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सोमेश सोरेन ने विधायक पद की शपथ ली, जानें क्या बोले दिवंगत रामदास सोरेन के बेटे

रांची झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता और घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के नवनिर्वाचित विधायक सोमेश चंद्र सोरेन में आज शुक्रवार को शपथ ली। विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने उन्हें शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद सोमेश ने कहा कि वे अपने पिता के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित हैं और क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देंगे। वहीं, झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 दिसंबर से शुरू होगा और 11 दिसंबर तक चलेगा। सूत्रों के मुताबिक शीतकालीन सत्र से पूर्व हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है और मंत्रिमंडल विस्तार में घाटशिला उप चुनाव जीतने वाले सोमेश सोरेन को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। इसको लेकर विचार विमर्श किया जा रहा है। बता दें कि घाटशिला में झामुमो प्रत्याशी सोमेश सोरेन ने बीजेपी प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन को 38524 मतों से पराजित किया। तीसरे स्थान पर जेएलकेएम प्रत्याशी रामदास मुर्मू रहे। सोमेश सोरेन को कुल 104794 वोट मिले। सोमेश ने अपने पिता के 2024 के चुनावी रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। 2024 के विधानसभा चुनाव में रामदास सोरेन ने बीजेपी उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन को 22 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था, लेकिन 11 नवंबर 2025 को हुए उपचुनाव में सोमेश सोरेन ने यह अंतर बढ़ाकर 38 हजार से अधिक कर दिया। इस बार JMM उम्मीदवार सोमेश सोरेन और JLKM प्रत्याशी रामदास मुर्मू को 2024 की तुलना में अधिक वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन के वोटों में गिरावट दर्ज की गई। ज्ञात हो कि झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन से यह सीट खाली हो गई थी। वैसे तो 13 प्रत्याशियों ने घाटशिला विधानसभा उपचुनाव लड़ा, लेकिन मुख्य मुकाबला फिलहाल सत्तारूढ़ झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन और भाजपा के बाबूलाल सोरेन के बीच था।  

चांडाल कहने वाले चाचा को चिराग का जवाब—‘आपकी हर बात को मानता हूँ आशीर्वाद’

पटना केंद्रीय मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने अपने चाचा पशुपति पारस द्वारा बिहार चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत पर बधाई देने पर प्रतिक्रिया दी है। भतीजे चिराग ने कहा कि उनके चाचा पारस ने कभी उन्हें गाली दी थी, चांडाल कहा था, तब भी उनकी बातें आशीर्वाद की तरह थीं क्योंकि वे बड़े हैं। अब वे सही में बधाई दे रहे हैं तो उनकी शुभकामनाएं सिर आंखों पर है। चिराग पासवान ने शुक्रवार को पटना स्थित लोजपा-आर के कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान ये बातें कहीं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर अपने चाचा एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस पर निशाना भी साधा। चिराग ने पारस पर लोजपा के साथ ही रामविलास पासवान के गैर राजनीतिक संगठन दलित सेना को भी हड़पने का आरोप लगाया। पारस ने चिराग को दी दो बार बधाई राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के मुखिया पशुपति कुमार पारस ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद भतीजे चिराग पासवान को दो बार बधाई दी। यह सियासी गलियारों में चर्चा का विषय भी बना। पारस ने बीते रविवार को सोशल मीडिया पर दो घंटे के भीतर 2 पोस्ट साझा किए थे। पहले में उन्होंने एनडीए के सभी घटक दल के नेताओं को एक साथ जीत की बधाई दी। फिर दूसरे पोस्ट में उन्होंने अपने भतीजे चिराग पासवान को अलग से बिहार चुनाव में जीत पर बधाई दी थी। बता दें कि लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी में टूट हो गई थी। चाचा पशुपति पारस ने 4 अन्य सांसदों को अपने साथ लेकर अलग गुट बना लिया था और नरेंद्र मोदी सरकार में वे मंत्री बन गए थे। चिराग अलग-थलग पड़ गए थे। बाद में पारस वाले गुट का नाम रालोजपा हुआ और चिराग के गुट वाली लोजपा (रामविलास) पार्टी बनी। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले चिराग पासवान की एनडीए में वापसी हुई और पारस साइडलाइन कर दिए गए। चिराग की पार्टी को एनडीए में 5 सीटें मिलीं और सभी पर उनके प्रत्याशी जीते। चिराग पासवान केंद्र में मंत्री बन गए। वहीं, रालोजपा ने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। फिर बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पारस ने एनडीए छोड़ने का ऐलान किया। उनकी महागठबंधन में जाने की चर्चा भी चली लेकिन बात नहीं बन पाई। फिर अकेले विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन एक भी सीट पर रालोजपा जीत नहीं दर्ज कर पाई।  

नेशनल कुश्ती में भाईयों की डबल जीत, दोनों ने दिलाया स्वर्ण पदक

भोजपुर बड़हरा थाना क्षेत्र के नथमलपुर गांव के दो सगे भाइयों ने राष्ट्रीय स्तर पर गांव का नाम रोशन किया है। नथमलपुर निवासी सामू सिंह के पुत्र साहिल कुमार और नमन सिंह ने उत्तराखंड के देहरादून स्थित परेड ग्राउंड में आयोजित नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में अपने-अपने वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। दोनों भाइयों की इस शानदार उपलब्धि से न केवल नथमलपुर बल्कि पूरे भोजपुर जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। जानकारी के अनुसार, गुरुवार दोपहर करीब दो बजे जब दोनों खिलाड़ी गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों ने गाजे-बाजे, फूल-मालाओं और उत्साहपूर्ण नारों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। गांव की सड़कों पर जश्न का माहौल नजर आया और छोटे-बड़े सभी लोग इन प्रतिभाशाली भाइयों को देखने और सम्मान देने के लिए उमड़ पड़े। साहिल और नमन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच रिजवान, माता-पिता, दादा और बड़े पापा को दिया। दोनों ने कहा कि परिवार और कोच की प्रेरणा और सहयोग के कारण ही वे यह मुकाम हासिल कर सके हैं। ग्रामीणों ने भी दोनों खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए प्रशासन से खेल प्रतिभाओं को विशेष प्रोत्साहन देने की मांग की।  

बिहार: शपथ ग्रहण के 24 घंटे भीतर विपक्षी दल के नेता की गोली मारकर हत्या

मोतिहारी मोतिहारी में बिहार विधानसभा चुनाव समाप्त होते ही एक बार फिर अपराधियों का तांडव शुरू हो गया है। जिले के दरपा थाना क्षेत्र के तिनकोनी गांव में शुक्रवार की अहले सुबह वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) के प्रखंड अध्यक्ष कामेश्वर सहनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के अनुसार, सुबह करीब 7 बजे कामेश्वर सहनी शौच कर लौटने के बाद अपने दरवाजे पर हाथ धो रहे थे। उसी दौरान बाइक पर सवार दो अज्ञात अपराधी पहुंचे और उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक कामेश्वर सहनी वीआईपी पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष थे और उनका पूर्व में आपराधिक इतिहास भी रहा है। जानकारी के मुताबिक, वे पहले नक्सली के रूप में भी जाने जाते थे और उनके ऊपर आधा दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। हत्या की जानकारी मिलते ही दरपा थाना पुलिस सहित आसपास के कई थानों की टीम मौके पर पहुंच गई और जांच शुरू कर दी। रक्सौल के एसडीपीओ मनीष आनंद भी घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की तफ्तीश में जुटे हुए हैं। मोतिहारी के प्रभारी एसपी विनय तिवारी ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा।

झारखंड पर्यटन को बढ़ावा: नेतरहाट वनों में ‘जंगल सफारी’ का शुभारंभ

लातेहार झारखंड सरकार ने राज्य में पर्यावरण के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से लातेहार जिले के खूबसूरत नेतरहाट वनों में ‘जंगल सफारी' बृहस्पतिवार को शुरू की। राज्य पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने इस पहल का उद्घाटन किया और कहा कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। कुमार ने कहा, ‘‘पर्यटक अब नेतरहाट के जंगलों, वन्यजीव तथा यहां की सुंदरता को और करीब से महसूस कर पाएंगे।'' नेतरहाट 3,622 फुट की ऊंचाई पर जंगलों में बसा है और रांची से करीब 157 किलोमीटर की दूरी पर है। सफारी के लिए 300 रुपये प्रति व्यक्ति दर निर्धारित की गई है और 16 सीट वाली गाड़ी के लिए 4,100 रुपये जबकि 10 सीट वाली गाड़ी के लिए 3,000 रुपये तय किए गए हैं। लोग दिन में दो बार सफारी का आनंद उठा सकेंगे। पहली सफारी सुबह 5:30 से 10 बजे तक चलेगी, वहीं दूसरी सफारी का समय दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक होगा।  

धनबाद में ED ने की रेड, कारोबारी ने रोकने के लिए छोड़े कुत्ते; थैलों में मिले भारी नोट और ज्वेलरी

रांची  केन्द्रीय जांच एजेंसी ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय (Directorate of Enforcement/ED) ने झारखंड (Jharkhand) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) में कोयला माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई में बड़े खुलासे हुए हैं. 21 नवंबर की सुबह करीब साढ़े पांच बजे ही इस सर्च ऑपरेशन के दौरान झारखंड के 18 लोकेशन पर दबिश दी गई, जिसके बाद कोयला माफियाओं के बीच यह खबर चर्चा का विषय बन गया. काफी समय के बाद इतने बड़े स्तर पर कोयला माफियाओं के खिलाफ सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया गया है. कोयला माफियाओं के यहां से बड़ी मात्रा में नकदी और ज्‍वेलरी बरामद की गई हैं. जांच एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि झारखंड के 18 लोकेशन और उसी वक्त पश्चिम बंगाल के करीब 24 से अधिक लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई प्रारंभ की गई. इन कोयला माफियाओं का आपस में काफी करीबी संबंध बताया जा रहा है, जिसका आपस में कई राज्यों में अपना नेटवर्क है. इसके मार्फत वो अपना काला साम्राज्य चलाते हैं. इसी काले नेटवर्क को तोड़ने के लिए जांच एजेंसी ईडी द्वारा बड़े पैमाने पर दो राज्यों में सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया गया है. एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि जांच के शुरुआती चरण में ही काफी महत्वपूर्ण सबूतों और इलेक्ट्रोनिक एविडेंस को कई लोकेशन से इकठ्ठा किए गए हैं. इसके आधार पर अब जांच का दायरा काफी आगे बढ़ने वाला है. धनबाद में भी एक्‍शन झारखंड की कोयला राजधानी के तौर पर चर्चित धनबाद के कई कोल माफियाओं के यहां सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है. धनबाद में लाल बहादुर सिंह का नाम भी शामिल है. बड़े स्तर के कोयला कारोबारी के यहां जब जांच एजेंसी की टीम पहुंची तब आसपास काफी संख्या में लोग इकठ्ठा होने लगे. लिहाजा पहले से ही मुस्तैद जांच एजेंसी की टीम अर्धसैनिक बल के जवानों की संख्या में और ज्यादा बढ़ोतरी कर दी, ताकि कानून व्यवस्था बरकरार रहे. सूत्र बताते हैं कि धनबाद स्थित देव विला इलाके में पहले भी अन्य एजेंसी द्वारा दबिश दी गई थी, लेकिन आरोपियों के इशारे पर काफी संख्या में लोग इकट्ठे हो जाते थे और जांच एजेंसी की टीम को परेशान कर उन्हें प्रभावित करने का प्रयास करते थे. इस बार ईडी की टीम मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के साथ लोकेशन पर पहुंची और अपने स्तर पर जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है. हर तरफ मची खलबली जांच एजेंसी के सूत्र की मानें तो 21 नवंबर को जब ये सर्च ऑपरेशन स्टार्ट हुआ तब कोल माफियाओं के बीच खलबली मच गई. ऐसा माना जाता है कि उनके कनेक्शन कई राजनीतिक हस्तियों सहित अन्य प्रभावशाली लोगों के साथ हैं. ईडी द्वारा कोलकाता के सॉल्टलेक जैसे प्राइम लोकेशन में रहने वाले आरोपी नरेंद्र खड़का (Narendra Kharka ) के कोलकाता, दुर्गापुर सहित कई लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया गया. इसके साथ ही अन्य कोल माफियाओं के हावड़ा, दुर्गापुर, आसनसोल, पुरुलिया, वर्धमान में भी सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया गया. सूत्र बताते हैं कि पश्चिम बंगाल में चर्चित कोल माफिया (कृष्ण मुरारी, युधिष्ठिर घोष, परवेज आलम सिद्दकी) के आवास सहित अन्य लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया गया. ED टीम को रोकने के लिए कारोबारी ने छोड़े पालतू कुत्ते प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध कोयला खनन और परिवहन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में झारखंड और पश्चिम बंगाल में 40 से अधिक जगहों पर एक समन्वित और बड़ी कार्रवाई शुरू की है. कोयला कारोबार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सबसे पहले आज धनबाद में बड़ी कार्रवाई की. ईडी की टीम ने तड़के सुबह कोल कारोबारी एल.बी. सिंह के आवास और उनसे जुड़े प्रतिष्ठानों पर एकसाथ छापेमारी शुरू की. जानकारी के अनुसार, ईडी की टीम ने धनबाद में देव बिला क्षेत्र सहित कुल 18 ठिकानों पर दबिश दी है.  एक अधिकारी ने बताया कि ये सर्च ऑपरेशन कोयला चोरी और स्मगलिंग के कई बड़े मामलों से जुड़े हैं, जिसमें अनिल गोयल, संजय उद्योग, एलबी सिंह और अमर मंडल के मामले शामिल हैं. इन मामलों में कुल मिलाकर कोयले की बड़ी चोरी और चोरी शामिल है, जिससे सरकार को सैकड़ों करोड़ का भारी फाइनेंशियल नुकसान हुआ है. पने पालतू कुत्तों को छोड़ दिया. कुत्ते परिसर में घूम रहे हैं और ईडी अफसरों को घर में घुसने से रोके हुए हैं, जबकि एल.बी. सिंह घर के अंदर से बाहर नहीं निकल रहे हैं. यह घटना ईडी की कार्रवाई में बाधा डालने के प्रयास को दर्शाती है. ईडी के अधिकारी अब कानूनी और सुरक्षात्मक उपायों के तहत परिसर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि छापेमारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके. बंगाल में भी छापेमारी इसके अलावा, ईडी कोलकाता, दुर्गापुर, पुरुलिया और हावड़ा जिलों में अवैध कोयला खनन, गैर-कानूनी ट्रांसपोर्टेशन और कोयले के स्टोरेज से संबंधित मामलों में 24 स्थानों पर तलाशी ले रहा है. इस कार्रवाई के तहत जिन लोगों से जुड़ी जगहों को कवर किया जा रहा है, उनमें नरेंद्र खरका, अनिल गोयल, युधिष्ठिर घोष, कृष्ण मुरारी कयाल और अन्य शामिल हैं. यह कार्रवाई झारखंड और पश्चिम बंगाल में सक्रिय कोयला माफियाओं के खिलाफ ईडी की व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है. 

नई बिहार सरकार में बीजेपी ने जेडीयू को पीछे छोड़ा, मंत्रियों की संख्या में हासिल बढ़त

 नई दिल्ली बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए सरकार बन गई है. नीतीश कुमार ने सीएम, तो सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली. नीतीश कैबिनेट में दोनों डिप्टी सीएम सहित 26 मंत्री बनाए गए हैं, जिसमें जेडीयू से ज्यादा बीजेपी कोटे से मंत्री बने हैं. इस तरह मंत्रिमंडल के नंबर गेम में फिलहाल बीजेपी आगे निकल गई है. क्या मंत्रियों को विभागों के बंटवारे में भी बीजेपी अपनी गठबंधन सहयोगी जेडीयू पर भारी पड़ेगी या फिर नीतीश कुमार का रहेगा होल्ड? नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार में फिलहाल 26 मंत्री बनाए गए हैं. बीजेपी कोटे से 14 मंत्री, जेडीयू से 8 मंत्री, एलजेपी (आर) के 2, आरएलएम और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा से एक-एक मंत्री बने हैं. ऐसे में कैबिनेट के गठन में जेडीयू से करीब दोगुना मंत्री बीजेपी के बनाए गए हैं. हालांकि, नीतीश सरकार में 9 मंत्री पद अभी भी खाली है, जिन्हें बाद में भरा जाएगा. बिहार में एनडीए सरकार के शपथ ग्रहण के बाद अब बारी मंत्रालय के विभागों के बंटवारे की है. नीतीश सरकार में कौन सा मंत्रालय किस मंत्री को मिलेगा, इस पर लोगों की निगाहें लगी हुई हैं. खासकर गृह, वित्त, ऊर्जा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण जैसे मंत्रालय को हाईवेट माना जाता है. बीजेपी मंत्रियों के नंबर गेम में जिस तरह से आगे निकली है, क्या उसी तरह से विभागों के बंटवारे में भी उसका वर्चस्व बरकरार रहेगा? अध्यक्ष पद के लिए जेडीयू और बीजेपी के बीच खींचतान कई दिनों तक चलती रही. बाद में स्पीकर पोस्ट बीजेपी के हिस्से में जाने की बात सामने आई है. माना जा रहा है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार को स्पीकर बनाया जा सकता है, क्योंकि उन्होंने गुरुवार को मंत्री पद की शपथ नहीं ली. अब बारी मंत्रालय के विभागों के बंटवारे की है. ऐसे में सबसे ज्यादा निगाहें गृह और वित्त मंत्रालय पर है. नीतीश क्या गृह मंत्रालय अपने पास रखेंगे नीतीश कुमार बिहार की सत्ता जब से संभाल रहे हैं, तब से गृह मंत्रालय अपने पास रखे हुए हैं. विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद से ही गृह विभाग को लेकर बीजेपी और जेडीयू दोनों ही दावे कर रही हैं. 2024 में नीतीश महागठबंधन से नाता तोड़कर दोबारा से एनडीए के साथ आए थे तो उस समय शपथ ग्रहण के पांच दिनों के बाद तक विभागों का बंटवारा नहीं हो सका था. बीजेपी की लाख कोशिश के बावजूद नीतीश कुमार गृह विभाग अपने पास रखने में कामयाब रहे थे. गृह मंत्रालय के जरिए ही नीतीश कुमार ने सुशासन बाबू वाली अपनी छवि बनाने में कामयाब रहे. नीतीश कुमार इसी यूएसपी के सहारे आरजेडी के जंगल राज के तिलिस्म को तोड़ा. कानून-व्यवस्था,पुलिस प्रशासन और भ्रष्टाचार नियंत्रण जैसे मामलों पर सीधी पकड़ रखने के लिए गृह विभाग को छोड़ना नहीं चाहते हैं. बीजेपी की नजर लंबे समय से इसी गृह विभाग पर है, जिसे लेकर 2024 में जेडीयू के साथ कई दिनों तक बार्गेनिंग करती रही. उस समय बात नहीं बनी, लेकिन अब देखना है कि इस बार गृह मंत्रालय किसे मिलता है. स्वास्थ्य, वित्त और शिक्षा मंत्रालय पर नजर गृह मंत्रालय ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य, वित्त, शिक्षा और लोक निर्माण जैसे हाईवेट मंत्रालय पर भी लोगों की नजर है. नीतीश कुमार 2005 से ही गृह मंत्रालय अपने पास रखते हैं तो वित्त मंत्रालय बीजेपी कोटे से बनने वाले डिप्टीसीएम को देती रही है. पहले सुशील मोदी के पास रहा और उसके बाद तारकिशोर प्रसाद और फिर सम्राट चौधरी को मिला. हालांकि, महागठबंधन सरकार के दौरान वित्त मंत्री का जिम्मा जेडीयू के विजय चौधरी के पास रहा. 2024 में नीतीश दोबारा से एनडीए में वापसी किए तो माना जा रहा है था कि वित्त जेडीयू के खाते में रहेगा और बदले में शिक्षा बीजेपी के पास रहेगी. बीजेपी ने वित्त विभाग को प्राथमिकता दी और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को वित्त मंत्रालय मिला था. ऐसे में वित्त मंत्रालय पर बीजेपी और जेडीयू दोनों की नजर है, लेकिन सियासी पैटर्न देखें तो बीजेपी के हिस्से में जा सकता है. बीजेपी-जेडीयू के पास कौन-कौन मंत्रालय थे बिहार की एनडीए सरकार में बीजेपी के पास वित्त, नगर विकास और आवास, स्वास्थ्य, खेल, पंचायती राज, उद्योग, पशु एवं मत्सय संसाधन,विधि, सहकारिता, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, पर्यटन, कृषि, पथ निर्माण, भूमि सुधार, गन्ना उद्योग, खान एवं भूतत्व, श्रम संसाधन, कला, संस्कृति और युवा, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण जैसे विभाग थे. वहीं, जेडीयू के पास फिलहाल सामान्य प्रशासन, गृह, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन, जल संसाधन, संसदीय कार्य, भवन निर्माण और परिवहन, शिक्षा, सूचना और जन संपर्क, ऊर्जा, योजना और विकास, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन, ग्रामीण कार्य, अल्पसंख्यक कल्याण, ग्रामीण विकास, समाज कल्याण, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्रालय थे. जीतनराम मांझी की पार्टी को सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग मिला था. कैबिनेट में किसे मिलेगा कौन सा विभाग नीतीश कुमार ने अपनी सरकार में जेडीयू कोटे से भी पुराने और अनुभवी चेहरों को मंत्री बनाया है जबकि बीजेपी ने अपने कई पुराने चेहरे को ड्राप करके उनकी जगह नए फेस को मंत्री बनाया है. ऐसे में हाई प्रोफाइल मंत्रालय पर जेडीयू अपना दावा करेगी. अभी तक के पैटर्न के लिहाज से राजस्व, सहकारिता, पशु एवं मत्स्य संसाधन, विधि, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण,उद्योग, पर्यटन और पथ निर्माण बीजेपी को मिल सकता है. जेडीयू के खाते में कृषि, खान एवं भूतत्व, जल संसाधन, संसदीय कार्य, ऊर्जा, योजना एवं विकास, विज्ञान एवं प्रावैधिकी, तकनीकी शिक्षा, ग्रामीण विकास, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण जैसे मंत्रालय मिल सकते हैं. हालांकि, बीजेपी चाहती है कि गृह और शिक्षा उसके पास आ जाए, इसके बदले वह स्वास्थ्य और वित्त जैसे विभाग छोड़ने को तैयार है. ऐसे में देखना होगा कि बिहार के बदले हुए माहौल में कौन मंत्रालय का जिम्मा किसे मिलता है?

‘आपकी सरकार–आपके द्वार’ की शुरुआत आज , मुख्यमंत्री हेमंत करेंगे कार्यक्रम का शुभारंभ

रांची आज से झारखंड में 'आपकी सरकार-आपके द्वार' कार्यक्रम की शुरुआत हो रही है जो कि 15 दिसंबर तक चलेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पलामू से ‘आपकी सरकार-आपके द्वार’ कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। इसके चलते रांची जिले के सभी 305 पंचायतों और नगर निगम क्षेत्र के 53 वार्डों में कल से शिविर लगने शुरू हो जाएंगे। यहां आम जनता की समस्याओं को सुना और निपटाया जाएगा। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर प्रत्येक पंचायत स्तर पर शिविरों का आयोजन योजनाबद्ध तरीके से किया जाएगा। इसमें सरकारी योजनाओं से संबंधित आवेदन लिए जाएंगे और पात्र लाभुकों को सीधे लाभ पहुंचाने की कोशिश होगी। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, मंजूनाथ भजंत्री संबंधित सभी पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अधिक से अधिक लोगों को इस कार्यक्रम से जोड़ें और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। उपायुक्त ने कहा कि पंचायत और गांव स्तर पर शिकायतों के त्वरित निष्पादन और योजनाओं से नए लाभुकों को जोड़ना प्रशासन की प्राथमिकता है। उपायुक्त ने रांची जिले के सभी लोगों से अपील की है कि वे अपने नजदीकी शिविरों में पहुंचे और आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी, बैंक पासबुक या अन्य पहचान पत्र आदि साथ लेकर आएं, ताकि उन्हें योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके। साथ ही नोडल अधिकारियों को प्रतिदिन अपने-अपने केंद्रों पर उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। आज इन पंचायतों और वार्डों में होगा शिविर चतरा पंचायत-अनगड़ा, खुखरा पंचायत -बेड़ो, कांची पंचायत-बुण्डू, छापर पंचायत-बुढ़मू, पंडरी पंचायत-चान्हो, गड़गांव पंचायत-ईटकी, उरुगुटू एवं उपरकोनकी-कांके, हुल्सु पंचायत-लापुंग, बंझीला पंचायत-मांडर, नारो पंचायत-नगड़ी, हरदाग पंचायत-नामकुम, जयडीहा पंचायत-ओरमांझी, राहे पंचायत-राहे, तारुप पंचायत-रातू, हलमाद पंचायत-सिल्ली, बारेन्दा पंचायत-सोनाहातू, अमलेशा पंचायत-तमाड़, वार्ड-1 (सीएमपीडीआई स्कूल के सामने), वार्ड-2 (एदलहातू जोगो पहाड़)

अंचल कार्यालयों में बैठने के लिये सीएससी वीएलई को सर्वे भवन में दिया जा रहा प्रशिक्षण

पटना, राज्य में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ऑनलाइन सेवाओं को आम नागरिकों के और करीब लाने के लिए विभाग द्वारा सीएससी के साथ समन्वय स्थापित कर उनके वीएलई को प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण सभी जिलों के वीएलई को विभिन्न बैचों में बांटकर दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद ये वीएलई अंचल कार्यालयों में बैठेंगे तथा नियत दर पर आमलोगों को सभी ऑनलाइन राजस्व सेवाओं की प्राप्ति में मदद करेंगे। कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के ये वीएलई सीधे अंचल कार्यालयों में स्थापित काउंटरों पर बैठकर आम जनता के लिये राजस्व विभाग के सलाहकार के रूप में भी कार्य करेंगे। इसी उद्देश्य से गुरुवार को राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, शास्त्रीनगर में वीएलई के चौथे बैच के दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव ने की चौथे बैच की शुरूआतः वीएलई के चौथे बैच की शुरुआत करते हुए विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि ऑनलाइन सेवाएं पूरी तरह उपलब्ध होने के बावजूद शिकायतों का जारी रहना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सभी राजस्व सेवाओं को ऑनलाइन करने का उद्देश्य जनता को सुगमता से विभाग की सेवायें पहुंचाना था ताकि उन्हें विभिन्न कार्यालयों तथा पदाधिकारियों के पास चक्कर ना लगाना पड़े। लेकिन आज भी राज्य की बड़ी आबादी राजस्व तथा भूमि संबंधी मामलों में ऑनलाइन प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता और भय से ग्रसित है। आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी न होने से भी समस्या बनी रहती है। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए वीएलई को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि पहली बार वीएलई को अंचल कार्यालय में बैठने की दी गई जिम्मेदारी विभागीय ऑनलाइन सेवाओं की आसान उपलब्धता की दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा कि अब वीएलई सिर्फ सेवा प्रदाता ही नहीं, विभाग के सलाहकार की भूमिका में रहेंगे। इसलिए उन्हें विभागीय प्रावधानों व प्रक्रियाओं की स्पष्ट समझ होनी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोग सीधे आपके पास आएंगे। यदि आप सही सलाह और सटीक कार्य करेंगे तो काम समय पर होगा और शिकायतें स्वतः कम होंगी। इससे विभाग के प्रति विश्वास बढ़ेगा और अंचलों में बेवजह की भीड़ घटेगी। प्रशिक्षण सत्र में विशेष कार्य पदाधिकारी अनुपम प्रकाश ने विभाग की संरचना की जानकारी दी। उन्होंने महत्वपूर्ण सेवा की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला। निदेशालय के आईटी मैनेजर कुणाल सिंह ने विभागीय ऑनलाइन सेवाओं तथा आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत पर प्रस्तुति देकर सभी वीएलई को समझाने की कोशिश की। कार्यक्रम का संचालन राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य दिव्य राज गणेश ने किया। स्वागत-भाषण करते हुए निदेशक जे. प्रियदर्शिनी ने कहा कि विभाग की यह नई व्यवस्था ऑनलाइन सेवाओं की उपलब्धता, दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसके लागू होने से लोगों को अपने ही अंचल कार्यालय में तेज, सरल और भरोसेमंद ऑनलाइन सेवाएं मिल सकेंगी।

अपराध पर रांची पुलिस की कड़ी कार्रवाई, एक दिन में 183 आरोपी पकड़े गए

रांची झारखंड की राजधानी रांची में बीते बुधवार देर रात पुलिस ने अभियान चलाया। इस अभियान का उद्देश्य अपराध नियंत्रण एवं सार्वजनिक शांति बनाए रखना था। यह अभियान अड्डेबाजी और सड़क पर शराब पीने वालों के खिलाफ चलाया गया। इस अभियान के तहत जिले के लगभग सभी थाना क्षेत्रों में देर रात तक व्यापक छापेमारी की गई। पुलिस ने अरगोड़ा, बरियातू, नामकुम, कांके, बिरला मैदान, विद्यानगर, नरकोपी, लालपुर, हरमू समेत 70 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान 75 से अधिक स्थानों पर छापेमारी करते हुए सड़क व सार्वजनिक स्थलों पर बेवजह जमावड़ा बनाकर अड्डेबाजी, हुड़दंग या शराब पीते 183 लोगों को हिरासत में लिया गया। यह लोग सड़कों या सार्वजनिक जगहों पर बैठकर नशा और अड्डेबाजी कर रहे थे। हालांकि पुलिस ने पूछताछ के बाद इन्हें छोड़ दिया, लेकिन कड़ी हिदायत भी दी गई। अधिक शराब पीने वाले युवकों की मेडिकल जांच कराई गई और उनसे बांड भरवाया गया। एसएसपी राकेश रंजन ने अभियान के बाद कहा कि आगे भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे और अगली बार अड्डेबाजी या सड़क पर शराब पीते पाये गए तो सीधे जेल भेजा जाएगा। राकेश रंजन ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने आसपास की संदिग्ध गतिविधियों, खासकर अड्डेबाजी या अवैध शराब सेवन की सूचना पुलिस को दे।