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छत्तीसगढ़ “धान का कटोरा” होने के साथ-साथ सेवा, समर्पण और आस्था की भूमि – मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण स्थित राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुवा धाम कुरियारी में आयोजित 9 दिवसीय राम कथा में शामिल हुए। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी मती कौशल्या साय के साथ आश्रम पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि सदैव भगवान राम के चरणों से धन्य रही है। उन्होंने वनवास काल में भगवान राम के आगमन और माता शबरी की अद्भुत भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस धरती ने आस्था, समर्पण और विश्वास की अनूठी परंपरा को सहेज कर रखा है। उन्होंने कहा कि तेंदुवाधाम आज धार्मिक और सांस्कृतिक जागरण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, जहां हजारों श्रद्धालु एक साथ राम कथा का श्रवण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर को अत्यंत सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि एक ही मंच से अनेक संतों का सान्निध्य और आशीर्वाद प्राप्त होना विशेष अनुभव है। उन्होंने आश्रम परिसर में हरिवंश औषधालय एवं पंचकर्म केंद्र,  राम-जानकी मंडपम, हरिवंश वैदिक पाठशाला, मां दुर्गा गौ मंदिर और हनुमत प्रवेश द्वार सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों के लोकार्पण पर आश्रम प्रबंधन और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ “धान का कटोरा” होने के साथ-साथ सेवा, समर्पण और आस्था की भूमि भी है। उन्होंने अयोध्या में भगवान राम मंदिर निर्माण के दौरान छत्तीसगढ़ से 11 ट्रक चावल और चिकित्सकों की टीम के वहां पहुंचने का उल्लेख करते हुए इसे प्रदेशवासियों की गहरी श्रद्धा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान राम भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं, जो देश की सांस्कृतिक एकता और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रामलला दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु अयोध्या धाम के दर्शन कर लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और जवानों के अदम्य साहस से आज प्रदेश से नक्सलवाद समाप्त हो चुका है तथा राज्य में शांति, विकास और सामाजिक समरसता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” यहां की संस्कृति और जीवन मूल्यों की सच्ची पहचान है। इस अवसर पर परमपूज्य वासुदेवनंद सरस्वती महाराज, किन्नर अखाड़ा प्रमुख मां टीना सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति में विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया। राघव सेवा समिति के प्रमुख डॉ. अशोक हरिवंश ने बताया कि यह स्थल माता शबरी की जन्मभूमि शिवरीनारायण में स्थित है, जहां ‘कलिंग शैली’ में भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। आश्रम में औषधालय, वैदिक विद्यालय, गौ मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, गीता वाटिका, शबरी रसोई और निर्धन कन्या विवाह जैसी अनेक सामाजिक-धार्मिक पहल संचालित हो रही हैं। कार्यक्रम के तहत विभिन्न वर्गों – दिव्यांगजन, रक्तदाता, कुष्ठ रोगी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों – को समर्पित विशेष दिवस भी आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में सांसद मती कमलेश जांगड़े, महंत  रामसुंदर दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे हेतु द्विदिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सम्पन्न

रायपुर आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय द्वारा राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSS) के अंतर्गत संचालित पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दो दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित सम्पन्न हुआ। संचालनालय के अधिकारियों ने सर्वेक्षण की गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस प्रशिक्षण से प्रतिभागियों की कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जो (PLFS) सर्वे के प्रभावी संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह प्रशिक्षण विगत दिनों संचालनालय के प्रशिक्षण कक्ष में आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न जिलों से सर्वे कार्य से जुड़े अधिकारी एवं प्रशिक्षुओं ने भागीदारी की। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सर्वेक्षण की संपूर्ण प्रक्रिया, प्रश्नावली की विस्तृत समझ, डेटा संग्रहण की विधियां तथा फील्ड में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों के समाधान के संबंध में जानकारी दी गई। साथ ही, हैंड्स-ऑन अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में सर्वेक्षण करने का व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया गया।

सेजेस कन्नेवाड़ा की हिमांशी को उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं

रायपुर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम में चयनित होकर राज्य का मान बढ़ाने वाली स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कन्नेवाड़ा की छात्रा हिमांशी साहू को बालोद कलेक्टर मती दिव्या उमेश मिश्रा ने सम्मानित किया। कलेक्टर मती मिश्रा ने आज बालोद के संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान कुमारी हिमांशी साहू की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की भूरी-भूरी सराहना करते हुए उनके इस उपलब्धि को पूरे जिले के लिए गौरव बताया। इस अवसर पर कलेक्टर ने हिमांशी साहू को प्रशस्ति पत्र के अलावा शाॅल, फल भेंटकर उनका आत्मीय सम्मान किया।           इस अवसर पर कलेक्टर मती मिश्रा ने हिमांशी की उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। कलेक्टर मती मिश्रा ने कुमारी हिमांशी साहू को कड़ी मेहनत कर जीवन में उपलब्धि हासिल करने की सीख भी दी। उल्लेखनीय है कि हिमांशी साहू स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कन्नेवाड़ा में कक्षा 9वीं में अध्ययनरत है। कुमारी हिमांशी ने 96 प्रतिशत अंकों के साथ कक्षा 8वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है।          छात्रा हिमांशी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम में पूरे राज्य में तीसरा स्थान प्राप्त कर अपने विद्यालय तथा संपूर्ण बालोद जिला का नाम रोशन किया है। इस अवसर पर कलेक्टर मती मिश्रा ने कुमारी हिमांशी के पिता  अभय कुमार और माता मती सहिता साहू को भी सम्मानित कर उनकी सुपुत्री की महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस मौके पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर  चंद्रकांत कौशिक,  अजय किशोर लकरा एवं  नूतन कंवर सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

Collector Office Dispute Ends: प्रशासन-संगठनों में समझौता, विवाद का हुआ पटाक्षेप

मुंगेली. कलेक्टर कार्यालय से जुड़ा विवाद, जिसने बीते कुछ दिनों में जिले का माहौल गरमा दिया था और सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक चर्चा का विषय बना हुआ था, अब पूरी तरह शांत हो गया है। 26 अप्रैल 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय मुंगेली में आयोजित शांतिवार्ता बैठक के बाद प्रशासन, जोहार पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के बीच चल रहा गतिरोध खत्म हो गया। इस बैठक में एसडीएम अजय कुमार शतरंज, तहसीलदार शेखर पटेल, नायब तहसीलदार प्रकाश यादव सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारी मौजूद रहे। चर्चा के दौरान 24 अप्रैल को कलेक्टर परिसर में हुए पूरे घटनाक्रम की विस्तार से समीक्षा की गई और दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी। अंततः सौहार्दपूर्ण वातावरण में आपसी सहमति बन गई और भविष्य में किसी भी विवाद को संवाद के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया गया। क्या था पूरा मामला दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 24 अप्रैल को उस वक्त हुई थी, जब कुछ लोग कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन देने पहुंचे थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए दावों में आरोप लगाया गया कि कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखे गए आवेदन को सार्वजनिक रूप से फेंक दिया। इस दावे को स्थानीय भाषा और अस्मिता के अपमान के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ी और मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा। वायरल पोस्ट्स में यह भी कहा गया कि ज्ञापन जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल करने की मांग को लेकर दिया जा रहा था, लेकिन आवेदन देने पहुंचे लोगों की बात नहीं सुनी गई और उनके साथ असम्मानजनक व्यवहार हुआ। देखते ही देखते यह मुद्दा केवल एक प्रशासनिक घटना न रहकर सामाजिक और भावनात्मक बहस का विषय बन गया। प्रशासन ने आरोपों को बताया था निराधार हालांकि, जिला प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। प्रशासन का कहना था कि कलेक्टर ने आवेदन को विधिवत स्वीकार करने और नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही थी। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोग बिना पूर्व अनुमति के कार्यालय परिसर में बैठ गए थे और नारेबाजी करने लगे, जिससे शासकीय कार्य प्रभावित हुए। इस दौरान कर्मचारियों के साथ बहस और हंगामे की स्थिति भी बनी। थाने तक पहुंच गया था मामला घटना के बाद कलेक्टर कार्यालय के कर्मचारियों ने सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 24 अप्रैल को दोपहर करीब 12:15 से 1:00 बजे के बीच कुछ लोगों ने कलेक्टर कक्ष के बाहर नारेबाजी और हंगामा किया, जिससे कार्यालय का माहौल प्रभावित हुआ और आम लोगों को भी असुविधा हुई। प्रशासन ने यह भी दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज मौजूद है और मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई थी।प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया था कि घटना के बाद कुछ लोगों द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी और अनावश्यक विवाद खड़ा हुआ। शांतिवार्ता से मामले का पटाक्षेप इसी बढ़ते विवाद और जनभावनाओं को देखते हुए 26 अप्रैल को शांतिवार्ता बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों पक्षों ने परिपक्वता दिखाते हुए विवाद को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया। लंबी चर्चा के बाद यह तय हुआ कि भविष्य में किसी भी मुद्दे को टकराव के बजाय बातचीत और समन्वय के जरिए सुलझाया जाएगा। बैठक के बाद दोनों पक्षों ने यह स्वीकार किया कि संवाद ही किसी भी विवाद का सबसे बेहतर समाधान है। प्रशासन और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना व जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के पदधिकारियों के बीच बनी यह सहमति न केवल तत्काल विवाद को खत्म करती है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक सकारात्मक संदेश देती है। यह घटनाक्रम इस बात का उदाहरण बनकर सामने आया है कि डिजिटल युग में किसी भी घटना के कई पहलू सामने आ सकते हैं, लेकिन सही तथ्यों, पारदर्शिता और आपसी संवाद से किसी भी विवाद का समाधान संभव है। फिलहाल, मुंगेली में स्थिति सामान्य हो चुकी है और प्रशासन व सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय स्थापित हो गया है।

छत्तीसगढ़ ने मनरेगा श्रमिकों की ई-केवाईसी में किया नया कीर्तिमान, देश में अव्वल

मनरेगा श्रमिकों की ई- के वाय सी में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश ने रचा नया कीर्तिमान  रायपुर  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत श्रमिकों के ई-के वाय सी कार्य में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 97.11 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-के वाय सी पूर्ण कर लिया गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ ने केरलम, त्रिपुरा, मिजोरम जैसे छोटे राज्यों तथा कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों को भी पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की है।                महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ;मनरेगा के तहत श्रमिकों की ई.केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूरा करने में छत्तीसगढ़ ने देश भर में अग्रणी स्थान हासिल किया है। प्रदेश में लगभग 56.87 लाख से ज्यादा मजदूरों की डिजिटल वेरिफिकेशन (e-KYC) पूरी की गई है जो भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। यह डिजिटल प्रक्रिया फर्जी जॉब कार्डों को हटाने और सीधे वास्तविक लाभार्थियों के बैंक खातों में मजदूरी पहुंचाने में मदद कर रही है।              यह उपलब्धि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल मार्गदर्शन एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के सतत नेतृत्व, मॉनिटरिंग और प्रभावी रणनीति का परिणाम है। राज्य में योजनाबद्ध ढंग से अभियान चलाकर ई-के वाय सी की प्रक्रिया को तेज किया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों को समयबद्ध रूप से इससे जोड़ा जा सका।          रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुल 58 लाख से अधिक सक्रिय श्रमिकों में से 56 लाख से अधिक का ई-के वाय सी सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।        मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार गरीब और श्रमिक वर्ग के हितों के संरक्षण एवं उन्हें योजनाओं का पारदर्शी लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। ई-के वाय सी के माध्यम से श्रमिकों को समय पर भुगतान एवं योजनाओं का सीधा लाभ सुनिश्चित हो रहा है।        उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम स्तर पर कार्यरत टीमों के समन्वित प्रयास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि ई-के वाय सी से न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगी है, बल्कि वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने में भी पारदर्शिता आई है। शर्मा ने सभी संबंधित अधिकारियों को बधाई देते हुए निर्देशित किया कि शेष लंबित प्रकरणों को भी शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश को 100 प्रतिशत e-KYC (ई – के वाय सी) लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जाए।            प्रदेश में चलाए गए विशेष अभियान, ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग से यह सफलता हासिल हुई है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है।

ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं

रायपुर मुख्य सचिव  विकासशील ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं। राज्य में जलवायु परिवर्तन कार्यक्रमों के लिए सीएसआर मद की उपलब्ध राशि का उपयोग करना प्रस्तावित करें। छत्तीसगढ़ राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना के लिए गठित स्टियरिंग समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।  बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र, राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना, राज्य में जलवायु परिवर्तन विषयक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और राज्य जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण के गठन और राज्य में कार्बन क्रेडिट आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। विभागीय सचिवों से जलवायु परिवर्तन पर कार्ययोजना के क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव मती ऋचा शर्मा ने जलवायु परिवर्तन की पृष्ठ भूमि, जलवायु परिवर्तन के कारक और छत्तीसगढ़ राज्य में भी जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव के संबंध में जानकारी दी। बैठक में पीसीसीएफ  निवास राव, एपीसीसीएफ  सुनील मिश्रा शामिल हुए। वृक्ष-आवरण में देश में प्रथम स्थान पर रहा छत्तीसगढ           छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जलवायु परिवर्तन से संबंधित विविध कार्य किये जा रहें हैं। इनमें मुख्यतः वृक्षारोपण कार्य किये जा रहें हैं। एक पेड़ माँ के नाम योजना के तहत् करीब 7 करोड़ पौधारोपण किया जा चुका है। किसान वृ़क्ष मित्र योजना के तहत् 3 करोड़ 68 लाख वृक्षारोपण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आई.एस.एफ.आर. 2025 के अनुसार राज्य के वन एवं वृक्ष-आवरण में सर्वाधिक वृद्धि 683 किलोमीटर किया गया है, जो देश में प्रथम स्थान पर रहा है। राज्य में जलवायु परिवर्तन के तहत ई-वाहनों के चालन के लिए जन-सामान्य को प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को सोलर पम्प वितरित किये जा रहे हैं।             अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2025-2026 में लगभग 55 हजार 50 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की गई। राज्य में 300 से अधिक बांधों की हाईड्रोलॉजिकल प्लानिंग के साथ 24 वृहद एवं मध्यम जलाशयों का सेडिमेंटेशन सर्वे पूर्ण किया जा चुका है। राज्य में जलवायु परिवर्तन ज्ञान केन्द्र निर्मित किए जाने के लिए अधिकारियों ने अपने विचार रखें।              बैठक में जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना के क्रियान्वयन के संबंध में कृषि एवं किसान कल्याण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, परिवहन, वाणिज्य एवं उद्योग, खनिज, ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल विकास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों अपने-अपने विभाग की जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सचिव मती निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विद्यायी विभाग की प्रमुख सचिव मती सुषमा सावंत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव मती शहला निगार, खनिज संसाधन एवं मुख्यमंत्री के सचिव  पी.दयानंद, नगरीय प्रशासन विकास विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव  बसवराजु एस., वाणिज एवं उद्योग विभाग के सचिव  रजत कुमार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, परिवहन विभाग के सचिव  एस.प्रकाश, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव  अंकित आनंद, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सु इफ्फत आरा सहित राज्य योजना आयोग, नाबार्ड, सेंटर फॉर एन्वायरमेंट एजुकेशन, इंडियन इंस्टयूट ऑफ साइंस और कृषि मौसम विज्ञान विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

आर्थिक तंगी से रंजना की छुटी पढ़ाई, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के सहयोग से फिर होगी शुरू उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर कबीरधाम जिले में बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री व कवर्धा विधायक  विजय शर्मा ने आर्थिक सहायता प्रदान कर एक प्रेरणादायक पहल की है। उन्होंने जरूरतमंद छात्राओं की पढ़ाई में सहयोग करते हुए ग्राम हरमो निवासी भारती साहू को 2 लाख रुपए तथा ग्राम चिल्फी निवासी रंजना झारिया को 25 हजार रुपए की राशि प्रदान की। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के निर्देश पर उक्त राशि के चेक प्रदान किए गए। इस अवसर पर  नरेन्द्र मानिकपुरी,  अमर कुर्रे,  ओमकार साहू,  लोकचंद साहू,  मिलू साहू उपस्थित रहे।         इस दौरान रंजना झारिया ने बताया कि उनके पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई थी, जिसके कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी। उन्होंने कहा कि जब उन्हें जानकारी मिली कि उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक  विजय शर्मा जरूरतमंदों की मदद करते हैं, तब उन्होंने उनसे संपर्क कर अपनी समस्या बताई। उनकी स्थिति को समझते हुए  शर्मा ने 25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की। रंजना ने बताया कि इस सहायता से वह अब दोबारा नर्सिंग की पढ़ाई शुरू कर सकेंगी और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। उन्होंने इसके लिए उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मदद उनके जीवन में नई उम्मीद लेकर आई है।

राज्यपाल डेका ने स्वर्ण पदक विजेता आर्मरेसलर मंत झा को दी बधाई राज्यपाल रमेन डेका

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोकभवन में 64 अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता पैरा आर्मरेसलर  मंत झा ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने हाल ही में नार्वे के ईदफ्योर्ड में  आयोजित हुए पैरा आर्मरेसलिंग कप 2026 प्रतियोगिता में 85 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रोशन किया है।          छत्तीसगढ़ के भिलाई के निवासी मंत झा एक प्रसिद्ध भारतीय पैरा-आर्मरेसलर (विकलांग कुश्ती खिलाड़ी) हैं, जिन्होंने नॉर्वे पैरा-आर्म रेसलिंग कप 2026 में 85 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रौशन किया है। वे एशिया नंबर-1 और वर्ल्ड नंबर-3 के रूप में पहचान रखते हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अब तक 64 से अधिक पदक जीत चुके हैं।  झा ने राज्यपाल को अपनी उपलब्धियों की जानकारी दी।  डेका ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी तथा उनका सम्मान किया।

विश्व रेडक्रॉस दिवस पर राज्य भर में होंगे विशेष कार्यक्रम राज्यपाल डेका ने दिए निर्देश राज्यपाल रमेन

रायपुर राज्यपाल  रमेन ने कहा कि रेडक्रॉस के मानव सेवा कार्याे का प्रचार-प्रसार जन-जन तक पहुंचाने के लिए सदस्यता अभियान को गति देना आवश्यक है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, समाज सेवियों एवं विभिन्न वर्गों के गणमान्य नागरिकों को अभियान से जोड़ा जाए।  डेका ने 8 मई विश्व रेडक्रॉस दिवस के अवसर पर राज्य एवं जिला शाखाओं में वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।           राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष  टोमन साहू ने मुलाकात की। इस दौरान रेडक्रॉस सोसायटी की गतिविधियों, सदस्यता अभियान तथा आगामी विश्व रेडक्रॉस दिवस के आयोजन के संबंध में राज्यपाल द्वारा मार्गदर्शन दिया गया।            डेका ने 8 मई विश्व रेडक्रॉस दिवस के अवसर पर वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों और गणमान्य व्यक्तियों को रेडक्रॉस स्टीकर लगाकर दान संग्रहण कार्यक्रम चलाएं। उन्होंने प्रदेश के सभी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं को जूनियर रेडक्रॉस और यूथ रेडक्रॉस से जोड़ने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने कहा कि युवाओं की भागीदारी से सेवा, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को बढ़ावा मिलेगा।         बैठक में रेडक्रॉस सोसायटी के विभिन्न कार्यक्रमों और भविष्य की योजना पर भी चर्चा की गई। इस अवसर पर रेडक्रॉस सोसायटी के राज्यप्रतिनिधि  युवराज देशमुख और कोषाध्यक्ष  संजय पटेल उपस्थित थे।

सुशासन एक्सप्रेस के ज़रिए नारायणपुर के दूर-दराज के गांवों को घर तक सर्विस मिलती है

रायपुर  नारायणपुर के अंदरूनी गांवों में रहने वाले कई परिवारों के लिए, सरकारी डॉक्यूमेंट कभी उनकी पहुंच से बाहर थे, अपनी मर्ज़ी से नहीं बल्कि दूरी की वजह से। लंबे सफ़र, खराब सड़कें और सुरक्षा की चिंताओं की वजह से सर्विस नहीं मिल पाती थीं। नारायणपुर कलेक्टर मती नम्रता जैन के तहत ज़िला प्रशासन द्वारा शुरू की गई सुशासन एक्सप्रेस, एक मोबाइल गवर्नेंस यूनिट है, जो सरकारी सर्विस को सीधे इन बस्तियों तक पहुंचाकर उस दूरी को कम कर रही है। सालों तक, भूगोल और सुरक्षा की चिंताओं की वजह से कई गांव प्रशासन की आम पहुंच से दूर थे। पहचान रजिस्ट्रेशन, वेलफेयर एनरोलमेंट और शिकायत निवारण जैसी बेसिक सर्विस के लिए अक्सर लंबा सफ़र करना पड़ता था या वे पूरी तरह से पहुंच से बाहर रहती थीं। सुशासन एक्सप्रेस इस समीकरण को बदल देती है। जनवरी 2026 में शुरू की गई यह पहल एक ट्रैवलिंग सर्विस सेंटर के तौर पर काम करती है। अधिकारी और डेटा ऑपरेटर दूर-दराज की बस्तियों में जाते हैं, टेम्पररी कैंप लगाते हैं और मौके पर ही सर्विस देते हैं। फोकस इस बात पर है कि अंदरूनी इलाकों के लोग, खासकर नियाद नेला नार गांवों के लोग, ज़रूरी स्कीमों के तहत कवर हों। जनवरी से 23 अप्रैल, 2026 के बीच, सुशासन एक्सप्रेस कई स्कीमों के तहत हज़ारों बेनिफिशियरी तक पहुंची है। डेटा ऑन-ग्राउंड डिलीवरी के स्केल को दिखाता है। कुल 1,951 आधार कार्ड, 259 आयुष्मान कार्ड और 306 लेबर कार्ड जारी किए गए हैं। ज़रूरी डॉक्यूमेंटेशन और रोजी-रोटी से जुड़ी सर्विसेज़ में भी लगातार प्रोग्रेस हुई है। इसमें 676 बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट, 514 राशन कार्ड जारी करना, 168 कास्ट सर्टिफिकेट, 104 इनकम सर्टिफिकेट और 63 रेजिडेंस सर्टिफिकेट शामिल हैं। इसके अलावा, PM सम्मान निधि के तहत 31 सर्विसेज़ को आसान बनाया गया है। यह आउटरीच सिर्फ डॉक्यूमेंटेशन तक ही सीमित नहीं रही है। इस पहल ने पेंशन से जुड़ी सर्विसेज़, MGNREGA जॉब कार्ड और चुनाव से जुड़े Form-6 रजिस्ट्रेशन में मदद की है। दूर-दराज के इलाकों में हेल्थ और डिसेबिलिटी सर्वे भी किए गए हैं। प्रोग्राम की एक खास बात आधार सर्विस डिलीवरी है। कुल 10,682 आधार अपडेट पूरे हो चुके हैं, जिसमें ज़रूरी बायोमेट्रिक अपडेट भी शामिल हैं। इससे लंबे समय से चली आ रही कमी दूर हो रही है, क्योंकि ज़्यादातर सरकारी स्कीमों का फ़ायदा उठाने के लिए पहचान के डॉक्यूमेंट्स तक पहुँच ज़रूरी है। कई लोगों के लिए, ये कैंप सरकारी सिस्टम तक पहली सीधी पहुँच देते हैं। झारवाही, कंडाकाडी, कोरगे, पंगुड, माधोनार, रायनार, कोरेंडा, तोयनार और छिनारी जैसे गाँव, जहाँ कभी इलाके और सुरक्षा की वजह से पहुँचना मुश्किल था, अब सर्विस डिलीवरी के इस बढ़ते नेटवर्क का हिस्सा हैं। कलेक्टर मती नम्रता जैन ने कहा, “मिले, प्रोसेस हुए और पेंडिंग एप्लीकेशन को ट्रैक करने के लिए एक डेली मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया गया है, जिससे ट्रांसपेरेंसी और समय पर डिलीवरी पक्की हो सके।” “सुशासन एक्सप्रेस के ज़रिए, हम दूर-दराज के इलाकों में लोगों तक सीधे ज़रूरी सर्विस पहुँचाने के लिए काम कर रहे हैं। पहचान के डॉक्यूमेंट्स, हेल्थकेयर, सोशल सिक्योरिटी और रोज़ी-रोटी में मदद तक पहुँच को बेहतर बनाकर, यह कोशिश भरोसा बनाने और इलाके को धीरे-धीरे स्थिरता और विकास की ओर ले जाने में मदद कर रही है।” नारायणपुर के इलाके ने लंबे समय से शासन चलाने के तरीके को आकार दिया है। घने जंगल, पहाड़ी इलाके और बिखरी हुई बस्तियां फिजिकल एक्सेस को मुश्किल बनाती हैं, क्योंकि कई गांव एडमिनिस्ट्रेटिव सेंटर से बहुत दूर हैं। समय के साथ, इसके लिए एडमिनिस्ट्रेशन को ज़्यादा फ्लेक्सिबल और फील्ड-बेस्ड तरीके अपनाने पड़े हैं। ऐसे में, सुशासन एक्सप्रेस जैसी पहल प्रैक्टिकल और लगातार तरीके से लोगों के करीब सर्विस पहुंचाने में मदद कर रही हैं। गांवों तक सर्विस पहुंचाकर, एडमिनिस्ट्रेशन कम्युनिटी के साथ सीधा जुड़ाव मजबूत कर रहा है और ज़रूरी स्कीम तक पहुंच में सुधार कर रहा है। नारायणपुर में, गवर्नेंस तेजी से घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री का कोट मुख्यमंत्री  विष्णु देव साई ने कहा, “सुशासन एक्सप्रेस गुड गवर्नेंस के सिद्धांत के प्रति हमारे कमिटमेंट को दिखाता है, जहां हर नागरिक को उनके लिए बने फायदे मिलते हैं।” “हम चाहते हैं कि हर नागरिक, खासकर दूर-दराज के इलाकों में, बिना किसी फालतू रुकावट के सरकारी सर्विस तक सीधी पहुंच हो। हमारा फोकस यह पक्का करने पर है कि फायदे बिना देरी के योग्य लोगों तक पहुंचें। फील्ड आउटरीच के ज़रिए एडमिनिस्ट्रेशन और नागरिकों के बीच सीधा जुड़ाव मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।”