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पंजाब में होटल-रेस्टोरेंट्स में खाने की कीमतों में 20% तक बढ़ोतरी, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹1380 बढ़ी

लुधियाना  अगर आप होटल-रेस्टोरेंट में खाने के शौकीन हैं तो अगले वीकेंड से आपको खाने के लिए जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के बाद होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने खाने के रेट बढ़ाने का फैसला कर लिया। पंजाब होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरवीर सिंह की मानें तो गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से कुकिंग कॉस्ट में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गई। होटल रेस्टोरेंट्स मालिकों के लिए पुरानी कीमत पर खाना बनाना अब मुश्किल है। एसोसिएशन ने फैसला किया कि अगर सरकार ने गैस की कीमतों की कई गई बढ़ोत्तरी वापस नहीं ली तो अगले वीकेंड से खाने की कीमत 15 से 20 प्रतिशत बढ़ाई जाएगी। उनका तर्क है कि गैस की कीमतें चार महीने में 1380 रुपए बढ़ गई। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन का एक शिष्टमंडल सोमवार को केंद्र सरकार के साथ बैठक कर रही है ताकि कमर्शियल गैस की कीमतों में हो रही बढ़ोत्तरी पर लगाम लगाया जा सके। अमरवीर ने बताया कि सोमवार को होने वाली बैठक के बाद खाने के रेट बढ़ाए जाएंगे। कुकिंग कॉस्ट में 20% का उछाल: होटल मालिकों ने खड़े किए हाथ पंजाब होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरवीर सिंह का कहना है कि गैस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने होटल और रेस्टोरेंट के किचन का बजट पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिर्फ गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई इस वृद्धि के कारण खाने की कुकिंग कॉस्ट 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। अमरवीर सिंह ने कहा, "हम पिछले कई महीनों से बढ़ती लागत को खुद सह रहे थे, लेकिन ₹1000 की एकमुश्त बढ़ोतरी ने हमारी कमर तोड़ दी है। अब हमारे पास खाने के रेट बढ़ाने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा है। यदि हम ऐसा नहीं करते, तो पंजाब का पूरा होटल उद्योग घाटे में डूब जाएगा।" जनवरी से मई तक तेजी से बढ़ी गैस की कीमतें इस साल की शुरुआत 1 जनवरी 2026 को हुई, जब नए साल के पहले ही दिन कीमतों में ₹111 की बढ़ोतरी की गई, जिससे सिलेंडर ₹1,691.50 का हो गया। इसके ठीक एक महीने बाद 1 फरवरी 2026 को फिर से ₹49 की मामूली वृद्धि हुई और कीमत ₹1,740.50 तक पहुंच गई। मार्च का महीना व्यापारियों के लिए दोहरी मार लेकर आया। पहले 1 मार्च को कीमतों में ₹30 का इजाफा हुआ और फिर ठीक 6 दिन बाद 7 मार्च 2026 को युद्ध और ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस का हवाला देते हुए कीमतों में ₹115 की बड़ी छलांग लगाई गई, जिससे सिलेंडर ₹1,883 के करीब पहुंच गया। महंगाई का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। 1 अप्रैल 2026 को कीमतों में फिर से ₹195.50 की बड़ी बढ़ोतरी हुई और सिलेंडर ₹2,078.50 के स्तर को पार कर गया। लेकिन सबसे बड़ा 'महा-झटका' 1 मई 2026 को लगा, जब अब तक की सबसे रिकॉर्ड वृद्धि करते हुए केंद्र सरकार ने एक ही झटके में ₹993 बढ़ा दिए। अब कमर्शियल सिलेंडर की नई कीमत ₹3,071.50 हो गई है। यानी मात्र 120 दिनों के भीतर एक सिलेंडर पर करीब ₹1,380 का अतिरिक्त बोझ बढ़ चुका है। अगले वीकेंड से लागू होंगे नए रेट कार्ड एसोसिएशन ने अल्टीमेटम दिया है कि वे सोमवार को केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ इस मसले पर बैठक करेंगे। बैठक में सरकार के सामने कीमतों को घटाने या कमर्शियल गैस पर सब्सिडी देने की मांग रखी जाएगी। अमरवीर सिंह ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने इस मामले में कोई राहत नहीं दी, तो अगले वीकेंड तक पूरे पंजाब के होटलों, रेस्टोरेंट्स, ढाबों और फास्ट फूड जॉइंट्स में खाने के दाम 15 से 20% तक बढ़ा दिए जाएंगे। पंजाब के 8000 से ज्यादा रेस्टोरेंट्स पर असर अमरवीर ने कहा कि पंजाब में छोटे ढाबों से लेकर फाइव स्टार होटलों तक करीब 8000 से ज्यादा इकाइयां काम कर रही हैं। रेट बढ़ने का असर न केवल आलीशान होटलों पर पड़ेगा, बल्कि उन आम लोगों पर भी पड़ेगा जो काम के सिलसिले में या छोटे फंक्शन्स के लिए ढाबों और मिड-रेंज रेस्टोरेंट्स पर निर्भर हैं। मिडिल क्लास परिवारों के लिए अब बाहर खाना एक लग्जरी बनता जा रहा है।

सही दवा, शुद्ध आहार अभियान में बड़ी कार्रवाई: एक्सपायरी खाद्य सामग्री नष्ट, दवा दुकानों की सघन जांच

सही दवा, शुद्ध आहार अभियान में बड़ी कार्रवाई: एक्सपायरी खाद्य सामग्री नष्ट, दवा दुकानों की सघन जांच मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में आमजन को सुरक्षित खाद्य सामग्री और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “सही दवा, शुद्ध आहार यही छत्तीसगढ़ का आधार” अभियान के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन में मनेंद्रगढ़, झगराखांड और खोंगापानी क्षेत्र में सघन निरीक्षण अभियान चलाया गया। निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा टीम ने विभिन्न दुकानों की जांच कर स्वच्छता, गुणवत्ता और लाइसेंस से जुड़े मानकों की पड़ताल की। मनेंद्रगढ़ स्थित मोहनलाल साहू की जलजीरा दुकान में एक्सपायरी विनेगर सिरप मिलने पर उसे मौके पर ही नष्ट कराया गया और संचालक को सख्त चेतावनी दी गई। वहीं प्रांशु गुप्ता की चाट दुकान में प्रतिबंधित खाद्य रंग के उपयोग पर करीब 5 किलो चाट नष्ट कराई गई। अभियान के तहत गन्ना रस और आइसक्रीम विक्रेताओं पर भी विशेष निगरानी रखी गई। कई दुकानों में अस्वच्छ बर्फ और गंदे आइस बॉक्स पाए जाने पर उन्हें हटवाकर साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए गए। डेयरी प्रतिष्ठानों की जांच में जया डेयरी और सिंह डेयरी से पनीर, दही और दूध के नमूने परीक्षण के लिए लिए गए, जबकि कृष्णा डेयरी द्वारा पंजीयन प्रस्तुत नहीं करने पर 3 दिनों के भीतर लाइसेंस जमा करने के निर्देश दिए गए। वहीं औषधि शाखा की टीम ने 14 दवा दुकानों का निरीक्षण किया, जिसमें संदेह के आधार पर 2 दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए। 3 प्रतिष्ठानों में नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह 15 दिवसीय विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य जहां नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करना है, वहीं आम जनता को सुरक्षित भोजन और गुणवत्तापूर्ण दवाओं के प्रति जागरूक बनाना भी है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे खाद्य सामग्री और दवाएं खरीदते समय उनकी गुणवत्ता, वैधता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

रायपुर : खाद्य एवं औषधि प्रशासन टीम ने की गुणवत्ता जांच,स्वच्छता में कमी पर दुकान को नोटिस

रायपुर  खाद्य सुरक्षा टीम ने भाटापारा एवं दामाखेड़ा में जांच अभियान चलाया। दामाखेड़ा में साहू होटल एवं स्वीट्स  में खाद्य पदार्थ ढंककर नही रखने व फ्रिज में गन्दगी पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम की धारा 55 के तहत नोटिस जारी किया गया। भाटापारा शहर के आयुष डेयरी व पटेल डेयरी दतरेंगी का औचक निरिक्षण किया।पटेल डेयरी से मलाई क्रीम का नमूना लेकर जाँच हेतु राज्य खाद्य परिक्षण प्रयोगशाला भेजा गया। पूर्व महीनो में जॉच हेतु लिए गये नमूनों में अविनाश पोहा इंडस्ट्रीज भाटापारा के पैक्ड पोहा व शीतल इंडस्ट्रीज भाटापारा के पैक्ड बेसन में पोषण संबंधी जानकारी अपूर्ण होने के कारण मिथ्याछाप घोषित किया गया है।खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के लेबलिंग व डिस्प्ले रेगुलेशन 2020 के तहत सभी पैक्ड खाद्य उत्पादों में पोषण सुचना संबंधी पूर्ण जानकारी देना अनिवार्य है।

इकोनॉमिस्ट की चेतावनी: ‘युद्ध 40 दिन से ज्यादा चला तो…’ खाद्य कीमतें 6 महीने के हाई पर पहुंच सकती हैं

 नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में युद्ध (Middle East War) का असर लगभग हर देश में देखने को मिला है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग के चलते होर्मुज बंद होने से पैदा हुए ग्लोबल तेल संकट (Oil Crisis) ने पाकिस्तान, बांग्लादेश से लेकर श्रीलंका समेत अन्य देशों की चिंता बढ़ा दी. संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) फूड प्राइस इंडेक्स के आकंड़े देखें, तो युद्ध के चलते दुनिया में खाने-पीने की चीजों के दाम छह महीने के हाई (Global Food Price Surge) पर पहुंच गए हैं।  आने वाले महीनों में बढ़ेगी टेंशन!  मार्च महीने में वैश्विक स्तर पर खाने-पीने की चीजों की कीमतें सितंबर 2025 के बाद से हाई लेवल पर पहुंच गईं. इससे आने वाले महीनों में किराने पर खर्च और उनके बिलों की स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा हुई हैं।  एफएओ के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी हुई है, जो ग्लोबल फूड मार्केट में महंगाई के बढ़ते दबाव का संकेत है     . जरूरी चीजों के मूल्य का आकलन करने वाला मानक FAO Food Price Index बीते मार्च महीने में औसतन 128.5 अंक रहा, जो फरवरी से 2.4% और वार्षिक आधार पर 1% का इजाफा दर्शाता है. इसके पीछे बड़े कारण की बात करें, तो खासतौर पर वेस्ट एशिया में जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण बढ़ती ऊर्जा कीमतें, उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित होना है। FAO के चीफ इकोनॉमिस्ट मैक्सिमो टोरेरो का कहना है कि मिडिल ईस्ट जंग शुरू होने के बाद से कीमतों में जो वृद्धि हुई है, उसका सबसे बड़ा कारण तेल की ऊंची कीमतें हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष का फूड सिस्टम पर गहरा और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।  खाद्य मंहगाई (Food Inflation) के पीछे के कारणों की बात करें,तो कच्चे तेल की हाई कीमतों से ट्रांसपोर्टेशन और प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ती है. इसके साथ ही बायोफ्यूल की डिमांड में भी इजाफा देखने को मिलता है और इससे वनस्पति तेल जैसी वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ जाती हैं. फर्टिलाइजर्स पर असर एक बड़ी चिंता का विषय है, जो किसानों के बुवाई प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।  गेहूं और मक्का की कीमतों में इजाफा  वैश्विक स्तर पर फूड प्राइस में बढ़ोतरी के बारे में रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रमुख रूप से खाद की बढ़ती लागत के चलते गेहूं की कीमतों में ग्लोबली 4.3% की वृद्धि हुई, तो एथेनॉल की डिमांड मजबूत होने से मक्का का भाव बढ़ा है।  इसके अलावा वनस्पति तेल की कीमतों में सबसे तेज इजाफा देखने को मिला है, जो मासिक आधार पर 5.1% है. इसके अलावा सालाना आधार पर देखें, तो 13.2% की बढ़ोतरी देखने को मिली है. ये क्रूड प्राइस और बायोफ्यूल की डिमांड बढ़ने के चलते रही. मीट की कीमतों में 1% की वृद्धि हुई. डेयरी प्रोडक्ट्स की कीमतों में 1.2%, जबकि चीनी की कीमतों में 7.2% का उछाल आया।  इकोनॉमिस्ट ने दी चेतावनी एफएओ ने खाद्य सप्लाई के लिए संभावित जोखिमों की चेतावनी भी दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक गेहूं उत्पादन 820 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1.7% कम है. इसके साथ ही इकोनॉमिस्ट टोरेरो ने वार्निंग देते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में मौजूदा संघर्ष 40 दिनों से अधिक समय तक चलता है, तो इसका वास्तविक प्रभाव बाद में देखने को मिल सकता है।  उन्होंने कहा कि किसान खाद का इस्तेमाल कम कर सकते हैं, बुवाई कम कर सकते हैं या कम लागत वाली फसलों की ओर रुख कर सकते हैं. ये ऐसे फैसले हैं, जिनसे आने वाले महीनों में पैदावार कम हो सकती है और आपूर्ति सीमित हो सकती है. टोरेरो की मानें, तो फिलहाल फूड प्राइस में जो तेजी देखने को मिली है, वो डराने वाली नहीं है, लेकिन इन क्षेत्रों में लगातार दबाव वैश्विक स्तर पर खाद्य लागत में बड़ी वृद्धि का कारण बन सकता है।   

नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री का सेवन, लोगों के स्वास्थ्य पर डाल रहा विपरीत प्रभाव

मिलावटखोरों का सरदार जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरके सोनी  नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री के उपयोग से लोगों के पूरे स्वास्थ्य पर पड रहा विपरीत प्रभाव  गांधी के फेर में लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ जिम्मेदारों ने मूंदी आंख सबसे सरोकार खबरें धारदार। ब्योहारी ब्यूरो चीफ वेदप्रकाश बेदांति ब्योहारी नगरीय क्षेत्र में मिलावट खोरों की चांदी, यहां कभी नहीं होती जांच और कार्यवाही। मिलावटखोरों को संरक्षण दे रहा खाद्य सुरक्षा विभाग का तथाकथित अधिकारी आर के सोनी, सूत्रों की मानें तो जिले में बैठकर यहां खाद्य सुरक्षा विभाग का प्रभार देख रहे साहब के द्वारा हर महीने यहां के होटल रेस्टोरेंट डेयरी नमकीन फैक्ट्री किराना दुकानों व पानी सप्लाई फैक्ट्री बर्फ आइसक्रीम फैक्ट्री व अन्य एजेंसियों से मासिक वसूली की जाती है। जिससे खाद्य सुरक्षा अधिकारी यहां कभी किसी पर कोई कार्यवाही नहीं करते और न कभी किसी का फोन उठाते हैं।  ब्योहारी-नगरीय क्षेत्र में दिनांक 27/03/2026 को विनायक पैलेस में आयोजित विवाह समारोह  बब्बू खान के लड़की की शादी में राजू गुप्ता की दुकान से पताजंली कम्पनी का सरसों तेल खरीदा गया जिसे सब्जी बनाने के लिए जब कड़ाही में डालकर गर्म किया तभी वह पूरा तेल हरे रंग में बदल गया जैसे डाबर आंवला का तेल हो। आनन फानन आयोजक दूसरी कम्पनी का तेल लाकर दावत का खाना बनाया गया।यदि उस तेल का उपयोग कर खाना बनाया जाता तो निसंदेह अनेक लोग  फ्रूडप्वाजिनिंग के शिकार हो सकते थे। गनीमत रही कि खाना बनाने वाले मिस्त्री ने तत्काल तेल के कलर बदलने से उसकी गुणवत्ता परख तेल ही बदलवा दिया।पतांजली कम्पनी का सरसों तेल जिसे गर्म करने पर उसका पूरा रंग ही बदल कर गाढ़ा हरे रंग का हो  जाता है। जिससे यह साफ है कि इसमें किसी तेज कैमिकल का उपयोग किया जाता है। जब इसे उपयोग के लिए कड़ाही में डालकर गर्म किया जाता है तो पूरा तेल ही हरे कलर में बदल जाता है। जैसे डाबर आंवला का तेल हो। पतांजली का कमाल सरसों तेल गरम करते ही बन गया डाबर आंवला का तेल  खाद्य पदार्थों में इतनी मिलावट खोरी से लोगों की जान जोखिम में बनी रहती है। मिलावटखोरों को लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने की यहां खुली छूट खाद्य सुरक्षा अधिकारी सोनी द्वारा दी गई है। जिसके बदले साहब हर महीने अपनी जेब खूब गर्म करते हैं।  यहां नकली मावा,दूध,पनीर, सहित ज्यादातर खाद्य पदार्थ नकली और मिलावटी रहता है।खाद्य सुरक्षा कानून लागू है। लेकिन जिले में बैठे ज़िला खाद्य अधिकारी आरके सोनी के बारे में यहां चर्चा है कि उनका एजेंट यहां की लगभग सभी होटल डेयरी रेस्टोरेंट एजेंसी कारखाने और अन्य खाद्य पदार्थ सप्लाई बाली जगहों से हर महीने एक निश्चित तय राशि की बसूली करता है।जिससे यहां का ज्यादातर बाजार नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री से पटा हुआ है। कार्यवाही से बेखबर व्यापारी लोगों के जीवन से खिलवाड़ करते हुए ब्रांडेड कम्पनी का लेबल लगा मनमानी दाम पर बाजार में खुलेआम नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री बेंच रहे हैं। जिससे जिले में बैठे खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरके सोनी पर लोग तमाम तरह के गम्भीर आरोप लगा रहे हैं। जबसे साहब ने जिले का प्रभार संभाला है तब से केवल साल में एकाध बार अपने स्थानीय एजेंटों के साथ नगरीय क्षेत्र के सभी व्यापारी बंधुओं से मिलकर मिलावटखोरी तेजकर जेब का बजन बढ़ाने की मिन्नत करने यहां जरुर आते हैं। जांच और कार्यवाही के नाम यहां हो रही केवल बसूली! ऐसा यहां के कुछ लोगों का कहना है। दिखाबा के लिए मात्र कागजी कार्यवाही कार्यालय में बैठकर ही साहब पूरी करते हैं। खाद्य सुरक्षा के नाम पर विभाग में बैठा अमला केवल बसूली ही करता है। नाम न छापने की शर्त पर एक रेस्टोरेंट के संचालक ने बताया कि जिलाखाद्य विभाग केवल ब्योहारी में हर महीने लाखों रुपए की बसूली करता है। लोगों का कहना है कि शहडोल जिले में जबसे जिला खाद्य विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरके. सोनी पदस्थ हुए हैं। तबसे स्थानीय व्यापारियों पर इनकी बसूली का दबाव कुछ अधिक ही बढ़ गया है।  यहां के कई व्यापारी इनकी इस अबैध बसूली से बहुत परेशान हैं। और सरकार से अंकुश लगाने की मांग कर रहे हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी शहडोल आरके सोनी कथन -इस सम्बन्ध में जब इनके मोबाइल पर सम्पर्क किया गया लेकिन फोन नहीं उठा।

मध्यप्रदेश में 2 हजार से ज्यादा सैंपल फेल, 60% डेयरी प्रोडक्ट मिलावटी

भोपाल  मध्य प्रदेश में दूध, मावा, पनीर, घी, मिर्च, धनिया पाउडर समेत कई चीजों में मिलावट हो रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में यह खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि करीब 2000 से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए है। करीब 30 जिलों में दो हजार सैंपल फेल हुए। इनमें ग्वालियर नंबर वन पर है। आइए जानते है कहां कौन से सैंपल फेल हुए है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। मोबाइल वैन के जरिए लिए गए सैंपल की तीन साल की रिपोर्ट सामने आई है। मोबाइल वैन के संचालन से लेकर अब तक करीब एक लाख सैंपल लेने का दावा किया गया है। जिसमें रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट ही सबसे ज्यादा मिलावटी पाए गए है। मिठाइयों के साथ मसाले और तेल भी सुरक्षित नहीं है। जलेबी, लड्डू, बर्फी गजक और नमकीन में मिलावट मिली। लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के कई सैंपल फेल हो गए। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की हाल में एक रिपोर्ट सामने आई। जिसमें 2000 से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए। सबसे ज्यादा मामले करीब 420 ग्वालियर से सामने आए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट ही सबसे ज्यादा मिलावटी पाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिलावट केवल फूड पॉइजनिंग ही नहीं, बल्कि डायबिटीज, हार्ट डिजीज और हार्मोनल बीमारियों तक का कारण बन रही है। FDA की यह रिपोर्ट मोबाइल वैन के जरिए लिए गए सैंपल और उनकी टेस्ट रिजल्ट के आधार पर तैयार की गई है। जिसमें बीते तीन साल के आंकड़े शामिल हैं। यह पहली बार है जब मोबाइल वैन के संचालन से लेकर अब कर लिए गए एक लाख सैंपल की कंपाइल रिपोर्ट सामने आई है। ग्वालियर सबसे आगे, कई जिलों में फैला मिलावट का जाल राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ग्वालियर जिले में सबसे ज्यादा मिलावट के मामले सामने आए हैं, जहां करीब 420 सैंपल फेल पाए गए। इसके बाद गुना (110), उज्जैन (95), भिंड (90) और बुरहानपुर (75) जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके अलावा शाजापुर, इंदौर, धार, रीवा, सागर, सीहोर और नरसिंहपुर सहित 30 से अधिक जिलों में मिलावट का जाल फैला हुआ है। जांच में दूध, पनीर, मावा, मिठाइयों और मसालों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। मिलावट से शरीर को कैसे हो रहा नुकसान गांधी मेडिकल कॉलेज के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा बताते हैं कि मिलावटी भोजन में मौजूद एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स (जैसे माइक्रोप्लास्टिक, हेवी मेटल) शरीर में जाकर हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करते हैं। इससे गट हेल्थ खराब होती है। बॉडी में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया नष्ट होते हैं। शरीर में पोषण की कमी होती है। इसके साथ ही मोटापा, डायबिटीज और पीसीओडी जैसी बीमारियां बढ़ती हैं। मसाले और तेल भी नहीं सुरक्षित सिर्फ डेयरी ही नहीं, मसाले और खाद्य तेल भी मिलावट से अछूते नहीं हैं। लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के कई सैंपल फेल पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इनका लगातार सेवन लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है और लंबे समय में कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकता है। जलेबी, लड्डू, बर्फी, गजक और नमकीन जैसे खाद्य पदार्थों में भी बड़े पैमाने पर मिलावट सामने आई है। त्योहारों के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है। दमोह, भिंड और मुरैना जैसे जिलों में मिठाइयों के सैंपल बड़ी संख्या में फेल पाए गए हैं। लगातार चल रही मॉनिटरिंग FDA आयुक्त दिनेश श्रीवास्तव ने कहा कि फेल सैंपलों के आधार पर संबंधित दुकानदारों और निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की लगातार की जा रही है। निगरानी सख्त की गई है। मिलावट का यह नेटवर्क खत्म करने के लिए नई योजना के तहत प्रदेश में काम किया जा रहा है। मोबाइल वैन प्रदेशभर में घूमकर सैंपल एकत्र कर उनकी टेस्टिंग कर रही हैं। मिलावट में ग्वालियर नंबर वन     ग्वालियर जिला मिलावट में पहले स्थान पर है। यहां दो हजार में से लगभग 420 सैंपल फेल हुए है।     गुना – 110     उज्जैन – 95     भिंड – 90,     बुरहानपुर – 75,     जबलपुर – 75     शाजापुर – 70     खरगोन – 65     सीहोर – 55     धार – 40     राजगढ़ – 35     नीमच – 30     नरसिंहपुर – 28     रीवा – 25     दमोह – 20     हरदा – 20     अलीराजपुर – 20     विदिशा – 18     झाबुआ – 18     सागर – 15     मंडला – 15     दतिया – 15     शिवपुरी – 12     छिंदवाड़ा – 12     बालाघाट – 10     डिंडोरी – 08     पन्ना – 08     कटनी – 06     शहडोल – 06 कहां कौन से सैंपल फेल     ग्वालियर- दूध, दही, पनीर, घी, मिक्स्ड मिल्क, गजक, मावा बर्फी, मालाई बर्फी, चावल, आटा     इंदौर- लस्सी, मिल्क केक, मावा कतली, पनीर, इडली, सांभर     शाजापुर- दूध, घी, पनीर, मावा, बेसन, लाल मिर्च पाउडर, कुकिंग ऑयल     दमोह- जलेबी, बेसन लड्डू, आलू मटर, चाउमीन, घी, पनीर, दही     भिंड- मालाई बर्फी, मावा पेड़ा, सौंफ और काली मिर्च     मुरैना- मावा, घी, पनीर, बेसन लड्डू, बूंदी लड्डू     धार- मावा, पनीर, धनिया पाउडर, पताशे     सागर- मोतीचूर लड्डू में मिलावट     रीवा- तुअर दाल और मिठाई     सिवनी- गुजिया, सेव और पनीर     नरसिंहपुर- दूध में मिलावट     खंडवा- गुड़ चिक्की का सैंपल फेल     बैतूल- दही और काली मिर्च में मिलावट     सीहोर- खाने का तेल  

योगी सरकार का बड़ा कदम, यूपी के हर जिले का जायका अब पहुंचेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक

लखनऊ   उत्तर प्रदेश के पारंपरिक और प्रसिद्ध व्यंजन अब सिर्फ प्रदेश या देश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जल्द ही पूरी दुनिया उनकी खुशबू और स्वाद से रूबरू होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस माह ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) की तर्ज पर ‘एक जिला एक व्यंजन’ (ODODC) योजना का शुभारंभ करने जा रहे हैं। इस योजना के तहत प्रदेश के हर जिले के खास व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाई जाएगी और उनकी देश-विदेश में आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। 150 पारंपरिक व्यंजनों की सूची तैयार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग ने योजना के लिए प्रदेशभर से करीब 150 पारंपरिक व्यंजनों की सूची तैयार की है। प्रत्येक जिले से कम से कम एक प्रसिद्ध व्यंजन को शामिल किया गया है। चयनित व्यंजनों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, यूपी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। ODOP की सफलता के बाद ODODC पर दांव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 जनवरी 2018 को उत्तर प्रदेश दिवस के मौके पर एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना की शुरुआत की थी। निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में प्रदेश से 1.70 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जिसमें 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी एक जिला एक उत्पादों की रही। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए अब सरकार खाद्य उत्पादों पर फोकस कर रही है। विदेशी बाजार के लिए मिलेगा प्रमाणीकरण एक जिला एक व्यंजन (ODODC) योजना के तहत शामिल व्यंजनों को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से प्रमाणित कराया जाएगा, ताकि विदेशों में बिक्री के दौरान किसी तरह की दिक्कत न हो। इसके साथ ही सरकार व्यंजनों को GI टैग दिलाने में भी मदद करेगी। उल्लेखनीय है कि एक जिला एक व्यंजन योजना के तहत अब तक 77 उत्पादों को GI टैग मिल चुका है। पैकेजिंग, प्रमोशन और सस्ता ऋण सरकार कारोबारियों को भारतीय पैकेजिंग संस्थान के माध्यम से आधुनिक पैकिंग का प्रशिक्षण दिलाएगी। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगने वाले फूड फेयर और प्रदर्शनियों में इन उत्पादों के प्रचार-प्रसार में भी मदद करेगी। कारोबार को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों को 25 प्रतिशत सब्सिडी पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। दुनिया की जुबान पर चढ़ेगा यूपी का स्वाद यूनेस्को द्वारा हाल ही में लखनऊ को ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ का दर्जा दिया गया है। एक जिला एक व्यंजन योजना के बाद लखनऊ के व्यंजन वैश्विक पहचान हासिल करेंगे। सूची में लखनऊ की रेवड़ी, मक्खन मलाई और आम से बने उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा, वाराणसी की तिरंगा बर्फी, मलाई मिठाई, बलिया का सत्तू, आगरा का पेठा, मथुरा का माखन- मिस्री, बाराबंकी का चंद्रकला, फर्रुखाबाद का दालमोट, शाहजहांपुर की लौंग बर्फी, सिद्धार्थनगर का मखाना, गोरखपुर का लिट्टी-चोखा, कानपुर का लड्डू, मेरठ की रेवड़ी व गजक सहित प्रदेश के अन्य जिलों के पारंपरिक व्यंजनों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।  

डेंटल कॉलेज मेस में मिली गंदगी, चावल में इल्ली, मरे हुए मेंढक और एक्सपायरी फूड प्रोडक्ट का इस्तेमाल

राजनांदगाव. छत्तीसगढ़ के राजनांदगाव शहर के सुंदरा गांव स्थित छत्तीसगढ़ डेंटल कॉलेज में उस समय हड़कंप मच गया, जब छात्रों के भोजन में मरा हुआ मेंढक मिलने की शिकायत सामने आई. इस गंभीर लापरवाही ने कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले की सूचना मिलते ही खाद्य विभाग की टीम ने कॉलेज परिसर स्थित हॉस्टल की मेस का निरीक्षण किया. जांच के दौरान रसोई और भंडार कक्ष में गंदगी का अम्बार मिला. टीम को मौके से कई खाद्य पैकेट एक्सपायरी डेट के भी मिले, जिन्हें छात्रों को परोसे जाने की आशंका जताई जा रही है. निरीक्षण के समय कार्य प्रबंधन की अनुसूची अनुपस्थिति भी सामने आई, जिससे नाराजगी और बढ़ गई. टीम के अधिकारियों ने कहा कि इसकी लापरवाही बच्चों की सेहत और जीवन से सीधा खिलवाड़ है. खाद्य विभाग की टीम ने की जांच शिकायत मिलते ही खाद्य विभाग की टीम कॉलेज परिसर पहुंची और मेस का निरीक्षण किया. जांच के दौरान रसोई और भंडार कक्ष में गंदगी का आलम देखने को मिला. टीम ने मौके पर पनीर, दाल और अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए. इसके साथ ही कॉलेज प्रशासन को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है. मिली अनियमितताएं और एक्सपायरी सामान जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं. टीम को एक पैकेट एक्सपायरी सूजी मिला, जिसे लापरवाही माना गया. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन खामियों को नोटिस में दर्ज किया जाएगा और सुधार के लिए निर्देश दिए जाएंगे. फिलहाल, कॉलेज प्रबंधन भी यह पता लगाने में जुटा है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई? छात्रों में आक्रोश, प्रबंधन पर सवाल खाने में मेंढक मिलने की घटना के बाद छात्रों में नाराजगी है. वे कॉलेज प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं. छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है. कई छात्रों ने मेस की सफाई और भोजन की गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठाए थे. कारण बताओ नोटिस जारी छात्रों की शिकायत के बाद फूड एवं सेफ्टी विभाग ने मेस का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान मेस में कई एक्सपायरी खाद्य सामग्री भी पाई गई। विभाग ने स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों में गंभीर खामियां पाए जाने पर मेस का संचालन करने वाली संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई छात्रों के स्वास्थ्य के साथ संभावित खिलवाड़ को देखते हुए की गई है। डीन बोले- शिकायत की जांच होगी छत्तीसगढ़ डेंटल कॉलेज के डीन डॉक्टर एसके नंदा ने बताया कि मेस में परोसे गए भोजन में मृत मेंढक मिलने की शिकायत की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि संस्था को समय-समय पर साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखने की हिदायत दी जाती है। हालांकि, उन्होंने एक्सपायरी खाद्य पदार्थ मिलने की जानकारी से इनकार किया। अन्य राज्यों के स्टूडेंट भी पढ़ने आते हैं कॉलेज में अलग-अलग राज्यों से आए विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं, जो खाने के लिए पूरी तरह मेस पर निर्भर रहते हैं। ये मामला सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य से खिलवाड़ को लेकर सवाल उठ रहे है। छात्रों ने कहा है कि दूषित भोजन और उसमें मृत जीव मिलने से फूड पॉइजनिंग और बैक्टीरियल इन्फेक्शन जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। कमियों को लेकर नोटिस जारी इस संबंध में जिला खाद्य अधिकारी तरुण बिरला ने बताया की डेंटल कॉलेज के भोजन में मेंढक पाए जाने की शिकायत पर जांच टीम पहुंची थी वहां से खाद्य पदार्थों का सैंपल लिया गया है कुछ कमियों को लेकर नोटिस भी जारी किया गया है। एक्सपायरी खाद्य पदार्थ जब्त नहीं की गई है। अधिकारियों का बयान: सख्त कार्रवाई होगी खाद्य विभाग के अधिकारी तरुण बिरला ने बताया कि छत्तीसगढ़ डेंटल कॉलेज की मेस में मेंढक मिलने का मामला सामने आया है. हमारी टीम ने मौके पर जाकर जांच की. कुछ अनियमितताएं मिली हैं, जिन पर नोटिस जारी किया गया है. हम सख्ती से कार्रवाई करेंगे ताकि भविष्य में ऐसे मामले दोबारा न हों. फिलहाल जांच जारी कॉलेज प्रबंधन ने भी जांच शुरू कर दी है. यह पता लगाया जा रहा है कि मेस में सफाई और गुणवत्ता नियंत्रण में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर सुधार नहीं हुआ तो आगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी. कॉलेज प्रशासन को भेजा नोटिस खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी तरुण बिरला ने कहा कि हमारे संज्ञान में कल मामला आया था कि छत्तीसगढ़ डेंटल कॉलेज की मेस में छात्रों को जो खाना परोसा जाता है, उसमें मेंढक निकला था. यूथ फाउंडेशन ऑफ इंडिया नाम की संस्था मेस चलाती है. हमारी टीम ने फौरन वहां जाकर जांच की है और वहां मेस का पूरा निरीक्षण किया गया और खाने के सैंपल लिए गए हैं. वहां कुछ अनियमितताएं मिली हैं, उसको लेकर नोटिस जारी किया जा रहा है. एक्सपायरी खाद्य सामग्री भी मिली है, उसका जिक्र भी नोटिस में किया गया है. उन्होंने कहा कि खाने में मेंढक कैसे आया, इसकी जांच कॉलेज प्रबंधन को करनी चाहिए. जब उनसे पूछा गया कि इससे पहले भी मेस में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.

ट्रंप के फैसले से 4.2 करोड़ अमेरिकियों की खाद्य सहायता पर खतरा, सुप्रीम कोर्ट ने दी अस्थायी रोक की मंजूरी

अमेरिका में लाखों गरीब परिवारों के लिए बुरी खबर है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नवंबर महीने के लिए मिलने वाली फूड सहायता की आधी राशि रोक दी है और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को अस्थायी मंजूरी दे दी है. यह राहत "सप्लिमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम" (SNAP) के तहत दी जाती है, जिससे करीब 4.2 करोड़ अमेरिकियों को हर महीने खाने का सामान मिलता है. दरअसल, सरकार में चल रहे शटडाउन (सरकारी कामकाज बंद होने) की वजह से फंड्स की कमी बताई जा रही है. प्रशासन ने कहा कि फिलहाल सिर्फ 4.65 अरब डॉलर की आंशिक फंडिंग ही संभव है, जबकि प्रोग्राम की पूरी फंडिंग के लिए करीब 9 अरब डॉलर की जरूरत होती है. सुप्रीम कोर्ट की जज केतानजी ब्राउन जैक्सन ने कहा कि यह आदेश सिर्फ तब तक लागू रहेगा जब तक निचली अदालत इस मामले पर फैसला नहीं दे देती. कोर्ट ने कहा कि प्रशासन को कुछ समय दिया जा रहा है ताकि वह स्थिति संभाल सके. इससे पहले रोड आइलैंड के एक जज जॉन मैककोनेल ने सरकार को आदेश दिया था कि वह तुरंत पूरी राशि जारी करे. उन्होंने कहा था कि सरकार गरीबों की मदद रोककर राजनीतिक खेल खेल रही है लेकिन ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए कहा कि निचली अदालत का आदेश "शटडाउन की अराजकता को और बढ़ा देगा." सरकार के इस रुख की आलोचना भी हो रही है. डेमोक्रेसी फॉरवर्ड नामक संगठन ने कोर्ट में कहा कि ट्रंप प्रशासन गरीब अमेरिकियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है. फिलहाल कोर्ट ने प्रशासन को राहत दे दी है, लेकिन इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जो हर महीने इसी सहायता से अपना पेट पालते हैं. अब आगे फैसला फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स करेगा कि ट्रंप प्रशासन को पूरी SNAP राशि देनी होगी या नहीं. गरीब तबके में चिंता है कि अगर फंडिंग समय पर नहीं आई, तो लाखों लोगों के सामने "खाने के लाले" पड़ सकते हैं.

रक्षाबंधन पर स्वच्छ और सुरक्षित खाद्य वस्तुओं के लिए प्रशासन सतर्क, शुरू हुआ जांच अभियान

महासमुन्द : रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच हेतु खाद्य सुरक्षा अभियान चलाया गया त्योहार पर मिलावट पर सख्ती: जिले में खाद्य सामग्री की जांच को चला विशेष अभियान रक्षाबंधन पर स्वच्छ और सुरक्षित खाद्य वस्तुओं के लिए प्रशासन सतर्क, शुरू हुआ जांच अभियान महासमुन्द राज्य शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा खाद्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देशानुसार आगामी पर्व रक्षाबंधन को दृष्टिगत रखते हुए 21 जुलाई को पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में पनीर एवं खोवा की गुणवत्ता जांच हेतु विशेष अभियान संचालित किया गया। इसी क्रम में कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह एवं जिला अभिहीत अधिकारी सह अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) महामसुंद श्री हरिशंकर पैकरा के मार्गदर्शन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री शंखनाद भोई द्वारा जिले के बागबाहरा क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न प्रतिष्ठानों से खाद्य नमूने संकलित किए गए। जांच के तहत प्रतिष्ठानों से विधिक खाद्य नमूने लिए गए। जिसमें मेसर्स विश्वा फैमिली रेस्टोरेंट एण्ड ढाबा बागबाहरा से पनीर एवं पका चावल, मेसर्स छत्तीसगढ़ फैमिली ढाबा एण्ड रेस्टोरेंट बागबाहरा से पनीर, मेसर्स श्री हर्षद मिष्ठान भंडार, बागबाहरा से खोवा संकलित किया गया। ये सभी खाद्य नमूने राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, कालीबाड़ी, रायपुर को परीक्षण हेतु भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि विगत माह में भी कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले में अभियान चलाकर 05 पनीर के खाद्य नमूने संकलित कर राज्य प्रयोगशाला को भेजे गए थे।