samacharsecretary.com

एमपी में जहर मुक्त खेती का ऐतिहासिक महायज्ञ, देशभर से किसान लेंगे हिस्सा

नीमच  भारतीय कृषि के इतिहास में ये संभवतः पहला अवसर है, जब देश का कोई जनप्रतिनिधि किसानों को 'आत्मनिर्भर' और खेती को 'जहर मुक्त' बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर इतना बड़ा बीड़ा उठा रहा है। रासायनिक खाद के बोझ और कर्ज के चक्रव्यूह में फंसे अन्नदाता को उबारने के लिए मध्य प्रदेश के नीमच जिले की जावद तहसील, देशव्यापी बदलाव का केंद्र बिंदु बनने जा रही है। पूर्व मंत्री और क्षेत्रीय विधायक ओमप्रकाश सखलेचा की अनूठी पहल पर 28 से 31 मार्च 2026 तक जावद में 04 दिवसीय 'राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती शिविर' का आयोजन होने जा रहा है। इस महासंगम में 'कृषि ऋषि' कहे जाने वाले पद्मश्री डॉ. सुभाष पालेकर स्वयं मौजूद रहेंगे। वे कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के कोने-कोने से आने वाले किसानों को ये समझाएंगे कि, कैसे बाजार के फंदे से निकलकर स्वाभिमान की खेती की जा सकती है। शिविर का मूल मंत्र ये है कि, एक किसान को अपनी खेती के लिए बाजार से एक रुपए की भी खाद या कीटनाशक खरीदने की जरूरत नहीं है। डॉ. पालेकर बताएंगे कि, सिर्फ एक देसी गोमाता के सहारे 10 से 15 एकड़ जमीन पर शून्य लागत (जीरो बजट) में भरपूर और विषमुक्त फसल कैसे की जा सकती है। संसाधन आड़े न आएं, इसलिए विधायक ने की ठहरने-खाने की चिंता अक्सर आर्थिक तंगी और संसाधनों का अभाव किसानों को ऐसे ज्ञानवर्धक आयोजनों से दूर कर देता है। इस पीड़ा को समझते हुए विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने एक मिसाल पेश की है। देश में अपनी तरह के इस पहले आयोजन में भाग लेने वाले प्रत्येक किसान के लिए आवास, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था पूरी तरह निःशुल्क रखी गई है। विधायक का आह्वान: 'मिट्टी और पीढ़ियों को बचाने का ये अंतिम अवसर' इस ऐतिहासिक आयोजन के सूत्रधार विधायक ओमप्रकाश सखलेचा का कहना है कि 'जावद अब देशभर के किसानों के लिए प्राकृतिक खेती का तीर्थ बनने जा रहा है। ये शिविर उन किसानों के लिए है, जो कर्ज और रसायनों के चक्रव्यूह से बाहर निकलना चाहते हैं। जो अपनी मिट्टी, अपने पानी और अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं। जावद में होने जा रहा ये आयोजन किसान के आत्मसम्मान, स्वास्थ्य और समृद्धि की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम है।' आयोजकों ने बताया कि, ये मॉडल किसानों की लागत घटाकर और आय बढ़ाकर खेती में नई उम्मीद जगाएगा।

मध्य प्रदेश में बोर्ड परीक्षा की शुरुआत, 16 लाख छात्र परीक्षा देंगे, 3800 सेंटरों पर ‘तीसरी आंख’ रहेगा अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं का दौरआज से  शुरू होने जा रहा है। 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में इस बार 16 लाख से ज्यादा छात्र शामिल होंगे। राज्यभर में बनाए गए 3856 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा होगी, जहां नकल रोकने के लिए तकनीक और प्रशासन दोनों का कड़ा पहरा रहेगा।इस बार बोर्ड परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और अनुशासित बनाने पर जोर दिया गया है। सभी परीक्षाएं सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक एक ही शिफ्ट में आयोजित होंगी। परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरों से निगरानी, फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा तक हर स्तर पर सख्ती की गई है।  10 फरवरी से 12वीं, 13 फरवरी से 10वीं की परीक्षा माध्यमिक शिक्षा मंडल के अनुसार 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं आज 10 फरवरी से शुरू हो रही , जबकि 10वीं की परीक्षाएं 13 फरवरी 2026 से प्रारंभ होंगी। इस बार करीब 9.07 लाख छात्र 10वीं और लगभग 7 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा देंगे। हर जिले में उड़नदस्ते, संवेदनशील केंद्रों पर तीसरी आंख प्रदेश के हर जिले में चार-चार फ्लाइंग स्क्वॉड बनाए गए हैं, जो परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण करेंगे। संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। यहां CCTV कैमरों के जरिए भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से सीधी मॉनिटरिंग होगी। इसके अलावा थानों से प्रश्नपत्र निकालने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है। प्रदेश भर में 16 लाख से ज्यादा छात्र देंगे बोर्ड परीक्षा इस बार प्रदेश में 10वीं और 12वीं की परीक्षा में करीब 16 लाख छात्र परीक्षा में शामिल होंगे। इनमें 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी कक्षा 10वीं की परीक्षा देंगे, जबकि करीब 7 लाख छात्र 12वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठेंगे। इतने बड़े स्तर पर होने वाली परीक्षाओं को शांतिपूर्ण, नकलमुक्त और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और शिक्षा विभाग ने महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं। 3856 परीक्षा केंद्र, हर जिले में सख्त निगरानी बोर्ड परीक्षाओं के लिए पूरे प्रदेश में 3856 परीक्षा केंद्र बनाए हैं। राजधानी भोपाल की बात करें तो यहां 10वीं के 30 हजार 746 और 12वीं के 26 हजार 627 छात्र परीक्षा देंगे। इन छात्रों के लिए भोपाल में कुल 104 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। हर जिले में चार-चार फ्लाइंग स्क्वॉड गठित किए गए हैं। इनमें से दो स्क्वॉड विकासखंड स्तर पर और दो जिला स्तर पर काम करेंगे। हर स्क्वॉड में तीन सदस्य होंगे और तीनों पुलिस या प्रशासनिक स्तर के अधिकारी होंगे, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई हो सके। संवेदनशील केंद्रों पर ‘तीसरी आंख’ का पहरा नकल और अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए इस बार तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन ने संवेदनशील परीक्षा केंद्रों की पहचान कर वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इन केंद्रों पर होने वाली गतिविधियों पर भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से सीधी निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा, थानों से प्रश्न-पत्र निकालने के दौरान भी वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है और सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती की गई है। इसका मकसद है कि परीक्षा प्रक्रिया की हर कड़ी पारदर्शी और सुरक्षित बनी रहे। स्कूलों को सख्त निर्देश… एक भी छात्र न छूटे माध्यमिक शिक्षा मंडल ने सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संशोधित टाइमटेबल की जानकारी हर हाल में छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचे। स्कूलों को कहा गया है कि नोटिस बोर्ड, मॉर्निंग असेंबली और अभिभावक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए यह सूचना तुरंत साझा करें। शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कोई भी छात्र पुरानी तारीखों के भरोसे परीक्षा से वंचित न रह जाए। परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश के सख्त नियम जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार ने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं को लेकर जिले में सख्त व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। परीक्षार्थियों को सुबह 8:30 बजे के बाद किसी भी हालत में परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षा केंद्रों के आसपास अनावश्यक भीड़ रोकने के लिए निर्धारित दूरी के बाद प्रवेश निषेध रहेगा। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। चयनित केंद्रों पर भोपाल से सीधी मॉनिटरिंग माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा प्रदेश के हर जिले में पांच-पांच परीक्षा केंद्रों को विशेष मॉनिटरिंग के लिए चुना गया है। इन केंद्रों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सीधे भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से की जाएगी। इसके अलावा, औचक निरीक्षण के लिए उड़नदस्ते भी लगातार सक्रिय रहेंगे, जिनमें शिक्षा विभाग के साथ प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। अब बात बच्चों की सेहत की परीक्षाओं की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे छात्रों पर पढ़ाई का दबाव बढ़ता जा रहा है। 10 फरवरी से 12वीं और 13 फरवरी से 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरू होनी हैं। ऐसे में छात्र घंटों एक ही जगह बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। कम समय में ज्यादा सिलेबस पूरा करने की दौड़ में बच्चे अपनी सेहत को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिसका असर अब उनके शरीर पर साफ दिखाई देने लगा है। राजधानी भोपाल में 104 परीक्षा केंद्र भोपाल में 10वीं के 30,746 और 12वीं के 26,627 छात्र परीक्षा देंगे। इसके लिए शहर में कुल 104 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। यहां भी हर केंद्र पर सख्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था लागू रहेगी।बोर्ड ने पहले ही संशोधित टाइम टेबल जारी कर दिया है। किसी भी तरह की गलतफहमी से बचने के लिए सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि यह टाइम टेबल हर छात्र और अभिभावक तक अनिवार्य रूप से पहुंचे। इसके लिए नोटिस बोर्ड, असेंबली और व्हाट्सएप ग्रुप जैसे माध्यमों का इस्तेमाल करने को कहा गया है। एग्जाम के दौरान सख्त नियम परीक्षार्थियों को सुबह 8:30 बजे तक परीक्षा केंद्र पहुंचना अनिवार्य होगा। इसके बाद प्रवेश नहीं मिलेगा। परीक्षा केंद्रों के आसपास भीड़ और अनावश्यक गतिविधियों पर रोक रहेगी। फिजियोथेरेपी सेंटरों में बढ़ी बच्चों की संख्या फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल बच्चों में फिजिकल एक्टिविटी लगभग खत्म हो गई है। लगातार 3 से 4 घंटे बिना ब्रेक पढ़ने से गर्दन और कंधों में दर्द, हाथों में झुन्नझुनी, सुन्नपन और कभी-कभी उल्टी जैसा मन होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। फिजियोथेरेपी सेंटर्स में 13 से 17 साल की उम्र के बच्चों की संख्या करीब 30 प्रतिशत … Read more

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में होगी समीक्षा

भोपाल. सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने मध्यप्रदेश सहकारिता विभाग में किये गये नवाचार एवं उपलब्धियों से संबंधित प्रजेंटेशन तैयार करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा चाही गयी बिन्दुवार जानकारी तैयार की जाये। जानकारी पूर्णत: अद्यतन हो, इस बात का विशेष ध्यान रखा जाये। मंत्री  सारंग सोमवार को मंत्रालय में सहकारिता विभाग की समीक्षा कर रहे थे। बैठक केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह की अध्यक्षता में 17 फरवरी को नई दिल्ली में होने वाले प्रस्तावित सम्मेलन के परिप्रेक्ष्य में आयोजित की गयी थी। मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रजेंटेशन में सहकारिता विभाग की विशेषताएँ एवं उपलब्धियों सहित सीपीपीपी मॉडल, चीता बीज और नवाचारों का भी समावेश किया जाये। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष में किये गये सर्वोत्तम कार्यों की जानकारी भी दी जाये। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र में सर्कुलेरिटी एवं सस्टेनेबिलिटी का भी समावेश किया जाये। सहकारिता में सहकार अभियान के तहत दुग्ध, मत्स्य सहित अन्य सहकारी संस्थाओं तथा उनके सदस्यों के खातों की संख्या दर्शाई जाये। प्रचार-प्रसार की दृष्टि से किये गये प्रयासों को भी बतायें। प्रजेंटेशन को अद्यतन जानकारी के साथ आकर्षक बनाया जाये और कम्पाइल प्रजेंटेशन तैयार कर शीघ्र प्रस्तुत करें। मंत्री  सारंग ने कहा कि पेक्स का बहुउद्देश्यीकरण, राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की योजनाएँ एवं सहकारिता क्षेत्र को लाभ, वित्तीय सहायता आदि का समावेश किया जाये। बैठक में प्रमुख सचिव  डी.पी. आहूजा, प्रबंध संचालक बीज संघ  महेन्द्र दीक्षित, प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक  मनोज गुप्ता, प्रबंध संचालक सहकारी संघ  ऋतुराज रंजन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

टोल-फ्री नम्बर 1962 बना लाइफ लाइन, घोड़े के बच्‍चे को मिला नया जीवन

भोपाल. पशुओं को सही समय पर घर पर ही बेहतर इलाज की सुविधा मिले, इसके लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा 1962 टोल फ्री नंबर का संचालन किया जा रहा है। चलित पशु एंबुलेंस चलाई जा रही है। खण्डवा जिले के खानशाहवली निवासी सैयद वसीम रजा के घोड़े के बच्‍चे कबीर के लिए प्रदेश सरकार का टोल फ्री नंबर लाइफ लाइन बना। समय पर उपचार मिलने की वजह से उसे नया जीवन मिला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पशु चिकित्सा हेल्पलाइन 1962 सुविधा के लिए वसीम और उनके परिवारजन ने आभार प्रकट किया है। खण्डवा के खानशाहवली क्षेत्र के निवासी सैयद वसीम रजा लगभग 5 माह पूर्व घोड़े का एक बच्चा लाए और उसका नाम “कबीर” रखा। घर में बच्चे की तरह कबीर का लालन पालन हो रहा था, और घर के सभी सदस्य उसे बच्चे जैसा दुलार करते। कुछ दिन पूर्व कबीर को जुएं पड़ गई। रविवार शाम को वसीम ने मेडिकल स्टोर से जूं नाशक दवा लाकर कबीर के शरीर पर दवा लगा दी। वसीम ने दवा तो लगा दी, लेकिन वह कबीर के मुंह को कवर करना भूल गया। कबीर ने अपने शरीर पर लगी जुंआ नाशक विषैली दवा चाटना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में विषैली दवा ने असर दिखाया और कबीर को बैचेनी होने लगी और वह लोटपोट होने लगा और उसके मुंह से झाग आने लगा। घर के सदस्यों ने यह सब देखा, तो घबरा गए। वसीम को इसकी खबर लगी तो वह तुरंत घर आया और टोल-फ्री नम्बर 1962 पर फोन लगाकर पशुओं के उपचार हेतु उपलब्ध शासन की एम्बुलेंस सुविधा के लिए कॉल किया। कुछ ही देर में पशु चिकित्सक डॉ. कौस्तुभ त्रिवेदी एम्बुलेंस सहित अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने अपना इलाज शुरू किया। डॉ. त्रिवेदी ने एम्बुलेंस पैरावेट स्टॉफ सुश्री विधि पटेल, एवं अटेण्डेंट श्री नीलेश विश्वकर्मा के सामूहिक प्रयासों से लगभग आधे घंटे के उपचार के बाद कबीर को आराम मिलना शुरू हो गया और धीरे धीरे वह बिल्कुल स्वस्थ हो गया। वसीम और उसका परिवार कबीर की जान बचाने के लिए पशु चिकित्सक डॉ. त्रिवेदी और उनके सहयोगी स्टॉफ की सराहना करते नहीं थकते हैं।  

परीक्षा से डरकर नहीं, डटकर आगे बढ़िए

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज के विद्यार्थी ही देश का भविष्य हैं। देश की बागडोर आगे चलकर इन्हें ही संभालनी है। इसलिए सभी विद्यार्थी अपने कौशल, ज्ञान और प्रदर्शन में निरंतर सुधार कर खुद को निखारें। परीक्षा की तैयारी पूरी मेहनत और लगन से करें, तनाव बिलकुल भी न लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परीक्षा हमारे जीवन का एक पड़ाव मात्र है, अंतिम लक्ष्य नहीं। मेहनत करना आपकी आदत में होना चाहिए, लेकिन तनाव को खुद पर हावी न होने दें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए परीक्षा के वक्त आत्मविश्वास, अनुशासन और संतुलित दिनचर्या ही सफलता की अंतिम कुंजी है। स्वयं पर सदैव विश्वास बनाए रखें, किसी बात से डरकर नहीं, डटकर आगे बढ़िए और अपने सभी सपनों को साकार कीजिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को शासकीय सुभाष उच्चतर माध्यमिक उत्कृष्ट विद्यालय में बोर्ड परीक्षाओं से पहले "परीक्षा पर संवाद – 2026" कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को बेहतर तैयारी के लिये मार्गदर्शन भी दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विद्यार्थियों से परीक्षा के समय खुद को तनाव से दूर रखते हुए निरंतर भरपूर मेहनत करने और जितना भी हो सके, अच्छे अंक लाने की अपील की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को समय प्रबंधन, नियमित अभ्यास और किसी भी हालात में खुद पर विश्वास बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि असफलता से घबराने की बजाए उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही एक सशक्त व्यक्तित्व की पहचान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ अपना भविष्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की समझाइश दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परीक्षा के समय सभी विद्यार्थी पर्याप्त नींद लें। पढ़ाई का एक शेड्यूल निर्धारित करें। किसी विषय के अध्ययन के बाद उस पर चिंतन-मनन की आदत डालें। केवल अक्षर ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को अपने मित्रों और शिक्षकों के साथ पाठ्यक्रम के विषयों पर चर्चा करनी चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्रा लक्ष्मी तिवारी के प्रश्न पर कहा कि माता-पिता और बच्चों के बीच परस्पर संवाद होते रहना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से पूछा कि परीक्षा से कौन-कौन डरते हैं या किसको डर नहीं लगता है? इस पर छात्र आदित्य ने कहा कि रेगुलर तैयारी करेंगे तो परीक्षा से बिल्कुल भी डर नहीं लगेगा। सिलेबस को डिवाइड कर रिवीजन करना चाहिए। छात्रा सरस्वती ने कहा कि हमें परीक्षा देते समय खुद पर विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि प्रधानमंत्री  मोदी ने कहा है कि परीक्षा एक उत्सव की तरह है। छात्रा तान्या दुबे ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि वे हमेशा आत्मविश्वास के साथ परीक्षा हॉल में प्रवेश करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्रों से पूछा कि परीक्षा के समय में पेपर में आए प्रश्नों का उत्तर देने में चयन कैसे करते हैं? इस पर छात्र हिमांशु ने कहा कि वह सबसे पहले अच्छी तरह से आने वाले प्रश्नों को हल करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अपने बीच पाकर विद्यार्थियों में भारी उमंग और उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सीधे संवाद का अवसर पाकर विद्यार्थियों ने बेहिचक सवाल किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी एक गुरू, एक शिक्षक, एक अभिभावक और एक मनोविज्ञान विशेषज्ञ की भांति पहले विद्यार्थियों के मन का भाव जाना, उनसे खुलकर बात की, फिर पूछे गए सभी सवालों के जवाब दिए। विद्यार्थियों ने अपनी परीक्षा की तैयारियों और इस दौरान आई कठिनाईयां भी शेयर की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ इस आत्मीय संवाद से सभी विद्यार्थियों को परीक्षा से पहले मानसिक संबल और हर परिस्थिति में पॉजीटिव रहने की नई ऊर्जा मिली। स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने कहा कि परीक्षा हर वर्ष एक चुनौती की तरह होती है। विद्यार्थियों को समुचित समय नियोजन करते हुए अपनी तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए और तनाव को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सतत रूप से विद्यार्थियों के साथ परस्पर संवाद करते हैं एवं उनकी कठिनाईयों को समझकर निराकरण करने का हरसंभव प्रयास करते हैं। वे लीडर विथ लेटेस्ट नॉलेज हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आरंभ में मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर विद्यार्थियों से संवाद की शुरूआत की। कार्यक्रम में सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण मती शिल्पा गुप्ता सहित सुभाष स्कूल के प्राचार्य, सभी शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

बाल व बंधुआ श्रम के खिलाफ सख्त रुख: श्रम मंत्री श्री पटेल

भोपाल. श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि चार नवीन श्रम संहिताओं में स्वास्थ्य, दुर्घटना बीमा और व्यावसायिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। बंधुआ मजदूरी और बाल श्रम जैसी कुप्रथाओं को जड़ से उन्मूलन के लिये ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस रोडमैप के पाँच प्रमुख स्तंभ होंगे कानूनी सहायता, पुनर्वास, कौशल विकास, जनजागरूकता और प्रशासनिक संवेदनशीलता। हमारा लक्ष्य मध्यप्रदेश को बंधुआ और बाल श्रम मुक्त बनाना है। यह बात श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल ने सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर भोपाल में आयोजित कार्यशाला में कही। श्रम मंत्री  पटेल ने कहा कि बंधुआ मजदूर की स्पष्ट परिभाषा तय करना आसान नहीं है, लेकिन यह अवश्य तय किया जा सकता है कि किन परिस्थितियों में कोई मजदूर बंधुआ बनता है। प्रवासी मजदूर होना, अशिक्षा, कानून की जानकारी का अभाव, नशे की लत, मानसिक रूप से कमजोर स्थिति, बाल श्रम और परंपरागत व्यवसायों से जुड़ी तात्कालिक आवश्यकताएं ये सभी बंधुआ श्रम के प्रमुख कारण हैं। मंत्री  पटेल ने बताया कि बारूद से जुड़े कारखानों को मध्यप्रदेश में अत्यंत खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। उद्योगों का वर्गीकरण खतरनाक और अति-खतरनाक श्रेणियों में किया जाना चाहिए, ताकि श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। श्रम मंत्री श्रह पटेल ने स्पष्ट किया कि आज संकल्प करने का दिन है कि आने वाले समय में हम यह कह सकें कि मध्यप्रदेश में न कोई बाल मजदूर है और न कोई बंधुआ मजदूर। उन्होंने कहा कि हुनर को रोका नहीं जा सकता, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी को मजदूरी के कारण बंधुआ न बनाया जाए और न ही किसी बच्चे से उसका बचपन छीना जाए। एआई युग में श्रम कानूनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सचिव, श्रम विभाग  रघुराज राजेन्द्रन ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में आज एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) एक बड़ा परिवर्तनकारी तत्व बनकर उभरा है। तकनीकी बदलाव हमेशा टूल के रूप में आए हैं, लेकिन एआई में सोचने की क्षमता होने के कारण यह कार्यबल और रोजगार के क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव लाएगा। उन्होंने कहा कि नियम निर्माण के दौरान जोखिमों को कैसे कम किया जाए, इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। इसी परिप्रेक्ष्य में यह कार्यशाला अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें चार नवीन श्रम संहिताओं पर चर्चा कर एक बेहतर और समावेशी समाज की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। कार्यक्रम में श्रम विभाग द्वारा तीन संस्थानों को श्रम स्टार रेटिंग में उल्लेखनीय कार्य करने पर सम्मान प्रदान किया गया। कार्यशाला में श्रमायुक्त मती तन्वी हुड्डा ने स्वागत भाषण देते हुए माननीय अतिथियों का अभिनंदन किया। बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 तथा स्टेट एक्शन प्लान (SAP) पर आधारित प्रस्तुति  लॉलीचैन पी. जोसेफ, बाल संरक्षण विशेषज्ञ, यूनिसेफ भोपाल द्वारा दी गई। कार्यशाला में यूनीसेफ एवं विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि श्रम विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नवीन श्रम संहिताओं की जागरूकता करना एवं उनके प्रावधानों से अवगत कराना था। कार्यशाला में लगभग 200 प्रतिभागियों के रूप में विभिन्न जिलों से श्रम अधिकारी/ कर्मचारी श्रमिक संगठन/यूनियन नियोजन एवं NGOs से सहभागिता दी गई। इसके साथ-साथ बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के अंतर्गत राज्य कार्य योजना का विमोचन श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा किया गया। श्रम अधिनियमों के मापदंडों के अनुपालन संबंधी नवीन अवधारणा श्रम स्टार रेटिंग के सर्टिफिकेट प्रदान किए गए। कार्यशाला में वाचकों द्वारा चार नवीन श्रम संहिताओं का प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रतिभागियों द्वारा समूह चर्चा एवं शंका समाधान सत्र में सक्रिय भागीदारी करते हुए मांग सुझाव दिए गए।  

खेती के साथ पशुपालन से बढ़ी किसानों की आय

भोपाल. ग्रामीण अर्थव्यवस्था का उत्थान, शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। शासन द्वारा कृषि और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे कृषि और पशुपालन अब न केवल लाभ का व्यवसाय बन गया है, बल्कि इससे किसानों और पशुपालकों को नई पहचान भी मिल रही है। छिंदवाड़ा जिले के चौरई विकासखंड के ग्राम बांकानागनपुर के श्री नवीन रघुवंशी भी उन्हीं किसानों और पशुपालकों में से एक हैं। श्री रघुवंशी ने पशुपालन विभाग की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) योजना का लाभ लेकर बकरी पालन को एक सशक्त और लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया है। सीमित संसाधनों से शुरू हुई उनकी यह पहल आज आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण क्षेत्र में एक मॉडल बकरी फार्म के रूप में पहचान बना चुकी है। श्री रघुवंशी बताते हैं कि एनएलएम योजना के अंतर्गत स्वीकृत उनके इस बकरी फार्म में सिरोही नस्ल की कुल 175 बकरियाँ, बकरे एवं उनके बच्चे उपलब्ध हैं। फार्म को मॉडल स्वरूप में विकसित किया गया है, जिसमें बीमार बकरियों के लिए पृथक क्वारंटाइन शेड, बच्चों के लिए अलग कमरे तथा बकरियों के बैठने के लिए 4 फीट ऊँचाई पर प्लाई प्लेटफॉर्म बनाया गया है। इसी प्लेटफॉर्म के नीचे कड़कनाथ मुर्गी का पालन भी किया जा रहा है, जिससे अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित हुआ है। बकरी फार्म की कुल लागत लगभग 1 करोड़ रुपये है, जिसमें भारत सरकार द्वारा 50 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। योजना के अंतर्गत प्रथम किस्त के रूप में 25 लाख रुपये की राशि श्री नवीन रघुवंशी को प्रदाय की जा चुकी है। इस आर्थिक सहयोग से फार्म को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया गया है। बकरियों के पोषण के लिए फार्म में तीन प्रकार की नेपियर घास का उत्पादन किया जा रहा है। दाना बनाने की मशीन एवं चैफ कटर जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं। ब्रीडिंग के उद्देश्य से उच्च गुणवत्ता के बकरे रखे गए हैं, जिनमें एक बकरे की कीमत लगभग 2 लाख रुपये है। बेहतर पोषण और प्रबंधन के कारण बकरियों का स्वास्थ्य एवं उत्पादन स्तर उत्कृष्ट बना हुआ है। बकरी पालन के साथ प्राकृतिक खेती फार्म में बकरी पालन के साथ-साथ प्राकृतिक खेती भी की जा रही है। इससे न केवल लागत में कमी आई है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल खेती को भी बढ़ावा मिला है। श्री नवीन रघुवंशी के पुत्र श्री मंथन रघुवंशी द्वारा बकरी पालन एवं उन्नत कृषि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई पहचान दी जा रही है। वे यूट्यूब एवं इंस्टाग्राम के माध्यम से बकरी पालन, उन्नत कृषि, मक्का उत्पादन तथा कम उम्र में पशुओं का वजन बढ़ाने जैसे विषयों पर शैक्षणिक वीडियो साझा कर रहे हैं। श्री मंथन रघुवंशी को उनके प्रभावी डिजिटल योगदान के लिए कृषि जागरण की ओर से “एग्री इंफ्लूएंसर ऑफ द ईयर 2026 पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि युवाओं को कृषि एवं पशुपालन से जोड़ने की प्रेरणा देती है। महिला किसानों की पहल को मिली प्रदेश स्तर पर सराहना छिंदवाड़ा जिले के मोहखेड़ ब्लॉक की महिला किसान श्रीमती ज्योति सोमकुंवर ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अपने नवाचार, अनुभव और जमीनी प्रयासों से प्रदेश स्तर पर पहचान बनाने में सफलता पाई है। भोपाल के मिंटो हॉल में आयोजित "मनन 2026" प्राकृतिक खेती विषयक कार्यक्रम में प्रदेश की महिला किसानों ने अपने अनुभव साझा किए, जिसमने छिंदवाड़ा जिले की ज्योति सोमकुंवर को भी अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला, जिसकी प्रदेश स्तर पर सराहना की गई। श्रीमती सोमकुंवर ने हकदर्शिका संस्था से जुड़कर किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने के अपने अनुभव साझा किए। नव गठित पांढुर्णा जिले के विकासखंड सौंसर से महिला किसान श्रीमती मीता धुर्वे एवं श्रीमती कविता सिरसाम ने भी बड़ादेव जैविक उत्पादक समूह के माध्यम से ग्राम जोबनढाना में सृजन संस्था के सहयोग से संचालित जैविक उत्पाद केंद्र की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार जैविक उत्पाद बनाकर किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित किया जा रहा है और इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार एवं आय के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। मोहखेड़ एवं सौंसर ब्लॉक की जैविक उत्पाद केंद्र से जुड़ी इन महिला किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के किए का रहे प्रयासों को प्रदेश स्तर पर सराहा गया। महिला किसानों की यह पहल न केवल अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनी है, बल्कि प्राकृतिक खेती को अपनाने की दिशा में एक मजबूत संदेश भी दे रही है।  

चोरी और रेलवे संपत्ति तस्करी पर कार्रवाई: मध्यप्रदेश पुलिस ने आरोपियों को दबोचा

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस अपने ध्येय वाक्य “देशभक्ति–जनसेवा” के अनुरूप प्रदेश में अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण एवं नागरिकों की आस्था व संपत्ति की सुरक्षा हेतु सतत् एवं ठोस कार्यवाही कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश के विभिन्‍न जिलों में चोरी की गंभीर घटनाओं का सफल खुलासा करते हुए पुलिस ने लगभग 37 लाख 40 हजार रूपए से अधिक मूल्य का चोरी की सामग्री जप्त की है। पन्ना- रेलवे स्टेशन भवन से चोरी गई सामग्री बरामद थाना देवेंद्रनगर क्षेत्र में नागौद–खजुराहो रेलवे प्रोजेक्ट के तहत ग्राम फुलवारी स्थित रेलवे स्टेशन भवन से केबल, वायर, पीवीसी पाइप एवं अन्य इलेक्ट्रिकल सामग्री की चोरी के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 20 लाख रूपए की संपत्ति जप्त की है। विदिशा- तीन चोरी के प्रकरणों का खुलासा जिले के थाना सिविल लाइन पुलिस ने मुखबिर सूचना एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तीन अलग-अलग चोरी की घटनाओं का खुलासा करते हुए 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्‍जे से पुलिस ने चोरी की बोलेरो पिकअप वाहन, मंदिर से चोरी किया गया मुकुट एवं छत्र तथा चोरी किया गया बिजली तार सहित लगभग 9 लाख 20 हजार रूपए की सामग्री जब्‍त की है। शाजापुर-ग्राम जावदी स्थित हनुमान मंदिर चोरी का खुलासा शाजापुर जिले के थाना मोहन बड़ोदिया क्षेत्रांतर्गत ग्राम जावदी स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में हुई चोरी की घटना का पुलिस ने 600 से अधिक सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य एवं साइबर सेल की सहायता से सफलतापूर्वक खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही चोरी का माल बेचने हेतु रखने वाले एक अन्‍य आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्‍जे से चांदी के आभूषण एवं नगदी, चोरी में प्रयुक्त मोटरसाइकिल एवं दो धारदार चाकू सहित  कुल 4 लाख 20 हजार 570 रूपए की सामग्री जब्‍त की है। सीहोर-सराफा दुकान में चोरी का त्वरित खुलासा जिले के थाना आष्टा क्षेत्र में बुधबारा खरी खुंडी स्थित एक सोने-चांदी की दुकान से कर्मचारी द्वारा लगभग 1 किलो 390 ग्राम चांदी के आभूषण (पायल, कड़े, ब्रेसलेट एवं गले की चेन) चोरी किए जाने की घटना का त्‍वरित खुलासा कर आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी के कब्जे से 1 किलो 359 ग्राम चांदी के आभूषण कीमत लगभग 4 लाख रूपए जब्‍त किए है। मध्यप्रदेश पुलिस आमजन की आस्था, धार्मिक स्थलों एवं निजी संपत्ति की सुरक्षा हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है। नागरिक किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी पुलिस थाना अथवा डायल-112 पर दें सकते हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नक्सली मुठभेड़ में अदम्य साहस दिखाने वाले 60 जवानों को क्रम से पूर्व पदोन्नति देने के लिए कार्यक्रम में पहुंचे।

बालाघाट  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नक्सली मुठभेड़ में अदम्य साहस दिखाने वाले 60 जवानों को क्रम  से पूर्व पदोन्नति देने के लिए बालाघाट पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने सलामी लेने के बाद अमर जवान ज्योति पर पुष्प चक्र अर्पित कर प्रदेश की शांति और सुरक्षा के लिए शहीद होने वाले जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ यादव को पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका अभिवादन किया गया। इस अवसर पर पुलिस जवानों ने "वो बांके अलबेले- जो वापस न लौटे- इस मिट्टी के बेटे" गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने "नक्सल संस्मरण" पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह सांसद श्रीमती भारती पारधी ,पूर्व मंत्री गौरी शंकर बिसेन, एडीजी नक्सल विरोधी अभियान वेंकटेश्वर राव, पुलिस अधीक्षक बालाघाट आदित्य मिश्रा सहित विधायक गण जनप्रतिनिधि , पुलिस जवान तथा शहीद जवानों के परिजन उपस्थित रहे।

कैबिनेट मंत्री ने रिपोर्टर के सवालों पर किया बेबाक तरीके से सम्मान, शेयर किया फेसबुक वीडियो

नरसिंहपुर  नरसिंहपुर जिले के बम्होरी में एक अस्पताल के उद्घाटन के दौरान मंच पर एक अद्भुत नजारा देखने को मिला. यहां नन्ही रिपोर्टर छवि विश्वकर्मा ने पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल का इंटरव्यू लिया. छवि के बेबाक अंदाज में पूछे गए सवालों ने मंत्री जी को यह कहने पर मजबूर कर दिया कि लगता है नर्मदा जी का असर आप पर भी है, इसीलिए आप इतना अच्छा प्रश्न पूछ पा रही हैं.  रिपोर्टर छवि ने जब संगम की ऊर्जा पर सवाल किया, तो मंत्री पटेल ने समझाया कि जहां संगम होता है, वहां जीवन की संभावना होती है और उद्गम पर अपूर्व ऊर्जा. चाहे पहाड़ों का संगम हो या नदियों का या फिर चाहे स्त्री-पुरुष का हो, वहां जीवन की संभावना रहती है, इसलिए संगम पर लोग स्नान करने जाते हैं, लेकिन उनको कारण पता नहीं होता. हर गृहस्थ को जीवन चाहिए. जीवन में खुशियां चाहिए, इसलिए वो तीर्थों पर जाता है जहां संगम होते हैं.   छवि ने जब नर्मदा परिक्रमा के दौरान एक भील द्वारा आटा दान करने वाली कहानी पूछी, तो मंत्री हैरान रह गए. उन्होंने चौंकते हुए नन्हीं छवि से पूछा कि आपको किसने बताया? इस पर बालिका ने कहा कि दीदी और पिताजी ने.   इसके बाद जवाब में मंत्री ने कहा, ''उस नशे में धुत भील ने अपनी आधी खुराक दान कर दी थी, जो दुनिया का सबसे बड़ा दान है. वहीं उनके गुरु ने सिखाया कि खुद आधा खाने से बेहतर है किसी दूसरे को पूरी रोटी मिल जाए…'' जब छवि ने पूछा कि आप किस रूप में ज्यादा खुश हैं, तो प्रहलाद पटेल ने मुस्कुराते हुए कहा, "रेवा (नर्मदा) दोधारी तलवार है, यह जोग (योग) भी देती है और भोग भी. मैं दोनों के तालमेल में खुश हूं."  देखें VIDEO:-  छवि विश्वकर्मा के सवाल पूछने के स्टाइल और उनके आत्मविश्वास की रील सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. खुद कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल भी इस नन्ही प्रतिभा के कायल हो गए और उन्होंने अपने ऑफिशियल फेसबुक पेज पर इस पूरे इंटरव्यू को पोस्ट किया है. यही नहीं, इंटरव्यू खत्म होने के बाद मंत्री ने नन्ही रिपोर्टर को चरण छूकर प्रणाम किया. मोहन सरकार के मंत्री प्रहलाद पटेल ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ''आयुर्वेद औषधालय के लोकार्पण पर एक 12 वर्ष की बेटी छाया विश्वकर्मा ने मेरा इंटरव्यू लिया. उनके प्रश्नों ने मुझे, उनके चरणों में झुका दिया. मैंने विनोदवश पूछा कि आप किस चैनल से हैं? तो उन्होंने कहा- मेरा ही चैनल है. मुझे आपका इंटरव्यू लेना है.''