samacharsecretary.com

रेल प्रशासन की ‘दमनकारी’ नीति के खिलाफ उतरे रनिंग कर्मचारी, वाईएम कार्यालय के चक्कर काटने से किया साफ इनकार

 रामगढ़ धनबाद रेल मंडल के सीआईसी सेक्शन अंतर्गत रामगढ़ के पतरातू में, लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों ने कॉशन पेपर की अव्यवहारिक व्यवस्था के विरोध में रविवार को जोरदार आंदोलन शुरू कर दिया है. लोको रनिंग कर्मियों का तर्क है कि ऑन-ड्यूटी तैनात कर्मचारियों को सुरक्षा से संबंधित ‘कॉशन पेपर’ या तो क्रू लॉबी में ही दिया जाना चाहिए या सीधे इंजन में उपलब्ध कराना चाहिए. वर्तमान में प्रचलित प्रक्रिया के कारण रेल परिचालन में अनावश्यक बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे कर्मियों में भारी असंतोष व्याप्त है. वाईएम कार्यालय के चक्कर काटने पर जताई कड़ी आपत्ति आंदोलनकारी कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के तहत उन्हें सबसे पहले क्रू लॉबी में अपनी उपस्थिति दर्ज (रिपोर्ट) करानी पड़ती है, जिसके बाद उन्हें ‘कॉशन पेपर’ लेने के लिए वाईएम (Yard Master) कार्यालय जाना पड़ता है. इस दोहरी प्रक्रिया में काफी समय बर्बाद हो जाता है, जिससे निर्धारित समय सीमा के भीतर इंजन तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. कर्मियों का आरोप है कि यदि इस प्रशासनिक देरी के कारण ट्रेन लेट होती है, तो रेल प्रशासन सारा दोष लोको पायलट के मत्थे मढ़ देता है. इसी दमनकारी नीति के विरोध में अब रनिंग कर्मियों ने वाईएम कार्यालय जाकर कॉशन पेपर लेने से साफ इनकार कर दिया है. सुरक्षित परिचालन के लिए ‘कॉशन पेपर’ का महत्व रेलवे की शब्दावली में ‘कॉशन पेपर’ एक अत्यंत संवेदनशील और अनिवार्य दस्तावेज होता है, जो ट्रेन के सुरक्षित संचालन के लिए लोको पायलट को सौंपा जाता है. इसमें ट्रैक की वर्तमान स्थिति, विभिन्न खंडों (Sections) में गति सीमा (Speed Limit) और सिग्नल से संबंधित महत्वपूर्ण चेतावनियां दर्ज होती हैं. लोको पायलट इसी अधिकार पत्र के आधार पर ट्रेन की रफ्तार और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं. कर्मियों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज की प्राप्ति प्रक्रिया को जटिल बनाने से न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि चालक के मानसिक एकाग्रता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. रेलवे प्रशासन को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी पतरातू के लोको पायलटों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर अविलंब संज्ञान नहीं लिया गया और व्यवस्था को सरल नहीं बनाया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तेज करेंगे. उन्होंने रेलवे के उच्चाधिकारियों से अपील की है कि डिजिटल युग में भी ऐसी पुरानी और थकाऊ प्रक्रियाओं को ढोना अनुचित है. फिलहाल, इस आंदोलन के कारण पतरातू क्षेत्र में रेल परिचालन की सुगमता पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिस पर रेल प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है.

बिहार में खरमास खत्म होने से पहले गैस की किल्लत ने बढ़ाई टेंशन, कालाबाजारी करने वालों पर एस्मा के तहत होगी कार्रवाई

पटना  बिहार में 14 अप्रैल को खरमास खत्म होते ही शहनाइयां बजनी शुरू हो जाएंगी, लेकिन इस बार दूल्हे और उनके परिवारों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंची हुई हैं. पटना सहित कई जिलों में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत जारी है. शादियों के घरों में इस बात का डर सता रहा है कि अगर समय पर सिलेंडर नहीं मिला, तो बारातियों के स्वागत और खाने-पीने का इंतजाम कैसे होगा. प्रशासन ने अभी तक शादी-ब्याह जैसे आयोजनों के लिए किसी अतिरिक्त कोटे की व्यवस्था नहीं की है. शादी वाले घरों में बढ़ी टेंशन शादी समारोहों के लिए बुकिंग तो महीनों पहले हो चुकी है, लेकिन अब गैस की कमी ने संचालकों के हाथ-पांव फुला दिए हैं. पटना के बेली रोड और दीघा आशियाना रोड के बैंक्वेट हॉल प्रबंधकों का कहना है कि उन्हें जरूरत का आधा कमर्शियल सिलेंडर भी नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि मेहमानों के सामने परोसे जाने वाले व्यंजनों की लिस्ट छोटी करनी पड़ सकती है. वहीं, जिन घरों में श्राद्ध या अन्य आकस्मिक आयोजन हैं, वहां के लोग एक-एक सिलेंडर के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं. कालाबाजारी करने वालों पर एस्मा के तहत कार्रवाई गैस संकट की गंभीरता को देखते हुए डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने अधिकारियों और गैस एजेंसियों के साथ आपात बैठक की है. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जो भी एजेंसी या व्यक्ति कालाबाजारी, ओवर-प्राइसिंग या गैस के अवैध उपयोग में शामिल पाया जाएगा, उस पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए.     जिलाधिकारी, पटना द्वारा लोक शिकायत के अपीलीय मामलों की सुनवाई की गई तथा परिवादों का निवारण किया गया। पदाधिकारियों को पूर्ण पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं संवेदनशीलता के साथ जन-शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण समाधान तथा जनहित के कार्यों का संवर्द्धन करने का निदेश दिया गया। प्रशासन ने लापरवाही बरतने वालों पर एस्मा (ESMA) के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है. उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए जिला कंट्रोल रूम का नंबर (0612-2219810) जारी किया गया है, जहां 24 घंटे शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. 1.71 लाख तक पहुंचा बैकलॉग स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एलपीजी सिलेंडर का बैकलॉग 1.71 लाख तक पहुंच गया है. लोग बुकिंग के बावजूद समय पर गैस नहीं पा रहे हैं. कई उपभोक्ताओं को फर्जी डिलीवरी मैसेज मिलने की शिकायत भी सामने आई है, जिससे नाराजगी बढ़ रही है. प्रशासन ने कालाबाजारी और ओवरप्राइसिंग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. गैस एजेंसियों को रिस्पॉन्सिव तरीके से काम करने को कहा गया है, वहीं गड़बड़ी मिलने पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी तक की कार्रवाई हो रही है.

दरभंगा से बेंगलुरु तक सीधी उड़ान शुरू, मिथिला के यात्रियों में खुशी की लहर

 दरभंगा  दरभंगा और बेंगलुरु के बीच अकासा एयर की सीधी उड़ान सेवा रविवार से शुरू हुई। पहले दिन दोनों ओर से विमान की सीटें फुल रहीं। बेंगलुरु से विमान ने 9:40 में दरभंगा के लिए उड़ान भरी। हवाई मार्ग पर दो घंटे 35 मिनट गुजारकर 12:15 में दरभंगा एयरपोर्ट पर लैंडिंग हुई। रनवे पर वाटर कैनन से फुहार छोड़कर विमान का स्वागत किया गया। विमान के अंदर बैठे यात्रियों को गुलाब और चाकलेट देकर खुशियां बांटी गई। इसके बाद सांसद सह दरभंगा एयरपोर्ट सलाहकार समिति के चेयरमैन डा. गोपालजी ठाकुर ने एयरपोर्ट पर यात्रियों को बोर्डिंग पास देकर बेंगलुरु के लिए विदा किया। कहा कि एक वर्ष में दरभंगा एयरपोर्ट से हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में 57 प्रतिशत की वृद्धि देश स्तर पर एक उदाहरण है। दरभंगा-बेंगलुरु के बीच अकासा की सीधी उड़ान सेवा का शुभारंभ होना संपूर्ण मिथिला क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। इस क्रम में अकासा के मैनेजर रवि शुक्ला ने सांसद डा .ठाकुर का पाग, अंगवस्त्रम एवं बुके देकर सम्मानित किया। सांसद डा. ठाकुर ने इस उड़ान सेवा के शुभारंभ किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू के नेतृत्व में दरभंगा एयरपोर्ट नित नए आयाम हासिल कर रहे हैं। इसी उपलब्धि का उदाहरण है कि दरभंगा बेंगलुरु के लिए सीधी उड़ान सेवा का शुभारंभ हुआ। यह नई उड़ान न केवल दरभंगा को देश और दुनिया से सीधे जोड़ेगी, बल्कि मिथिला के विकास, रोजगार और पर्यटन में भी नए आयाम खोलेगी। स्पाइसजेट के विमान में हवाई सफर में होती थी परेशानी बेंगलुरु की फ्लाइट से पहुंचे यात्री मोहमदपुर पिंडारूच निवासी अरविंद कुमार साह ने बताया कि परिवार के साथ बेंगलुरु में रहकर ठेकेदारी करते हैं। वहां से स्वजन से मिलने के लिए साल में दो से तीन बार आना जाना हो जाता है। स्पाइसजेट के विमान से आने जाने में काफी परेशानी झेलना पड़ती थी। किराया में भी मनमानी थी। उड़ान की निश्चितता को लेकर मन में संशय बना रहता था। कई बार बगैर कोई सूचना दिए सेवा को महीनों के लिए ठप कर देते थे। कनेक्टिंग फ्लाइट में अधिक पैसे खर्च करने पड़ते थे अथवा पटना एयरपोर्ट से हवाई सफर को मजबूर हो रहे थे। अब दरभंगा-बेंगलुरु के बीच अकासा के आने से उन सभी परेशानियों से राहत की उम्मीद है। अकासा में टाइम टेबल का खासा ध्यान रखा जाता है। अभी शुरुआत में ही टिकट के दाम में काफी राहत है। मधुबनी जिले के भंवरा निवासी अर्जुन कुमार ने बेंगलुरु में एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। कहते हैं कि कई बार दरभंगा और बेंगलुरु के बीच स्पाइसजेट के विमान में सफर किए हैं। अकासा के विमान में यात्रा कर अच्छा लगा है। स्पाइसजेट हवाई सफर के दौरान सुविधा के नाम पर केवल खानापूरी कर रही थी। अकासा के विमान में हवाई सफर करने पर संतुष्टि हुई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बेंगलुरु की सीधी हवाई सेवा का किया स्वागत‎ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और दरभंगा विधायक संजय सरावगी ने दरभंगा से बेंगलुरु के लिए सीधी हवाई सेवा शुरू होने का स्वागत किया है। उन्होंने इसे मिथिलांचल के विकास, व्यापार और शिक्षा के लिए बड़ी सौगात बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया है। एक विज्ञप्ति में सरावगी ने कहा कि इससे लोगों के लिए बेंगलुरु की यात्रा अब आसान हो गई। दरभंगा से सीधे बेंगलुरु के लिए हवाई सेवा शुरू होना पूरे मिथिलांचल और बिहार के लिए अत्यंत हर्ष एवं गर्व का विषय है। इससे क्षेत्र के लोगों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी तथा व्यापार, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। दरभंगा जैसे महत्वपूर्ण शहर को देश के प्रमुख आईटी हब बेंगलुरु से जोड़ना बिहार की प्रगति की दिशा में एक बड़ा कदम है। पूरे मिथिला क्षेत्र में बेंगलुरु के लिए सीधी हवाई सेवा का लगातार आग्रह भी किया जा रहा था। पूर्व में सीधी सेवा थी लेकिन पिछले छह महीने से स्पाइसजेट ने यह सेवा बंद कर दी थी, जिससे लोगों को तकलीफ हो रही थी। अकासा की सेवा प्रारंभ होने पर अधिकारियों और कर्मचारियों को धन्यवाद दिया है।  

बिहार की महिलाओं का सफेद कपड़ों में सत्याग्रह, नीतीश की विरासत के लिए निशांत कुमार के नाम पर अड़ीं प्रदर्शनकारी

 पटना बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में गांधी मूर्ति के नीचे रविवार को महिलाओं का एक बड़ा हुजूम उमड़ा। हाथों में तख्तियां, बैनर और माथे पर काली पट्टी बांधकर बैठी इन महिलाओं ने साफ़ संदेश दिया कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ते हैं, तो उनका उत्तराधिकारी उनके पुत्र निशांत कुमार को ही होना चाहिए। 'सुधार वाहिनी' के बैनर तले आयोजित इस सत्याग्रह में बिहार के विभिन्न कोनों से आई महिलाओं ने नीतीश कुमार के शासनकाल में हुए महिला सशक्तिकरण की जमकर तारीफ की। आंदोलन का नेतृत्व कर रही प्रतिभा सिंह (राष्ट्रीय अध्यक्ष, सुधार वाहिनी) ने कहा, “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया, शराबबंदी जैसे बड़े फैसले लिए और हमें समाज में बराबरी का हक दिलाया। हम उनके जाने से दुखी हैं, लेकिन अगर वे पद छोड़ते हैं, तो हमें उनकी जगह निशांत कुमार ही मंजूर हैं।” महिलाओं का सफेद कपड़ों में सत्याग्रह सत्याग्रह पर बैठी महिलाओं का मानना है कि निशांत कुमार सादगी के प्रतीक हैं। विभा नाम की एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "पूरा बिहार जानता है कि निशांत कुमार कितनी सादगी से रहते हैं। वे अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए महिलाओं के लिए वही काम करेंगे जो नीतीश जी ने किया है। हमें किसी और नेता पर भरोसा नहीं है।" महिलाओं ने साफ कहा कि नीतीश कुमार की विरासत को उनका पुत्र ही सही तरीके से आगे बढ़ा सकता है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा। आमतौर पर राजनीति से दूर रहने वाले निशांत कुमार के समर्थन में इस तरह का प्रदर्शन बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि निशांत भी एनडीए (NDA) परिवार का हिस्सा हैं और उनके आने से गठबंधन को मजबूती मिलेगी। हालांकि, जब उनसे भाजपा के किसी मुख्यमंत्री के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें सिर्फ 'अपना रक्षक' चाहिए और फिलहाल उनकी नजरों में निशांत से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। सत्याग्रह के दौरान "बिहार की महिला करे पुकार, नीतीश नहीं तो निशांत कुमार" जैसे नारों से गांधी मैदान गूंज उठा है।

साढ़े 4 करोड़ की योजना कागजों में दबी, गोपालगंज आज भी बस स्टैंड को तरसा

गोपालगंज गोपालगंज को जिला का दर्जा मिले 52 वर्ष का समय गुजर गया है। इसके बावजूद जिले को स्तरीय बस स्टैंड की सुविधा नहीं मिल सकी है। ऐसी बात नहीं कि इस दिशा में घोषणाएं नहीं हुई। शहर के राजेंद्र बस पड़ाव को स्तरीय बस स्टैंड बनाने की कई बार घोषणा हुई। बस स्टैंड के लिए नए स्थान पर जमीन ढूंढने की भी बात हुई। इस बीच ना ही बस स्टैंड के लिए जमीन मिली और ना ही इसका कायाकल्प हुआ। नगर परिषद के स्तर पर इसके लिए मास्टर प्लान बनाकर नगर विकास विभाग को सौंपा गया। नगर विकास विभाग से संचिका बाहर नहीं निकलने के कारण जिला मुख्यालय को स्तरीय बस स्टैंड तक नहीं मिल सका है। शहर का एकमात्र बस पड़ाव उपेक्षित शहर का राजेंद्र बस स्टैंड जिले का एक मात्र मुख्य बस पड़ाव है। इस स्टैंड से सूबे की राजधानी पटना, मुजफ्फरपुर से लेकर, यूपी के गोरखपुर, वाराणसी, असम के सिलीगुड़ी तथा झारखंड के रांची तक के लिए बसें चलती हैं। हर साल इस स्टैंड की बंदोबस्ती से नगर परिषद को प्रति वर्ष करीब एक करोड़ से अधिक की आय होती है। इसके बाद भी इस स्टैंड में यात्री सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। यहां न तो यात्रियों के लिए बैठने की व्यवस्था है और ना ही बसों को खड़ी करने की ठीक व्यवस्था है। वर्षा होने पर पूरा बस स्टैंड परिसर जल जमाव की चपेट में आ जाता है। इससे यहां बस पकड़ने के लिए आने वाले यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। छह वर्ष पूर्व हुई थी कायाकल्प की हुई थी पहल वर्ष 2019 में राजेंद्र बस पड़ाव के कायाकल्प की पहल की गई। इस पहल के तहत बस स्टैंड परिसर में वातानुकूलित भवन बनाए जाने की नगर परिषद ने योजना बनाई। इस भवन में यात्रियों के बैठने की बढि़या व्यवस्था से लेकर टीवी भी लगाया जाना था। डिसप्ले पर बस के बारे में सूचना देने से लेकर बस स्टैंड परिसर में मॉल का भी निर्माण कराए जाने की बात थी। जहां रेस्टोरेंट से लेकर यात्रियों की जरूरत के सभी सामान उपलब्ध हो सकें। इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए यहां वाई-फाई की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना तैयार की गई। इस बीच बात तैयारियों तक ही सिमटकर रह गई। साढ़े चार करोड़ की योजना नगर विकास विभाग की संचिका में तब करीब साढ़े चार करोड़ की योजना तैयार कर नगर परिषद ने स्वीकृति के लिए नगर विकास विभाग को भेज दिया। इस बीच यह योजना नगर विकास विभाग की फाइलों में ही दब कर रह गई। हालांकि, इसी बीच करीब दो साल पूर्व नगर विकास विभाग ने नगर परिषद को राजेंद्र बस स्टैंड का कायाकल्प करने के लिए फिर से प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया। इस निर्देश के बाद नगर परिषद ने नया प्रस्ताव विभाग को भेज दिया, लेकिन लंबी अवधि बीतने के बाद भी अब तक नगर विकास विभाग ने इस योजना को अपनी स्वीकृति नहीं दी है। लाचार दिखते हैं यात्री बस स्टैंड में सुविधा के नाम पर कुछ भी उपलब्ध नहीं होने के कारण यहां आने वाले यात्री लाचार दिखते हैं। विशेष तौर पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री स्टैंड में संसाधन नहीं होने के कारण व्यवस्था को कोसते नजर आते हैं। पटना के लिए बस पकड़ने बस स्टैंड पहुंचे प्रमोद कुमार ने बताया कि सुबह आठ बजे बस स्टैंड पहुंचा। पता चला कि बस 8.40 बजे सुबह है। करीब आधे घंटे से सड़क पर बच्चों के साथ खड़ा हूं। कहीं बैठने तक की सुविधा नहीं है। राजेश कुमार की तरह बस स्टैंड में मौजूद विकास कुमार, राजेंद्र सिंह तथा राजेंद्र बस पड़ाव के कायाकल्प की योजना काफी पुरानी है। नगर विकास विभाग को काफी पहले इसके विस्तार की योजना भेजी गई थी। इस दिशा में अबतक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। नए स्थान पर बस स्टैंड को ले जाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भूमि चयन की प्रक्रिया पूर्ण की जा रही है।  

आस्था का संगम: रामगढ़ के कैथा कब्रिस्तान में मसीही समुदाय ने मोमबत्तियां जलाकर दी अपनों को श्रद्धांजलि

रामगढ़  गुड फ्राइडे के बाद विशेष संडे के अवसर पर, प्रभु यीशु के पुनः जीवित होने की आस्था को याद किया जाता है. इस मौके पर झारखंड के रामगढ़ जिले के सीएनआई चर्च से जुड़े मसीही समुदाय के लोगों द्वारा कब्रिस्तान में विशेष प्रार्थना कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और अपने दिवंगत परिजनों को श्रद्धांजलि अर्पित की. सुबह 4 बजे से शुरू हुई आराधना कार्यक्रम की तैयारी शाम में ही पूरी कर ली गई थी, जिसके बाद सुबह 4 बजे से आराधना की शुरुआत हुई. CNI कैथा कब्रिस्तान में श्रद्धालु एकत्रित हुए, जहां धार्मिक विधि-विधान के साथ प्रार्थना की गई. मोमबत्तियां जलाकर दी श्रद्धांजलि इस दौरान मसीही श्रद्धालुओं ने मोमबत्तियां जलाकर अपने प्रियजनों को याद किया और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल शांति, आस्था और श्रद्धा से भरा रहा. लोगों ने एकजुट होकर प्रार्थना की और प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश दिया. लोगों ने क्या कहा इस मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि इस तरह के आयोजन न केवल दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि देने का माध्यम हैं, बल्कि समाज में एकता और सद्भाव को भी मजबूत करते हैं.

पश्चिमी सिंहभूम में मागे पर्व की धूम, आदिवासी समुदाय ने पारंपरिक वेशभूषा में की सुख-समृद्धि की कामना

 वेस्ट सिंघभूम   झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत गुवा क्षेत्र के नुईया गांव में आदिवासी समुदाय के लोगों ने पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मागे पर्व मनाया. मागे पर्व पर लोग ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचे. इस मौके पर पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला. इन जगहों से लोग हुए शामिल मागे पर्व के मौके पर जगन्नाथपुर, चाईबासा और दुरदरा सहित आसपास के क्षेत्रों से भी मेहमान पहुंचे और इस पारंपरिक पर्व में शामिल होकर खुशी साझा की. दूर-दराज से आए लोगों की मौजूदगी ने उत्सव की रौनक को और बढ़ा दिया. पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक झलक इस दौरान बच्चे, बुजुर्ग, युवक और महिलाएं सभी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए. लोगों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर नृत्य किया. इस मौके पर पूरे गांव में उत्साह और उमंग का वातावरण बना रहा. पुजारी ने की पूजा-अर्चना गांव के पुजारी ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना कर गांव की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की. इस पर्व के माध्यम से आदिवासी समुदाय ने अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया. मागे पर्व का यह आयोजन आपसी भाईचारे, एकता और सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने का संदेश देता है.

स्वदेशी तकनीक का कमाल, एनएमएल के वैज्ञानिकों ने तैयार किया सोने का विशेष गोलाकार पाउडर

 जमशेदपुर झारखंड के लौहनगरी जमशेदपुर के नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है. सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल ) ने देश में पहली बार 22 कैरेट सोने का गोलाकार पाउडर तैयार करने में सफलता पाई है. यह पाउडर विशेष रूप से एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग ( थ्री डी प्रिंटिंग) के लिए विकसित किया गया है. उक्त बातें सीएसआईआर-एनएमएल के वैज्ञानिक डॉ. के. गोपाला ने शनिवार को साझा की. वे बिष्टुपुर स्थित एसएनटीआई ऑडिटोरियम में इंजीनियर्स संस्था (भारत) जमशेदपुर लोकल सेंटर द्वारा आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. के. गोपाला ने कहा कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की सफलता पूरी तरह से कच्चे माल यानी मेटल पाउडर की गुणवत्ता पर टिकी होती है. एनएमएल की ‘विशेष गैस एटोमाइजर सुविधा’ का उपयोग कर तैयार किया गया 22 कैरेट सोने का यह पाउडर स्वदेशी तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है. इससे भविष्य में आभूषण निर्माण और अन्य जटिल तकनीकी क्षेत्रों में थ्री डी प्रिंटिंग के प्रयोग को एक नयी दिशा मिलेगी. इससे पूर्व कच्चे माल के संश्लेषण से उन्नत उत्पाद विकास एवं विशेषता निर्धारण विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि मनोस डे (ऑफिस हेड, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स) और विशिष्ट अतिथि विनीत कुमार साह (चीफ लॉन्ग प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील एवं चेयरमैन, आईईआई) ने दीप प्रज्ज्वलित कर संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे प्रयोगशाला के नवाचारों को सीधे उद्योगों से जोड़कर भारत को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है. लैब के रिसर्च का उपयोग फैक्ट्रियों में हो: मनोस डे मुख्य अतिथि मनोस डे ने अपने संबोधन में कच्चे माल के विकास और उन्नत उत्पाद निर्माण के बीच समन्वय को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि लैब में होने वाले शोध तभी सार्थक हैं. जब वे कारखानों तक पहुंचे. उन्होंने इंजीनियरिंग क्षेत्र में लागत और ऊर्जा की बचत पर विशेष जोर देते हुए युवाओं को नयी तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया. जटिल डिजाइनों के लिए थ्री डी प्रिंटिंग अनिवार्य: विनीत कुमार साह संस्थान के चेयरमैन विनीत कुमार साह ने स्वागत भाषण में कहा कि वर्तमान समय में सटीक फिनिशिंग और जटिल ढांचों के निर्माण के लिए एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की मांग बढ़ी है. इस तकनीक के माध्यम से ऐसी ग्रेडेड सामग्री तैयार की जा सकती है. जो पारंपरिक निर्माण विधियों से संभव नहीं थी. स्टील की आंतरिक संरचना पर शोध: डॉ. मोनालिसा मंडल एनआईटी जमशेदपुर की डॉ. मोनालिसा मंडल ने एसएस 420 मार्टेंसिटिक स्टील पर अपना शोध प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि डीएमएलएस तकनीक से उत्पाद बनाते समय यदि मानकों को सही ढंग से नियंत्रित किया जाए, तो उत्पादों की मजबूती और उनकी सूक्ष्म संरचना को काफी बेहतर बनाया जा सकता है. बढ़ेगा जंग के प्रति प्रतिरोध: कौशल किशोर टाटा स्टील आरएंडडी के प्रिंसिपल रिसर्चर कौशल किशोर ने वायर आर्क एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर व्याख्यान दिया. उन्होंने 316 एल स्टेनलेस स्टील की सूक्ष्म संरचना में होने वाले बदलावों और उसके जंग प्रतिरोध पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी. उच्च तापमान तकनीक और सिरेमिक उत्पाद: डॉ. राम कृष्ण एनआईटी जमशेदपुर के डॉ. राम कृष्ण ने उच्च तापमान वाले वातावरण के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा की. उन्होंने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सिरेमिक उत्पादों के विकास और उनके विशेषता निर्धारण की प्रक्रिया को समझाया. कार्यक्रम का संचालन जुस्को की सुकन्या दास ने किया. जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस डी. भट्टाचार्जी ने किया. पूरे कार्यक्रम के सफल समन्वय में कृष्णेंदु शॉ की अहम भूमिका रही. संगोष्ठी के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए. विशेषज्ञों ने माना कि इस तरह के आयोजनों से इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के बीच एक प्रभावी साझा मंच तैयार होता है.

स्कूली बच्चों को लू से बचाने के लिए बड़ा फैसला, सुबह 6:30 बजे से खुलेंगे बिहार के स्कूल, मिड-डे मील के नियमों में भी बदलाव

 पटना बिहार में बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य के सभी सरकारी स्कूलों का समय बदल दिया गया है ताकि बच्चों को तेज धूप और गर्मी से बचाया जा सके. यह नई व्यवस्था 6 अप्रैल से लागू होकर 31 मई तक चलेगी. गर्मी की छुट्टियों से पहले तक स्कूल मॉर्निंग शिफ्ट में ही चलेंगे. नए टाइम टेबल के बारे में जानिए नए टाइम टेबल के अनुसार अब स्कूल सुबह 6:30 बजे खुलेंगे और दोपहर 12:30 बजे तक पढ़ाई होगी. दिन की शुरुआत प्रार्थना और अन्य गतिविधियों से होगी, जिसके बाद रेगुलर क्लासेज चलेंगी. सातवीं घंटी के बाद 12:20 बजे छात्रों की छुट्टी कर दी जाएगी. इसके बाद 10 मिनट तक शिक्षकों की बैठक होगी. इसमें दिनभर की समीक्षा और आगे की योजना बनाई जाएगी. क्या- क्या बदलाव हुआ गर्मी को ध्यान में रखते हुए मध्याह्न भोजन यानी मिड-डे मील की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या ज्यादा है और सभी को एक साथ खाना खिलाना मुश्किल है, वहां दो हिस्सों में भोजन कराने की छूट दी गई है. कुछ बच्चे ब्रेक में खाना खाएंगे, जबकि बाकी बच्चे तीसरी या चौथी क्लास के दौरान भोजन कर सकेंगे. इस दौरान पढ़ाई का काम भी जारी रहेगा. जहां स्कूल दो शिफ्ट में चलते हैं, वहां स्थानीय हालात के हिसाब से समय तय करने का अधिकार जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिया गया है. डीएम को भी जरूरत पड़ने पर स्कूल के समय में बदलाव करने की छूट दी गई है.

रांची जेल में प्रशांत बोस की मौत, अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासन और परिजनों के बीच उलझा मामला

रांची एक करोड़ रुपये के इनामी रहे प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस (82 वर्ष) की मौत बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में तीन अप्रैल को हो गयी थी. इसके बाद प्रशांत बोस का शव रिम्स के मोर्चरी में पड़ा रहा. बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद उसकी पत्नी और माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य शीला मरांडी ने जेल प्रशासन के माध्यम से जिला प्रशासन को पत्र लिखकर कहा कि उसके पति का कोई अन्य परिजन नहीं है. इसलिए जिला प्रशासन ही अंतिम संस्कार की व्यवस्था करे. हालांकि शनिवार रात तक जिला प्रशासन के स्तर पर इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका था. जेल प्रशासन ने खड़े किए हाथ इससे पहले शनिवार को कोलकाता से प्रशांत बोस के कुछ परिजन बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा पहुंचे. परिजनों ने जेल प्रशासन के अधिकारियों को एक पत्र दिखाया, जो प्रशांत बोस के बड़े भाई का था. उस पत्र में लिखा था कि उनकी उम्र 84 वर्ष है और वे स्वयं आकर अपने भाई का शव ले जाने में असमर्थ हैं. इसलिए उन्होंने अन्य परिजनों को भेजा है. उनके भाई प्रशांत बोस का शव उन्हें सौंप दिया जाये ताकि वे अपने रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर सकें. जेल प्रशासन ने उन्हें जिला प्रशासन के पास यह कहते हुए भेज दिया कि इस पर निर्णय लेना जेल प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में नहीं है. इसके बाद परिजनों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर शव सौंपने की मांग की. बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा के अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर ने बताया कि जेल में बंद उनकी पत्नी शीला मरांडी ने पत्र लिखकर कहा है कि प्रशासन स्वयं प्रशांत बोस का अंतिम संस्कार कर दे, क्योंकि उनका कोई परिजन नहीं है. दूसरी ओर, कोलकाता से उनके बड़े भाई का पत्र लेकर कुछ लोग आये थे, जिन्हें जिला प्रशासन से संपर्क करने के लिए कहा गया था. अब क्या होगा प्रशांत बोस की मृत्यु की सूचना एनएचआरसी और रांची के न्यायिक आयुक्त को भेज दी गयी है. न्यायिक आयुक्त स्तर पर मामले की जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट से करायी जा सकती है. जिला प्रशासन जिस व्यक्ति को भी प्रशांत बोस का शव सौंपेगा, उसकी प्राप्ति रसीद जेल प्रशासन को देनी होगी, ताकि इसकी सूचना एनएचआरसी को दी जा सके. क्या है एनएचआरसी का दिशा-निर्देश एनएचआरसी के दिशानिर्देश के अनुसार मृत बंदी का अंतिम संस्कार 24 घंटे के भीतर कर दिया जाना चाहिए. परिजन द्वारा दावा किये जाने की स्थिति में प्रशासन अधिकतम 72 घंटे तक शव को मोर्चरी में रख सकता है. बंदी की मृत्यु पर अंतिम संस्कार के लिए कितनी राशि दी जायेगी, इसका स्पष्ट उल्लेख जेल मैनुअल में नहीं है. क्या कहना है डीसी का रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि प्रशांत बोस की मृत्यु शुक्रवार की सुबह हुई है. अंतिम संस्कार के लिए जिला प्रशासन से अनुरोध किया गया है. हम प्राप्त पत्र का परीक्षण कर रहे हैं और संबंधित पक्षों से मंतव्य भी लिया जा रहा है.