samacharsecretary.com

MP के शहडोल मेडिकल कॉलेज में अनोखा मामला, सामान्य प्रसव से एक साथ जन्मे तीन बच्चे; मां-बच्चे सुरक्षित

शहडोल शहडोल मेडिकल कॉलेज में एक महिला ने सामान्य प्रसव से एक साथ तीन बच्चों को जन्म दिया है। नवजातों में दो बेटियां और एक बेटा शामिल हैं। तीनों का वजन एक किलोग्राम के आसपास या उससे कम है, इसलिए उन्हें विशेष निगरानी में एसएनसीयू में रखा गया है। डॉक्टरों के मुताबिक मां और तीनों बच्चों की स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर है। मेडिकल कॉलेज में एक साथ तीन बच्चों के सामान्य प्रसव का यह पहला मामला बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार सोहागपुर क्षेत्र के ग्राम पतासी निवासी 20 वर्षीय प्रीति कोल पति कृष्ण कुमार को प्रसव के लिए शहडोल मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। यहां डॉक्टरों की देखरेख में 8 अक्टूबर को उन्होंने तीन बच्चों को जन्म दिया। मेडिकल रिकॉर्ड के मुताबिक महज 10 मिनट के भीतर तीनों नवजातों का जन्म हो गया। तीनों बच्चों में पहली और तीसरी संतान बेटियां हैं, जबकि दूसरी संतान बेटा है। जन्म के समय से पहले जन्म होने और कम वजन के कारण तीनों को विशेष निगरानी के लिए स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में रखा गया है।  मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की एचओडी डॉ. सोना सिंह के अनुसार एक साथ तीन बच्चों का जन्म होना दुर्लभ है। उन्होंने बताया कि करीब 8 से 10 हजार मामलों में ऐसा एक मामला सामने आने की बात कही जाती है। मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. नागेंद्र सिंह ने भी इसे दुर्लभ मामला बताया। डॉक्टरों के मुताबिक फिलहाल मां और तीनों नवजातों की स्थिति खतरे से बाहर है। एक साथ तीन बच्चों के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल है। मेडिकल कॉलेज में सामान्य प्रसव से तीन बच्चों के जन्म का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। 

शराब ठेकों के बदले ₹1 करोड़ लेने का आरोप, डिप्टी CM के OSD दीपम रायचुरा पर विभागीय जांच के निर्देश

भोपाल  डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा ने अपने ओएसडी दीपम रायचुरा को पद से हटा दिया है। साथ ही मामले में विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं। दीपम रायचुरा पर शराब की दुकानों के ठेके को लेकर रिश्वत के आरोप लगे थे। डेप्युटी सीएम ने कहा कि ये आरोप जिस समय को लेकर लग रहे हैं, उस समय वे हमारे ओएसडी नहीं थे। मेरे ओएसडी के रूप में कार्यरत नहीं थे डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा ने आरोपों पर कहा कि आज न्यूज के माध्यम से वर्ष 2024-25 में शराब ठेकों से संबंधित अनियमितताओं का मामला मेरे संज्ञान में आया है। इस अवधि में दीपम रायचुरा भोपाल में सहायक आबकारी अधिकारी के पद पर पदस्थ थे। उस समय वे मेरे OSD के रूप में कार्यरत नहीं थे। जांच के दिए निर्देश उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलते ही मैंने संबंधित विभाग को शीघ्र जांच के निर्देश दिए हैं। जांच निष्पक्ष रूप से संपन्न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए दीपम रायचुरा को OSD के प्रभार से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया है।  मोहित गोगिया के कथित बयान में गंभीर आरोप करीब 930 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में आरोपी मोहित गोगिया के नाम से प्रसारित बयान में दावा किया गया है कि वर्ष 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों के ठेके जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में मदद की गई थी। कथित बयान में दीपम रायचूरा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि ठेके हासिल करने के लिए बैंक गारंटी के तौर पर इस्तेमाल की गई फर्जी एफडीआर को मंजूरी दिलाने में भी मदद की गई। बयान में कहा गया है कि ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये दिए गए। इसमें 50 लाख रुपये नकद देने और बाकी 50 लाख रुपये आईएसबीटी क्षेत्र में होटल चलाने वाले एक व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर करने का दावा किया गया है। कथित बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि दीपक दुबे के जरिए रकम ली गई थी। इसके अलावा बिना लाइसेंस शराब बिक्री में मदद किए जाने के दावे भी किए गए हैं।  मुलाकात कराने और रकम देने का भी दावा कथित बयान के अनुसार, वर्ष 2022-23 में तनुज सेठी ने गोगिया की मुलाकात रायचूरा से कराई थी। इसके बाद रायचूरा ने उसे दीपक दुबे से मिलवाया था। बयान में दावा किया गया है कि दुबे उनके कामकाज देखते थे।  फिलहाल उपमुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को जांच के निर्देश देने और ओएसडी को प्रभार से मुक्त करने की बात कही है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि शराब दुकानों के ठेकों, एफडीआर और कथित लेनदेन के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं। धोखाधड़ी के आरोपी ने लगाया था आरोपी जांच एजेंसियों ने 1000 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी के आरोपी मोहित गोगिया को गिरफ्तार किया है। गोगिया ने पूछताछ के दौरान डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचुरा का नाम लिया था। उसने जांच एजेंसियों को बताया था कि शराब की दुकानों के ठेके लिए दीपम रायचुरा के आदमी को एक करोड़ रुपए दिए थे। उठ रहे थे सवाल इसे लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रही थी। साथ ही जांच की मांग हो रही थी। पहले भी दीपम रायचुरा पर आरोप लग चुके हैं। अब सरकार से इस मामले को लंबा खींचने की जगह दीपम रायचुरा को तुरंत हटा दिया है। हालांकि रायचुरा इन आरोपों को खारिज कर रहे थे।  

केन-बेतवा परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व को खतरा? हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगी पर्यावरणीय रिपोर्ट

जबलपुर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़ी जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिका में दावा किया है कि परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का आधे से अधिक हिस्सा डूब क्षेत्र में आ सकता है और करीब 60 लाख पेड़ों की कटाई होगी। कोर्ट ने रिपोर्ट में बताई गई कथित अनियमितताओं, सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही और उस पर राज्य सरकार की कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने ये निर्देश दिए। जबलपुर के अधिवक्ता अरिहंत तिवारी ने जनहित याचिका दायर की है और गुरुवार को स्वयं अपना पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी। केन-बेतवा परियोजना पर कोर्ट ने क्या पूछा     CEC की रिपोर्ट में परियोजना से जुड़ी कौन-कौन सी अनियमितताएं बताई गई हैं?     सुप्रीम कोर्ट में परियोजना से संबंधित कार्यवाही की वर्तमान स्थिति क्या है?     CEC की रिपोर्ट के आधार पर मध्यप्रदेश सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है? वन्यजीवों और घड़ियाल अभयारण्य पर असर की आशंका याचिका में कहा है कि परियोजना के लिए होने वाले जलभराव से पन्ना टाइगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। इससे बाघ, तेंदुआ, गिद्ध सहित अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन के गलियारों पर असर पड़ने की आशंका है। याचिका में केन घड़ियाल अभयारण्य पर संभावित प्रभाव का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की CEC ने अपनी रिपोर्ट में चिंता जताई है कि नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्थायी समिति ने डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में घड़ियाल अभयारण्य पर पड़ने वाले प्रभाव का पर्याप्त आंकलन नहीं किया। याचिका में इसका स्वतंत्र और वैज्ञानिक आकलन कराने की मांग की गई है। 60 लाख पेड़ों की कटाई का दावा याचिका में वन सलाहकार समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए करीब 60 लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान बताया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे बुंदेलखंड के पर्यावरण, वर्षा चक्र और स्थानीय जलवायु पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यह क्षेत्र पहले से ही जल संकट और सूखे की समस्या से प्रभावित रहा है। याचिका में वर्ष 2017 की पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, कई आधिकारिक एजेंसियों ने रिपोर्ट में तथ्यात्मक त्रुटियों की ओर संकेत किया है। नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की विशेषज्ञ समिति की ओर से स्वतंत्र हाइड्रोलॉजिकल स्टडी कराने की कथित मांग को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया गया है। आदिवासियों और ग्रामीणों पर दबाव का आरोप याचिका में छतरपुर जिले में परियोजना के विरोध में चल रहे आंदोलन का भी जिक्र है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सैकड़ों आदिवासी महिलाओं और ग्रामीणों ने छोटे बच्चों को गोद में लेकर प्रतीकात्मक ‘चित्ता आंदोलन’ के जरिए विरोध जताया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस और प्रशासन ने आंदोलनकारियों पर दबाव बनाया। राशन, पानी और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति रोकने तथा गांवों में आवाजाही प्रतिबंधित करने जैसी कार्रवाई के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों पर कोर्ट ने अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। 1980 के दशक में हुई थी परियोजना की परिकल्पना केन-बेतवा लिंक परियोजना की परिकल्पना 1980 के दशक में की गई थी। वर्ष 2014 में केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद इसे आगे बढ़ाया गया। 8 दिसंबर 2021 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने परियोजना के वित्त पोषण और क्रियान्वयन को मंजूरी दी थी। इसे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया है। परियोजना का उद्देश्य केन नदी के अतिरिक्त जल को बेतवा नदी बेसिन तक पहुंचाकर बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है। परियोजना से मध्यप्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन तथा उत्तरप्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिलों को सिंचाई और पेयजल सुविधा मिलने का दावा किया है। हालांकि, जनहित याचिका में इसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन कराने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन और राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा उपस्थित हुए। हाईकोर्ट ने केंद्र से CEC की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही की स्थिति पेश करने को कहा है।  

इंदौर पहुंचीं बीजेपी नेता नाजिया इलाही, हिंदू देवी-देवताओं में जताई आस्था; उज्जैन में करेंगी तर्पण

इंदौर सुप्रीम कोर्ट की वकील व भाजपा नेता सनातनी प्रवक्ता नाजिया इलाही खान गुरुवार को इंदौर पहुंची. यहां उन्होंने हिंदू धर्म ग्रहण करने के संकेत दिए. वहीं इस साल वह उज्जैन में श्राद्ध पक्ष में पितरों का विधि-विधान से तर्पण और श्राद्ध कर्म करेंगी. इसके साथ ही नाजिया ने गरबा उत्सव को लेकर बेटियों की सुरक्षा का भी मुद्दा उठाते हुए लव जिहाद का पाकिस्तान कनेक्शन बताया।  नाजिया इलाही ने दिया हिंदू धर्म ग्रहण करने के संकेत हिंदू धर्म और सनातन से प्रभावित रहीं सुप्रीम कोर्ट की तेज तर्रार वकील और भाजपा प्रवक्ता नाजिया इलाही खान ने जल्द ही सनातन धर्म ग्रहण करने का ऐलान किया है. उन्होंने आज इंदौर में स्पष्ट किया कि "उनके पूर्वजों को भी मुगल काल में हिंदू से मुस्लिम धर्म में कन्वर्ट किया गया होगा, इसीलिए अब वह इस पाप से मुक्ति पाना चाहती हैं. उन्होंने कहा मध्य प्रदेश में उनके रिश्ते के भाई हैं, जिनके साथ वह उज्जैन पहुंचकर श्राद्ध पक्ष में अपने पितरों का तर्पण भी करेंगी।  उज्जैन में करेंगी श्राद्ध और तर्पण नाजिया ने कहा पिछले कई वर्षों से उनके मन में अपने स्वर्गवासी बुजुर्गों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने की इच्छा थी, लेकिन किसी न किसी कारण से यह कार्य टलता रहा. अब उन्होंने महाकाल की नगरी उज्जैन में यह संकल्प पूरा करने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम महिला के रूप में पितृ तर्पण के माध्यम से वह मुस्लिम समाज में मानवीयता और पूर्वजों के प्रति सम्मान का संदेश देना चाहती हैं।  हिंदू देवी-देवताओं पर भरोसा, गरबा को लेकर संदेश एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह हिंदू देवी-देवताओं को मानती हैं और अध्यात्म में उनका भरोसा रहा है. इसलिए भी मुस्लिम धर्म के कई कट्टरपंथी उन्हें हिंदू धर्म में जाने की सलाह देते हैं, लेकिन मैं उनके कहने से या उनके तरीके से नहीं जाऊंगी. जब मुझे जाना होगा, तब आपको खबर मिल जाएगी. इसके साथ ही नाजिया ने आगामी नवरात्रि और गरबा उत्सव के दौरान हिंदू बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि नवरात्रि के दौरान लव जिहाद के लिए बेटियों को निशाना बनाया जाता है और इसके पीछे पाकिस्तान से फंडिंग और साजिश का दावा किया।  लव जिहाद के मामलों का पाकिस्तान कनेक्शन उन्होंने सरकार से बेटियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी तंत्र तैयार करने की मांग की. नाजिया ने आतंकी शहजाद भट्टी की धमकी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यूपी एटीएस, दिल्ली क्राइम ब्रांच और देश की प्रमुख सुरक्षा एजेंसियां इस मामले से अवगत हैं. नाजिया ने हिंदू संगठनों से नवरात्रि के दौरान सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा लव जिहाद के जितने भी मामले सामने आए हैं. उन सब का कहीं ना कहीं पाकिस्तानी कनेक्शन पाया गया है. इसलिए आगामी नवरात्रि में गरबा के दौरान हिंदू ब्राह्मण से लेकर दलित तक की बेटियों को फंसाने के बाद उनका सौदा और रेट लगाया जाता है. इसलिए सनातनियों को भी सतर्क हो जाने की जरूरत है। 

इंदौर में क्रिकेट मैच के लिए हाईटेक सुरक्षा, फेस रिकग्नाइजेशन से निगरानी; जीरो वेस्ट पर रहेगा फोकस

इंदौर  देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में में हो रहे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के साथ स्वच्छता के संस्कारों की रोशनी दुनियाभर में फैलेगी। भारत और वेस्टइंडीज के बीच 11 अक्टूबर को होने वाला अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच जीरो वेस्ट थीम पर आयोजित होगा। यहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत फोर-व्हील्स सेग्रीगेशन के तहत कचरे को चार हिस्सों में संग्रहीत किया जाएगा। साथ ही विज्ञापन होर्डिंग भी पुन:उपयोग होने वाले मटेरियल से तैयार किए जाएंगे। मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) के साथ मिलकर स्वच्छता के लिए काम करने वाले सृष्टि फाउंडेशन के श्रीगोपाल जगताप ने बताया कि फोर-व्हील्स सेग्रीगेशन के तहत गीला, सूखा, सेनेटरी वेस्ट और हेजार्ड वेस्ट पृथक किया जाएगा। जैविक कचरे से खाद बनेगी और इस प्रक्रिया का पहला चरण स्टेडियम परिसर में ही पूरा किया जाता है। इसके बाद इसे प्लांट भेजा जाता है। 11 अक्टूबर की शाम होलकर स्टेडियम एक बार फिर भारत और वेस्टइंडीज की भिड़ंत का गवाह बनने जा रहा है। इस बार मुकाबला T20 इंटरनेशनल का है। मैच रात 7 बजे शुरू होगा और करीब 27,500 दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है। मैच से पहले दैनिक भास्कर ने स्टेडियम की तैयारियों का जायजा लिया। ग्राउंड से लेकर दर्शक दीर्घा तक तैयारियां अंतिम दौर में हैं। बाहर दर्शकों की एंट्री को व्यवस्थित करने के लिए रेलिंग लगाई जा रही है, जबकि अंदर कुर्सियों की धुलाई और सफाई का काम जारी है। सबसे बड़ी राहत मौसम को लेकर है। मौसम वैज्ञानिक आनंद हर्षाना के मुताबिक 8 से 12 अक्टूबर तक बारिश की संभावना नहीं है। तापमान सामान्य से कुछ अधिक चल रहा है, लेकिन न्यूनतम तापमान कम है। मौसम के ड्राई रहने की संभावना है। यानी क्रिकेट प्रेमियों को बारिश के कारण मैच रुकने की चिंता फिलहाल नहीं है। MPCA के सीएओ रोहित पंडित ने बताया कि मैच की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और लगभग सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। अचानक बारिश की स्थिति के लिए भी बैकअप प्लान तैयार है। जरूरत पड़ने पर पूरे ग्राउंड को कवर करने की व्यवस्था रहेगी। बारिश का खतरा नहीं, अब नजर ओस पर मैच रात में खेला जाना है, इसलिए बारिश के बाद अब मौसम को लेकर दूसरा सवाल ओस का है। मैच के दौरान तापमान, हवा और नमी की स्थिति गेंदबाजों के लिए अहम रहेगी। मौसम वैज्ञानिक आनंद हर्षाना के मुताबिक फिलहाल बारिश के कोई संकेत नहीं हैं। मानसून का दौर समाप्त हो चुका है और आने वाले दिनों में मौसम के ड्राई रहने की संभावना है। स्टेडियम के बाहर लग रही रेलिंग मैच से पहले होलकर स्टेडियम में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बाहर दर्शकों की एंट्री को व्यवस्थित करने के लिए रेलिंग लगाने का काम चल रहा है। मैच के दिन बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचेंगे, ऐसे में प्रवेश द्वारों के आसपास भीड़ को नियंत्रित करना अहम होगा। रेलिंग के जरिए दर्शकों की कतार और आने-जाने के रास्ते को व्यवस्थित किया जाएगा। स्टेडियम के अंदर कुर्सियों की सफाई और धुलाई भी की जा रही है। दर्शकों के लिए जरूरी होगा कि वे टिकट पर दर्ज प्रवेश गेट की जानकारी पहले से देख लें और पर्याप्त समय लेकर स्टेडियम पहुंचें। 27,500 दर्शकों की भीड़ संभालना बड़ी चुनौती भारत का मुकाबला हो और वह भी इंदौर में, तो स्टेडियम के बाहर भी क्रिकेट का माहौल बनना तय है। करीब 27,500 दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद के चलते सुरक्षा और प्रवेश व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सुरक्षा जांच में समय लग सकता है, इसलिए आखिरी समय में पहुंचने वाले दर्शकों को परेशानी हो सकती है। दर्शकों को टिकट, निर्धारित गेट और स्टेडियम की एंट्री गाइडलाइन पहले से देखनी चाहिए और मैच शुरू होने से काफी पहले पहुंचना बेहतर रहेगा। सुरक्षा में पुलिस के साथ टेक्नोलॉजी से निगरानी, 160 CCTV कैमरे लगे मुकाबले के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है। MPCA और स्थानीय पुलिस के साथ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्टेडियम के अंदर करीब 160 CCTV कैमरे लगे हैं। आसपास के क्षेत्रों में भी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा फेस रिकग्नाइजेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। दर्शकों की एंट्री से लेकर स्टेडियम के अंदर आवाजाही तक पर नजर रखी जाएगी। सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस आपसी समन्वय से काम करेंगी। छोटी बाउंड्री यानी चौके-छक्कों का मैदान होलकर स्टेडियम की सबसे बड़ी खासियत इसकी छोटी बाउंड्री है। यहां चौकोर बाउंड्री करीब 56 मीटर और सीधी बाउंड्री करीब 68 मीटर बताई जाती है। बल्लेबाज अगर गेंद को सही टाइमिंग से कनेक्ट करता है तो बाउंड्री तक पहुंचाने के लिए बहुत ज्यादा ताकत की जरूरत नहीं होती। T20 क्रिकेट में छोटी बाउंड्री का महत्व और बढ़ जाता है। यही वजह है कि होलकर में दर्शकों को तेज रन, बड़े शॉट और लगातार बाउंड्री देखने की उम्मीद रहती है। इस मुकाबले के लिए पिच भी T20 के हिसाब से तैयार की जा रही है। ऐसे में टॉस के बाद कप्तानों का फैसला महत्वपूर्ण होगा। ODI में 7 जीत के बाद पहली बार हार भी देख चुका है मैदान होलकर स्टेडियम लंबे समय तक वनडे में भारत के लिए अजेय मैदान रहा। भारत ने यहां लगातार सात ODI जीते, लेकिन जनवरी 2026 में न्यूजीलैंड ने भारत को 41 रन से हराकर यह सिलसिला तोड़ा। अब यहां भारत का ODI रिकॉर्ड 8 मैचों में 7 जीत और 1 हार है। इस मैदान पर भारत का सबसे बड़ा ODI स्कोर 418/5 है, जो 8 दिसंबर 2011 को वेस्टइंडीज के खिलाफ बना था। इसी मुकाबले में वीरेंद्र सहवाग ने 219 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी। पोस्टर से बनाएंगे थैलियां  मैच के दौरान स्टेडियम में विज्ञापन पोस्टर प्लास्टिक या फ्लैक्स के बजाए पुन: उपयोग होने वाले मटेरियल से तैयार किए जाते हैं। मैच के बाद यह पोस्टर महिला स्व सहायता समूह को दिए जाते हैं, जिससे वे थैलियां और मोबाइल बैग बनाती हैं। प्रशंसकों को करेंगे जागरूक स्टेडियम परिसर में ही कचरे को रिसाइकल करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया जाएगा। साथ ही घर के कचरे के सही तरीके से निस्तारण के लिए प्रेरित भी किया जाएगा। अन्य शहरों को भी दी सीख श्रीगोपाल जगताप बताते हैं कि भारत में हुए महिला विश्व कप के दौरान इंदौर से सीखकर … Read more

मध्यप्रदेश में पटवारियों की हड़ताल पर सख्ती, काम पर नहीं लौटे तो खत्म होगी सेवा

भोपाल  स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के विरोध में सामूहिक अवकाश पर गए पटवारियों को प्रशासन ने अब 24 घंटे में काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है। खासकर परिवीक्षाधीन पटवारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समय-सीमा में अपने पदस्थापना स्थल पर पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करें। ऐसा नहीं करने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत उनकी सेवाएं बिना किसी अतिरिक्त सूचना के समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। मध्यप्रदेश में 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री की तैयारी के बीच स्वामित्व योजना में पटवारियों की भूमिका को लेकर विवाद बढ़ गया है। पटवारियों के निष्पादक (एग्जीक्यूटर) की भूमिका में साइन नहीं करने के फैसले के बाद प्रदेश में 102 पटवारियों पर बर्खास्त। सबसे बड़ी कार्रवाई रीवा में हुई, जहां गुरुवार को 15 पटवारियों को एक साथ निलंबित किया गया। इसके बाद ग्वालियर में 19, जबलपुर में 17 और सागर में 13 पटवारियों को निलंबित किया गया। कार्रवाई के विरोध में प्रभावित जिलों में पटवारियों ने राजस्व काम का शटडाउन रखा है। देवास में पटवारी बुधवार देर रात तक कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते रहे। इधर, नर्मदापुरम में 133, सागर में 137, छिंदवाड़ा में 32, गुना में 52 और भोपाल में 3 पटवारियों को नोटिस दिए गए हैं। रतलाम में 12 पटवारियों को शासकीय कार्यों में लापरवाही पर आरोप-पत्र दिए गए हैं। सीएम तक पहुंचा मामला, PRC की बैठक बेनतीजा पटवारियों का विरोध और जिलों में कार्रवाई का मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। विरोध के बीच गुरुवार को प्रमुख राजस्व आयुक्त (PRC) कार्यालय में पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई, लेकिन इसमें कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। संबंधित पटवारियों का वेतन काटने के आदेश प्रशासन ने सामूहिक अवकाश को अनधिकृत अनुपस्थिति मानते हुए संबंधित पटवारियों का वेतन काटने के आदेश भी दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि अवकाश के लिए प्रत्येक कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से विधिवत आवेदन प्रस्तुत करना जरूरी है। संघ के माध्यम से सामूहिक अवकाश की सूचना देकर लगातार शासकीय कार्य से अनुपस्थित रहना सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है। अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि का नहीं मिलेगा वेतन, 'ब्रेक इन सर्विस' की चेतावनी सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों का हवाला देते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति सामूहिक अवकाश या हड़ताल में शामिल होने की अवधि का वेतन देय नहीं होगा। इस अवधि को अवकाश भी स्वीकृत नहीं किया जाएगा। संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि का वेतन काटने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पटवारी आगे भी अनधिकृत रूप से शासकीय कार्य से अनुपस्थित रहते हैं तो संबंधित अवधि को 'सेवा में व्यवधान' (ब्रेक इन सर्विस) मानने संबंधी प्रस्ताव विभागाध्यक्ष को भेजे जाएंगे। पहले तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों पर हो चुकी कार्रवाई बता दें कि प्रशासन की सख्ती के बीच तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं पहले ही समाप्त की जा चुकी हैं। इसके विरोध में जिलेभर के पटवारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन में 1000 से अधिक पटवारी शामिल हुए थे। डिप्टी सीएम के साथ होने वाली बैठक भी टली पटवारी प्रतिनिधिमंडल की डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के साथ वल्लभ भवन में होने वाली बैठक भी टल गई। डिप्टी सीएम की व्यस्तता के चलते बैठक नहीं हो सकी। ऐसे में पटवारियों की मांग और उन पर हुई कार्रवाई को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है। पटवारी संघ का कहना है कि जब तक उन्हें निष्पादक की भूमिका से हटाया नहीं जाता, उनकी मुख्य आपत्ति बनी रहेगी। संघ कार्रवाई वापस लेने की मांग भी कर रहा है। 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री का मामला मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण इलाकों की करीब 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया पर सरकार के 3,800 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है। स्वामित्व योजना में ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक देने के लिए अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं। अब इसी आबादी भूमि पर काबिज लोगों को रजिस्ट्री के जरिए मुफ्त में मालिकाना हक देने की प्रक्रिया की जा रही है। पटवारी संघ ने कहा- कोर्ट में घसीटे जांएगे पटवारी संघ ने योजना में रजिस्ट्री के निष्पादक के रूप में काम करने से इनकार किया है। संघ का कहना है कि लीज डीड में पटवारी का नाम शामिल होने से भविष्य में जमीन को लेकर विवाद होने पर उन्हें भी कानूनी मामले में पक्षकार बनाया जा सकता है।  

मुरैना में महापौर BJP की, विधायक कांग्रेस के, फिर भी विकास को तरस रहा शहर; बारिश में सड़कें बनीं तालाब

मुरैना में महापौर बीजेपी की, विधायक कांग्रेस के, फिर भी विकास की राह देख रहा शहर बारिश में तालाब बनीं सड़कें, गड्ढों में तब्दील रास्ते और सफाई व्यवस्था पर सवाल; राजनीतिक खींचतान के बीच जनता की समस्याएं बरकरार मुरैना  शहरवासियों ने नगर निगम चुनाव में महापौर और सभापति दोनों पदों पर कांग्रेस को चुनकर शहर की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई थी। लोगों को लगा था कि सड़कों की हालत सुधरेगी, नाले-नालियों की नियमित सफाई होगी और घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचेगा। इसके बाद विधानसभा चुनाव में भी मुरैना की जनता ने कांग्रेस के दिनेश गुर्जर को विधायक चुना। लेकिन समय के साथ राजनीतिक समीकरण बदल गए, महापौर शारदा सोलंकी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गईं और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद शहर की बुनियादी समस्याओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालात यह हैं कि बारिश के दौरान कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई, जबकि शहर की अनेक सड़कों की बदहाली लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। महापौर-विधायक अलग-अलग दलों में, जवाबदेही पर सवाल मुरैना में वर्तमान राजनीतिक समीकरण के तहत महापौर शारदा सोलंकी भाजपा में हैं, जबकि विधायक दिनेश गुर्जर कांग्रेस से हैं। ऐसे में शहर के विकास को लेकर दोनों जनप्रतिनिधियों की भूमिका और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। विपक्ष में बैठी कांग्रेस शहर की समस्याओं को लेकर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करती रही है, लेकिन राजनीतिक विरोध का केंद्र महापौर के बजाय नगर निगम आयुक्त रहने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं हैं कि क्या शहर के विकास से जुड़े मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों का रुख पर्याप्त रूप से स्पष्ट है? हालांकि, इस संबंध में संबंधित नेताओं का पक्ष सामने आना भी जरूरी है। बारिश में तालाब बने कई इलाके बारिश के मौसम में बस स्टैंड से लेकर न्यू हाउसिंग बोर्ड, केशव कॉलोनी, सदर बाजार और विक्रम नगर सहित कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई। बारिश के पानी की निकासी को लेकर नाले-नालियों की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। जलभराव से आम लोगों, दुकानदारों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शहरवासियों की अपेक्षा है कि नगर निगम जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए स्थायी कार्ययोजना बनाए, ताकि हर बारिश में उन्हें इसी समस्या से न जूझना पड़े। गणेशपुरा से सदर बाजार तक सड़कों की हालत खराब शहर की सड़कों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। गणेशपुरा, सदर बाजार, गोपीनाथ की पुलिया और केशव कॉलोनी सहित विभिन्न इलाकों में सड़कों पर गड्ढे होने और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ सड़कों के गारंटी अवधि के दौरान ही खराब होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। यदि इन शिकायतों की पुष्टि होती है, तो संबंधित निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कर ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। सड़क निर्माण और मरम्मत पर सरकारी राशि खर्च होने के बाद भी यदि लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा नहीं मिलती, तो यह नगर निगम की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ठेकेदारों की भूमिका और निर्माण कार्यों की जांच की मांग शहर में सड़क निर्माण की गुणवत्ता और ठेकेदारों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव रखने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है। नगर निगम को चाहिए कि सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान, निर्धारित समयसीमा और गारंटी अवधि की समीक्षा कर स्थिति सार्वजनिक करे। जनता को चाहिए समाधान, आरोप-प्रत्यारोप नहीं मुरैना की जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि महापौर और विधायक के अलग-अलग राजनीतिक दलों में होने के बावजूद शहर की बुनियादी समस्याओं का समाधान कब होगा? शहरवासियों को राजनीतिक बयानबाजी से अधिक साफ-सफाई, बेहतर जल निकासी, स्वच्छ पेयजल और गड्ढामुक्त सड़कों की जरूरत है। अब नगर निगम प्रशासन, महापौर और क्षेत्रीय विधायक की जिम्मेदारी है कि वे आपसी राजनीतिक समीकरणों से ऊपर उठकर शहर की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाएं। जनता ने जनप्रतिनिधियों को शहर के विकास की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में उनके कामकाज का आकलन राजनीतिक दलों के आधार पर नहीं, बल्कि शहर में हुए विकास और लोगों को मिली सुविधाओं के आधार पर होना चाहिए।

न्यू मार्केट में आग बुझाने में देरी, 400 रेहड़ियों के अतिक्रमण से दमकल का रास्ता रुका

भोपाल  बालाजी छोले-भटूरे की दुकान से शुरू हुई आग ऊपर तक पहुंची और देखते ही देखते पास की 5-6 चार मंजिला दुकानों को चपेट में ले लिया। मोबाइल, कुर्ता-पजामा, बर्तन और रेडीमेड गारमेंट्स की दुकानों में रखा दीवाली का स्टॉक जल गया।इनके आसपास लगी 10-12 रेहड़ियां भी पूरी तरह खाक हो गईं। दुकानदारों के मुताबिक नुकसान 4 से 5 करोड़ रुपए तक है। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल आग की वजह से ज्यादा न्यू मार्केट की तैयारी और पहुंच को लेकर है। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक छोले-भटूरे बनाते समय भट्ठी से आग भड़की और ऊपर लगे बैनर तक पहुंची। दुकान में 2-3 गैस सिलेंडर रखे थे। सिलेंडर फटे या नहीं, इसकी पुष्टि फायर विभाग अभी नहीं कर रहा है। दूसरी तरफ आग बुझाने पहुंची दमकलों को संकरी सड़क, रेहड़ियों और अतिक्रमण के बीच रास्ता बनाकर घटना स्थल तक पहुंचना पड़ा। दुकानदार के मुताबिक इसमें 25 से 30 मिनट लग गए। जहां से आग शुरू हुई, वहीं सबसे बड़ा सवाल सिलेंडर को लेकर बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में बाहर की तरफ ही भट्ठी लगी है। प्रत्यक्षदर्शी नीलेश पाटिल के मुताबिक दोपहर में भटूरे बनाते समय अचानक आग भड़की। दुकान में उस समय करीब 50-60 लोग मौजूद थे। आग लगते ही सभी बाहर भागे। नीलेश के मुताबिक दुकान में 2-3 गैस सिलेंडर भी रखे थे और धमाके हुए। हालांकि, नगर निगम के फायर ऑफिसर सौरभ पटेल ने सिलेंडर रखे होने की बात तो कही है, लेकिन इनके ब्लास्ट होने की पुष्टि नहीं की है। उनका कहना है कि दुकान पूरी तरह तहस-नहस हो गई है और यह भी जांचा जा रहा है कि सिलेंडर ब्लास्ट हुए थे या नहीं। मंदिर तक पहुंच सकती थी आग, दीवार ने बचाया आग की चपेट में दुकान से सटा खेड़ापति हनुमान मंदिर भी आ सकता था। हालांकि मंदिर की दीवार के कारण आग वहां तक नहीं पहुंच सकी और मंदिर सुरक्षित रहा। अतिक्रमण ने बढ़ाई दमकल की परेशानी इस घटना के बाद न्यू मार्केट में अतिक्रमण का मुद्दा भी सामने आया। बाजार में दुकान के बाहर और आसपास काफी अतिक्रमण होने के कारण दमकल वाहनों को अंदर पहुंचने में परेशानी हुई आग तेजी से फैल रही थी, जबकि फायर ब्रिगेड को मौके तक पहुंचने के लिए सीमित जगह में काम करना पड़ा। इससे आग पर काबू पाने में चुनौती बढ़ गई। विधायक सबनानी ने कहा कि घटना से सबक लेते हुए न्यू मार्केट को जल्द अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी आपात स्थिति में दमकल और राहत वाहनों को आसानी से रास्ता मिलना जरूरी है। 25 फीट की लपटों ने ऐसे पकड़ीं एक के बाद एक दुकानें छोले-भटूरे की दुकान से उठी आग ऊपर की मंजिलों तक पहुंची। दुकान के अंदर फर्नीचर और पर्दे थे, जबकि ऊपरी हिस्से में फ्लैक्स और पोस्टर लगे थे। यही आग फैलने का जरिया बने। इसके बाद पास की मोबाइल, कुर्ता-पजामा, बर्तन और रेडीमेड गारमेंट्स की दुकानों तक आग पहुंच गई। दुकानदार संजय कुमार जैन के मुताबिक इन दुकानों में दीवाली का स्टॉक भरा था, जो पूरी तरह जल गया। सजावटी सामान, मोबाइल एक्सेसरीज और खाने-पीने की रेहड़ियां भी आसपास थीं। इनमें से 10-12 रेहड़ियां पूरी तरह जल गईं। दुकानदारों के अनुसार कुल नुकसान 4 से 5 करोड़ रुपए तक है। इसकी अंतिम पुष्टि नुकसान के आकलन के बाद होगी। दमकल को आधा घंटा क्यों लगा, जबकि फायर स्टेशन करीब 1 किमी दूर? न्यू मार्केट के अंदर आने-जाने के करीब 10 रास्ते हैं। टीटी नगर थाने की ओर से दो और क्वॉलिटी रेस्टॉरेंट की ओर से एक प्रमुख रास्ते से वाहन आते-जाते हैं। आग वाली दुकानें टीटी नगर थाने के सामने वाले रास्ते की तरफ हैं। दुकानदार संजय कुमार के मुताबिक फायर कंट्रोल रूम पर सूचना देने के बाद कर्मचारियों को घटना स्थल की लोकेशन समझाने में भी समय लगा। इसके बाद जब दमकलें अंदर पहुंचीं तो रास्ते में लगी रेहड़ियां और संकरी सड़क बड़ी बाधा बनीं। दुकानदार के मुताबिक दमकल को मौके तक पहुंचने में 25 से 30 मिनट लग गए। माता मंदिर फायर स्टेशन यहां से करीब एक किलोमीटर दूर है। सामने आया अहम सवाल – अगर फायर स्टेशन करीब एक किलोमीटर दूर है और न्यू मार्केट में कई प्रवेश मार्ग हैं तो दमकल को घटना स्थल तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगा? क्या अतिक्रमण और रेहड़ियां सिर्फ रास्ते में थीं या पार्किंग और संकरी सड़क भी उतनी ही बड़ी बाधा बनी? न्यू मार्केट में 900 दुकानें, करीब 400 रेहड़ियां न्यू मार्केट में करीब 900 रजिस्टर्ड दुकानें हैं। इसके अलावा करीब 400 रेहड़ियां लगती हैं। खेड़ापति हनुमान मंदिर के सामने शाम के समय इतना अतिक्रमण रहता है कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। आग वाली जगह के पास और सामने भी रेहड़ियां लगी थीं। आग में 10-12 रेहड़ियां पूरी तरह जल गईं। हादसे के दौरान इन्हीं रास्तों से दमकलों को अंदर लाने के लिए पुलिस और अन्य टीमों को लगातार रास्ता खाली कराना पड़ा। न्यू मार्केट व्यापार संरक्षण समिति के उपाध्यक्ष अजय देवनानी का कहना है कि हॉकर्स के अतिक्रमण के कारण दमकलों को अतिरिक्त समय लगा। उनके मुताबिक मल्टी लेवल पार्किंग पर एक स्टैंडिंग फायर ब्रिगेड रहती है, लेकिन न्यू मार्केट में दोपहिया फायर फाइटर की अतिरिक्त व्यवस्था भी होनी चाहिए। फायर सेफ्टी की तैयारी कितनी? न्यू मार्केट में कपड़े, सजावटी सामान, ज्वेलरी समेत कई तरह की दुकानें हैं। आग वाली लाइन में 10-12 छोले-भटूरे की दुकानें और रेस्टॉरेंट हैं। इनमें कई जगह भट्ठियां बाहर की तरफ लगी हैं। फायर ऑफिसर सौरभ पटेल के मुताबिक दुकानदारों को फायर सेफ्टी नियमों के पालन के लिए कहा जाता है और विभाग की टीमें निरीक्षण भी करती हैं, लेकिन हादसे ने अब यह सवाल खड़ा किया है कि सिर्फ निरीक्षण और नोटिस से आगे बाजार में वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था कितनी है। जिस दुकान से आग शुरू हुई, उस पर पहले भी अतिक्रमण की कार्रवाई हादसे के बाद अतिक्रमण का मुद्दा अचानक सामने नहीं आया है। जिस बालाजी छोले-भटूरे की दुकान से आग शुरू हुई, उसके संचालक के खिलाफ करीब आठ महीने पहले अतिक्रमण अधिकारी शैलेंद्र सिंह भदौरिया ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। अतिक्रमण हटाने के दौरान दुकानदार से विवाद होने की बात भी सामने आई है। भवन अनुज्ञा शाखा की … Read more

मध्यप्रदेश के 27 जिला चिकित्सालयों में सृजित होंगे नए पद, तय समय-सीमा में पूरी होगी प्रक्रिया

27 जिला चिकित्सालयों में आवश्यकतानुसार नवीन पदों के सृजन की कार्यवाही समय-सीमा में करें पूर्ण: उप मुख्यमंत्री शुक्ल लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को लंबित प्रस्तावों का समय पर निराकरण सुनिश्चित करने और प्रशासनिक एवं तकनीकी विषयों में अंतर्विभागीय समन्वय के माध्यम से प्राथमिकता से कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने 27 जिला चिकित्सालयों में आवश्यकतानुसार नवीन पदों के सृजन से संबंधित कार्यवाही समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला चिकित्सालयों में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यकताओं के अनुरूप मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पदों के सृजन से संबंधित प्रस्ताव समय पर तैयार कर आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त की जाएं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल मेडिकल कॉलेजों में लगभग 3 हजार नवीन नर्सिंग पदों के सृजन से संबंधित प्रस्तावों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा, उपचार एवं विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के अनुरूप आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। इसके लिए पद सृजन से संबंधित प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाए। पांच मेडिकल कॉलेजों में कैंसर उपचार की सुविधाओं के विस्तार की समीक्षा उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेजों में पेट स्कैन, कैंसर की जांच एवं उपचार से संबंधित सुविधाओं के विकास की भी समीक्षा की। उन्होंने इन संस्थानों में ऑन्कोसर्जरी तथा मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभागों की स्वीकृति से संबंधित कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि कैंसर रोगियों को जांच एवं उपचार की समग्र सुविधाएं मेडिकल कॉलेज स्तर पर उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आधुनिक जांच एवं विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का विस्तार राज्य सरकार की प्राथमिकता है। पेट स्कैन, लिनैक सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास के साथ विशेषज्ञ विभागों की उपलब्धता सुनिश्चित करने से मरीजों को बेहतर उपचार सेवाएं प्राप्त होंगी और उन्हें उपचार के लिए अन्य स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम होगी। ग्वालियर में सीटीवीएस विभाग की स्थापना शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेज ग्वालियर में कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग की स्थापना से संबंधित कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने विभाग की स्थापना से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाओं को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि ग्वालियर एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी जटिल सर्जरी की विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हो सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों के प्रस्तावों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। प्रस्ताव समय पर तैयार कर आवश्यक स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किए जाएं। उन्होंने प्रशासनिक एवं तकनीकी विषयों के निराकरण में संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कार्यों में जहां भी अंतर्विभागीय समन्वय की आवश्यकता हो, वहां संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित किया जाए। पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता संबंधी कार्यवाही प्राथमिकता से पूर्ण करें उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश में पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता से संबंधित कार्यवाही की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मान्यता संबंधी प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मान्यता प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई एवं भविष्य प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित प्रकरणों का प्राथमिकता से परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही पूर्ण की जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सुखवीर सिंह, आयुक्त धनराजू एस सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सुलह की उम्मीद न हो तो तलाक के लिए 6 महीने इंतजार जरूरी नहीं

इंदौर  पति-पत्नी आपसी सहमति से तलाक लेना चाहते हैं तो हर मामले में 6 महीने की प्रतीक्षा अवधि पूरी करना अनिवार्य नहीं है। यदि दोनों लंबे समय से अलग रह रहे हैं, साथ रहने की कोई संभावना नहीं है और सुलह की कोशिशें भी विफल हो चुकी हैं, तो परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय प्रतीक्षा अवधि माफ कर सकता है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने यह टिप्पणी करते हुए फैमिली कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें तलाक की प्रक्रिया में 6 महीने की अवधि पूरी होने तक इंतजार करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह आदेश 6 अक्टूबर को जारी किया है। फैमिली कोर्ट ने अप्रैल 2027 की तारीख तय की थी 15 दिन के भीतर आवेदन पर निर्णय लें जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने अशुतोष की याचिका स्वीकार करते हुए इंदौर के फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया कि 6 महीने की प्रतीक्षा अवधि माफ करने के आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के हालिया निर्णयों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से फैसला किया जाए। कोर्ट ने कहा है कि प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 15 दिन के भीतर इस आवेदन पर निर्णय लिया जाए। पति-पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए संयुक्त आवेदन दिया था। दोनों अप्रैल-मई 2025 से अलग रह रहे हैं। इसके बावजूद फैमिली कोर्ट ने छह महीने की प्रतीक्षा अवधि का हवाला देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 4 अप्रैल 2027 तय कर दी थी। पति ने मांगी थी प्रतीक्षा अवधि में छूट पति की ओर से छह महीने की अवधि माफ करने के लिए आवेदन दिया गया था। फैमिली कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद पति ने हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए कहा कि धारा 13-बी(2) में निर्धारित छह महीने की अवधि का उद्देश्य पति-पत्नी को जल्दबाजी में तलाक लेने से रोकना और विवाह बचाने की संभावना तलाशने का अवसर देना है। सुलह की संभावना नहीं तो विवाह को लंबा खींचना उचित नहीं कोर्ट ने कहा कि जब पति-पत्नी लंबे समय से अलग रह रहे हों, उनके बीच सुलह की कोई संभावना न बची हो और समझौते की कोशिशें भी विफल हो चुकी हों, तब केवल प्रतीक्षा अवधि पूरी कराने के लिए वैवाहिक विवाद को लंबा खींचना कानून के उद्देश्य के अनुरूप नहीं होगा। ऐसी परिस्थितियों में कोर्ट मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए छह महीने की अवधि माफ करने पर विचार कर सकता है। अब फैमिली कोर्ट को नए सिरे से करना होगा फैसला हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए मामले को वापस भेज दिया है। अब फैमिली कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के हालिया फैसलों के आधार पर पति के छह महीने की प्रतीक्षा अवधि माफ करने के आवेदन पर नए सिरे से निर्णय लेना होगा।