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HEC सरकारी कंपनी पर 280 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया

रांची. झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) पर बकायेदारों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। सबसे बड़ा बकायेदार हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (एचईसी) है, जो हर महीने 80 से 90 लाख रुपये की बिजली खपत करने के बावजूद बिजली बिल के एवज में एक रुपये का भी भुगतान नहीं कर रहा है। स्थिति यह है कि एचईसी पर जेबीवीएनएल का बकाया 280 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और अगर यही रफ्तार रही तो यह राशि जल्द ही 350 करोड़ रुपये के पार चली जाएगी। इस गंभीर मुद्दे पर शुक्रवार को रांची एरिया बोर्ड की बैठक में गहरी चिंता जताई गई। बैठक में एरिया बोर्ड के महाप्रबंधक मनमोहन कुमार ने बताया कि इतनी बड़ी राशि को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह सीधे तौर पर बिजली वितरण व्यवस्था को कमजोर कर रही है। उन्होंने बताया कि बैठक में केवल एक ही एजेंडा पर चर्चा हुई है, बड़े बकायेदारों से बिजली बिल वसूला जाए, नहीं तो कनेक्शन काटा जाए। बताया गया कि पिछले चार महीनों से सरकार की ओर से 200 यूनिट फ्री बिजली के एवज में जेबीवीएनएल को भुगतान नहीं मिल रहा है, जिसके कारण एनटीपीसी और डीवीसी को भुगतान अटक गया है। निगम पर एनटीपीसी का करीब 450 करोड़ और डीवीसी का लगभग 300 करोड़ रुपये बकाया है। बैठक में रांची एरिया बोर्ड के सभी कार्यपालक अभियंता शामिल हुए। सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अब रिलेशन मेंटेन करने के बजाय बकायेदारों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करें और जरूरत पड़े तो बिजली कनेक्शन काटें। रिंग रोड के अंदर 90 हजार हाई वोल्टेज कंज्यूमर मौजूद, जल्द होगा वसूली इस मौके पर जीएम मनमोहन कुमार ने कहा कि निर्बाध बिजली आपूर्ति तभी संभव है जब उपभोक्ता समय पर बिजली बिल का भुगतान करें। उन्होंने कहा कि जैसे निगम की जिम्मेदारी लगातार बिजली देने की है, वैसे ही उपभोक्ताओं की भी जिम्मेदारी है कि वे समय पर बिलें। उन्होंने कहा कि रांची रिंग रोड के अंदर हाई वोल्टेज कंज्यूमर की संख्या 90 हजार है, जिससे वसूली के लिए 21 से 23 जनवरी तक योजना बनाकर वसूली किया जाएगा। सबसे पहले वेस्ट डिविजन में वसूली के लिए कार्रवाई होगी, अंत में कोकर डिविजन में वसूली होगी। उन्होंने कहा कि कई अन मीटर और डिफेक्टिव मीटर के भी मामले सामने आए है, इसकी जांच कर इसे ठीक किया जाए।

बिहार पुलिस 50 एडवांस ड्रोन से यातायात और भीड़ करेगी कण्ट्रोल

पटना. बिहार पुलिस अब कानून-व्यवस्था और यातायात नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है। राज्य में पहली बार बिहार पुलिस की एक अलग ड्रोन यूनिट का गठन किया जाएगा। इस यूनिट का मुख्य उद्देश्य भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और यातायात कण्ट्रोल करेगी। एडीजी (आधुनिकीकरण) सुधांशु कुमार ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ड्रोन यूनिट के गठन से पुलिसिंग अधिक प्रभावी, तेज और तकनीक आधारित बनेगी। ड्रोन यूनिट का गठन, 50 आधुनिक ड्रोन खरीदेंगे एडीजी सुधांशु कुमार के अनुसार, इस यूनिट के लिए कुल 50 आधुनिक ड्रोन खरीदे जाएंगे, जिन पर लगभग 25 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इनमें से 40 ड्रोन राज्य के विभिन्न पुलिस जिलों को दिए जाएंगे, जबकि 10 ड्रोन विशेष कार्यों के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को मिलेंगे। इन ड्रोन की खरीद केंद्र सरकार की ASUMP (असिस्टेंस टू स्टेट्स एंड ड्यूटीज फॉर मॉडर्नाइजेशन ऑफ पुलिस) योजना के तहत की जा रही है। उम्मीद है कि यह ड्रोन यूनिट मार्च तक पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी। निगरानी में होगा ड्रोन का प्रमुख उपयोग ड्रोन तकनीक का एक प्रमुख उपयोग यातायात निगरानी में होगा। एडीजी ने बताया कि ड्रोन कैमरों की मदद से बिना हेलमेट वाहन चलाने, गलत लेन में ड्राइविंग करने, ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने और जाम लगाने जैसी स्थितियों की पहचान की जाएगी। इसके बाद संबंधित वाहन मालिकों के खिलाफ ऑनलाइन चालान की कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, ड्रोन यूनिट बड़े आयोजनों, त्योहारों, वीआईपी मूवमेंट और संवेदनशील इलाकों में भीड़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऊंचाई से पूरे क्षेत्र की लाइव निगरानी संभव होगी, जिससे स्थिति का तुरंत आकलन कर पुलिस बल की प्रभावी तैनाती की जा सकेगी। अपराधियों पर होगी सख्त निगरानी STF को दिए जाने वाले ड्रोन का इस्तेमाल खास तौर पर दियारा क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों में सक्रिय अपराधियों की निगरानी के लिए किया जाएगा। एडीजी ने कहा कि, इन इलाकों में पुलिस की भौतिक पहुंच सीमित रहती है, लेकिन ड्रोन के जरिए अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा। ड्रोन यूनिट के गठन से बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। इससे अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

कांग्रेस नेता छत्रपति यादव के भोज में पहुंचे दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस में गुटबाजी और तेज हो गई है। बिहार कांग्रेस के नाराज गुट की ओर से शुक्रवार को मकर संक्रांति का दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया। पूर्व विधायक छत्रपति यादव के पटना स्थित आवास पर आयोजित इस भोज में दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कई जिला अध्यक्ष समेत प्रदेश नेतृत्व से नाराज चल रहे कई नेता शामिल हुए। यह भोज सूबे के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। दही-चूड़ा भोज का आयोजन एआईसीसी सदस्य आनंद माधव, पूर्व विधायक छत्रपति यादव, राजकुमार राजन एवं नागेंद्र पासवान विकल की ओर से किया गया। छत्रपति यादव ने कहा कि भोज में सभी कांग्रेसियों के अलावा उन नेताओं को भी बुलाया गया जिन्हें प्रदेश कार्यालय सदाकत आश्रम में निमंत्रण नहीं दिया गया था। आनंद माधव ने कहा कि यह कोई राजनीतिक भोज नहीं है। बीते सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पार्टी का आधिकारिक दही-चूड़ा भोज आयोजित हुआ था। उसमें नाराज गुट के नेता नहीं दिखे थे। पार्टी के सभी 6 विधायकों ने भी इससे दूरी बनाए रखी थी। हालांकि, नेताओं की नाराजगी की बात से प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इनकार किया था। दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश कांग्रेस के एक गुट ने प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर पैसे लेकर बाहरियों को चुनाव में टिकट देने का आरोप लगाया था। चुनाव नतीजों में पार्टी को करारी हार मिली तो नाराज गुट का विरोध तेज हो गया। पटना से लेकर दिल्ली तक पार्टी कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया गया। अब इस गुट को दो पूर्व अध्यक्ष अखिलेश सिंह और मदन मोहन झा का भी खुलकर समर्थन मिल गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में गुटबाजी चरम पर पहुंचने के आसार नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, एनडीए की ओर से कांग्रेस के सभी 6 विधायकों के पाला बदलने के दावे भी किए जा रहे हैं।

बिहार विधानसभा के बजट सत्र में खत्म होगा आरजेडी, कांग्रेस और RLM में टूट का सस्पेंस?

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत 2 फरवरी से होने जा रही है। यह सत्र कई मायनों में रोचक रहने वाला है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठित एनडीए की नई सरकार का सदन में 3 फरवरी को पहला बजट पेश करेगी। सदन की कार्यवाही के दौरान विधायकों के सीटिंग अरेंजमेंट पर भी सबकी निगाहें रहेंगी। दरअसल, लालू एवं तेजस्वी यादव के राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में टूट के दावे और अटकलबाजी चर्चा का विषय बनी हुई है। अब इन दावों से सस्पेंस बजट सत्र में खत्म होने के आसार नजर आ रहे हैं। बिहार चुनाव में प्रचंड जीत और नई सरकार के गठन के कुछ दिनों बाद से ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेताओं की ओर से विपक्ष में टूट के दावे किए जाने लगे। विधानसभा में 25 सदस्यों वाली आरजेडी और 6 सदस्यों वाली कांग्रेस के अधिकतर विधायकों के एनडीए के संपर्क में होने और खरमास के बाद पाला बदलने के दावे किए जा रहे हैं। इससे सियासी पारा गर्माया हुआ है। हालांकि, विपक्ष की ओर से इस बात को लगातार खारिज किया जा रहा है। कांग्रेस विधायकों की पार्टी के भोज से दूरी बीते सोमवार को पटना स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया। इसमें पार्टी के कोई भी विधायक नहीं पहुंचे। इससे विपक्ष में टूट के दावों को और बल मिल गया। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कांग्रेस में सब कुछ ऑल इज वेल होने का दावा किया। मगर विधायकों की गैरमौजूदगी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी रहीं। एनडीए में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम में भी खटपट चल रही है। बिहार चुनाव में RLM के 4 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे। इनमें से कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता को छोड़ अन्य 3 विधायक शीर्ष नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। उनकी भाजपा से नजदीकी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को नीतीश कैबिनेट में मंत्री बनाया, जो किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। इससे पार्टी में नाराजगी बढ़ गई और कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया था। इसी वजह से पार्टी के 3 विधायक एकजुटता दिखा रहे हैं। पिछले दिनों तीनों विधायक (माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक कुमार सिंह) ने उन्होंने कुशवाहा की लिट्टी पार्टी से दूरी बनाए रखी। हाल ही में वे भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के दही-चूड़ा भोज में दिखे। इससे कुशवाहा की पार्टी में बिखराव की अटकलें लगाई जा रही हैं। बजट सत्र में खत्म होगा सस्पेंस? खरमास खत्म हो गया है लेकिन विभिन्न दलों में टूट और खटपट के दावों पर फिलहाल संशय बना हुआ है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले महीने होने वाले बिहार विधानसभा के बजट सत्र में यह सस्पेंस खत्म हो जाएगा। सदन के अंदर आरजेडी-कांग्रेस के विधायक विपक्ष के खेमे में ही बैठेंगे या नहीं, साथ ही आरएलएम के विधायकों का सीटिंग अरेंजमेंट कैसा होगा, यह 2 फरवरी को सत्र के पहले दिन स्पष्ट हो जाएगा।

पटना की घुरदौड़–ज्ञान निकेतन रोड सहित 9 सड़कों को मिला नया नाम

पटना. नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति की सामान्य बैठकों में राजधानी की 9 सड़कों का नामकरण किया गया। साथ ही 5 पार्कों के नामकरण को भी स्वीकृति प्रदान की गई। समिति से मंजूरी मिलने के उपरांत नगर निगम प्रशासन द्वारा नामकरण से संबंधित सूचना डाक विभाग को भेजी जाती है। उल्लेखनीय है कि बीते एक माह के भीतर सशक्त स्थायी समिति की दो बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। दीघा रोड, घुरदौड़ से ज्ञान निकेतन गर्ल्स स्कूल तक की सड़क अब आचार्य किशोर कुणाल के नाम से जानी जाएगी। अशोक राजपथ स्थित नंद गोला मेन रोड पर डॉ. विजय कांत शर्मा के आवास से पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी श्रीराम कुमार के आवास तक के मार्ग को पूर्व पार्षद श्रीराम कुमार पथ नाम दिया गया। पूर्व पार्षद नथुनी राम यादव के नाम पर सड़क श्रीकृष्णापुरी पार्क के मेन गेट के सामने से लेकर एलएफ फ्लैट पार्क तक की सड़क का नामकरण न्यायमूर्ति इंदु प्रभा सिंह पथ किया गया। इसी प्रकार 15 दिसंबर को हुई बैठक में वार्ड 72 में अशोक राजपथ मुख्य सड़क लिंक पथ से अनिल कुमार यादव (बजरंगबली मंदिर) के मकान से सहदरा चौड़ाहा तक का नामकरण वरिष्ठ समाजसेवी व पूर्व पार्षद नथुनी राम यादव के नाम पर किया गया। दीघा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आशियाना दीघा रोड से आकाशवाणी रोड के बीच पड़ने वाली सड़क को मुंदर साह पथ नाम दिया गया। कंकड़बाग वार्ड 33 के पूर्वी इंद्रानगर स्थित सुधा देवी लेन रोड नंबर एक-ए का पूर्वी इंद्रा नगर नामकरण किया गया। रोड नंबर छह, राजेंद्र नगर सुपर स्पेशलिटी नेत्र अस्पताल से लेकर ज्योतिषाचार्य पं. रामलोचन पांडेय के घर के कोने तक सड़क को डॉ. ब्रजकिशोर सिन्हा मार्ग नाम दिया गया। एग्जीबिशन रोड-फ्रेजर रोड लिंक सड़क का नामकरण पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. दुखन राम मार्ग किया गया। वार्ड 44 अंतर्गत केंद्रीय विद्यालय के समीप नगर निगम द्वारा निर्मित वाटिका एवं उसके सामने एसबीआइ शाखा से लेकर कंकड़बाग देवी स्थान तक जाने वाले मार्ग का नामकरण यदुनंदन प्रसाद मार्ग किया गया। पाटलिपुत्र कालोनी के पार्क को मिला अटल बिहारी वाजपेयी का नाम 15 दिसंबर को हुई बैठक में दीघा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पाटलिपुत्रा कालोनी स्थित पार्क को अटल पार्क नाम दिया गया है। इस पार्क में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पहले से स्थापित है। चितकोहरा पंजाबी कालोनी स्थित पार्क का नामकरण गुरु गोबिंद सिंह पार्क किया गया। वहीं, न्यू पुनाईचक स्थित पार्क को भामा शाह पार्क नाम दिया गया है, जहां दानवीर भामा शाह की प्रतिमा पूर्व से ही स्थापित है। वार्ड 44 के अंतर्गत डाक्टर कालोनी में जीवक हार्ट हास्पिटल के दक्षिण स्थित पार्क का नामकरण स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रांतिकारी चंद्रमा सिंह के नाम पर किया गया।

पटना में पूरी तरह खुले स्कूल, सुबह 9 बजे से रहेंगी क्लास

पटना. पटना जिले में स्कूल पूरी तरह खोल दिए गए हैं। 17 जनवरी से जिले के तमाम निजी और सरकारी विद्यालयों में सभी कक्षाओं की पढ़ाई सुचारू कर दी गई है। बिहार में पड़ रही प्रचंड ठंड और शीतलहर को देखते हुए पिछले दिनों स्कूलों में पाबंदी लगाई गई थी। 16 जनवरी तक प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं पर पाबंदी थी, जिसे शनिवार को हटा दिया गया। इस संबंध में जिलाधिकारी (डीएम) ने आदेश जारी किया है। पटना के डीएम त्यागराजन द्वारा शुक्रवार को जारी आदेश में कहा गया कि जिले के सभी निजी एवं सरकारी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों में सभी कक्षाओं की शैक्षणिक गतिविधियों की अनुमति दे दी गई है। हालांकि, किसी भी शिक्षण संस्थान में सुबह 9 बजे से पहले पढ़ाई नहीं हो पाएगी। स्कूलों का संचालन 9 बजे के बाद ही किया जाएगा। यह आदेश फिलहाल 20 जनवरी तक लागू रहेगा। ठंड में और राहत मिलने पर टाइमिंग में और राहत दी जाएगी। ठंड के चलते बंद किए गए थे स्कूल पटना समेत बिहार के कई जिलों में ठंड के चलते निजी एवं सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बंद की गई थी। इस महीने की शुरुआत में जिले के सभी स्कूलों में 8वीं तक के बच्चों की छुट्टी कर दी गई थी। यह पाबंदी 11 जनवरी तक जारी रही थी। इसके बाद चरणवार तरीके से विभिन्न कक्षाओं की छुट्टियां खत्म की गईं। सबसे पहले, 12 जनवरी से छठी से आठवीं तक के स्कूल खोल दिए गए, लेकिन कक्षा 5 तक पाबंदी जारी रही। बाद में 14 तारीख से कक्षा 1-5 तक के लिए स्कूल खोले गए, लेकिन प्राइमरी एवं प्री-प्राइमरी के बच्चों की छुट्टियां जारी रहीं। अब सभी कक्षाओं पर लगी रोक को हटा दिया गया है।

विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना में शामिल हुए सीएम नीतीश

पूर्वी चंपारण. पूर्वी चंपारण. पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड के कैथोलिया स्थित जानकी नगर में बने रहे Virat Ramayan Mandir में शनिवार को दुनिया के सबसे बड़े सहस्र लिंगम की स्थापना के लिए की जानेवाली पीठ पूजा का उत्साह उत्कर्ष पर है। बड़ी संख्या में शिवभक्तों की भीड़ मंदिर परिसर पर पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विराट रामायण मंदिर पहुंचकर सहस्र शिवलिंगम की स्थापना की प्रक्रिया को देखा। मंदिर परिसर का भ्रमण करने के उपरांत सीएम मोतिहारी में समृद्धि यात्रा के तहत आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना हो गए। उनके साथ दोनों डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी भी मौजूद हैं। विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की आज मोतिहारी में बन रहे विराट रामाणय मंदिर परिसर में आज स्थापना हो रही है। आचार्य किशोर कुणाल के पुत्र शायन कुणाल और उनकी पत्नी शांभवी चौधरी मुख्य यजमान हैं। सीएम नीतीश कुमार इस आयोजन में भाग लेंगे। सुबह 8 बजे से 10:30 बजे तक पीठ पूजा का कार्यक्रम संपन्न किया गया।इसके बाद हवन व शिवलिंग स्थापित करने का कार्यक्रम शुरू हुआ है। 33 फीट ऊंचे शिवलिंग को दो क्रेन से सीधा कर स्थापित किया जा रहा है।बनारस व पटना से आए आचार्य शिवलिंग स्थापना कार्यक्रम को संपन्न करा रहे हैं। वैदिक मंत्रों से वातावरण गूंज रहा है। थोड़ी देर में सीएम नीतीश कुमार भी यहां पहुंचेंगे। वे यहां 15 मिनट तक रहेंगे। इधर, विराट शिवलिंग की स्थापना को लेकर माहौल पूरी तरह शिवमय हो गया है।सुबह से विराट रामायण मंदिर परिसर में लोग पहुंचने लगे थे। सड़कों पर लोगों की भीड़ है। सभी इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने को लालायित दिख रहे हैं।वाहनों पर रोक के कारण पैदल ही लोग कार्यक्रम स्थल की ओर निकल पड़े हैं।लगातार हर हर महादेव के जयघोष से वातावरण गूंज रहा है। मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। मंदिर के चारो ओर भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। लोग शिव मंत्र जप कर रहे हैं और महिलाएं महादेव के मंगलगीत गा रही हैं। अब से कुछ ही घंटों बाद महादेव की नगरी काशी समेत विभिन्न इलाकों से आए विद्वान पीठ पूजा की विधि शुरू करेंगे। समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी और उनके पति सायण कुनाल यजमान के रूप में बैठ हुए हैं। सायण कुणाल महावीर मंदिर न्यास पटना के सचिव भी हैं। याद रहे कि 20 जून, 2023 को विराट रामायण मंदिर के निर्माण के लिए शिलापूजन का कार्य धार्मिक न्यास परिषद पटना के तत्कालीन अध्यक्ष आर्चाय किशोर कुणाल के नेतृत्व में की गई थी। तब से लगातार डेढ़ वर्षों तक प्रतिदिन ढाई सौ मजदूरों ने काम किया और जमीन के अंदर सौ फीट से कुल 3102 स्तंभ खड़े किए। नींव का कार्य पूरा करने के बाद परिसर में आधारपीठ तैयार किया गया, उसपर आज तमिलनाडु के महाबलीपुरम में बनाये गये 33 फीट ऊंचे व 33 फीट मोटे सहस्रलिंगम की स्थापना होनी है। सम्राट चौधरी ने X पोस्ट के जरिए इस कार्यक्रम को लेकर बधाई दी है। उन्होंने लिखा, "पूर्वी चंपारण के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग के स्थापना समारोह के पावन अवसर पर समस्त श्रद्धालुओं एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। यह दिव्य आयोजन हमारी आस्था, संस्कृति और सनातन गौरव को और अधिक सशक्त करेगा।"

झारखंड निकाय चुनाव में 5 से 25 लाख तक कर सकेंगे खर्च

रांची. झारखंड नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है। निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव में खर्च की अधिकतम सीमा तय कर दी है। इसमें दस लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगम में मेयर के प्रत्याशी 25 लाख और पार्षद के प्रत्याशी पांच लाख रुपए तक ही चुनावी खर्च कर पाएंगे। निर्वाचन आयोग ने जनसंख्या के आधार पर बांटे गए नगर निकायों के लिए अलग-अलग खर्च की सीमा तय की है। इसमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के लिए अलग-अलग खर्च की सीमा तय की गई है। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को चुनाव समाप्ति के 30 दिनों के अंदर अपने-अपने रिटर्निंग ऑफिसर को खर्च का हिसाब देना अनिवार्य है। प्रत्याशियों द्वारा नियुक्त निर्वाचन अभिकर्ता को प्रत्याशी के चुनाव खर्च का हिसाब देना होगा। अगर कोई जीता हुआ प्रत्याशी 30 दिनों के अंदर चुनाव खर्च का हिसाब नहीं देता है तो उसकी सदस्यता रद्द करते हुए उसे अगले तीन साल के लिए चुनाव लड़ने से भी रोक दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार कोई भी प्रत्याशी अगर सरकारी भवनों पर झंडा-बैनर या प्रचार सामग्री लगाता है तो उसपर एफआईआर दर्ज की जाएगी। वहीं निजी भवनों में झंडा-बैनर लगाने पर उस भवन मालिक से लिखित में सहमति पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है।

पारसनाथ पहाड़ के मामले में सरकार को जवाब दायर करने का निर्देश

रांची झारखंड हाइकोर्ट ने जैन धर्म के प्रमुख – धार्मिक स्थल गिरिडीह स्थित पारसनाथ – पहाड़ को जैन धर्मावलंबियों की – भावनाओं के अनुरूप संरक्षित रखने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस एमएस – सोनक व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की – सुनवाई के दौरान प्रार्थी का पक्ष सुना। खंडपीठ ने पारसनाथ पहाड़, जो इको सेंसेटिव जोन घोषित है, वहां पर होनेवाले खनन के मामले में राज्य सरकार को जवाब दायर करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 12 फरवरी की तिथि निर्धारित की। इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता खुशबू कटारूका ने पक्ष रखते हुए खंडपीठ को बताया कि गिरिडीह के जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) की रिपोर्ट में पारसनाथ पहाड़ी क्षेत्र में हो रहे माइनिंग गतिविधियों का कोई जिक्र नहीं है। वह पूरा क्षेत्र इको सेंसेटिव जोन के रूप में घोषित है। वहां पर खनन नहीं हो सकता है। इसके बावजूद वहां अवैध खनन हो रहा है। उस पर रोक लगाने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि प्रार्थी जैन संस्था ज्योत की ओर से जनहित याचिका दायर की गयी है। इसमें कहा गया है कि पारसनाथ पहाड़ जैन धर्मावलंबियों का पवित्र धार्मिक स्थल है। वहां विगत कई वर्षों से शराब व मांस की बिक्री होती है। अतिक्रमण भी किया जा रहा है। लोग यहां पिकनिक मनाने भी आते हैं।केंद्र सरकार के वन, पर्यावरण व क्लाइमेट चेंज मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की थी। मंत्रालय ने माना है कि पारसनाथ पहाड़ी पर जो भी कार्य किया जाये, वह जैन धर्मावलंबियों की भावना को ध्यान में रख कर किया जाये।

झारखंड विधानसभा के 18 से बजट सत्र के आज से विधायक पूछ सकेंगे सवाल

रांची. झारखंड विधानसभा का पंचम (बजट) सत्र 18 फरवरी से 19 मार्च तक आयोजित किया जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय ने सत्र का औपबंधिक कार्यक्रम जारी कर दिया है। इस संबंध में सभी विधायकों को सूचना भेज दी गई है। विधानसभा सदस्य शुक्रवार से ही सदन में अपने-अपने प्रश्न दर्ज करा सकेंगे, जिससे सत्र की तैयारी औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। सत्र के पहले दिन 18 फरवरी को राज्यपाल विधानसभा सत्र को संबोधित करेंगे। इसी दिन शोक प्रकाश भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद सरकार और विपक्ष के लिए सत्र की कार्यवाही क्रमशः आगे बढ़ेगी। हेमंत सोरेन सरकार 24 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026-27 का आम बजट विधानसभा में पेश करेगी, जिसे इस सत्र का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव 19 फरवरी को प्रश्नकाल के बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर सदन में वाद-विवाद होगा, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी बात रखेंगे। 20 फरवरी को धन्यवाद प्रस्ताव पर सरकार का उत्तर दिया जाएगा। इसके बाद मतदान कराया जाएगा। इसी दिन वित्तीय वर्ष 2025-26 की तृतीय अनुपूरक व्यय विवरणी भी सदन के पटल पर रखी जाएगी। 21 और 22 फरवरी को विधानसभा की कार्यवाही नहीं होगी। 23 फरवरी को तृतीय अनुपूरक व्यय विवरणी पर विस्तृत चर्चा, मतदान और संबंधित विनियोग विधेयक का उपस्थापन एवं पारण किया जाएगा। 25 फरवरी से बजट पर सामान्य वाद-विवाद की शुरुआत होगी, जिसमें विभिन्न दलों के विधायक सरकार की वित्तीय नीतियों पर अपनी राय रखेंगे। 26 और 27 फरवरी को अनुदान मांगों पर चर्चा 26 और 27 फरवरी को अनुदान मांगों पर चर्चा और मतदान प्रस्तावित है। इसके बाद 28 फरवरी से आठ मार्च तक होली और अन्य पर्व-त्योहारों को लेकर अवकाश रहेगा। नौ मार्च से 13 मार्च तक अलग-अलग तिथियों में प्रश्नकाल के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के आय-व्ययक की अनुदान मांगों पर वाद-विवाद, सरकार का उत्तर और मतदान कराया जाएगा। 14 और 15 मार्च को पुनः अवकाश रहेगा। सत्र के अंतिम चरण में 16 और 18 मार्च को अनुदान मांगों पर चर्चा के साथ-साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 के विनियोग विधेयक सदन में लाए जाएंगे। इसके बाद विभिन्न राजकीय विधेयकों और अन्य शासकीय कार्यों पर विचार किया जाएगा। सत्र के अंतिम दिन 19 मार्च को गैर-सरकारी संकल्प प्रस्तुत किए जाएंगे।