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‘We Will Do It’ का संदेश, 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक संकल्प और विश्वास पर कैलाश सारंग का जोर

We Will Do It- 140 करोड़ देशवासियों का सामूहिक संकल्प विश्वास कैलाश सारंग भोपाल भारत की विकास यात्रा आज उस मुकाम पर पहुंच चुकी है, जहां दुनिया भारत को केवल संभावनाओं वाले देश के रूप में नहीं बल्कि अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की क्षमता रखने वाली एक सशक्त शक्ति के रूप में देख रही है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का वी विल डू इट का मंत्र देशवासियों के भीतर नए आत्मविश्वास, नई ऊर्जा और बड़े संकल्प का संचार करता है। 7 अक्टूबर को अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्र के सामने भविष्य के भारत की एक ऐसी तस्वीर रखी जिसमें लक्ष्य छोटे नहीं बल्कि विराट हैं। सपने सीमित नहीं बल्कि वैश्विक हैं और उन्हें पूरा करने का विश्वास 140 करोड़ देशवासियों की सामूहिक संकल्प में है। प्रधानमंत्री जी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत अब असंभव समझे जाने वाले लक्ष्यों से पीछे हटने वाला नहीं है। वी विल डू इट प्रधानमंत्री जी का यह मंत्र भारत की उस बदलती मानसिकता का प्रतीक है, जिसमें चुनौतियों को बाधा नहीं बल्कि अवसर के रूप में देखने का आत्मविश्वास पैदा हुआ है। हम कर सकते हैं से आगे बढ़कर हम करके दिखाएंगे का भाव ही इस मंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। प्रधानमंत्री जी ने जिन लक्ष्यों को सामने रखा उनमें 2047 तक विकसित भारत, विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में भारत का स्थान, आत्मनिर्भर भारत, भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना, ओलंपिक की मेजबानी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूना शामिल हैं। हर लक्ष्य के साथ उनका उद्घोष वी विल डू इट देश की सामूहिक संकल्प की इच्छाशक्ति को अभिव्यक्त करता है। 2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा। यह केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं बल्कि वर्तमान पीढ़ी के सामने इतिहास रचने का अवसर है। आज की युवा पीढ़ी के सामने यह जिम्मेदारी है कि वह ऐसा भारत बनाए जो आर्थिक रूप से मजबूत हो, तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर हो, सामाजिक रूप से सशक्त हो और वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता रखता हो। प्रधानमंत्री जी ने इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आज सवाल केवल यह नहीं है कि 2047 में भारत को कहां पहुंचना है बल्कि यह है कि उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आज से क्या करना है? यही विचार वी विल डू इट को भविष्य के संकल्प से वर्तमान के कर्म से जोड़ता है। आत्मनिर्भर भारत का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं बल्कि दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाते हुए अपनी क्षमताओं को मजबूत करना है। आज भारत मोबाइल निर्माण से लेकर रक्षा उत्पादन, डिजिटल तकनीक से लेकर अंतरिक्ष अनुसंधान और नवीकरणीय ऊर्जा से लेकर स्टार्टअप इकोसिस्टम तक अनेक क्षेत्रों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। प्रधानमंत्री जी के वी विल डू इट का संदेश इसी आत्मविश्वास को और मजबूत करता है कि भारत केवल दूसरों से सीखने वाला देश नहीं बल्कि दुनिया को सिखाने वाला देश बने। यह आत्मविश्वास उस भारत का है जो अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ वैश्विक बाजार के लिए भी उत्पादन करने की क्षमता रखता है। भारत की विशाल युवा आबादी, प्रतिभा, तकनीकि क्षमता और बड़ा घरेलू बाजार उसे वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग के लिए स्वाभाविक रूप से सक्षम बनाते हैं। मेक इन इंडिया से शुरू हुई सोच अब मेक फॉर द वर्ल्ड की दिशा में आगे बढ़ रही है। भारत में निर्मित उत्पाद जब दुनिया के बाजारों में अपनी पहचान बनाते हैं तो यह केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं होती बल्कि भारतीय प्रतिभा और सामर्थ्य पर दुनिया के बढ़ते विश्वास का प्रमाण भी होती है। प्रधानमंत्री जी ने इसी संदर्भ में बड़े लक्ष्यों की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका संदेश स्पष्ट है कि यदि लक्ष्य बड़ा होगा तो प्रयास भी बड़ा होगा और परिणाम भी असाधारण प्राप्त होंगे। प्रधानमंत्री जी के वी विल डू इट मंत्र में भारत की खेल शक्ति के विस्तार का संकल्प भी दिखाई देता है। ओलंपिक की मेजबानी का लक्ष्य केवल एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन की आकांक्षा नहीं है बल्कि भारत को वैश्विक खेल शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आज देश में खेल अधोसंरचना का विस्तार हो रहा है। छोटे शहरों और गांवों से प्रतिभाएं सामने आ रही हैं और खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गांव से ग्लोबल तक पहुंचती भारतीय खेल प्रतिभा इस विश्वास को मजबूत करती है कि यदि अवसर, संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले तो भारत के युवा किसी भी वैश्विक मंच पर तिरंगे की शान बढ़ा सकते हैं। जिस देश ने कभी अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत सीमित संसाधनों के साथ की थी, वही भारत आज चंद्रमा पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है और अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई महत्वाकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री जी का अंतरिक्ष में भारत की नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का संकल्प यह दर्शाता है कि भारत की आकांक्षाएं अब धरती की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। प्रधानमंत्री जी के संदेश का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि उन्होंने इन लक्ष्यों की जिम्मेदारी केवल सरकार पर नहीं छोड़ी है। उन्होंने देश की 140 करोड़ आबादी को भारत की सबसे बड़ी शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है। भारत की हर समस्या के समाधान में करोड़ों भारतीयों की क्षमता जुड़ी है। किसान, युवा, महिला, वैज्ञानिक, उद्यमी, श्रमिक, खिलाड़ी, शिक्षक, स्टार्टअप संस्थापक और देश का प्रत्येक नागरिक विकसित भारत की यात्रा का भागीदार है। यही कारण है कि वी विल डू इट में वी सबसे महत्वपूर्ण शब्द है। यह मैं करूंगा का नहीं बल्कि हम करेंगे का सामूहिक मंत्र है। भारत के पास युवा शक्ति है, विशाल बाजार है, तकनीकी क्षमता है, लोकतांत्रिक मजबूती है और वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रभाव है। इसलिए आज भारत के सामने छोटे सपने देखने का समय नहीं है बल्कि बड़े लक्ष्य तय करने और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी शक्ति से जुट जाने का समय है। वी विल डू इट की वास्तविक शक्ति केवल इसे बोलने में नहीं बल्कि इसे अपने जीवन और कर्म में उतारने में है। 2047 का विकसित भारत किसी एक सरकार, … Read more

मध्यप्रदेश में रोजगार की बड़ी सौगात, टेक्सटाइल उद्योग में ₹7,500 करोड़ का निवेश; हजारों नौकरियां मिलेंगी

भोपाल /मुंबई  मध्य प्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। मुंबई स्थित होटल 'द सेंट रेजिस' में आयोजित 'इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से देश की अग्रणी टेक्सटाइल कंपनी 'भिलोसा इंडस्ट्रीज' के प्रबंध निदेशक श्री संदीप जैन ने उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक के दौरान भिलोसा इंडस्ट्रीज ने पीएम मित्र पार्क (धार) को केंद्र में रखते हुए राज्य में चरणबद्ध रूप से कुल ₹7,500 करोड़ के बड़े निवेश और करीब 3,750 प्रत्यक्ष रोजगार सृजन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। पीएम मित्र पार्क, धार में स्थापित होगी अत्याधुनिक इकाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ चर्चा में श्री संदीप जैन ने बताया कि कंपनी पीएम मित्र पार्क, धार में टेक्सटाइल निर्माण के लिए 200 एकड़ और सहायक इकाइयों के लिए अतिरिक्त 100 एकड़ (कुल 300 एकड़) भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया में है, जिसका चयन अंतिम चरण में है। कंपनी प्रारंभिक रूप से ₹2,500 करोड़ के पूंजीगत निवेश के साथ कार्य प्रारंभ कर समग्र रूप से ₹7,500 करोड़ का निवेश करेगी। इस परियोजना के तहत वर्ष 2028 से उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। धार-इंदौर बेल्ट में बनेगा संपूर्ण पॉलिएस्टर इकोसिस्टम इस परियोजना के माध्यम से धार-इंदौर क्षेत्र में पॉलिएस्टर यार्न, फाइबर, निटेड फैब्रिक तथा मैन-मेड फाइबर आधारित नॉन-गारमेंट फैब्रिक का एक एकीकृत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जाएगा। इसके अंतर्गत पॉलिएस्टर आधारित मुख्य उद्योगों के साथ-साथ कई सूक्ष्म एवं लघु सहायक इकाइयों को भी गति मिलेगी। वैश्विक स्तर पर स्थापित है भिलोसा इंडस्ट्रीज की साख उल्लेखनीय है कि भिलोसा इंडस्ट्रीज 13,232 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर के साथ भारतीय पॉलिएस्टर बाजार में लगभग 25% हिस्सेदारी रखने वाली शीर्ष निर्माता कंपनी है। कंपनी के उत्पाद घरेलू बाजार के साथ-साथ दक्षिण अमेरिका, तुर्की, नेपाल सहित कई वैश्विक बाजारों में निर्यात किए जाते हैं। मध्यप्रदेश में इस संयंत्र की स्थापना से राज्य के निर्यात राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उद्योगों को हर संभव प्रोत्साहन देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि धार स्थित 'पीएम मित्र पार्क' विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी से परिपूर्ण है, जो टेक्सटाइल उद्योग के लिए देश के सबसे मुफीद केंद्रों में से एक बनकर उभर रहा है। उन्होंने उद्योग समूह को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार पॉलिएस्टर आधारित उद्योगों और उनके सहयोगी उपक्रमों के लिए अनुकूल नीतियां, पारदर्शी प्रक्रियाएं और केंद्रित प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

त्विषा शर्मा मौत मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, भोपाल से दिल्ली ट्रांसफर कराने की मांग

 भोपाल  त्विषा शर्मा मौत मामले में पीड़ित पक्ष ने मामले की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जिसे मंजूरी मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट में लगाए गए ट्रांसफर पिटिशन पर 16 अक्टूबर को सुनवाई होगी। याचिका में पीड़ित पक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसे भोपाल न्यायालय में निष्पक्ष न्याय मिलने को लेकर भरोसा नहीं है। इसी आशंका के चलते मामले की सुनवाई दिल्ली की अदालत में कराने की मांग की गई है। निष्पक्ष सुनवाई पर उठाए सवाल याचिका में कहा गया है कि मामले में आरोपित पूर्व जिला जज गिरीबाला सिंह को भोपाल न्यायालय से पहले ही जमानत मिल चुकी है। पीड़ित पक्ष ने इस तथ्य को भी अपनी आशंका का आधार बनाया है। याचिका में कहा गया है कि गिरीबाला सिंह पूर्व में भोपाल में जिला जज के पद पर रह चुकी हैं। ऐसे में पीड़ित पक्ष को आशंका है कि उनके प्रभाव के चलते मामले की सुनवाई निष्पक्ष रूप से प्रभावित हो सकती है। दिल्ली में सुनवाई की अपील पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि मामले से जुड़े आरोपितों ने पहले भी अपने प्रभाव और शक्ति का इस्तेमाल जांच को प्रभावित करने तथा साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने के प्रयास किए हैं। इसी आधार पर याचिका में कहा गया है कि भोपाल में सुनवाई जारी रहने पर उन्हें न्याय मिलने को लेकर भरोसा नहीं है। पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से मामले को भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित कर वहां सुनवाई कराने की मांग की है। अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। गिरीबाला सिंह के सामने नई मुसीबत, CBI ने फंसाया पेच जेल में बंद पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. उनकी तरफ से दहेज एक्ट की धाराओं को विलोपित कर दायर की गयी संशोधित जमानत याचिका हाई कोर्ट में पेश की गयी. सीबीआई की तरफ से जमानत याचिका का विरोध किया गया।  सीबीआई ने दहेज मांग के साक्ष्य नहीं मिलने बताए इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई ने हाईकोर्ट में लिखित आपत्ति पेश की थी। इसमें बताया गया था कि मामले में दहेज की मांग किए जाने से संबंधित साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसके बाद गिरिबाला सिंह की ओर से जमानत आवेदन में संशोधन कर दहेज प्रताड़ना से संबंधित धारा हटाने की अनुमति मांगी गई थी। गुरुवार को सुनवाई के दौरान उनकी ओर से आवेदन में सुधार की दरख्वास्त पेश की गई, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया। तकनीकी साक्ष्यों की जांच जारी सीबीआई ने हाई कोर्ट जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ को बताया "एकत्र किये गये तकनीकी साक्ष्यों को जांच के लिए लैब भेजा गया था, जिनकी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है. सीबीआई प्रकरण की जांच कर रही है और लैब रिपोर्ट प्राप्त होने पर साक्ष्यों के आधार पर संबंधित न्यायालय के समक्ष विधि अनुसार कार्रवाई की जायेगी." भोपाल की पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरीबाला सिंह की बहू व मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध हालात में 12 मई 2026 को मौत हो गई थी।  ट्विशा मौत केस में अब तक क्या हुआ पुलिस ने सास पूर्व जज गिरीबाला तथा उसके बेटे के खिलाफ दहेज हत्या व दहेज एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया था. आरोपी सास को भोपाल जिला व सत्र न्यायालय से 15 मई को अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया था. पीड़ित पक्ष ने अग्रिम जमानत मिलने के खिलाफ हाई कोर्ट ने याचिका दायर की थी।  इसके अलावा मृतका का दोबारा पोस्टमार्टम कराने जाने की मांग करते हुए भी हाई कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी. हाई कोर्ट ने दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिये थे. हाई कोर्ट ने 27 मई को पूर्व न्यायाधीश को मिली अग्रिम जमानत को निरस्त कर दिया था. सरकार द्वारा प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपी गयी थी।  संशोधित याचिका पेश करते ही सीबीआई सक्रिय पिछली सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया था कि दहेज की मांग किये जाने के संबंध में साक्ष्य नही मिलने के कारण सीबीआई के तरफ से प्रकरण में दहेज एक्ट की धाराओं को हटा दिया गया है. एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को दहेज एक्ट की धाराओं को विलोपित कर संशोधित याचिका दायर करने के निर्देश जारी किए थे।  आदेश का पालन करते हुए याचिकाकर्ता की तरफ से संशोधित याचिका पेश की गयी. लेकिन सीबीआई की तरफ से एकलपीठ को बताया गया कि जब्त किये गये लैपटॉप, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सहित अन्य तकनीकी साक्ष्यो के रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है. एकलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को निर्धारित की है।  अब आत्महत्या से जुड़े आरोपों पर सुनवाई जमानत आवेदन में संशोधन के बाद अब मामला आत्महत्या से जुड़े आरोपों के संदर्भ में आगे बढ़ेगा। हाईकोर्ट ने संशोधन की अनुमति देते हुए जमानत याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की है। 12 मई को ट्विशा ने आत्महत्या की थी गिरीबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा ने 12 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद ट्विशा के परिजन ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए थे। परिजन का आरोप था कि ट्विशा को दहेज के लिए परेशान किया जा रहा था और मांग पूरी नहीं होने पर उसके साथ प्रताड़ना की गई। परिवार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया था कि लगातार मानसिक प्रताड़ना के चलते ट्विशा ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। गिरीबाला और बेटे पर केस दर्ज इसके बाद भोपाल पुलिस ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज हत्या और दहेज एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया था। पूर्व न्यायाधीश को भोपाल जिला सत्र न्यायालय से इस मामले में जमानत मिल गई थी। अग्रिम जमानत मिलने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसके अलावा मृतका का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग को लेकर भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। AIIMS दिल्ली की टीम ने किया दोबारा पोस्टमार्टम हाईकोर्ट ने दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने 27 मई को पूर्व न्यायाधीश को मिली अग्रिम जमानत … Read more

मध्य प्रदेश में निवेश को मिलेगी रफ्तार, आगर की मैक्केन फूड परियोजना से 2,000 लोगों को रोजगार

आगर में 3800 करोड़ की मैक्‍केन फूड परियोजना होगी शुरू : मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव 2 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार पशुपालन, किसानों की आय बढ़ाने का महत्‍वपूर्ण साधन है मुख्‍यमंत्री ने आगर के बलराम कृषि महोत्‍सव में किसानों से किया वर्चुअली संवाद भोपाल  मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियों कॉन्‍फ्रेसिंग से आगर में शुक्रवार को आयोजित बलराम कृषि महोत्‍सव में सहभागिता करते हुए किसानों से सीधा संवाद किया। उन्‍होंने कृषक कल्‍याण वर्ष के तहत् आयोजित कार्यक्रमों में किसानों से कृषि गतिविधियों, शासन की किसान हितैषी योजनाओं से मिल रहे लाभ, कृषि के क्षेत्र में नवाचार तथा किसानों की आवश्‍यकताओं के संबंध में संवाद किया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगर में 3800 करोड़ की मैक्‍केन फूड परियोजना शुरू हो रही है, इसमें 2 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का महत्‍वपूर्ण साधन है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगर-मालवा जिले के लालूखेड़ी में आलू प्रसंस्‍करण का 200 करोड़ का उद्योग स्‍थापित हो रहा है, लालूखेड़ी के साथ ही अब आगर-मालवा जिले के किसान भी आलू उगाऐंगे। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगर एवं सुसनेर का संतरा देश भर में भेजा जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि जिले के पशुपालक गौपालन के लिये भी विशेष रूप से जाने जाते है। जैविक दूध प्रदेश में कही मिलता है तो आगर में ही मिलता है। उन्‍होंने कहा कि प्रदेश का दूध उत्‍पादन भी बढ़ेगा, सांची का दुग्‍ध ब्राण्‍ड भी बढ़ रहा है। मुख्‍यमंत्री ने कहा कि आगर जिला सौर उर्जा एवं विण्‍ड एनर्जी के लिये भी अपनी अलग पहचान रखता है। प्रदेश में पर्याप्‍त बिजली, सिंचाई के लिये पानी उपलब्ध है और पांच लाख किलोमीटर की सड़कों का जाल भी है। उन्‍होंने ने कहा कि वर्ष 2027 तक गेहूं 2700 से के भाव में खरीदेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगर जिला गौ-सेवा के लिये भी विशेष पहचान रखता है। गौ-अभयारण्य सालरिया एवं जिले की अन्‍य गौशालाओं में 20 हजार से अधिक गौवंश की समुचित देखभाल की जा रही है। सरकार प्रति गौवंश 40 रूपए प्रतिदिन की दर से गौवंश की देखभाल के लिये गौशालाओं को राशि प्रदान कर रही है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौपालन को बढ़ावा देने के लिये गौपालन पुरस्‍कार योजना के तहत् अच्‍छे पशुपालकों की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। जिसमें प्रत्‍येक विकास खण्‍ड से प्रथम पुरस्‍कार प्राप्‍त करने वाले पशुपालक को एक लाख रूपए, द्वितीय पुरस्‍कार के लिये 50 हजार एवं तृतीय पुरस्‍कार के रूप में 25 हजार रूपए की राशि पशुपालक को प्रदान की जाएगी। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने बिनायगा बड़ौद के प्राकृतिक एवं जैविक खेती करने वाले किसान राधेश्‍याम परिहार, आखाखेड़ी तनोडिया के प्राकृतिक अरहर खेती करने वाले किसान रोहित शर्मा एवं अन्‍य उपस्थित प्रगतिशील कृषकों से वर्चुअली संवाद कर उनके द्वारा की जा रही प्राकृतिक, जैविक एवं उन्‍नत कृषि के बारे में जानकारी ली तथा इससे होने वाले लाभ के बारे में भी चर्चा की। सांसद रोड़मल नागर ने कहा कि मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने खेती को उद्यम बनाकर किसानों के लिये लाभ का धन्‍धा बना दिया है। आज उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त करने के बाद भी किसान पुत्र कृषि की ओर आकर्षित हो रहे है। किसान मोर्चा के प्रदेश अध्‍यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा, अपेक्‍स बैंक के प्रशासक महेन्‍द्र सिंह यादव और विधायक मधु गेहलोत ने भी संबोधित किया। प्रगतिशील किसानों, मेधावी विद्यार्थियों और भूतपूर्व सैनिकों का किया सम्‍मान कार्यक्रम मे उत्‍कृष्‍ट एवं प्रगतिशील किसानों, किसान परिवार के मेधावी छात्र-छात्राओं और भूतपूर्व सैनिकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्‍मानित किया गया। कार्यक्रम को कपिल यारदे, कप्‍तान सिंह यादव ने भी सम्‍बोधित किया। कार्यक्रम स्‍थल पर विभिन्‍न विभागों द्वारा लगाई गई, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्‍स्‍य विभाग एवं आधुनिक कृषि यंत्रों सहित अन्‍य विभागों की प्रदर्शनियों लगायी गई।  

गरबा में जाने को लेकर भोपाल में बयानबाजी तेज, मुफ्ती ने बताया हराम; हिंदू संगठन भी कर रहे विरोध

भोपाल  नवरात्रि और गरबा का सीजन शुरू होने से पहले होते ही शहर का सियासी और सामाजिक पारा चढ़ गया है। पिछले कुछ सालों से जहां हिंदू संगठन गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री का कड़ा विरोध करते रहे हैं, वहीं इस बार समीकरण एक नया मोड़ ले चुके हैं। अब हिंदू संगठनों के बाद खुद मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों ने भी मुस्लिम युवाओं के गरबा में शामिल होने पर पूरी पाबंदी का ऐलान कर दिया है। मुफ्ती ने जारी किया वीडियो भोपाल के मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर हलचल मचा दी है। मुफ्ती नदवी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि मुस्लिम युवाओं का हिंदू रस्मों और गरबा में शिरकत करना सरासर 'हराम' है। उन्होंने चेतावनी दी कि दूसरी कौम की परंपराओं का अनुकरण करना समाज के लिए फितने (विवाद) का कारण बनता है, इसलिए युवाओं को अपने दोस्तों के साथ भी गरबा पंडालों में जाने से तौबा करनी चाहिए। मुस्लिमों से न जाने की अपील की इसी कड़ी में ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी भी खुलकर सामने आ गई है। कमेटी ने समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे गरबा आयोजनों से पूरी तरह दूर रहें। अध्यक्ष शेख इस्माइल खान का कहना है कि यह कदम किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि आपसी विवादों से बचने और शांति बनाए रखने के लिए उठाया गया है। इसके लिए अब जिलों में विशेष अभियान भी चलाया जाएगा। मध्य प्रदेश में पहले भी हुए हैं विवाद मध्य प्रदेश में गरबा पंडाल हमेशा से सियासत का केंद्र रहे हैं। महू से बीजेपी विधायक उषा ठाकुर पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक और पहचान पत्र की जांच की कड़ी मांग उठा चुकी हैं। पिछले वर्षों में भी पहचान छिपाकर पंडालों में एंट्री को लेकर कई बड़े विवाद और हंगामे सामने आए थे। गौरतलब है कि अब स्थिति यह बन गई है कि एक तरफ हिंदू संगठन पंडालों के दरवाजे बंद करने पर अड़े हैं तो दूसरी तरफ मुस्लिम उलेमाओं ने भी अपने समाज के युवाओं के लिए पाबंदी का दायरा खींच दिया है। इस दोतरफा माहौल के बीच भोपाल का इस बार का गरबा सीजन तीखी बयानबाजी और गर्माहट के साथ सुर्खियों में आ गया है।

MP के शहडोल मेडिकल कॉलेज में अनोखा मामला, सामान्य प्रसव से एक साथ जन्मे तीन बच्चे; मां-बच्चे सुरक्षित

शहडोल शहडोल मेडिकल कॉलेज में एक महिला ने सामान्य प्रसव से एक साथ तीन बच्चों को जन्म दिया है। नवजातों में दो बेटियां और एक बेटा शामिल हैं। तीनों का वजन एक किलोग्राम के आसपास या उससे कम है, इसलिए उन्हें विशेष निगरानी में एसएनसीयू में रखा गया है। डॉक्टरों के मुताबिक मां और तीनों बच्चों की स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर है। मेडिकल कॉलेज में एक साथ तीन बच्चों के सामान्य प्रसव का यह पहला मामला बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार सोहागपुर क्षेत्र के ग्राम पतासी निवासी 20 वर्षीय प्रीति कोल पति कृष्ण कुमार को प्रसव के लिए शहडोल मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। यहां डॉक्टरों की देखरेख में 8 अक्टूबर को उन्होंने तीन बच्चों को जन्म दिया। मेडिकल रिकॉर्ड के मुताबिक महज 10 मिनट के भीतर तीनों नवजातों का जन्म हो गया। तीनों बच्चों में पहली और तीसरी संतान बेटियां हैं, जबकि दूसरी संतान बेटा है। जन्म के समय से पहले जन्म होने और कम वजन के कारण तीनों को विशेष निगरानी के लिए स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में रखा गया है।  मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की एचओडी डॉ. सोना सिंह के अनुसार एक साथ तीन बच्चों का जन्म होना दुर्लभ है। उन्होंने बताया कि करीब 8 से 10 हजार मामलों में ऐसा एक मामला सामने आने की बात कही जाती है। मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. नागेंद्र सिंह ने भी इसे दुर्लभ मामला बताया। डॉक्टरों के मुताबिक फिलहाल मां और तीनों नवजातों की स्थिति खतरे से बाहर है। एक साथ तीन बच्चों के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल है। मेडिकल कॉलेज में सामान्य प्रसव से तीन बच्चों के जन्म का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। 

शराब ठेकों के बदले ₹1 करोड़ लेने का आरोप, डिप्टी CM के OSD दीपम रायचुरा पर विभागीय जांच के निर्देश

भोपाल  डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा ने अपने ओएसडी दीपम रायचुरा को पद से हटा दिया है। साथ ही मामले में विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं। दीपम रायचुरा पर शराब की दुकानों के ठेके को लेकर रिश्वत के आरोप लगे थे। डेप्युटी सीएम ने कहा कि ये आरोप जिस समय को लेकर लग रहे हैं, उस समय वे हमारे ओएसडी नहीं थे। मेरे ओएसडी के रूप में कार्यरत नहीं थे डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा ने आरोपों पर कहा कि आज न्यूज के माध्यम से वर्ष 2024-25 में शराब ठेकों से संबंधित अनियमितताओं का मामला मेरे संज्ञान में आया है। इस अवधि में दीपम रायचुरा भोपाल में सहायक आबकारी अधिकारी के पद पर पदस्थ थे। उस समय वे मेरे OSD के रूप में कार्यरत नहीं थे। जांच के दिए निर्देश उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलते ही मैंने संबंधित विभाग को शीघ्र जांच के निर्देश दिए हैं। जांच निष्पक्ष रूप से संपन्न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए दीपम रायचुरा को OSD के प्रभार से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया है।  मोहित गोगिया के कथित बयान में गंभीर आरोप करीब 930 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में आरोपी मोहित गोगिया के नाम से प्रसारित बयान में दावा किया गया है कि वर्ष 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों के ठेके जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में मदद की गई थी। कथित बयान में दीपम रायचूरा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि ठेके हासिल करने के लिए बैंक गारंटी के तौर पर इस्तेमाल की गई फर्जी एफडीआर को मंजूरी दिलाने में भी मदद की गई। बयान में कहा गया है कि ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये दिए गए। इसमें 50 लाख रुपये नकद देने और बाकी 50 लाख रुपये आईएसबीटी क्षेत्र में होटल चलाने वाले एक व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर करने का दावा किया गया है। कथित बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि दीपक दुबे के जरिए रकम ली गई थी। इसके अलावा बिना लाइसेंस शराब बिक्री में मदद किए जाने के दावे भी किए गए हैं।  मुलाकात कराने और रकम देने का भी दावा कथित बयान के अनुसार, वर्ष 2022-23 में तनुज सेठी ने गोगिया की मुलाकात रायचूरा से कराई थी। इसके बाद रायचूरा ने उसे दीपक दुबे से मिलवाया था। बयान में दावा किया गया है कि दुबे उनके कामकाज देखते थे।  फिलहाल उपमुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को जांच के निर्देश देने और ओएसडी को प्रभार से मुक्त करने की बात कही है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि शराब दुकानों के ठेकों, एफडीआर और कथित लेनदेन के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं। धोखाधड़ी के आरोपी ने लगाया था आरोपी जांच एजेंसियों ने 1000 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी के आरोपी मोहित गोगिया को गिरफ्तार किया है। गोगिया ने पूछताछ के दौरान डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचुरा का नाम लिया था। उसने जांच एजेंसियों को बताया था कि शराब की दुकानों के ठेके लिए दीपम रायचुरा के आदमी को एक करोड़ रुपए दिए थे। उठ रहे थे सवाल इसे लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रही थी। साथ ही जांच की मांग हो रही थी। पहले भी दीपम रायचुरा पर आरोप लग चुके हैं। अब सरकार से इस मामले को लंबा खींचने की जगह दीपम रायचुरा को तुरंत हटा दिया है। हालांकि रायचुरा इन आरोपों को खारिज कर रहे थे।  

केन-बेतवा परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व को खतरा? हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगी पर्यावरणीय रिपोर्ट

जबलपुर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़ी जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिका में दावा किया है कि परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का आधे से अधिक हिस्सा डूब क्षेत्र में आ सकता है और करीब 60 लाख पेड़ों की कटाई होगी। कोर्ट ने रिपोर्ट में बताई गई कथित अनियमितताओं, सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही और उस पर राज्य सरकार की कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने ये निर्देश दिए। जबलपुर के अधिवक्ता अरिहंत तिवारी ने जनहित याचिका दायर की है और गुरुवार को स्वयं अपना पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी। केन-बेतवा परियोजना पर कोर्ट ने क्या पूछा     CEC की रिपोर्ट में परियोजना से जुड़ी कौन-कौन सी अनियमितताएं बताई गई हैं?     सुप्रीम कोर्ट में परियोजना से संबंधित कार्यवाही की वर्तमान स्थिति क्या है?     CEC की रिपोर्ट के आधार पर मध्यप्रदेश सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है? वन्यजीवों और घड़ियाल अभयारण्य पर असर की आशंका याचिका में कहा है कि परियोजना के लिए होने वाले जलभराव से पन्ना टाइगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। इससे बाघ, तेंदुआ, गिद्ध सहित अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन के गलियारों पर असर पड़ने की आशंका है। याचिका में केन घड़ियाल अभयारण्य पर संभावित प्रभाव का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की CEC ने अपनी रिपोर्ट में चिंता जताई है कि नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्थायी समिति ने डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में घड़ियाल अभयारण्य पर पड़ने वाले प्रभाव का पर्याप्त आंकलन नहीं किया। याचिका में इसका स्वतंत्र और वैज्ञानिक आकलन कराने की मांग की गई है। 60 लाख पेड़ों की कटाई का दावा याचिका में वन सलाहकार समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए करीब 60 लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान बताया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे बुंदेलखंड के पर्यावरण, वर्षा चक्र और स्थानीय जलवायु पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यह क्षेत्र पहले से ही जल संकट और सूखे की समस्या से प्रभावित रहा है। याचिका में वर्ष 2017 की पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, कई आधिकारिक एजेंसियों ने रिपोर्ट में तथ्यात्मक त्रुटियों की ओर संकेत किया है। नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की विशेषज्ञ समिति की ओर से स्वतंत्र हाइड्रोलॉजिकल स्टडी कराने की कथित मांग को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया गया है। आदिवासियों और ग्रामीणों पर दबाव का आरोप याचिका में छतरपुर जिले में परियोजना के विरोध में चल रहे आंदोलन का भी जिक्र है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सैकड़ों आदिवासी महिलाओं और ग्रामीणों ने छोटे बच्चों को गोद में लेकर प्रतीकात्मक ‘चित्ता आंदोलन’ के जरिए विरोध जताया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस और प्रशासन ने आंदोलनकारियों पर दबाव बनाया। राशन, पानी और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति रोकने तथा गांवों में आवाजाही प्रतिबंधित करने जैसी कार्रवाई के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों पर कोर्ट ने अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। 1980 के दशक में हुई थी परियोजना की परिकल्पना केन-बेतवा लिंक परियोजना की परिकल्पना 1980 के दशक में की गई थी। वर्ष 2014 में केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद इसे आगे बढ़ाया गया। 8 दिसंबर 2021 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने परियोजना के वित्त पोषण और क्रियान्वयन को मंजूरी दी थी। इसे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया है। परियोजना का उद्देश्य केन नदी के अतिरिक्त जल को बेतवा नदी बेसिन तक पहुंचाकर बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है। परियोजना से मध्यप्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन तथा उत्तरप्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिलों को सिंचाई और पेयजल सुविधा मिलने का दावा किया है। हालांकि, जनहित याचिका में इसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन कराने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन और राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा उपस्थित हुए। हाईकोर्ट ने केंद्र से CEC की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही की स्थिति पेश करने को कहा है।  

इंदौर पहुंचीं बीजेपी नेता नाजिया इलाही, हिंदू देवी-देवताओं में जताई आस्था; उज्जैन में करेंगी तर्पण

इंदौर सुप्रीम कोर्ट की वकील व भाजपा नेता सनातनी प्रवक्ता नाजिया इलाही खान गुरुवार को इंदौर पहुंची. यहां उन्होंने हिंदू धर्म ग्रहण करने के संकेत दिए. वहीं इस साल वह उज्जैन में श्राद्ध पक्ष में पितरों का विधि-विधान से तर्पण और श्राद्ध कर्म करेंगी. इसके साथ ही नाजिया ने गरबा उत्सव को लेकर बेटियों की सुरक्षा का भी मुद्दा उठाते हुए लव जिहाद का पाकिस्तान कनेक्शन बताया।  नाजिया इलाही ने दिया हिंदू धर्म ग्रहण करने के संकेत हिंदू धर्म और सनातन से प्रभावित रहीं सुप्रीम कोर्ट की तेज तर्रार वकील और भाजपा प्रवक्ता नाजिया इलाही खान ने जल्द ही सनातन धर्म ग्रहण करने का ऐलान किया है. उन्होंने आज इंदौर में स्पष्ट किया कि "उनके पूर्वजों को भी मुगल काल में हिंदू से मुस्लिम धर्म में कन्वर्ट किया गया होगा, इसीलिए अब वह इस पाप से मुक्ति पाना चाहती हैं. उन्होंने कहा मध्य प्रदेश में उनके रिश्ते के भाई हैं, जिनके साथ वह उज्जैन पहुंचकर श्राद्ध पक्ष में अपने पितरों का तर्पण भी करेंगी।  उज्जैन में करेंगी श्राद्ध और तर्पण नाजिया ने कहा पिछले कई वर्षों से उनके मन में अपने स्वर्गवासी बुजुर्गों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने की इच्छा थी, लेकिन किसी न किसी कारण से यह कार्य टलता रहा. अब उन्होंने महाकाल की नगरी उज्जैन में यह संकल्प पूरा करने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम महिला के रूप में पितृ तर्पण के माध्यम से वह मुस्लिम समाज में मानवीयता और पूर्वजों के प्रति सम्मान का संदेश देना चाहती हैं।  हिंदू देवी-देवताओं पर भरोसा, गरबा को लेकर संदेश एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह हिंदू देवी-देवताओं को मानती हैं और अध्यात्म में उनका भरोसा रहा है. इसलिए भी मुस्लिम धर्म के कई कट्टरपंथी उन्हें हिंदू धर्म में जाने की सलाह देते हैं, लेकिन मैं उनके कहने से या उनके तरीके से नहीं जाऊंगी. जब मुझे जाना होगा, तब आपको खबर मिल जाएगी. इसके साथ ही नाजिया ने आगामी नवरात्रि और गरबा उत्सव के दौरान हिंदू बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि नवरात्रि के दौरान लव जिहाद के लिए बेटियों को निशाना बनाया जाता है और इसके पीछे पाकिस्तान से फंडिंग और साजिश का दावा किया।  लव जिहाद के मामलों का पाकिस्तान कनेक्शन उन्होंने सरकार से बेटियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी तंत्र तैयार करने की मांग की. नाजिया ने आतंकी शहजाद भट्टी की धमकी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यूपी एटीएस, दिल्ली क्राइम ब्रांच और देश की प्रमुख सुरक्षा एजेंसियां इस मामले से अवगत हैं. नाजिया ने हिंदू संगठनों से नवरात्रि के दौरान सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा लव जिहाद के जितने भी मामले सामने आए हैं. उन सब का कहीं ना कहीं पाकिस्तानी कनेक्शन पाया गया है. इसलिए आगामी नवरात्रि में गरबा के दौरान हिंदू ब्राह्मण से लेकर दलित तक की बेटियों को फंसाने के बाद उनका सौदा और रेट लगाया जाता है. इसलिए सनातनियों को भी सतर्क हो जाने की जरूरत है। 

इंदौर में क्रिकेट मैच के लिए हाईटेक सुरक्षा, फेस रिकग्नाइजेशन से निगरानी; जीरो वेस्ट पर रहेगा फोकस

इंदौर  देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में में हो रहे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के साथ स्वच्छता के संस्कारों की रोशनी दुनियाभर में फैलेगी। भारत और वेस्टइंडीज के बीच 11 अक्टूबर को होने वाला अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच जीरो वेस्ट थीम पर आयोजित होगा। यहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत फोर-व्हील्स सेग्रीगेशन के तहत कचरे को चार हिस्सों में संग्रहीत किया जाएगा। साथ ही विज्ञापन होर्डिंग भी पुन:उपयोग होने वाले मटेरियल से तैयार किए जाएंगे। मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) के साथ मिलकर स्वच्छता के लिए काम करने वाले सृष्टि फाउंडेशन के श्रीगोपाल जगताप ने बताया कि फोर-व्हील्स सेग्रीगेशन के तहत गीला, सूखा, सेनेटरी वेस्ट और हेजार्ड वेस्ट पृथक किया जाएगा। जैविक कचरे से खाद बनेगी और इस प्रक्रिया का पहला चरण स्टेडियम परिसर में ही पूरा किया जाता है। इसके बाद इसे प्लांट भेजा जाता है। 11 अक्टूबर की शाम होलकर स्टेडियम एक बार फिर भारत और वेस्टइंडीज की भिड़ंत का गवाह बनने जा रहा है। इस बार मुकाबला T20 इंटरनेशनल का है। मैच रात 7 बजे शुरू होगा और करीब 27,500 दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है। मैच से पहले दैनिक भास्कर ने स्टेडियम की तैयारियों का जायजा लिया। ग्राउंड से लेकर दर्शक दीर्घा तक तैयारियां अंतिम दौर में हैं। बाहर दर्शकों की एंट्री को व्यवस्थित करने के लिए रेलिंग लगाई जा रही है, जबकि अंदर कुर्सियों की धुलाई और सफाई का काम जारी है। सबसे बड़ी राहत मौसम को लेकर है। मौसम वैज्ञानिक आनंद हर्षाना के मुताबिक 8 से 12 अक्टूबर तक बारिश की संभावना नहीं है। तापमान सामान्य से कुछ अधिक चल रहा है, लेकिन न्यूनतम तापमान कम है। मौसम के ड्राई रहने की संभावना है। यानी क्रिकेट प्रेमियों को बारिश के कारण मैच रुकने की चिंता फिलहाल नहीं है। MPCA के सीएओ रोहित पंडित ने बताया कि मैच की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और लगभग सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। अचानक बारिश की स्थिति के लिए भी बैकअप प्लान तैयार है। जरूरत पड़ने पर पूरे ग्राउंड को कवर करने की व्यवस्था रहेगी। बारिश का खतरा नहीं, अब नजर ओस पर मैच रात में खेला जाना है, इसलिए बारिश के बाद अब मौसम को लेकर दूसरा सवाल ओस का है। मैच के दौरान तापमान, हवा और नमी की स्थिति गेंदबाजों के लिए अहम रहेगी। मौसम वैज्ञानिक आनंद हर्षाना के मुताबिक फिलहाल बारिश के कोई संकेत नहीं हैं। मानसून का दौर समाप्त हो चुका है और आने वाले दिनों में मौसम के ड्राई रहने की संभावना है। स्टेडियम के बाहर लग रही रेलिंग मैच से पहले होलकर स्टेडियम में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बाहर दर्शकों की एंट्री को व्यवस्थित करने के लिए रेलिंग लगाने का काम चल रहा है। मैच के दिन बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचेंगे, ऐसे में प्रवेश द्वारों के आसपास भीड़ को नियंत्रित करना अहम होगा। रेलिंग के जरिए दर्शकों की कतार और आने-जाने के रास्ते को व्यवस्थित किया जाएगा। स्टेडियम के अंदर कुर्सियों की सफाई और धुलाई भी की जा रही है। दर्शकों के लिए जरूरी होगा कि वे टिकट पर दर्ज प्रवेश गेट की जानकारी पहले से देख लें और पर्याप्त समय लेकर स्टेडियम पहुंचें। 27,500 दर्शकों की भीड़ संभालना बड़ी चुनौती भारत का मुकाबला हो और वह भी इंदौर में, तो स्टेडियम के बाहर भी क्रिकेट का माहौल बनना तय है। करीब 27,500 दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद के चलते सुरक्षा और प्रवेश व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सुरक्षा जांच में समय लग सकता है, इसलिए आखिरी समय में पहुंचने वाले दर्शकों को परेशानी हो सकती है। दर्शकों को टिकट, निर्धारित गेट और स्टेडियम की एंट्री गाइडलाइन पहले से देखनी चाहिए और मैच शुरू होने से काफी पहले पहुंचना बेहतर रहेगा। सुरक्षा में पुलिस के साथ टेक्नोलॉजी से निगरानी, 160 CCTV कैमरे लगे मुकाबले के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है। MPCA और स्थानीय पुलिस के साथ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्टेडियम के अंदर करीब 160 CCTV कैमरे लगे हैं। आसपास के क्षेत्रों में भी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा फेस रिकग्नाइजेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। दर्शकों की एंट्री से लेकर स्टेडियम के अंदर आवाजाही तक पर नजर रखी जाएगी। सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस आपसी समन्वय से काम करेंगी। छोटी बाउंड्री यानी चौके-छक्कों का मैदान होलकर स्टेडियम की सबसे बड़ी खासियत इसकी छोटी बाउंड्री है। यहां चौकोर बाउंड्री करीब 56 मीटर और सीधी बाउंड्री करीब 68 मीटर बताई जाती है। बल्लेबाज अगर गेंद को सही टाइमिंग से कनेक्ट करता है तो बाउंड्री तक पहुंचाने के लिए बहुत ज्यादा ताकत की जरूरत नहीं होती। T20 क्रिकेट में छोटी बाउंड्री का महत्व और बढ़ जाता है। यही वजह है कि होलकर में दर्शकों को तेज रन, बड़े शॉट और लगातार बाउंड्री देखने की उम्मीद रहती है। इस मुकाबले के लिए पिच भी T20 के हिसाब से तैयार की जा रही है। ऐसे में टॉस के बाद कप्तानों का फैसला महत्वपूर्ण होगा। ODI में 7 जीत के बाद पहली बार हार भी देख चुका है मैदान होलकर स्टेडियम लंबे समय तक वनडे में भारत के लिए अजेय मैदान रहा। भारत ने यहां लगातार सात ODI जीते, लेकिन जनवरी 2026 में न्यूजीलैंड ने भारत को 41 रन से हराकर यह सिलसिला तोड़ा। अब यहां भारत का ODI रिकॉर्ड 8 मैचों में 7 जीत और 1 हार है। इस मैदान पर भारत का सबसे बड़ा ODI स्कोर 418/5 है, जो 8 दिसंबर 2011 को वेस्टइंडीज के खिलाफ बना था। इसी मुकाबले में वीरेंद्र सहवाग ने 219 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी। पोस्टर से बनाएंगे थैलियां  मैच के दौरान स्टेडियम में विज्ञापन पोस्टर प्लास्टिक या फ्लैक्स के बजाए पुन: उपयोग होने वाले मटेरियल से तैयार किए जाते हैं। मैच के बाद यह पोस्टर महिला स्व सहायता समूह को दिए जाते हैं, जिससे वे थैलियां और मोबाइल बैग बनाती हैं। प्रशंसकों को करेंगे जागरूक स्टेडियम परिसर में ही कचरे को रिसाइकल करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया जाएगा। साथ ही घर के कचरे के सही तरीके से निस्तारण के लिए प्रेरित भी किया जाएगा। अन्य शहरों को भी दी सीख श्रीगोपाल जगताप बताते हैं कि भारत में हुए महिला विश्व कप के दौरान इंदौर से सीखकर … Read more