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CG News: CM विष्णुदेव साय ने मंत्रालय में बुलाई फसरों की बैठक

रायपुर. नए साल 2026 के पहले दिन ही सीएम साय मंत्रालय में अफसरों के साथ अहम बैठक करने जा रहे हैं। आज एक जनवरी 2026 को होने वाली बैठक सुबह 11 बजे मंत्रालय में होगी। इस बैठक में सभी अपर मुख्य, प्रमुख सचिव सचिव और विशेष सचिव मौजूद रहेंगे। बैठक में सभी विभाग अध्यक्ष को भी बुलाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने कल शाम एक संक्षिप्त सूचना जारी की, जिसमें लिखा है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक विचार-विमर्श आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम में शासन की प्राथमिकताओं, भावी कार्ययोजनाओं और सुशासन से संबंधित विषयों पर चर्चा होगी। यह संवाद कार्यक्रम शासन के कार्यों को और अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अतः आपसे अनुरोध है कि निर्धारित समय के अनुसार संवाद कार्यक्रम में उपस्थित हों।

सड़क सुरक्षा उपायों का सबकी सहभागिता से हो बेहतर क्रियान्वयन

रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य सड़क सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा बैठक संपन्न सड़क सुरक्षा उपायों का सबकी सहभागिता से हो बेहतर क्रियान्वयन सड़क दुर्घटनाएं नही हो और यातायात को बेहतर बनायें – मुख्य सचिव विकासशील रायपुर राज्य सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव विकासशील ने राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को परस्पर समन्वय के साथ कार्य करते हुए सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के दिए निर्देश। मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कहा है कि सुनिश्चित करे कि 108 एम्बुलेंस समय पर दुर्घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिाकरियों को इसकी मॉनिटरिंग के निर्देश दिए है। दुर्घटना में घायल व्यक्ति के समुचित उपचार हेतु ट्रामा सेंटरों को सुदृढ़ किया जाए। सड़क सुरक्षा एवं स्वप्रेरणा से सुगम यातायात प्रबंधन कार्य हेतु अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।         मुख्य सचिव ने सभी जिलों के कलेक्टरों केा सड़क दुर्घटनाओं को रोकने तथा सड़क सुरक्षा की लगातार मानिटरिंग करने और जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक करने के निर्देश दिए है। समीक्षा बैठक के प्रारंभ में सचिव परिवहन एस. प्रकाश के प्रारंभिक विभागीय गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। संजय शर्मा अध्यक्ष अंतर्विभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) ने संबंधित विभागों द्वारा संपादित कार्यों तथा अद्यतन स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने चिन्हाकित 152 ब्लैक स्पॉट्स में से 102 में सुधार कार्य पूर्ण होने और शेष 50 में सुधारात्मक उपाय शीघ्र किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। यातायात के नियमों के उल्लंघनकर्ताओं के विरूद्ध पुलिस विभाग द्वारा 8 लाख 15 हजार 954 प्रकरणों पर कार्यवाही 33 करोड 22 लाख 39 हजार 300 रूपए तथा परिवहन विभाग द्वारा राशि 38.52 करोड़ शमन शुल्क वसूल किये गए।            वर्ष 2025 में विभिन्न जिलों में 150 सड़क सुरक्षा समितियां समीक्षा बैठक संपन्न हुई है। सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के उपचार हेतु 8 जिलों अस्पताल में सीटीस्कैन की जांच, समस्त जिला अस्पतालों 24X7 एक्सरे, लेबोट्री जांच, इमरजेंसी संबंधित आवश्यक दवाईयां, इन्जेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। समस्त जिलों के विशेषज्ञ, चिकित्सा, स्टाफ नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस वर्ष शाला सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण में सड़क सुरक्षा से संबंधित यातायात जागरूकता के लगभग 4 लाख 47 हजार 200 प्रशिक्षण के माध्यम से तथा 7लाख 19 हजार यूट्यूब के माध्यम से शिक्षक तथा विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं। समग्र शिक्षा द्वारा मुख्यमंत्री शाला सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण में 1200 स्त्रोत व्यक्ति, 46 हजार शिक्षक एवं 4 लाख छात्र-छात्राओं तथा राज्य साक्षरता मिशन द्वारा संपन्न वाद-विवाद प्रतियोगिता में सड़क सुरक्षा से 1 लाख 38 हजारशिक्षकगण/विद्यार्थी/समुदाय लाभान्वित हुए।           यातायात जागरूकता के 15 हजार 319 कार्यक्रम, शैक्षणिक संस्थानों में संपन्न हुए। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में 3 लाख 72 हजार 406 एलईडी स्ट्रीट लाईट लगाये गये, 1 लाख 02 हजार 410 अतिरिक्त लाईट्स की स्वीकृति प्रदान की गई। प्रदेश में करीब में 5388 अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। सड़क दुर्घटनाओं के प्रभावितों के धनरहित उपचार के लिये निर्दिष्ट चिकित्सालयों का आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण, घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्तियों, गुड सेमेरिटन को यथाशीघ्र सम्मान राशि प्रदाय करने के निर्देश दिये गये। राज्य में सर्वाधिक सडक दुर्घटनाओं एवं इससे होने वाली मृत्यु एवं घायलों के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार, सरगुजा, जगदलपुर (बस्तर) जिलों में दुर्घटनाओं के कारणों की समीक्षा कर कार्ययोजना तैयार प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिये गये।           मुख्य सचिव द्वारा जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में हिट एण्ड रन प्रकरणों के प्रभावितों को राहत के लिये गठित जिला दावा निपटान समिति को प्रकरणों को निर्धारित समय-सीमा में निराकरण तथा जी.आई. सी के अधिकारियों से संपर्क स्थापित कर दावा निपटान की प्रक्रिया में तेजी लाने, मालवाहक वाहनों में यात्री परिवहन को रोकने अन्य वैकल्पिक प्रबंध, बिना हेलमेट/सीट बेल्ट, शराब सेवन कर वाहन चलान के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही की जाए।       स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने अवगत कराया कि शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा पहली से लेकर दसवीं तक के पाठ्यक्रमों मे सड़क सुरक्षा विषयक पाठों के परिमार्जन का कार्य पूर्ण हो चुका है, जिसे आगामी शिक्षा सत्र से लागू करने सहित प्रत्येक शैक्षणिक संस्थानों में रोड़ क्लब गठित कर नियमित गतिविधियों से सड़क सुरक्षा का वातावरण तैयार किया जायेगा। एस. प्रकाश सचिव परिवहन ने व्हीकल ट्रेकिंग प्लेटफार्म कमाण्ड एवं कंट्रोल सेंटर, आटोमैटेड टेस्टिंग स्टेशन ड्रायविंग ट्रेनिंग एण्ड रिसर्च संस्थान, क्षेत्रीय ड्रायविंग प्रशिक्षण केन्द्र, पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा परिवहन सुविधा केन्द्र पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा प्रदूषण जांच केन्द्र, बस संगवारी ऐप, हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट, ई-ट्रैक, इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग संहित अन्य सड़क सुरक्षा प्रयासों के संबंध में जानकारी दी गई। इसी क्रम में अवगत कराया गया कि प्रदेश में दोपहर 03 बजे से लेकर रात्रि 09 बजे के मध्य शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक दुर्घटनाएं हो रही है। इन दुर्घटनाओं में सर्वाधिक दोपहिया वाहन चालक/सवारों की मृत्यु की प्रमुख वजह बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाना है। सड़क सुरक्षा माह का आयोजन बेहतर किया जाए। शहरों के निकास पर प्रभावी प्रवर्तन हो ताकि दुर्घटनाओं में कमी आ सकें। हेलमेट एवं सीटबेल्ट लगाने के लिए प्रेरित किया जाए।    ब्लैक स्पॉट्स में जांच समिति द्वारा दिये गये सुझाव अनुरूप समय सीमा पर आवश्यक सुधार का कार्य किया जाए। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि ब्लैक स्पॉट्स में सुधारात्मक उपाय उपरांत दुर्घटनाओं में कितनी कमी आई, इसका विश्लेषण होना चाहिए। ब्लैक स्पॉट्स तय होने के पश्चात् सुधार उपाय करने से बेहतर होगा कि, पहले से रोड़ डिजाईन सही हो, यह सुनिश्चित किया जावे। एनएचएआई एवं एनएच को समय पर स्वप्रेरणा से तत्परता के साथ कार्य संपादन करने के निर्देश दिए गए। बैठक में बसवराजू, सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, डॉ. कमलप्रीत सिंह सचिव लोक निर्माण विभाग, प्रदीप गुप्ता अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यातायात, श्रीमती नेहा चंपावत सचिव गृह विभाग सहित स्वास्थ्य सेवाएं, लोक निर्माण विभाग, परिवहन, जनसंपर्क, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, समस्त संभाग आयुक्त, तथा पुलिस महानिरीक्षक रेंज, सर्वाधिक सड़क दुर्घटना के जिला कलेक्टर्स एवं पुलिस अधीक्षकगण सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में सड़क सुरक्षा परिदृश्य संबंधी वर्चुअल समीक्षा बैठक मंत्रालय में संपन्न हुई।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 02 नई स्क्वायर बेलर मशीनों का उद्घाटन किया

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 02 स्क्वायर बेलर मशीनों का किया लोकार्पण रायपुर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपने कबीरधाम प्रवास के दौरान पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर परिसर से आधुनिक तकनीक से युक्त 02 स्क्वायर बेलर मशीनों का विधिवत पूजा-अर्चना कर लोकार्पण किया।  इस अवसर पर उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों से मशीनों की कार्यप्रणाली, उपयोगिता एवं उद्देश्य के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने बताया कि स्क्वायर बेलर मशीन अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित है, जो एक घंटे में लगभग डेढ़ एकड़ क्षेत्र में हार्वेस्टर से कटे हुए पैरा को चौकोर बंडल (बेल) के रूप में तैयार करती है। इन बंडलों का उपयोग आगे चलकर गौ-वंश के लिए चारे के रूप में किया जाएगा, जिससे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। यह भी जानकारी दी गई कि स्क्वायर बेलर मशीनों के उपयोग से खेतों में पैरा जलाने की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इससे न केवल किसानों को अवशेष प्रबंधन में सुविधा मिलेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, वायु प्रदूषण में कमी और गौ संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, चारे के सुव्यवस्थित संग्रहण और परिवहन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसान हित, गौ संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। स्क्वायर बेलर मशीन जैसी पहल से कृषि अवशेषों का सार्थक उपयोग होगा और किसानों को आर्थिक एवं पर्यावरणीय दोनों स्तरों पर लाभ मिलेगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मशीनों के नियमित, समुचित और प्रभावी उपयोग के निर्देश भी दिए। इस अवसर पर सांसद संतोष पाण्डेय, पूर्व संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू, पूर्व विधायक योगेश्वर राज सिंह, अशोक साहू, जिला पंचायत सभापति डॉ. बीरेन्द्र साहू, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, उपाध्यक्ष पवन जायसवाल, जनपद उपाध्यक्ष गणेश तिवारी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विदेशी राम धुर्वे, श्रीमती विजयलक्ष्मी तिवारी, श्रीमती सतविंदर पाहुजा, समस्त पार्षद, जनप्रतिनिधि तथा पंचमुखी बूढ़ा महादेव सेवा समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

CG News: सरपंच ने रेप करने की कोशिश की

बिलासपुर.  न्यायधानी बिलासपुर में घर में घुसकर महिला के साथ छेड़खानी का गंभीर मामला सामने आया है। गांव के सरपंच पर यह आरोप लगाया गया है। घटना से आहत पीड़िता ने जहर का सेवन कर लिया, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मामला जिले के पचपेड़ी थाना क्षेत्र के ग्राम सुलौनी का है। पीड़िता का पति और परिवार बाहर गए हुए थे, महिला घर में अकेली सो रही थी। इसी दौरान गांव के सरपंच, धनेश साहू, घर में घुसकर उससे छेड़खानी करने लगे। आरोप है कि सरपंच ने पीड़िता के साथ अश्लील हरकत की। घबराई हुई पीड़िता चिल्लाते हुए घर से बाहर निकली। शोर सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और उन्होंने आरोपी को घर से भागते हुए देखा। घटना से आहत पीड़िता ने जहर खा लिया, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।  

रायपुर: धान खरीदी तिहार बना किसानों के लिए खुशहाली की वजह, पारदर्शी व्यवस्था से बढ़ा भरोसा

रायपुर : धान खरीदी तिहार किसानों के लिए खुशियों और राहत की सौगात ऑनलाइन टोकन, पारदर्शी व्यवस्था और समयबद्ध भुगतान से बढ़ा किसानों का भरोसा रायपुर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समर्थन मूल्य एवं कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत प्रदेशभर में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। शासन की इस किसान-हितैषी व्यवस्था ने खेतों में महीनों की मेहनत करने वाले अन्नदाताओं को आर्थिक संबल और आत्मविश्वास प्रदान किया है। मौसम की अनिश्चितताओं और कठिन परिश्रम के बीच तैयार की गई फसल का उचित मूल्य समय पर मिलने से किसानों के चेहरे पर संतोष और भरोसे की मुस्कान दिखाई दे रही है। प्रदेश के सभी धान उपार्जन केंद्रों में खरीदी की प्रक्रिया तेज, सुव्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है। ऑनलाइन एवं ऑफलाइन टोकन व्यवस्था, सरल प्रक्रिया और समयबद्ध भुगतान ने किसानों को अनावश्यक प्रतीक्षा और असुविधा से मुक्त किया है। डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग से खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़े हैं। इसी क्रम में धान उपार्जन केंद्र पेंड्री पहुंचे किसान नरेश रात्रे ने 30.80 क्विंटल धान का विक्रय किया। उन्होंने बताया कि बीज, खाद, सिंचाई और श्रम पर आने वाली लागत के बाद जब उपज का उचित मूल्य समय पर मिल जाता है, तो किसान का मनोबल कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि केंद्र में नमी परीक्षण, तौल और टोकन वितरण की पूरी प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी और व्यवस्थित है। किसान रात्रे ने विशेष रूप से “तुंहर टोकन” मोबाइल ऐप की सराहना करते हुए कहा कि इस डिजिटल सुविधा ने भीड़, लंबी कतारों और अनावश्यक इंतजार की समस्या को समाप्त कर दिया है। घर बैठे ऑनलाइन टोकन बुक कर निर्धारित समय पर केंद्र पहुंचने से धान की खरीदी सुगमता से हो जाती है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की यह व्यवस्था किसानों की मेहनत को सही सम्मान देने वाली है। धान उपार्जन केंद्रों पर छांव, पेयजल, शौचालय सहित सभी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता से किसानों को सम्मानजनक और सुविधाजनक वातावरण मिल रहा है। प्रदेशभर में जिला प्रशासन द्वारा धान खरीदी केंद्रों की सतत निगरानी की जा रही है। बेहतर प्रबंधन, डिजिटल प्रणाली और प्रशासनिक सक्रियता के कारण राज्य में धान खरीदी कार्य पूर्ण पारदर्शिता, गति और सुगमता के साथ संपन्न हो रहा है, जिससे किसान वर्ग में संतोष और विश्वास का वातावरण निर्मित हुआ है।

रायपुर: राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 का उद्घाटन 01 जनवरी को

रायपुर : राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 का 01 जनवरी को होगा शुभारंभ जन-जागरूकता के लिए होंगे विविध कार्यक्रमों का होगा आयोजन 1 जनवरी को रायपुर में बाइक रैली का होगा आयोजन रायपुर लोगों को सड़क सुरक्षा की गंभीरता, चुनौतियों और नियमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सहित सम्पूर्ण देश में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 का आयोजन 1 से 31 जनवरी 2026 तक किया जा रहा है। इस दौरान राज्य के सभी जिलों में सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत जिलों में सड़क सुरक्षा पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्वास्थ्य परीक्षण एवं नेत्र जांच शिविर, स्कूल डे आयोजन, स्कूली बच्चों के लिए स्लोगन, निबंध, चित्रकला एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं, ई-रिक्शा, ऑटो व बस चालकों का प्रशिक्षण, एम्बुलेंस ड्राइविंग ट्रेनिंग, वाहनों की फिटनेस एवं रेडियम स्ट्रिप्स की जांच/संधारण, शराब सेवन कर वाहन चलाने से होने वाले नुकसान पर रैली, ग्राम चौपालों में जन-जागरूकता कार्यक्रम, गंभीर सड़क दुर्घटना स्थलों का चिन्हांकन एवं सड़क सुरक्षा मितानों का प्रशिक्षण जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त युवाओं के लिए एरोबिक्स-जुंबा के माध्यम से 'स्वस्थ शरीर – स्वस्थ मन, सुरक्षित जन' थीम पर कार्यक्रम, हेलमेट धारी वाहन चालकों को प्रोत्साहन स्वरूप टॉफी वितरण तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विविध गतिविधियां भी आयोजित होंगी। 1 जनवरी 2026 को सर्किट हाउस रायपुर के समीप शाम 5:00 बजे सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष श्री अभय मनोहर सप्रे की उपस्थिति में जनजागरूकता के लिए हेलमेट एवं बाइक रैली का आयोजन किया जाएगा। यह रैली सड़क सुरक्षा नियमों के पालन, हेलमेट उपयोग और सुरक्षित वाहन संचालन का संदेश देगी।  जनजागरूकता के लिए भिलाई में मैराथन का हुआ आयोजन इसी क्रम में रविवार को भिलाई में आयोजित मैराथन को सड़क सुरक्षा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री संजय शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मैराथन के उपरांत सड़क सुरक्षा पर आधारित नुक्कड़ नाटक का मंचन भी किया गया, जिसकी लोगों ने सराहना की।

हाईवे मुआवजा घोटाले में शिकंजा: ईडी ने रायपुर-विशाखापत्तनम प्रोजेक्ट से जुड़े 10 ठिकानों पर मारा छापा, 40 लाख जब्त

रायपुर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), रायपुर जोनल ऑफिस ने 29 दिसंबर को पीएमएलए, 2002 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में रायपुर और महासमुंद में दस जगहों पर तलाशी ली। यह तलाशी भारतमाला योजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम हाईवे प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण में मिले अवैध मुआवजे के मामले में हरमीत सिंह खनूजा और अन्य के आवासीय और आधिकारिक ठिकानों पर की गई। ईडी ने एसीबी/ईओडब्ल्यू, रायपुर द्वारा निर्भय साहू, तत्कालीन एसडीओ (राजस्व), अभनपुर, रायपुर और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। एफआईआर में आरोप है कि आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर रायपुर-विशाखपत्तनम हाईवे प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण में आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर करके अवैध मुआवजा प्राप्त किया।  ईडी की जांच में पता चला कि आरोपियों ने कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ आपराधिक साजिश रचकर, भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत अधिग्रहित भूमि के लिए जानबूझकर जमीन के बड़े हिस्सों को छोटे टुकड़ों में परिवार के सदस्यों के बीच बांटकर और पिछली तारीख की एंट्री करके धोखाधड़ी से अतिरिक्त मुआवजा प्राप्त किया। भूमि अधिग्रहण से पहले कई छोटे खेतों को दिखाने के लिए जमीन का यह कृत्रिम विभाजन किया गया था, जिससे अधिक मुआवजे का दावा करने के लिए मुआवजा ढांचे का फायदा उठाया जा सके। राजस्व रिकॉर्ड में इस तरह से हेरफेर किया गया कि ये विभाजन अधिग्रहण प्रक्रिया से पहले हुए थे, जिससे बढ़ी हुई अवैध मुआवजे की राशि स्वीकृत और वितरित हुई। इस तरह प्राप्त अतिरिक्त अवैध मुआवजा अपराध की आय थी। इससे सरकारी खजाने को गलत नुकसान हुआ और आरोपियों को संबंधित गैरकानूनी लाभ हुआ। तलाशी अभियान के दौरान 40 लाख रुपए नकद, डिजिटल उपकरण और विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। साथ ही, तलाशी अभियान के दौरान अनुसूचित अपराध करने से उत्पन्न पीओसी से शामिल व्यक्तियों के नाम पर अर्जित कई चल और अचल संपत्तियों की पहचान की गई। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है।

रायपुर: ‘बस्तर पंडुम 2026’ महोत्सव से रंगेगा आदिवासी कला-संसार, 10 जनवरी से शुरू

रायपुर : 'बस्तर पंडुम 2026’ से सजेगा आदिवासी कला-संसार बस्तर की लोक-संस्कृति का महोत्सव 10 जनवरी से 06 फरवरी तक चलेगा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दिशा निर्देश पर छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल बस्तर संभाग की लोक-संस्कृति, परंपरा और विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए बस्तर पंडुम 2026 के आयोजन की तैयारियां शुरु कर दी गई है। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026 में “बस्तर पंडुम 2026” का आयोजन जनपद, जिला एवं संभाग स्तर पर प्रतियोगात्मक स्वरूप में किया जाएगा। यह आयोजन बस्तर अंचल की लोककला, शिल्प, नृत्य, गीत-संगीत, पारंपरिक व्यंजन, बोली-भाषा, वेश-भूषा, आभूषण, वाद्य यंत्र, नाट्य एवं जनजातीय जीवन-पद्धति के संरक्षण और संवर्धन का एक भव्य मंच बनेगा। राज्य शासन ने बस्तर संभाग के सभी सात जिलों-बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कांकेर, कोण्डागांव एवं नारायणपुर-में इस उत्सव को व्यापक सहभागिता के साथ आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग की 1885 ग्राम पंचायतों से जुड़े 32 जनपद मुख्यालयों में 12 विधाओं पर आधारित प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। ग्राम पंचायत स्तर से चयनित लोक कलाकारों और कला दलों को निःशुल्क ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से जनपद स्तरीय प्रतियोगिता में आमंत्रित किया जाएगा। पहले चरण में जनपद स्तरीय प्रतियोगिताएं 10 से 20 जनवरी 2026 के बीच आयोजित होंगी। प्रत्येक विधा से एक-एक विजेता दल का चयन किया जाएगा, जिन्हें 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। जनपद स्तर पर आयोजन के लिए प्रत्येक जनपद पंचायत को 5 लाख रुपये का बजट आबंटित किया गया है। दूसरे चरण में जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं 24 से 29 जनवरी 2026 तक आयोजित की जाएंगी। जिला स्तर पर प्रत्येक विधा के विजेता दल को 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए प्रत्येक जिले को 10 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। अंतिम और सबसे भव्य चरण के रूप में संभाग स्तरीय प्रतियोगिता 2 से 6 फरवरी 2026 तक जगदलपुर, जिला बस्तर में आयोजित होगी। इसमें सातों जिलों से चयनित 84 विजेता दल भाग लेंगे। संभाग स्तर पर प्रथम पुरस्कार 50 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 30 हजार रुपये, तृतीय पुरस्कार 20 हजार रुपये तथा शेष 48 प्रतिभागी दलों को 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस महोत्सव की विशेषता यह होगी कि इसमें केवल वही कलाकार भाग ले सकेंगे, जो बस्तर संभाग के वास्तविक मूल निवासी हैं और जनजातीय लोक कला विधाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही, गांवों और कस्बों में अपनी कला से पहचान बना चुके वरिष्ठ कलाकारों के साथ-साथ नवोदित कलाकारों को भी मंच प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक स्तर पर विजेता दलों को पुरस्कार राशि के साथ प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह (फोटो फ्रेम) प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। आयोजन को जनउत्सव का स्वरूप देने के लिए समाज प्रमुखों, वरिष्ठ नागरिकों, आदिवासी मुखियाओं, जनप्रतिनिधियों एवं संस्कृति प्रेमियों को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने हेतु प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया के माध्यम से बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इस संपूर्ण आयोजन के लिए संचालनालय, संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। संस्कृति विभाग से युगल तिवारी, नोडल अधिकारी एवं कार्यक्रम संयोजक (मोबाइलः +91-94063-98080) को आयोजन का दायित्व सौंपा गया है। समन्वय हेतु प्रशांत दुबे (मोबाइलः +91-75093-62263) एवं भाविन राठौर (मोबाइलः +91-99071-41307) को नामांकित किया गया है। सभी जिलों को अपने-अपने स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त कर विभाग को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य शासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि “बस्तर पंडुम 2026” को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध, सुव्यवस्थित और गरिमामय ढंग से आयोजित किया जाए, ताकि बस्तर की लोक-संस्कृति की असली पहचान को सहेजते हुए उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।

आदिवासी अंचलों तक पहुंचेगी सेहत की सौगात, मुख्यमंत्री साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट को किया रवाना

रायपुर दूरस्थ और घने वनांचल वाले आदिवासी क्षेत्रों में अब स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों के दरवाज़े तक पहुँचेंगी। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान “पीएम जनमन” के तहत बुधवार को नवा रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। मोबाइल मेडिकल यूनिटों के संचालन से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सरकार का मानना है कि दुर्गम अंचलों में रहने वाले समुदायों को अस्पताल तक पहुँचने में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए यह व्यवस्था स्वास्थ्य सुविधाओं को सीधे उनके गाँवों व बसाहटों तक पहुँचाएगी। मोबाइल मेडिकल यूनिटों की तैनाती से प्रदेश के 18 जिलों के 2100 से अधिक गाँवों और बसाहटों तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जाएँगी। इससे दो लाख से अधिक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए अब इलाज और जाँच की सुविधा गाँव में ही उपलब्ध होगी। उन्होंने इस पहल को आदिवासी समुदायों की “सर्वांगीण भागीदारी और स्वास्थ्य सुरक्षा का ठोस आधार” बताया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव का दिन है। समाज में आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक प्रत्येक दृष्टिकोण से पिछड़े लोग विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग हैं। छत्तीसगढ़ में निवासरत 3 करोड़ की आबादी में विशेष पिछड़ी जनजाति के 2 लाख 30 हजार लोग 18 जिलों के 21 सौ बसाहटों में निवासरत हैं। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट उनके लिए वरदान साबित होगा। इन सर्वसुविधा-संपन्न 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से यह कार्य आसान होगा। इस यूनिट में डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्निशियन और स्थानीय वालंटियर उपस्थित होंगे। इस यूनिट में 25 तरह की जाँच सुविधाएँ तथा 106 तरह की दवाइयाँ निःशुल्क उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री साय ने इस नवीन योजना के लिए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के सहित सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जाति के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रयासरत हैं। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट ऐसे सुदूर वनांचलों के लिए हैं जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच कम है। आज 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट पूरे प्रदेश के लिए समर्पित कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूर्ण करेगा। मंत्री जायसवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने इस पुनीत कार्य में छत्तीसगढ़ को सहभागी बनकर योगदान देने का अवसर प्रदान किया। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 नवंबर 2023 को विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक, आर्थिक उत्थान के लिए पीएम जनमन योजना की शुरुआत की। इसका उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं को सीधे बसाहटों तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन स्थिति में मरीज को इन यूनिट के माध्यम से निकट स्वास्थ्य केंद्रों में पहुँचाना आसान होगा। हमारा उद्देश्य सिर्फ मशीनें ही नहीं, अपितु कुशल एवं संवेदनशील कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है। प्रत्येक मोबाइल मेडिकल यूनिट में चिकित्सक, नर्स, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट और स्थानीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं। ये यूनिटें हर 15 दिन में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करेंगी, जिनमें 25 से अधिक प्रकार की जाँच और रोगों  का उपचार किया जाएगा और आवश्यक दवाइयों का वितरण किया जाएगा। गंभीर मरीजों को आवश्यकता अनुसार निकटतम स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाएगा। उल्लेखनीय है कि पूर्व में संसाधनों की कमी के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ नियमित रूप से नहीं पहुँच पाती थीं। अब नए वाहन और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता के साथ यह व्यवस्था लगातार संचालित की जा सकेगी। इस पहल से टीबी, मलेरिया, एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याओं की समय पर पहचान व रोकथाम में मदद मिलेगी।

औद्योगिक विकास नीति 2024–30 में संशोधन : छत्तीसगढ़ को और अधिक निवेश-अनुकूल एवं प्रतिस्पर्धी बनाने की बड़ी पहल

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024–30 में महत्वपूर्ण संशोधनों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन संशोधनों के माध्यम से नीति को अन्य राज्यों की तुलना में और अधिक प्रतिस्पर्धात्मक, स्पष्ट एवं निवेश-अनुकूल बनाया गया है। इससे राज्य में औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र के साथ-साथ रोजगार के नए अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावनाएँ सुदृढ़ हुई हैं। मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए निर्णयों का मुख्य उद्देश्य राज्य के मूल निवासियों के लिए स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण रोजगार का सृजन सुनिश्चित करना है। इसी दृष्टि से ईपीएफ प्रतिपूर्ति तथा रोजगार सृजन अनुदान से संबंधित नए प्रावधान जोड़े गए हैं। अब 50 से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले विशेष सेक्टर के उद्यम — जैसे फार्मा, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, आईटी आदि के एमएसएमई इकाइयों को भी छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को दिए जाने वाले वेतन पर अनुदान प्राप्त होगा। सेवा क्षेत्र के दायरे का विस्तार करते हुए, मंत्रिमंडल ने कंप्यूटर-आधारित टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-कॉमर्स एवं ऐप-आधारित एग्रीगेटर, तथा NABL मान्यता प्राप्त डायग्नोस्टिक लैब को भी नीति के अंतर्गत सम्मिलित किया है। इन संस्थाओं को अब औद्योगिक विकास नीति के तहत निर्धारित प्रोत्साहन एवं अनुदान का लाभ मिलेगा। पर्यटन एवं स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास को गति देने के उद्देश्य से रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में पाँच सितारा होटलों तथा अन्य जिलों में तीन सितारा होटलों की स्थापना के लिए प्रोत्साहनात्मक संशोधन किए गए हैं। इसी प्रकार राज्य में बड़े निजी मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की स्थापना को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता संवर्धन के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि NIRF Ranking में शीर्ष 100 में शामिल शिक्षण संस्थानों द्वारा राज्य में परिसर स्थापित किए जाने पर उन्हें नीति के अंतर्गत विशेष अनुदान प्रदान किया जाएगा। इससे छत्तीसगढ़ में उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा और राज्य के युवाओं को विश्व-स्तरीय शिक्षा एवं बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत ये संशोधन छत्तीसगढ़ को उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ निवेश गंतव्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन निर्णयों से राज्य में निवेश बढ़ने, व्यापक रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास की गति को और अधिक तेज एवं संतुलित बनाने में सहायता मिलेगी।