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रायपुर में खाद दुकानों पर कार्रवाई, लक्ष्मी ट्रेडर्स का लाइसेंस निलंबित; कई विक्रेताओं को नोटिस

रायपुर : एक खाद दुकान का लाइसेंस निलंबित, कई विक्रेताओं को नोटिस मेसर्स लक्ष्मी ट्रेडर्स भखारा खाद की कालाबाजारी का मामला रायपुर धमतरी जिले में किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। औचक निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर एक उर्वरक विक्रेता का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि कई निजी और सहकारी विक्रय केन्द्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग ने साफ कर दिया है कि कालाबाजारी, अधिक कीमत व अनियमित बिक्री किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग की टीम लगातार जिलेभर में निरीक्षण कर रही है। उप संचालक कृषि, उर्वरक, बीज एवं कीटनाशी निरीक्षकों सहित विभागीय अधिकारियों ने धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी विकासखंड के कई सहकारी एवं निजी उर्वरक विक्रय केन्द्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मेसर्स लक्ष्मी ट्रेडर्स भखारा में गंभीर अनियमितता सामने आई। यहां निर्धारित मात्रा से अधिक उर्वरक बिक्री और भूमिहीन व्यक्ति को उर्वरक बेचने की पुष्टि होने पर दुकान का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। वहीं मेसर्स काप केयर एण्ड ट्रेडिंग झिरिया, पारस कृषि केन्द्र सोनामगर, कर्मा ट्रेडर्स सेमरा, कृष्णा फर्टिलाईजर कुरूद और राज कृषि केन्द्र नगरी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। कृषि विभाग का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित केन्द्रों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। खरीफ सीजन को देखते हुए जिले में उर्वरक की उपलब्धता और बिक्री व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे डीएपी के विकल्प के रूप में अन्य अनुशंसित उर्वरकों का उपयोग करें और उर्वरक खरीदते समय निर्धारित मूल्य पर ही खरीदी कर बिल अवश्य लें। उर्वरकों की गुणवत्ता, कालाबाजारी या अधिक कीमत वसूली की शिकायत नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय में तत्काल दर्ज कराने को कहा गया है।

रायपुर के कुटरु समाधान शिविर में उमड़ा जनसैलाब, तपती धूप में भी दिखा ग्रामीणों का उत्साह

रायपुर : समाधान शिविर कुटरु में उमड़ा जनसैलाब- तपती धूप में भी दिखा शासकीय योजनाओं के प्रति ग्रामीणों का भारी उत्साह ’बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने का आह्वान’ ’सुशासन तिहार भीषण गर्मी के बावजूद हजारों ग्रामीणों ने उठाया कल्याणकारी योजनाओं का लाभ’ रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन तिहार के अंतर्गत बीजापुर जिले के कुटरु में आयोजित समाधान शिविर में ग्रामीणों का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप की परवाह न करते हुए हजारों की संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं के त्वरित निराकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने शिविर पहुंचे। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने संबोधित करते हुए शासन की विभिन्न योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और तेंदूपत्ता संग्रहण जैसी जन-हितैषी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। ’सुशासन तिहार भीषण गर्मी के बावजूद हजारों ग्रामीणों ने उठाया कल्याणकारी योजनाओं का लाभ’            इस वृहद् शिविर में ग्राम पंचायत गुदमा, कोमपल्ली, केतुलनार, सकनापल्ली, अड़ावली, अम्बेली, कुटरु, मंगापेठा, दरभा, उसकापटनम, करकेली, हुर्रागुबाली, फरसेगढ़, रानीबोदली, सागमेटा, पेंकरम, सोमनपल्ली और मण्डेम सहित आस-पास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण बड़ी तादाद में सम्मिलित हुए। ’बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने का आह्वान’           मुख्य अतिथि का संदेश बस्तर मुन्ने (बस्तर के बच्चे/आगे) कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना हमारा संकल्प है। इसके लिए ग्रामीण अपने आवश्यक दस्तावेज समय पर तैयार रखें और शिविरों में तैनात शासकीय अमले का पूरा सहयोग करें। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में शासन की अधिकांश योजनाओं का लाभ डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जा रहा है, जिसके लिए बैंक खाता और आधार कार्ड का लिंक होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उन्होंने आयुष्मान कार्ड की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसके जरिए पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। ’भावनात्मक और सामाजिक सरोकार का अनूठा संगम’         शिविर में उस समय एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती माताओं की गोद भराई और छह माह पूर्ण कर चुके शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया गया। इस पहल ने प्रशासनिक शिविर को एक पारिवारिक और आत्मीय उत्सव में बदल दिया। ’24 से अधिक विभागों ने दी अपनी सेवाएं’          ग्रामीणों की सुविधा के लिए शिविर में 24 से अधिक शासकीय विभागों ने अपने स्टॉल लगाए थे, जहाँ पात्र हितग्राहियों को ऑन-द-स्पॉट लाभान्वित किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नव-निर्मित पक्के मकानों की चाबियाँ हितग्राहियों को सौंपी गईं। समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सहायक उपकरणों का वितरण किया गया। कृषि, मत्स्य, राजस्व सहित अन्य प्रमुख विभागों द्वारा कृषि इनपुट और संबंधित सामग्रियों का वितरण किया गया। जनसंपर्क विभाग द्वारा राज्य शासन की उपलब्धियों और योजनाओं पर आधारित विभिन्न मार्गदर्शिका, शासकीय प्रकाशनों और सूचना सामग्रियों का निःशुल्क वितरण किया गया। ’जन-समस्याओं के त्वरित निराकरण का भरोसा’         सुशासन तिहार के इस मंच पर ग्रामीणों ने अपनी व्यक्तिगत और सामुदायिक समस्याओं से संबंधित आवेदन भी प्रस्तुत किए। शिविर में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी आवेदनों को संवेदनशीलता से दर्ज करते हुए उनके शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निराकरण का ठोस आश्वासन दिया। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष श्रीमती दशरी कोरसा, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती प्रीति आरकी, जनपद उपाध्यक्ष जितेंद्र लेकाम सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, एसडीएम भैरमगढ़, जनपद पंचायत सीईओ और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

सड़क हादसे रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाएं: मुख्य सचिव का सख्त निर्देश

रायपुर : सड़क दुर्घटनाएं नहीं हों, इसके लिए हर जरूरी कदम उठाएं : मुख्य सचिव ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश, प्रदेश में 150 स्थानों पर लगे ईव्ही चार्जिंग स्टेशन रायपुर मुख्य सचिव विकासशील ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए सभी समुचित और ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव आज मंत्रालय में सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित बैठक में अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।   ब्लैक स्पॉट सुधारने पर विशेष जोर मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के लिए चिन्हित ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और वहां आवश्यक सुधार कार्य तत्काल किए जाएं। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय से सड़कों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए ताकि हादसों की आशंका खत्म हो सके।    सुप्रीम कोर्ट और केंद्र की योजनाओं की समीक्षा बैठक में राज्य सड़क सुरक्षा कोष, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा फलोदी एवं रंगा रेड्डी सड़क दुर्घटना मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। साथ ही पीएम राहत योजना और पीएम ई-ड्राईव योजना की प्रगति की जानकारी ली गई।  मुख्य सचिव ने सर्वाेच्च न्यायालय की कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने को कहा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सड़क दुर्घटना रेस्क्यू से संबंधित एसओपी के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।   ईव्ही चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने के निर्देश मुख्य सचिव ने पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत ई-वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन की स्थापना में तेजी लाने को कहा। उन्होंने परिवहन विभाग को निर्धारित स्थलों पर तत्काल ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 150 स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इन स्टेशनों पर पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत सब्सिडी भी दी जाती है।  घायलों को मिलेगा कैशलेस इलाज मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को त्वरित उपचार मिलना सबसे जरूरी है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत घायलों का अस्पताल में कैशलेस उपचार किया जाता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, गृह-पुलिस, परिवहन तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत अब तक 282 सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के उपचार के लिए पंजीकरण किया गया है। मुख्य सचिव ने इस योजना के क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की और इसे और प्रभावी बनाने को कहा।   बैठक में परिवहन विभाग के सचिव एवं आयुक्त एस. प्रकाश, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुआर. शंगीता सहित पुलिस, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

गति शक्ति और आत्मनिर्भर भारत के विजन से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान

बदलता इंफ्रास्ट्रक्चर, बढ़ता भारतः रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से खुलेगा तरक्की का द्वार गति शक्ति और आत्मनिर्भर भारत के विजन से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान रायपुर  भारत आज तीव्र गति से आधुनिक बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और सुदृढ़ आर्थिक नेटवर्क के निर्माण की दिशा में अग्रसर है। सड़क, रेल, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स को एकीकृत करते हुए देश को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास निरंतर जारी है। विकास के इसी दूरदर्शी दृष्टिकोण का एक उत्कृष्ट उदाहरण रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर है। यह कॉरिडोर केवल दो शहरों को जोड़ने वाली सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह ष्नए भारत की नई रफ्तारष् का प्रतीक है, जो उद्योग, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए क्षितिज खोलने जा रहा है। मध्य-पूर्वी समुद्री तट को जोड़ने वाला महामार्ग            रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर देश के मध्य भाग को पूर्वी समुद्री तट से जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक मार्ग है। यह छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी (संपर्क) स्थापित करेगा, जिससे सड़क परिवहन, लॉजिस्टिक नेटवर्क और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इस परियोजना को प्रधानमंत्री की “गति शक्ति” और “आत्मनिर्भर भारत” की सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विकास का मूलमंत्र           किसी भी राज्य या देश के विकास का सबसे मजबूत आधार उसका इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। जहां विश्वस्तरीय सड़कें, सुगम परिवहन और अत्याधुनिक लॉजिस्टिक सुविधाएं होती हैं, वहां उद्योगों का तेजी से विस्तार होता है और निवेश आकर्षित होता है। यह कॉरिडोर माल परिवहन को अधिक तीव्र, सुरक्षित और लागत प्रभावी (कम खर्चीला) बनाएगा। इसके परिणामस्वरूप उद्योगों को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होगा और तैयार उत्पाद कम से कम समय में बाजार तक पहुंच सकेंगे।           चूंकि विशाखापट्टनम बंदरगाह देश के प्रमुख समुद्री द्वारों में से एक है, इसलिए इस कॉरिडोर के माध्यम से छत्तीसगढ़ को सीधे पोर्ट कनेक्टिविटी मिलेगी। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि राज्य के उद्योगों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच स्थापित होगी, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी। छत्तीसगढ़ को मिलने वाले प्रमुख लाभ           रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। छत्तीसगढ़ खनिज संपदा, ऊर्जा संसाधनों, कृषि और वनोपज से समृद्ध राज्य है। यहाँ लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट और स्टील उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं। पूर्व में बेहतर परिवहन और लॉजिस्टिक नेटवर्क के अभाव के कारण उद्योग अपनी पूरी क्षमता का लाभ नहीं उठा पाते थे, परंतु यह कॉरिडोर इन चुनौतियों को समूल समाप्त कर देगा। औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन           कॉरिडोर के निर्माण से रायपुर, दुर्ग, भिलाई, धमतरी, कांकेर और जगदलपुर जैसे क्षेत्रों में नए औद्योगिक क्लस्टर्स विकसित होंगे। स्टील, सीमेंट, एल्युमिनियम, खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) और एमएसएमई (लघु उद्योगों) को एक नई ऊर्जा मिलेगी, जिससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का रुझान इस क्षेत्र की ओर तेजी से बढ़ेगा। रोजगार के नए अवसरों का सृजन        इतनी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना के आने से रोजगार के अवसर भी आनुपातिक रूप से बढ़ते हैं। सड़क निर्माण, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक पार्क्स, नई औद्योगिक इकाइयों और परिवहन सेवाओं के माध्यम से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में जीविकोपार्जन के साधन मिलने से पलायन की समस्या पर काफी हद तक रोक लगेगी। बस्तर क्षेत्र का कायाकल्प          यह कॉरिडोर बस्तर संभाग के लिए विशेष रूप से परिवर्तनकारी सिद्ध होगा। लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से कटे क्षेत्रों में बेहतर सड़क और व्यापारिक संपर्क स्थापित होगा। बस्तर के बहुमूल्य वन उत्पाद, अनूठे हस्तशिल्प, कृषि उपज और लघु उद्योगों को बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी, जिससे आदिवासी समुदायों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। कृषि और वनोपज को सही मूल्य               छत्तीसगढ़ देश में धान के कटोरे के रूप में प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त यहाँ मक्का, दलहन, फल और लघु वनोपज का भी प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता है। बेहतर परिवहन व्यवस्था से किसानों और वनोपज संग्राहकों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में सुगमता होगी। परिवहन लागत घटने से सीधे तौर पर किसानों का मुनाफा बढ़ेगा। पर्यटन उद्योग को नई उड़ान            चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर और बस्तर के सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच सुगम होने से राज्य में पर्यटन उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा। इससे होटल, गाइड, स्थानीय परिवहन और हस्तशिल्प व्यवसायियों की आय दोगुनी होगी। व्यापार और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि            विशाखापट्टनम पोर्ट तक आसान और तेज पहुंच से छत्तीसगढ़ के उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता (कॉम्पिटिटिवनेस) बढ़ेगी। संक्षेप में कहें तो, रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर महज एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता का नया महामार्ग है। यह छत्तीसगढ़ को देश के एक प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक हब के रूप में स्थापित करने का सामर्थ्य रखता है।            मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही सशक्त अर्थव्यवस्था की नींव होता है, और यही परियोजना आने वाले समय में छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। नए भारत की नई रफ्तार का यह कॉरिडोर देश के हर कोने को प्रगति की साझा मुख्यधारा से जोड़ने का एक जीवंत माध्यम है। मुख्यमंत्री का विजनः छत्तीसगढ़ की समृद्धि का महामार्ग          मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर हमारे छत्तीसगढ़ की आर्थिक रीढ़ बनने जा रहा है। हमारा राज्य खनिज संपदा, कृषि और समृद्ध वनोपज से परिपूर्ण है, लेकिन वैश्विक बाजारों तक सीधी और तीव्र पहुंच न होने से हमारे उद्यमियों और किसानों को अपनी क्षमता का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। यह कॉरिडोर हमारी इस भौगोलिक चुनौती को अवसर में बदल देगा। विशाखापट्टनम बंदरगाह से सीधे जुड़ने के बाद छत्तीसगढ़ का स्टील, हस्तशिल्प और कृषि उत्पाद सीधे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपनी धाक जमाएंगे। हमारी सरकार का संकल्प है कि इस मार्ग के किनारे अत्याधुनिक औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्क विकसित किए जाएं, ताकि स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिले और बस्तर सहित पूरे राज्य में खुशहाली का एक नया … Read more

ग्रीष्मकाल में पानी की किल्लत रोकने सक्रिय हुआ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग

ग्रीष्म काल में स्वच्छ और नियमित पेयजल पहुंचाने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सतर्क  दूरस्थ गांवों तक निर्बाध पेयजल पहुंचाने जुटी पीएचई की टीमें तकनीकी कर्मचारियों और हैंडपंप मैकेनिकों को खराब हैंडपंपों, पाइपलाइन संबंधी समस्याओं व पेयजल व्यवस्था में आने वाली बाधाओं के तत्काल निराकरण के निर्देश रायपुर  भीषण गर्मी, उमस और लगातार बढ़ते जल संकट के बीच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम ग्रामीण क्षेत्रों में सुचारू पेयजल व्यवस्था बनाए रखने पूरी प्रतिबद्धता के साथ मैदान में डटी हुई है। ग्रीष्म काल में ग्रामीणों तक स्वच्छ और नियमित पेयजल पहुंचाने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम सतर्कता से काम कर रही है। वनांचलों और दूरस्थ गांवों तक निर्बाध पेयजल पहुंचाने विभाग तत्परता से काम कर रहा है। राज्य शासन ने विभाग के सभी तकनीकी कर्मचारियों और हैंडपंप मैकेनिकों को खराब हैंडपंपों, पाइपलाइन संबंधी समस्याओं एवं पेयजल व्यवस्था में आने वाली बाधाओं के तत्काल निराकरण के निर्देश दिए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर विभागीय अधिकारी लगातार ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर पेयजल योजनाओं की जमीनी स्थिति का निरीक्षण कर रहे हैं। विभाग की टीम भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीणों को पानी की समस्या से राहत दिलाने दिन-रात काम कर रही है। विभाग द्वारा दूरस्थ क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक शुद्ध और सुरक्षित पेयजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। ग्रीष्म काल में भी हर घर तक स्वच्छ, सुरक्षित और नियमित पेयजल की उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभागीय टीमें सक्रियता से काम कर रही हैं।   विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के तहत संचालित योजनाओं के नियमित संचालन के साथ-साथ ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। लोगों से आवश्यकता न होने पर नल की टोटी बंद रखने, पानी का दुरुपयोग रोकने और जल बचाने की अपील की जा रही है। विभाग द्वारा यह संदेश भी दिया जा रहा है कि पानी केवल आज की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य संसाधन है, इसलिए इसका संरक्षण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम भ्रमण के दौरान ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के सदस्यों के साथ बैठक कर योजनाओं के सतत संचालन में जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। ग्रामीणों को जल कर के संग्रहण के महत्व से अवगत कराया जा रहा है, ताकि योजनाओं का रखरखाव एवं संचालन लंबे समय तक निर्बाध रूप से जारी रखा जा सके। विभाग द्वारा प्रत्येक घर के नल कनेक्शन के पास सोख्ता गड्ढा के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण के साथ स्वच्छता भी सुनिश्चित हो सके।

आदिवासी समाज से दुनिया सीखे प्रकृति के साथ विकास: लाल किला मैदान में बोले CM विष्णुदेव साय

रायपुर  देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में  जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का एक विराट दृश्य देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और पारंपरिक समुदाय एक मंच पर जुटे। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। जल जंगल और जमीन की करते रहे हैं रक्षा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज पूरी दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है, ऐसे समय में जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से जुड़ी हुई है, जहां 42 प्रकार की जनजातियां निवास करती हैं और राज्य का लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है और भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष और बलिदान का इतिहास रचा। जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करने का कर रही है काम वहीं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को संरक्षित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि नया रायपुर में आयोजित ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल कर रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रह सके। साथ ही बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी और मातागुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। धर्मांतरण पर भी बोले सीएम सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि समाज के भीतर यह भावना लगातार प्रबल हो रही है कि जो लोग अपनी मूल जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और धर्म को छोड़ चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर किए जाने पर गंभीरता से विचार होना चाहिए, ताकि आरक्षण और सरकारी सुविधाओं का वास्तविक लाभ उन समुदायों तक पहुंचे जो आज भी अपनी मूल पहचान और परंपराओं को संरक्षित किए हुए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की अस्मिता, अधिकारों और सांस्कृतिक अस्तित्व की रक्षा की भावना से जुड़ी हुई है। इसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में उठाया जा रहा है। जनजातीय कलाकारों ने किया प्रदर्शन कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान में दिनभर गूंजते मांदर, ढोल और पारंपरिक लोकधुनों के बीच यह समागम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सशक्त राष्ट्रीय घोष बनकर सामने आया।

SC ने पूर्व आबकारी आयुक्त को दी बेल, कुछ शर्तों के साथ मिली राहत

रायपुर  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 25 मई 2026 को छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को करोड़ों रुपये के कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत दे दी है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुप एम. पंचोली की पीठ ने राहत प्रदान करते हुए कहा कि इस मामले के अन्य सह-आरोपी पहले से ही जमानत पर बाहर हैं और मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में काफी समय लगने की संभावना है.  अदालत ने मुख्य मामले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के मामले, दोनों में ही निरंजन दास को जमानत दी है. अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी नोट किया कि कथित तौर पर 'किंगपिन' बताए जा रहे निरंजन दास ने राज्य में अन्य सह-आरोपियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से आबकारी नीति बनाने में भूमिका निभाई थी.  मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि दास को इन मामलों में क्रमशः 18 सितंबर 2025 और 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने अन्य सह-आरोपियों की तरह ही दास पर भी कड़ी शर्तें लगाई हैं, जिसके तहत उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा और वे केवल अदालती सुनवाई व जांच में शामिल होने के लिए ही राज्य में आ सकेंगे.  हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि वे बाद में इन शर्तों में ढील देने की मांग कर सकते हैं. इससे पहले 1 मार्च को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इसी शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया को भी जमानत दे दी थी. इस पूरे मामले में राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 17 जनवरी 2024 को प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर आपराधिक पहलुओं की जांच शुरू की थी, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) 11 अप्रैल 2024 को मामला दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है.  ईडी के अनुसार, भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान साल 2019 से 2023 के बीच इस घोटाले को अंजाम दिया गया, जिसमें प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी दुकानों पर अवैध शराब सप्लाई कर वसूली की गई. केंद्रीय एजेंसी ने इस घोटाले से सरकारी खजाने को लगभग 2,883 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है.

सरेंडर नक्सलियों की सूचना पर बड़ी कार्रवाई, सुरक्षा बलों ने पकड़ी माओवादियों की हथियार निर्माण यूनिट

रायपुर  नक्सल मोर्चे पर मुस्तैद सुरक्षा बलों को माओवादियों के खिलाफ एक और बड़ी और रणनीतिक कामयाबी हाथ लगी है। गढ़चिरौली पुलिस ने नक्सलियों के एक गुप्त और अत्याधुनिक हथियार निर्माण कारखाने का पर्दाफाश करते हुए जंगल में छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में युद्ध सामग्री और मशीनों को बरामद कर नष्ट कर दिया है। पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह पूरी सफलता हाल ही में आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से मिली बेहद सटीक और खुफिया जानकारी के बाद हाथ लगी है, जिससे सुरक्षा बलों पर होने वाले कई बड़े हमलों को समय रहते टाल दिया गया है। माओवादियों से पूछताछ में खुलासा दरअसल, माओवादी सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करने और विभिन्न हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए जंगलों में जमीन के नीचे हथियार और विस्फोटक छिपाकर रखते थे। इस बड़ी साजिश का खुलासा तब हुआ जब 16 मई 2026 को ' ऑपरेशन अंतिम प्रहार ' के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान नक्सलियों ने स्वीकार किया कि बिनागुंडा क्षेत्र के घने जंगलों में हथियार बनाने का एक गुप्त ठिकाना सक्रिय है, जहां भारी मात्रा में खतरनाक उपकरण जमीन के नीचे दबाकर रखे गए हैं। बीडीडीएस टीम ने घेरा जंगल सटीक इनपुट मिलते ही गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक के कुशल मार्गदर्शन में एक विशेष रणनीति तैयार की गई। 21 मई 2026 को विशेष अभियान दल गढ़चिरौली, प्राणहिता और बम निरोधक दस्ते की संयुक्त टीमों को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। 22 मई को सुरक्षा बलों ने बिनागुंडा पुलिस सहायता केंद्र के उत्तर दिशा में स्थित जंगलों को चारों तरफ से घेर लिया। बीडीडीएस के जवानों ने जब आधुनिक मेटल डिटेक्टर्स और तकनीकी उपकरणों की मदद से सघन तलाशी अभियान चलाया, तो जमीन के नीचे छुपाए गए हथियारों के इस बड़े कारखाने का पता चला। सुरक्षा बलों ने मौके से हथियार तराशने वाली लेथ मशीन से लेकर बिजली आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले सोलर पैनल और जनरेटर तक बरामद किए हैं। जानकारों का मानना है कि इस फैक्ट्री के ध्वस्त होने से नक्सलियों की हथियार सप्लाई चेन को भारी नुकसान पहुंचा है।

कोर्ट का बड़ा फैसला: बहू की मौत के बाद सास को मिलेगा 18 लाख रुपये हर्जाना

बिलासपुर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी मनीषा ठाकुर की अदालत ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाली 22 वर्षीय विवाहिता अंजनी ध्रुव की मृत्यु पर उसके परिजनों के पक्ष में 18,03,720 रुपये का क्लेम अवार्ड पारित किया है। घटना 16 दिसंबर 2023 की है, जब ग्राम भिलाई (मस्तुरी) निवासी अंजनी अपने पति चोलाराम ध्रुव के साथ मोटर साइकिल पर पीछे बैठकर अस्पताल जा रही थी। भिलाई पुल के पास पति ने वाहन को तेजी व लापरवाही से चलाया, जिससे गिरकर अंजनी की मौत हो गई। थाना मस्तुरी में आरोपी पति के खिलाफ मर्ग दर्ज था। बीमा कंपनी ने मृतिका की लापरवाही और चालक के पास वैध लाइसेंस न होने की दलीलें दीं, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पति के पास वर्ष 2035 तक वैध लाइसेंस मौजूद था। आय का पुख्ता प्रमाण न होने पर कोर्ट ने श्रमायुक्त की न्यूनतम मजदूरी दर से ₹10,100 मासिक आय तय की। चूंकि मृतिका पति के साथ पृथक रहती थी, इसलिए कोर्ट ने जेठ-जेठानी को आश्रित न मानकर केवल सास (कमला बाई) को मुख्य आश्रित माना। वित्तीय सुरक्षा के लिए कोर्ट ने आदेश दिया कि जेठ-जेठानी व उनके बच्चों को स्नेह हानि के एवज में कुल 1,92,000 रुपए नगद दिए जाएंगे। वहीं, मुख्य आश्रित (सास) की राशि का 30% हिस्सा 3 वर्ष के लिए बैंक में फिक्स रहेगा, ताकि उन्हें नियमित ब्याज मिलता रहे और रकम सुरक्षित रहे। शेष 70% राशि तत्काल ट्रांसफर होगी।  

अब एयरपोर्ट पर नहीं बना सकेंगे रील, रायपुर समेत देशभर में DGCA के नए नियम लागू

 रायपुर  एयरपोर्ट परिसर में रील, वीडियो और फोटो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट करने वालों के लिए अब सख्ती बढ़ा दी गई है। रायपुर समेत देश के बड़े एयरपोर्ट पर लगातार बढ़ते रील कल्चर और सुरक्षा संबंधी शिकायतों के बाद डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एविएशन (DGCA) और ब्यूरो आफ सिविल एविएशन सिक्यूरिटी (BCAS) ने नई गाइडलाइन जारी की है। इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में शूटिंग पूरी तरह प्रतिबंधित नई गाइडलाइन के तहत एयरपोर्ट के संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्रों में फोटो, वीडियो और रील बनाना पूरी तरह बैन रहेगा। सुरक्षा जांच क्षेत्र, विमान पार्किंग एरिया और यात्रियों को विमान तक ले जाने वाले जोन में कैमरा चलाने पर कार्रवाई की जाएगी। डीजीसीए ने इसे सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय माना है। अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा होल्ड एरिया, जहां सीआइएसएफ यात्रियों और सामान की जांच करती है, वहां किसी भी प्रकार की वीडियो शूटिंग या फोटोग्राफी कानूनी अपराध मानी जाएगी। विमान के पास वीडियो शूटिंग पर रोक विमान खड़े होने वाले क्षेत्र, रनवे से जुड़े हिस्सों और बस से विमान तक जाने वाले रास्तों में रुककर वीडियो या फोटो बनाना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि ऐसी गतिविधियों से विमान संचालन और मेंटेनेंस कार्य प्रभावित होते हैं और सुरक्षा जोखिम बढ़ता है। उड़ान के दौरान सीमित छूट डीजीसीए के निर्देशों के अनुसार यात्री टेकआफ, लैंडिंग या उड़ान के दौरान अपनी सीट से सामान्य फोटो या वीडियो ले सकते हैं। ऐसा कोई उपकरण या तरीका इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा, जिससे विमान संचालन प्रभावित हो। केबिन क्रू यदि कैमरा बंद करने का निर्देश देता है तो उसका पालन करना अनिवार्य होगा। नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई एयरपोर्ट के प्रतिबंधित क्षेत्रों में वीडियो या रील बनाते पाए जाने पर सीआइएसएफ द्वारा फोन या रिकार्डिंग उपकरण जब्त किया जा सकता है। संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विमान अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। साथ ही उसे अनरूली पैसेंजर घोषित कर तीन महीने से लेकर दो साल या उससे अधिक समय तक हवाई यात्रा से प्रतिबंधित किया जा सकता है। प्रोफेशनल शूटिंग के लिए अनुमति जरूरी यदि कोई व्यक्ति विज्ञापन, फिल्म या प्रोफेशनल ब्लाग के लिए एयरपोर्ट परिसर में शूटिंग करना चाहता है तो उसे डीजीसीए और संबंधित एयरपोर्ट अथारिटी से पहले अनुमति लेनी होगी। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी जमा करना अनिवार्य रहेगा।