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1 लाख मतदाताओं के फैसले पर टिकी नजर, आज आएंगे 227 पदों के चुनाव नतीजे

रायपुर. छत्तीसगढ़ में हाल ही में संपन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत और नगरीय निकायों के आम एवं उप चुनाव के नतीजे आज घोषित किए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मतगणना की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुबह से मतगणना शुरू होगी और इसके साथ ही 5 नगरीय निकाय अध्यक्ष, 71 पार्षद, 10 जनपद पंचायत सदस्य, 34 सरपंच और 107 पंच पदों के लिए चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला सामने आने लगेगा। बता दें कि मतों की गणना प्रदेश के 13 निर्धारित मतगणना केंद्रों में की जाएगी, जहां मतगणना कार्य संपन्न कराने के लिए 395 अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। चुनाव परिणामों को लेकर प्रत्याशियों, समर्थकों और राजनीतिक दलों में उत्सुकता चरम पर है। इन चुनावों को स्थानीय स्तर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इनमें कई नवगठित नगर पंचायतों और रिक्त पंचायत पदों के लिए जनप्रतिनिधियों का चुनाव हुआ है। चुनाव परिणाम आने के बाद संबंधित क्षेत्रों में विकास और स्थानीय प्रशासन की नई दिशा तय होगी। मई में जारी हुआ था चुनाव कार्यक्रम राज्य निर्वाचन आयोग ने मई में नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन, जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद 1 जून को मतदान कराया गया, जबकि आज यानी 4 जून को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार पूरे चुनावी कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। मतदान के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त निगरानी रखी गई थी। 5 अध्यक्ष और 71 पार्षद पदों पर सबकी नजर नगरीय निकाय चुनाव में कुल 5 अध्यक्ष पद और 71 पार्षद पदों के लिए मतदान हुआ था। इनमें नवगठित नगर पंचायतों के चुनाव भी शामिल हैं। राजनांदगांव जिले की घुमका, जांजगीर-चांपा जिले की बम्हनीडीह, सूरजपुर जिले की शिवानंदनपुर और बलौद जिले की पलारी नगर पंचायत के नतीजों पर विशेष नजर रहेगी। इन क्षेत्रों में पहली बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला था। पंचायतों में भी कई महत्वपूर्ण पदों का फैसला पंचायत चुनाव में 10 जनपद पंचायत सदस्य, 34 सरपंच और 107 पंच पदों के लिए मतदान कराया गया था। कई जगहों पर मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है। स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और ग्रामीण नेतृत्व को लेकर मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था, जिसका परिणाम आज सामने आएगा। मतदान में दिखा था जबरदस्त उत्साह 1 जून को हुए मतदान में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। नगरीय निकाय चुनाव में 31,928 मतदाताओं में से 27,006 मतदाताओं ने मतदान किया, जिससे 84.58 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। वहीं पंचायत चुनाव में 1,02,797 मतदाताओं में से 79,968 लोगों ने वोट डाले और 78.61 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड किया गया। मतदान के लिए नगरीय निकाय क्षेत्रों में 96 और पंचायत क्षेत्रों में 274 मतदान केंद्र बनाए गए थे। राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताया था। राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की बढ़ी धड़कनें मतगणना को लेकर प्रत्याशियों और उनके समर्थकों में उत्सुकता चरम पर है। मतदान के बाद से ही जीत-हार को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कई सीटों पर कांटे की टक्कर की संभावना जताई जा रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में एकतरफा मुकाबले की भी चर्चा है। स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव भले ही गैर-दलीय आधार पर लड़े जाते हों, लेकिन इनके परिणामों को राजनीतिक दलों की जमीनी पकड़ और संगठनात्मक ताकत के पैमाने के रूप में भी देखा जाता है। ऐसे में आज आने वाले नतीजों पर प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों की भी नजर बनी हुई है।

खाद, बीज और उर्वरकों की समय पर उपलब्धता से किसानों में उत्साह

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की किसान-केंद्रित नीतियों और सुशासन के परिणामस्वरूप प्रदेश में खरीफ सीजन की तैयारियां सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही हैं। किसानों को समय पर आवश्यक कृषि संसाधन उपलब्ध कराने के लिए शासन ने व्यापक और प्रभावी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। इससे किसानों को खेती की तैयारियों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। बेहतर प्रबंधन और सरल प्रक्रियाओं के कारण किसान न केवल संतुष्ट हैं, बल्कि आगामी फसल को लेकर भी आशान्वित और उत्साहित हैं। फसल विविधीकरण को दे रहे हैं बढ़ावा             कोरबा जिले के ग्राम झगरहा निवासी कृषक श्री रामरतन निकुंज, दादरखुर्द निवासी कृषक श्री लकेश्वर सिंह एवं श्रीमती अंजनी राठिया खरीफ सीजन की तैयारियों के तहत सहकारी समिति सोनपुरी पहुंचे। यहां उन्होंने शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही कृषि आदान सुविधाओं का लाभ लेते हुए अपनी आवश्यकता अनुसार खाद, बीज एवं अन्य कृषि सामग्री प्राप्त की। लगभग 5 से 7 एकड़ भूमि में खेती करने वाले ये किसान कृषि को अपनी आजीविका का प्रमुख आधार मानते हैं। धान उत्पादन के साथ-साथ वे मूंगफली एवं सब्जी की खेती कर फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दे रहे हैं। समिति में खाद एवं बीज की पर्याप्त उपलब्धता            कृषकों ने बताया कि खरीफ सीजन प्रारंभ होने से पहले ही समिति में खाद एवं बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है, जिससे उन्हें आवश्यक कृषि सामग्री के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ा। उन्होंने ढैंचा एवं मूंग बीज सहित आवश्यक उर्वरकों का उठाव किया और कहा कि समय पर कृषि आदान उपलब्ध होने से खेती की तैयारियां व्यवस्थित रूप से पूरी हो रही हैं। किसानों के अनुसार समिति में सामग्री वितरण की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी एवं सुगम रही, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हुई। साथ ही हरित खाद एवं वैकल्पिक फसलों के प्रति किसानों का रुझान भी लगातार बढ़ रहा है। आधुनिक तकनीकों के नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग से फसल बेहतर            कृषकों ने शासन द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि समय पर खाद-बीज मिलने से खेती की योजना बनाना और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना आसान हुआ है। उन्होंने बताया कि उत्पादन बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए वे आधुनिक कृषि तकनीकों को भी अपना रहे हैं। उन्होंने बीते वर्षों में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इन उर्वरकों के प्रयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई तथा पोषक तत्वों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हुआ।

​सुशासन तिहार: मौके पर ही दूर हो रही हैं जनता की तकलीफें

​रायपुर         छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश की जनता की समस्याओं के त्वरित और मौके पर ही निराकरण के लिए 'सुशासन तिहार' के तहत समाधान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को ग्राम छेरकापुर में एक विशाल समाधान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  गौरी शंकर अग्रवाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।       ​ शिविर के दौरान राजस्व मंत्री  वर्मा ने क्षेत्र के विकास को गति देते हुए 55 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। साथ ही, विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत हितग्राहियों को सामग्री और प्रमाण पत्र वितरित किए।          राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य शासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। सुशासन तिहार का मुख्य उद्देश्य जनता के बीच सीधे पहुंचकर शासकीय योजनाओं का फीडबैक लेना और समस्याओं का मौके पर समाधान करना है। हमारा प्रयास है कि युवा, गरीब, बच्चे और किसान,समाज का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़े। ​ छेरकापुर और सेमरिया को मिलीं ये प्रमुख विकास सौगातें     ​ राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने क्षेत्र के अधोसंरचना विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने सेमरिया में सीसी रोड निर्माण के लिए 30 लाख रुपये और गोड़ा सरस्वती शिशु मंदिर के विकास हेतु 12 लाख रुपये की स्वीकृति दी। इसके साथ ही, छेरकापुर उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना, छेरकापुर में मुक्तिधाम निर्माण और सीसी रोड निर्माण के लिए 5-5 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा की। ​ 'विष्णु के सुशासन और मोदी की गारंटी' से मिल रहा सीधा लाभ      ​ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  गौरीशंकर अग्रवाल ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य आम जनता की तकलीफों का जमीनी स्तर पर समाधान करना है। 'विष्णु के सुशासन और मोदी की गारंटी' के तहत राज्य सरकार समाज के हर वर्ग तक लाभ पहुंचाने का पूरा प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इन शिविरों के माध्यम से शासन-प्रशासन सीधे जनता के द्वार तक पहुँच रहा है। ​ 'मोर गाँव मोर पानी 2.0' और 'हम होंगे कामयाब 2.0' की सफलता    ​ कलेक्टर  कुलदीप शर्मा ने जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों और अभियानों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 'मोर गाँव मोर पानी अभियान 2.0' के तहत जल संचयन दीदियों और ग्राम पंचायतों के साझा प्रयासों से महज ढाई महीने के भीतर ढाई लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा जारी 'हम होंगे कामयाब 2.0' वेब पोर्टल की भी जानकारी दी, जिसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं को रोजगार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां आसानी से मिल रही हैं। हितग्राहियों को मौके पर ही सामग्री, प्रमाण पत्र और स्पोर्ट्स किट का वितरण      ​ इस समाधान शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया गया और बड़ी संख्या में हितग्राहियों को सीधे लाभान्वित किया गया। शिविर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों को निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श देने के साथ ही आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए। समाज कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल बांटी गई।       इसके अलावा, 'हम होंगे कामयाब' अभियान 2.0 के तहत युवाओं को जॉब सर्टिफिकेट सौंपे गए। खेल विभाग द्वारा स्थानीय खेल प्रतिभाओं को स्पोर्ट्स किट का वितरण किया गया और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। वहीं, राजस्व विभाग द्वारा ग्रामीणों को स्वामित्व कार्ड और डिजिटल किसान किताब का वितरण किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

सड़क दुर्घटना में चकनाचूर पेल्विस (श्रोणि) की हड्डी का सफल ऑपरेशन, सिम्स में युवक को मिला नया जीवन

रायपुर सड़क दुर्घटना में चकनाचूर पेल्विस (श्रोणि) की हड्डी का सफल ऑपरेशन, सिम्स में युवक को मिला नया जीवन सड़क दुर्घटनाओं में पेल्विस (श्रोणि) की हड्डी का गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाना तथा साथ ही एसीटैबुलम (Acetabulum) का फ्रैक्चर होना अत्यंत गंभीर एवं जटिल चोटों में गिना जाता है। ऐसे मामलों में समय पर विशेषज्ञ उपचार न मिलने पर स्थायी विकलांगता, चलने-फिरने में गंभीर कठिनाई तथा भविष्य में गठिया जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसी प्रकार के एक चुनौतीपूर्ण मामले में सिम्स बिलासपुर के अस्थि रोग विभाग ने सफल सर्जरी कर 40 वर्षीय अजय पटेल को नया जीवन प्रदान किया। बिलासपुर निवासी अजय पटेल को 19 अप्रैल 2026 को बिल्हा क्षेत्र में हुई सड़क दुर्घटना में गंभीर चोटें आई थीं। दुर्घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार हेतु सिम्स बिलासपुर लाया गया, जहां जांच में उनकी दाहिनी पेल्विस में सेंट्रल हिप डिसलोकेशन (Right Central Hip Dislocation) के साथ एसीटैबुलम फ्रैक्चर (Acetabular Fracture) पाया गया। यह चोट अत्यंत जटिल मानी जाती है क्योंकि इसमें हिप जॉइंट अपनी सामान्य स्थिति से हट जाता है तथा उसे घेरने वाली पेल्विस की हड्डी भी क्षतिग्रस्त हो जाती है। वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण सिंह ठाकुर की देखरेख में मरीज का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। चोट की गंभीरता एवं भविष्य में जोड़ की कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. बेन के मार्गदर्शन में विशेष सर्जिकल योजना तैयार की गई। दिनांक 28 अप्रैल 2026 को विशेषज्ञ टीम द्वारा सफलतापूर्वक ओपन रिडक्शन एंड इंटरनल फिक्सेशन (ORIF) विद राइट एसीटैबुलर रिपेयर एवं ओपन रिडक्शन ऑफ हिप जॉइंट की जटिल सर्जरी की गई। ऑपरेशन के दौरान आधुनिक सी-आर्म (C-Arm) फ्लोरोस्कोपी मशीन की सहायता से हड्डियों की स्थिति का लगातार मूल्यांकन किया गया, जिससे फ्रैक्चर के टुकड़ों को शारीरिक संरचना के अनुरूप सटीक रूप से स्थापित किया जा सका। सी-आर्म तकनीक के उपयोग से इम्प्लांट की सही स्थिति सुनिश्चित की गई तथा हिप जॉइंट का पूर्ण एनाटॉमिकल रिडक्शन प्राप्त किया गया। टूटे हुए एसीटैबुलम की मरम्मत कर उसे स्थिर किया गया तथा जोड़ को पुनः उसकी सामान्य स्थिति में स्थापित किया गया। यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानी जाती है और इसके लिए उच्च स्तरीय सर्जिकल कौशल एवं आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है। ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ तथा मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही। सर्जरी के बाद मरीज को विशेषज्ञ फिजियोथेरेपी एवं पुनर्वास कार्यक्रम के अंतर्गत रखा गया, जिससे वह धीरे-धीरे पुनः सामान्य गतिविधियों की ओर अग्रसर हो सका। चिकित्सकों के अनुसार समय पर किए गए ऑपरेशन एवं सटीक एनाटॉमिकल रिडक्शन से भविष्य में जोड़ की कार्यक्षमता बेहतर रहने तथा दीर्घकालिक जटिलताओं की संभावना कम होने की उम्मीद है। इस सफलता पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि सिम्स बिलासपुर में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, सी-आर्म आधारित उन्नत ट्रॉमा सर्जरी एवं अनुभवी चिकित्सकों की संयुक्त कार्यप्रणाली के कारण जटिल से जटिल पेल्विस एवं एसीटैबुलर चोटों का सफल उपचार संभव हो रहा है। यह संस्थान की उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं, टीमवर्क और विशेषज्ञता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

100 से अधिक हितग्राहियों को राशन कार्ड, आवास की चाबी, बीज, सुपोषण किट, श्रवण यंत्र व अन्य सामग्री का वितरण

रायपुऱ सुशासन तिहार: गोपालपुर समाधान शिविर में पहुंचे प्रभारी मंत्री लखन लाल देवांगन, 17 पंचायतों के ग्रामीणों को मिला योजनाओं का लाभ सुशासन तिहार-2026 के अंतर्गत खैरागढ़ जिले के विकासखंड छुईखदान की ग्राम पंचायत गोपालपुर में आयोजित समाधान शिविर में वाणिज्य, उद्योग तथा श्रम एवं जिले के प्रभारी मंत्री  लखन लाल देवांगन शामिल हुए। उन्होंने विभिन्न विभागों के स्टॉलों का निरीक्षण कर आवेदनों के निराकरण की समीक्षा की तथा अधिकारियों को त्वरित एवं पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रभारी मंत्री  लखन लाल देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं गरीब, किसान, श्रमिक और आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आवास, सड़क, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा एवं आधारभूत संरचना के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में प्रारंभ की गई योजनाओं ने विकास और जनकल्याण को नई दिशा दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान राज्य सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, बकाया बोनस वितरण, तेंदूपत्ता संग्राहकों को बढ़ा हुआ पारिश्रमिक तथा रामलला दर्शन योजना जैसे वादों को पूरा कर रही है।  देवांगन ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और प्रशासन को सीधे जनता तक पहुंचाना तथा उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। शिविरों के माध्यम से लोगों को योजनाओं की जानकारी और लाभ प्रदान किए जा रहे हैं तथा प्राप्त आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय स्वयं प्रदेशभर में भ्रमण कर जनसमस्याओं की जानकारी ले रहे हैं और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार आने वाले समय में भी जनहित और विकास के कार्यों को इसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाती रहेगी। जिला पंचायत अध्यक्ष मती प्रियंका खम्हन ताम्रकार ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों तक शासकीय योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष  विक्रांत सिंह ने कहा कि इस पहल से ग्रामीणों की मांगों एवं समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित हो रहा है। कलेक्टर  इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने बताया कि सुशासन तिहार-2026 के तहत जिले में अब तक लगभग 22 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत से अधिक का निराकरण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि नवगठित जिले में सीमित संसाधनों के बावजूद प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों, मीडिया एवं आमजन के सहयोग से कार्यक्रम का सफल आयोजन संभव हो पाया है। विभिन्न विभागों द्वारा हितग्राहियों को मिला लाभ शिविर में 17 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने भाग लिया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 5 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास की चाबी प्रदान की गई। शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र, मोमेंटो, पुस्तकें एवं गणवेश वितरित किए। कृषि विभाग ने 5 किसानों को मूंग बीज तथा उद्यानिकी विभाग ने 5 हितग्राहियों को सब्जी मिनी किट प्रदान की। मत्स्य विभाग ने 2 हितग्राहियों को मछली जाल एवं 2 को आइस बॉक्स वितरित किए। समाज कल्याण विभाग द्वारा 4 श्रवण यंत्र एवं 10 छड़ियां प्रदान की गईं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने 5 सुपोषण किट एवं 5 स्वच्छता किट वितरित कीं, जबकि खाद्य विभाग ने 5 हितग्राहियों को राशन कार्ड प्रदान किए। स्वास्थ्य विभाग ने 10 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त होने पर प्रशस्ति पत्र तथा 3 टीबी मरीजों को पोषण आहार प्रदान किया। स्वास्थ्य शिविर में 142 मरीजों का उपचार स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित शिविर में कुल 142 मरीजों का उपचार किया गया। 79 लोगों की रक्तचाप एवं शुगर जांच, 26 लोगों की नेत्र जांच, 52 एक्स-रे तथा 15 मलेरिया जांच की गई। शिविर में 112 आभा आईडी, 22 आयुष्मान कार्ड एवं 3 वय वंदन कार्ड बनाए गए। एक कुपोषित बच्चे की स्वास्थ्य जांच कर आवश्यक परामर्श भी दिया गया। स्वास्थ्य विभाग को प्राप्त 2 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया तथा कोई भी आवेदन लंबित नहीं रखा गया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती प्रियंका खम्हन ताम्रकार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  विक्रांत सिंह, पूर्व संसदीय सचिव  कोमल जंघेल, जिला पंचायत सभापति  ललित चोपड़ा, जनपद पंचायत अध्यक्ष मती पुष्पा प्रकाश वर्मा, कलेक्टर  इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल, पुलिस अधीक्षक  लक्ष्य शर्मा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  प्रेम कुमार पटेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

लोकभवन में तीन दिवसीय मेडिटेशन शिविर का आयोजन

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका की पहल पर लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए तीन दिवसीय (3 जून से 5 जून तक) मेडिटेशन (ध्यान) शिविर का आयोजन किया गया है। शिविर का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, कार्यक्षमता तथा तनाव प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना है।             हार्टफुलनेस संस्था, अमलेश्वर के सहयोग से आयोजित इस शिविर के प्रथम दिन ध्यान के महत्व और उसके व्यावहारिक लाभों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित ध्यान से मानसिक शांति, सकारात्मक सोच, निर्णय क्षमता और कार्य के प्रति एकाग्रता में वृद्धि होती है, जिससे शासकीय कार्यों के निष्पादन में भी बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।            शिविर के दौरान लोकभवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक घंटे का विशेष ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सचिवालय के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। प्रतिभागियों को ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया गया तथा दैनिक जीवन में ध्यान को अपनाने के तरीकों की जानकारी दी गई।           हार्टफुलनेस संस्था के प्रशिक्षक विकास पाठक एवं  डी.एम. शर्मा ने प्रशिक्षण प्रदान करते हुए ध्यान को स्वस्थ, संतुलित और तनावमुक्त जीवन की प्रभावी साधना बताया। उन्होंने कहा कि नियमित मेडिटेशन व्यक्ति को आंतरिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ कार्यस्थल पर उसकी उत्पादकता और सकारात्मकता को भी बढ़ाता है। तीन दिवसीय इस शिविर में आगामी दिनों में ध्यान, आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन एवं तनाव प्रबंधन से संबंधित विभिन्न सत्र आयोजित किए

महिलाओं को मिली बड़ी राहत, साय सरकार की नीति से बढ़ीं महिला नामांतरण रजिस्ट्रियां

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों के जमीन पर सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर महिलाओं के नाम होने वाली भूमि व संपत्ति की रजिस्ट्री (पंजीयन) शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने और 12 प्रतिशत उपकर (Cess) को पूरी तरह समाप्त करने के निर्णय से बड़ा बदलाव आया है। शासन की इस बड़ी रियायत के चलते बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने और पंजीयन कराने की होड़ सी मच गई है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। एक महीने में रजिस्ट्री मामलों में 70 प्रतिशत की भारी वृद्धि जिला पंजीयक कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह छूट लागू होने के बाद मात्र एक महीने के भीतर महिलाओं के पक्ष में होने वाली रजिस्ट्रियों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल 2026 जिले के पांचों उप पंजीयक कार्यालयों में महिलाओं के नाम पर कुल 309 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। मई 2026 यह संख्या बढ़कर 445 पहुंच गई, जो अप्रैल की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी को दर्शाती है।   ब्लॉकवार आंकड़ों पर एक नजर (अप्रैल बनाम मई 2026) रजिस्ट्री शुल्क में कटौती का लाभ उठाने में जिले के सभी क्षेत्र आगे रहे हैं, जिनमें शहरी इलाकों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। उप पंजीयक कार्यालय केवल बलौदाबाजार में अप्रैल 2026 में 78 और मई 2026 में बढ़कर 119 हो गया। इसी प्रकार पलारी में अप्रैल 2026 में 40  दस्तावेज बढ़कर मई 2026 में 56, सिमगा में 56 से बढ़कर 99, कसडोल में 24से बढ़कर 50 तथा भाटापारा में 111 से बढ़कर 121 दस्तावेज हो गए। यह वृद्धि दर्शाती है कि महिलाओं को दी गई पंजीयन शुल्क छूट का लाभ बड़ी संख्या में परिवार उठा रहे हैं। शहरी क्षेत्र बलौदाबाजार और भाटपारा के आकड़ों में अधिक वृद्धि देखी गई है। जिला पंजीयक विनोद कोचे ने बताया कि राज्य शासन की इस नीति का सीधा और त्वरित लाभ महिलाओं को मिल रहा है। संपत्ति खरीद की लागत काफी कम हो जाने से अब परिवार स्वेच्छा से महिलाओं के नाम पर जमीन और मकान पंजीकृत कराने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं। इससे महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। वहीं, बलौदाबाजार के उप पंजीयक श्री विपुल श्रीवास्तव के अनुसार, अप्रैल 2026 से 12 प्रतिशत उपकर समाप्त होने से इस प्रक्रिया में और तेजी आई है। अकेले बलौदाबाजार कार्यालय में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अब तक 107 अधिक दस्तावेजों का पंजीयन हो चुका है। खास बात यह है कि इससे जहां एक तरफ आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ रजिस्ट्री की संख्या बढ़ने से शासन के राजस्व में भी वृद्धि हो रही है। अब महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदना हुआ आसान योजना की लाभार्थी नमिता साहू ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि महिलाओं के नाम रजिस्ट्री पर मिलने वाली इस छूट से उनके परिवार को बड़ा आर्थिक लाभ हुआ है। पहले रजिस्ट्री में भारी-भरकम खर्च देखकर लोग कतराते थे, लेकिन अब खर्च आधा होने से यह बेहद आसान हो गया है। इससे महिलाओं को न सिर्फ आर्थिक सुरक्षा मिल रही है, बल्कि संपत्ति पर उनका कानूनी अधिकार भी मजबूत हो रहा है। महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के मार्गदर्शन में लिया गया यह फैसला प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम साबित हो रहा है।

सरगुजा के किसान देवानंद बने मिसाल, मनरेगा डबरियों से खेती और रोजगार को मिला नया सहारा

मनरेगा की आजीविका डबरियां बन रहीं ग्रामीण समृद्धि का आधार जल संरक्षण, मछली पालन और सिंचाई से किसानों की बढ़ रही आय, सरगुजा के किसान देवानंद बने सफलता की मिसाल रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण विकास और आजीविका संवर्धन की दिशा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) बहुआयामी परिवर्तन का माध्यम बन रही है। योजना के तहत निर्मित ‘आजीविका डबरियां’ जल संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने, भू-जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरगुजा जिले के ग्राम अडची के किसान देवानंद इसकी जीवंत मिसाल बनकर उभरे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति मनरेगा से निर्मित एक डबरी ने बदल दी है। जनपद पंचायत अम्बिकापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत अडची निवासी किसान देवानंद ने वर्ष 2025-26 में अपने खेत में आजीविका डबरी निर्माण का प्रस्ताव रखा था। ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के अंतर्गत 2 लाख रुपये की लागत से 17×19 मीटर आकार की डबरी का निर्माण कराया गया। निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीण मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला, वहीं देवानंद को खेती और अतिरिक्त आय के नए अवसर प्राप्त हुए। आज यह डबरी वर्षा जल से भरकर उनके खेत की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। डबरी के जल से वे अपनी फसलों और सब्जियों की समय पर सिंचाई कर रहे हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई है। साथ ही उन्होंने डबरी में मछली पालन भी शुरू किया है। आगामी छह महीनों में पहली मछली फसल से उन्हें 15 से 20 हजार रुपये की अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है। इस प्रकार एक ही परिसंपत्ति से सिंचाई और मत्स्य पालन दोनों के माध्यम से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। देवानंद की डबरी केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आजीविका का मजबूत आधार बन चुकी है। मात्र 2 लाख रुपये के शासकीय निवेश से निर्मित यह परिसंपत्ति आगामी दो दशकों तक उनके परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करेगी। उनकी सफलता से प्रेरित होकर गांव के अन्य किसान भी मनरेगा के माध्यम से डबरी निर्माण और मत्स्य पालन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। सरगुजा जिले में किसानों की आय बढ़ाने और जल संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से डबरी निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिले में अब तक 487 आजीविका डबरियां स्वीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 422 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इन डबरियों के माध्यम से वर्षा जल का संचयन हो रहा है, भू-जल स्तर में सुधार आ रहा है, खेतों में नमी बनी रह रही है तथा किसानों को सिंचाई और मत्स्य पालन जैसे अतिरिक्त आजीविका साधन उपलब्ध हो रहे हैं। मनरेगा के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरियां आज ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही हैं। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि जल सुरक्षा और सतत ग्रामीण विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

सहकारी समिति में बिना किसी परेशानी के मिला उर्वरक, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जताया आभार

खरीफ सीजन में किसानों को समय पर मिल रही खाद, सखौली के किसान कमलेश ने जताया संतोष सहकारी समिति में बिना किसी परेशानी के मिला उर्वरक, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जताया आभार रायपुर,  राज्य शासन की किसान हितैषी पहल और कृषि विभाग की सतत निगरानी के परिणामस्वरूप किसानों को खरीफ सीजन के लिए आवश्यक उर्वरकों की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर खाद उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे खेती-किसानी की तैयारियों को गति मिली है। सरगुजा जिले के विकासखंड अम्बिकापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सखौली के किसान कमलेश राजवाड़े ने उर्वरक वितरण व्यवस्था पर संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि उन्हें समिति केंद्र में बिना किसी परेशानी के आवश्यक खाद उपलब्ध हो गया। उन्होंने कहा कि समिति पहुंचने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनका परमिट तत्काल जारी किया गया तथा आवश्यक उर्वरक भी आसानी से प्राप्त हो गया। कमलेश राजवाड़े ने बताया कि उनके पास लगभग 2 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें वे खरीफ सीजन में धान की खेती करते हैं। इसके अलावा वे वर्ष के अन्य समय में आलू, गोभी और टमाटर जैसी सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं। उन्होंने बताया कि समिति से उन्हें खेती की आवश्यकता के अनुसार 2 बोरी यूरिया, 1 बोरी इफको (उर्वरक) तथा 1 बोरी राखड़ खाद प्राप्त हुआ है। समय पर उर्वरक उपलब्ध होने से फसल प्रबंधन में सुविधा होगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के तहत समिति केंद्र में उर्वरक प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा। पारदर्शी और सुव्यवस्थित वितरण प्रणाली से किसानों का समय बच रहा है तथा खेती की तैयारियां समय पर पूरी हो पा रही हैं। उर्वरकों की समयबद्ध उपलब्धता से प्रसन्न किसान कमलेश राजवाड़े ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई व्यवस्थाओं से खेती-किसानी के कार्यों में काफी सुविधा हुई है। राज्य शासन द्वारा किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के प्रयासों का सीधा लाभ ग्रामीण अंचलों के किसानों को मिल रहा है।

कारोबारी सेटलमेंट के बाद भी केस चलाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI की कार्रवाई खारिज

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के कारोबारी विजय कुमार केला को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के कारोबारी की अपील स्वीकार करते हुए सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर, चार्जशीट और निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है. मामले में कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यदि बैंक लोन अकाउंट का सेटलमेंट आपसी सहमति से हो चुका है और उस पर डेब्ट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल की मुहर लग चुकी है, तो उसके बाद कर्जदार के खिलाफ धोखाधड़ी का क्रिमिनल केस चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि कमर्शियल विवादों के निपटारे के बाद भी यदि आपराधिक मुकदमे चलते रहेंगे तो देश के आर्थिक सिस्टम पर इसका बुरा असर पड़ेगा और लोग बैंकों के साथ वन-टाइम सेटलमेंट करने से कतराएंगे. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच सुनाया. दरअसल, रायपुर निवासी विजय कुमार केला के खिलाफ सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट पेश की थी. जिसे लेकर कारोबारी ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी लगाई थी. केला ने बताया कि फर्म मेसर्स मोहन ट्रेडर्स को उनके बड़े भाई स्वर्गीय परमानंद केला संभालते थे. फर्म ने यूको बैंक से लोन लिया, जो वर्ष 2009 तक 8 करोड़ रुपए हो गया था. इस लोन के बदले रायपुर के अमलीडीह और बोरियाखुर्द की संपत्तियां गिरवी रखी गई थीं. नवंबर 2009 में परमानंद केला के आकस्मिक निधन के बाद कारोबार ठप हो गया और लोन की किस्तें जमा नहीं की जा सकीं. इसके चलते 31 दिसंबर 2010 को बैंक ने इस खाते को एनपीए घोषित कर दिया और बकाया लोन की वसूली के लिए डीआरटी, जबलपुर में केस पेश किया. डीआरटी में मामला लंबित रहने के दौरान दोनों पक्षों में 6.49 करोड़ रुपए के बकाया के बदले 4.25 करोड़ रुपए में फुल एंड फाइनल सेटलमेंट तय हुआ. शिकायत खाता बंद होने के करीब ढाई साल बाद फरवरी 2018 में यूको बैंक के जोनल हेड ने सीबीआई में शिकायत करते हुए आरोप लगाया, कि केला ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर लोन लिमिट बढ़वाने के लिए सीए की फर्जी ऑडिट रिपोर्ट पेश की थी और कीमती संपत्तियों को मुक्त कराकर बैंक के पास एक अतिक्रमण वाली जमीन गिरवी रख दी. CBI ने केस दर्ज कर रायपुर की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी, जिस पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी रोक लगाने से इनकार कर दिया, तब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था.