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SBI हड़ताल: 16 मांगों को लेकर बैंक कर्मचारी 25-26 मई को विरोध में

 रांची  स्टेट बैंक आफ इंडिया के ग्राहक अलर्ट हो जायें। क्योंकि पूरे देश के बैंक कर्मचारी 25 और 26 मई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। जिसके कारण केवल दो दिन नहीं बल्कि पांच दिन तक बैंक के कामकाज प्रभावित होंगे। 23 मई को चौथा शनिवार है, 24 को रविवार। 25 और 26 मई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल और 27 मई बुधवार को बकरीद की छुट्टी है। आल इंडिया स्टेट बैंक आफ इंडिया फेडरेशन ने बैंक प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों के हितों की अनदेखी और 16 लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का निर्णय लिया है। फेडरेशन के महासचिव एल चंद्रशेखर ने कहा कि प्रबंधन के साथ बार-बार चर्चा के बाद भी कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान नहीं हुआ, जिसके कारण हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को होने वाली असुविधा के लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं, लेकिन हम यह कदम कर्मचारियों के न्यायपूर्ण अधिकार के लिए अनिवार्य है। यह वीडियो भी देखें कर्मचारियों के हड़ताल की मुख्य मांगे     एनपीएस में सुधार-नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत फंड मैनेजर बदलने का विकल्प देना     भर्ती पर रोक-पिछले तीन दशकों से मैसेंजर और कुछ वर्षों से सशस्त्र गार्ड की भर्ती न होने का विरोध     नई बहाली-कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए नई बहाली सुनिश्चित हो     वेतन समानता- 12वें द्विपक्षीय समझौते के बाद वेतन विसंगति और स्पेशल पे मुद्दा     आउटसोर्सिंग का विरोध- स्थायी नौकरियों के आउटसोर्सिंग का विरोध     सुरक्षा और कामकाजी स्थितियां-बैंक में सुरक्षा की कमी और कर्मचारी विरोधी नीतियों का विरोध     एचआरएमएस की खामियों को दुरूस्त करने की मांग     क्रास सेलिंग के नाम पर मिस सेलिंग बंद करने की मांग क्यों प्रभावित रहेगा 5 दिन काम?     23 मई: चौथा शनिवार (बैंक अवकाश)    24 मई: रविवार (साप्ताहिक अवकाश) 25 मई: राष्ट्रव्यापी हड़ताल 26 मई: राष्ट्रव्यापी हड़ताल 27 मई: बकरीद (सार्वजनिक अवकाश)  

हाई कोर्ट आदेश से क्रशर उद्योग पर गहरा असर, हजारों रोजगार खतरे में

रांची राज्य के लगभग 70 प्रतिशत खनन-क्रशर उद्योगों पर बंदी की तलवार लटक रही है। यह हाई कोर्ट के ताजे आदेश से स्थिति पैदा हुई है। हाल में जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि 2015 में गठित एनओसी विशेषज्ञ कमेटी को विशेषज्ञ कमेटी नहीं माना जा सकता है, क्योंकि इस कमेटी में विषय के जानकार नहीं थे। अतः 2015 की गजट को मान्यता नहीं दी जा सकती है। इसलिए पहले से जारी वनभूमि से माइंस की दूरी 400 मीटर और पत्थर के क्रशर यूनिट की दूरी 500 मीटर ही मान्य होगी। चेंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा कहते हैं कि इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से भी मिला जाएगा और समाधान के लिए कहा जाएगा। यह हजारों लोगों की रोजी-रोटी का सवाल है। राज्य सरकार ने 2015 में जारी किया था गजट राज्य सरकार ने 2015 में गजट प्रकाशित किया था और उसमें बताया गया था आरक्षित वन क्षेत्र, संरक्षित वन क्षेत्र, रिहायशी क्षेत्र, नदी/अन्य जल स्रोत, शिक्षा संस्थान से 200-250 मीटर की दूरी पर खनन कर सकते हैं। जबकि 2015 से पहले यह दूरी चार सौ-पांच सौ मीटर का था। अब हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद खनन-क्रशर उद्योग संकट में पड़ गया है क्योंकि जिन लोगों ने 2015 के बाद वैध ढंग से खनन-क्रशर उद्योग के लिए लाइसेंस लिया और काम कर रहे हैं, उनके सामने भीषण संकट पैदा हो गया है। उनके साथ हजारों श्रमिक भी इससे प्रभावित होंगे। इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इस आदेश से राज्य के करीब 70 प्रतिशत उद्योग बंद हो जाएंगे और हजारों श्रमिक बेरोजगार हो जाएंगे। व्यवसायियों का कहना है कि इससे सरकार को भी राजस्व की हानि होगी। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड ने तय की है 200 मीटर दूरी केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड ने 2025 में नोटिफिकेशन जारी किया था और क्रशर-पत्थर को ओरेंज श्रेणी में रखा और उसने मानक तय किया था कि वन-नदी सीमा से दो सौ मीटर की दूरी होनी चाहिए। इसे लघु खनिज की श्रेणी में रखते हुए उसने मानक तय किए थे। जबकि झारखंड में कम से कम ढाई सौ मीटर का मानक रखा गया है। यह थी एनओसी विशेषज्ञ कमेटी एनओसी विशेषज्ञ कमेटी को विशेषज्ञ कमेटी को उच्च न्यायालय ने विशेषज्ञ कमेटी नहीं माना। दो दिसंबर 2015 की बैठक में पांच सौ मीटर को संशोधित कर स्टोन क्रशर के लिए वन-वनभूमि की न्यूनतम दूरी 250 मीटर तय किया गया। उस कमेटी में संजय कुमार सुमन, सदस्य सचिव, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद, बीबी सिंह, अपर निदेशक, खान एवं भूतत्व विभाग, झारखंड सरकार, बीएम लाल दास, उप निदेशक उद्योग विभाग, झारखंड सरकार, फिलीप मैथ्यू जेएसआईए, सुधीर कुमार, पर्यावरण अभियंता, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद। यह हमारे लिए चिंता का विषय है। चार हजार से ऊपर क्रशर-खनन उद्योग झारखंड में होंगे। अच्छा-खासा सरकार को राजस्व जाता है। न्यायालय के आदेश से इस पर संकट आ गया है। अब हम लोग मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखेंगे और कहा जाएगा कि इस पर विचार हो। इसमें हम लोगों की कोई गलती नहीं है। -सीपी सिन्हा, अध्यक्ष, झारखंड राज्य पत्थर उद्योग संघ     हमने तो नियम के अनुसार ही लाइसेंस प्राप्त किया और अब इसे निरस्त किया जा रहा है। इससे हमारा खनन-क्रशर उद्योग प्रभावित होगा। इसमें हमारी ओर से कोई गलती तो नहीं है। हमने तो कानूनी ढंग से ही काम किया। जिनका उद्योग 2015 के बाद से चल रहा है, उनके सामने तो बड़ी समस्या पैदा हो गई। हजारों लोग अचानक बेरोजगार होकर कहां जाएंगे। इसमें सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए।     -पंकज सिंह, सचिव, झारखंड राज्य पत्थर उद्योग संघ  

तस्करों के हमलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए क्यूआरटी तैनाती

धनबाद बीसीसीएल के ब्लॉक-दो क्षेत्र में कोयला चोरों के बढ़ते दुस्साहस और हिंसक घटनाओं ने प्रबंधन की नींद उड़ा दी है. लगातार मिल रही धमकियों और असुरक्षा के माहौल के बीच, मुख्यालय ने अब मोर्चा संभाल लिया है. ​पिछले कुछ समय से ब्लॉक-दो क्षेत्र में कोयला तस्करों का वर्चस्व इस कदर बढ़ गया था कि ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मारपीट और गाली-गलौज आम बात हो गई थी. स्थिति इतनी भयावह हो गई कि अधिकारियों ने खुद को असुरक्षित पाते हुए सामूहिक रूप से सीएमडी को पत्र लिखकर अपना तबादला करने की गुहार लगाई थी. अधिकारियों का कहना था कि जान जोखिम में डालकर काम करना मुमकिन नहीं है.  हरकत में आया मुख्यालय बीसीसीएल मुख्यालय रेस हो गया. प्रबंधन की साख और अधिकारियों के मनोबल को गिरते देख जीएम (सिक्योरिटी) हफीजुद्दीन कुरैशी खुद जमीनी हकीकत जानने ब्लॉक-दो के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे. सुरक्षा बैठक में कई फैसले ​जीएम सिक्योरिटी ने क्षेत्रीय महाप्रबंधक  कुमार रंजीव और अन्य उच्च अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समन्वय बैठक की. इस बैठक के कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. जीएम ने ​सुरक्षा का भरोसा दिया. जीएम सिक्योरिटी ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की सुरक्षा करना प्रबंधन की पहली प्राथमिकता है. सभी संवेदनशील और डेंजर पॉइंट्स पर सीआइएसएफ की क्यूआरटी को तैनात करने का निर्णय लिया गया. सुरक्षा बलों की गश्त और निगरानी को और सख्त करने के निर्देश दिए गए. बीसीसीएल प्रबंधन के इस कड़े रुख और सुरक्षा के नए वादों के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि ब्लॉक-दो क्षेत्र में खनन कार्य सामान्य हो सकेगा. ​ प्रबंधन का कड़ा रुख अधिकारियों से अपील की गई कि वे बिना किसी डर के काम करें. किसी भी असामाजिक तत्व के दबाव में आने या तबादले की सोचने की जरूरत नहीं है. जीएम सिक्योरिटी हफीजुद्दीन कुरैशी ने आश्वस्त किया कि कोयला चोरी रोकने और अधिकारियों को सुरक्षा देने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘तबादला समाधान नहीं है,’ बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को इतना दुरुस्त किया जाएगा कि अपराधी खुद पीछे हट जाएं.

सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा कैबिनेट विस्तार, 32 नए मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। पटना के गांधी मैदान में पहला कैबिनेट विस्तार किया गया, जिसमें 32 नए मंत्रियों को शामिल किया गया। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का भी नाम शामिल है। आज से करीब 22 से दिन पहले जब सम्राट चौधरी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया तब भी निशांत डिप्टी सीएम बनने की चर्चा हुई थी। जेडीयू के बड़े नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने पहले बिहार घूमने की बात कहकर डिप्टी सीएम बनने से इनकार कर दिया था। इसके बाद भी जेडीयू के नेता निशांत को मनाने में जुटे रहे और अब वो सम्राट कैबिनेट में बतौर मंत्री शामिल हो गए हैं। सीएम ने निशांत कुमार को बिहार का स्वास्थ्य मंत्री बनाया है, जिस पद पर लंबे समय तक रहे मंगल पांडेय इस बार सरकार से ड्रॉप हो गए हैं। सम्राट चौधरी कैबिनेट के विस्तार के वक्त जेडीयू के वरिष्ठ नेता संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने निशांत कुमार को समझाया और बिहार सरकार में शामिल होने के लिए तैयार किया। अब निशांत को बिहार का स्वास्थ्य मंत्री बना दिया गया है। पहले यह विभाग भाजपा के पास रहा करता था, जिसे जदयू को दे दिया गया है। पहली बार मंत्री बने निशातं को स्वास्थ्य जैसे बड़े मंत्रालय की कमान सौंपी गई है। आपको बता दें कि जब निशांत कुमार मंत्री पद के लिए तैयार नहीं दिख रहे थे तब उनके साथ नजर आ रहे युवा विधायकों की कोर टीम में से किसी एक को मंत्री बनाने की चर्चा थी। जेडीयू के उन युवा विधायकों में रुहैल रंजन, अतिरेक कुमार, चेतन आनंद, कोमल सिंह, ऋतुराज कुमार, नचिकेता मंडल वगैरह का नाम शामिल था। भाजपा ने इन्हें बनाया मंत्री भाजपा कोटे से विजय कुमार सिन्हा, रामकृपाल यादव, केदार गुप्ता, नीतीश मिश्रा, मिथिलेश तिवारी, रमा निषाद,दिलीप जायसवाल, श्रेयसी सिंह,प्रमोद चंद्रवंशी, लखविंदर पासवान, संजय टाइगर, इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र, नंद किशोर राम, रामचंद्र प्रसाद और अरुण शंकर प्रसाद को मंत्री बनाया गया है। जेडीयू कोटे से कौन-कौन जेडीयू कोटे से निशांत कुमार, श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, रत्नेश सदा, मदन सहनी, लेसी सिंह, श्वेता गुप्ता, बुलो मंडल, दामोदर रावत, भगवान सिंह कुशवाहा, सुनील कुमार, शीला मंडल और जमा खान को मंत्री बनाया गया है। विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव पहले से मंत्री हैं। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) से संजय सिंह व संजय पासवान, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हम से संतोष सुमन और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो से दीपक प्रकाश मंत्री बने हैं।

सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का मिशन, यूपी में शुरू होगा बड़ा वृक्षारोपण अभियान

 लखनऊ प्रदेश में इस बार पौधारोपण सिर्फ हरियाली बढ़ाने का अभियान नहीं होगा, बल्कि सामाजिक समरसता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन का व्यापक मिशन भी बनेगा। “नवीन विशिष्ट वनों की स्थापना” थीम के तहत सरकार ने अलग-अलग उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के वनों के विकास की योजना तैयार की है। महाअभियान कई अभिनव माडलों के जरिए प्रदेश के पर्यावरणीय परिदृश्य को नई दिशा देने का प्रयास करेगा। पिछले वर्षों की भांति इस मानसून सीजन में भी एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने की तैयारी है। अभियान के तहत महर्षि चरक ''औषधि वन'', ''समरस वन'', ''समृद्धि वन'', ''कृषि वन'', ''ऊर्जा वन'', ''कपि '''' और पौराणिक वनों के पुनर्स्थापन जैसी योजनाएं तैयार की हैं। इसके साथ ही विशेष तिथियों में पौधारोपण कार्यक्रमों की शृंखला भी तय की गई है, जिससे आमजन की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। ‘विविधता में एकता’ की थीम पर आधारित समरस वन में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी पौधारोपण में होगी। ब्लाक स्तर तक पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित कर सामाजिक सौहार्द को मजबूत किया जाएगा। समृद्धि वन में किसानों की आय बढ़ाने वाले पौधे लगाए जाएंगे। कृषि भूमि पर विकसित किए जाने वाले समृद्धि वन से किसानों को कार्बन क्रेडिट और अतिरिक्त आय का लाभ मिलेगा। बंदरों के लिए आबादी के बाहर फलदार पौधे लगाकर ''कपि वन'' विकसित किए जाएंगे। इसके जरिए शहरों में इनके प्रवेश को रोका जाएगा। ऊर्जा वन में ऐसी प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे जिनसे ग्रामीणों को ईंधन के लिए लकड़ी मिल सके। महर्षि चरक औषधीय वन प्रत्येक जिले में औषधीय पौधों के संरक्षण और प्रचार के लिए न्यूनतम एक हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। अभियान का एक प्रमुख हिस्सा ‘मिशन छाया’ भी है, जिसके तहत गर्मी से राहत देने के लिए सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधे लगाए जाएंगे। एक अध्ययन में पाया गया कि पेड़ों की छाया में तापमान में लगभग आठ डिग्री सेल्सियस तक कमी दर्ज की गई। इस मॉडल को प्रदेशभर में लागू करने की तैयारी है। प्रदेश के 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे सहित अन्य मार्गों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। मथुरा में 36 पौराणिक वनों के पुनर्जीवन के लिए 487 हेक्टेयर क्षेत्र में इको-रेस्टोरेशन कार्य किया जा रहा है। इन वनों में इस बार पारंपरिक और धार्मिक महत्व वाले पौधों का रोपण किया जाएगा। विशेष अवसरों पर भी होगा पौधारोपण 15 अगस्त: वंदे मातरम् वाटिका-‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर प्रत्येक जिले में कम से कम एक वाटिका विकसित की जाएगी, जिसमें 150 पौधे लगाए जाएंगे। इसमें ट्रस्ट, सामाजिक संगठनों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। 28 अगस्त: भाई-बहन पौधारोपण-रक्षाबंधन के दिन इसमें भाई-बहन मिलकर पौधे लगाएंगे। 5 सितंबर: ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ अभियान-शिक्षक दिवस के दिन प्रदेश में एक पौधा गुरु के नाम पर लगाया जाएगा।  

एससी-एसटी छात्रों के लिए बड़ी राहत, 9.78 लाख से ज्यादा को मिला योजना का लाभ

पटना अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के 10वीं पास करने वाले छात्र-छात्राओं एवं 12वीं की परीक्षा उतीर्ण करने वाले मेधावी छात्राओं को मुख्यमंत्री मेधावृति योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसके तहत पिछले 5 वर्षों में 9 लाख 78 हजार 306 छात्र-छात्राओं को लाभ दिया गया है। इस योजना के माध्यम से छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। दसवीं में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर 10 हजार और द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर 8 हजार रुपये तक एकमुश्त सहायता राशि प्रदान की जाती है। इस क्रम में बारहवीं में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर 15 हजार और द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर 10 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता राशि प्रदान की जाती है। ऐसे स्टूडेंट्स उठा सकते हैं लाभ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में 1 लाख 63 हजार 826 एससी-एसटी छात्र-छात्राओं ने इसका लाभ उठाया है। वहीं वर्ष 2024 में 1 लाख 87 हजार 298, 2023 में 1 लाख 64 हजार 790, 2022 में 1 लाख 58 हजार 760, 2021 में 1 लाख 40 हजार 267 और 2020 में 1 लाख 63 हजार 365 छात्र-छात्राओं को लाभ दिया गया है। इस दौरान विभाग ने 941.31 करोड़ रुपये की राशि वितरित की है। इस उपलब्धि से न केवल छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों से आने वाले एससी-एसटी युवाओं में उच्च शिक्षा की ओर रुझान भी बढ़ा है। विशेष रूप से राज्य में इस योजना ने एससी-एसटी छात्र-छात्राओं को मजबूत प्रोत्साहन दिया है। इसके माध्यम से छात्र-छात्राएं अब बिना आर्थिक चिंता के शैक्षणिक गतिविधियों में हिस्सा ले रहे है। ऐसे करें योजना में आवेदन इस वर्ष में उतीर्ण छात्र-छात्राएं जल्द ही योजना का लाभ लेने के लिए आधिकारिक वेबसाइट मेधासॉफ्ट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवश्यक दस्तावेजों में 10वीं और 12वीं की अंक-पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण शामिल है।

मौसम का बदला मिजाज बना खतरा, वज्रपात और तेज हवाओं की चेतावनी

पटना  बिहार में अप्रैल-मई महीने में आंधी, बारिश और ठनका का कहर देखा जा रहा है। वज्रपात की चपेट में आने और आंधी में पेड़ गिरने से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गई। बारिश के कारण गर्मी की तपिश से राहत मिली है। पर मौसम का मिजाज लोगों को डरा रहा है। आज राज्य के 15 जिलों में ठनका और आंधी के साथ वर्षा का ऑरेंज अलर्ट मौम विभाग की ओर से जारी किया गया है। छह जिलों में लोगों को यथा संभव घरों में रहने की सलाह दी गई है। पूरे प्रदेश के किसानों को मौसम पर नजर रखते हुए खेती-बारी का कार्य करने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग की ओर से बताया गया है कि राज्य के पूर्णिया, दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर किशनगंज, अररिया, कटिहार, मधेपुरा, सुपौल, सहरसा, मधुबनी, और समस्तीपुर समेत कई जिलों में तेज आंधी और बारिश और ठनका गिरने की संभावना बनी हुई है। इन जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही कई इलाकों में वज्रपात की भी चेतावनी दी गई है आज और कल गर्मी संग उमस तो 10 को बारिश बीएयू, सबौर के मौसम वैज्ञानिक डॉ. बीरेंद्र कुमार ने बताया कि शुक्रवार एवं शनिवार को जहां आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और धूप-छांव के बीच लोगों को गर्मी व उमस का एहसास होगा। वहीं 10 एवं 11 मई को धूल भरी आंधी के बीच जिले में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने का अनुमान है। दिन में गर्मी-उमस ने किया परेशान भागलपुर में गुरुवार को आई आंधी-बारिश से जहां मौसम सुहाना हो गया था। 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली तो बिजली की गड़गड़ाहट के बीच हल्की बारिश हुई। इस बारिश को भारतीय मौसम विभाग के पैमाने पर 8.5 मिमी मापा गया। वहीं दिन में धूप-छांव से उपजे गर्मी व उमस से लोग परेशान रहे। बारिश के कारण जहां न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया। वहीं पूर्वाह्न 11:30 बजे तक चमकी धूप व इसके बाद छाए बादल के कारण गर्मी का तेवर चढ़ गया और दिन का पारा ढाई डिग्री सेल्सियस तक उछल गया। गुरुवार को अधिकतम तापमान 32.2 व न्यूनतम 19.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य तापमान से क्रमश: पांच व 4.3 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा।

तिरहुत प्रमंडल के स्कूलों में मनमानी पर सख्ती, शिक्षा विभाग ने मांगा जवाब

 मुजफ्फरपुर तिरहुत प्रमंडल के तीन सौ से अधिक निजी स्कूलों पर शिक्षा विभाग की कार्रवाई की तलवार लटक गई है। फीस वृद्धि, किताब और पोशाक के नाम पर मनमानी वसूली की शिकायतों के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी सक्रिय हो गए हैं और चिह्नित स्कूलों के प्रबंधन व प्राचार्यों से जवाब-तलब की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बताया गया कि प्रमंडल के विभिन्न जिलों में संचालित निजी विद्यालयों की शुल्क संरचना और अन्य व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है। 300 स्कूल चिह्नित विभाग ने ऐसे करीब 300 स्कूलों को चिह्नित किया है, जहां नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिली हैं। संबंधित स्कूलों से जवाब मांगा जा रहा है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। आयुक्त ने बिहार निजी विद्यालय शुल्क (विनियमन अधिनियम) 2019 का हवाला देते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। अधिनियम के अनुसार निजी विद्यालय हर वर्ष अधिकतम सात प्रतिशत तक ही फीस वृद्धि कर सकते हैं। बावजूद इसके कई स्कूलों द्वारा बिना उचित आधार के शुल्क बढ़ाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सख्त निर्देश आयुक्त ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों में निजी विद्यालयों की नियमित निगरानी और निरीक्षण करें साथ ही फीस, पुस्तक और पोशाक से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा कर निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट उपलब्ध कराएं, ताकि अनियमितता पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। शिक्षा विभाग की इस सख्ती से निजी स्कूल संचालकों में बेचैनी बढ़ गई है। अभिभावकों को उम्मीद है कि विभाग की कार्रवाई से मनमानी फीस वसूली पर रोक लगेगी और उन्हें राहत मिलेगी।

बिहार में बड़ा ट्रैफिक संकट, टूटे विक्रमशिला सेतु पर बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की तैनाती

  भागलपुर बिहार की सिल्क सिटी भागलपुर की लाइफ लाइन कहलाने वाली विक्रमशिला सेतु पर आवागमन ठप हो जाने से कई जिलों में परेशानी बड़ गई है। इस सेतु को फिर से दुरुस्त करने और इस पर आवागमन चालू करने को लेकर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। कहा जा रहा है कि पुल से यातायात सुचारु होने में तीन माह का वक्त लगेगा। आम जनों की पेशानी को देखते हुए बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन को तैनात किया गया। बीआरओ उत्तर बिहार को भागलपुर समेत अन्य कई जिलों से जोड़ने वाले इस पुल से आंशिक आवागमन की व्यवस्था बहाल करने के लिए काम शुरू हो ह गया है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की मदद से बेली ब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। लोगों को हो रही असुविधा को देखते हुए तकनीकी विशेषज्ञों और अधिकारियों ने विक्रमशिला सेतु की मरम्मत के लिए एक्शन प्लान तैयार किया है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की सहायता से शीघ्र ही एक बेली ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। इसको लेकर युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आंशिक रूप से यातायात को तुरंत बहाल करना, ताकि जनता को हो रही असुविधा कम हो सके। उन्होंने कहा कि विक्रमशिला सेतु भागलपुर एवं आसपास के जिलों के लोगों के लिए लाइफलाइन है। इसलिए बेली ब्रिज का निर्माण कर आंशिक रूप से यातायात शुरू किया जाएगा। क्या है बेली ब्रिज? बेली ब्रिज एक इमरजेंसी तकनीक है जिसका इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के समय किया गया था। बेली ब्रिज एक प्रकार का पोर्टेबल, प्री कास्टेड स्टील ट्रस ब्रिज है। इसे युद्ध या आपदा के समय तेजी से और आसानी से ट्रस को एक दूसरे को जोड़कर बनाया जाता है। यह मॉड्यूलर डिज़ाइन पर आधारित है। सका आविष्कार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1940-41 में ब्रिटिश इंजीनियर डोनाल्ड कोलमैन बेली ने किया था। इसमें भारी उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती और यह अस्थायी या स्थायी दोनों तरह से काम आ सकता है। सेना और सीमा सड़क संगठन इसका उपयोग दूरदराज के क्षेत्रों या बाढ़, भूस्खलन अन्य आपदा की स्थिति में संपर्क बहाल करने के लिए करते हैं। यह ट्रस नामक त्रिकोणीय स्टील स्ट्रक्चर से बनता है, जिन्हें पिन और बेल्ट की सहायता से आसानी से जोड़ा जा सकता है। रविवार आधी रात को टूटा था पुल यह घटना रविवार रात लगभग 12.30 बजे की है। पहले सेतु पर 133 नंबर पोल के पास कुछ हिस्सा धंस गया। उसी वक्त आवागमन रोक दिया गया। लेकिन कुछ ही देर बाद वह हिस्सा टूट गया। एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने रात 1.15 बजे इसकी सूचना दी और लोगों से विक्रमशिला सेतु की ओर न जाने की अपील की है। पुलिस की सतर्कता से जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ। घटना के समय सीएम सम्राट चौधरी दिल्ली में थे। हालांकि उन्होंने पटना पहुंचते ही उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर जल्द से जल्द आवागमन सुचारु कराने के आदेश अधिकारियों को दिया। इस मामले में लापरवाही के आरोप कार्यपालक अभियंता को सस्पेंड कर दिया गया।

देवघर एयरपोर्ट से गुवाहाटी, हैदराबाद और सूरत के लिए नई उड़ानें जल्द

 देवघर  गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने गुरुवार को देवघर में कहा कि अक्टूबर-नवंबर में देवघर में बिहार-झारखंड का पहला वीजा फेसिलटी सेंटर शुरू होगा। अभी तक लोग वीजा बनवाने दिल्ली या कोलकाता जाते थे। अब यह सुविधा देवघर में मिलेगी। जानकारी हो कि मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में भी यह सुविधा नहीं है। अभी छोटे देश जाने के लिए वीजा बनना शुरू होगा। पर्यटन या पढ़ाई के लिए सिंगापुर, दुबई, थाइलैंड, मलेशिया, बैंकॉक जाने वालों को देवघर वीजा केंद्र से वह सुविधा मिलने लगेगी। देवघर एक बड़ा केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि दो न्यूक्लियर प्लांट भी इस क्षेत्र को मिल रहा है। एक देवघर के पुनासी डैम और दूसरा बिहार के बांका में होगा। देवघर से हैदराबाद, गुवाहाटी, सूरत की चलेगी फ्लाइट सांसद ने बताया किया कि देवघर एयरपोर्ट का विस्तार होगा। जिसके लिए 450 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुका है। शीघ्र ही निविदा होगी। जल्द ही देवघर एयरपोर्ट से नई उड़ान शुरू होगी। देवघर से गुवाहाटी, हैदराबाद और सूरत की विमान सेवा शुरू होगी। वहीं, मुंबई और कोलकाता के लिए अब प्रतिदिन फ्लाइट हो जाएगी। जानकारी हो कि अभी दिल्ली, बेंगलुर की प्रतिदिन यात्री विमान है। मुंबई के लिए सप्ताह में तीन दिन है। जो प्रतिदिन हो जाएगी। गोड्डा से गुजरात और कोटा की सीधी ट्रेन देवघर और गोड्डा से लगातार नई ट्रेन नए गंतव्य के लिए चल रही है। एक नहीं कई ट्रेनें हो गई हैं। इस बीच सांसद ने एलान किया कि जल्द ही गोड्डा से गुजरात और कोटा की सीधी ट्रेन चलेगी। दिसंबर 2027 तक गोड्डा-महगामा रेल लाइन का काम पूरा हो जाएगा और महगामा तक ट्रेन चलने लगेगी। वहीं, 28 जून 2028 तक देवघर से पीरपैंती रेल लाइन पूरी हो जाएगी। उसके बाद सीधी ट्रेन चलेगी। गोड्डा-पाकुड़ के बीच भी रेल लाइन बिछेगी। यह पीपीपी मोड पर होगा। साहिबगंज-पाकुड़ को मिलेगी वंदे भारत डॉ. निशिकांत ने कहा कि भागलपुर से कोलकाता के बीच एक वंदे भारत जल्द शुरू होगी। इससे साहिबगंज और पाकुड़ के लोगों को फायदा होगा। साहिबगंज और पाकुड़ में इसका ठहराव होगा। वंदे भारत सुबह भागलपुर से चलेगी और शाम में कोलकाता से भागलपुर के लिए वापस होगी। यह वाया साहिबगंज और पाकुड़ होगी। बता दें कि पाकुड़ सबसे अधिक राजस्व देने वाला इलाका है।