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जल चौपालों में दिलाया जा रहा जल संरक्षण का संकल्प

भोपाल  जल गंगा संवर्धन अभियान–2026 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ प्रदेश में जल संरक्षण की सशक्त पहल बनकर उभरा है। जनभागीदारी, जागरुकता और सामूहिक प्रयासों से यह अभियान जल संकट के समाधान के साथ ही पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। प्रदेश में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान–2026’ जल संरक्षण और संवर्धन का सशक्‍त माध्‍यम बन गया है। ‘बूंद-बूंद का संरक्षण’ और ‘जनभागीदारी’ के सिद्धांत पर संचालित हो रहा यह अभियान पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन और राज्य को जल-संपन्न बनाने की दिशा में प्रभावकारी सिद्ध रहा है। जबलपुर संभाग में अभियान के अंतर्गत नर्मदा नदी सहित क्षेत्र के तालाबों, कुओं और अन्य जल संरचनाओं के पुनर्भरण, साफ-सफाई और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सक्रिय जन भागीदारी ने इस अभियान को जन-आंदोलन बना दिया है। इस अभियान से जल प्रबंधन और पर्यावरण पारिस्थितिकी संतुलन की स्थिति में सुधार हो रहा है। जल चौपाल से जल जागरुकता जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जबलपुर जिले के कुंडम विकासखंड में कलेक्टर  राघवेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में ग्राम झोझ स्थित खेरमाता मंदिर परिसर में जल चौपाल का आयोजन कर ग्रामीणों को जल संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। साथ ही जल स्रोतों की साफ-सफाई और सोक-पिट्स के निर्माण की कार्ययोजना तैयार की गई। अभियान के अंतर्गत कटनी जिले के रीठी विकासखंड के ग्राम पोड़ी में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद एवं नवांकुर संस्था द्वारा जल जागरूकता चौपाल आयोजित की गई। इस दौरान तालाब, नदी, बावड़ी जैसे जल स्रोतों के गहरीकरण, साफ-सफाई से वर्षा जल संरक्षण के लिये श्रमदान का संकल्प दिलाया गया। कलश यात्रा एवं जन-जागरूकता रैली के माध्यम से भी सामूहिक स्वच्छता अभियान संचालित किया गया। जल शक्ति से नव भक्ति नरसिंहपुर जिले के चांवरपाठा विकासखंड के ग्राम सिमरियाकला में वृक्ष पूजन, पौधरोपण एवं स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित कर जल संरक्षण का संदेश दिया गया। ग्रामीणों को जल की प्रत्येक बूंद बचाने की शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही डिंडौरी जिले के ग्राम चटुवा में ‘जल शक्ति से नव-भक्ति’ कार्यक्रम के अंतर्गत पीपल वृक्ष पूजन एवं पुराने कुएँ की साफ-सफाई की गई। ग्रामीणों को वर्षा जल संचयन एवं जल संरक्षण के उपायों की जानकारी दी गई। जल मंदिर (प्याऊ) का शुभारंभ जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत मंडला जिले में नर्मदा पथ आश्रय स्थल पर परकोलेशन टैंक निर्माण हेतु श्रमदान एवं पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर में वृद्धि करना है। इसके अलावा छिंदवाड़ा जिले के परासिया विकासखंड के ग्राम डुंगरिया तीतरा में ‘जल शक्ति से नव भक्ति’ कार्यक्रम के अंतर्गत जल मंदिर (प्याऊ) का शुभारंभ किया गया, जिससे गर्मी में राहगीरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सके। जल संरक्षण पर सांस्कृतिक आयोजनों से जन जागरुकता जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत सिवनी जिले में दिव्य शिक्षा आदर्श समिति द्वारा हनुमान घाट गोपालगंज की साफ-सफाई कर प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट हटाए गए तथा जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई। इसके अलावा बालाघाट जिले के खैरलांजी विकासखंड के ग्राम बिटोड़ी एवं लोहारा में पेयजल गुणवत्ता जांच एवं स्वच्छता अभियान चलाया गया। फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से जल के क्लोरीन, आयरन एवं फ्लोराइड की जांच कर ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया गया। इसी प्रकार पांढुर्णा जिले के शासकीय महाविद्यालय सौसर में जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर  नीरज कुमार वशिष्ठ ने कहा, “जल ही जीवन है, केवल उक्ति नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का आधार है”। बढ़ते जल संकट के बीच नदियों, झीलों और भूजल स्तर में गिरावट चिंता का विषय है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जल संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प और जन जागरूकता और सहभागिता का प्रभावी अभियान बनकर उभरा है।  

बाल श्रम पर कड़ा प्रहार: खतरनाक उद्योगों में पूर्ण प्रतिबंध, नियम तोड़ने पर ‘जीरो रेटिंग’

भोपाल प्रदेश में 14 से 18 वर्ष तक के बच्चों का खतरनाक उद्योगों एवं प्रक्रियाओं में नियोजन पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है। सहायक श्रम आयुक्त सुश्री राखी जोशी ने बताया है कि श्रम स्टार रेटिंग के अंतर्गत यदि किसी संस्थान में बाल श्रम अथवा बंधक श्रम पाया जाता है, तो जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उस संस्थान को शून्य अंक दिए जाएंगे। इस संबंध में मध्यप्रदेश के सभी श्रम अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिन संस्थानों में बाल या बंधुआ श्रमिक नियोजित नहीं हैं, उन्हें अन्य मापदंडों में कुछ कमी होने के बावजूद श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। “वेदा पहल” के तहत बाल श्रम उन्मूलन और सतत निगरानी बाल श्रम उन्मूलन के लिए श्रम विभाग द्वारा “वेदा पहल” के अंतर्गत लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत प्रत्येक शुक्रवार को नियमित समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है और अभियोजन मामलों की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। साथ ही, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 (टोल-फ्री, 24/7) पर प्राप्त शिकायतों की भी निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। बाल एवं बंधक श्रम पर सख्त दंड का प्रावधान सहायक श्रम आयुक्त, श्रमायुक्त कार्यालय इंदौर से प्राप्त जानकारी के अनुसार कानूनी प्रावधानों के तहत बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत दोषी पाए जाने पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक जुर्माना और 6 माह से 2 वर्ष तक कारावास की सजा का प्रावधान है। वहीं, बंधक श्रम पद्धति (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के अंतर्गत अधिकतम 3 वर्ष कारावास या 2 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। बंधक श्रमिकों के पुनर्वास के लिये आर्थिक सहायता और कार्पस फंड व्यवस्था बंधक श्रमिकों के पुनर्वास के लिए केंद्र प्रवर्तित योजना 2021 के तहत वयस्क पुरुष श्रमिकों को 1 लाख रुपये, महिला श्रमिकों और अनाथ बच्चों को 2 लाख रुपये तथा शारीरिक शोषण या मानव तस्करी के पीड़ितों को 3 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा प्रत्येक जिले में पुनर्वास के लिए कार्पस फंड का भी गठन किया गया है।  

स्कूलों में ही बनेंगे आधार कार्ड और अद्यतन भी होगा

भोपाल राज्य शिक्षा केन्द्र, स्कूल शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश द्वारा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के सहयोग से प्रदेश के स्कूलों में छात्रों की सुविधा के लिए आधार नामांकन एवं अद्यतन शिविर विद्यार्थियों के लिए आधार, अब विद्यालय के द्वार का अगला चरण 1 अप्रैल से शुरू किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके विद्यालय परिसर में ही आधार से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिससे उन्हें नामांकन और अपडेट के लिए अलग से कहीं जाने की आवश्यकता न पड़े। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व यह कार्यक्रम 18 अगस्त से 31 अक्टूबर 2025 के बीच दो चरणों में आयोजित किया जा चुका है, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को लाभ मिला था। अब इसके अगले चरण के माध्यम से शेष विद्यार्थियों को भी इस सुविधा से जोड़ा जाएगा। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण एवं स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों के लंबित बायोमेट्रिक अपडेट को पूर्ण करने के उद्देश्य से “विद्यार्थियों के लिए आधार, अब स्कूल के द्वार” अभियान का अगला चरण प्रारंभ किया जा रहा है। यह अभियान 1 अप्रैल से प्रारंभ होकर 15 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा, जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को विद्यालय स्तर पर ही आधार से संबंधित सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। 500 से अधिक ऑपरेटर्स का किया गया है चयन आधार शिविरों के कुशल संचालन के लिए लगभग 500 से अधिक ऑपरेटर्स का चयन किया गया है। इसके साथ ही इस सबंध में शालाओं के प्रधानाध्‍यापकों को निर्देशित भी किया गया है कि वे UDISE+ पोर्टल से उन विद्यार्थियों की सूची अद्यतन कर लें जिनके आधार में MBU पेंडिंग हैं। ऐसे विद्यार्थियों को आधार अपडेट कराने के लिये जागरूक करें और इसके लिए एक रोस्टर बनाएं। स्‍कूल शिक्षा विभाग की यह पहल मुख्य रूप से बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) पर केंद्रित है। जिसमें उनके आधार में उंगलियों के निशान, आईरिस स्कैन और एक तस्वीर अपडेट करना शामिल है। पहला अपडेट तब आवश्यक है जब बच्चा 5 वर्ष का हो जाए। दूसरा MBU तब आवश्यक है जब बच्चा 15 वर्ष का हो जाए। दूसरा MBU 15 से 17 वर्ष की आयु के बीच पूरा होने पर निःशुल्क है, लेकिन 17 वर्ष की आयु के बाद शुल्क लागू होता है। अपडेटेड बायोमेट्रिक्स वाला आधार कार्ड, स्कूल प्रवेश, प्रवेश परीक्षा, छात्रवृत्ति और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं जैसी सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इसीलिए सरकार समयबद्ध तरीके से विद्यार्थियों की 100 प्रतिशत अपार आईडी (APAAR id) बनाने का भी लक्ष्य रख रही है। अपार आईडी विद्यार्थियों को उनके सभी शैक्षणिक क्रेडिट, जैसे स्कोर कार्ड, मार्कशीट, ग्रेड शीट, डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और सह-पाठ्यचर्या संबंधी उपलब्धियों को डिजिटल रूप से संग्रहीत, प्रबंधित और एक्सेस करने में मदद करती है। यह आईडी शिक्षा जगत में छात्र के लिए एक स्थायी डिजिटल पहचान के रूप में कार्य करती है। APAAR id के लिए महत्वपूर्ण है कि स्कूलों द्वारा APAAR Id बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले UDISE+ पोर्टल में दर्ज छात्र का नाम, आधार कार्ड में दर्ज नाम से मेल खाना चाहिए। स्कूल एडमीशन, प्रवेश परीक्षा, स्कॉलरशिप और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रोग्राम जैसी सर्विस पाने के लिए स्टूडेंट के पास मौजूदा बायोमेट्रिक्स वाला आधार होना ज़रूरी है। स्टूडेंट्स के लिए सबसे नए बायोमेट्रिक्स वाला अपडेटेड आधार भी ज़रूरी है, क्योंकि NTA, UPSC, JEE, NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए परीक्षा फॉर्म जमा करने और परीक्षा केन्‍द्रों में आगे एंट्री के लिए मोबाइल नंबर से जुड़ी आधार विवरण आवश्‍यक होता है। अपडेटेड आधार से स्टूडेंट की APAR ID भी आसानी से बन जाती है। पहले चरण में 2000 से अधिक स्कूलों में लगा था शिविर विद्यार्थियों की सुविधा के लिए, मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग, राज्य शिक्षा केंद्र के द्वारा यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (UIDAI) के सहयोग से "विद्यार्थी के लिए आधार, अब स्कूल के द्वार" पहल शुरू की गई है। पहले चरण में प्रदेश के 2000 से ज़्यादा विद्यालयों में MBU कैंप लगाए गए थे, जिनमें 15 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने अपने आधार में बायोमेट्रिक्स अपडेट किए थे।  

राज्यपाल पटेल से राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष पवैया ने की सौजन्य भेंट

राज्यपाल पटेल से राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष पवैया ने सौजन्य भेंट की भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल से राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने गुरूवार को राजभवन पहुँचकर सौजन्य भेंट की। आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने राज्य वित्त आयोग का कार्यभार ग्रहण करने की जानकारी राज्यपाल को दी। उल्लेखनीय है कि 23 मार्च 2026 को आयोग के अध्यक्ष पवैया के साथ आयोग के सदस्य के. के. सिंह तथा सदस्य सचिव वीरेन्द्र कुमार ने भी अपना-अपना कार्यभार ग्रहण किया है। राज्यपाल पटेल ने वित्त आयोग की भूमिका, कार्यप्रणाली तथा विभिन्न गतिविधियों को लेकर मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि राज्य वित्त आयोग अपने उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करते हुए प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इस अवसर पर आयोग के अध्यक्ष पवैया ने राज्यपाल पटेल को आश्वस्त किया कि आयोग को सौंपे गए दायित्वों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन किया जाएगा और राज्य के विकास में आयोग अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभाएगा। राज्यपाल पटेल ने आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि आयोग को सौंपे गए दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना ही राज्य और देश की सच्ची सेवा है।  

सीएम योगी के नेतृत्व में यूपी में पहली बार महिला गन्ना किसानों को मिली सर्वाधिक मजबूती

लखनऊ उत्तर प्रदेश में गन्ना की खेती के क्षेत्र में महिलाओं ने अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए नया इतिहास रच दिया है। योगी सरकार में प्रदेश की 57 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं गन्ना उत्पादन से जुड़कर सफल उद्यमी बन चुकीं हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है। प्रदेश में वर्ष 2020-21 में शुरू किए गए “उन्नत गन्ना बीज वितरण कार्यक्रम” से महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। इस योजना के तहत 37 गन्ना आच्छादित जिलों में 3,163 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया। इनमें 57,322 महिलाओं को स्वरोजगार मिला है। साथ ही इस पहल से अब तक लगभग साढ़े चार लाख से अधिक कार्य दिवसों का रोजगार सृजित हुआ है। महिलाओं को मिली प्राथमिकता, बढ़ा आत्मविश्वास गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. ने बताया कि गन्ना उत्पादन के क्षेत्र में पहली बार योगी सरकार के दौरान महिला किसानों को पर्ची निर्गमन में प्राथमिकता दी गई है। इससे प्रदेश की लगभग डेढ़ लाख महिला गन्ना लघु किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। इस निर्णय ने महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाया है और उन्हें खेती में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया है। सामाजिक समावेशन का विशेष ध्यान योगी सरकार ने इस योजना में सामाजिक समावेशन का भी विशेष ध्यान रखा है। इसमें 10,270 अनुसूचित जाति और 130 अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को शामिल किया गया है, जो अब आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रहीं हैं। बीज उत्पादन से करोड़ों का कारोबार महिला स्वयं सहायता समूहों ने अब तक 60.73 करोड़ गन्ना बीज तैयार किए हैं। इसके बदले उन्हें 77.83 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया है। इससे ग्रामीण महिलाओं को बड़े स्तर पर आर्थिक लाभ मिला है और वे अब कृषि आधारित उद्यमिता की नई पहचान बना रहीं हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई दिशा गन्ना खेती में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से प्रदेश में न सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि गांवों में आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिली है। योगी सरकार की इस पहल ने यह साबित किया है कि सही अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता की नई इबारत लिख सकतीं हैं। महिलाओं को ऋण एवं अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. ने बताया कि महिलाओं को सशक्त करने के लिए गन्ना विभाग ने ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ एक एमओयू किया है। जिसके तहत समितियों में प्रेरणा कैंटीन चलाई जाएंगी। इसके अंतर्गत महिलाओं को ऋण एवं अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उनके रोजगार एवं आय में वृद्धि होगी।

मंदिर गेट पर विवादित पोस्टर से हड़कंप, दमोह में ‘एंट्री बैन’ और लव जिहाद को लेकर चेतावनी

दमोह शहर के बड़ी देवी मंदिर गेट के बाहर चैत्र नवरात्रि पर्व पर हिंदू संगठन द्वारा पोस्टर लगाए गए हैं, जिसमें विधर्मियों का प्रवेश निषेध लिखा है। इसके अलावा अंदर टीन शेड पर भी लव जिहाद जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए पोस्टर लगाए गए हैं। मंदिर के मुख्य गेट पर लगाए गए यह पोस्टर इस समय चर्चा का विषय बन गए हैं। हिंदू संगठन की ओर से लगाए गए इन पोस्टरों में महिलाओं से पारंपरिक परिधान में मंदिर आने की अपील की गई है। विशेष समुदाय के युवकों पर छेड़छाड़ के आरोप हिंदू संगठन के नित्या प्यासी ने बताया कि बड़ी देवी मंदिर धार्मिक क्षेत्र है, वह घूमने वाला क्षेत्र नहीं है। जिन लोगों की आस्था हिंदू धर्म और सनातन धर्म में नहीं है, उन्हीं को लेकर हमने यह पोस्टर लगाए हैं। उसमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि विधर्मियों का प्रवेश निषेध है; माताएं-बहनें पारंपरिक सांस्कृतिक परिधान में ही माता की आराधना करें। उन्होंने आगे बताया कि पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि मंदिर में विशेष समुदाय के युवक यहां घूमते दिखाई दिए हैं और कई बार इन लोगों के द्वारा छेड़छाड़ जैसी घटनाएं भी की गई हैं। हमने कार्रवाई करते हुए पुलिस को इन्हें सौंपा है। 'प्रशासन बाद में पहुंचेगा, हम अपने हिसाब से कार्रवाई करेंगे' नित्या प्यासी ने आगे कहा कि जब आपकी आस्था हिंदू और सनातन धर्म में नहीं है तो बड़ी देवी मंदिर में क्यों जाना? वहां हमारी माताएं, बहनें मां की आराधना करती हैं, 9 दिन का उपवास करती हैं, तो वहां समुदाय विशेष के युवक को नहीं जाना चाहिए। यह लोग लव जिहाद की घटना के तहत ही यहाँ आते हैं और षड्यंत्र रचते हैं। लव जिहाद फैलाने के उद्देश्य से जो भी व्यक्ति हमें दोबारा मिलता है, तो अब हमारा कहना है कि प्रशासन तो बाद में पहुँचेगा, हम पहले ही अपने हिसाब से कार्रवाई करेंगे। कड़ी कार्रवाई का अल्टीमेटम, 'हाथ में डंडा है और इलाज भी जानते हैं' हमारा स्पष्ट रूप से कहना है कि यदि हमारे धार्मिक स्थान पर जाना है तो अपनी माता और बहनों को भी साथ लेकर जाइए, हम आपका फूल-मालाओं से स्वागत करेंगे। यदि आप लव जिहाद के उद्देश्य से जाएंगे तो हमारे हाथ में डंडा है और उसमें झंडा लगा रहता है। हम इसका इलाज भी जानते हैं; यदि मंदिर क्षेत्र में माता, बहनों के साथ छेड़छाड़ या लव जिहाद जैसी हरकत की गई तो इसका बहुत बड़ा नुकसान ऐसे लोगों को भुगतना होगा।  

स्कूलों की लापरवाही भारी, इंटरनल मार्क्स अपडेट नहीं—MP बोर्ड रिजल्ट में हो सकती है देरी

भोपाल मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम 15 अप्रैल को जारी करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन इस बार प्राचार्यों की लापरवाही के कारण देरी की आशंका बढ़ गई है। कई स्कूलों ने प्रायोगिक परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन के अंक अब तक ऑनलाइन दर्ज नहीं किए हैं। मंडल द्वारा पहले 12 मार्च तक अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि की समय-सीमा तय की गई थी, लेकिन कार्य पूरा नहीं होने पर इसे बढ़ाकर 29 मार्च कर दिया गया है। मंडल की सख्त चेतावनी मंडल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी विद्यालय निर्धारित समय-सीमा तक हर हाल में अंक ऑनलाइन दर्ज करें, ताकि परिणाम समय पर जारी हो सके। सचिव द्वारा जारी पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि 29 मार्च तक अंक प्रविष्ट नहीं किए गए, तो संबंधित विद्यार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन का कॉलम रिक्त छोड़कर ही परिणाम घोषित किया जाएगा। इसके बाद किसी प्रकार का संशोधन या पुनः प्रविष्टि की अनुमति नहीं होगी। परिणाम प्रक्रिया पर असर मंडल इस वर्ष अप्रैल के दूसरे सप्ताह में परिणाम जारी करना चाहता है, क्योंकि द्वितीय बोर्ड परीक्षा 7 मई से शुरू होनी है। लेकिन आंतरिक अंकों की प्रविष्टि में देरी से परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। स्कूल स्तर पर होता है मूल्यांकन मंडल ने तीन वर्ष पहले परीक्षा पद्धति में बदलाव करते हुए लिखित परीक्षा के साथ प्रायोगिक और प्रोजेक्ट कार्य को शामिल किया था। 100 अंकों में 80 अंक लिखित परीक्षा और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के होते हैं। ये आंतरिक अंक स्कूल स्तर पर तैयार किए जाते हैं और उनकी ऑनलाइन प्रविष्टि की जिम्मेदारी प्राचार्यों की होती है। मंडल अधिकारियों के अनुसार कई जिलों के स्कूलों ने अभी तक यह कार्य पूरा नहीं किया है।

गैस नहीं तो सड़क जाम! मुरैना में LPG की किल्लत पर लोगों का उग्र प्रदर्शन

मुरैना मुरैना जिले में गैस एजेंसियों पर सिलिंडर के लिए कतारें लंबी होती जा रही हैं। आज सुबह से सबलगढ़ गैस एजेंसी पर खाली सिलिंडरों के साथ लोगों की लाइन लग गई। एजेंसी संचालक ने 11 बजे एजेंसी की शटर गिरा दी। उपभोक्ताओं को सिलिंडर देने से मना कर दिया। एजेंसी ने कहा कि सिंलिंडरों की कमी है। ऐसे में अब और लोगों को सिलिंडर नहीं दिए जा सकते हैं, जिससे नाराज होकर लोग सड़कों पर उतर आए। खाली सिलिंडरों को एमएम रोड पर रखकर जाम लगा दिया। करीब 20 मिनट तक हंगामा व जाम चलता रहा। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाइश दी। लाइन में लगे लोगों को मिला सिलिंडर हंगामे के बाद एजेंसी संचालक ने कहा कि लाइन में लगे लोगों को ही सिलिंडर मिलेंगे। उसके बाद जाम लगा रहे लोग खाली सिलिंडरों को लेकर एजेंसी की तरफ दौड़े।  

दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में रामलला का दर्शन किया, बोले – “राम मंदिर का विरोध मैंने कभी नहीं किया

भोपाल  वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आज यानी गुरुवार 26 मार्च को अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आ जाता है, इसलिए जब मुझे बुलावा आया, तो मैं उपस्थित हो गया। प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा। दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा। जब उनसे मंदिर के कंस्ट्रक्शन को लेकर प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसमें हम लोगों का भी योगदान है, हमने भी पैसा दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम लला के दर्शनों के साथ ही उन्होंने हनुमानगढ़ी जाकर भगवान हनुमान का भी आशीर्वाद लिया। जब उनसे कांग्रेस नेताओं के अयोध्या न आने पर प्रश्न किया गया तो उन्होंने कहा, 'कांग्रेस में हर व्यक्ति अपनी आस्था अनुसार धर्म का पालन करता है। हम धर्म का दुरुपयोग ना तो व्यवसाय के लिए करते हैं और ना राजनीति के लिए करते हैं।'उन्होंने कहा हमारी आस्था, जो भी जिस धर्म का व्यक्ति हो चाहे वह हिंदू हो, मुसलमान हो, सिक्ख, ईसाई, पारसी हो, हर व्यक्ति अपने धर्म का अपने अनुसार पालन करता है।इस दौरान दिग्विजय सिंह से वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व पार्टी अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अयोध्या आने पर भी प्रश्न पूछा गया। इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा, 'जब उनको बुलावा आएगा तो वो भी जरूर आएंगे। क्यों नहीं आएंगे? प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आता है दर्शन-पूजन के बाद मंदिर प्रांगण से बाहर आए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि जब प्रभु का बुलावा आता है तो हर व्यक्ति आ जाता है इसलिए जब मुझे बुलावा आया, तो मैं उपस्थित हो गया। उन्होंने कहा कि प्रभु के दर्शन करके अच्छा लगा। कांग्रेस में तो हर व्यक्ति अपनी आस्था अनुसार धर्म का पालन करता है। हम धर्म का दुरुपयोग ना तो व्यवसाय के लिए करते हैं और ना राजनीति के लिए करते हैं। कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया नेता दिग्विजय सिंह ने हनुमान गढ़ी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की और उन्होंने कहा कि मैंने तो कभी भी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया। मैंने कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया है। मैं अयोध्या राजनीति करने नहीं आया हूं। मैंने राम मंदिर निर्माण के दौरान चंदा भी दिया था। सभी पर श्रीराम की कृपा बनी रहे। रामलला के दर्शन करने के बाद उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि रामलला के दर्शन कर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने प्रभु राम से कामना की कि पूरे देश में खुशहाली फैले, तरक्की हो और सभी लोगों के बीच सद्भाव बना रहे। राम मंदिर के निर्माण और उसकी भव्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर तो मैं विस्तार से बाद में चर्चा करूंगा। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद पहली बार कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने रामलला का दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह गुरुवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन किया। उनसे पहले यूपी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय भी रामलला का दर्शन कर चुके हैं।  

दो दिवसीय सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स का आयोजन

दो दिवसीय सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स का आयोजन सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के हुआ पीटीआरआई में प्रशिक्षण भोपाल सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं यातायात की नवीन तकनीकों से परिचय कराने के लिये इलेक्ट्रॉनिक इनफोर्समेंट इन एमपी एण्ड टाइम बाउंड इनवेस्टीगेशन फोर रोड़ विषय पर आधारित दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेक शर्मा के निर्देशानुसार पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) भोपाल में किया गया। मध्यप्रदेश में सड़क पर होने वाली वाहन दुर्घटनाओं एवं दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को सड़क सुरक्षा प्रबंधन कोर्स के माध्यम से दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु में कमी लाने के लिये पीएम राहत योजना (कैशलेस), राहवीर योजना, हिट एण्ड रन पीड़ित प्रतिकर योजना का व्यापक प्रयोग एवं प्रचार-प्रसार करने पर बल दिया गया। साथ ही यातायात प्रवर्तन की नई तकनीकों जैसे पीओएस, आईटीएमएस, ई-चालन जैसे नव प्रयोगों के बारे में व्यापक अद्यतन रूप से विषय-विशेषज्ञों द्वारा सेमिनार में उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को बताया गया। साथ ही संस्थान के प्रमुख अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेक शर्मा द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट-1988, सीएमवीआर-1989, मध्यप्रदेश मोटर व्हीकल रूल्स-1994 के अद्यतन नवीन प्रावधान तथा वर्तमान में यातायात प्रबंधन में प्रचलित ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ई-डार प्रणाली के बारे में व्यापक रूप से अवगत कराया गया। सड़क सुरक्षा प्रबंधन का उद्देश्य सड़क उपयोगकर्ताओं को एक सुरक्षित सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराना, जिसमें पदयात्रियों तथा साइकिल, वाहन चालकों को प्राथमिकता दी गयी है और भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या एवं सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के लक्ष्य को प्राप्त करना है। प्रशिक्षण सत्र के शुभारंभ पर उप पुलिस महानिरीक्षक पीटीआरआई टी.के. विद्याथी द्वारा 4-ई के प्रमुख स्तंभ जैसे एजुकेशन ,इंजीनियरिंग, इनफोर्समेंट एवं इमरजेंसी-केयर की तथा सड़क दुर्घटनाओं की भयावहता को प्रशिक्षणार्थियों के समक्ष रखा। उनके द्वारा यातायात प्रवर्तन को दृष्टिगत रखते हुए ई-इनफोर्समेंट पर जोर दिया। साथ ही ओवर स्पीडिंग से निवारण के लिये इंटरसेप्टर व्हीकल की उपयोगिता को बढ़ाए जाने का अनुरोध किया। वर्तमान में भारत सरकार की योजनाओं राहगीर एवं कैशलेस उपचार के साथ-साथ गोल्डन ऑवर की अवधारणा से प्रशिक्षणार्थियों को अवगत कराया गया। सेमिनार में पीटीआरआई के सहायक पुलिस महानिरीक्षक अभिनीत कुमार रंजन, राजेश मिश्रा, विक्रम सिंह रघुवंशी, उप पुलिस अधीक्षक मनोज खत्री, हिमांशु कार्तिकेय एवं प्रशिक्षण टीम के अधिकारी भी उपस्थित रहे। कोर्स के समापन में प्रशिक्षणार्थियों को पीटीआरआई द्वारा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये।