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छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव, दुर्ग और बिलासपुर में कमिश्नरेट सिस्टम की तैयारी

दुर्ग. छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा संकेत दिया है. राजधानी रायपुर के बाद अब बिलासपुर और दुर्ग में भी पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने की तैयारी है. राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने भिलाई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन शहरों में बढ़ती आबादी, शहरी विस्तार और अपराध नियंत्रण की जरूरत होगी, वहां चरणबद्ध तरीके से यह व्यवस्था लागू की जाएगी. सरकार इसे शहरी पुलिसिंग को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम मान रही है. गृहमंत्री ने कहा कि कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने से पुलिस को अधिक प्रशासनिक और कार्यकारी अधिकार मिलेंगे. इससे अपराध पर त्वरित नियंत्रण, निर्णय प्रक्रिया में तेजी और जवाबदेही तय करने में सुविधा होगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार इस मॉडल को जरूरत के आधार पर अन्य शहरों में भी विस्तार दे सकती है. हालांकि लागू करने की समयसीमा पर उन्होंने कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की, लेकिन इसे प्राथमिकता में शामिल बताया. कमिश्नरेट प्रणाली क्या है कमिश्नरेट प्रणाली में पुलिस आयुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कई कार्यकारी अधिकार मिलते हैं. वर्तमान पारंपरिक व्यवस्था में ये अधिकार जिला दंडाधिकारी के पास होते हैं. नई प्रणाली में मजिस्ट्रियल शक्तियां पुलिस आयुक्त को हस्तांतरित हो जाती हैं, जिससे धारा 144 लागू करने, लाइसेंस जारी करने और भीड़ नियंत्रण जैसे फैसले तेजी से लिए जा सकते हैं. बड़े और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में इसे प्रभावी मॉडल माना जाता है. रायपुर के बाद दो बड़े शहर राजधानी रायपुर में पहले ही कमिश्नरेट प्रणाली लागू की जा चुकी है. अब बिलासपुर और दुर्ग को भी इसमें शामिल करने की घोषणा की गई है. बिलासपुर न्यायिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है, जबकि दुर्ग और भिलाई औद्योगिक क्षेत्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहे हैं. इन शहरों में बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण को देख सरकार ने यह निर्णय लिया है. पुलिस को मिलेंगे अतिरिक्त अधिकार गृहमंत्री के मुताबिक इस प्रणाली से पुलिस को कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में स्वतंत्र और त्वरित निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा. अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और संगठित अपराध पर निगरानी में मजबूती आएगी. आम नागरिकों को भी शिकायतों के समाधान में तेजी का लाभ मिलेगा. इससे प्रशासनिक समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है.

जनसुविधाओं से समृद्ध होगा शहर, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी बोले- विकास कार्य लगातार जारी

शहर को सुव्यवस्थित, आधुनिक और जनसुविधाओं से समृद्ध बनाने लगातार किए जा रहे कार्य : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी वित्त मंत्री ने रायगढ़ नगर निगम क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं शिलान्यास सामुदायिक भवन, बाल उद्यान और नाली निर्माण से बढ़ेंगी नागरिक सुविधाएं अधोसंरचना विकास, पर्यावरण संरक्षण और युवाओं के लिए आधुनिक सुविधाओं पर विशेष जोर रायपुर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने नगर पालिक निगम रायगढ़ क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास करते हुए कहा कि रायगढ़ शहर को सुव्यवस्थित, आधुनिक और जनसुविधाओं से समृद्ध बनाने के उद्देश्य से लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर के विकास में अधोसंरचना विस्तार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सुविधाओं और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साहू समाज सामुदायिक भवन का लोकार्पण वित्त मंत्री चौधरी ने नगर निगम के वार्ड क्रमांक 28 में विधायक निधि से लगभग 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित साहू समाज सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भवन सामाजिक गतिविधियों, बैठकों, सांस्कृतिक आयोजनों और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। ऐसे भवन समाज के लोगों को सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराते हैं और सामाजिक समन्वय को मजबूत करते हैं। इस अवसर पर चौधरी ने कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले साहू समाज के छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। श्रीराम कॉलोनी में बाल उद्यान का जीर्णोद्धार वार्ड क्रमांक 21, श्रीराम कॉलोनी में अधोसंरचना विकास एवं पर्यावरण उपकर निधि से लगभग 46 लाख रुपये की लागत से बाल उद्यान जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत लैंडस्केपिंग, पौधरोपण, मुख्य द्वार, बाउंड्रीवाल, विद्युतीकरण, बच्चों के खेल उपकरण, बैठने की व्यवस्था सहित अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वित्त मंत्री ने कहा कि इस उद्यान के विकसित होने से बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थल मिलेगा तथा शहर के हरित क्षेत्र में वृद्धि होगी। नाली निर्माण से सुदृढ़ होगी जल निकासी व्यवस्था रायगढ़ स्टेडियम के पीछे से श्रीराम कॉलोनी मोड़ तक लगभग 37.88 लाख रुपये की लागत से 580 मीटर लंबी नाली निर्माण कार्य का शिलान्यास भी किया गया। इस निर्माण से क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था में सुधार होगा और बरसात के दौरान होने वाली समस्याओं में कमी आएगी। चौधरी ने कहा कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जल निकासी संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं। रायगढ़ में तेजी से आगे बढ़ रहे विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि रायगढ़ में सड़क, पुल, केलो नदी तट विकास, तालाब सौंदर्यीकरण, उद्यान निर्माण और ऑक्सीजन जोन जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। इतवारी बाजार क्षेत्र को ऑक्सीजन जोन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिलेगा। उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन नालंदा परिसर युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का आधुनिक अध्ययन केंद्र बनेगा, जहां पुस्तकालय, अध्ययन कक्ष और मार्गदर्शन की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। बिजली बिल समाधान एवं सौर ऊर्जा योजनाओं की जानकारी कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की जानकारी देते हुए कहा कि इसके माध्यम से उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिलों में राहत मिल रही है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दी जा रही सब्सिडी की जानकारी भी दी और नागरिकों से योजना से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम में नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान, सभापति डिग्री लाल साहू, जनप्रतिनिधिगण, समाज के पदाधिकारी, अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

Census को लेकर सख्ती, सही जवाब देना होगा अनिवार्य; घर के नंबर हटाने पर कार्रवाई

दुर्ग. आगामी जनगणना के सुचारू संचालन के लिए प्रगणकों और नागरिकों के लिए अनिवार्य गाइडलाइंस जारी की हैं। जिसके अनुसार सभी नागरिक प्रगणक द्वारा पूछे गए वैधानिक प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए बाध्य हैं। यही नहीं अगर कोई व्यक्ति मकान पर लिखे नंबर को मिटाया या नुकसान पहुंचाता है तो उस पर 1000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग की अधिसूचना के परिपालन में जिला प्रशासन ने गाइडलाइंस जारी की गई है. इसमें बड़ी बात यह है कि सभी नागरिक प्रगणक द्वारा पूछे गए वैधानिक प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए बाध्य हैं। हालांकि, स्थानीय सामाजिक परंपराओं का सम्मान करते हुए किसी भी महिला को उसके पति/ मृत पति का नाम या किसी भी नागरिक को अपने परिवार के सदस्यों का नाम बताने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। नागरिकों को अपने घरों में प्रगणकों को युक्तियुक्त प्रवेश देने और मकानों पर जनगणना के लिए आवश्यक नंबर या चिन्ह लगाने की अनुमति देनी होगी। प्रगणकों को भी नागरिकों के साथ शालीन व्यवहार करने और घरेलू रूढ़ियों का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए है। प्रगणकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे वैधानिक सीमा में रहकर केवल केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में निर्दिष्ट और निर्धारित प्रश्नों को ही पूछें तथा नागरिकों से अनावश्यक या अतिरिक्त पूछताछ न करें। साथ ही, अपने कर्तव्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या इंकार करने पर प्रगणकों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है, उत्तर देने से इनकार करता है, या मकानों पर लिखे गए नंबरों को मिटाता / नुकसान पहुंचाता है, तो उस पर 1,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जनगणना कार्य में बाधा डालने या कार्यालय में अनधिकृत प्रवेश करने पर 1,000 रु. जुर्माने के साथ अधिकतम 3 वर्ष तक की जेल का भी प्रावधान है। जनता के भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया गया है कि जनगणना में प्राप्त किये गए आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रहेंगे। इन्हें किसी भी दीवानी या आपराधिक मामले में कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता। ज्ञात हो कि जनगणना के आंकड़ों का प्राथमिक उपयोग केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सटीक नीति निर्धारण, लोक प्रशासन और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन व आरक्षण के लिए किया जाता है। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से इस राष्ट्रीय कार्य में सही जानकारी देकर सहयोग करने की अपील की है।

महिला स्व-सहायता समूहों ने बदली गांवों की तस्वीर, आत्मनिर्भरता और पोषण का बन रहीं नया आधार

विशेष लेख आत्मनिर्भरता, पोषण और बदलाव की नई पहचान बनीं महिला स्व-सहायता समूह रायपुर छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति को एक साथ जोड़ते हुए राज्य सरकार ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जिसने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता की नई रोशनी जगाई है। आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार (रेडी-टू-ईट) के निर्माण एवं वितरण का दायित्व महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपकर सरकार ने महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा में सशक्त भागीदारी का अवसर भी प्रदान किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रारंभ की गई यह पहल राज्य में महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में उभर रही है। पहले जहां पूरक पोषण आहार निर्माण का कार्य बाहरी एजेंसियों के माध्यम से किया जाता था, वहीं अब यह जिम्मेदारी गांव की महिलाओं ने संभाल ली है, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हुआ है और महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रही है। राज्य सरकार ने प्रथम चरण में रायगढ़, कोरबा, सूरजपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिलें में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया है। इन छह जिलें के 42 महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण एवं वितरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन समूहों के माध्यम से हजारों महिलाओं को रोजगार मिली है और वे अब संगठित रूप से उत्पादन, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और वितरण का कार्य संभाल रही हैं। प्रदेश का पहला रेडी-टू-ईट उत्पादन रायगढ़ जिले में प्रारंभ हुआ, जिसने पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। कोरबा जिले में 10, रायगढ़ में 10, सूरजपुर एवं बलौदाबाजार-भाटापारा में 7-7, बस्तर में 6 तथा दंतेवाड़ा में 2 महिला स्व-सहायता समूह इस कार्य से जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण पूरक पोषण आहार पहुंचाया जा रहा है। इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे महिलाओं की भूमिका केवल श्रमिक तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे प्रबंधन और निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा भी बनी हैं। उत्पादन इकाइयों में कार्यरत महिलाओं को मशीन संचालन, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, भंडारण वितरण और लेखा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित इन इकाइयों ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। सूरजपुर जिले में संचालित रेडी-टू-ईट निर्माण संयंत्र इस बदलाव की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। भैयाथान, प्रतापपुर और सूरजपुर विकासखंडों में संचालित संयंत्रों में महिलाएं पौष्टिक नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार तैयार कर रही हैं। इन खाद्य पदार्थों में विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘डी’, आयरन, कैल्शियम, जिंक और फोलिक एसिड जैसे आवश्यक पोषक तत्व शामिल हैं, जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इन संयंत्रों में कार्यरत महिलाएं अब केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां नहीं निभा रहीं, बल्कि जिले के पोषण अभियान में महत्वपूर्ण भागीदार बन चुकी हैं। सूरजपुर जिले में निर्माण के साथ-साथ वितरण की जिम्मेदारी भी महिला समूहों को सौंपी गई है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं आजीविका से जुड़ सकी हैं। लगभग 430 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार पहुंचाने के कार्य में सक्रिय रूप से लगी हुई हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस पहल को महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और बच्चों के बेहतर पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि यह योजना महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ राज्य के पोषण स्तर में सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। दरअसल, यह पहल केवल पोषण आहार निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव की एक सशक्त कहानी भी है, जिन महिलाओं की पहचान कभी केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थी, वे आज उत्पादन इकाइयों का संचालन कर रही हैं। समूहों का नेतृत्व कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही हैं। नियमित आय ने उनके जीवन में स्थिरता लाई है, आत्मविश्वास बढ़ाया है और समाज में उनकी भागीदारी को मजबूत किया है। छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संचालित यह मॉडल “पोषण के साथ सशक्तिकरण” की अवधारणा को वास्तविक रूप दे रहा है। यह पहल साबित कर रही है कि जब महिलाओं को अवसर और विश्वास मिलता है, तो वे न केवल अपने जीवन को बदलती हैं, बल्कि पूरे समाज के विकास की दिशा भी तय करती हैं। • डॉ. दानेश्वरी संभाकर • उप संचालक (जनसंपर्क)

ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में छत्तीसगढ़ बंद, हजारों मेडिकल स्टोरों पर लटके ताले

सरगुजा. ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में आज देशभर में केमिस्ट संगठन हड़ताल पर हैं। छत्तीसगढ़ में करीब 18 हजार मेडिकल स्टोर बंद हैं, जिनमें थोक और रिटेल दोनों दुकानें शामिल हैं। रायपुर, बिलासपुर में सुबह से मेडिकल स्टोर नहीं खुले हैं। संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियों की भारी छूट से छोटे मेडिकल स्टोर्स का कारोबार प्रभावित हो रहा है। दवा व्यापारियों के इस आंदोलन को CAIT, चेंबर ऑफ कॉमर्स और कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ ने समर्थन दिया है। CAIT के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन अमर पारवानी ने कहा कि यह सिर्फ दवा कारोबार का मुद्दा नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों और स्थानीय बाजार को बचाने का मामला है। डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय कृपलानी ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री और भारी छूट की वजह से स्थानीय मेडिकल स्टोर्स का कारोबार प्रभावित हो रहा है। इससे छोटे व्यापारियों पर संकट बढ़ रहा है। स्थानीय व्यापारियों के हितों पर ध्यान दे सरकार छत्तीसगढ़ कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ ने भी दवा व्यापारियों की हड़ताल का समर्थन किया है। प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि बड़ी ऑनलाइन और विदेशी कंपनियां भारी छूट देकर स्थानीय दवा कारोबार को नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ दवा व्यापारियों की नहीं, बल्कि छोटे कारोबारियों की भी है। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि स्थानीय व्यापारियों और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाएं। कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ ने केमिस्ट हड़ताल का किया समर्थन। मरीजों को परेशानी ना हो इसके लिए व्यवस्था देशभर में चल रही हड़ताल को देखते हुए छत्तीसगढ़ खाद्य एवं औषधि प्रशासन अलर्ट हो गया है। मरीजों को दवाओं की कमी न हो, इसके लिए राज्यभर में जरूरी दवाएं और मेडिकल सामान उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि सरकारी जनऔषधि केंद्रों, धन्वंतरी मेडिकल स्टोर्स, सरकारी अस्पतालों, नर्सिंग होम और अन्य मेडिकल स्टोर्स के जरिए लोगों को जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जा रही है। केमिस्ट एसोसिएशन से सहयोग की अपील खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने छत्तीसगढ़ केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन से भी अपील की है कि हड़ताल के दौरान मरीजों को जरूरी दवाएं मिलती रहे। इसके लिए दवा दुकानों और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित न करने में सहयोग मांगा गया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है। जरूरत से ज्यादा दवाइयों का स्टॉक न करें प्रशासन ने अपील की है कि घबराकर ज्यादा दवाइयां जमा न करें। रोजाना दवा लेने वाले लोग जरूरत की दवाएं पहले से रख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर सरकारी अस्पतालों, जनऔषधि केंद्रों और मेडिकल स्टोर्स में दवाइयां उपलब्ध रहेंगी।

बस्तर की पारंपरिक शिल्पकला को मिली बड़ी पहचान, अमित शाह-योगी को दिए गए विशेष उपहार

कोंडागांव. बस्तर की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की पहल कोंडागांव में देखने को मिली. गृहमंत्री अमित शाह को भगवान गणेश की विशेष शिल्पकृति भेंट कर स्थानीय कला का सम्मान किया गया. वहीं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मां दंतेश्वरी का चित्र स्मृति चिन्ह के रूप में प्रदान किया गया. यह शिल्पकृति स्थानीय मूर्तिकारों की मेहनत और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जा रही है. बताया गया कि कलाकार सुशील सखूजा ने इस कृति को तैयार करवाया, जबकि इसे मूर्त रूप देने में मदन का योगदान रहा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल कलाकृति नहीं, बल्कि बस्तर की लोक परंपराओं का प्रतिनिधित्व है. राष्ट्रीय नेतृत्व तक बस्तर की कला पहुंचने से स्थानीय कलाकारों में उत्साह देखा जा रहा है. ऐसी पहल से हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को नया बाजार मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है. कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, किरण सिंह देव और कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. बस्तर की कला लंबे समय से अपनी अलग पहचान रखती है. अब इसे राष्ट्रीय मंच मिलने से स्थानीय शिल्पकारों को प्रोत्साहन और रोजगार की संभावनाएं बढ़ने लगी हैं. सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाली इस पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है.

पीडब्ल्यूडी सचिव ने केशकाल घाटी फोरलेन प्रोजेक्ट का लिया जायजा, निर्माण कार्य तेज करने के आदेश

केशकाल. रायपुर-जगदलपुर मार्ग के बहुप्रतीक्षित केशकाल घाटी फोरलेन बायपास को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए. उन्होंने निर्माण एजेंसी और विभागीय अधिकारियों के साथ बायपास के दोनों छोरों का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान शेष पेड़ों की कटाई जल्द पूरी करने के निर्देश वन विभाग को दिए गए. साथ ही लंबित मुआवजा प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने पर भी जोर दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना बस्तर और छत्तीसगढ़ की यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. करीब 308 करोड़ रुपये की लागत से 11.38 किलोमीटर लंबा बायपास तैयार किया जा रहा है. परियोजना में दो बड़े और दो मध्यम पुलों का निर्माण भी शामिल है.घाटी क्षेत्र में लगातार लगने वाले जाम और दुर्घटनाओं को कम करने में यह बायपास अहम माना जा रहा है. सरकार ने इसे प्राथमिकता वाली परियोजना बताते हुए जल्द निर्माण पूरा करने के संकेत दिए हैं. निरीक्षण के दौरान प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे. अब स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित यह परियोजना जल्द धरातल पर दिखाई देगी.

नवा रायपुर अटल नगर बन रहा नए भारत का स्मार्ट चेहरा, विकास और निवेश से बदल रही तस्वीर

नवा रायपुर अटल नगर: विकास, निवेश और आधुनिक भारत का उभरता स्मार्ट शहर नवा रायपुर अटल नगर: उपलब्धियों से नई ऊँचाइयों की ओर रायपुर छत्तीसगढ़ की आधुनिक और योजनाबद्ध राजधानी नवा रायपुर अटल नगर आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे स्मार्ट शहरों में शामिल है। सुव्यवस्थित अधोसंरचना, हरित विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी, पर्यटन और महिला सशक्तिकरण जैसे विविध क्षेत्रों में हुई उल्लेखनीय प्रगति ने नवा रायपुर को भविष्य के भारत का आदर्श शहरी मॉडल बना दिया है। यह केवल प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि निवेश, नवाचार और समावेशी विकास का उभरता हुआ केंद्र है। स्मार्ट अधोसंरचना और शहरी सेवाओं में बड़ी उपलब्धियाँ नवा रायपुर अटल नगर में 52 एमएलडी क्षमता की पाइपलाइन और अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्र के माध्यम से पूरे शहर में दीर्घकालिक पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। इससे वर्तमान आबादी के साथ-साथ नए विकसित हो रहे सेक्टरों की आवश्यकताओं की भी पूर्ति हो सकेगी। वर्षाजल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए 10.66 किलोमीटर लंबी बायोस्वेल्स, रिचार्ज पिट्स और प्राकृतिक जल निकासी तंत्र विकसित किए गए हैं। इन पहलों ने न केवल जल संरक्षण को मजबूत किया है, बल्कि शहर के पर्यावरणीय संतुलन को भी सुदृढ़ किया है। परिवहन और कनेक्टिविटी को मिला नया आयाम रायपुर-राजिम रेल सेवा का नवा रायपुर के सीबीडी स्टेशन तक विस्तार शहर की कनेक्टिविटी को नई गति प्रदान कर रहा है। महिलाओं की सुरक्षित आवाजाही और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए पिंक ई-रिक्शा सेवा शुरू की गई है। साथ ही, ई-बस संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है और सेवा प्रारंभ होने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह पहल हरित और टिकाऊ शहरी परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शिक्षा के क्षेत्र में विकसित हो रहा एडूसिटी नवा रायपुर के 13 सहकारी विद्यालयों का उन्नयन किया गया है और दो उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया गया है। लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में एडूसिटी का विकास किया जा रहा है, जहाँ राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों जैसे National Institute of Fashion Technology (NIFT), National Institute of Electronics and Information Technology (NIELIT) और National Forensic Sciences University (NFSU), Narsee Monjee को भूमि आवंटित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त सेक्टर-7 में 17 एकड़ भूमि पर आवासीय विद्यालय की स्थापना प्रस्तावित है। मेडिसिटी: स्वास्थ्य सेवाओं का नया केंद्र मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में विश्वस्तरीय मेडिसिटी विकसित की जा रही है। यहाँ सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, डायग्नोस्टिक सेंटर, धर्मशाला, होटल और आवासीय सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। इस परियोजना के तहत Bombay Hospital को 300 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। साथ ही, लगभग 50 एकड़ भूमि पर आवासीय विकास हेतु निजी निवेशकों को भूखंड आवंटित किए गए हैं, जिनमें लगभग 350 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। महिला सशक्तिकरण और श्रमिक कल्याण कार्यरत महिलाओं के लिए 1,000 क्षमता वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का निर्माण 109 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यह परियोजना महिला सुरक्षा, सुविधा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी। इसके अतिरिक्त, प्रवासी श्रमिकों के लिए 1,100 क्षमता वाला सर्वसुविधायुक्त श्रमिक आवास भवन 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। पर्यटन, संस्कृति और MICE गंतव्य के रूप में उभार नवा रायपुर में 77 एकड़ भूमि पर सेवाग्राम तथा सेक्टर-39 में Art of Living Foundation को 40 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जहाँ सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के बड़े केंद्र विकसित हो रहे हैं। सेक्टर-4 और 10 में लगभग 120 एकड़ क्षेत्र में निजी निवेश के माध्यम से कन्वेंशन सेंटर कम स्पोर्ट्स सिटी विकसित की जा रही है। लगभग 800 करोड़ रुपये की इस परियोजना में विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर और टेनिस, तैराकी, कुश्ती, तीरंदाजी तथा स्क्वैश जैसी खेल सुविधाएँ शामिल होंगी। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी का उभरता हब नवा रायपुर में राज्य का पहला SEZ आधारित एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 4,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश अपेक्षित है। यहाँ भारत का पहला GaN तकनीक आधारित सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने के लिए भी भूमि आवंटित की गई है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) हेतु भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त हुई है, जहाँ PCB प्रोटोटाइपिंग, 3D प्रिंटिंग और EMC टेस्टिंग जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। सीबीडी क्षेत्र में प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर आईटी कंपनियों को सुसज्जित कार्यालय स्थान उपलब्ध कराए गए हैं। वर्तमान में लगभग 1,000 युवा कार्यरत हैं और 2,000 अतिरिक्त रोजगार सृजन की संभावना है। सतत विकास और हरित पहल “पीपल फॉर पीपल” अभियान के अंतर्गत 1 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जिससे शहर के 26 प्रतिशत हरित क्षेत्र को संरक्षित और विस्तारित करने में मदद मिली है। बायोस्वेल्स, रिचार्ज सिस्टम और हरित कॉरिडोर जैसे उपाय नवा रायपुर को पर्यावरण-अनुकूल और जल-संवेदनशील शहर के रूप में स्थापित कर रहे हैं। प्राधिकरण की आगामी कार्ययोजना नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण आने वाले वर्षों में शहर को और अधिक आधुनिक एवं निवेश-आकर्षक बनाने हेतु कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है: सेरीखेड़ी और मंदिरहसौद क्षेत्र में लगभग 1,100 एकड़ पर 800 करोड़ रुपये की लागत से अधोसंरचना विकास। राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) के एकीकृत विकास हेतु विशेष प्राधिकरण गठन। 500 एकड़ में मेडिसिटी और 200 एकड़ में एडूसिटी का विस्तार। नवा रायपुर को IT, ITeS और AI हब के रूप में स्थापित करना। वार्षिक पूंजीगत व्यय क्षमता को 1,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाना। वेलनेस सेंटर, वेडिंग डेस्टिनेशन, MICE कैपिटल और पर्यटन परियोजनाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहन। प्रभावित ग्राम पंचायतों में ग्राम विकास योजना के आधार पर आधुनिक अधोसंरचना विकास। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का तकनीकी उन्नयन। सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने हेतु 40 नई ई-बसों का संचालन। नई राजधानी, नए भारत की पहचान नवा रायपुर अटल नगर आज योजनाबद्ध विकास, आधुनिक सुविधाओं और सतत शहरीकरण का सशक्त उदाहरण बन चुका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, पर्यटन और हरित विकास के क्षेत्रों में निरंतर प्रगति इसे न केवल छत्तीसगढ़ की नई पहचान बना रही है, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है। आने वाले वर्षों में नवा रायपुर अटल नगर निश्चित ही भारत … Read more

न्यायालय परिसर बना रणक्षेत्र, सुनवाई के बीच भिड़े दोनों पक्ष; प्रशासन ने लिया एक्शन

बलरामपुर. जमीन से जुड़े मामले में सुनवाई के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे पक्षकार आपस में भिड़ गए. तहसील कार्यालय के पुलिस के निकाले जाने के बाद दोनों पक्ष तहसील परिसर में एक-दूसरे से मारपीट करने लगे. घटना पर वाड्रफनगर तहसीलदार गुरुदत्त पंचभावे की रिपोर्ट पर वाड्रफनगर चौकी पुलिस ने 18 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर धरपकड़ में जुटी है. दरअसल, वाड्रफनगर तहसीलदार के समक्ष मंगलवार को आवेदक इलियासुदीन पिता जलालूदीन विरूद्ध अनावेदकगण रसीद पिता इलियास, अफजल पिता इलियास और इलियास पिता इस्ताज के प्रकरण की सुनवाई हो रही थी. इसी दरम्यान अनावेदक पक्ष के पक्षकार एवं उनके साथ साक्ष्य के लिए उपस्थित गवाहों ने दूसरे पक्ष के अधिवक्ता सिद्वदकी के साथ गाली-गलौच करते हुए वाद-विवाद और मारपीट करने लगे. कोर्ट से निकाले जाने बाद तहसील एवं सिविल कोर्ट परिसर में दोनो पक्षों ने आपस में मारपीट की. घटना के मद्देनजर तहसीलदार पंचभोई ने न्यायालय की गरिमा को क्षति पहुंचाने के साथ शासकीय कार्य में बाधा डालने पर दोनो पक्षों के विरुद्ध शांति भंग करने पर बीएनएस की धारा 170 के तहत कार्रवाई करने पुलिस में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है. इसके साथ वीडियो भी संलग्न किया गया, जिससे पुलिस पूरे साक्ष्य के साथ मामले में कार्रवाई कर सके. मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू कर दी है.

7.5 करोड़ खर्च फिर भी घटिया निर्माण, निरीक्षण में खुली नहर घोटाले की परतें

डोंगरगढ़. डोंगरगढ़ क्षेत्र में देवकट्टा जलाशय से बेलगांव तक बनाई गई करीब 7.5 करोड़ रुपए की नहर परियोजना में गंभीर तकनीकी गड़बड़ियां सामने आने से हड़कंप मच गया है. ताजा निरीक्षण में नहर लाइनिंग की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हुए हैं. जांच के दौरान कई स्थानों पर लाइनिंग की मोटाई निर्धारित मानक से बेहद कम पाई गई, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी दोनों संदेह के घेरे में आ गई हैं. जानकारी के मुताबिक नहर लाइनिंग की मोटाई 4 इंच तय थी, लेकिन मौके पर कई हिस्सों में यह 2 इंच से भी कम मिली. कमजोर कंक्रीट और घटिया निर्माण के कारण डेढ़ साल के भीतर ही लाइनिंग उखड़ने लगी है. कई स्थानों पर बेस लेयर खुल चुकी है और नहर की स्थिति किसी टूटी नाली जैसी दिखाई दे रही है. नहर में जगह-जगह सिल्ट और कचरा जमा होने से जल प्रवाह भी प्रभावित हो रहा है. सिर्फ मुख्य नहर ही नहीं, उससे जुड़ी माइनर नहरों में भी भारी लापरवाही सामने आई है. किनारों की फिलिंग अधूरी बताई जा रही है और पर्याप्त कंपैक्शन नहीं होने से बरसात में कटाव का खतरा बढ़ गया है. कई हिस्सों में कंक्रीट की पतली परत उखड़ रही है, जिससे निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप और तेज हो गए हैं. बुधवार को विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान खामियों को गंभीर मानते हुए ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई गई और दोषपूर्ण हिस्सों में तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए. जानकारी यह भी सामने आई है कि मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है. किसानों का बड़ा आरोप किसानों का कहना है कि निर्माण कार्य अधूरा और मानक से कम होने के बावजूद पूरा भुगतान कर दिया गया. उनका दावा है कि यदि माप पुस्तिका और भुगतान रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हो जाए तो पूरी गड़बड़ी सामने आ सकती है. ग्रामीणों और किसानों ने चेतावनी दी है कि समय रहते गुणवत्ता सुधार नहीं किया गया तो आगामी बारिश में नहर की लाइनिंग बह सकती है, जिससे सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होने का खतरा है.