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उत्तर बस्तर कांकेर : समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 2025-26 : सहकारी समिति प्रबंधक, खरीदी केन्द्र प्रभारी एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज

उत्तर बस्तर कांकेर धान खरीदी कार्य को गंभीरता से नहीं लेने के कारण जिले की सहकारी समितियों के 02 प्रभारी प्रबंधक एवं 02 कम्प्यूटर ऑपरेटर और 01 धान खरीदी केन्द्र प्रभारी के विरूद्ध थाना पखांजूर एवं थाना नरहरपुर में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। कार्यालय उपायुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं जिला कांकेर के निर्देश पर सहकारी निरीक्षकों एवं शाखा प्रबंधक द्वारा पुलिस थाना पखांजूर एवं नरहरपुर में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। उपायुक्त सहकारिता जिला कांकेर से मिली जानकारी के अनुसार आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित पखांजूर विकासखण्ड कोयलीबेड़ा के प्रभारी प्रबंधक वासुदेव दास एवं उपार्जन केन्द्र पी.व्ही. 24 के कम्प्यूटर ऑपरेटर रविशंकर मंडल के विरूद्ध थाना पखांजूर और आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित उमरादाह विकासखण्ड नरहरपुर के प्रभारी प्रबंधक भूषण पटेल तथा उपार्जन केन्द्र नावडबरी के धान खरीदी प्रभारी शिवप्रसाद नाग एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर तेज सिन्हा के विरूद्ध थाना नरहरपुर में छत्तीसगढ़ आवश्यक सेवा संधारण एवं विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 (एस्मा एक्ट) के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विपणन वर्ष 2025-26 की संपूर्ण धान खरीदी अवधि तक धान खरीदी कार्य में संलग्न समस्त कर्मचारियों पर छत्तीसगढ़ आवश्यक सेवा संधारण एवं विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 (एस्मा एक्ट) लागू किया गया है।

रायपुर : मुख्यमंत्री साय ने विधानसभा के विशेष सत्र में पूर्व सदस्यों का किया पुण्य स्मरण

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान छत्तीसगढ़ की रजत यात्रा में योगदान देने वाले तीन प्रमुख जनप्रतिनिधियों मती रजनी ताई उपासने,  बनवारी लाल अग्रवाल और  राधेश्याम शुक्ल का पुण्य स्मरण किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर की पहली महिला विधायक मती रजनी ताई उपासने राजनीतिक और सामाजिक जीवन की प्रेरक व्यक्तित्व थीं, उनका निधन प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है।  बनवारी लाल अग्रवाल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष, दो बार के विधायक रहे और उनके जनसेवा से जुड़े कार्य, संगठन और समाज के प्रति समर्पण हम सब के लिए अनुकरणीय है।  मुख्यमंत्री ने  राधेश्याम शुक्ल के बारे में कहा कि वे अनुशासित एवं कर्मनिष्ठ जनप्रतिनिधि के रूप में याद किए जाएंगे। उनका पूरा जीवन जनसेवा को समर्पित रहा, उनके निधन से प्रदेश ने एक प्रतिबद्ध नेता को खो दिया है। मुख्यमंत्री  साय ने तीनों दिवंगत विभूतियों की आत्मा की शांति और परिजनों को संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

रायपुर : कृषक लक्ष्मण, छगन और खोरबाहरा ने आसानी से किया धान विक्रय

रायपुर : कृषक लक्ष्मण, छगन और खोरबाहरा को धान विक्रय में नहीं हुई परेशानी, आसानी से धान बेच पाए समिति में सभी सुविधाएं दुरुस्त रायपुर, कृषक लक्ष्मण, छगन और खोरबाहरा को धान विक्रय में नहीं हुई परेशानी, आसानी से धान बेच पाएकृषक लक्ष्मण, छगन और खोरबाहरा को धान विक्रय में नहीं हुई परेशानी, आसानी से धान बेच पाए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन और किसान-कल्याण की प्राथमिकता को धरातल पर उतारती हुई राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी कृषक उन्नति योजना आज किसानों के लिए वास्तविक परिवर्तन का माध्यम बन रही है। बेहतर समर्थन मूल्य, पारदर्शी एवं सुविधाजनक उपार्जन व्यवस्था, तथा टोकन प्रणाली जैसे सुधारों ने धान विक्रय प्रक्रिया को सहज, तेज और भरोसेमंद बनाया है। जिसका प्रत्यक्ष लाभ सीमांत कृषक से लेकर बड़े किसानों तक समान रूप से पहुंच रहा है और कृषक अधिक उत्साह और विश्वास के साथ उत्पादन बढ़ा रहे हैं।             महासमुंद जिला के विकासखंड के ग्राम मोंगरा निवासी श्री लक्ष्मण ध्रुव अपने 54 कट्टा धान का विक्रय करने ग्रामीण सेवा सहकारी समिति झालखम्हरिया उपार्जन केंद्र पहुंचे। उन्होंने बताया कि वे 3 दिन पूर्व टोकन कटवाया है, जिससे उन्हें समय पर धान विक्रय की सुविधा मिली। शासन की पारदर्शी टोकन व्यवस्था और त्वरित पंजीयन ने उनकी प्रक्रिया को सहज बनाया। उनके पास एक एकड़ खेती है। इसी तरह मोंगरा निवासी श्री खोरबहारा साहू ने बताया कि वे अपने 42 डिसमिल कृषि भूमि में 8.80 क्विंटल धान उत्पादन किया है। उन्होंने सतत देखभाल और शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का लाभ लेते हुए अपने फसल का उत्पादन किया है। उन्होंने बताया कि धान बेचने में उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। वहीं मोंगरा निवासी श्री छगन लाल साहू ने अपने पिताजी पुनीत राम साहू के नाम पंजीकृत 10 एकड़ कृषि भूमि में इस वर्ष 250 कट्टा धान का उपार्जन किया है।          सरकार द्वारा प्रति एकड़ 21 क्विंटल की दर से धान खरीदी और समर्थन मूल्य 3100 रुपए प्रति क्विंटल देने का निर्णय किसानों के लिए एक बड़ी राहत है। मोंगरा निवासी लक्ष्मण ध्रुव, खोरबाहरा साहू और छगन लाल साहू ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का धन्यवाद ज्ञापित किया है।

किसानों को बड़ी राहत: रायपुर में 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर शुरू हुई धान खरीदी

रायपुर : 3100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर धान खरीदी ने लौटाई किसानों की मुस्कान ‘टोकन तुहर हाथ’ ऐप किसानों के लिए बनी वरदान रायपुर विष्णुदेव साय सरकार की समर्थन मूल्य पर धान खरीदी ने छत्तीसगढ़ के किसानों के खेत-खलिहानों में नई उम्मीदों की फसल बो दी है। 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से शुरू हुई धान खरीदी ने किसानों के चेहरों पर संतोष और विश्वास की मुस्कान लौटा दी है।     गौरेला विकासखंड के आंदु ग्राम के किसान मनमोहन सिंह राठौर ने बताया कि इस साल उन्हें अपनी मेहनत का सच्चा मूल्य मिला है। ‘टोकन तुहर हाथ’ मोबाइल ऐप से उन्होंने घर बैठे ही खरीदी का टोकन प्राप्त किया। अब सोसायटियों में लंबी कतारों में खड़ा रहना नहीं पड़ता। मनमोहन सिंह कहते हैं, “इस सुविधा ने हमारा समय और मेहनत दोनों बचाया है। सरकार ने सचमुच किसानों की तकलीफ को समझा है।”     उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने 206 क्विंटल धान बेचा था और इस बार 10 एकड़ खेत में उगाई फसल से पहली खेप में 100 क्विंटल धान गौरेला केंद्र में जमा किया है। इस आमदनी से वे रबी सीजन में गेहूं, सरसों, मूंग और उड़द जैसे दलहन-तिलहन फसलें बोने की तैयारी कर रहे हैं।     गौरेला-पेंड्रा-मारवाही जिले में खरीदी का सिलसिला तेजी से जारी है। 17 नवंबर को दूसरे दिन जिले के 14 केंद्रों में कुल 2252 क्विंटल धान की खरीदी हुई, धनौली केंद्र में सबसे अधिक 510.40 क्विंटल धान खरीदा गया। यह आँकड़ा बताता है कि सरकार की पारदर्शी व्यवस्था और विश्वसनीय भुगतान ने किसानों का भरोसा मजबूत किया है।     गांवों में अब हर ओर खुशी की लहर है, किसानों को सरकार पर विश्वास है, और खेतों में फिर मेहनत का जोश है। समर्थन मूल्य पर समय पर खरीदी और भुगतान व्यवस्था ने न केवल किसानों की आय बढ़ाई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी रौनक ला दी है। सरकार की पारदर्शी नीति और कृषि सुधारों ने किसानों के लिए नयी संभावनाओं के द्वार खोले हैं।

मेकाहारा में सस्ती मेडिकल जांच, MRI 2 हजार और CT-स्कैन 1 हजार में, डीन को CGMSC NOC की आवश्यकता नहीं

 रायपुर  छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में  रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय और डॉडीकेएस अस्पताल के स्वशासी समिति के सामान्य सभा की बैठक संपन्न हुई। बैठक में उन्होंने चिकित्सा महाविद्यालय और संबद्ध अस्पताल में लोगों को अविलंब स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता, रीएजेंट एवं कंज्यूमेबल की खरीदी तथा आवश्यक मानव संसाधन की व्यवस्था स्वशासी मद से करने हेतु कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये। स्वास्थ्य मंत्री ने स्वशासी सभा की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि अस्पताल में किसी भी मरीज को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने मरीज हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए चिकित्सा महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के लिए अति आवश्यक सामाग्रियों उपकरण/रियेजेन्ट/केमिकल/ डिस्पोजेबल सामाग्रियां इत्यादि जिनके मांगपत्र सीजीएमएससी को प्रेषित किये गए हैं, उन सामाग्रियों की आपातकालीन आवश्यकता होने पर सीजीएमएससी से एनओसी प्राप्त होने एवं राशि मिलने की प्रत्याशा में अधिष्ठाता स्तर पर छ.ग. भंडार क्रय नियमानुसार आवश्यकता के अनुरूप सामाग्री क्रय किये जाने की वित्तीय शक्ति प्रदत्त करने का अनुमोदन किया।  स्वास्थ्य मंत्री ने पेट सीटी स्कैन तथा गामा कैमरा की सुविधा मरीजों को प्रदान किये जाने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए तीन महीने के अंदर इस सुविधा को प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त व्यवस्था बनाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये। विभिन्न विभागों को दिए जाने वाले इंप्रेशन मनी की राशि को प्रति मांगपत्र ₹10 हजार से बढ़ाकर ₹1 लाख करने की घोषणा की। उन्होंने अस्पताल में आवश्यकता पड़ने पर समय-समय पर किए जाने वाले छोटे-मोटे मरम्मत कार्यों के लिए अस्पताल स्तर पर ऑटोनॉमस फंड का उपयोग करने के निर्देश दिये। समिति की बैठक में मेडिकल कॉलेज के 200 छात्रों के लिए चयन किए गए छात्रावास भवन पर सहमति दी गई। शीघ्र ही यह छात्रावास संचालन में आ जाएगा। बैठक में डीकेएस अस्पताल के एमसीएच छात्रावास का शुल्क 5 हजार से घटाकर 2 हजार 5 सौ रुपए करने का निर्णय लिया गया। ओपीडी में आने वाले मरीजों के सीटी स्कैन एवं एमआरआई जांच की दर को पुनरीक्षित करते हुए एपीएल (गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन करने वाले) मरीजों को एमआरआई जांच हेतु ₹2000 एवं सीटी स्कैन जांच हेतु ₹1000 राशि प्रावधानित करने का निर्णय लिया। वहीं बीपीएल मरीजों तथा 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए ओपीडी में जाँच सुविधा निशुल्क रहेगी। जबकि अंत: रोगी यानी अस्पताल में भर्ती एपीएल एवं बीपीएल दोनों मरीजों के लिए ये दोनों जांच निशुल्क है। सांसद रायपुर बृजमोहन अग्रवाल एवं विधायक सुनील सोनी की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, संभाग आयुक्त महादेव प्रसाद कांवरे, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा शिखा राजपूत तिवारी, सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक रितेश अग्रवाल, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. यू. एस. पैंकरा, रायपुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी, अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर, डीकेएस अस्पताल प्रबंधन समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे ।

खूंखार माओवादी कमांडर हिड़मा मारा गया, झीरम घाटी और अन्य 26 हमलों का था जिम्मेदार

बस्तर   देश में चल रहा माओवाद के खिलाफ अभियान अब अपने अंतिम दौर में है। माओवाद के ताबूत में एक और कील के रूप में सुरक्षा बल के जवानों में हिड़मा को मार गिराया है। छत्तीसगढ़ के सुकमा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर मंगलवार को जारी मुठभेड़ में सुरक्षाबल के जवानों ने 6 माओवादियों को मार गिराया है। इसमें कुख्यात माओवादी हिड़मा भी शामिल है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुठभेड़ में हिड़मा, उसकी पत्नी राजे और 25 लाख का इनामी माओवादी एसजेडसीएम टेक शंकर मारा गया है। यह इनकाउंटर सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी सफलता बतायी जा रही है। आंध्र-प्रदेश की ग्रे-हांउड टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। बता दें कि शीर्ष माओवादी नेताओं बसवा राजू, के. रामचंद्र रेड्डी (गुड्सा उसेंडी), के. सत्यनारायण रेड्डी (कोसा) के मारे जाने और भूपति, रूपेश, सुजाता व ककराला सुनीता जैसे वरिष्ठ कैडरों के आत्मसमर्पण के बाद अब बस्तर में हिड़मा ही माओवादी संगठन का मुख्य नेता था। हिड़मा माओवादी संगठन की बटालियन नंबर-1 का प्रभारी और केंद्रीय समिति का सदस्य था। वह लंबे समय से सुरक्षा बलों के रडार था। बटालियन कमांडर से केंद्रीय समिति सदस्य बना हिड़मा माओवादी संगठन में हिड़मा का नाम पहली बार झीरम घाटी हमले के बाद चर्चाओं में आया था। पिछले वर्ष उसे केंद्रीय समिति का सदस्य बनाया गया, हालांकि पद की दृष्टि से वह अपेक्षाकृत नीचे है, लेकिन प्रभाव और पहचान के लिहाज से वह पिछले एक दशक से संगठन का सबसे प्रभावशाली चेहरा था। हिड़मा के बारे में कुछ मुख्य तथ्य     जन्म: 1981, पूवर्ति, सुकमा (छत्तीसगढ़)     पद: पीएलजीए बटालियन नंबर 1 का प्रमुख- माओवादियों की सबसे घातक हमलावर इकाई।     वह CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य था।     वह बस्तर क्षेत्र से सेंट्रल कमेटी में शामिल होने वाला एकमात्र आदिवासी था।     उसके सिर पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित था।     हिड़मा के साथ उसकी दूसरी पत्नी राजे (राजक्का) भी मारी गई।     असली नाम: संतोष मुख्य हमले जिनमें वह शामिल था     2010 दंतेवाड़ा हमला: 76 सीआरपीएफ जवान शहीद     2013 झीरम घाटी नरसंहार: 27 लोग मारे गए, जिनमें शीर्ष कांग्रेसी नेता शामिल     2021 सुकमा-बीजापुर मुठभेड़: 22 सुरक्षा कर्मी शहीद 45 लाख का इनामी था हिड़मा संगठन ने अब उसे केंद्रीय समिति सदस्य के साथ बटालियन नंबर-1 का प्रभारी नियुक्त किया है। उसकी जगह उसके ही गांव पूवर्ती के बारसे देवा को नया कमांडर बनाया गया है। हिड़मा पर 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था। हिड़मा देश की एकमात्र माओवादी बटालियन नंबर-1 का कमांडर रह चुका है, वही बटालियन जो देशभर में सबसे संगठित और घातक हमलों के लिए कुख्यात रही है। हिड़मा की मां से मिले थे उपमुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कुछ दिनों पहले हिड़मा के गांव पूवर्ती पहुंचतक उसकी मां से मुलाकात की थी। उन्होंने हिड़मा से हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि सरकार की प्राथमिकता मार्च 2026 तक बस्तर और आसपास के क्षेत्रों से माओवादी हिंसा का पूर्ण उन्मूलन है।

रायपुर: अवैध धान की तस्करी रोकने प्रशासन हुआ सख्त, सीमावर्ती चेकपोस्टों पर कड़ी निगरानी

रायपुर प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के साथ ही कुछ क्षेत्रों में अवैध धान परिवहन की संभावनाओं को रोकने राज्य भर में प्रशासन सख़्त हो गया है।  इसी क्रम में जशपुर जिला  कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने जशपुर जिले का झारखंड सीमा से लगे चेकपोस्टों पर देर रात औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। निरीक्षण दल में तहसीलदार जय राजनपथे, नायब तहसीलदार अरुण कुमार, फूड इंस्पेक्टर आलोक टोप्पो, मंडी निरीक्षक, राजस्व निरीक्षक तथा पटवारी शामिल थे। टीम ने भलमंडा, सकरडेगा और साईंटांगाटोली चेकपोस्टों का दौरा किया, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और वाहन चेकिंग प्रक्रिया को परखा गया। संभावित अवैध धान परिवहन पर रोक के लिए मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। इसी दौरान संबंधित ग्रामों के सरपंच और सचिव भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने तथा सीमा क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल उपलब्ध कराने आग्रह किया, ताकि अवैध आवागमन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सीमावर्ती इलाकों में सतत निगरानी जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सरेंडर्ड नक्सलियों को मिली फूड ट्रेनिंग, बस्तर में चलेंगे कैफे; CM साय ने पहले दिन किया फूड ऑर्डर

बस्तर  नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पुनर्वास और मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में आज बस्तर एक नया इतिहास रचा है। पुलिस लाइन स्थित त्रिवेणी परिसर के सामने पंडुम कैफे अपनी तरह का पहला ऐसा कैफेटेरिया होगा, जहां नक्सल पीड़ित परिवारों और समर्पित नक्सलियों को रोजगार देते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।इस संवेदनशील पहल का उद्घाटन मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने किया। पंडुम कैफे का संचालन दुर्ग की प्रसिद्ध नुक्कड़ संस्था करेगी, जो वर्षों से मूक-बधिर और दिव्यांग बच्चों की देखरेख और सामाजिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में पंडुम कैफे की शुरुआत की गई है जिसका संचालन सरेंडर्ड नक्सली और नक्सल हिंसा पीड़ित परिवार के लोग करेंगे। इसके लिए बकायदा उन्हें खाना बनाने, सर्व करने, ऑर्डर लेने की ट्रेनिंग दी गई। शुरुआत में 13 लोग मिलकर इस कैफे को चलाएंगे।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जगदलपुर के पुलिस लाइन परिसर में बने इस कैफे का उद्घाटन किया। इस दौरान सीएम ने खुद फूड ऑर्डर किया। सरेंडर किए नक्सलियों ने CM को फूड परोसा। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने डिजिटल रूप से बिल भी पेय किया। पुलिस लाइन परिसर में बना पंडुम कैफे दरअसल, सरकार की पुनर्वास नीति के तहत बस्तर पुलिस और प्रशासन के सहयोग से जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में पंडुम कैफे बनाया गया है। इसके स्ट्रक्चर निर्माण के लिए शासन-प्रशासन ने पैसे खर्च किए हैं। नक्सल हिंसा पीड़ित परिवार और हथियार छोड़कर मुख्य धारा में लौटे नक्सलियों को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से इस कैफे का शुभारंभ किया गया है। अभी कुल 13 लोगों को कैफे की चाबी थमाई गई है। 13 लोगों को मिला रोजगार कैफे के माध्यम से कुल 13 लोगों को रोजगार मिला है। जिसमें 8 नक्सल हिंसा पीड़ित हैं, 5 लोग सरेंडर नक्सली हैं। इनमें 8 महिलाएं भी शामिल हैं। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत तैयार किया गया यह कैफे नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्म समर्पित माओवादी कैडरों के लिए आजीविका प्रदान करने वाला एक मॉडल है। पहले दी ट्रेनिंग, फिर काम में लगाया इन 13 लोगों को पहले जगदलपुर में ही ट्रेनिंग दी गई। इन्हें अलग-अलग तरह के फूड्स को बनाने से लेकर परोसने तक के गुर सिखाए गए। साथ ही कस्टमर से कैसे बर्ताव करना है, कैसे ऑर्डर लेना है इसके बारे में भी बताया गया। करीब 1 महीने से ज्यादा इन्हें ट्रेनिंग दी गई। जब ये इसमें माहिर हुए तो 13 लोगों को कैफे की चाबी थमा दी गई। पर्यटकों को बस्तर दिखाने हो रहे तैयार सरकार के पुनर्वास नीति के तहत बस्तर के पूर्व नक्सलियों को अलग-अलग काम में पारंगत बनाया जा रहा है। पुनर्वास केन्द्रों में उनके जीवन को बदलने की पहल हो रही है। आड़ावाल के केन्द्र में करीब 30 सरेंडर नक्सली होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रहे हैं साथ ही कई अन्य पूर्व नक्सलियों को टूरिस्ट गाइड बनाने की भी तैयारी हो रही है। CM बोले- बस्तर के लिए नया अध्याय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पंडुम कैफे को स्पष्ट सामाजिक और विकासात्मक उद्देश्यों के साथ स्थापित किया गया है। ये बस्तर के लिए एक नया अध्याय है। पंडुम कैफे की यह पहल राज्य की शांति, विकास और मानव-केंद्रित पुनर्वास के प्रति प्रतिबद्धता को दृढ़ता से रेखांकित करती है। IG बोले- अलग-अलग स्किल्स की ट्रेनिंग दी गई बस्तर के IG सुंदरराज पी ने कहा कि, जो कभी संघर्ष, हिंसा या माओवादी गतिविधियों से प्रभावित हुए थे उनको हॉस्पिटैलिटी, कैफे संचालन, स्वच्छता मानक, खाद्य सुरक्षा, ग्राहक सेवा और उद्यमिता में प्रशिक्षित किया गया है। यह उन्हें दीर्घकालिक करियर और आत्मनिर्भरता के लिए तैयार करता है। उन्होंने कहा कि, पंडुम नाम बस्तर की सांस्कृतिक जड़ों से प्रेरित है। ये टैग लाइन 'Where every cup tells a story' क्षेत्र की दृढ़ता, उपचार और आशा की भावना को दर्शाती है। ये शांति निर्माण का स्केलेबल मॉडल है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र: 18 नवंबर को क्या होगा और नए भवन में शिफ्टिंग के नियम क्या हैं?

रायपुर   छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा भवन का उद्घाटन हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्योत्सव के दौरान एक नवंबर को नवा रायपुर स्थित नवनिर्मित विस भवन का लोकार्पण किया। इस नए भवन में अगल शीतकालीन सत्र आयोजित किया जाएगा। याने रेगुलर सत्र अब नए भवन में होंगे। मगर शीतकालील सत्र से पहले 18 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। इसे विदाई सत्र कहा गया है। इसमें विधायक पुराने विधानसभा भवन में अपने अनुभवों को शेयर करेंगे। सदन की सहमति जरूरी संसदीय नियमों के तहत विधानसभा या लोकसभा को नए भवन में शिफ्ट किया जाता है तो उसके लिए सदन की सहमति आवश्क होती है। जिस तरह किसी विधयेक को पारित करने के लिए सदन की अनुमति जरूरी होती है, उसी तरह विधानसभा और लोकसभा को शिफ्थ करने के लिए भी चाहिए होता है। दिल्ली में जब पिछले साल लोकसभा और राज्यसभा नए भवन में शिफ्ट हुआ तो उसमें प्रस्ताव पारित किया गया था। क्या होगा 18 को विशेष सत्र में 18 नवंबर को छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। ये नियमित सत्र नहीं है, इसलिए इसमें प्रश्नकाल नहीं होगा। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद स्पीकर, सदन के नेता, नेता प्रतिपक्ष समेत मंत्री, विधायक अपने अनुभव शेयर करेंगे। फिर आएगा महत्वपूर्ण क्षण, जब विधानसभा अध्यक्ष डॉ0 रमन सिंह विधानसभा को नए भवन में शिफ्ट करने के साथ ही अगला शीतकालीन सत्र नए विधानसभा भवन में रखने का प्रस्ताव पेश करेंगे। इस प्रस्ताव पर सदन की सहमति लगेगी। विधायक हाथ उठाकर इस प्रस्ताव को पारित करेंगे, फिर विधानसभा अध्यक्ष नए विधानसभा भवन में अगले सत्र होने का ऐलान करेंगे। इतिहास बन जाएगा विधानसभा भवन छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद केंद्रीय जल संसाधन विभाग के भवन को विधानसभा के लिए चुना गया था। दिलचस्प यह है कि इस बिल्डिंग की बनावट ऐसी की गई थी मानो विधानसभा के लिए ही तैयार किया गया हो। इसीलिए सरकार को इस भवन में ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ी। हर साल बजट, मानसून और शीतकालीन मिलाकर 25 साल में 75 सत्र आयोजित किया गया। तीन विशेष सत्र भी बुलाए गए। 18 नवंबर की शाम के बाद विधानसभा भवन अब इतिहास बनकर रह जाएगा। अब इसे पुराना विधानसभा भवन कहा जाएगा। आगे इस बिल्डिंग को किस रूप में उपयोग किया जाएगा, ये अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।

सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारा गया हिडमा, छत्तीसगढ़-आंध्र सीमा पर नक्सलियों के साथ हिंसक मुठभेड़

रायपुर  छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों का नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी है, जगदलपुर जिले में छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश की सीमा पर बड़ी मुठभेड़ हुई है, जहां आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम जिले के जंगलों में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में कई नक्सलियों को ढेर किया है. हालांकि अभी तक यह क्लीयर नहीं हुआ है कि मरने वाले नक्सलियों की संख्या कितनी है, लेकिन जवान इलाके में लगातार चल रहे सर्च अभियान चला रहे हैं. सुरक्षाबलों के जवानों ने इलाके को चारों तरफ से घेर के रखा हुआ है, ऐसे में यहां तेजी से कार्रवाई की जा रही है. हिड़मा के अलावा 5 अन्य नक्सलियों को भी सुरक्षाबलों ने मार गिराया है। सुकमा से सटे आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सीताराम जिले के पास सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही थी। कई घंटों की फायरिंग के बाद एनकाउंटर में 6 नक्सली ढेर कर दिए गए हैं। नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच फायरिंग अभी भी जारी है। पुलिस ने दी जानकारी पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह एनकाउंटर आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर हुआ है। पुलिस को इन जंगलों में कई नक्सलियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। मुखबिरी के आधार पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। आज सुबह से ही सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच फायरिंग चल रही है। इस दौरान पुलिस ने सुकमा में भी 1 नक्सली को मार गिराया है। वहीं, आंध्र प्रदेश में हिड़मा समेत 6 नक्सलियों का एनकाउंटर किया गया है। अल्लुरी सीताराम जिले के एसपी अमित बरदार के अनुसार,     आज सुबह 6:30-7 बजे के करीब मारेडुमिल्ली मंडल के जंगल में एनकाउंटर शुरू हुआ था। अब तक 6 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना मिली है। यह पुलिस और सुरक्षाबलों के द्वारा चलाया गया साझा ऑपरेशन है। हिड़मा की पत्नी भी ढेर बता दें कि माड़वी हिड़मा को सबसे खूंखार नक्सलियों में गिना जाता है। हिड़मा आम नागरिकों समेत सुरक्षाबलों पर हुए 26 नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा है, जिसमें कई लोगों की जान भी गई है। हिड़मा पर पुलिस ने 50 लाख रुपये का इनाम रखा था। हिड़मा के अलावा उसकी पत्नी राजे की भी एनकाउंटर में मौत हो गई है। सुकमा जिले में सुबह हुई मुठभेड़  बताया जा रहा है कि 18 नवंबर की सुबह-सुबह सुकमा जिले से लगे आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम जिले की सीमा पर सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई. दोनों तरफ से काफी देर तक जोरदार फायरिंग होती रही, जिसके बाद माना जा रहा है कि यहां 6 के आसपास नक्सली ढेर हुए हैं. पुलिस को इस बात की जानकारी मिली थी कि एर्राबोर के जंगल में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने डेरा डाला है, जिसके बाद रात में ही डीआरजी के जवानों ने मौके पर मोर्चा संभाला और सुबह होते ही नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई.  जैसे ही नक्सलियों ने जवानों को देखा तो तुरंत ही फायरिंग शुरू कर दी, ऐसे में जवानों ने भी बदले में फायरिंग की और जंगल को चारों तरफ से घेरकर मोर्चा संभाल लिया, बताया जा रहा है कि यहां कई बड़े कैडर के नक्सली होने की पूरी संभावना है. हालांकि सर्च ऑपरेशन के बाद ही इन बातों की पूरी जानकारी सामने आ पाएगी, फिलहाल फोर्स का यहां ऑपरेशन जारी है.  बीजापुर में मारे गए थे 6 नक्सली  बता दें कि इससे पहले बीजापुर में जिले में भी सुरक्षाबलों ने 6 नक्सलियों को ढेर किया था, जिसमें नक्सली बच्नन्वा भी शामिल था. पुलिस और सुरक्षाबलों के साथ-साथ डीआरजी के जवानों की तरफ से नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है. जहां अब तक कई नक्सलियों को ढेर किया गया है.   कौन था माड़वी हिड़मा? हिड़मा का जन्म 1981 को सुकमा जिले में हुआ था। पीपुल्स लिब्रेशन की गुरिल्ला बटालियन का नेतृत्व करने के बाद वो सीपीआई-माओवादी की केंद्रीय कमेटी का सदस्य बन गया था। हिड़मा बस्तर इलाके से इस कमेटी का अकेला सदस्य था। झीरम घाटी हमले के बाद हिड़मा का नाम पहली बार चर्चा में आया था। इसके बाद हिड़मा ने लगातार कई नक्सली हमलों को अंजाम दिया और दशकों तक उसके नाम की दहशत पूरे इलाके में देखने को मिलती थी।