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मुख्यमंत्री की सराहना से बढ़ी विष्णु भोग चावल की मांग, रायपुर से पहुंचे ग्राहक ने खरीदा 50 किलो चावल

रायपुर : सीएम की तारीफ का बड़ा असर – सोशल मीडिया पर वीडियो देख रायपुर से जीपीएम पहुंचे ग्राहक, खरीदा 50 किलो विष्णु भोग चावल सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सराहा था स्थानीय उत्पाद, बाजार में बढ़ी सुगंधित पारंपरिक चावल की मांग रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पारंपरिक विष्णु भोग चावल की तारीफ किए जाने के बाद इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। हालत यह है कि अब जिले के बाहर से भी लोग इस विशेष सुगंधित चावल को खरीदने के लिए उत्पादकों तक सीधे पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो बना जरिया          गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत निमधा में आयोजित जनचौपाल के दौरान स्थानीय किसानों और महिला समूहों द्वारा उपजाए गए विष्णु भोग चावल की विशेष सराहना की थी। मुख्यमंत्री के इस संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। इसी वीडियो को देखकर रायपुर निवासी अजय कुमार इस पारंपरिक चावल की विशेषताओं और गुणवत्ता से इतने प्रभावित हुए कि वे अपने साथियों के साथ सीधे गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले पहुंच गए। कलेक्टर की मौजूदगी में 7 हजार की सीधी खरीदी         जिले में पहुंचे इन ग्राहकों ने कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन की विशेष उपस्थिति में तिपान महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से सीधे 50 किलोग्राम विष्णु भोग चावल की खरीदी की। इस खरीदी की कुल कीमत 7 हजार रुपये रही। रायपुर से आए ग्राहकों ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा उत्पाद की तारीफ किए जाने के बाद ही उनकी रुचि इस चावल के प्रति जगी थी और वे खुद इसकी सुगंध और स्वाद का अनुभव करना चाहते थे। उन्होंने भविष्य में भी इस चावल की खरीदी जारी रखने की बात कही। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही है मजबूती         इस मौके पर तिपान महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की नीति रंग ला रही है। इससे किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और उत्पादक संगठनों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है और उनके लिए बाजार के नए रास्ते खुल रहे हैं। कृषि समृद्धि का नया प्रतीक बना विष्णु भोग        अपनी विशिष्ट सुगंध, बेहतरीन स्वाद और उच्च गुणवत्ता के लिए पहचाना जाने वाला विष्णु भोग चावल अब सिर्फ एक स्थानीय फसल नहीं, बल्कि जिले की कृषि समृद्धि और महिला उद्यमिता का एक सफल ब्रांड बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री की इस अनूठी पहल से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीदें काफी मजबूत हो गई हैं।

स्कूल खुलने से पहले खास तैयारी: ड्रॉपआउट बच्चों की वापसी पर फोकस, छात्रों को मिलेंगी फ्री किताबें और यूनिफॉर्म

रायपुर  छत्तीसगढ़ में गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल 16 जून से ही खुलेंगे। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किया है। सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 16 जून 2026 से पढ़ाई शुरू होगी। आदेश के मुताबिक, प्रदेश में 20 अप्रैल से 15 जून 2026 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया था। छुट्टियां खत्म होने के बाद नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 का नियमित संचालन 16 जून से शुरू किया जाएगा। इससे पहले गर्मी के कारण स्कूल खुलने में देरी की अटकलें लगाई जा रही थी। स्कूल खुलने के साथ ही एडमिशन फेस्ट होगा। तिलक लगाकर बच्चों का स्वागत किया जाएगा। नए बच्चों के एडमिशन के लिए गांवों-शहरों में मुनादी की जाएगी। पात्र विद्यार्थियों को फ्री किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल बांटी जाएगी। साथ ही ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाने स्पेशल प्लान तैयार किया गया है। बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्टूडेंट्स का सम्मान किया जाएगा। वहीं प्राइवेट स्कूलों को तय शेड्यूल के अनुसार फ्री किताबें दी जाएगी। किताबों का वितरण 12 डिपो (6 स्थायी और 6 अस्थायी) के जरिए किया जाएगा। स्कूलों में मनाया जाएगा एडमिशन फेस्ट 16 जून से शाला प्रवेश उत्सव मनाया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को इसकी तैयारी के लिए जरूरी निर्देश दिए हैं। विभाग का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा बच्चों का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित करना, पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को वापस स्कूल से जोड़ना और बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करना है। निर्देशों के अनुसार, स्कूल खुलने से पहले परिसर, कक्षाओं और भवनों की साफ-सफाई और आवश्यक मरम्मत का काम पूरा किया जाएगा। शाला प्रवेश उत्सव के प्रचार-प्रसार के लिए बैनर, पोस्टर, रैली और मुनादी का उपयोग किया जाएगा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन समितियों और अभिभावकों को भी आमंत्रित किया जाएगा। स्कूल छोड़ चुके बच्चों को लाने स्पेशल प्लान विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों की सूची लेकर पहली कक्षा में प्रवेश की तैयारी करने और पांचवीं पास विद्यार्थियों का छठवीं कक्षा में प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। शिक्षकों के पेंडिंग मामलों के निराकरण और आगामी 3 महीनों की पढ़ाई की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग ने विद्यार्थियों और शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा है। शाला प्रवेश उत्सव के दौरान पात्र विद्यार्थियों को फ्री किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल बांटी जाएगी। बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान किया जाएगा। वहीं पहली बार स्कूल आने वाले बच्चों का विशेष स्वागत किया जाएगा। प्राइवेट स्कूलों को तय शेड्यूल के अनुसार मिलेंगी फ्री किताबें नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रदेश के गैर अनुदान प्राप्त प्राइवेट स्कूलों को कक्षा 1 से 10वीं तक की हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की मुफ्त पाठ्यपुस्तकें तय कार्यक्रम के अनुसार दी जाएंगी। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने इसके लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर वितरण योजना तैयार की है। निगम के अनुसार, किताबों का वितरण 12 डिपो (6 स्थायी और 6 अस्थायी) के माध्यम से किया जाएगा। स्कूलों को निर्धारित तारीख पर अपने प्रतिनिधि को भेजकर किताबें लेनी होंगी। यदि कोई स्कूल तय दिन नहीं पहुंच पाता है, तो उसे बाद में भी किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। अस्थायी डिपो में रिजर्व डे भी रखा गया विभाग ने बताया कि किसी तकनीकी या अन्य कारण से वितरण प्रभावित होने पर स्कूलों को टोकन नंबर दिया जाएगा और अगले दिन प्राथमिकता के आधार पर किताबें दी जाएंगी। अस्थायी डिपो में इसके लिए रिजर्व डे भी रखा गया है। सुबह 10 बजे से दी जाएगी किताबें भीड़ से बचने के लिए स्कूल संचालक डिपो प्रभारी से संपर्क कर अलग समय निर्धारित कर सकते हैं। किताबों का वितरण हर दिन सुबह 10 बजे से शुरू होगा। जरूरत पड़ने पर रविवार और सरकारी अवकाश के दिन भी किताबें दी जाएगी। पाठ्यपुस्तक निगम ने कहा है कि किताबों का वितरण डीपीआई की उपलब्ध कराई गई छात्र संख्या और ऑनलाइन दर्ज आंकड़ों के आधार पर होगा। यदि किसी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या में बदलाव हुआ है, तो इसकी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को देनी होगी।

स्कूलों की प्रार्थना सभा में नया नियम, राष्ट्रगान के साथ राज्यगीत और वैदिक मंत्रों का होगा पाठ

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने 2026-27 सत्र से स्कूलों में राष्ट्रगान, राज्यगीत, वैदिक मंत्र, सरस्वती वंदना और भोजन मंत्र को शामिल करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों और अनुशासन को बढ़ावा देना है। शिक्षा सत्र 2026-27 से लागू होगी नई व्यवस्था छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में शिक्षा सत्र 2026-27 से नई सांस्कृतिक एवं मूल्य आधारित व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत विद्यालयों की दैनिक गतिविधियों में राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जुड़े कार्यक्रमों को नियमित रूप से शामिल किया जाएगा। प्रार्थना सभा में जुड़ेगा सांस्कृतिक और प्रेरणात्मक आयाम नई व्यवस्था के अनुसार सुबह की प्रार्थना सभा केवल राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और देश के महापुरुषों की जीवनी का वाचन भी कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि विद्यार्थियों को विद्यालय स्तर पर ही भारतीय परंपराओं, आदर्श व्यक्तित्वों और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जाना आवश्यक है। इससे छात्रों में नैतिक शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। भोजन के समय होगा सामूहिक भोजन मंत्र विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के दौरान भी नई पहल लागू की जाएगी। छात्रों को भोजन ग्रहण करने से पहले सामूहिक रूप से भोजन मंत्र का पाठ कराया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे विद्यार्थियों में भोजन के प्रति सम्मान, अनुशासन और सामूहिकता की भावना विकसित होगी। यह व्यवस्था सभी स्कूलों में समान रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। तीन सत्रों में बंटा शेड्यूल विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्कूलों में अब प्रतिदिन तीन अलग-अलग समय पर निर्धारित क्रम में गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रातःकालीन सत्र स्कूल प्रारंभ होने पर सुबह की प्रार्थना सभा में एक तय क्रम के अनुसार ये प्रस्तुतियां अनिवार्य होंगी। विद्यालय प्रारंभ होने पर प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में क्रमशः राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीपमंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र तथा महापुरुषों की जीवनी का वाचन कराया जाएगा। इसी प्रकार मध्यान्ह भोजन के समय विद्यार्थियों द्वारा भोजन मंत्र का सामूहिक पाठ किया जाएगा। वहीं विद्यालय की छुट्टी के समय संध्या सत्र में राज्यगीत, गायत्री मंत्र एवं शांति मंत्र का सामूहिक वाचन कराया जाएगा।  जानें क्या है उद्देश्य? स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि इन गतिविधियों के नियमित और प्रभावी संचालन से छात्रों में न केवल राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना मजबूत होगी, बल्कि उनके भीतर नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का भी सही विकास होगा। यह पहल विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय मूल्यों से परिचित कराने में मील का पत्थर साबित होगी। लापरवाही पर होगी कार्रवाई शासन ने स्पष्ट किया है कि सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को प्रतिदिन स्कूलों का औचक निरीक्षण करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि इन नियमों का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं। निर्धारित क्रम में अवहेलना पाए जा छुट्टी के समय राज्यगीत और शांति मंत्र विद्यालयों में दिन की समाप्ति भी अब एक निर्धारित सांस्कृतिक क्रम के तहत होगी। छुट्टी के समय विद्यार्थियों द्वारा राज्यगीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का सामूहिक गान किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान और राज्य की गौरवशाली परंपराओं से जोड़ना बताया जा रहा है। इस पहल को शिक्षा और संस्कारों के समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। संस्कृति और शिक्षा के समन्वय पर जोर रायपुर में इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराएं देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनके अनुसार विद्यालयों में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राज्यगीत और वैदिक मंत्रों को शामिल करने से बच्चों के व्यक्तित्व विकास और संस्कार निर्माण में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने इस निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक पुरंदर मिश्रा ने पूर्ववर्ती सरकारों पर सांस्कृतिक मूल्यों की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज विश्व के कई देशों में भारतीय संस्कृति, योग और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है, ऐसे समय में राज्य की शिक्षा व्यवस्था में इन मूल्यों को स्थान देना एक स्वागतयोग्य पहल है। उन्होंने इस निर्णय के लिए नरेंद्र मोदी,विष्णु देव साय और गजेन्द्र यादव के प्रति आभार भी व्यक्त किया। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर फोकस शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान का केंद्र नहीं होते, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक मूल्यों के विकास का भी प्रमुख माध्यम होते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ सांस्कृतिक, नैतिक और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखी जा रही है। आने वाले शिक्षा सत्र से यह व्यवस्था राज्यभर के स्कूलों में लागू होने के बाद शिक्षा और संस्कार के संतुलित मॉडल की नई तस्वीर प्रस्तुत कर सकती है। स्कूल समाप्ति पर राज्यगीत और शांति मंत्र का गायन छुट्टी के समय स्कूलों में राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का गायन अनिवार्य किया गया है, जिससे दिन का समापन सकारात्मक वातावरण में हो सके। कड़ाई से लागू होंगे नियम, लापरवाही पर कार्रवाई तय शिक्षा विभाग का मानना है कि इन गतिविधियों से छात्रों में राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना मजबूत होगी। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से औचक निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी नियमों का पालन हो।यदि किसी स्कूल में इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य पर कार्रवाई की जा सकती है। 16 जून से खुलेंगे स्कूल, तैयारियों के सख्त निर्देश Chhattisgarh में सभी स्कूल 16 जून 2026 से खुलेंगे। इसके साथ ही शाला प्रवेश उत्सव 2026 के आयोजन के लिए भी विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।शिक्षकों की शत प्रतिशत उपस्थिति, पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता, टाइम टेबल की तैयारी और स्कूलों की साफ सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय अंडर-19 महिला टीम की उपकप्तान बनीं महक नरवासे, CM विष्णु देव साय ने किया सम्मानित

श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान बनीं महक नरवासे : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया सम्मानित महक की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजनांदगांव जिले की प्रतिभाशाली युवा क्रिकेटर सुमहक नरवासे ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह तथा सांसद बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने भारतीय महिला अंडर-19 क्रिकेट टीम के आगामी श्रीलंका दौरे के लिए टी-20 एवं वनडे दोनों टीमों का उपकप्तान नियुक्त किए जाने पर सुमहक नरवासे को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर महक का सम्मान किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महक नरवासे की यह उपलब्धि केवल उनके परिवार या राजनांदगांव जिले की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बेटियां आज खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं और राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रही हैं। महक ने अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर यह मुकाम हासिल किया है, जो प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि महक आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ और देश का नाम गौरवान्वित करेंगी। उन्होंने महक को प्रोत्साहित करते हुए कहा, "खूब खेलो, आगे बढ़ो और नई ऊंचाइयों को छुओ। आपकी सफलता प्रदेश के हजारों युवा खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देगी।" मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महक नरवासे का भारतीय अंडर-19 महिला टीम की उपकप्तान के रूप में चयन प्रदेश में विकसित हो रहे खेल वातावरण और खिलाड़ियों को मिल रहे अवसरों का उत्कृष्ट उदाहरण है। सुमहक नरवासे ने सम्मान एवं शुभकामनाओं के लिए मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उनके पिता राधेश्याम नरवासे, महापौर मधुसूदन यादव, कोच मनोज तिवारी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

रायपुर में नायब तहसीलदार पर गंभीर आरोप, शादी का वादा कर दुष्कर्म करने का मामला दर्ज; अधिकारी मेडिकल लीव पर

रायपुर राजधानी रायपुर के गंज थाना में सूरजपुर जिले में पदस्थ एक नायब तहसीलदार के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। रायपुर निवासी एक युवती की शिकायत पर पुलिस ने नायब तहसीलदार दिवाकर भास्कर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है। मामला सामने आने के बाद से आरोपित अधिकारी के फरार होने की चर्चा है और पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। सोशल मीडिया के जरिए हुई थी पहचान पुलिस सूत्रों के अनुसार युवती और आरोपित अधिकारी की पहचान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से हुई थी। शुरुआती बातचीत धीरे-धीरे नजदीकियों में बदल गई। शिकायत में युवती ने आरोप लगाया है कि दिवाकर भास्कर ने उससे शादी करने का भरोसा दिलाया था। इसी भरोसे के आधार पर उसने युवती को रायपुर के एक होटल में बुलाया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता का कहना है कि कुछ समय बाद जब उसने शादी की बात दोबारा उठाई, तब आरोपित लगातार टालमटोल करने लगा। इसके बाद युवती को संदेह हुआ कि उससे धोखे से संबंध बनाए गए हैं। मामले को गंभीर मानते हुए उसने गंज थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। एफआईआर दर्ज होने के बाद से फरार जानकारी के मुताबिक दिवाकर भास्कर वर्तमान में सूरजपुर जिले के लटौरी क्षेत्र में नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद से वह पुलिस की पहुंच से बाहर बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने 6 जून से मेडिकल लीव ले रखी है और तब से कार्यालय में भी उपस्थित नहीं हुए हैं। पुलिस टीम आरोपित की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है। उसके निवास सहित अन्य संदिग्ध स्थानों पर भी जांच की जा रही है। हालांकि खबर लिखे जाने तक पुलिस को आरोपित को गिरफ्तार करने में सफलता नहीं मिली थी। संरक्षण मिलने के आरोपों पर पुलिस का जवाब मामले के सामने आने के बाद कुछ सामाजिक संगठनों और शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि आरोपित अधिकारी को संरक्षण दिया जा सकता है। इस संबंध में गृह मंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से भी शिकायत की गई है। वहीं पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपित की गिरफ्तारी और साक्ष्य जुटाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की होगी जांच पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की विवेचना के दौरान होटल में ठहरने से जुड़े रिकॉर्ड, मोबाइल कॉल डिटेल, सोशल मीडिया चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने और आरोपित से पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले को लेकर पुलिस सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले- केंद्र और राज्य के समन्वय से विकास को मिलेगी नई गति

केंद्र-राज्य समन्वय से विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य भेंट रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सौजन्य मुलाकात की।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय एवं निरंतर संवाद की भावना ने विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है। इसी सहयोगात्मक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच मजबूत साझेदारी से अधोसंरचना विकास, उद्योग, रोजगार, कौशल विकास तथा जनसेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी सहयोग और समन्वय से छत्तीसगढ़ के विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में सहायता प्राप्त होगी। इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।

बाल श्रम निषेध दिवस पर बड़ा एक्शन: फैक्ट्री से 9 नाबालिग मुक्त, 20 बच्चों को मिला संरक्षण

बाल श्रम निषेध दिवस पर बाल आयोग का बड़ा एक्शन डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में बाल श्रम पर बड़ी कार्रवाई जोखिमपूर्ण फैक्ट्री से 9 नाबालिग मुक्त, कुल 20 बच्चों को संरक्षण दूसरे प्रदेशों के नाबालिगों का रेस्क्यू, बाल तस्करी के एंगल से होगी जांच रायपुर,   विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नेतृत्व में बच्चों के संरक्षण हेतु प्रदेशभर में विशेष कार्रवाई की गई। इस दौरान रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र से 9 नाबालिग बच्चों, बिलासपुर में आरपीएफ के माध्यम से 7 बच्चों तथा रायपुर जीआरपी के माध्यम से 4 बच्चों का रेस्क्यू कर कुल 20 बच्चों को संरक्षण में लिया गया। इसी क्रम में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में राजधानी रायपुर के उरला स्थित मारुति नंदन स्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज में विशेष औचक छापामार कार्रवाई की गई। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि लोहे की फैक्ट्री में नाबालिग बच्चों से गंभीर एवं जोखिमपूर्ण प्रकृति का कार्य कराया जा रहा था। मौके से 9 बच्चों को तत्काल संरक्षण में लेकर नियमानुसार प्रकरण दर्ज किया गया तथा उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि रेस्क्यू किए गए बच्चे ओडिशा, उत्तर प्रदेश के बरेली तथा पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निवासी हैं। बच्चों ने बताया कि उन्हें एक ठेकेदार के माध्यम से रायपुर लाया गया था, जो बिहार का रहने वाला है। मामले में संबंधित ठेकेदार, बच्चों को यहां लाने वाले अन्य व्यक्तियों तथा संभावित बाल तस्करी के पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। बच्चों के परिजनों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। प्रकरण में प्रथम दृष्टया बच्चों के साथ क्रूरता, शोषण एवं अवैध रूप से जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने के तथ्य सामने आने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75, 79 एवं 143 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही बाल श्रम एवं संभावित बाल तस्करी से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं की भी विस्तृत जांच की जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि, बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, विशेषकर तब जब उनसे जोखिमपूर्ण उद्योगों में कार्य कराया जाता है। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है। बाल श्रम एवं बाल तस्करी जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध आयोग पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी तथा बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इस कार्रवाई में जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय निराला, विपिन ठाकुर, श्रम विभाग की टीम एवं संबंधित अधिकारियों की संयुक्त उपस्थिति रही। रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को आवश्यक संरक्षण, परामर्श, चिकित्सकीय सहायता एवं पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है।

अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी? मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायतों के बाद तबादलों की अटकलें तेज

रायपुर  छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के समापन के साथ ही अब शासन का फोकस जनता से मिले फीडबैक और शिकायतों के विश्लेषण पर केंद्रित हो गया है। प्रदेशभर में आयोजित शिविरों में लाखों आवेदन प्राप्त होने के बाद सरकार प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी करती दिखाई दे रही है। सूत्रों की मानें तो कई विभागों में व्यापक स्तर पर तबादले और जिम्मेदारियों में फेरबदल की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों में हलचल तेज हो गई है। सुशासन तिहार के दौरान प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से कुल 6 लाख 43 हजार 334 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें 4 लाख 17 हजार 111 मांग संबंधी जबकि 26 हजार 223 शिकायत संबंधी आवेदन शामिल हैं। बड़ी संख्या में सामने आई शिकायतों ने शासन का ध्यान खींचा है और अब इन्हीं आंकड़ों के आधार पर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की तैयारी चल रही है। जानकारी के अनुसार राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खाद्य एवं सामाजिक कल्याण विभाग से जुड़ी शिकायतें सबसे अधिक सामने आई हैं। लोगों ने अधिकारियों और कर्मचारियों पर लापरवाही, भ्रष्टाचार, समय पर कार्य नहीं करने तथा आम जनता से दूरी बनाए रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। कई जिलों से लगातार मिल रही शिकायतों ने शासन को संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा करने के लिए मजबूर कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री स्तर पर भी शिविरों से प्राप्त फीडबैक की नियमित समीक्षा की जा रही है। जिन विभागों और क्षेत्रों में शिकायतों का प्रतिशत अधिक है, वहां अलग से रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। जिलों से मिले प्रतिवेदनों में यह परखा जा रहा है कि किन अधिकारियों के खिलाफ बार-बार शिकायतें दर्ज हुई हैं और किन क्षेत्रों में जन असंतोष सबसे अधिक है। सरकार केवल शिकायतों के निराकरण तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उन कारणों की भी पड़ताल कर रही है जिनकी वजह से जनता को बार-बार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि प्रशासनिक सुधार की दिशा में अब जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज होती दिखाई दे रही है। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि जिन जिलों में शिकायतों का आंकड़ा अपेक्षाकृत अधिक रहा है, वहां अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य प्रदर्शन का विशेष मूल्यांकन किया जाएगा। खराब प्रदर्शन और लगातार शिकायतों के आधार पर तबादले, जिम्मेदारियों में बदलाव या विभागीय कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। स्पष्ट संकेत हैं कि सुशासन तिहार केवल शिकायतें सुनने का अभियान नहीं था, बल्कि सरकार इसे प्रशासनिक सुधार के एक बड़े आधार के रूप में देख रही है। आने वाले दिनों में यदि बड़े पैमाने पर तबादले और जिम्मेदारियों में बदलाव देखने को मिलें, तो इसे सुशासन तिहार से निकले जनमत का सीधा प्रभाव माना जाएगा।

छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में बड़ा बदलाव- 16 जून से ऑनलाइन हाजिरी और लीव जरूरी, लापरवाही पर रुकेगा जून का वेतन

रायपुर छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में अब ढर्रे पर काम नहीं चलेगा। लोक शिक्षण संचालनालय ने अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए ऑनलाइन उपस्थिति (हाजिरी) और ऑनलाइन अवकाश (छुट्टी) आवेदन व्यवस्था का कड़ाई से पालन करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के मुताबिक, आगामी 16 जून 2026 से सभी के लिए डिजिटल उपस्थिति अनिवार्य होगी। नियमों की अनदेखी करने पर जून महीने का वेतन रोक दिया जाएगा। स्कूलों के लिए VSK App और कार्यालयों के लिए AEBAS अनिवार्य शासन ने विभाग के हर स्तर पर पारदर्शिता लाने के लिए दो अलग-अलग डिजिटल माध्यम तय किए हैं। शासकीय विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति विद्या समीक्षा केंद्र (टैज्ञ) द्वारा विकसित मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से दर्ज की जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के तहत कार्यालयों में पदस्थ अधिकारियों और बाबुओं को आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS)के जरिए अपनी हाजिरी लगानी होगी। हाजिरी नहीं तो वेतन नहीं यदि 16 जून से किसी भी कर्मचारी की उपस्थिति VSK App या बायोमेट्रिक प्रणाली में दर्ज नहीं पाई जाती है, तो उसकी उपस्थिति को शून्य माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित कर्मचारी का जून माह का वेतन जारी नहीं किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDOs) की होगी। ऑफलाइन छुट्टी पर पूर्ण प्रतिबंध, मनमर्जी करने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज संचालनालय ने साफ किया है कि शिक्षा विभाग के कर्मियों के अवकाश आवेदन और उसकी स्वीकृति के लिए 'HRMIS पोर्टल' की व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर अब भी ऑफलाइन (कागज पर) आवेदन लिए जा रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने अब ऑफलाइन अवकाश आवेदनों को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। अब सभी प्रकार की छुट्टियां केवल ऑनलाइन माध्यम से ही ली और मंजूर की जा सकेंगी। यदि किसी अधिकारी ने ऑफलाइन आवेदन स्वीकार या मंजूर किया, तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश  लोक शिक्षण संचालनालय ने राज्य के सभी संयुक्त संचालकों (JDs), जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और आहरण व संवितरण अधिकारियों (DDOs) को पत्र जारी कर इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इस नई व्यवस्था से विभाग में लेटलतीफी और बिना सूचना गायब रहने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह से लगाम कसने की उम्मीद है।

बुनकरों और शिल्पियों की आय बढ़ाने के लिए डिजाइन प्रशिक्षण एवं नवाचार पर जोर

रायपुर केंद्रीय मंत्री  गिरिराज सिंह ने रेशम उत्पादन बढ़ाने पर विशेष बल देते हुए विभागीय अधिकारियों को प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हथकरघा बुनकरों, शिल्पियों एवं कारीगरों को डिजाइन विकास संबंधी नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, ताकि उनके उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़े तथा उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।           केंद्रीय वस्त्र मंत्री  गिरिराज सिंह की अध्यक्षता में राज्य अतिथि गृह (पहुना) में आज आयोजित समीक्षा बैठक में रायपुर लोकसभा सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष मती शालिनी राजपूत, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष  राकेश पाण्डेय, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ के अध्यक्ष  भोजराज देवांगन, ग्रामोद्योग विभाग के सचिव  राजेश सिंह राणा, छत्तीसगढ़ माटी कला एवं हस्तशिल्प बोर्ड के प्रबंध संचालक  जयप्रकाश मौर्य, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की प्रबंध संचालक मती लीना कमलेश मंडावी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।         केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण एवं कुटीर उद्योग क्षेत्र के उद्यमियों की वार्षिक आय 5 लाख रुपये तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र में कार्यरत उद्यमियों को निर्यात एजेंसियों से जोड़ा जाए तथा उनके उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिल सके।             बैठक में सिल्क एवं कॉटन उत्पादों में अन्य प्राकृतिक रेशों के समावेश के माध्यम से नवीन उत्पाद विकसित करने तथा बाजार विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।         केंद्रीय मंत्री ने रेशम केंद्रों में रेशम पौधों के साथ फ्लोरीकल्चर एवं सब्जी उत्पादन की मिश्रित खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए, जिससे कृमिपालकों एवं कीटपालकों की आय में अतिरिक्त वृद्धि हो सके। उन्होंने वस्त्र निर्माण में प्राकृतिक रंगों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए हल्दी, कत्था, मेहंदी तथा विभिन्न पुष्पों से प्राप्त रंगों के अधिकाधिक प्रयोग की आवश्यकता बताई। साथ ही हथकरघा क्षेत्र में नवाचार, आधुनिक डिजाइन एवं उत्पाद विकास को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के सहयोग से कार्य करने के निर्देश भी दिए।            बैठक में खादी, ग्रामोद्योग, हथकरघा, हस्तशिल्प एवं रेशम क्षेत्र के समग्र विकास, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के विभिन्न उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई।