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डिजिटल छत्तीसगढ़: जिसने दूर रह रही बेटी को दिया सबसे बड़ा सहारा

मीलों की दूरी मिटा दी तकनीक ने—डिजिटल छत्तीसगढ़ की मानवीय मिसाल भुवनेश्वर में रहते हुए भी श्रीमती सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र किया प्राप्त छत्तीसगढ़ की डिजिटल व्यवस्था ने बनाया मुश्किल काम आसान रायपुर,  डिजिटल भारत अभियान और छत्तीसगढ़ शासन की ई-सेवाओं ने आम नागरिकों के जीवन को न सिर्फ आसान बनाया है, बल्कि समय, मेहनत और संसाधनों की बड़ी बचत भी सुनिश्चित की है। भुवनेश्वर में रहने वाली श्रीमती सोनम त्रिपाठी का अनुभव इसका जीवंत उदाहरण है। उन्होंने डिजिटल सेवाओं के सहारे अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और अपनी बीमार माताजी के बैंक खाते को बिना किसी परेशानी के भुवनेश्वर में स्थानांतरित करवा लिया। विवाह के बाद भुवनेश्वर में बस चुकी श्रीमती सोनम त्रिपाठी के माता-पिता बिलासपुर में ही रहते थे। पिता का निधन होने के बाद नगरपालिका बिलासपुर ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। लेकिन जब उनकी माताजी की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अपने साथ भुवनेश्वर ले जाना पड़ा, तब एक नई चुनौती सामने आई कि माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर। बैंक ने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का आग्रह किया, जिसकी जानकारी श्रीमती त्रिपाठी को पहले नहीं थी, और इसी कारण काम कुछ समय के लिए अटक  गया। इस दस्तावेज़ की आवश्यकता ने परिवार को असमंजस में डाल दिया। इंटरनेट और डिजिटल छत्तीसगढ़ का मिला सहारा श्रीमती त्रिपाठी ने समाधान की तलाश शुरू की और इंटरनेट की मदद से छत्तीसगढ़ के जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यालय का संपर्क नंबर प्राप्त किया। भुवनेश्वर से ही उन्होंने संबंधित कर्मचारी से संपर्क किया। कार्यालय कर्मचारी ने आवश्यक दस्तावेज़ों, ऑनलाइन प्रक्रिया और प्रमाण पत्र प्राप्ति के चरणों की स्पष्ट एवं सहज जानकारी प्रदान की। डिजिटल व्यवस्था की बदौलत कुछ ही दिनों में उन्हें अपने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन उपलब्ध हो गया, और बैंक की समस्त औपचारिकताएँ तुरंत पूर्ण हो गईं। डिजिटल सेवाएँ समय बचाती हैं, परेशानी दूर करती हैं — श्रीमती सोनम त्रिपाठी श्रीमती सोनम त्रिपाठी बताती हैं कि यदि उन्हें डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी पहले मिल जाती, तो उनका काम और पहले ही पूरा हो जाता। उनका कहना है कि बैंकिंग, सरकारी सहायता, संपत्ति, पेंशन और अन्य कार्यों में बाधा से बचने के लिए ऐसे दस्तावेज़ समय रहते बनवा लेना चाहिए। मैंने भी भुवनेश्वर से ही ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की और प्रमाण पत्र कुछ ही दिनों में प्राप्त हो गया। उनका अनुभव बताता है कि सूचना की उपलब्धता, तकनीक का उपयोग और सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण किस प्रकार जटिल लगने वाले कामों को भी सरल और तेज बनाते हैं। डिजिटल छत्तीसगढ़: अब हर नागरिक के ‘एक क्लिक’ पर सरकारी सेवाएँ छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण, शिकायत निवारण, प्रमाण पत्र उपलब्धता और विभिन्न सेवाओं के डिजिटलीकरण ने आमजन की परेशानी को काफी हद तक कम किया है। बिलासपुर से लेकर बस्तर तक हर कोई घर बैठे प्रमाण पत्र, आवेदन स्थिति और अन्य सेवाओं का लाभ उठा पा रहा है। इससे न केवल समय और ऊर्जा की बचत होती है, बल्कि प्रक्रियाएँ पारदर्शी और विश्वसनीय भी बनी हैं।  सोनम त्रिपाठी की यह कहानी उन नागरिकों के लिए प्रेरणा है जो परंपरागत प्रक्रियाओं की कठिनाइयों से परेशान रहते हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि समय पर सूचना, सहयोगी प्रशासन और आधुनिक डिजिटल सेवाओं की सहायता से कोई भी महत्वपूर्ण कार्य शीघ्रता और सरलता से पूरा किया जा सकता है। डिजिटल छत्तीसगढ़ की यह मिसाल न केवल राज्य के डिजिटल परिवर्तन की सफलता को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि डिजिटल भारत अभियान कैसे आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहा है। छत्तीसगढ़ की डिजिटल सेवाएँ अब आम नागरिकों की जिंदगी में बदलाव ला रही हैं। भुवनेश्वर में रहते हुए भी श्रीमती सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर बिना किसी कठिनाई के पूरा कर लिया—यह हमारे ई-गवर्नेंस सिस्टम की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और दक्षता का प्रमाण है। “डिजिटल छत्तीसगढ़” का लक्ष्य ही यही है कि हर नागरिक को घर बैठे, एक क्लिक में, तेज़ और सरल तरीके से सरकारी सेवाएँ उपलब्ध हों। श्रीमती त्रिपाठी का यह अनुभव डिजिटल भारत अभियान और राज्य सरकार की नागरिक-केंद्रित कार्यशैली की सफलता को रेखांकित करता है। – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

नवा रायपुर मेडिसिटी: मध्य भारत में स्वास्थ्य क्रांति की नई इबारत लिख रहा है छत्तीसगढ़

हेल्थकेयर हब बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है अटल नगर रायपुर, स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान किसी भी विकसित समाज की असली नींव होते हैं। भारत जब वर्ष 2047 के विकसित राष्ट्र के संकल्प की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ हमारी प्रमुख प्राथमिकता बन चुकी हैं। इसी दृष्टि से छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में विकसित की जा रही ‘मेडिसिटी’ परियोजना न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवा के नए युग की शुरुआत कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय  के नेतृत्व एवं वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में यह परियोजना देश की सबसे महत्वाकांक्षी और भविष्यगामी स्वास्थ्य पहल के रूप में उभर रही है। नवा रायपुर अटल नगर पहले से ही शिक्षा, परिवहन, उद्योग और आधुनिक शहरी ढांचे का प्रमुख केंद्र रहा है। अब मेडिसिटी इसे राष्ट्रीय स्तर पर हेल्थकेयर की राजधानी के रूप में स्थापित करने जा रहा है। अत्याधुनिक कनेक्टिविटी, व्यापक परिवहन नेटवर्क और भौगोलिक दृष्टि से रणनीतिक स्थिति नवा रायपुर को न सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों के लिए भी उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख गंतव्य बना रही है। हर वर्ष 7 करोड़ से अधिक यात्री यहां के एयरपोर्ट और रेल सेवाओं का उपयोग करते हैं, और जल्द ही शुरू होने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के बाद मेडिकल टूरिज्म के विस्तृत अवसर यहां खुलने वाले हैं। सेक्टर 36–37 में 200 एकड़ में विकसित की जा रही मेडिसिटी में 5,000 से अधिक बेड की क्षमता और देश के अग्रणी हेल्थकेयर समूहों की भागीदारी इस परियोजना को देश के सबसे बड़े स्वास्थ्य शहर के रूप में स्थापित करेगी। मेडिसिटी में मेडिकल यूनिवर्सिटी, नर्सिंग कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित किए जा रहे हैं ताकि डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल पेशेवरों की नई और सक्षम पीढ़ी तैयार हो सके। कार्डियोलॉजी, कैंसर साइंस, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, ऑर्गन ट्रांसप्लांट और मल्टी–स्पेशियलिटी अस्पतालों के साथ अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक्स लैब्स यहां स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगे। मरीजों और उनके परिजनों के लिए आवासीय परिसर, छात्रावास, होटल और धर्मशाला जैसी सुविधाएँ इस पूरे क्षेत्र को एक व्यवस्थित ह्यूमन–सेंट्रिक मेडिकल ज़ोन में बदल देंगी। ‘वॉक-टू-हॉस्पिटल’ मॉडल, पर्यावरण अनुकूल डिजाइन, सुगम सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी और पीएमजेएवाई व सीजीएचएस जैसी योजनाओं के तहत किफायती उपचार सेवाएँ इस परियोजना को पूरी तरह समावेशी बनाती हैं। उल्लेखनीय है कि नवा रायपुर में पहले से सक्रिय उत्कृष्ट स्वास्थ्य संस्थान इस संरचना को और भी मजबूत आधार प्रदान करते हैं। श्री सत्य साई संजीवनी हॉस्पिटल 2012 से बाल हृदय रोग के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का अग्रणी केंद्र है, जहाँ भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अफ्रीकी देशों से भी मरीज आते हैं। वहीं 2018 से संचालित 170 बिस्तरों वाला बालको कैंसर हॉस्पिटल सेंट्रल इंडिया के 500–600 किमी के दायरे में अत्याधुनिक कैंसर उपचार उपलब्ध कराता है। रायपुर का स्वच्छ वातावरण और कम जीवन–यापन लागत मरीजों के लिए इसे और उपयुक्त बनाती है। मेडिसिटी केवल एक स्वास्थ्य परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों का भी विशाल केंद्र बनेगी। स्वास्थ्य, फार्मा, वेलनेस और सपोर्ट सेवाओं में हजारों रोजगार सृजित होंगे। इसके आसपास किफायती आवास, व्यापारिक प्रतिष्ठान और नई सेवा गतिविधियों का विस्तार राज्य की जीडीपी में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। नवा रायपुर मेडिसिटी छत्तीसगढ़ सरकार का वह संकल्प है जो कहता है—सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य, कम लागत में उच्च सुविधा और सुरक्षित जीवन की गारंटी। यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि भारत के स्वस्थ, सुरक्षित और विकसित भविष्य की नई परिभाषा है। आने वाले वर्षों में नवा रायपुर अटल नगर मेडिसिटी न सिर्फ मध्य भारत बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श हेल्थकेयर मॉडल के रूप में स्थापित होगी। नवा रायपुर मेडिसिटी छत्तीसगढ़ की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का ऐसा इंजन बनेगी, जो आने वाले दशकों तक राज्य की विकास रफ्तार को नई दिशा देगा। 200 एकड़ में विकसित हो रही यह विश्वस्तरीय हेल्थकेयर सिटी न सिर्फ उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करेगी, बल्कि स्वास्थ्य, फार्मा, वेलनेस, शिक्षा और सेवा क्षेत्रों में हजारों रोजगार सृजित कर राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देगी। एम्स, बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट, मेडिकल यूनिवर्सिटी और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों की स्थापना से नवा रायपुर राष्ट्रीय हेल्थ हब के रूप में उभरेगा।  मेडिसिटी का मॉडल ‘सुलभता, किफायत और उच्च गुणवत्ता’ के सिद्धांतों पर आधारित है और यह आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को मेडिकल टूरिज्म, रिसर्च और हेल्थ इकोनॉमी का अग्रणी केंद्र बनाएगा।-वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी नवा रायपुर अटल नगर में विकसित की जा रही मेडिसिटी  मध्य भारत में स्वास्थ्य क्रांति की नई शुरुआत है। 200 एकड़ में विकसित हो रहा यह विशाल हेल्थकेयर सिटी आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ ही नहीं, ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र सहित पूरे क्षेत्र को अत्याधुनिक, सुलभ और किफायती चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करेगा। ‘नवा रायपुर मेडिसिटी’ उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएँ, मेडिकल शिक्षा, अनुसंधान और मेडिकल टूरिज्म सभी को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराते हुए भारत के विकसित भविष्य की मजबूत आधारशिला बनेगी। – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

एनकाउंटर के डर से चैतू का समर्पण: पढ़ाई से नक्सलवाद तक कैसे पहुंचा खूंखार नक्सली

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में लंबे समय से सक्रिय 25 लाख रुपए के इनामी नक्सली चैतू उर्फ श्याम दादा ने जवानों के सामने सरेंडर कर दिया। श्याम दादा के सरेंडर से नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है। चैतू उर्फ दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य था। उसके ऊपर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके साथ 9 अन्य माओवादियों ने भी हथियार डाल दिए। इन सभी पर कुल 65 लाख रुपए का इनाम घोषित था। चैतू को 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले का मुख्य मास्टरमाइंड माना जाता है। उस हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई बड़े नेता मारे गए थे। लंबे समय तक वह दरभा डिवीजन का प्रभारी भी रहा। चैतू उर्फ श्याम दादा वर्तमान में DKSZCM कैडर का है। बस्तर के जंगलों में कई बार सुरक्षाबलों की गोलियों से बच निकला था। बस्तर इलाके में फोर्स की बढ़ते दबदबे के बाद चैतू ने अपने साथियों के साथ सरेंडर करने का फैसला किया। वह करीब 45 साल तक नक्सली संगठन से जुड़ा रहा। जानिए चैतू दादा के बारे में चैतू उर्फ श्याम दादा मूल रूप से तेलंगाना का रहने वाला है। वह 1980 में कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही नक्सल संगठन में शामिल हो गया था। नक्सली संगठन में शामिल होने के बाद वह शुरुआत में हिंसात्मक गतिविधियों में शामिल था। उसके बाद 1990 में वह बस्तर इलाके में आकर संगठन के विस्तार के काम में लग गया। इस दौरान इस इलाके में वह करीब 35 साल तक काम किया। उसका मुख्य काम नक्सली संगठन में युवाओं को जोड़ना और भर्ती करना था। सुरक्षाबल के जवानों ने उसे कई बार घेर लिया था लेकिन हर बार वह बचकर निकल जाता था। क्यों किया सरेंडर जवानों के सामने सरेंडर करने पहुंचे चैतू ने मीडिया को बताया कि रूपेश और सोनू दादा ने भी हथियार डाल दिए हैं। नक्सल संगठन में अब कुछ नहीं रखा है। मैं करीब 63 साल हूं लेकिन वर्तमान में परिस्थितियों बदल गई हैं। बदली हुई परिस्थति को देखने के बाद ही मैंने अपने साथियों और हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड चैतू उर्फ श्याम दादा उन नक्सलियों में शामिल है जिन्होंने झीरम घाटी हमले की योजना बनाई थी। 25 मई 2013 में दरभा घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला करवाने में इसका हाथ था। इस हमले में विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल समेत कई करीब 24 नेताओं को का एनकाउंटर किया था।

तांत्रिक केके श्रीवास्तव की काली कमाई का पर्दाफाश, बेटा भी शामिल; ऑस्ट्रेलिया-चीन में करोड़ों का निवेश

रायपुर पूर्व कांग्रेस सरकार में ठेका दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले कथित तांत्रिक कृष्ण कुमार श्रीवास्तव उर्फ केके के खिलाफ पेश चार्जशीट में तेलीबांधा पुलिस ने कई खुलासे किए हैं. पुलिस का दावा है कि केके और उसके बेटे कंचन ने हवाला के जरिए करोड़ों रुपए भेजकर चीन और ऑस्ट्रेलिया में निवेश किए हैं. दोनों के बैंक खातों की जांच में 441 करोड़ रुपए के लेन-देन का रिकॉर्ड मिला है. पुलिस के मुताबिक, पिछली सरकार में बिलासपुर निवासी केके श्रीवास्तव बेहद प्रभावशाली था. वह कई बड़े नेताओं से जुड़ा हुआ था. उसने नोएडा की रावत एसोसिएट कंपनी के मालिक अर्जुन सिंह को स्मार्ट सिटी के तहत 500 करोड़ के ठेके दिलाने का झांसा दिया और उनसे 15 करोड़ रुपए ले लिए. कार से भागा नागपुर, फिर दिल्लीः तेलीबांधा थाने में एफआईआर होने के बाद केके और कंचन फरार हो गए थे. जांच में पाया गया कि युवा कांग्रेसी नेता आशीष शिंदे अपनी कार CG 04PP 0007 में केके को छिपाकर नागपुर ले गया. वहां कुछ दिन रहने के बाद दोनों दिल्ली पहुंचे. लगभग एक महीने तक वहां छिपे रहने के बाद केके भोपाल आया और शिंदे रायपुर लौट गया. लंबी जांच के बाद पुलिस ने 24 जून को केके को भोपाल से गिरफ्तार किया है. 5 खातों में 15 करोड़ रुपए ट्रांसफर: अर्जुन सिंह ने ठेका मिलने की उम्मीद में 10 से 17 जुलाई 2023 के बीच कंचन और केके को 15 करोड़ रुपए भेजे. यह रकम अकाउंट R 14900500, 500000, 0026050, 10126077, 001063400 में ट्रांसफर की गई. इनमें से तीन खाते बिलासपुर के अब्बास अली के नाम पर हैं, जो केके श्रीवास्तव के लिए काम करता था. पिता-पुत्र लगातार अर्जुन से संपर्क में थे, और उन्हें वाट्सएप पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े फर्जी दस्तावेज भेजते रहे, जिससे अर्जुन को भरोसा हो गया कि वह काम दिला देंगे. कुछ रकम लौटाने के बाद बाकी पैसा वापस नहीं किया गया. दोनों ने पैसे को निजी उपयोग में खर्च कर दिया. सीबीआई और ईडी करेगी जांच: चार्जशीट में मनी लॉन्ड्रिंग और महादेव सट्टा बुक से संबंध का उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट ईडी और सीबीआई को भेजी गई है. ईडी ने जांच शुरू कर दी है और सीबीआई भी जल्द पूछताछ करेगी. महादेव सट्टा मामले की जांच सीबीआई कर रही है और अब तक 120 से अधिक लोगों के बयान लिए जा चुके हैं. इस मामले में केके श्रीवास्तव का नाम सामने आया है. सूत्रों के अनुसार, सीबीआई दिसंबर में पहला चार्जशीट दाखिल करने वाली है. इसमें गिरफ्तार आईपीएस और रापुसे अधिकारियों को बड़ी राहत मिल सकती है. कंचन घूम रहा, रिकॉर्ड में फरार: पुलिस ने कंचन और अब्बास अली को फरार बताया है. जबकि कंचन को रायपुर और बिलासपुर में देखा गया है. पुलिस ने उसे बनारस से हिरासत में लिया था उसे पूछताछ कर छोड़ दिया, जबकि एफआईआर में भी नामजद आरोपी है.

गंदगी देख भड़के सभापति सूर्यकांत राठौड़, स्टेडियम में तुरंत सफाई के आदेश

रायपुर नगर निगम के सभापति सूर्यकांत राठौड़ ने गुरुवार को सरदार बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान परिसर में भारी गंदगी, कचरे के ढेर और साफ-सफाई की पूरी तरह से कमी देखकर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई. तत्काल सफाई अभियान के निर्देश सभापति राठौड़ ने मौके पर ही जोन-4 के कार्यपालन अभियंता शेखर सिंह को बुलाकर स्टेडियम का निरीक्षण कराया और उन्हें तुरंत नगर निगम की टीम भेजकर सफाई अभियान शुरू करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि स्टेडियम में प्राथमिकता के आधार पर स्वच्छता बहाल की जाए. ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी राठौड़ ने स्पष्ट चेतावनी दी कि स्टेडियम की सफाई का जिम्मा संभाल रहे ठेकेदार द्वारा यदि तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो उसका ठेका रद्द कर उसे नगर निगम की ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाएगा. सीवरेज चैंबर्स के टूटे ढक्कन भी बने समस्या निरीक्षण के दौरान सभापति ने स्टेडियम की सीवरेज लाइन के कई चैंबर्स को खुले और ढक्कन टूटा हुआ पाया. इसे गंभीर सुरक्षा संकट मानते हुए उन्होंने कार्यपालन अभियंता को निर्देश दिया कि सभी टूटे ढक्कनों को तत्काल बदलवाया जाए, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे. राठौड़ ने स्पष्ट कहा कि इंडोर स्टेडियम जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुविधा में गंदगी और अव्यवस्था किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और नगर निगम सख्त रवैया अपनाएगा.

दिव्यांग बेटियों की एशियन पैरा गेम्स 2025 में सफलता, आर्थिक मदद के लिए उठाई आवाज़

रायपुर छत्तीसगढ़ की दो होनहार दिव्यांग पैरा खिलाड़ी- परलीन कौर और हुलसी मरकाम ‘यूथ पारा एशियन गेम्स 2025’ के लिए चयनित हुई हैं. वर्षों की कड़ी मेहनत, संघर्ष और लगन का फल हासिल करने के बाद दोनों खिलाड़ियों ने राज्य का नाम रोशन किया है. परलीन दृष्टिबाधित हैं, जबकि कवर्धा की हुलसी मरकाम एक हाथ से वंचित हैं. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुकी ये खिलाड़ी अब आर्थिक संकट से जूझ रही हैं. एशियन पैरा गेम्स में भाग लेने के लिए आवश्यक स्पॉन्सरशिप राशि जुटाना दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. दोनों खिलाड़ियों ने कलेक्टर, विधायक और अलग-अलग जनप्रतिनिधियों से आर्थिक सहायता की अपील कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सहयोग नहीं मिल पाया है. वहीं स्पॉन्सर राशि जमा करने की अंतिम तिथि 1 दिसंबर 2025 तय है, जिससे चिंता और बढ़ गई है. अब उनकी आखिरी उम्मीद प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से है. खिलाड़ियों ने कहा कि “मुख्यमंत्री जी से विनती है कि हमारा साथ दें. हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य और देश का नाम गर्व से ऊंचा करेंगे. यदि दिव्यांग बेटियां आगे बढ़ेंगी, तो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बनेंगी. हमने सिर्फ एक सपना देखा है कि हमें देश और छत्तीसगढ़ का नाम दुनिया में ऊंचा करना है. सरकार सहयोग करे तो हम अंतरराष्ट्रीय मंच से पदक जीतकर लौट सकते हैं.” छत्तीसगढ़ की ये बेटियाँ न सिर्फ खेल में बल्कि जीवन के हर मोर्चे पर संघर्ष की मिसाल बन चुकी हैं. ऐसे में इनकी मदद करना केवल खेल का समर्थन नहीं, बल्कि प्रदेश की बेटियों के उज्ज्वल भविष्य को नई दिशा देने जैसा है.

नई गाइडलाइन दरों को लेकर चैंबर ऑफ कॉमर्स ने वित्त मंत्री से किया अहम सुझाव

रायपुर छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी से मुलाकात की. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चैंबर के अध्यक्ष सतीश थौरानी ने किया. बैठक के दौरान, चैंबर ने प्रदेश में लागू नई गाइडलाइन दरों और अचल संपत्ति के पंजीयन शुल्क से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों पर अपने सुझाव वित्त मंत्री के समक्ष रखे. चैंबर ने सुझाव दिया कि अचल संपत्तियों के मूल्यांकन और शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया को इस प्रकार संशोधित किया जाए, जिससे आवासीय खरीददारों, उद्यमियों, व्यापारिक संस्थाओं और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े सभी वर्गों को राहत मिले. इसके साथ ही, इन बदलावों के जरिए राज्य में निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को और अधिक सुगम बनाने का प्रस्ताव रखा गया. सतीश थौरानी ने कहा कि वित्त मंत्री ने चैंबर के सुझावों को गंभीरता से सुना और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सभी सुझावों पर विभागीय स्तर पर गहन विचार-विमर्श और अध्ययन किया जाएगा. इस बैठक में चैंबर के कई प्रमुख सदस्य भी उपस्थित थे, जिनमें सलाहकार तिलोकचंद बरडिया, कार्यकारी अध्यक्ष राधाकृष्ण सुंदरानी, राजेश वासवानी, जसप्रीत सिंह सलूजा, जितेन्द्र शादीजा, मनीष प्रजापति, राकेश वाधवानी, जतिन नचरानी, हरचरण सिंह साहनी, और अमित गोयल प्रमुख रूप से शामिल थे.

बेचने के इरादे से लाई गई अवैध धान खेप, मक्का बाड़ी में पुलिस ने रोकी तस्करी

 गरियाबंद सरकारी समर्थन मूल्य पर प्रदेश में हो रही धान खरीदी के बीच पड़ोसी राज्यों से अवैध रूप से धान खपाने का क्रम जारी है. इस कड़ी में अमलीपदर पुलिस ने 611 कट्टा धान के साथ ट्रक को जब्त किया है. देर रात मुखबिर से मिली सूचना पर कार्रवाई करते हुए अमलीपदर पुलिस ने कांडेकेला के मक्का बाड़ी में डंप धान और ट्रक को जब्त किया. ट्रक में 415 बोरी डंप के साथ बाड़ी में डंप 196 बोरी धान को जब्त किया गया है, जिसकी कीमत साढ़े सात लाख रुपए आंकी गई है. इसके पहले भी पुलिस ने धान से भरे आधा दर्जन वाहन जब्त कर चुकी है.

सुरक्षा में लापरवाही, भिलाई इस्पात संयंत्र ने दो महाप्रबंधकों को किया निलंबित, अन्य अफसरों को दी चेतावनी

दुर्ग भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के शीर्ष प्रबंधन ने बीते कुछ समय में कार्यस्थल पर हुए कर्मचारियों की मृत्यु और घायल होने की घटना को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है. सिंटर प्लांट-3 के महाप्रबंधक शंकर मोरी और उर्जा प्रबंधन विभाग के महाप्रबंधक सुब्रमणि रमणी को निलंबित कर दिया है. इसके अलावा उर्जा प्रबंधन विभाग के दो कार्यपालकों को चेतावनी पत्र जारी किया है. वहीं दो महाप्रबंधकों को एडवाइजरी पत्र प्रदान किए गए हैं. जीरो टॉलरेंस की नीति प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि असुरक्षित कार्य और असुरक्षित कार्यप्रणाली के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पहले की तरह आगे भी कड़ाई से लागू रहेगी.  सुरक्षा संस्कृति को मजबूत बनाना प्रत्येक स्तर पर सामूहिक उत्तरदायित्व है, और किसी भी प्रकार की लापरवाही या असुरक्षित व्यवहार को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसी संदर्भ में दुर्घटना-जनित परिस्थितियों और सुरक्षा संबंधी चूक की गंभीरता को देखते हुए कठोर प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं. सभी घटनाओं का मूल कारण विश्लेषण किया गया है, ताकि प्रत्येक पहलू का तथ्यपरक मूल्यांकन हो सके. साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए आवश्यक सुधारात्मक और निवारक उपायों की रूपरेखा तैयार कर संबंधित विभागों को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं.

आईआईएम रायपुर में डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन, पीएम मोदी व अमित शाह की मौजूदगी

रायपुर रायपुर में आयोजित 60वें अखिल भारतीय डीजी–आईजी सम्मेलन का दूसरा दिन शनिवार की सुबह शुरू हो गया है। पूरे देश के शीर्ष पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में बैठक जारी है। इसी दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी उपस्थित रहे। सम्मेलन के दूसरे दिन कई राज्यों के डीजीपी अपने प्रस्तुतीकरण देंगे, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा पर उभरते खतरे, पहले दिए गए सुझावों की समीक्षा और महिला सुरक्षा में तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। दिनभर चलने वाली इन चर्चाओं में पुलिस प्रशासन के सामने मौजूद नई चुनौतियों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा। जन-आंदोलनों के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के बेहतर तरीकों पर चर्चा होने के साथ ही विदेशी भगोड़ों को वापस लाने की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। फॉरेंसिक तकनीक को और अधिक उपयोगी बनाने, वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर अपराधों की जांच को मजबूत करने तथा आधुनिक सुरक्षा ढांचे के निर्माण को लेकर अधिकारियों से सुझाव लिए जाएंगे। इस बार सम्मेलन की थीम “विकसित भारत, सुरक्षित भारत” रखी गई है। छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण देव गौतम बस्तर 2.0 के बारे में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करेंगे। मार्च 2026 में नक्सलवाद के उन्मूलन के बाद बस्तर में विकास के नए चरण को कैसे आगे बढ़ाया जाए, इस पर उनकी प्रस्तुति केंद्रित रहेगी। वहीं आतंकवाद निरोधक रणनीतियों के वर्तमान रुझानों पर चर्चा के साथ आईबी के विशेष निदेशक देश के आंतरिक सुरक्षा विज़न–2047 का खाका सामने रखेंगे। प्रधानमंत्री मोदी सुबह सवा आठ बजे आईआईएम रायपुर पहुँचे, जहाँ उनका स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्वागत के तुरंत बाद वे लगातार बारह घंटे तक चलने वाली विभिन्न बैठकों में शामिल रहेंगे। इन बैठकों में आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, नक्सलवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत विमर्श होगा। देर शाम प्रधानमंत्री स्पीकर हाउस पहुँचेंगे और वहीं रात्रि विश्राम करेंगे। सम्मेलन में भाग लेने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के लिए व्यापक आवास व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री के लिए एम–1 और गृह मंत्री अमित शाह के लिए एम–11 में ठहरने की व्यवस्था की गई है, जबकि एनएसए अजीत डोभाल, डिप्टी एनएसए अनीश दयाल सिंह, आईबी प्रमुख तपन डेका और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को नए सर्किट हाउस में ठहराया गया है। ठाकुर प्यारेलाल संस्थान के 140 कमरे, निमोरा अकादमी के 91 कमरे और सर्किट हाउस के 6 सूइट तथा 22 कमरे सम्मेलन से जुड़े अधिकारियों के लिए आरक्षित किए गए हैं। कुल मिलाकर पूरे देश से आए 33 राज्यों के डीजीपी और पैरामिलिट्री के वरिष्ठ अधिकारियों सहित लगभग 75 पुलिस अधिकारियों को रायपुर में ठहराया गया है।