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तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने ली जान: गुमला में नदी में गिरने से 30 वर्षीय युवक की डूबकर मौत

गुमला झारखंड के गुमला जिले में गुमला-छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बीते बुधवार सुबह एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर सीलम नदी में गिर गई। इस हादसे में लोहरदगा थाना क्षेत्र के तिगरा गांव निवासी 30 वर्षीय जुनैद अंसारी की डूबने से मौत हो गई। गुमला: झारखंड के गुमला जिले में गुमला-छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बीते बुधवार सुबह एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर सीलम नदी में गिर गई। इस हादसे में लोहरदगा थाना क्षेत्र के तिगरा गांव निवासी 30 वर्षीय जुनैद अंसारी की डूबने से मौत हो गई। हादसे की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पानी में तैरता देखकर उसे सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। स्कॉर्पियो में मृतक जुनैद अंसारी के साथ चालक अब्दुल रशीद और शमशाद आलम भी सवार थे। दोनों हादसे से सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। अब्दुल रशीद ने बताया कि स्कॉर्पियो के सीलम नदी के पास पुल के निकट एक सामने से आ रहे ट्रक को बचाने की कोशिश करते हुए अचानक कार पर नियंत्रण खो गया और वाहन पुल से नीचे नदी में जा गिरा। दुर्घटना के समय तीनों छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के टीन टांगर गांव से वापस लौट रहे थे। हादसे के बाद अब्दुल रशीद ने फुर्ती से ड्राइविंग सीट की खुली खिड़की से बाहर निकलकर खुद को बचाया और शमशाद आलम को भी बाहर निकाला। उन्होंने तब तक जलेब जुनैद को खोजने की कोशिश की, लेकिन वह गाड़ी के पीछे फंसा हुआ था और नजर नहीं आया। पुलिस को सूचना देने के बाद रायडीह थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और नदी में तैरते हुए शव को देखा। जुनैद अंसारी विवाहित थे और उनके तीन छोटे बच्चे हैं। हादसे की खबर मिलते ही उनका परिवार अस्पताल पहुंच गया। पुलिस ने घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है ताकि हादसे के कारणों का पता लगाया जा सके।  

भीड़ हिंसा का मामला: कोर्ट ने 5 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई

जमशेदपुर झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले की एक अदालत ने 2017 के भीड़ हिंसा के मामले में 5 लोगों को दोषी करार देते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह घटना 18 मई, 2017 को बागबेड़ा थाना क्षेत्र के नागाडीह में हुई थी। आरोपियों ने बच्चा चोर के संदेह में विकास वर्मा, उनके भाई गौतम वर्मा, उनकी दादी रामसखी देवी और गंगेश गुप्ता नामक व्यक्ति की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। घटना के संबंध में आठ मामले दर्ज किए गए थे और उनमें से एक मामले में 25 सितंबर को पांच लोगों को दोषी ठहराया गया। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश-1 विमलेश कुमार सहाय की अदालत ने मामले में 20 आरोपियों को बरी कर दिया। इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में 29 लोगों को नामजद किया गया था जिनमें से चार अब भी फरार हैं। अदालत ने राजाराम हांसदा, गोपाल हांसदा, रेंगो पूर्ति, तारा मंडल और सुनील सरदार को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 341 (गलत तरीके से रोकना), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 338 (जीवन को खतरे में डालने वाले कृत्य से गंभीर चोट पहुंचाना), 117 (अपराध के लिए उकसाना) और 149 (समान उद्देश्य से गैरकानूनी जमावड़ा) के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाने के अलावा प्रत्येक पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।  

झारखंड में जन्मे दो नवजातों का अवैध सौदा, स्वास्थ्यकर्मी बर्खास्त, सात आरोपियों पर FIR

गुमला झारखंड के गुमला ज़िले में एक महीने से भी कम उम्र के दो नवजात शिशुओं को बेच दिए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. हालांकि बाद में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए उन दोनों बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया. इस वारदात के बारे में पुलिस ने बुधवार को जानकारी दी. पुलिस ने बताया कि इस अवैध कृत्य में शामिल होने के आरोप में सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. जिनमें से पांच की पहचान हो गई है, जबकि दो अज्ञात लोग शामिल हैं. उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने अधिकारियों को रविवार को सामने आए मामले की जांच के निर्देश दिए हैं. जिल के रायडीह थाने के प्रभारी निरीक्षक संदीप कुमार यादव ने एक न्यूज़ अजेंसी को बताया कि दोनों नवजात शिशुओं को दो पक्षों को बेचा गया था. बाद में पुलिस ने एक बच्चा रांची से और दूसरा गुमला से बरामद किया है. इंस्पेक्टर संदीप कुमार यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि मामला अवैध गोद लेने से संबंधित है, क्योंकि गोद लेने के कानून के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था और स्वास्थ्य अधिकारियों ने कथित तौर पर माता-पिता को शिशुओं को सौंपने के लिए राजी किया था. पुलिस अधिकारी ने कहा कि नवजात शिशुओं की खरीद-फरोख्त में कथित रूप से शामिल सात लोगों के खिलाफ मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज की गई है. उन्होंने बताया कि उनमें से पांच की पहचान हो गई है और दो लोग अज्ञात हैं. एसएचओ यादव ने कहा कि पुलिस ने पूरे मामले जांच शुरू कर दी है. गुमला के सिविल सर्जन शंभू नाथ चौधरी ने बताया कि जांच में रायडीह के बांसडीह की सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, शंख मोड़ की सहिया पार्वती देवी और ब्लॉक टीम ट्रेनर (बीटीटी-ग्रामीण) सुमन कुजूर की संलिप्तता सामने आई है. उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक मामले में उनके और संबंधित पक्षों के बीच एक-एक लाख रुपये का लेन-देन पाया गया. उप-मंडल अधिकारी की अध्यक्षता वाली एक समिति के समक्ष अपनी संलिप्तता स्वीकार करने के बाद तीनों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. चौधरी ने बताया कि शिशुओं को गुमला स्थित बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को सौंप दिया गया है. सिविल सर्जन शंभू नाथ चौधरी ने दावा करते हुए बताया कि एक शिशु का जन्म गुमला के रायडीह स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ, जबकि दूसरे शिशु का जन्म छत्तीसगढ़ के लोरो घाटी स्थित एक निजी अस्पताल में एक अविवाहित महिला से हुआ. बाद में मां ने ब्लॉक आदिवासी कल्याण अधिकारी से संपर्क किया और शिशु को बेच दिया. सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष नेम्हंती तिग्गा ने बताया कि दोनों नवजात शिशु चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ हैं. उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूसी द्वारा परिवार के सदस्यों को आमंत्रित किया जाएगा और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.

सीट बंटवारे पर BJP की रणनीति: बिहार में NDA अपनाएगी 2020 वाला रास्ता

पटना 6 और 11 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए होने वाले मतदान का परिणाम 14 नवंबर को सामने आ जाएगा। मतलब, अब चुनाव परिणाम आने में भी 36 दिन शेष ही हैं। आमने-सामने की लड़ाई लड़ रहे दोनों गठबंधनों में सीटों पर ही बात बनती नहीं दिख रही है, प्रत्याशियों का नाम तो उसके बाद घोषित होगा। गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी के बिहार प्रदेश कार्यालय में गहमागहमी रही। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बयानों ने उस गहमागहमी को गरमागरमी जैसा बनाए रखा। लेकिन, अंदर की बात यह है कि एनडीए की सीट शेयरिंग योजना ट्रैक से उतरी नहीं है। लोकसभा चुनाव में ही भाजपा ने कर ली थी तैयारी बिहार भाजपा के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान पटना में हैं। वह घटक दलों के मन की बातें उनके मन से निकालने में कामयाब रहे हैं। मांझी-चिराग के मन की बात भले सामने आई, लेकिन भाजपा को भी पता है कि केंद्रीय मंत्री की कद्दावर कुर्सी छोड़ चिराग पासवान और जीतन राम मांझी बाहर जाने वाले नहीं हैं। उपेंद्र कुशवाहा तो किनारे होकर तमाशा देख रहे हैं। चिराग पासवान की पार्टी के पास मौजूदा विधानसभा में कोई विधायक नहीं। जीतन राम मांझी के पास चार विधायक हैं। उपेंद्र कुशवाहा के पास भी कोई विधायक नहीं। मांझी-चिराग या कुशवाहा को लोकसभा चुनाव के समय भी अंदाजा बता दिया गया था कि बिहार विधानसभा चुनाव के समय सीटों पर कैसे बात होगी। चिराग और मांझी को इसी कारण पसंदीदा, मजबूत और काम लायक मंत्रालय दिए गए थे। रही बात उपेंद्र कुशवाहा की तो, उनके लिए एनडीए के पास कई ऑफर हैं। बिहार में हुई बात, लेकिन रास्ता तो दिल्ली में निकलेगा बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं। भाजपा-जदयू अब तक लगभग बराबर 100-100 के गणित पर है। चिराग पावान न्यूनतम 35 और जीतन राम मांझी कम-से-कम 15 सीटें चाह रहे हैं। इस तरह से बच रही है तीन सीटें उपेंद्र कुशवाहा के लिए। जदयू 110-105  की मांग से उतर कर 101-100 पर आकर टिकेगा ही। भाजपा 105 की तैयारी के बीच 100 के लिए भी मन बनाए बैठी है। भाजपा की पटना में बैठकों से कोई अंतिम नतीजा निकलना भी नहीं था। अब फैसला दिल्ली में होना है। ऐसे में भाजपा के रणनीतिकारों ने 2020 मॉडल को ही अंतिम उपाय माना है। क्या है भाजपा का अंतिम रास्ता, जो 2020 में अपनाया था 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग की पार्टी से भाजपा के कई कद्दावर नेता उतरे थे, लेकिन उस समय निशाना जदयू था। इस बार वैसी परिस्थिति नहीं है। सीएम नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बीच उस समय वाली दूरी अभी नहीं है। भाजपा ने उस समय एनडीए में रही मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी में अपने प्रत्याशी दिए थे। मुकेश सहनी खुद चुनाव नहीं जीत सके थे, इसलिए उनके चार में से तीन विधायक अपनी मूल पार्टी भाजपा में चले गए। एक का निधन हो गया था। मौजूदा परिस्थिति में जदयू-भाजपा अपने खाते में 100-100 सीटों को रखती है तो जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा-सेक्युलर को जीतने वाली 8 सीटों के साथ मजबूत स्थिति वाली दो-तीन सीटें देगी। उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मोर्चा को पांच-आठ सीटों के बीच फाइनल किया जाएगा। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 22-25 सीटें देने की बात अंतिम तौर पर चल रही है। जब यह सब फाइनल होने लगेगा तो इन दलों से अपने कुछ मजबूत प्रत्याशी भी शिफ्ट करने की बात होगी। देखना यही है कि इस बात पर चिराग कितना राजी होते हैं।मांझी या कुशवाहा के लिए भाजपा की पंचायत का यह रास्ता फायदेमंद ही होगा, क्योंकि ऐसे प्रत्याशियों के पास भाजपा का कैडर भी होगा।

तेजस्वी यादव का वादा: नई सरकार में 20 दिन के भीतर रोजगार कानून लागू करेंगे

 पटना बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन के सारे दल तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का चेहरा मान रहे हैं, हालांकि कांग्रेस की ओर से खुलकर सीधे शब्दों में यह बात अब तक नहीं कही गई है। इस बीच सीटों के बंटवारे को लेकर जिच भी सामने आ रही है और मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम प्रस्तावित किए जाने पर कांग्रेस ने भी अपने लिए ऐसे पद की मांग अनौपचारिक रूप से रख दी है। लेकिन, इन बातों पर कोई जवाब देने की जगह तेजस्वी यादव ने राजद नेताओं के साथ बैठ मीडिया से बात की और बड़ा एलान कर दिया। उन्होंने एलान किया कि उनकी सरकार बनते ही 20 दिनों के अंदर कानून बनाकर हर घर में एक सरकारी नौकरी दी जाएगी। 'पिछले 17 महीनों के काम से मैं संतुष्ट नहीं' तेजस्वी यादव ने कहा, 'पिछले 17 महीनों के काम से मैं संतुष्ट नहीं हूं। बिहार की जनता अब बदलाव चाहती है। लोगों को सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि आर्थिक न्याय भी मिलेगा। तेजस्वी यादव ने जो वादा किया है, उसे वो जरूर पूरा करेंगे। आज की सरकार तेजस्वी यादव की दिखाई राह की नकल कर रही है। पिछले 20 साल से लोग पक्के मकान का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन हम सरकार बनने के 20 दिनों के अंदर ही इसके लिए कानून बनाएंगे।' 'शुरू करेंगे सरकारी नौकरी देने की योजना' तेजस्वी यादव ने कहा, "हमारी सरकार बनने पर हर घर से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाएगी। इससे लोगों की हर तरह की परेशानियां खत्म होंगी। सरकार बनने के बाद बिहार में उद्योग और कारोबार को बढ़ावा दिया जाएगा। हम खेती और डेयरी से जुड़े उद्योग भी शुरू करेंगे। बिहार के विकास और खुशहाली के मौके पर ‘जश्न-ए-बिहार’ मनाया जाएगा, जिसमें लोगों को सरकारी नौकरियां दी जाएंगी।” उन्होंने आगे कहा, “हम अधिनियम (कानून) बनाकर हर परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की योजना शुरू करेंगे।” 'मेरा धर्म बिहारी होना है' तेजस्वी यादव ने कहा, “जैसे ही चुनाव आया, यह सरकार बेरोजगारी भत्ता देने लगी, यानी रोजगार देने की बात ही नहीं कर रही है। मेरा कर्म बिहार है और मेरा धर्म बिहारी होना है, इसे साबित करने के लिए हमें सिर्फ पांच साल का मौका चाहिए। हम बिहार को एक सच्ची, ईमानदार और परफेक्ट सरकार देंगे। अपनी नीयत, सेवा और जिम्मेदारी का सबूत हम 17 महीनों में दे चुके हैं। पांच लाख नौकरियां देकर हमें खुशी है, लेकिन मैं अभी संतुष्ट नहीं हूं।”

सोरम नदी की तेज़ी ने मचाया तबाही, शीतलपट्टी पुल गिरा और ग्रामीणों में भय

सीतामढ़ी बिहार के सीतामढ़ी जिले के बथनाहा शीतलपट्टी गांव के पास सोरम नदी पर बना पुल बुधवार सुबह पानी के तेज बहाव में पूरी तरह ध्वस्त हो गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों की बढ़ गई परेशानी दरअसल, तेज धार में पुल का एक हिस्सा पहले झूलने लगा, फिर कुछ ही देर में पूरा ढांचा पानी में समा गया। पुल के टूटने से आसपास के कई गांवों का संपर्क राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-22 से पूरी तरह कट गया है। इसके चलते आवागमन बाधित हो गया है और ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैल जाने से खेत और घर जलमग्न हो गए हैं। विशेषकर स्कूल जाने वाले बच्चों और बीमार लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बथनाहा सीओ अमरदीप कुमार ने बताया कि अधवारा समूह की नदियों में जलस्तर अचानक बढ़ने से पुलिया बह गई है। प्रशासन ने प्रभावित इलाके में निगरानी बढ़ा दी है और वैकल्पिक मार्ग से आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं।  

ED को BMW तुरंत लौटाने का आदेश, हेमंत सोरेन को मिली बड़ी राहत

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित भूमि घोटाला मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली स्थित प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) अपीलीय ट्रिब्यूनल ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को उनकी लग्जरी बीएमडब्ल्यू कार तुरंत छोड़ने का निर्देश दिया है। यह कार ईडी ने 29 जनवरी 2024 को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान सोरेन के दिल्ली स्थित आवास से जब्त की थी। ईडी ने उस समय हेमंत सोरेन के खिलाफ भूमि घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत छापेमारी की थी, जिसमें बीएमडब्ल्यू कार के अलावा कई दस्तावेज और अन्य सामग्री भी बरामद की गई थी। इसके बाद सोरेन ने जब्त की गई संपत्ति को छोड़ने के लिए पीएमएलए ट्रिब्यूनल में अपील दायर की थी। ट्रिब्यूनल के सदस्य वी.के. माहेश्वरी ने आदेश में कहा कि ईडी बीएमडब्ल्यू कार को तत्काल रिलीज करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि अगर भविष्य में कोई नया सबूत सामने आता है, तो ईडी को कानून के अनुसार कार्रवाई करने की स्वतंत्रता होगी। ट्रिब्यूनल ने माना कि मामले में कार जब्त रखने का कोई ठोस आधार वर्तमान में मौजूद नहीं है। ट्रिब्यूनल ने यह भी याद दिलाया कि इस मामले में जब्त की गई अन्य सभी वस्तुएं, जिनमें डिजिटल उपकरण भी शामिल थे, पहले ही 22 मई 2025 के आदेश के तहत हेमंत सोरेन को लौटा दी गई थीं। मौजूदा अपील केवल बीएमडब्ल्यू कार को लेकर थी, जिसका अब निपटारा कर दिया गया है।  

जेल प्रशासन पर बड़ी कार्रवाई: हजारीबाग जेपी कारा के 12 कर्मी निलंबित/बर्खास्त

हजारीबाग झारखंड के हजारीबाग स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा में लापरवाही और अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बाद सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। जेल अधीक्षक की अनुशंसा पर जेलर समेत छह सरकारी कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि संविदा पर कार्यरत छह भूतपूर्व सैनिक कक्षपालों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हाल ही में एक पूर्व जेल सिपाही की गिरफ्तारी के बाद हुई विभागीय जांच में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। जांच में यह पाया गया कि कारा के अंदर बाहरी व्यक्तियों को अनधिकृत रूप से प्रवेश की अनुमति दी जा रही थी। कुछ कर्मियों पर बंदियों को अनुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने के भी आरोप लगे हैं। प्रशासन ने निलंबित कर्मियों के विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश जारी किए हैं। वहीं बर्खास्त संविदाकर्मियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है। इस कार्रवाई के बाद जेल प्रशासन में भारी हड़कंप मच गया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 'जेल व्यवस्था में किसी भी प्रकार की ढिलाई, अनुशासनहीनता या भ्रष्टाचार को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' राज्य कारा निदेशालय ने घटना के बाद सभी जिलों के जेलों को सतर्क किया है और सुरक्षा मानकों के सख्त पालन का निर्देश जारी किया है।  

जीतन राम मांझी का अल्टीमेटम: सम्मानजनक सीटें नहीं तो चुनाव नहीं

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बुधवार को बड़ा धमाका करते हुए कहा कि अगर उनकी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) को 15 सीटें नहीं दी गईं, तो वे चुनाव नहीं लड़ेंगे. मांझी ने साफ शब्दों में कहा कि वे और उनकी पार्टी खुद को “अपमानित” महसूस कर रहे हैं और अब इस अपमान का घूंट और नहीं पिएंगे. दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए जीतन राम मांझी ने कहा कि “हम अपने आप को अपमानित महसूस कर रहे हैं. हमारे लोगों को मतदाता सूची नहीं दी गई, हमें बैठकों में नहीं बुलाया गया. ये अपमान का घूंट हम कब तक पिएंगे? मैंने हमेशा एनडीए का साथ दिया है, तो एनडीए का फर्ज बनता है कि हमें अपमानित महसूस न होने दें” मांझी ने कहा कि उनकी पार्टी 15 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, ताकि उनमें से कम से कम 8-9 सीटों पर जीत हासिल की जा सके. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर 15 सीटें नहीं मिलीं तो हम चुनाव नहीं लड़ेंगे.” “चिराग से नहीं आपत्ति, पर सम्मान चाहिए” जीतन राम मांझी ने यह भी कहा कि उन्हें चिराग पासवान से कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है. लेकिन, एनडीए में उनकी पार्टी के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है, वह उन्हें और उनके समर्थकों को आहत कर रहा है. उन्होंने कहा कि वे हमेशा गठबंधन के प्रति वफादार रहे हैं, लेकिन अब वे चाहते हैं कि उनकी पार्टी को “सम्मानजनक स्थान” मिले. हालांकि मांझी ने इशारों ही इशारों में निशाना साधते हुए कहा कि जिनके पास एक सीट भी नहीं है वो बड़ी-बड़ी डिमांड कर रहे हैं. हमारे पास विकल्प खुले हैं: मांझी मांझी ने आगे कहा कि उनकी पार्टी के पास सभी विकल्प खुले हैं. “70-80 सीटें ऐसी हैं जहां हमारे बीस हजार वोट पक्के हैं. हम मान्यता प्राप्त पार्टी हैं और छह फीसदी से ज्यादा वोट ला सकते हैं। लेकिन यह हमारा अंतिम विकल्प होगा. हम नहीं चाहते कि हालात वहां तक पहुंचें.” मांझी ने बताया कि 10 अक्टूबर को पटना में पार्टी की पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला लिया जाएगा. उन्होंने संकेत दिया कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई, तो वह चुनाव भी नहीं लड़ेंगे. NDA के लिए मुश्किल स्थिति एनडीए के अंदर पहले ही चिराग पासवान की सीट डिमांड को लेकर पेच फंसा हुआ है, अब मांझी की यह सख्त बयानबाजी बीजेपी के लिए नई चुनौती लेकर आई है. बीजेपी मांझी को पुराने फॉर्मूले के तहत 7 सीटें देने की पेशकश कर चुकी है, लेकिन मांझी पुराने फॉर्मूले को “अपमानजनक” बताते हुए 15 सीटों पर अड़े हुए हैं.

जेब हमेशा खाली? चाणक्य के 5 सरल मंत्रों से बनाएं अपनी बचत की आदत

नौकरीपेशा लोगों की अकसर खुद से यह शिकायत रहती है कि महीना खत्म होने से पहले ही उनकी जेब के पैसे खत्म हो जाते हैं। पूरे महीने मेहनत करके कमाया हुआ धन, खर्चों की कटौती करने के भी नहीं बच पाता है। अगर आपका हाल भी कुछ ऐसा ही है तो चाणक्य नीति में आपकी परेशानी का हल मौजूद है। चाणक्य नीति में धन के प्रबंधन और बचत के लिए कई उपयोगी सिद्धांत बताए गए हैं, जो आज के समय में भी बेहद असरदार हैं। धन की बचत से जुड़े चाणक्य के ये 5 सिद्धांत व्यक्ति को को आर्थिक सुरक्षा देकर सम्मानित जीवन जीने में भी मदद करते हैं। आय का एक हिस्सा अवश्य बचाएं चाणक्य के अनुसार, जिस तरह बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही छोटी-छोटी बचत से धन संचय होता है। व्यक्ति को चाहिए कि अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा, चाहे वह कितना भी कम क्यों ना हो, नियमित रूप से बचत के लिए अलग निकालकर रखें। यह धन भविष्य में आपातकाल या बड़े लक्ष्यों को पूरा करने के काम आता है। अनावश्यक खर्चों से बचें चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति अपनी आय से अधिक खर्च करता है, वह शीघ्र ही दरिद्र हो जाता है। चाणक्य नीति के अनुसार, दिखावे के लिए अनावश्यक खर्च करने से बचना चाहिए। केवल जरूरी और उपयोगी चीजों पर ही धन खर्च करें। उदाहरण के लिए ब्रांडेड कपड़ों या लग्जरी वस्तुओं पर खर्च करने के बजाय, गुणवत्तापूर्ण और किफायती विकल्प चुनें। धन का विवेकपूर्ण निवेश करें धन को केवल वहां उपयोग करें, जहां सुरक्षित रहते हुए वह अधिक बढ़ सके। चाणक्य की इस सलाह का मतलब है कि धन को बेकार एक जगह न पड़ा रहने दें, बल्कि जोखिम का आकलन करते हुए उसे ऐसी जगह निवेश करें जहां वह समय के साथ बढ़े, जैसे व्यापार, संपत्ति, या सुरक्षित निवेश योजनाएं। म्यूचुअल फंड, या सोने में निवेश धन को बढ़ाने का सुरक्षित तरीका हो सकता है। भविष्य के लिए योजना बनाएं जो व्यक्ति भविष्य की चिंता नहीं करता, वह एक दिन संकट में पड़ जाता है। चाणक्य के अनुसार, भविष्य की जरूरतों, जैसे शिक्षा, विवाह, या आपातकाल के लिए धन संचय करना चाहिए। इसके लिए नियमित बचत और दीर्घकालिक योजना बनाना जरूरी है। लालच और जोखिम से बचें लालच में आकर धन का दुरुपयोग करने वाला व्यक्ति अपना सर्वनाश कर लेता है। चाणक्य सलाह देते हैं कि जल्दी अमीर बनने की चाह में जोखिम भरे निवेश या जुआ जैसी गतिविधियों से बचें। धन को सुरक्षित और समझदारी से प्रबंधित करें।