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महाकाल मंदिर का लड्डू अब बनेगा हाईटेक मशीन से, 40 करोड़ का टेंडर जारी, गड़बड़ी पर लगेगा 50 लाख तक जुर्माना

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में मिलने वाला लड्डू प्रसाद अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रहा है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए मंदिर समिति ने अत्याधुनिक मशीनों से लड्डू तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। खास बात यह है कि महाकाल मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर है जिसके लड्डू प्रसाद को FSSAI की 5 स्टार रेटिंग मिल चुकी है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु लड्डू प्रसाद ग्रहण करते हैं। सामान्य दिनों में करीब 50 क्विंटल और विशेष पर्वों पर 100 क्विंटल तक लड्डू प्रसाद की खपत होती है। बढ़ती मांग और आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति अब आधुनिक तकनीक के जरिए प्रसाद निर्माण को नई दिशा देने जा रही है। मंदिर समिति ने करीब 40 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है। जिसके तहत फुली ऑटोमेटिक मशीनों के माध्यम से लड्डू प्रसाद तैयार किया जाएगा। नई यूनिट त्रिवेणी संग्रहालय के पास बने अन्नक्षेत्र परिसर में स्थापित की गई है। जिसका निर्माण लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। मंदिर समिति के अनुसार मशीनों के उपयोग से लड्डुओं की एक जैसी सिकाई होगी। गुणवत्ता में एकरूपता आएगी और उत्पादन क्षमता भी कई गुना बढ़ेगी। इससे सिंहस्थ के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर और स्वच्छ प्रसाद उपलब्ध कराया जा सकेगा। उप प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि टेंडर में गुणवत्ता को लेकर सख्त नियम तय किए गए हैं। आवेदन वही फर्म कर सकेगी जिसके पास कम से कम 3 साल का खाद्य निर्माण अनुभव हो। साथ ही FSSAI और ISO 22000 प्रमाणन अनिवार्य होगा। लड्डुओं की शेल्फ लाइफ कम से कम 15 दिन रखना भी जरूरी किया गया है। वहीं गुणवत्ता में लापरवाही पाए जाने पर 25 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। घटिया सामग्री उपयोग करने पर 5 लाख और वजन कम पाए जाने पर 2 लाख रुपए तक की पेनल्टी का प्रावधान रखा गया है। मंदिर समिति का कहना है कि प्रसाद की शुद्धता और स्वाद बनाए रखने के लिए शुद्ध घी, रागी, चना दाल, काजू-किशमिश सहित तय मानकों के अनुसार सामग्री का उपयोग किया जाएगा। धार्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक के इस संगम को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में एक बड़े नवाचार के रूप में देखा जा रहा है।

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने सौर ऊर्जा उत्पादन शुरू किया, ऊर्जा मंत्री तोमर का बयान

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने सौर ऊर्जा उत्पादन की ओर बढ़ाया कदम : ऊर्जा मंत्री तोमर 110 मेगावाट की सौर परियोजनाएं स्थापित होंगी तीन ताप विद्युत गृहों में फ्लेक्सिबिलिटी योजना के तहत सौर और ताप विद्युत का संयोजन 24*7 विश्वसनीय बिजली आपूर्ति का लक्ष्य भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) ने पारम्परिक ऊर्जा के साथ अब गैर वैकल्प‍िक ऊर्जा उत्पादन की ओर भी कदम बढाया है। पावर जनरेटिंग कंपनी प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 110 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना करेगी। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह जानकारी देते हुए कहा है कि यह परियोजनाएं मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के तीन प्रमुख ताप विद्युत गृहों सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया (40 मेगावाट), अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई (40 मेगावाट) और संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर (30 मेगावाट) में स्थापित होंगी। रणनीतिक स्थापना एवं फ्लेक्सिबिलिटी योजना के तहत संचालन पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने अपने स्थापित ताप विद्युत गृहों में ही सौर संयंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिससे उपलब्ध संसाधनों, अधोसंरचना और तकनीकी विशेषज्ञता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इस रणनीति से परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन, लागत में कमी व संचालन दक्षता में वृद्धि होने की संभावना है। गौरतलब है कि इन संयंत्रों से उत्पादित विद्युत का संचालन केंद्र सरकार की फ्लेक्सीबिलिटी योजना के अंतर्गत किया जाएगा। यह योजना सौर ऊर्जा को तापीय या जल विद्युत के साथ जोड़कर 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगी। इस समेकित मॉडल के माध्यम से नवकरणीय ऊर्जा की अनियमितता को संतुलित करते हुए ग्रिड की स्थिरता और विश्वसनीयता को भी बढ़ाया जाएगा। राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप पहल वर्ष 2021 में आयोजित COP-26 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रस्तुत ‘पंचामृत’ लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें वर्ष 2030 तक देश की 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताओं को नवकरणीय स्रोतों से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड का यह प्रयास राज्य में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान देगा। पॉवर जनरेटिंग कंपनी पूर्व में मंदसौर जिले के रातागुराड़िया में 7 मेगावाट का सौर संयंत्र स्थापित कर इस दिशा में शुरुआत कर चुकी है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कंपनी की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने हमेशा राज्य को विश्वसनीय और निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रदान की है और अपनी दक्षता से राष्ट्रीय पटल पर प्रदेश का मान बढ़ाया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी कंपनी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेगी और यह परियोजना राज्य के ऊर्जा क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी। उत्कृष्टता की परंपरा को बरकरार रखेंगे प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने वर्षों से उत्कृष्ट संचालन और तकनीकी दक्षता के बल पर देश के ऊर्जा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि “हमारा लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से सतत विकास सुनिश्चित करना है, साथ ही अपनी उत्कृष्टता की परंपरा को बनाए रखना है।” मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की यह पहल न केवल राज्य में नवकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि वितरण कंपनियों को स्थायी हरित ऊर्जा उपलब्ध कराने में भी सहायक साबित होगी। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी लाते हुए एक संतुलित और भविष्य के लिए तैयार ऊर्जा प्रणाली का निर्माण करेगी। उल्लेखनीय है कि पिछले माह ही मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के साथ अनुबंध हस्ताक्षरित किया है। इसके अंतर्गत नगरीय निकायों में सामूहिक रूप से लगने वाले प्रस्तावित प्लांट्स के लिए कंपनी मुख्य सलाहकार की भूमिका अदा करेगी। इस तरह के कदम राज्य को स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेंगे। 

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में करोड़ों की संगठित धोखाधड़ी का पर्दाफाश सीआईडी ने दर्ज की दो एफआईआर

भोपाल पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के निर्देशन में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा एक बड़े संगठित बीमा धोखाधड़ी गिरोह का खुलासा किया गया है। इस मामले में अपराध अनुसंधान विभाग, पुलिस मुख्यालय भोपाल में दो अलग-अलग प्रकरण पंजीबद्ध कर व्यापक जांच प्रारंभ कर दी गई है। विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी)  पंकज वास्‍तव ने बताया कि “प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY)” के अंतर्गत संगठित अपराधियों के एक गिरोह द्वारा फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के आधार पर बीमा कंपनियों से लगभग ढाई करोड़ रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है। यह संगठित अपराध ग्वालियर, मुरैना, रतलाम सहित प्रदेश के अन्य जिलों में सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि गिरोह के सदस्यों द्वारा विभिन्न बैंकों में फर्जी नामों से सैकड़ों संदिग्ध बैंक खाते खोले गए तथा इन्हीं खातों के माध्यम से बड़ी संख्या में बीमा पॉलिसियां ली गईं। एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम पर बीमा कराया गया, साथ ही एक ही नाम-पते वाले व्यक्तियों के अलग-अलग बीमा कंपनियों में बीमा कराए गए। कई मामलों में एक ही मोबाइल नंबर एवं ई-मेल आईडी का उपयोग विभिन्न खातों और बीमा पॉलिसियों में किया गया, जिससे संदेह और अधिक गहरा हुआ। विशेष रूप से यह तथ्यभी सामने आया है कि अनेक व्यक्तियों की जानकारी के बिना ही उनके नाम से बीमा पॉलिसियां जारी कराई गईं, जबकि संबंधित हितग्राही को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। बीमा कराने के एक माह से एक वर्ष के भीतर ही इन व्यक्तियों को मृत बताकर नगरीय निकायों से कथित रूप से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराए गए और उनके आधार पर बीमा क्लेम प्राप्त कर लिया गया। कई मामलों में संबंधित व्यक्ति जीवित पाए गए, फिर भी उन्हें मृत दिखाकर धोखाधड़ी की गई। गिरोह द्वारा धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को छिपाने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क का उपयोग किया गया। ग्वालियर एवं मुरैना में खोले गए खातों में राशि जमा होते ही उसे रतलाम, राजस्थान के सवाई माधोपुर, गंगानगर एवं अन्य स्थानों के एटीएम से तत्काल निकाल लिया जाता थाया म्यूल खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इसी प्रकार रतलाम में खोले गए खातों से राशि की निकासीग्वालियर-मुरैना क्षेत्र के एटीएम से की गई। संदेहास्पद खातों को चिन्हित कर फ्रीज करने की कार्रवाई की गई है। जांच के दौरान यह भी ज्ञात हुआ कि कई मामलों में बीमित व्यक्ति का निवास स्थान एक स्थान पर दर्ज किया गया, जबकि उसकी मृत्यु किसी अन्य दूरस्थ स्थान पर दर्शाई गई और वहीं से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराए गए। अलग-अलग नामित व्यक्तियों द्वारा कॉमन मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी का उपयोग कर क्लेम राशि प्राप्त की गई। उल्लेखनीय है कि “प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना” एक केंद्रीय सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को जीवन बीमा कवर प्रदान करना है। 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के हितग्राहियों को 436 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का बीमा कवर उपलब्ध कराया जाता है, जिसकी राशि मृत्यु की स्थिति में नामित व्यक्ति को प्रदान की जाती है। इस मामले में कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां एक ही परिवार के दो या तीन सदस्यों की मृत्यु एक ही सप्ताह या एक माह के भीतर दर्शाकर बीमा दावा प्राप्त किया गया, जबकि लगभग सभी मामलों में मृत्यु का कारण “प्राकृतिक” बताया गया है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा इस संगठित अपराध के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। गिरोह में शामिल आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी, बैंकिंग एवं बीमा नेटवर्क की विस्तृत जांच तथा अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क का भी पता लगाया जा रहा है। आगामी समय में इस प्रकरण में और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।  

पुलिस विभाग में 2070 महिला आरक्षकों को दिये जायेंगे नियुक्ति पत्र

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के पालन में पुलिस विभाग में रिक्त पदों पर भर्ती के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी रिक्त पदों पर बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश पुलिस में वर्ष 2025 में आरक्षक के रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से कराई गई है। पुलिस विभाग में जिला बल में 6800 पुलिस आरक्षकों की चयन प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। इसमें पुलिस आरक्षकों के 2070 पदों पर महिलाओं का चयन किया गया है। चयनित पुलिस आरक्षकों को जिलें आवंटित कर पुलिस अधिक्षकों को पत्र जारी कर दिये गये हैं। वे नियुक्ति पत्र जारी कर नियुक्ति की कार्यवाई समय सीमा में पूर्ण करायेंगे। भर्ती प्रक्रिया में जिला बल के लिए विज्ञप्ति आरक्षक के 6800 पदों में से महिलाओं के लिए 35% आरक्षण के मान से 2380 पद आरक्षित किए गए । इनमें से माननीय न्यायालय के आदेश के पालन में 13% पदों को रोकते हुए 87% पदों का परीक्षा परिणाम जारी किया गया है। इस तरह महिलाओं के लिए आरक्षित 2070 पदों पर महिला उम्मीदवारों का चयन किया गया है। पुलिस मुख्यालय की चयन भर्ती शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार म.प्र. पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम म.प्र. कर्मचारी चयन भोपाल व्दारा अपनी वेबसाईट पर गत 9 अप्रैल को जारी किया जा चुका है। चयनित उम्मीदवारों को पदस्थापना हेतु इकाई का आवंटन चयन/भर्ती शाखा पुलिस मुख्यालय भोपाल व्दारा किया गया है। इकाई आवंटन का परिणाम आज 30 अप्रैल को म.प्र. कर्मचारी चयन मण्डल भोपाल की वेबसाईट पर जारी किया गया है। साथ ही चयनित उम्मीदवारों को अपनी आवंटित इकाई में उपस्थित होने के संबंध में निर्देश भी डाउनलोड किये जा सकते है। इकाइयों को नियुक्ति संबंधी कार्यवाही एक माह में पूर्ण करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है।  

मेड इन इंडिया’ को मिल रही वैश्विक मांग, इंदौर बना ई-कॉमर्स निर्यात का नया केंद्र

भोपाल वैश्विक बाजारों में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच मध्यप्रदेश के एमएसएमई और डी2सी ब्रांड्स अब सीधे अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना रहे हैं। इसी दिशा में इंदौर में अमेज़न के ई-कॉमर्स निर्यात कार्यक्रम अमेज़न ग्लोबल सेलिंग द्वारा "एक्सपोर्ट हाट" का आयोजन किया गया, जिसने उभरते उद्यमियों और निर्यातकों को वैश्विक व्यापार से जोड़ने का सशक्त मंच प्रदान किया। अमेज़न ग्लोबल सेलिंग द्वारा वर्ष 2015 से अब तक 2 लाख से अधिक भारतीय निर्यातकों को 20 बिलियन डॉलर से अधिक के संचयी ई-कॉमर्स निर्यात तक पहुंचने में सहयोग दिया गया है। इंदौर में आयोजित इस कार्यक्रम में 150 से अधिक निर्यातकों ने भागीदारी की, जिनमें भोपाल सहित आसपास के क्षेत्र के निर्यातक शामिल रहे। कार्यक्रम के माध्यम से एमएसएमई, डी2सी ब्रांड्स और टियर-2 शहरों के उद्यमियों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया, जिसमें निर्यात व्यवसाय की स्थापना, विस्तार, बाजार अवसरों की पहचान, लॉजिस्टिक्स, अंतर्राष्ट्रीय भुगतान और ई-कॉमर्स निर्यात से जुड़े सभी आवश्यक पहलुओं को शामिल किया गया। इस वर्ष अमेज़न ग्लोबल सेलिंग द्वारा तिरुपुर, करूर और ठाणे जैसे प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में भी इसी प्रकार की पहलें आयोजित की जा रही हैं। इंदौर में आयोजित यह कार्यक्रम फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (एफआईईओ) के सहयोग से सम्पन्न हुआ, जिसने क्षेत्र की बढ़ती निर्यात क्षमता को रेखांकित किया। वस्त्र, हस्तशिल्प, होम डेकोर और खाद्य उत्पादों के मजबूत विनिर्माण आधार के कारण मध्यप्रदेश वैश्विक विस्तार के इच्छुक छोटे व्यवसायों के लिए तेजी से आकर्षण का केंद्र बन रहा है। वर्तमान में राज्य के 8 हजार से अधिक निर्यातक अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सक्रिय हैं। एमपी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक एवं निर्यात आयुक्त  चंद्रमौली शुक्ला ने बताया कि मध्यप्रदेश मजबूत एमएसएमई आधार और विविध उत्पाद श्रेणियों के चलते भारत के निर्यात परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक खरीददारों की बदलती प्राथमिकताओं के बीच ई-कॉमर्स निर्यात स्थानीय व्यवसायों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचने और अपने ब्रांड स्थापित करने का अवसर प्रदान कर रहा है। ऐसे कार्यक्रम विक्रेताओं को डिजिटल टूल्स के उपयोग और निर्यात प्रक्रिया को समझने में सक्षम बना रहे हैं, जिससे इंदौर के व्यवसाय वैश्विक स्तर पर विस्तार कर सकें। एमपीआईडीसी इंदौर के कार्यकारी निदेशक  हिमांशु प्रजापति ने बताया कि इंदौर निर्यात और उद्यमिता का सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। एक्सपोर्ट हाट डिजिटल निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जो एमएसएमई, स्टार्टअप और डी2सी ब्रांड्स को वैश्विक ई-कॉमर्स और क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड की समझ प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर राज्य अपने विशिष्ट उत्पादों को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर सकता है। अमेज़न ग्लोबल सेलिंग इंडिया की प्रमुख निधि कल्पवुड़ी ने बताया कि इंदौर जैसे उभरते केंद्र वैश्विक बाजारों की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। मध्यप्रदेश की वस्त्र और कपास उत्पादन क्षमता अब वैश्विक मांग में परिवर्तित हो रही है, जिससे ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की पहुंच दुनिया भर में बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि निर्यात प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए आवश्यक टूल्स, जानकारी और एंड-टू-एंड सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिससे एमएसएमई और डी2सी ब्रांड्स वैश्विक ग्राहकों तक पहुंच सकें और वर्ष 2030 तक 80 बिलियन डॉलर के संचयी ई-कॉमर्स निर्यात के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। डिटवी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं निदेशक  सचिन सुले ने बताया कि एसजीआई बेडिंग के माध्यम से भारतीय वस्त्र विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अमेज़न ग्लोबल सेलिंग से बाजार रुझानों की समझ, पर्यावरण के प्रति जागरूक ग्राहकों तक पहुंच और फुलफिलमेंट बाय अमेज़न के माध्यम से लॉजिस्टिक्स प्रबंधन में सुविधा मिली है। प्रतिस्पर्धी कीमतों पर टिकाऊ उत्पाद उपलब्ध कराते हुए भारतीय कारीगरी को वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे भारत की वस्त्र क्षेत्र में वैश्विक पहचान और मजबूत हो रही है।  

MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं की कटौती राशि एरियर्स सहित देने के निर्देश

जबलपुर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने 2019 से 2023 के बीच सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के मानदेय में की गई कटौती को गलत माना है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जून 2019 से जून 2023 तक का जो बकाया यानी एरियर्स है, उसे सरकार को छह प्रतिशत ब्याज के साथ चुकाना होगा। कोर्ट ने इसके लिए 120 दिनों की समय सीमा तय की। इस अवधि के अंदर प्रशासन को 48 महीनों की एरियर्स राशि का भुगतान करना होगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को ग्रेच्युटी एक्ट के दायरे में रखने का भी आदेश दिया है। सीधी निवासी आंगनबाड़ी सहायिका कार्यकर्ता संघ की सचिव विभा पांडे की और से 2019 में याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था। 2018 में केंद्र की भाजपा सरकार ने इसमें 1500 की वृद्धि की। लेकिन 2019 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो कार्यकर्ताओं का मानदेय 1500 कम कर दिया गया। इसी तरह सहायिकाओं का मानदेय भी 7000 से घटकर से 5500 कर दिया गया। अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि इसके बाद भाजपा सरकार ने इस कटौती को वापस कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं के मानदेय 2023 में बहाल कर दिए। लेकिन 2019 से 2023 तक का इन्हें एरियर्स नहीं मिला। इन्हें ग्रेच्युटी भी नहीं मिल रही है।

प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में जोड़ें नए आयाम

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को देश का रोल मॉडल बनाने के प्रयास किए जाएं। प्रदेश के दूरस्थ इलाकों के साथ ही पड़ौसी राज्यों के यात्रियों को भी विमानन सेवाएं लाभान्वित करती हैं। मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र का महत्व बढ़ाने की दृष्टि से भी ये सेवाएं महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में हुई बैठक में विमानन विभाग के कार्यों की जानकारी प्राप्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विकसित होने वाले मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के परिसर में हैलीपेड निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। हैली सेवाओं के विस्तार के लिए हैलीपेड निर्माण में निजी क्षेत्र का सहयोग प्राप्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने उज्जैन एयरपोर्ट के विकास के लिए संचालित कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि उज्जैन एयरपोर्ट में एयरफील्ड का कुल क्षेत्रफल 95 एकड़ है। राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार उज्जैन एयरपोर्ट 2700 मीटर लंबाई के रनवे के साथ कुल 4 हजार 100 मीटर लंबाई में विकसित होगा। इसके लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के लिए 590 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि स्वीकृत की जा चुकी है। सिंहस्थ:2028 के दृष्टिगत श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए एयरपोर्ट उपयोगी होगा। उन्होंने निर्देशित किया कि एयरपोर्ट के विकास के सभी कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए। बैठक में पीएम हेली पर्यटन सेवा के संचालन के संबंध में भी चर्चा हुई। रोजगारपरक एविएशन पाठ्यक्रम का लाभ युवाओं को दिलवाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विमानन सेवाओं के विस्तार के साथ दक्ष पायलट और अन्य प्रशिक्षित अमले की आवश्यकता होगी। नई शिक्षा नीति में एविएशन पाठ्यक्रम को रोजगारपरक शिक्षा की श्रेणी में शामिल किया गया है। उन्होंने प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा एविएशन कोर्स का लाभ युवाओं को दिलवाने के लिये प्रयास करने के ‍निर्देश दिये। सफल है प्रदेश की विमानन नीति, रीवा से 24 हजार यात्रियों ने उठाया हवाई सेवा का लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 गत फरवरी 2025 में जारी की गई थी। नीति में विमानन क्षेत्र की समग्र वैल्यू चैन के लिए कई तरह के प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश से बनारस और पटना जैसे बड़े नगरों के लिए विमान सेवा प्रारंभ करने का प्रयास किया जाए ताकि धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिले। प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में नए आयाम जोड़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन नीति की सफलता के लिए विभाग के अधिकारियों को बधाई दी। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के एयरपोर्ट से नए गंतव्यों को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए वित्तीय सहायता भी शिड्यूल्ड ऑपरेटर्स को दी जा रही है। मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 की सफलता का ही यह प्रमाण है कि गत छह माह में रीवा से 24 हजार यात्रियों ने हवाई सेवा का लाभ उठाया है। रीवा से दिल्ली, रीवा से रायपुर सप्ताह में तीन दिन और रीवा से इंदौर प्रतिदिन फ्लाइट उपलब्ध है। गत चार माह में रीवा से इंदौर की ऑक्यूपेंसी 85 प्रतिशत और गत डेढ़ माह में रीवा से रायपुर की ऑक्यूपेंसी 80 प्रतिशत से अधिक है। रीवा- नई दिल्ली फ्लाइट की ऑक्यूपेंसी भी 70 प्रतिशत से अधिक है। बैठक में अपर मुख्य सचिव विमानन विभाग  संजय कुमार शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव  आलोक कुमार सिंह, सचिव वित्त  लोकेश जाटव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।  

मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी में जेजे एक्ट एवं पॉक्सो एक्ट पर दो दिवसीय सेमीनार संपन्न

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी भोपाल में जेजे एक्ट एवं पॉक्सो एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन तथा बाल संरक्षण तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से दो दिवसीय सेमीनार का आयोजन 28 एवं 29 अप्रैल को किया गया। सेमीनार का आयोजन निदेशक/अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  मो. शाहिद अबसार के निर्देशन एवं उप निदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय "जेजे एक्ट एवं पॉक्सो एक्ट के विशेष पाठ्यक्रम, एसजेपीयू, जेजेसी एवं सीडब्ल्यूसी की भूमिका" रहा, जिसके अंतर्गत बाल संरक्षण से संबंधित विभिन्न कानूनी एवं प्रक्रियात्मक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान उप पुलिस अधीक्षक  नीरज नामदेव, नेशनल ज्यूडिशियल अकादमी भोपाल की प्रोफेसर सु पैकर नासिर, जेजे बोर्ड के सदस्य डॉ. कृपा शंकर चौबे, नगरीय पुलिस भोपाल की एडीपीओ डॉ. मनीषा पटेल तथा म.प्र. पुलिस अकादमी की एडीपीओ मती सुचित्रा वर्मा ने व्याख्यानों के माध्यम से अपने अनुभव साझा करते हुए जेजे एक्ट एवं पॉक्सो एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा संस्थागत समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। सेमीनार में मध्यप्रदेश पुलिस की विभिन्न इकाइयों से आए अधिकारी एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विषय से संबंधित व्यावहारिक एवं विधिक पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। सेमीनार का समापन 29 अप्रैल 2026 को उप निदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर सहायक निदेशक प्रशिक्षण मती रश्मि पाण्डेय, उप पुलिस अधीक्षक  नीरज नामदेव, सूबेदार  विजय गौर सहित अकादमी का स्टाफ उपस्थित रहा।  

मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड प्रारंभ, पैक्स समितियों में सदस्यता वृद्धि महाअभियान का भी हुआ शुभारंभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष के दौरान सोलह विभाग समन्वित रूप से किसानों के हित में कार्य कर रहे हैं। यह एक समग्र पहल है, जिसमें कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य पालन सहित अन्य विभागों को जोड़कर किसानों के विकास के लिए कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला से प्रदेश में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी किसानों के समर्पण भाव के साथ नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाते हुए कार्य करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों की समृद्धि के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2026 कृषक कल्याण के लिए समर्पित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रवींद्र भवन, भोपाल में कृषक कल्याण वर्ष में किसानों के सशक्तिकरण और उनकी आय वृद्धि के उद्देश्य से कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों की शुरूआत की गई, जिनमें मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड, पैक्स समितियों में सदस्यता वृद्धि महाअभियान और सीएम किसान हेल्पलाइन शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हेल्पलाइन से जुड़कर कृषि संबंधी जानकारी प्राप्त की और इसकी उपयोगिता का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की सेवा के लिए सीएम किसान हेल्पलाइन प्रारंभ की गई है। किसान भाई टोल फ्री नम्बर 155253 के माध्यम से इस नवाचारी पहल का लाभ ले सकेंगे। इस हेल्पलाइन से किसानों को त्वरित मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्मुखीकरण कार्यशाला में उपस्थित सभी कृषि कर्मयोगियों से किसान हितैषी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए पवित्र और समर्पण भाव से कार्य करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के लिए कार्य करते हुए नए प्रयोगों के साथ अपने मन के नए अंकुरण और कोमलता को जीवंत रखने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में हुए सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता के बल पर अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से पशुपालन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिससे प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई है और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। राज्य सरकार ने कई असंभव कार्यों को लक्ष्य तक पहुंचाया है। प्रदेश में दुग्ध क्रांति हो रही है। वर्तमान में किसानों को प्रति लीटर दूध पर पहले की तुलना में 7 से 8 रुपए तक अधिक मूल्य मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि क्षेत्र में अब व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहे है। पहले रबी फसल वर्षा पर निर्भर रहती थी, लेकिन अब समय बदल रहा है। नहरों और विद्युत सुविधाओं के विस्तार से खेत-खेत तक सिंचाई पहुंच गई है। इसके परिणामस्वरूप किसान अब वर्ष में 2 के स्थान पर 3 फसलें लेने लगे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार किसानों के लिये प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। इस वर्ष राज्य सरकार किसानों से 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं उपार्जित कर रही है। राज्य सरकार ने उड़द की फसल पर समर्थन मूल्य के साथ देने की शुरुआत की है। किसानों की अतिरिक्त आय का साधन बना एग्री वेस्ट मैनेजमेंट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान अब एग्री वेस्ट मैनेजमेंट अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। मक्के के डंठल, गेहूं और धान की नरवाई से भूसा बनाकर किसान लाभ कमा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं को खेती की ओर आकर्षित करने पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों और नवाचारों के माध्यम से खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। इजरायल में सीमित संसाधनों के बावजूद वहां खेती को अत्यंत आधुनिक और लाभकारी बनाया गया है। इजरायल में कम बारिश के बाद भी खेती में तकनीक का उपयोग प्रेरणास्पद है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार के लिए सीमा पर जवान और खेतों में किसान दोनों बराबर हैं। कृषक परिवारों से आने वाले युवा डॉक्टर, इंजीनियर बनना चाहते हैं, लेकिन खेती को भी लाभ का जरिया बनाया जा सकता है। इसके लिए युवाओं को प्रेरित करने की आवश्यकता है। पीकेसी परियोजना के लिए हमारी सरकार के आभारी है राजस्थानवासी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश को तीन-तीन नदी जोड़ो परियोजनाओं की सौगात मिली है। केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना से मध्यप्रदेश और राजस्थान के कई जिले लाभान्वित होने वाले हैं, जिनके लिए केंद्र सरकार ने लागत की 90 प्रतिशत राशि दी है। पीकेसी परियोजना पर सहमति के लिए राजस्थान के 15 जिलों के लोग मध्यप्रदेश सरकार को कोटि-कोटि धन्यवाद दे रहे हैं। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है और यहां जलराशी का पर्याप्त भंडार है। प्रधानमंत्री  मोदी ने मां नर्मदा के आशीर्वाद से अपने गुजरात के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में गुजरात को विकसित और अग्रणी राज्य बनाया। अब हमारी सरकार भी नर्मदा के जल से प्रदेश को समृद्ध बना रही है। आज पानी की बूंद-बूंद को बचाकर खेती-किसानी को आगे बढ़ाने का प्रयास करने की आवश्यकता है। कृषि मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा कि हर जिले में कृषि मेले आयोजित किये जा रहे हैं। इस कार्यशाला के माध्यम से कृषि कर्मयोगियों के साथ मंथन हो रहा है। राज्य में किसान हितैषी सरकार है, मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों की परेशानियों के लिए चिंतित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज गेहूं उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण किया है। प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों के लिए शुरू की गई योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारा है। इस कार्य में सभी कृषि कर्मयोगियों को सहयोग प्राप्त हो रहा है। सचिव कृषि  निशांत वरवड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने लोकसेवकों को कर्मयोगी की संज्ञा दी है। कृषक कल्याण वर्ष में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन से आज सभी 55 जिले, विकासखंड, क्लस्टर लेवल और ग्राम पंचायतों से कृषि से जुड़े 16 विभागों के 1627 चुनिंदा अधिकारियों और कर्मचारियों को कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला में आमंत्रित किया है। इसमें कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, मत्स्य पालन विभाग, उद्यानिकी विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, मार्केटिंग फेडरेशन, बीज निगम, कृषि अभियांत्रिकी विभाग एवं अन्य विभाग शामिल हैं। कार्यशाला में किसानों की समस्याओं … Read more

पुलिस मुख्यालय परिवार द्वारा 11 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दी गई भावभीनी विदाई

भोपाल पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं से माह अप्रैल में सेवानिवृत्त 11 कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने गुरूवार को भावभीनी विदाई दी। पुलिस महानिदेशक ने सभी को पौधे एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए और उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके विभिन्न स्वत्वों (क्लेम) भुगतान के आदेश भी प्रदान किए गये। नवीन पुलिस मुख्यालय भवन कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित विदाई समारोह में विशेष पुलिस महानिदेशक  अनिल कुमार,  पंकज वास्तव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  योगेश चौधरी,  विवेक शर्मा एवं अन्य पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्त, कर्मचारियों के परिजन उपस्थित थे। पुलिस मुख्यालय से सेवानिवृत्तव मानसेवी उप पुलिस अधीक्षक विशेष शाखा  अजय कुमार तुरकई, मानसेवी उप पुलिस अधीक्षक योजना शाखा मती लता खट्टर, निरीक्षक अ.अ.वि. शाखा  कैलाश नारायण भारद्वाज, कार्यवाहक निरीक्षक विशेष शाखा  रामसनेही यादव, कार्यवाहक निरीक्षक विशेष शाखा  केदारनाथ शर्मा, कार्यवाहक सूबेदार (एम) रिकार्ड शाखा  नईमउद्दीन, उप निरीक्षक (तकनीकी) पुलिस आईटीआई  शशिवीर सिंह सिसोदिया, उप निरीक्षक (तकनीकी) पुलिस आईटीआई  रणजीत सिंह उप्पल, सहायक उप निरीक्षक (एम) शिकायत शाखा  राजकुमार साहू, कार्यवाहक सहायक उप निरीक्षक अ.अ.वि.  चैनसिंह तथा कार्यवाहक प्रधान आरक्षक पीटीआरआई  हाकिम सिंह को पुलिस मुख्यालय परिवार ने गुरूवार को भावभीनी विदाई दी। सहायक पुलिस महानिरीक्षक मती इरमीन शाह ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के कार्यकाल पर प्रकाश डाला। विदाई समारोह में मौजूद अधिकारियों ने सेवानिवृत कर्मचारियों की मेहनत और लगन की सराहना की।