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सूत्रों का दावा: CM नीतीश कुमार 30 तारीख को विधान परिषद से इस्तीफा दे सकते हैं

पटना  बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होने की अटकलें तेज हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं. बताया जा रहा है कि 29 मार्च तक विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही अवकाश पर है, जिसके बाद 30 मार्च सोमवार को वे अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।  बिहार में कौन होगा अगला मुख्यमंत्री ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार नालंदा के बिहारशरीफ स्थित सर्किट हाउस पहुंचे और मीडिया से बातचीत में कहा कि 9 अप्रैल तक का समय है, उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी. उन्होंने यह भी कहा कि नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला एनडीए की बैठक में लिया जाएगा और नीतीश कुमार की इच्छा के अनुसार ही अगला मुख्यमंत्री चुना जाएगा. हालांकि अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर केवल अटकलें ही लगाई जा रही हैं।  नियम क्या कहते हैं? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद राज्यसभा जा रहे हैं. सवाल यह है कि वह राज्यसभा में कब शपथ लेंगे. राज्यसभा का मौजूदा सत्र 2 अप्रैल तक चलेगा. उम्मीद है कि वह इसी दौरान शपथ ले सकते हैं. ऐसे में उनका दिल्ली जाना भी तय माना जा रहा है. संविधान के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति राज्यसभा का सदस्य बनता है, तो उसे 14 दिनों के अंदर अपनी राज्य की सदस्यता छोड़नी होती है. इस हिसाब से माना जा रहा है कि नीतीश कुमार को 30 मार्च तक विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा।  कब सामने आएगा अगले मुख्यमंत्री का नाम नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं. 14 दिनों के अंदर इस्तीफा नहीं देने पर नियमानुसार राज्य सभा की सदस्यता खुद खत्म हो जाती है. नए सीएम की बात की जाए तो, माना जा रहा है कि खड़मास खत्म होने के बाद, यानी 14 अप्रैल के बाद ही नई सरकार को लेकर फैसला हो सकता है. फिलहाल मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. हालांकि, पिछले कुछ समय से नीतीश कुमार इशारों में सम्राट चौधरी का नाम आगे बढ़ाते नजर आए हैं। 

मौसम का कहर! अगले दो दिन भारी, तेज बारिश और तूफान की चेतावनी

पटना  बिहार में मौसम ने करवट बदल ली है और अगले 48 घंटे राज्य के लिए भारी पड़ सकते हैं। भीषण गर्मी के बीच बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और पश्चिमी विक्षोभ के मिलन ने राज्य में 'प्री-मानसून' हलचल तेज कर दी है। मौसम विभाग ने आज राज्य के सभी 38 जिलों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है, जिसमें वज्रपात (आकाशीय बिजली) और तेज आंधी की विशेष चेतावनी दी गई है। प्रमुख जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, राज्य को दो श्रेणियों में बांटा गया है: ऑरेंज अलर्ट (12 जिले): पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, वैशाली और समस्तीपुर जिले में 60 किमी/घंटा की रफ्तार से विनाशकारी हवाएं चलने और भारी बारिश की संभावना है। प्रशासन ने इन क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। येलो अलर्ट (26 जिले): नालंदा, भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, गया, नवादा, जहानाबाद, अरवल, लखीसराय, शेखपुरा, बेगूसराय, खगड़िया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया, भागलपुर, बांका, मुंगेर और जमुई में यहां हल्की से मध्यम बारिश के साथ मेघगर्जन और बिजली गिरने की आशंका है। क्यों बदला मौसम का मिजाज? मौसम वैज्ञानिकों ने इस अचानक बदलाव के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं: नमी और ऊष्मा का टकराव: बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी वाली हवाएं और दिन के बढ़ते तापमान के कारण वायुमंडल में अस्थिरता पैदा हुई है। पश्चिमी विक्षोभ : उत्तर-पश्चिम भारत से आ रहे विक्षोभ का असर बिहार के आसमान पर साफ दिख रहा है। दबाव क्षेत्र: हवा की दिशा में लगातार बदलाव और स्थानीय स्तर पर कम दबाव का क्षेत्र बनने से ओलावृष्टि (Hailstorm) की स्थिति बन रही है। राजधानी पटना का हाल पटना में आज दोपहर बाद मौसम के बिगड़ने के आसार हैं। अगले दो दिनों तक आसमान में बादलों का डेरा रहेगा और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 28 मार्च तक रुक-रुक कर बारिश होने से तापमान में गिरावट आएगी, जिससे स्थानीय लोगों को तपती गर्मी से अस्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।

गोमो रेलवे स्टेशन पर ट्रेन मैनेजर की मौत, ड्यूटी के बीच गिरे; ओवरटाइम जांच के घेरे में

गोमो  झारखंड के नेताजी सुभाष चंद्र बोस गोमो रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान एक ट्रेन मैनेजर की अचानक मौत से रेलवे विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। गोमो रेलवे स्टेशन पर 42 वर्षीय ट्रेन मैनेजर (गार्ड) दीपक कुमार पासवान की ड्यूटी के दौरान अचानक मौत हो गई। दर्दनाक दृश्य को देखकर भावुक हुए लोग घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही रेलकर्मी मौके पर पहुंचे और डॉक्टर को बुलाया गया, लेकिन जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। रेल थाना पुलिस और आरपीएफ के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर थाना लाया गया। दीपक पासवान बिहार के गया जिले के रहने वाले थे। घटना की खबर मिलते ही उनकी पत्नी प्रीति देवी अपने परिजनों के साथ सुबह गोमो पहुंचीं। थाना में शव देखते ही परिवार के लोग रोने लगे। पत्नी अपने पति के शव से लिपटकर बार-बार बेहोश हो रही थीं। इस दर्दनाक दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। दीपक पासवान करीब 15 साल से रेलवे में काम कर रहे थे। गार्ड एसोसिएशन और लोको रनिंग स्टाफ के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए धनबाद भेज दिया है। मौत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा जानकारी के मुताबिक, दीपक पासवान की ड्यूटी देर रात 2:15 बजे लगी थी। उन्हें गोमो से मालगाड़ी लेकर गया जाना था। लेकिन ट्रेन पर चढ़ने से पहले ही वे प्लेटफॉर्म नंबर 4 के पास गिरे हुए मिले। ट्रेन चालक ने उनसे कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब वह पास पहुंचा, तो दीपक पासवान मृत पाए गए। प्राथमिक जांच में उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है। रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि लगातार ओवरटाइम ड्यूटी की वजह से रनिंग स्टाफ में दिल की बीमारी का खतरा बढ़ रहा है। हाल ही में एक अन्य ट्रेन मैनेजर की भी ड्यूटी के दौरान मौत हो चुकी है। सहकर्मियों ने दीपक पासवान को श्रद्धांजलि दी और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।  

रांची के तपोवन मंदिर पहुंचे सीएम हेमन्त सोरेन, पत्नी के साथ की विशेष पूजा-अर्चना

रांची झारखंड के हेमन्त सोरेन ने रामनवमी के पावन अवसर पर रांची के प्रसिद्ध तपोवन मंदिर में पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपनी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन के साथ रामनवमी के मौके पर रांची के श्री राम जानकी तपोवन मंदिर, निवारणपुर में विधि-विधान से पूजा की। भगवान श्रीराम सभी की मनोकामनाएं पूरी करें मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के चरणों में नमन करते हुए राज्य की उन्नति, सुख-शांति और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को रामनवमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम सभी की मनोकामनाएं पूरी करें। उन्होंने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी उन्हें तपोवन मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला है। मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और विभिन्न अखाड़ों की शोभायात्रा भी यहां आ रही है। तपोवन मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है मुख्यमंत्री हेमन्त ने लोगों से अपील की कि वे इस पर्व को श्रद्धा, उत्साह और खुशी के साथ मनाएं और भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं। साथ ही सामाजिक सद्भाव और भाईचारे के साथ इस पर्व को खास बनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि तपोवन मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है और इसकी अलग पहचान है। सरकार मंदिर के सौंदर्यीकरण का काम तेजी से कर रही है, ताकि इसे और भव्य बनाया जा सके। उन्होंने भगवान श्रीराम से प्रार्थना की कि यह कार्य जल्द पूरा हो।  

क्या नीतीश कुमार सीएम पद छोड़ने वाले हैं? ताबड़तोड़ परियोजनाओं के उद्घाटन के बीच खरमास का इंतजार

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य चुने जा चुके हैं, लेकिन सीएम पद की कुर्सी नहीं छोड़ी है. दो दशकों से सत्ता की बागडोर संभाल रहे नीतीश ने  केंद्र की राजनीति में लौटने का फैसला किया है और राज्यसभा जा रहे हों, लेकिन बिहार में अपनी सियासी पकड़ को कमजोर नहीं होने देना चाहते. ऐसे में नीतीश बिहार के अलग-अलग जिलों की यात्रा कर रहे और ताबड़तोड़ विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कर रहे हैं।   नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद पूरी तरह से एक्टिव रहने के चलते सवाल यही है कि मुख्यमत्री पद कब छोड़ेंगे? क्या खरमास के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन होना. बिहार के नए सीएम को लेकर बीजेपी के कई नामों पर अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन सबके मन में एक ही सवाल है कि नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे? उसके बाद ही मुख्यमंत्री और सरकार गठन की असल तस्वीर साफ हो सकेगी?  नीतीश कुमार 21 साल बाद दिल्ली करेंगे कूच नीतीश कुमार अपने राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं, 21 साल पहले सांसद रहते हुए बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार ने अपने बेटे निशांत को राजनीतिक पारी शुरू कराने के साथ ही बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के व्यापक दौरे कर विकास परियोजनाओं का लगातार उद्घाटन कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य सीधे जनता से संवाद स्थापित करना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करना है।  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का फैसला किया और सदस्य चुन लिए भी गए हैं. इसके बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने हुए हैं और बिहार के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ेंगे, चर्चा है कि नीतीश एक साथ बिहार की राजनीति नहीं छोड़ेंगे, बल्कि दो किस्तों में इस्तीफा देंगे।   नीतीश अभी मुख्यमंत्री होने के साथ ही बिहार विधान परिषद के सदस्य भी हैं. वे राज्यसभा सदस्य भी चुन लिए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद की कुर्सी नहीं छोड़ा. ऐसे में सवाल यही है कि कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे।  नीतीश कुमार कब देंगे सीएम पद से इस्तीफा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101(2)के तहत प्रावधान है कि कोई व्यक्ति एक ही समय में एक ही सदन का सदस्य रह सकता है. संसद के लोकसभा, राज्यसभा और राज्य के विधानमंडल के विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य एक साथ नहीं सकता है.अगर ऐसा होता है तो उसे एक निश्चित समयसीमा के अंदर एक सदन से त्यागपत्र देना होगा. समयसीमा का निर्धारण राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम से तय होगा।  प्रोहिबिशन ऑफ सिमुल्टेनियस मेंबरशिप रूल्स 1950 में तय की गई है. इस नियम के तहत दो सदनों के सदस्य निर्वाचित होने की स्थिति में व्यक्ति को 14 दिनों के अंदर अपना पद छोड़ना होगा. चुनाव नतीजों के परिणाम के केंद्रीय या राज्य गजट में प्रकाशन की तारीख से से समय तय होता है. निर्वाचन की तारीख और गजट का प्रकाशन का समय अलग-अलग होता है।  नियम कहता है कि कोई भी व्यक्ति गजट नोटिफिकेशन के 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देने के लिए बाध्य होता है, न कि निर्वाचन की तारीख से. राज्यसभा चुनाव के परिणामों का गजट प्रकाशन अब तक नहीं हुआ है, ऐसे में नीतीश कुमार पर विधान परिषद की सदस्यता त्यागने की बाध्यता फिलहाल नहीं है. इसके चलते नीतीश कुमार विधान परिषद सदस्य के साथ-साथ राज्यसभा सदस्य हैं. इसके चलते मुख्यमंत्री भी बने हुए हैं।   नीतीश कुमार ने 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव जीता था. इसीलिए कहा जा रहा है कि नीतीश 30 मार्च तक बिहार विधान परिषद की सदस्यता नहीं छोड़ते हैं, तो संसद के उच्च सदन के सदस्य नहीं बन पाएंगे. इसलिए उनका एमएलसी पद से इस्तीफा की बात कही जा रही थी, लेकिन अभी तक गजट ही जारी नहीं हुआ है तो वो एक साथ दोनों पद पर बने हुए हैं।  खरमास के बाद क्या छोड़ें सीएम की कुर्सी नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद न छोड़ने की पीछे कहीं खरमास वजह तो नहीं है, जिसके चलते वो किसी नए सफर की तरफ अपने कदम नहीं बढ़ा रहे. खरमास का महीना 13 अप्रैल को खत्म हो रहा है. इसके बाद 14 अप्रैल की सुबह से सभी मांगलिक और शुभ कार्य किए जा सकेंगे. बीजेपी नया और शुभ काम खरमास के महीने में नहीं करती है. नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद बीजेपी को फौरन अपने किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाना है, जिसके चलते ही खरमास खत्म होने का इतंजार किया जा रहा है।  बिहार के पांच राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो रहा है, जिनकी सीटों पर 16 मार्च को चुनाव हुए हैं और नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद चुने गए हैं. इसके चलते ही माना जा रहा है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से खरमास खत्म होने के साथ ही इस्तीफा दे देंगे ताकि दूसरे दिन बीजेपी बिहार में सरकार गठन कर लगे।  बिहार में सरकार गठन का क्या होगा फॉर्मूला नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलती है तो पहली बार होगा जब बीजेपी का अपना सीएम होगा. बीजेपी से कई नेताओं के नाम सीएम की रेस में चल रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी नाम पर फाइनल मुहर नहीं लगी है. सम्राट चौधरी से लेकर नित्यानंद राय तक के नाम चर्चा में है. देखना है कि बीजेपी किसे सीएम बनाती है।  बिहार में बीजेपी का सीएम बनता है तो फिर जेडीयू से बिहार में डिप्टी सीएम पद मिलेगा. सियासी गलियारे में ऐसी चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. इसके अलावा पार्टी के किसी सीनियर लीडर को दूसरा उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है. बीजेपी से 15 और जेडीयू से 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। 

Jharkhand Doctor Bharti: राज्य में बड़े पैमाने पर भर्ती, स्वास्थ्य व्यवस्था होगी सशक्त

रांची राज्य के मेडिकल कॉलेजों, सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में शीघ्र ही 942 चिकित्सकों की नियुक्ति होगी। स्वास्थ्य विभाग ने रिक्त पड़े कुल 942 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत कुल 276 पदों पर नियुक्ति के लिए कार्मिक विभाग के माध्यम से अधियाचना झारखंड लोक सेवा आयोग को भेजी गई है। वहीं, शेष 666 पदों के लिए जेपीएससी को अधियाचना भेजने के लिए कार्मिक विभाग से अनुरोध किया गया है। राज्य के मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 180 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी, जिनमें 155 पद नियमित तथा 25 पद बैकलॉग श्रेणी के हैं। ये नियुक्तियां 24 विभिन्न विभागों में की जाएंगी, जिनमें मेडिसिन, सर्जरी, निश्चेतना, स्त्री एवं प्रसव रोग तथा शिशु रोग जैसे महत्वपूर्ण विभाग सम्मिलित हैं। यह नियुक्ति प्रक्रिया झारखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा नियमावली, 2018 (संशोधित 2021) तथा राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के नवीनतम मानकों अनुरूप संपन्न होगी, जिससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके साथ ही राज्य के पांच प्रमुख मेडिकल कालेजों धनबाद, जमशेदपुर, हजारीबाग, पलामू और दुमका में सुपर स्पेशियलिटी विभागों को सशक्त बनाने के लिए 96 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी। इन पदों में न्यूरो सर्जरी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी और आंकोलॉजी जैसे अत्याधुनिक चिकित्सा क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इस पहल से राज्य में जटिल एवं गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें अपने ही राज्य में उन्नत उपचार सुविधाएं मिल सकेंगी।इसी तरह, स्वास्थ्य सेवाओं के जमीनी स्तर को मजबूत करने के लिए राज्य के विभिन्न जिला एवं अनुमंडल अस्पतालों में 666 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी, जिनमें 506 पद नियमित तथा 160 पद बैकलाग के हैं। इस संबंध में विभाग के द्वारा कार्मिक विभाग को पत्र लिखा गया है कि जेपीएससी को अधियाचना भेजी जाए ताकि नियमित नियुक्ति हो सके। इनमें सर्वाधिक पद फिजिशियन (226) और शिशु रोग विशेषज्ञ (224) के हैं, जबकि निश्चेतक और स्त्री रोग विशेषज्ञ के बड़ी संख्या में पद सम्मिलित हैं। स्वास्थ्य विभाग इसके अतिरिक्त 335 चिकित्सा पदाधिकारियों की भी नियुक्ति की जानी है, जिसके लिए अधियाचना जेपीएससी को भेजने की तैयारी चल रही है।  

भावुक हुआ माहौल: ‘अपने जैसा CM बनाकर जाएं’—जीविका दीदियों की नीतीश से गुहार

नालंदा. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को नालंदा में अपनी स्मृद्धि यात्रा का समापन किया। नालंदा जिले को उन्होंने 810 करोड़ की योजनाओं की सौगात दी। इस दौरान सीएम ने विशाल जनसभा को भी संबोधित किया। जनसभा में भारी तादात में महिलाएं भी दिखीं। कुछ महिलाएं नीतीश कुमार के भाषण के दौरान भावुक भी हो गईं। दीपनगर स्टेडियम में समृद्धि यात्रा के दौरान एक भावुक दृश्य देखने को मिला। जीविका दीदियों और स्थानीय महिलाओं की आंखें नम थीं। राज्यसभा और दिल्ली की राजनीति की चर्चाओं के बीच महिलाओं ने कहा कि नीतीश बाबू हमारे गार्जियन हैं, उनके जाने से ऐसा लग रहा है जैसे सिर से साया उठ रहा हो। महिलाओं ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार दिल्ली जाने से पहले अपने जैसा सीएम बनाकर जाएं। हम उनको बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं। उन्होंने बिहार की महिलाओं के लिए बहुत कुछ किया है और रोजगार देने का काम किया। विपक्ष पर बोला हमला बता दें कि सीएम नीतीश कुमार ने जनसभा के दौरान विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2005 से पहले का बिहार किस हाल में था, ये सब जानते हैं। बिहार 2005 के बाद बदला है। नीतीश कुमार ने इस दौरान केंद्र सरकार और पीएम मोदी की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज बिहार को केंद्र से लगातार सहायता मिल रही है। सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी सरकार ने अब तक 50 लाख युवाओं को नौकरी और रोजगार दिया है और अगले 5 वर्षों में 1 करोड़ रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। नीतीश जाएंगे राज्यसभा, कौन बनेगा बिहार का सीएम? बता दें कि आने वाले 5 दिनों में नीतीश कुमार एमएलसी के पद से इस्तीफा दे देंगे। वहीं, 10 अप्रैल तक वह राज्यसभा की शपथ भी ले लेंगे। इसके बाद बिहार में नई सरकार का गठन होगा। नया मुख्यमंत्री बीजेपी के कोटे से हो सकता है। वहीं, सूत्र बता रहे हैं कि जदयू निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाना चाहती है और विधानसभा अध्यक्ष पद भी दावेदारी पेश करेगी।

सरकारी योजना को मिलेगा बूस्ट: झारखंड के सभी जिलों में प्लानिंग फेलो की नियुक्ति

रांची. झारखंड के सभी 24 जिलों में योजनाओं के क्रियान्वयन, अनुश्रवण और मूल्यांकन को लेकर राज्य सरकार संविदा के आधार पर प्लानिंग फेलो तैनात करने जा रही है। इनका मुख्य दायित्व होगा जिलों में प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग करना। आंकड़ों के आधार पर योजनाओं को मूर्त रूप देने में ये अधिकारी जिलों के प्रशासनिक अफसरों को सहयोग प्रदान करेंगे। योजना कार्यालयों में होगी नियुक्ति राज्य में सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सभी विभागों में पीएमयू बनाने के प्रस्ताव पर भी सहमति प्रदान कर दी गई है। इसके पूर्व सभी जिला योजना कार्यालयों में एक-एक प्लानिंग फेलो की नियुक्ति होगी। इसके माध्यम से जिलास्तर पर योजनाओं के सतत अनुश्रवण और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप परिणाम के लिए कार्यालयों में एक-एक फेलो की सेवा संविदा के आधार पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। योजनाओं की कठिनाइयों को दूर करने में होंगे सहायक विभागीय तैयारियों के अनुसार, ये पदाधिकारी जिला योजना कायालयों में योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों को दूर करने में सहायक होंगे। इनके द्वारा जिला स्तर पर अधिकृत डाटा बैंक तैयार होगा जिसके आधार पर जिलाें में अंतर विभागीय समन्वय कर जिलों का डिस्ट्रिक्ट प्रोफाइल तैयार करेंगे। इन कर्मियों की सेवा शर्त आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम के आधार पर तैयार की जाएगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि इन कर्मियों की की सेवा बाह्य स्रोत (आउट सोर्सिंग) से ली जाएगी। शीघ्र ही इनकी नियुक्ति को लेकर विभाग के स्तर से दिशानिर्देश तय करते हुए पूरी प्रक्रिया परिभाषित की जाएगी। राज्य सरकार ने इनकी नियुक्ति के लिए 50 लाख रुपये का अनुमानित बजट तैयार किया है, जो योजना विभाग को दिया जा चुका है।

बिहार राजनीति में बड़ा बदलाव: नीतीश कुमार का MLC से इस्तीफा, अब राज्यसभा की तैयारी

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) ने गुरुवार को अपनी 'समृद्धि यात्रा' को विराम दे दिया। अब वह अगले सोमवार से अपनी दिल्ली की तैयारी को आगे बढ़ाएंगे। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद अगले माह की 10 तारीख तक उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेनी है। वहीं, अगले पांच दिनों के अंदर नीतीश विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे यह भी तय है। यह कानूनी बाध्यता है। त्यागपत्र देने के बाद अगली व्यवस्था तक वह मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा गुरुवार को नालंदा तथा पटना में हुई। मुख्यमंत्री के आगे के कार्यक्रमों की रूप रेखा लगभग तय है। शुक्रवार को वह रामनवमी के आयोजन में शामिल होंगे। शनिवार से मुख्यमंत्री की मौजूदगी में जदयू की कई बैठकों का सिलसिला आरंभ होगा। नई सरकार पर होगी चर्चा सबसे पहले मुख्यमंत्री जदयू की प्रदेश इकाई की बैठक में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में शामिल होंगे। बैठक मुख्यमंत्री आवास या फिर जदयू प्रदेश कार्यालय में होगी। इसके बाद जदयू के कोर कमेटी की बैठक नई सरकार के गठन पर होगी। सरकार के स्वरूप पर भी चर्चा होगी। इस बार यह चर्चा है कि जदयू की दावेदारी विधानसभा अध्यक्ष पद पर भी है, इसलिए जदयू की कोर कमेटी की बैठक में इस विषय पर भी सहमति बननी है। क्या निशांत बनेगे उपमुख्यमंत्री? निशांत कुमार को उप मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिलेगी या नहीं यह भी चार से पांच दिनाें के अंदर तय हो जाएगा। इसके बाद एनडीए की बैठक होगी। एनडीए की बैठक में तय होना है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। 14 अप्रैल के बाद बिहार को मिलेगा नया सीएम इस बात की संभावना पर भी राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि नई सरकार 14 अप्रैल के पहले अस्तित्व में नहीं आएगी। यह कहा जा रहा कि खरमास के बाद ही मुख्यमंत्री पद पर बिहार में कोई नया व्यक्ति शपथ ग्रहण करेगा। नई व्यवस्था होने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का कामकाज देखते रहेंगे।

बिहार में बिजली बिल में बदलाव: दिन में सस्ती और शाम को महंगी बिजली, स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए नया सिस्टम

पटना  बिहार विद्युत विनियामक आयोग (बीईआरसी) ने बिजली कंपनियों की याचिका स्वीकार कर ली है. अब 1 अप्रैल 2026 से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे 87 लाख से अधिक घरेलू. व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को टाइम ऑफ डे (टीओडी) टैरिफ लागू होगा. इसका मतलब है कि बिजली खपत का समय तय करेगा बिल कितना आएगा. इसके तहत अब दिन में सस्ती और रात में महंगी बिजली मिलेगी. जानकारी के अनुसार, सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली इस्तेमाल करने पर उपभोक्ताओं को सिर्फ 80 प्रतिशत राशि चुकानी होगी. यानी 100 रुपये की खपत पर 80 रुपये ही. शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक पीक आवर में खपत पर 120 प्रतिशत दर लगेगी. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आयोग ने इसे 110 प्रतिशत रखा है. जबकि रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक पूरी तरह सामान्य दर लागू रहेगी. कृषि कनेक्शन को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।  क्या है टाइम ऑफ डे टैरिफ? टाइम ऑफ डे टैरिफ का मतलब है कि दिन के अलग-अलग समय पर बिजली की दर अलग-अलग होगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बिजली उपयोग का समय बदलने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि पीक आवर में लोड कम किया जा सके. पहले यह व्यवस्था सिर्फ औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं तक सीमित थी, लेकिन अब इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है।  तीन टाइम स्लैब में बंटी बिजली दरें जानकारी के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत दिन को तीन हिस्सों में बांटा गया है.     सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक: इस दौरान बिजली सबसे सस्ती रहेगी और उपभोक्ताओं को सामान्य दर का करीब 80% ही देना होगा.     शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक: यह पीक आवर होगा, जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं को लगभग 10% अधिक और गैर-घरेलू को 20% तक ज्यादा शुल्क देना पड़ेगा।      रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक: इस दौरान सामान्य दर पर ही बिजली मिलेगी. किन उपभोक्ताओं पर लागू होगा नियम? यह नया नियम मुख्य रूप से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाले उपभोक्ताओं पर लागू होगा. इसके अलावा जिन उपभोक्ताओं का लोड 10 किलोवाट से अधिक है, उन पर भी यह व्यवस्था लागू की जा सकती है. कृषि उपभोक्ताओं को फिलहाल इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।  क्यों लिया गया यह फैसला? ऊर्जा विभाग और आयोग का मानना है कि दिन के समय खासकर सोलर ऊर्जा की उपलब्धता ज्यादा होती है, जिससे बिजली उत्पादन सस्ता पड़ता है. इसलिए दिन में दर कम रखी गई है. वहीं शाम के समय मांग बढ़ने के कारण दरें बढ़ाई गई हैं, ताकि उपभोक्ता अपनी खपत को संतुलित करें।  कितने उपभोक्ताओं पर असर? बिहार में करीब 2 करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं और इनमें बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. इस फैसले का असर लाखों उपभोक्ताओं पर सीधे तौर पर पड़ेगा, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां स्मार्ट मीटर तेजी से लगाए जा रहे हैं।  क्या होगा आम लोगों पर असर? इस नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं को अपने बिजली उपयोग का समय बदलना होगा. अगर लोग दिन में ज्यादा बिजली इस्तेमाल करेंगे तो उनका बिल कम आएगा, जबकि शाम के समय ज्यादा उपयोग करने पर बिल बढ़ सकता है. यानी अब बिजली बचाने के साथ-साथ समय प्रबंधन भी जरूरी हो जाएगा।  पूरी कवायद का क्या होगा असर? बिहार में बिजली बिल की यह नई व्यवस्था उपभोक्ताओं की आदतों को बदलने वाली है. सरकार और आयोग का लक्ष्य बिजली की मांग को संतुलित करना और सस्ती ऊर्जा का बेहतर उपयोग करना है. हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव शुरुआत में चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही उपयोग से बिजली बिल में बचत भी संभव है।