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80 यात्रियों से भरी बस में अचानक भड़की आग, लुधियाना में अफरा-तफरी का माहौल

लुधियाना. खन्ना के नजदीक लुधियाना–अमृतसर नेशनल हाईवे पर रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब यात्रियों से भरी एक एसी स्लीपर बस में अचानक आग भड़क उठी। बस में करीब 80 यात्री सवार थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। गनीमत रही कि चालक और कंडक्टर की सूझबूझ से सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और एक बड़ा जानलेवा हादसा टल गया। जानकारी के मुताबिक, यह बस लुधियाना के समराला चौक से उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की ओर जा रही थी। जैसे ही बस बिजा गांव के पास पहुंची, पीछे के केबिन के नीचे बने लगेज कंपार्टमेंट से धुआं निकलने लगा। कुछ ही पलों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते पूरी बस इसकी चपेट में आ गई। धुआं और गर्मी ऊपर के केबिन तक पहुंचते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कई यात्री घबराहट में अपनी सीटें छोड़कर इधर-उधर भागने लगे। कुछ लोगों ने तो चलती बस से उतरने की कोशिश भी की, जिसमें उन्हें मामूली चोटें आईं। हालात बिगड़ते देख ड्राइवर ने तुरंत बस को सड़क किनारे रोका और कंडक्टर ने तेजी से सभी यात्रियों को नीचे उतारना शुरू किया। हालांकि, आग इतनी तेजी से फैली कि यात्रियों को अपना सामान निकालने का मौका तक नहीं मिला। आग की चपेट में आकर सभी यात्रियों का सामान जलकर राख हो गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। दमकल विभाग की दो गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जल चुकी थी। घटना स्थल का निरीक्षण करने पहुंचीं स्वाति तिवाना ने बताया कि सभी यात्री सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। प्रशासन की ओर से प्रभावित यात्रियों को प्राथमिक उपचार, आवश्यक सहायता और आगे की यात्रा के लिए वैकल्पिक बस की व्यवस्था की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आग लगने के कारणों की गहन पड़ताल की जा रही है।

सीमा पर योग का संदेश, अटारी-वाघा बॉर्डर पर BSF संग हजारों लोगों ने किया अभ्यास

अमृतसर. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) पंजाब फ्रंटियर द्वारा अटारी संयुक्त चेक पोस्ट (जेसीपी) में एक हजार से अधिक लोगों ने योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। इस दौरान बीएसएफ के अधिकारी, जवान, उनके परिवारजन, विद्यार्थी, स्थानीय गणमान्य नागरिक और सीमावर्ती गांवों के लोग शामिल हुए। बीएसएफ पंजाब ने अपने हीरक जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में इस वर्ष की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था हेतु योग’ के तहत सभी मुख्यालयों, यूनिटों और सीमा चौकियों पर योग सत्र आयोजित किए। मुख्य कार्यक्रम जेसीपी अटारी में हुआ, जबकि गुरदासपुर स्थित करतारपुर साहिब कारिडोर, फिरोजपुर के जेसीपी हुसैनीवाला और फाजिल्का सीमा पर स्थित जेसीपी सादकी में भी विशेष आयोजन किए गए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बीएसएफ पंजाब के महानिरीक्षक अतुल फुलझेले ने कहा कि योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकता है। नियमित योगाभ्यास मन और शरीर को संतुलित रखने के साथ जीवन के प्रत्येक चरण में सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाए रखने में सहायक है। योग प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कराया। इस दौरान श्वास संबंधी क्रियाओं और शरीर की सही मुद्रा पर विशेष जोर दिया गया।

सीमा पर नशा तस्करी पर बड़ा वार, अमृतसर में संयुक्त कार्रवाई में 27 किलो हेरोइन जब्त

अमृतसर. भारत पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित पुल मोरां के पास बीएसएफ और पुलिस ने सर्च अभियान चलाकर कुल 27 किलो हेरोइन की खेप बरामद की है। 25 पिस्तौल और एके 47 की बरामदगी के बाद यह बड़ी खेप है। आशंका जताई जा रही है कि यहीं हथियारों की खेप भी पाकिस्तानी तस्करों ने गिराई है। सर्च अभी तक जारी है। बीएसएफ को सूचना मिली थी कि पाक तस्करों ने ड्रोन के जरिए घरिंडा इलाके में हेरोइन की बड़ी खेप गिराई है। पुलिस के साथ ज्वाइंट आपरेशन के दौरान जवानों ने यह खेप बरामद की। भार करने पर इसका वजन 27 किलो बताया गया है। बता दें इससे पहले बुधवार को रमदास इलाके में 25 पिस्तौल, एक एके 47, 360 कारतूस, 47 मैगजीन और एक बुलेट प्रूफ जाकेट सहित एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा चुका है।

एक दिन नहीं, पूरे 365 दिन योग: चंडीगढ़ में नई पहल से फिटनेस पर जोर

चंडीगढ़. 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ में राज्य स्तरीय समारोह उत्साह और जनभागीदारी के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और नागरिकों से योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम "स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग" रही। इस अवसर पर कोलकाता के रेड रोड से आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि योग मानवता को जोड़ने वाली शक्ति है। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को जीवन के हर चरण में स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समारोह को संबोधित करते हुए प्रशासक कटारिया ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक ऐसी पद्धति है जो शरीर को स्वस्थ, मन को शांत और जीवन को संतुलित बनाए रखने में सहायक है। उन्होंने कहा कि योग का नियमित अभ्यास लोगों को अधिक स्वस्थ और प्रसन्न जीवन जीने में मदद करता है। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन अपनी ‘योग 365’ पहल के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक योग पहुंचाने के लिए कार्य कर रहा है, ताकि योग केवल एक दिन का आयोजन न रहकर पूरे वर्ष की जीवनशैली बन सके। उन्होंने समेकित अस्पतालों, मोबाइल चिकित्सा इकाइयों और विभिन्न आयु वर्गों के लिए चलाए जा रहे वेलनेस कार्यक्रमों के माध्यम से आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चंडीगढ़ के युवा योगासन खिलाड़ियों अनुष्का शर्मा, अभय मिश्रा और देव को सम्मानित किया गया। इसके अलावा शहर में योग के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 14 संगठनों एवं संस्थानों के प्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया गया। प्रशासक ने आयुष विभाग, योग प्रशिक्षकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और शैक्षणिक संस्थानों के योगदान की सराहना करते हुए विशेष रूप से युवाओं से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, सक्षम और समृद्ध चंडीगढ़ के निर्माण में योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस अवसर पर महापौर सौरभ जोशी, वित्त सचिव दिप्रवा लकड़ा, नगर निगम आयुक्त अमित कुमार, खेल सचिव प्रेरणा पुरी, सचिव (आतिथ्य) स्वप्निल एम. नाइक, उपायुक्त निशांत कुमार यादव सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक एवं योग प्रेमी उपस्थित रहे।

श्रद्धा और आस्था का सफर: अमृतसर से पाकिस्तान पहुंचेगा सिख जत्था, गुरुधामों में करेगा मत्था टेक

अमृतसर. शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह की बरसी के अवसर पर पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए सिख श्रद्धालुओं का जत्था श्री हरिमंदिर साहिब परिसर स्थित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) कार्यालय से रवाना हो गया। यह जत्था विभिन्न गुरुद्वारों के दर्शन करने के बाद 30 जून को भारत लौटेगा। एसजीपीसी की ओर से जत्थे की अगुवाई समिति सदस्य बाबा बूटा सिंह करेंगे। उनके साथ जत्थे के डिप्टी लीडर के रूप में खुशविंदर सिंह भाटिया और बीबी हरजिंदर कौर तथा जनरल मैनेजर के रूप में उप सचिव आजाददीप सिंह शामिल होंगे। श्रद्धालुओं को वीजा लगे पासपोर्ट वितरित किए। एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मनन ने कहा कि पाकिस्तान में स्थित सिख गुरुधामों के दर्शन करना प्रत्येक सिख की इच्छा होती है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं में इस यात्रा को लेकर भारी उत्साह है और समिति द्वारा सभी आवश्यक प्रबंध पूरे कर लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस बार 302 श्रद्धालुओं के पासपोर्ट वीजा के लिए भेजे गए थे, जिनमें से 12 को वीजा जारी नहीं किया गया। इस प्रकार 290 श्रद्धालुओं को वीजा प्राप्त हुए हैं और उन्हें पासपोर्ट सौंप दिए गए।

पंजाब के नए DGP पर मंथन तेज, 14 IPS अधिकारियों में से चुने जाएंगे 3 नाम

चंडीगढ़. पंजाब पुलिस को जल्द ही स्थायी मुखिया मिलने की संभावना बढ़ गई है। राज्य में नियमित डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंच गई है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने 30 जून को एंपैनलमेंट कमेटी की बैठक बुलाई है, जिसमें पंजाब कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में से तीन नामों का पैनल तैयार किया जाएगा। इसके बाद पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार इन तीन नामों में से एक अधिकारी को राज्य का नियमित डीजीपी नियुक्त करेगी। पंजाब में चार साल से कार्यवाहक डीजीपी यह नियुक्ति राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पंजाब में पिछले लगभग चार वर्षों से पुलिस महकमा कार्यवाहक डीजीपी के नेतृत्व में चल रहा है। जुलाई 2022 में गौरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया था। तब से लेकर अब तक राज्य में नियमित डीजीपी की नियुक्ति नहीं हो सकी। ऐसे में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले स्थायी डीजीपी की नियुक्ति कानून-व्यवस्था और चुनावी तैयारियों के लिहाज से अहम मानी जा रही है। नियमित डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद इस प्रक्रिया ने गति पकड़ी। शीर्ष अदालत ने 5 फरवरी को सुनवाई के दौरान कई राज्यों पर नाराजगी जताई थी, जहां लंबे समय तक कार्यवाहक डीजीपी के भरोसे पुलिस प्रशासन चलाया जा रहा था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि प्रकाश सिंह पुलिस सुधार मामले में तय दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है और डीजीपी नियुक्ति यूपीएससी की प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि राज्यों में “एक्टिंग डीजीपी” व्यवस्था स्थायी विकल्प नहीं हो सकती। यूपीएससी ने 18 फरवरी को मांगी पात्र अफसरों की लिस्ट इसी आदेश के बाद यूपीएससी ने 18 फरवरी को पंजाब सरकार से पात्र अधिकारियों की सूची मांगी थी। पंजाब सरकार ने 6 अप्रैल को 14 योग्य आईपीएस अधिकारियों की सूची आयोग को भेजी। इनमें 1992 बैच के चार वरिष्ठ अधिकारी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। इस बैच में शरद सत्य चौहान सबसे वरिष्ठ हैं। उनके बाद हरप्रीत सिंह सिद्धू, कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव और कुलदीप सिंह का नाम आता है। इसके अलावा 1993 बैच के तीन तथा 1994 बैच के सात अधिकारियों को भी पात्र सूची में शामिल किया गया है। सूत्रों के अनुसार यूपीएससी ने पैनल बैठक से पहले कुछ अधिकारियों से जुड़े लंबित मामलों पर पंजाब सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था। शरद सत्य चौहान के खिलाफ लंबित मामलों की स्थिति तथा कुलदीप सिंह की 23 फरवरी से 16 अक्टूबर तक की हाफ-पे लीव को लेकर आयोग ने जानकारी मांगी थी। राज्य सरकार द्वारा आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण सौंपने के बाद अब चयन प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच गई है। कमेटी में ये लोग रहेंगे शामिल यूपीएससी की एंपैनलमेंट कमेटी में आयोग के चेयरमैन, केंद्रीय गृह सचिव या उनके नामित वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय पुलिस संगठन का प्रमुख तथा पंजाब के मुख्य सचिव और मौजूदा डीजीपी शामिल रहेंगे। यह कमेटी अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, वरिष्ठता, उपलब्धियों, नेतृत्व क्षमता और विजिलेंस स्थिति का मूल्यांकन कर तीन नामों का पैनल तैयार करेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पैनल तैयार होने के बाद अंतिम फैसला पंजाब सरकार के हाथ में होगा। यानी आप सरकार को तीन नामों में से अपने पसंद के अधिकारी को डीजीपी नियुक्त करने का अधिकार रहेगा। नियमित डीजीपी को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत कम से कम दो वर्ष का कार्यकाल मिलेगा, चाहे इस दौरान सेवानिवृत्ति की तारीख क्यों न आए। अब पुलिस महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सबकी नजर 30 जून की बैठक पर टिकी है।

पंजाब के 24 अप्रेंटिस कर्मचारियों को मिली राहत, PSPCL में नियमितीकरण की घोषणा

चंडीगढ़. पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) में भर्ती किए गए 24 अप्रेंटिसशिप उम्मीदवारों को नियमित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन युवाओं को असिस्टेंट लाइनमैन (एएलएम) के पद पर नियुक्त किया जाएगा, जिससे लंबे समय से नियमित भर्ती की मांग कर रहे उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिलेगी। चीमा ने कहा कि सरकार युवाओं के रोजगार को लेकर गंभीर है और योग्य उम्मीदवारों को उनके कौशल के अनुरूप अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इन उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।वित्त मंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के तहत उम्मीदवारों का पंजाबी भाषा का पेपर भी लिया जाएगा। इस परीक्षा का सिलेबस, परीक्षा पैटर्न और अन्य जरूरी दिशा-निर्देश जल्द ही पीएसपीसीएल की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे, ताकि उम्मीदवार समय पर पूरी जानकारी प्राप्त कर सकें और तैयारी शुरू कर सकें। उन्होंने बताया कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सरल और व्यवस्थित बनाने के लिए एक मजबूत सिस्टम तैयार कर रही है। इसके तहत ऐसा इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा जिससे चयन प्रक्रिया में स्पष्टता बनी रहे और उम्मीदवारों को किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। चीमा ने भरोसा दिलाया कि सरकार युवाओं के हितों की रक्षा करते हुए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए लगातार काम कर रही है। पीएसपीसीएल में असिस्टेंट लाइनमैन के पद पर इन अप्रेंटिस उम्मीदवारों की नियुक्ति को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

करोड़ों के घोटाले पर CBI सख्त, हरियाणा-चंडीगढ़ के कई अफसरों पर गिर सकती है गाज

चंडीगढ़. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े हरियाणा के सरकारी विभागों और चंडीगढ़ नगर निगम समेत क्रेस्ट के खातों में हुए करोड़ों के घोटाले में सीबीआई अब बड़े एक्शन की तैयारी में है। आईएएस समेत कई अफसरों पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है, जिससे उनकी नींद उड़ी हुई है। नगर निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े 116 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में सीबीआई की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है।  शुरुआत से ही कई वरिष्ठ अधिकारी जांच के दायरे में हैं और उनसे पूछताछ चल रही थी, लेकिन उन्हें इस मामले में न तो आरोपित बनाया गया और न ही गिरफ्तार किया। हाल ही में हरियाणा में हुए 650 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में सीबीआई ने पंचकूला नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आरके सिंह को गिरफ्तार किया। चंडीगढ़ में हुए घोटाले में भी अफसरों के नाम सामने आए हैं। सीबीआई जल्द उनके खिलाफ भी बड़ा एक्शन ले सकती है। दोनों मामले एक दूसरे से जुड़े हैं और सीबीआई दोनों की जांच कर रही है। ऐसे में दोनों मामलों में बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी हो सकती है। पिछले महीने सीबीआई को मिला केस सीबीआई ने पिछले महीने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली थी। इससे पहले मामले की जांच चंडीगढ़ पुलिस कर रही थी। जांच में सामने आया कि स्मार्ट सिटी परियोजना की एफडी में जमा करोड़ों रुपये का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि धनराशि को निकालकर निजी हितों के लिए इस्तेमाल किया गया और बाद में रिकार्ड में हेरफेर कर फर्जी एफडी दस्तावेज तैयार किए गए। स्मार्ट सिटी परियोजना खत्म होने के बाद शेष ग्रांट और बैंक जमा राशि को नगर निगम के खातों में स्थानांतरित किया जाना था। इसी प्रक्रिया के दौरान आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में दिखाई जा रही एफडी की रसीदें जाली पाई गईं। जांच में खुलासा हुआ कि एफडी में जमा रकम पहले ही निकाली जा चुकी थी। शेल कंपनियां बनाकर किया घोटाला आरोपितों ने इस रकम को विभिन्न शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया और बाद में रियल एस्टेट सहित अन्य क्षेत्रों में निवेश कर मोटी कमाई की। मामला उजागर होने के बाद इसकी शिकायत पुलिस को दी गई थी। अब सीबीआई वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकाॅर्ड, शेल कंपनियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। इस मामले में अब तक 10 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है जिनमें स्मार्ट सिटी और आइडीएफसी बैंक के अधिकारी भी शामिल हैं।

अमृतसर में डॉक्टरों ने रचा इतिहास, 6 महीने के बच्चे की जटिल हार्ट सर्जरी सफल

अमृतसर. सरकारी मेडिकल कॉलेज गुरु नानक देव अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञों की टीम ने मात्र छह माह के शिशु के जन्मजात हृदय दोष का उपचार कर चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शिशु का वजन केवल 4.5 किलोग्राम था और वह अपेक्षित शारीरिक विकास नहीं कर पा रहा था। चिकित्सकीय भाषा में इस स्थिति को पीडीए (पेटेंट डक्टस ऑर्टेरियोसस) कहा जाता है। यह एक जन्मजात हृदय विकार है, जिसमें जन्म के बाद हृदय से जुड़ी एक रक्तवाहिनी नहीं होती। कम वजन वाले शिशुओं में इस रोग का उपचार करने की प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण है। हृदय रोग विशेषज्ञ डा. परमिंदर सिंह मांगेड़ा के अनुसार, चिकित्सकों की टीम ने आधुनिक लाइफटेक वैस्कुलर प्लग उपकरण की सहायता से शिशु के हृदय दोष को सफलतापूर्वक बंद किया। चिकित्सा दल ने इस सफलता का श्रेय ईश्वर की कृपा, वरिष्ठ चिकित्सकों के मार्गदर्शन और पूरी टीम के सामूहिक प्रयास को दिया। इस प्रक्रिया में डा. वीना, डा. मिलिंद तथा एनेस्थीसिया विभाग की पूरी टीम का विशेष योगदान रहा।

चुनावी रण से पहले कांग्रेस में हलचल, पंजाब इकाई में बड़े बदलाव की चर्चा तेज

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. पार्टी नेतृत्व को चिंता है कि गुटबाजी, कई पावर सेंटर और अंदरूनी खींचतान का फायदा विरोधी दल उठा सकते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब पर फोकस बढ़ा दिया है।  कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के साथ पंजाब के वरिष्ठ नेताओं की बैठक की है. इस बैठक का मकसद संगठन की स्थिति, चुनावी तैयारियों और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं का आकलन करना है।  इसके बाद पार्टी ने अजय माकन समेत तीन सदस्यों की एक ऑब्जर्वर कमेटी गठित कर दी है. इस कमेटी को पंजाब की स्थिति का मूल्यांकन करने और भविष्य की रणनीति पर सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है. कमेटी की रिपोर्ट से पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष का नाम तय होगा।  हाईकमान ने हलचल बढ़ाई पंजाब को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की गंभीरता लगातार बढ़ती बैठकों से साफ दिखाई दे रही है. पिछले दो सप्ताह में ही पार्टी ने पंजाब मामलों पर चार महत्वपूर्ण बैठकें की हैं. इससे ये संकेत मिलता है कि हाईकमान चुनाव से काफी पहले संगठनात्मक कमियों को दूर करना चाहता है।  ऑब्जर्वर कमेटी ने करीब 70 नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया है. इनमें सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं. चर्चाओं का केंद्र संगठनात्मक पुनर्गठन, लंबित चुनावी समितियां और नेतृत्व में संभावित बदलाव है।  सूत्रों के मुताबिक, ऑब्जर्वर कमेटी ने नेताओं से मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष पर भी राय मांगी है. उनसे पूछा गया कि क्या वर्तमान नेतृत्व को जारी रखा जाना चाहिए या बदलाव की जरूरत है. कमेटी अगले दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है. इसके बाद संगठनात्मक बदलाव हो सकते हैं।  PCC में बदलाव की बहस तेज स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने पंजाब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की बहस को तेज कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा अमरिंदर सिंह वारिंग को अपने राजनीतिक गढ़ गिद्दड़बाहा में बड़ा झटका लगा. यहां आम आदमी पार्टी ने 19 में से 17 नगर निकाय वार्डों में जीत दर्ज की थी।  इस प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर कई नेताओं ने नेतृत्व में बदलाव पर जोर देना शुरू कर दिया है. उनका मानना है कि यदि कांग्रेस को 2027 में मजबूत चुनौती पेश करनी है, तो संगठन को नए सिरे से खड़ा करना होगा. दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का पलड़ा भारी हुआ है।  चन्नी स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के बाद अधिक मजबूत होकर उभरे हैं. चमकौर साहिब में कांग्रेस के अच्छे नतीजों ने उनके राजनीतिक कद को बढ़ाया है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि चन्नी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी की संभावनाओं को लेकर सक्रिय हैं. उनके साथ कई नाम चर्चा में हैं।  चन्नी की महत्वाकांक्षा और चुनौती इसमें सुखजिंदर सिंह रंधावा और विजेंदर सिंगला के नाम भी संभावित PCC चीफ के तौर पर चर्चा में हैं. इससे साफ है कि नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर कई दावेदार मौजूद हैं. चन्नी की बढ़ती सक्रियता ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. वो अभी भी पंजाब में बड़े चेहरे हैं।  उनकी गिनती कांग्रेस के सबसे बड़े दलित चेहरे के रूप में होती है. लेकिन पार्टी नेतृत्व 2022 विधानसभा चुनाव के अनुभव को भी नजरअंदाज नहीं कर सकता. कांग्रेस ने तब उनको पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया था. इसके बावजूद पार्टी सत्ता बरकरार नहीं रख सकी।  यही कारण है कि संगठन के भीतर इस बात पर अलग-अलग राय है कि क्या चन्नी को फिर से पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाया जाना चाहिए. चन्नी समर्थकों का तर्क है कि उनके पास दलित समाज में मजबूत जनाधार है. इतना ही नहीं वो पार्टी को सामाजिक संतुलन देने की क्षमता रखते हैं।  जट्ट और दलित सिख समीकरण वहीं विरोधी खेमे का मानना है कि कांग्रेस को किसी एक चेहरे पर निर्भर होने की बजाय संगठन को मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. पंजाब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती जट्ट और दलित सिख के बीच संतुलन बनाए रखने की है. दोनों बेहद प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं।  फिलहाल पार्टी के दो सबसे अहम पद जट्ट सिख नेताओं के पास हैं. राजा अमरिंदर सिंह वारिंग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं, जबकि प्रताप सिंह बाजवा कांग्रेस विधायक दल का नेतृत्व कर रहे हैं. ऐसे में चन्नी समर्थक दलित नेताओं का एक वर्ग संगठन में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहा है।  यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब देश का वह राज्य है, जहां अनुसूचित जाति की आबादी सबसे अधिक है. हालांकि, इसके साथ ही कांग्रेस के सामने एक और चुनौती है. पिछले कुछ वर्षों में चुनाव के दौरान दलित वोट बैंक का बड़ा हिस्सा आम आदमी पार्टी की ओर शिफ्ट हुआ है।  कमेटी की रिपोर्ट पर टिकीं निगाहें ऐसे में नेतृत्व से जुड़ा कोई भी फैसला केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं होगा, बल्कि उसका सीधा असर पार्टी के सामाजिक और चुनावी समीकरणों पर भी पड़ेगा. फिलहाल पंजाब कांग्रेस की राजनीति का केंद्र अजय माकन की अगुवाई वाली ऑब्जर्वर कमेटी की रिपोर्ट बन गई है।  ये रिपोर्ट तय कर सकती है कि कांग्रेस पार्टी नेतृत्व में बड़ा बदलाव होगा या मौजूदा टीम को ही 2027 चुनाव तक मौका दिया जाएगा. राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और भूपेश बघेल की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि कांग्रेस पंजाब को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।