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बल्क ग्राहकों पर महंगाई की मार! नए नियमों से भोपाल निगम पर हर महीने ढाई करोड़ का अतिरिक्त बोझ

भोपाल   हैं। अब उन्हें आम उपभोक्ताओं के मुकाबले 30 प्रतिशत तक महंगा ईंधन खरीदना पड़ेगा। इससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। भोपाल नगर निगम की बात करें तो अब उसे 49 रुपए प्रति लीटर अतिरिक्त देने होंगे।  बता दें कि कुछ दिन पहले तेल कंपनियों द्वारा बल्क उपभोक्ताओं के लिए डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए थे। अब कंपनियों ने पंप संचालकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि बल्क उपभोक्ताओं को डिस्काउंट रेट पर नहीं, बल्कि निर्धारित बल्क रेट पर ही डीजल-पेट्रोल दिया जाए। कंपनियों ने यह भी हिदायत दी है कि यदि किसी पंप से बल्क उपभोक्ताओं को कम दरों पर डीजल-पेट्रोल दिया गया तो संबंधित पंप संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसका असर भोपाल में देखने को मिलने लगा है। पुराने रेट पर डीजल देने से इनकार नगर निगम की कचरा कलेक्शन गाड़ियां जब तय रिटेल पंपों पर डीजल लेने पहुंचीं तो पंप संचालकों ने पुराने रेट पर डीजल देने से इनकार कर दिया। कर्मचारियों को बताया गया कि अब बल्क उपभोक्ताओं को 142 रुपए प्रति लीटर की दर से ही डीजल मिलेगा। पहले नगर निगम को करीब 93 रुपए प्रति लीटर की दर से डीजल मिल रहा था। यानी नए और पुराने रेट में करीब 49 रुपए प्रति लीटर का अंतर आ गया है। कचरा कलेक्शन के काम पर असर बताया जाता है कि पंपों से समय पर डीजल नहीं मिलने के कारण करीब 2 से 3 घंटे तक कचरा कलेक्शन का काम प्रभावित रहा। अफसरों की दखल के बाद पंपों से डीजल सप्लाई शुरू हुई। जिसके बाद कचरा कलेक्शन दोबारा शुरू किया गया। इसका असर शहर की सफाई व्यवस्था पर भी दिखाई दिया। कई इलाकों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन देर से हुआ, जबकि कुछ स्थानों पर गाड़ियां तय समय पर नहीं पहुंच सकीं। अब तक 5 रुपये महंगे हुए, जानें नई कीमतें आज शनिवार सुबह फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि की है. ताजा जानकारी के मुताबिक पेट्रोल में करीब 87 पैसे और डीजल के दामों में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की गई है. इसके साथ-साथ सीएनजी के दाम भी बढ़ाए गए हैं।  बता दें, मिडिल ईस्ट में तनाव का साफ असर अब दिखाई देने लगा है. आम जनता पर लगातार महंगाई का बोझ बढ़ता ही जा रहा है. जानकारी के लिए बता दें, तेल कंपनियों ने पिछले दस दिनों के अंदर तीसरी बार पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में संशोधन किया है. इससे पहले 15 मई को पेट्रोल-डीजल के दामों में 3-3 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई थी. उसके बाद 19 मई को दोबारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 87 पैसे और 91 पैसे बढ़ाए गए थे. इस तरह 10 दिनों के भीतर पेट्रोल-डीजल करीब 5 रुपये महंगे हो गए हैं।  राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल के नई कीमतें 87 पैसे बढ़कर 99.51 रुपये प्रति ली. हो गई हैं. इससे पहले यह 98.64 रुपये प्रति ली. की दर से बिक रहा था. वहीं, डीजल के दामों में 91 पैसे बढ़ाए गए हैं. जिससे नई कीमतें 91.58 रुपये से बढ़कर 92.49 रुपये प्रति ली. हो गई है. बात सीनएजी की करें तो इसके दाम 1 रुपये प्रति किलो बढ़ाए गए हैं. राजधानी दिल्ली में 1 किलो सीएनजी के नए दाम करीब 81.09 रुपये हैं।  कुछ दिनों पहले ही केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने बयान दिया था कि भारत देश में ईंधन पर्याप्त मात्रा में है. सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि देश में पेट्रोल औऱ डीजल की पर्याप्त मात्रा है. घबराने की कोई बात नहीं है. सप्लाई पूरी तरह से स्थिर बनी हुई है. मंत्रालय ने आगे कहा कि देश की जनता अफवाहों से बचकर रहे और परेशान ना हो। 

आयुर्वेद चिकित्सा के सफल प्रयोगों को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर, बोले मुख्यमंत्री डॉ. यादव

आयुर्वेद चिकित्सा के सफल प्रयोग की जानकारी और लाभ जन-जन तक पहुंचायें: मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुजुर्ग रोगियों के लिए वयोमित्र कार्यक्रम एक आदर्श मॉडल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुष विभाग की गतिविधियों की समीक्षा की भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन से जुड़े स्थानों पर आयुर्वेद पद्धति से चिकित्सा व्यवस्था और वेलनेस केन्द्र स्थापित करने की पहल सराहनीय है। अन्य प्रदेशों में हुए ऐसे सफल प्रयोगों और नवाचारों का अध्ययन कर बेहतर कार्य करते हुए उन्होंने जन-जन तक इनकी जानकारी और इनका लाभ पहुंचाने के आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वृद्ध नागरिकों की डोर टू डोर आयुष देखभाल के लिए वयोमित्र कार्यक्रम उपयोगी है। इसी तरह कारूण्य के अंतर्गत असाध्य रोगों का कष्ट झेल रहे रोगियों के जीवन को गुणवत्तापूर्ण बनाने का कार्य भी प्रशंसनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में आयुष विभाग के कार्यों की जानकारी प्राप्त की। बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के साथ किए गए एमओयू के अंतर्गत प्रदेश में 12 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें विश्व धरोहर स्थल खजुराहो जिला छतरपुर के साथ ही ओंकारेश्वर जिला खण्डवा, चंदेरी जिला अशोकनगर, चित्रकूट जिला सतना, पचमढ़ी जिला नर्मदापुरम, ओरछा जिला निवाड़ी के अलावा उज्जैन, दतिया, मंदसौर, आलीराजपुर, सिंगरौली और आगर-मालवा शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एलोपैथी के साथ ही ऐसी चिकित्सा पद्धतियों का प्रोत्साहन आवश्यक है जो भारतीय परम्परा से जुड़ी हैं। प्रदेश के अनेक स्थानों पर प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य कार्यरत हैं। इनकी सेवाओं से बड़ी संख्या में नागरिक लाभान्वित होते हैं। उज्जैन सहित प्रदेश के अनेक स्थानों पर आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का लाभ लेकर शल्य चिकित्सा के बिना रोगियों को लाभान्वित करने के उदाहरण मिलते हैं। सामान्य प्रसव करवाने वाले अस्पताल भी प्रदेश में संचालित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आजीवन आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ लेने वाले नागरिकों को भी प्रोत्साहन कार्यक्रमों से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वास्थ्य नीति-2017 और विजन-2047 के अनुक्रम में प्रदेश के जिला स्तरीय चिकित्सालयों में विकल्प के रूप में आयुष चिकित्सा के लिए पृथक विंग स्थापित करने का कार्य चल रहा है। प्रत्येक आयुष विंग में पंचकर्म यूनिट की स्थापना भी की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन कार्यों की गति बढ़ाई जाए। बैठक में बताया गया कि जिलों में आयुष जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों के व्यापक संचालन के अंतर्गत सुप्रजा, आयुर्विद्या, वयोमित्र, मस्कुलर-स्केलेटल प्रिवेंटिव कार्यक्रम और कारूण्य का लाभ नागरिकों को दिलवाया जा रहा है। जनजातीय बहुल और सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित जिलों में आयुर्वेद औषधियों का वितरण भी सुनिश्चित किया जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 22 जिलों के एलोपैथी चिकित्सालयों में आयुष विंग की स्थापना की कार्यवाही चल रही है। पांच नए आयुर्वेदिक कॉलेज स्थापित करने और 12 जिलों में 50 बिस्तर क्षमता के आयुष अस्पताल प्रारंभ करने का कार्य चल रहा है। भारत सरकार से राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत गत दो वर्ष में नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, बालाघाट, सागर, झाबुआ और शुजालपुर जिला शाजापुर में नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय के निर्माण की मंजूरी मिली है। भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय के परिसर में 29 करोड़ की लागत से प्रशासनिक और अकादमिक भवन का कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में 6 जिला आयुष कार्यालय बन कर तैयार हो गए हैं। इसी तरह 80 आयुष औषधालयों के भवन बनाए जाने थे, जिनमें से 53 का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। आयुष विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 में प्रदेश के सभी 9 आयुष महाविद्यालयों को फर्स्ट रेफेरल यूनिट के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। सभी 9 आयुष महाविद्यालयों में हॉस्टल बनाने, सीट क्षमता का 100 तक उन्नयन करने, यूनानी पाठ्यक्रम हिंदी में उपलब्ध करवाने, आयुष महाविद्यालयों में शोध कार्य बढ़ाने और बालाघाट में आयुष शोध केन्द्र का संचालन प्रारंभ करने का भी लक्ष्य है। श्रम विभाग से समन्वय कर प्रदेश के लगभग 13 लाख कर्मचारी राज्य बीमा में पंजीकृत श्रमिक परिवारों को आयुष चिकित्सा पद्धति की कैशलेस सुविधा दिलवाने का लक्ष्य है। स्वास्थ्य बीमा में आयुष को शामिल करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। प्रदेश में 7 आयुष महाविद्यालयों में फार्मेसी विभाग स्थापित करने, आयुष विश्वविद्यालय की पहल और एक प्राकृतिक एवं योग महाविद्यालय स्थापित करने तथा ऐसे जिलों जहां आयुष चिकित्सा सुविधा नहीं है, वहां 20 आयुष मोबाइल मेडिकल यूनिट प्रारंभ करने के कार्यों के लिए लगभग 75 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है। बैठक में आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव आयुष शोभित जैन और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

मत्स्योद्योग में आएगी स्टार्टअप क्रांति, पारंपरिक मछली पालन से आगे बढ़ने पर जोर : राज्यमंत्री पंवार

पारंपरिक मछली पालन से आगे बढ़कर स्टार्टअप आधारित होगा मत्स्योद्योग : राज्यमंत्री पंवार मध्यप्रदेश बनेगा देश का ब्लू इकॉनमी हब: केज कल्चर के लिए डेढ़ से दो लाख प्रस्ताव निवेशकों के लिए नियुक्त होंगे कॉन्टैक्ट ऑफिसर, योजना, सब्सिडी और दस्तावेजीकरण में करेंगे मदद कोल्ड चेन, हैचरी और फिश फीड पर मिलेगी सब्सिडी: कृषि उत्पादन आयुक्त बर्णवाल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मत्स्योत्पादन को दोगुना करने के विजन को लेकर 'मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026' के सफल क्रियान्वयन की दिशा में शुक्रवार को राज्य स्तरीय 'हितधारक सम्मेलन' हुआ। इस सम्मेलन में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पंवार की उपस्थिति में मत्स्य क्षेत्र के उद्यमियों और निवेशकों ने उत्साह दिखाया। राज्यमंत्री पंवार ने कहा कि प्रदेश में पहले वर्ष 10 हज़ार केज लगाने का लक्ष्य था, लेकिन निवेशकों की ओर से लगभग 2 लाख केज लगाने के प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। यह दिखाता है कि प्रदेश में मत्स्य उत्पादन को दोगुना करने की दिशा में विभाग द्वारा सकारात्मक पहल की जा रही है। मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पंवार ने कहा कि आज का यह समागम केवल एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी सरकार पहली बार पारंपरिक मत्स्य पालन की सीमाओं से आगे बढ़कर एकीकृत मत्स्योद्योग (हितग्राही और उद्यमी मॉडल) पर काम कर रही है। इसे केवल एक समाज आधारित योजना के रूप में न देखकर, हर वर्ग को साथ लेकर चलने और रोजगार सृजन की 'स्टार्टअप आधारित ब्लू इकॉनमी' के रूप में देखा जाना चाहिए। केज कल्चर के लिए खत्म हो आवेदन की समय सीमा: पंवार राज्यमंत्री पंवार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि केज कल्चर के प्रस्ताव प्राप्त करने की प्रक्रिया को किसी समय-सीमा में न बांधा जाए। इसे एक सतत प्रक्रिया बनाया जाए जिससे अधिक से अधिक युवा उद्यमी और हितग्राही इससे जुड़ सकें। कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव मत्स्य विकास के लिए 100 करोड़ रुपये तक खर्च करने को तैयार हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए कोल्ड चेन मेंटेन करने, हैचरी निर्माण और फिश फीड के लिए शासन द्वारा पूरी सहायता और सब्सिडी दी जाएगी। उन्होंने बैंकिंग और इंश्योरेंस क्षेत्र के हितधारकों से मत्स्य उत्पादन के आधुनिकीकरण में सहयोग की अपील की। हर निवेशक के साथ जुड़ेंगे कॉन्टैक्ट ऑफिसर: सचिव सिंह मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के सचिव स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश जलाशयों का केंद्र है। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए हर निवेशक के साथ सुविधानुसार एक 'कॉन्टैक्ट ऑफिसर' नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी निवेशक के सभी आवश्यक दस्तावेजीकरण, सब्सिडी और अन्य विभागीय कार्यों को पूर्ण कराने में मदद करेगा। साथ ही, विभाग द्वारा मार्केटिंग और प्रोसेसिंग से जुड़े एक्सपर्ट्स की सूची भी उपलब्ध कराई जाएगी। राज्यमंत्री नारायण सिंह पंवार ने केज कल्चर के प्रस्तावों के अनुरूप प्राथमिक रूप से चयनित केज कल्चर के हितधारकों को अभिस्वीकृति पत्र वितरित किये गए। मत्स्य महासंघ के प्रबंध संचालक अनुराग चौधरी ने सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में निवेशकों और उद्यमियों के साथ 'राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस' भी आयोजित की गई, जिसमें स्टेक होल्डर्स से प्राप्त प्रस्तावों और अन्य विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके अलावा, प्रदेश में 'केज कल्चर' को बढ़ावा देने के लिए इसमें इस्तेमाल होने वाले सीड, फीड और जाल आदि की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विक्रेताओं के साथ भी विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के संचालक मनोज पथरोलिया, मत्स्य महासंघ के महाप्रबंधक रवि गजभिए समेत प्रदेश भर से आए मत्स्य उद्यमी, निवेशक, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। उप संचालक, मत्स्योद्योग गिरीश मेश्राम ने सभी अतिथियों, निवेशकों और हितधारकों के प्रति आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया।  

बालाघाट का बेटा पहुंचेगा NASA! सांदीपनि विद्यालय के छात्र का शैक्षणिक भ्रमण के लिए चयन

बालाघाट के सांदीपनि विद्यालय का छात्र जाएगा नासा, शैक्ष्रणिक भ्रमण के लिए हुआ चयन आईएसएससी 2026 में देशभर में हासिल किया प्रथम स्थान, अंतरिक्ष विज्ञान में सांदीपनि विद्यालय की गूंज पहुंची नासा तक बालाघाट प्रदेश के बालाघाट जिले स्थित सांदीपनि विद्यालय के कक्षा 12वीं के छात्र मयंक मात्रे ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल कर मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है। आईएसएससी 2026 में मयंक मात्रे ने देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस उल्लेखनीय सफलता के आधार पर उनका चयन प्रतिष्ठित नासा एजुकेशन टूर के लिए हुआ है। मयंक की यह उपलब्धि प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है तथा उनकी मेहनत, प्रतिभा और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। “Grand Winner” घोषित मध्यप्रदेश के सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी क्रम में बालाघाट जिले के सांदीपनि विद्यालय वारासिवनी के कक्षा 12वीं के छात्र मयंक मात्रे ने आईएसएससी (International Space Science Competition) में ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त कर विद्यालय एवं प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। इस उपलब्धि के साथ उन्हें “Grand Winner” घोषित किया गया तथा आगामी सितंबर 2026 में आयोजित होने वाले नि:शुल्क नासा एजुकेशन टूर (USA) के लिये चयनित किया गया है। यह प्रतियोगिता Go4Guru द्वारा देशभर के स्कूल एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की जाती है। सांदीपनि विद्यालय में विद्यार्थियों को आईएसएससी 2026 प्रतियोगिता की जानकारी दिए जाने के बाद इच्छुक विद्यार्थियों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया। इसी क्रम में मयंक ने 8 अप्रैल 2026 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में भाग लिया। 4 मई को घोषित परिणामों में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक-5 प्राप्त कर देशभर के शीर्ष 17 विद्यार्थियों में स्थान बनाते हुए फाइनल राउंड के लिए चयनित हुए। इसके बाद 15 मई 2026 को जूम के माध्यम से आयोजित लाइव फाइनल राउंड में नासा से संबद्ध शैक्षणिक कार्यक्रमों के प्रतिनिधियों एवं Go4Guru टीम की उपस्थिति में प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में त्वरित उत्तर आधारित विभिन्न क्विज राउंड हुए, जिनमें प्रतिभागियों को कुछ ही सेकंड में उत्तर प्रस्तुत करना था। देशभर के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के मध्य प्रतिस्पर्धा करते हुए मयंक ने सर्वाधिक 155 अंक प्राप्त किए और आईएसएससी 2026 के विजेता घोषित हुए। इस उपलब्धि के अंतर्गत मयंक का चयन आगामी नासा शैक्षणिक भ्रमण (NASA Educational Tour) के लिए किया गया है। इस दौरान उन्हें केनेडी स्पेस सेंटर, ऑरलैंडो का भ्रमण, अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय परिसर का अवलोकन, थीम पार्क अनुभव तथा डिज़्नी स्प्रिंग्स जैसी शैक्षणिक एवं प्रेरणादायक गतिविधियों में सहभागिता का अवसर प्राप्त होगा। मयंक ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी निरंतर मेहनत, अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि एवं शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने बताया कि वे नियमित अध्ययन के साथ ISRO, NASA एवं Space Science से संबंधित विषयों का लगातार अध्ययन करते रहे। गौरतलब है कि विद्यालय के उप प्राचार्य हुमराज पटले के नेतृत्व में विद्यालय में विज्ञान, नवाचार एवं समग्र विकास आधारित गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। विद्यालय में नियमित अकादमिक संवाद, शिक्षक समीक्षा बैठकें, योजनाबद्ध शैक्षणिक गतिविधियाँ एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिये विभिन्न प्रक्रियाएँ संचालित की जाती हैं। साथ ही, पीपल संस्था द्वारा प्रदान किए जा रहे सतत शैक्षणिक सहयोग, प्रशिक्षण आधारित मार्गदर्शन, अकादमिक सुझावों एवं विभिन्न शिक्षण प्रक्रियाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने विद्यालय में शिक्षण गुणवत्ता, अकादमिक संवाद एवं सीखने के वातावरण को और अधिक बेहतर एवं परिणामोन्मुख बनाया है। छात्र की इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।  

छोटे-छोटे बदलावों से बनेगा बड़ा जनआंदोलन, मंत्री राजपूत ने दोहराया प्रधानमंत्री का संदेश

दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर प्रधानमंत्री जी के संदेश को जन आंदोलन बनाएं : मंत्री राजपूत मंत्रालय से पैदल पहुंचे शासकीय निवास स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सादगी का दिया संदेश भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने शुक्रवार को विभागीय समीक्षा बैठक के उपरांत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हुए स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, अनुशासित जीवनशैली और सादगी का प्रेरणादायक संदेश दिया। मंत्री राजपूत मुख्यमंत्री सचिवालय से अपने शासकीय निवास सी-2, 74 बंगले तक पैदल पहुंचे। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाकर प्रधानमंत्री मोदी के संदेश को आंदोलन का रूप दें। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पैदल चलने और अनावश्यक वाहन उपयोग से बचने का प्रयास करने की भी अपील की। मंत्री राजपूत ने कहा कि भागदौड़ भरी जीवनशैली और लगातार बढ़ते तनाव के बीच स्वास्थ्य का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक हो गया है। नियमित पैदल चलना न केवल शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखता है, बल्कि मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और ऊर्जा भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यदि लोग प्रतिदिन कुछ समय पैदल चलने की आदत विकसित करें तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकता है। इसलिए हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में योग, व्यायाम और पैदल चलने जैसी गतिविधियों को शामिल करना चाहिए। इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी हमारा योगदान बढ़ेगा। मंत्री राजपूत ने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों और समाज के जिम्मेदार लोगों को स्वयं उदाहरण प्रस्तुत कर समाज को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करना चाहिए। राजपूत ने कहा कि सादगीपूर्ण जीवनशैली भारतीय संस्कृति की पहचान रही है और आज के समय में इसकी प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी अच्छी आदतें व्यक्ति के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं।  

सौर ऊर्जा को जनआंदोलन बनाने पर जोर, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए बड़े निर्देश

सौर ऊर्जा के उपयोग को अधिकाधिक प्रोत्साहित करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोलर उपकरणों की उपलब्धता बढ़ायें मंत्रालय में हुई ऊर्जा विभाग के कार्यों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऊर्जा उत्पादन के पारम्परिक स्त्रोतों का उपयोग करते हुए राज्य में सौर ऊर्जा के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। किसानों के लिए सोलर पम्प और गांव से लेकर शहर तक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर उपकरणों की उपलब्धता एवं उपयोग को प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में ऊर्जा विभाग के कार्यों की बैठक में समीक्षा कर रहे थे। नवाचारों की प्रशंसा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऊर्जा विभाग द्वारा किए गए प्रमुख नवाचारों की प्रशंसा की। बैठक में बताया गया कि गत ढाई वर्ष में प्रदेश में ड्रोन आधारित पेट्रोलिंग का नवाचार सफल हुआ है। इससे विद्युत लाइन ट्रिपिंग को 35 प्रतिशत कम करने और 220 केव्ही के लगभग 10 हजार टॉवरों के टॉप पेट्रोलिंग के कार्य में सफलता मिली है। इसी तरह वर्तमान में 400 और 132 केव्ही के 23 हजार टॉवरों के टॉप पेट्रोलिंग का कार्य ड्रोन द्वारा किया जा रहा है। इंसूलेटेड वर्क प्लेटफार्म का नवाचार भोपाल, जबलपुर, इंदौर और दमोह में किया गया। लाइनमैन द्वारा चालू लाइन में ही वेयर हेन्ड तकनीक और हॉट लाइन स्टिक तकनीक का कार्य इससे संभव होता है। गत वर्ष चालू लाइन में 257 परिचालन किए गए। परिचालन कर्मियों और प्रशिक्षु इंजीनियरों के प्रशिक्षण के लिए परिचालन सिम्युलेटर स्थापित किया जा रहा है। 19 हजार 895 मेगावॉट की सफलतापूर्वक पूर्ति बैठक में जानकारी दी गई कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी ने विश्वसनीय संचालन का प्रमाण देते हुए विद्युत गृहों द्वारा लगातार विद्युत उत्पादन किया गया है। गत 14 जनवरी को 19 हजार 895 मेगावॉट की सफलतापूर्वक पूर्ति इतिहास की सर्वाधिक पूर्ति है। ट्रांसमिशन कम्पनी का हानियां भी 2.60 प्रतिशत ही हैं। इसी तरह पारेषण उपलब्धता का प्रतिशत 99.52 है। समाधान योजना 2025-26 समाधान योजना 2025-26 के अंतर्गत विलंबित बिल के भुगतान पर सरचार्ज में छूट का लाभ उपभोक्ताओं को दिया गया। कुल 1,970 करोड़ की देनदारियां निराकृत हुईं। उपभोक्ताओं को 473 करोड़ रूपए की सरचार्ज की राशि माफ की गई। स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य प्रगति पर है। तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा 40 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित किए गए हैं। प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में प्रीपेड मीटरिंग के अंतर्गत 47 हजार से अधिक मीटर प्रीपेड मोड पर संचालित हैं। इस कार्य में 139 प्रतिशत भौतिक प्रगति प्राप्त की गई। प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ी प्रदेश में मार्च 2024 में कुल विद्युत क्षमता में नवकरणीय ऊर्जा का प्रतिशत 25 था, जो मार्च 2026 में बढ़कर 33 हो गया है। दो वर्ष पहले जहां 5 हजार 690 मेगावॉट ऊर्जा नवकरणीय स्त्रोतों से उत्पादित की जा रही थी, वहीं अब यह 8 हजार 608 मेगावॉट तक पहुंच गई है। इस उपलब्धि में सर्वाधिक योगदान 5 हजार 376 मेगावॉट सौर ऊर्जा का है। प्रदेश में पवन और अन्य नवकरणीय ऊर्जा से 3 हजार 232 मेगावॉट ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। बैठक में अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा विभाग नीरज मंडलोई ने बताया कि विभाग द्वारा मंत्रिपरिषद के निर्णयों के पालन, राजस्व आय में वृद्धि, घोषणाओं को पूर्ण करने के कार्य को प्राथमिकता दी गई। विद्युत अधोसंरचना की वृद्धि के साथ विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ परिणाम लाने के निर्देश दिए गए हैं। केन्द्र शासन से बेहतर समन्वय के कारण जबलपुर आईलैंडिंग योजना के क्रियान्वयन के लिए 5.08 करोड़ रूपए के केन्द्रीय अनुदान की मंजूरी मिली है। राज्य भार प्रेषण केन्द्र की सायबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी 13.61 करोड़ रूपए का अनुदान प्राप्त हुआ है। केन्द्र सरकार के पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से प्राप्त अनुदान से प्रदेश में ओपीजीडब्ल्यू (ऑप्टिकल ग्राउंड वायर) की 10 हजार 752 किलोमीटर लाईन में सफलतापूर्वक स्थापना संभव हुई। इसके लिए केन्द्र सरकार 146 करोड़ रूपए की अनुदान राशि प्राप्त हुई। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कृष्ट अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 63 हजार से अधिक जनजातीय समुदाय के नागरिकों को आवास गृह के विद्युतीकरण का लाभ दिलवाया गया। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) के अंतर्गत प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया और भारिया समुदाय के 28 हजार से अधिक घरों में विद्युतीकरण होने की उपलब्धि भी मिली है। कृषि फीडर विभक्तिकरण के 374 फीडर और एचटी लाईन में क्षमता वृद्धि के तहत लगभग 18 हजार कार्य पूर्ण किए गए हैं। ऊर्जा विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश     सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रत्येक स्तर पर बढ़ावा दिया जाए।     मजरों टोलों के सभी घरों तक सभी कार्य पूर्ण करें।     विद्युत देयक वसूली और नगद संग्रहण में वृद्धि हुई है ,इसे कायम रखें।     ऊर्जा विभाग में 2500 करोड़ रुपए की हानि को कम किया है। ऐसे प्रयास जारी रखें।     जबलपुर में वन नेशन वन ग्रिड के अंतर्गत पायलट प्रोजेक्ट के कार्य के लिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।     विद्युत बचत उपाय पर निरंतर अमल हो।     प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया, भारिया के घरों में विद्युतीकरण होने की उपलब्धि महत्वपूर्ण है। इन वर्गों के सभी लोगों को लाभ पहुंचाएं।     ऊर्जा की भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारी को अंजाम दें।     मध्यप्रदेश विद्युत जनरेशन कंपनी लाभ में है। इसके लिए कंपनी के पदाधिकारी बधाई के पात्र हैं।     बैठक में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

एशिया के मैदान पर चमकेगी मध्यप्रदेश की बेटियों की प्रतिभा

भोपाल  मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी, भोपाल की प्रतिभाशाली महिला खिलाड़ियों ने एक बार फिर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। जापान में आयोजित होने वाले महिला अंडर-18 एशिया कप 2026 के लिए घोषित भारतीय टीम में अकादमी की 4 खिलाड़ियों का चयन हुआ है। चयनित खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए देश एवं मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगी। प्रतियोगिता का आयोजन जापान के काकामिगाहारा में 29 मई से 06 जून 2026 तक किया जाएगा। अकादमी की चार बेटियों को मिला राष्ट्रीय मंच भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम में मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी, भोपाल की गोलकीपर महक परिहार, मिडफील्डर स्नेहा दावड़े एवं नम्मी गीता, तथा फॉरवर्ड खिलाड़ी नौशीन नाज़ को शामिल किया गया है। इन खिलाड़ियों का चयन उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन, अनुशासित प्रशिक्षण और निरंतर मेहनत का परिणाम है। चार खिलाड़ियों का एक साथ भारतीय टीम में चयन मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की मजबूत प्रशिक्षण व्यवस्था एवं महिला हॉकी विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। महिला अंडर-18 एशिया कप : पूल-ए में भारत की मजबूत चुनौती प्रतियोगिता में भारतीय टीम पूल-ए में शामिल है, जहां उसका मुकाबला कोरिया, मलेशिया एवं सिंगापुर जैसी मजबूत टीमों से होगा। भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत 30 मई को मलेशिया के विरुद्ध करेगी। इसके बाद 31 मई को कोरिया तथा 2 जून को सिंगापुर के खिलाफ मुकाबला खेलेगी। भोपाल में हुआ विशेष प्रशिक्षण, अंतर्राष्ट्रीय मंच के लिए तैयार हुई टीम भारतीय महिला अंडर-18 टीम ने प्रतियोगिता पूर्व अपना प्रशिक्षण शिविर भोपाल के राष्ट्रीय कैंप में पूर्ण किया, जहां खिलाड़ियों ने तकनीकी कौशल, सामरिक रणनीति, मैच फिटनेस एवं टीम समन्वय पर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसी तैयारी क्रम में भारतीय टीम ने भोपाल में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध चार मैचों की श्रृंखला भी खेली, जिसमें टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए आत्मविश्वासपूर्ण जीत दर्ज की। यह श्रृंखला खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित हुई। जापान में होगा एशिया का बड़ा मुकाबला महिला अंडर-18 एशिया कप 2026 का आयोजन 29 मई से 6 जून 2026 तक काकामिगाहारा, जापान में किया जाएगा। भारतीय टीम को पूल-ए में कोरिया, मलेशिया और सिंगापुर के साथ रखा गया है। भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत 30 मई को मलेशिया के विरुद्ध करेगी। इसके बाद 31 मई को कोरिया तथा 2 जून को सिंगापुर के खिलाफ मुकाबला खेलेगी। प्रतियोगिता के सेमीफाइनल 5 जून एवं फाइनल मुकाबला 6 जून को होगा। बेटियों का भारतीय टीम में चयन प्रदेश के लिए गौरव-  सारंग खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने भारतीय महिला अंडर-18 टीम एवं चयनित खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, “मध्यप्रदेश की बेटियों का भारतीय टीम में चयन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। खिलाड़ियों ने अपने समर्पण, अनुशासन एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन के बल पर यह उपलब्धि अर्जित की है। हमें विश्वास है कि भारतीय टीम एशिया कप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश को गौरवान्वित करेगी। मध्यप्रदेश सरकार खिलाड़ियों को बेहतर अवसर एवं विश्वस्तरीय खेल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।” महिला हॉकी प्रतिभाओं का मजबूत केंद्र बन रहा मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी, भोपाल लगातार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को तैयार कर रही है। आधुनिक खेल अधोसंरचना, वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रणाली, खेल विज्ञान आधारित फिटनेस प्रबंधन एवं अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन से अकादमी देश की अग्रणी हॉकी प्रशिक्षण संस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना रही है। एक साथ चार महिला खिलाड़ियों का भारतीय टीम में चयन इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश महिला हॉकी प्रतिभाओं के विकास में तेजी से अग्रणी भूमिका निभा रहा है।    

पश्चिम मध्य रेलवे का बड़ा फैसला, 14 स्टेशनों को मिला जंक्शन का दर्जा

बीना  पश्चिम मध्य रेलवे ने जबलपुर जोन के अंतर्गत जबलपुर, भोपाल व कोटा मंडल के कुल 14 स्टेशनों को जंक्शन का दर्जा दिया है, इसमें मालखेड़ी स्टेशन भी शामिल है, जो कि अब जंक्शन के नाम से पहचाना जाएगा। जंक्शन का दर्जा मिलने के बाद स्टेशन पर सुविधाओं में विस्तार की उम्मीद भी जाग गई है। बीना शहर से महज दो किलोमीटर दूर यह स्टेशन अभी जबलपुर मंडल में आता है, जहां पर सुविधाओं के विस्तार की मांग लगातार की जाती है, लेकिन यहां पर जो ट्रेनें खड़ी होती हैं, उनके अनुसार सुविधाओं में विस्तार की जरूरत है। दरअसल रेलवे अधोसंरचना विकास और नई रेल लाइनों, कॉर्ड लाइनों व बाईपास लाइनों के चालू होने के बाद यात्रियों व रेल परिचालन की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशनों के नामों को संशोधित करने का निर्णय लिया गया है। इसी के तहत सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति और भारतीय रेलवे सम्मेलन (आईआरसीए), नई दिल्ली के से चर्चा के बाद पश्चिम मध्य रेल के तीनों मंडलों (जबलपुर, भोपाल एवं कोटा) के कुल 14 रेलवे स्टेशनों के नामों में संशोधन कर उन्हें अब आधिकारिक तौर पर जंक्शन स्टेशन के रूप में अधिसूचित कर दिया गया है। यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि इन सभी स्टेशनों के पुराने अल्फाबेटिकल (अक्षर) और न्यूमेरिकल (संख्यात्मक) कोड में कोई बदलाव नहीं किया गया है, वह पहले की तरह ही रहेंगे। केवल नाम में जंक्शन शब्द जोड़ा गया है। अल्फाबेटिकल और न्यूमेरिकल कोड यथावत रहेंगे रेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्टेशनों के अल्फाबेटिकल और न्यूमेरिकल कोड में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केवल नाम के साथ 'जंक्शन' शब्द जोड़ा गया है।     पश्चिम मध्य रेलवे के 14 स्टेशनों के नाम में जुड़ा 'जंक्शन'     जबलपुर मंडल के सबसे ज्यादा 8 स्टेशन शामिल     भोपाल मंडल के 3 और कोटा मंडल के 3 स्टेशन अपग्रेड     रेलवे बोर्ड और IRCA की मंजूरी के बाद जारी हुई अधिसूचना     स्टेशन कोड पहले जैसे ही रहेंगे, उनमें कोई बदलाव नहीं     नए रेल रूट और कॉर्ड लाइन शुरू होने के बाद लिया गया फैसला     यात्रियों को सही रूट चुनने और ट्रेनों के संचालन में मिलेगी सुविधा जबलपुर मंडल के ये स्टेशन बने जंक्शन कटनी साउथ → कटनी साउथ जंक्शन (KTES) कटनी मुड़वारा → कटनी मुड़वारा जंक्शन (KMZ) कैमा → कैमा जंक्शन (KMA) सगमा → सगमा जंक्शन (SAGM) बांसापहाड़ → बांसापहाड़ जंक्शन (BNSP) बीना मालखेड़ी → बीना मालखेड़ी जंक्शन (MAKR) कटंगी खुर्द → कटंगी खुर्द जंक्शन (KTKD) कछपुरा → कछपुरा जंक्शन (KEQ)   भोपाल मंडल के ये स्टेशन बने जंक्शन तलवड़िया → तलवड़िया जंक्शन (TLV) रूठियाई → रूठियाई जंक्शन (RTA) संत हिरदाराम नगर → संत हिरदाराम नगर जंक्शन (SHRN) नई रेल लाइनों और बेहतर कनेक्टिविटी को देखते हुए 14 स्टेशनों को “जंक्शन” का दर्जा दिया गया है। इससे रेल संचालन और यात्रियों की सुविधा बेहतर होगी रेलवे अधिकारी, पश्चिम मध्य रेल विभाग कोटा मंडल के ये स्टेशन बने जंक्शन गंगापुर सिटी → गंगापुर सिटी जंक्शन (GGC) रामगंज मंडी → रामगंज मंडी जंक्शन (RMA) गुड़ला → गुड़ला जंक्शन (GQL) रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, स्टेशनों को जंक्शन का दर्जा मिलने से ट्रेनों के सुचारू संचालन, नए रेल रूट के बेहतर प्रबंधन और यात्रियों को सही यात्रा मार्ग चुनने में काफी आसानी होगी। इसके साथ ही भविष्य में इन स्टेशनों पर सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी। मालखेड़ी से जाती हैं चार दिशाओं में ट्रेनें मालखेड़ी स्टेशन जो अब जंक्शन है, यहां से चार दिशाओं में ट्रेनें चलती हैं, यहां से सीधे कटनी, झांसी, आगरा, मथुरा दिल्ली, गुना, कोटा अजमेर व भोपाल, इटारसी, मुंबई की ओर ट्रेनें चलती हैं। स्टेशन पर सुविधाओं के अभाव में अभी सिर्फ 24 ट्रेनों का स्टॉपेज है, जबकि यहां पर करीब 36 से अधिक ट्रेनें निकलती हैं, जिनमें से कई ट्रेनों का स्टॉपेज यहां पर नहीं है। अब लोगों को उम्मीद है कि सभी ट्रेनें यहां पर रुकेंगी और रिजर्वेशन टिकट काउंटर, पर्याप्त स्टॉल सहित अन्य सुविधाओं में विस्तार किया जाएगा। सुविधाएं बढ़ने से यात्रियों को परेशनियों से निजात मिलेगी। अभी सड़क, प्रकाश मूलभूत सुविधाओं की कमी है।

निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण, 34 कार्यों की हुई समीक्षा

भोपाल लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत प्रदेश में संचालित निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति की समीक्षा के लिए 20 मई को मुख्य अभियंताओं के सात दलों द्वारा भोपाल, मण्डला, अशोकनगर, खंडवा, रीवा, नीमच एवं निवाड़ी जिलों में औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में कुल 34 कार्यों का रेंडम आधार पर चयन कर परीक्षण किया गया। निरीक्षित कार्यों में 21 कार्य लोक निर्माण विभाग (सड़क एवं पुल), 6 कार्य परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) के भवन निर्माण, 6 कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम तथा एक कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम से संबंधित था। निरीक्षण दलों से प्राप्त प्रतिवेदनों की समीक्षा बैठक मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में प्रमुख अभियंता (सड़क/पुल)  के.पी.एस. राणा, प्रमुख अभियंता (भवन)  एस.आर. बघेल, प्रमुख अभियंता (बीडीसी)  अजय वास्तव, तकनीकी सलाहकार एमपीआरडीसी  आर.के. मेहरा सहित विभाग के समस्त मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री एवं निरीक्षणकर्ता अधिकारी ऑनलाइन उपस्थित रहे। समीक्षा में निवाड़ी जिले में सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय से रियारा धाम तेहरका तक 1.50 किलोमीटर लंबाई की निर्माणाधीन सड़क के संबंध में संबंधित मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग सागर परिक्षेत्र को पुनः निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त 19 अन्य कार्यों में आंशिक सुधार कर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए। बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि निरीक्षण प्रतिवेदनों में की गई अनुशंसाओं का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाए तथा पूर्व में किए गए निरीक्षणों की लंबित कार्यवाहियों का निराकरण अगली समीक्षा बैठक से पूर्व पूर्ण किया जाए। समीक्षा में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं लोकपथ ऐप पर प्राप्त शिकायतों के संतोषजनक और समयबद्ध निराकरण पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को शिकायतकर्ताओं को निराकरण की जानकारी देकर संतुष्टि प्राप्त करने तथा विभागीय रैंकिंग में सुधार के लिये निरंतर प्रयास करने के निर्देश दिए गए। बैठक में वर्षा ऋतु से पूर्व सड़क, पुल एवं भवनों के संधारण कार्य पूर्ण करने, दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट स्थलों के सुधार कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने तथा लोक कल्याण सरोवर योजना के कार्य 30 जून 2026 तक पूर्ण कर विभागीय पोर्टल पर जियो-टैग्ड वाली फोटो अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अतिरिक्त भास्कराचार्य संस्थान द्वारा विकसित किए जा रहे लोक कल्याण सूचकांक मॉड्यूल में समय पर प्रविष्टियां दर्ज करने, सड़क किनारे पौधारोपण करने तथा विभागीय नवाचारों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।  

उज्जैन में शुरू हुआ खास आकाशीय अवलोकन, 20 रुपए में मिल रहा ग्रहों को करीब से देखने का मौका

उज्जैन  मध्य प्रदेश का उज्जैन अब विज्ञान और खगोल अध्ययन के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है. शहर में मौजूद प्राचीन जीवजी वैधशाला, डोंगला स्थित वरामिहिर वैधशाला, तरामण्डल और विज्ञान केंद्र विज्ञान प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इसी क्रम में प्राचीन जीवजी वैधशाला में 21 मई से विशेष खगोलीय अवलोकन कार्यक्रम की शुरुवात हुई है जो 28 मई तक चलेगी।  इस आयोजन में देश-दुनिया से उज्जैन आने वाले पर्यटकों और विज्ञान में रुचि रखने वालों को 8 इंच टेलिस्कोप से अंतरिक्ष के अद्भुत नजारे दिखाए जा रहे हैं. पर्यटक टेलीस्कोप की मदद से चंद्रमा पर मौजूद गड्ढे, बृहस्पति ग्रह की पत्तियों और उसके उपग्रहों का नजदीक से अवलोकन कर रहे हो।  गाइड दे रहे रोचक जानकारी मौके पर मौजूद गाइड पर्यटकों के साथ वैज्ञानिक महत्व साझा कर रहे हैं और बड़ी रोचक जानकारियां भी दे रहे हैं. जिससे पहले ही दिन बड़ा उत्साह पर्यटकों में देखा गया. हालांकि इसमे 10 साल से कम उम्र के बच्चों को दूर रखा गया है. वहीं वैधशाला के अधीक्षक के अनुसार, ''शुक्र, बृहस्पति और बढ़ते चंद्रमा का अवलोकन भी करवाया जा रहा है. विज्ञान और आस्था का अनोखा संगम नगरी में पर्यटकों और विद्यार्थियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।  छात्र बोला- अभी तक चंद्रमा के बारे में किताबों में पढ़ा था अनुभव ले चुके पर्यटकों ने चर्चा की. पांचवी कक्षा के हनी ने कहा, ''यह बड़ा ही अद्भुत है, इसमें चंद्रमा की सतह पर गड्ढे, बृहस्पति पर पत्तियां और उसके उपग्रह को बड़ी आसानी से देखा जा रहा है. अभी तक सिर्फ किताबों में पड़ा था लेकिन आज पहली बार इसे करीब से देखकर महसूस किया, यह बहुत ही रोचक था।  कक्षा सातवीं में पढ़ने वाले प्रिंस ने कहा, ''इसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. जो भी कुछ मैंने देखा उसे में अपने दोस्तों से भी शेयर करूंगा और उन्हें भी यहां आने के लिए आग्रह करूंगा.'' वहीं पर्यटक विकास बोले टेलिस्कोप से 8 दिन के लिए दी गई सुविधा का हर किसी को फायदा उठाना चाहिए. यह बहुत ही अद्भुत और रोचक अनुभव रहा।  जीवजी वैधशाला अधीकक्ष ने कहा, ''वर्तमान में आकाश में सायं सूर्यास्त के बाद आप पश्चिम दिशा में लठ्ठू की तरह चमकदार शुक्र ग्रह को देख रहे हैं. पश्चिमी आकाश में लगभग 60 अशं पर चमकदार बृहस्पति ग्रह दिखाई दे रहा है. साथ ही शुक्ल पक्ष का प्रतिदिन बढ़ता हुआ हमारा चन्द्रमा तो आकाश में दिख ही रहा है. इस प्रकार तीन खगोलीय पिण्डों के अवलोकन के लिए एवं अपनी जिज्ञासा के समाधान का यह सबसे शानदार अवसर है।  इन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए शासकीय जीवाजी वैधशाला उज्जैन द्वारा उसे 8 दिन के लिए ग्रीष्मकालीन आकाशीय अवलोकन के नाम से शुरू किया है. हर रोज शाम 7:00 बजे से रात 9:00 बजे तक पर्यटक इसका लाभ उठा सकते हैं. सिर्फ शुक्र ग्रह नीचे की स्थिति में होने के कारण शाम 8:00 बजे के बाद टेलीस्कोप की परिधि से बाहर हो जायेगा. इसलिए इसे शाम 8:00 बजे तक ही दिखाया जा सकेगा. आकाशीय अवलोकन के लिये आकाश का खुला होना आवश्यक है. 20 प्रति व्यक्ति शुल्क रखा गया है।