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BPSC TRE-4 शिक्षक भर्ती 2026 में आवेदन से पहले रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

पटना. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने चौथी चरण की शिक्षक भर्ती TRE-4 2026 का कार्यक्रम घोषित कर दिया है, जिसमें कुल 46,595 रिक्तियों पर शिक्षकों की बहाली की योजना है। यह भर्ती कक्षा 1 से 12वीं तक के सरकारी स्कूलों में शिक्षक पदों के लिए होगी। बीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर परीक्षा का शेड्यूल भी जारी किया गया है। परीक्षा 22 से 27 सितंबर 2026 के बीच आयोजित होने की संभावना है। आधिकारिक नोटिफिकेशन जल्द जारी होगा, जिसके बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। वेदन से पहले उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल खोला जाएगा। आवेदन से पहले रजिस्ट्रेशन अनिवार्य बीपीएससी ने इस बार आवेदन प्रक्रिया में एक अहम बदलाव किया है। आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को आयोग के रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद ही वे मुख्य आवेदन फॉर्म भर पाएंगे। इस बदलाव का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को और सुव्यवस्थित करना है। पिछली भर्तियों की तरह इस बार भी लाखों उम्मीदवारों के आवेदन करने की उम्मीद है। उम्मीदवारों को सलाह दी जा रही है कि वे सभी डाक्यूमेंट तैयार रखें। तीन प्रमुख बदलाव भर्ती प्रक्रिया में बीपीएससी TRE-4 में इस बार तीन महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहला बदलाव यह है कि डोमिसाइल नीति लागू की जाएगी, जिसमें अधिकांश सीटें बिहार के मूल निवासियों के लिए आरक्षित होंगी। दूसरा बदलाव-महिलाओं को 35% आरक्षण मिलेगा, जो राज्य के मूल निवासियों के हित में है। तीसरा और बड़ा बदलाव यह है कि एक अभ्यर्थी को सिर्फ एक ही रिजल्ट मिलेगा। इसका मतलब है कि एक उम्मीदवार को एक से अधिक पदों के लिए अलग-अलग मेरिट सूची में नाम नहीं मिलेगा। यह नया नियम लंबे समय से चर्चा में रहा है और उम्मीदवारों को एक साफ-सुथरा रिजल्ट देगा। परीक्षा तिथि और कार्यक्रम बीपीएससी TRE-4 परीक्षा 22 से 27 सितंबर 2026 तक आयोजित होने की घोषणा कर दी गई है। इस परीक्षा में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक शिक्षक पदों का चयन होगा। परीक्षा के बाद परिणाम नवंबर 2026 में जारी होने के संकेत हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक नोटिफिकेशन और पात्रता नियमों का ध्यानपूर्वक पालन करें। आवेदन प्रक्रिया के फॉर्म और तिथियों की घोषणा आयोग की वेबसाइट पर अपडेट होगी। आधिकारिक नोटिफिकेशन के बाद ही आवेदन शुल्क, आयु सीमा और परीक्षा पैटर्न भी स्पष्ट होंगे। लाखों युवाओं के लिए सुनहरा अवसर TRE-4 भर्ती बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को काफी हद तक पूरा करने में मदद करेगी। पिछले तीन चरणों में पहले से लाखों शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है। इस भर्ती के माध्यम से करोड़ों युवा अपने सपने की सरकारी नौकरी पा सकते हैं।

राज्यसभा सीट को लेकर चर्चाएं तेज, पवन सिंह का नाम आगे… क्या मुश्किल में उपेंद्र कुशवाहा?

पटना  राज्यसभा चुनाव की तारीख सामने आ गई है. अगले महीने 16 मार्च को चुनाव होंगे. 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव होने हैं. इस चुनाव से सदन में बीजेपी का आंकड़ा तो बढ़ेगा ही, साथ ही यह कई दिग्गजों का भविष्य भी तय करेगा. कई बड़े नेता नंबर के फेर में फंसकर सियासी रूप से पैदल हो सकते हैं. वहीं, कई नेताओं की लॉटरी भी लग सकती है. राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव की तारीख जारी होने के साथ ही सियासी गलियारों में कई चर्चित चेहरों के भविष्य को लेकर चर्चा अब होने लगी है. माना जा रहा है कि सबसे दिलचस्प बिहार का चुनाव रहने वाला है. क्योंकि यहां राज्यसभा की जिन 5 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से 2 आरजेडी की सीटें हैं. मौजूदा नंबर के हिसाब से तेजस्वी यादव किसी को भेज नहीं पाएंगे.  पवन सिंह जाएंगे राज्यसभा! ऐसे में बीजेपी के खाते में 2 सीटें जा सकती हैं. राजनीतिक गलियारों में जो चर्चा है उसके मुताबिक नितिन नबीन विधायक बने रहेंगे. ऐसे में एक नाम जो रेस में है वो भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह का है. विधानसभा चुनाव के वक्त पवन सिंह ने खूब प्रचार किया था. इस दौरान माना गया था कि राज्यसभा की ही डील हुई थी. लटक सकता है उपेंद्र कुशवाहा का भविष्य आंकड़ों के हिसाब से जेडीयू अपने दोनों सदस्यों को फिर से रिपीट कर सकती है. क्योंकि हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा में बड़ा कद है और रामनाथ ठाकुर मंत्री हैं. रही बात पांचवीं सीट की तो नंबर के हिसाब से चिराग पासवान का दावा बनेगा. लिहाजा उपेंद्र कुशवाहा का भविष्य लटक सकता है.  26 फरवरी से शुरू होगी राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया बता दें कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 26 फरवरी 2026 को शुरू होगी. नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च रखी गई है. नामांकनों की जांच 6 मार्च को होगी और उम्मीदवार 9 मार्च तक नाम वापस ले सकते हैं.

आज से रमजान की शुरुआत, मंत्री इरफान अंसारी ने झारखंड वासियों को दीं शुभकामनाएं

रांची  पवित्र माह-ए-रमजान की शुरुआत के अवसर पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक मुबारकबाद दी है। उन्होंने राज्य में अमन-चैन, खुशहाली और तरक्की की दुआ की। मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि रमजान बरकत, रहमत और मगफिरत (माफी) का महीना है। इस महीने में लोग रोजा रखकर अपने देश, राज्य और परिवार की सलामती के लिए दुआ करते हैं। उन्होंने कहा कि रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह सब्र, परहेजगारी और खुद को बेहतर बनाने का संदेश देता है।मंत्री ने आगे कहा कि तरावीह की नमाज के जरिए लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और सच्चे दिल से की गई दुआ जरूर कबूल होती है। रमजान को उन्होंने इम्तेहान का महीना बताया, लेकिन साथ ही कहा कि यह रहमतों और नेमतों से भरा हुआ समय भी है। मंत्री ने समाज के लोगों से अपील की कि इस पवित्र महीने में ज्यादा से ज्यादा जकात और खैरात दें तथा जरूरतमंदों की मदद करें, ताकि समाज में प्यार, भाईचारा और हमदर्दी बनी रहे। अंत में उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को माह-ए-रमजान की दिली मुबारकबाद दी।

बिहार में राज्यसभा चुनाव की चुनौती: एनडीए का क्लीन स्वीप मुश्किल, राजनीतिक समीकरण ने बढ़ाई जटिलता

पटना बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा हो गई है. भारत निर्वाचन आय़ोग की तरफ से जारी शेड्यूल के अनुसार 10 राज्यों में होने वाले चुनाव के तहत बिहार की इन सीटों के लिए 26 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी होगी. मतदान 16 मार्च को कराया जाएगा. बता दें कि बिहार में जिन पांच सीटों पर चुनाव होना है, वे फिलहाल अमरेंद्र धारी सिंह (Amarendra Dhari Singh), प्रेम चंद गुप्ता (Prem Gupta), उपेन्द्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha), हरिवंश नारायण सिंह, (Harivansh Narayan Singh) और रामनाथ ठाकुर ( Ram Nath Thakur) के पास हैं . इन सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है . चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 5 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 मार्च तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे . राज्यसभा चुनाव में संख्याबल की सियासत राजनीति के जानकारों की नजर में बिहार की इन पांच सीटों के लिए होने वाला चुनाव बिहार की सियासत में नई गणित और नई रणनीतियों को जन्म देगा. बता दें कि  आगामी 9 अप्रैल को मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, ऐसे में सभी दलों की नजर टिकट वितरण और संख्याबल की स्थिति पर टिकी है.  ऐसे देखना दिलचस्प होगा कि कौन दल अपने प्रत्याशियों को राज्यसभा भेजने में सफल रहता है. इसके सियासी गुणा-गणित पर हम बात करेंगे, लेकिन पहले आइए जानते हैं कि चुनाव के लिए महत्वपूर्ण तारीखें कौन -कौन सी हैं. चुनाव कार्यक्रम की प्रमुख तिथियां     अधिसूचना जारी होगी- 26 फरवरी 2026     नामांकन की अंतिम तिथि- 5 मार्च 2026     नामांकन पत्रों की जांच- 6 मार्च 2026     नाम वापस लेने की अंतिम तिथि-9 मार्च 2026     मतदान-16 मार्च 2026 सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक     मतगणना-16 मार्च 2026 शाम 5 बजे से     चुनाव प्रक्रिया पूर्ण- 20 मार्च 2026 एनडीए के भीतर फंसा सीट बंटवारे में पेच! बता दें कि बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 42 वोट की जरूरत है. 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को 202 सीटें मिली थीं. इसमें बीजेपी 89, जदयू 85, लोजपा रामविलास 19, हम 5 और आरएलएम 4 सीटों के साथ शामिल हैं . इस आंकड़े के आधार पर एनडीए आराम से चार सीटें जीत सकता है और पांचवीं पर भी मजबूत दावेदारी रखता है. लेकिन पेच यहीं से शुरू होता है. बीजेपी अब विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के पास भी बड़ी ताकत है. दोनों दल दो दो सीटों की मांग कर सकते हैं. जदयू से हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है. संख्या एनडीए के पास, बीजेपी बड़ी पार्टी दूसरी ओर बीजेपी अपनी बढ़ती ताकत के आधार पर ज्यादा हिस्सेदारी चाह सकती है. वहीं, छोटे दल भी दबाव में हैं. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के पास सीमित विधायक हैं, लेकिन वे अपनी सीट बचाना चाहेंगे. लोजपा रामविलास भी अपने 19 विधायकों के आधार पर एक सीट की मांग कर सकती है. ऐसे में सीट बंटवारा ही सबसे बड़ा राजनीतिक गणित बन गया है. क्या एक सीट भी बचा पाएगा विपक्ष? वहीं महागठबंधन की स्थिति कमजोर है. आरजेडी, कांग्रेस और वाम दल मिलाकर कुल 35 विधायक ही हैं. यह आंकड़ा एक सीट के लिए जरूरी कोटा से कम है. ऐसे में विपक्ष को या तो अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा या फिर क्रॉस वोटिंग की उम्मीद करनी होगी. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सामने राज्यसभा में अपनी मौजूदगी बचाने की चुनौती है . राज्यसभा चुनाव में कौन जीतेगा बाजी? कुल मिलाकर बिहार में राज्यसभा चुनाव का गणित एनडीए के पक्ष में है, लेकिन राजनीति का असली इम्तिहान गठबंधन के भीतर है . कौन कितनी सीट पाएगा, किसे दोबारा मौका मिलेगा और किसे इंतजार करना होगा, यह तय करेगा कि बहुमत की यह ताकत एकजुट रहती है या भीतर से खींचतान शुरू होती है. विपक्ष के लिए यह चुनाव अस्तित्व बचाने जैसा है, जबकि एनडीए के लिए संतुलन साधने की परीक्षा .

नीतीश द्विवेदी ने खुद का संगठन लॉन्च किया, 19 महीने में पूरे बिहार में करेंगे यात्रा

पटना  मुकेश सहनी के करीबी माने जाने वाले नीतीश कुमार द्विवेदी ने अब अपनी नई राह चुन ली है. उन्होंने ‘नौजवानों की आवाज’ नाम से एक सामाजिक संगठन बनाने की घोषणा की है. इसी के साथ उन्होंने युवाओं के मुद्दों पर सड़क पर उतरने का ऐलान किया है. पहली बैठक में तय हुई रूपरेखा नई संगठन की पहली बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार द्विवेदी ने की. इस दौरान संगठन के विस्तार और मजबूती पर चर्चा हुई. बैठक में चार अलग-अलग प्रकोष्ठ बनाने का फैसला लिया गया. इसका मकसद युवाओं से जुड़े मुद्दों पर व्यवस्थित तरीके से काम करना है. संगठन शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास जैसे विषयों पर फोकस करेगा. 19 महीने में करेंगे 38 जिलों की यात्रा नीतीश कुमार द्विवेदी ने घोषणा की कि वह बिहार के 38 जिलों में 19 महीने की यात्रा पर निकलेंगे. इस दौरान वे युवाओं से सीधे संवाद करेंगे. उनकी समस्याएं सुनेंगे और समाधान के लिए पहल करेंगे. उन्होंने कहा कि चुनाव के समय भी वह लगातार जनता के बीच रहे. करीब एक लाख लोगों से सीधे मुलाकात की. कई बार 10 दिन तक घर नहीं गए. जहां जगह मिली, वहीं रुक गए. पहले भी दिखा चुके हैं बागी तेवर नीतीश कुमार द्विवेदी विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय सचिव रह चुके हैं. वह पहले भी पार्टी से बागी होकर महराजगंज से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. अब वह अपने संगठन के जरिए युवाओं की आवाज बनने का दावा कर रहे हैं. युवाओं की बात प्रशासन तक पहुंचाने का दावा उन्होंने कहा कि उनकी टीम गांव-गांव और जिले-जिले जाएगी. युवाओं से सीधा फीडबैक लिया जाएगा. फिर संबंधित विभागों और प्रशासन तक उनकी बात पहुंचाई जाएगी. 

तेजस्वी यादव का बड़ा बयान: नीतीश कुमार पर साधा निशाना, कहा- बिहार को मिला ‘कठपुतली’ मुख्यमंत्री

पटना राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 'अचेत' और 'कठपुतली' सीएम बताते हुए कहा कि यह बिहार का दुर्भाग्य है कि उसे ऐसा नेतृत्व मिला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज प्रदेश को मुख्यमंत्री नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा भ्रष्ट अधिकारी चला रहे हैं। तेजस्वी यादव ने मंगलवार को जननायक कर्पूरी ठाकुर की पुण्यतिथि समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी कर्पूरी ठाकुर के अनुयायी हैं। हम सभी का फर्ज बनता है कि उनके सपनों को पूरा करें, लेकिन आज देश की स्थिति बदली हुई है। आज लोकतंत्र और संविधान को मिटाया जा रहा है, संवैधानिक संस्थाओं को समाप्त किया जा रहा है, और तानाशाही चरम पर है। ऐसे में हमारी लड़ाई का रास्ता इतना सरल नहीं है। उन्होंने राज्य में बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरते हुए कहा कि बिहार में विकास के नाम पर केवल जनता की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि पिछले 100 दिनों के शासन में बिहार में कितने नए कारखाने खुले और कितने युवाओं को रोजगार मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को लेकर भी कहा कि क्या महिलाओं को 1.90 लाख रुपए मिल गए? उन्होंने राजद के कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि राजद कमजोर नहीं है, समय कमजोर है। तेजस्वी ने प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में पुलिस और प्रशासन द्वारा राजद कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को डराने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि जब हम लोगों का समय आएगा तो ऐसे लोगों को जवाब दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ रहा है और राजद का वोट शेयर 23-24 प्रतिशत से बढ़कर अब 40 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि होली के बाद बिहार के सभी जिलों में कार्यक्रम होगा और संगठन को विस्तार और मजबूत करने का कार्य किया जाएगा। यह कार्यक्रम अन्य राज्यों में भी चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजद को राष्ट्रीय पार्टी बनाने के लिए अन्य प्रदेशों में भी हमें मजबूत बनना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वे झुकने वाले नहीं हैं और हर अत्याचार के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।

अमृत भारत स्टेशन योजना से बिहार में बदल रहा रेलवे का चेहरा

कटिहार. भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई अमृत भारत स्टेशन योजना देशभर में रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण का नया अध्याय लिख रही है। इस संबंध में सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि एनएफ रेल अंतर्गत बिहार, असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में जहां बड़े पैमाने पर स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है, वहीं बिहार के सीमावर्ती स्टेशन भी इस परिवर्तन यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत चयनित स्टेशनों के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार कर चरणबद्ध तरीके से यात्री सुविधाओं और आधारभूत संरचना का विकास किया जा रहा है। स्टेशन पहुंच मार्ग, सर्कुलेटिंग एरिया, आधुनिक प्रतीक्षालय, स्वच्छ शौचालय, लिफ्ट-एस्केलेटर, फ्री वाई-फाई, अत्याधुनिक यात्री सूचना प्रणाली और आकर्षक स्टेशन भवन इसके प्रमुख घटक हैं। वन स्टेशन वन प्रोडक्ट कियोस्क के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पूर्वोत्तर में 60 स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य जारी है, जिनमें असम के 50 स्टेशन शामिल हैं। हैवर गांव रेलवे स्टेशन असम का पहला अमृत भारत स्टेशन बनकर आधुनिक सुविधाओं और असमिया विरासत के समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत कर चुका है। इसी कड़ी में बिहार के कटिहार और किशनगंज सहित अन्य रेलवे स्टेशन को भी अमृत भारत योजना के तहत विकसित किया जा रहा है। सीमावर्ती और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ये दोनों स्टेशन पूर्वोत्तर और बिहार को जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनके पुनर्विकास से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा स्थानीय व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को नया आयाम मिलेगा। अमृत भारत स्टेशन योजना न केवल रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बना रही है, बल्कि स्टेशनों को सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के सशक्त केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रही है। बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाओं के साथ यह पहल असम, पूर्वोत्तर और बिहार में विकास की नई रफ्तार का प्रतीक बनती जा रही है। जो अत्याधुनिक तकनीकों और सुख सुविधाओं से सज्जित होगा। जिससे यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसा सुखद अनुभव मिलेगी।

बिहार में मैट्रिक परीक्षा देने कड़ी सुरक्षा के बीच सेंटरों में पहुंचे छात्र

पटना. बिहार में आज मैट्रिक की परीक्षा हो रही है। इसके लिए छात्र अपने-अपने सेंटर्स में पहुंच रहे हैं। जहां सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त है। छात्राओं के लिए प्रत्येक जिले में चार मॉडल परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जहां छात्राओं का फूल और चंदन से स्वागत किया गया। परीक्षा समिति ने कहा कि विद्यार्थियों को जूता-मोजा पहनकर आना वर्जित है। विद्यार्थी चप्पल पहनकर परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा केंद्र पर किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। बोर्ड ने ओएमआर शीट और उत्तरपुस्तिका जमा कराने का भी समय निर्धारित किया है, ताकि परीक्षा संचालन में पारदर्शिता बनी रहे। बिहार बोर्ड ने सभी जिलों के डीएम, एसपी और प्रशासनिक अधिकारियों को परीक्षा संचालन में सख्ती से निर्देशों का पालन कराने को कहा है।

नवगछिया-चौधरीडीह फोरलेन सड़क में बनेगा अंडरपास

भागलपुर. नवगछिया से चौधरीडीह तक बनने वाले फोरलेन सड़क में बंशीटीकर के पास व्हिकल अंडरपास (वीयूपी) का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जीरोमाइल फ्लाईओवर के बगल में समानांतर फ्लाईओवर बनाने की योजना पर पुनर्विचार किया जा रहा है। हाल ही में, जीरोमाइल के पास समानांतर फ्लाईओवर न बनाने और सड़क के चौड़ीकरण के माध्यम से फोरलेन बनाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अब सर्विस रोड की चौड़ाई बढ़ाने के बजाय, सबौर दिशा में एक और समानांतर टूलेन फ्लाईओवर बनाने पर विचार किया जा रहा है। नवगछिया-चौधरीडीह प्रस्तावित फोरलेन सड़क में बंशीटीकर के पास व्हिकल अंडरपास बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए डीपीआर में बदलाव कर वीयूपी को शामिल किया जाएगा। इस संदर्भ में कंसल्टेंसी को मोर्थ के रिजनल ऑफिस (आरओ) में बुलाया गया है। जीरोमाइल फ्लाईओवर के बगल में समानांतर फ्लाईओवर बनाने पर विचार किया जा रहा है, जबकि पहले डीपीआर में सड़क चौड़ीकरण का निर्णय लिया गया था। अब इसमें बदलाव करने पर चर्चा चल रही है। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी मोड़ से चौधरीडीह के बीच तीसरी बार डीपीआर में संशोधन किया जाएगा, जिससे फोरलेन सड़क निर्माण में देरी हो सकती है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि अप्रैल 2028 तक फोरलेन पुल का निर्माण पूरा होना है। इस बीच, 22 मीटर सड़क चौड़ी की जाएगी। महादेवपुर घाट से फोरलेन पुल तक 900 मीटर का बांध 9 करोड़ की राशि से बनाया जाएगा। इस बांध के निर्माण से सड़क को नुकसान नहीं पहुंचेगा और बाढ़ के दौरान गांवों को भी सुरक्षा मिलेगी। नवगछिया से शुरू होने वाले एनएच में जाह्नवी चौक से 53 मीटर अप्रोच रोड का निर्माण होगा। यह 18 मीटर ऊंची अप्रोच रोड फोरलेन सेतु से जुड़ेगी। भागलपुर की दिशा में भी अप्रोच रोड को ऊंचा किया जाएगा। विक्रमशिला सेतु की अप्रोच और नए सेतु की अप्रोच रोड भी फोरलेन की होगी। इस प्रकार, जीरोमाइल से जाह्नवी चौक तक सिक्स लेन की सड़क का निर्माण किया जाएगा। नवगछिया से भागलपुर तक एनएच 131बी को फोरलेन किया जाना है। यह कार्य दो चरणों में पूरा होगा, जिससे यातायात के लिए बेहतर सड़क उपलब्ध होगी। एनएच के अभियंता ने बताया कि नवगछिया जीरोमाइल से जाह्नवी चौक तक 9 किलोमीटर की अनुमानित लागत 295 करोड़ रुपये और बरारी बाइपास मोड़ से चौधरीडीह तक 4.5 किलोमीटर की अनुमानित लागत 111 करोड़ रुपये है। गोपालपुर के पास एक और रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण भी किया जाएगा, जिसकी लंबाई 60 मीटर और चौड़ाई 10 मीटर होगी। बाइपास में सेंट टेरेसा स्कूल और हवाई अड्डा के पास व्हीकल अंडरपास के अलावा दो छोटे ब्रिज का भी निर्माण होगा। जाह्नवी चौक और तेतरी के पास भी व्हीकल अंडरपास का निर्माण किया जाएगा। भागलपुर-नवगछिया के बीच फोरलेन बनने से न केवल आवागमन में आसानी होगी, बल्कि कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। इस फोरलेन का जुड़ाव नवगछिया साइड में एनएच-33 और भागलपुर की ओर मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीन फील्ड सहित हंसडीहा फोरलेन से होगा। इसका उपयोग समानांतर फोरलेन पुल के लिए भी किया जा सकेगा।

रामविलास पासवान को ‘बेचारा’ कहने पर बिहार विधानसभा में बवाल

पटना. बिहार विधानसभा परिसर में मंगलवार को रामविलास पासवान के सम्मान के मुद्दे पर सियासी तापमान एक बार फिर बढ़ गया। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेताओं और विधायकों ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और धरना पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान लोजपा (आर) के विधायकों ने रामविलास पासवान को “दूसरा अंबेडकर” बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर दलितों, वंचितों और गरीबों की आवाज बुलंद की। धरना दे रहे नेताओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल की राजनीतिक संस्कृति हमेशा से दलित विरोधी रही है और पार्टी समय-समय पर दलित नेताओं का अपमान करती रही है। लोजपा (आर) विधायकों ने कहा कि रामविलास पासवान का अपमान दरअसल दलित समाज का अपमान है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने नारेबाजी करते हुए राजद से सार्वजनिक माफी की मांग की। उनका कहना था कि पासवान ने केंद्र और राज्य की राजनीति में रहकर सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूती दी और हाशिए पर खड़े लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया। ऐसे नेता पर टिप्पणी करना दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित है। विधानसभा परिसर में कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई। लोजपा (आर) नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि राजद की ओर से स्पष्ट सफाई या माफी नहीं आती है तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। क्या है मामला? दरअसल, पिछले दिनों विधानसभा में राजद के विधायक कुमार सर्वजीत ने लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान की प्रतिमा विधानसभा परिसर में लगाने की मांग की थी तब उन्होंने अपने संबोधन में रामविलास पासवान को बेचारा कह दिया।