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दिल्ली: मेजरमेंट बुक संकट से ठप पड़ी कामों की एंट्री, गुणवत्ता पर खतरा

नई दिल्ली  एमसीडी में पिछले 4-6 महीने से मेजरमेंट बुक का भारी अकाल पड़ा हुआ है। मेजरमेंट बुक न होने की वजह से संबंधित डिविजनों (मेंटिनेंस) के तहत चल रहे हजारों कामों की मेजरमेंट बुक में एंट्री नहीं हो पा रही है। जब मेजरमेंट बुक में एंट्री ही नहीं हो पा रही है तो संबंधित डिविजनों में कॉन्ट्रैक्टर जितने भी काम कर रहे हैं उनकी कोई निगरानी नहीं हो रही है। इसका सीधा असर काम की क्वॉलिटी पर पड़ेगा। एमसीडी के पास खुद की प्रिटिंग प्रेस सूत्रों का कहना है कि यह स्थिति तो तब है जबकि एमसीडी को मेजरमेंट बुक किसी बाहरी प्रिंटर से नहीं छपवानी, बल्कि सिविल लाइन स्थित अपनी ही प्रिंटिंग प्रेस पर छापनी है। बावजूद इसके पिछले कई महीनों से डिविजनों में मेजरमेंट बुक उपलब्ध नहीं हो पा रही। दिल्ली सरकार की ओर से सड़कें, गलियां और कॉलोनियों की टूटी पुलिया आदि बनाने के लिए भरपूर फंड उपलब्ध कराया हुआ है। MCD के 12 जोनों में चल रहे विकास कार्य वॉर्ड वाइज काम कराने के लिए संबंधित जोन की डिविजनों द्वारा टेंडर मांगे जाते हैं। टेंडर अलॉट होने के बाद जब कॉन्ट्रैक्टर काम शुरू करता है उसी दिन से मेजरमेंट बुक में एंट्री करने का काम शुरू हो जाता है। एमसीडी के 12 जोनों के तहत आने वाली मेंटिनेंस डिविजनों में हजारों काम चल रहे हैं। किसी वॉर्ड में कॉलोनी के अंदर ही सड़कें बनाने का काम चल रहा है तो कहीं पर गलियों के साथ-साथ नालियों को बनाया जा रहा है। कॉन्ट्रैक्टर को काम शुरू करने से पहले करनी होती है एंट्री इसके अलावा जिन कॉलोनियों में पुलिया टूटी हुई थी उन्हें भी दोबारा बनाया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि कॉन्ट्रैक्टर जब काम शुरू करता है तो उसके हर दिन वह जो भी काम करता है उसकी एंट्री मेजरमेंट बुक में की जाती है। उदाहरण के रूप में अगर कोई कॉन्ट्रैक्टर कहीं पर सड़क बनाने का काम कर रहा है तो सड़क बनाने से पहले वह पुरानी सड़क को तोड़ेगा। कॉन्ट्रैक्टर ने किस दिन कितनी सड़क तोड़ी यह सब मेजरमेंट बुक में दर्ज किया जाता है। प्रिंटिंग प्रेस अपनी, फिर मेजरमेंट बुक क्यों नहीं ? प्रिंटिंग प्रेस अपनी, प्रिंटिंग प्रेस पर काम करने वाला स्टॉफ भी अपना, पेपर की भी कोई कमी नहीं, बावजूद इसके मेजरमेंट बुक का अकाल पड़ना एमसीडी के प्रिंटिंग प्रेस विभाग पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। डिविजन के लिए मेजरमेंट बुक का बड़ा महत्व है। कॉन्ट्रैक्टर को जो वर्कआर्डर मिलता है शुरुआत से लेकर आखिर तक छोटे से छोटे काम की एंट्री इसमें दर्ज होती है। मेजरमेंट बुक कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस वजह से कई डिविजनों में काम शुरू नहीं हो पाए।

कांवड़ यात्रा को लेकर दिल्ली में बड़ा फेरबदल, रेखा गुप्ता ने समिति का किया पुनर्गठन

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस बार आगामी कांवड़ यात्रा को यादगार, सुगम, भक्तिभाव से परिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए एक हाई लेवल 'कांवड़ समिति' का पुनर्गठन किया है। दिल्ली सरकार के संस्कृति एवं कानून मंत्री कपिल मिश्रा को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इनके अलावा दिल्ली के 5 अन्य विधायकों अजय महावर, अनिल शर्मा, करनैल सिंह, संजय गोयल और उमंग बजाज को समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इस मौके पर रेखा गुप्ता ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक पारंपरिक धार्मिक आयोजन मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अटूट सामाजिक समरसता और जनआस्था का एक विराट महोत्सव है। उन्होंने कहा कि सावन माह में दिल्ली की सड़कों पर उमड़ने वाला शिवभक्तों का सैलाब देश की सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित करता है। कांवड़ शिविरों को विशेष सहायता दी जाएगी मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार इस बार भी शिवभक्तों के लिए सम्मानजनक एवं बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। इसके लिए कांवड़ शिविरों को विशेष सहायता दी जाएगी।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार के लिए कांवड़ व्यवस्थाएं अब सिर्फ कागजी प्रशासनिक कामकाज नहीं रह गई हैं, बल्कि यह पूरी व्यवस्था दिल्ली में सेवा, श्रद्धा और सम्मान का एक अनूठा प्रतीक बन चुकी है। सरकार का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने वाले हर एक शिवभक्त कांवड़िए को अतिथि के रूप में देवतुल्य सम्मान और श्रेष्ठ सुविधाएं मिलें। क्या होगा समिति का काम सीएम ने बताया कि अध्यक्ष कपिल मिश्रा के नेतृत्व में यह नवगठित समिति जल्द ही दिल्ली के सभी डीएम, दिल्ली पुलिस, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य व संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेगी। समिति का मुख्य फोकस रूट मैनेजमेंट, वॉटरप्रूफ टेंटों की गुणवत्ता, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, 24 घंटे निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति और सुरक्षा चाक-चौबंद रखने पर होगा, ताकि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी यात्रा निर्विघ्न और अभूतपूर्व रूप से संपन्न हो सके। पिछले साल कांवड़ शिविरों को क्या हुए फायदे रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार ने शिवभक्तों की सेवा के लिए पिछले वर्षों की तुलना में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक व्यवस्थाएं की थीं। वर्ष 2024 में जहां राजधानी में केवल 170 कांवड़ शिविरों को मंजूरी मिली थी, वहीं वर्ष 2025 में सरकार द्वारा दी गई आसान मंजूरियों के चलते रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई और पूरी दिल्ली में कुल 374 रजिस्टर्ड कांवड़ शिविर लगाए गए। इन शिविरों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने पुरानी टेंडर प्रथा को खत्म कर सीधे बैंक खातों में (डीबीटी के माध्यम से) 50,000 रुपये से लेकर अधिकतम 11 लाख रुपये तक की पारदर्शी आर्थिक सहायता प्रदान की, जिसका 50 प्रतिशत हिस्सा आयोजन से पहले ही एडवांस के रूप में जारी कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, समितियों पर वित्तीय बोझ कम करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार द्वारा प्रत्येक रजिस्टर्ड शिविर को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और अस्थायी मीटर के सिक्योरिटी डिपॉजिट में 75 प्रतिशत की छूट भी दी गई थी।

सुरक्षाबलों पर हमले की थी तैयारी! दिल्ली में ISI मॉड्यूल का भंडाफोड़, 9 आरोपी दबोचे गए

 नई दिल्ली दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बड़े आतंकी हमले को नाकाम कर दिया है। एनडीआर ने ऐसे 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो पाकिस्तानी आईएसआई और मुंबई अंडरवर्ल्ड नेटवर्क के इशारे पर काम कर रहे थे। इन सभी लोगों को दिल्ली की खास जगहों और सुरक्षा बलों पर हमला करने का काम दिया गया था। पुलिस ने इनके पास से कई हथियार और बारूद भी बरामद किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आईएसआई और अंडरवर्ल्ड से जुड़े 9 लोगों को दिल्ली में अलग-अलग जगह हमले का काम सौंपा गया था। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में खूफिया जानकारी मिलने के बाद ऑपरेशन चलाया गया था जिनमें इन आरोपियों को दबोच लिया गया। इसके लिए पिछले कुछ समय से मॉड्यूल पर नजर रखी जा रही थी। संवेदनशील इलाकों पर करने वाले थे हमला आरोप है कि गिरफ्तार किए गए नौ सदस्य पाकिस्तान की जासूसी एजेंसियों, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस और मुंबई के अंडरवर्ल्ड से जुड़े हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहे थे। उन्हें दिल्ली में संवेदनशील ठिकानों पर हमले करने का काम सौंपा गया था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आरोपी दिल्ली, मुंबई और पंजाब के रहने वाले हैं। इनमें से कुछ विदेशी नागरिक भी हैं। आतंकवादियों के निशाने पर प्रमुख प्रतिष्ठान सूत्रों का कहना है कि आतंकियों के निशाने पर दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाएं थीं. संभावित लक्ष्यों में पावर प्लांट, बिजली उत्पादन एवं वितरण केंद्र, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान शामिल थे. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन ठिकानों पर हमला कर व्यापक जनहानि के साथ-साथ देश की आवश्यक सेवाओं को बाधित करने की साजिश रची जा रही थी।  जांच में यह भी सामने आया है कि बरामद विस्फोटक सामग्री कथित तौर पर सीमा पार से भारत पहुंचाई गई थी. एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विस्फोटकों और हथियारों की खेप देश के भीतर किस नेटवर्क के जरिए पहुंचाई गई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे. बरामद सामग्री में ग्रेनेड और कई अत्याधुनिक विदेशी हथियार शामिल बताए जा रहे हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।  गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है. जांच एजेंसियां उनके डिजिटल उपकरणों, संचार माध्यमों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क की संरचना, फंडिंग और विदेशी संपर्कों का पता लगाया जा सके. दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (स्पेशल सेल) मामले को लेकर पुलिस मुख्यालय में प्रेस ब्रीफिंग करेंगे, जिसमें ऑपरेशन की पूरी जानकारी, गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका और बरामद हथियारों एवं विस्फोटकों से जुड़े विवरण साझा किए जाने की संभावना है।  सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई देश की सुरक्षा के लिए बड़ी सफलता है, क्योंकि इससे एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसके तार कथित तौर पर पाकिस्तान की आईएसआई, दुबई आधारित ऑपरेटरों और अंडरवर्ल्ड से जुड़े तत्वों तक पहुंचते हैं. हालांकि जांच अभी जारी है और कई तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की विस्तृत ब्रीफिंग के बाद ही हो सकेगी।  हाई अलर्ट पर दिल्ली खूफिया एजेंसियों से आतंकी हमले की जानकारी मिलने के बाद दिल्ली को हाई अलर्ट पर रखा गया है। जानकारी के मुताबिक इस महीने की शुरुआथ में ही सुरक्षा एजेंसियों को हमले की खूफिया जानकारी मिली थी। इसमें बताया गया था कि आतंकी सेंट्रल दिल्ली की संवेदनशील जगहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बना सकते हैं। इसके लिए वे आत्मघाती हमले, गाड़ियों में IED धमाके, गोलीबारी या कई जगहों पर हमले की साजिश रच रहे हैं। इसके बाद से ही दिल्ली पुलिस इस मॉड्यूल पर नजर बनाए रखी हुई थी। हालात देखते हुए दिल्ली के सभी थानों और जिलों की पुलिस को अलर्ट कर दिया गया है। साथ ही, उन्हें खुफिया एजेंसियों और केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर काम करने के लिए कहा गया है। विदेश में बैठकर कौन रच रहा हमले की साजिश? दिल्ली पुलिस अब इस नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटाने और अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है। इसके अलावा इतनी भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक कहां से मिले, इसका भी पता लगाया जा रहा है। दिल्ली पुलिस इस बात का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गैंग के तार विदेश से कैसे जुड़े हैं और हमलों के लिए फंडिंग कहां से हो रही है। इसके अलावा विदेश में बैठे कौन-कौन से लोग इन्हें ऑर्डर दे रहे हैं।

फर्जी दस्तावेजों से बनाई गई कंपनी, जमीन और बिजली बिल का हुआ दुरुपयोग

 नई दिल्ली जीएसटी फर्जीवाड़े का एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक कारोबारी की जानकारी के बिना उसके पते, बिजली बिल और कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर फर्जी फर्म खड़ी कर दी गई। इसके बाद उसी फर्म के जरिए करोड़ों रुपये की बोगस बिलिंग कर जीएसटी लाभ हासिल करने का खेल खेला गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने शिकायतकर्ता के बयान पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता रवि कुमार ने आरोप लगाया है कि सोनिया विहार स्थित उनकी संपत्ति के पते का दुरुपयोग कर एक नाम से जीएसटी फर्म रजिस्टर कराई गई। उन्हें जानकारी तब मिली, जब जीएसटी विभाग ने पूछताछ के लिए बुलाया। वहां अधिकारियों ने एक रेंट अग्रीमेंट दिखाया, जिसके आधार पर फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया गया था। कभी रेंट एग्रीमेंट पर साइन नहीं किया रवि कुमार का कहना है कि उन्होंने कभी अपनी संपत्ति किसी कपिल नामक व्यक्ति को किराये पर नहीं दी। न ही किसी रेंट एग्रीमेंट पर साइन किए। शिकायतकर्ता के मुताबिक, दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर फर्जी हैं और जालसाजी कर तैयार किए गए शुरुआती जांच में सामने आया कि फर्म के जरिए करीब 34.28 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग की गई हैं। जांच में यह भी सामने आया कि फर्म के जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए उनके घर का बिजली बिल इस्तेमाल किया गया। रवि का दावा है कि उन्होंने कभी किसी को अपना बिजली बिल उपलब्ध नहीं कराया। यह भी आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संबंधित फर्म के नाम से बैंक खाता भी खुलवाया गया। इसी खाते से कथित तौर पर फर्जी कारोबारी लेन-देन किए गए और टैक्स लाभ लेने की कोशिश की गई। बोगस बिलिंग का आरोप शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी पहचान और संपत्ति का इस्तेमाल किया गया, जबकि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी। शुरुआती जाच में सामने आया कि फर्म के जरिए करीब 34.28 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग की गई। आरोप है कि इसके माध्यम से करीब 6.17 करोड रुपये का अनुचित जीएसटी लाभ लेने का अनुचित प्रयास किया गया। जाच के दौरान धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, आपराधिक विश्वासघात और साजिश सही पाए गए। EOW ने 21 मई को केस दर्ज किया। पुलिस अब कथित मास्टरमाइंड कपिल, और पूरे नेटवर्क की जाच कर रही है।  

ई-चालान सिस्टम हुआ और स्मार्ट, 1500 नई हैंडहेल्ड मशीनें तैनात

नई दिल्ली  दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अपने चालान और यातायात प्रबंधन सिस्टम में एक बड़ा तकनीकी बदलाव शुरू किया है, जिसका उद्देश्य यातायात नियमें के उल्लंघन को अधिक पारदर्शी, नागरिक अनुकूल, प्रभावी और डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है। लोग मौके पर ही भर सकेंगे चालान इस पहल के तहत अब यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले लोग मौके पर ही UPI, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड जैसी विभिन्न डिजिटल भुगतान सुविधाओं से अपने चालान का भुगतान कर सकेंगे। इसके लिए फील्ड में तैनात ट्रैफिक पुलिस अधिकारी हैंडहेल्ड डिवाइस का उपयोग करेंगे। मामले में क्या बोले ट्रैफिक के अडिशनल पुलिस कमिश्नर ई चालान मशीनों से फिलहाल चालान के साथ-साथ पुराने चालानों का भी डिजिटल भुगतान सड़क पर तैनात ट्रैफिक कर्मियों की सहायता से किया जा सकेगा। इससे यात्रियों को होने वाली असुविधा तो कम होगी ही साथ ही कैश रहित लेनदेन को भी बढ़ावा मिलेगा। अडिशनल पुलिस कमिश्नर (ट्रैफिक) विजयंता गोयल आर्या ने बताया कि चालान का भुगतान डिजिटल रूप में करने की व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए दिल्लीभर में फील्ड अधिकारियों को लगभग 1,500 नई ई-चालान मशीनें बांटी की जा रही है। कई आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं खास मशीन ट्रैफिक पुलिस मुख्यालय टोडापुर में कुछ ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को ये मशीनों बांटकर इस मुहिम की शुरूआत की गई है। इन हैंडहेल्ड डिवाइस के माध्यम से तेज चालान जेनरेशन, तुरंत भुगतान प्रक्रिया, गाड़ी और उल्लंघनकर्ता की फोटो कैप्चर करने, गाड़ी को टो किए जाने की सूचना गाड़ी मालिक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजने और बेहतर डेटा और रेकॉर्ड प्रबंधन जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। भारत बिल पेमेंट सिस्टम से जुड़ चुकी ई चालान प्रणाली जनसुविधा को और बेहतर बनाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ई-चालान प्रणाली को अब भारत बिल पेमेंट सिस्टम (BBPS) से भी जोड़ दिया गया है। इससे कोई भी व्यक्ति किसी भी UPI मोबाइल ऐप्लीकेशन से वर्तमान और पुराने दोनों प्रकार के कंपाउंडेबल चालानों का सुरक्षित, सरल और सहज भुगतान कर सकेंगे। ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई नई मशीनों और डिजिटल भुगतान के बारे में बताने के लिए सभी फील्ड अधिकारियों, जिनमे सर्किल ट्रैफिक इंस्पेक्टर भी शामिल है, उनको ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई। इसमें ई-चालान प्रणाली के संचालन, डिजिटल भुगतान प्रक्रिया और शिकायत निवारण संबंधी प्रोटोकॉल की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस आधुनिक तकनीक और स्मार्ट प्रवर्तन समाधानो के माध्यम से यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने, चालान भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने, नागरिको को सुविधा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है

लाल किले हमले के बाद अलर्ट, दिल्ली पुलिस ने हथियारों संग आतंकी मॉड्यूल पकड़ा

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को फिर से दहलाने की साजिश रची जा रही थी। लेकिन समय से पहले एक्शन लेते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तानी आईएसआई-मुंबई अंडरवर्ल्ड नेटवर्क के इशारे पर काम करने वाले 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन्हें दिल्ली में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने का काम सौंपा गया था। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के अनुसार, इनके पास से हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए हैं। पाकिस्तानी आतंकियों के संपर्क में थे सभी आरोपी दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के मुताबिक ये सभी आरोपी पाकिस्तानी आईएसआई हैंडलर के इशारे पर काम कर रहे थे। उन्हें दिल्ली के हॉटस्पॉट इलाकों में हमला करने का काम सौंपा गया था। इतना ही नहीं सुरक्षाकर्मियों पर भी हमला करने की प्लानिंग थी। इनके पास से कई खतरनाक हथियार और विस्फोटक बरामद हुए हैं। लाल किले हमले के बाद यह गिरफ्तारियां अहम मानी जा रही बता दें कि दिल्ली के लाल किले पर हमले के बाद यह गिरफ्तारियां अहम मानी जा रही हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में, पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने जमीनी स्तर पर खुफिया जानकारी जुटाने और उभरते खतरों की पहचान करने के लिए राजधानी के प्रत्येक पुलिस स्टेशन में समर्पित आतंकवाद-विरोधी इकाइयों (सीटीयू) के गठन का आदेश दिया था। सीटीयू को दी गई थी ये जिम्मेदोरी इन इकाइयों को संवेदनशील स्थानों की निगरानी करने, कट्टरपंथी व्यक्तियों का पता लगाने, अस्थाई आबादी की पुष्टि करने और आतंकी गतिविधियों से जुड़े संदिग्धों, गैंगस्टरों और हवाला संचालकों पर नजर रखने का काम सौंपा गया है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह कदम खुफिया जानकारी के आधार पर उठाया गया है, जिसमें संकेत मिले हैं कि विदेशों से संचालित आतंकी सरगना भारत में अपने गुर्गों की भर्ती, उन्हें कट्टरपंथी बनाने और मार्गदर्शन करने के लिए एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और स्थानीय स्लीपर नेटवर्क का तेजी से उपयोग कर रहे हैं।  

कांवड़ यात्रा के लिए दिल्ली सरकार ने बनाई नई उच्च स्तरीय समिति

नई दिल्ली  मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आगामी कांवड़ यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए उच्च स्तरीय 'कांवड़ समिति' का पुनर्गठन किया है। दिल्ली सरकार के संस्कृति और कानून मंत्री कपिल मिश्रा को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच विधायकों को बतौर सदस्य इसमें शामिल किया गया है। सीएम रेखा गुप्ता ने एक्स पर दी जानकारी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा कि उच्च स्तरीय कांवड़ समिति का पुनर्गठन किया गया है। कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। जबकि अजय माहवार, अनिल शर्मा, करनैल सिंह, संजय गोयल और उमंग बजाज को इस समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है। कावड़ शिविरों को दी जाएगी विशेष सहायता मुख्यमंत्री का कहना है कि दिल्ली सरकार इस बार भी शिवभक्तों के लिए सम्मानजनक एवं बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। इसके लिए कांवड़ शिविरों को विशेष सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक पारंपरिक धार्मिक आयोजन मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अटूट सामाजिक समरसता और जनआस्था का एक विराट महोत्सव है। हर शिवभक्त को मिले श्रेष्ठ सुविधाएं उन्होंने कहा कि सावन माह में दिल्ली की सड़कों पर उमड़ने वाला शिवभक्तों का सैलाब देश की सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित करता है। दिल्ली सरकार के लिए कांवड़ व्यवस्थाएं अब सिर्फ कागजी प्रशासनिक कामकाज नहीं रह गई हैं, बल्कि यह पूरी व्यवस्था दिल्ली में सेवा, श्रद्धा और सम्मान का एक अनूठा प्रतीक बन चुकी है। सरकार का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने वाले हर एक शिवभक्त (कांवड़िए) को अतिथि के रूप में देवतुल्य सम्मान और श्रेष्ठ सुविधाएं मिलें। कपिल मिश्रा संभालेंगे अध्यक्ष की कमान मुख्यमंत्री की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि अध्यक्ष कपिल मिश्रा के नेतृत्व में यह नवगठित समिति जल्द ही दिल्ली के सभी डीएम, दिल्ली पुलिस, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेगी। समिति का मुख्य फोकस रूट मैनेजमेंट, वाटरप्रूफ टेंटों की गुणवत्ता, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, 24 घंटे निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति और सुरक्षा चाक-चौबंद रखने पर होगा, ताकि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी यात्रा निर्विघ्न और अभूतपूर्व रूप से संपन्न हो सके। पिछली साल सरकार द्वारा की गईं व्यवस्थाओं का किया जिक्र मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी जानकारी दी कि दिल्ली सरकार ने शिवभक्तों की सेवा के लिए पिछले वर्षों की तुलना में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक व्यवस्थाएं की थीं। वर्ष 2024 में जहां राजधानी में केवल 170 कांवड़ शिविरों को मंजूरी मिली थी, वहीं वर्ष 2025 में सरकार की ओर से दी गई आसान मंजूरियों के चलते रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई और पूरी दिल्ली में कुल 374 पंजीकृत कांवड़ शिविर लगाए गए। प्रत्येक शिविर को मिलती हैं ये सुविधाएं उन्होंने बताया कि इन शिविरों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने पुरानी टेंडर प्रथा को खत्म कर सीधे बैंक खातों में (डीबीटी के माध्यम से) 50,000 रुपये से लेकर अधिकतम 11 लाख रुपये तक की पारदर्शी आर्थिक सहायता प्रदान की, जिसका 50 प्रतिशत हिस्सा आयोजन से पहले ही एडवांस के रूप में जारी कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, समितियों पर वित्तीय बोझ कम करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार द्वारा प्रत्येक पंजीकृत शिविर को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और अस्थाई मीटर के सिक्योरिटी डिपॉजिट में 75 प्रतिशत की छूट भी दी गई थी।  

आदर्श परीक्षा केंद्र पर अव्यवस्था, घंटों इंतजार के बाद परीक्षा कैंसिल

नोएडा नोएडा सेक्टर-64 स्थित आदर्श परीक्षा केंद्र में शनिवार को आयोजित सीयूईटी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) परीक्षा छात्रों और अभिभावकों के लिए भारी परेशानी का कारण बन गई। सुबह से परीक्षा देने पहुंचे सैकड़ों अभ्यर्थियों को घंटों इंतजार करना पड़ा, लेकिन तकनीकी खामी के चलते परीक्षा शुरू ही नहीं हो सकी। आखिरकार परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने केंद्र के बाहर धरना-प्रदर्शन करते हुए एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का आरोप है कि वे सुबह नौ बजे की परीक्षा के लिए समय से केंद्र पहुंच गए थे। लंबी कतारों में खड़े रहने के बाद जब उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश मिला तो वहां भी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ा। अभ्यर्थियों के अनुसार परीक्षा शुरू होने का इंतजार करते हुए उन्हें एक से दो घंटे तक कक्ष में बैठाए रखा गया, जबकि कई कमरों में पंखे तक नहीं चल रहे थे। भीषण गर्मी के बीच छात्र लगातार परीक्षा शुरू होने का इंतजार करते रहे, लेकिन अंत में परीक्षा रद्द कर दी गई। प्रदर्शन में शामिल अनुज ने बताया कि उनके भाई की परीक्षा सुबह नौ बजे से थी। वह सुबह 6:30 बजे उन्हें केंद्र छोड़कर घर लौट गए थे और दस बजे लेने पहुंचे। लेकिन तब तक कोई भी छात्र बाहर नहीं आया था। अंदर से लगातार घोषणा की जा रही थी कि तकनीकी कारणों से परीक्षा शुरू नहीं हो पा रही है। अनुज के मुताबिक, एक छात्र ने बाहर आकर बताया कि दो घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद परीक्षा शुरू नहीं हुई और छात्रों को बाहर निकलने की भी अनुमति नहीं दी जा रही थी। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे कई महीनों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। 12वीं के बाद देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली इस परीक्षा के रद्द होने से उनके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

हाईराइज बिल्डिंग्स के लिए इंटरनेट मॉनिटरिंग सिस्टम लागू, फायर अलर्ट सीधे DFS को मिलेगा

नई दिल्ली  आग की बढ़ती घटनाओं के बीच अब रेजिडेंशल और कर्मशल इमारतें का थर्ड पार्टी फायर सेफ्टी ऑडिट होगा। यह ऑडिट दिल्ली फायर डिपार्टमेंट के बजाए उनकी ओर से अधिकृत प्राइवेट फायर सेफ्टी ऑडिटर करेंगे। इसके साथ ही हाईराइज इमारतों में अब इंटरनेट आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू किया जाएगा, जिसके बाद किसी मी फायर इक्विपमेंट में खराबी आई ते बिल्डिंग मालिक के साथ दिल्ली फायर सर्विसेज (DFS) को भी अलर्ट जाएगा। दिल्ली सरकार ने नियमों में किया बदलाव दिल्ली सरकार ने फायर NOC लेने के लिए थर्ड पार्टी फायर सेफ्टी ऑडिटर के लिए दिल्ली फायर सर्विस (संशोधन) नियम-2025 में बदलाव कर लागू कर दिया है। फायर इक्विपमेंट की 24 घंटे निगरानी के लिए इंटरनेट आधारित मॉनीटरिंग को भी शामिल किया गया है। जिससे समय पर खराब इक्विपमेंट की जानकारी मिलेगी। नियमों में बदलाव को लेकर क्या बोले गृह मंत्री आशीष सूद सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार DFS (दिल्ली फायर सर्विसेज) से हटाकर अधिकृत फायर सेफ्टी ऑडिटर्स (FSAS) को सौंप दिया गया है। गृह मंत्री आशीष सूद के मुताबिक दिल्ली सरकार ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेशन की प्रक्रिय को डिसेंट्रलइज किया गया है, जिससे यह काम तेजी से हो सके। इमारतें में एक पेशेवर फायर ऑडिटिंग सिस्टम बने। जिससे आग जैसे घटनाओं से बच जा सके। एजेंसी को कार्रवाई करने का भी होगा अधिकार DFS अब सिर्फ इनफोर्समेंट पर काम करेगी। साथ ही प्राइवेट ऑडिटर्स की ओर से किए गए सर्टिफिकेशन की जांच भी करेगी। अधिसूचना में कहा गया है कि DFS चहे तो प्राइवेट ऑडिटर्स की ओर से किए गए 5 फीसदी सर्टिफिकेशन की रैडम जांच कर सकती है। अगर उसमें कोई गढ़बढ़ी मिलती है, तो उसपर कार्रवाई का अधिकार भी होगा। जुमाने का भी प्रावधान है। ऑडिट के लिए बिल्डिंग मालिक फायर सेफ्टी सर्विसेज की वेबसाइट पर जाकर उनकी बुकिंग कर सकेंगे। तीन लेवल के होंगे फायर सेफ्टी ऑडिटर्स अलग-अलग इमारतें की कैटिगरी के हिसाब से थर्ड पार्टी फायर सेफ्टी ऑडिटर्स को तीन कैटिगरी में बांटा गया है। लेवल 1 में ऑडिटर्स 15 मीटर से कम ऊंची बिल्डिंग्स (स्कूल, अस्पताल, गेस्ट हाउस, छोटे व्यावसायिक भवन) का फायर सेफ्टी सर्टिफिकेशन कर सकते है। इसके लिए उनके पास फायर सेफ्टी इंजिनियरिंग, अर्किटेक्चर डिग्री और डिप्लोमा होना चाहिए।  

सरकार के निशाने पर दिल्ली जिमखाना क्लब, सामने आया पूरा प्लान; 5 जून से होगी कार्रवाई

नई दिल्ली दिल्‍ली जिमखाना क्‍लब का अब इतिहास के पन्‍नों में दफन होना अब लगभग तय माना जा रहा है. जिम खाना क्‍लब को लेकर सरकार का पूरा प्‍लान सामने आया गया है. फिलहाल, जिमखाना क्‍लब के मौजूदा प्रबंधन को 5 जून तक का समय मिला हुआ है. यह मियाद पूरा होते ही सरकार की तरफ से एक्‍शन शुरू हो जाएगा. आपको बता दें कि केंद्र सरकार राजधानी के इस क्लब की जमीन वापस लेने की तैयारी में है।  सरकार का कहना है कि यह इलाका बेहद संवेदनशील और हाई सिक्योरिटी जोन में आता है, इसलिए यहां केवल सरकारी और प्रशासनिक कामकाज से जुड़ी सुविधाएं ही होनी चाहिए. सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस जमीन पर सरकारी दफ्तर और अधिकारियों के लिए आवासीय परिसर बनाने की योजना पर काम कर रही है. बताया जा रहा है कि यह सुविधा दिल्ली के मोती बाग इलाके की तरह विकसित की जा सकती है।  दरअसल, दिल्ली जिमखाना क्लब प्रधानमंत्री आवास लोक कल्याण मार्ग के पास स्थित है. सरकार का मानना है कि इस सुरक्षा क्षेत्र में यह एकमात्र ऐसा निजी संस्थान है, जहां आम सदस्यों की पहुंच बनी हुई है. इसी वजह से केंद्र सरकार ने क्लब की जमीन वापस लेने का फैसला किया है. केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि यह जमीन रक्षा ढांचे को मजबूत करने, सार्वजनिक सुरक्षा और जरूरी प्रशासनिक जरूरतों के लिए चाहिए. सरकार का कहना है कि इस इलाके का इस्तेमाल सार्वजनिक हित से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाएगा।  22 मई को भूमि एवं विकास कार्यालय यानी एलएंडडीओ ने दिल्ली जिमखाना क्लब को आदेश दिया था कि वह 5 जून तक जमीन सरकार को सौंप दे. आदेश में रणनीतिक और रक्षा जरूरतों का हवाला दिया गया था. हालांकि, इस फैसले को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है. क्लब के कुछ सदस्यों, स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य लोगों ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इन लोगों ने सरकार के फैसले का विरोध किया है. हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और क्लब प्रबंधन दोनों को नोटिस जारी किया है।  दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास काफी पुराना है. इसकी स्थापना 3 जुलाई 1913 को ब्रिटिश शासन के दौरान ‘इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के नाम से हुई थी. उस समय यह क्लब अंग्रेज अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों के लिए बनाया गया था. आजादी के बाद इसके नाम से ‘इम्पीरियल’ शब्द हटा दिया गया. क्लब की ज्यादातर मौजूदा इमारतें 1930 के दशक की बनी हुई हैं. 2022 में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण यानी एनसीएलटी ने क्लब के प्रबंधन में 15 सरकारी निदेशकों की नियुक्ति को मंजूरी दी थी. यह फैसला क्लब में कथित गड़बड़ियों और कुप्रबंधन के आरोपों के बाद लिया गया था।