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पशुपति पारस ने किया ऐलान—महागठबंधन से नहीं गठजोड़, अब तक 33 सीटों पर उम्मीदवार

पटना राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख पशुपति कुमार पारस ने कहा कि हमने महागठबंधन के साथ गठबंधन करने की काफी कोशिश की, लेकिन गठबंधन साकार नहीं हो सका। इसीलिए हमने तय किया है कि हम चुनाव अकेले लड़ेंगे। हमलोगों ने पहले चरण की 33 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। मुझे उम्मीद है कि चुनाव के पहले चरण में हम अच्छी संख्या में सीटें जीतेंगे। पशुपति पारस ने कहा कि 2005 में हमारी पार्टी ने अकेले ही बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा था। 29 सीटों पर हमलोग जीते थे। इस बार भी हम लोगों ने महागठबंधन के साथ गठबंधन करने का प्रयास किया। लेकिन, कुछ कारण वश ऐसा नहीं हुआ। हमारा संगठन पूरे बिहार में है। हमारा दलित सेना पूरे बिहार में है। इस बार हमारी पार्टी ने फैसला किया कि हम लोग अकेले चुनाव लड़ेंगे। पहले चरण में हम लोगों ने 33 अपने कार्यकर्ताओं को प्रत्याशी बनाया। इसमें छह महिलाओं को टिकट दिया है। हम लोगों ने बिहार के जातीय समीकरण का पूरा ख्याल रखना है। मुझे उम्मीद है की प्रथम चरण के चुनाव परिणाम में हमारी संख्या काफी अच्छी रहेगी। महागठबंधन में सीट बंटवारे के सवाल पर उन्होंने कहा कि आज तक सीट बंटवारा फाइनल नहीं हुआ तो अब क्या होगा? मुकेश सहनी के साथ पिछले बार भी गलत हुआ और इस बार भी हो रहा है। हम लोगों के साथ भी ऐसा ही किया गया इसलिए हमलोग अलग हो गए। पारस ने कहा कि यह बिहार के लिए दुर्भाग्य की बात है जो सामाजिक न्याय की सरकार बननी थी, उसमें अवरोध पैदा हो गया है। यह चीज गठबंधन के लिए अच्छी बात नहीं है कुछ सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवार आमने-सामने हो गए हैं, इस सवाल पर पशुपति पारस ने कहा कि इसका मतलब स्पष्ट है कि उम्मीदवारों का चयन गलत किया गया है। एक तरफ आप गठबंधन की बात करते हो और दूसरी तरफ दोस्ताना संघर्ष की बात करते हो। लालगंज, वैशाली समेत कई जगहों पर दोस्ताना संघर्ष हो रहा है। यह गठबंधन के लिए अच्छी बात नहीं है। पशुपति पारस ने स्पष्ट कहा की कि हम लोगों को सभी जाति धर्म के लोग वोट करेंगे और हमारी जीत होगी।  

चुनावी हलचल: तेजस्वी यादव ने टिकट दिया विवादित नेता की पत्नी को

नवादा बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट ले रही है। नवादा जिले में महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि सीट बंटवारे को लेकर असंतोष बढ़ता दिख रहा है। खासकर वारिसलीगंज विधानसभा सीट पर आरजेडी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। कुख्यात बाहुबली अशोक महतो की पत्नी कुमारी अनीता को राजद ने वारिसलीगंज से अपना उम्मीदवार बनाया है। तेजस्वी यादव ने उन्हें पार्टी का सिंबल सौंपते हुए समर्थन भी दिया। वहीं, कांग्रेस ने उसी सीट से सतीश कुमार उर्फ मंटन सिंह को मैदान में उतारकर सीधा मुकाबला खड़ा कर दिया है। महागठबंधन के इस 'दोस्ताना मुकाबले' के पीछे रणनीति जो भी हो, असल में यह भीतर ही भीतर फूट की कहानी भी बयां कर रहा है। वारिसलीगंज से दोनों उम्मीदवारों का नामांकन शनिवार को होना है। नवादा सदर सीट, गोविंदपुर और रजौली विधानसभा सीटों पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। राजद के कौशल यादव गोविंदपुर और नवादा सीटों पर अपने और अपनी पत्नी के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं। वहीं, गोविंदपुर सीट पर मौजूदा विधायक मो. कामरान भी टिकट पर अड़े हुए हैं। कामरान मगध प्रमंडल से जीतने वाले अकेले मुस्लिम विधायक थे, और उन्हें किनारे किया जाना कई राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। रजौली विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक प्रकाशवीर को तेजप्रताप यादव की पार्टी जन शक्ति जनता दल ने अपना उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतार दिया है। यह कदम महागठबंधन के अंदर नई राजनीतिक हलचलों को जन्म दे रहा है। प्रकाशवीर ने हाल ही में जदयू की सदस्यता ग्रहण की थी और अब वह ब्लैकबोर्ड के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे। अब सवाल यह उठता है कि क्या महागठबंधन की यह रणनीति वोटों के बंटवारे का कारण बनेगी? क्या मतदाता इस 'दोस्ताना लड़ाई' को स्वीकार करेंगे या इसे महागठबंधन की विफलता के रूप में देखेंगे? नवादा की जनता अब इन सियासी गणनाओं का मूल्यांकन करेगी, और नतीजे तय करेंगे कि महागठबंधन की यह चाल बाजी मानेगी या मात।  

बिहार चुनाव: JMM के लिए चर्चा जारी, सुदिव्य कुमार सोनू ने तेजस्वी यादव से मुलाकात की

रांची झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव को उन सीटों के बारे में सूचित कर दिया है, जिन पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) बिहार में चुनाव लड़ने को इच्छुक है। घाटशिला सीट पारंपरिक रूप से झामुमो का गढ़ रही है बिहार विधानसभा के लिए दो चरणों में, छह नवंबर और 11 नवंबर को मतदान होना है तथा मतगणना 14 नवंबर को होगी। सोनू ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने हाल में पटना में एक बैठक के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा की थी, जिसमें झामुमो की भागीदारी से ‘इंडिया' गठबंधन को मिलने वाले संभावित लाभों को रेखांकित किया गया था, विशेष रूप से मतों के एकीकरण के संदर्भ में। मंत्री ने कहा कि उन्होंने छह अक्टूबर को राजद के साथ हुई गठबंधन की बैठक में ये मुद्दे उठाए थे। मंत्री ने बताया कि उसी बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राजद नेता तेजस्वी यादव आपस में इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। घाटशिला में 11 नवंबर को होने वाले उपचुनाव के बारे में सोनू ने कहा कि यह सीट पारंपरिक रूप से झामुमो का गढ़ रही है। मालूम हो कि घाटशिला उपचुनाव मतदान 11 नवंबर को होगा जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी। इस निर्वाचन क्षेत्र में 2.56 लाख मतदाता हैं, जिनमें 1.31 लाख महिला मतदाता हैं। एक अधिकारी ने बताया कि कुल 231 स्थानों पर 300 मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे।  

हिन्दुस्तान बिहार समागम: अमित शाह का जोरदार संदेश, 20 साल की कामयाबी दिखाती है कि जंगलराज नहीं लौट सकता

पटना होम मिनिस्टर अमित शाह ने हिन्दुस्तान बिहार समागम में कई अहम सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने घुसपैठिया, बिहार के विकास, जंगलराज, चुनाव आयोग के SIR समेत कई मसलों पर बात की। उन्होंने सीट बंटवारे को लेकर उपजे मतभेदों पर कहा कि एनडीए में कोई विवाद नहीं है। अमित शाह ने कहा कि हम राजनीतिक दल हैं और सभी की अपनी मांग होती है, लेकिन जब एक बार सीटें तय हो जाती हैं तो फिर सब मिलकर काम करने लगते हैं। राहुल गांधी की ओर से वोट चोरी के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि जो देश का नागरिक नहीं है, वह कैसे तय करेगा कि सरकार किसकी होगी। देश का पीएम विदेशी नागरिक थोड़ी तय करेंगे। अमित शाह ने प्रधान संपादक शशि शेखर से बातचीत में कहा, 'यदि चुनाव आयोग SIR के जरिए घुसपैठियों को निकालता है तो उन्हें तकलीफ क्या है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने घुसपैठ होने देकर अपना वोट बैंक बढ़ाया है। हम भाजपा के रूप में यही मांग रखते हैं कि पूरे देश में SIR होना चाहिए और चुन-चुनकर घुसपैठियों को निकाला जाए।' उनसे पूछा गया कि घुसपैठ रोकने का काम तो केंद्र सरकार का ही है और आप कितने सफल हुए हैं? इस सवाल पर अमित शाह ने कहा कि बंगाल और झारखंड में हमारी सरकार नहीं है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि बॉर्डर कोई सीधी सड़क नहीं है। वहां बहुत सी जटिलताएं होती हैं। मौसम की मार भी होती है। नदी के बहाव, पर्वत, बर्फबारी जैसी स्थितियों में 24 घंटे की निगरानी करना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि जब कोई घुसपैठिया एंट्री करता है तो किसी गांव में जाता है। ऐसी स्थिति में वहां का स्थानीय प्रशासन कैसे निगरानी करता है और उन्हें बाहर क्यों नहीं निकलता। यह जरूरी सवाल है। नई पीढ़ी के तमाम लोगों को तो जंगलराज याद ही नहीं है, जिसकी आप बात करते हैं। इस पर अमित शाह ने कहा कि मैं उसे ही याद दिलाने यहां आया हूं। 20 साल से हम यहां हैं तो क्या हुआ? इसका जवाब है कि हमने सारे गड्ढे भरे हैं। पहले 10 साल में यहां की कानून व्यवस्था सही हुई है। नरसंहार, फिरौती, कत्लेआम का दौर समाप्त हुआ है। इसके बाद हमने सड़कें बनानी शुरू कीं। सामाजिक न्याय के तहत नए युग की शुरुआत हुई। फिर अगले 10 साल में कई बड़े-बड़े निर्माण हुए हैं। गंगा में 10 नए पुल बन रहे हैं और 4 बन चुके हैं। पटना से गया जाने में मुझे साढ़े 6 घंटे लगे थे, जब मैं पिताजी का श्राद्ध करने गया था। अब यह टाइम दो घंटे का ही है। अमित शाह ने बताया- अगले 10 साल में बिहार में क्या करेंगे अब जो 10 साल आएंगे, उसमें हम बिहार को औद्योगिक राज्य बनाएंगे। एआई का हब बनाएंगे। बिहार में पानी की कमी नहीं है और मेहनती लोग हैं। यहां के लोग बुद्धिमत्ता में भी बहुत आगे हैं। बिहार में पूर्णिया, दरभंगा और पटना में एयरपोर्ट बन गए हैं। हमने साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये खर्च करके बिहार की सड़कें मजबूत की हैं। बिहार में बिजली के 4 कारखाने लगे हैं और राज्य अब विद्युत आपूर्ति में आत्मनिर्भर बन चुका है। 20 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन हो गया है। हमारी कोशिश है कि कपड़े बदलकर या चेहरा बदलकर जंगलराज फिर से बिहार में ना आ जाए। 'मैंने तो घुसपैठिया बोला है, हिंदू या मुसलमान तो कहा नहीं' उन्होंने कहा कि बिहार में जमीन की कमी रही है। जमीन अधिग्रहण में इसके चलते समस्याएं रही हैं। ऐसी स्थिति में हम बिहार को एआई का हब बनाना चाहते हैं। हम एआई की तकनीक में तैयार युवाओं को रोजगार दिलाने के प्रयास करेंगे। बिहार में बाढ़ के चलते तबाही मचती रही है, लेकिन नरेंद्र मोदी ने 2024 के बजट में कोसी के लिए हजारों करोड़ का बजट दिया है। इससे 50 हजार एकड़ से ज्यादा भूमि सिंचित भी होगी और राज्य बाढ़ से पूरी तरह से मुक्त हो जाएगा। वहीं ध्रुवीकरण के आरोप की बात आई तो अमित शाह ने कहा कि मैंने ऐसा कुछ कहां कहा। मेरा शब्द सिर्फ घुसपैठिया है। मैंने हिंदू या मुसलमान घुसपैठिया नहीं कहा है। दिक्कत विपक्ष की है, जो कह रहा है कि मुस्लिम घुसपैठिया है तो उसे रहने दीजिए। यही सांप्रदायिकता है और यही ध्रुवीकरण की राजनीति है। हम तो ऐसा कुछ नहीं कर सकते।  

2 से 3 की हो गई कड़ी टक्कर, JLKM ने घाटशिला उपचुनाव में किया ऐलान

घाटशिला घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा और झामुमो के बाद झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने रामदास मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाया है। बता दें कि पहले भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन और झामुमो प्रत्याशी सोमेश सोरेन के बीच कांटे की टक्कर थी, लेकिन अब झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने मैदान में अपना उम्मीदवार उतारा है तो यह मुकाबला और टक्कर का हो गया है। देखना ये है कि तीनों में से किसके सिर ताज सजेगा और किसे हार मिलेगी। मालूम हो कि नयी दिल्ली में 15 अगस्त को रामदास सोरेन के निधन के बाद से यह सीट रिक्त हो गई थी। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बीते बुधवार को पूर्व शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के बेटे सोमेश चंद्र सोरेन को घाटशिला विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन को इस सीट से चुनाव मैदान में उतारा है। बाबूलाल सोरेन ने 2024 का विधानसभा चुनाव इस सीट से लड़ा था, लेकिन वह रामदास सोरेन से 22,464 मतों के अंतर से हार गये थे।  

पर्यटन प्रेमियों के लिए खुशखबरी: झारखंड में टाइगर सफारी की तैयारी शुरू

रांची झारखंड अपनी पहली ‘टाइगर सफारी' परियोजना शुरू करने की तैयारी कर रहा है और यह राज्य के वन्यजीव पर्यटन तथा वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रस्तावित ‘टाइगर सफारी' परियोजना की विस्तृत प्रस्तुति की शुक्रवार शाम रांची स्थित अपने सरकारी आवास में समीक्षा की। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पलामू बाघ अभयारण्य के बाहर स्थित लातेहार जिले के पुटुवागढ़ क्षेत्र में विकसित करने का प्रस्ताव है।  

कारोबारी पर हमला, रांची पुलिस की बड़ी कार्रवाई—6 गिरफ्तार

रांची  झारखंड के रांची के पुंदाग इलाके में सीमेंट-छड़ कारोबारी राधेश्याम साहू पर हुए फायरिंग मामले में पुलिस ने संदेह के आधार पर 6 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इनमें से दो रांची के बिल्डर और जमीन कारोबारी बताए जा रहे हैं। पुलिस हिरासत में लिए लोगों से पूछताछ कर रही है और हमलावरों को पकड़ने के लिए आसपास के जिलों में तलाशी अभियान भी चला रही है। पीड़ित कारोबारी राधेश्याम साहू के बेटे सज्जन कुमार ने नगड़ी थाना में इस मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई है। उनकी शिकायत में दो नामजद अभियुक्त पुरुषोत्तम कुमार और शशि शेखर हैं। सज्जन के अनुसार, उनके पिता का इन दोनों के साथ ढाई एकड़ जमीन को लेकर लंबा विवाद चल रहा था, जो अब न्यायालय में लंबित है। यह विवाद इस हिंसक घटना की वजह बताया जा रहा है। सज्जन कुमार ने पुलिस को बताया कि करीब दो महीने पहले पटना निवासी शशि शेखर ने उनके पिता को धमकी दी थी कि यदि यह मामला जल्दी सुलझाया नहीं गया तो उनकी जान को खतरा रहेगा। फायरिंग के समय राधेश्याम साहू के स्टाफ सदस्य संजय सिन्हा, नागेन्द्र दुबे और सोमरा उरांव भी मौके पर मौजूद थे, जिन्होंने घटना का तुरंत पुलिस को सूचना दी। रांची पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले के खुलासे के लिए कई टीमें बना कर हमलावरों की खोज में जुटी हुई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आसपास के जिलों में भी पुलिस दल भेजे गए हैं, ताकि अपराधियों को पकड़कर न्याय दिलाया जा सके।  

राहुल-प्रियंका की जोड़ी उतरेगी बिहार रण में, कांग्रेस ने जारी की 40 स्टार प्रचारकों की सूची

पटना बिहार में विधानसभा चुनाव प्रचार का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को बिहार चुनाव के प्रथम चरण के मतदान के लिए अपने 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पार्टी सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा इसमें शामिल हैं। इनके अलावा कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री,उपमुख्यमंत्री समेत विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष भी बिहार में प्रचार की कमान संभालेंगे। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को भी इसमें जगह दी गई है। इनके अलावा कन्हैया कुमार, अखिलेश प्रसाद सिंह, रंजीता रंजन, राजेश राम, शकील अहमद खान, मदन मोहन झा, कृष्णा अल्लावरु के भी नाम हैं। ये हैं स्टार प्रचारक केसी वेणुगोपाल, सुखविंदर सिंह सुखु, अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, दिग्विजय सिंह, अधीर रंजन चौधरी, मीरा कुमार, सचिन पायलट, रणदीप सिंह सुरजेवाला, सैयद नासिर हुसैन, चरणजीत सिंह चन्नी, गौरव गगोई, तारिक अनवर, मोहम्मद जावेद, मनोज राम, अलका लांबा, पवन खेड़ा, इमरान प्रतापगढ़ी, शकील अहमद, जीतू पटवारी, सुखदेव भगत, राजेश कुमार राम, शकील अहमद खान, मदन मोहन झा, अजय राय, जिग्नेश मेवानी, अनिल जयहिंद, राजेंद्र पाल गौतम, फुरकान अंसारी, उदय भानु चिब, सुबोध कांत सहाय का नाम भी स्टार प्रचारकों में है। बिहार में दो चरणों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। 6 नवंबर को पहले चरण जबकि दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होंगे। इसमें महागठबंधन के किस पार्टी के कितने उम्मीदार मैदान में उतरेंगे इस पर क्लियर पिक्चर अभी तक नहीं आई है। कई सीटों पर दोस्ताना संघर्ष है। दरअसल महागठबंध में सीट का पेंच अभी तक फंसा है। शनिवार को पटना में कांग्रेस पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के बाद बिहार में कांग्रेस की ताकत बढ़ी है। इसके मद्देनचह पार्टी अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। लेकिन आरजेडी कांग्रेस की मांग पर सहज और सहमत नहीं है। वैशाली की दो सीटों पर कांग्रेस और राजद ने अपने उम्मीदवारों को टिकट देकर नामांकन भी करवा दिया है।  

बिहार में जातीय गणित गर्माया: कांग्रेस ने उतारे 19 सवर्ण, RJD ने यादवों पर जताया भरोसा

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए से मुकाबले के लिए महागठबंधन ने अपने सामाजिक समीकरण को विस्तार देने की कोशिश की है। महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस की अब तक की घोषित कैंडिडेट लिस्ट में में इसके प्रयास दिखते हैं। दोनों दलों ने अपने परंपरागत वोटरों के साथ ही सर्वसमाज का भी पूरा ख्याल रखा है। उधर, वामदलों ने भी अपने-अपने आधार वोट बैंक को तवज्जो दी है। कांग्रेस ने 8 भूमिार मेत 19 सवर्णों को टिकट दिया है। वहीं, राजद ने आधे से ज्यादा उम्मीदवार यादव समाज से उतारे हैं। बिहार में सवर्ण, दलित और मुसलमान कांग्रेस के परंपरागत वोटर रहे हैं। अपनी खोयी जमीन वापस लाने के प्रयास में जुटी कांग्रेस पार्टी ने सवर्ण, मुसलमान तथा दलित समाज से आने वाले नेताओं पर भरोसा जताया है। सवर्णों को खुले मन से टिकट देने के साथ ही इस बार पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग को भी तरजीह दी है। कांग्रेस पांच मुस्लिमों को मैदान में उतारा है। वहीं, राजद ने अपने जनाधार वोट मुस्लिम और यादव का पूरा ख्याल रखा है। पार्टी ने 51 सीटों में से 28 यादवों को चुनावी मैदान में उतारा है। 6 मुस्लिमों को भी टिकट दिया गया है। वामदल और वीआईपी ने भी समीकरण साधकर टिकट दिए हैं। महागठबंधन इस बार अति पिछड़ा वर्ग को साधने में जुटा है। टिकट बंटवारे में इसकी झलक दिख रही है। बिहार में करीब 36 फीसदी आबादी वाले ईबीसी वर्ग को एनडीए खासकर नीतीश कुमार की जदयू का वोट बैंक माना जाता है। महागठबंधन शुरू से ही इस वोट बैंक में सेंध लगाने की फिराक में है। राहुल गांधी ने पटना, राजगीर सहित कई जगहों पर इस वर्ग के साथ संवाद भी किया है। यही कारण है कि कांग्रेस के अलावा राजद, वीआईपी और वाम दलों ने भी अति पिछड़ा वर्ग को टिकट देकर उन्हें भी तरजीह दी है। हालांकि, अभी महागठबंधन में 40 फीसदी सीटों पर प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा बाकी है। कांग्रेस ने अभी तक 50 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की है। इनमें सवर्णों की बात करें तो पार्टी ने सबसे अधिक 8 भूमिहार उतारे हैं। इसके अलावा 6 ब्राह्मण और 5 राजपूतों को टिकट दिया है। यानी कुल 19 सवर्ण को टिकट दिया है। वहीं, पिछड़ा वर्ग से 10 नेताओं को उम्मीदवार बनाया है। इनमें चार यादव, एक कुर्मी, एक गोस्वामी, एक कुशवाहा और तीन वैश्य हैं। 6 अति पिछड़ा वर्ग के नेताओं को टिकट दिया है, जबकि 5 मुस्लिमों को मैदान में उतारा गया है। कांग्रेस ने अनुसूचित जाति की 9 सीटों पर दलित प्रत्याशी उतारे हैं। एक अनुसूचित जनजाति को टिकट दिया है। पिछले चुनाव को देखें तो कांग्रेस ने 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। तब पार्टी के सबसे अधिक 34 पर सवर्ण उम्मीदवार थे। 10 मुस्लिम और 13 सीटों पर दलितों को टिकट दिया था। 10 पिछड़ा वर्ग और तीन अति पिछड़ा वर्ग को जगह दी थी। वामदलों ने ओबीसी को सर्वाधिक 15 टिकट दिए लेफ्ट पार्टियों ने 29 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। इनमें सर्वाधिक 15 सीटों पर टिकट पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को दी गई है। सीपीआई माले ने 19, सीपीआई ने 6 और सीपीएम ने 4 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। ये तीनों दल इंडिया गठबंधन (महागठबंधन) के साथ चुनाव मैदान में उतरे हैं। वाम दलों ने अति पिछड़ा वर्ग को एक, दलित को आठ, अल्पसंख्यक समाज के दो उम्मीदवारों को पार्टी सिंबल सौंपा है। सवर्ण समाज में भूमिहार से दो और राजपूत से एक उम्मीदवार बनाया है। सुपौल स्थित पिपरा विधानसभा सीट भाकपा माले के कोटे में आया है, इस सीट पर दूसरे चरण में चुनाव होना है। इस सीट के लिए अबतक प्रत्याशी की घोषणा नहीं हुई है। वर्ष 2020 चुनाव में वामदलों की 29 सीटों में से चार पर अगड़ी जाति के प्रत्याशी थे। तीन मुस्लिम, तीन यादव और शेष दलित और अति पिछड़ा समुदाय के थे।  

घुसपैठिया और पेट दर्द का सवाल: अमित शाह ने चुनावी सवालों पर की चेतावनी

पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सियासत गर्म है। कांग्रेस ने चुनाव के ऐलान से पहले ही एसआईआर के खिलाफ 'वोट चोरी' वाली मुहिम चलाई और चुनाव आयोग के साथ ही बीजेपी को घेरने की पूरी कोशिश की। हिन्दुस्तान के बिहार समागम में पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह से जब 'वोट चोरी' के मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों पर सवाल किया गया तो उन्होंने देश की सबसे पुरानी पार्टी को खूब सुनाया। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, मैंने राहुल जी के वक्तव्य को ठीक से देखा ही नहीं लेकिन वह खुद ही अपना मुद्दा भूल गए हैं। बिहार की जनता ने ही भुला दिया है। 15 दिन से वह बिहार में वोट चोरी पर नहीं बोल रहे हैं। शायद उन्हें कोई सलाह दी गई होगी। लेकिन क्या बिहार की सत्ता का फैसला कोई घुसपैठिया करेगा? लोकतंत्र की मूल बात चुनाव है और उसमें भी मूल मतदाता सूची है। जो देश का मतदाता नहीं है वह कैसे तय करेगा कि कौन प्रदेश का मुख्यमंत्री होगा। क्या मिर्ची लगी है लोगों को? उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग एसआईआर करके अवैध घुसपैठियों को मतदाता सूची से निकालता है तो उनके पेट में दर्द क्या है? उन्होंने घुसपैठ होने देकर वोट बैंक क्रिएट किया है। हम चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत करते हैं कि पूरे देश में एसआईआर होना चाहिए और घुसपैठियों को डिलीट करना चाहिए। गृह मंत्री से जब पूछा गया कि घुसपैठ रोकने के लिए केंद्र के पास क्या सॉलिड योजना है? इसपर शाह ने कहा, जिन्होंने बांग्लादेश, कश्मीर का बॉर्डर देखा होगा। वहां कोई रोड नहीं है। वहां घने जंगल हैं, ऊंची पहाड़ियां हैं. नदी नाले हैं। सब जगह फेंस लगाना मुश्किल नहीं है और ना ही 24 घंटे निगरानी हो पाती है। बारिश के दिनों में तो स्थिति और भी खराब हो जाती है। दिल्ली के लुटियन में बैठकर बात करना आसाना है। घुसपैठिया घुसकर सबसे पहले कहां जाता है? क्या थाने को पता नहीं चलता, पटवारी को पता नहीं चलता? लेकिन बंगाल में कहा जाता है कि उनका लाल जाजम बिछाकर स्वागत करिए। उन्होंने बंगाल की जनता को भी कहा कि अगर बीजेपी की सरकार बनी तो वहां भी घुसपैठ नहीं होने देंगे।