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बांधवगढ़ की बाघिन का राजस्थान में रिश्ता तय, हेलीकॉप्टर से विदाई और मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में शिफ्ट

उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की बाघिन का रेस्क्यू सफल रहा. इस बाघिन को राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने की योजना है. फिलहाल बाघिन को ऑब्जरवेशन में रखा गया है. राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार के सामने मध्य प्रदेश से 3 टाइगर की डिमांड रखी थी. राजस्थान को एक ऐसी बाघिन की तलाश है, जो मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में कुनबा बढ़ा सके. एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से राजस्थान जाएगी बाघिन बांधवगढ़ की बाघिन एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से राजस्थान जाएगी. यहां से उसकी दुल्हन की तरह धूमधाम से विदाई होगी. इसकी तैयारी के लिए एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर का ट्रायल लैंडिंग भी हो चुका है. कुछ दिन पहले पेंच टाइगर रिजर्व से एक बाघिन को इसी तरह एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व शिफ्ट किया गया था. रेस्क्यू के बाद बाघिन को रेडियो कॉलर पहनाया बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया "बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व प्रबंधन ने कक्ष क्रमांक RF-327, के दमना बीट के ताला परिक्षेत्र से एक बाघिन का रेस्क्यू किया है, जिसकी उम्र 3 से 4 वर्ष है. अब बाघिन के हर मूवमेंट पर नजर रहेगी. रेस्क्यू करने के बाद उसके स्वास्थ्य की जांच की गई है और रेडियो कॉलर पहनाया गया." बाघिन को अंडर ऑब्ज़र्वेशन रखने के लिए आगामी कुछ दिनों के लिए मगधी परिक्षेत्र के बहेरहा स्थित बाड़े में सुरक्षित रूप से रखा गया है. योजना के अनुसार सभी तरह की परमिशन मिलने के बाद बाघिन को राजस्थान भेजा जाएगा. मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की शान बनेगी बाघिन बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बाघिन को राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में भेजने की योजना है. इसकी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. इसी के तहत इस बाघिन का रेस्क्यू किया गया है. राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व को एक एडल्ट बाघिन चाहिए, जो बाघों का कुनबा बढ़ा सके. ऐसी बाघिन की उम्र 3 से 5 साल तक के बीच होनीचाहिए, जो प्रजनन करने योग्य हो. इस बारे में राजस्थान सरकार ने भारत सरकार के माध्यम से परमिशन लेकर मध्य प्रदेश से 03 टाइगर और महाराष्ट्र से 02 टाइगर मांगे हैं. इसी कड़ी में पेंच टाइगर रिजर्व से राजस्थान जा चुकी है. अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से बाघिन ले जाने की तैयारी है. 

सिंहस्थ में फूलों की खेती के लिए 4200 हेक्टेयर जमीन, विशेष क्लस्टर के लिए केंद्र से मंजूरी की अपील

उज्जैन  उज्जैन और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण धार्मिक दृष्टि से अहम इंदौर जिले में अब फूलों की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी है। राज्य सरकार ने इंदौर सहित कुछ जिलों को चिह्नित करते हुए पुष्प क्षेत्र विस्तार योजना बनाई है। इस योजना के तहत इंदौर जिले में 110 हेक्टेयर भूमि पर फूलों की खेती का लक्ष्य तय किया गया है। 110 हेक्टेयर में सिर्फ गुलाब की खेती का लक्ष्य योजना के पहले चरण में 83.87 हेक्टेयर भूमि पर 142 हितग्राही किसानों को चयनित किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक पूरे 110 हेक्टेयर क्षेत्र में केवल गुलाब की खेती की जाए। इससे धार्मिक आयोजनों में फूलों की बढ़ती मांग को स्थानीय स्तर पर पूरा किया जा सकेगा। मुख्य सचिव करेंगे प्रोजेक्ट की निगरानी इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग खुद मुख्य सचिव अनुराग जैन करेंगे। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में इस योजना पर चर्चा के बाद उद्यानिकी विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उप संचालक उद्यान को योजना का नोडल अधिकारी बनाया गया है। सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन के लिए बड़ा प्लान सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन जिले के लिए भी बड़ी योजना बनाई गई है। यहां 4200 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती के क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भारत सरकार से विशेष प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ मेले के दौरान बड़ी मात्रा में फूलों की आवश्यकता होगी। इंदौर में रोज 8 से 12 टन फूलों की आवक इंदौर फूल बाजार एसोसिएशन के अनुसार शहर में प्रतिदिन 8 से 12 टन फूलों की आवक होती है। त्योहारी और पीक सीजन में यह मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। नवरात्रि, दीपावली और विवाह आयोजनों के दौरान आवक 30 से 70 टन तक पहुंच जाती है। बाजार में मुख्य रूप से गेंदा, गुलाब और सेवंती की आपूर्ति होती है। प्रदेश में तेजी से बढ़ रही फूलों की खेती प्रदेश में फूलों की खेती लगातार बढ़ रही है और मध्यप्रदेश पूरे देश में तीसरे स्थान पर है। गेंदा सबसे अधिक क्षेत्र में उगाया जाता है, इसके बाद गुलाब, क्रिसैंथेमम, ग्लैडियोलस, ट्यूबरोज और अन्य मौसमी फूलों की खेती होती है। राज्य में लगभग 43 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 5.12 लाख टन से अधिक फूलों का उत्पादन हुआ। धार्मिक स्थलों के कारण बढ़ी मांग उज्जैन, ओंकारेश्वर के अलावा देवास, सलकनपुर, नीमच, मंदसौर, महेश्वर, नलखेड़ा, परशुराम लोक सहित कई धार्मिक और तीर्थ स्थल इस क्षेत्र में स्थित हैं। इसी वजह से यहां फूलों की खेती पर विशेष फोकस किया जा रहा है। मंत्री बोले, बाहर से फूल मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने हाल ही में पत्रकारों से चर्चा में कहा कि उज्जैन और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर साल भर फूलों की भारी मांग रहती है। सिंहस्थ मेले के दौरान यह मांग कई गुना बढ़ जाती है। सरकार की योजना है कि स्थानीय किसानों से ही फूलों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, जिससे परिवहन लागत घटेगी और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे।   

9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस पर नई श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला का आयोजन

9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर नयी श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का भी होगा विमोचन भोपाल  श्रम विभाग ने 9 फरवरी को 'बंधक श्रम उन्मूलन दिवस' पर कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेन्शन सेंटर (मिंटो हॉल) में कार्यशाला का आयोजन किया है। उद्घाटन सुबह 10 बजे श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल करेंगे। कार्यशाला में राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का विमोचन भी होगा। पूरे मध्य प्रदेश में महीनेभर चलेगा अभियान बंधक श्रम (बंधुआ मजदूरी) कराने वालों के विरुद्ध मध्यप्रदेश का श्रम विभाग 9 फरवरी 'बंधक श्रम उन्मूलन दिवस' से विशेष अभियान भी शुरू करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि श्रम मंत्री की पहल पर विभाग ने बाल एवं बंधक श्रम को रोकने और जागरुकता लाने एक विशेष 'वेदा पहल' की शुरुआत की है। कार्यशाला के प्रमुख चार बिंदु पहला: बाल एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य एक्शन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। इसमें अधिनियम के अंतर्गत निरीक्षण, पहचान, बचाव एवं पुनर्वास की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी। दूसरा: बंधुआ श्रम (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के क्रियान्वयन के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अधिनियम की उपलब्धियों एवं वर्तमान चुनौतियों पर विचार किया जाएगा। तीसरा: नई चार श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। चौथा: राज्य एक्शन प्लान के माध्यम से विभागीय समन्वय, प्रवर्तन व्यवस्था एवं जनजागरूकता को सुदृढ़ करने की रणनीति प्रस्तुत की जाएगी। श्रम विभाग के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य कानून, नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि राज्य में बाल एवं बंधुआ श्रम के उन्मूलन की दिशा में प्रभावी और ठोस परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।  

उज्जैन में शुरू होगा ‘विक्रमोत्सव’, 12 फरवरी से 139 दिनों तक चलेगा, महानाट्य और विज्ञान का अनोखा मिलन

उज्जैन  उज्जैन में 12 फरवरी से 30 जून तक 139 दिन का विक्रमोत्सव होगा। इसमें कलश यात्रा, नाटक मंचन, वैचारिक समागम, शोध संगोष्ठी, फिल्मों के प्रदर्शन, वेद अंताक्षरी और सूर्योपासना के आयोजन होंगे। प्रदेश के नगरों में विक्रमादित्य महानाट्य मंचन व शिक्षण संस्थाओं में सम्राट विक्रमादित्य पर केंद्रित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता की जाएंगी। 15 फरवरी को प्रदेश में शिवरात्रि मेलों का शुभारंभ 15 फरवरी को प्रदेश में शिवरात्रि मेलों का शुभारंभ होगा। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने शुक्रवार को विक्रमोत्सव की तैयारियों की समीक्षा करते हुए इसकी रूपरेखा पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के वैज्ञानिक पक्ष को भी प्रचारित किया जाएगा। विज्ञान सम्मत कार्यों के संबंध में विज्ञान महाविद्यालयों, अभियांत्रिकी महाविद्यालयों और पालिटेक्निक को जोड़कर अभिनव कार्यक्रम किए जाएंगे। 15 फरवरी को प्रदेश में महादेव की कलाओं के शिवार्चन, कलश यात्रा, बैंड प्रस्तुति, शिवनाद और विक्रम व्यापार मेले का आयोजन होगा। 16 से 20 फरवरी तक शिव पुराण, 16 से 25 फरवरी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नाट्य प्रस्तुतियां और 26 से 28 फरवरी तक इतिहास समागम, पुतुल समारोह और अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी जैसी गतिविधियां होंगी। कवि गोष्ठियां, शोध संगोष्ठियां, फिल्म प्रदर्शन, गुड़ी पड़वा पर कार्यक्रम वैचारिक समागम, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, विभिन्न भाषाओं और बोलियों में लोकरंजन के तहत कवि गोष्ठियां, शोध संगोष्ठियां, फिल्म प्रदर्शन, गुड़ी पड़वा पर उज्जैन के रामघाट (दत्त अखाड़ा) पर सूर्य उपासना का कार्यक्रम होगा। उज्जयिनी गौरव दिवस अंतर्गत शिप्रा तट पर सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण और विक्रम पंचांग 2082-83 और आर्ष भारत के द्वितीय संस्करण का लोकार्पण होगा। महादेव की नदी कथा-नृत्य नाट्य और पार्श्व गायकों द्वाराT सांगीतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। 15 फरवरी को शुभारंभ, 25 फरवरी तक नाट्य प्रस्तुतियां सरकारी कार्यक्रम के अनुसार, विक्रमोत्सव का शुभारंभ 15 फरवरी को शिवरात्रि मेलों, भव्य कलश यात्रा और कलाकारों के समूह द्वारा प्रस्तुत 'शिवोहम' संगीतमय प्रस्तुति के उद्घाटन के साथ किया जाएगा. इसके बाद विक्रम थिएटर महोत्सव के अंतर्गत 16 से 25 फरवरी के बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित नाट्य कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे, जिसमें ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित नाटक होंगे. कठपुतली महोत्सव, बौद्धिक सम्मेलन और फिर कवि सम्मेलन 26 से 28 फरवरी के दौरान एक अंतरराष्ट्रीय इतिहास सम्मेलन, कठपुतली महोत्सव और अनुसंधान संगोष्ठी का आयोजन प्रस्तावित है. वहीं, सम्राट विक्रमादित्य के युग में न्याय व्यवस्था और शासन प्रणाली पर केंद्रित एक बौद्धिक सम्मेलन 28 फरवरी से 1 मार्च तक आयोजित किया जाएगा. इसके पश्चात 7 मार्च को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें देशभर के प्रसिद्ध कवि भाग लेंगे. पौराणिक फिल्मों का अंतरराष्ट्रीय महोत्सव विक्रमोत्सव के तहत अन्य प्रमुख कार्यक्रमों में 20 से अधिक देशों की प्रविष्टियों के साथ पौराणिक फिल्मों का एक अंतरराष्ट्रीय महोत्सव, वेद अंताक्षरी तथा गुड़ी पड़वा के अवसर पर रामघाट और दत्त अखाड़ा में सूर्योदय पूजा शामिल हैं. यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और बौद्धिक विमर्श का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा. कार्यक्रम के अंतिम दिन, 19 मार्च को, वर्ष प्रतिपदा और सृष्टि आरंभ दिवस के अवसर पर 'उज्जयिनी गौरव दिवस' के रूप में मनाया जाएगा. सरकार के अनुसार, इस दिन शिप्रा नदी के तट पर मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें सम्राट विक्रमादित्य पुरस्कार का वितरण, विक्रम पंचांग 2082-83 का विमोचन, 'अर्शा भारत' के दूसरे संस्करण का लोकार्पण तथा नृत्य-नाट्य प्रस्तुति 'महादेव की नदी कथा' प्रमुख आकर्षण होंगे. CM मोहन यादव का अधिकारियों को निर्देश मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि विक्रमोत्सव में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व और कृतित्व के सभी आयामों की प्रभावी और व्यापक प्रस्तुति सुनिश्चित की जाए. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक निरंतरता को सशक्त बनाए रखने के लिए नई पीढ़ी को सम्राट विक्रमादित्य के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक योगदान से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है. सीएम मोहन यादव ने यह भी निर्देश दिए कि विज्ञान महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों को विक्रमोत्सव से जोड़ा जाए, ताकि सम्राट विक्रमादित्य के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कालगणना, खगोल विज्ञान तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को उजागर करने वाले विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें.   

उज्जैन में वनतारा मॉडल पर 500 हेक्टेयर में बनेगा वन्य जीव केंद्र और रेस्क्यू सेंटर

 उज्जैन   उज्जैन में वनतारा की तर्ज पर इस तरह का जंगल चिड़ियाघर सफारी (वाइल्ड लाइफ सेंटर कम इंडियन जू कम रेस्क्यू सेंटर) तैयार करें, जो यहां आने वाले विजिटर्स को पूरी दुनिया के अलग-अलग जंगलों का एक ही जगह पर पूरा अनुभव दें। इस वाइल्ड लाइफ सेंटर को करीब 500 हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार किया जाए। उज्जैन में 50 हेक्टेयर रकबे में पहले से तैयार ईको टूरिज्म पार्क भी इसी वन्य जीव केंद्र में शामिल कर लिया जाए। यह एक अनोखा वन्य जीव केंद्र होना चाहिए, जिसमें वन और वन्य प्राणियों की विविधता दूसरे वन्य जीव केंद्रों से भिन्न हो। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  वन विभाग की समीक्षा में कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में उज्जैन में वन्य जीव केंद्र सह रेस्क्यू सेंटर के निर्माण के संबंध में नियुक्त कन्सल्टेंट फर्म के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। कंसल्टेंट भी नियुक्त किए डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में पर्यटन विशेषकर वन्य पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार पुरजोर कोशिश कर रही है। प्रदेश में उज्जैन और जबलपुर में वन्य जीव केंद्र सह रेस्क्यू सेंटर निर्मित किए जा रहे हैं। दोनों ही शहरों में इन सेंटर्स के निर्माण के लिए कंसल्टेंट भी नियुक्त कर दिए गए हैं। बहुत जल्द प्रदेश में दो नए वन्य जीव केंद्र बनेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष में उज्जैन के वन्य जीव केंद्र के फेज-1 का निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाए और जितनी जल्दी हो सके, वन्य जीव केंद्र तैयार हो जाए, जिससे उज्जैन को एक बेहतरीन फारेस्ट टूरिज्म स्पाट (सफारी एक्सपीरियंस के साथ) के रूप में ख्याति मिल सके। केंद्र ऐसे करें तैयार कि देशी और विदेशी सभी प्रजाति का दिन और रात कर विजिटर्स ले सकें आनंद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन के वन्य जीव केंद्र में देशी और विदेशी सभी प्रजाति के वन्य प्राणी हों। यह केंद्र इस तरह तैयार किया जाए कि इसमें दिन और रात दोनों वक्त विजिटर्स इसका आनंद ले सकें। बैठक में उज्जैन में इस केंद्र की स्थापना के लिए सैद्धांतिक सहमति व्यक्त कर निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं और सेंटर के डिजाइन पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य जीव केंद्र को टूरिज्म डिपार्टमेंट के साथ मिलकर एक भव्य केंद्र के रूप में तैयार किया जाए। देश-दुनिया के 11 जंगलों का कराया जाएगा अनुभव नियुक्त कंसल्टेंट फर्म के पदाधिकारियों ने बताया कि वन्य जीव केंद्र में विजिटर्स को देश-दुनिया के 11 जंगलों का अनुभव कराया जाएगा। वर्ष 2027 के अंत तक पहला चरण पूरा हो जाएगा। वन्य जीव केंद्र का निर्माण कुल छह चरणों में किया जाएगा। इसमें दिखाई नहीं देने वाली बाड़ का खुला जंगल होगा, जिसमें विजिटर्स पैदल, बग्घी, सफारी और सेवा वाहन का उपयोग कर सेंटर का विजिट कर सकेंगे। 300 से अधिक देशी-विदेशी प्रजाति के जंगली जानवर होंगे। देशी और विदेशी जानवरों का अनुपात क्रमश: 75 एवं 25 प्रतिशत होगा। केंद्र में एक रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि विश्व में पहली बार विजिटर्स को असली जंगल चिड़ियाघर सफारी का अनुभव उज्जैन के वन्य जीव केंद्र में कराया जाएगा।

सुरखी विधानसभा के अंतिम छोर के गांव तक पहुंचेगी शिक्षा : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल . सुरखी विधानसभा क्षेत्र के जैसीनगर में विकास की एक और नई इबारत लिखी गई, जहां 38 करोड़ की लागत से बने सांदीपनि विद्यालय का शुभारंभ स्कूल शिक्षा एवं परिहवन मंत्री  राव उदय प्रताप सिंह द्वारा किया गया। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने मंत्री  राव उदय प्रताप सिंह का आत्मीय स्वागत किया। स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  सिंह ने कहा कि आज पूरे प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय निजी स्कूलों से ज्यादा अच्छे बन रहे हैं, यह सब जनता जनार्दन के आर्शीवाद से ही संभव हुआ है।  सिंह ने कहा कि देश का नेतृत्व आज एक ऐसा राष्ट्र भक्त व्यक्ति के हाथों में है जिनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्पों से भारत विश्व में एक अलग पहचान बना चुका है। हमारे प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का सपना है कि हर व्यक्ति के सर पर छत हो, जिसको लेकर उनका अभियान चल रहा है। उनके नेतृत्व में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार म.प्र. को उंचाईयों की ओर ले जा रहे हैं।  सिंह ने मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को मसीहा बताते हुए कहा कि सुरखी की जनता ने एक मजबूत जनप्रतिनिधि को चुना है, जिसने जनता की आवाज को मजबूती से सरकार के सामने रखा और सुरखी विधानसभा में विकास के नये आयाम बनाये हैं। उन्होंने कहा कि सुरखी के पास एक नहीं दो-दो जनप्रतिनिधि है यदि मंत्री  राजपूत भोपाल में होते हैं तो सुरखी के पास  हीरा सिंह राजपूत हमेशा उपस्थित रहते हैं। स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री ने कहा कि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की मांग पर जल्द ही बिलहरा और सुरखी में करोड़ो के नये सांदीपनि विद्यालय खोले जायेंगें। अभी राहतगढ़ और जैसीनगर में आपके यहां यह विद्यालय खोले जा चुके हैं जिनमें प्राईवेट स्कूलों से अच्छी शिक्षा एवं व्यवस्थाएं मिलेगी। जिसमें अत्याधुनिक स्मार्ट क्लास, लैब, आने जाने के लिए बसें, डिजीटल लाजनिंग हब, पुस्तकालय, खेल परिसर, कोरीडोर, निःशुल्क कोचिंग, कैरियर काउंसिलिंग, इन्डोर, आउटडोर खेल की सुविधा, बाउंड्रीवाल, आधुनिक तकनीकि और सुरक्षा मानको से लैस यह सांदीपनि वि़द्यालय ग्रामीण क्षेत्र के लिए शिक्षा की संजीवनी होगा। प्रधानमंत्री की सोच को दृढ़ संकल्पों के साथ पूरा कर रहे हैं मुख्यमंत्री:  राजपूत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मंत्री  राजपूत ने मंत्री उदय प्रताप सिंह का अभिनंदन करते हुए कहा कि स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह का विशेष स्नेह है कि उनसे जो भी मांग की जाती है वह पूरी होती है, उनकी कार्य कुशलता के चलते शिक्षा एवं परिवहन विभाग में कई नवाचार हो रहे हैं, जिनका फायदा जनता को मिल रहा है।  राजपूत ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी की जनकल्याणकारी सोच और सपनों को हमारे मुख्यमंत्री डॉ. यादव दृढ़ संकल्पों के साथ पूरा कर रहे हैं, जिनके मार्गदर्शन में सुरखी विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में चहुंओर विकास हो रहा है।  राजपूत ने कहा कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र के अंतिम गांव तक विकास योजनाएं पहुंच रही है, जिन गांव की आबादी भले ही पचास परिवारों की है वह भी पक्की सड़कों से जोड़े जायेंगें। यह डबल इंजन की सरकार ही है जो हर व्यक्ति की छोटी-बड़ी समस्याओं का ध्यान रखकर जनहितैषी योजनाओं से लांभावित कर रही है। शिक्षा के क्षेत्र में हर मांग पूरी करना मेरा कर्तव्य सुरखी विधानसभा क्षेत्र में भवनविहीन शास. माध्यमिक शाला जेरा, विशनपुर, बरखेरा महंत, धाउ, हड़ा एवं भवन निर्माण हेतु शास. हाईस्कूल विदवास, बरोदा सागर, मिडवासा, मसुरहाई, गेहूंरास बुजुर्ग, पड़रई, आदि के लिए मांग की गई थी। मंत्री  राजपूत द्वारा की गई मांग को पूरा करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री  राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि जो भी मांग मंत्री  राजपूत द्वारा की जायेगी वह पूरी होगी और शिक्षा के लिए हर मांग पूरी करना मेरा दायित्व है। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष  हीरा सिंह राजपूत ने कहा कि विकास करने वाली सरकार है जिसमें 80 प्रतिशत बजट केवल गांव के लिए आवंटित किया है, जिससे पता चलता है कि सरकार जमीनी स्तर से काम कर ही है।  

किसानों की सहमति से होगा सड़क चौड़ीकरण, भूमि अधिग्रहण पर उप मुख्यमंत्री शुक्ल का बयान

भोपाल . गुरूकुल विद्यालय से खैरा तक सड़क चौड़ीकरण कार्य की समीक्षा की उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने गुरूकुल विद्यालय से खैरा तक सड़क के चौड़ीकरण कार्य की समीक्षा करते हुए कहा कि यह सड़क रीवा एयरपोर्ट को सिलपरा-बेला रिंग रोड से जोड़ेगी। सड़क चौड़ीकरण में आने वाली जमीनों के लिए चोरहटा, रघुनाथपुर व खैरा गांव के किसानों ने अपनी सहमति दी है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि हवाई अड्डे को जोड़ने वाली सड़क के बन जाने से किसानों की शेष जमीनों का भी मूल्य बढ़ेगा। कलेक्ट्रेट रीवा के सभागार में बैठक में किसानों ने कहा कि हम सब रीवा के विकास में उप मुख्यमंत्री  शुक्ल के साथ हैं। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि आपसी सहमति से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया कम से कम समय में पूरी हो जाएगी और किसानों को उनकी अधिग्रहीत जमीन का उचित मुआवजा भी शीघ्र मिल जाएगा। उन्होंने लोक निर्माण विभाग व राजस्व विभाग के अधिकारियों को समन्वय बनाकर अतिशीघ्र प्रक्रिया को पूरा करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि सिलपरा-बेला रिंग रोड निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है। आगामी अप्रैल माह में इसका लोकार्पण हो जाएगा। रिंग रोड के लोकार्पण से पूर्व ही गुरूकुल से खैरा होकर बनने वाली सड़क का चौड़ीकरण कार्य भी पूरा करा लिया जाएगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने रीवा शहर के उत्तरी छोर में निर्माणाधीन चोरहटा-रतहरा बायपास के सिक्स लेन चौड़ीकरण मार्ग की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि रीवा का संभागीय मुख्यालय प्रदेश का पहला संभागीय मुख्यालय होगा जहाँ आगामी माह में शहर के चारों तरफ बायपास या रिंगरोड का निर्माण हो जाएगा। कलेक्टर मती प्रतिभा पाल ने राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि 9 एवं 10 फरवरी को शिविर आयोजित कर किसानों से सहमति पत्र लेकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं जिससे शीघ्र ही जमीन का अधिग्रहण किया जाकर नियत समय में चौड़ीकरण कार्य किया जा सके। बैठक में ढेकहा तिराहा के चौड़ीकरण तथा एयरपोर्ट विस्तार कार्य पर भी चर्चा की गई। बैठक में अपर कलेक्टर मती सपना त्रिपाठी सहित राजस्व एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारी तथा संबंधित गांवों के किसान उपस्थित रहे।  

12 फरवरी से शुरू होगा उज्जैन में 139 दिवसीय विक्रमोत्सव: अपर मुख्य सचिव श्री शुक्ला

भोपाल. अपर मुख्य सचिव संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व  शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि सृष्टि सृजनकर्ता महादेव के भव्य-दिव्य महाशिवरात्रि उत्सव से 15 फरवरी को विक्रमोत्सव-2026 का भव्य औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। महोत्सव सृष्टि निर्माण दिवस वर्ष प्रतिपदा से होते हुए पंच महाभूतों में अतिविशिष्ट जल तत्व के संरक्षण, संवर्धन के लिए विशिष्ट रूप से नियोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन पर अपनी पूर्णता जो प्राप्त करेगा। इसके पूर्व 12 फरवरी से महाकाल वन मेला में हर्बल उत्पादों एवं पारंपरिक हर्बल ज्ञान के विषय में प्रदर्शनी, उत्पादकों का प्रदर्शन किया जायेगा। इस तरह 12 फरवरी से 30 जून, 2026 तक यह 139 दिवसीय आयोजन देश तथा दुनिया में आयोजित होने वाला सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का एक अनूठा उत्सव होगा। अपर मुख्य सचिव  शुक्ला ने बताया कि प्रथम चरण महाशिवरात्रि के अवसर पर 15 फरवरी को सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम द्वारा शिवोऽहम महादेव की आराधना से प्रारंभ होगा। द्वितीय चरण 19 मार्च से 30 जून 2026 तक जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत सम्पन्न होगा। इसमें 41 से अधिक बहुआयामी गतिविधियों में 4 हजार से अधिक कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी जायेंगी। अपर मुख्य सचिव  शुक्ला ने यह जानकारी एमपीटी लेक व्यू रेजिडेंसी में पत्रकार वार्ता के दौरान दी। इस अवसर पर संस्कृति संचालनालय के  एन.पी. नामदेव, मुख्यमंत्रीजी के संस्कृति सलाहकार एवं महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक राम तिवारी, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी एवं दत्तोपंत ठेंगडी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश मिश्रा उपस्थित थे। देश का सबसे बड़ा सम्मान होगा सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण अपर मुख्य सचिव  शुक्ला ने बताया कि गणनायक सम्राट विक्रमादित्य की स्मृति को सुरक्षित रखने तथा उनके शौर्य, औदार्य, न्यायप्रियता तथा धर्म एवं प्रजावत्सल गुणों को समाज में पुनःस्थापित करने की दृष्टि से राशि रूपये 1 करोड़ 1 लाख का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान स्थापित किया गया है। इसके साथ ही सम्राट विक्रमादित्य के नाम से 21 लाख रूपये का एक राष्ट्रीय सम्मान एवं 5-5 लाख रुपये राशि के 3 राज्य स्तरीय सम्मान स्थापित किये हैं। अपर मुख्य सचिव  शुक्ला ने बताया कि 139 दिवसीय इस महोत्सव में 41 से अधिक बहुआयामी गतिविधियाँ संचालित की जाएगी। शिवरात्रि मेलों का शुभारंभ, महाकाल वन मेला, कृषि मेला, कलश यात्रा, विक्रम व्यापार मेला, संगीत, नृत्य, वादन, शिवोद्य, शिवपुराण, अनादि पर्व, विक्रम नाट्य समोराह, पुतुल समारोह, संगीत का उद्भव और विकास पर केंद्रित अनहद वैचारिक समागम, चित्र प्रदर्शनियाँ, संगोष्ठी, विक्रमादित्य का न्याय समागम, भारतीय इतिहास समागम, राष्ट्रीय विज्ञान समागम, वेद अंताक्षरी, कोटि सूर्योपासना, शिल्प कला कार्यशाला, प्रकाशन लोकार्पण, पौराणिक फिल्मों का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, बोलियों एवं हिन्दी रचनाओं का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर मातृशक्ति कवयित्री सम्मेलन, ड्रोन शो व ख्यात कलाकारों प्रीतम तथा विशाल मिश्रा की प्रस्तुतियाँ शामिल है। इसके साथ ही भारतीय कालगणना पर केन्द्रित विक्रम पंचांग सहित विविध पुस्तकों का लोकार्पण किया जाएगा। और सबसे महत्वपूर्ण देश का सबसे बड़ा सम्मान सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय अलंकरण विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। उज्जैन के दशहरा मैदान में महाकाल वन मेला का आयोजन विक्रमोत्सव अंतर्गत 12 से 16 फरवरी तक उज्जैन के दशहरा मैदान में महाकाल वन मेला आयोजित किया जा रहा है। इसमें हर्बल उत्पादों एवं पारंपरिक हर्बल ज्ञान के विषय में प्रदर्शनी, उत्पादकों का प्रदर्शन किया जायेगा। साथ ही इसमें आयुर्वेदिक डॉक्टरों द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच की जायेगी तथा इस मौके पर सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी आयोजित की जा रही है। देव महादेव पर्वः प्रदेश के 60 से अधिक प्रमुख शिव मंदिरों में मेलों का आयोजन महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव की कलापरक और सांस्कृतिक आराधना के अंतर्गत प्रदेश के 60 से अधिक प्रमुख शिव मंदिरों में मेलो का आयोजन किया जा रहा है। इसमें मंदिरों की साज सज्जा, साफ-सफाई एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ प्रमुख है। पौराणिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, जनजातीय विषयों पर केन्द्रित प्रदर्शनियाँ विक्रमोत्सव अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ परिसर एवं कालिदास संस्कृत अकादमी परिसर में पौराणिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और जनजातीय विषयों पर 7 विभिन्न प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या, आर्ष भारत, महाभारतकालीन अस्त्र-शस्त्र, चक्रव्यूह, पताकाएँ, शंख, 84 महादेव, जनजातीय देवलोक, कृष्ण प्रभात एवं रागमाला प्रमुख है। इन प्रदर्शनियों को महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा तैयार किया गया है। विक्रम नाट्य समारोह में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की प्रस्तुतियों का मंचन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुकी नाट्य प्रस्तुतियों पर केन्द्रित दस दिवसीय विक्रम नाट्य समारोह में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा तैयार की गई प्रस्तुतियों जटायुवधम्, चारूदत्तम, भरतवाक्य, जाति जीवनम्, अभिज्ञान शाकुन्तलम् और चतुर्भाणी के मंचन के साथ ही अंधायुग, भूमि सूर्य वीरगाथा, आदि-अनंत, अभंग नाद, सौगंधिकाहरणं का भी मंचन किया जाएगा। पुतुल समारोह 25 से 28 फरवरी तक भारत की विभिन्न पुतुल (कठपुतली) शैलियों पर आधारित पुतुल समारोह में 6 विभिन्न शैलियों में कठपुतलियों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य, भीम और बकासुर, आठवां, द आर्चर स्टूड अलोन, दुर्योधन वधम् व पद्मगाथा की प्रस्तुतियाँ होगी। भारतीय कवि सम्मेलनों का आयोजन लोकरंजन के अंतर्गत 1 मार्च को जनजातीय भाषा एवं बोलियों का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश भर के विभिन्न बोलियों एवं भाषा के लगभग 9 कवि अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर नारी शक्ति अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन आयोजित किया जायेगा। इसमें देश-प्रदेश की 9 महिला कवयित्रियों का कविता पाठ होगा। इसके साथ ही 14 मार्च को देशभर के 10 सुप्रसिद्ध एवं जाने-माने कवियों का कविता पाठ होगा। इसका संचालन अंतर्राष्ट्रीय कवि दिनेश दिग्गज करेंगे। शिव पुराण शिवपुराण के अंतर्गत 13 से 17 मार्च तक भारतीय ज्ञान परंपरा के 18पुराणों में से एक शिव पुराण आख्यान पर आधरित चित्र प्रदर्शनी, लोक नृत्य तथा नृत्य नाटिकाओं का आयोजन होगा। अंतर्राष्ट्रीय पौराणिक फिल्म महोत्सव में 25 से अधिक देश होंगे शामिल पौराणिक फिल्मों का अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव 13 से 17 मार्च 2026 तक उज्जैन में आयोजित किया जा रहा है। इसमें 25 से देश शामिल हो रहे है। इसके साथ ही समारोह में अंग्रेजी, फ्रेंच, हिबरू, रसियन, स्पेनिश, इटेलियन, डच, मंगोलियन, फिजियन, इन्डोनेशियन, अफरीकन, नाइजिरियन, सिंहली, ग्रीक, भाषाओं की 25 से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन होगा। इस फिल्म समारोह में महाभारत पर केन्द्रित फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जायेगा।  

अक्षरधाम मंदिर में उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने की नागरिकों की सुख-समृद्धि के लिये प्रार्थना

भोपाल उपमुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने इंदौर में स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में स्वामीनारायण की आरती कर नागरिकों के लिए सुख एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर इंदौर अतिसुंदर रूप में निर्मित हुआ है। मंदिर में आकर अत्यंत आत्मिक शांति मिली है। मंदिर से बड़ी संख्या में भक्त जुड़कर सफलतम जीवन की कामना करते हैं और जीवन के हर क्षेत्र में सफल होते हैं। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि यहां पहुंचकर स्वामीनारायण के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पूर्व सांसद  कृष्णमुरारी मोघे ने भी स्वामीनारायण भगवान की आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया। अतिथियों को मंदिर समिति के सेवादारों ने शॉल, फल एवं साहित्य भेंट किया। इस अवसर पर  जे.पी. मूलचंदानी,  नीलेंद्र अजमेरा,  राकेश अजमेरा,  रमेश भाई पटेल,  गिरीश नीमा सहित सेवा मंडल के सदस्य उपस्थित थे।  

23 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक होगी आरक्षक (जी.डी.) भर्ती 2025 की द्वितीय चरण PET

भोपाल. आरक्षक (जी.डी.) एवं आरक्षक (रेडियों) के कुल 7500 पदों पर भर्ती हेतु मध्‍यप्रदेश कर्मचारी मंडल भोपाल द्वारा ऑनलाईन परीक्षा दिनांक 30.10.2025 से 15.12.2025 तक आयोजित कराई गई थी। उक्त परीक्षा का परिणाम दिनांक 25.01.2026 को वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर घोषित किया जा चुका है। सफल उम्‍मीदवार को अगले चरण के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा physical proficiency test (PPT) ली जाएगी। अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का परीक्षण एवं 800 मीटर दौड़, लम्बी कूद एवं गोला फेंक मध्यप्रदेश के 10 स्थानों पर 23 फरवरी से 13 मार्च 2025 तक प्रतिदिन प्रात: 6:00 बजे से आरंभ होगी। ऑनलाइन परीक्षा में सफल उम्मीदवार म.प्र.कर्मचारी चयन मंडल की वेबसाइट से अपना सूचना पत्र डाउनलोड कर निर्धारित शारीरिक प्रवीणता परीक्षा स्थल पर पहुंचे। सभी उम्मीदवारों को उनकी निर्धारित दिनांक को ही पहुंचना आवश्यक है। उम्मीदवार को शारीरिक प्रवीणता के लिये जो दिनांक व स्थान सूचित किया जा रहा है उस दिनांक व स्थान में कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा। इन जगहों पर होगा शारीरिक दक्षता परीक्षा का आयोजन भोपाल में लाल परेड ग्राउड भोपाल, इंदौर में माउण्टेड ट्रूप डिपार्टमेंट (MTD) परिसर आरएपीटीसी इन्दौर, जबलपुर में परेड ग्राउण्ड 6वीं वाहिनी विसबल रांझी जबलपुर, ग्वालियर में परेड ग्राउण्ड 14वीं वाहिनी विसबल कम्पू ग्वालियर, उज्जैन में महानंदा एरीना ग्राउण्ड देवास रोड उज्जैन, सागर में शासकीय इंदिरा गांधी इंजीनियरिंग कालेज बहेरिया सागर, रीवा में परेड ग्राउण्ड 9वीं वाहिनी विसबल रीवा, बालाघाट में फुटबॉल/हॉकी ग्राउण्उ 36वीं वाहिनी विसबल बालाघाट, रतलाम में भगत सिंह शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बस स्टैण्ड के पास जावरा रतलाम तथा मुरैना में परेड ग्राउण्ड 05वीं वाहिनी विसबल मुरैना में आयोजित होगी। शारीरिक दक्षता चयन के विभिन्न चरणों में आधार ई-केवायसी सत्यापन कराया जाएगा। अत: अभ्यार्थी अपना आधार कार्ड साथ लेकर आएं। अभ्यर्थी यह भी सुनिश्चित करें कि उनका आधार नम्बर उनके द्वारा लॉक न कर दिया गया हो। दस्तावेज परीक्षण हेतु उम्मीदवारों को समस्त मूल आवश्यक प्रमाण-पत्र एवं उनकी स्वयं प्रमाणित छायाप्रति (photocopy) साथ लेकर उपस्थित होना अनिवार्य है।