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झारखंड शराब घोटाले में CBI का हाथ खींचना, रायपुर जोनल ऑफिस ने किया इंकार, HCमें सुनवाई होगी अगले हफ्ते

रायपुर झारखंड में सामने आए करोड़ों रुपये के शराब घोटाले की जांच को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। छत्तीसगढ़ की तर्ज पर दर्ज इस मामले की जांच से केंद्रीय जांच ब्यूरो ने हाथ खींच लिए हैं। सीबीआइ के रायपुर जोनल कार्यालय ने इस प्रकरण की जांच करने से इन्कार कर दिया है। इससे संबंधित सीबीआइ का पत्र छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पेश किया गया, जिसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है। यह मामला रांची निवासी विकास सिंह की शिकायत से जुड़ा है, जिसके आधार पर झारखंड-छत्तीसगढ़ शराब घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ में प्रकरण दर्ज किया गया था। वर्तमान में इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय और छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा की जा रही है। हाई कोर्ट में तीन याचिकाएं लंबित ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज प्राथमिकी से संबंधित इस प्रकरण में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में तीन याचिकाएं विचाराधीन हैं। इनमें झारखंड के तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे, संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह और शिकायतकर्ता विकास सिंह की याचिकाएं शामिल हैं। इन याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार अग्रवाल की खंडपीठ में सुनवाई हुई। महाधिवक्ता ने कोर्ट में रखा सीबीआइ का पत्र सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने न्यायालय के समक्ष सीबीआइ रायपुर के हेड ऑफ ब्रांच द्वारा भेजे गए पत्र की प्रति प्रस्तुत की। पत्र में बताया गया कि छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव की ओर से भेजा गया जांच संबंधी पत्र सीबीआइ ने वापस कर दिया है, क्योंकि एजेंसी इस मामले की जांच करने के लिए इच्छुक नहीं है। महाधिवक्ता ने कहा कि वे मामले के मेरिट पर अदालत के समक्ष पक्ष रखना चाहते हैं। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई में दलीलें सुनने का निर्णय लिया।  

बलौदाबाजार प्लांट में हादसा, 6 मजदूर जलकर मरे, कंपनी ने 20 लाख की मदद की घोषणा, कांग्रेस करेगी जांच

बलौदाबाजार  बलौदाबाजार जिले के भाटापारा क्षेत्र के बकुलाही गांव में स्थित एक निजी इस्पात स्पंज आयरन फैक्ट्री(Chhattisgarh Steel Plant Blast) में गुरुवार सुबह भीषण विस्फोट होने से कम से कम छह मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घटना की खबर मिलने पर क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। 10 बजे की है घटना घटना सुबह करीब 10 बजे उस समय हुई, जब फैक्ट्री के स्पंज आयरन प्लांट के कोल कीलन में अचानक जोरदार धमाका हो गया। इसकी चपेट में आए अधिकांश मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी चीख-पुकार से पूरा परिसर गूंज उठा। प्राप्त जानकारी के अनुसार विस्फोट इतना भयानक था कि आसपास काम कर रहे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। मौके पर दमकल, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत पहुंच गए और घायलों को निकटतम स्वास्थ्य केंद्र और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि घायलों की स्थिति गंभीर बनी हुई है और कुछ की हालत नाजुक है। पुलिस ने दर्ज किया मामला पुलिस ने पूरे मामले में केस दर्ज कर आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में फैक्ट्री की तकनीकी खराबी या मशीनरी में दबाव वृद्धि को विस्फोट का संभावित कारण बताया जा रहा है। अधिकारियों ने मृतकों के परिजनों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने और घायलों के बेहतर इलाज की भी बात कही है। भाटापारा के ग्रामीणों और मजदूर संगठनों ने इस हादसे को सुरक्षा मानकों की उपेक्षा का नतीजा बताया है। उन्होंने कहा कि कारखानों में सुरक्षा उपायों की कमी अनेक बार जानलेवा साबित हो चुकी है और इस पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। घटना की हाई-लेवल जांच की जाए : भूपेश बघेल पूर्व सीएम बघेल ने आगे लिखा कि हम सरकार और प्रशासन से अनुरोध करते हैं कि घायलों को सही इलाज दिया जाए. हम यह भी मांग करते हैं कि मरने वालों के परिवारों को सही मुआवजा दिया जाए, घटना की हाई-लेवल जांच की जाए और इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. हालांकि विष्णु देव साई की छत्तीसगढ़ सरकार ने अभी तक किसी भी पीड़ित के लिए कोई एक्स-ग्रेसिया अनाउंस नहीं किया है. मुख्यमंत्री ने क्या कहा? सीएम विष्णु देव साय ने लिखा है कि "बलौदा बाजार के बकुलाही स्थित स्पंज आयरन फैक्ट्री में हुए भयावह विस्फोट की घटना अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है. इस हादसे में 6 श्रमिकों की असमय मृत्यु हो गई, जबकि 5 घायलों को बिलासपुर उच्च स्तरीय इलाज हेतु भेजा गया है. मृतकों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी शोक संवेदना। इस दुख की घड़ी में उनकी हर संभव सहायता सुनिश्चित की जाएगी. जिला प्रशासन को घायलों के समुचित उपचार और हादसे के कारणों की तथ्यपरक जांच के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं. छत्तीसगढ़ सरकार पीड़ित परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है. ॐ शान्ति" राहत कार्य जारी पुलिस और राहत कर्मी अब भी बचाव कार्य में जुटे हैं और मृतकों की पहचान तथा विस्तृत राहत गतिविधियों के बारे में अपडेट जारी किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य ने गहरा शोक व्यक्त किया इस दर्दनाक हादसे पर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने गहरा शोक व्यक्त किया है। क्लिनिकल फर्नेस के दौरान हुए विस्फोट में श्रमिकों के असामयिक निधन को अत्यंत दुःखद बताते हुए उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति तथा शोकाकुल परिवारजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हादसे में गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को बेहतर उपचार हेतु सिम्स, बिलासपुर में भर्ती कराया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि घायलों को हर संभव उत्तम एवं त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनके उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे।

रायपुर में IND-NZ टी-20 मैच, भीड़ से बचने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने रूट और पार्किंग तय किए

रायपुर  भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी-20 सीरीज का दूसरा मैच आज 23 जनवरी को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है। राज्य के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में दर्शक रायपुर पहुंच रहे हैं। इसी को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने दर्शकों और खिलाड़ियों की सुविधा के लिए विशेष यातायात और पार्किंग व्यवस्था लागू की है। विजय अभियान जारी रखने उतरेगा भारत न्यूजीलैंड के विरुद्ध नागपुर में पहला टी-20 इंटरनेशनल मुकाबला 48 रन से जीतकर भारतीय टीम आत्मविश्वास से लबरेज है। अब शुक्रवार को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में होने वाला दूसरा मुकाबला सीरीज के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। कप्तान सूर्यकुमार यादव की नजरें इस मुकाबले को जीतकर सीरीज में 2-0 की बढ़त लेने पर होंगी, ताकि आगे के मैचों में टीम को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सके। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम इस मैच को हर हाल में जीतकर सीरीज में बराबरी करना चाहेगी। पहले मैच में अभिषेक शर्मा और रिंकू सिंह की तूफानी बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने 238 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने कीवी टीम को 200 रन के भीतर रोक दिया। अभिषेक-संजू से विस्फोट पारी की उम्मीद पहले टी-20 में संजू सैमसन भले ही बड़ी पारी नहीं खेल सके, लेकिन अभिषेक शर्मा ने 35 गेंदों पर 84 रन की विस्फोटक पारी खेलकर मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया था। रायपुर में भी टीम मैनेजमेंट बाएं-दाएं के इस काम्बिनेशन को बरकरार रख सकता है। वहीं, नागपुर में इशान किशन और संजू सैमसन की बल्लेबाजी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी। ऐसे में दूसरे टी-20 में श्रेयस अय्यर को मौका दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। तिलक वर्मा के चोटिल होने के बाद टीम में लौटे अय्यर को टी-20 विश्व कप से पहले आजमाना टीम मैनेजमेंट की प्राथमिकता हो सकती है। स्पिन ट्रैक पर भारत की रणनीति रायपुर की पिच आमतौर पर स्पिनरों को मदद देती है। ऐसे में भारत अपनी अंतिम एकादश में बदलाव कर सकता है। शिवम दुबे की जगह कुलदीप यादव या रवि बिश्नोई को मौका मिल सकता है। स्पिन विभाग की कमान उप-कप्तान अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती संभालेंगे। हालांकि, अक्षर पटेल की फिटनेस पर नजर रहेगी, क्योंकि वह पिछले मैच में चोटिल हो गए थे। तेज गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह की जोड़ी शानदार लय में है। न्यूजीलैंड करना चाहेगा वापसी पहले मुकाबले में हार के बाद न्यूजीलैंड की टीम रायपुर में नई रणनीति के साथ उतर सकती है। कप्तान मिशेल सेंटनर टाप आर्डर को अधिक आक्रामक बनाने और अतिरिक्त स्पिनर को शामिल करने पर विचार कर सकते हैं। डेवोन कान्वे, ग्लेन फिलिप्स और डेरिल मिचेल से बड़ी पारियों की उम्मीद होगी। भारत : सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, इशान किशन, श्रेयस अय्यर, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, रिंकू सिंह, अर्शदीप सिंह, रवि बिश्नोई, हर्षित राणा। न्यूजीलैंड : मिशेल सैंटनर (कप्तान), डेवोन कान्वे, बेवोन जैकब्स, डेरिल मिशेल, ग्लेन फिलिप्स, टिम राबिंसन, जिमी नीशम, ईश सोढी, जैक फाल्क्स, मार्क चैपमैन, माइकल ब्रेसवेल, रचिन रवींद्र, काइल जेमीसन, मैट हेनरी, जैकब डफी, क्रिस्टियन क्लार्क। शहर से स्टेडियम जाने वाले दर्शक रायपुर शहर से आने वाले दर्शक तेलीबांधा थाना तिराहा होते हुए नेशनल हाईवे-53 से सेरीखेड़ी ओवरब्रिज पार कर नया रायपुर मार्ग से स्टेडियम तिराहा पहुंचेंगे। यहां से साईं अस्पताल रोड होते हुए साईं अस्पताल और सेंध तालाब पार्किंग में वाहन खड़े कर पैदल स्टेडियम जाना होगा। बिलासपुर, बलौदाबाजार और महासमुंद से आने वाले दर्शक बिलासपुर, बलौदाबाजार, खरोरा और महासमुंद की ओर से आने वाले दर्शकों को नेशनल हाईवे-53 के रास्ते मंदिर हसौद और नवागांव होकर स्टेडियम टर्निंग पहुंचना होगा। वाहन परसदा और कोसा पार्किंग में खड़े कर पैदल स्टेडियम जाना होगा। धमतरी-जगदलपुर मार्ग से आने वाले दर्शक इस दिशा से आने वाले दर्शक अभनपुर, केन्द्री, उपरवारा और मंत्रालय चौक होते हुए सेंध तालाब और साईं अस्पताल पार्किंग में वाहन खड़े कर सकेंगे। दुर्ग-भिलाई से आने वाले दर्शक दुर्ग-भिलाई की ओर से आने वालों को टाटीबंध, रिंग रोड और तेलीबांधा तिराहा होकर नेशनल हाईवे-53 से नया रायपुर मार्ग अपनाना होगा। पासधारी वाहनों के लिए अलग व्यवस्था जिन वाहनों को A से G तक के पार्किंग पास जारी किए गए हैं, वे सेरीखेड़ी ओवरब्रिज होकर नया रायपुर प्रवेश मार्ग से सीधे स्टेडियम के निर्धारित पार्किंग जोन में वाहन पार्क कर सकेंगे। ट्रैफिक पुलिस ने दर्शकों से अपील की है कि तय मार्गों और पार्किंग व्यवस्था का पालन करें, ताकि मैच के दौरान किसी तरह की असुविधा न हो और सभी सुरक्षित व समय पर स्टेडियम पहुंच सकें।  13 गेट पर लोहे की रेलिंग लगाई गई CSCS छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ ने साफ किया है कि, फर्स्ट इनिंग खत्म होने के बाद किसी भी दर्शक को स्टेडियम में एंट्री नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 350 से ज्यादा प्राइवेट बाउंसर्स भी तैनात किए जा रहे हैं। इस दौरान क्रिकेट संघ के 45 अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था के लिए मौजूद रहेंगे। 13 गेट पर लोहे की रेलिंग लगा दी गई है। 800 रुपए से 25 हजार रुपए तक की टिकट इस बार मैच के जनरल टिकट के दाम पिछले वनडे मुकाबले के लगभग समान रखे गए हैं। टिकट 800 रुपए से शुरू होकर 25 हजार रुपए तक बिके हैं। टिकट विंडो ओपन होने के शुरुआती तीन दिनों तक मैच की टिकट नहीं बिक पाई थी। लेकिन चौथे दिन सारी 35,000 टिकट बिक गईं। एंट्री गेट्स पर तिहरी निगरानी स्टेडियम के सभी एंट्री गेट्स पर पुलिस, प्राइवेट गार्ड्स और क्रिकेट संघ के कर्मचारियों की संयुक्त ड्यूटी लगाई जाएगी। जिससे किसी तरह का विवाद या अव्यवस्था न हो। पिछले ODI में 2 दर्शक रेलिंग जंप करते हुए मैदान के बीच खिलाड़ियों तक पहुंच गए थे। इस बार बाउंसर्स को बाउंड्री पर तैनात किया जाएगा, ताकि दर्शक दीर्घा से कोई जंप कर खिलाड़ियों तक न पहुंच पाएं।

रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर बने संजीव शुक्ला, श्वेता बनीं ग्रामीण SP, 15 IPS अफसरों का ट्रांसफर

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए पुलिस विभाग में एक बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 15 अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस फेरबदल की सबसे खास बात राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली के तहत पहली नियुक्ति और कई जिलों में नए कप्तानों की तैनाती है। रायपुर को मिला पहला पुलिस कमिश्नर राजधानी रायपुर की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए संजीव शुक्ला (2004 बैच) को रायपुर का पहला पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे बिलासपुर में आईजी (IG) के पद पर तैनात थे। रायपुर में अब पुलिसिंग का स्वरूप पूरी तरह प्रोफेशनल और हाई-टेक होने की उम्मीद है। राज्य के तीन प्रमुख रेंजों में भी नए आईजी की तैनाती की गई है:     रामगोपाल गर्ग (2007 बैच): बिलासपुर रेंज के नए आईजी।     अभिषेक शांडिल्य (2007 बैच): दुर्ग रेंज की कमान संभालेंगे।     बालाजी राव सोमावार (2007 बैच): राजनांदगांव रेंज के नए आईजी बनाए गए हैं। जिलों के नए कप्तान (SP) कुछ महत्वपूर्ण जिलों में भी अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है:     लाल उमेद सिंह: जशपुर के नए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP)।     शशि मोहन सिंह: रायगढ़ जिले की सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे।     दिव्यांग पटेल: सेनानी, 14वीं वाहिनी, बालोद।     उमेश प्रसाद गुप्ता: पुलिस अधीक्षक (रेल), रायपुर। रायपुर नगरीय पुलिस का नया ढांचा शहर की बढ़ती आबादी और क्राइम कंट्रोल के लिए रायपुर नगरीय पुलिस में विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई है:     अमित तुकाराम काम्बले: अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, रायपुर।     संदीप पटेल: पुलिस उपायुक्त (मध्य)।     मयंक गुर्जर: पुलिस उपायुक्त (उत्तर)।     विकास कुमार: पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक एवं प्रोटोकॉल)।     राजनाला स्मृतिक: पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर)।     श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा: सहायक पुलिस आयुक्त (आजाद चौक)। अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर और ग्रामीण एसपी की नियुक्ति 2009 बैच के आईपीएस अमित तुकाराम कांबले को रायपुर का अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर बनाया गया है। वहीं रेल एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा को रायपुर ग्रामीण एसपी के पद पर पदस्थ किया गया है। एसएसपी स्तर पर तबादले रायपुर के एसएसपी लाल उम्मेद सिंह का तबादला मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृहक्षेत्र जशपुर किया गया है। जशपुर के एसएसपी शशिमोहन सिंह को रायगढ़ भेजा गया है। आईजी और एसपी स्तर पर बड़ा फेरबदल आदेश के अनुसार दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग को बिलासपुर रेंज भेजा गया है। अभिषेक शांडिल्य को राजनांदगांव से दुर्ग रेंज, बालाजी राव सोमावार को पुलिस मुख्यालय से राजनांदगांव रेंज और रायगढ़ एसपी दिव्यांग पटेल को रेल एसपी बनाया गया है। रायपुर में रह चुके हैं संजीव शुक्ला संजीव शुक्ला पूर्व में रायपुर के एसपी रह चुके हैं और स्थानीय अनुभव व मजबूत प्रशासनिक नेटवर्क के लिए जाने जाते हैं। हालांकि वे जनवरी 2027 में सेवानिवृत्त होंगे, जिससे उन्हें करीब 11 माह का कार्यकाल मिलेगा। क्यों खास है यह फेरबदल? यह आदेश राज्यपाल के नाम से गृह सचिव हितेश शिखर गुप्ता द्वारा जारी किया गया है। इन नियुक्तियों के पीछे मुख्य उद्देश्य वीआईपी मूवमेंट, बढ़ते साइबर अपराध और शहरी यातायात को बेहतर ढंग से मैनेज करना है। संजीव शुक्ला जैसे अनुभवी अधिकारी का रायपुर कमिश्नर बनना शहर की सुरक्षा के लिहाज से एक नया अध्याय माना जा रहा है। SP के रूप में संभाला चुके हैं दुर्ग की कमान  संजीव शुक्ला ने दुर्ग जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया. इससे पहले उन्होंने इसी जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक का पद भी संभाला था. दुर्ग में उनका काम करने का तरीका सख्त, अनुशासित और अपराध नियंत्रण में प्रभावी माना जाता था. बाद में उन्हें बिलासपुर रेंज का पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में समस्याओं को सुलझाने और रेंज स्तर पर संगठित अपराध से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. दो बार प्रेसिडेंट पुलिस मेडल से नवाजे जा चुके हैं संजीव शुक्ला बता दें कि संजीव शुक्ला CID के हेड के तौर पर भी काम कर चुके हैं. उन्हें उनके बेहतरीन काम के लिए प्रेसिडेंट मेडल से सम्मानित किया गया है, जिससे उनका सर्विस रिकॉर्ड और भी मजबूत हुआ है. उन्हें 2010 और 2022 में दो अलग-अलग कैटेगरी में दो बार प्रेसिडेंट पुलिस मेडल मिला. संजीव शुक्ला कांकेर में डीआईजी के पद पर तैनात थे. उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी (रायपुर) में उप निदेशक के रूप में काम करने का भी अनुभव है.   रायपुर कमिश्नरी में DCP की नियुक्ति रायपुर में कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने के बाद नगरीय पुलिस ढांचे को मजबूत करते हुए पुलिस उपायुक्त (DCP) स्तर पर अहम नियुक्तियां की गई हैं। इसके तहत वर्ष 2020 बैच के आईपीएस अधिकारी उमेश प्रसाद गुप्ता को पुलिस उपायुक्त (मध्य) रायपुर, संदीप पटेल को पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) रायपुर और मयंक गुर्जर को पुलिस उपायुक्त (उत्तर) रायपुर नगरीय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा विकास कुमार (IPS-2020) को पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक एवं प्रोटोकॉल) और राजनाला स्मृतिक (IPS-2020) को पुलिस उपायुक्त (क्राइम और साइबर) रायपुर नगरीय नियुक्त किया गया है। वहीं ईशु अग्रवाल (IPS-2022), जो अब तक नगर पुलिस अधीक्षक, आजाद चौक रायपुर थे, उन्हें पुलिस सहायक आयुक्त, आजाद चौक, रायपुर नगरीय पदस्थ किया गया है। आधे जिले में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू रायपुर के आधे जिले में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम आज यानी 23 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गई है। रायपुर के 21 थाने कमिश्नर और 12 थाने SP संभालेंगे। गृह विभाग ने इसे लेकर बुधवार शाम नोटिफिकेशन जारी किया गया था। रायपुर में कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने के लिए शहर की पुलिस फोर्स को 2 हिस्सों में बांटा गया।

स्वास्थ्य सेवाओं के साथ युवाओं को मिलेगा रोजगार: नवा रायपुर बनेगा सेंट्रल इंडिया का हेल्थकेयर हब – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर : मेडिसिटी विकास की दिशा में बड़ी उपलब्धि: चार माह में जमीन लीज और रजिस्ट्री पूरी, ₹680 करोड़ की लागत से बनेगा 300 बिस्तरों का बॉम्बे हॉस्पिटल स्वास्थ्य सेवाओं के साथ युवाओं को मिलेगा रोजगार: नवा रायपुर बनेगा सेंट्रल इंडिया का हेल्थकेयर हब – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर नवा रायपुर को देश के प्रमुख हेल्थकेयर हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में देश के प्रतिष्ठित बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर और नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के मध्य 15 एकड़ भूमि के लीज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता नवा रायपुर में प्रस्तावित मेडिसिटी के विकास को नई गति देगा। यह परियोजना न केवल राज्य के हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करेगी, बल्कि निवेश के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की तेज़ और भरोसेमंद प्रशासनिक कार्यप्रणाली का भी उदाहरण बनेगी। राज्य सरकार द्वारा 24 सितंबर 2025 को निवेश आमंत्रण जारी किए जाने के बाद मात्र चार माह के भीतर भूमि चिन्हांकन, आवश्यक स्वीकृतियां और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर ली गई, जो अपने आप में एक नया बेंचमार्क है। नवा रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा आबंटित 15 एकड़ भूमि पर बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा लगभग ₹680 करोड़ की लागत से 300 बिस्तरों का अत्याधुनिक मल्टी सुपर-स्पेशलिटी हॉस्पिटल स्थापित किया जाएगा। यह अस्पताल ट्रस्ट का देश में चौथा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल होगा। इससे पूर्व मुंबई, इंदौर और जयपुर में ट्रस्ट के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। बॉम्बे हॉस्पिटल के माध्यम से कार्डियक साइंसेज, कैंसर उपचार, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, क्रिटिकल केयर, ऑर्गन ट्रांसप्लांट सहित कई उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसके प्रारंभ होने से छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मुंबई या दिल्ली जैसे महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इस परियोजना से 500 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है, जिनमें डॉक्टर, सर्जन, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और मेडिकल टेक्नीशियन शामिल होंगे। इसके साथ ही हेल्थकेयर सप्लाई चेन, सेवाओं और सहयोगी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष रोजगार भी उत्पन्न होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि बॉम्बे हॉस्पिटल की स्थापना से नवा रायपुर में मेडिसिटी का सपना साकार होने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के नागरिकों को अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के निरंतर विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। बॉम्बे हॉस्पिटल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का नवा रायपुर में निवेश करना राज्य की नीतिगत स्थिरता, तेज़ निर्णय क्षमता और निवेशक-अनुकूल वातावरण पर विश्वास का प्रमाण है। यह परियोजना छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024–30 के अंतर्गत स्वास्थ्य जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को दिए जा रहे विशेष प्रोत्साहनों और समयबद्ध क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष परिणाम है। इससे नवा रायपुर को सेंट्रल इंडिया के प्रमुख हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में सहायता मिलेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ चंदन कुमार, बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं चेयरमैन भरत तापड़िया, सचिव श्याम जी सहित ट्रस्ट एवं शासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा – किसानों की प्रगति के लिए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य

रायपुर : किसानों की समृद्धि के लिए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना आवश्यक : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय लंबे समय से अधूरे सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण करने को लेकर मुख्यमंत्री सख्त मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग के कामकाज की उच्च स्तरीय समीक्षा की रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में विभागीय कार्यों, संचालित परियोजनाओं तथा प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार बड़े निर्णय ले रही है और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को अटल सिंचाई योजना में शामिल किया गया है, इन्हें समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने आगामी तीन वर्षों में पूर्ण की जाने वाली परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। खेती के बढ़ते रकबे और किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट की कोई कमी नहीं है और इसके लिए पृथक बजटीय प्रावधान किया गया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश में सिंचित रकबा बढ़ेगा और किसानों की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री साय ने जशपुर जिले के किसानों के मध्यप्रदेश अध्ययन भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से सिंचाई को प्रभावी ढंग से संचालित होते देखकर किसान काफी उत्साहित हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में सिंचाई क्षेत्र में बेहतर नवाचार किए जा रहे हैं, वहां छत्तीसगढ़ के किसानों का भी अध्ययन भ्रमण कराया जाए, ताकि वे नई तकनीकों और कार्यप्रणालियों से अवगत हो सकें। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि आगामी तीन वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 14 सिंचाई परियोजनाओं को चरणबद्ध रूप से पूर्ण करने की योजना है, जिससे लगभग 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इनमें 4,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली चार प्रमुख परियोजनाओं का मार्च और मई माह में भूमिपूजन प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं में बस्तर जिले की देउरगांव बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, मटनार बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में महानदी पर मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना तथा गरियाबंद जिले की सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक परियोजना शामिल हैं। इसी प्रकार अटल सिंचाई योजना के अंतर्गत 115 लंबित परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ रुपये का बजट आबंटित किया गया है, जिनके माध्यम से लगभग 11 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का विकास किया जाएगा। बैठक में अंतराज्यीय जल विवादों के समाधान पर भी चर्चा की गई। आगामी तीन वर्षों में महानदी जल विवाद, पोलावरम बांध के डुबान क्षेत्र तथा समक्का बैराज से संबंधित मामलों के निपटारे के लिए ठोस प्रयास किए जाने पर सहमति बनी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पुल की चोरी: कोरबा में 11 बजे तक था सही, सुबह अचानक 60 फीट लंबा लोहे का पुल गायब

 कोरबा     छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक अजब गजब मामले की पुलिस रिपोर्ट दर्ज हुई है. सिविल लाइन थाना की सीएसईबी पुलिस चौकी में 60 फीट लंबे पुल के चोरी हो जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है. कलेक्टर कोरबा कुणाल दुदावत और एसपी सिद्धार्थ तिवारी से शिकायत किए जाने के बाद यह रिपोर्ट दर्ज हुई है और इस मामले को लेकर प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप बचा हुआ है. पुलिस ने चोरी के पुल की तलाश में एक विशेष जांच दल गठित कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. छत्तीसगढ़ के कोरबा में शहर के मध्य भाग से होकर गुजरने वाले हसदेव बायीं तट नहर में वर्षों पहले बनाया गया पुल रातो-रात चोरी हो गया. नगर निगम के वार्ड नंबर 17 के नागरिकों के शहर आवागमन के लिए यह पुल करीब 40 साल पहले बनाया गया था. रात 11 बजे तक था, सुबह हुआ लापता पुल की लंबाई लगभग 60 फीट और चौड़ाई 5 फीट थी. यह पुल रात 11 बजे तक सही सलामत था. वार्ड 17 के लोग इस समय तक पुल से होकर घर लौटे थे. लेकिन सुबह उन्होंने देखा कि पुल अपनी जगह से गायब है. पुल के चोरी चले जाने की सूचना तुरन्त वार्ड पार्षद लक्ष्मण श्रीवास को दी गई. वे भी भागते दौड़ते मौके पर पहुंचे, तो देख की पुल वास्तव में चोरी हो गया था. वार्ड पार्षद लक्ष्मण श्रीवास ने तुरंत आवेदन पत्र तैयार किया और एसपी सिद्धार्थ तिवारी के पास पहुंच कर शिकायत दर्ज कराई. वे यहीं नहीं रुके. उन्होंने पुल चोरी की लिखित शिकायत कलेक्टर कुणाल दुदावत से भी की और पुल के चोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर से शिकायत के बाद पुलिस विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया. पुलिस ने एक विशेष जांच दल का गठन कर मामले की तेज गति से जांच शुरू कर दी है. दरअसल, जिस पुल की चोरी हुई है, वह मजबूत लोहे का बना हुआ था. मोटे मोटे लोहे के गर्डर यानी रेल पटरियों जैसी संरचना से यह 60 फीट लंबा पुल शहरी क्षेत्र में नहर निर्माण के बाद नागरिकों के आवागमन के लिए बनाया गया था.  गर्डर के ऊपर लोहे की मोटी-मोटी प्लेट लगाई गई थी. यह पुल इतना मजबूत था कि बीते 40 सालों में इसे कोई क्षति नहीं पहुंची थी. इसी पुल की रातो रात चोरी हो गई है. मौके पर पुल को गैस कटर से काटने के निशान थे. नहर के दोनों सिरों पर पुल के जमीन में लगे टुकड़ों में गैस कटर से पुल काटने के निशान दिखाई दे रहे थे. 30 टन लोहा और करीब 15 लाख कीमत स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह चोरी शहर में सक्रिय स्क्रैप माफिया ने कराई है. चोरी गए पुल के लोगों का वजन अनुमानित 25 से 30 टन है और उसका बाजार मूल्य करीब 15 लाख रुपए होता है.  टल गया बड़ा जल संकट चोरों ने कोरबा शहर में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नगर निगम की ओर से बिछाई गई पानी की पाइप लाइन की सुरक्षा के लिए उसके तीन दिशाओं में लगाए गए लोहे के मोटे सुरक्षा कवच को भी काटकर चोरी कर ली है. गनीमत है कि पानी का पाइप लाइन सुरक्षित है, वरना कोरबा की ढाई लाख से अधिक की आबादी बूंद बूंद पानी के लिए तरस जाती और शहर में हाहाकार मच जाता. प्रशासन में हड़कंप, SIT का गठन कोरबा जिला पुलिस जिले में स्क्रैप कारोबार यानी कबाड़ का व्यवसाय  बंद होने का दावा करती है. लेकिन पिछले कुछ माह से जगह जगह संचालित स्क्रैप के दुकान इस दावे को साफ साफ नकारते हैं. नगर के वार्ड नंबर 17 में पुल चोरी की घटना से सिद्ध हो जाता है कि जिले में संगठित रूप से माफिया की तर्ज पर स्क्रैप के कारोबार का संचालन किया जा रहा है. पुलिस ने शहर के दो कबाड़ियों के ठिकानों पर छापामार कार्रवाई भी की, लेकिन उसे वांछित सफलता नहीं मिली.

लंबे समय से अधूरे सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण करने को लेकर मुख्यमंत्री साय सख्त

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में विभागीय कार्यों, संचालित परियोजनाओं तथा प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार बड़े निर्णय ले रही है और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को अटल सिंचाई योजना में शामिल किया गया है, इन्हें समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने आगामी तीन वर्षों में पूर्ण की जाने वाली परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। खेती के बढ़ते रकबे और किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट की कोई कमी नहीं है और इसके लिए पृथक बजटीय प्रावधान किया गया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश में सिंचित रकबा बढ़ेगा और किसानों की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री साय ने जशपुर जिले के किसानों के मध्यप्रदेश अध्ययन भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से सिंचाई को प्रभावी ढंग से संचालित होते देखकर किसान काफी उत्साहित हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में सिंचाई क्षेत्र में बेहतर नवाचार किए जा रहे हैं, वहां छत्तीसगढ़ के किसानों का भी अध्ययन भ्रमण कराया जाए, ताकि वे नई तकनीकों और कार्यप्रणालियों से अवगत हो सकें। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि आगामी तीन वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 14 सिंचाई परियोजनाओं को चरणबद्ध रूप से पूर्ण करने की योजना है, जिससे लगभग 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इनमें 4,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली चार प्रमुख परियोजनाओं का मार्च और मई माह में भूमिपूजन प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं में बस्तर जिले की देउरगांव बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, मटनार बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में महानदी पर मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना तथा गरियाबंद जिले की सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक परियोजना शामिल हैं। इसी प्रकार अटल सिंचाई योजना के अंतर्गत 115 लंबित परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ रुपये का बजट आबंटित किया गया है, जिनके माध्यम से लगभग 11 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का विकास किया जाएगा। बैठक में अंतराज्यीय जल विवादों के समाधान पर भी चर्चा की गई। आगामी तीन वर्षों में महानदी जल विवाद, पोलावरम बांध के डुबान क्षेत्र तथा समक्का बैराज से संबंधित मामलों के निपटारे के लिए ठोस प्रयास किए जाने पर सहमति बनी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  मुकेश बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लेते हुए 5000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उक्त शिक्षक भर्ती व्यापमं के माध्यम से की जाए तथा इसके लिए फरवरी 2026 तक विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण हो सके। बैठक में शिक्षक भर्ती परीक्षा–2023 से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि परीक्षा–2023 की प्रतीक्षा सूची की मान्यता नहीं बढ़ाई जाएगी, ताकि पिछले वर्षों में उत्तीर्ण युवाओं को भी शासकीय सेवा में आने का मौका दिया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तेज़ी से उठाए जाएंगे।

जैव विविधता की वापसी: बारनवापारा अभयारण्य में वर्षों बाद नजर आया दुर्लभ जीव

  रायपुर.   दुर्लभ ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन-पिजन,बर्ड सर्वे के दौरान हुई विशेष फोटोग्राफी बारनवापारा अभयारण्य से पक्षी प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। हाल ही में अभ्यारण्य में आयोजित बर्ड सर्वे के दौरान दुर्लभ 'ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन-पिजन' (ट्रेरॉन बाइसिंक्टस) की उपस्थिति दर्ज की गई है।              ऐतिहासिक रूप से इस पक्षी की उपस्थिति बारनवापारा में पहले भी दर्ज की गई थी, जब वर्ष 2015-16 में विख्यात पक्षी विशेषज्ञ ए.एम.के. भरोस ने इसे देखा था। उसके बाद से यह प्रजाति यहाँ से ओझल रही थी, जिससे अब इसकी पुनः वापसी वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से एक बड़ा रिकॉर्ड मानी जा रही है।           इस दुर्लभ पक्षी की साइटिंग पकरीद टीम द्वारा की गई, जिसमें बर्डर एवं वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर राजू वर्मा और प्रतीक ठाकुर सहित कर्नाटक, बिहार और ओडिशा के विशेषज्ञ शामिल थे। टीम को उस वक्त बड़ी सफलता मिली जब इस पक्षी का एक जोड़ा उनके ठीक ऊपर पेड़ पर बैठा पाया गया, जिससे उड़ने से पहले उनकी विस्तृत फोटोग्राफी और रिकॉर्डिंग करना संभव हो सका।           वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह साइटिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस प्रजाति को कई वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस क्षेत्र में देखा गया है।          भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में पाया जाने वाला यह पक्षी मुख्य रूप से अंजीर और जंगल के अन्य रसीले फलों पर निर्भर रहता है। इसे एक निवासी प्रजाति माना जाता है जो स्थानीय मौसमी बदलावों के साथ अपनी गतिविधियां संचालित करता है। छत्तीसगढ़ के अन्य वनों में भी इसकी मौजूदगी समय-समय पर दर्ज होती रही है, लेकिन बारनवापारा में इसकी वापसी पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती को दर्शाती है।             सर्वे टीम ने इस पक्षी की पहचान इसकी विशिष्ट शारीरिक विशेषताओं के आधार पर की है। ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन-पिजन की नीली-धूसर गर्दन, पीले-हरे रंग का सिर और शरीर का निचला हिस्सा इसे विशेष बनाता है। इसके लाल पैर और स्लेटी-धूसर केंद्रीय पूंछ के पंख इसे आमतौर पर दिखने वाले 'येलो-फुटेड ग्रीन-पिजन' (हरियल) से स्पष्ट रूप से अलग करते हैं।            विशेष रूप से नर पक्षी की पहचान उसके सीने पर मौजूद गहरे नारंगी रंग के पैच से की गई। कई वर्षों बाद इस प्रजाति का कैमरे में कैद होना न केवल फोटोग्राफर्स के लिए उत्साह का विषय है बल्कि यह अभयारण्य में पक्षियों के अनुकूल वातावरण और विविधता का एक सशक्त प्रमाण भी है।