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भूमि नामांतरण के बदले रिश्वत मांगने वाले जावर के पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर पर अभियोजन की स्वीकृति

भूमि नामांतरण के एवज में रिश्वत मांगने वाले जावर के पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति 8 हजार रुपये रिश्वत मांगने के प्रकरण में कलेक्टर सीहोर  बालागुरु के. ने जारी किया आदेश भोपाल राजस्व प्रशासन में अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों में जिला स्तर पर निरंतर कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर सीहोर श्री बालागुरु के. ने जावर तहसील में पदस्थ पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की है। यह कार्रवाई लोकायुक्त में दर्ज शिकायत और जांच में सामने आए तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है। जारी आदेश के अनुसार, पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया था कि पटवारी द्वारा भूमि नामांतरण के एवज में 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत के सत्यापन में 8 हजार रुपये रिश्वत मांगने की पुष्टि जारी आदेश के अनुसार शिकायत के सत्यापन के लिए निरीक्षक श्री मुकेश तिवारी द्वारा शिकायतकर्ता को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर उपलब्ध कराया गया।रिकॉर्डिंग के दौरान पटवारी द्वारा 8 हजार रुपये रिश्वत लेने पर सहमति व्यक्त की गई। इसके बाद स्वतंत्र पंच साक्षियों की उपस्थिति में रिकॉर्डेड वार्तालाप का अवलोकन कर प्रारंभिक पंचनामा तैयार किया गया और जावर जाकर ट्रेप की कार्रवाई की गई। रिकॉर्ड की गई बातचीत में रिश्वत की मांग स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुई। एफएसएल जांच में पटवारी की आवाज प्रमाणित सीहोर जिले के तहसील कार्यालय जावर में पंचों की उपस्थिति में वॉयस रिकॉर्डर और मेमोरी कार्ड का जप्ती पंचनामा तैयार कर उन्हें सीलबंद किया गया। आरोपी पटवारी की आवाज का नमूना (वॉइस सैंपल) लेकर एफएसएल भोपाल भेजा गया। एफएसएल रिपोर्ट में रिकॉर्ड की गई आवाज को पटवारी श्री राठौर की आवाज होना प्रमाणित किया गया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पंजीबद्ध हुआ प्रकरण धर्मेन्द्र सिंह राठौर, पटवारी हल्का नंबर 24, तहसील जावर, जिला सीहोर के विरुद्ध लोक सेवक के पद का दुरुपयोग करते हुए भूमि नामांतरण के लिए 8 हजार रुपये रिश्वत की मांग करने का आरोप है। प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था। उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के आधार पर कलेक्टर सीहोर श्री बालागुरु के. ने माना कि आरोपी के विरुद्ध अभियोजन की कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 19(1)(बी) एवं (सी) के प्रावधानों के तहत सक्षम प्राधिकारी की अभियोजन स्वीकृति आवश्यक होने से कलेक्टर सीहोर द्वारा पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध न्यायालय में अभियोजन चलाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

मध्यप्रदेश में खनन का नया मॉडल, निजी कंपनियों को मिलेगी हिस्सेदारी; 30 हजार करोड़ राजस्व का लक्ष्य

भोपाल  प्रदेश की धरती में छिपे खनिज संसाधनों की तलाश अब राज्य सरकार निजी कंपनियों के माध्यम से कराएगी। इसके लिए खनिज विभाग ने मिनरल एक्सप्लोरेशन पॉलिसी तैयार की है। इसमें कंपनियों को खनिजों की खोज के बदले उत्खनन में हिस्सेदारी देने का प्रावधान किया जा रहा है। इससे सरकार को खनिजों की खोज पर सीधे राशि खर्च नहीं करनी पड़ेगी और पर कार खनिज धडार मिलने पर राजस्व अवसर भी बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पॉलिसी पर आगे काम बढ़ाने का अनुमोदन कर दिया है। पॉलिसी में खासतौर पर क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ एलीमेंट की खोज (Critical Rare Earth Minerals Mining) पर जोर दिया गया है। इन खनिजों की पहचान के लिए अत्याधुनिक तकनीक और महंगी मशीनों की जरूरत होती है। मप्र खनिज निगम के माध्यम से कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित कर उन्हें अलग अलग क्षेत्रों में खोजबीन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। कंपनियां अपने संसाधनों से सर्वे और खोज करेंगी। इसके बदले उन्हें उत्खनन व उद्योग में भागीदारी भी मिलेगी। सैटेलाइट से निगरानी, अवैध खनन पर पेनाल्टी दूसरी ओर, खनिज विभाग ने गौण खनिजों के खनन को नियंत्रित करने के लिए नए माइनर मिनरल रूल्स का ड्राफ्ट तैयार कर शासन को भेजा है। मंजूरी मिलने के बाद इन्हें लागू किया जाएगा। नए नियमों में पर्यावरण संरक्षण के साथ खनन गतिविधियों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। इसके तहत सैटेलाइट से खदानों की निगरानी, ऑनलाइन चालान और ई-चेकगेट के माध्यम से परिवहन संबंधी प्रक्रियाओं को डिजिटल किया जाएगा। निर्धारित क्षेत्र और गहराई से अधिक खनन करने या बिना अनुमति खनन करने पर पेनाल्टी बढ़ाने का प्रस्ताव है। पांच साल में राजस्व दोगुने करने का लक्ष्य सीएम डॉ. मोहन यादव ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ किया जाए। निवेश के साथ प्रदेश में रोजगार के अवसर भी सृजित हों। खनिज से होने वाली आय का अधिकतम हिस्सा जनहित पर खर्च करें। खनिज विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल के अनुसार, 2026-27 में खनिज राजस्व 13,720 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। वहीं, 2030-31 तक इसे बढ़ाकर 30 हजार करोड़ करने की योजना है। नई एक्सप्लोरेशन पॉलिसी और खनन नियमों में बदलाव को इस लक्ष्य की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। पॉलिसी से ये फायदा? सरकार पर खर्च का बोझ कमः निजी कंपनियां अपने संसाधनों से खनिजों की खोज करेंगी। सरकार को सीधे निवेश नहीं करना पड़ेगा। दुर्लभ खनिजों की तलाश में तेजीः क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ एलीमेंट की खोज के लिए आधुनिक तकनीक व मशीनों का उपयोग बढ़ेगा। निवेश को प्रोत्साहनः खनिजों की खोज और उत्खनन में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी। खनिज आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। राजस्व में वृद्धिः नए खनिज भंडार मिलने व व्यावसायिक उत्खनन से सरकार की आय बढ़ सकती है। रोजगार के नए अवसरः खनन, खनिज प्रसंस्करण और उनसे जुड़े उद्योगों में स्थानीय स्तर पर रोजगार बढेगा। अवैध खनन पर अंकुशः सैटेलाइट निगरानी, ई-चेकगेट व ऑनलाइन चालान से अवैध खनन पर निगरानी मजबूत होगी। पर्यावरण संरक्षणः खदानों के आसपास पर्यावरण सुधार को अनिवार्य बनाने और उल्लंघन पर पेनाल्टी से पर्यावरणीय नुकसान कम करने में मदद मिलेगी।

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण को चुनौती, सरकार से 2 हफ्ते में मांगा जवाब

 उज्जैन उज्जैन शहर में होने वाले सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण में जाने वाली जमीन को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई है। इसमें नगर निगम के सड़क चौड़ीकरण के लिए निर्माण हटाने व जमीन निगम की घोषित करने को चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नोटिस जारी कर उज्जैन नगर निगम व सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। हालांकि कोर्ट ने इस मामले में निगम कार्रवाई पर रोक तो नहीं लगाई लेकिन अंतरिम व्यवस्था दी कि जो भी कार्रवाई होगी, वो कोर्ट आदेश के अधीन रहेगी। चौबीस खंभा मार्ग उज्जैन निवासी छात्र सोमिल कराड़े ने निगम द्वारा सड़क चौड़ीकरण को लेकर जारी आदेश को चुनौती दी है। दायर की थी याचिका उनका कहना है कि केंद्र सरकार 13 साल पहले पारित भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने के बाद राज्य सरकार के मप्र म्यूनिसिपल एक्ट की धारा-305 का औचित्य नहीं रह जाता। इसके तहत निगम को सड़क बनाने में बाधक निर्माण हटाने के साथ ही उस जमीन का आधिपत्य मिल जाता है। भूमि अधिग्रहण कानून में इसके लिए दावे आपत्ति बुलाकर मुआवजा तय करने की प्रक्रिया है, जबकि निगम एक्ट में केवल नोटिस के जरिए ही प्रक्रिया पूरी हो जाती ऐसे में दो नियम एक दूसरे के विपरीत होने के चलते उन्होंने याचिका दायर की है। है। कोर्ट ने चार सप्ताह बाद मामले पर दोबारा सुनवाई करने का निर्णय लिया है। जानकारी के लिए बता दें कि अगला उज्जैन सिंहस्थ (कुंभ मेला) 27 मार्च से 27 मई 2028 तक आयोजित किया जाएगा। वाघमारे केस का हवाला सुनवाई के दौरान जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की कोर्ट ने सवाल उठाए कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही सुभदा वाघमारे केस में इस विषय को तय कर चुकी है तो फिर कोर्ट इस पर कैसे सुनवाई कर सकती है। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि सुभदावाघमारे द्वारा जब कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, उस समय केंद्र सरकार का कानून लागू नहीं हुआ था। इस पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही चार सप्ताह का निर्णय लिया है। बाद इस पर दोबारा सुनवाई करने का निर्णय लिया गया है।

Ladli Behna Yojana 41वीं किस्त का इंतजार खत्म होने वाला! महिलाओं के खाते में कब आएंगे ₹1500?

भोपाल  मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चल रही लाड़ली बहना योजना एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि इस बार योजना की 41वीं किस्त जारी होनी है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। इस बार लाभार्थियों को योजना की 41वीं किस्त का इंतजार है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि इस बार महिलाओं के बैंक खाते में 1500 रुपये की अगली राशि आखिर कब तक आएगी? तो चलिए बिना देर किए इस बारे में जानने की कोशिश करते हैं।  कब आएगी लाडली बहना योजना की 41 किस्त? अगर आप भी लाडली बहना योजना की 41वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं, तो अभी सरकार की तरफ से इसकी आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं हुआ है। हालांकि माना जा रहा है कि लाडली बहनों को उनकी अगली किस्त के 1500 रुपये 10 से 15 अक्टूबर के बीच मिल जाएंगे। हालांकि किस्त के जारी होने से पहले लाभार्थी बहनों को कुछ चीजें चेक कर लेनी चाहिए। सरकारी पोर्टल के मुताबिक, महिला के नाम पर अपना बैंक खाता होना जरूरी है। इसके अलावा ई-केवाईसी भी पूरी होनी चाहिए, वरना पैसे बैंक में नहीं आएंगे। 1500 रुपये पाने के लिए कौन से 3 काम करवाना जरूरी है? पहला काम     लाड़ली बहना योजना के तहत दी जाने वाली किस्त के 1500 रुपये सरकार द्वारा महिलाओं के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजे जाते हैं     इसलिए बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सही होना जरूरी है     अगर बैंक खाते की जानकारी गलती है, तो आपकी किस्त अटक सकती है दूसरा काम     लाभार्थी यह जरूर चेक कर लें कि उनका बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक है या नहीं     साथ ही बैंक खाते में डीबीटी सुविधा भी एक्टिव होनी चाहिए     अगर ऐसा है, तो बेहतर है वरना किस्त प्राप्त करने में आपको दिक्कत हो सकती है तीसरा काम     लाड़ली बहना योजना के तहत मिलने वाली किस्त का लाभ लेने के लिए आपको ई-केवाईसी भी करवानी होती है     अगर आप ई-केवाईसी नहीं करवाते हैं तो आपकी किस्त अटक सकती है     इसलिए ये जरूर चेक करें कि आपकी केवाईसी हो रखी है या नहीं लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त कब आ सकती है?     लाड़ली बहना योजना के तहत सरकार सामान्य तौर पर हर महीने की 10 से 15 तारीख के बीच किस्त जारी कर देती है     इसी आधार पर 41वीं किस्त के भी इसी समय के बीच आने की उम्मीद है यानी 10 से 15 तारीख के बीच     हालांकि, अभी सरकार की तरफ से तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है बैंक अकाउंट में किस्त नहीं आने पर कहां करें शिकायत? अगर सरकार द्वारा किस्त की घोषणा के बाद भी आपके अकाउंट में पैसा नहीं आता है, तो आप राज्य सरकार के हेल्पलाइन नंबर 0755-2700800 या 181 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकती हैं. इसके अलावा अपनी ग्राम पंचायत, वार्ड कार्यालय या महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के स्थानीय ऑफिस में संपर्क करके भी समस्या का तुरंत समाधान पा सकती हैं।       

MP में वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ी, लांजी बना अहम कॉरिडोर; हाथी-बाघ के लिए सुरक्षित रास्ता

बालाघाट  मध्य प्रदेश का लांजी क्षेत्र अब महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से आने वाले वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक रास्ता बनता जा रहा है। पश्चिम लांजी सामान्य वन क्षेत्र के जंगलों से होकर वन्यजीव नवेगांव-नगझीरा अभयारण्य और कान्हा टाइगर रिजर्व के बीच आवाजाही कर रहे हैं। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे कट्टीपार के जंगल इस प्राकृतिक वन्यजीव गलियारे की अहम कड़ी बनकर उभरे हैं। लांजी से पश्चिम दिशा में नवेगांव-नगझीरा अभयारण्य करीब 80 किलोमीटर और पूर्व में कान्हा टाइगर रिजर्व करीब 100 किलोमीटर दूर है। दोनों बड़े वन क्षेत्रों के बीच मौजूद लगातार फैला जंगल वन्यजीवों को सुरक्षित आवाजाही का प्राकृतिक रास्ता उपलब्ध कराता है। हाथी ने 15 दिन तक किया विचरण अप्रैल 2026 में छत्तीसगढ़ की ओर से आया एक हाथी कट्टीपार के रास्ते बालाघाट पहुंचा था। हाथी ने किरनापुर और हट्टा क्षेत्र के जंगलों में करीब 15 दिन तक विचरण किया। इसके बाद वह उकवा के जंगलों से होते हुए कान्हा की दिशा में चला गया।यह इस गलियारे से हाथियों की आवाजाही का पहला मामला नहीं है। वर्ष 2022 में भी इसी रास्ते से तीन हाथियों के गुजरने की जानकारी सामने आई थी। नवेगांव-नगझीरा की बाघिन भी पहुंची थी लांजी वन्यजीवों की आवाजाही का एक और उदाहरण वर्ष 2025 में सामने आया, जब नवेगांव-नगझीरा अभयारण्य की एक बाघिन लांजी-किरनापुर क्षेत्र में पहुंची। बाघिन करीब एक महीने तक इस इलाके के जंगलों में विचरण करती रही और इसके बाद वापस लौट गई।इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि यह क्षेत्र अलग-अलग वन क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 23 बीटों में बाघ से लेकर बायसन तक मौजूद दक्षिण सामान्य वन मंडल बालाघाट के पश्चिम लांजी सामान्य वन क्षेत्र का विस्तार करीब 23 हजार हेक्टेयर में है। यहां 23 बीट हैं, जिनमें बाघ, तेंदुआ, बायसन और भालू समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी दर्ज की जाती है। लांजी और महाराष्ट्र की सीमा के बीच से बाघ नदी बहती हुई किरनापुर क्षेत्र की ओर आती है। नदी के दोनों तरफ जंगल होने के कारण गर्मी के मौसम में जब पानी के स्रोत सीमित होते हैं, तब नवेगांव-नगझीरा क्षेत्र के वन्यजीव नदी पार कर इस ओर आ जाते हैं। कुछ यहीं बना लेते हैं ठिकाना वन विभाग के अनुसार, दूसरे वन क्षेत्रों से आने वाले वन्यजीव इस इलाके में कई दिनों तक विचरण करते हैं। इनमें से कुछ वापस अपने पुराने क्षेत्र में लौट जाते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक इसी क्षेत्र में बने रहते हैं। पश्चिम लांजी सामान्य के वन परिक्षेत्र अधिकारी सपन ताम्रकार के मुताबिक, कान्हा और नवेगांव-नगझीरा के बीच पश्चिम लांजी सामान्य का जंगल प्राकृतिक गलियारे की तरह काम कर रहा है। दोनों वन क्षेत्रों से वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। बालाघाट बना बाघों का नया ठिकाना, बढ़ती संख्या से वन विभाग अलर्ट, 200 से ज्यादा टाइगर मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त है. देश भर में साल 2014 से 2022 के बीच 65 प्रतिशत आबादी बढ़ी है. इसमें सिर्फ एमपी में 155 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी. ऐसे में एमपी टाइगर की संख्या एक हजार से ज्यादा हो गई है. इसमें अकेले में बालाघाट में अकेले 200 से ज्यादा बाघ होने की संभावना है. इसी बीच बालाघाट में बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है।  दरअसल, बालाघाट के कान्हा पेंच कॉरिडोर यानी दक्षिण सामान्य वन मंडल में 18 बाघ और 27 तेंदुए दर्ज हुए है. ऐसे में एमपी को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला हुआ है. लेकिन जितनी तेजी से बाघों की संख्या बढ़ रही है उतनी ही तेजी से बाघों और मानव के बीच संघर्ष भी बढ़ रहा है।  दक्षिण बालाघाट बना बाघों का आशियाना डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग की नई रिपोर्ट में एक जानकारी सामने आई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर और दक्षिण बालाघाट के वन मंडलों में बड़े मांसाहारी वन्य जीवों की संख्या में इजाफा हुआ है. ऐसे में जिस इलाके को कान्हा नेशनल पार्क और पेंच नेशनल पार्क के बीच बाघों के गूजरने का गलियारा नहीं माना जाता है. वह अब सिर्फ एक रास्ता नहीं बल्कि बाघ, तेंदुआ और दूसरे वन्य प्राणियों का अहम इलाका भी बन गया  है.  दूसरी तरफ बाघों की बढ़ती आबादी और सिकुड़ता जंगल कई चिंताएं पैदा कर रहा है. इसमें सड़क निर्माण, माइनिंग, मानव-वन्य संघर्ष और बाघों की टेरिटोरियल फाइट भी शामिल है।  जानिए कितने बाघ और कितने तेंदुआ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग की नवंबर 2021 में दक्षिण बालाघाट के लालबर्रा और कटंगी वन क्षेत्रों में 71 कैमरा ट्रैप लगाए गए. इसमें कैमरों की मदद से 215 वर्ग किलोमीटर इलाके में 25 दिनों तक निगरानी रखी गई. इस दौरान बाघों के 262 और 154 फोटो मिले. इसी के आधार पर 18 अलग-अलग बाघ और 27 तेंदुए की पहचान हुई. इसके अलावा कैमरे ने 24 स्तनधारी प्रजातियों को भी कैद किया. इसमें भेड़िया, सियार, रीछ या स्लॉथ बेयर, गौर, सांभर, चीतल, नीलगाय, बार्किंग डियर और साही जैसी कई प्रजातियां शामिल है।  क्यों भा रहा बाघों को यह ठिकाना  बालाघाट को दो नेशनल पार्कों (कान्हा और पेंच) का कॉरिडोर कहा जाता है. दरअसल, जब बाघों की आबादी कम हुआ करती थी तब यहीं से बाघ गुजरते थे. बालाघाट सीसीएफ गौरव चौधरी ने बताया कि यह इलाका बाघों  के प्रजनन के लिए अनुकूल वातारण मिलता गया. ऐसे में यहाँ पर आबादी भी बढ़ती गई. दूसरी तरफ यह पर बाघों के लिए शिकार और आराम की भी पर्याप्त व्यवस्था है. इसके अलावा जंगल और गांव पास-पास ही है. ऐसे में बाघों को आसान शिकार मिलते हैं. ऐसे में कॉरिडोर ही अब बाघों का ठिकाना बनता गया। 

Global Investors Summit 2027 से पहले MP की बड़ी तैयारी, मुंबई में उद्योग समूहों से मिलेंगे CM यादव

भोपाल मध्यप्रदेश में निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों और औद्योगिक संभावनाओं को देश के प्रमुख उद्योग समूहों तक सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज  8 अक्टूबर को मुंबई में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे। द सेंट रेजिस, लोअर परेल में आयोजित होने वाले मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर संवादात्मक सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपतियों के साथ वन टू वन बैठकें करेंगे और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा भी करेंगे। मुंबई देश के प्रमुख औद्योगिक, वित्तीय और कारोबारी समूहों का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्योग जगत के साथ सीधा संवाद मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को लेकर चल रहे संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण चरण होगा। संवाद के दौरान प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों तथा विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक आधार से उद्योग समूहों को अवगत कराया जाएगा। निवेशकों से सीधे संवाद पर होगा फोकस मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठक करेंगे । इसके बाद मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर केंद्रित प्रस्तुतिकरण और विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मुख्य संबोधन भी निवेशकों के साथ संवाद का प्रमुख केंद्र रहेगा। मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश में उद्योगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, निवेश अनुकूल नीतिगत वातावरण और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक अवसरों को विस्तार से सामने रखा जाएगा। औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर प्रस्तुतीकरण देंगे। संवाद में विशेष रूप से यह रेखांकित किया जाएगा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित होने के कारण बड़े बाजारों से जुड़ाव, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक अधोसंरचना और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स के माध्यम से निवेशकों के लिए व्यापक संभावनाएं उपलब्ध करा रहा है। प्रदेश में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप अधोसंरचना और निवेश सुविधा तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है। जनवरी 2027 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले बढ़ाया जा रहा सीधा संपर्क मध्यप्रदेश सरकार ने जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों के साथ देश और विदेश के प्रमुख उद्योग समूहों से सीधे संपर्क की प्रक्रिया तेज की है। इसी क्रम में मुंबई का यह संवाद महत्वपूर्ण है। सरकार का प्रयास है कि समिट से पहले विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग समूहों के साथ उनकी आवश्यकताओं, निवेश योजनाओं और प्रदेश में उपलब्ध अवसरों पर प्रत्यक्ष संवाद स्थापित हो। मुंबई संवाद में प्रमुख उद्योग क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। इससे प्रदेश में निवेश के इच्छुक उद्योग समूहों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप अवसरों और औद्योगिक क्षेत्रों की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ संभावित निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए सीधा संवाद स्थापित करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उद्योगपतियों के साथ वन टू वन बैठकें इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं कि इनमें निवेशकों के प्रस्तावों और उनकी व्यावसायिक आवश्यकताओं को सीधे समझने का अवसर मिलेगा। प्रदेश सरकार की ओर से निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, आवश्यक अनुमतियों और सुविधाओं को सुगम बनाने तथा उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की जाएगी। मुंबई में होने वाला यह निवेश संवाद मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति देने और देश के प्रमुख उद्योग समूहों के साथ प्रदेश के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आयोजित यह संवाद निवेश प्रस्तावों तक सीमित न रहकर उद्योगों की आवश्यकताओं को समझने और उन्हें मध्यप्रदेश में उपलब्ध अवसरों से जोड़ने पर विशेष रूप से केंद्रित रहेगा।  

सीमित समय में टीम वर्क से सफल हुआ आयोजन-डीजीपी मकवाणा

भोपाल  नवीन न्याय संहिताओं को आमजन के लिए सरल, सहज एवं व्यावहारिक रूप में समझाने के उद्देश्य से भेल दशहरा मैदान, गोविन्दपुरा में आयोजित पांच दिवसीय भव्य प्रदर्शनी का आज  पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा की उपस्थिति में समापन हुआ। इस अवसर पर डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री जी के 3 अक्टूबर के दौरे की सूचना के बाद  प्रदर्शनी के आयोजन के लिए मात्र छह दिन का समय मिला था। सीआईडी टीम ने लगातार अवकाश के दिनों में कार्य करते हुए रूपरेखा तैयार की और इवेंट एजेंसी ने केवल दो दिनों में प्रदर्शनी का सेटअप तैयार किया। उन्होंने कहा कि इतने कम समय में इतने बड़े स्तर का आयोजन टीमवर्क और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। डीजीपी  मकवाणा ने विशेष रूप से आरक्षकों कीसराहना करते हुए कहा कि अंतिम समय में ब्रीफिंग मिलने के बावजूद उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ आगंतुकों को नवीन कानूनों एवं आधुनिक पुलिसिंग की जानकारी दी। उन्होंने स्वयं भी परिवार के साथ सामान्य नागरिक के रूप में प्रदर्शनी का अवलोकन कर पूरी प्रक्रिया को समझा। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने प्रदर्शनी में अपराध की सूचना से लेकर पुलिस कार्रवाई, वैज्ञानिक अनुसंधान, फॉरेंसिक जांच, अभियोजन और न्यायालयीन प्रक्रिया तक की पूरी व्यवस्था को एक ही मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत किए जाने की सराहना की। समापन अवसर पर प्रदर्शनी को सफल बनाने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सीआईडी, फिंगरप्रिंट टीम, डॉग स्क्वाड, पुलिस स्टेशन टीम सहित विभिन्न अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रदर्शनी में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रावधानों को केवल पुस्तकीय जानकारी तक सीमित न रखते हुए पुलिस, फॉरेंसिक, चिकित्सा, अभियोजन, न्यायपालिका एवं जेल प्रशासन की समन्वित कार्यप्रणाली के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। 14 विशेष जोन में मॉडल, डिजिटल डिस्प्ले, वीडियो, लाइव डेमो और सजीव नाट्य मंचन के माध्यम से नागरिकों को आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली की पूरी कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिला। अंतिम दिन अभियोजन एवं न्यायालय चरण का सजीव मंचन प्रदर्शनी के अंतिम दिन तृतीय चरण—अभियोजन तथा न्यायालय चरण को विशेष रूप से सजीव नाट्य मंचन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें विवेचना के बाद प्रकरण के अभियोजन तक पहुंचने, अभियोजन की भूमिका, न्यायालयीन कार्यवाही तथा अंतिम न्याय तक पहुंचने की प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया गया। इस सजीव प्रस्तुति में CCTNS एवं ICJS सहित आधुनिक डिजिटल प्रणालियों की भूमिका को भी प्रदर्शित किया गया। प्रस्तुति के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न चरणों के बीच डिजिटल सूचना एवं कार्यप्रणाली का समन्वय प्रकरण के त्वरितएवं व्यवस्थित निराकरण में सहायक बनता है। ICJS के पांच प्रमुख स्तंभों के माध्यम से ‘एंड-टू-एंड’ डिजिटल न्याय प्रक्रिया का प्रदर्शन प्रदर्शनी में ICJS (Inter-Operable Criminal Justice System) एवं CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) के माध्यम से आपराधिक न्याय प्रक्रिया को शुरुआत से अंत तक डिजिटल रूप में प्रस्तुत किया गया। ‘वन डेटा, वन एंट्री’ के सिद्धांत पर आधारित इस व्यवस्था में पुलिस से लेकर अभियोजन, स्वास्थ्य एवं फॉरेंसिक, जेल तथा न्यायालय तक विभिन्न चरणों में तकनीक के उपयोग और आपसी समन्वय को प्रदर्शित किया गया। पुलिस स्तर पर CCTNS एवं e-साक्ष्य के माध्यम से FIR दर्ज करने, डिजिटल साक्ष्य एकत्र करने, e-Zero FIR तथा जांच प्रबंधन की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया। तलाशी, जब्ती एवं अपराध स्थल से संबंधित प्रक्रियाओं की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग तथा e-Summon जैसी डिजिटल सुविधाओं की जानकारी भी दी गई। अभियोजन स्तर पर e-Prosecution पोर्टल के माध्यम से आरोप-पत्र के त्वरित मूल्यांकन, केस फाइलों की डिजिटल जांच तथा पुलिस डेटाबेस से प्रकरण संबंधी जानकारी के डिजिटल समन्वय की प्रक्रिया को समझाया गया। स्वास्थ्य एवं फॉरेंसिक स्तर पर MedLEaPR (Medico-Legal Examination and Postmortem Reporting) के माध्यम से मेडिको-लीगल जांच एवं पोस्टमॉर्टम रिकॉर्ड के मानकीकृत निर्माण तथा इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण की प्रक्रिया और e-Forensics के माध्यम से वैज्ञानिक केस ट्रैकिंग एवं साक्ष्य सत्यापन की व्यवस्था को प्रदर्शित किया गया। जेल प्रशासन के स्तर पर e-Prisons प्रणाली के माध्यम से डिजिटल जेल प्रबंधन, बंदियों की जानकारी एवं ट्रैकिंग, रिमांड निगरानी, e-Parole तथा पुनर्वास प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। न्यायालयीन स्तर पर e-Courts, न्याय श्रुति एवं e-Summon के माध्यम से डिजिटल न्यायालयीन प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक सुनवाई, समन की डिजिटल तामीली तथा गवाहों की वर्चुअल गवाही एवं दूरस्थ सुनवाई की व्यवस्था को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार प्रदर्शनी में पुलिस से लेकर न्यायालय तक आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रत्येक चरण में डिजिटल तकनीक के उपयोग और आपसी समन्वय को एकीकृत रूप में समझाया गया। रंगमंचीय प्रस्तुति से समझाई ‘घटना से न्याय तक’ की पूरी प्रक्रिया प्रदर्शनी के लिए अपराध अनुसंधान विभाग के तत्वावधान में तैयार की गई रंगमंचीय प्रस्तुति में घटना घटित होने से लेकर पुलिस सहायता, पुलिस थाने की कार्यप्रणाली, अपराध की खोजबीन एवं विश्लेषण, चिकित्सकीय सहायता, वैज्ञानिक अनुसंधान, फॉरेंसिक परीक्षण, अभियोजन तथा न्यायालयीन कार्यवाही तक की पूरी प्रक्रिया को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में नवीन न्याय संहिताओं एवं आधुनिक न्याय प्रणाली के व्यावहारिक उपयोग को भी दर्शाया गया। रंगमंचीय प्रस्तुति का निर्देशन  आनंद यादव द्वारा किया गया। सीमित समय में प्रस्तुति को तैयार कर आमजन के लिए प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत करने में उनके परिश्रम, लगन एवं रचनात्मक योगदान की वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सराहना की गई। NAFIS और MCU से अपराध अनुसंधान में आधुनिक तकनीक की झलक प्रदर्शनी में अपराध अनुसंधान में आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक के उपयोग को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) के माध्यम से घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट एवं पामप्रिंट जैसे चांस प्रिंट्स के आधार पर पहचान की प्रक्रिया को समझाया गया। घटनास्थल से प्राप्त ऐसे निशानों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित कर राष्ट्रीय स्तर के फिंगरप्रिंट डेटाबेस में मिलान की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इसी प्रकार MCU (Measurement Collection Unit) के माध्यम से अपराधियों से संबंधित बायोमेट्रिक एवं पहचान संबंधी विवरण के संकलन की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया। इसमें आइरिस स्कैन, मानकीकृत डिजिटल फोटोग्राफी तथा अन्य पहचान संबंधी मापदंडों के उपयोग की जानकारी दी गई। इन तकनीकों के माध्यम से अपराध अनुसंधान को अधिक वैज्ञानिक एवं तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में किए जा रहे … Read more

एमपीआईडीसी ने इंडियन मोबाइल कांग्रेस : 2026 में प्रदर्शित किया ग्वालियर का टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन

भोपाल नई दिल्ली में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड ने इंडियन मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2026 में स्टेट पार्टनर के रूप में सहभागिता की और मध्यप्रदेश को टेलीकॉम एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के उभरते डेस्टिनेशन के रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के की-नोट सत्र में एमपीआईडीसी की कार्यपालक निदेशक मती अनीशा वास्तव ने प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ग्वालियर में प्रस्तावित समर्पित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन की जानकारी दी। इसका उद्देश्य टेलीकॉम उपकरण निर्माताओं, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को आकर्षित करना है। इंडियन मोबाइल कांग्रेस के दौरान मती वास्तव ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, उद्योगपतियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया। उन्होंने निवेश अवसरों, उद्योगों की आवश्यकताओं तथा मध्यप्रदेश में विनिर्माण एवं प्रौद्योगिकी इकाइयों की स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा की। आईएमसी : 2026 में एमपीआईडीसी की सहभागिता से टेलीकॉम एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकोसिस्टम के साथ प्रदेश का जुड़ाव और अधिक सुदृढ़ हुआ है। साथ ही मध्यप्रदेश में नए निवेश आकर्षित करने के प्रयासों को भी बल मिला है।

विकसित भारत के संकल्प की अविराम यात्रा कृष्णा गौर

भोपाल भारत के सार्वजनिक जीवन में कुछ यात्राएँ केवल राजनीतिक यात्रा नहीं होतीं, वे राष्ट्र-निर्माण की यात्रा बन जाती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष ऐसी ही एक प्रेरणादायी यात्रा का प्रतीक हैं। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी जी ने जिस जिम्मेदारी को स्वीकार किया था, वह आज 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा, नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण की एक ऐतिहासिक यात्रा बन चुकी है। गुजरात से शुरू हुई यह यात्रा आज भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और विश्व में अग्रणी राष्ट्र बनाने के संकल्प तक पहुँच चुकी है। इन 25 वर्षों को केवल सत्ता में निरंतरता के रूप में देखना इस यात्रा को सीमित कर देना होगा। वास्तव में यह नीति से नीयत, नीयत से परिणाम और परिणाम से जनविश्वास तक की यात्रा है। गरीब के सम्मान से राष्ट्र के उत्थान तक प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही है कि विकास को उन्होंने केवल बड़े शहरों और बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रखा। गरीब, किसान, महिला, युवा, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजातीय समाज और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना उनकी नीतियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। जनधन योजना के माध्यम से वित्तीय समावेशन, उज्ज्वला योजना के माध्यम से महिलाओ के जीवन में सुविधा, स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता को जन आंदोलन बनाना, प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को पक्का घर, आयुष्मान भारत के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा और पीएम-किसान के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष सहायता—इन पहलों ने शासन और सामान्य नागरिक के बीच संबंध को नए रूप में स्थापित किया है। यह परिवर्तन केवल योजनाओ की सूची नहीं है। यह उस सोच का परिणाम है जिसमें सरकार का अर्थ केवल प्रशासन नहीं, बल्कि जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन है। महिला शक्ति को नेतृत्व की शक्ति बनाना प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने नारी शक्ति को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सक्रिय भागीदार के रूप में देखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर महिला स्वयं सहायता समूहों, उज्ज्वला, मुद्रा, जनधन और अन्य योजनाओ तक महिलाओ को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त करने का प्रयास हुआ है। आज देश की महिलाएँ राजनीति, प्रशासन, विज्ञान, सेना, खेल, उद्यमिता और शिक्षा सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे कदम राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में भी एक नई दिशा का संकेत देते हैं। एक महिला जनप्रतिनिधि के रूप में मैं मानती हूँ कि जब देश की आधी आबादी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती है, तब पूरा देश आगे बढ़ता है। पिछड़े वर्गों के सशक्तीकरण की दिशा में मेरे लिए प्रधानमंत्री मोदी जी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक न्याय और अवसरों के विस्तार सेभी जुड़ा है। पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना के वल राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विषय नहीं है; यह शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, कौशल, वित्तीय अवसर और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा व्यापक प्रश्न है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार ने वंचित वर्गों के लिए योजनाओ की पहुँच बढ़ाने, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण को मजबूत करने और अवसरों को अधिक व्यापक बनाने पर जोर दिया है। यही सोच ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के भाव को मजबूत करती है। मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण के दायित्व से जुड़े होने के कारण मैं विशेष रूप से महसूस करती हूँ कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओ का लाभ पहुँचाना ही सुशासन की वास्तविक कसौटी है। डिजिटल भारत और बदलता हुआ शासन पिछले 25 वर्षों की एक बड़ी उपलब्धि भारत के शासन तंत्र में तकनीक का व्यापक समावेश भी है। आज डिजिटल भुगतान, आधार, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और ऑनलाइन सेवाओ ने नागरिक और सरकार के बीच की दूरी को कम किया है। भारत ने यह दिखाया है कि तकनीक के वल आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि पारदर्शिता, गति और समावेशन का माध्यम भी बन सकती है। भारत की डिजिटल क्षमता ने विश्व के सामने एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है और अनेक क्षेत्रों में भारत आज समाधान देनेवालेदेशों मेंशामिल हो रहा है। आत्मनिर्भर भारत सेविकसित भारत तक प्रधानमंत्री मोदी जी की सोच में भारत के वल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक मजबूत उत्पादन, नवाचार और आत्मनिर्भरता वाला राष्ट्र है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और बुनियादी ढाँचे में बड़े निवेश जैसी पहलों ने भारत की आर्थिक क्षमता को नई गति देने का प्रयास किया है। आज भारत की आकांक्षा के वल वर्तमान को बेहतर बनाने की नहीं, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की है। यह लक्ष्य के वल सरकार का लक्ष्य नहीं हो सकता; यह 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक भागीदारी सेही पूरा होगा। विश्व पटल पर नए आत्मविश्वास का भारत प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति में भी आत्मविश्वास और सक्रियता दिखाई देती है। भारत ने वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से रखने का प्रयास किया है। G20 की अध्यक्षता, वैश्विक दक्षिण की चिंताओ को सामने रखना, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, आपदा के समय सहायता और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका इस परिवर्तन को दर्शाती है। भारत आज विश्व व्यवस्था में केवल एक सहभागी नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्णऔर प्रभावशाली भागीदार के रूप मेंअपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है। 25 वर्ष हमें क्या सिखाते हैं? श्री नरेन्द्र मोदी जी की 25 वर्षों की यात्रा हमें यह सिखाती है कि नेतृत्व केवल पद प्राप्त करने का नाम नहीं है। नेतृत्व का वास्तविक अर्थ है—दृष्टि रखना, कठिन निर्णय लेने का साहस रखना और उन निर्णयों को परिणाम में बदलने के लिए निरंतर परिश्रम करना। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक की यह यात्रा निरंतर जनसेवा की यात्रा रही है। आज जब हम इन 25 वर्षों को देखते हैं, तो यह केवल अतीत का मूल्यांकन करने का अवसर नहीं, बल्कि आने वाले भारत की दिशा तय करने का अवसर भी है। विकसित भारत के संकल्प के साथ आज इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं प्रधानमंत्री मोदी जी को 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ … Read more

विकसित भारत के संकल्प की अविराम यात्रा कृष्णा गौर

भोपाल  भारत के सार्वजनिक जीवन में कुछ यात्राएँ केवल राजनीतिक यात्रा नहीं होतीं, वे राष्ट्र-निर्माण की यात्रा बन जाती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष ऐसी ही एक प्रेरणादायी यात्रा का प्रतीक हैं। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में श्री मोदी जी ने जिस जिम्मेदारी को स्वीकार किया था, वह आज 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा, नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण की एक ऐतिहासिक यात्रा बन चुकी है। गुजरात से शुरू हुई यह यात्रा आज भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और विश्व में अग्रणी राष्ट्र बनाने के संकल्प तक पहुँच चुकी है। इन 25 वर्षों को केवल सत्ता में निरंतरता के रूप में देखना इस यात्रा को सीमित कर देना होगा। वास्तव में यह नीति से नीयत, नीयत से परिणाम और परिणाम से जनविश्वास तक की यात्रा है। गरीब के सम्मान से राष्ट्र के उत्थान तक प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही है कि विकास को उन्होंने केवल बड़े शहरों और बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रखा। गरीब, किसान, महिला, युवा, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजातीय समाज और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना उनकी नीतियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। जनधन योजना के माध्यम से वित्तीय समावेशन, उज्ज्वला योजना के माध्यम से महिलाओ के जीवन में सुविधा, स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता को जन आंदोलन बनाना, प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को पक्का घर, आयुष्मान भारत के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा और पीएम-किसान के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष सहायता—इन पहलों ने शासन और सामान्य नागरिक के बीच संबंध को नए रूप में स्थापित किया है। यह परिवर्तन केवल योजनाओ की सूची नहीं है। यह उस सोच का परिणाम है जिसमें सरकार का अर्थ केवल प्रशासन नहीं, बल्कि जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन है। महिला शक्ति को नेतृत्व की शक्ति बनाना प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने नारी शक्ति को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सक्रिय भागीदार के रूप में देखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर महिला स्वयं सहायता समूहों, उज्ज्वला, मुद्रा, जनधन और अन्य योजनाओ तक महिलाओ को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त करने का प्रयास हुआ है। आज देश की महिलाएँ राजनीति, प्रशासन, विज्ञान, सेना, खेल, उद्यमिता और शिक्षा सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे कदम राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में भी एक नई दिशा का संकेत देते हैं। एक महिला जनप्रतिनिधि के रूप में मैं मानती हूँ कि जब देश की आधी आबादी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती है, तब पूरा देश आगे बढ़ता है। पिछड़े वर्गों के सशक्तीकरण की दिशा में मेरे लिए प्रधानमंत्री मोदी जी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक न्याय और अवसरों के विस्तार सेभी जुड़ा है। पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना के वल राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विषय नहीं है; यह शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, कौशल, वित्तीय अवसर और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा व्यापक प्रश्न है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार ने वंचित वर्गों के लिए योजनाओ की पहुँच बढ़ाने, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण को मजबूत करने और अवसरों को अधिक व्यापक बनाने पर जोर दिया है। यही सोच ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के भाव को मजबूत करती है। मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण के दायित्व से जुड़े होने के कारण मैं विशेष रूप से महसूस करती हूँ कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओ का लाभ पहुँचाना ही सुशासन की वास्तविक कसौटी है। डिजिटल भारत और बदलता हुआ शासन पिछले 25 वर्षों की एक बड़ी उपलब्धि भारत के शासन तंत्र में तकनीक का व्यापक समावेश भी है। आज डिजिटल भुगतान, आधार, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और ऑनलाइन सेवाओ ने नागरिक और सरकार के बीच की दूरी को कम किया है। भारत ने यह दिखाया है कि तकनीक के वल आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि पारदर्शिता, गति और समावेशन का माध्यम भी बन सकती है। भारत की डिजिटल क्षमता ने विश्व के सामने एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है और अनेक क्षेत्रों में भारत आज समाधान देनेवालेदेशों मेंशामिल हो रहा है। आत्मनिर्भर भारत सेविकसित भारत तक प्रधानमंत्री मोदी जी की सोच में भारत के वल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक मजबूत उत्पादन, नवाचार और आत्मनिर्भरता वाला राष्ट्र है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और बुनियादी ढाँचे में बड़े निवेश जैसी पहलों ने भारत की आर्थिक क्षमता को नई गति देने का प्रयास किया है। आज भारत की आकांक्षा के वल वर्तमान को बेहतर बनाने की नहीं, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की है। यह लक्ष्य के वल सरकार का लक्ष्य नहीं हो सकता; यह 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक भागीदारी सेही पूरा होगा। विश्व पटल पर नए आत्मविश्वास का भारत प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति में भी आत्मविश्वास और सक्रियता दिखाई देती है। भारत ने वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से रखने का प्रयास किया है। G20 की अध्यक्षता, वैश्विक दक्षिण की चिंताओ को सामने रखना, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, आपदा के समय सहायता और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका इस परिवर्तन को दर्शाती है। भारत आज विश्व व्यवस्था में केवल एक सहभागी नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्णऔर प्रभावशाली भागीदार के रूप मेंअपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है। 25 वर्ष हमें क्या सिखाते हैं? श्री नरेन्द्र मोदी जी की 25 वर्षों की यात्रा हमें यह सिखाती है कि नेतृत्व केवल पद प्राप्त करने का नाम नहीं है। नेतृत्व का वास्तविक अर्थ है—दृष्टि रखना, कठिन निर्णय लेने का साहस रखना और उन निर्णयों को परिणाम में बदलने के लिए निरंतर परिश्रम करना। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक की यह यात्रा निरंतर जनसेवा की यात्रा रही है। आज जब हम इन 25 वर्षों को देखते हैं, तो यह केवल अतीत का मूल्यांकन करने का अवसर नहीं, बल्कि आने वाले भारत की दिशा तय करने का अवसर भी है। विकसित भारत के संकल्प के साथ आज इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं प्रधानमंत्री श्री मोदी जी को 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा के लिए हार्दिक … Read more