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सावित्रीबाई फुले का सपना नारी बने शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर: मंत्री भूरिया

भोपाल महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार महान समाजसेविका और देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के सपने को पूरा करने का कार्य कर रही है। नारी सशक्तिकरण के लिये प्रदेश में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। भारत के सामाजिक इतिहास में सावित्रीबाई फुले नाम महिला शिक्षा और सशक्तिकरण की पहली अग्रदूत के रूप में आदर के साथ लिया जाता है। वे देश की पहली महिला शिक्षिका थीं, जिन्होंने ऐसे समय में बालिकाओं की शिक्षा के लिए अलख जगाई, जब समाज में महिलाओं को पढ़ाने की कल्पना भी नहीं की जाती थी। सावित्रीबाई फुले ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए बेटियों को शिक्षा से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया और महिलाओं के सम्मान, अधिकार और समानता की नींव रखी। भारत के सामाजिक इतिहास में चुनिंदा ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने अपने साहस, दूरदर्शिता और समाज के प्रति समर्पण से देश को नई दिशा दी। ऐसी ही महिला सशक्तिकरण की अग्रदूत थीं सावित्री बाई फुले। उनकी पुण्यतिथि हमें पुण्य स्मरण कराती है कि महिलाओं को शिक्षा के साथ समानता के अधिकार और सम्मान के बिना समाज की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है। सावित्रीबाई फुले ने ऐसे समय में महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष किया, जब समाज में महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखा जाता था। उन्होंने न केवल देश का पहला बालिका विद्यालय शुरू किया, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव के खिलाफ भी आवाज़ बुलंद की। उनके प्रयासों ने महिलाओं को आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वावलंबन की राह दिखाई। आज उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मध्यप्रदेश सरकार भी सावित्रीबाई फुले के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए महिलाओं और बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित, शिक्षित, स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाना है। प्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह योजना बेटियों की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। इसी प्रकार लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत आधार दे रही है, जिससे वे परिवार और समाज में अधिक आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाओं और बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए पोषण अभियान तथा आंगनवाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के समुचित पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और गर्भवती और धात्री माताओं के स्वास्थ्य तथा बालिकाओं के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न हेल्पलाइन सेवाओं, जागरूकता अभियानों और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ कर रही है। स्व-सहायता समूहों और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को रोजगार और स्व-रोजगार तथा उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सके। महान शिक्षाविद सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि के अवसर पर हम उन्हें केवल स्मरण ही न करें, बल्कि उनके स्थापित आदर्शों को अपनाकर अन्य लोगों को भी प्रेरित करें। प्रत्येक बेटी को जब शिक्षा, सम्मान और अवसर मिलेगा, तभी एक समतामूलक और सशक्त समाज का निर्माण संभव होगा। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना भी है, जहां महिलाएँ आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार कर सकें। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक अवसरों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्री सुश्री भूरिया ने सभी से अपील की है कि सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि पर हम सभी यह संकल्प लें कि महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा और सम्मान के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी और यही एक विकसित और सशक्त भारत की दिशा में हमारा महत्वपूर्ण कदम होगा।  

किसान हित में सरकार प्रतिबद्ध: कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना का बयान

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि किसानों का कल्याण करना राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित कर खेती को लाभ का धंधा बनाने और किसानों की आय आय बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं और गतिविधियां संचालित की गई हैं । विभाग का प्रमुख दायित्व प्रदेश में कृषि फसलों की उत्पाद‌कता में वृद्धि, भूमि एवं जल प्रबंध, लघु सिंचाई कार्यक्रमों का विस्तार एवं नवीनतम विकसित कृषि तकनीकी को खेतों तक पहुंचाने के लिए कृषकों को प्रेरित करना है। आधुनिक कृषि उपकरणों तथा उन्नत प्रमाणित बीजों का उपयोग बढ़ाने के साथ-साथ अन्य आदान सामग्री की उपलब्धता सुचारू रखने का दायित्व भी विभाग का है। कृषि मंत्री  कंषाना ने कहा कि समन्वित रूप से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में कृषकों की आय में वृद्धि करने के उद्‌देश्य से वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। डिजीटल एग्रीकल्चर के माध्यम से क्षेत्र का आधुनिकीकरण करने एवं कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने के अतिरिक्त मूल्य संवर्धन के माध्यम से नये रोजगार सृजन करना इसके आधारभूत लक्ष्य हैं। 'समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश' की दिशा में कृषक कल्याण वर्ष-2026 में प्रदेश में कृषि विकास का बहु आयामी मॉडल निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत विभिन्न बहुउद्‌देशीय गतिविधियों का समावेश किया गया है। ई-विकास (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने एवं किसानों को आवश्यक उर्वरकों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए "ई-विकास (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान)" की शुरुआत की गई है। यह एक डिजिटल प्रणाली है, जिसका उ‌द्देश्य किसानों को अनुशंसित मात्रा अनुसार उर्वरक प्रदाय करने एवं उर्वरक प्राप्ति में होने वाली समस्याओं जैसे लंबी कतारें, कालाबाजारी, अनियमित वितरण एवं बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना है। 1 अक्टूबर 2025 से प्रदेश के तीन जिलों विदिशा, शाजापुर एवं जबलपुर में ई-विकास (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली लागू की गयी। इसके सकारात्मक परिणाम स्वरूप ई-विकास प्रणाली को सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में लागू किया गया है। ई-विकास के माध्यम से वर्तमान में 2 लाख 11 हजार किसानों द्वारा 1.28 लाख मीट्रिक टन उर्वरक क्रय किया गया है। भावांतर भुगतान योजना राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में किसान भाईयों के लिये खरीफ वर्ष 2025 में सोयाबीन फसल के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू की गई। यह योजना प्रदेश के किसानों को सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से लागू की गई है जिससे प्रदेश में सोयाबीन के उत्पादन को प्रोत्साहन मिल सकेगा। योजना में 1700 से अधिक पंजीयन केंद्रों पर 9 लाख से अधिक किसानों द्वारा फसल विक्रय के लिए पंजीयन कराया गया। अन्न (कोदो-कुटकी) प्रोत्साहन प्रदेश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में अन्न (कोदो-कुटकी) के क्षेत्र विस्तार एवं उत्पादन को प्रोत्साहित कर किसानों की आय में वृध्दि किये जाने के लिए "रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना" अंतर्गत खरीफ 2025 में लगभग 30 हजार मीट्रिक टन कोदो एवं कुटकी का उपार्जन किया गया। कुटकी 3500 रुपए प्रति क्विंटल एवं कोदो 2500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से उपार्जन किया जाता है। निर्धारित क्रय मूल्य के अतिरिक्त राज्य सरकार दवारा 1000 रुपए प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदाय की जाती है। योजना अंतर्गत वर्ष 2025-26 में कोदो कुटकी उपार्जन के लिए कुल 22 हजार 886 कृषकों का पंजीयन किया गया, जिसका रकबा 20 हजार 616 हैक्टेयर है। मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में कृषकों की आय संवर्धन एवं आर्थिक सुरक्षा की दृष्टि से पहली बार मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना 2024 लागू की गई है। मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना में राज्य स्तरीय कार्यक्रम 24 सितम्बर, 2025 को कटंगी, जिला बालाघाट में आयोजित किया जाकर वर्ष 2024 में धान उपार्जन करने वाले किसानों को राशि रूपये 337.12 करोड़ डीबीटी के माध्यम से 6 लाख 69 हजार 272 कृषकों को प्रदाय कर लाभान्वित किया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसान क्रेडिट कार्ड धारक किसानों का फसल बीमा करने में देश में प्रथम स्थान पर है। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग अंतर्गत प्रदेश को 1513 क्लस्टर में 75 हजार 650 हैक्टेयर (189125 एकड़) के लिए 189125 किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग अंतर्गत 3026 कृषि सखी का चयन किया गया है। पराली प्रबंधन कृषकों द्वारा फसल अवशेष (पराली) जलाने से रोकने के लिए शासन द्वारा कई कदम उठाये गये हैं, जिसमें प्रदेश स्तर पर 46,800 से अधिक नरवाई प्रबंधन से संबंधित कृषि यंत्र अनुदान पर वितरित करने के लिए कुल 468 करोड़ की अनुदान राशि जारी की गई है। वर्ष 2025-26 में पराली प्रबंधन से संबंधित 15 फसल अवशेष सप्लाई चैन (एग्रीगेटर) स्थापित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में पराली प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ रीपर, बेलर जैसे 7 हजार कृषि यंत्रों को अनुदान के माध्यम से वितरित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है। मृदा परीक्षण प्रदेश में किसानों को निःशुल्क स्वाइल हैल्थ कार्ड उपलब्ध कराये जाने के लिए भारत सरकार की स्वाइल हैल्थ एंड फर्टीलिटी योजना संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत प्रदेश में वृहद स्तर पर अभियान चला कर स्वाइल हैल्थ कार्ड उपलब्ध कराये गये है। विकासखण्ड स्तर पर मृदा नमूना परीक्षण उपलब्ध कराये जाने हेतु 265 नवीन मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। देश में मध्यप्रदेश स्वाईल हैल्थ कार्ड वितरण में प्रथम स्थान पर है। बीज वितरण खरीफ 2025 में कुल 22.46 लाख क्विंटल तथा रबी 2025-26 में 8.53 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का शासकीय, सहकारी एवं पंजीकृत निजी बीज उत्पादक संस्थाओं के माध्यम से वितरण किया गया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उददेश्य प्रदेश में ग्राम स्तर तक सिंचाई क्षेत्र में निवेश को बढ़ाकर हर खेत में पानी पहुंचाना है। उपलब्ध जल का उचित प्रबंध कर "पर ड्रॉप-मोर क्राप" के लक्ष्य को प्राप्त करना है। वर्ष 2025-26 के लिए भौतिक लक्ष्य 57924 हैक्टेयर के विरुद्ध 18003 हैक्टेयर क्षेत्र के कृषकों को लाभान्वित किया गया है। प्राकृतिक खेती बोर्ड किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग … Read more

गुना के डायल 112हीरोज: तत्परता से मिली मदद, ऑटो पलटने से घायल महिलाओं को पहुँचाया अस्पताल

भोपाल गुना जिले के थाना धरनावदा क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में घायल हुई महिलाओं को डायल-112 जवानों की त्वरित कार्रवाई से समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। 10 मार्च को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना धरनावदा क्षेत्र में रुठियाई से धरनावदा रोड पर एक सवारी ऑटो मोड़ पर अनियंत्रित होकर पलट गया है, जिससे उसमें सवार कई महिलाएँ घायल हो गई हैं। सूचना मिलते ही धरनावदा थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर आरक्षक  मोहर सिंह एवं पायलट  माखन सिंह गुर्जर ने पाया कि रुठियाई से पटना गाँव की ओर जा रहा सवारी ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया था, जिससे उसमें सवार लगभग 07-08 महिलाएँ घायल हो गई थीं। डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी घायलों को सुरक्षित रूप से एफआरव्ही वाहन की सहायता से रुठियाई अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उनका उपचार प्रारंभ किया गया। डायल-112 जवानों की तत्परता और जिम्मेदार कार्रवाई के कारण घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सकी। डायल 112हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस हर आपात स्थिति में आमजन की सहायता और जीवन रक्षा के लिए सदैव तत्पर और समर्पित है।  

डिजिटल डकैती: इंदौर में AI ट्रेडिंग स्कैम से 2.10 लाख की ठगी

इंदौर  शेयर ट्रेडिंग के नाम से 2 लाख से ज्यादा की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोपितों ने एआई ट्रेडिंग बॉट के माध्यम से शेयर खरीदने का झांसा देकर ठगी की है। साइबर हेल्पलाइन से मिले निर्देशों के बाद राजेंद्र नगर पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक धोखाधड़ी कुंदन नगर निवासी संजय पुत्र किशोर बनवार के साथ हुई है। टेलीग्राम ग्रुप और फर्जी निवेशकों का मायाजाल किशोर ने पुलिस को बताया कि पिछले साल 30 अक्टूबर को टेलीग्राम पर 'साक्सोग्रोथ इन्वेस्टमेंट' में ऐड किया था। ग्रुप में करीब सौ लोग जुड़े थे जो शेयर बाजार में निवेश करने और ट्रेडिंग संबंधित चर्चा करते थे। आरोपितों ने संजय से भी चर्चा की और कहा कि हमारा सिस्टम एआई बेस्ड है। एआई ट्रेडिंग बॉट ही फॉरेक्स मार्केट में ट्रेडिंग करता है और 100 प्रतिशत मुनाफा दिलाता है। आरोपितों ने निवेशक को निवेश करने की सलाह दी और कहा कि मुनाफा करवाना उनकी जिम्मेदारी है। 100% मुनाफे का झांसा और एक अन्य ठगी का मामला उन्होंने ग्रुप में शामिल अन्य निवेशकों से भी पुष्टि करवा दी। इस तरह संजय से 2 लाख 10 हजार रुपये ले लिए थे। बाद में पता चला ग्रुप में शामिल नंबर भी उनके ही थे। रावजी बाजार पुलिस ने भी सुंदरम पुत्र कृष्णकांत तिवारी निवासी शनि गली की शिकायत पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। सुंदरम के साथ डेढ़ लाख रुपये की वित्तीय ठगी हुई है।

विदिशा, बुरहानपुर और अनूपपुर पुलिस की बड़ी सफलता —पिछले दो दिनों में 1 करोड़ 68 लाख रुपये से अधिक मूल्‍य के 698 मोबाइल लौटाये

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए किये जा रहे तकनीकी प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। प्रदेश के तीन जिलों विदिशा, बुरहानपुर और अनूपपुर में की गई प्रभावी कार्यवाही के तहत जिलों की पुलिस टीमों ने कुल 698 गुम मोबाइल फोन बरामद किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ 68 लाख रुपये से अधिक है। इन मोबाइलों को तकनीकी माध्यमों और CEIR पोर्टल की सहायता से ट्रेस करउनके वास्तविक मालिकों को वापस किया गया है। विदिशा जिले में संचालित “मिशन मोबाइल रिकवरी” के अंतर्गत जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से कुल 603 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ 50 लाख 75 हजार रुपये है। इन मोबाइलों को आधुनिक तकनीकी माध्यमों से ट्रैक करते हुए बरामद किया गया और उनके वास्तविक मालिकों को वापस किया जा रहा है। मोबाइल बरामदगी की यह कार्रवाई केवल जिले तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और बिहार जैसे अन्य राज्यों से भी मोबाइल ट्रेस कर बरामद किए गए है। बुरहानपुर जिले में साइबर सेल तथा थानों में स्थापित साइबर हेल्प डेस्क ने कुल 70 गुम मोबाइल फोन ट्रेस कर बरामद किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 13 लाखरुपये है। इन मोबाइलों में विभिन्न कंपनियों के एंड्रॉयड स्मार्टफोन शामिल हैं, जिनकी कीमत 10 हजार से लेकर 40 हजार रुपये तक है। मोबाइलों को स्थानीय क्षेत्र के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों तथा पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से भी ट्रेस कर बरामद किया गया है। मोबाइल फोन बरामद होने के बाद उन्हें उनके वास्तविक मालिकों को वापस किया गया, जिनमें कई विद्यार्थी भी शामिल थे जिनके लिए मोबाइल पढ़ाई और ऑनलाइन गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण साधन था। अपने खोए हुए मोबाइल वापस मिलने पर नागरिकों ने पुलिस की इस कार्यवाही के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे जनहित में किया गया सराहनीय प्रयास बताया है। अनूपपुर थाना रामनगर एवं थाना बिजुरी क्षेत्र में प्राप्त शिकायतों के आधार पर तकनीकी माध्यमों से मोबाइल फोन ट्रैक कर कार्रवाई की गई। पुलिस टीमों द्वारा गुम हुए कुल 25 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 4 लाख 32 हजार रुपये है। बरामद मोबाइलों को उनके वास्तविक मालिकों को वापस किया गया, जिससे फरियादियों के चेहरों पर खुशी लौट आई है। मोबाइल वापस मिलने पर नागरिकों ने पुलिस की तत्परता और जनहितैषी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा गुम मोबाइल फोन की ट्रेसिंग के लिए तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। नागरिकों से भी अपील की गई है कि मोबाइल गुम होने की स्थिति में तुरंत संबंधित थाने में सूचना दें तथा CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें, जिससे मोबाइल के दुरुपयोग को रोका जा सके और उसे ट्रेस कर वापस दिलाने की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जा सके। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश में बड़ी संख्या में गुम मोबाइल फोन बरामद कर नागरिकों को राहत प्रदान की जा रही है तथा पुलिस के प्रति जनविश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।  

सास-बहू से देवरानी-जेठानी तक: महिलाओं की साझेदारी से गांवों में चमक रहा ग्रामीण पर्यटन

होम-स्टे से बदली गांव की तस्वीर भोपाल सफलता की कहानी सास-बहू, मां-बेटी या देवरानी-जेठानी के रिश्तों को अक्सर तकरार और मतभेद के उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्राम इन धारणाओं को बदलते हुए एक नई मिसाल कायम कर रहे हैं। जिले के गॉवों की महिलाएं आपसी सहयोग और विश्वास के साथ होम-स्टे चला रही हैं और रिश्तों की मजबूती को तरक्की की नई राह में बदल रही हैं। पर्यटन ग्राम धूसावानी की श्रीमती मनेशी धुर्वे और श्रीमती अलका धुर्वे रिश्ते में सास-बहू हैं, लेकिन जब उनके होम-स्टे में पर्यटक आते हैं तो दोनों मिलकर पूरे उत्साह से मेहमाननवाजी में जुट जाती हैं। इसी तरह सावरवानी में श्रीमती मालती यदुवंशी अपनी सास श्रीमती शारदा यदुवंशी के साथ मिलकर होम-स्टे का संचालन कर रही हैं। यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि पूरे जिले में उभरती एक नई सामाजिक और आर्थिक तस्वीर है, जहां रिश्तों की साझेदारी महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है। रिश्तों की साझेदारी से मिली पहचान छिंदवाड़ा के पर्यटन ग्रामों में चल रहे होम-स्टे केवल आय का साधन नहीं हैं, बल्कि ये महिलाओं की सांस्कृतिक पहचान और आत्मविश्वास का भी प्रतीक बन चुके हैं। यहां सास-बहू, मां-बेटी और देवरानी-जेठानी मिलकर पर्यटकों का स्वागत करती हैं, भोजन तैयार करती हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं। इन रिश्तों की सामूहिक ताकत ने यह साबित किया है कि जब परिवार की महिलाएं साथ मिलकर काम करती हैं, तो घर ही नहीं बल्कि पूरा गांव विकास की राह पर आगे बढ़ सकता है। जिले में 50 से अधिक होम-स्टे मध्यप्रदेश में सर्वाधिक होम-स्टे संचालित करने वाले जिलों में शामिल छिंदवाड़ा में इस समय 50 से अधिक होम-स्टे संचालित हैं। खास बात यह है कि इन सभी होम-स्टे का पंजीयन महिलाओं के नाम पर किया गया है और संचालन की अधिकांश जिम्मेदारी भी महिलाएं ही संभाल रही हैं। सावरवानी, चोपना, काजरा, देवगढ़, चिमटीपुर, गुमतरा और धूसावानी जैसे पर्यटन ग्रामों में स्थानीय महिलाएं पारंपरिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय स्वाद और संस्कृति से जुड़ते पर्यटक गांव की महिलाएं पर्यटकों के लिए पारंपरिक और स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजन तैयार करती हैं। इसके साथ ही वे लोकनृत्य और लोक गायन से क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी पर्यटकों को परिचित कराती हैं। इससे पर्यटकों को ग्रामीण जीवन और संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिलता है, वहीं महिलाओं को आय का सम्मानजनक साधन भी प्राप्त हो रहा है। महिलाओं के हाथों में होम-स्टे की कमान गांव की महिलाएं स्वयं होम-स्टे का संचालन कर रही हैं। पर्यटकों के स्वागत से लेकर भोजन व्यवस्था, आवास और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रबंधन तक की पूरी जिम्मेदारी वे ही निभाती हैं। इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि सास-बहू, देवरानी-जेठानी जैसे रिश्ते केवल पारिवारिक संबंध ही नहीं, बल्कि सहयोग और विश्वास के मजबूत आधार भी बन सकते हैं। यही साझेदारी आज छिंदवाड़ा के ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान दे रही है और महिलाओं को आत्मनिर्भर बन रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि होम-स्टे की यह पहल गांव की महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यटन ग्रामों की पहचान भी तेजी से बढ़ा रही है। आने वाले समय में यहां पर्यटन गतिविधियों के और विस्तार की संभावनाएं भी दिखाई दे रही हैं।  

बिजली कार्मिकों को मिला स्वास्थ्य सुरक्षा कवच, अब बीमा से मिलेगा इलाज का सहारा

भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के निर्देश एवं मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह के मार्गदर्शन में कर्मचारियों, अधिकारियों के लिए कैशलेस बीमा योजना लागू की गई है। कम प्रिमियम पर अधिक चिकित्सकीय व्यय लाभ दिलाने वाली यह य़ोजना बिजली कार्मिकों के लिए अनोखे कवच के रूप में काम आएगी। इस योजना के बिजली कंपनी एवं मेडसेव हेल्थ इंश्योरेंस के बीच दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया मंगलवार को प्रबंध निदेशक कार्यालय में की गई। इस अवसर पर पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक प्रकाश सिंह चौहान, संयुक्त सचिव संजय मालवीय, इंश्योरेंस कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधक विनय रिछारिया आदि मौजूद थे। इस कैशलेस हेल्थ बीमा योजना से कार्मिकों के परिवार का पांच सौ रूपए प्रतिमाह की प्रिमियम पर 5 लाख का, एक हजार मासिक प्रिमियम पर दस लाख का, दो हजार मासिक प्रिमियम पर 25 लाख का कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस कवर रहेगा। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनर भी सपरिवार इस योजना का चुनिंदा शर्तों के अधीन लाभ ले सकेंगे।  

प्रधानमंत्री मोदी का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया आभार व्यक्त

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट ने 3 हजार 839 करोड़ की लागत से एनएच 752D पर बदनावर-पेटलावद-थांदला-टिमरवानी सेक्शन के फोर लेन निर्माण की मंजूरी के लिए आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह कॉरिडोर उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के टिमरवानी इंटरचेंज तक सीधी फोर लेन कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। यह एक महत्वपूर्ण प्रकल्प होगा। इससे जहां इंदौर, पीथमपुर, उज्जैन और देवास के औद्योगिक केंद्रों तक पहुंच सुगम होगी वहीं धार एवं झाबुआ जिले का समग्र आर्थिक विकास भी सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह स्वीकृति इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इससे सिंहस्थ-2028 के दौरान श्रद्धालुओं का आवागमन अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।  

भोजशाला सर्वे में सामने आई बड़ी बात, शिलालेखों के अक्षर मिटाने के प्रमाण मिलने का दावा

धार ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर इतिहास के सबसे संवेदनशील सवालों के केंद्र में है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की मैसूर स्थित एपिग्राफी (उत्कीर्णित लेखों का अध्ययन) शाखा ने वर्ष 2024 के सर्वे के दौरान यहां 244 शिलालेखों का विस्तृत अध्ययन किया था। ये शिलालेख 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच के माने जा रहे हैं। इन पर नागरी लिपि में संस्कृत, प्राकृत तथा स्थानीय बोली में रचनाएं अंकित हैं। सर्वे की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई शिलालेखों के अक्षर जानबूझकर छेनी से मिटाए गए और उन्हें भवन के अलग-अलग हिस्सों में पुनः इस्तेमाल कर लिया गया। मध्यकालीन धरोहर पर आघात और नए साक्ष्य ये जानकारियां मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में प्रस्तुत एएसआइ की सर्वे रिपोर्ट में दर्ज हैं। रिपोर्ट पर 16 मार्च को सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल के अनुसार अभिलेखविदों ने रिपोर्ट में बताया है कि ये खंड कभी बड़े शिलालेखों का हिस्सा थे, जिनमें साहित्यिक रचनाएं अंकित थीं। अक्षरों को जानबूझकर मिटाना मध्यकालीन सांस्कृतिक धरोहर पर गंभीर आघात रहा। हालिया सर्वे में 50 नए शिलालेख खंड और एक टूटी हुई प्रतिमा के आसन के टुकड़े का भी परीक्षण किया गया है। पारिजातमंजरी से नागबंध तक: सम्राट भोज का वैभव सर्वे में तीन शिलालेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताए गए हैं। पहला, 'पारिजातमंजरी नाटिका शिलालेख' बताता है कि इस नाटक की रचना धार के राजा अर्जुनवर्मन के गुरु मदन ने की थी और इसका पहला मंचन 'शारदा देवी के सदन' में हुआ था। दूसरा, 'अवनिकूर्मशतम शिलालेख' में प्राकृत भाषा के दो काव्य हैं, जिनमें प्रत्येक में 109 श्लोक हैं और दोनों की रचना सम्राट भोजदेव द्वारा की गई। तीसरा, 'नागबंध शिलालेख' व्याकरण और शिक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जिसमें परमार वंश के राजा नरवर्मन का उल्लेख है। इतिहास की धूल से निकले सदियों पुराने शिल्पकारों के नाम सर्वे में 34 छोटे उत्कीर्ण नाम भी सामने आए। 13वीं सदी के शिल्पकारों में मदन, माधव और जकिजु के नाम हैं, जबकि 16वीं सदी में मोहिला, कामदेव, सोमदेव, रणपाल और परमार सहित डेढ़ दर्जन से अधिक शिल्पकारों के नाम मिले हैं। ये नाम उन कारीगरों की जीवित गवाही हैं जो सदियों से इतिहास की धूल में दबे थे। बता दें, भोजशाला से जुड़े शिलालेखों का पहला अध्ययन वर्ष 1951 में हुआ था।  

नौरादेही में बसेंगे चीते: रानी दुर्गावती अभयारण्य बनेगा देश का तीसरा चीता होम, सीएम डॉ. यादव का ऐलान

भारतीय क्रिकेट टीम ने बढ़ाया देश का मान मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंत्रीगण से चर्चा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नौरादेही का रानी दुर्गावती अभयारण्य चीतों का तीसरा घर बनने जा रहा है। जल्द ही वहाँ भी चीते छोड़े जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतकर भारतीय क्रिकेट टीम ने एक बार फिर सफलता का परचम लहराया है। खेलने वाले कुल 20 देश, 55 मैच और विजेता- भारत, यह आंकड़े बताते हैं कि भारतीय क्रिकेट टीम ने दृढ़ संकल्प, साहस और पराक्रम से यह उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे खिलाड़ियों ने पूरे विश्व में देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश सरकार और पूरी मंत्रि-परिषद् की ओर से भारतीय क्रिकेट टीम को बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संघ लोक सेवा आयोग-2026 के हालिया घोषित रिजल्ट में मध्यप्रदेश के 2 होनहार अभ्यर्थियों द्वारा टॉप टेन अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त करने पर दोनों ही अभ्यर्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रदेश के कई विद्यार्थियों का यूपीएससी की परीक्षा में आईएएस, आईपीएस, आईआरएस इत्यादि कई पदों पर चयन हुआ है। हमारे विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में चयनित होकर प्रदेश का नाम रौशन कर रहे हैं। रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) में भी छोड़ेंगे चीते मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में चीते तेजी से फल-फूल रहे हैं। हाल ही में 5 नये शावकों की आमद से चीतों का परिवार और भी समृद्ध हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार करीब 2 महीने बाद रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) में भी चीते छोड़ने जा रही है। इससे मध्यप्रदेश में चीतों के 3 घर तैयार हो जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मगर/घड़ियाल और कछुए भी विभिन्न जल क्षेत्रों में मुक्त करेंगे, ताकि हमारी जैव सम्पदा और भी समृद्ध हो सके। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को भायी मध्यप्रदेश की जल संचय पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से कहा कि मध्यप्रदेश में जल संचयन के लिए चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान की केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल द्वारा सराहना की गई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने 5 मार्च को हुई वीडियो काँफ्रेंसिंग में कहा था कि मध्यप्रदेश सामुदायिक सहभागिता से जल संरक्षण और सतत् जल प्रबंधन देश के सामने श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। मध्यप्रदेश में 250 से अधिक नदियां हैं। मध्यप्रदेश बांधों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा था कि जल संचयन के प्रोत्साहन के लिए भारत सरकार भी जल इस दिशा में जनभागीदारी से ऐसा ही कदम बढ़ाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि केंद्र से मिली सराहना हमारी जल संचय नीति की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के प्रथम चरण में 2.79 लाख से अधिक जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण कर महत्वपूर्ण योगदान दिया गया। दूसरे चरण में भी मध्यप्रदेश में 72 हजार 647 जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण कार्य पूरे कर लिए गए हैं और 64 हजार 395 जल संरचना निर्माण कार्य फिलहाल प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में इस साल 19 मार्च 2026 से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से कहा कि वे भी अपने-अपने क्षेत्रों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के काम बढ़ाएं। डिजिटल पंजीयन में मध्यप्रदेश ने रचा इतिहास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में दस्तावेजों के डिजिटल पंजीयन का काम शुरू हो गया है। मध्यप्रदेश में प्रति वर्ष करीब 16 लाख से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन किया जाता है। यह एक बड़ा काम है पर हम इसे समय-सीमा में ही पूरा करेंगे। उन्होंने बताया कि संपदा 2.0 प्रणाली से दस्तावेजों का पूर्णत: पेपरलेस ई- पंजीयन शुरु कर दिया है। यह व्यवस्था नागरिकों को त्वरित सेवाएं देने के साथ-साथ प्रशासन में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित करेगी। संपदा प्रणाली से ई-पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग की सुविधा प्रदान कर पूरी प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिक बनाया गया है। इस प्रणाली में कोई भी व्यक्ति कहीं से भी ई-स्टॉम्प तैयार कर सकता है। यह व्यवस्था लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। गेहूं उपार्जन 2026 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं उपार्जन पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। साथ ही दलहन उत्पादन को प्रोत्साहन के लिए उड़द की खरीद पर भी 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। उड़द की खरीद पर बोनस देने के मामले में मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने यह कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन की अवधि 10 मार्च 2026 रखी गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को समय पर भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पचमढ़ी को बनाएंगे बेस्ट इन्वायरमेंटल मॉडल मुख्यमंत्री ने बताया कि पचमढ़ी को जर्मनी की एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संस्था द्वारा ग्रीन डेस्टिनेशन के रूप में प्रमाणित किया गया है। यह मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए हो रहे प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि पचमढ़ी देश का ऐसा पहला स्थल है, जिसे इस तरह का प्रमाणन मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम पचमढ़ी को देश के अनुकरणीय और बेस्ट इन्वायरमेंटल मॉडल के रूप में विकसित करेंगे। खाड़ी देशों में वर्तमान स्थिति के मद्देनजर हेल्पलाइन/कंट्रोल रूम स्थापित मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में उपजी विषम परिस्थितियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे मध्यप्रदेश के निवासियों की सहायता के लिए मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली में एवं भोपाल के वल्लभ भवन (मंत्रालय) में 24×7 हेल्पलाइन/कंट्रोल रूम की स्थापना कर दी गई है। मध्यप्रदेश के निवासी जो खाड़ी देशों में अध्ययन, नौकरी, व्यवसाय, पर्यटन, इत्यादि के लिए गए मध्यप्रदेश के निवासी वर्तमान परिस्थतियों में किसी प्रकार की सहायता की अपेक्षा करते हों तो वे कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। मध्यप्रदेश के लोगों की सकुशल स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए हम सभी … Read more