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शादी में लूट का तांडव: पहले चाचा से बैग, फिर दूल्हे के पिता से 95 हजार लेकर फरार हुए बदमाश

ग्वालियर  शहर में आधी रात लूट की दो वारदातों ने कानून-व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। महज 17 मिनट के भीतर बहोड़ापुर और किलागेट के बीच महज तीन किलोमीटर के दायरे में बारातों में ही बाइक सवार बदमाशों ने लूट को अंजाम देकर पुलिस को खुली चुनौती दे डाली। पहली वारदात रात 12.02 बजे राजवाड़ा पैलेस के बाहर हुई। यहां दूल्हे के चाचा से बारात से थोड़े ही आगे बैग लूट लिया। इसमें रुपये और बेंदा था। इसके बाद बहोड़ापुर में पटेल बारात घर के बाहर दूसरी बारात में दूल्हे के पिता को निशाना बना डाला। दूल्हे के पिता से 95 हजार रुपये की लूट की है। सीसीटीवी में कैद हुई लुटेरों की करतूत दोनों ही वारदातों में एक ही गैंग के बदमाश हैं। काले रंग की पल्सर पर सवार बदमाशों ने ही लूट की है। दोनों ही घटनाएं सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई हैं, लेकिन पुलिस आरोपितों तक पहुंचने में अभी सफल नहीं हो सकी है। लुटेरों की पहचान के प्रयास चल रहे हैं। बहोड़ापुर, ग्वालियर और क्राइम ब्रांच थाने की टीमें आरोपितों की तलाश में लगी हैं। रात 12.02 बजे राजवाड़ा पैलेस के पास पहली वारदात हुई। हनुमान नगर निवासी कामता प्रसाद श्रीवास के भतीजे की शादी राजवाड़ा पैलेस से थी। कामता प्रसाद बारात से थोड़े आगे चल रहे थे। उन्होंने बताया कि पहले सामने से बाइक सवार बदमाश आए और पीछे की तरफ गए। यही बदमाश लौटकर आए और पीछे से बैग पर झपट्टा मारकर लूट लिया। बैग छीनने के झटके से कामता प्रसाद सड़क पर गिर पड़े और जब तक शोर मचाया, लुटेरे भाग चुके थे।

मध्यप्रदेश: ओबीसी आरक्षण मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई तेज, अगली तारीख 28 अप्रैल तय

जबलपुर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष सोमवार को ओबीसी आरक्षण मामला सुनवाई के लिए लगा। इस संबंध में एक साथ 86 याचिकाओं की सुनवाई होनी है। कोर्ट ने पहले दिन सायं चार बजकर 35 मिनट से पांच बजकर 10 मिनिट तक सुनवाई की। इस दौरान सभी पक्षों से अंडरटेकिंग ली कि कौन कितने समय तक बहस करेगा। इसके बाद कोर्ट ने निर्धारित किया कि सर्वप्रथम ओबीसी आरक्षण के विरुद्ध याचिकाकर्ताओं के वकीलों को सुना जाएगा। इसके बाद राज्य शासन और फिर ओबीसी आरक्षण के पक्ष में याचिकाकर्ताओं के वकीलों को सुना जाएगा। मंगलवार को सुबह 11 बजे से आगे की सुनवाई होगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में अशिता दुबे व अन्य की ओर से दायर याचिका में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने को चुनौती दी गई थी। इसके बाद से लगातार ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के पक्ष और विपक्ष में सैकड़ों याचिकाएं दायर हुईं।  

दुकान में चोरी का अनोखा तरीका: अंडरवियर में छिपाए ब्रांडेड कपड़े, पकड़े जाने पर दी धमकी

रीवा  शहर में चोरी का एक अनोखा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत प्रकाश चौराहे में संचालित एक कपड़ा दुकान में काम करने वाला कर्मचारी ही चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था। आरोपी बेहद शातिर तरीके से कपड़ों को अपने अंडरवियर और पैंट में छिपाकर दुकान से बाहर ले जाता था। फिलहाल लगातार हो रही चोरी से परेशान दुकान संचालक ने जब सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो पूरा मामला उजागर हो गया। सीसीटीवी फुटेज से खुला चोरी का राज जानकारी के अनुसार शहर के प्रकाश चौराहे स्थित जेडी फैमिली शॉप के संचालक जितेंद्र खुबानी की कपड़ों की दुकान में करीब 6 से 7 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन्हीं में से एक कर्मचारी आशीष सिंह पर दुकान के माल में कमी को लेकर संदेह हुआ। शुरुआत में तो यह कमी सामान्य समझी गई, लेकिन जब लगातार स्टॉक कम होने लगा तो संचालक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगालना शुरू किया।  

टायर फटने से वीडियोकोच बस में लगी आग, पुलिस ने कांच तोड़ 21 यात्रियों को बचाया

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नागरिक सुरक्षा एवं जनसेवा के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण ग्वालियर में सामने आया है, जहां थाना झांसी रोड पुलिस की त्वरित, साहसिक एवं संगठित कार्रवाई से एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। पुलिस बल ने आग की चपेट में आई यात्री बस में से 21 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर बड़ी जनहानि होने से बचा लिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 26 अप्रैल को प्रातः लगभग 5:40 बजे जयपुर से छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम जा रही यात्री बस झांसी रोड थाना क्षेत्र से गुजर रही थी। बस में 18 यात्री, 02 चालक,01कंडक्टर सहित 21 लोग सवार थे।अधिकतर यात्री सो रहे थे जिन्हें जगाकर बाहर निकाला गया। बस जैसे ही झांसी रोड थाना परिसर के सामने पहुंची, अचानक तेज धमाके के साथ बस का पिछला टायर फट गया। टायर फटने से उत्पन्न चिंगारी बस के पिछले हिस्से तक पहुंची, जिससे वहां आग लग गई। कुछ ही क्षणों में बस से धुआं उठने लगा और आग फैलने लगी। थाना परिसर में उपस्थित पुलिसकर्मियों ने तेज धमाके की आवाज सुनते ही तत्काल बाहर आकर देखा तो बस से धुआं एवं आग की लपटें उठ रही थीं। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पुलिसकर्मियों ने बिना समय गंवाए तत्काल राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया।पुलिसकर्मियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बस की खिड़कियों के कांच तोड़े और एक-एक कर सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने संयम, त्वरित निर्णय क्षमता एवं उच्च स्तर की संवेदनशीलता का परिचय दिया। पुलिस की त्‍वरितप्रतिक्रिया से बस में सवार सभी 21 लोगों की जान सुरक्षित बचाई जा सकी। यात्रियों को सुरक्षित निकालने के बाद पुलिस टीम ने आग बुझाने हेतु तत्काल स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया। थाना परिसर में स्थापित बोरवेल से पानी लाकर आग पर काबू पाने का प्रयास प्रारंभ किया। सूचना प्राप्त होते ही दमकल दल भी मौके पर पहुंचा और संयुक्त प्रयासों से आग पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया गया। उक्त सराहनीय एवं साहसिक कार्यवाही में थाना प्रभारीशक्ति यादव, प्रधान आरक्षक शिव सिंह गुर्जर, प्रधान आरक्षक रामभरण लोधी, प्रधान आरक्षक सुशांत चौहान, आरक्षक हरिओम जाट, आरक्षक सलमान, आरक्षक रवि भदौरिया तथा आरक्षक आकाश छारी की विशेष एवं उल्लेखनीय भूमिका रही। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 28 अप्रैल को सूपखार में करेंगे भैंस पुनर्स्थापन का शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि चीता पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब जंगली भैंसों की वापसी से प्रदेश की जैव-विविधता में एक नया आयाम जुड़ेगा। प्रदेश में एक सदी से अधिक समय से विलुप्त हो चुकी जंगली भैंस (वाइल्ड बफेलो) प्रजाति की पुनर्स्थापना की रणनीति अब साकार हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 28 अप्रैल को बालाघाट जिले के सूपखार एवं टोपला क्षेत्र में कार्यक्रम के अंतर्गत जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन अभियान का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री सूपखार में 4 जंगली भैंसों को उनके नए प्राकृतिक आवास में छोड़ेंगे। इनमें 3 मादा और एक नर जंगली भैंसा शामिल है। इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री  उदय प्रताप सिंह, अधिकारीगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहेंगे। इस पहल से भैंस प्रजाति के संरक्षण के साथ ही राज्य का वन पारिस्थितिकी तंत्र भी सशक्त बनेगा। काजीरंगा से कान्हा तक: ऐतिहासिक ट्रांसलोकेशन इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत असम के काजीरंगा से जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व लाया जा रहा है। पहले चरण में 4 भैंसों का दल अपनी यात्रा प्रारंभ कर चुका है। कुल 50 भैंसों के समूह को ‘फाउंडर पॉपुलेशन’ के रूप में लाने का लक्ष्य निर्धारित है। इस सीजन में 8 भैंसों को स्थानांतरित किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया काजीरंगा और कान्हा के वरिष्ठ अधिकारियों एवं अनुभवी पशु-चिकित्सकों की निगरानी में वैज्ञानिक तरीके से संपन्न की जा रही है। एमपी–असम के बीच वन्यजीव सरंक्षण और जैव विविधता सहयोग का विस्तार इस परियोजना के साथ ही मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्यजीव आदान-प्रदान का नया अध्याय भी जुड़ रहा है। असम से गैंडे (राइनो) के दो जोड़े मध्यप्रदेश लाए जाएंगे, जिन्हें भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में रखा जाएगा। इसके बदले में मध्यप्रदेश, असम की मांग के अनुसार 3 बाघ और 6 मगरमच्छों का स्थानांतरण करेगा। इस पर गुवाहाटी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और असम के मुख्यमंत्री  हिमंता विश्व सरमा के बीच हुई बैठक में सहमति बनी थी। ‘चीते के बाद अब भैंस’-जैव-विविधता को समृद्ध बनाने की एक और पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि चीता पुनर्स्थापना के बाद अब जंगली भैंसों की वापसी से प्रदेश की जैव-विविधता में एक नया आयाम जुड़ेगा। यह पहल एक प्रजाति के संरक्षण के प्रयास के साथ ही प्रदेश के वन पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। मध्यप्रदेश पहले ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘लेपर्ड स्टेट’ के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है। जंगली भैंसों का पुनर्स्थापन इस गौरव को और सुदृढ़ करेगा। महत्वपूर्ण है यह पुनर्स्थापन मध्यप्रदेश में जंगली भैंसों की आबादी लगभग 100 वर्ष पहले समाप्त हो गई थी। कान्हा के सूपखार क्षेत्र में 1979 के आसपास जंगली भैसा देखा गया था। अत्यधिक शिकार, मानव हस्तक्षेप, आवास का क्षरण और घास के मैदानों का नष्ट होना इसके प्रमुख कारण रहे। वर्तमान में इनकी प्राकृतिक आबादी मुख्य रूप से असम में सीमित है, जबकि छत्तीसगढ़ में इनकी संख्या अत्यंत कम है। कान्हा सबसे उपयुक्त प्राकृतिक आवास भारतीय वन्यजीव संस्थान (देहरादून) द्वारा किए गए अध्ययन में कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन के लिए सबसे उपयुक्त पाया गया है। यहाँ के विस्तृत घासभूमि क्षेत्र, पर्याप्त जल स्रोत और न्यूनतम मानव हस्तक्षेप इस प्रजाति के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं। प्रकृति संतुलन की दिशा में निर्णायक पहल सूपखार में जंगली भैंसों को छोड़े जाने के साथ यह ‘वाइल्ड-टू-वाइल्ड’ पुनर्स्थापना परियोजना एक नए चरण में प्रवेश करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे कान्हा की घासभूमि पारिस्थितिकी को मजबूती मिलेगी और जैव-विविधता संतुलन को नया जीवन मिलेगा। यह पहल मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में संचालित एक और ऐतिहासिक संरक्षण अभियान है, जो आने वाले समय में देश के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित होगा।  

समय पर जानकारी न देने का तर्क खारिज, क्लेम रोकने पर 80 हजार का भुगतान आदेश

भोपाल स्वास्थ्य बीमा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में जिला उपभोक्ता आयोग में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए इलाज में खर्च राशि ब्याज सहित देने के आदेश जारी किए हैं। यह मामला इसलिए खास माना जा रहा है, क्योंकि संबंधित बीमा एक सामाजिक संस्था के माध्यम से देशभर के जैन समुदाय के लिए सामूहिक रूप से कराया गया था। जब उपभोक्ता के पिता को इलाज के बाद क्लेम राशि नहीं मिली, तो उसने बीमा कंपनी के साथ-साथ संस्था के खिलाफ भी याचिका दायर किया। ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस योजना और इलाज का खर्च दरअसल, भोपाल के पटेल नगर निवासी सौरभ जैन ने जिला उपभोक्ता आयोग क्रमांक-2 में मुंबई स्थित बीमा कंपनी और जैन इंटरनेशनल संस्था के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। सौरभ के अनुसार, संस्था द्वारा जैन समाज के सदस्यों के लिए ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस योजना चलाई जा रही थी। उन्होंने “खुशहाल परिवार योजना” के तहत वर्ष 2018-19 से 2023-24 तक नियमित प्रीमियम जमा करते हुए परिवार के चार सदस्यों के लिए 10 लाख रुपये का बीमा लिया था।  

वन क्षेत्रों में जल प्रबंधन से भीषण गर्मी में वन्य जीवों को मिलेगी राहत

भोपाल भीषण गर्मी के बीच मध्यप्रदेश में वन्य जीवों को पेयजल के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2026’ के अंतर्गत वन क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जल प्रबंधन के कार्य किए जा रहे हैं। वन विभाग द्वारा जंगलों में जल स्रोतों का निर्माण, संरक्षण और पुनर्जीवन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान' ‘जल ही जीवन है’ की भावना को साकार करते हुए न केवल मानव जीवन, बल्कि वन्यजीवों और प्रकृति के संतुलन को भी सुरक्षित करने की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में उभर रहा है। वन्य जीवों के लिए विशेष जल प्रबंधन अभियान के अंतर्गत जंगलों में तालाब, स्टॉप डैम, झिरिया और अन्य जल संरचनाओं का निर्माण एवं गहरीकरण किया जा रहा है। वन क्षेत्रों में वन्य जीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु तालाबों के निर्माण, गहरीकरण, जल स्रोतों के विकास तथा पुराने स्रोतों के जीर्णोद्धार जैसे कार्य प्रगति पर हैं। कई स्थानों पर नए जल स्रोतों का निर्माण किया गया है, जबकि मौजूदा जल संरचनाओं की मरम्मत और पुनर्जीवन का कार्य भी व्यापक स्तर पर जारी है। इससे गर्मी के मौसम में वन्य जीवों को सतत जल उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। वन क्षेत्रों में वन्य जीवों के लिये पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के कार्य क्र. कार्य का विवरण निर्धारित लक्ष्य उपलब्धि वित्तीय लक्ष्य (₹) वित्तीय उपलब्धि (₹) 1 निर्माण हेतु तालाब (संख्या) 11 6 77,96,000 35,96,000 2 तालाब गहरीकरण (संख्या) 3 0.5 10,00,000 0 3 निर्माण सॉसर (संख्या) 19 0.5 10,80,000 0 4 स्टॉपडैम निर्माण (संख्या) 1 0 20,00,000 10,00,000 5 झिरिया निर्माण (संख्या) 22 0 0 0 6 डाइक निर्माण (संख्या) 0 0 0 0 7 वाटर लिफ्टिंग सिस्टम (किमी) 0 0 0 0 8 मौजूदा झिरिया की मरम्मत एवं जीर्णोद्धार 50 40 5,00,000 4,00,000 कुल       1,23,76,000 49,96,000 पारिस्थितिकी संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम वन क्षेत्रों में जल स्रोतों का निर्माण न केवल वन्य जीवों की प्यास बुझाने का कार्य कर रहा है, बल्कि इससे जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिल रही है। जल उपलब्धता बढ़ने से वन्य जीवों का विचलन कम होगा और मानव–वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है। जन–आंदोलन के रूप में जल संरक्षण 'जल गंगा संवर्धन अभियान' जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन का एक राज्य स्तरीय जन–आंदोलन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अभियान के तीसरे चरण का शुभारंभ 19 मार्च 2026 को गुड़ी पड़वा (नव संवत्सर) के अवसर पर इंदौर से किया। इस अभियान को ‘जनशक्ति से नवभक्ति’ के मंत्र से जोड़ते हुए आमजन को श्रमदान के माध्यम से जल संरक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। 100 दिवसीय राज्य व्यापी अभियान यह अभियान 19 मार्च से 30 जून 2026 तक, लगभग 100 दिनों तक पूरे प्रदेश में संचालित किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 55 जिलों में नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों के आसपास व्यापक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इस अभियान में 18 विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है, जिसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल तथा नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग को सह–नोडल विभाग बनाया गया है। 2500 करोड़ रुपये के कार्य और बड़े लक्ष्य अभियान के अंतर्गत इस वर्ष लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत से जल संरक्षण के कार्य किए जा रहे हैं। इसमें 10 हजार से अधिक चेक डैम और स्टॉप डैम की मरम्मत का लक्ष्य रखा गया है। अभियान में पुराने तालाबों और बावड़ियों का गहरीकरण एवं सफाई , नदियों (कोलांस, शिप्रा, बेतवा) के संरक्षण के लिए कार्य योजना, जल स्रोतों के आसपास बड़े पैमाने पर पौधारोपण (लगभग 28 लाख पौधे) और अतिक्रमण हटाने और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किये जायेंगे। जागरूकता के लिए विशेष आयोजन अभियान के दौरान जन–जागरूकता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण आयोजन भी किए जा रहे हैं। इनमें 23–24 मई को भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय जल सम्मेलन, 25–26 मई को क्षिप्रा परिक्रमा यात्रा और 30 मई से 7 जून तक भारत भवन, भोपाल में सदानीरा समागम आयोजित की जायेगी।  

विधानसभा में महिला आरक्षण पर गरम बहस, कांग्रेस पर साधा निशाना

 भोपल मध्य प्रदेश में महिला आरक्षण (Women Reservation) को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच खींचतान जारी है। इसी उद्दे को लेकर सोमवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें सीएम मोहन यादव 'नारी शक्ति वंदन' अधिनियम के तहत परिसीमन के आधार पर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का संकल्प पेश किया। संकल्प पर चर्चा की शुरूआत राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने की। संकल्प का समर्थन करते हुए इसे देश की आधी आबादी के अधिकार, सम्मान और भागीदारी से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया। गौर ने इस दौरान कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर निशाना जमकर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस को कौरव बताया और कहा कि- महिलाएं उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी। कृष्णा गौर ने इसके बाद आरोप लगाया कि कांग्रेस में महिला आरक्षण को लेकर 3 भ्रामक दावे किए है। विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- उन्होंने तोड़ा महिलाओं का दिल मंत्री कृष्णा गौर ने अपने संबोधन में कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि ब महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए संसद में संशोधन विधेयक लाया गया था, तब पूरे देश की महिलाओं को उम्मीद जगी थी लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने मनगढ़ंत और तर्कहीन कारणों के आधार पर इस विधेयक को पारित नहीं होने दिया। यह केवल विधेयक को गिराना नहीं था, बल्कि देश और प्रदेश की करोड़ों महिलाओं के मान-सम्मान पर प्रहार था। ओबीसी के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा कृष्णा गौर ने स्वयं को ओबीसी वर्ग की महिला बताते हुए कहा कि सदन में विपक्ष के द्वारा यह दलील दी गई कि इस वर्ग को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन कांग्रेस ने कभी भी ओबीसी वर्ग का वास्तविक समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा भ्रम फैलाने का काम किया है, जबकि वर्तमान सरकार महिलाओं और पिछड़े वर्गों को वास्तविक अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है। कौरवों का उदाहरण देकर दी चेतावनी अपने भाषण के अंत में कृष्णा गौर ने महाभारत का उदाहरण देते हुए विपक्ष को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि- भगवान श्रीकृष्ण कौरवों को समझाने गए थे, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी और परिणाम महाभारत के रूप में सामने आया। आज फिर एक यदुवंशी मोहन आपको समझाने की कोशिश कर रहे हैं, यदि आप नहीं समझे तो परिणाम भी वैसा ही होगा। महिलाएं आपको कभी माफ नहीं करेंगी। गौर ने विपक्ष से अपील की कि वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस संकल्प का समर्थन करे। नारी शक्ति संशोधन विधेयक पर विधानसभा में चर्चा के दौरान राज्यमंत्री कृष्णा गौर कहा कि कांग्रेस ने इस विधेयक को रोकने के लिए भ्रामक और तर्कहीन दलीलों का सहारा लिया, लेकिन उनके सभी दावों की सच्चाई सामने आ गई।     मंत्री ने कहा कि कांग्रेस का पहला भ्रम यह था कि इस प्रस्ताव से दक्षिण भारत के राज्यों को सीटों का नुकसान होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के प्रस्ताव में सभी राज्यों में सीटों की संख्या 50% के समान अनुपात से बढ़ाने का प्रावधान है, जिससे किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा।     दूसरे मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि विपक्ष यह भ्रम फैला रहा है कि ओबीसी महिलाओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। इस पर उन्होंने खुद का उदहारण दिया और कहा कि अगर किसी दल ने ओबीसी समाज को सम्मान दिया है, तो वह केवल भाजपा है। कांग्रेस ने तो कभी उन्हें संगठन और सत्ता में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया।     तीसरे भ्रामक दावे को लेकर उन्होंने कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण”का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे को जानबूझकर उठा रही है।

अब तक 554 कारखानों ने प्राप्त की रेटिंग

भोपाल  मध्यप्रदेश शासन के श्रम विभाग द्वारा संचालित श्रम स्टार रेटिंग पहल को प्रदेशभर में उद्योगों से सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है। इस पहल का उद्देश्य कारखानों में श्रम कानूनों के पालन को सुनिश्चित करना तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देना है। संचालक औद्योगिक स्‍वास्‍थ्‍य एवं सुरक्षा मध्‍यप्रदेश इंदौर श्रीमती नमिता तिवारी ने बताया है कि अब तक प्रदेश के 554 कारखानों ने स्व-मूल्यांकन के माध्यम से श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त की है। इनमें बड़ी, मध्यम और लघु श्रेणी की विभिन्न विनिर्माण इकाइयाँ शामिल हैं, जो इस पहल की व्यापक स्वीकार्यता और औद्योगिक क्षेत्रों में इसके प्रभावी प्रसार को दर्शाती हैं। श्रम स्टार रेटेड कारखाने इस बात का प्रमाण होते हैं कि संबंधित कार्यस्थलों पर बाल श्रम और बंधुआ श्रम पूर्णतः प्रतिबंधित हैं तथा श्रमिकों के अधिकारों का समुचित संरक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। संचालक औद्योगिक स्‍वास्‍थ्‍य एवं सुरक्षा इंदौर ने इस पहल में सक्रिय सहभागिता के लिए सभी कारखानों का आभार व्यक्त किया है। विशेष रूप से, श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त करने वाले पहले पाँच कारखानों की सराहना की गई है, जिन्होंने इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाते हुए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया। श्रम रेटिंग में प्रथम पांच कारखाने संचालक औद्योगिक स्‍वास्‍थ्‍य एवं सुरक्षा मध्‍यप्रदेश इंदौर ने बताया कि UltraTech Cement Limited Unit Birla White कटनी, JK White (Unit of J K Cement Ltd.) कटनी, Mahakaushal Refractories Pvt. Ltd. कटनी, Udaipur Beverages Ltd. जबलपुर एवं KEC International Ltd. जबलपुर श्रम स्टार रेटिंग प्राप्‍त करने वाले प्रथम पांच कारखाने हैं। इस प्रणाली को अपनाने से न केवल श्रमिकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि उद्योगों को भी कई प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होते हैं। इससे उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ता है, निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है और बाजार में संस्थानों की प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। साथ ही, प्रमाणित कारखानों को उपभोक्ताओं द्वारा प्राथमिकता मिलने की संभावना भी अधिक रहती है, जिससे उनकी ब्रांड वैल्यू और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मजबूत होती है। संचालक औद्योगिक सुरक्षा ने प्रदेश के अन्य कारखानों से भी अपील की है कि वे इस पहल में सक्रिय रूप से भाग लें और श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त कर अपने संस्थान को सुरक्षित, उत्तरदायी और विश्वसनीय कार्यस्थल के रूप में स्थापित करें।  

सतना में सुरक्षा पर सवाल, वन स्टॉप सेंटर की दीवार लांघकर फरार हुईं तीन नाबालिग बालिकाएं

सतना शहर के जवाहर नगर स्थित वन स्टॉप सेंटर से 27 अप्रैल की देर रात तीन नाबालिग बालिकाएं खिड़की के रास्ते बाहर निकल गईं। घटना की जानकारी सोमवार सुबह सामने आने पर केंद्र प्रबंधन में हलचल मच गई। मामले की सूचना तत्काल सिटी कोतवाली थाना पुलिस को दी गई, जिसके बाद बालिकाओं की तलाश शुरू कर दी गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, तीनों बालिकाओं को बाल कल्याण समिति के निर्देश पर अस्थायी रूप से वन स्टॉप सेंटर में रखा गया था। सतना और बिजनौर की रहने वाली हैं बालिकाएं इनमें से एक बालिका उत्तर प्रदेश के बिजनौर की रहने वाली है, जबकि अन्य दो सतना जिले के पौराणिक टोला और रामपुर बघेलान क्षेत्र से संबंधित हैं। बताया जा रहा है कि जिस डोरमेट्री में बालिकाएं ठहरी थीं, वहां की पीछे की खिड़की को क्षतिग्रस्त कर वे एक-एक कर बाहर निकलीं और परिसर से दूर चली गईं। केंद्र में सीसीटीवी कैमरे और मुख्य द्वार पर सुरक्षा कर्मी की तैनाती होने के बावजूद, पीछे की ओर खुले मैदान की दिशा से निकलने की आशंका जताई जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और परिजनों से ली जा रही मदद घटना की सूचना मिलते ही अधीक्षिका द्वारा पुलिस को अवगत कराया गया। सिटी कोतवाली पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न टीमों का गठन किया है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य संभावित स्थानों पर तलाश की जा रही है। साथ ही, आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालकर सुराग जुटाने का प्रयास जारी है। पुलिस द्वारा बालिकाओं के परिजनों और परिचितों से भी संपर्क किया जा रहा है, ताकि संभावित स्थानों की जानकारी मिल सके। अधिकारियों का कहना है कि बालिकाओं की सुरक्षित बरामदगी प्राथमिकता है और सभी आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।