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बिहार की सियासत में हलचल: अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे सम्राट चौधरी

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को दिल्ली बुलाया है। बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर चल रहीं चर्चाओं के बीच सियासी हलचल तेज है। सम्राट रविवार को शाह से मिलने पटना से दिल्ली जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के बाद बिहार में नए सीएम के नाम पर मंथन चल रहा है। चर्चा है कि अगला सीएम भारतीय जनता पार्टी से होगा। अमित शाह ने सम्राट चौधरी को दिल्ली क्यों बुलाया है, इस बारे में कोई स्पष्ट वजह तो सामने नहीं आई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद नई सरकार के गठन को लेकर उनसे चर्चा की जा सकती है। सम्राट बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में नंबर दो की पॉजिशन पर हैं। वह राज्य का सबसे अहम माने जाने वाला गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, जो पहले नीतीश के पास हुआ करता था। बताया जा रहा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने संभावित सीएम पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने के बाद वे बिहार सीएम पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद नए सिरे से सरकार का गठन किया जा सकता है। अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका ऐलान उसी समय होने की संभावना है।  

संजय झा के घर जेडीयू की मीटिंग में दिखे निशांत कुमार

पटना. बिहार सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ऐक्शन में आ गए हैं। पहली बार वे जदयू के बड़े नेताओं की बैठक में नजर आए। यह बैठक राज्यसभा सांसद और जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के घर पर बुलाई गई थी जिसमें मंत्री, सांसद और विधायक शामिल हुए। निशांत ने पार्टी नेताओं के साथ खुलकर बात की। नीतीश कुमार से हरी झंडी मिलने के बाद निशांत के जदयू में विधिवत शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है। सियासत की पीच पर औपराचिक एंट्री से पहले निशांत ने अपना मैसेज साफ कर दिया है। इस बैठक में युवा ब्रिगेड के साथ अनुभवी राजनेता भी मौजूद थे। मीटिंग का वीडियो फोटो सामने आया है जिसमें संजय झा के अलावे, मंत्री श्रवण कुमार,जेडीयू एमएलसी संजय गांधी मौजूद दिख रहे हैं। इनके साथ-साथ जेडीयू विधायकों में कोमल सिह, चेतन आनंद, राहुल सिंह, अतिरेक कुमार, ललन सर्राफ, रूहेल रंजन, शुभानंद मुकेश, एम मृणाल, समृद्ध वर्मा शामिल हुए। मीटिंग में जदयू के 20 से अधिक नेताओं ने भाग लिया जिनके साथ निशांत कुमार ने भविष्य की योजनाओं पर विमर्श किया। मीटिंग के बाद जदयू नेताओं के साथ निशांत कुमार बैठक को लेकर मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि निशांत कुमार की पार्टी में जरूरत है। कोई बैठक नहीं थी, बातचीत थी। विधायकों ने उनसे मुलाकात की। आने वाले दिनों में पार्टी को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका पर चर्चा हुई। वहां मौजूद सभी जदयू सदस्यों ने निशांत कुमार का स्वागत किया। पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं को लंबे समय से इस दिन का इंतजार था। नीतीश कुमार जी से भी सहमति मिल गई है कि निशांत पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि निशांत राजनीति में बेहतर परफॉर्मेंस दिखाएंगे। इधर, निशांत के स्वागत में पटना के चौक चौराहों पर पोस्टर लगना शुरू हो गया है। जदयू के साथ-साथ बीजेपी कार्यालय के पास भी निशांत के समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं जिनमें उन्हें नीतीश कुमार के साथ दिखाया गया है। निशांत के लिए सरकार और पार्टी में बड़ी भूमिका की मांग की गयी है। हालाकि, यह तय माना जा रहा है कि राज्य की नई सरकार में निशांत की भूमिका होगी। उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जाएगा। बताया जा रहा है कि 8 मार्च(रविवार) को दोपहर बाद निशांत औपचारिक तौर पर जनता दल यू की सदस्यता हासिल करेंगे। इससे पहले शुक्रवार की शाम को नीतीश कुमार के आवास पर जदयू की हाईलेवल मीटिंग हुई जिसमें नीतीश कुमार ने औपचारिक तौर पर अपने निर्णय से पार्टी जनों को अवगत कराया। राज्यसभा जाने की बात सुनकर कई नेता भावुक हो गए। नीतीश कुमार ने उन्हें ढाढस बंधाया कि वह हमेशा बिहार से जुड़े रहेंगे। मीटिंग में निशांत कुमार को पार्टी में शामिल कराने पर सहमति बनी।

नीतीश कुमार के 10 क्रांतिकारी कदम: बिहार में बदलाव की कहानी, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों ने किया फॉलो

पटना नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में बिहार के सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने कार्यकाल में खासकर महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर कई ठोस कदम उठाए गए, जिसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहना हुई। उनकी योजनाओं ने बिहार की महिलाओं के साथ ही पिछड़ा,अति पिछड़ा, दलित, महादलित और अल्पसंख्यक समाज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर करने में काफी मदद की। पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण नीतीश सरकार ने देश में पहली बार बिहार की महिलाओं को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और नगर निकायों में 50 फीसदी आरक्षण दिया। इससे निचले स्तर पर राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 55 फीसदी तक हो गई है। बाद में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा, उत्तराखंड आदि ने भी इस फैसले का अनुसरण किया। नौकरी/पढ़ाई में महिलाओं को 35 प्रतिशत रिजर्वेशन 2013 में नीतीश कुमार ने बिहार पुलिस में 35 फीसदी महिला आरक्षण लागू किया। इसका प्रभाव हुआ कि आज बिहार में कुल पुलिस बल का लगभग 30 फीसदी महिलाएं हैं और महिला पुलिस की संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। नीतीश सरकार ने 2016 से सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 35 फीसदी क्षैतिज आरक्षण लागू कर दिया। राज्य के इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों के नामांकन में भी लड़कियों को 33 फीसदी आरक्षण लागू है। जीविका योजना ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण और गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य के साथ 2006 में बिहार में जीविका (बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी) परियोजना की शुरुआत की। आज इससे एक करोड़ 40 लाख से अधिक महिलाएं जुड़कर ‘जीविका दीदी’ के रूप में कार्य कर रही हैं। यह महिलाएं 11.03 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में गोलंबद हैं। इसकी तर्ज पर केंद्र सरकार ने पूरे देश में आजीविका मिशन लागू किया है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 2025 में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत अब तक 1.81 करोड़ महिलाओं को उनके बैंक खाते में 10-10 हजार रुपये भेजे गए हैं। इनमें रोजगार बढ़ाने की इच्छा रखने वाली महिलाओं को दो-दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। कन्या उत्थान/ जननी बाल सुरक्षा योजना स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नीतीश कुमार ने काफी काम किया। उनके कार्यकाल के दौरान 2008-09 में कन्या उत्थान योजना शुरू की गई। इसके परिणाम स्वरूप जन्म पंजीकरण में भारी वृद्धि हुई। एनएफएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, जन्म पंजीकरण दर 54.9% बढ़कर 5.8 से 60.7 हो गया है। जननी बाल सुरक्षा योजना से संस्थागत प्रसव में वृद्धि हुई। आशा और ममता जैसी प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्य कर्ताओं से गर्भवतियों व स्तनपान कराने वाली माताओं को स्वास्थ्य सुरक्षा दी गई। वर्ष 2006-07 में केवल चार प्रतिशत महिलाएं ही संस्थागत प्रसव के लिए अस्पताल आती थीं, जो बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो गया है। वर्ष 2016 में पूर्ण शराबबंदी, कड़े कानून बनाए अप्रैल 2016 से पूरे राज्य में देशी शराब और विदेशी शराब पर प्रतिबंध लगाने का कड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया। गांधी जयंती पर दो 2 अक्टूबर, 2016 को नया मद्य निषेध अधिनियम पूरे राज्य में लागू किया गया। यह सामाजिक सुधार की दिशा में बहुत बड़ा कदम रहा। शराबबंदी ने महिलाओं के लिए सामाजिक क्रांति लाई। इससे घरेलू हिंसा में 35 से 40 फीसदी कमी आई और परिवारों में शांति स्थापित हुई। महिलाओं की बचत बढ़ी। अपराध की दर घटी। कानून व्यवस्था से बदली बिहार की छवि नीतीश कुमार ने 2005 के बाद अपराध पर नियंत्रण के लिए स्पीडी ट्रायल और सख्त पुलिसिंग को बढ़ावा दिया। इससे बिहार की छवि में बड़ा बदलाव आया। बाहुबलियों को जेल भेजा गया और शाम होते ही घरों में दुबक जाने वाले लोग रात-बेरात सड़कों पर निकलने लगे। मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान भी अपनी इस उपलब्धि का लगातार बखान किया। बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ अभियान बाल विवाह और दहेज प्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए 2017 से एक व्यापक राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की। शुरुआत में ही करीब ढाई करोड़ लोगों ने बाल विवाह और दहेज प्रथा को समाप्त करने की शपथ ली। इसमें पंचायत प्रतिनिधि, स्कूली छात्रों, सरकारी अधिकारी, गैर-सरकारी कार्यकर्ता व आम जनता भी शामिल हुए। लड़कियों की शैक्षणिक स्थिति में सुधार, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा उपायों के चलते पिछले वर्षों में बाल विवाह की दर में भारी कमी आई है। मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत राज्य के सभी 38 जिलों में महिला हेल्पलाइन स्थापित किया। यह हेल्पलाइन घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और अन्य सामाजिक बुराइयों से पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक परामर्श, चिकित्सा और कानूनी सहायता प्रदान करती है। पिछड़ा वर्ग की साक्षरता को चलाया अभियान 2009-10 से अक्षर अंचल योजना चलायी, जिससे 67 लाख से अधिक महिलाएं साक्षर हुईं। 2013 में महादलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़ा वर्ग को भी इस योजना से जोड़ा गया। इसके कारण बिहार में महिलाओं और एससी-एसटी की साक्षरता में पूरे देश की तुलना में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इस उपलब्धि के कारण बिहार को राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार प्राप्त हुआ। हुनर और औजार ‘हुनर’ के तहत अल्पसंख्यक समुदायों की हजारों लड़कियों को विभिन्न व्यवसायों का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया गया है। फिर उन्हें ‘औजार’ कार्यक्रम के तहत टूल-किट दी गई, ताकि वे स्वरोजगार शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। महादलित टोलों के विकास को लेकर इनकी बहुलता वाली पंचायत और शहरी वार्डों में समुदाय से ही विकास मित्र बहाल किए गए।

उमेश कुशवाहा फिर बने जदयू के बिहार अध्यक्ष, नीतीश कुमार का भरोसा लगातार तीसरी बार कायम

पटना उमेश सिंह कुशवाहा जनता दल यूनाइटेड के तीसरी बार बिहार अध्यक्ष बन गए हैं। कुशवाहा ने शुक्रवार को इस पद के लिए नामांकन किया। जदयू प्रदेश अध्यक्ष के लिए अन्य कोई नामांकन नहीं आने के बाद उन्हें निर्विरोध चुन लिया गया। शाम 4 बजे इसकी औपचारिक घोषणा कर दी गई। बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में संगठनात्मक चुनाव चल रहे हैं। वैशाली जिले के महनार से विधायक उमेश सिंह कुशवाहा बीते 5 सालों से बिहार में जदयू की कमान संभाल रहे हैं। वह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद नेता माने जाते हैं। पहली बार वह 2021 में जदयू प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए थे। उन्होंने वशिष्ठ नारायण सिंह की जगह ली थी। इसके बाद वे लगातार इस पद पर चुने जा रहे हैं।   नीतीश को उमेश पर क्यों इतना भरोसा? नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू की राजनीति का मुख्य आधार 'लव-कुश' (कुर्मी-कोइरी) वोट बैंक है। कोइरी समाज से आने वाले उमेश कुशवाहा इस समीकरण के 'कुश' पक्ष को मजबूती देते हैं, जो बिहार की राजनीति में एक अहम वोट बैंक माना जाता है। वहीं, उमेश कुशवाहा वे जेडीयू संगठन की सबसे मजबूत कड़ी माने जाते हैं और पार्टी की राजनीति को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम करते रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा जैसे बड़े कोइरी नेताओं के पार्टी छोड़ने के बावजूद वे नीतीश कुमार के साथ मजबूती से टिके रहे, जिसने उनके प्रति विश्वास को और बढ़ाया। नीतीश कुमार को पार्टी में एक ऐसे युवा चेहरे की जरूरत थी जो ऊर्जावान हो और कैडर के साथ संवाद कर सके। इसी कारण उन्हें 2021 में जेडीयू का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था और हाल ही में वे तीसरी बार इस पद के लिए चुने गए हैं। उमेश कुशवाहा वैशाली जिले के महनार से विधायक हैं। वे 2015 और 2025 में यहां से चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि, 2020 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2020 का विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद नीतीश ने उन्हें जदयू प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। वर्तमान में, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा के बाद बिहार में राजनीतिक परिस्थिति बदल रही है। ऐसे में उमेश कुशवाहा को फिर से जदयू प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना, नीतीश की लंबी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उमेश कुशवाहा बोले- निशांत राजनीति में आएं तीसरी बार जदयू प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने के बाद उमेश कुशवाहा ने सीएम नीतीश के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि निशांत सक्रिय राजनीति में आएं। वे पार्टी में शामिल हों और राज्य की सेवा करें।  

PM मोदी के पोस्टर से छेड़छाड़, जदयू दफ्तर में विरोध प्रदर्शन; नीतीश के राज्यसभा जाने पर नाराज़गी

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले का उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड में विरोध तेज हो गया है। पटना स्थित जदयू के प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जमा हो गए और नीतीश के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। जदयू कार्यालय में लगे पोस्टर में कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर कालिख भी पोत दी। पार्टी कार्यकर्ताओं ने नीतीश से राज्यसभा जाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। शुक्रवार सुबह से पटना में जदयू कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। जदयू कार्यालय के बाहर कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए और बैनर लगाकर नारेबाजी करने लगे। पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह बिहार के जनादेश का अपमान है। बिहार की जनता ने नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया था। उनके चेहरे पर बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा गया था। इसलिए मुख्यमंत्री पद के लिए वही पात्र हैं। जदयू कार्यकर्ताओं ने जदयू अध्यक्ष एवं सीएम नीतीश कुमार से राज्यसभा जाने का फैसला वापस लेने की मांग की है। जदयू कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं की भीड़ इस दौरान जदयू कार्यालय के बाहर लगे फिर से नीतीश और मोदी के पोस्टर में पीएम के चेहरे पर कालिख भी पोत दी गई। साथ ही जदयू कार्यालय के गेट पर कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश से राज्यसभा जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए पोस्टकार्ड भी लिखे। बता दें कि लगभग दो दशक तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश अब मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं। उन्होंने खुद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए गुरुवार को यह ऐलान किया। उन्होंने जदयू प्रत्याशी के तौर पर गुरुवार को ही बिहार विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन भी कर दिया। नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में कहा कि वह अपनी इच्छा से राज्यसभा जा रहे हैं। उनकी बिहार विधानमंडल और संसद के दोनों सदनों के सदस्य रहने की इच्छा है। वह विधायक, एमएलसी और लोकसभा सांसद रह चुके हैं और अब राज्यसभा सांसद के रूप में नई पारी की शुरुआत करेंगे। बताया जा रहा है कि नीतीश के राज्यसभा सांसद बनते ही अगले महीने बिहार में नई सरकार का गठन होगा और सूबे को पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुख्यमंत्री मिलेगा। एक दिन पहले भी जदयू कार्यालय और सीएम आवास के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं ने नीतीश के इस फैसले का विरोध करते हुए हंगामा किया था। शुक्रवार को एहतियातन पुलिस ने मुख्यमंत्री आवास की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया।

बिहार सरकार ने शुरू किया महिलाओं के रोजगार का सर्वे, 10 हजार रुपये लेने वाली महिलाओं की ड्यूटी पर जीविका कर्मचारी

 रजौली  रजौली प्रखंड क्षेत्र में 28000 महिलाओं को राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार रुपये की सहायता प्राप्त करने वाली महिलाओं के रोजगार की स्थिति जानने के लिए व्यापक सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर आत्मनिर्भर बनाना है। अब यह आकलन किया जा रहा है कि मिली आर्थिक सहायता का उपयोग किस प्रकार के व्यवसाय में किया गया और उसका वर्तमान स्वरूप क्या है। सर्वे की जिम्मेदारी जीविका समूह के कर्मियों को सौंपी गई है। जीविका कर्मी मोबाइल एप के माध्यम से लाभुक महिलाओं से सीधे संपर्क कर रहे हैं। वे उनसे व्यवसाय की प्रकृति, आय की स्थिति, सामने आ रही चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं से संबंधित जानकारी जुटा रहे हैं। एकत्रित डेटा को तत्काल एप पर अपलोड किया जा रहा है, जिससे विभागीय स्तर पर इसकी समीक्षा की जा सके। किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, डेयरी, बकरी पालन समेत अन्य रोजगार के लिए लिए हैं रुपये प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कई महिलाओं ने किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन और सब्जी बिक्री जैसे छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं। कुछ महिलाओं ने घर आधारित खाद्य सामग्री निर्माण का कार्य भी शुरू किया है। सर्वे के माध्यम से यह भी देखा जाएगा कि व्यवसाय कितना सफल रहा और किन लाभुकों को आगे अतिरिक्त मार्गदर्शन या वित्तीय सहयोग की आवश्यकता है। सरकार का मानना है कि सही मूल्यांकन के आधार पर अगली किस्त का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचे और उनके आर्थिक सशक्तिकरण का लक्ष्य पूरा हो सके। क्या कहते हैं जीविका बीपीएम? रजौली जीविका के बीपीएम मनीष कुमार ने बताया कि सभी महिलाओं को प्रशिक्षण कार्य जल्दी शुरू कर दिया जाएगा।  

नीतीश पर तेजस्वी का तंज—साथ रहते तो हालात अलग होते

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने वाले फैसले से प्रदेश की राजनीति ने अचानक से करवट ली है। सत्ता पक्ष जहां नीतीश कुमार के फैसले की सराहना कर रहा है, तो वहीं विपक्ष का दावा है कि नीतीश कुमार पर भाजपा ने राज्यसभा जाने के लिए दबाव बनाया। राजद नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि अगर वे नीतीश कुमार के साथ होते तो उन्हें आज यह दिन नहीं देखना पड़ता और बिहार की सियासत से उन्हें बाहर नहीं होना पड़ता। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा, "नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं; उनके साथ हमारी पूरी सहानुभूति है। हमें पता है कि क्या हो रहा है और वह किस दौर से गुजर रहे हैं। अगर हम वहां होते, तो शायद नीतीश कुमार को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। भाजपा लगातार दबाव बना रही थी। आखिरकार, यह तो होना ही था। नीतीश कुमार ने 20 साल तक बिहार की सेवा की। हम उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं।" तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह राज्यसभा जाना चाहते हैं। हम शुरू से ही कह रहे हैं कि भाजपा चुनाव के बाद नीतीश कुमार को सीएम की कुर्सी पर नहीं रहने देगी। वह अब सच हो रहा है। राजद-जदयू के गठबंधन टूटने के दौर का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि सभी लोग जानते हैं कि हम लोगों ने नीतीश कुमार के साथ मिलकर सरकार चलाई। नीतीश कुमार की सरकार में मैं दूसरी बार डिप्टी सीएम बना था। 28 जनवरी 2024 को नीतीश कुमार हमें छोड़कर गए। उस दौरान उनके पास कोई वजह नहीं थी। उस समय भी हम लोगों ने कहा था कि भाजपा जदयू को खत्म करना चाहती है; जदयू बचेगी नहीं। हमारी पूरी सहानुभूति नीतीश कुमार के साथ है। उन्होंने आगे कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी हमने कुछ नहीं कहा है। हमने कहा था कि नीतीश कुमार को घोड़ी तो चढ़ाया, लेकिन फेरे किसी और के साथ दिला रहे हैं। भाजपा नहीं चाहती है कि कोई ओबीसी समाज, दलित या आदिवासी समाज से आने वाला शख्स न्याय की बात करे। भाजपा के लोग उन्हें टिकने नहीं देना चाहते हैं। निशांत कुमार के राजनीति में आने पर तेजस्वी यादव ने कहा, "हम तो पहले से कहते रहे हैं कि उन्हें आना चाहिए। राजनीति में युवाओं को आना चाहिए।" बताते चलें कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। उनके नामांकन दाखिल कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह समेत बिहार सरकार के कई मंत्री मौजूद रहे।

Bihar BJP CM Race: चर्चा तेज, लेकिन नाम उजागर करने से बच रहे भाजपा के दिग्गज

पटना दो दशक तक बिहार का राजकाज संभालने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में सीएम के कैंडिडेट की तलाश तेज होनी तय है। नीतीश के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा के खाते में जानी तय है। नए सीएम के नाम पर अटकलबाजी कल ही शुरू हो गई थी, जब यह खबर आई कि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष नीतीश को दिल्ली जाने के लिए मनाया जा रहा है। बिहार में भाजपा के पास बड़े नेताओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन दिल्ली में रेखा गुप्ता, ओडिशा में मोहन चरण मांझी, छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय और मध्य प्रदेश में मोहन यादव को कुर्सी मिलने के उदाहरणों से सारे नेता सतर्क हैं। पार्टी नेतृत्व किसके नाम की पर्ची निकाल दे, ये अंदाजा किसी को नहीं है। भाजपा का संसदीय बोर्ड ऐसे मसलों पर फैसला लेता रहा है, लेकिन वहां क्या तय होगा, यह भनक फैसले से पहले शायद ही किसी को लग पाएगी। नीतीश के सीएम पद छोड़कर राज्यसभा जाने के बाद यह जरूर संभव है कि भाजपा किसी पिछड़ा (OBC) या अति पिछड़ा (EBC) को ही मुख्यमंत्री के पद पर बिठाए। एनडीए की अगली सरकार में जेडीयू से दो डिप्टी सीएम की बात है। कहा जा रहा है कि एक तो नीतीश के बेटे निशांत कुमार होंगे। निशांत आज ही जदयू में विधिवत शामिल हो रहे हैं। निशांत को राजनीति में लाने के लिए नीतीश पर जेडीयू के ही नेता काफी समय से दबाव डाल रहे थे। अब जब बिहार को अगला और नया मुख्यमंत्री देने की बारी भाजपा के पास आ गई है तो नेताओं का नाम उछलना स्वाभाविक है। बात लंबे समय से भाजपा के अघोषित सीएम कैंडिडेट रहे केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय की हो या इस समय सबसे मजबूत नेता बनकर उभरे डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की या फिर विवाद-बयान से दूर पार्टी और संगठन का काम करने वाले दीघा के विधायक संजीव चौरसिया की। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा और प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष दिलीप जायसवाल भी विकल्प हैं, जो अमित शाह के करीबी नेता के तौर पर गिने जाते हैं। भाजपा के पास विधानसभा में 89 और परिषद में 22 सदस्य हैं। कई राज्यों में चौंका चुकी भाजपा इनमें से किसी को भी सीएम बना सकती है। पार्टी चाहे तो विधानमंडल से बाहर के किसी नेता को भी सीएम बना सकती है। भाजपा की जीत दर जीत से यह साफ हो चुका है कि वह चुनाव से छह महीने पहले चुनाव की तैयारी करने वाली पार्टी नहीं है। पश्चिम बंगाल के चुनाव की तैयारी वह पिछले एक साल से कर रही है। अब फोकस बढ़ गया है। बिहार की राजनीति में प्रभाव बढ़ाने की रणनीति के साथ वो एक ऐसा मुख्यमंत्री चुन सकती है, जो पार्टी और सहयोगियों दलों के नेताओं से बेहतर तालमेल रख सके। जातीय गणित भाजपा देखती है, लेकिन वो इकलौती चीज नहीं है, जिस पर वो किसी को सीएम बनाती है। गिरिराज सिंह ने कहा है कि जो भी बनेगा, वो नीतीश कुमार की मर्जी से बनेगा। मतलब निकालें तो भाजपा के जिन नेताओं के नीतीश से रिश्ते बेहतर नहीं हैं, उनका चांस कमजोर होगा। गठबंधन सरकार को चलाने के लिए राजनीतिक समझदारी के साथ जोड़-तोड़ का अनुभव जरूरी है। बिहार में इस तरह का अनुभव रखने वाले भी कई नेता भाजपा में हैं जो चुनाव के समय गठबंधन के दलों से सीट बंटवारे पर सहमति बनाते नजर आते हैं। लेकिन किस राजनेता के नाम पर अंतिम सहमति बनेगी, यह दिल्ली में ही तय होगा। उसके बाद ही पटना में पहले भाजपा और फिर एनडीए विधायक दल की बैठकों में जय-जय होगा। नाम का ऐलान विधायक दल की बैठक से पहले या बाद में होना औपचारिकता रहेगी।  

JDU दफ्तर में बवाल: नाराज कार्यकर्ताओं ने किया तोड़फोड़, नीतीश कुमार के खिलाफ नारेबाजी

पटना राजधानी के वीरचंद पटेल पथ स्थित जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश कार्यालय में गुरुवार को पूरे दिन उग्र प्रदर्शन और तोड़फोड़ का माहौल रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने के फैसले से पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके चलते कार्यालय परिसर में हंगामा हो गया। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा के साथ ही जदयू समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में दोपहर 12 से ही सैकड़ों कार्यकर्ता जमा हो गए और "नीतीश कुमार बिहार के हैं, उन्हें कहीं नहीं जाने देंगे", "हम जान दे देंगे, लेकिन नीतीश को नहीं जाने देंगे" जैसे भावुक नारे लगाने लगे। नारेबाजी के बीच कुछ आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने कार्यालय के अंदर फर्नीचर उलट-पलट दिया, टेबल-कुर्सियां तोड़ीं, प्लेटें-बर्तन फेंके और पोस्टर-बैनर फाड़ दिए। यहां तक कि भोज के लिए तैयार बफे काउंटर को भी नुकसान पहुंचाया गया। भोज की व्यवस्था केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर की ओर से नामांकन के उपरांत कार्यकर्ताओं के लिए किया गया था। कार्यकर्ताओं का मुख्य गुस्सा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर भी रहा। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय चौधरी के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि ये नेता भाजपा के साथ मिलकर पार्टी को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने विधान पार्षद संजय कुमार उर्फ गांधी जी के साथ धक्का-मुककी की। उन्हें गाड़ी से उतरकर किसी तरह कार्यालय में प्रवेश मिला। हंगामें की सूचना पर पार्टी कार्यालय पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के साथ भी रही। कार्यकर्ता उनकी गाड़ी के आगे लेट गए। साथ में रहे सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह उन्हें प्रदेश कार्यालय के अंदर प्रवेश कराया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने लाठीचार्ज सहकर नीतीश को मुख्यमंत्री बनाया था, अब वे उन्हें राज्यसभा भेजकर बिहार को अकेला नहीं छोड़ सकते। पार्टी कार्यालय के अंदर जाने के बाद उमेश कुशवाहा ने एकबार फिर कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की भावना से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा। फिर भी कार्यकर्ता नहीं माने। वे नारेबाजी करते रहे। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अभी मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया है। आपलोग शांत रहें। प्रदेश कार्यालय में शाम तक रूक रूक कर पार्टी के बड़े नेताओं के खिलाफ नारेबाजी होती रही। मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी होता रहा प्रदर्शन, गुस्से मे दिखे कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी इसी तरह का हंगामा देखा गया, जहां कार्यकर्ता रोते हुए विरोध जता रहे थे और आने-जाने वाले नेताओं की गाड़ियां रोकी जा रही थीं। सुबह 10 बजे से कार्यकर्ता यहां जुटे थे। पटना, नालंदा, बेगूसराय से पहुंचे जदूय कार्यकर्ताओं को पुलिस बार-बार आवास के आगे से हटा रही थी। लेकिन जदयू कार्यकर्ता फिर वहां पहुंचकर नीतीश कुमार के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे। वहीं, अपने ही पार्टी के वरीय नेताओं के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। इस दौरान जदयू कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेता व पशुपालन विभाग के मंत्री सुरेंद्र मेहता की गाड़ी को रोक दिया। गाड़ी पर कार्यकर्ता मुक्के मारे रहे थे। पुलिस ने किसी तरह आक्राेशितों को हटाकर मंत्री की गाड़ी को वहां से निकलवाया।  

बिहार में सत्ता बदलाव की अटकलें: नीतीश कुमार कब देंगे इस्तीफा, कब होगा नए सीएम का शपथ ग्रहण?

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधायक, विधान पार्षद रह चुके हैं। लोकसभा सांसद भी। अब राज्यसभा भी जा रहे हैं। मतलब, बिहार के सीएम की कुर्सी खाली हो रही है। कुर्सी कब खाली होगी और अगला चेहरा उस कुर्सी पर कब विराजमान होगा, इन सवालों का जवाब भी समझना अब जरूरी हो गया है। नीतीश कुमार का तुरंत इस्तीफा देना मजबूरी नहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन करने जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि नामांकन के साथ ही उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देनी होगी। भारतीय जनता पार्टी जल्द से जल्द वह कुर्सी हासिल करना चाहेगी, ताकि माहौल उलटा न बन जाए। जबकि, नीतीश कुमार के पास फैसला लेने के लिए समय रहेगा। 5 मार्च, यानी आज राज्यसभा के लिए नामांकन होगा और 16 मार्च को उनका निर्विरोध निर्वाचित होना तय है। इसके बाद चूंकि 9 अप्रैल तक मौजूदा राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल है तो इस समय तक मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के बने रहने में कोई तकनीकी परेशानी नहीं। खरमास के नाम पर भाजपा दिखा सकती है तेजी भाजपा के लिए नीतीश कुमार को पदच्युत करना बहुत आसान नहीं था और न आगे रहेगा। फिर भी, चूंकि नीतीश कुमार ने खुद राज्यसभा जाने की बात को लेकर भाजपा के दबाव की चर्चा नहीं की है तो आगे भारतीय जनता पार्टी अपना सीएम और जदयू के दो डिप्टी सीएम के प्रस्ताव को लेकर जल्द से जल्द नीतीश कुमार से इस्तीफा लेने का प्रयास भी करेगी। 15 मार्च के बाद खरमास शुरू हो रहा है और 16 मार्च को निर्विरोध राज्यसभा के लिए जीत का एलान होना है। चूंकि, 202 सदस्यों के कारण विधानसभा कोटे से राज्यसभा के रास्ते में कोई दिक्कत नहीं है, इसलिए भाजपा खरमास से पहले ही नई सरकार के गठन का रास्ता तय करना चाहेगी। जानिए, सीएम नीतीश कुमार ने क्या कहा? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है। संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं। मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा। जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।