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हवाई कनेक्टिविटी में बड़ा विस्तार, बिहार को मिलेंगे दो अंतरराष्ट्रीय स्तर के एयरपोर्ट

 पटना  बिहार में हवाई कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सोनपुर और अजगैबीनाथ धाम में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है। दोनों परियोजनाओं पर काम भी शुरू हो गया है। सरकार के इस फैसले से पर्यटन, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को व्यापक बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बदल जाएगी बिहार की तस्‍वीर खासकर सोनपुर एयरपोर्ट के निर्माण से पटना एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव में कमी आएगी, जबकि अजगैबीनाथ धाम एयरपोर्ट पूर्वी बिहार के लिए नई उड़ान साबित होगा।   पटना से सटे सोनपुर के साथ-साथ सुल्तानगंज (भागलपुर) स्थित अजगैबीनाथ धाम में भी एयरपोर्ट निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। बिहार नागरिक विमानन विभाग ने दोनों परियोजनाओं के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये एजेंसी को 16 किस्तों में देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विस्तृत परियोजना और टाइमलाइन सोनपुर में करीब 4228.61 एकड़ और सुल्तानगंज में 3064.039 एकड़ भूमि पर एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे। लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक दोनों परियोजनाओं का निर्माण पूरा कर लिया जाए। डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने की जिम्मेदारी RITES Limited को सौंपी गई है, जिसके लिए 5.06 करोड़ रुपये का परामर्श शुल्क निर्धारित किया गया है। जमीन अधिग्रहण पर बड़ा निवेश सोनपुर एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण हेतु करीब 1302 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। वहीं, भागलपुर क्षेत्र में 931 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए 472.72 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें से 150 करोड़ रुपये संबंधित जिला प्रशासन को जारी भी कर दिए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं सोनपुर एयरपोर्ट का प्रस्तावित रनवे करीब 5.5 किलोमीटर लंबा होगा, जिससे दुनिया के बड़े से बड़े विमानों की लैंडिंग संभव हो सकेगी। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बिहार देश के प्रमुख एयर कनेक्टिविटी हब के रूप में उभर सकता है, जिससे निवेश, पर्यटन और व्यापार के नए अवसर खुलेंगे।

सियासत में हलचल: नीतीश का नया ठिकाना बना शक्ति केंद्र, ‘7 नंबर’ से जुड़ी चर्चा तेज

पटना. बिहार की राजनीति में एक अहम बदलाव के संकेत के बीच नीतीश कुमार अब अपने नए आवास 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो चुके हैं। करीब दो दशकों तक 1 अणे मार्ग में रहने के बाद उनका यह स्थान परिवर्तन सियासी गलियारों में कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीतीश कुमार के साथ उनके बेटे निशांत कुमार भी इसी आवास में रहेंगे। शुक्रवार को नए आवास में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद शनिवार से यहां राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेताओं का आना-जाना शुरू हो गया है, जिससे साफ है कि 7 सर्कुलर रोड अब सत्ता-समीकरणों का नया केंद्र बनने जा रहा है। 20 साल बाद बदला पता, बढ़ी हलचल करीब 20 वर्षों बाद आवास बदलने के फैसले को महज प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब राज्य में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा तेज है, यह बदलाव और भी अहम हो जाता है। ‘7’ नंबर से खास जुड़ाव नीतीश कुमार का ‘7’ अंक से खास लगाव लंबे समय से चर्चा में रहा है। 1977 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा, 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने दोनों ही वर्षों में ‘7’ का संयोग रहा। 2005 में जब वे पहली बार मुख्यमंत्री बने, तब उनकी गाड़ी का नंबर 777 था। रेल मंत्री रहते उनके फोन नंबर का अंतिम अंक भी 7 बताया जाता है। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने ‘7 निश्चय’ योजनाओं की शुरुआत की, जो आज भी उनकी प्रमुख नीतिगत पहचान है। अब 7 सर्कुलर रोड में उनका शिफ्ट होना इस सिलसिले को और मजबूत करता दिख रहा है। दिल्ली में भी नया ठिकाना राज्यसभा सदस्य के रूप में नीतीश कुमार को नई दिल्ली में 9 नंबर का सरकारी बंगला आवंटित हुआ है। यह आवास अमित शाह और राहुल गांधी के आवास के नजदीक स्थित है, जो उनके राष्ट्रीय राजनीतिक कनेक्शन को भी दर्शाता है।

बिहार राजनीति में नया मोड़, नीतीश-डिप्टी सीएम बैठकों से बढ़ी चर्चा

 पटना बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग खाली कर 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास में शिफ्ट कर लिया है। इस बदलाव को केवल आवास परिवर्तन नहीं, बल्कि संभावित राजनीतिक पुनर्संरचना के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। शनिवार को सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी के साथ नीतीश कुमार से उनके नए आवास पर मिलने पहुंचे। करीब 20 मिनट चली इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इसमें संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और सत्ता संतुलन पर गहन चर्चा हुई। इससे पहले दिन की शुरुआत में ही नीतीश कुमार ने दूसरे डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव से मुलाकात की। साथ ही पूर्व मंत्री अशोक चौधरी से भी बातचीत की। इन लगातार बैठकों ने सियासी हलकों में अटकलों को और तेज कर दिया है। कैबिनेट विस्तार की उलटी गिनती बिहार में 15 अप्रैल से मुख्यमंत्री और दो डिप्टी सीएम के हाथों में ही सभी विभागों की जिम्मेदारी है, जिस पर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव लगातार सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में अब माना जा रहा है कि पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के तुरंत बाद बिहार में मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि नए मंत्रिमंडल में ज्यादातर पुराने चेहरों की वापसी हो सकती है, जबकि नए चेहरों की संख्या सीमित रहने के आसार हैं। इससे साफ है कि नेतृत्व अनुभव और राजनीतिक संतुलन को प्राथमिकता देना चाहता है। विजय सिन्हा पर टिकी नजरें इस संभावित विस्तार में सबसे ज्यादा नजरें पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा पर टिकी हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार, खनन जैसे अहम विभाग संभालते हुए उनके कई फैसले चर्चा में रहे थे। हालांकि नई सरकार ने उनके कुछ फैसलों को पलट दिया है और विभागीय स्तर पर बदलाव भी किए गए हैं। प्रधान सचिव का तबादला किया जा चुका है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या विजय सिन्हा को उनके पुराने विभागों की जिम्मेदारी फिर से सौंपी जाएगी या उन्हें नई भूमिका दी जाएगी। कुल मिलाकर, नीतीश कुमार के आवास परिवर्तन से लेकर लगातार हो रही राजनीतिक बैठकों तक, बिहार में सत्ता समीकरणों के नए दौर की आहट साफ सुनाई दे रही है। आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार इस सियासी हलचल को नई दिशा दे सकता है।  

बिहार में परीक्षा घोटाला, BPSC ने 32 अभ्यर्थियों पर लगाया प्रतिबंध

 पटना  बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने आखिरकार सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी की परीक्षा रद कर दी है। परीक्षा में कदाचार और गड़बड़ी के आरोपों के बाद यह कार्रवाई की गई। इस मामले में 6 जिलों में 8 एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिसके बाद आयोग ने सख्त कदम उठाया। इसके साथ ही 32 परीक्षार्थियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ये अब आयोग की किसी भी आगामी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। मुंगेर में सामने आया मामला AEDO परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर ब्लूटूथ और अन्य आधुनिक उपकरणों के जरिए नकल करने की कोशिश की गई थी। हालांकि, सतर्क प्रशासन ने इन प्रयासों को विफल कर दिया। 14 से 21 अप्रैल तक 935 पदों के लिए 9 पालियों में परीक्षाएं आयोजित की गई थीं। वहीं, अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी के लिए 23 अप्रैल को परीक्षा हुई थी। शिक्षा विभाग के तहत AEDO की वैकेंसी राज्य में पहली बार निकाली गई थी, जिसके लिए 10 लाख 97 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। BPSC ने तीन चरणों में परीक्षा आयोजित की थी—पहला चरण 14-15 अप्रैल, दूसरा 17-18 अप्रैल और तीसरा चरण 20-21 अप्रैल को हुआ था। डीएम को मिली थी पहले ही सूचना परीक्षा शुरू होने से एक दिन पहले ही मुंगेर में डीएम को गड़बड़ी की सूचना मिली थी, जिसके बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। इस मामले में अब तक 8 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 36 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक 22 गिरफ्तारियां मुंगेर से हुई हैं। मामले की जांच में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) भी जुट चुकी है, हालांकि 12 दिन बाद भी मास्टरमाइंड का पता नहीं चल सका है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान प्रश्नपत्र लीक या वायरल होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। जिलेवार एफआईआर का ब्योरा:     मुंगेर – 1     नालंदा – 1     बेगूसराय – 1     वैशाली – 1     गया – 2     समस्तीपुर – 2  

बिहार राजधानी में सख्ती, 9 टीमों के साथ अवैध कब्जों पर प्रशासन की कार्रवाई शुरू

पटना  बिहार की राजधानी पटना में एक बार फिर से अतिक्रमणकारियों पर प्रशासन का बुलडोजर गरजने वाला है। पटना की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त बनाने और यातायात व्यवस्था को सुचारू करने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम ने एक बड़े एक्शन प्लान की तैयारी कर ली है। आज से लेकर 30 मई तक पटना के विभिन्न इलाकों में एक सघन अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत मुख्य रूप से नूतन राजधानी, पाटलिपुत्र, कंकड़बाग, बांकीपुर, पटना सिटी और दानापुर जैसे व्यस्त और प्रमुख इलाकों को चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में सड़क किनारे अवैध रूप से लगाई गई दुकानें, ठेले और पक्के या कच्चे निर्माण को पूरी तरह से ध्वस्त किया जाएगा। 9 विशेष टीमों का गठन किया गया इस महाभियान को सफल और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। जानकारी के अनुसार, अतिक्रमण के खिलाफ इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए 9 विशेष टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें तय किए गए इलाकों में जाकर अवैध कब्जों को हटाएंगी। इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग के लिए प्रशासन द्वारा रोजाना समीक्षा बैठक भी की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्रवाई सही दिशा में और प्रभावी तरीके से हो रही है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अतिक्रमण हटाने के दौरान किसी भी प्रकार की कोताही, नरमी या पक्षपात न बरता जाए। बाधा डालने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई अतिक्रमणकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस अभियान का विरोध करने या सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही एक और अहम और कड़ा फैसला लिया गया है कि जिन स्थानों से प्रशासन द्वारा एक बार अतिक्रमण हटा दिया जाएगा, वहां अगर दोबारा किसी ने कब्जा करने या दुकान लगाने की कोशिश की, तो उस व्यक्ति के खिलाफ सीधी एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी। बता दें कि पटना में अतिक्रमण के खिलाफ यह कार्रवाई कोई नई बात नहीं है, बल्कि इससे पहले 30 अप्रैल को भी प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए विधायक आवास के पीछे से लगभग 100 से 150 अवैध दुकानों और निर्माणों को हटाया था। उसी तर्ज पर अब शहर के अन्य हिस्सों को भी साफ करने की योजना है।

मंईयां सम्मान योजना समेत सभी पेंशन लाभुकों का घर-घर सत्यापन शुरू, 25 मई तक चलेगा अभियान

रांची झारखंड के अलग-अलग जिलों में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े लाभुकों के भौतिक सत्यापन के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के तहत सामाजिक सुरक्षा निदेशालय ने सभी जिलों के कोषांगों को कहा है कि वे वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्र एवं राज्य प्रायोजित योजनाओं के सभी लाभुकों तथा मुख्यमंत्री मंईंयां सम्मान योजना के तहत लाभ ले रहे लोगों का व्यापक सत्यापन कराएं। इसे लेकर गुमला जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग ने आदेश जारी कर दिया है। करीब एक माह तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत प्रत्येक लाभुक का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन के दौरान योजना के प्रावधान के अनुरूप अपात्र पाए जाने वाले लाभुकों का नाम हटाने की की कार्रवाई भी की जाएगी। इसके लिए पंचायत स्तर पर पंचायत सचिव को नोडल पदाधिकारी नामित किया गया है। साथ ही जनसेवक, रोजगार सेवक एवं आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को इस कार्य में सहयोग के लिए लगाया गया है। ग्रामवार-पंचायतवार टीम बनाकर सत्यापन जानकारी के मुताबिक, यह सत्यापन अभियान 25 मई तक डोर-टू-डोर चलाया जाएगा। ग्रामवार एवं पंचायतवार टीम बनाकर लाभुकों के घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा। इस दौरान जिन लाभुकों का आधार एवं मोबाइल नंबर उपलब्ध नहीं है, उनका संग्रहण कर राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) पोर्टल पर अपटेड किया जाएगा। निदेशालय ने सभी जिला प्रशासन के माध्यम से स्पष्ट किया है कि सभी योजनाओं के लाभुकों का सत्यापन करने के बाद आवश्यकतानुसार एनएसएपी पोर्टल एवं झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना (जेएमएमएसवाई) पोर्टल पर डेटा अपडेट और विलोपन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने सभी लाभुकों से अपील की है कि वे निर्धारित समयावधि में अपना भौतिक सत्यापन अवश्य कराएं। साथ ही संबंधित आवश्यक दस्तावेज पंचायत सचिव, जनसेवक, रोजगार सेवक या आंगनबाड़ी कर्मियों के पास जमा करें। इससे यह सुनिश्चित हो पाएगा कि योजना के पात्र लाभुकों को समय पर डीबीटी के माध्यम से उनकी पेंशन राशि सीधे बैंक खाते में मिलती रहे। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम योजना आयु वर्ग अनुमानित लाभुक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय 60-80 वर्ष से ऊपर 8,30,786 वृद्धावस्था पेंशन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय 40 वर्ष या उससे ऊपर 3,36,122 विधवा पेंशन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय 18 वर्ष या उससे ऊपर 24,467 दिव्यांग पेंशन राष्ट्रीय पारिवारिक हित लाभ योजना इसमें मुख्य अर्जन कर्ता की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को एकमुश्त 20,000 रुपए केन्द्रांश के रूप में दी जाती है। योजना के लाभुकों की अनुमानित संख्या 1,152 है। (6 योजनाएं) पेंशन योजना के तहत राज्य सरकार अपनी मद से दो योजनाओं को क्रियान्वित करती है। पहली – झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना। इसमें 18 वर्ष से 50 वर्ष तक की महिला लाभुकों को प्रतिमाह 2500 रुपए दिए जाते हैं। वर्तमान में योजना की लाभार्थियों की संख्या 55,42,601 है। दूसरी योजना झारखंड मुख्यमंत्री सर्वजन पेंशन है। इसके अंतर्गत पांच योजनाएं आती हैं। योजना अनुमानित लाभुक मुख्यमंत्री राज्य वृद्धावस्था 27,01,017 सीएम आदिम जनजाति पेंशन 80,353 सीएम राज्य निराश्रित महिला 5,01,079 सम्मान पेंशन सीएम राज्य एचआईवी पेंशन 8,319 स्वामी विवेकानंद नि:शक्त 3,10,186 स्वावलम्बन प्रोत्साहन सीएम राज्य सामाजिक 49 सुरक्षा पेंशन (ट्रांसजेंडर)

मनीष जायसवाल और रोशन लाल चौधरी ने पत्रकारिता की अहमियत पर जताई अपनी राय, लोकतंत्र में इसकी अनिवार्यता

सरकार के कार्यों के आकलन में पत्रकारों की भूमिका सबसे बड़ी: मनीष जायसवाल  पत्रकारिता के बिना लोकतंत्र की कल्पना नहीं -रोशन लाल चौधरी पतरातू में बीएसपीएस के 12वीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक संपन्न  पतरातू (रामगढ़)  रामगढ़ जिले के पतरातू में भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के 12वीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 1 मई को आयोजित की गई। इसमें शामिल हुए हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने पत्रकारों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए कहा कि आपने जो चार प्रमुख मांग रेलवे में पूर्व की तरह रियायत, रोड टोल में छूट, पत्रकार सुरक्षा और स्वास्थ्य बीमा की मांगे रखी हैं, उसे मेरे स्तर से सरकार तक बात पहुंचाई जाएगी और कुछ सार्थक परिणाम जरूर निकलेंगे। सांसद मनीष जायसवाल ने BSPS के प्रतिनिधिमंडल के साथ रेलवे एवं सूचना प्रसारण मंत्री से शीघ्र मुलाकात की बात संगठन के संस्थापक शाहनवाज हसन से कही।  उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में खनिज की जितनी चोरी होती है, खनिज पदार्थ की चोरी और लूट की खबर पूरा देश जानता है तो वह पत्रकारों और पत्रकारिता की बदौलत ही है। वहीं बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में यह कार्यक्रम हो रहा है, इसके लिए आप धन्यवाद के पात्र हैं। मुझे पत्रकारों का हमेशा सहयोग मिला है और पत्रकारिता के बिना लोकतंत्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। पतरातू के अलेक्सा रिजोर्ट में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएसपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पांडेय ने की जबकि संचालन महामंत्री नवीन आनंद जोशी और राष्ट्रीय सचिव चंदन मिश्रा ने किया। सबसे पहले बीएसपीएस और जेजेए के संस्थापक शाहनवाज हसन ने सबका स्वागत करते हुए यूनियन के उद्देश्य और अब तक की उपलब्धियां पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हम एकजुट रहेंगे तो पत्रकार हित में फैसले भी होंगे और उसका लाभ मिलेगा।   अपनी समस्याओं के लिए हम खुद भी जिम्मेदार: अशोक पांडेय  ढहता चौथा स्तंभ और दम तोड़ता लोकतंत्र पर चर्चा करते हुए वरीय पत्रकार, बीएसपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विभिन्न अखबारों के संपादक रहे अशोक पांडेय ने कहा कि पत्रकारिता में काफी समस्याएं हैं, पर हमारा संकट है तो लोकतंत्र में भी संकट है। उन्होंने कहा कि सबसे प्राचीन ग्रंथ वेद हैं, इनमें विज्ञान और धर्म का उल्लेख है तो वहीं पत्रकारिता की भी चर्चा है। आज अपनी समस्याओं के लिए हम खुद जिम्मेदार हैं। पत्रकारिता में कुछ वैसे तत्वों का प्रवेश हो गया है जिसके कारण पत्रकारिता बदनाम हो रही है उन्होंने पत्रकारों से स्वस्थ पत्रकारिता करने और संयमित होकर कार्य करने की अपील की।  सांसद से रखी गई मांगें  कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल से पत्रकारों ने चार मांगे रखी। रेलवे में पूर्व की तरह रियायत, रोड टोल में छूट, पत्रकार सुरक्षा कानून और बीमा योजना को सभी पत्रकारों के लिए लागू किए जाने की मांगे रखी गई। बीएसपीएस की बैठक में कई निर्णय भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के 12वीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पश्चिम बंगाल यूनिट के अध्यक्ष शैलेश्वर पांडा को बीएसपीएस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके साथ ही झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन और पश्चिम बंगाल यूनिट की नयी कार्यकारिणी की जल्द घोषणा का निर्णय लिया गया। पश्चिम बंगाल के प्रभारी और संगठन सचिव गिरधारी शर्मा के द्वारा एक महीने के भीतर घोषणा की जाएगी। मध्य प्रदेश के अध्यक्ष अरुण सक्सेना को राजस्थान इकाई के विस्तार के लिए प्रभारी बनाया गया। वे 30 मई तक अपनी रिपोर्ट देंगे। इसके साथ ही 30 मई तक बिहार इकाई की पूरी कमेटी का विस्तार करने, चंडीगढ़ हरियाणा और पंजाब में संगठन का विस्तार करने के लिए नवीन पांडे और गिरधर शर्मा अधिकृत किए गए। तेलंगाना, कर्नाटक, पुडुचेरी और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए वीरभद्र राव को प्रभारी बनाया गया, जिन्हें शैलेश्वर पांडा सहयोग करेंगे। यह भी तय किया गया कि जुलाई महीने में मध्य प्रदेश के मांडव में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी वहीं सितंबर महीने में लखनऊ में तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन होगा। विभिन्न राज्यों से आए पत्रकारों ने रखी अपनी बात बीएसपीएस के राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में मध्य प्रदेश अध्यक्ष अरुण सक्सेना, असम के राहुल कर्मकार, बिहार के अजय कुमार, पश्चिम बंगाल के शैलेश्वर पांडा और शुभेंदु चटर्जी, आंध्र प्रदेश के वीर भद्र राव, उत्तर प्रदेश के जायद बाजपेई, उत्तराखंड के नवीन पांडे तथा नेपाल से आए जनमदेव जैसी ने अपनी बातें रखी। मध्य प्रदेश में पत्रकारों को मिल रही सुविधाओं पर चर्चा की गई और बताया गया कि यहां 60 साल से ऊपर के मान्यता प्राप्त पत्रकारों को 20 हजार प्रति महीना सम्मान राशि की जा रही है। इसे सभी राज्यों में लागू करने की मांग की गई। काफी संख्या में जुटे पत्रकार  कार्यक्रम में देश भर के विभिन्न राज्यों से आए काफी संख्या में पत्रकार जुटे। संस्थापक शाहनवाज हसन के अलावा राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पांडेय, महामंत्री नवीन आनंद जोशी, संगठन सचिव गिरधर शर्मा, कोषाध्यक्ष एस नसरीन, सचिव चंदन मिश्र, जेजेए के प्रदेश अध्यक्ष संपूर्णानंद भारती, मध्य प्रदेश अध्यक्ष अरुण सक्सेना, मीडिया प्रभारी संजीव समीर, असम अध्यक्ष राहुल कर्मकार, बिहार अध्यक्ष अजय कुमार, प बंगाल अध्यक्ष शैलेश्वर पांडा, शुभेंदु चटर्जी, आंध्र प्रदेश अध्यक्ष वीरभद्र राव, उत्तर प्रदेश जायद बाजपेई, उत्तराखंड से नवीन पांडेय, नेपाल से जनमदेव जैसी के अलावा राजस्थान से आरके जोशी, आंध्र प्रदेश से राघवेन्द्र मिश्रा, जगदीश सलूजा, उत्तराखंड से नवीन पांडेय, कृष्णा गुप्ता, पंकज सिंह, जावेद इस्लाम, डीके राठौर, खालिद अनवर, कुमार रमेशम, अनिल सिंह, राहुल कर्मकार, मासूम रजा, आकाश सोनी, सुभाशीष झा, जावेद अली, नईमुल्लाह, सम्पदा बुद्धा, रंजीत पांडेय, श्रीकांत, अर्जुन सोनी, प्रभाकर श्रीवास्तव, राकेश सिंह, मासूम अंसारी, नितिन मिश्रा, विपिन नायक, अंकित सिंह, याकूब अली समेत विभिन्न राज्यों और जिलों से आये पत्रकार मौजूद थे। इस दौरान अतिथियों को स्मृति चिन्ह और बुके देकर सम्मानित भी किया गया।

सीबीआई जांच के नाम पर बड़ा फ्रॉड, साइबर ठगों ने रिटायर्ड अफसर को बनाया शिकार

 मुजफ्फरपुर बिहार के मुजफ्फरपुर में एक रिटायर अधिकारी को साइबर ठगों ने सीबीआई जांच के नाम पर डराकर 17 लाख रुपए ठग लिए। वीडियो कॉल से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर घर में नजरबंद रखा और धमकाते रहे। पैसे ट्रांसफर कर देने के बाद भी जब फ्रॉड आगे की मांग करने लगे तब जाकर पीड़ित को साइबर ठगी का अहसास हुआ। साइबर थाने में शिकायत के बाद ऐक्शन में आई पुलिस न तीन शातिरों को गिरफ्तार किया है। उनके ठिकाने से कई राज्यों के बैंक पासबुक, एटीएम और फर्जरी से जुड़े अन्य सामान बरामद किए गए हैं। ठगी गिरोह में मुजफ्फरपुर के अलावे वैशाली जिसे के शातिर भी शामिल हैं। साइबर फ्रॉड के शिकार मुजफ्फरपुर के सदर थाना क्षेत्र के खबड़ा गांव निवासी भोला प्रसाद बिजली विभाग से अवकाश प्राप्त अधिकारी हैं। पुलिस को दिए आवेदन में उन्होंने बताया कि करीब तीन हफ्ते पहले उनके व्हाट्सएप पर एक अनजान अंतरराष्ट्रीय नंबर से वीडियो कॉल आया। उन्होंने रिसीव किया तो फोन करने वाले ने बड़े रौब से बात की और खुद को सीबीआई का बड़ा अधिकारी बताया। उसने भोला प्रसाद को डरा दिया और कहा कि उनके खिलाफ जांच और बड़ी कार्रवाी चल रही है। आरोप लगाया कि बिजली विभाग की नौकरी में रहते हुए उन्होंने काफी गबन किया है। गुप्त तरीके से सीबीआई जांच में आरोप सत्य पाय जाने के कारण गिरफ्तारी वारंट निकल चुका है। कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है। कॉलर ने धमकाया कि आपको वीडियो कॉल से डिजिटल अरेस्ट किया जा चुका है। कैमरे के सामने से हटे तो तुरंत पुलिस घर तक पहुंच जाएगी और गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ऐसे हुआ शक बदमाशों ने कहा कि उनके खिलाफ 17 लाख गबन का प्रमाण मिला है। अंगर दिए गए अकाउंट में यह राशि जमा करा दें तो गिरफ्तारी से बच सकते हैं। विभागीय कार्रवाई चलती रहेगी। राशि जमा करा देने से कार्रवाई में राहत मिलेगी। डर के मारे उन्होंने मांगी गई राशि अपने खाते से ट्रांसफर कर दिया। जब आगे भी उन्हें धमकाया गया और पैसों की डिमांड की तो उन्हें शक हो गया। जब उन्होंने सवाल पूछना शुरू किया तो फ्रॉड ने कॉल डिस्कनेक्ट कर नंबर को बंद कर दिया। उसके बाद उन्हें सच्चाई का पता चला। वैज्ञानिक जांच से चिन्हित हुए शातिर पीड़ित ने साइबर थाने में केस दर्ज कराया। साइबर डीएसपी हिमांशु के नेतृत्व में गठित टीम ने बैंक खातों की जांच करके स्थानीय शातिरों को चिन्हित किया और उनकी गिरफ्तारी की गई। सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने बताया कि साइबर टीम ने ट्रांजेक्शन पाथ, मोबाइल नंबर और अन्य तरीकों से वैशाली में छापेमारी की। पुलिस ठिकाने पर पहुंची तो दंग रह गई। ठिकाने पर इंटरनेशन कॉलिंग डिवाइस, कई राज्यों के बैंक खातों के सबूत और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मिले। मुजफ्फरपुर के मनियारी में भी छापेमारी करके विक्रम कुमार नाम के शातिर को पकड़ा। उसकी निशानदेही पर बृजेश कुमार और कृष्ण कुमार की गिरफ्तारी की गई। सभी गिरोह से जुड़े हैं। पुलिस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।

ईशांक श्रीवास्तव का कमाल, 9 घंटे 50 मिनट में समुद्र तैरकर रचा इतिहास

रांची कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों' ये पंक्तियां जब दुष्यंत कुमार ने लिखीं तो उन्हें नहीं पता था कि रांची का 7 साल का ईशांक श्रीलंका और भारत के बीच पड़ने वाले समुद्री रास्ते को इतनी कम उम्र में तैरकर पार कर देगा और इसके लिए महज 9 घंटे 50 मिनट की तैराकी करनी पडे़गी। ईशांक अब इस स्ट्रेट को तैरकर पार करने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के तैराक का रिकॉर्ड बना लिए हैं। कौन हैं ईशांक ईशान रांची के धुर्वा के रहने वाले हैं। बीते दिनों ईशांक ने श्रीलंका के तलाईमन्नार से भारत के धनुषकोडी तक के खतरनाक पाक स्ट्रेट को तैरकर पार किया। ईशांक ने 29 किलोमीटर की समुद्री दूरी को तय करने के लिए महज 9 घंटे 50 मिनट का समय लिया। इसके साथ ही अब ईशांक ऐसा करने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के तैराक का वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 30 अप्रैल को ईशांक ने श्रीलंका के तलाईमन्नार से अपनी यात्रा शुरू की थी। अगले 9 घंटे और 50 मिनट में ईशांक ने विश्व रिकॉर्ड बना दिया। ईशांक को इस उपलब्धि के लिए यूनिवर्सल रिकॉर्ड्स फोरम की तरफ से यंगेस्ट एंड फास्टेस्ट पाक स्ट्रेट स्विमर का वर्ल्ड रिकॉर्ड सर्टिफिकेट दिया गया है। ईशांक ने यह उपलब्धि कड़ी ट्रेनिंग, अनुशासन और अपने पक्के इरादे से हासिल की है। क्या करते थे ईशांक पाक स्ट्रेट को सबसे तेज पार करने के लिए ईशांक रांची के धुर्वा डैम में रोजाना 4-5 घंटे प्रैक्टिस किया करते थे। अपने कोच अमन कुमार जयसवाल और बजरंग कुमार के मार्गदर्शन में ईशांक की मेहनत रंग लाई और उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। ईशांक की इस उपलब्धि ने ना सिर्फ रांची बल्कि देश का नाम विश्व स्तर पर किया है। तारीफों की बाढ़ ईशांक रांचीक के श्यामली डीएवी स्कूल की तीसरी कक्षा के छात्र हैं। इस उपलब्धि के लिए स्कूल की तरफ से भी ईशांक के लिए तारीफों की बाढ़ आ गई है। उनकी इस उपलब्धि पर प्रिंसिपल ने कहा कि ईशांक की यह उपलब्धि स्कूल के लिए, पूरे रांची शहर के लिए और पूरे देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि इस कम उम्र में ईशांक का कठिन समुद्री परिस्थितियों में विश्व रिकॉर्ड बनाना असाधारण साहस और पक्के इरादे के चलते संभव हो पाया है। प्रिंसिपल ने ईशांक की सराहना करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में इतना बड़ा रिकॉर्ड बनाना उनकी लगन और मार्गदर्शन का परिणाम है। प्रिंसिपल ने कहा कि ईशांक की यह उपलब्धि बाकी छात्रों को भी प्रेरित करेगी।

स्व-गणना का विकल्प आज रात 12 बजे तक, 2 मई से प्रगणक घर-घर जाएंगे

पटना बिहार में जनगणना 2027 के तहत चल रहे स्व-गणना अभियान का आखिरी दिन है। 17 अप्रैल से शुरू हुई जनगणना की प्रक्रिया में अब तक 42 लाख 47 हजार 621 लोगों ने मोबाइल या कंप्यूटर से अपनी गणना की है। है। इसमें मधुबनी जिला सबसे आगे है, जबकि वैशाली और दरभंगा क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। भारतीय जनगणना निदेशालय की ओर से टॉप 10 जिलों की सूची भी जारी कर दी है। इसके अनुसार, पहले स्थान पर मधुबनी है, जहां 5,71,113 लोगों ने स्व-गणना पूरी की है। दूसरे स्थान पर वैशाली (5,38,966) और तीसरे पर दरभंगा (3,65,466) हैं। चौथे स्थान पर गोपालगंज (2,88,201), पांचवें पर पटना (2,12,501) और छठे स्थान पर भोजपुर (1,95,999) है। इसके बाद सातवें नंबर पर खगड़िया (1,54,050), आठवें पर औरंगाबाद (1,48,794), नौवें पर पश्चिम चंपारण (1,21,862) और दसवें स्थान पर कटिहार (98,554) जिला शामिल है। आज रात 12 बजे के बाद स्व-गणना नहीं कर पाएंगे जनगणना 2027 के तहत नागरिकों को खुद से ऑनलाइन जानकारी भरने का विकल्प दिया गया है। इसके जरिए लोग घर बैठे अपनी जनसंख्या संबंधी जानकारी सुरक्षित और आसान तरीके से दर्ज कर सकते हैं। जनगणना निदेशालय के डिप्टी डायेक्टर संजीव कुमार ने कहा कि स्व-गणना का विकल्प एक मई यानी आज रात 12 बजे तक ही उपलब्ध है। ऐसे में जिन लोगों ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, वे जल्द से जल्द आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज करा सकते हैं। यह प्रक्रिया सुरक्षित, सरल और समय की बचत करने वाली है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो लोग मोबाइल से अपनी गणना नहीं कर सकते हैं, वह घबराएं नहीं। दो मई यानी शनिवार से प्रगणक आपके घर आएंगे, वह गणना का काम कर कसते हैं। साथ ही जो लोग बिहार से बाहर रहते हैं वह भी नहीं घबराएं। आपके जिस राज्य में रह रहे हैं वहां जब जनगणना की प्रकिया शुरू होगी तब आप इसमें शामिल हो सकते हैं। आपकी गणना मान्य वैद्य मानी जाएगी। आपके डाटा को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और डिजिटल माध्यम में एन्क्रिप्टेड सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। Bihar Weather: बिहार के कई जिलों आज भी बारिश का यलो अलर्ट, पटना में बूंदाबांदी; जानिए कहां-कैसा रहेगा मौसम? हर घर और इलाके का जियो-टैगिंग की जा रही जनगणना 2027 के लिए कागजी फॉर्म और रजिस्टरों की जगह अब इलेक्ट्रोनिक डिवाइस, जियो-टैगिंग मैपिंग टूल और एक केंद्रीकृत वेब आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। सरकार ने साल 2027 की जनगणना को देश की पहली डिजिटल जनगणना बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। मोबाइल एप के जरिए डेटा इकट्ठा किया जाए रहा है। इसके अलावा सेंसस मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएमएस) नाम का एक केंद्रीय पोर्टल बनाया गया है, जो पूरी प्रक्रिया की रियल टाइम निगरानी कर रही है। स्वगणना में भी हर घर और इलाके का जियो-टैगिंग की जा रही है। वहीं दो मई से जब प्रगणक लोगों के घर जाएंगे तब भी वह यही प्रक्रिया करेंगे।