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झारखंड में ट्रेन देरी पर सियासत गरम: हेमंत सोरेन ने रेल मंत्री को घेरा

 सरायकेला सरायकेला-खरसावां के चांडिल-टाटा रेल सेक्शन में ट्रेनों की लगातार हो रही लेट-लतीफी के मुद्दे को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उठाया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सीधे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को संबोधित करते हुए इस स्थिति को पूरी तरह ‘अस्वीकार्य’ बताया है. मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि पिछले दो वर्षों से इस महत्वपूर्ण रेल खंड पर यात्री ट्रेनें घंटों विलंब से चल रही हैं, जिससे आम जनता का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों के बीच भेदभाव का आरोप मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रेलवे की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए लिखा कि एक ही ट्रैक पर यात्री ट्रेनों को घंटों रोक कर रखा जाता है, जबकि मालगाड़ियों की आवाजाही बिना किसी बाधा के निर्बाध रूप से जारी रहती है. उन्होंने तीखा सवाल पूछते हुए एक्स पर लिखा कि क्या रेलवे के हिसाब से झारखंड के लोगों का समय भी उतना ही मूल्यवान है, जितना देश की अर्थव्यवस्था के लिए माल परिवहन?” आम जनता और श्रमिकों पर पड़ रहा बुरा असर ट्रेनों के समय पर न चलने के कारण सबसे अधिक परेशानी उन श्रमिकों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को हो रही है जो प्रतिदिन रोजगार और शिक्षा के लिए इस रेल खंड का उपयोग करते हैं. सीएम ने कहा कि यह केवल परिचालन से जुड़ा एक तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों की सुविधा और उनकी गरिमा से जुड़ा प्रश्न है. हजारों यात्रियों को घंटों स्टेशन पर इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनके काम के घंटे और शिक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं. रेल मंत्री से तत्काल समाधान का आग्रह हेमंत सोरेन ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मांग की है कि चांडिल-टाटा सेक्शन में यात्री ट्रेनों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए. इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में लंबित रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया है. सीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि झारखंड के नागरिकों की सुविधा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और रेलवे को ट्रेन लेट होने की समस्या का तत्काल स्थायी समाधान सुनिश्चित करना चाहिए.

राजद की सीट बचाने की चुनौती, एनडीए 8–9 सीटों पर बढ़त के दावे में

पटना राज्य में होने वाले 9 विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) के चुनाव में क्या महागठबंधन तोड़फोड़ के जरिए नया गुल खिलाएगा? क्या कुछ समीकरण ऐसा बनेगा जिसके सहारे महागठबंधन के विधायक राजद के दो एमएलसी की पारी खत्म होने के बरक्स दो एमएलसी की सीटें हासिल कर सकें? क्या कुछ गणित बनने की संभावना है? क्या विपक्ष के बचे 16 विधायक अपने वोट का बलिदान करेंगे या फिर समीकरण की जद में कोई खेल रच पाएंगे? ऐसे कई सवाल एमएलसी की 9 सीटों के लिए होने वाले चुनाव के संदर्भ में उठने लगे हैं। राजद के लिए खोने का चुनाव ! जून 2026 में होने वाले बिहार विधान परिषद के आगामी चुनावों में राष्ट्रीय जनता दल के मौजूदा 2 एमएलसी मोहम्मद फारुक और सुनील कुमार सिंह का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। 9 सीटों के होने वाले चुनाव के संदर्भ में माना जा रहा है कि एक सीट के लिए 25 विधायक की जरूरत होगी। वैसे में राजद के हिस्से में केवल एक सीट बचाने की क्षमता है। ऐसा इसलिए कि राजद के पास एक्यूरेट 25 विधायक हैं। लेकिन इन 25 विधायकों के अलावा विपक्ष के 16 विधायक शेष रह जाएंगे। अब सवाल उठता है कि राजद का हाल कहीं राज्यसभा चुनाव वाला न हो जाए? 41 विधायकों के रहते राजद के एडी सिंह चुनाव हार गए और एनडीए राज्यसभा की सभी पांचों सीटें जीत गई। एनडीए के निशाने पर 9 MLC सीटें? तोड़फोड़ के जरिए जीत के आदी हो चुके एनडीए के रणनीतिकार क्या कुछ राज्यसभा वाला गेम खेलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं? वैसे अभी तक के गणित के अनुसार एनडीए आठ सीटों पर जीत के प्रति आश्वस्त है। एनडीए सूत्रों के अनुसार विधायकों की संख्या के अनुरूप वह विधान परिषद की रिक्त हो रही आठ सीटों का हकदार है। एक एमएलसी के लिए लगभग 25 विधायकों के वोट की जरूरत पड़ेगी। इस जोड़ से 8 एमएलसी की सीटें जीतने के लिए 200 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। एनडीए के पास फिर भी 2 शेष रह जाएंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तीन-तीन एमएलसी सीटें जदयू और बीजेपी के हिस्से आएंगी। एक सीट लोजपा और एक सीट रालोमो के हिस्से में जाने की बात कही जा रही है। क्या 9 वीं सीट को लेकर मचेगा धमाल? राज्यसभा चुनाव में सेंधमारी करने में सफल एनडीए के रणनीतिकार क्या कोई गुल खिला सकते हैं। राजद की बात करें तो राज्यसभा चुनाव में एक विधायक बागी हो गए थे। कांग्रेस के तीन विधायकों ने भी अलग राह पकड़ी थी। क्या एआईएमआईएम के 5, कांग्रेस के छह, वाम दल के तीन बसपा के एक और आईपी गुप्ता कुल 16 विधायकों की भूमिका में कुछ उलट पुलट की संभावना है? या एनडीए किसी धनपशु के बहाने 9 वीं सीट के लिए कोई बाजी खेल जाए? क्या राजद को समर्थन देने वाले एआईएमआईएम को वादे के अनुसार एमएलसी की एक सीट देगी या फिर दूसरी सीट का गणित उलझाने के लिए एआईएमआईएम कोई उम्मीदवार खड़ा करेगा? ऐसे कई अनुत्तरित सवाल हैं। राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं कब कौन किसका साथ दे, कौन साथ छोड़ दे, कोई नहीं कह सकता है!  

रसोई गैस किल्लत से स्ट्रीट फूड महंगा, रेट में 10–12% तक बढ़ोतरी

पटना  बिहार की राजधानी पटना में होटल, ढाबा और स्ट्रीट फूड व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। मार्च महीने की शुरुआत से ही व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर अब शहर की रसोई पर दिखने लगा है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की मुश्किलें बढ़ गई है। कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में बढ़ने से कोयला-लकड़ी के सहारे रेस्टोरेंट होटल होने लगे हैं। जो होटल, रेस्टोरेंट ईरान-अमेरिका जंग शुरू होने के पहले से व्यावसायिक गैस सिलेंडर का उठाव कर रहे थे। इनको भी उनके पूर्व की मांग का 70% ही आपूर्ति की जा रही है। मतलब 30% सिलेंडर के बदले उन्हें वैकल्पिक ऊर्जा साधनों लकड़ी- कोयला भट्टी, इंडक्शन का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। पॉकेट पर सीधा वार, खानपान की नई कीमतें गैस की कीमत बढ़ने से 5 रुपए की रोटी 7 रुपए की हो गई है। छोटी दुकानों में 10 रुपए का समोसा अब 15 से 20 रुपए पीस मिल रहा है। एलपीजी की कीमत बढ़ने और नहीं मिलने से स्ट्रीट वेंडरों पर दोहरी मार पड़ी है। चाय की कीमतों में इजाफा हुआ है। चाउमीन वाले 5 से 10 कीमत बढ़ा दिए हैं। इनका कहना है कि ब्लैक में खरीदना नहीं चाहते और गैस खत्म होने के बाद नया सिलेंडर मिलने तक दुकान बंद करनी पड़ती है।     रोटी: पहले 5 रुपए में मिलने वाली रोटी अब 7 रुपए की     समोसा: 10 रुपए वाला समोसा अब बाजार में 15-20 रुपए की     चाय: 10 रुपए से बढ़कर 15-20 रुपए तक पहुंच गई     चाउमीन: दाम में 5-10 रुपए तक का इजाफा देखा जा रहाकु     खाने-पीने की चीजों में औसतन 10-12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी छोटे कारोबारियों की हालत को और भी खराब इस क्राइसिस से छोटे कारोबारियों की हालत तो और भी खराब है। एक चाय विक्रेता ने बताया कि चाय की कीमत पहले ही दस रुपए से बढ़कर 15 रुपए की गई। कुछ दुकानदार 20 रुपए भी कर रहे हैं। लेकिन इससे ग्राहकों की संख्या में कमी आने लगी है। अगर ग्राहकों की संख्या में कमी आई तो कारोबार समेटने या कोई दूसरा रोजगार करने पर विचार करेंगे। इससे खाने-पीने के सामानों की कीमतों में कम से कम 10 से 12 प्रतिशत तक इजाफा तय है। मिठाइयों से लेकर रेस्टोरेंटों के मैन्यू की कीमतों, हॉस्टल के मेस के मैन्यू से लेकर स्ट्रीट फूड तक सब कुछ महंगा लग रहा है। कोयले की मांग बढ़ने से कीमत में इजाफा एलपीजी किल्लत से कोयले की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। 18 से 20 रुपए किलो बिकने वाला कोयला की कीमत 30 से 40 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। अच्छे और गुणवत्ता वाले कोयले की कीमत इससे भी अधिक लगाई जा रही है। कोयले को लेकर दुकानदार कोयले के थोक व्यापारियों के यहां एडवांस बुकिंग तक करने लगे है। लकड़ी के कोयले की कीमत 40 से 50 रुपए किलो के बीच पहुंच गई है। स्ट्रीट वेंडरों के रोजी-रोजगार पर असर पटना के ढाबों और स्ट्रीट वेंडरों के पास पांच किलोग्राम के छोटा गैर सब्सिडी प्राप्त गैस सिलेंडरों के साथ-साथ घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर है। स्ट्रीट वेंडरों द्वारा घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग करना अवैध है। लेकिन, पटना की छोटी दुकानों में सड़कों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। कंकड़बाग में चाउमिन विक्रेता ने बताया कि छोटा गैस सिलेंडर महंगा भी पड़ता है। इसमें वैसा ताव नहीं मिलता है जैसा ताव 14.2 किलोग्राम गैस सिलेंडर में मिलता है। इसलिए हम मजबूरी में घरेलू गैस सिलेंडर का ही उपयोग ठेला पर कर रहे है। ईरान-अमेरिका युद्ध के पहले पटना में लगभग 5 हजार व्यावसायिक गैस सिलेंडर की खपत थी। ये फिलहाल 3000-3500 के बीच रह गई है। ईरान-अमेरिका युद्ध का साइड इफेक्ट बिहार एलपीजी वितरक संघ के महासचिव रामनरेश सिन्हा के मुताबिक ईरान-अमेरिका युद्ध के पहले पटना में लगभग 5 हजार व्यावसायिक गैस सिलेंडर की खपत थी। ये फिलहाल 3000-3500 के बीच रह गई है। पटना के होटलों- रेस्टोरेंटों में एक बार फिर से लकड़ी, कोयला की खपत में इजाफा हो गया है। पटना के रेस्टोरेंट कोयले और लकड़ी का इस्तेमाल करने लगे हैं।  

PM आवास योजना लाभुकों को मिली राहत की उम्मीद, विधायक ने दिया पूरा साथ

जमशेदपुर  जमशेदपुर के बिरसानगर में प्रधानमंत्री आवास योजना (PRAW) के सैकड़ों लाभुक रविवार सुबह जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय के बिष्टुपुर स्थित आवास पर जमा हुए. लाभुकों ने व्यथा सुनाते हुए कहा कि पूरा पैसा जमा करने के बावजूद उन्हें पिछले 6 साल से चाबी नहीं मिल रही है. थक-हारकर लाभुकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि वे आगामी 6 मई को शुभ मुहूर्त में अपने-अपने घरों में सामूहिक गृह प्रवेश पूजा करेंगे. विधायक सरयू राय ने इस फैसले का न केवल समर्थन किया, बल्कि पूजा सामग्री और पंडाल की व्यवस्था स्वयं करने का एलान किया. दोहरी आर्थिक मार और बदतर हालात लाभुकों ने बताया कि वे वर्तमान में ‘दोहरी मार’ झेल रहे हैं. एक तरफ बैंकों से लिए गए लोन की EMI कट रही है, तो दूसरी तरफ घर न मिलने के कारण वे 4,000 से 6,000 रुपये तक प्रति माह किराया देने को मजबूर हैं. कई परिवारों की माली हालत इतनी खराब हो गई है कि उनके पास खाने तक के लाले पड़ रहे हैं. योजना के तहत ब्लॉक नंबर 8 और 23 में 95% काम पूरा होने के बावजूद बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का काम अब भी अधूरा है. भ्रष्टाचार और निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल विधायक सरयू राय ने निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि 21 ब्लॉक में से मात्र 2 ब्लॉक ही तैयार हो सके हैं. लाभुकों ने विधायक को ऐसी तस्वीरें और वीडियो दिखाए, जिनमें नवनिर्मित मकानों की दीवारों में दरारें और प्लास्टर गिरते हुए स्पष्ट दिख रहे हैं. राय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि घर मिलने से पहले ही आशियाने टूटने लगे हैं. सरकार और जुडको के बीच पिस रही जनता परियोजना का जिम्मा जुडको (JUIDCO) को दिया गया था, जिसने छह अलग-अलग कंपनियों को काम सौंपा है. जिस योजना को मार्च 2021 तक पूरा होना था, वह मई 2026 तक भी फिनिशिंग स्टेज में ही अटकी हुई है. सरयू राय ने कहा कि वे सोमवार को मुख्यमंत्री और विभागीय सचिव से मिलकर इस समस्या के समाधान का अंतिम प्रयास करेंगे ताकि लाभुकों को आधिकारिक रूप से चाबी मिल सके. परियोजना एक नजर में     कुल फ्लैट्स (संशोधित): 7372 (24 ब्लॉक में)     कुल लागत: 653 करोड़ रुपये     प्रति फ्लैट लागत: 6.81 लाख रुपये     लाभुकों का अंशदान: 4.31 लाख रुपये     कारपेट एरिया: 313 वर्ग फीट     संरचना: G+8 (ग्रुप हाउसिंग)     सुविधाएं: जलापूर्ति, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज, पार्क और पार्किंग  

तीन कॉलेजों के लोन भुगतान पर रोक, शिक्षा विभाग का फैसला

मुजफ्फरपुर राज्य में सरकारी योजनाओं का लालच देकर निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा मुनाफा कमाने और बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाया है। मुजफ्फरपुर के तीन निजी शिक्षण संस्थानों के नए आवेदनों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। हायर एजुकेशन के लिए दिया जाता है लोन सरकार की इस योजना के तहत छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए 4 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है, जिसे पढ़ाई पूरी होने के एक साल बाद चुकाना होता है। यदि छात्र को नौकरी या रोजगार नहीं मिलता है तो भुगतान के लिए अतिरिक्त समय भी दिया जाता है। लेकिन कई निजी संस्थान इस सुविधा का गलत फायदा उठा रहे हैं। उनके होर्डिंग और बैनरों पर भी इस योजना का लाभ मिलने का दावा किया जाता है, जिससे छात्र आकर्षित होते हैं। तीन निजी शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई इसी क्रम में बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम लिमिटेड ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुजफ्फरपुर के तीन निजी शिक्षण संस्थानों एमपीएस कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन,शिवि कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन और देव कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन के नए आवेदनों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। नियम के खिलाफ फायदा उठाने की कोशिश यह कार्रवाई सत्र 2025-26 में निर्धारित सीट से अधिक बोनाफाइड जारी करने और संतोषजनक जवाब नहीं देने के कारण की गई है। विभाग को शिकायत मिली थी कि कई संस्थानों ने तय सीमा से अधिक छात्रों का नामांकन दिखाकर योजना का लाभ लेने की कोशिश की। इसके अलावा, MNSSBY पोर्टल पर आवेदनों की स्वीकृति प्रक्रिया में भी पारदर्शिता की कमी पाई गई। सवालों के जवाब नहीं दे सके कॉलेज जांच के दौरान जब संबंधित संस्थानों से स्पष्टीकरण मांगा गया, तो संस्थान स्पष्ट जवाब देने में असफल रहे, जिससे पूरी प्रक्रिया संददेह के घेरे में आ गई। विभाग ने साफ किया है कि जिन संस्थानों ने अनियमित तरीके से नामांकन किया है, उनके नए आवेदनों के भुगतान पर रोक जारी रहेगी। हालांकि, जिन छात्रों की एक किस्त पहले ही जारी हो चुकी है, उनकी आगे की किस्त मिलती रहेगी ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

बिहार पुलिस का बड़ा अभियान: सीवान से पटना तक एनकाउंटर की झड़ी, कई अपराधी ढेर

पटना बिहार में अपराधियों पर ताबड़तोड़ ऐक्शन हो रहा है। मुख्यमंत्री की गद्दी संभालने के बाद सम्राट चौधरी ने पहले ही कहा था कि वो अपराधियों का पिंडदान करेंगे। सीएम के इस कथन के बाद से ही राज्य में अपराधियों पर पुलिस कहर बनकर बरप रही है। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महज 18 दिन के सम्राट चौधरी के राज में मगध से अंग और सारण तक पांच एनकाउंटर अब तक हो चुके हैं। सबसे पहले बात करते हैं आज यानी रविवार को सीवान जिले में हुए ताजा एनकाउंटर की। सारण में दो एनकाउंटर सीवान के चर्चित हर्ष मर्डर केस में पुलिस ने  एनकाउंटर किया है। पुलिस ने इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी सोनू यादव को मुठभेड़ में मार गिराया है। यहां भाजपा नेता व पूर्व एमएलसी मनोज सिंह के भांजे हर्ष सिंह की गत 29 अप्रैल को गोली मारकर हत्या करने वाले मुख्य आरोपित सोनू यादव को पुलिस के साथ मुठभेड़ में रविवार की अहले सुबह ढेर कर दिया गया। वह हुसैनगंज थाना क्षेत्र के सरेया का रहने वाला है। गाड़ी सटने के विवाद में पूर्व एमएलसी के भांजा व बहनोई को गोली मार दी गई थी। भांजे हर्ष की मौत हो गई थी और बहनोई का इलाज अस्पताल में चल रहा है। इससे पहले इस हत्याकांड के एक दिन बाद यानी 30 अप्रैल की सुबह भी सीवान पुलिस ने इसी मर्डर केस से जुड़े एक अन्य आरोपी छोटू यादव का हाफ एनकाउंटर किया था। पुलिस ने छोटू यादव के पैर में गोली मारी थी। पुलिस की गोली से छोटू जख्मी हुआ था और उसे बाद में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अंग के सुल्तानगंज में रामधनी यादव का एनकाउंटर इससे पहले सम्राट चौधरी की पुलिस ने बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज नगर परिषद के सभापति पर हुए हमले के कथित मुख्य साजिशकर्ता रामधनी यादव को 29 अप्रैल को पुलिस मुठभेड़ में मारा गिराया था। मुठभेड़ के दौरान एक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) और दो निरीक्षक घायल हो गए थे। दरअसल 28 अप्रैल को तीन हथियारबंद अपराधियों ने सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में सभापति राजकुमार के कक्ष में गोलीबारी की थी। जिसमें सभापति और कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में कार्यपालक पदाधिकारी की मौत हो गई थी। राजकुमार को इलाज के लिए पटना के एक अस्पताल में भेज दिया गया था। यह जानकारी सामने आई थी कि सुल्तानगंज नगर परिषद की उपसभापति नीलम देवी और उनके पति रामधनी यादव ने व्यक्तिगत रंजिश में सभापति राजकुमार पर हमला करवाया था। बाद में रामधनी यादव पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। ज्वेलरी लूटकांड के आरोपी का पटना में हाफ एनकाउंटर इससे पहले 22 अप्रैल को पटना पुलिस ने एक हाफ एनकाउंटर किया था। पुलिस ने रामकृष्णा नगर इलाके में एक ज्वेलरी लूट के आरोपी को उसी जगह पर गोली मारी थी जहां अपराधियों ने लूट के माल का बंटवारा किया था। दरअसल 19 अप्रैल को रामकृष्णा नगर में गहनों की लूटपाट हुई थी। इस लूटकांड में पुलिस ने दिलीप को पकड़ा था। पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने बताया था कि दिलीप ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। पुलिस जब उसे लेकर हथियार बरामदगी के लिए गई थी तब उसने पुलिस पर गोली चलाई थी। जिसके बाद मोर्चा संभालते हुए पुलिस ने उसके पैर में गोली मारी थी। पुलिस ने बताया था कि इस लूटकांड में कुल 4 अपराधी शामिल थे। नवादा में 50 हजार के इनामी का एनकाउंटर इससे पहले पुलिस ने 26 अप्रैल को नवादा जिले में एक हाफ एनकाउंटर किया था। यहां रोह थाना क्षेत्र के कोशी गांव में राइस मिल के पास पुलिस की गोली लगने से एक अपराधी घायल हो गया था। पुलिस ने उसके पास से एक देसी कट्टा और 3 कारतूस बरामद किए थे। आरोपी की पहचान मूल रूप से बिहार के ही जमुई जिले के रहने वाले लछुआड़ गांव के मिटू यादव के तौर पर हुई थी। मिंटू पर आरोप था कि वो एक मेडिकल प्रैक्टिशनर अशोक कुमार की निर्मम हत्या में शामिल था। मिंटू के खिलाफ कई अन्य केस भी दूसरे थानों में केस दर्ज है। पुलिस ने उसे अंतरराज्यीय अपरााधी बताया था। मंटू पर 50 हजार रुपये का इनाम था।

चेंबर ऑफ कॉमर्स की पहल पर पुलिस और व्यापारियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर

 रांची  चेंबर आफ कामर्स की पहल पर शनिवार को सुखदेवनगर थाने में पुलिस–व्यवसायी समिति की बैठक की गई। थाना क्षेत्र के व्यवसायियों एवं पुलिस प्रशासन के बीच विधि-व्यवस्था को सुदृढ़ करने, आपसी समन्वय बढ़ाने तथा क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान को लेकर बात की गई। थाना प्रभारी सुनील कुशवाहा ने थाना क्षेत्र में नशाखोरी पर नियंत्रण एवं विधि-व्यवस्था में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि नशाखोरी पर अंकुश लगाने में पुलिस का सहयोग करें। बैठक में बढ़ती नशाखोरी, क्षेत्र के प्रमुख स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने तथा सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। थाना प्रभारी ने बताया कि वर्तमान में सुखदेवनगर थाना में 1 पीसीआर एवं 4 टाइगर मोबाइल कार्यरत हैं। थाना स्तर पर समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में विधि-व्यवस्था में गुणात्मक सुधार हुआ है। चेंबर महासचिव रोहित अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि थाना में आम लोगों के साथ शालीन व्यवहार सुनिश्चित किया जाए ताकि लोग अपनी शिकायत दर्ज कराने में संकोच न करें। ला एंड आर्डर उप समिति के चेयरमैन मुकेश अग्रवाल ने प्रमुख बाजारों एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में पुलिस गश्ती बढ़ाने, असामाजिक तत्वों एवं संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने तथा समय-समय पर व्यापारियों के साथ बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया। सह सचिव नवजोत अलंग एवं सह सचिव रोहित पोद्दार ने थाना स्तर पर पुलिसिंग को बेहतर बनाने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। पूर्व अध्यक्ष किशोर मंत्री ने पुलिस एवं व्यापारियों के बीच मित्रवत वातावरण बनाने पर जोर दिया। सदस्य बिंदल वर्मा एवं शशांक भारद्वाज ने भी क्षेत्र की विधि-व्यवस्था में सुधार हेतु अपने विचार साझा किये। भविष्य में भी इस प्रकार की समन्वय बैठकें आयोजित करने पर सहमति बनी। बैठक में उप समिति के चेयरमैन मुकेश अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष किशोर मंत्री, सदस्य शशांक भारद्वाज, राजेश पोद्दार, रंजीत कुमार, बिंदुल वर्मा सहित क्षेत्र के कई व्यापारी शामिल थे।

महादेव की भक्ति में निकले राइडर, देशभर के ज्योतिर्लिंगों तक पहुंचेगा सफर

जमशेदपुर कहते हैं जब महादेव बुलाते हैं, तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं. इसी आस्था और हिम्मत के साथ जमशेदपुर के राहरगोड़ा निवासी युवा राइडर आशीष झा ने अपने साथी विष्णु शर्मा के साथ 12 ज्योतिर्लिंगों की 50 दिन की यात्रा शुरू की है. रविवार को जब वे जमशेदपुर से निकले, तो उनके चेहरे पर भगवान शिव के प्रति गहरी श्रद्धा और भरोसा साफ दिख रहा था. राहरगोड़ा स्थित उनके आवास और रवानगी स्थल पर परिवार, दोस्त और शुभचिंतकों ने उन्हें माला पहनाकर और तिलक लगाकर शुभ यात्रा की शुभकामनाएं दी. 12 हजार से अधिक किलोमीटर की दूरी तय होने का अनुमान यह 50 दिन की यात्रा होगी, जिसमें लगभग 12 हजार किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की जाएगी. इस दौरान आशीष देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित शिवधामों में जाकर मत्था टेकेंगे. इस यात्रा में वे मुश्किल रास्तों से गुजरेंगे और साथ ही पूरे देश में सनातन संस्कृति और साहसिक जीवनशैली का संदेश भी देंगे. सनातन संस्कृति और पर्यटन का संदेश आशीष झा ने बताया कि इस यात्रा के जरिए वे भारत की अलग-अलग जगहों की भौगोलिक विविधता और सांस्कृतिक एकता को करीब से देखना चाहते हैं. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक एडवेंचर ट्रिप नहीं है, बल्कि इसका मकसद युवाओं को भारतीय संस्कृति, धार्मिक पर्यटन और साहसिक जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है. उनके इस कदम की पूरे शहर में तारीफ हो रही है. खासकर राहरगोड़ा के लोग इसे गर्व की बात मान रहे हैं. राहरगोड़ा से केदारनाथ तक, कुछ इस तरह तय होगी 12 ज्योतिर्लिंगों की दूरी जमशेदपुर के राइडर आशीष झा और उनके साथी विष्णु शर्मा की 50 दिन की बाइक यात्रा किसी कठिन तपस्या से कम नहीं है. इस यात्रा की शुरुआत झारखंड के देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक से होगी. इसके बाद वे उत्तर प्रदेश जाएंगे और काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करेंगे. मध्य भारत की परिक्रमा: इसके बाद यह सफर मध्य प्रदेश के हृदय स्थल की ओर मुड़ेगा. शिप्रा नदी के तट पर स्थित महाकालेश्वर (उज्जैन) और नर्मदा किनारे बसे ओंकारेश्वर में मत्था टेकने के बाद महाराष्ट्र की ओर प्रस्थान करेंगे. महाराष्ट्र के तीन पड़ाव: पश्चिम भारत में प्रवेश करते ही सबसे पहले भीमाशंकर की पहाड़ियों को नापा जाएगा. जिसके बाद नासिक स्थित त्रयंबकेश्वर और फिर एलोरा के समीप घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की बारी आएगी. दक्षिण की ओर बढ़ते कदम: महाराष्ट्र की यह यात्रा सह्याद्री पर्वत श्रृंखलाओं के बीच रोमांच से भरी होगी. महाराष्ट्र से आशीष दक्षिण भारत का रुख करेंगे. कृष्णा नदी के तट पर बसे मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश) का दर्शन करने के बाद यह सफर देश के अंतिम छोर तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम पहुंचेगा. यहां समुद्र तट पर पूजा-अर्चना के बाद यह यात्रा पश्चिम की ओर मुड़ेगी. पश्चिम से हिमालय की ऊंचाई तक: गुजरात के समुद्र तट पर बसे प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ और द्वारका स्थित नागेश्वर का आशीर्वाद लेने के बाद आशीष सीधे हिमालय की वादियों की ओर करेंगे. इस 50 दिवसीय महायात्रा का समापन उत्तराखंड की दुर्गम पहाड़ियों में स्थित केदारनाथ के कपाट पर होगा. जहां जलाभिषेक के साथ इस संकल्प की पूर्णाहूति होगी.

Negligence Rises During Boating at Jharkhand’s Dams; Failure to Wear Life Jackets Emerges as a Leading Cause of Accidents

 रांची  डैम और जलाशयों में बोटिंग के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी लगातार गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। हाल ही में जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे के बाद भी लोग सबक लेने को तैयार नहीं हैं। प्रशासन और बोट संचालकों द्वारा लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य किया गया है, लेकिन पर्यटक बीच पानी में पहुंचते ही सेल्फी लेने के लिए जैकेट उतार देते हैं। यह लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। रांची में भी ऐसे हादसों का इतिहास रहा है। करीब 12 वर्ष पहले बाड़ा तालाब में नाव डूबने से दो लोगों की मौत हो गई थी, जहां कई लोग लाइफ जैकेट नहीं पहने हुए थे। इसी तरह धुर्वा डैम में भी वर्षों पहले लोग डूबे थे, हालांकि उस घटना में जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। इन घटनाओं के बावजूद लोग अब भी लापरवाही बरत रहे हैं। 17 जुलाई 2022 को पंचखेरो डैम में नाव पलटने से एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई थी। कई पर्यटक केवल दिखावे के लिए जैकेट पहनते हैं या उसे ठीक से बांधते भी नहीं हैं, जिससे दुर्घटना के समय वह बेकार साबित हो सकती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है। लाइफ जैकेट की गुणवत्ता और जांच पर भी सवाल डैमों पर उपलब्ध लाइफ जैकेट की नियमित जांच नहीं होती। यह भी सुनिश्चित नहीं किया जाता कि किस व्यक्ति के वजन के अनुसार कौन-सी जैकेट दी जानी चाहिए। कई जैकेट खराब हालत में हैं, लेकिन उनकी समय पर जांच और रखरखाव नहीं हो रहा है। लोगों को सही तरीके से जैकेट पहनने की जानकारी भी नहीं दी जाती, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। बरगी हादसे के बाद पलामू में सख्ती, सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन बरगी डैम हादसे के बाद पलामू जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भीम बैराज डैम, काशी सोत डैम और मुरमा मलय डैम पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अब बिना लाइफ जैकेट किसी भी पर्यटक को बोटिंग की अनुमति नहीं दी जा रही। बोट संचालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे क्षमता से अधिक सवारी न बैठाएं और सभी सुरक्षा नियमों का पालन करें। कोडरमा में 8 मौतों के बाद भी ढिलाई, नियमों की उड़ रही धज्जियां जबलपुर हादसे के बाद कोडरमा जिले के तिलैया और पंचखेरो डैम में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। हालांकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। 17 जुलाई 2022 को पंचखेरो डैम में नाव पलटने से एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई थी। उस हादसे में भी किसी ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। आज भी आम दिनों में लाइफ जैकेट का उपयोग बेहद कम देखने को मिलता है। निरीक्षण के दौरान ही नियमों का पालन होता है, जबकि सामान्य दिनों में लापरवाही जारी रहती है। पतरातू डैम में सख्त नियम, बिना लाइफ जैकेट नहीं मिलेगी एंट्री रांची के पास स्थित पतरातू डैम में सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। नाविक संघ की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि बिना लाइफ जैकेट किसी भी पर्यटक को बोटिंग नहीं कराई जाएगी। नाविकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें गोताखोरी और लाइफ सेविंग तकनीक शामिल है। टिकट काउंटर से लेकर बोट तक हर जगह लाइफ जैकेट के उपयोग को लेकर जागरूकता संदेश लगाए गए हैं। डैम और जलाशयों में सुरक्षा के लिए नियम तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन उनका पालन तभी संभव है जब पर्यटक खुद जिम्मेदारी दिखाएं।

रांची होटल कारोबार पर महंगाई की मार, गैस सिलेंडर महंगा होने से मेन्यू तक हुआ महंगा

 रांची  कमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतों में लगातार हो रही भारी वृद्धि ने रांची के होटल और रेस्टूरेंट कारोबार को संकट में डाल दिया है। बढ़ती लागत के कारण संचालकों ने अब गैस की जगह कोयले का सहारा लेना शुरू कर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि गैस सिलिंडर का उपयोग अब केवल छौंक लगाने तक सीमित रह गया है। शहर में 19 किलो के कमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमत (Commercial Gas Cylinder Price) बढ़कर 3250.50 रुपये पहुंच गई है। एक मई को केंद्र सरकार द्वारा कीमत में 994 रुपये की भारी बढ़ोतरी (LPG Price Hike May 2026) की गई, जिससे होटल व्यवसायियों की चिंता और बढ़ गई। जनवरी 2026 में यह कीमत 1733 रुपये थी, जो महज चार महीनों में दोगुनी हो गई है। कमर्शियल गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमतों ने होटल उद्योग की कमर तोड़ दी है। यदि जल्द राहत नहीं मिली, तो इसका असर न सिर्फ कारोबार, बल्कि आम ग्राहकों की जेब पर भी लगातार पड़ता रहेगा। वहीं कुछ होटल व रेस्टूरेंट संचालकों ने बताया कि स्थिति में अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो होटल व रेस्टूरेंट बंद करना भी पड़ सकता है। हर महीने बढ़ती रहीं कीमतें गैस सिलिंडर की कीमतों में हर महीने इजाफा हुआ है। जनवरी और फरवरी में 111.50 रुपये, मार्च में 144 रुपये, अप्रैल में 218.50 रुपये और मई में अचानक 994 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। इसी तरह 47.5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत भी बढ़कर 8120 रुपये हो गई है। कोयले पर बढ़ी निर्भरता गैस की बढ़ती कीमतों के चलते होटल संचालकों ने अब कोयले का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। रांची के बाजार में 20 किलो कोयले की बोरी 260 से 300 रुपये (Coal Price in Ranchi) में मिल रही है। रेस्टूरेंट व होटल संचालकों ने बताया कि एक सप्ताह में लगभग 1500 रुपये और महीने में 4000 से 5000 रुपये तक का कोयला जलाया जा रहा है। मेन्यू महंगा, ग्राहकों पर बोझ बढ़ती लागत का असर सीधे ग्राहकों पर पड़ रहा है। होटल और रेस्टूरेंट संचालकों ने खाने के हर आइटम पर 20 से 30 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। उनका कहना है कि लागत बढ़ने के कारण यह कदम उठाना मजबूरी बन गया है। होटल संचालकों का आरोप है कि पहले से ही कमर्शियल गैस सिलिंडर की उपलब्धता एक बड़ी समस्या थी। कई बार उन्हें ब्लैक में महंगे दाम पर सिलेंडर खरीदना पड़ता था। अब कीमतों में बढ़ोतरी के बाद यह समस्या और गंभीर हो गई है। बड़े होटल अभी कर रहे मंथन शहर के बड़े होटलों ने फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। उनका कहना है कि उनके पास अभी पुराना स्टाक मौजूद है। स्टाक खत्म होने के बाद ही मेन्यू की कीमतों में बदलाव पर निर्णय लिया जाएगा। वहीं, कई शहर के बड़े होटल संचालकों ने बताया कि उनके पास पीएनजी की सर्विस है, जिसके कारण उन्हें एजपीजी गैस सिलिंडर की कीमत में बढ़ोतरी से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।     गैस सिलिंडर महंगा होने के बाद लोग कोयला पर निर्भर हो गए है। लेकिन अगर कोयला की कीमत में भी इजाफा हुआ तो लोग दुकान बंद करने पर मजबूर होंगे। मध्य दर्जे के रेस्टूरेंट गैस सिलिंडर की संकट से जूझ रहे हैं। – प्रसंजीत मंडल, मैनेजर, बिरियानी बाय ब्रोस, बहुबाजार