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यूरोप में गर्मी का कहर! सूखे नदी-तालाब, घटी मिट्टी की नमी; अगस्त ने बनाया तापमान का रिकॉर्ड

नई दिल्ली अगस्त 2026 दुनिया का अब तक का सबसे गर्म अगस्त रहा. यूरोपीय संघ की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने दुनिया का औसत तापमान जुलाई 2023 के रिकॉर्ड के बराबर रहा. अगस्त में धरती का औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.65 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा।  इस बढ़ती गर्मी का असर यूरोप में भी साफ दिखा. जून से अगस्त 2026 की अवधि रिकॉर्ड में सबसे गर्म गर्मियों में शामिल रही और 2024 के स्तर के बराबर रही. पूरे यूरोप में 2026 की गर्मी रिकॉर्ड में तीसरी सबसे गर्म रही, जबकि पश्चिमी यूरोप में यह अब तक की सबसे गर्म गर्मी रही।  यूरोप में बारिश कम, सूखा बढ़ा अगस्त में यूरोप के बड़े हिस्से में बारिश कम हुई. इससे जमीन में नमी कम हो गई और कई नदियों में पानी भी घट गया. फ्रांस, ब्रिटेन, हंगरी, रोमानिया और सर्बिया में गंभीर सूखे की स्थिति रही. राइन, दानुबे, सदर्न बग और ड्नीपर जैसी बड़ी नदियों में पानी का बहाव सामान्य से काफी कम रहा।  कई इलाकों में लंबे समय तक गर्म और सूखा मौसम बना रहा. अगस्त के आखिर में कुछ जगहों पर बारिश हुई, जिससे सूखे से थोड़ी राहत मिली. वहीं, कुछ इलाकों में ज्यादा बारिश के कारण बाढ़ भी आई।  समुद्र भी रहा बहुत गर्म अगस्त में एक्सट्रा-पोलर महासागरों का औसत सी सरफेस टेम्परेचर (SST) भी रिकॉर्ड स्तर पर रहा. यह मार्च 2024 के रिकॉर्ड के बराबर था. वहीं, एक्सट्रा-पोलर महासागर का रोजाना का सबसे ज्यादा SST 21.11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।  ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में भी समुद्र की सतह काफी गर्म रही. यहां अल नीनो की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है. ग्लोबल वार्मिंग के साथ समुद्र के बढ़ते तापमान का असर दुनिया के मौसम पर भी पड़ सकता है।  आर्कटिक में भी कम हुई समुद्री बर्फ अगस्त में आर्कटिक सी आइस का औसत फैलाव रिकॉर्ड में 12वां सबसे कम रहा. यानी आर्कटिक में समुद्री बर्फ का क्षेत्र सामान्य के मुकाबले काफी कम रहा. गर्मी और सूखे का असर इंडोनेशिया में जंगलों की आग पर भी पड़ रहा है. अगस्त में वहां मौसम जंगलों में मौसमी आग के और बढ़ने के लिए अनुकूल रहा।  कॉपरनिकस के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में बढ़ती गर्मी का असर अब कई जगहों पर साफ दिखाई दे रहा है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फॉसिल फ्यूल्स का इस्तेमाल कम करना, क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देना और बदलते मौसम के असर से निपटने की तैयारी करना जरूरी है। 

रिकॉर्डतोड़ गर्मी से यूरोप बेहाल! फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन में 40°C पार, आखिर क्यों ज्यादा प्रभावित होते हैं यूरोपीय?

लंदन /पेरिस  यूरोप इस समय रिकॉर्डतोड़ हीटवेव की चपेट में है. फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. भीषण गर्मी का असर अब सिर्फ लोगों की सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों, रेल नेटवर्क और बिजली व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है।  सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में फ्रांस की सड़कों की ऊपरी परत भीषण गर्मी के कारण नरम पड़ती और पिघलती नजर आ रही है. वहीं जर्मनी में अत्यधिक तापमान की वजह से ट्राम की पटरियां टेढ़ी हो गईं, जिसके कारण कई जगह सेवाएं रोकनी पड़ीं या उनकी रफ्तार कम करनी पड़ी।  रॉयटर्स के मुताबिक, यह हीटवेव 20 जून के आसपास शुरू हुई और कुछ इलाकों में सामान्य से 18 डिग्री सेल्सियस तक अधिक तापमान दर्ज किया गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति 'ओमेगा ब्लॉक' नाम के मौसमीय पैटर्न और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त असर का परिणाम है. सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जो यूरोप में गर्मी की भयावह स्थिति को दिखाते हैं।  भारतीयों से ज्यादा यूरोपीय लोगों को क्यों सताता है? जब यूरोप में तापमान 40 डिग्री पहुंचता है तो लोग कहते हैं कि जीवन रुक गया है. अस्पताल भर जाते हैं. मौतें बढ़ जाती हैं. वहीं भारत में कई इलाकों में 40-45 डिग्री आम बात है, लोग काम करते रहते हैं. यह फर्क सिर्फ तापमान का नहीं, बल्कि कई अन्य कारणों की वजह से है. आइए समझते हैं दोनों में अंतर…  नमी का असर – सबसे बड़ा अंतर सबसे महत्वपूर्ण अंतर ह्यूमिडिटी (नमी) का है. भारत में गर्मी के मौसम में नमी बहुत ज्यादा होती है, लेकिन लोग इससे अभ्यस्त हैं. यूरोप में जब 40 डिग्री आता है तो अक्सर सूखी गर्मी होती है, लेकिन कई बार नमी भी बढ़ जाती है. जब नमी ज्यादा होती है तो पसीना सूखता नहीं है. शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं हो पाता. इसे वेट बुल्ब टेम्परेचर कहते हैं. यूरोप में 40 डिग्री के साथ अगर नमी 60-70% हो जाए तो इंसान के लिए खतरनाक हो जाता है. भारत में लोग लंबे समय से गर्मी झेल रहे हैं, इसलिए उनका शरीर बेहतर तरीके से ढल जाता है।  ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एयर कंडीशनर (AC) खरीदने के लिए लोगों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं. दुकान के बाहर इतनी भीड़ है कि मानो खरीदारी नहीं, बल्कि होड़ मची हो। वहीं एक अन्य वीडियो में भीषण गर्मी के कारण सड़क का डामर नरम पड़ता और पिघलता नजर आ रहा है।  एक और वीडियो में यूरोप के समुद्र तटों (बीच) पर लोगों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है. गर्मी से राहत पाने के लिए हजारों लोग समुद्र किनारे पहुंच गए, जिससे वहां मेले जैसा माहौल बन गया। फ्रांस में गर्मी के कारण अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है. कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई, जबकि गर्म नदियों के कारण कुछ परमाणु बिजली संयंत्रों का उत्पादन भी घटाना पड़ा. इटली, जर्मनी और मध्य यूरोप के कई हिस्सों में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यूरोप में कभी 'सदी में एक बार' आने वाली ऐसी भीषण हीटवेव अब जलवायु परिवर्तन की वजह से कहीं ज्यादा बार देखने को मिल सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाएं और गंभीर हो सकती हैं. इमारतें और घर कैसे बने हैं? यूरोप की इमारतें ठंड के लिए बनाई गई हैं. दीवारें मोटी, इंसुलेशन अच्छा पर गर्मी निकालने की व्यवस्था कम. जब 40 डिग्री की गर्मी पड़ती है तो घर के अंदर भी तापमान बहुत बढ़ जाता है. वहां एयर कंडीशनर कम घरों में हैं।  भारत में घरों में छतें ऊंची, खिड़कियां बड़ी, पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल आम है. लोग दोपहर में आराम करते हैं. शाम को काम करते हैं. यूरोप में ऐसी आदत नहीं है. स्कूल, ऑफिस और अस्पताल भी गर्मी के लिए तैयार नहीं होते।  सूर्य की तीव्रता यूरोप हाई एल्टीट्यूड पर स्थित है, इसलिए वहां गर्मियों में दिन बहुत लंबे (15 से 17 घंटे) हो जाते हैं. साफ आसमान और कम वायु प्रदूषण के कारण सीधी धूप बहुत तेज और चुभने वाली लगती है।  रात का तापमान और आराम यूरोप की हीटवेव में रात का तापमान भी बहुत ऊंचा रहता है. शरीर को ठंडा होने का मौका नहीं मिलता. लगातार गर्मी से थकान, दिल का दौरा और मौतें बढ़ जाती हैं. भारत में दिन में गर्मी ज्यादा होती है लेकिन रात में तापमान काफी गिर जाता है. इससे शरीर को राहत मिलती है. यही वजह है कि भारत में 40 डिग्री सहन करना यूरोप की तुलना में आसान पड़ता है।  लोगों की आदत और स्वास्थ्य भारतीय शरीर गर्मी के लिए ज्यादा तैयार रहता है. बचपन से गर्मी में खेलना, काम करना सिखाया जाता है. पसीना आना, ज्यादा पानी पीना, छाछ-निम्बू पानी जैसी चीजें आम हैं।  यूरोप में ज्यादातर लोग ठंडे मौसम में रहते हैं. उनकी त्वचा पतली, शरीर गर्मी सहने के लिए कम तैयार होता है. खासकर बुजुर्ग और बच्चे जल्दी प्रभावित होते हैं. फ्रांस, जर्मनी, इटली जैसी जगहों पर 40 डिग्री में हजारों अतिरिक्त मौतें हो जाती हैं।  तैयारियां और सरकारी व्यवस्था भारत में हीटवेव एक्शन प्लान है. स्कूलों की छुट्टी, पानी की व्यवस्था, जागरूकता अभियान चलते हैं. लोग जानते हैं कि दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर कम निकलना चाहिए।  यूरोप में अचानक गर्मी आने पर सरकारें भी हैरान रह जाती हैं. अस्पताल तैयार नहीं होते, बिजली की मांग बढ़ने से ग्रिड फेल हो जाते हैं. ट्रेनें रुक जाती हैं, सड़कें पिघल जाती हैं।  जलवायु परिवर्तन का प्रभाव वैज्ञानिक कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन यूरोप को तेजी से गर्म कर रहा है. पहले वहां 40 डिग्री बहुत दुर्लभ था, अब लगभग हर साल हो रहा है. यूरोप अब भी अनुकूलन (Adaptation) की प्रक्रिया में है  भारत गर्म देश है, इसलिए 40-45 डिग्री नया नहीं. लेकिन भारत को भी चिंता करनी चाहिए क्योंकि गर्मी और बढ़ रही है. दिल्ली, राजस्थान में 48-50 डिग्री भी पहुंच रहा है।  क्या सीख सकते हैं दोनों देश?     यूरोप को भारत से सीखना चाहिए- हल्के कपड़े, दिन की आदतें बदलना, … Read more

पंजाब में गर्मी का कहर जारी, 41 डिग्री तक पहुंचा तापमान; पहाड़ी इलाकों से लगे जिलों में बारिश की संभावना

अमृतसर  पंजाब में वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर बने रहने के बावजूद गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है। शुक्रवार को राज्य का अधिकतम तापमान एक बार फिर 41 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। सबसे अधिक तापमान पटियाला में 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों तक हिमाचल प्रदेश से सटे जिलों में हल्की बारिश, गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना बनी रहेगी, जबकि राज्य के अधिकांश मैदानी इलाकों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 27 जून (शनिवार) को पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर और रूपनगर जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना है। गुरदासपुर जिले में भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। इन जिलों के लिए निगरानी श्रेणी का अलर्ट जारी किया गया है। आने वाले दिन कोई अलर्ट नहीं 28 जून: बारिश का दायरा कुछ सिमट जाएगा। इस दिन पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और रूपनगर में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। राज्य के शेष जिलों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है, लेकिन मौसम विभाग ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया है। 29 जून: वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी पंजाब तक सीमित रहेगा। पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और रूपनगर में छिटपुट बारिश हो सकती है, जबकि अन्य जिलों में वर्षा की संभावना नहीं है।  30 जून: को भी लगभग यही स्थिति बनी रहेगी। पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और रूपनगर में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना है। बाकी जिलों में मौसम शुष्क रहने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन जिलों में वर्षा का अनुमान है, वहां भी व्यापक बारिश नहीं होगी, बल्कि केवल कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा दर्ज की जा सकती है। सामान्य से 1.7 डिग्री बढ़ा तापमान शुक्रवार को भी पंजाब में गर्मी का असर बरकरार रहा। औसत अधिकतम तापमान में 1.9 डिग्री की बढ़ौतरी देखने को मिली। राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान पटियाला में 41.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके बाद बठिंडा में 40.8, भाखड़ा बांध 39.5, लुधियाना 39.0, मोहाली 38.5, गुरदासपुर (बल्लोवाल) 38.0, पठानकोट 37.8, जालंधर 37.3, फिरोजपुर और होशियारपुर में 37.1 तथा अमृतसर में 35.0 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 1.7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। हालांकि वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक उत्तर-पूर्वी और हिमाचल से सटे जिलों में बादलों की आवाजाही व हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी, लेकिन दक्षिणी और मध्य पंजाब में गर्मी का असर फिलहाल जारी रहने का अनुमान है।

यूपी में गर्मी का कहर जारी, 30 जून से बारिश और तेज हवाओं की संभावना

लखनऊ मॉनसून की कमजोर सक्रियता के बीच यूपी के अधिकांश हिस्से भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल राहत के आसार कम हैं। अगले 24 घंटों में पश्चिमी यूपी में मौसम शुष्क रहेगा। जबकि पूर्वी यूपी के कुछ इलाकों में हल्की बारिश और गरज-चमक हो सकती है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के लखनऊ द्वारा गुरुवार को जारी मौसम बुलेटिन के अनुसार पूर्वांचल के अनेक स्थानों पर लू तथा कुछ स्थानों पर भीषण लू चलने की संभावना है। राजधानी लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में आसमान मुख्यतः साफ रहने का अनुमान है। यहां अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना व्यक्त की गई है। संगमनगरी का बढ़ा पारा प्रदेश में तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया। प्रयागराज 43.0 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश के सर्वाधिक गर्म शहरों में शामिल रहा, जबकि सुल्तानपुर में 42.9 डिग्री, लखीमपुर खीरी में 42.4 डिग्री, बलिया और फतेहपुर में 42.3 डिग्री तथा वाराणसी (बीएचयू) में 42.2 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। अधिकांश स्थानों पर तापमान सामान्य से चार से सात डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। लखनऊ में 40 तापमान राजधानी लखनऊ में गुरुवार को अधिकतम तापमान 39.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.8 डिग्री अधिक रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 30.0 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.6 डिग्री अधिक है। शहर में दिनभर गर्म हवाओं और उमस का असर बना रहा तथा वर्षा नहीं हुई। मौसम के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को सहारनपुर में अधिकतम तापमान 34.0 डिग्री सेल्सियस था, जो मंगलवार को बढ़कर 37.0 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। बुधवार को पारा 39.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि गुरुवार को यह 40.0 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। न्यूनतम तापमान भी 27 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा, जिससे उमस में काफी वृद्धि हुई। गुरुवार को सुबह से ही तेज धूप निकली और दोपहर के समय गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। छिटपुट बारिश की संंभावना मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रदेश में मानसून की सक्रियता बढ़ने तक गर्मी और लू से तत्काल राहत मिलने की संभावना कम है। हालांकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में छिटपुट वर्षा और गरज-चमक की गतिविधियां स्थानीय स्तर पर तापमान में मामूली गिरावट ला सकती हैं। इस दिन में मेघगर्जन की संभावना मौसम विभाग की मानें तो 29 जून को पूर्वी, 30 और 1 जून को यूपी के अंधिकाश हिस्सों में बारिश की संभावना है। इसे लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। यानी मेघगर्जन-वर्जपात के साथ झोकेजार हवा (40 से 50 किमी/घंटा) चलने के आसार हैं।

गर्मी और बारिश का डबल अटैक! मध्यप्रदेश के 5 जिलों में हीटवेव, जानें कब पहुंचेगा मानसून

भोपाल  मध्य प्रदेश में 26 जून तक हीटवेव (लू), गर्मी और आंधी-बारिश वाला मौसम रहेगा। मानसून के नहीं आने और प्री-मानसून की एक्टिविटी कम होने से उमस-गर्मी बढ़ी है। पिछले 2 दिन से जबलपुर संभाग में लू का असर भी है। मौसम केंद्र (IMD) भोपाल ने अगले 4 दिन तक जबलपुर, रीवा और सागर संभाग के जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। सोमवार को नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, उमरिया और डिंडौरी में दिन में गर्म हवाएं चलेंगी, जबकि शाम के बाद आंधी-बारिश होने का अनुमान है। ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, गुना, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, देवास, सीहोर, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में गर्मी का असर रहने का अनुमान है। इन जिलों में आज बारिश हीटवेव-गर्मी के बीच 21 से अधिक जिलों में आंधी-बारिश वाला मौसम भी रहेगा। झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, मैहर, अनूपपुर, कटनी, दमोह, सागर, विदिशा और अशोकनगर में तेज आंधी का अलर्ट है। रायसेन में ढाई इंच पानी गिरा, भोपाल-सतना में भी तेज बारिश प्रदेश में रविवार को भी तेज आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। रायसेन में 61 मिमी यानी, करीब ढाई इंच पानी गिर गया। भोपाल में दोपहर में तेज बारिश हुई, जबकि सतना में पौन इंच बारिश दर्ज की गई। जबलपुर, खजुराहो, नौगांव, सिवनी में भी बारिश का दौर बना रहा। रविवार को दिन के तापमान में गिरावट आई है। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 35.3 डिग्री, इंदौर में 37.1 डिग्री, ग्वालियर में 39.7 डिग्री, उज्जैन में 36 डिग्री और जबलपुर में पारा 38 डिग्री सेल्सियस रहा। पचमढ़ी में सबसे कम 32.2 डिग्री सेल्सियस रहा। सिवनी-शिवपुरी में 35 डिग्री, रायसेन में 36 डिग्री, सागर-टीकमगढ़ में 36.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दतिया में सबसे ज्यादा 40.6 डिग्री रहा। प्रदेश में मानसून 4 दिन लेट प्रदेश में मानसून 7 दिन लेट हो गया है, जबकि इसकी एंट्री को 4 दिन और लगेंगे। IMD ने 25 जून के बाद प्रदेश में मानसून के दस्तक देने का अनुमान जताया है। 23 जून को यह छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र की ओर आगे बढ़ सकता है। 15 जून तक मानसून की एंट्री हो जाती है मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में मानसून की सामान्यत: 15 जून के आसपास एंट्री हो जाती है, लेकिन इस बार 22 जून तक मानसून का अता-पता नहीं है। तेलंगाना में 8 जून से ही मानसून अटका हुआ है। हालांकि, यह धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में 23 जून को छत्तीसगढ़ आने की संभावना है। रफ्तार तेज रहती है तो यह एमपी में 25 जून के आसपास आ सकता है। पिछली बार यह 16 जून को ही आ गया था। बारिश का आंकड़ा घटा मानसून के लेट होने से जून की सामान्य बारिश का आंकड़ा भी तेजी से घट रहा है। प्रदेश में 48 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें से पूर्वी हिस्से जैसे- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के 24 जिलों में 69 प्रतिशत पानी कम गिरा है। पश्चिमी हिस्से के संभाग- भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम में आंकड़ा 29 प्रतिशत कम है। प्रदेश के 55 में से 45 जिलों में बारिश का आंकड़ा माइनस में है। अलीराजपुर में एक बूंद भी रिकॉर्ड नहीं हुई है, जबकि भोपाल में सबसे ज्यादा साढ़े 4 इंच पानी गिर चुका है। देश के मौसम का हाल दिल्ली और एनसीआर इलाके के लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि मौसम विभाग ने आंधी-तूफान के साथ बारिश का अनुमान लगाया है. इससे दिन भर में अधिकतम तापमान 38 और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की उम्मीद है. मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि दिल्ली में दोपहर के समय आंधी-तूफान और तेज हवा चल सकती है. हवा की स्पीड 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे पहुंच सकती है, और हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।  उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी भारत आईएमडी ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, राजस्थान और यूपी सहित उत्तर-पश्चिम में छिटपुट वर्षा का अनुमान लगाया है. हिमाचल और उत्तराखंड के लिए भारी अलर्ट जारी किए गए हैं, क्योंकि दोनों में 22-23 जून के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की गति से गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं, जो 60 किमी प्रति घंटे की गति तक पहुंच सकते हैं. पूरे सप्ताह अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक वर्षा की गतिविधि होने की संभावना है।  पूर्वी और पश्चिमी भारत सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 23-25 ​​जून तक भारी बारिश होने की उम्मीद है. बिहार, झारखंड और ओडिशा में भी तेज हवा के साथ गरज के साथ बारिश होने की उम्मीद है. 22 जून को हवा की स्पीड 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच सकती है. मौसम विभाग ने 22-28 जून के दौरान गुजरात, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में बारिश की गतिविधि का अनुमान लगाया है।  मध्य भारत मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 22 से 26 जून तक बारिश जारी रहने की संभावना है. मौसम विभाग ने पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में कहीं-कहीं बारिश, गरज, बिजली कड़कने और तेज हवा का अनुमान लगाया है. मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ़्तार से तेज़ हवा भी चल सकती हैं।  दक्षिणी भारत दक्षिणी भारत में इस हफ़्ते तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में बारिश होने की उम्मीद है. 22 जून को तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल में भारी बारिश होगी।  लू के हालात हीटवेव की स्थिति 22-25 जून के दौरान छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर हो सकती है. कर्नाटक और ओडिशा में आज रात के समय मौसम गर्म रहने का अनुमान है। 

भीषण गर्मी से पंजाब बेहाल, पारा 42.5 डिग्री पार; थर्मल प्लांट बंद होने से बिजली संकट गहराया

चंडीगढ़  पंजाब में पारा 42.5 डिग्री पहुंच गया। हालांकि देर शाम कई जिलों में तेज हवाओं के साथ हुई बरसात ने गर्मी से राहत दिलाई। पंजाब में तापमान 1.5 डिग्री की वृद्धि के साथ सामान्य से 2.1 डिग्री ऊपर हो गया है। आने वाले दिनों में इस भीषण गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।  मौसम विभाग ने अगले तीन दिन के लिए पंजाब में यलो अलर्ट जारी कर दिया है। इस दौरान पंजाब में कई जगहों पर गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर की गति से तेज हवाएं चलेंगी और बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की कमी दर्ज की जा सकती है। इसके बाद 25 जून से पंजाब में मौसम शुष्क बन जाएगा। पंजाब के न्यूनतम तापमान में 0.6 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई। यह सामान्य के नजदीक बना हुआ है। सबसे कम 22.8 डिग्री का न्यूनतम पारा रूपनगर का दर्ज किया गया। पंजाब में 42.5 डिग्री के साथ बठिंडा सबसे ज्यादा तपा। अमृतसर का अधिकतम पारा 38.3 डिग्री, लुधियाना का 39.8 डिग्री, पटियाला का 40.6 डिग्री, पठानकोट का 39.9 डिग्री, बठिंडा का 42.5 डिग्री, फिरोजपुर का 39.0 डिग्री, फाजिल्का का 40.6 डिग्री, होशियारपुर का 37.1 डिग्री, एसबीएस नगर का 37.3 डिग्री और रूपनगर का 39.1 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 27.1 डिग्री, लुधियाना का 29.0 डिग्री, पटियाला का 28.0 डिग्री, पठानकोट का 26.8 डिग्री, बठिंडा का 28.0 डिग्री, फाजिल्का का 26.1 डिग्री, फिरोजपुर का 27.0 डिग्री, होशियारपुर का 24.2 डिग्री दर्ज किया गया। बिजली संकट गहराया  भीषण गर्मी और धान सीजन के मध्य सूबे में बिजली संकट गहरा गया है। 920 मेगावाट की क्षमता वाले लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांट की सभी चार यूनिट बंद हो गई हैं। इसके अलावा गोइंदवाल थर्मल का 270 मेगावाट की दो नंबर यूनिट और रोपड़ थर्मल प्लांट की 210 मेगावाट की क्षमता की 4 नंबर यूनिट भी बॉयलर ट्यूब में लीकेज के चलते बंद है।  सरकारी क्षेत्र के सभी तीन थर्मल प्लांटों के छह यूनिट बंद पड़ने से कुल 1400 मेगावाट बिजली उत्पादन बंद पड़ गया है। वहीं रविवार को पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग 15568 मेगावाट दर्ज की गई। लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांट की तीन यूनिट तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं, वहीं चौथी यूनिट भारी मात्रा में राख जमा होने के कारण ठप पड़ गई है। प्लांट के पूरी तरह से बंद होने का मुख्य कारण मुलाजिमों की हड़ताल को माना जा रहा है। थर्मल प्लांट के करीब 1800 ठेका मुलाजिम इस समय हड़ताल पर हैं। मुलाजिम मांग कर रहे हैं कि उन्हें ठेकेदारों के अधीन रखने के बजाय सीधे तौर पर पावरकाॅम के ठेके पर लिया जाए। ठेका मुलाजिमों का यह आंदोलन हालांकि 9 जून से चल रहा है लेकिन 16 जून से सभी मुलाजिम मुकम्मल हड़ताल पर चले गए हैं। इसके मद्देनजर प्लांट प्रबंधन ने जमा हुई राख को तुरंत साफ करने और बिजली उत्पादन दोबारा बहाल करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की मांग की है। प्लांट में करीब 500 रेगुलर मुलाजिम हैं जिनमें से करीब आधे केवल दफ्तरी कामों में लगे हुए हैं। इस कारण फील्ड के काम के लिए स्टाफ की बड़ी कमी आ रही है।  अघोषित कट भी लगने की संभावना  रविवार को पावरकाॅम के पास केवल 4143 मेगावाट बिजली की ही उपलब्धता रही। इसमें से प्रमुख तौर पर प्राइवेट क्षेत्र के तलवंडी साबो और राजपुरा थर्मल प्लांटों से 3023 मेगावाट, सरकारी क्षेत्र के थर्मलों से मात्र 609 मेगावाट, हाइडल प्रोजेक्टों से 369 मेगावाट बिजली की उपलब्धता हुई। पावरकाॅम अधिकारियों के मुताबिक गर्मी के इस पीक सीजन में पावरकाॅम को सस्ती बिजली अपने थर्मल प्लांटों से मिलनी थी लेकिन तकनीकी खराबी के चलते छह यूनिट बंद होने से अब बाहर से महंगे दामों में बिजली खरीदनी पड़ रही है। अधिकारियों के मुताबिक जरूरत पड़ने पर 10 रुपये प्रति यूनिट तक के दामों पर बाहर से बिजली खरीदी जा रही है। बिजली की मांग को 16000 मेगावाट से कम रखने के लिए अघोषित कट भी लगाए जा सकते हैं।  

लू और गर्म रात का कहर जारी, बिहार में मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

पटना बिहार वासियों को फिलहाल गर्मी से राहत नहीं मिलने वाली है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आज यानी 20 जून से 22 जून तक राज्य के पश्चिमी और मध्य भागों में लू (हीट वेव) और गर्म रात (वॉर्म नाइट) जैसी स्थिति बने रहने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम और मध्य बिहार के कई जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। साथ ही पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी गर्म एवं शुष्क हवाओं के प्रभाव से दिन के समय तेज गर्मी महसूस होगी। रात में भी न्यूनतम तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहने के कारण लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने कहा कि 20 जून को भी उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार के जिलों में हीट वेव जैसी स्थिति बनी रह सकती है। इसके साथ ही उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज हवा चलने के आसार हैं। वहीं 21 जून को दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य जिलों में कुछ स्थानों पर उष्ण लहर चलने की संभावना जताई गई है। वहीं उत्तर-मध्य, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व बिहार के कई इलाकों में मेघ गर्जन, वज्रपात तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। मौसम विभाग ने कहा कि 22 जून को भी दक्षिण-पश्चिम बिहार में हीट वेव का असर जारी रह सकता है। दूसरी ओर अररिया, किशनगंज सहित सीमांचल क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मेघ गर्जन, वज्रपात और कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना है। कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा और सुपौल जिलों में भी 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने लोगों से सावधान रहने की अपील की है। पिछले 24 घंटें में कहां-कैसा रहा मौसम? पिछले 24 घंटों के दौरान बिहार के मौसम में मिले-जुले हालात देखने को मिले। मधुबनी जिले के एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई, जबकि राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। वहीं सारण, बक्सर और कैमूर जिलों में उष्ण लहर (हीट वेव) का प्रभाव बना रहा। राज्य का सर्वाधिक अधिकतम तापमान कैमूर (भभुआ) में 42.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में 22.2 डिग्री सेल्सियस रहा। अधिकतम तापमान 29.9 से 42.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.2 से 29.9 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया। कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। मोतिहारी में 46 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सबसे तेज हवा चली। वर्षा की बात करें तो राजनगर में सर्वाधिक 83 मिमी बारिश हुई, जबकि लौकही में 53.2 मिमी, बरबीघा में 53 मिमी, गिरियक में 50.4 मिमी और बेनीपट्टी में 46.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इससे कई क्षेत्रों में लोगों को गर्मी से राहत मिली, हालांकि दक्षिण-पश्चिम बिहार के कुछ जिलों में गर्मी का असर बरकरार रहा। भीषण गर्मी का स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लू के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, अत्यधिक थकान और अन्य गर्मी जनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसका सबसे अधिक असर बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, लंबे समय से बीमार लोगों और खुले में काम करने वाले श्रमिकों पर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने स्पष्ट कहा कि लंबे समय तक धूप में रहने या अत्यधिक शारीरिक श्रम करने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में अधिक सावधानी बरतें। मौसम विभाग ने कहा कि लोगों को अत्यधिक गर्मी में कठिन और श्रमसाध्य कार्य करने से बचें। साथ ही चाय, कॉफी, कार्बोनेटेड शीतल पेय और अधिक प्रोटीनयुक्त या बासी भोजन के सेवन से भी परहेज करने को कहा गया है। लक्षण दिखें तो फौरन डॉक्टर को कॉल करें मौसम विभाग ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति में तेज बुखार, चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, सिरदर्द, भ्रम की स्थिति या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत छायादार और ठंडी जगह पर ले जाएं तथा प्राथमिक उपचार देने के बाद नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें।  

चौंकाने वाली रिपोर्ट: 2013 के मुकाबले अब भारत में दोगुने दिनों तक पड़ रही हीटवेव

नई दिल्ली जलवायु परिवर्तन का असर अब भारत में साफ और बेहद खतरनाक रूप में दिखने लगा है. देश में पर्यावरण, वन्यजीव और मौसम के पैटर्न में बड़े बदलाव आ रहे हैं. सबसे चिंताजनक स्थिति हीटवेव की है, जिसके दिनों में पिछले कुछ वर्षों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इन आंकड़ों से साफ है कि भारत एक तरफ जहां गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ तकनीक और संरक्षण के जरिए इनसे निपटने की कोशिशें भी की जा रही हैं।  हीटवेव का कहर: 13 साल में दोगुने हुए लू के दिन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में क्लाइमेट चेंज के कारण हीटवेव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. अगर पिछले 13 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत में हीटवेव के दिनों की संख्या दोगुनी हो चुकी है. साल 2013 में जहां देश में लगभग 100 दिन हीटवेव के दर्ज किए गए थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 200 दिनों के पार पहुंच चुका है।  सरकार द्वारा संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में भारतीय क्षेत्र में रिकॉर्ड 554 हीटवेव दिन देखे गए, जबकि साल 2023 में यह संख्या 230 दिन थी. यानी सिर्फ एक साल के भीतर ही हीटवेव के दिनों में दोगुने से भी ज्यादा का उछाल आया है, जो यह दर्शाता है कि ग्लोबल वार्मिंग और स्थानीय मौसमी बदलाव कितनी तेजी से भारत को अपनी चपेट में ले रहे हैं।  भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, जब किसी क्षेत्र में अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा हो जाए और यह स्थिति कम से कम दो दिन तक बनी रहे, तो उसे हीटवेव कहा जाता है. मैदानी इलाकों में 40 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान हीटवेव की श्रेणी में आता है।  हीटवेव सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि लू का रूप ले लेती है, जो इंसानी शरीर के लिए बेहद खतरनाक होती है. विशेष रूप से गरीब, मजदूर वर्ग, बुजुर्ग और बच्चे इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।  13 सालों में दोगुनी हुई हीटवेव की संख्या पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के आंकड़ों से साफ पता चलता है कि 2013 के मुकाबले अब हीटवेव के दिन दोगुने हो गए हैं. पहले जहां हीटवेव मुख्य रूप से अप्रैल-मई तक सीमित रहती थी, अब मार्च से जून तक और कभी-कभी जुलाई में भी इसका असर दिखने लगा है।   उत्तर भारत, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में हीटवेव की अवधि और तीव्रता बढ़ गई है. 2024-2025 के ग्रीष्मकाल में कई राज्यों में 40-45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान कई हफ्तों तक बना रहा, जिसने रिकॉर्ड तोड़ दिए।  जलवायु परिवर्तन क्यों जिम्मेदार? जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान बढ़ रहा है. भारत में औसत तापमान 0.6 से 0.7 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है. ग्रीनहाउस गैसों (कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन आदि) की बढ़ती मात्रा वायुमंडल को गर्म कर रही है. मानवीय गतिविधियां जैसे जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल, जंगलों की कटाई, शहरीकरण और औद्योगीकरण इस वृद्धि के मुख्य कारण हैं. जलवायु मॉडल बताते हैं कि अगर ग्लोबल वार्मिंग यूं ही जारी रही, तो 2050 तक हीटवेव की संख्या और अवधि और भी ज्यादा बढ़ जाएगी।  क्षेत्रीय प्रभाव और हॉटस्पॉट     उत्तर भारत और इंडो-गंगा प्लेन: दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.     पश्चिम भारत: राजस्थान और गुजरात में लंबे समय तक 45-48 डिग्री तापमान रहता है.     मध्य और दक्षिण भारत: महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में भी नई हीटवेव हॉटस्पॉट बन रहे हैं. शहरों में शहरी हीट आइलैंड इफेक्ट के कारण रात का तापमान भी नहीं गिरता, जिससे शरीर को आराम नहीं मिल पाता. इंसानी सेहत पर असर हीटवेव से हर साल हजारों लोग प्रभावित होते हैं. हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, हार्ट अटैक और किडनी फेलियर के मामले बढ़ रहे हैं. बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ता है. एक लंबा हीटवेव हजारों अतिरिक्त मौतें का कारण बन सकती है. 2015 की हीटवेव में 2000 से ज्यादा मौतें हुई थीं. अब स्थिति और बदतर हो रही है।  कृषि, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर असर     कृषि: गेहूं, चावल, फल और सब्जियों की पैदावार घट रही है. पशुधन भी प्रभावित हो रहा है.     पानी: भूजल स्तर गिर रहा है और जल संकट बढ़ रहा है.     अर्थव्यवस्था: मजदूरों की उत्पादकता घटती है. बिजली की मांग बढ़ती है. अर्थव्यवस्था को अरबों का नुकसान होता है. भारत में हीटवेव का दोगुना होना जलवायु संकट की घंटी है. 13 साल में 100 से 200 दिनों तक की बढ़ोतरी सिर्फ शुरुआत है. अगर हम अभी गंभीर कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दशकों में यह संकट और भयावह रूप ले लेगा. हीटवेव अब कोई मौसमी घटना नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन की स्थायी सच्चाई बन चुकी है। 

भीषण गर्मी के बीच पंजाब के मौसम में होगा बदलाव? जानिए कब होगी बारिश और कितने दिन चलेगी Heatwave.

चंडीगढ़. पंजाब और चंडीगढ़ में एक बार फिर भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग ने 9 और 10 जून के लिए हीटवेव (लू) अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, गर्म हवाएं और बढ़ता तापमान 11 जून तक जारी रहने की संभावना है। इसके बाद प्री-मानसून गतिविधियां शुरू होने से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच ना निकले बाहर सोमवार को चंडीगढ़ में अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2 डिग्री अधिक था। वहीं, न्यूनतम तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस रहा। रविवार को अधिकतम तापमान 39.9 डिग्री सेल्सियस था, लेकिन सोमवार को यह 40 डिग्री का आंकड़ा पार कर गया। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को दिनभर उमस और गर्मी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। 11 जून से बदलेगा मौसम मौसम विज्ञान केंद्र, चंडीगढ़ के अनुसार, 11 से 14 जून के बीच पंजाब और चंडीगढ़ में प्री-मानसून गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। इस दौरान कई क्षेत्रों में तेज हवाएं, गरज-चमक और आंधी के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने 11 और 12 जून के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र, चंडीगढ़ के निदेशक Surinder Pal ने बताया कि अगले 4 दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, 11 जून के बाद मौसम में बदलाव के साथ हीटवेव का असर कम होने की उम्मीद है।

पंजाबियों के लिए अलर्ट: अगले 3 दिन हीट वेव का खतरा, दोपहर में बाहर निकलना पड़ सकता है भारी

चंडीगढ़  पंजाब में भीषण गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है और लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। पिछले दिनों हुई बारिश से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली थी, लेकिन अब एक बार फिर गर्म हवाओं और 'लू' ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में 11 जून तक 'लू' को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं मौसम विभाग के अनुसार, फिरोजपुर, फरीदकोट, मोगा, बरनाला और संगरूर जिलों में लू का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बिना किसी जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। हालांकि, 11 से 13 जून के बीच पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर और मोहाली समेत कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। इससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर तापमान की बात करें तो बठिंडा राज्य का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं चंडीगढ़ में तापमान 39.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 4 दिनों में तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ सकता है, जिससे गर्मी का असर और अधिक बढ़ने की संभावना है।   11 जून से बदलेगा मौसम पंजाब में अगले तीन दिन भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग ने प्रदेश में हीट वेव का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान अधिकतम तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि 11 जून से मौसम में बदलाव के आसार हैं। विभाग के अनुसार तेज आंधी चलने से तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है। 12 और 13 जून को भी ऐसे ही मौसम बने रहने की संभावना है। रविवार को प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में 1.1 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई जो सामान्य से 1.6 डिग्री अधिक रहा। बठिंडा सबसे गर्म रहा जहां अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा फरीदकोट में 42.5 डिग्री, अबोहर में 42.2 डिग्री और लुधियाना में 42 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। न्यूनतम तापमान में भी एक डिग्री की बढ़ोतरी हुई जबकि गुरदासपुर में सबसे कम 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी भी हुई।