samacharsecretary.com

छत्तीसगढ़ में भी शुरू होगी वोटर लिस्ट की जांच प्रक्रिया (SIR), BLO को मिल रही ट्रेनिंग

जगदलपुर  मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है। एसआइआर कोई नया प्रविधान नहीं है। पहले भी ऐसा किया जा चुका है। मध्य प्रदेश के विभाजन के बाद छत्तीसगढ़ में पहले विधानसभा चुनाव 2003 के पूर्व मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया था। बता दें कि 22 वर्ष बाद इस साल दोबारा एसआइआर प्रस्तावित है। यहां बस्तर में भी इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। हालांकि भारत निर्वाचन आयोग ने अभी इसके लिए कार्यक्रम विवरण जारी नहीं किया है। निर्वाचन आयोग से मिले दिशा निर्देशों के अनुसार हाल ही में बूथ लेवल आफिसर्स (बीएलओ) को पहले चरण का प्रशिक्षण दिया गया है। बस्तर जिले में 783 मतदान केंद्र और इतने की बूथ लेवल आफिसर्स हैं जो इस कार्य को करेंगे। जिले में साढ़े छह लाख से अधिक मतदाता हैं। जिला निर्वाचन कार्यालय में कार्यरत रहे कुछ पुराने कर्मचारियों से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि एसआइआर सामान्य प्रक्रिया है और पहले भी हो चुकी है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए दो प्रविधान है। विशेष गहन पुनरीक्षण अर्थात एसआइआर और दूसरा विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण। 2003 में विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया था। इसके बाद प्रति वर्ष और विशेषकर विधानसभा, लोकसभा चुनाव से पहले विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान चलाकर मतदाता सूची को अपडेट किया जाता रहा है। इसके तहत नाम जोड़ने, विलोपित करने, निवास पता की जानकारी परिवर्तित करने आदि किया जाता है। विशेष गहन पुनरीक्षण में एक-एक मतदाता का नए सिरे से दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर सत्यापन का प्रविधान है। इससे गलत जानकारी देकर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने वाले बाहर हो जाएंगे। चुनाव कार्यालय में लंबे समय तक कार्य कर चुके सेवा निवृत कर्मचारियों-अधिकारियों की माने तो पांच वर्ष में एक बार एसआइआर जरूर होना चाहिए। 2003 और 2025 की सूची की जांच होगी बताया गया कि एसआइआर में 2003 और 2025 की मतदाता सूची की जांच की जाएगी। प्रशिक्षण में बीएलओ को एक प्रपत्र दिया गया है। जिसमें ऐसे मतदाता जिनका नाम दोनों मतदाता सूची में हैं उनकी सूची तैयार की जाएगी। ऐसे मतदाता जिनका नाम 2025 की मतदाता सूची में हैं लेकिन 2003 की सूची में नहीं है उनकी पहचान की जाएगी। 2025 की सूची में शामिल ऐसे मतदाता जिनके माता-पिता में किसी का भी नाम 2003 की सूची में शामिल है उनकी सूची भी तैयार की जाएगी। ऐसे मतदाताओं के साथ कोई दिक्कत नहीं है उनका सत्यापन बीएलओ सूची तैयार करने के बाद घर-घर जाकर करेंगे। ऐसे मतदाता जो 2003 के बाद जुड़े हैं और उनके माता-पिता में किसी का नाम पुरानी सूची में नहीं है उन्हें अपनी यहां का निवासी होने और पहचान स्थापित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा करना होगा।

Retired IAS निरंजन दास गिरफ्तार, आबकारी घोटाले की प्लानिंग में शामिल होने का आरोप

 रायपुर 3,200 करोड़ के शराब घोटाले में लंबे समय से जांच एजेंसियों की रडार पर रहे रिटायर्ड आइएएस अधिकारी निरंजन दास को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। निरंजन दास पर यह है आरोप पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान आबकारी आयुक्त रहे निरंजन दास पर शराब घोटाले की पूरी रूपरेखा बनाने और उसे लागू कराने का आरोप है। विभाग प्रमुख के तौर पर उन्होंने विभाग में सक्रिय सिंडीकेट का सहयोग करते हुए, शासकीय शराब दुकानों में अन एकाउंटेंड शराब की बिक्री, अधिकारियों के ट्रांसफर, टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर, दोषपूर्ण शराब नीति लाये जाने में सहयोग, अन्य तरीकों से सिंडीकेट को लाभ पहुंचाते हुए उसके एवज में करोड़ों का लाभ अर्जित किया था। दास को शुक्रवार कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी है। सुप्रीम कोर्ट ने नौ मई तक गिरफ्तारी से राहत दी थी। सूत्रों के मुताबिक ईओडब्ल्यू के अधिकारी नितेश पुरोहित, यश पुरोहित को गिरफ्तार करने गिरिराज होटल गई थी,जहां से दोनों फरार हो गए। कस्टम मिलिंग घोटाले में ईडी की छापेमारी वहीं 140 करोड़ के कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने भिलाई समेत प्रदेश के दस ठिकानों में छापेमारी की। गुरुवार की सुबह छह बजे ईडी की चार सदस्यीय टीम ने भिलाई के तालपुरी इलाके में रिटायर्ड आइएएस डॉ.आलोक शुक्ला और हुड़को में सुधाकर राव घर दबिश दी। टीम ने घर की घेराबंदी कर महत्वपूर्ण दस्तावेजों,लेनदेन से जुड़े कागजों को खंगालकर छानबीन की। छापेमारी के दौरान आलोक शुक्ला घर पर नहीं थे। उनके मप्र जाने की जानकारी दी गई थी। ईडी ने घर पर नोटिस चस्पा कर उन्हें तलब किया है। बताया जा रहा है कि आलोक शुक्ला सरेंडर करने ईडी की विशेष कोर्ट पहुंचे थे,लेकिन सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं होने पर उन्हें वापस भेज दिया गया।

रायपुर : महानदी परियोजना लवन शाखा नहर के कार्यों के लिए 9 करोड़ रूपए से अधिक राशि स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा रायपुर जिले के आरंग विकासखण्ड की महानदी परियोजना के अंतर्गत लवन-शाखा नहर के वितरक शाखा क्रमांक-एक के कोण्डापार माईनर, रसौटा एवं केसला माईनर के रिमॉडलिंग, सी.सी. लाईनिंग और पुनःनिर्माण, जीर्णोद्धार कार्य के लिए 9 करोड़ 6 लाख 68 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने पर योजना की रूपांकित सिंचाई 1953.28 हेक्टेयर में 462.61 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति सहित पूर्ण रूपांकित क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है। योजना के कार्यों को कराने जल संसाधन मंत्रालय महानदी भवन से मुख्य अभियंता महानदी परियोजना जल संसाधन विभाग रायपुर को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।

ED का खुलासा: ‘BIG BOSS’ वॉट्सएप ग्रुप के जरिए घोटालों की प्लानिंग, चैतन्य के लिए पप्पू और सौम्या के लिए दीपेंद्र पहुंचाते थे पैसा

रायपुर  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ताजा चार्जशीट ने प्रदेश की सियासत गरमा दी है। कोर्ट में पेश चार्जशीट में दावा किया गया है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 'बिग बास ग्रुप' नामक एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जिसमें बड़े अधिकारी, कारोबारी, नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल और उनके करीबी मित्र शामिल थे। यह नेटवर्क शराब, कोयला और ऑनलाइन सट्टेबाजी जैसे अवैध कारोबार से अरबों रुपये की कमाई के साथ-साथ अधिकारियों के खिलाफ सुनियोजित षड्यंत्र रचता था। चार्जशीट में दर्ज चैट्स और दस्तावेजों से ईडी का कहना है कि यह गैंग फिल्मी स्क्रिप्ट और मनगढ़ंत कहानियों का सहारा लेकर अफसरों की छवि को खराब करने में लगा था। खासकर एक विवादित आइपीएस की 'कल्पनाओं पर आधारित डायरी' को हथियार बनाकर ईमानदार अधिकारियों के खिलाफ अफवाहें फैलाकर उन्हें दबाव में लाने की कोशिश की गई। इससे कई अधिकारियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और वे मानसिक रूप से प्रताड़ित हुए। वॉट्सएप ग्रुप में शराब घोटाले से जुड़ी चर्चा और पैसों के लेन-देन की बातें हैं। ED ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है कि पूर्व सीएम भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रही सौम्या चौरसिया शराब सिंडिकेट के लोगों से बातचीत के दौरान IAS अफसरों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करती थी, उन्हें गाली देती थी। इसके साथ ही उन्होंने कई बार सिंडिकेट के कुछ सदस्यों काे हिसाब किताब की जानकारी नहीं देने की बात भी लिखी है। चैट में इस बात का भी जिक्र है कि चैतन्य के लिए पप्पू बंसल, सौम्या के लिए दीपेंद्र कुरियर बॉय का काम करता था, ये उन्हें पैसे पहुंचाते थे, जिसे वह डिलीवर कहकर बात करते थे। चैट्स से खुला सिंडिकेट का राज, चैतन्य का नंबर बिट्टू नाम से सेव था शराब घोटाले में गिरफ्तार अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के मोबाइल की जांच में कई चौंकाने वाले राजफाश हुए हैं। अनवर के मोबाइल में चैतन्य बघेल का नंबर 'बिट्टू' नाम से सेव था, जिसमें पैसों की डीलिंग से लेकर नकली होलोग्राम बनाने तक की बातचीत सामने आई है। ईडी की चार्जशीट के अनुसार, ‘बिग बॉस’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप में चैतन्य बघेल, अनवर ढेबर, सौम्या चौरसिया, अनिल टुटेजा और पुष्पक जैसे प्रमुख सदस्य जुड़े थे। इस ग्रुप के जरिए शराब घोटाले की प्लानिंग, मनी लाड्रिंग, रकम के वितरण और हेराफेरी की सूचनाएं साझा की जाती थी। चैट्स में कब, किसे कॉल किया गया और कितनी देर बातचीत हुई, इसका पूरा विवरण भी चार्जशीट में शामिल है। 1000 करोड़ का कैश मैनेज किया भिलाई के शराब कारोबारी पप्पू बंसल ने ईडी की पूछताछ में बताया है कि उसने चैतन्य के साथ मिलकर 1000 करोड़ से अधिक कैश मैनेज किया। यह राशि अनवर ढेबर से दीपेन चावड़ा होते हुए कांग्रेस नेताओं रामगोपाल अग्रवाल और केके श्रीवास्तव तक पहुंचाई गई। बंसल ने यह भी माना कि उसे तीन महीने में 136 करोड़ रुपये मिले थे। पप्पू बंसल ने खोला राज दुर्ग-भिलाई के शराब कारोबारी और भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले लक्ष्मी नारायण उर्फ पप्पू बंसल ने पूछताछ में बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने माना कि उन्होंने और चैतन्य ने मिलकर 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश को मैनेज किया। बंसल ने बताया कि यह रकम अनवर ढेबर से दीपेंद्र चावड़ा और फिर कांग्रेस नेताओं रामगोपाल अग्रवाल और केके श्रीवास्तव तक पहुंचाई जाती थी। बंसल ने यह भी स्वीकार किया कि तीन महीने की अवधि में ही उन्हें 136 करोड़ रुपए मिले। रियल एस्टेट में लगाया ब्लैक मनी ED ने आरोप लगाया कि चैतन्य ने अपने विठ्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट और बघेल डेवलपर्स एंड एसोसिएट्स में शराब घोटाले की रकम निवेश की। असल खर्च 13-15 करोड़ रुपए था, लेकिन दस्तावेजों में मात्र 7.14 करोड़ दिखाया गया। वहीं डिजिटल डिवाइस की जांच से पता चला कि एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ रुपए कैश में भुगतान किया गया, जिसका हिसाब रिकॉर्ड में नहीं था। इसी प्रोजेक्ट में त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने 19 फ्लैट खरीदे, लेकिन भुगतान खुद किया। ED के मुताबिक यह सब ब्लैक मनी को सफेद दिखाने के लिए किया गया। मोबाइल चैट्स से खुलासा ED ने जब अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के मोबाइल की जांच की तो चौंकाने वाले चैट्स मिले। अनवर के मोबाइल में चैतन्य का नंबर ‘बिट्टू’ नाम से सेव था। इसमें पैसों की डीलिंग और नकली होलोग्राम बनाने तक की चर्चा थी।

बघेल का भी आरोप, कहा– चुनाव आयोग BJP का एजेंडा चला रहा है

बेमेतरा  छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में कांग्रेस ने गुरुवार को ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान मंच पर कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे कांग्रेस नेता सचिन पायलट का कार्यकर्ताओं ने गजमाला पहनाकर भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, पूर्व मंत्री रविन्द्र चौबे सहित दर्जनों पूर्व मंत्री और नेता मौजूद रहे। BJP सरकार पर बरसे सचिन पायलट 'वोट चोर-गद्दी छोड़' यात्रा के तीसरे दिन कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर लोकतंत्र को कमजोर किया है। सचिन पायलट ने कहा, ‘राहुल गांधी ने वोट चोरी के सबूत पेश किए, लेकिन आयोग ने कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही नोटिस थमा दिया। वहीं छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा पर भी यही आरोप लगे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।’ कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग पर भाजपा सरकार के लिए काम करने का आरोप लगाया और दावा किया कि छत्तीसगढ़ की जनता अब बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनेगी। भाषण के दौरान अजान की आवाज़ आने पर पायलट ने तकरीबन डेढ़ मिनट तक मौन रहकर धार्मिक भावनाओं का सम्मान भी किया। सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अन्य नेताओं ने कहा कि ‘भाजपा ने नोटबंदी, जीएसटी, किसान बिल और कोरोना जैसे मुद्दों पर हिटलरशाही रवैया अपनाया।’ उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने निर्वाचन आयोग के साथ मिलीभगत कर चुनाव जीते हैं और यह जनता के वोटों से नहीं बल्कि 'वोट चोरी' से हासिल हुई जीत है। नेताओं ने कहा कि कांग्रेस अब इस "वोट चोरी" की सच्चाई को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान चला रही है। इसी कड़ी में बेमेतरा की यह सभा आयोजित की गई।  

बड़ी सफलता! छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने नक्सली ठिकाना ध्वस्त किया, तीन इनामी नक्सली मारे गए

रायपुर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा और बीजापुर जिलों में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। दो अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 12 लाख रुपए के इनामी तीन माओवादी मारे गए, जिनमें एक महिला माओवादी भी शामिल है। दोनों ही मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक सामग्री और दस्तावेज भी बरामद किए हैं। सुकमा जिले में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। इस दौरान 5 लाख की इनामी महिला माओवादी बूस्की नुप्पों (35) मारी गई। वह मलांगीर एरिया कमेटी की सक्रिय सदस्य (एसीएम) थी और सुकमा एवं दंतेवाड़ा में दर्ज 9 गंभीर मामलों की आरोपी थी। इसके पास से 315 बोर रायफल, रायफल कारतूस, वायरलेस सेट, डेटोनेटर, कोर्डेक्स वायर, जिलेटिन रॉड, पिट्ठू बैग, बारूद, रेडियो, बंडा, नक्सली साहित्य एवं दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद की गई है। सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि विश्वसनीय सूचना के आधार पर डीआरजी की टीम ने जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसमें यह सफलता मिली। वहीं, बीजापुर जिले की मुठभेड़ में दो इनामी नक्सली मारे गए। यह मुठभेड़ 17 सितंबर को हुई। बीजापुर के दक्षिण-पश्चिमी जंगलों में भी माओवादियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में दो इनामी माओवादी ढेर कर दिए गए। ये दोनों हाल ही में ग्रामीणों और एक शिक्षादूत की हत्या में शामिल थे। मारे गए माओवादियों की पहचान रघु हपका (33) के रूप में हुई है। इसके ऊपर 5 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। दूसरे माओवादी की पहचान सुक्कु हेमला (32) के रूप में हुई है, जो बीजापुर थाना का रहने वाला था। इसके ऊपर 2 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। इनके पास से 303 रायफल, मैग्जीन, जिंदा कारतूस, बीजीएल लांचर, सेल, बैटरी, कार्डेक्स वायर, सेफ्टी फ्यूज, पिट्ठू बैग, माओवादी वर्दी, दवाइयां और अन्य नक्सली सामग्री बरामद हुई है। बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि डीआरजी, एसटीएफ और कोबरा 202 एवं 205 की टीम ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन में इन दोनों इनामी माओवादियों को ढेर किया।

आज तक माओवादी लगाते थे पोस्टर, अब पुलिस ने संभाली कमान — वॉन्टेड नक्सलियों के लिए ग्रामीणों से सहयोग की अपील

खांजूर/ कांकेर कांकेर जिले में पुलिस ने अंदरूनी गांवों में वांछित माओवादियों के बैनर लगाकर उन पर इनाम घोषित किया है। पुलिस ने बुधवार को परलकोट क्षेत्र के अंदरूनी और माओवादी प्रभावित इलाकों में एक अनोखी पहल शुरू की। पुलिस ने यहां के गांवों और जंगलों में वांछित माओवादियों के पोस्टर और बैनर लगाए हैं, ताकि स्थानीय लोगों की मदद से इन माओवादियों को पकड़ा जा सके। इस कदम को माओवाद के खिलाफ लड़ाई में एक नया मोड़ माना जा रहा है। इन पोस्टरों में वांछित माओवादियों की तस्वीरें, उनके नाम और उन पर घोषित इनाम की जानकारी दी गई है। साथ ही, पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें इन माओवादियों के बारे में कोई भी जानकारी मिले, तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें। जानकारी देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी। अक्सर, स्थानीय लोग माओवादियों के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, लेकिन डर की वजह से वे पुलिस को नहीं बताते। इन पोस्टरों से न केवल उन्हें जानकारी मिलेगी, बल्कि उन्हें यह भी एहसास होगा कि उनकी मदद से इन अपराधियों को पकड़ा जा सकता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य माओवादियों को उनके अपने गढ़ में ही कमजोर करना है। जब स्थानीय आबादी उनके खिलाफ हो जाएगी और उनके बारे में जानकारी देना शुरू कर देगी, तो उनके लिए छिपना और अपनी गतिविधियों को अंजाम देना मुश्किल हो जाएगा। पुलिस को सफलता की उम्मीद यह पहला मौका नहीं है जब पुलिस ने इस तरह की रणनीति अपनाई है, लेकिन इस बार इसे और बड़े पैमाने पर और व्यवस्थित तरीके से लागू किया गया है। पुलिस को उम्मीद है कि इस पहल से उन्हें वांछित माओवादियों को पकड़ने में बड़ी सफलता मिलेगी और क्षेत्र में शांति बहाल करने में मदद मिलेगी। यह देखना बाकी है कि यह पहल कितनी प्रभावी साबित होती है, लेकिन यह साफ है कि पुलिस माओवाद के खिलाफ लड़ाई में नए और रचनात्मक तरीके अपना रही है। पोस्टर में पांच लाख के इनामी माओवादियों के नाम पुलिस द्वारा एक बैनर में माओवादी बसंती आंचल, पुष्पा हेमला, रामा कुंजाम, श्रवण मरकर, विश्वनाथ, रामको मंडावी, रानी उर्फ उमा, जानकी सोरी पर पांच-पांच लाख रुपये और मनीषा कोर्राम, जमली मंडावी, कुमारी मंगली, कमला पददा दर्रो पर एक-एक लाख का इनाम घोषित है। इसके अलावा, अन्य स्थानों पर अलग-अलग माओवादियों के नाम और इनाम का भी उल्लेख किया गया है।

CM ने दी MEMU ट्रेन को हरी झंडी: रायपुर-राजिम का सफर अब सिर्फ डेढ़ घंटे में, रोज चलेगी ट्रेन

रायपुर  छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी है। रायपुर से नया रायपुर होते हुए राजिम तक आज से नई मेमू (MEMU) स्पेशल ट्रेन दौड़ेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  राजिम से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया ।आज से रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर ट्रेन (68766/68767) की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नई रेल सेवा शुरू करने का फैसला लिया। इस ट्रेन के शुरू होने से रायपुर और नवा रायपुर के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन रायपुर से मंदिरहसौद, सीबीडी, केंद्री, अभनपुर, मानिक चौरी और राजिम तक चलेगी। यह ट्रेन हर दिन दोनों तरफ से चलेगी। जिससे राजिम और रायपुर के बीच आना-जाना आसान होगा। डेढ़ घंटे में सफर होगा। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, रायपुर से राजिम रोजाना 2 हजार लोग यात्रा करते हैं। इस इलाके के ढाई लाख लोगों को इसका लाभ मिलेगा। ट्रेन के शुरू होने से उन्हें राहत मिलेगी। यह रेलवे प्रोजेक्ट 1500 करोड़ का है। छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर से राजिम जाने वाले यात्रियों को ट्रेन की सुविधा मिलने जा रही है. रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर नई सेवा का शुभारंभ आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजिम रेलवे स्टेशन से दोपहर 12 बजे करेंगे. यात्री लंबे समय से इस रूट पर मेमू ट्रेन की सुविधा की मांग कर रहे थे.  धार्मिक स्थलों समेत अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति इस ट्रेन के चलने से रायपुर समेत प्रदेशभर से राजिम के कुलेश्वर महादेव और राजिव लोचन मंदिर जाने वाले लोगों को फायदा होगा। साथ ही प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थलों से लोग जुड़ सकेंगे। वहीं क्षेत्रीय व्यापार, कृषि, तीर्थाटन और पर्यटन को भी नए अवसर मिलेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। मिलेगा फायदा रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर नई सेवा से यात्रियों को सुगम, सुलभ और किफायती यात्रा का विकल्प उपलब्ध होगा. ग्रामीण अंचलों से राजधानी रायपुर का आवागमन अधिक सुविधाजनक बनेगा. राजधानी आने वाले विद्यार्थी, नौकरीपेशा वर्ग और व्यापारी वर्ग के लिए यह ट्रेन विशेष रूप से उपयोगी होगी. इसके साथ ही इस नई सेवा से छत्तीसगढ़ के प्रयाग—राजिम तक सीधी रेल पहुंच सुनिश्चित होगी, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. इस ट्रेन का हो रहा विस्तार दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर रेल मंडल से प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर और अभनपुर के मध्य संचालित रायपुर-अभनपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन अब राजिम तक विस्तार किया जा रहा है. 19 सितम्बर 2025 से नियमित समय-सारणी के अनुसार गाड़ी संख्या 68766/68767 रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर प्रतिदिन दोनों छोर से—राजिम और रायपुर से संचालित होगी. इस ट्रेन में 06 सामान्य श्रेणी के डिब्बे तथा 02 पावरकार सहित कुल 08 कोच होंगे. दो फेरे में चलेगी रोजाना नई मेमू ट्रेन रोजाना दो फेरे लगाएगी। इससे रायपुर-नवा रायपुर और आसपास के गांवों, कस्बों में रहने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। मात्र 10 रुपए होगा किराया अभी रायपुर से नवा रायपुर का यात्री किराया 30 से 40 रुपए तक है, लेकिन नई ट्रेन में सफर करने पर यात्रियों को केवल 10 रुपए किराया देना होगा। इससे रोजाना अप-डाउन करने वालों को काफी फायदा होगा। वर्तमान में रायपुर से अभनपुर के बीच दो मेमू ट्रेनें पहले से चल रही हैं। अब नई ट्रेन शुरू होने से यात्रियों को और अधिक सुविधा मिलेगी।

सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी: सुकमा में एनकाउंटर में मरी गई महिला इनामी माओवादी

सुकमा  बस्तर संभाग में चलाए जा रहे माओवादी विरोधी अभियान में सुरक्षाबल के जवानों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। सुरक्षाबल के जवानों ने माओवादी मुठभेड़ में 5 लाख की इनामी महिला माओवादी को ढेर कर दिया है, जिसका शव जिला मुख्यालय लाया गया है। जानकारी के अनुसार, जिले के पश्चिमी पहाड़ी जंगलों में माओवादियों के छिपे होने की सुरक्षाबल के जवानों को सूचना मिली थी। जिसके आधार पर गुरुवार को जवानों ने सर्च ऑपरेशन चलाया। जवानों और माओवादियों के बीच रुक-रुककर फायरिंग होती रही। जिसमें जवानों के हाथ यह सफलता लगी है। मुठभेड़ के बाद मौके से सुरक्षा बलों को भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए हैं। बीजापुर में मुठभेड़ के दौरान दो माओवादी ढेर बीजापुर जिले के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में बुधवार को सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच दोपहर तीन बजे से मुठभेड़ जारी रही। सुरक्षा बलों ने माओवादियों की मौजूदगी की सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। मुठभेड़ स्थल पर रुक-रूककर फायरिंग हुई, जिसमें अब तक दो माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं। मुठभेड़ स्थल से 01 नग .303 रायफल, 01 नग बीजीएल लांचर, विस्फोटक सामग्री और अन्य नक्सल संबंधी सामान भी जब्त किया गया। सुरक्षा बलों ने फिलहाल मुठभेड़ के स्थान, ऑपरेशन में शामिल जवानों की संख्या और अन्य संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की है, ताकि ऑपरेशन में लगे जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन अभी जारी है और पूरा होने के बाद जानकारी दी जाएगी। गौरतलब है कि सरकार की ओर से माओवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा बल और शासन की ओर से लगातार इस दिशा में काम जारी है। इस साल अब तक 1500 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। वहीं, अब तक 400 से अधिक माओवादियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। साथ ही अपने अभियानों के दौरान कई शीर्ष माओवादी नेताओं को मौत के घाट भी उतारा जा चुका है।

CBI की कार्रवाई के बाद बड़ा एक्शन, रावतपुरा मेडिकल कॉलेज केस में तीन डॉक्टरों को किया गया निलंबित

रायपुर  रावतपुरा मेडिकल कॉलेज मान्यता मामले में फंसे तीन डॉक्टरों को कर्नाटक की मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने निलंबित कर दिया है। ये सभी डॉक्टर मेडिकल कालेज का निरीक्षण करने जुलाई महीने में रायपुर आए थे। इस दौरान सीबीआई की टीम ने मान्यता दिलाने के एवज में 55 लाख रुपये रिश्वत के साथ कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया था। निलंबित डॉक्टरों में राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद की सदस्य डॉ.चैत्रा एमएस, एसोसिएट प्रोफेसर (अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु),डॉ. मंजप्पा सीएन, प्रोफेसर और प्रमुख (आर्थोपेडिक्स विभाग, मंड्या इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज),डॉ. अशोक शेलके, असिस्टेंट प्रोफेसर (कम्युनिटी मेडिसिन विभाग, बीदार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) शामिल है। डॉक्टरों पर नवा रायपुर स्थित रावतपुरा चिकित्सा विज्ञान और अनुसंधान संस्थान के लिए पाजिटिव इंस्पेक्शन रिपोर्ट जारी करने का आरोप है। जांच में सामने आया कि इंस्पेक्शन प्रोग्राम और मूल्यांकनकर्ताओं की पहचान कॉलेज को पहले ही लीक कर दी गई थी। संस्थान ने रिकार्ड और दस्तावेज पहले से तैयार कर लिए ताकि मानकों को पूरा करता हुआ दिखाया जा सके। इस तरीके से कॉलेज को सीट मंजूरी मिल गई। इस मामले में कुल 34 लोगों के खिलाफ सीबीआई ने नामजद एफआइआर दर्ज किया है। इनमें मंत्रालय, नेशनल मेडिकल कमीशन और कई अन्य अधिकारियों के नाम शामिल हैं। गौरतलब है कि मामले के खुलासे के बाद सीबीआई ने आरोपी डॉक्टरों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। साथ ही इस वर्ष के लिए रावतपुरा चिकित्सा विज्ञान और अनुसंधान संस्थान की मान्यता को रद्द करते हुए इस वर्ष जीरो इयर घोषित कर दिया गया है। इस साल प्रदेश के रावतपुरा कॉलेज को मान्यता नहीं मिलने के कारण मेडिकल की सीटें कम हो गई। जिसके बाद प्रदेश के 3 निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाई गई हैं।