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DVC ने उपभोक्ताओं के लिए नए नियम लागू किए, स्मार्ट मीटर विवाद में मिली राहत

बेरमो स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर चल रहे विरोध और आंदोलन के बीच डीवीसी प्रशासन ने उपभोक्ताओं को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। डीवीसी ने स्पष्ट किया है कि संविदा श्रमिकों, बैंक कर्मचारियों, डाकघर कर्मचारियों, विद्यालयों के कर्मचारियों, डीवीसी के पेंशनरों और अन्य केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों को अब एलटी बिजली आपूर्ति प्रीपेड मीटर प्रणाली के तहत मिलेगी। जारी आदेश के अनुसार, 1 सितंबर 2025 से प्रीपेड बिलिंग व्यवस्था लागू होगी। इस व्यवस्था के आरंभ में उपभोक्ता का खाता शून्य शेष राशि से शुरू होगा। वहीं, उपभोक्ताओं पर पूर्व में बकाया बिल की राशि को संबंधित एचओपी के स्तर पर सामंजस्य स्थापित करने के बाद छह समान मासिक किस्तों में वसूला जाएगा। डीवीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी उपभोक्ता का बैलेंस अचानक खत्म हो जाता है तो उसकी बिजली आपूर्ति तत्काल बाधित नहीं होगी। उपभोक्ताओं को (-) 200 रुपये तक का अतिरिक्त उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, यदि इस अवधि में खाता रिचार्ज नहीं किया गया तो आपूर्ति अस्थायी रूप से काट दी जाएगी। डीवीसी का कहना है कि यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को समय पर रिचार्ज करने का पर्याप्त अवसर देने के लिए की गई है। इसके अलावा, सभी एचओपी को निर्देश दिया गया है कि वे पूर्व बकाया राशि की वसूली पर अपने स्तर से सामंजस्य स्थापित करने के बाद मासिक एमआईएस रिपोर्ट डीवीसी मुख्यालय को भेजें। प्रशासनिक स्तर पर यह भी कहा गया है कि उपभोक्ताओं को जानकारी देने के लिए नोटिस चिपकाए गए हैं और लोगों से सहयोग की अपील की गई है।  

30 अगस्त तक हड़ताल से लौटे विशेष सर्वेक्षण संविदा कर्मियों के योगदान पर होगा विचार

सेवा नियमितीकरण की अफवाह से रहें सावधान, बर्खास्त लोगों पर कोई विचार नहीं करेगा विभाग पटना राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय ने विशेष सर्वेक्षण संविदा कर्मियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि 30 अगस्त की शाम 5 बजे तक ड्यूटी पर लौटकर अपने बंदोबस्त कार्यालय को लिखित सूचना देने वाले कर्मियों पर ही विभाग विचार करेगा। तय तिथि के बाद लौटने वालों को अवसर नहीं दिया जाएगा। साथ ही बर्खास्त संविदा कर्मियों के मामलों में भी कोई विचार नहीं किया जाएगा। ज्ञात हो कि अगस्त से राजस्व महा-अभियान की शुरुआत होते ही बड़ी संख्या में विशेष सर्वेक्षण संविदा कर्मी हड़ताल पर चले गये।मानदेय आधारित संविदा नियोजन नियमावली के तहत कार्यरत विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, विशेष सर्वेक्षण कानूनगो, विशेष सर्वेक्षण अमीन और विशेष सर्वेक्षण लिपिक 16 अगस्त से तथाकथित संघ के आह्वान पर हड़ताल पर हैं। विभाग को जिलों से बड़ी संख्या में संविदाकर्मियों के हड़ताल छोड़ने और योगदान देने की सूचना मिल रही है। अभी तक 2087 संविदा कर्मी हड़ताल से वापस आकर काम पर लौट चुके हैं। इनके मामलों में विचार किया जा रहा है। सेवा नियमितीकरण पर फैलाई जा रही अफवाह विभाग ने यह भी साफ किया है कि सेवा नियमितीकरण या संविदा अवधि 60 वर्ष तक करने का कोई प्रावधान नहीं है और न ही ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार हो रहा है। इसके बावजूद तथाकथित संघ द्वारा सरकार से सकारात्मक वार्ता होने की झूठी खबर फैलाई जा रही है और इस आधार पर संविदाकर्मियों से चंदा वसूला जा रहा है। निदेशक, भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय द्वारा संविदा कर्मियों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और समय रहते अपने कार्यस्थल पर योगदान सुनिश्चित करें। बताते चलें कि अभी तक कुल 383 विशेष सर्वेक्षण संविदा कर्मियों को बर्खास्त किया गया है। बर्खास्त कर्मियों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। वहीं 2083 विशेष सर्वेक्षण संविदा कर्मियों के हड़ताल से लौट आने के बाद जिलों द्वारा भेजे गये प्रतिवेदन के आधार पर उनके मामलों में पुनः विचार किया जा रहा है। वहीं इस दौरान विभिन्न पदों के 407 विशेष सर्वेक्षण संविदा कर्मी हड़ताल पर नहीं गए थे।

स्कूली गतिविधि के साथ शिक्षकों की फोटो भी विभाग को उपलब्ध करने का निर्देश

–    स्कूलों को उपलब्ध कराने होंगे चेतना सत्र, मध्याहन भोजन, विज्ञान एवं आईसीटी लैब की कक्षाओं के साथ शिक्षकों के भी ग्रुप फोटो पटना, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं की ससमय उपस्थिति और उनके कार्यकलापों की निगरानी के सम्बन्ध में जिला शिक्षा पदाधिकारियों के लिए गुरुवार को एक नया निर्देश जारी किया है। दरअसल, शिक्षा विभाग ने अपने कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को यह निर्देश दिया है कि वह स्कूलों से समय-समय पर विद्यालयों के कार्यकलापों की तस्वीरें मंगाई जाएं। लेकिन इस निर्देश के बावजूद राज्य के कई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने कॉल सेंटर के ऑपरेटर से इस संबंध में लिखित पत्र की मांग की है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि कमांड एंड कंट्रोल सेंटर द्वारा फोटो मांगे जाने पर उसे निश्चित रूप से फोटो उपलब्ध कराया जाए। यदि किसी को कॉलर के संबंध में कोई शक हो तो कमांड एंड कंट्रोल सेन्टर के 14417 अथवा 18003454417 पर सम्पर्क कर उसे कंफर्म कर सकते हैं। अपर मुख्य सचिव ने स्कूलों में चेतना सत्र, मध्याहन भोजन योजना, भौतिकी, रसायनशास्त्र, जीव विज्ञान, आईसीटी लैब की कक्षाओं से संबंधित, स्कूल के शौचालय की स्थिति, स्कूल की कार्यावधि में शिक्षकों का ग्रुप फोटो कमांड एण्ड कंट्रोल सेन्टर को उपलब्ध कराया जाए। दरअसल, विभाग के अपर मुक्य सचिव को ऐसी शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि कुछ स्कूलों से शिक्षक अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर लापता हो जाते हैं। उन्होंने संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही इस संबंध में विद्यालय प्रधान को भी सूचित किया जाए।

राज्य की हरियाली संवारने में अहम भूमिका निभा रही हैं जीविका दीदियां

-2019 में शुरू जल-जीवन-हरियाली अभियान को दीदियों ने दिया जनांदोलन का रूप – ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण दोनों को मिल रही मजबूती पटना, बिहार में सामाजिक परिवर्तन की अग्रदूत बनीं जीविका दीदियां, जिन्होंने शराबबंदी, दहेज प्रथा और बाल-विवाह जैसी बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाकर गांव-गांव में नई सोच जगाई है, अब पर्यावरण बचाने की मुहिम में भी सक्रिय हो गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा वर्ष 2019 में आरंभ किया गया जल-जीवन-हरियाली अभियान आज पूरे राज्य में जनांदोलन के रूप में खड़ा है। इस अभियान को सफल बनाने में जीविका दीदियों ने हरित जीविका-हरित बिहार कार्यक्रम के अंतर्गत करोड़ों पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण की ऐतिहासिक पहल की है। चार करोड़ से ज्यादा पौधे लगाए राज्य के ग्यारह लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी एक करोड़ चालीस लाख से अधिक दीदियों ने अब तक चार करोड़ से ज्यादा पौधे लगाए हैं। पौधों की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए दीदी की नर्सरी की शुरुआत की गई। आज जीविका दीदियों द्वारा संचालित नर्सरियों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं की श्रम भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में भी नेतृत्व का कार्य कर रही हैं। 987 दीदी की नर्सरी संचालित जीविका, मनरेगा और वन एवं पर्यावरण विभाग के सहयोग से पूरे राज्य में अब तक 987 दीदी की नर्सरियां संचालित हो चुकी हैं। इनमें 677 नर्सरियां जीविका व मनरेगा की साझेदारी से और 310 नर्सरियां वन विभाग के सहयोग से चल रही हैं। गौर करने वाली बात है कि 2019-20 में इनकी संख्या मात्र 350 थी, जो पांच साल में करीब तीन गुना बढ़ गई है। लाखों पौधों की आपूर्ति और करोड़ों की आय दीदी की नर्सरी से विभिन्न प्रजातियों के औसतन 20 हजार पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं। हर वर्ष जून से अक्टूबर के बीच बड़े पैमाने पर पौधों का वृक्षारोपण होता है। वर्तमान में नर्सरियों में तीन फीट से अधिक ऊंचाई वाले 68 लाख 80 हजार पौधे और तीन फीट से कम ऊंचाई वाले एक करोड़ 19 लाख 48 हजार से अधिक पौधे उपलब्ध हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 95.32 लाख पौधों की बिक्री से 18.27 करोड़ रुपये की आय हुई थी।अबतक कुल 67 करोड़ रुपये की आमदनी नर्सरी संचालक दीदियों को हुई है। 97 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2024-25 में हरित जीविका-हरित बिहार अभियान के तहत 82 लाख पौधे लगाए गए। वहीं, वर्ष 2025-26 के लिए जीविका दीदियों ने 97 लाख पौधारोपण का लक्ष्य तय किया है। जून माह से चल रहे अभियान में अब तक 23 लाख से अधिक पौधे लगाए भी जा चुके हैं। गौरतलब है कि जीविका दीदियों के प्रयास से न केवल बिहार का पर्यावरण और हरियाली बढ़ रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की सतत आजीविका भी सुदृढ़ हो रही है। जल-जीवन-हरियाली अभियान के साथ अब बिहार की महिलाएं पर्यावरण संरक्षण की सबसे बड़ी भागीदार बन चुकी हैं।

महोदय, शिक्षिका 12 बजे स्कूल आती हैं और दो बजे घर लौट जाती हैं

–    नाम छुपाने की शर्त पर सिवान के रघुनाथपुर के एक ग्रामीण ने दर्ज कराई है विभाग में शिकायत –    लिखा, शिक्षिका का परिवार दबंग है, नाम उजागर होने पर हो सकता है मेरी जान को खतरा     पटना, शिक्षा विभाग के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को ग्रामीणों के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति और कार्यकलापों को लेकर कई तरह की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं। ऐसी एक शिकायत सिवान के रघुनाथपुर स्थित हाई स्कूल सह इंटर कॉलेज, निखती कलां से प्राप्त हुई है। यह शिकायत वहां के एक स्थानीय ग्रामीण ने वहां कार्यरत एक शिक्षिका सुश्री गीतांजलि के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज कराई है।        उक्त ग्रामीण का कहना है कि शिक्षिका गीतांजलि का निवास विद्यालय से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर है। किंतु उन्होंने अपने एक नज़दीकी रिश्तेदार  जो विद्यालय से लगभग 500 मीटर दूरी पर रहते हैं। शिक्षिका ने उनके घर पर अपना मोबाइल रख छोड़ा है। उसी रिश्तेदार द्वारा प्रतिदिन उनकी हाजिरी मोबाइल ऐप से बनाई जाती है, जबकि शिक्षिका विद्यालय में समय पर उपस्थित नहीं रहतीं। वह कभी 11 बजे तो कभी 12 बजे स्कूल आती हैं। कभी आती ही नहीं हैं और दोपहर 2 से 3 बजे ही विद्यालय से चली जाती हैं। जब प्रधानाध्यापक ने उनके खिलाफ सख्ती दिखाई, तो उक्त शिक्षिका एवं उनके रिश्तेदारों द्वारा प्रधानाध्यापक को ही जान से मारने की धमकी देने लगे।      इस व्यक्ति ने विद्यालय के कुछ फोटो भी बतौर साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं जिससे उसके आरोपों की पुष्टि होती है। शिक्षा विभाग की जांच में पाया गया कि उक्त शिक्षिका ने अपनी कई दिनों की हाजिरी एक ही पृष्ठभूमि यानी बैकग्राउंड में बनाई गई है। किसी दिन सुबह और शाम की हाजिरी की फोटो में कपड़े भी अलग-अलग हैं। कभी-कभी तो शिक्षिका की जगह किसी पुरुष का फोटो भी हाजिरी में दर्ज है। उनका हाजिरी लोकेशन भी हमेशा 400 मीटर से अधिक दूरी दर्शाता रहा है। उक्त शिकायतकर्ता का कहना है कि इस विषय की जानकारी बीआरसी और जिलास्तर के पदाधिकारियों को भी है, लेकिन दबंग रिश्तेदारों के कारण कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उसने यह भी बताया है कि इस मामले में स्थानीय स्तर पर शिकायत करने पर मेरी सुरक्षा को खतरा है। इस वजह से निवेदन किया गया है कि इस शिकायत को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाए और साक्ष्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाए।

किशनगंज में जीविका दीदियों ने संभाली टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई की कमान

– महानंदा लीफ से बनेगी किशनगंज की चाय की पहचान – बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की जीविका दीदियाँ करेंगी टी फैक्ट्री का संचालन पटना,  किशनगंज के पोठिया में गुरुवार को  महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा संचालित टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा ने कहा कि यह इकाई जिले के चाय पत्ता उत्पादक किसानों और जीविका दीदियों के लिए आर्थिक स्वावलंबन का मजबूत आधार बनेगी। उन्होंने बताया कि अब हमारी दीदियाँ टी फैक्ट्री का संचालन करेंगी और आने वाले समय में महानंदा लीफ ब्रांड के नाम से यहां तैयार चाय देश-विदेश में अपनी पहचान बनाएगी। कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी विशाल राज ने बताया कि यह इकाई स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत कालिदास किस्मत, कचकेचिपाड़ा, पोठिया में स्थापित की गई थी। राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा इकाई को जीविका को हस्तांतरित करना किसानों के हित में साबित होगा। जीविका संपोषित महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की दीदियाँ इसका संचालन करेंगी। लाभार्थी दीदियों को सामुदायिक निवेश निधि, बैंक लिंकेज और इंडिविजुअल इंटरप्राइज के लिए सांकेतिक चेक प्रदान किया गया। वहीं खुशी सीएलएफ अंतर्गत दीदी अधिकार केंद्र शुभारंभ के लिए डमी चाबी सौंपी गई। स्थानीय किसान शिखा और आरती दीदी ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के गठन से चाय उत्पादक किसानों को अब उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल रहा है और वे बिचौलियों से मुक्त हुए हैं। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त स्पर्श गुप्ता, जीविका निदेशक उद्यम विनय कुमार राय, डीपीएम अनुराधा चंद्रा सहित जीविका एवं जिला प्रशासन के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

बिहार में ग्रामीण सड़कों के निर्माण से कम हुई गांवों से शहरों की दूरी

–    नाबार्ड के सहयोग से राज्य की 2025 ग्रामीण सड़कों में 1859 पर फर्राटा भर रहे हैं छोटे बड़े वाहन –    कुल 1235 ग्रामीण पुलों में 910 पुलों का भी निर्माण कार्य पूर्ण, ग्रामीण कार्य विभाग ने जारी की सड़कों के निर्माण की प्रगति रिपोर्ट    पटना, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की मदद से बिहार में निर्मित ग्रामीण सड़कों और पुलों का संजाल बुनने का काम अब लगभग अपने अंतिम चरण में है। राज्य में बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़कों के निर्माण से गांवों की तस्वीर तो बदली ही है, साथ ही राज्य के सुदूर गांवों से शहरों की दूरी लगातार कम गई है। साथ ही राज्य के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को यह सड़कें नई रफ़्तार दे रही हैं। नाबार्ड के सहयोग से इस राज्य योजना के तहत विभिन्न जिलों में स्वीकृत सड़कों के निर्माण की ग्रामीण कार्य विभाग ने जिलावार प्रगति रिपोर्ट गुरुवार को जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में राज्य की कुल 2025 ग्रामीण सड़कों के निर्माण की विभाग ने प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की थी। जिसमें 1859 सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। इन 2025 सड़कों की कुल लम्बाई 5254.490 किलोमीटर है, जिसमें 4822.474 सड़कों का निर्माण कर लिया गया है। इसी तरह, राज्य में ग्रामीण सड़कों के साथ-साथ कुल 1235 पुलों के निर्माण का लक्ष्य भी नाबार्ड के सहयोग से निर्धारित किया गया था। जिसमें अबतक कुल 910 पुलों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष 325 पुलों का निर्माण का कार्य जारी है और इसे अगले कुछ महीनों में पूरा कर लिया जाएगा। नालंदा समेत इन जिलों का प्रदर्शन शानदार ग्रामीण कार्य विभाग के स्तर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार ग्रामीण सड़कों के निर्माण में नालंदा जिला सबसे आगे है। जहां कुल 214 सड़कों की स्वीकृति में से 199 सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। नालंदा में 370 किलोमीटर से भी अधिक सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। जबकि लक्ष्य 396.194 किलोमीटर सड़क के निर्माण का है। साथ ही, नालंदा में 67 पुल का निर्माण किया जाना था, जिसमें 59 पुल बनकर तैयार हो चुके हैं। वहीं, गयाजी में कुल 129 सड़कों के निर्माण की मिली स्वीकृति के विरुद्ध 120 सड़कों का निर्माण हो चुका है। गयाजी में कुल 395.245 किलोमीटर लंबाई की सड़कें बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। जिसके विरुद्ध अबतक 365.782 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। जबकि गयाजी में निर्माणाधीन 57 पुलों में 46 पुलों का निर्माण भी पूरा हो चुका है। वहीं, राजधानी पटना जिला में कुल 167 ग्रामीण सड़कों के निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। जिनमें से 157 सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। पटना में कुल 363.767 किमी से अधिक ग्रामीण सड़कों के निर्माण का लक्ष्य है। जबकि इस लक्ष्य के विरुद्ध कुल 329.708 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जा चुका है। पटना के ग्रामीण इलाकों में निर्माणाधीन कुल 54 पुलों में 46 पुल बनकर तैयार हो चुके हैं। वहीं, औरंगाबाद में कुल 244.856 किलोमीटर, दरभंगा में 235.740 किमी, पूर्वी चंपारण में 230.772 किमी, मुंगेर में 202.814 किमी, रोहतास में 176.462 किमी, जहानाबाद में 169.606 किमी, सीतामढ़ी में 151.346 किमी, मुजफ्फरपुर में 139.682 किमी सड़कों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वहीं, जमुई, मधुबनी, समस्तीपुर, गोपालगंज, किशनगंज और नवादा में भी ग्रामीण सड़कों के निर्माण का काम लगभग पूर्ण हो चुका है।

बिहार में जनता का गुस्सा, नित्यानंद राय ने राहुल और तेजस्वी पर साधा निशाना

पटना  केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के समर्थकों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए दोनों पार्टियों को कटघरे में खड़ा करते हुए राहुल गांधी और तेजस्वी यादव से बिहार और देश के लोगों से माफी मांगने की बात कही। उन्होंने कहा, "बिहार के लोग यह कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री पर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के मंच से टिप्पणी की जाए।" केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि वे विपक्ष के नेता बनने के लायक नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 'वोटर अधिकार यात्रा' के नाम पर देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विरोधी दलों के लोगों ने 'वोटर अधिकार यात्रा' को गाली-गलौज करने का मंच बनाकर रख दिया है। आजकल राहुल गांधी और तेजस्वी यादव संविधान की कॉपी जेब में लेकर घूम रहे हैं, लेकिन इन लोगों ने संविधान को मजाक बनाकर रख दिया है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्या लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को नहीं मालूम है कि प्रधानमंत्री का पद संवैधानिक है? प्रधानमंत्री पूरे देश के होते हैं, किसी पार्टी के नहीं? उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर तत्काल माफी मांगें, अन्यथा भारतीय जनता पार्टी चुप नहीं बैठेगी। बिहार के 14 करोड़ लोगों में जबरदस्त गुस्सा है और इसका जवाब जनता देने के लिए तैयार है।

पशुपालन से जुड़े व्यवसायों में सरकार देगी सहायता

* पशुपालन से जुड़े व्यवसायों में सरकार देगी आर्थिक सहायता, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर * किसानों को पशुपालन से जुड़ी योजनाओं में 50 प्रतिशत तक मिलेगी सब्सिडी * पशुपालन से जुड़े उद्यमों को शुरू करने में महत्वपूर्ण सहायता साबित होगी यह योजना * चारा प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना को प्रोत्साहित करेगी सरकार पटना, बिहार सरकार के पशुपालन निदेशालय ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) के अंतर्गत उद्यमिता विकास कार्यक्रम (एनएलएम-ईडीपी) की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन करना और पशुपालन को व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाना है।       इस कार्यक्रम के तहत किसानों, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारिता संगठनों, और निजी उद्यमियों को पशुपालन से जुड़े व्यवसायों में सरकार के स्तर से सहायता प्रदान की जाएगी।       इस कार्यक्रम का मकसद रोजगार सृजन और उत्पादकता वृद्धि करना है। जुगाली करने वाले छोटे पशु, कुक्कुट और सूअर पालन क्षेत्र और चारा क्षेत्र में उद्यमिता विकास के माध्यम से रोजगार का सजृन करना है। नस्ल सुधार के जरिए प्रति पशु उत्पादकता में वृद्धि करना है। मांस, अंडा, बकरी का दूध, ऊन और चारे के उत्पादन को बढ़ाना है। चारा बीज आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त बनाकर इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना।       मांग आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए चारा प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना को प्रोत्साहित करना भी इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है। इसके साथ ही किसानों के लिए पशुधन बीमा सहित जोखिम प्रबंधन उपायों को बढ़ावा देना। मुर्गी, भेड़, बकरी पालन और चारा प्राथमिकता वाले क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहित करना। उत्पादन लागत को कम करने और पशुधन क्षेत्र के उत्पादन में सुधार के लिए कौशल आधारित प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकियों के प्रसार को बढ़ावा देना भी इसके प्रमुख उद्श्यों में शामिल है।        इस कार्यक्रम के तहत योजनाओं में लाभार्थियों को अधिकतम 50% कैपिटल सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जो पशुपालन से जुड़े उद्यमों को शुरू करने में महत्वपूर्ण सहायता साबित होगी। माना जा रहा है ति यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मददगार होगी।       अधिक जानकारी के लिए इच्छुक व्यक्ति http://nlm.udyamimitra.in या www.dahd.nic.in वेबसाइट पर संपर्क कर सकते हैं। उद्यमिता विकास कार्यक्रम बिहार के किसानों और पशुपालकों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जो न केवल रोजगार उत्पन्न करेगा बल्कि पशुधन क्षेत्र को आधुनिक बनाएगा।

19 करोड़ की लागत से वैशाली गोरौल-सोन्धो-मथनामल सड़क चौड़ीकरण-मजबूतीकरण को स्वीकृति : सम्राट चौधरी

* गोरौल-सोन्धो-मथनामल सड़क चौड़ीकरण-मजबूतीकरण से आवागमन सुगम, रोजगार के बढेंगे अवसर * सड़कों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है डबल इंजन सरकार पटना, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि वैशाली पथ प्रमंडल- हाजीपुर अंतर्गत गोरौल–सोन्धो–मथनामल (12.66 किमी) सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना पर कुल 1951.63 लाख यानि उन्नीस करोड़ इक्यावन लाख रुपये तिरेसठ हजार रुपये की लागत आएगी।  चौधरी ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण से स्थानीय लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और आर्थिक-सामाजिक विकास को गति मिलेगी। सम्राट चौधरी ने कहा- बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की डबल इंजन सरकार सूबे में सड़कों के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। 2005 की तुलना में बिहार में विशाल सड़क नेटवर्क तैयार हुआ है। इसी कड़ी में वैशाली गोरौल-सोन्धो-मथनामल सड़क के चौड़ीकरण-मजबूतीकरण को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के पूर्ण होने से वैशाली क्षेत्र के लोगों को बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।