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उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति और सरल, सुगम विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराएं : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल विद्युत वितरण प्रणाली को निर्बाध बनाने तथा विद्युत समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर की अध्यक्षता में बुधवार को रोशनी घर स्थित विधुत विभाग के कार्यालय ग्वालियर में समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। इस अवसर पर मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य अभियंता  विनोद कटारे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ ही बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु तत्परता के साथ पहल करने तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि प्रत्येक उपभोक्ता को सरल, सुगम एवं बेहतर विद्युत सेवाएं उपलब्ध हों। नवरात्रि तथा दीपावली पर्व पर उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराना हमारा दायित्व है। हम यह सुनिश्चित करें कि ट्रिपिंग की स्थिति निर्मित न हो, इसके लिए मुख्य रूप से ओवरलोडिंग, शॉर्ट सर्किट और अर्थ लीकेज जैसी समस्याओं को रोकना जरूरी है।  

स्वामित्व योजना पर संकट! MP में 50 लाख मुफ्त रजिस्ट्रियों पर पटवारियों का विरोध

भोपाल  मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत तैयार होने वाल संपत्ति दस्तावेजों का काम शुरू ही नहीं हो पाया हैं। पटवारियों के साा ही अब तहसीलदार भी विरोध में उतर आए हैं। एक साथ पटवारी के हस्ताक्षर को लेकर राजस्व अमले ने सवाल उठाए हैं। मंगलवार को तहसीलदार संघ, राजस्व निरीक्षक संघ, मध्यप्रदेश पटवारी संघ और प्रांतीय पटवारी संघ ने संयुक्त रूप से कहा कि पटवारी योजना के काम में पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं, लेकिन जिस संपत्ति में उनका कोई स्वामित्व या कानूनी अधिकार नहीं है, उसके दस्तावेज पर उन्हें ‘निष्पादक’  के रूप में हस्ताक्षर करने की जिम्मेदारी क्यों दी जा रही है, इसका वैधानिक आधार स्पष्ट होना चाहिए। संघों ने 13 अगस्त 2026 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इसमें पटवारी को दस्तावेज के निष्पादन की भूमिका दिए जाने की बात है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह अधिकार किस अधिनियम, नियम, राजपत्र या वैध डेलिगेशन के तहत मिला है। संघों ने आदेश से जुड़ी मूल फाइल, अनुमोदन और रिकॉर्ड की जांच की मांग भी की है।  रिकॉर्ड की जांच और दस्तावेज पर हस्ताक्षर अलग-अलग काम राजस्व अमले का तर्क है कि जमीन का सर्वे, सीमांकन, मौके का सत्यापन और राजस्व रिकॉर्ड की जांच करना अलग काम है, जबकि किसी संपत्ति संबंधी कानूनी दस्तावेज को शासन या स्वामी की ओर से निष्पादित करना अलग। उनके मुताबिक मैदानी और रिकॉर्ड संबंधी जिम्मेदारी होने मात्र से पटवारी को संपत्ति दस्तावेज execute करने का अधिकार नहीं मिल जाता। संघों ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 और भू-अभिलेख नियमावली 2020 का हवाला देते हुए कहा कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिसमें पटवारी को स्वतंत्र रूप से इस तरह की एग्जीक्यूशनरी पावर दी गई हो।  हरियाणा-राजस्थान का हवाला संघ ने दावा किया कि हरियाणा और राजस्थान में अधिकार अभिलेख देने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन मध्यप्रदेश में रजिस्ट्री में पटवारियों को निष्पादक बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि भविष्य में विवाद होने पर इसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। 3500 से 4000 रजिस्ट्रियां रोज प्रदेश में सामान्य दिनों में रोजाना औसतन 3500 से 4000 रजिस्ट्रियां होती हैं। ऐसे में स्वामित्व योजना की रजिस्ट्रियों पर रोक का सीधा असर ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले मालिकाना हक की प्रक्रिया पर पड़ रहा है। पटवारियों की अन्य मांगें     2100 से बढ़ाकर 2400 रुपये ग्रेड पे करने की मांग।     पीएम किसान, सीएम किसान और फार्मर आईडी का काम कृषि विभाग को देने की मांग।     अतिरिक्त काम का भार कम करने की मांग।     सरकार कार्रवाई करती है तो सामूहिक रणनीति बनाने की चेतावनी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला संघों ने के. गोपी बनाम द सब-रजिस्ट्रार एवं अन्य मामले में 7 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि इस फैसले में दस्तावेज के निष्पादन और उससे जुड़े अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है। इसी आधार पर वे सवाल उठा रहे हैं कि जब पटवारी के पास संबंधित संपत्ति में कोई टाइटल,राइट याइंटरेस्ट नहीं है, तो उसे एक्जीक्यूटेंट की भूमिका किस कानूनी अधिकार से दी गई है। संघों ने संविधान के अनुच्छेद 299 का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि यदि दस्तावेज राज्य की ओर से निष्पादित किए जा रहे हैं तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि पटवारी को राज्य की ओर से ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने और राज्य को उससे बाध्य करने की शक्ति किस प्रावधान से मिली है।   पंजीयन की भूमिका अलग, निष्पादन पर सवाल संघों के अनुसार स्वामित्व प्रक्रिया में पंजीयन और दस्तावेज का निष्पादन दो अलग कानूनी कार्य हैं। पंजीयन के लिए तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक या प्रभारी राजस्व निरीक्षक को Sub-Registrar की भूमिका दिए जाने का उल्लेख है, लेकिन पटवारी को एक्जीक्यूटेंट बनाने का अलग वैधानिक आधार स्पष्ट नहीं है। राजस्व अमले का कहना है कि ड्रोन सर्वे, ग्राउंड ट्रूथिंग, सीमांकन, पहचान और रिकॉर्ड सत्यापन जैसे काम पटवारी पहले की तरह करते रहेंगे। आपत्ति केवल अंतिम संपत्ति दस्तावेज पर हस्ताक्षर और उससे जुड़ी कानूनी जवाबदेही को लेकर है।  योजना के खिलाफ नहीं, भूमिका स्पष्ट करने की मांग संघों ने साफ किया कि उनकी आपत्ति स्वामित्य योजना के खिलाफ नहीं है। उनके मुताबिक योजना से ग्रामीणों को संपत्ति का रिकॉर्ड मिल रहा है और बैंक ऋण जैसी सुविधाओं का रास्ता भी आसान हो रहा है। संघों की मांग है कि दस्तावेज का निष्पादन कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, एसडीओ/एसडीएम या शासन द्वारा विधि-सम्मत रूप से अधिकृत सक्षम अधिकारी से कराया जाए। साथ ही पटवारियों की मैदानी और अभिलेखीय भूमिका स्पष्ट रखते हुए उन्हें लिखित मार्गदर्शन और कानूनी संरक्षण दिया जाए। उनका कहना है कि जिस काम की वैधानिक अधिकारिता स्पष्ट नहीं है, उसमें व्यक्तिगत कानूनी जवाबदेही लेकर हस्ताक्षर करना उचित नहीं होगा। 

विगत एक सप्ताह में लगभग 1 करोड़ 62 लाख रुपये से अधिक के अवैध मादक पदार्थ एवं अन्य संपत्ति जब्त

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थों की तस्करी, परिवहन एवं अवैध खेती के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विगत एक सप्ताह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस ने कार्यवाही कर गांजा, ब्राउन शुगर, स्मैक, अफीम एवं डोडाचूरा सहित बड़ी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ जब्त किए है। कार्रवाई के दौरान आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ लगभग 1 करोड़ 62 लाख रुपये से अधिक के अवैध मादक पदार्थ एवं अन्य संपत्ति जब्त की है। रतलाम जिले के सरवन थाना क्षेत्र में पुलिस ने शासकीय भूमि पर कपास-मक्का की फसल के बीच की जा रही अवैध गांजे की खेती का खुलासा करते हुए 2,948 हरे गांजे के पौधे, कुल वजन 724 किलोग्राम जिसकी अनुमानित कीमत 70 लाख रुपये है, जब्त किए है। विदिशा थाना कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 20 ग्राम अवैध ब्राउन शुगर के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से ब्राउन शुगर एवं मोटरसाइकिल सहित लगभग 2 लाख 50 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है। वहीं, ऑपरेशन क्लीन स्वीप के तहत ब्राउन शुगर तस्करी नेटवर्क का खुलासा करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 38.56 ग्राम ब्राउन शुगर, ईकोस्पोर्ट कार, मोटरसाइकिल एवं 5 मोबाइल सहित लगभग 16 लाख 50 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है। इसके अतिरिक्‍त थाना कोतवाली और सिविल लाइन पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाइयों में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से 80 ग्राम ब्राउन शुगर और वाहनों सहित लगभग 12 लाख 81 हजार रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है।  इस प्रकार विदिशा पुलिस ने इन कार्रवाईयों में लगभग 31 लाख  81 हजार रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। धार जिले के मनावर में पुलिस ने ग्राम उकाला के तीन खेतों पर एक साथ कार्यवाही कर अवैध रूप से उगाए गए गांजे के 229 हरे पौधे, करीब 170 किलोग्राम, जिसकी अनुमानित कीमत 20 लाख रुपये है, जब्त किए। देवास जिले के सोनकच्छ में पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार के तहत ड्रोन की मदद से अवैध गांजा खेती का खुलासा कर 354 गांजे के पौधे, कुल वजन 700 किलोग्राम गांजा, अनुमानित कीमत 15 लाख रुपये जब्त किया है। राजगढ़ जिले में ऑपरेशन शुद्धि के तहत थाना कोतवाली एवं विशेष टीम की संयुक्त कार्रवाई में 50.860 किलोग्राम अवैध गांज एवं कार सहित लगभग 11 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है। साथ ही 1 आरोपी को गिरफ्तार किया है। मंदसौर जिले में थाना सीतामऊ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 2 किलो 978 ग्राम अवैध अफीम एवं मोटरसाइकिल सहित लगभग 4 लाख 90 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है। वहीं थाना सुवासरा की चौकी रूनिजा पुलिस ने 62 किलो 900 ग्राम अवैध डोडाचूरा, दो मोबाइल, एक कीपेड मोबाइल एवं कार सहित लगभग 1 लाख 55 हजार रुपये की संपत्ति जब्‍त की है। इसी प्रकार थाना गरोठ पुलिस ने संतरे के बगीचे के बीच से अवैध मादक पदार्थ गांजे के 107 हरे पौधे तथा मोबाइल सहित लगभग 1 लाख 10 हजार रुपये की संपत्ति जब्‍त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। इस प्रकार मंदसौर जिले की तीनों कार्रवाईयों में लगभग 7 लाख 55 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है। गुना जिले की मृगवास थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अवैध स्मैक के साथ दो अंतर्राज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 20.61 ग्राम स्मैक तथा तस्करी में प्रयुक्त मोटरसाइकिल सहित लगभग 3 लाख 10 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है। छिंदवाड़ा जिले के थाना कोतवाली, कुण्डीपुरा एवं देहात पुलिस ने तीन अलग-अलग कार्रवाईयों में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 किलो 46 ग्राम अवैध गांजा, जिसकी अनुमानित कीमत 1 लाख 77 हजार रुपये है, जब्त किया है। आरोपियों के विरुद्ध NDPS Act के तहत प्रकरण दर्ज कर गांजे के स्रोत एवं सप्लाई नेटवर्क की जांच की जा रही है। नरसिंहपुर थाना करेली अंतर्गत पुलिस ने एक आरोपी से 12.7 ग्राम अवैध स्मैक सहित लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये की संपत्ति जब्‍त कर आरोपी को गिरफ्तार किया है। शिवपुरी थाना कोतवाली पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 5 किलो 500 ग्राम गांजा, एवं एक मोटरसाइकिल सहित लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है। मध्यप्रदेश पुलिस नशे के कारोबार से जुड़े प्रत्येक स्तर—स्रोत, परिवहन, सप्लाई एवं तस्करी नेटवर्क—पर कार्रवाई करते हुए प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।  

मुख्य अभियंताओं के सात दलों ने 35 निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण; 18 कार्यों में आंशिक सुधार के निर्देश

भोपाल लोक निर्माण विभाग के मंत्री  राकेश सिंह एवं प्रमुख सचिव  सुखवीर सिंह के निर्देशानुसार निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में सुधार के लिए तैयार कार्ययोजना के अंतर्गत 05 अक्टूबर 2026 को प्रदेश के सात जिलों में औचक निरीक्षण किया गया। मुख्य अभियंताओं के सात दलों ने सीहोर, मंडला, मुरैना, धार, सतना, उज्जैन एवं छतरपुर जिलों में यादृच्छिक आधार पर चयनित कुल 35 निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इनमें लोक निर्माण विभाग के सड़क एवं पुल संबंधी 21 कार्य, परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) के 04 भवन कार्य, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के 06 कार्य, मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के 03 कार्य तथा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) का 01 कार्य शामिल था। निरीक्षण दलों से प्राप्त प्रतिवेदनों की समीक्षा के लिए मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रमुख अभियंता (सड़क/पुल)  आर.एल. वर्मा, प्रमुख अभियंता (एमपीआरडीसी)  के.पी.एस. राणा, प्रमुख अभियंता (भवन)  एस.आर. बघेल तथा प्रमुख अभियंता (एमपीबीडीसी)  अजय वास्तव सहित मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री एवं निरीक्षणकर्ता अधिकारी ऑनलाइन उपस्थित रहे। मंडला मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण की गुणवत्ता की सराहना निरीक्षण के दौरान मंडला जिले में मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा निर्माणाधीन नवीन मेडिकल कॉलेज भवन का कार्य संतोषजनक एवं गुणवत्तापूर्ण पाया गया। इसके लिए संभागीय प्रबंधक  मानवेंद्र सिंह सेंगर, प्रबंधक  सुभेश पांडे, प्रबंधक  मयंक जैन तथा निर्माण एजेंसी मेसर्स बीपीसी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, रांची की सराहना की गई। निरीक्षण किए गए कुल 35 कार्यों में से 18 कार्यों में आवश्यकतानुसार आंशिक सुधार के निर्देश दिए गए। प्रबंध संचालक  भरत यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि औचक निरीक्षण में सामने आई कमियों को गंभीरता से लेते हुए उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाए। शिकायतों का समयबद्ध एवं संतुष्टिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें समीक्षा बैठक में प्रबंध संचालक ने निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का निराकरण शिकायतकर्ता को अवगत कराते हुए संतुष्टिपूर्ण ढंग से सुनिश्चित किया जाए। मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण यंत्री स्वयं इसकी नियमित समीक्षा करें, ताकि आगामी माह की ग्रेडिंग में सुधार हो। लोकपथ ऐप पर प्राप्त शिकायतों का निर्धारित 04 दिवस की समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने तथा ऐप के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए। गुणवत्ता एवं सड़क सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन प्रबंध संचालक ने सभी अधिकारियों को निर्माण परियोजनाओं में निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन सुनिश्चित कराने तथा सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में सक्रिय भागीदारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परियोजना में सड़क सुरक्षा से संबंधित मानकों एवं नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा। सड़क मरम्मत के साथ सड़क सुरक्षा संबंधी कार्य, सड़क किनारे झाड़-झंखाड़ की सफाई, रोड मार्किंग तथा साइन बोर्ड की मरम्मत एवं पेंटिंग निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। सड़कों एवं पुल-पुलियाओं के आवश्यक संधारण कार्य भी शीघ्र पूर्ण करने को कहा गया। 30 अक्टूबर तक गड्ढों की मरम्मत एवं ब्लैक स्पॉट सुधार के निर्देश सड़कों की मरम्मत के लिए आवश्यकतानुसार अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन कार्ययोजनाएं तैयार कर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सड़कों के सभी छोटे-बड़े गड्ढों की मरम्मत तथा ब्लैक स्पॉट सुधार के कार्य 30 अक्टूबर तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। पैदल यात्रियों की सुरक्षा एवं मॉडर्न स्कूल जंक्शन विकसित करने संबंधी प्रस्ताव संबंधित शाखा को भेजने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही, नवीन लक्ष्यों के अनुरूप लोक कल्याण सरोवरों के निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से पूर्ण करना सुनिश्चित किया जाए।  

सभी विभाग समय सीमा में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक करें

भोपाल  राज्य शासन ने मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के अनुसार अनिवार्य रूप से  अधीनस्थ कार्यालयों को समय-सीमा में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैँ जिससे पात्र लोक सेवकों को समय पर पदोन्नति प्राप्त हो सके। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस सम्बन्ध मे सभी विभागों, संभागायुक्तों, विभागध्यक्ष एवं कलेक्टर्स को विस्तृत निर्देश दिए हैँ। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के नियम 6 के अनुसार प्रत्येक चयन वर्ष के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित किए जाने का स्पष्ट प्रावधान है। प्रत्येक चयन वर्ष के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक उसके पूर्ववर्ती वर्ष में सामान्यतः माह सितम्बर से माह नवम्बर के मध्य आयोजित की जाना अनिवार्य है। इस बैठक में आगामी चयन वर्ष की 31 दिसम्बर के पूर्वान्ह तक की स्थिति में उपलब्ध उद्भूत होने वाली समस्त संभावित एवं अप्रत्याशित रिक्तियों के लिए पदोन्नति के लिए लोक सेवकों की उपयुक्तता पर विचार किया जाएगा। पूर्व में 31 दिसम्बर, 2025 के पूर्वान्ह तक की रिक्तियों के लिये एक विशेष विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक इस नियम के प्रवृत्त होने के उपरांत की गई थी,जिसके आधार पर वर्ष 2026 में पदोन्नति की कार्यवाही की गई है अथवा प्रचलन में है। परिपत्र में कहा गया है कि वर्ष 2025 में पुनः माह सितम्बर से माह नवम्बर के मध्य वर्ष 2026 में उत्पन्न हुई कोई अप्रत्याशित रिक्ति जो प्रतीक्षा सूची से भी नहीं भरी जा सकी हो एवं चयन वर्ष अर्थात 31 दिसम्बर 2026 के पूर्वान्ह तक की प्रत्याशित रिक्तियों को भरने के लिये विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक की जानी थी। सामान्य प्रशासन विभाग ने निर्देश दिए हैं। कि विभागों द्वारा 31 दिसंबर 2026 के पूर्वान्ह तक की प्रत्याशित रिक्तियों को भरने के लिये यदि बैठक आयोजित नहीं की गई हो तो बैठक आयोजित की जाए। विभाग द्वारा यदि विशेष विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक 31 दिसंबर 2025 के पूर्वान्ह तक की प्रत्याशित रिक्तियों को भरने के साथ ही 31 दिसंबर 2026 के पूर्वान्ह तक की प्रत्याशित रिक्तियों को भरने की कार्यवाही की जा चुकी हो तो बैठक के आयोजन की आवश्यकता नहीं होगी। परिपत्र के अनुसार वर्ष 2026 में उत्पन्न हुई कोई अप्रत्याशित रिक्ति जो प्रतीक्षा सूची से भी नहीं भरी जा सकी हो एवं आगामी चयन वर्ष अर्थात 31 दिसम्बर 2027 के पूर्वान्ह तक की प्रत्याशित रिक्तियों को भरने के लिये विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक भी इसी वर्ष माह सितम्बर से नवम्बर के मध्य किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

वन्य-जीव संरक्षण के प्रति जन-भागीदारी एवं जागरूकता बढ़ाने का लिया संकल्प

भोपाल वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में वन्य-जीव सप्ताह-2026 के समापन अवसर पर बुधवार 7 अक्टूबर को विविध कार्यक्रमों का आयोजन गरिमापूर्ण एवं उत्साहपूर्ण किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वन्य-जीवों एवं जैव-विविधता के संरक्षण के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाना, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना तथा वन्य-जीव संरक्षण में जन-भागीदारी को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक  मनोज कुमार अग्रवाल ने उद्बोधन में उन्होंने सुरक्षित वन, समृद्ध वन्य-जीव, सशक्त समुदाय और वैज्ञानिक वन प्रबंधन पर प्रकाश डाला। वन्य-जीव संरक्षण में जन-भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही वन्य-जीव एवं जैव-विविधता का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है। वन एवं वन्य-जीव मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में वन्य-जीवों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस अवसर पर संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान  विजय कुमार द्वारा स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए वन्य-जीव सप्ताह-2026 के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, अधिकारियों-कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों को वन्य-जीव एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने तथा वन एवं वन्य-जीवों की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने की शपथ दिलाई गई। उपस्थितजनों ने प्रकृति, वन्य-जीव एवं जैव-विविधता के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता का संकल्प लिया। इस अवसर पर भोपाल बर्ड फेस्टिवल-2027 के पोस्टर का विमोचन किया गया। यह आयोजन भोपाल बर्ड्स संस्था द्वारा मध्यप्रदेश राज्य जैव-विविधता बोर्ड एवं मध्यप्रदेश वन विभाग के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। पोस्टर विमोचन के माध्यम से भोपाल की समृद्ध पक्षी विविधता, पक्षी संरक्षण एवं नागरिकों की सहभागित्ता को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया। साथ ही "बर्ड्स, कॉल्स ऑफ वन विहार नेशनल पार्क" पोस्टर का भी विमोचन किया गया। यह पोस्टर भोपाल बर्ड्स एवं वन विहार नेशनल पार्क द्वारा तैयार किया गया है। इसके माध्यम से वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले पक्षियों की विविधता एवं उनकी विशिष्ट आवाजों के प्रति लोगों में जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया गया है। वन्य-जीव सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। साथ ही वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के उन कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने दायित्वों का उत्कृष्ट निर्वहन करते हुए वन्य-जीव संरक्षण, प्रबंधन एवं जन-जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (उत्पादन) मती बिंदु शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास)  अन्निगेरी, सदस्य सचिव म.प्र. जैव-विविधता बोर्ड  सुदीप सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट)  एम.एल. मीना, प्रबंध संचालक म.प्र. लघु वनोपज संघ मती कमलिका मोहंता, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन-2)  अजय कुमार यादव, वन संरक्षक भोपाल वृत्त  क्षितिज कुमार, वन मंडलाधिकारी भोपाल वनमंडल  लोकप्रिय भारती सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी और भी उपस्थित रहे। साथ ही वन्य-जीव प्रेमी, प्रकृति एवं पक्षी विशेषज्ञ, प्रतियोगिताओं के प्रतिभागी तथा अन्य अतिथि उपस्थित रहे।  

मध्यप्रदेश की धरती पर बुंदेलखंड में चीतों को मिला तीसरा ठिकाना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन्य जीव हमारे वनों के आभूषण हैं। इन्हें संजोकर रखना हम सबका दायित्व है। उन्होंने कहा कि मप्र की धरती पर वन्य जीवों का संरक्षण और संवर्धन हमारा मिशन है और यह मिशन लगातार भी जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार सागर के रहली में वन्य जीव सप्ताह समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 2 चीते (नर 'व्योम' और मादा 'नीरा') के लिए तैयार किए गए सुरक्षित बाड़े (सॉफ्ट रिलीज बोमा) में विमुक्त किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चीता मित्रों और बाघिन दीदी से भी संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर अभयारण्य के बाद नौरादेही टाइगर रिजर्व में चीतों को नया ठिकाना मिला है। बुंदेलखंड स्थित वीरांगना दुर्गावती अभयारण्य प्रदेश में तीसरा ऐसा स्थान बना है, जहां चीते अपने अनुकूल प्राकृतिक आवास में स्वच्छंद होकर विचरण करेंगे। नौरादेही में 41 वर्ष पहले टाइगर रिजर्व की स्थापना हुई थी। यह अभयारण्य सबसे खास होगा, क्योंकि अब नौरादेही में पर्यटकों को चीता और टाइगर एक ही रिजर्व में विचरण करते नजर आएंगे। मध्यप्रदेश में चीतों की संख्या अब 60 तक पहुंच गई है। प्रदेश की धरती वन्य प्राणियों के लिए सबसे अनुकूल है। मध्यप्रदेश, देश में सबसे अधिक टाइगर और गिद्धों की संख्या वाला राज्य है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन और वन्य प्राणियों की चिंता करते हुए उनका सभी प्रकार से संरक्षण कर रही है। मध्यप्रदेश में जलचर, थलचर और नभचर सभी प्रकार के जीवों की संख्या निरन्तर बढ़ रही है। राज्य में नर्मदा मैया के वाहन मगरमच्छ को भी संरक्षण दिया जा रहा है। वन समितियों को 20 करोड़ रूपये लाभांश के वितरित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते यह हमारा दायित्व है कि कठिन समय में क्षेत्र के नागरिकों के लिए साथ खड़े रहें। वन्य जीव सप्ताह के समापन के अवसर पर आज वन समितियों को उनके लाभांश का वितरण भी किया गया। नौरादेही टाइगर रिजर्व के आसपास पर्यटकों को घुमाने और उन्हें सुविधाएं प्रदान करने वाली समितियों के सदस्यों को कुल 80 करोड़ की आय में से 20 करोड़ लाभांश के रूप में मिला है। होमस्टे बनाकर अर्जित करें आय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन क्षेत्र के आसपास बफर जोन में होमस्टे सर्विस को प्रोत्साहित किया जा रहा है। गांव में रहने वाले लोग अपने मकान में एक से दो कमरे होमस्टे के लिए तैयार करें और स्वरोजगार पाएं। राज्य सरकार होमस्टे तैयार करने के लिए 2 से 3 लाख रुपए का अनुदान भी दे रही है। ग्राम पंचायतों में बन रही दूग्ध संकलन समितियाँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में हमारी सरकार गौपालन और दूध उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है। गौपालकों से उचित मूल्य पर दूध खरीदने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर सहकारी दूध संकलन समिति बनाई जा रही हैं। इससे किसानों को दूध से निश्चित आय मिलेगी। राज्य सरकार ने पिछले दिनों केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह की मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश की दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा लक्ष्य तय किया है।  प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कूनों में शुरू हुआ चीता प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की धरती से पहले टाइगर और चीते विलुप्त होते जा रहे थे। आज प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और सेवा संकल्प के 25 वर्ष पूर्ण हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी नेतृत्व और मार्गदर्शन में एशिया की धरती पर पहली बार कूनो अभयारण्य से चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई। हमारा प्रयास है कि वनों में सभी वन्य जीव आबाद रहे और मनुष्य भी सहअस्तित्व के भाव से निवास करें। दोनों अपने अनुशासन का पालन करें। आज नौरादेही अभयारण्य में 2 चीते मुक्त आवास में छोड़े गए हैं। अगले महीने 2 और चीते यहां लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि चीता एक ऐसा जीव है, जो सभी को लेकर साथ चलता है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि आज का दिन सागर जिले के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा। नौरादेही टाइगर रिजर्व में लगभग 20 लाख हैक्टेयर वनक्षेत्र है। यहां चीतों को लाए जाने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे। आज हमें दो चीतों की सौगात मिली है। बुंदेलखंड का समग्र विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। संभागीय स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के आयोजन से बुंदेलखंड के अनेक स्थानों पर नए उद्योगों की स्थापना हो रही है। पर्यटन क्षेत्र में भी विकास की अपार संभावनाएं हैं, इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। विधायक एवं पूर्व मंत्री  गोपाल भार्गव ने कहा कि 41 साल पहले नौरादेही अभयारण्य घोषित होते ही स्थानीय लोग आशंकित हो गए थे, कि अब वे जंगल नहीं जा पाएंगे और मवेशियों को कहां लेकर जाएंगे। ऐसे समय में उन्होंने जनजागरुकता के लिए पद यात्रा की थी। विधायक  भार्गव ने कहा कि विपक्ष की सरकार रहते हुए रहली क्षेत्र में विकास की रफ्तार पर ब्रेक लग गया था, लेकिन जब से राज्य में हमारी सरकार आई, क्षेत्र में हर तरफ सड़कें, नदियों पर पुल और गांव-गांव में स्कूल भवन बनकर तैयार होते चले गए। सांसद  राहुल सिंह ने कहा कि नौरादेही टाइगर रिजर्व बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां आज चीते छोड़े गए हैं, जिससे भविष्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए अलग-अलग भाषाओं के प्रशिक्षण के लिए सेंटर खोलने की मांग की। सांसद  सिंह ने कहा कि युवा भाषाई ट्रेनिंग लेकर दक्षता के साथ अच्छे गाइड बन पाएंगे, जो पर्यटकों को सही और सटीक जानकारी प्रदान करेंगे। कार्यक्रम में विधायक  बृज विहारी पटेरिया, विधायक  प्रदीप लारिया, विधायक  शैलेंद्र सिंह, विधायक  वीरेंद्र सिंह लम्बरदार, प्रमुख सचिव वन  राघवेंद्र सिंह, वनबल प्रमुख  शुभरंजन सेन, मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) डॉ. समिता राजौरा, मती रानी कुशवाहा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने पुस्तक, ब्रोशर और पोस्टर का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में पुस्तक, 'गिद्ध संख्या आंकलन 2026', बुंदेली बोली में तैयार वीडीटीआर के पोस्टर, जनभागीदारी आधारित … Read more

वर्चुअल संवाद मंत्री सारंग भोपाल जिले के मुख्य कार्यक्रम में हुए शामिल

भोपाल  विकसित भारत के संकल्प को नई ऊर्जा, नई दिशा और जनभागीदारी का व्यापक स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को विकसित भारत संकल्प सभा के माध्यम से देशवासियों से वर्चुअल संवाद किया। प्रधानमंत्री  मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत देशभर में विकसित भारत संकल्प सभा एवं सेवा ज्योति यात्रा का आयोजन किया गया। प्रदेश में भी विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री तथा विकसित भारत संकल्प सभा (सेवा ज्योति यात्रा) के प्रदेश प्रभारी  विश्वास कैलाश सारंग के नेतृत्व में प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। भोपाल जिले का मुख्य कार्यक्रम रवींद्र भवन में आयोजित किया गया, जिसमें उप-मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, मंत्री सांसद  आलोक शर्मा, विधायक  रामेश्वर शर्मा,  भगवानदास सबनानी, महापौर मती मालती राय सहित जिले के जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए। सभी ने प्रधानमंत्री  मोदी के उद्बोधन को वर्चुअल माध्यम से सुना। इस अवसर पर मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होना देश के लिए सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना को और अधिक मजबूत करने का अवसर है। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल सरकार का लक्ष्य नहीं बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के संकल्प, सहभागिता और सामूहिक प्रयास का परिणाम होगा। सेवा ज्योति यात्रा इसी भावना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण का संदेश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। प्रदेश के प्रत्येक बूथ से जिला केंद्र तक पहुंची सेवा ज्योति यात्रा मंत्री  सारंग ने बताया कि प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं ने प्रत्येक बूथ से जनता के साथ संवाद करते हुए सेवा ज्योति यात्रा के रूप में जिला केंद्रों की ओर प्रस्थान किया। यात्रा के माध्यम से कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने सेवा के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने और विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि भोपाल जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों के विभिन्न बूथों से सेवा ज्योति यात्राएं प्रारंभ हुईं। इन यात्राओं में कार्यकर्ताओं के साथ समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने सहभागिता की। विभिन्न क्षेत्रों से निकलकर सेवा ज्योति यात्राएं रवींद्र भवन स्थित मुख्य कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं, जहां सभी यात्राओं का समागम हुआ। विकसित भारत संकल्प सभा के बाद निकली मशाल यात्रा रवींद्र भवन में आयोजित विकसित भारत संकल्प सभा में प्रधानमंत्री  मोदी के वर्चुअल संवाद के बाद भोपाल जिले में सेवा ज्योति यात्रा का अगला चरण प्रारंभ हुआ। मुख्य कार्यक्रम स्थल से विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के लिए सेवा ज्योति यात्रा के रूप में मशाल यात्रा निकाली गई। मशाल जुलूस के माध्यम से सेवा, सुशासन, जनभागीदारी और विकसित भारत के संकल्प का संदेश प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र और बूथ तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने उत्साहपूर्वक इसमें सहभागिता की। समाज के हर वर्ग की रही सहभागिता मंत्री  सारंग ने बताया कि सेवा ज्योति यात्रा को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में उत्साह देखने को मिला। युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों ने अभियान में सहभागिता कर इसे जनअभियान का स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने कहा कि सेवा का भाव भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का अभिन्न हिस्सा है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश विकास के साथ सेवा और जनकल्याण को भी प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। सेवा से विकसित भारत के संकल्प की ओर मंत्री  सारंग ने कहा कि सेवा ज्योति यात्रा विकसित भारत के संकल्प के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इसका उद्देश्य प्रत्येक बूथ, प्रत्येक विधानसभा और प्रत्येक समाज वर्ग तक सेवा एवं विकसित भारत का संदेश पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मविश्वास के साथ विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे अभियानों के माध्यम से देशवासियों को विकास की यात्रा से जोड़ने और सेवा के संकल्प को मजबूत करने का कार्य किया जा रहा है।

आशीर्वाद का दीया आयोजन के तहत उपयोग किए गए दीयों से बनी नंदी की भव्य आकृति

भोपाल  सेवा संकल्‍प अभियान <br> सेवा की कहानी सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित “आशीर्वाद का दीया” कार्यक्रम में उपयोग किए गए दीयों को नगर  निगम उज्जैन ने कचरा बनने से बचाते हुए रचनात्मक रूप से पुनः उपयोग किया है। दीपोत्सव कार्यक्रम से लगभग 05 लाख से अधिक दीयों से तैयार की गई नंदी की भव्य एवं आकर्षक आकृति न केवल नगर निगम की रचनात्मक पहल को दर्शा रही है, बल्कि 3R (Reduce, Reuse एवं Recycle ) की अवधारणा का प्रभावी संदेश भी दे रही है। हेलीपैड परिसर में स्थापित की गई नंदी की आकृति का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ यादव ने नगर निगम द्वारा उपयोग किए गए दीयों के रचनात्मक पुनः उपयोग की पहल की सराहना की है। इस अवसर पर  संभाग आयुक्त  आशीष सिंह एडीजी  राकेश गुप्ता, डीआईजी,  नवनीत भसीन, कलेक्टर  रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक   प्रदीप शर्मा  तथा  नगर निगम आयुक्त  अभिलाष मिश्रा मौजूद थे।

CM डॉ. यादव का मुंबई दौरा, फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर के उद्योगपतियों से करेंगे संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुंबई में फार्मा, मेडिकल डिवाइस सेक्टर के उद्योगपतियों से करेंगे संवाद सेक्टर आधारित निवेश अवसरों को उद्योगों की जरूरत से जोड़कर रोजगार के नए अवसरों पर रहेगा फोकस भोपाल  मध्यप्रदेश में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 8 अक्टूबर को मुंबई में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे। जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले होने वाले इस संवाद में मध्यप्रदेश में विकसित किए जा रहे विभिन्न सेक्टर के औद्योगिक क्षेत्रों और उनमें उपलब्ध निवेश अवसरों को संबंधित उद्योग समूहों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें भी करेंगे। मुंबई देश के प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी केंद्रों में ही नहीं है बल्कि देश की आर्थिक राजधानी भी है। यहां ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल्स, केमिकल्स और उभरती ऊर्जा प्रौद्योगिकियों से जुड़े बड़े उद्योग समूह हैं। मध्यप्रदेश इन क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को संबंधित कंपनियों तक पहुंचा रहा है, ताकि प्रदेश में विकसित किए जा रहे औद्योगिक अवसरों को उद्योगों की जरूरत और उनकी विस्तार योजनाओं से जोड़ा जा सके। विशेष क्षेत्रों में निवेश के अवसर मुंबई संवाद में ग्वालियर के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, नर्मदापुरम के बाबई मोहासा रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग जोन, धार के पीएम मित्र पार्क और उज्जैन के मेडिकल डिवाइसेज पार्क को प्रमुखता से सामने रखा जाएगा। ये परियोजनाएं अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरत के अनुसार तैयार किए जा रहे विशेष औद्योगिक क्षेत्रों का हिस्सा हैं। ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग, नर्मदापुरम में रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण, धार में टेक्सटाइल और गारमेंट तथा उज्जैन में मेडिकल डिवाइसेज और हेल्थकेयर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उद्योगों के लिए अवसर उपलब्ध हैं। इन क्षेत्रों में निवेश से संबंधित उद्योगों के साथ सहायक इकाइयों और स्थानीय सप्लाई चेन के विकास की संभावनाएं भी बनेंगी। निवेश के साथ रोजगार पर जोर मध्यप्रदेश सरकार का जोर ऐसे निवेश पर है, जिससे प्रदेश में उत्पादन बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ें। बड़ी औद्योगिक इकाइयों के साथ उनके सप्लायर, सहायक उद्योग, लॉजिस्टिक्स और दूसरी सेवाओं का काम भी बढ़ता है। इससे स्थानीय उद्यमियों के लिए नए अवसर और युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बनती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगी। इन बैठकों में कंपनियों की निवेश और विस्तार योजनाओं के साथ उनकी जरूरतों को भी समझा जाएगा। भूमि, बिजली, लॉजिस्टिक्स, कुशल मानव संसाधन, सप्लाई चेन, अनुमतियों और नीतिगत सहयोग जैसे विषयों पर सीधे चर्चा होगी। उद्योगपतियों से मिलने वाले सुझावों के आधार पर प्रदेश की निवेश सुविधा व्यवस्था को उनकी जरूरतों के अनुरूप और बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी। सरकार के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को किस तरह की सुविधाओं और सहयोग की आवश्यकता है। फार्मा और मेडिकल डिवाइसेज क्षेत्र पर विशेष चर्चा मुंबई कार्यक्रम में फार्मास्युटिकल क्षेत्र के साथ केंद्रित राउंडटेबल मीटिंग भी होगी। इसमें मध्यप्रदेश के फार्मा और हेल्थकेयर मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। उज्जैन के मेडिकल डिवाइसेज पार्क से संबंधित प्रेजेंटेशन भी उद्योग प्रतिनिधियों के दिया जाएगा। मध्यप्रदेश में विशेष क्षेत्र के अनुरूप औद्योगिक अधोसंरचना तैयार करने का उद्देश्य संबंधित उद्योगों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे निवेशकों को अपने क्षेत्र के अनुसार औद्योगिक आधार मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर सहायक उद्योगों और रोजगार के अवसर विकसित होने की संभावना रहेगी। उद्योगों के साथ सीधे संपर्क का विस्तार मध्यप्रदेश सरकार ने जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों के साथ देश और विदेश के प्रमुख उद्योग समूहों से सीधा संपर्क बढ़ाया है। क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलनों के बाद अब देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में जाकर संबंधित उद्योगों से बातचीत की जा रही है। मुंबई में भारत स्थित विदेशी मिशनों के साथ भी संवाद होगा। इसके माध्यम से मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों को अंतर्राष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क तक पहुंचाने और विदेशी निवेशकों को प्रदेश के क्षेत्र विशेष के अवसरों से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री मोदी के भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के विजन के अनुरूप मध्यप्रदेश में भी नई औद्योगिक अधोसंरचना और क्षेत्र विशेष के औद्योगिक अवसर तैयार किए जा रहे हैं। निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के साथ उद्योगों की जरूरत के अनुसार सुविधाओं और निवेश सुविधा तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपतियों से मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों और उनकी जरूरतों पर सीधे चर्चा करेंगे। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट : 2027 से पहले यह संवाद निवेश के इच्छुक उद्योग समूहों से संपर्क बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।