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झारखंड में जंगली हाथी के दर से 1 घर में सोते हैं 150 लोग

मझगांव (पश्चिमी सिंहभूम). पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड अंतर्गत बेनीसागर गांव में जंगली हाथी की दहशत इस कदर बढ़ गई है कि ग्रामीण अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। हालात यह हैं कि गांव के एक सुरक्षित घर में करीब 15 लोग एक साथ रात गुजार रहे हैं। इस घर में अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जबकि पुरुष रातभर बाहर रहकर हाथी की निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार हाथी के अचानक गांव में घुस आने और जान-माल को नुकसान पहुंचाने के डर से कोई भी अपने घर में अकेले सोने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। बीते तीन दिनों में इसी गांव के दो ग्रामीणों समेत कुल तीन लोगों की हाथी द्वारा पटककर और कुचलकर मौत हो चुकी है, जिसके बाद से गांव में भय का माहौल और गहरा गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथी को गांव की सीमा से बाहर खदेड़ने और स्थायी समाधान की मांग की है, ताकि वे सुरक्षित रूप से अपने घरों में लौट सकें। बता दें कि पिछले 9 दिनों में हाथी के हमलों में पश्चिमी सिंहभूम जिले के कुल 20 लोगों की जान जा चुकी है। मझगांव प्रखंड अंतर्गत बेनीसागर गांव में जमी वन विभाग की टीम मझगांव प्रखंड अंतर्गत बेनीसागर गांव में हमलावर हाथी के मौजूद होने की सूचना पर वन विभाग की टीम शनिवार रात भर कैंप कर निगरानी करती रही। हालांकि देर रात तक हाथी की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार हाथी को ट्रेस करने और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए क्षेत्र में लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग के आला अधिकारी रविवार को भी बेनीसागर पहुंचकर हाथी की लोकेशन ट्रैक करने और आगे की रणनीति तय करने का प्रयास करेंगे।

बिहार ने केंद्र सरकार से बजट 2026-27 में मांगा खास पैकेज

पटना. केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले नई दिल्ली में आयोजित बजट-पूर्व परामर्श बैठक में बिहार ने अपने हितों से जुड़े कई अहम मुद्दे केंद्र सरकार के सामने उठाए. इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने की. बैठक में बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने राज्य की आर्थिक चुनौतियों और विकास की जरूरतों पर विस्तार से बात रखी. बैठक में बिहार के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर सहित देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री मौजूद थे. बिहार ने खास तौर पर कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी, कर्ज सीमा और बाढ़ जैसी पुरानी समस्याओं पर केंद्र का ध्यान खींचने की कोशिश की. बिहार के वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र के कुल कर राजस्व में सेस और अधिभार की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है. वर्ष 2011-12 में यह हिस्सेदारी 10.4 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 13.6 प्रतिशत हो गई है. चूंकि सेस और अधिभार को राज्यों के साथ साझा किए जाने वाले विभाज्य कोष में शामिल नहीं किया जाता, ऐसे में बिहार जैसे राज्यों को उनके संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप राजस्व नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने सेस और अधिभार को विभाज्य कोष में शामिल करने की मांग की. अतिरिक्त उधार सीमा की मांग राज्य की प्रति व्यक्ति आय को राष्ट्रीय औसत के स्तर तक पहुंचाने के लिए बिहार ने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 2 प्रतिशत अतिरिक्त ऋण लेने की अनुमति मांगी है. यह मांग मौजूदा 3 प्रतिशत की उधार सीमा के अतिरिक्त रखी गई है. बिहार का कहना है कि अतिरिक्त उधारी से बुनियादी ढांचे, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी परियोजनाओं में निवेश को गति मिल सकेगी. बाढ़ नियंत्रण के लिए विशेष पैकेज उत्तरी बिहार में हर साल आने वाली भीषण बाढ़ को राज्य की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए बिहार ने केंद्र से विशेष ‘रिलीफ एंड डिजास्टर रेजिलिएंट पैकेज’ की मांग की. इस पैकेज के तहत सैटेलाइट आधारित पूर्वानुमान, जीआईएस मैपिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया. साथ ही बाढ़ और सूखे के स्थायी समाधान के लिए ‘नदी जोड़ो परियोजना’ को प्राथमिकता देने की अपील भी की गई. कृषि और उद्योग में तकनीक की मांग रोजगार सृजन को तेज करने के लिए बिहार ने कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकों पर आधारित केंद्र प्रायोजित योजनाओं की जरूरत बताई. इसके अलावा पर्याप्त जल संसाधन और कुशल श्रमशक्ति को ध्यान में रखते हुए राज्य में नए उद्योगों की स्थापना के लिए विशेष केंद्रीय सहयोग की मांग भी रखी गई. बैठक के अंत में बिहार के वित्त मंत्री ने राज्य के विकास से जुड़ा एक विस्तृत ज्ञापन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपा. उन्होंने उम्मीद जताई कि बजट 2026-27 में बिहार की इन मांगों पर सकारात्मक फैसला लिया जाएगा.

पटना में कोहरे के बीच कई गाड़ियां टकराणे से चार की मौत

पटना. बिहार के पटना जिले में बख्तियारपुर-मोकामा फोरलेन पर शनिवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. घने कोहरे के कारण अथमलगोला थाना क्षेत्र के फुलेलपुर गांव के पास एक के बाद एक कई गाड़ियां आपस में टकरा गईं. इस भीषण भिड़ंत में कार सवार पिता और उनकी मासूम पुत्री की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हैं. जानकारी के अनुसार, बेगूसराय से पटना की ओर जा रहे एक कंटेनर का टायर अचानक फट गया, जिससे वह सड़क पर ही खड़ा हो गया. घने कोहरे की वजह से पीछे से तेज रफ्तार में आ रही हुंडई क्रेटा (Creta) कार के चालक को संभलने का मौका नहीं मिला और कार सीधे कंटेनर के पिछले हिस्से में जा घुसी. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पीछे से आ रहे अन्य वाहन भी एक-दूसरे से टकराते चले गए. गैस कटर से काटकर निकाला गया शव हादसे का मंजर इतना खौफनाक था कि कार चालक का सिर धड़ से अलग हो गया. पुलिस और स्थानीय लोगों ने भारी मशक्कत के बाद गैस कटर से कार की बॉडी को काटकर शवों को बाहर निकाला. घायलों को तुरंत बख्तियारपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है. नई नौकरी ज्वाइन करने जा रहे थे फरीदाबाद मृतक की पहचान बांका जिले के रजौन निवासी अनुपम कुमार के रूप में हुई है. अनुपम भारतीय वायुसेना (Air Force) से सेवानिवृत्त हुए थे और हाल ही में उनकी नियुक्ति हरियाणा के फरीदाबाद स्थित केनरा बैंक में हुई थी. सोमवार को उन्हें ड्यूटी ज्वाइन करनी थी. इसी सिलसिले में वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ कार से भागलपुर से फरीदाबाद जा रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। घंटों तक लगा रहा भारी ट्रैफिक जाम हादसे की सूचना मिलते ही अथमलगोला थाना पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाया, जिसके बाद लगभग एक घंटे से बाधित मोकामा-बख्तियारपुर फोरलेन पर यातायात बहाल हो सका. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है.

झारखंड भाजपा में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का बढ़ा जोश

रांची. देश के आध्यात्मिक स्वरूप के केंद्र बिंदु प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग सोमनाथ की पुनर्स्थापना 1000 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस अवसर को भाजपा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के रूप में मना रही है। शनिवार को प्रदेश भाजपा नेताओं ने सभी मंडल अध्यक्ष, प्रदेश कार्य समिति सदस्य और कार्यकर्ताओं के साथ अपने नजदीक के शिवालय में जाकर भगवान शिव की आरती की और जलाभिषेक किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा विदेशी आक्रांताओं ने न केवल भारत की धन संपदा को लूटा बल्कि देश के मान बिंदुओं पर भी प्रहार किया। आक्रांता मोहम्मद गजनी ने सोमनाथ मंदिर से हीरे, जवाहरात, सोना चांदी सब लुटे और अद्वितीय शिवलिंग सोमनाथ पर भी चोट किया था। उन्होंने कहा कि यह हमला भारत की आत्मा पर था, लेकिन भारत की सांस्कृतिक चेतना फिर से खड़ी हो गई। प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सांसद आदित्य साहू ने अपने पैतृक गांव स्थित शिवालय में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का गौरव पुनर्स्थापित हो रहा है। प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने रांची पहाड़ी पर पहाड़ी बाबा का जलाभिषेक और पूजन आरती किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत का परिचय जानना आवश्यक है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हमारी ऐतिहासिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक : संजय सेठ रांची के पिस्का मोड़ स्थित शिव मंदिर में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने देवाधिदेव महादेव की पूजा, अर्चना एवं आरती किया। उन्होंने कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण के साक्षी बन रहे हैं। इस अवसर पर रांची के विधायक सीपी सिंह, महानगर भाजपा अध्यक्ष वरुण साहू, सत्यनारायण सिंह, सुखदेव नगर मंडल अध्यक्ष ओमप्रकाश पांडेय, पंडरा मंडल अध्यक्ष अशोक मुंडा, निवर्तमान वार्ड पार्षद अशोक यादव सहित सैकड़ों शिवभक्त उपस्थित थे। भाजपा ने चलाया विशेष स्वच्छता अभियान विश्व के प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली एक हजार वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी द्वारा देशभर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में भाजपा हैदरनगर मंडल की ओर से क्षेत्र के विभिन्न शिवालयों में विशेष स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया और विधिवत पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने श्रमदान कर मंदिर परिसर की सफाई की और भगवान शिव की विशेष आरती की। पूरे आयोजन में श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह का माहौल देखा गया। शिव शक्ति धाम मंदिर सुदना में ओमकार मंत्र का हुआ जाप स्वाभिमान सोमनाथ पर्व-2026 के तहत शनिवार को स्थानीय सूदना स्थित शिव शक्ति धाम मंदिर में पलामू सांसद विष्णु दयाल राम ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ पूजा-अर्चना करते हुए ओमकार मंत्र का जाप किया। सांसद ने बताया कि सोमनाथ मंदिर की अखंडता को अडिग रखने के लिए यह कार्यक्रम पूरे देशभर के अधिकांश शिवालयों में जन सहभागिता के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 11 जनवरी को प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सोमनाथ मंदिर में सहस्त्र संकल्प यात्रा का आयोजन किया जाएगा और वर्ष भर मनाए जाने वाले सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की घोषणा की जाएगी। सांसद ने कहा कि जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर इसे ध्वस्त कर दिया था। वर्ष 2026 में इस आस्था और सभ्यता के महान प्रतीक पर किए गए बर्बर आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। 1000 वर्षों के उतार-चढ़ाव के बावजूद यह मंदिर आज भी अपनी भव्यता और गौरव के साथ खड़ा है।

बंगाल के UP और दिल्ली MCD का चुनाव लड़ेगी जनशक्ति जनता दल: तेज प्रताप

पटना. राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका का विस्तार करते हुए जनशक्ति जनता दल ने बड़ा ऐलान किया है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने साफ कर दिया है कि जनशक्ति जनता दल अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली नगर निगम (MCD) के आगामी चुनावों में भी अपने उम्मीदवार उतारेगी. तेज प्रताप ने कहा, 'हमारी पार्टी बंगाल, UP और दिल्ली MCD का चुनाव भी लड़ेगी.' तेज प्रताप यादव के इस ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. बहन के बयान का किया समर्थन यह बयान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी और तेज प्रताप यादव की बहन रोहिणी आचार्य के एक ट्वीट को लेकर मची सियासी हलचल के बीच आया है. इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए तेज प्रताप यादव ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की. तेज प्रताप यादव ने कहा, “हम लगातार इन आरोपों को उठाते रहे हैं. शुरू से ही कुछ ‘जयचंदों’ ने मुझे परिवार और पार्टी से अलग-थलग करने की कोशिश की. लेकिन जिस तरह से मेरी बहन के साथ व्यवहार किया गया, वह बेहद निंदनीय है. यह सब एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है.” बिहार की राजनीति में भारत रत्न को लेकर बयानबाज़ी तेज हो गई है. जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग के बाद अब जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने भी बड़ा दावा किया है. तेज प्रताप यादव ने कहा है कि अगर नीतीश कुमार को भारत रत्न दिया जाता है, तो उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को भी यह सम्मान मिलना चाहिए. पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा, “लालू प्रसाद यादव को भी भारत रत्न मिलना चाहिए. अगर लोग कह रहे हैं कि नीतीश कुमार को यह सम्मान दिया जाए, तो मेरे पिता को भी दिया जाना चाहिए, क्योंकि कहा जाता है कि मेरे पिता और नीतीश कुमार भाई जैसे थे. यह जनशक्ति जनता दल की मांग है.” इससे पहले जेडीयू नेता राजीव रंजन ने केसी त्यागी के बयान से पार्टी को अलग बताया. उन्होंने कहा कि केसी त्यागी का बयान उनका निजी विचार है और इसका पार्टी की गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरी तरह स्वस्थ हैं और लगातार बिहार की जनता की सेवा कर रहे हैं. गौरतलब है कि शुक्रवार को जेडीयू नेता केसी त्यागी ने नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार एनडीए के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और समाजवादी आंदोलन से जुड़े ऐसे बड़े नेता हैं जो आज भी जीवित हैं. त्यागी ने यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित किया है और इसी कड़ी में नीतीश कुमार को भी यह सम्मान मिलना चाहिए.

झारखंड में 64 सीडीपीओ चयनित

रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग ने बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) नियुक्ति के तहत शनिवार को अंतिम परिणाम जारी कर दिया। इससे राज्य को 64 सीडीपीओ मिले हैं। राज्य सरकार शीघ्र ही अनुशंसित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करेगी। आयोग ने मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का सात से नौ जनवरी तक साक्षात्कार आयोजित किया था, जिसका परिणाम जारी कर दिया। इसमें अनारक्षित श्रेणी से 34, एससी श्रेणी से दो, एसटी श्रेणी से 21, बीसी-वन से एक तथा आर्थिक रूप से कमजाेर श्रेणी में छह सफल घोषित हुए हैं। सफल अभ्यर्थियों में अक्षय कुमार नेत्रहीन, प्रकाश कुमार शारीरिक दिव्यांग तथा अनुपमा कमल मूक बधिर हैं। इन्होंने इन कमजोरियों को धता बताते हुए अपनी प्रतिभा से सीडीपीओ जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त होने में सफलता प्राप्त की। वहीं, चयनित 64 अभ्यर्थियों में 35 महिला हैं, जबकि 50 प्रतिशत अर्थात 32 पद ही महिलाओं के लिए आरक्षित थे। बताते चलें कि आयोग ने यह नियुक्ति परीक्षा जून 2023 में ही शुरू की थी।

बिहार में होली से पहले 149 नई डीलक्स बसें चलेंगी

पटना. बिहार में सार्वजनिक परिवहन को और अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के लिए बिहार स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (BSRTC) ने होली से पहले 149 नई डीलक्स बसों का संचालन शुरू करने का फैसला लिया है. इन बसों में 75 एसी डीलक्स और 74 नॉन-एसी डीलक्स बसें शामिल हैं, जो यात्रियों को आरामदायक, सुरक्षित और सुविधाजनक सफर उपलब्ध कराएंगी. नई एसी डीलक्स बसों का मुख्य ध्यान अंतरराज्यीय मार्गों पर रहेगा. ये बसें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल समेत कुल 9 राज्यों के लिए संचालित होंगी. इसके साथ ही बिहार के अंदर भी लंबी दूरी की यात्राओं के लिए नई एसी बस सेवा शुरू करने की योजना बनाई गई है, जिससे प्रदेशवासियों का सफर और भी सुगम हो सके. परिवहन और ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार ने कहा कि घाटे वाले रूटों की पहचान कर वहां बस परिचालन बंद किया जाएगा. इन रूटों पर बहाल बसों को नई बसों के साथ बेहतर रूट प्रबंध के तहत समायोजित किया जाएगा ताकि संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके और परिचालन प्रभावी बने. अंतरराज्यीय बस परिचालन की प्रक्रिया को भी सरल और तीव्र बनाया जा रहा है. उत्तर प्रदेश के लिए पुराने रूट परमिट के नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है, जबकि दिल्ली के लिए नए रूटों की सूची अंतिम चरण में है. पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओड़िशा और पश्चिम बंगाल के साथ एमओयू भी पहले ही हो चुके हैं. परिवहन मंत्री ने यह भी सुनिश्चित किया है कि बसों के परिचालन से पहले सभी रूटों को अधिसूचित किया जाए, ताकि परिचालन में किसी भी तरह की देरी न हो. इस संदर्भ में 7-8 जनवरी को दिल्ली में संबंधित राज्यों के परिवहन मंत्रियों के साथ बैठक भी प्रस्तावित है. वर्तमान में BSRTC के बेड़े में 884 बसें हैं, जो हर साल लगभग 3 करोड़ यात्रियों को सेवा देती हैं. नई बसों के जुड़ने से बिहार में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और मजबूत होकर त्योहारों के दौरान यात्रियों को विश्वसनीय और सुरक्षित सेवा मिलेगी.

बिहार DGP ने किया खुलासा, राज्य में 60% अपराध जमीन विवाद से जुड़े, अब मंत्री विजय सिन्हा क्या कदम उठाएंगे?

पटना   डिप्टी सीएम विजय सिन्हा एक तरफ जमीन विवादों को निपटाने के लिए लगातार एक्शन मोड में दिख रहे वहीं दूसरी तरफ बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने बड़ी बात कह दी है. डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि बिहार में बढ़ते अपराध का मुख्य कारण जमीन विवाद है. राज्य में लगभग 50 से 60 प्रतिशत आपराधिक घटनाएं जमीन विवाद के ही कारण हो रही है. समय पर विवाद नहीं निपटाना बड़ा कारण डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि राज्य में गोलीबारी या फिर हत्या जैसी घटनाओं के पीछे का कारण अक्सर जमीन विवाद ही होता है. कई बार ऐसा होता है कि समय पर जमीन से जुड़े मामलों का निपटारा नहीं हो पाता है. ऐसे में ये मामले आपराधिक घटनाओं में बदल जाते हैं. हालांकि, जमीन विवाद से जुड़े मामले मुख्य रूप से राजस्व एवं भूमि सुधार से ही जुड़े होते हैं. पुलिस जमीन विवाद में नहीं करेगी हस्तक्षेप डीजीपी ने क्लियर किया कि वह इस मामले हस्तक्षेप नहीं करेंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि पुलिस का हस्तक्षेप जमीन से जुड़े मामलों में सीमित होता है, क्योंकि पुलिस के पास राजस्व रिकॉर्ड, नक्शा या फिर खतियान भी नहीं होता है, जिससे मामले को सुलझाया जा सके. लेकिन आगे डीजीपी ने यह भी कहा, अगर मामले आपराधिक घटना में बदलते हैं तो पुलिस हस्तक्षेप करेगी. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते जमीन से जुड़े मामले निपटा लिए जाए तो आपराधिक घटनाओं में कमी आ सकती है. क्या होगा मंत्री विजय सिन्हा का अगला स्टेप? दरअसल, डिप्टी सीएम और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा लगातार जमीन से जुड़े विवादों को सुन रहे हैं. किसी तरह की परेशानी होने पर विभाग के अधिकारियों की फटकार भी लगा रहे हैं. साथ ही वे जमीन के विवाद निपटाने के लिए अल्टीमेटम दे रहे हैं. ऐसे में डीजीपी के इस खुलासे के पास मंत्री विजय सिन्हा का अगला स्टेप क्या कुछ होता है, यह देखने वाली बात होगी. जमीन माफियाओं पर कड़ी नजर इधर, डीजीपी विनय कुमार जमीन माफियाओं के खिलाफ सख्त दिखे. उन्होंने स्पष्ट किया कि जबरन जमीन हड़पने, कब्जा करने वाले और माफियाओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है. बिहार पुलिस की तरफ से इस संबंध में कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. जमीन संबंधी अपराध को लेकर डीजीपी के इस बड़े बयान के बाद बिहार में जल्द बदलाव दिख सकेगा, इस बात की बड़ी संभावना है.

महिलाएं बंजर भूमि पर गाजर उगाकर बनीं आत्मनिर्भर

गिरिडीह. गिरिडीह स्थित बेंगाबाद प्रखंड की महिलाएं, जो कभी घरों तक सीमित थीं, अब बंजर भूमि पर गाजर की फसल उगाकर अपनी पहचान बना रही हैं और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। बेंगाबाद प्रखंड के मोतीलेदा पंचायत में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़ी महिला कृष मोतीलेदा में पहली बार लगभग 4 से 5 एकड़ भूमि पर महिला कृषकों द्वारा गाजर की खेती की जा रही है। इस कार्य में गांव की लगभग दो दर्जन महिलाएं शामिल हैं, जो अपने-अपने खेतों में आधुनिक तकनीक और जैविक विधि से खेती कर रही हैं। महिलाओं की मेहनत से कभी बंजर पड़ी जमीन आज गाजर की हरी-भरी फसल से आच्छादित हो गई है। बड़े पैमाने पर गाजर की खेती करने का लक्ष्य बेंगाबाद जेएसएलपीएस द्वारा इन महिलाओं को गाजर की उन्नत खेती का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण से पहले भी महिलाएं गाजर उगाती थीं, लेकिन पारंपरिक तरीकों से उत्पादन सीमित रहता था। प्रशिक्षण के बाद इस वर्ष क्यारी और बेड पद्धति अपनाकर खेती की गई, जिससे उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अगले वर्ष और भी बड़े पैमाने पर गाजर की खेती करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। महिला कृषक पवनती देवी ने बताया कि अब जैविक विधि से खेती की जा रही है, जिसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं होता। इससे उत्पादन बढ़ा है और सब्जियों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। 10 डिसमिल में गाजर की खेती से 6 से 7 क्विंटल तक उत्पादन महिला कृषकों के अनुसार, प्रत्येक महिला लगभग 15 से 20 डिसमिल भूमि पर खेती करती है। 10 डिसमिल में गाजर की खेती से 6 से 7 क्विंटल तक उत्पादन होता है, जिससे करीब 15 से 20 हजार रुपए तक की आमदनी हो जाती है। वहीं, एसएचजी से जुड़े किसान कोलेश्वर वर्मा और बिनोद वर्मा ने बताया कि इस वर्ष कुल मिलाकर करीब 5 एकड़ भूमि पर गाजर की खेती की जा रही है। प्रति एकड़ लगभग 65 क्विंटल उत्पादन होता है, जिससे करीब 2 लाख रुपए तक की आय होती है। गाजर की खेती में प्रति एकड़ 20 से 25 हजार रुपए का खर्च आता है। खेती में जुटी महिला कृषक आशा वर्मा, कविता कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, पवनती देवी और सुनीता देवी ने बताया कि वे पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं। गाजर के साथ-साथ मटर, गोभी सहित अन्य सब्जियों की भी खेती करती हैं। हालांकि, किसानों ने सिंचाई की समस्या को लेकर चिंता भी जताई। उनका कहना है कि खेतों तक बिजली की व्यवस्था नहीं होने के कारण डीजल पंप से सिंचाई करना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। यदि खेतों तक बिजली की सुविधा मिल जाए तो कम खर्च में खेती संभव हो सकेगी। कुल मिलाकर मोतीलेदा की महिला कृषक अपनी मेहनत, प्रशिक्षण और नए तकनीकों के सहारे न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल भी कायम कर रही हैं।

खाते में 25 लाख होने पर भी शिक्षक को इलाज के लिए नहीं मिला पैसा

जमशेदपुर. सोनारी निवासी झारखंड सरकार की सेवानिवृत्त शिक्षिका अंजलि बोस की मौत ने बैंकिंग सिस्टम और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खाते में करीब 25 लाख रुपए जमा होने के बावजूद समय पर इलाज के लिए राशि नहीं मिल सकी और अंजलि बोस की जान चली गई। विडंबना यह रही कि जिस मदद के लिए स्वजन कई दिनों तक भटकते रहे, वही सहायता उनकी मौत के दो घंटे बाद अस्पताल पहुंची। शुक्रवार के तड़के अंजलि बोस का एमजीएम अस्पताल में निधन हो गया। डाक्टरों ने पहले ही बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में रेफर करने की सलाह दी थी, लेकिन इलाज में सबसे बड़ी बाधा पैसा नहीं बल्कि बैंक की प्रक्रिया बन गई। नॉमिनी नहीं होने से हुई मुश्किल सेवानिवृत्ति के समय मिली पूरी राशि अंजलि बोस ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सोनारी शाखा में जमा कर रखी थी। अविवाहित होने के कारण उन्होंने खाते में किसी को नामिनी नहीं बनाया था। स्वजनों का कहना है कि अंजलि बोस की तबीयत लगातार बिगड़ने की जानकारी बैंक अधिकारियों को दी जाती रही। अस्पताल से लेकर बैंक शाखा तक चक्कर लगाए गए, लेकिन हर बार कानूनी अड़चन का हवाला देकर मदद से इनकार कर दिया गया। छोटी बहन गायत्री बोस अपनी बड़ी बहन के इलाज के लिए दर-दर भटकती रहीं, मगर सिस्टम पसीजने को तैयार नहीं हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह को इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने तुरंत अस्पताल पहुंचकर स्थिति देखी और सीधे उपायुक्त को मामले से अवगत कराया। उपायुक्त के हस्तक्षेप के बाद देर रात बैंक अधिकारियों से संपर्क साधा गया और सहायता की पहल शुरू हुई। देरी से पहुंचा पैसा इसके बाद शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे बैंक के जिम्मेदार अधिकारी पैसा लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सुबह 8 बजे ही अंजलि बोस ने दम तोड़ दिया था। अस्पताल पहुंचने पर बैंक अधिकारियों को स्वजनों के गुस्से का सामना करना पड़ा। बाद में अधिकारियों ने स्वजनों से माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की बात कही। विकास सिंह ने साफ कहा कि यदि बैंक अधिकारियों ने यही काम समय रहते कर दिया होता, तो अंजलि बोस की जान बचाई जा सकती थी। यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत का नहीं, बल्कि उस सिस्टम की संवेदनहीनता का प्रतीक बन गया है, जहां खाते में लाखों रुपये होते हुए भी इलाज के अभाव में एक शिक्षिका को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह घटना एक कड़ा सवाल छोड़ जाती है,क्या सरकारी नियम और बैंक की प्रक्रियाएं इंसान की जान से भी ऊपर हो गई हैं?