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देश के सात कलाकारों को मिला संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप सम्मान, रामलाल बरेठ भी शामिल

रायपुर. संस्कृति मंत्रालय ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप, अकादमी रत्न, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कारों की घोषणा की है. फेलोशिप और पुरस्कारों के लिए छत्तीसगढ़ के चार कलाकारों का चयन किया गया है. संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप के लिए जिन सात कलाकारों का चयन किया गया है, उनमें से छत्तीसगढ़ के पंडित रामलाल बरेठ का नाम सबसे ऊपर है. उनका चयन कथक नृत्य के संरक्षण और संवर्धन के लिए किया गया है. इसके अलावा संगीत नाटक अकादमी की सामान्य परिषद ने संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक, जनजातीय कलाओं और कठपुतली सहित विभिन्न क्षेत्रों के 108 कलाकारों को अकादमी पुरस्कार के लिए चुना है. इनमें छत्तीसगढ़ के अनूप रंजन पांडेय का चयन लोक नृत्य (Folk Dance) के लिए किया गया है. वहीं 106 युवा कलाकारों का चयन उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के लिए किया गया है. इन युवा कलाकारों में छत्तीसगढ़ के आनंद कुमार पांडेय का चयन अभिनय (Acting) के लिए और घनश्याम साहू का चयन कथा लेखन (Play Writing) के लिए किया गया है. पंडित रामलाल बरेठ, कथक नर्तक संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप के लिए चयनित रामलाल बरेठ कथक नर्तक हैं. जिन्हें रायगढ़ के महाराज चक्रधर अपने दरबार के नर्तकों में कोहिनूर हीरा मानते थे. रामलाल ने अपनी पूरी जिंदगी नृत्य को समर्पित कर दी है. पंडित रामलाल बरेठ का जन्म 6 मार्च सन 1936 को हुआ था. संगीत परिवार में जन्में पंडित रामलाल की कथक नृत्य शिक्षा 5 साल की उम्र में अपने पिता के सानिध्य में शुरू हो गई थी. 10 वर्ष की छोटी आयु में ही वे रायगढ़ दरबार में कला के शौकीन लोगों के सामने नृत्य का प्रदर्शन करने लगे. जिसे देखकर महाराजा चक्रधर सिंह बहुत खुश हुए. इसके बाद महाराजा ने जयपुर के गुरू पंडित जयलाल महाराज से उनकी नृत्य शिक्षा की व्यवस्था करवाई. राजा चक्रधर सिंह खुद गायन, वादन एवं नृत्य के विद्वान भी थे. वाद्य यंत्र और गायन में भी महारथी पंडित रामलाल नृत्य के अलावा तबला वादन और गायन में भी पारंगत हैं. तबला की शिक्षा अपने पिता पंडित कार्तिकराम और पंडित जयलाल महाराज से ली और गायन की शिक्षा अपने पिता और उस्ताद हाजी मोहम्मद खां बांदावाले से ली है. पंडित रामलाल सन् 1949 में लखनऊ सम्मेलन में पहली बार मंच पर आए थे. जहां से इन्हें ख्याति मिलनी शुरू हुई. इसके बाद नृत्य प्रदर्शन का अनवरत सिलसिला शुरू हो गया. भारतीय शास्त्रीय नृत्य में उनके योगदान के लिए उन्हें 2024 में पद्मश्री प्रदान गया था. अनूप रंजन पांडेय अकादमी द्वारा लोक नृत्य (Folk Dance) के लिए चयनित वरिष्ठ रंगकर्मी और लोक कलाकार पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में अपना एक अलग स्थान है. 21 जुलाई 1965 को बिलासपुर जिले के एक किसान परिवार में जन्मे अनूप रंजन पांडेय को बचपन में अपने माता-पिता से कला और संस्कृति के संस्कार विरासत में मिली. कला के प्रति उनके जुनून का नतीजा है कि उन्होंने खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से लोक संगीत में पीएचडी हासिल की. वर्ष 1988 में सुप्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर से मुलाकात के बाद साल 1990 में वे उनके मशहूर ‘नया थियेटर’ से जुड़े और देश-विदेश के कई बड़े मंचों पर प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ी लोक रंगमंच को एक नई पहचान दिलाई. रंगमंच के जरिए केवल लोगों के मनोरंजन ही नहीं बल्कि जन जागरूकता का भी काम किया. 1989 से 1992 के दौरान उन्होंने अविभाजित मध्यप्रदेश में चले ‘संयुक्त साक्षरता आंदोलन’ में भी अहम भूमिका निभाई. बस्तर बैंड के जरिए दुर्लभ वाद्ययंत्रों का संरक्षण छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद वे रायपुर आ गए और यहाँ साक्षरता के लिए ‘स्टेट रिसोर्स सेंटर’ (SRC) में भी कई वर्षों तक अपनी सेवाएँ दीं. अनूप रंजन पांडेय ने बस्तर के स्थानीय कलाकारों को साथ जोड़कर ‘बस्तर बैंड’ की स्थापना की, जिसके जरिए उन्होंने बस्तर के जनजातीय क्षेत्रों में संगीत के जरिए शांति और संस्कृति के संरक्षण का काम किया. लोकगीतों-पांडुलिपियों का किया संकलन उन्होंने करीब 60 दुर्लभ पारंपरिक वाद्ययंत्रों को विलुप्ति से बचाते हुए सहेजने का काम किया. इसके साथ छत्तीसगढ़ के 143 लोकगीतों और लोककथाओं की पांडुलिपियों का संकलन किया है. यही नहीं उन्होंने अपने व्यक्तिगत संग्रह के कई दुर्लभ वाद्ययंत्र रायपुर स्थित संग्रहालय को दान भी किए हैं. घनश्याम साहू, कथा लेखक छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और रंगमंचीय परंपरा को नई पहचान देने वाले युवा रंगकर्मी घनश्याम साहू आज नाटक लेखन, निर्देशन और सांस्कृतिक नेतृत्व के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नाम हैं. वर्ष 2007 से रंगमंच से सक्रिय रूप से जुड़े घनश्याम साहू ने अपने लेखन और निर्देशन के माध्यम से समाज, लोकजीवन और समकालीन सरोकारों को मंच पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया है. रायगढ़ जिले के सारंगढ़ के कतेली के रहवासी घनश्याम साहू द्वारा लिखित एवं निर्देशित प्रमुख नाटकों में अघनिया, चैती, लाल दुपट्टा, बाबागिरी, पहटिया और बिरसा शामिल हैं, जिनका मंचन देश के विभिन्न शहरों और सांस्कृतिक केंद्रों में हुआ है. विशेष रूप से “पहटिया” का मंचन दिल्ली, बैंगलोर, भोपाल, नागपुर, बालाघाट और चंडीगढ़ जैसे महत्वपूर्ण शहरों में हुआ, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. फ़िल्म लेखन एवं निर्देशन में योगदान घनश्याम साहू ने रंगमंच के साथ-साथ सिनेमा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके द्वारा लिखित एवं निर्देशित फ़ीचर फिल्मों में कुरुक्षेत्र, झन जाबे परदेस, दंतेला, मुरली, असुर प्रमुख हैं. डॉ. आनंद कुमार पांडेय, अभिनय डॉ. आनंद कुमार पाण्डेय ने वर्ष 2010 में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से नाट्यकला में एमए करने के बाद डॉ. योगेन्द्र चौबे के निर्देशन में “भारतीय रंगमंच में हबीब तनवीर के ‘नया थिएटर’ का योगदान” विषय पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की. रंगमंच के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है. वर्ष 2007 से हिंदी रंगमंच के संवर्धन और विकास के लिए निरंतर कार्यरत आनंद कुमार अपने अभिनय, निर्देशन और सांस्कृतिक गतिविधियों से नई पीढ़ी को रंगकर्म से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं. जशरंग राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव का आयोजन वर्तमान में वे जशपुर में रंगमंच को आगे बढ़ाने और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं. बीते दो सालों से वे सफलतापूर्वक “जशरंग राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव” का आयोजन कर रहे हैं, जो क्षेत्र के कलाकारों और रंगकर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है. डॉ. पाण्डेय का … Read more

बिलासपुर को मिलेगा नया बायपास, 75.73 करोड़ की मंजूरी; तय समय में निर्माण पूरा करने के आदेश

रायपुर. राज्य सरकार ने बिलासपुर में कोनी (सेंदरी)-मोपका बायपास सड़क के लिए 75 करोड़ 73 लाख रुपए की निविदा को मंजूरी दे दी है। इस राशि से 13.40 किलोमीटर फोरलेन सीमेंट क्रांकीट सड़क का निर्माण किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने लोक निर्माण विभाग के बिलासपुर संभाग क्रमांक-1 के कार्यपालन अभियंता को अनुबंधित समयावधि में काम पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए मापदंडों के अनुरूप सड़क का निर्माण सुनिश्चित करने की बात कही है। लोक निर्माण विभाग ने कार्यपालन अभियंता को अनुबंधित कार्य का संपादन और पर्यवेक्षण विभागीय मापदंडों के अनुसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्य किसी अन्य को सब-लेट (Sub-let) नहीं किया जाएगा। कार्य संपादन के लिए पावर-ऑफ-अटॉर्नी मान्य नहीं होगी। राज्य शासन ने अनुबंध से पहले ठेकेदार से एपीएस (Additional Performance Security) की राशि का एफडीआर (Fixed Deposit Receipt) प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं।

बस्तर के विकास की नई रूपरेखा: दूध, सिंचाई, रोजगार और गांवों को नई पहचान देने की तैयारी

बस्तर में दूध, खेतों तक पानी, युवाओं को काम और गांवों को नई पहचान देने की तैयारी नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रखा विकसित छत्तीसगढ़ का विजन बस्तर में आमदनी दोगुनी करने का बड़ा संकल्प: तीन साल में हर परिवार की आय 30 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंचाने का लक्ष्य नई दिल्ली  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में नक्सलवाद से मुक्त बस्तर की नई तस्वीर देश के सामने रखी। उन्होंने कहा कि दशकों तक हिंसा की मार झेलने वाला बस्तर अब आर्थिक पुनरुत्थान, रोजगार, शिक्षा, पर्यटन और कृषि आधारित विकास का मॉडल बनेगा। मुख्यमंत्री ने बैठक में बस्तर के आदिवासी परिवारों की आय दोगुनी करने, दुग्ध क्रांति लाने, 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, पर्यटन को बड़े उद्योग के रूप में विकसित करने तथा एआई और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अब नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। वहां दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, खेतों तक पानी पहुंचाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं, गांवों में डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगले तीन वर्षों में बस्तर के परिवारों की मासिक आय बढ़ाकर 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में बस्तर के लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। सरकार खेती, पशुपालन, वन उपज, छोटे उद्योग और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में “डेयरी मॉडल” को तेजी से लागू किया जा रहा है। इसके तहत आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य गांवों में स्थायी आय का स्रोत तैयार करना है। इस पहल से महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा गांवों में डेयरी केंद्र, दूध संग्रहण, परिवहन और स्थानीय बाजार जैसी नई आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले दो बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं से 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इंद्रावती नदी क्षेत्र में सालभर पानी उपलब्ध होने से खेती बेहतर होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसान धान के साथ-साथ सब्जियां, फल तथा अन्य नकदी फसलें भी उगा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इससे मरीजों के इलाज, बीमारी और दवाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा तथा डॉक्टरों को समय पर सही जानकारी मिल सकेगी। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और बुजुर्गों को मिलेगा। उन्होंने बताया कि बस्तर में बने लगभग 200 सुरक्षा शिविरों को अब “सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चित्रकोट और बौद्ध धर्म से जुड़े तीर्थस्थल सिरपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित कर रही है। बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है, जबकि सिरपुर में ग्लोबल मेडिटेशन सेंटर, संग्रहालय और महानदी तट के विकास पर कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि पर्यटन रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है। पर्यटकों के आने से होटल, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प, दुकानदारों और स्थानीय उद्यमियों को रोजगार मिलता है। बस्तर को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने से हजारों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार निवेश, सुशासन और तकनीक आधारित विकास को तेजी से आगे बढ़ा रही है। राज्य में 435 सुधार लागू किए गए हैं और सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत बनाकर निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दो आधुनिक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और डिजिटल तकनीक के जरिए विकास का नया मॉडल तैयार किया जा रहा है। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपये की लागत से एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। इसके साथ ही 341 पीएमस्कूल, 5,857 स्मार्ट क्लासरूम और 16 स्थानीय भाषाओं में द्विभाषी पुस्तकों के माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि एग्रीस्टैक योजना के तहत 33 लाख से अधिक किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया है। डिजिटल द्वार प्लेटफॉर्म और अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सरल बनाया गया है। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार ने एआई मिशन, पर्यटन मिशन, खेल मिशन, अधोसंरचना मिशन और स्टार्टअप-निपुण मिशन शुरू किए हैं। इन मिशनों से युवाओं को रोजगार, तकनीक और उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे तथा छत्तीसगढ़ को नवाचार और निवेश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के तहत छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और निर्यात को नई गति मिली है। खेल सामग्री, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायो-एथेनॉल, गारमेंट और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन इंडस्ट्रीज को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना से राज्य के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक 761.76 करोड़ रुपये का निर्यात … Read more

अवैध विज्ञापनों पर सख्ती, दुर्ग निगम ने जुर्माना वसूली के लिए भेजे नोटिस

दुर्ग. आयुक्त सुमित अग्रवाल के निर्देश पर बाजार । विभाग द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर बिजली के खंभों, पेड़ों तथा सार्वजनिक संपत्तियों पर बिना अनुमति होर्डिंग एवं प्रचार सामग्री लगाकर विज्ञापन किए जाने के मामले सामने आए। निरीक्षण में पाया गया कि विभिन्न क्षेत्रों में बिजली के खंभों एवं पोलों पर डॉ. सुशांत कुमार ( मस्तिष्क एवं नस रोग विशेषज्ञ) तथा डॉ. प्रशांत कुमार (मस्तिष्क एवं नस रोग विशेषज्ञ) के होर्डिंग बोर्ड लगाकर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इसके अलावा शहर के उद्यानों की दीवारों पर भी प्रचार सामग्री चस्पा कर सार्वजनिक संपत्तियों का उपयोग विज्ञापन के लिए किया जा रहा था। जांच के दौरान पेड़ों पर विद्यापीठ, भिलाई द्वारा एडमिशन ओपन संबंधी होर्डिंग तथा बिजली के खंभों पर वेदांतु के नीट एवं आईआईटी जेईई कोचिंग संबंधी विज्ञापन भी लगाए पाए गए। निगम अधिकारियों ने इसे नगर निगम के नियमों का उल्लंघन मानते हुए संबंधित संस्थानों एवं व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। मौका निरीक्षण के उपरांत बाजार विभाग द्वारा अवैध रूप से होर्डिंग एवं प्रचार सामग्री लगाने वाले पांच संबंधित व्यक्तियों / संस्थानों को पचास हजार रुपये का जुर्माना राशि हेतु नोटिस जारी किया गया है।

नारायणपुर मॉडल बना किसानों के लिए मिसाल, खेतों में आई फलदार क्रांति

नारायणपुर का मॉडल बना मिसाल, किसानों के खेतों में फलदार क्रांति बासीन ग्राम में मनरेगा का असर: 99% पौधे जीवित, किसानों के लिए नई उम्मीद रायपुर,  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत नारायणपुर जिले के ओरछा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंदला के आश्रित ग्राम बासीन में किसानों की आय बढ़ाने और हरित विकास को बढ़ावा देने की एक उल्लेखनीय पहल सामने आई है। यहां किसानों के खेतों में लगाए गए फलदार वृक्षों में लगभग 99 प्रतिशत पौधे जीवित एवं स्वस्थ पाए गए हैं, जो योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सफल उदाहरण बनकर उभरा है। किसानों के दीर्घकालिक लाभ, पर्यावरण संरक्षण के लिए लगाए फलदार वृक्ष         मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत नर्सरी में उद्यान विभाग द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफ्टेड आम के पौधे तैयार किए गए और वित्तीय वर्ष 2025-26 में चयनित किसानों के खेतों में उनका रोपण कराया गया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ उपलब्ध कराना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार वृक्षों का विस्तार करना है। पौधों के संरक्षण-संवर्धन के लिए रखरखाव व्यवस्था की गई सुनिश्चित        योजना के तहत केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक वर्ष तक रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। साथ ही उद्यान विभाग द्वारा किसानों को सामूहिक फेंसिंग (बाड़बंदी) का लाभ दिया गया, जिससे पौधों को नुकसान से बचाया जा सका। किसानों ने भी सिंचाई और देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाई।  किसानों की भागीदारी, विभागीय समन्वय से हुई 99 प्रतिशत जीवितता दर        हाल ही में किए गए क्षेत्रीय निरीक्षण में लगाए गए पौधों की 99 प्रतिशत जीवितता दर दर्ज की गई, जो किसानों की भागीदारी, विभागीय समन्वय और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का परिणाम माना जा रहा है। इस पहल से आने वाले वर्षों में किसानों को आम उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, वहीं क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। ग्राम बासीन का यह मॉडल अब अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।         “रोजगार के साथ हरियाली और आय वृद्धि” की अवधारणा को साकार करती यह पहल ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है।

उज्ज्वला गैस वितरण में अनियमितता का खुलासा, खैरागढ़ की गैस एजेंसी पर FIR

खैरागढ़. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के हितग्राहियों को गैस वितरण में कथित अनियमितताओं के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बाजार आतरिया क्षेत्र स्थित साल्हेकला इंडियन ग्रामीण वितरक के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। साथ ही एजेंसी के विरुद्ध आगे की कार्रवाई के लिए राज्य स्तरीय समन्वयक, तेल उद्योग को भी पत्र भेजा गया है। मामला उस समय सामने आया जब क्षेत्र के अनेक ग्रामीणों ने शिकायत की कि गैस एजेंसी के कर्मचारी उपभोक्ताओं के मोबाइल पर आए ओटीपी की जानकारी लेकर सिस्टम में सिलेंडर कई की डिलीवरी दर्ज कर देते हैं जबकि मामलों में सिलेंडर वास्तविक रूप से उपभोक्ताओं तक पहुंचता ही नहीं है। इसके बावजूद रिकॉर्ड में वितरण दर्शाया जाता है और सब्सिडी की प्रक्रिया पूर्ण भी पूरी हो जाती है। लगातार मिल रही शिकायतों और मीडिया में मामले के उजागर होने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर जांच कराई गई। जांच में एजेंसी द्वारा द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) प्रदाय एवं वितरण विनियमन आदेश, 2000 के प्रावधानों के उल्लंघन की पुष्टि हुई। इसके आधार पर प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि रिकॉर्ड में डिलीवर दिखाए गए कई सिलेंडर वास्तविक हितग्राहियों तक नहीं पहुंचे। इससे वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। शिकायतों में घरेलू गैस के संभावित व्यावसायिक उपयोग और कालाबाजारी की आशंका भी जताई गई है। बता दे कि साल्हेकला एजेंसी से खैरागढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में उपभोक्ता जुड़े हुए हैं ऐसे में मामले का प्रभाव व्यापक माना जा रहा है। प्रशासन अब यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि कथित अनियमितताएं कब से चल रही थीं और कितने उपभोक्ता प्रभावित हुए। प्रशासन की इस कार्रवाई से स्पष्ट संकेत मिला है कि उज्ज्वला योजना के हितग्राहियों द्वारा की गई शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। अब लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है और प्रभावित उपभोक्ताओं को किस प्रकार राहत प्रदान की जाती है।

शासकीय भूमि पर अवैध रिसॉर्ट निर्माण का मामला, शिकायत के बाद प्रशासन का बड़ा एक्शन

धमतरी. धमतरी जिले के ग्राम बरारी में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर रिसॉर्ट का निर्माण करने का मामला सामने आया है. शिकायत के बाद कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य रुकवा दिया है. दरअसल, ग्राम बरारी में करीब 70 डिसमिल शासकीय भूमि पर लगे पेड़ों की कटाई कर रिसॉर्ट निर्माण की तैयारी की जा रही थी. शिकायत मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर के निर्देश पर तत्काल काम रोक दिया गया. आरोपों के घेरे में आए बरारी निवासी खूबलाल ध्रुव का कहना है कि वह पिछले करीब 40 वर्षों से इस भूमि पर काबिज है, और डुबान प्रभावित होने के कारण यहां निवास कर रहा है. उसका कहना है कि कुछ लोगों की शिकायत के चलते यह मामला सामने आया है. इसके साथ ही उसने कहा कि प्रशासन जो भी वैधानिक कार्रवाई करेगा, वह स्वीकार्य होगा. हालांकि, इस पूरे मामले में सवाल यह उठ रहा है कि यदि जमीन शासकीय है तो उस पर निर्माण कार्य किस आधार पर किया जा रहा था. यही नहीं पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं. फिलहाल, निर्माण कार्य रोक दिया गया है, और प्रशासन जांच में जुटा हुआ है.

245 पीड़ितों को नहीं मिला पूरा न्याय, 32 लाख लौटाकर भी गिरफ्त से दूर पोस्टमास्टर

डोंगरगढ़. छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित जटकन्हार पोस्ट ऑफिस में सामने आए कथित वित्तीय घोटाले का मामला महीनों बाद भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। सैकड़ों खाताधारकों की जमा पूंजी फंसने के बाद दर्ज हुई 245 शिकायतों में से बड़ी संख्या में मामले अब भी लंबित हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार, अब तक केवल 32 लाख रुपये के सेटलमेंट को मंजूरी मिली है, जिनमें से भी लगभग 25 लाख रुपये ही प्रभावित खाताधारकों को लौटाए जा सके हैं। फरवरी 2026 में सामने आए इस मामले ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया था। प्रदर्शन के बाद आयोजित हुआ था शिविर आरोप है कि जटकन्हार पोस्ट ऑफिस में पदस्थ तत्कालीन पोस्टमास्टर आशीष मांडवी ने खाताधारकों की जमा राशि में अनियमितता करते हुए लाखों रुपये का गबन किया। मामला उजागर होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने डोंगरगढ़ उप डाकघर का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद डाक विभाग को विशेष शिकायत शिविर आयोजित करना पड़ा। विभागीय प्रक्रिया के कारण 7 लाख रुपए लंबित डाक विभाग के विशेष शिविर में कुल 245 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जांच के बाद विभाग ने 32 लाख रुपये के सेटलमेंट को स्वीकृति दी। राजनांदगांव डाक संभाग के हेड पोस्टमास्टर एम.के. शर्मा के अनुसार स्वीकृत राशि में से लगभग 25 लाख रुपये खाताधारकों को वापस किए जा चुके हैं, जबकि शेष 7 लाख रुपये विभागीय प्रक्रिया के कारण लंबित हैं और जल्द जारी किए जाएंगे। प्रभावित खाताधारकों में नाराजगी हालांकि स्थानीय सूत्रों का दावा है कि 245 शिकायतों में से अब तक लगभग 100 मामलों का ही निराकरण हो पाया है। बड़ी संख्या में शिकायतें अभी भी दस्तावेजों के सत्यापन, रिकॉर्ड की कमी और जांच लंबित होने के कारण अटकी हुई हैं। इससे प्रभावित खाताधारकों में नाराजगी बनी हुई है। आरोपी अब भी फरार, पुलिस ने तेज की तलाश मामले का मुख्य आरोपी आशीष मांडवी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस विभाग ने 5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। एसडीओपी केसरी नंदन नायक ने बताया कि आरोपी की लगातार तलाश की जा रही है। उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई है और तकनीकी माध्यमों से भी उसकी लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है। दोषी पाए जाने पर होगी कार्रवाई- SDOP उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट दर्ज कराने में डाक विभाग की ओर से हुई देरी के कारण आरोपी को फरार होने का मौका मिल गया, लेकिन अब पुलिस पूरी गंभीरता से जांच कर रही है। एसडीओपी नायक ने कहा, “मामले की जांच सभी पहलुओं से की जा रही है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई चल रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।” 245 शिकायतें, सिर्फ 32 लाख का सेटलमेंट पर्याप्त कैसे फिलहाल जटकन्हार पोस्ट ऑफिस फ्रॉड में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 245 शिकायतों के मुकाबले केवल 32 लाख रुपये का सेटलमेंट आखिर पर्याप्त कैसे माना जा सकता है। जब तक सभी शिकायतों का निष्पक्ष निराकरण नहीं होता और मुख्य आरोपी सलाखों के पीछे नहीं पहुंचता, तब तक प्रभावित खाताधारकों की लड़ाई जारी रहने वाली है।

सुशासन तिहार में मिली चेतावनी पड़ी भारी, एमसीबी DEO मिरे की हुई छुट्टी

मनेंद्रगढ़. छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्था में कसावट लाते हुए राज्य में बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले किए हैं। राज्य शासन द्वारा ‘महानदी भवन’ से जारी इस नवीन आदेश के तहत कई जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और प्राचार्यों के प्रभार में भारी फेरबदल किया गया है। इस पूरी सूची में सबसे बड़ा और संवेदनशील एक्शन मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में देखने को मिला है, जहाँ सुशासन की कसौटी पर खरे न उतरने वाले अधिकारियों पर कड़ा रुख अपनाया गया है। रविशंकर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में 16 जून से शुरू होगा एडमिशन… खाद-बीज संकट को लेकर कांग्रेस करेगी प्रदर्शन… राजधानी के कई इलाकों में आज शाम जलापूर्ति रहेगी बाधित सुशासन तिहार की फटकार और खराब रिज़ल्ट मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के जिला शिक्षा अधिकारी आरपी मिरे का तबादला कर दिया गया है। गौरतलब है कि हाल ही में घोषित हुए कक्षा 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षा परिणामों में एमसीबी (MCB) जिला पूरे प्रदेश में सबसे आखिरी पायदान पर रहा था। शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर शासन स्तर पर भारी असंतोष था। ​इसके अलावा, ‘सुशासन तिहार’ के तहत जब मुख्यमंत्री स्वयं एमसीबी जिले के चिरमिरी में मैराथन समीक्षा बैठक ले रहे थे, तब विभागीय लापरवाही और लचर कार्यप्रणाली को लेकर उन्होंने तत्कालीन डीईओ आरपी मिरे को जमकर फटकार भी लगाई थी। मुख्यमंत्री की इसी सख्त नाराजगी और खराब परफॉर्मेंस का सीधा असर इस तबादला आदेश में देखने को मिला है, जहाँ मिरे को हटाकर लोक शिक्षण संचालनालय के विकल्प पर रखा गया है। रविकांत यादव बने प्रभारी डीईओ जिले में पटरी से उतरी स्कूली शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और सुशासन को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए शासन ने अब रविकांत यादव (विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी) पर भरोसा जताया है। रविकांत यादव को तत्काल प्रभाव से मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का नया प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनके सामने अब जिले के शैक्षणिक स्तर को सुधारने और आगामी बोर्ड परीक्षाओं में जिले को शीर्ष पर लाने की एक बेहद चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

राज्य कांग्रेस को जल्द मिल सकता है नया अध्यक्ष, दावेदारों के नामों से बढ़ी सियासी हलचल

रायपुर  छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई हैं। दरअसल, वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने वाला है। ऐसे में पार्टी के भीतर नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति होनी तय है। कई बड़े नामों पर चर्चा हो रही हैं। इस बार किसे युवा चेहरे को मौका मिलने की आशंका जताई गई है। माना जा रहा है कि संगठन को नई ऊर्जा देने के लिए नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में यह कदम उठाया जा सकता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं। जिसमें पूर्व मंत्री और खरसिया विधायक उमेश पटेल, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समेत कई अन्य नाम चर्चा में है। खास बात यह है कि उमेश पटेल को संगठनात्मक अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलित चेहरा माना जाता है। जबकि विधायक देवेंद्र यादव को एक ऊर्जावान और जनाधार वाले युवा नेता के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा टीएस सिंहदेव भी इस रेस में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वह सरगुजा, कोरबा और जांजगीर-चांपा जैसे क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहकर अपना राजनीतिक आधार मजबूत कर रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है। वहीं, मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज की दावेदारी को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा है। आदिवासी समाज में उनकी मजबूत पकड़ और संगठन में सक्रिय भूमिका उनके पक्ष में मानी जा रही है। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। पार्टी हाईकमान युवा और अनुभवी चेहरों के बीच संतुलन बनाते हुए जल्द ही बड़ा फैसला ले सकता है।