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ईंधन से पहले PUC जरूरी: ‘नो PUC, नो फ्यूल’ से एक ही दिन में 61,000 प्रमाणपत्र बने

नई दिल्ली दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार ने ‘नो PUC, नो फ्यूल’ अभियान को पूरी सख्ती के साथ लागू कर दिया है। इस अभियान का असर पहले ही दिन दिखाई दिया। पिछले 24 घंटों के भीतर राजधानी में 61,000 से अधिक वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) जारी किए गए। सरकार का कहना है कि यह अभियान इसी तरह तेजी से और लगातार जारी रहेगा, ताकि वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण पर काबू पाया जा सके और राजधानी की हवा को स्वच्छ बनाया जा सके। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम से लोगों को असुविधा हो सकती है, लेकिन सभी वाहनों का प्रदूषण जांच कराना और उनका प्रमाणन सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि इस नियम के तहत जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं है, उन्हें पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वैध प्रदूषण नियंत्रण (PUC) प्रमाणपत्र के बिना किसी भी वाहन को दिल्ली में ईंधन भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि शहर की बिगड़ती हवा को सुधारने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। सीएम ने कहा, “लोगों को असुविधा हो रही है, लेकिन दिल्ली में चलने वाले हर वाहन को प्रदूषण फैलाए बिना चलाना चाहिए। यह हमारी सामूहिक नैतिक जिम्मेदारी है कि हम अपने वाहनों को PUC प्रमाणित कराएं।” मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “कार-पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। परिवहन व्यवस्था में सुधार वायु गुणवत्ता में सुधार की कुंजी है।” उन्होंने समझाया कि कार-पूलिंग का मतलब है कि एक ही स्थान पर जाने वाले दो या दो से अधिक लोग एक ही वाहन में यात्रा करें। सीएम ने यह भी बताया कि सरकार राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण परीक्षण के बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पहले पीयूसी प्रमाणपत्र जारी करने वाले केंद्रों की संख्या बहुत कम थी, लेकिन अब नंद नगरी, बुराड़ी और तेहखंड में स्वचालित परीक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। नहीं दिया जा रहा पेट्रोल-डीजल दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार प्रदूषण से लड़ने के लिए चार बड़े मोर्चों पर काम कर रही है: वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़कों और निर्माण स्थलों की धूल, उद्योगों से होने वाला प्रदूषण और कचरा प्रबंधन। सिरसा ने बताया कि ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम के तहत बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा, बीएस-6 मानकों से नीचे के गैर-जरूरी बाहरी वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर भी सख्ती लागू की गई है। ‘चालान काटने के लिए नहीं है यह अभियान’- मनजिंदर सिरसा दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार को दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर और जनपथ सहित कई पेट्रोल पंपों का अचानक दौरा कर अभियान का जायजा लिया। उन्होंने पेट्रोल पंप कर्मियों को निर्देश दिए कि नियमों को कड़ाई से लागू किया जाए, लेकिन वाहन मालिकों से शालीनता और शांति के साथ पेश आएं। मंत्री ने कहा कि यह अभियान चालान काटने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सेहत बचाने के लिए है। आंकड़ों के मुताबिक, 17 दिसंबर को 29,938 और 18 दिसंबर की शाम तक 31,974 PUC सर्टिफिकेट जारी किए गए। यानी करीब एक दिन में 61,000 से अधिक वाहनों के लिए PUC बनवाया या नवीनीकरण कराया गया। इसी दौरान 3,746 वाहनों का चालान उन वाहनों के लिए काटा गया जिनके पास वैध PUC नहीं था। दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए किए गए ये काम सीमावर्ती इलाकों में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीमों ने करीब 5,000 वाहनों की जांच की। इनमें से 568 गैर-अनुपालक वाहनों को दिल्ली में प्रवेश नहीं दिया गया, जबकि 217 गैर-जरूरी ट्रकों को ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर मोड़ दिया गया। सड़कों की धूल कम करने के लिए राजधानी में 2,300 किलोमीटर से अधिक सड़कों की मशीन से सफाई की गई। इसके अलावा, मोबाइल एंटी-स्मॉग गन के जरिए 5,524 किलोमीटर क्षेत्र में पानी का छिड़काव किया गया। प्रदूषण नियंत्रण के अन्य उपायों में 132 अवैध कचरा डंपिंग स्थलों को बंद कराना और करीब 38,000 मीट्रिक टन पुराने कचरे का निपटान शामिल है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने लोगों से अपील की कि वे GRAP नियमों का पालन करें, समय पर PUC बनवाएं और जहां संभव हो, वर्क फ्रॉम होम अपनाएं। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ यह लड़ाई सरकार अकेले नहीं जीत सकती। मंत्री ने जोर देकर कहा कि आम जनता के सहयोग के बिना दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाना संभव नहीं है।

दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में हवा शुद्ध रखने के लिए एयर प्यूरीफायर लगाने का फैसला

नई दिल्ली दिल्ली में हर सर्दी में प्रदूषण की वजह से स्कूलों को ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में शिफ्ट करना पड़ता है जिससे बच्चों की पढ़ाई और एक्टिविटीज प्रभावित होती हैं. लेकिन अब अच्छी खबर ये है कि दिल्ली सरकार सरकारी स्कूलों में हजारों एयर प्यूरीफायर लगाने जा रही है. पहले फेज में 10,000 एयर प्यूरीफायर लगाए जाएंगे और अगले चरण में सभी सरकारी स्कूलों के हर क्लासरूम में ये इंस्टॉल होंगे. इससे क्लासरूम की हवा साफ रहेगी और बच्चों को प्रदूषण से बचाव होगा. जिससे ऑनलाइन क्लासेस की मजबूरी खत्म हो जाएगी और स्कूलों में नॉर्मल तरीके से पढ़ाई हो सकेगी. दिल्ली में प्रदूषण का मौजूदा हाल कितना गंभीर? आज यानी 19 दिसंबर 2025 को दिल्ली का AQI ‘वेरी पूअर’ से ‘सीवियर’ कैटेगरी में है.कई जगहों पर 387 से लेकर 480 तक रिकॉर्ड किया गया. स्मॉग की मोटी चादर छाई हुई है.सांस लेने में तकलीफ हो रही है.आंखों में जलन और गले में खराश आम शिकायत है.GRAP स्टेज-4 लागू है जिसके तहत कंस्ट्रक्शन रोक दिया गया है.कुछ गाड़ियों पर बैन है और ऑफिसेस में 50% स्टाफ वर्क फ्रॉम होम कर रहा है. स्कूलों के लिए क्‍या है आदेश? नर्सरी से क्लास 5 तक पूरी तरह ऑनलाइन क्लासेस कर दी गई हैं. क्लास 6 से 11 तक हाइब्रिड मोड है, जबकि क्लास 10 और 12 के बच्चे स्कूल आ सकते हैं. आउटडोर एक्टिविटीज और स्पोर्ट्स पूरी तरह बैन हैं. ये सब बच्चों की सेहत बचाने के लिए किया गया है. दिल्ली सरकार की बड़ी पहल: स्कूलों में एयर प्यूरीफायर शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने ऐलान किया है कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 10,000 एयर प्यूरीफायर लगाए जाएंगे.पहले चरण में ये शुरू होगा और बाद में सभी सरकारी स्कूलों के हर क्लासरूम तक पहुंचेगा. इससे इनडोर एयर क्वालिटी बेहतर होगी और प्रदूषण के हानिकारक पार्टिकल्स फिल्टर हो जाएंगे.बच्चों को साफ हवा में पढ़ाई करने का मौका मिलेगा और सर्दियों में बार-बार ऑनलाइन शिफ्ट होने की समस्या कम हो जाएगी.

वाहन चालकों के लिए अलर्ट! दिल्ली में बिना PUCC नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

नई दिल्ली जब भी गाड़ी चलाते हैं तो हमें सड़क एवं यातायात नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो हमारी गाड़ी का चालान कट सकता है। इसमें कई नियम होते हैं जिनका पालन करना जरूरी है। इसी क्रम में दिल्ली में आज से PUCC सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा। अगर आपकी गाड़ी की PUCC नहीं है तो आपको दिल्ली में पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा। इसको लेकर सरकार ने न सिर्फ नियम जारी किया है बल्कि, इसका सख्ती से पालन करने को भी कहा गया है। इसलिए अगर आपकी गाड़ी की PUCC (NO PUCC NO Fuel) नहीं हुई है तो आप इसे तुरंत करवा लें। आप यहां आखिरी तारीख से लेकर नए नियम के बारे में और PUCC करवाने का तरीके के बारे में भी जान सकते हैं। अगली स्लाइड्स में आप इस बारे में सबकुछ जान सकते हैं… क्या है नया नियम?     दरअसल, अगर आप दिल्ली में रहते हैं या दिल्ली में अपनी गाड़ी लेकर जाते हैं और आप दिल्ली के पेट्रोल पंप से पेट्रोल-डीजल लेते हैं, तो आपको बिना PUCC पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा। दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर सरकार ने ये सख्त कदम उठाने का फैसला किया। बस आज और कल का समय     अगर आपकी गाड़ी PUCC सर्टिफिकेट नहीं है, तो आपके लिए आज से पेट्रोल-डीजल लेने में दिक्कत होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि ये नया नियम दिल्ली में आज यानी 18 दिसंबर 2025 से लागू हो गया है जिसके बाद आपको बिना PUCC पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा। कैसे करवाएं PUCC? स्टेप 1     अगर आपकी गाड़ी की PUCC यानी प्रदूषण नियंत्रण (पोल्यूशन अंडर कंट्रोल) नहीं है, तो आपको अब ये करवाना अनिवार्य होगा     इसके लिए आपको सबसे पहले पेट्रोल पंप या अन्य जगहों पर बने हुए PUCC सेंटर पर जाना होगा     यहां पर जाकर आपको अपनी गाड़ी की आरसी दिखानी होती है स्टेप 2     इसके बाद आपकी आरसी से आपकी गाड़ी की जानकारी सिस्टम में फीड की जाती है     फिर आपकी गाड़ी की टेस्टिंग होती है यानी उसका प्रदूषण नियंत्रण चेक होता है     सबकुछ सही पाए जाने पर आपकी गाड़ी की PUCC कर दी जाती है जिसके लिए आपसे निर्धारित शुल्क लिया जाता है     इसके बाद आपको प्रदूषण नियंत्रण का सर्टिफिकेट दिया जाता है  

दिल्ली में BS‑4 गाड़ियों पर सख्ती, जानें कैसे करें अपनी कार का BS स्टेटस चेक

 नई दिल्ली देश के राजधानी की हवा को सांस लेने लायक बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने आज से सख्त एंटी-पॉल्यूशन उपाय लागू कर दिए हैं. अब BS-VI इंजन वाले वाहनों को ही दिल्ली में प्रवेश मिलेगा, जबकि बिना वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट के किसी भी वाहन को पेट्रोल पंप पर फ्यूल नहीं दिया जाएगा. यह फैसला GRAP के स्टेज-IV के तहत लागू किया गया है, जो प्रदूषण के सबसे गंभीर हालात में ही एक्टिव किया जाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस फैसले का सीधा असर दिल्ली से सटे गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद और नोएडा से रोजाना आने वाले करीब 12 लाख वाहनों पर पड़ेगा. ऐसे में दिल्ली-एनसीआर के वाहन मालिकों के बीच तमाम तरह का कन्फ्यूजन देखने को मिल रहा है. उन्हें डर है कि, दिल्ली में एंट्री करते ही उनकी कार को पकड़ लिया जाएगा. इसके अलावा लोगों में अपने वाहन के भारत स्टैंडर्ड (BS) यानी इमिशन मानक को लेकर भी कन्फ्यूजन है, कि उनकी कार सरकार के इस बैन लिस्ट के दायरे में आएगी या नहीं.  क्या है सरकार का आदेश दिल्ली सरकार का यह आदेश पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत जारी किया गया है, जो GRAP स्टेज-IV (Severe+) लागू रहने तक प्रभावी रहेगा. इस नियम के अनुसार, दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-VI से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों की राजधानी में एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली-एनसीआर में BS-IV एमिशन मानकों से नीचे आने वाले पुराने वाहनों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की इजाजत दे दी है. बिना PUC, नो फ्यूल अब दिल्ली में केवल उन्हीं वाहनों को फ्यूल (पेट्रोल, डीजल या सीएनजी) मिलेगी, जिनके मालिक उक्त वाहन का पीयूसी सर्टिफिकेट पेट्रोल पंप पर दिखाएंगे. यदि कोई भी वाहन फ्यूल पंप पर बिना वैलिड PUC सर्टिफिकेट पकड़ा जाता है तो उस पर तत्काल एक्शन लिया जाएगा और जुर्माना लगेगा. PUC की जांच फिजिकल सर्टिफिकेट, ANPR (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) कैमरे, VAHAN डाटाबेस, वॉयस अलर्ट सिस्टम से की जाएगी. कैसे पहचाने आपकी गाड़ी रोकी जाएगी या नहीं दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण के बीच BS3 और BS4 वाहनों पर पाबंदियां सख्त हो गई हैं. ऐसे में वाहन मालिकों के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि उनकी गाड़ी BS3 है या BS4. गलत जानकारी न सिर्फ जुर्माने का कारण बन सकती है, बल्कि वाहन जब्त होने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है. वाहन के RC से पहचान आपका वाहन BS3 है या BS4, इसे पहचानने का सबसे आसान तरीका RC यानी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट देखना है. RC कार्ड या डिजिलॉकर में उपलब्ध डिजिटल आरसी में “Emission Norms” या “Fuel Norms” का कॉलम होता है. इसमें साफ लिखा होता है कि वाहन BS3 है या BS4. अगर RC 2010 से पहले जारी हुई है तो अधिकतर मामलों में वाहन BS3 होता है, जबकि 2010 से 2020 के बीच रजिस्टर्ड वाहन आमतौर पर BS4 कैटेगरी में आते हैं. मैन्युफैक्चरिंग ईयर से अंदाजा भारत में BS3 मानक 2005 से 2010 तक लागू रहे. इसके बाद 2010 से अप्रैल 2020 तक BS4 नियम लागू हुए. अगर आपकी गाड़ी 2010 से पहले बनी है तो उसके BS3 होने की संभावना ज्यादा है. वहीं 2010 से 2020 के बीच बनी गाड़ियां आमतौर पर BS4 होती हैं. हालांकि यह तरीका अनुमान पर आधारित है, इसलिए पुख्ता पुष्टि के लिए RC देखना जरूरी है. इंजन और चेसिस नंबर से जानकारी वाहन के इंजन नंबर और चेसिस नंबर से भी BS नॉर्म की जानकारी निकाली जा सकती है. अधिकतर कार निर्माता इन नंबरों के जरिए वाहन की पूरी डिटेल बताते हैं. आप कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, कस्टमर केयर या अधिकृत डीलर से संपर्क कर इन नंबरों के आधार पर अपनी गाड़ी का BS3 या BS4 स्टेटस कन्फर्म कर सकते हैं. इन नंबरों को व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर (VIN) भी कहा जाता है. PUC सर्टिफिकेट से भी मिलेगा सुराग PUC सर्टिफिकेट पर कई बार उत्सर्जन मानक का जिक्र होता है. हालांकि यह हर राज्य में अनिवार्य नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में यहां BS नॉर्म लिखा मिल सकता है. अगर नहीं लिखा है तो PUC सेंटर ऑपरेटर से पूछकर भी जानकारी ली जा सकती है. वाहन के स्टिकर और लेबल पर नजर कुछ वाहनों में बोनट के अंदर, दरवाजे के फ्रेम या इंजन बे में एक एमिशन लेबल लगा होता है. इस लेबल पर वाहन का एमिशन स्टैंडर्ड यानी BS3 या BS4 लिखा होता है. पुराने वाहनों में यह स्टिकर फीका या गायब भी हो सकता है, इसलिए इसे एकमात्र आधार न बनाएं. मोबाइल ऐप से करें पुख्ता जांच सरकार का mParivahan ऐप वाहन से जुड़ी सभी आधिकारिक जानकारियां देता है. ऐप में वाहन नंबर डालते ही फ्यूल टाइप, रजिस्ट्रेशन डेट और एमिशन नॉर्म की जानकारी मिल जाती है. यह तरीका सबसे भरोसेमंद माना जाता है क्योंकि डेटा सीधे सरकारी रिकॉर्ड से आता है. गलत जानकारी से बचना क्यों जरूरी. कई लोग BS3 और BS4 को लेकर भ्रम में रहते हैं और अनजाने में नियम तोड़ बैठते हैं. आज के सख्त एंटी-पॉल्यूशन दौर में सही जानकारी ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है. एक मिनट में की गई जांच आपको चालान, फ्यूल बैन और कानूनी परेशानी से बचा सकती है. इसलिए यदि आपको अपने वाहन को लेकर कन्फ्यूजन है तो गाड़ी सड़क पर निकालने से पहले इन बातों की तस्दीक कर लें.

मजदूरों को राहत, वर्क फ्रॉम होम पर नया निर्णय और वाहनों के लिए कड़ा फैसला — रेखा गुप्ता सरकार

नई दिल्ली दिल्‍ली में एयर पॉल्‍यूशन से हालात काफी गंभीर हो चुके हैं. अब मुख्‍यमंत्री रेखा गुप्‍ता की सरकार ने इसको लेकर बड़ा ऐलान किया है. मजदूरों से लेकर वाहन चालकों और नौकरीपेशा लोगों के लिए घोषणाएं की गई हैं. दिल्‍ली की रेखा गुप्‍ता सरकार अब एयर पॉल्‍यूशन से निपटने के लिए युद्धस्‍तर पर काम करने में जुट गई है. वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्‍ली सरकार की ओर से कई महत्‍वपूर्ण कदम उठाए गए हैं. दिल्‍ली सरकार ने प्रभावित होने वाले मजदूरों को ₹10000 का मुआवजा देने का ऐलान किया है. साथ ही नौकरीपेशा लोगों के लिए भी महत्‍वपूर्ण घोषणा की गई है. सरकार ने 50 फीसद स्‍टाफ के साथ ही ऑफिस चलाने का निर्देश दिया है. 50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से ही काम करने (Work From Home – वर्क फ्रॉम होम) का निर्देश दिया गया है. वाहनों को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है. दिल्‍ली सरकार के श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने वायु प्रदूषण से निपटने को लेकर बुधवार 17 दिसंबर 2025 को बड़ा ऐलान किया है. उन्‍होंने कहा कि इस गंभीर समस्‍या से निजात पाने के लिए कुछ कड़े निर्णय लिए गए हैं. कपिल मिश्रा ने कहा, ‘GRAP-3 के चलते कंस्ट्रक्शन वर्कर्स का काम बंद था, जिससे उनकी माली हालत पर फर्क पड़ा. सभी रजिस्‍टर्ड मजदूरों के बैंक खाते में दस हजार रुपये DBT के माध्‍यम से ट्रांसफर किए जाएंगे. ये अभी सोलह दिन का है.’ कपिल मिश्रा ने आगे बताया कि GRAP-4 का भी इन मजदूरों को पैसा दिया जाएगा. दिल्‍ली में वर्क फ्रॉम होम देश की राजधानी दिल्‍ली की सरकार ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ा फैसला किया है. कपिल मिश्रा ने कहा, ‘⁠दूसरा निर्णय ऑफिस जानेवालों के लिए है. सभी प्रतिष्ठान (सरकारी और प्राइवेट) केवल 50 परसेंट अटेंडेंस के साथ ही चलेंगे. स्‍वास्‍थ्‍य, बिजली, पानी, डिजास्‍टर मैनेजमेंट और पर्यावरण विभाग पर यह 50 फीसद का फॉर्मूला लागू नहीं होगा.’ कपिल मिश्रा ने वर्किंग आवर्स को फ्लेक्सिबल करने की भी अपील की है. बता दें कि दिल्‍ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए सर्दियों के मौसम में वर्क फ्रॉम होम के फॉर्मूले का अक्‍सर इस्‍तेमाल किया जाता है. इसके अलावा कार पूलिंग का यूज करने की सलाह भी दी गई है. नहीं मानी बात तो जुर्माना मंत्री कपिल मिश्रा ने साफ कर दिया कि निर्देशों की अवहेलना होने की स्थिति में जुर्माना लगाया जाएगा. दिल्‍ली में एयर पॉल्‍यूशन पर कपिल मिश्रा ने कहा कि हमसे एक गलती तो हुई है. हमने 30 साल का पॉल्‍यूशन को 5 महीने में खत्‍म नहीं कर पाए. उन्‍होंने कहा कि आप सरकार ने कुछ नहीं किया. ये जो भी आप देख रहे हैं ये सब 12 साल के हैं. प्रदूषण हमें विरासत में मिला है. बता दें कि सर्दियों के मौसम में हर साल एयर पॉल्‍यूशन की हालत गंभीर हो जाती है. एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स बेहद ही गंभीर कैटेगरी में पहुंच जाता है, जिसके चलते खुली हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है.

नमो भारत स्टेशन बना ‘रीडिंग हब’, यात्री अब वहीं से खरीद सकेंगे मनपसंद किताबें

नई दिल्ली नमो भारत ट्रेन में सफर करने वाले यात्री अब स्टेशन पर ही अपनी पसंदीदा कहानी, किस्से की पुस्तकें भी खरीद सकेंगे। एनसीआरटीसी ने बुकटेल्स के साथ मिलकर आनंद विहार स्टेशन पर पुस्तक मेला शुरू किया है। 21 दिसंबर तक चलने वाले स्टोरी बॉक्स नाम के इस मेले में लोग सुबह 10 से रात 10 बजे तक किताबें खरीद सकेंगे। इस पुस्तक मेले की खास बात यह है कि इसमें बॉक्स-आधारित खरीदारी का विकल्प भी मौजूद है। लोग अलग-अलग किताबें खरीदने के बजाय एक बॉक्स भरकर किताबें चुन सकते हैं और इकट्ठा खरीद सकते हैं। इसके लिए दो अलग-अलग बॉक्स साइज के विकल्प उपलब्ध हैं। यात्री अपनी पसंद और बजट के हिसाब से कोई भी बॉक्स चुनकर, उसमें जितनी किताबें आराम से फिट हो सकें, उतनी भर सकते हैं और पूरे बॉक्स की तय कीमत पर एक साथ खरीद सकते हैं। किताबें खरीदने का ये अनोखा तरीका, लोगों की जेब पर बिना बोझ डाले, उन्हें अलग-अलग तरह की किताबें चुनने और अपनी सभी पसंदीदा किताबें एक ही बार में खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। एनसीआरटीसी के अधिकारी ने बताया कि इस पुस्तक मेले में अलग-अलग तरह की किताबों का कलेक्शन मौजूद है। इनमें फिक्शन, नॉन-फिक्शन, बच्चों की किताबें और नए व युवा लेखकों की किताबें शामिल हैं। इसके अलावा युवा पाठकों के लिए एक खास सेक्शन भी बनाया गया है। मीट एंड ग्रीट सेशन के लिए कई लेखक भी इस पुस्तक मेले में पहुंच रहे हैं। पुस्तक प्रेमी न सिर्फ इन लेखकों से मिलकर बात कर सकते हैं, बल्कि पसंदीदा किताबों पर ऑटोग्राफ भी ले सकते हैं।  

सर्दी–प्रदूषण के बीच ट्रैफिक पुलिस की सुरक्षा, मास्क व विंटर गियर मुहैया

नई दिल्ली राजधानी में प्रदूषण और स्मॉग बढ़ने से दृश्यता कम होने पर दिल्ली यातायात पुलिस ने शीतकालीन सुरक्षा योजना लागू कर दी है। सड़कों पर तैनात छह हजार से अधिक ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को प्रदूषण और ठंड के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए एन-95 मास्क और गर्म कपड़े उपलब्ध कराए जा रहे हैं।  दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्रैफिक पुलिसकर्मी सड़कों पर खड़े रहकर यातायात व्यवस्था संभालते हैं। स्मॉग बढ़ने और वायु गुणवत्ता बिगड़ने इनको स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अधिक रहता है। इसे देखते हुए ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को मास्क, सर्दियों के कपड़े और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण दिए जा रहे हैं। कम दृश्यता के चलते हुए जोखिम से निपटने के लिए ट्रैफिक कर्मियों को फ्लोरोसेंट जैकेट प्रदान की गई हैं, ताकि यातायात नियंत्रित करते समय वे सड़क पर चलने वाले लोगों को साफ दिखाई दें। बैरिकेड्स पर रिफ्लेक्टिव फ्लोरोसेंट स्टिकर भी लगाए जा रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के टोडापुर स्थित मुख्यालय में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर कर्मियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है। शिविर में सामान्य चिकित्सकों के साथ नेत्र विशेषज्ञ और मनोवैज्ञानिक भी शामिल किए जा रहे हैं। यातायात पुलिस ने वाहन चालकों सलाह दी है कि वे रात में फॉग लाइट जलाकर रखें, ताकि दुर्घटनाओं के खतरे को कम किया जा सके।  

स्वच्छ हवा की दिशा में बड़ा संदेश: प्रदूषण से निपटने को सरकार का साझा संकल्प — सीएम रेखा गुप्ता

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को राजधानी में बढ़ते प्रदूषण पर अपनी सरकार की रणनीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी सरकार जमीन पर रहकर और दिल्ली के भीतर ही समाधान तलाशते हुए प्रदूषण की चुनौती से निपट रही है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि नागरिकों की भी साझा जिम्मेदारी है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह के उपायों पर समान रूप से काम कर रही है, ताकि प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके। उन्होंने पिछले कुछ महीनों में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए बताया कि बुनियादी ढांचे के उन्नयन से लेकर स्वच्छ ऊर्जा तक की पहुंच सुनिश्चित करने पर लगातार काम किया जा रहा है। रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण के खिलाफ किसी भी मोर्चे को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मेरी दिल्ली, मेरी जिम्मेदारी सिर्फ एक नारा नहीं है, बल्कि यह कार्य करने और उसे पूरा करने की हमारी दैनिक प्रतिबद्धता है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से भी अपील की कि वे सरकार के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि राजधानी को स्वच्छ और स्वस्थ बनाया जा सके।  

दिल्ली में 17 दिसंबर को भू-स्थानिक पारिस्थितिकी तंत्र पर राष्ट्रीय कार्यशाला

नई दिल्ली नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में भू-स्थानिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने काे लेकर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयाेजन 17 दिसंबर को हाेगा। इसका उद्धघाटन केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व मुख्य अतिथि डॉ. जितेंद्र सिंह होंगे। यह आयोजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत भारतीय सर्वेक्षण एजेंसी करेगी, जिसका विषय भू-स्थानिक मिशन: विकसित भारत का एक प्रवर्तक है।  कार्यशाला का उद्देश्य भारत के भू-स्थानिक मिशन को गति देना और विभिन्न क्षेत्रों के नीति निर्माता, प्रौद्योगिकीविद, उद्योग जगत के नेता और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ भारत के भू-स्थानिक भविष्य को आकार देने वाले नवाचारों पर विचार-विमर्श करेंगे। कार्यशाला में कई सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसमें हितधारकों को उभरते अवसरों पर विचार करने, भू-स्थानिक प्रथाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में भविष्य के लिए तैयार प्रौद्योगिकियों को अपनाने में तेजी लाने में मदद मिलेगी। यह कार्यक्रम विकसित भारत 2047 की राष्ट्रीय परिकल्पना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।  

बढ़ते प्रदूषण पर सख्ती: दिल्ली में बिना वैध PUCC वाहनों को पेट्रोल पर रोक

 नई दिल्ली दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बीजेपी सरकार ने कई सख्त फैसलों का ऐलान किया है, जिनका असर आम लोगों से लेकर वाहन चालकों और निर्माण क्षेत्र तक पड़ेगा. दिल्ली के पर्यावरण संरक्षण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि इन कदमों का मकसद राजधानी की हवा को साफ करना और लोगों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना है. पर्यावरण मंत्री मनजींदर सिंह सिरसा ने घोषणा की है कि 18 दिसंबर से पेट्रोल पंपों पर उन वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा, जिनके पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) सर्टिफिकेट नहीं होगा. इस नियम की निगरानी कैमरों के जरिए की जाएगी, ताकि कोई उल्लंघन ना हो सके. नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित वाहन मालिकों और पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. सरकार का मानना है कि इस कदम से सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या में कमी आएगी. इसके अलावा दिल्ली के बाहर से आने वाले निजी वाहनों को लेकर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं. दूसरे राज्यों में रजिस्टर, बीएस-VI उत्सर्जन मानकों से नीचे के निजी वाहनों को राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी. यह फैसला खासतौर पर उन वाहनों पर लागू होगा, जो अधिक धुआं छोड़कर वायु प्रदूषण बढ़ाते हैं. दिल्ली की सीमाओं पर तैनात एजेंसियों को इस नियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. निर्माण गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण पर भी सरकार ने सख्ती दिखाई है. दिल्ली में ईंट, रेत, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्रियों के ​परिवहन पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जाएगा और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पर्यावरण मंत्री सिरसा ने दिल्ली वालों से मांगी माफी पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए मंत्री सिरसा ने कहा कि मौजूदा सरकार को 'प्रदूषण की बीमारी विरासत में मिली है'. उन्होंने कहा, 'जिन लोगों ने दिल्ली में प्रदूषण फैलाया, वही आज विरोध कर रहे हैं.' बीजेपी सरकार द्वारा दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि राजधानी के लैंडफिल साइट्स की ऊंचाई में करीब 15 मीटर की कमी आई है और लगभग 8,000 उद्योगों को कड़े प्रदूषण नियंत्रण मानकों के दायरे में लाया गया है. प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर अब तक 9 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है. उन्होंने कहा कि लकड़ी जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने 10,000 हीटर वितरित किए हैं. इसके अलावा, बैंक्वेट हॉल्स में डीजे के उपयोग को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं. मंत्री सिरसा ने स्वीकार किया कि दिल्ली में प्रदूषण पर पूरी तरह काबू पाना इतने कम समय में संभव नहीं है. उन्होंने कहा, 'मैं दिल्ली के लोगों से माफी मांगता हूं, लेकिन सात-आठ महीनों में प्रदूषण को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है.' साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर भी तंज कसते हुए आरोप लगाया कि पिछले वर्ष इसी अवधि में उन्होंने मास्क नहीं पहने थे, लेकिन अब मास्क पहनकर घूम रहे हैं. प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार ने उठाए कई कदम पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि शहर में 62 पॉल्यूशन हॉटस्पॉट की पहचान की है, जिनमें से 13 क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में प्रदूषण का स्तर कम दर्ज किया गया है. इसके अलावा, 3,427 इलेक्ट्रिक बसों को डीटीसी में शामिल किया गया है ताकि वाहनों से होने वाले ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम किया जा सके. सिरसा ने यह भी बताया कि वैज्ञानिकों की एक समिति गठित की गई है, जो नियमित रूप से बैठक कर प्रदूषण के रुझानों का अध्ययन कर रही है और आगे के उपायों की सिफारिश कर रही है. दिल्ली में इस समय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'बहुत खराब' श्रेणी में बना हुआ है. 16 दिसंबर 2025 को सुबह के समय AQI 380 से ऊपर दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है. सर्दियों का मौसम आते ही धुंध और स्मॉग की मोटी चादर छा जाने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है. वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों से उड़ती धूल प्रदूषण को बढ़ाने में सहयोग कर रही है. सरकार का मानना है कि वाहनों से होने वाला प्रदूषण दिल्ली की हवा को खराब करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है. इसलिए PUCC चेक को अनिवार्य बनाकर पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगाम लगाई जा रही है. लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपयोग करने की अपील दिल्ली सरकार ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करें, सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करें और अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें. दिल्ली सरकार का कहना है कि ये कदम अस्थायी जरूर हैं, लेकिन जनता के स्वास्थ्य को देखते हुए बेहद जरूरी हैं. आने वाले दिनों में प्रदूषण की स्थिति की समीक्षा कर आगे और कड़े फैसले लिए जा सकते हैं. पर्यावरण मंत्री सिरसा ने कहा कि ये कदम दिल्ली को स्वच्छ हवा देने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि ये उपाय 18 दिसंबर से लागू हो रहे हैं. उन्होंने नगारिकों से नियमों का पालन करने का अनुरोध किया.