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गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, सोलिया गांव से आरोपी दबोचा गया

 रामगढ़ झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र में पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए अवैध हथियार के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार युवक के पास से 9 एमएम का प्रतिबंधित पिस्टल बरामद किया गया है. पुलिस इस मामले की जांच गहराई से कर रही है. सूचना के आधार पर पुलिस की कार्रवाई और छापेमारी प्राप्त जानकारी के अनुसार, 26 अप्रैल की रात लगभग 8 बजे पुलिस अधीक्षक रामगढ़ को सूचना मिली थी कि पतरातू थाना क्षेत्र के ग्राम सोलिया निवासी अनीश अंसारी अवैध हथियार के साथ घूम रहा है. सूचना के सत्यापन के बाद सहायक पुलिस अधीक्षक सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पतरातू राघवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में छापामारी दल का गठन किया गया. छापामारी के दौरान पुलिस ने तालाताड़ पंचायत के सोलिया गांव से अनीश अंसारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की. हथियार बरामदगी और मामला दर्ज पूछताछ के दौरान उसके बताए गए स्थान पर उसके घर से तुर्की मेड जिगाना कंपनी का 9 एमएम पिस्टल बरामद किया गया. पुलिस के अनुसार आरोपी ने बताया कि उक्त पिस्टल उसे राहुल दुबे गैंग के एक सक्रिय सदस्य द्वारा फायरिंग की घटना के बाद रखने के लिए दिया गया था. इस मामले में पतरातू थाना कांड संख्या 101/2026 के तहत आरोपी के विरुद्ध आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस ने बताया कि आरोपी का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ पहले भी कई धाराओं में मामला दर्ज है.छापामारी दल में पतरातू अंचल पुलिस निरीक्षक सत्येंद्र कुमार सिंह, थाना प्रभारी शिवलाल कुमार गुप्ता, भदानीनगर ओपी प्रभारी अख्तर अली, पुलिस अवर निरीक्षक अफजल अंसारी के साथ अन्य पुलिस बल के जवान शामिल थे.

राजभवन से लेकर जिलों तक बदली जिम्मेदारी, गोपाल मीणा बने नए सचिव

पटना बिहार सरकार ने रविवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा के चार वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इस फेरबदल में राजभवन से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों की जिम्मेदारी बदली गई है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव राज्यपाल के सचिवालय में हुआ है, जहाँ प्रधान सचिव के पद पर नई तैनाती की गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। राजभवन में चोंग्यू की विदाई बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत 1997 बैच के आईएएस अधिकारी और राज्यपाल के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल. चोंग्यू को राजभवन से स्थानांतरित कर दिया गया है। अब उनको अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रधान सचिव की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह 2007 बैच के आईएएस अधिकारी गोपाल मीणा को राज्यपाल का नया सचिव नियुक्त किया गया है। गोपाल मीणा इससे पहले राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में सचिव के पद पर तैनात थे। आईएएस अधिकारी गोपाल मीणा, राजभवन की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ सामान्य प्रशासन विभाग के जांच आयुक्त के अतिरिक्त प्रभार में भी  रहेंगे।  मो. सोहैल बने सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सचिव के पद पर तैनात 2007 बैच के आईएएस अधिकारी मो. सोहैल का भी तबादला कर दिया गया है। उन्हें अब  सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव पद पर तैनात किया गया है। गोपाल मीणा की तरह मो. सोहैल भी जांच आयुक्त के अपने अतिरिक्त प्रभार को पूर्ववत संभालते रहेंगे। यह खबर भी पढ़ें-Bihar: मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद पहली बार JDU दफ्तर में नीतीश, कैबिनेट विस्तार पर डिप्टी सीएम ने क्या कहा? लखीसराय को मिले नए डीएम सरकार ने जिला स्तर पर भी बदलाव करते हुए 2013 बैच के आईएएस अधिकारी शैलेन्द्र कुमार को लखीसराय का नया समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी बनाया गया है। वह अब तक कृषि विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थे।  

संघर्ष से सफलता तक,झारखंड की दिव्यानी बनीं रांची की पहली महिला फुटबॉल स्टार

रांची झारखंड के रांची जिले की प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ी दिव्यानी लिंडा ने अपने संघर्ष, समर्पण और मेहनत के दम पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. ये रांची की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्हें AFC U-17 Women’s Asian Cup में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है. इस वर्ष झारखंड से एक साथ 4 खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जो राज्य के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. संघर्ष से सफलता तक का सफर दिव्यानी लिंडा चंद्र पंचायत के चंदरा गांव की निवासी हैं. सीमित संसाधनों, खेल मैदान की कमी और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया. कठिन परिस्थितियों में भी उनका आत्मविश्वास और मेहनत उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा, जिसका परिणाम आज पूरे देश के सामने है. स्टार वॉरियर्स से बनी पहचान दिव्यानी Star Warriors Football Club, कांके ब्लॉक में संचालित क्लब की प्रमुख खिलाड़ी हैं. उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा कांके क्षेत्र और क्लब गौरवान्वित हुआ है. कोच अनवरूल हक उर्फ बबलू का अहम योगदान दिव्यानी की सफलता के पीछे उनके कोच अनवरूल हक (बबलू) का विशेष योगदान रहा है, जो क्लब के संस्थापक भी हैं. उन्होंने दिव्यानी की प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारा और हर कठिन समय में मार्गदर्शन दिया. झारखंड का गौरव दिव्यानी लिंडा झारखंड की दूसरी खिलाड़ी बन चुकी हैं, जिन्हें इतने बड़े एशियाई स्तर के टूर्नामेंट में खेलने का अवसर मिला है. वहीं, रांची की पहली खिलाड़ी बनकर उन्होंने एक नया इतिहास स्थापित किया है. प्रेरणा की मिसाल दिव्यानी की सफलता हर उस युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखता है. बधाई और शुभकामनाएं इस उपलब्धि पर स्टार वॉरियर्स फुटबॉल क्लब के संरक्षक जगदीश सिंह (जग्गू), कांके उप प्रमुख अजय कुमार बैठा, कोषाध्यक्ष सह पंचायत समिति सदस्य रेशमी तिर्की और देवेंद्र स्वामी प्रकाश, छोटू टोप्पो, सुरेन्द्र उरांव, डॉ. शहनवाज कुरैशी, समंदर लाल, रामेंद्र कुमार, राणा मिश्रा, नुरुल हक, एकरामुल अंसारी सहित अन्य सदस्यों ने दिव्यानी को बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं.

जेसीबी से खुदाई के दौरान निकली मूर्ति, ग्रामीणों ने बनाया अस्थायी मंदिर

चाईबासा  पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर और आनंदपुर के सीमावर्ती इलाके में स्थित कोयल नदी में पानी के लिए जेसीबी से चार फीट गहरा गड्ढा खोदा जा रहा था. अचानक दोपहर डेढ़ बजे एक तेज आवाज के साथ खुदाई कर रही मशीन का पंजा किसी बेहद कठोर वस्तु से टकराकर ठिठक गया. ड्राइवर ने कोशिश की, लेकिन मशीन आगे बढ़ने को तैयार नहीं थी. पहले लगा कि कोई बड़ा पत्थर या चट्टान है, लेकिन जैसे ही वहां से बालू हटाई गई, वहां मौजूद लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं. अंधेरी गहराइयों से भगवान राधा-कृष्ण की युगल प्रतिमा मुस्कुराती हुई प्रकट हुई. ग्रामीण इसे अद्भुत घटना मान रहे हैं. कोयल नदी के गर्भ से भगवान राधा-कृष्ण की एक अत्यंत सुंदर प्रतिमा बालू के करीब चार फीट नीचे दबी थी. खुदाई में यह सुंदर मूर्ति जैसे ही बाहर निकली, पूरे इलाके में यह खबर आग की तरह फैल गई. देखते ही देखते नदी का तट एक अस्थायी मंदिर के रूप में तब्दील हो गया है. लोग इसे एक मूर्ति की खोज नहीं, बल् एक साक्षात सनातन चमत्कार मान रहे हैं जिसने पल भर में नदी के सूखे तट को भक्ति के सरोवर में बदल दिया है. जेसीबी की खुदाई के दौरान मिली प्रतिमा मिली जानकारी के अनुसार, भीषण गर्मी के कारण कोयल नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है. ग्रामीणों की प्यास बुझाने और पास के गांव तक पानी पहुंचाने के लिए नदी में जेसीबी मशीन से खुदाई का काम चल रहा था. रविवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे, खुदाई के दौरान मशीन अचानक किसी ठोस चीज से टकराकर रुक गई. जब सावधानी से उस जगह की दोबारा खुदाई की गई तो बालू के नीचे से राधा-कृष्ण की युगल प्रतिमा निकली. मूर्ति के निकलते ही वहां मौजूद लोग जयकारे लगाने लगे. झारखंड चमत्कार: खुदाई के दौरान कोयल नदी से निकली भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा, ग्रामीणों ने बनाया अस्थायी मंदिर. श्रद्धालुओं ने बनाया अस्थायी दरबार मूर्ति मिलने की सूचना मिलते ही मनोहरपुर और आनंदपुर प्रखंड के गांवों से सैकड़ों की संख्या में लोग कोयल नदी के तट पर पहुंचने लगे. लोगों की आस्था इतनी गहरी है कि उन्होंने तुरंत उस स्थान पर भगवा झंडा गाड़ दिया. भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से भगवान को बचाने के लिए ग्रामीणों ने लकड़ी और पेड़ों की टहनियों से एक अस्थायी छत (शेड) भी बना दी है. अब यहां सुबह से शाम तक पूजा-अर्चना और कीर्तन का दौर चल रहा है. मंदिर स्थापना की तैयारी में ग्रामीण नदी के बीचों-बीच मिली इस प्रतिमा को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्साह है. कई ग्रामीणों का मानना है कि यह कोई साधारण घटना नहीं बल्कि ईश्वरीय संकेत है. गांव की प्रबंध समिति और बुजुर्ग अब इस प्रतिमा को विधि-विधान के साथ किसी सुरक्षित स्थान या नवनिर्मित मंदिर में स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. फिलहाल, वनशक्ति देवी मंदिर के पास स्थित यह नदी क्षेत्र एक तीर्थ स्थल बन गया है.  

मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट, 33 से 36 मंत्री तक बढ़ सकती है संख्या

पटना बिहार को सुंदर बनाना है। समृद्ध और विकसित बनाना है। फैक्ट्री लगानी है। इस दिशा में हरसंभव प्रयास करूंगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन सहित रोजगार को और अधिक बढ़ावा मिल सके, इसके लिए काम किया जायेगा।" मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 26 अप्रैल को अपने विधानसभा क्षेत्र तारापुर में जब यह बातें कहीं तो स्पष्ट हो गया कि वह लंबी पारी खेलना चाहते हैं। 15 अप्रैल को नई सरकार बनने के बाद से अब तक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के काम करने के तौर तरीके और बयानों से स्पष्ट हो गया है कि वह एक नई टीम चाहते हैं। सम्राट चौधरी के करीबी इसे 'नई विकास टीम' का नाम दे रहे हैं। नई टीम में कई चेहरों का नाम फाइल हो चुका है। कुछ पर मंथन चल रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि जल्द ही इस नई टीम की घोषणा भी कर दी जाएगी। एक दिन पहले यानी रविवार को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट कहा कि जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार हो जाएगा। तारीख उन्होंने नहीं बताई लेकिन कयास लगाया जा रहा है कि चार मई को चुनाव परिणाम आने के बाद पांच मई तक बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार कर लिया जाए। वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि भाजपा नए चेहरों को मौका जरूर देगी। विजय सिन्हा, मंगल पांडेय, रामकृपाल यादव, दिलीप जायसवाल जैसे पुराने दिग्गजों को दुबारा मौका मिल सकता है। युवा और महिलाओं पर सम्राट चौधरी का विशेष फोकस रहेगा। आलाकमान चाहते हैं कि सरकार में सोशल इंजीनियरिंग का खास ख्याल रखा जाए। हर वर्ग को मौका मिले ताकि संतुलन बरकरार रहे। सम्राट चौधरी की नई टीम में क्षेत्रीय और समाजिक समीकरण का समावेश दिख सकता है। जदयू ने अपने दो पुराने चेहरों को उपमुख्यमंत्री बनाकर यह साफ कर दिया है कि नीतीश कुमार अधिक प्रयोग नहीं करना चाहते हैं। निशांत कुमार फिलहाल सरकार में कोई पद नहीं लेंगे। यह लगभग तय है। अन्य पुराने चेहरे जैसे श्रवण कुमार, जमां खान, मदन सहनी, लेशी सिंह को दुबारा मौका मिल सकता है। हालांकि निशांत के करीबी कुछ युवा विधायक भी मंत्री बनने की कतार में खड़े हैं। इनमें कुछ को जदयू मौका दे सकती है। हाल के दिनों में विपक्ष ने जिन मंत्रियों पर सवाल उठाया है, उनपर  एनडीए विचार कर रहा है। विजय सिन्हा का क्या होगा? 2025 में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी तो सम्राट चौधरी के साथ विजय सिन्हा भी उपमुख्यमंत्री बने थे। उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इस विभाग में भ्रष्टाचार अंकुश लगाने के लिए कुछ ऐसे कदम उठाए, जिसकी चर्चा आज तक हो रही है। जनता ने विजय सिन्हा को एक ईमानदार नेता के रूप में देखा। हालांकि, राजस्व सेवा के अधिकारियों ने उनके काम करने की शैली का विरोध किया और हड़ताल पर चले गए। लेकिन, विजय सिन्हा अपने निर्णय पर अडिग रहे और उन्होंने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही। नई सरकार बनी तो विजय सिन्हा उपमुख्यमंत्री नहीं बने। सोशल मीडिया पर विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी के बीच नोंकझोंक के पुराने वीडियो वायरल होने लगे। चर्चा होने लगी कि विजय सिन्हा अब किनारे कर दिए जाएंगे। तेजस्वी यादव ने भी विधानसभा में कहा कि विजय सिन्हा की नजर सम्राट चौधरी की पगड़ी पर है। हालांकि, सम्राट चौधरी ने विजय सिन्हा के काम की तारीफ की। इसके बाद ऐसा लगा कि विजय सिन्हा को दोबारा मंत्रिमंडल में जगह दिया जाएगा। चर्चा है कि नाराज चल रहे विजय सिन्हा की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें दोबारा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के साथ गृह विभाग की भी जिम्मेदारी मिल सकती है। फिलहाल गृह विभाग सम्राट चौधरी के पास है। हालांकि, आखिरी फैसला दिल्ली दरबार में बैठे आलाकमान को ही लेना है। अब वहीं से सारा कुछ तय होगा।   चिराग, उपेंद्र और मांझी के पार्टी से कितने मंत्री बनेंगे? 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद जो सरकार बनी, उसमें 26 मंत्रियों ने शपथ ली थी। उसमें भाजपा से 14 , जदयू से 8, लोजपा (राम) से दो, हम और रालोमो से एक-एक मंत्री शामिल थे। सम्राट चौधरी सरकार में जो खाका तैयार किया गया है उसमें मंत्रियों की संख्या 33 तक जा सकती है। इसमें जदयू के 14 और भाजपा के 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं चिराग की पार्टी से दो मंत्री बनाए जा सकते हैं जबकि उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टी से पहले जैसे ही एक-एक मंत्री रहने की बात सामने आ रही है। अगर पूरी संख्या, यानी 36 विधायक रहे तो भाजपा के 17, जदयू के 15, लोजपा रामविलास के 2, रालोमो और हम के एक-एक मंत्री तय फॉर्मूले के तहत बनेंगे। विधानसभा अध्यक्ष पद किसके पास जाएगा? विधानसभा अध्यक्ष पद जदयू के कुछ नेता अपने पाले में चाह रहे हैं लेकिन भाजपा ऐसा नहीं होने देना चाहती है। भाजपा सूत्रों की मानें तो प्रेम कुमार अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, ऐसा आश्वासन उन्हें पहले ही दिया जा चुका है। इस सूरत में भाजपा विधानसभा अध्यक्ष पद के साथ छेड़छाड़ नहीं होने देगी। 

BPSC परीक्षा में सॉल्वर गैंग का जाल, 8 FIR दर्ज

पटना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) की परीक्षा में धांधली की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें एक बड़े संगठित गिरोह और 'सॉल्वर गैंग' की भूमिका सामने आ रही है। इस मामले में अब तक बिहार के 5 अलग-अलग जिलों में 8 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, वहीं पुलिस ने अब तक कुल 38 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। EOU ने मामले की गंभीरता को देखते हुए BPSC से कई अहम जानकारियां मांगी हैं, जिससे आने वाले दिनों में कुछ बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। 5 जिलों में एक जैसा चीटिंग पैटर्न EOU की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुंगेर, नालंदा, बेगूसराय, शेखपुरा और गया जैसे जिलों के परीक्षा केंद्रों पर धांधली का एक जैसा पैटर्न मिला है। कई अभ्यर्थी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज के साथ रंगे हाथों पकड़े गए। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इस धांधली के पीछे एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था, जो अभ्यर्थियों को 25 से 30 लाख रुपये में परीक्षा पास कराने का झांसा देता था। SIT का गठन कर अब इस संगठित गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश की जा रही है। ब्लैकलिस्टेड कंपनी पर क्यों मेहरबान था आयोग? जांच का सबसे बड़ा और विवादित पहलू परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसी 'मेसर्स साई एजु केयर प्राइवेट लिमिटेड, जयपुर' की भूमिका है। रिपोर्ट के अनुसार, जिस कंपनी को परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी, उसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पहले ही ब्लैकलिस्टेड कर रखा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक दागी कंपनी को इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा का जिम्मा कैसे दिया गया? इसके अलावा, बायोमेट्रिक हाजिरी लेने वाले कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिनसे अब कड़ी पूछताछ की जा रही है। 14 से 21 अप्रैल के बीच हुई थी परीक्षा BPSC ने 14 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच AEDO की परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के दौरान ही कई केंद्रों से गड़बड़ी की खबरें आने लगी थीं, जिसके बाद EOU ने मोर्चा संभाला। अब EOU ने BPSC से उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का ब्यौरा मांगा है, जो परीक्षा प्रक्रिया और एजेंसी के चयन में शामिल थे।

रांची में जल संकट गहराया, धुर्वा-हटिया क्षेत्र में आपूर्ति बाधित

रांची  झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रही है. खासकर धुर्वा और आसपास के इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर हो गई है. पिछले तीन दिनों से जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे करीब एक लाख की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान है. भीषण गर्मी के बीच पानी की कमी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. हटिया डैम से सप्लाई बाधित शहर के कई प्रमुख इलाकों (धुर्वा, हटिया, डोरंडा, हिनू, बिरसा चौक और एयरपोर्ट क्षेत्र) में हटिया डैम से होने वाली जलापूर्ति बाधित हो गई है. इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पिछले 72 घंटों से नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है. इससे दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. जलापूर्ति बाधित होने का असर घरों के साथ-साथ छोटे व्यवसायों और दुकानों पर भी देखने को मिल रहा है. बिजली कटौती बनी मुख्य वजह पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार इस संकट की सबसे बड़ी वजह लगातार हो रही बिजली कटौती है. हटिया डैम स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशनों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है. बिजली की कमी के कारण पानी को लिफ्ट करने और पाइपलाइन में पर्याप्त दबाव (प्रेशर) बनाने में समस्या आ रही है. इसी वजह से जलापूर्ति पूरी तरह सुचारू नहीं हो पा रही है. आंशिक सप्लाई से बढ़ी परेशानी पिछले तीन दिनों से इन इलाकों में केवल आंशिक जलापूर्ति ही हो रही है. कई जगहों पर नलों में पानी आता भी है, तो उसका प्रेशर बेहद कम होता है. इससे लोगों को पानी भरने में काफी दिक्कत हो रही है. धुर्वा सेक्टर-2 के निवासी राजीव सिन्हा बताते हैं कि नल से पानी या तो आता नहीं है, और अगर आता है तो इतना कम कि बर्तन भरना भी मुश्किल हो जाता है. बाजार से पानी खरीदने को मजबूर लोग जल संकट के चलते लोग अब बाजार से जार और बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हो गए हैं. इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. गर्मी के मौसम में पानी की मांग पहले से ज्यादा होती है, लेकिन सप्लाई अनियमित होने के कारण स्थिति और बिगड़ गई है. कई परिवारों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी का इंतजाम करना चुनौती बन गया है. विभाग ने जताई परेशानी पेयजल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे बिजली विभाग के साथ समन्वय बनाकर स्थिति को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन जब तक पावर कट की समस्या दूर नहीं होती, तब तक जलापूर्ति को पूरी तरह बहाल करना मुश्किल रहेगा. अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही बिजली आपूर्ति सामान्य होगी, जलापूर्ति भी धीरे-धीरे सुचारू हो जाएगी. लोगों में बढ़ती नाराजगी लगातार हो रही पानी की किल्लत से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में ऐसी समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जलापूर्ति और बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी से बचा जा सके. जल्द समाधान की उम्मीद फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति को सामान्य करने के प्रयास में जुटे हैं. लेकिन जब तक बिजली की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक जल संकट से पूरी तरह राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है. रांची के हजारों लोगों के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है, और सभी को जल्द से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है.  

JSSC भर्ती प्रक्रिया तेज, मई में राज्य स्तरीय कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र वितरण की तैयारी

रांची झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से अनुशंसित 329 सहायक आचार्यों को मई के पहले सप्ताह में नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में सभी को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने का अनुरोध मुख्यमंत्री से किया है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद तिथि की घोषणा कर दी जाएगी। फिलहाल उन 329 अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति पत्र दिया जाएगा, जिनकी अनुशंसा आयोग ने दिसंबर 2025 में की थी। इनकी काउंसिलिंग जिला स्तर पर हो चुकी है, जिसमें इनके सभी प्रमाणपत्र वैध पाए गए हैं। इधर, विभाग को आयोग से लगभग एक हजार अन्य अभ्यर्थियों की भी नियुक्ति की अनुशंसा प्राप्त हुई है। इन अभ्यर्थियों के फोल्डर सोमवार को जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय के प्रतिनिधियों को सौंप दिए जाएंगे। इसके बाद जिला स्तर पर इनकी काउंसिलिंग होगी। काउंसिलिंग को लेकर जिलों को दिशा-निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। काउंसिलिंग में प्रमाणपत्रों की जांच के बाद योग्य अभ्यर्थियों को बाद में आयोजित होनेवाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि मई के अंतिम सप्ताह या जून के पहले सप्ताह में इन्हें भी नियुक्ति पत्र मिल सकता है। अभी तक 10,213 अभ्यर्थियों की हो चुकी है नियुक्ति अभी तक सहायक आचार्य के पदों पर कुल 10,213 अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी है। आयोग ने कुल 11,300 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा की थी, जिनमें इतने अभ्यर्थियों की नियुक्ति काउंसिलिंग के बाद हुई। ये सभी सहायक आचार्य स्कूलों में पठन-पाठन का कार्य करा रहे हैं। बता दें कि आयोग द्वारा आयोजित झारखंड प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा, 2023 के माध्यम से कुल 26,001 पदों पर नियुक्ति होनी थी, लेकिन योग्य अभ्यर्थी नहीं होने से बड़ी संख्या में पद रिक्त रह गए हैं। अधिसंख्य पद पारा शिक्षक श्रेणी में रिक्त रहे हैं।

धनबाद CSIR विवाद,1 लाख से 16 लाख किराया बिल, हाईकोर्ट ने पुनर्मूल्यांकन का आदेश

रांची झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च (सीएसआइआर), धनबाद के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के सरकारी आवास के किराया बिल में छह माह के भीतर एक लाख रुपये से बढ़कर 16 लाख रुपये हो जाने के मामले सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए CSIR के निदेशक से पूछा कि आखिर इतनी कम अवधि में हाउस रेंट की राशि में इतना बढ़ोतरी कैसे हो गई। खंडपीठ ने CSIR के निदेशक को निर्देश दिया कि सेवानिवृत्त कर्मी गोपाल चंद्र लोहार के 16 लाख रुपये के हाउस रेंट बिल का पुनर्मूल्यांकन कर नए सिरे से गणना की जाए। मामले की अगली सुनवाई एक मई को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन में सीएसआइआर के निदेशक, सेक्शन अफसर और प्रशासनिक अधिकारी अदालत में उपस्थित हुए। अदालत ने अगली सुनवाई में निदेशक को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी, लेकिन सेक्शन अफसर और प्रशासनिक अधिकारी को उपस्थित रहने का निर्देश दिया। प्रार्थी गोपाल चंद्र लोहार वर्ष 1989 में सीएसआइआर धनबाद में टेक्नीशियन पद पर नियुक्त हुए थे। वह 31 दिसंबर 2021 को सेवानिवृत्त हुए। आरोप है कि सेवानिवृत्ति के बाद करीब आठ माह तक उन्हें सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान नहीं किया गया। संस्थान की ओर से उन्हें पत्र देकर सूचित किया गया था कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें आवंटित आवास का किराया 9,995 रुपये प्रतिमाह देना होगा। 17 अप्रैल 2023 को संस्थान ने उन्हें आवास किराया का बकाया 1,06,403 रुपये बताया। इसके बाद नवंबर 2023 में उन्होंने आवास खाली कर दिया। बाद में संस्थान ने आवास किराया बकाया राशि बढ़ाकर 16,11,163 रुपये बता दिया। प्रार्थी का आरोप है कि ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट मद में बकाया लगभग 23 लाख रुपये में से 16 लाख रुपये काटने की मंशा से यह राशि बढ़ाई गई। ट्रिब्यूनल के आदेश पर भी सवाल प्रार्थी ने सरकारी क्वार्टर के किराया एवं दंडात्मक शुल्क की गणना को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि ट्रिब्यूनल ने बिना उचित कारण बताए उनकी याचिका खारिज कर दी और आदेश अत्यंत संक्षिप्त दिया। हाई कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में टिप्पणी करते हुए था कि 17 अप्रैल 2023 को 1,06,403 रुपये और 22 अप्रैल 2024 को 16,11,163 रुपये की गणना के बीच भारी अंतर है, जबकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इतनी वृद्धि किस आधार पर हुई। अदालत ने यह भी कहा था कि पहली गणना प्रशासनिक अधिकारी ने की थी, जबकि बाद की गणना उससे निम्न स्तर के सेक्शन अफसर द्वारा की गई। ट्रिब्यूनल ने बिना जवाब मांगे ही मामले का निपटारा कर दिया, जो प्रथम दृष्टया उचित नहीं प्रतीत होता।

असरगंज में जनसभ,सम्राट चौधरी बोले—बिहार में 5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

 मुंगेर  तारापुर विधानसभा के असरगंज पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जनसभा को संबोधित करते हुए विकास और निवेश को लेकर बड़ा विजन पेश किया। मन की बात कार्यक्रम के बाद आयोजित सभा में उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जिस धरती पर उनका जन्म हुआ, वहीं पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि यह अवसर जनता के प्यार और समर्थन का परिणाम है और अब क्षेत्र के हर अधूरे सपने को पूरा करना उनकी प्राथमिकता होगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार विकास कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ेगी। नीतीश के काम को आगे बढ़ाने की बात मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक नीतीश कुमार ने बिहार को संवारने का काम किया है। अब उसे समृद्धि की ओर ले जाना एक बड़ी चुनौती है, जिस पर सरकार ने काम शुरू कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के लिए वित्त की कोई कमी नहीं है। सभी लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा और नई योजनाओं को भी तेजी से जमीन पर उतारा जाएगा। महिलाओं, युवाओं और शिक्षा पर फोकस सम्राट चौधरी ने कहा कि महिलाओं को उद्योग से जोड़ना, बच्चियों की शिक्षा को मजबूत करना और युवाओं को रोजगार से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने जीविका योजना के तहत महिलाओं को सहायता राशि जल्द उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। साथ ही युवाओं को राज्य में ही रोजगार के अवसर देने की दिशा में तेजी से काम करने की बात कही। प्रशासनिक व्यवस्था होगी मजबूत मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीएमओ स्तर से लेकर ब्लाक, अंचल और थाना तक की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। हर माह दो दिन विशेष अभियान चलाकर लंबित मामलों का निपटारा किया जाएगा। एक माह से अधिक आवेदन लंबित रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इको-टूरिज्म से बढ़ेगा पर्यटन असरगंज में ढोल पहाड़ी पर 12.49 करोड़ रुपये की लागत से इको-टूरिज्म परियोजना की आधारशिला रखी गई। मुख्यमंत्री ने इसे प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को फोरलेन सड़क से जोड़कर सुल्तानगंज तक सीधी कनेक्टिविटी दी जाएगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। देवघरा पहाड़ के विकास को मंजूरी मुख्यमंत्री ने देवघरा पहाड़ के विकास के लिए 26 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाएं क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देंगी और पर्यटन के जरिए आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। 2026 तक 5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार ने 2026 तक पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने बताया कि पीरपैंती पावर प्लांट में ही 1.36 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस निवेश से राज्य में उद्योगों का विस्तार होगा और युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीन ड्राइव परियोजना के जरिए गंगा के पानी को नियंत्रित किया जाएगा। इससे बाढ़ की समस्या में कमी आएगी और सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी। हनुमाना डैम, खड़गपुर झील और फूलीडूमर तक पानी पहुंचाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है, जिससे किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। सोलर ऊर्जा और बिजली पर फोकस उन्होंने कहा कि सोलर ऊर्जा के माध्यम से हर घर को एक किलोवाट बिजली उपलब्ध कराने की योजना है। इससे ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और लोगों को सस्ती बिजली मिल सकेगी। जमीन अधिग्रहण पर सख्त रुख मुख्यमंत्री ने जमीन अधिग्रहण को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए जमीन की जरूरत होती है और इसमें किसी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं होगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर, असरगंज की सभा में मुख्यमंत्री ने विकास, निवेश और प्रशासनिक सुधार को लेकर सरकार का स्पष्ट रोडमैप सामने रखा और क्षेत्र के लोगों को तेजी से बदलाव का भरोसा दिलाया।