samacharsecretary.com

शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक (उत्तरी एवं मध्य राज्य) भोपाल में 20 दिसम्बर को

भोपाल. केन्द्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक (उत्तरी एवं मध्य राज्यों) 20 दिसंबर शनिवार प्रात: 11 बजे कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र, भोपाल में आयोजित हो रही है। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रमुख शहरी विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच सहयोग और समन्वय को सुदृढ़ करना है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने बताया कि यह बैठक राज्यों को योजना-वार प्रगति प्रस्तुत करने, क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं को साझा करने, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान तथा मंत्रालय से नीतिगत एवं रणनीतिक मार्गदर्शन प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी। क्षेत्रीय बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल और प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय की उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़, दिल्ली, राजस्थान एवं उत्तरप्रदेश के शहरी विकास मंत्री एवं राज्यमंत्री, भारत सरकार एवं राज्यो के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण स्वच्छ सर्वेक्षण वर्ष 2025-26 के लिए कार्य-दिशा पुस्तिका का विमोचन होगा। इस संबंध में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने बताया कि यह कार्य-दिशा पुस्तिका स्वच्छता, स्थायित्व तथा नागरिक-केंद्रित शहरी प्रशासन को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बैठक में पाँच सत्रों में महत्वपूर्ण विषयों पर होगी चर्चा बैठक के दौरान पाँच सत्रों में शहरी विकास से जुड़े प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इन सत्रों के माध्यम से केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही व्यवहारिक चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकेगा। अमृत योजना के अंतर्गत संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता तथा समयबद्ध पूर्णता से संबंधित विषयों पर विचार किया जाएगा। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये आवश्यक सुधारात्मक कदमों पर भी मंथन होगा। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत डंप स्थलों के वैज्ञानिक प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट निपटान तथा स्वच्छता से जुड़ी चुनौतियों पर मंथन होगा। स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत निर्माणाधीन एवं स्वीकृत आवासों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी तथा लाभार्थियों को समय पर आवास उपलब्ध कराने में आ रही समस्याओं के समाधान पर विचार किया जाएगा। अंगीकार अभियान की वर्तमान स्थिति, उपलब्धियों एवं चुनौतियों की समीक्षा करते हुए अभियान को अधिक प्रभावी एवं जनसहभागिता आधारित बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। सत्र में शहरी परिवहन व्यवस्था के अंतर्गत नगर बस सेवाओं, भूमिगत रेल प्रणाली तथा पैदल मार्गों से संबंधित आवागमन व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। यातायात को सुगम, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिये आगामी रणनीति पर चर्चा होगी। क्षेत्रीय बैठक से राज्य-वार एवं योजना-वार क्रियान्वयन चुनौतियों की पहचान, कार्यक्रमों को सशक्त बनाने के लिये व्यावहारिक अनुशंसाएँ, केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा शहरी प्रशासन एवं सेवा प्रदायगी में सुधार के लिए ठोस रणनीतिक सुझाव प्राप्त होगे।  

थाली में परोसा जा रहा हार्ट अटैक: इंदौर में मिलावटखोर सक्रिय, खाद्य सुरक्षा पर चिंता

 इंदौर  खानपान के लिए प्रसिद्ध इंदौर में मिलावटखोर सक्रिय हैं। यहां असली घी के नाम पर आम जनता को वनस्पति बेचा जा रहा है। पालदा स्थित श्री राम मिल्क फूड डेरी इंडस्ट्रीज से विभिन्न ब्रांड और पैकिंग के घी के 10 नमूने लिए गए थे, जिनमें से सात सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि घी में बड़ी मात्रा में वनस्पति मिलाई गई थी, जो खाद्य नियमों का उल्लंघन है और आम लोगों की सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इस फर्म के मालिक नरेंद्र कुमार गुप्ता लंबे समय से इसी प्रकार घी के नाम पर आम लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वनस्पति को हाइड्रोजन प्रक्रिया के जरिए बनाया जाता है, जिससे यह 40 डिग्री तापमान तक पिघलती नहीं है। यह देखने में घी जैसी लगती है, जिससे उपभोक्ता आसानी से धोखा खा जाते हैं। इसी धोखे का फायदा उठाकर इसे मदर चाइस सहित अन्य नामी ब्रांडों के नाम से 700 से 800 रुपये प्रति किलो तक बेचा जा रहा था। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है वनस्पति का सेवन वनस्पति में ट्रांस फैट की मात्रा अधिक होती है, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है। नियमित रूप से इसका सेवन करने से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, मोटापा, कोलेस्ट्राल बढ़ना और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। लंबे समय तक वनस्पति युक्त घी खाने से हृदय रोग और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। इससे पहले दूध, पनीर, मावा, मिठाइयों और मसालों में भी मिलावट के मामले सामने आ चुके हैं। कारोबारी सस्ते और हानिकारक पदार्थ मिलाकर ज्यादा मुनाफा कमाने में लगे हैं। क्या कहते हैं एक्सपर्ट डॉ. अमन यादव, एमडी मेडिसिन बताते हैं कि "घी हमारे शरीर के लिए जरूरी होता है, लेकिन इसमें मिलावट होती है तो यह फायदे की जगह नुकसान पहुंचाता है। इससे बेड कोलेस्ट्राल बढ़ता है। यह हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है। साथ ही फैटी लिवर की समस्या भी होती है।"  

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हर चुनौती का सामना करते हुए देश को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वामी विवेकानंद का विचार था कि 21वीं सदी भारत की होगी। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के प्रभावी नेतृत्व और मार्गदर्शन में आज विवेकानंद जी का यह स्वप्न साकार होता दिख रहा है। वर्तमान में विश्व का हर देश भारत से मित्रता करना चाहता है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत अब हर चुनौती और परिस्थिति का सामना करने में सक्षम है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की भूमिका के आधार पर ही भारत आज दुनिया के सामने मजबूती से खड़ा है। हमारे प्रशासनिक अधिकारी हर चुनौती का सामना करते हुए देश को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। भारत की अनेक विविधताओं के बीच आज देश में यह सेवा क्षेत्र मजबूती और प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव म.प्र. आई.ए.एस. एसोसिएशन सर्विस मीट-2025 के शुभारंभ अवसर पर प्रशासन अकादमी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। शुभारंभ अवसर पर मुख्य सचिव  अनुराग जैन, सेवानिवृत्त अधिकारियों सहित मध्यप्रदेश कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश की आजादी के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों के फलस्वरूप प्रशासनिक व्यवस्था निर्मित हो पाई। देश में राजाओं की सत्ता को प्रजातंत्र में बदलने में प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। हमारे देश की संवैधानिक व्यवस्था में संघीय प्रणाली है और इस बीच प्रदेश के अधिकारियों ने केंद्र-राज्यों के साथ समन्वय करते हुए राज्य की बेहतर छवि बनाई है। मध्यप्रदेश एक प्रयोगशाला की तरह है, जहां कई क्षेत्रों में लगातार नवाचार हुए और इनमें से कई नवाचारों का देश-दुनिया में अनुसरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी योग्यता और अनुभव के महत्व को पहचानते हैं। इसी का परिणाम है कि सेवाकाल के बाद भी कई अधिकारियों के अनुभव का लाभ शासन व्यवस्था को मिल रहा है। प्रदेश के सभी प्रशासनिक अधिकारी सम्मान के हकदार हैं। प्रसन्नता का विषय है कि सभी अधिकारी एक परिवार की तरह हर कठिनाई से निकलने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अनुभव से भरे हमारे वरिष्ठ अधिकारी और ऊर्जा से भरे हमारे युवा साथी विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के आधार हैं। उन्होंने कहा कि यह समय नीतियां बनाने और योजनाओं का क्रियान्वयन करने के साथ नवाचार को समझने, तकनीक को अपनाने और नागरिक की दृष्टि से सोचने का भी है। हमें सेवा कर पाने का अवसर सौभाग्य से मिलता है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने यह सौभाग्य अपने कठिन परिश्रम से अर्जित किया है। हमारी संस्कृति में नर सेवा को नारायण सेवा माना गया है। आम आदमी के कष्टों का समाधान करने, उनकी समस्याओं की सुनवाई करने और सार्थक समाधान देने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमें प्रदेश के विकास के लिए अपना शत-प्रतिशत देने का संकल्प लेना होगा। मध्यप्रदेश आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष एसीएस  मनु श्रीवास्तव ने कहा कि सर्विस मीट में नए वेंचर्स की सफलता पर विमर्श किया जाएगा। मध्यप्रदेश ऐसा राज्य है, जो सभी को अपना लेता है। प्रदेश के आईएएस अफसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर सेवाएं दे रहे हैं। मध्यप्रदेश आईएएस एसोसिएशन एक परिवार की तरह है। आयोजन समिति के अध्यक्ष  पी. नरहरि ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य में सेवा का कार्य पूर्ण गरिमा के साथ किया जा रहा है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बैतूल में मेडिकल कॉलेज स्थापना के लिए विधायकगण ने माना आभार

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बैतूल विधायक तथा प्रदेश अध्यक्ष  हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में बैतूल जिले के विधायकों ने भेंट कर बैतूल को मेडिकल कॉलेज तथा अन्य सौगातें देने के लिए मुख्यमंत्री का आभार माना। मुख्यमंत्री निवास पर हुई भेंट में विधायक सर्व महेंद्र सिंह चौहान, डॉ. योगेश पंडाग्रे, चंद्रशेखर देशमुख तथा श्रीमती गंगाबाई उईके मौजूद रहीं। विधायकों ने कहा कि जनजातीय और ग्रामीण बहुल बैतूल जिले में मेडिकल कॉलेज खुलने से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्र के मरीजों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा जिले में ही मिल सकेगी। इससे स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार हो सकेगा। पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना से क्षेत्र के विद्यार्थियों को मेडिकल की पढ़ाई में भी सुविधा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री  जे. पी. नड्डा बैतूल जिले के कोसमी क्षेत्र में पीपीपी मोड पर आरंभ हो रहे मेडिकल कॉलेज का 23 दिसम्बर को भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विधायकों ने सारणी के सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में लगभग 12 हजार करोड़ रुपए की लागत की 660 मेगावाट यूनिट इकाई की स्थापना की वर्षों पुरानी मांग स्वीकृत करने, भीमपुर में 100 बिस्तरीय अस्पताल और चिचोली में 50 बिस्तरीय अस्पताल की स्वीकृति देने के लिए भी आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से घोड़ाडोंगरी विधायक श्रीमती गंगा बाई उईके ने चोपना क्षेत्र के परिवारों के पट्टों के प्रकरणों के निराकरण के संबंध में भी अनुरोध किया।

राज्य निर्वाचन आयोग का नया कदम: महापौर/पार्षद चुनाव में ऑनलाइन व्यय सुनवाई की सुविधा

राज्य निर्वाचन आयोग का नवाचार महापौर/पार्षद का चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों के निर्वाचन व्यय लेखा के संबंध में ऑनलाइन सुनवाई भोपाल राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने महापौर, अध्यक्ष एवं पार्षद का चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों के निर्वाचन व्यय लेखा दाखिल करने के संबंध में वीडियो काफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई का नवाचार किया है। अब संबंधित अभ्यर्थियों को सुनवाई के लिये राज्य निर्वाचन आयोग भोपाल नहीं आना पड़ता। सुनवाई प्रत्येक गुरूवार को होती है। इससे अभ्यर्थियों के समय और धन दोनों की बचत हुई है। पूर्व में ऐसे प्रकरणों की सुनवाई राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्यालय भोपाल में होती थी। अब तक 411 अभ्यार्थियों की हुई सुनवाई राज्य निर्वाचन आयुक्त श्रीवास्तव द्वारा फरवरी 2025 से अब तक व्ही.सी. के माध्यम से 411 अभ्यर्थियों की सुनवाई की जा चुकी है। भोपाल, खण्डवा, छिंदवाड़ा, मन्दसौर, धार, सतना, उमरिया, ग्वालियर, अलीराजपुर, राजगढ, नीमच, शाजापुर, डिण्डौरी, सागर एवं हरदा जिले के अभ्यार्थियों की सुनवाई की जा चुकी हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा 97 अभ्यर्थियो के निर्वाचन व्यय लेखे सुनवाई उपरांत एवं दस्तावेज प्रमाण के आधार पर मान्य किये गये। राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा 226 अभ्यर्थियो को व्ही०सी० के माध्यम से सुनवाई उपरांत निरर्हित किया गया। अधिकतम पांच साल तक के लिये निरर्हित किये जाने का प्रावधान है। अभ्यर्थी नियत तारीख प्रत्येक गुरुवार को सायंकाल 4:30 PM से 6:00PM तक जिला मुख्यालय के एन आई सी रूम से जुड़कर राज्य निर्वाचन आयुक्त की व्ही०सी० में सम्मिलित होकर अपना पक्ष रख सकते हैं। प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिये आयोग द्वारा जिले के उप जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।  म.प्र. नगरपालिक निगम एवं मध्यप्रदेश नगर पालिक अधिनियम के तहत निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत किया जाना और लेखा दाखिल करने में असफलता पर निरर्हित घोषित किये जाने के प्रावधान हैं। नैर्सिंगक न्याय के आधार पर लेखा दाखिल करने में असफल अभ्यर्थियों को विलम्ब से लेखा दाखिल करने और विहित रीति में लेखा दाखिल नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को पक्ष समर्थन के लिए राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया जाता है।  

अर्थ नीति ही तय करती है राष्ट्र की प्रगति की दिशा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसी भी राष्ट्र की सशक्त अर्थ नीति और वैचारिक दूरदर्शिता ही उसके विकास की संतुलित गति, स्थायित्व और भविष्य की दिशा तय करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीता दशक देश की अर्थव्यवस्था के लिए स्वर्णिम काल रहा है। इस दौरान देश ने विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक चुनौतियों से उबरते हुए विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मुंबई में आयोजित वर्ल्ड हिंदू इकोनॉमिक फोरम कॉन्फ्रेंस–2025 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का औद्योगिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। मध्यप्रदेश में निवेश और सरलता से व्यापार-व्यवसाय बढ़ाने के लिए हमारी सरकार निवेशकों की हर संभव मदद करने को तत्पर है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश करने के इच्छुक हर निवेशक के लिए हमारी सरकार हर घड़ी उनके साथ खड़ी है। निवेशकों की जरूरतों से हम वाक़िफ हैं, इसीलिए जैसी जरूरत, हमारी सरकार निवेशकों की वैसी मदद करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम सब मिल जुलकर 'मेक इन इंडिया' और 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करेंगे। देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर में 25 दिसंबर को भारतरत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मशताब्दी वर्ष के समापन के अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह प्रदेश में 2.5 लाख करोड़ रूपये लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट’ में शामिल होने के लिए ग्वालियर आमंत्रित करते हुए कहा कि यह आयोजन ‘उद्योग एवं रोजगार वर्ष’ के सफल समापन का साक्षी बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों को बेहतर पॉलिसी, अवसर, इन्सेंटिव, इको सिस्टम, मार्केट लिंकेज और ग्रोथ रेट के साथ-साथ सरकार का फुल सपोर्ट मिलेगा। हमारे यहां उद्योगों के लिए पर्याप्त लैंड और वॉटर बैंक है, यूथ फोर्स है और स्किल्ड ह्यूमन रिसोर्स भी है। उन्होंने निवेशकों से मध्यप्रदेश में निवेश करने के लिए बेहिचक आगे बढ़ने का आहवान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए भारत की आर्थिक प्रगति, सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक नेतृत्व की भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज भारत जिस रफ्तार से आर्थिक प्रगति कर रहा है, वह अभूतपूर्व है। सुदृढ़ नीतियों, संरचनात्मक सुधारों, आत्मनिर्भर भारत अभियान और वैश्विक निवेशकों के बढ़ते विश्वास के कारण हमारा देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत शीघ्र ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। देश-विदेश से बड़ी संख्या में आए बिजनेस टायकून्स, उद्योगपतियों, नीति-निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों, ग्लोबल इकोनॉमी के विचारकों और वर्ल्ड हिंदू इकोनॉमिक फोरम के सभी सदस्यों ने कॉफ्रेंस में शिरकत की। वर्ल्ड हिंदू इकोनॉमिक फोरम कॉन्फ्रेंस–2025 भारत की आर्थिक सोच, सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक दृष्टि को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है, इससे देश की भावी विकास यात्रा को नई दिशा और ऊर्जा मिल रही है। मध्यप्रदेश : निवेश और विकास का नया केंद्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कांफ्रेंस में मध्यप्रदेश की बेजोड़ उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य निवेश, उद्योग, कृषि, ऊर्जा और पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है। मध्यप्रदेश में कभी भी औद्योगिक बाधाओं (इंडस्ट्रियल अनरेस्ट) की शिकायत नहीं रही। सरकार की निवेशकों के अनुकूल 18 नई औद्योगिक नीतियों, पारदर्शी शासन-प्रशासन और मजबूत बुनियादी ढांचे के कारण मध्यप्रदेश आज निवेशकों और नव उद्यमियों के लिए एक आकर्षक और भरोसेमंद केंद्र बन गया है। हम निवेशकों को हर जरूरी प्रोत्साहन, न्यूनतम दर पर भूमि, मदद और मार्गदर्शन भी मुहैया करा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "इनोवेशन प्रास्पेरिटी एण्ड सेल्फ-रिलायंस : इंडिया पाथ टू ग्लोबल लीडरशिप" जैसे विषय पर ऐसे समय में संवाद हो रहा है, जब भारत केवल उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि विश्व को दिशा देने वाली शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है। भारतीय परम्परा में अर्थ को कभी भी केवल लाभ तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उसे लोक कल्याण, संतुलन और दीर्घकालिक समृद्धि से जोड़ा गया है। भारत अब "मेक इन इंडिया" से लेकर " मेक फॉर वर्ल्ड" के लिए तैयार है। यह परिवर्तन परफॉर्म, रिफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इनोवेशन की नीति से आया है। मध्यप्रदेश भारत के सबसे तेजी से विकसित होते राज्यों में से एक है। हमने ईज़ ऑफ डूइंग को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे धरातल पर उतारते हुए उसे स्पीड स्केल और स्किल ऑफ डूइंग में परिवर्तित कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने 18 नई औद्योगिक पॉलिसी लॉन्च कीं, जो प्रदेश की ग्रोथ के लिए गेम चेंजर सिद्ध हो रही हैं। धार जिले में देश के पहले और सबसे बड़े पीएम टेक्सटाइल पार्क का भूमि-पूजन किया गया है। यह पार्क फार्म-टू-फाइबर-टू-फैक्ट्री-टू-फैशन-टू-फॉरेन के विजन को साकार करेगा। प्रदेश में 20 लाख 43 हजार से अधिक एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं। पिछले 3 वर्षों में 4 लाख 26 हजार से अधिक नई विनिर्माण इकाइयां स्थापित हुईं। इनसे 66 हजार करोड़ से अधिक निवेश एवं एक करोड़ से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने " ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) पॉलिसी" और "एपीजीसी-एक्सआर हब" जैसी अभिनव पॉलिसी लागू की हैं। जल्द ही प्रदेश में स्पेस टेक पॉलिसी भी लागू की जाएगी। स्टार्ट-अप्स को वित्तीय सहायता, बुनियादी ढांचा सहयोग के लिए 'एमपी स्टार्ट- अप पॉलिसी एंड इम्लीमेंटेशन स्कीम लागू की गई है। पर्यटकों को एमपी के टूरिज्म का एक्सपीरियंस लुभा रहा है। प्रदेश में वर्ष 2024 में पर्यटन के क्षेत्र में कीर्तिमान रचा है। रिकॉर्ड 13.41 करोड़ पर्यटक मध्यप्रदेश आए। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने के लिए हमने मध्यप्रदेश में पीएम पर्यटन वायु सेवा और हेली पर्यटन सेवा जैसे नवाचारों की शुरुआत भी की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश डबल इंजन की सरकार के साथ आगे बढ़ रहा है। राज्य में कृषि के साथ औद्योगिक विकास पर विशेष जोर दिया गया है। हमारी सरकार ने प्रदेश में लॉजिस्टिक, मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी और सप्लाई चेन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। देश के मध्य में होने का बड़ा लाभ मध्यप्रदेश को मिल रहा है। हमने जन विश्वास … Read more

विश्व ध्यान दिवस पर हार्टफुलनेस का वैश्विक आयोजन – एक विश्व, एक हृदय

भोपाल.  21 दिसंबर को विश्वभर के करोड़ों लोग "विश्व ध्यान दिवस" के अवसर पर हार्टफुलनेस संस्थान द्वारा आयोजित वैश्विक ध्यान सत्र में सम्मिलित होंगे। इस आयोजन का थीम ‘एक विश्व, एक हृदय’ रखा गया है, जिसका उद्देश्य विश्व शांति, करुणा, एकता और सामूहिक चेतना जागरण को बढ़ावा देना है। भोपाल सहित मध्य प्रदेश से अब तक 6 लाख से अधिक नागरिक पंजीकरण कर चुके हैं। यह सत्र हार्टफुलनेस के वैश्विक मार्गदर्शक एवं श्री रामचंद्र मिशन के अध्यक्ष परम पूज्य दाजी के नेतृत्व में कान्हा शांति वनम से संचालित होगा। इस कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की उपस्थिति भी रहेगी। आयोजन स्थल पर हजारों लोग प्रत्यक्ष ध्यान करेंगे, जबकि विश्वभर के लाखों प्रतिभागी यूट्यूब के माध्यम से वर्चुअली जुड़ेंगे। मध्य प्रदेश से भी भारी संख्या में लोग 21 दिसंबर की रात 8 बजे होने वाले इस ध्यान में भाग लेंगे। 20 मिनट का ध्यान दुनिया को सकारात्मक बदलाव देगा – हार्टफुलनेस हार्टफुलनेस ध्यान को मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और मानवता को जोड़ने का माध्यम माना जा रहा है। मार्गदर्शक दाजी के अनुसार, “जब लाखों लोग एक साथ ध्यान करेंगे, तो यह विश्व में सकारात्मक ऊर्जा और स्थायी परिवर्तन लाएगा, यही मानवता को करुणामय भविष्य की ओर ले जाएगा।” हार्टफुलनेस ध्यान सरल अवलोकन पर आधारित है, जिसमें मन और हृदय के संतुलन पर विशेष बल दिया जाता है। नियमित अभ्यास से स्पष्टता, भावनात्मक स्थिरता और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। इस ध्यान सत्र में युवा, विद्यार्थी, पेशेवर एवं समाज का हर वर्ग निःशुल्क भाग ले सकता है। हार्टफुलनेस संस्था 160 देशों में 5000 से अधिक केंद्रों के माध्यम से ध्यान प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। आयोजन में सम्मिलित होने के लिए पंजीकरण लिंक उपलब्ध है और किसी अनुभव की आवश्यकता नहीं है। मध्य प्रदेश के नागरिकों से भी अपील है कि वे स्वयं के साथ अपने परिचितों को जोड़ें। यह जानकारी डॉक्टर नील केलकर एवं एस डी वर्मा द्वारा साझा की गई।

संतोष वर्मा के बाद IAS मीनाक्षी सिंह का वीडियो सामने आया, बयान को लेकर विवाद

 भोपाल IAS संतोष वर्मा के सवर्ण समाज पर दिए गए विवादित बयान के बाद अब एक और आईएएस अधिकारी का वीडियो सामने आया है. इस बार यह वीडियो IAS अफसर मीनाक्षी सिंह का है, जिसमें वह जातिगत पहचान और जातिवाद को समय की जरूरत बता रही हैं. वीडियो में उन्होंने कहा है कि आज के दौर में जाति को पहचानना और उसी आधार पर एक-दूसरे का सहयोग करना जरूरी हो गया है. सवर्ण समाज के लोग सरनेम (उपनाम) देखकर पक्षपात करते हैं और यही मानसिकता हमें भी अपनानी होगी. अपने समाज के लोगों को पहचान कर उनकी मदद करनी चाहिए. यह वीडियो भी 23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर पार्क में आयोजित अजाक्स सम्मेलन का ही है जो अब वायरल हुआ है. IAS मीनाक्षी सिंह ने इसी सम्मेलन में कहा कि 'अजाक्स को केवल एक संगठन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे समाज तक पहुंचना होगा. वायरल वीडियो में मीनाक्षी सिंह बोल रही हैं, ''समाज को जोड़ने की पहली कड़ी परिवार होता है. बच्चों को यह बताना जरूरी है कि वे आदिवासी हैं और उनकी जाति क्या है. आज के समय में जातिगत पहचान और जातिवादी सोच सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है.'' वीडियो में मीनाक्षी सिंह यह भी कह रही हैं, ''सवर्ण समाज पक्षपात करता है और यही जातिवादी सोच हमें भी अपनानी होगी. अपने समाज के लोगों को तलाशिए और उनकी मदद कीजिए. कई आदिवासी भाई-बहन यह सोचकर झिझकते हैं कि बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों से कैसे मिलें. ऐसा नहीं होना चाहिए। जब भी भोपाल आएं तो बेझिझक मिलें, अपनी बात रखें और समस्याएं साझा करें. बातचीत और संवाद से ही समाज के लिए कुछ किया जा सकता है.'' ‘बच्चों को अपनी जातिगत पहचान बताना जरूरी’ भोपाल के अंबेडकर पार्क में पिछले दिनों आयोजित अजाक्स (AJAKS) के सम्मेलन को संबोधित करते हुए मीनाक्षी सिंह ने कहा कि संगठन को केवल मंच तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे समाज और परिवार तक ले जाना होगा। उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने की शुरुआत घर से होती है और इसके लिए बच्चों को यह बताया जाना चाहिए कि वे किस समुदाय से आते हैं। उन्होंने मंच से यह भी कहा कि बच्चों को यह जानकारी होनी चाहिए कि वे आदिवासी या एससी समुदाय से जुड़े हैं और अपनी जातिगत पहचान को समझना जरूरी है। ‘जातिगत पहचान आज के समय की जरूरत’ आईएएस मीनाक्षी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में जातिगत पहचान को लेकर सजग रहना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज में आज भी उपनाम देखकर भेदभाव किया जाता है। ऐसे में अपने समाज के लोगों को पहचानना और एक-दूसरे का सहयोग करना जरूरी हो गया है। उनका कहना था कि समाज के भीतर एकजुटता तभी आएगी, जब लोग खुलकर अपनी पहचान स्वीकार करेंगे और एक-दूसरे के साथ खड़े होंगे। ‘लोग मिलने से हिचकिचाते हैं’ अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि कई बार आदिवासी समाज के लोग वरिष्ठ पदों पर बैठे अधिकारियों से मिलने में झिझकते हैं। उन्हें लगता है कि बड़े पद पर बैठे अधिकारियों से कैसे संपर्क किया जाए। मीनाक्षी सिंह ने लोगों से अपील की कि भोपाल आने पर वे उनसे बिना किसी संकोच के मुलाकात करें, चाहे कोई समस्या हो या न हो। संवाद से ही समाज के लिए बेहतर काम किया जा सकता है।   आदिम जनजाति विभाग में है उप सचिव  बता दें आईएएस मीनाक्षी सिंह 2013 बैच की अधिकारी हैं और वर्तमान में आदिम जनजाति विभाग में उपसचिव के पद पर कार्यरत हैं। वे पदोन्नति के माध्यम से आईएएस बनी हैं और अजाक्स संगठन से भी जुड़ी हुई हैं। इस मामले में उनसे संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।  ब्राह्मण समाज ने जताई नाराजगी IAS मीनाक्षी सिंह के बयान पर सवर्ण समाज ने आपत्ति जताई है. अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा कि यह सब संतोष वर्मा के खिलाफ समय पर और ठोस कार्रवाई नहीं करने का नतीजा है कि बड़े पदों पर बैठे अफसर ऐसे समाज को बांटने वाले बयान दे रहे हैं. 'सवर्ण समाज चुप नहीं बैठेगा' आईएएस अधिकारी संविधान की शपथ लेते हैं जिसमें सर्वधर्म समभाव की बात होती है. यदि प्रदेश के आईएएस अफसरों में इस तरह की सोच पनप रही है, तो यह बेहद खतरनाक संकेत है. इसका मतलब वो जाति देखकर काम कर रहे हैं. सीएम मोहन यादव को चाहिए कि ऐसे जातिवादी सोच वाले अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर इन्हें लूप लाइन में भेजें, नहीं तो सवर्ण समाज चुप नहीं बैठेगा. IAS संतोष वर्मा भी दे चुके हैं विवादित बयान बता दें कि आईएएस मीनाक्षी सिंह से पहले आईएएस संतोष कुमार वर्मा भी इसी तरह का बयान देकर विवादों में घिर चुके हैं. 23 नवंबर को अजाक्स सम्मेलन में ब्राह्मण समाज की बेटियों को लेकर उन्होंने जो बयान दिया था, उसके बाद देश भर में प्रदर्शन और विरोध हुआ था, जिसके बाद सरकार ने उन्हें कृषि विभाग से हटाकर मंत्रालय अटैच कर दिया था.

दो साल में श्रमिकों के हित में बड़े कदम, मध्यप्रदेश सरकार की अहम उपलब्धियाँ

श्रमिकों के कल्याण के लिये मध्यप्रदेश में दो वर्षों में हुए उल्लेखनीय कार्य भोपाल  विकास के मार्ग पर तेजी से बढ़ रहे मध्यप्रदेश में डॉ मोहन यादव सरकार की श्रम और श्रमिकों से संबंधित नीतियों के कारण श्रमिकों के हित में अनेक निर्णय लिए गए है। वहीं तुलनात्मक रूप से राज्य में श्रम उपलब्धता की बेहतर स्थिति के कारण राज्य के औद्योगिक विकास में भी मदद मिल रही है। इस कार्य में मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। किसी भी राज्य में बेहतर औद्योगिक विकास के पीछे श्रमिकों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण घटक है। इसी को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश में श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखकर कदम उठाए जा रहे हैं। म.प्र. श्रम कल्याण मंडल की विगत दो वर्ष की उपलब्धियों मंडल द्वारा म.प्र. श्रम कल्याण निधि अधिनियम, 1982 के प्रावधानों के अंतर्गत मंडल को श्रमिकों एवं नियोजकों से प्राप्त होने वाले अभिदाय को ऑनलाइन प्राप्त करने के लिये एम पी ऑनलाइन के माध्यम से मंडल का पोर्टल विकसित किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से 97 प्रतिशत से अधिक अभिदाय राशि मंडल को ऑनलाइन प्राप्त हो रही है। पोर्टल में मंडल द्वारा संचालित श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी एवं आवेदन पत्रों का प्रारूप दिया गया है। सभी नियोजकों के लिये पोर्टल उपयोगी है। मंडल को विगत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 13 हजार 238 संस्थान स्थापनाओं में कार्यरत लगभग 8 लाख 93 हजार 193 श्रमिकों का अभिदाय 12 करोड़ 35 लाख 50 हजार रूपये प्राप्त हुआ है। यह विगत वित्तीय वर्ष की तुलना में 1 करोड़ 30 लाख रूपये अधिक है। मंडल द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 11 हजार 359 हितग्राहियों को 6 करोड़ 29 लाख रूपये से अधिक हितलाभ राशि वितरित की गई थी। वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में 15 हजार 405 हितग्राहियों को 8 करोड़ 24 लाख रूपये से अधिक की हितलाभ राशि वितरित की गई। यह विगत वित्तीय वर्ष की तुलना में 1 करोड़ 95 लाख रूपये अधिक है। मंडल की 60वीं बैठक में लिये गये निर्णय एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा श्रम विभाग की समीक्षा बैठक में श्रम मंत्री एवं मुख्य सचिव महोदय के समक्ष प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में नवीन सर्व सुविधा युक्त आदर्श श्रम कल्याण केन्द्र स्थापित किये जाने के निर्देश दिये गये थे। इसके परिपालन में भोपाल, ग्वालियर, रीवा, सतना, पीथमपुर जबलपुर एवं उज्जैन में आदर्श श्रम कल्याण केन्द्र विकसित करने के लिये शासकीय भूमि आवंटन के लिये सर्व संबंधित औद्योगिक केन्द्र विकास निगम के कार्यकारी संचालकों को पत्र प्रेषित किये गये हैं। मंडल की 61वीं बोर्ड बैठक में अंतिम संस्कार सहायता योजना एवं अनुग्रह सहायता योजना का विस्तार करते हुए पात्र श्रमिक के परिवार में पति, पली, पुत्र, पुत्री तथा पात्र श्रमिक के माता पिता के अंतिम संस्कार के लिये एवं अनुग्रह सहायता का लाभ प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। मंडल की 61वीं बोर्ड बैठक में पात्र दिव्यांग श्रमिकों को इलेक्ट्रिक ट्रायसायकल एवं उपकरण प्रदान योजना प्रारम्भ करने का निर्णय लिया गया था। उक्त योजना लोक सेवा गारंटी स्कीम के अंतर्गत अधिसूचित की गई है। योजना लागू करने के संबंध में कार्यवाही निरंतरित है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र दिव्यांग श्रमिकों को 50 हजार रूपये राशि तक इलेक्ट्रिक ट्रायसायकल अथवा उपकरण प्रदान किये जायेंगे। श्रम मंत्री द्वारा सभी संभागों में श्रमिक खेलकूद प्रतियोगिताए आयोजित करने के निर्देशों के परिपालन में इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, रीवा, उज्जैन, जबलपुर, शहडोल, ग्वालियर चंबल तथा सागर संभाग में श्रमिक खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा चुका है। इनमें प्रदेश के सभी संभागों में समूह खेलों में विजेता, उपविजेता तथा एथेलेटिक्स में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले 1005 श्रमिक खिलाडियों ने पुरस्कार प्राप्त किये। मंडल द्वारा प्रदेश में संचालित 27 श्रम कल्याण केन्द्रों को कम्प्यूटर सेट एवं आवश्यक सामग्री प्रदान की गई है। प्रदेश के 17 सिलाई केन्द्रों में विगत तीन वर्षों में सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली श्रमिक परिवार की 418 महिलाओं को म.प्र. राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड भोपाल के माध्यम से दक्षता मूल्यांकन कर प्रमाण पत्र प्रदान किये गये है। म.प्र. भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों में 100 बिस्तर क्षमता के श्रमिक विश्राम गृह निर्माण का निर्णय लिया गया है। उज्जैन, सागर, सिंगरौली, बालाघाट एवं शहडोल जिलों में एक एक नवीन श्रमोदय आवासीय विद्यालय का निर्माण किए जाने का निर्णय लिया गया है। नरसिंहपुर जिले में श्रमोदय आदर्श आईटीआई के निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है। केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं का क्रियान्वयन भी विभाग की ओर से किया जा रहा है। आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत 13 लाख 85 हजार 963 निर्माण श्रमिकों एवं 38 लाख 52 हजार 307 परिवार सदस्यों का आयुष्मान कार्ड जारी किया गया है। इस योजना के तहत अब तक 3 लाख से अधिक निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारों के सदस्यों को 847 करोड़ 33 लाख की चिकित्सा सहायता दी गयी। · डॉ. आर.आर. पटेल  

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने प्रेस वार्ता में गिनाईं दो वर्षों की उपलब्धियाँ

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने प्रेस वार्ता में बताई दो वर्ष की उपलब्धियाँ भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने आज मिंटो हाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों से मीडिया को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के विकास हेतु सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की है। मध्य प्रदेश में श्रमिकों के हित में भी अनेक उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। मंत्री प्रह्लाद पटेल द्वारा प्रेस वार्ता में बताए गए तथ्य इस प्रकार हैं — प्रसन्नता का विषय है कि भारत की संसद ने विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 (विकसित भारत- जी राम जी  विधेयक, 2025) को पारित किया है। यह विधेयक मनरेगा में व्यापक वैधानिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो ग्रामीण रोज़गार को विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक विजन के साथ संयोजित करेगा तथा जवाबदेही, बुनियादी ढांचे के परिणामों और आय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा।गांव के विकास के बिना प्रदेश और राष्ट्र के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। हमारा सौभाग्य है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में ग्राम विकास है। उनकी भावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश सरकार के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ग्रामीण क्षेत्र के विकास हेतु सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम विभाग का उत्तरदायित्व मिला है। हमारी सरकार ने विगत दो वर्षों में जो कार्य किए हैं उनकी जानकारी इस प्रकार है :- विशेष उल्लेखनीय बिंदु     तीनों स्तर की पंचायतों के कार्यालय भवनों हेतु स्वीकृतियां प्रदान कीं तथा उनकी डिजाइन में परिवर्तन भी किया ताकि भविष्य में उनके ऊपरी मंजिलों का भी निर्माण किया जा सके।      2472 अटल ग्राम सेवा सदनों (ग्राम पंचायत भवनों) के निर्माण हेतु 922.20 करोड़ की राशि स्वीकृत की।     106 अटल सुशासन भवनों (जनपद पंचायत भवनों) के निर्माण हेतु 557.08 करोड़ की राशि स्वीकृत की।     05 अटल जिला सुशासन भवनों (जिला पंचायत भवनों) के निर्माण हेतु 49.98 करोड़ की राशि स्वीकृत की।     जीवनदायिनी माँ नर्मदा के परिक्रमा पथ को सुगम बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता में है। इस हेतु आश्रय स्थलों के निर्माण हेतु 231 स्थल चिन्हित किए गए हैं। इन स्थलों पर प्रथम चरण में पौधारोपण कार्य हेतु फेंसिंग के लिए 4.13 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। 19 स्थलों पर आश्रय स्थलों एवं यात्री प्रतिक्षालय के निर्माण हेतु 10.5 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इन आश्रय स्थलों का निर्माण पर्यटन विकास विभाग के माध्यम से प्रारंभ भी हो चुका है।     नदियों एवं जलवायु का संरक्षण हम सभी की सामूहिक चिंता का विषय है। मैंने प्रदेश की 106 नदियों के उद्गम स्थलों तक की यात्रा की है। हमारी सरकार इन उद्गम स्थलों को संरक्षित एवं संवर्धित करने का प्रयास कर रही है। हमने 89 नदियों के उद्गम स्थलों पर पौधरोपण कार्य हेतु फेंसिंग के लिए 2.92 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की है।     प्रदेश के पुराऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण भी हमारी सरकार की प्राथमिकता में है। हमने तामिया एवं भीमबेटिका क्षेत्र के विकास हेतु मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम को 2 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की है।      प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान घाटों को सुव्यवस्थित करने का निर्णय हमारी सरकार ने लिया है। इसके लिए दिसंबर, 2026 तक की समय सीमा भी तय की है। इस अवधि में सभी श्मशान घाटों को अतिक्रमण मुक्त करवाकर फेंसिंग उपरांत उनमें पौधरोपण करना तथा उन्हें मुख्य सड़क से एप्रोच रोड बनाकर जोड़ने का कार्य इस अवधि में किया जाएगा।     प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में प्रदेश ने उल्लेखनीय कार्य किया है इसके प्रथम चरण में 72975 किलोमीटर लंबाई की 18948 सड़कों का निर्माण किया गया द्वितीय चरण में 4891 किलोमीटर की 373 सड़कों का निर्माण हुआ तथा तीसरे चरण में 11886 किलोमीटर की 984 सड़कों का निर्माण किया गया। विगत दो वर्षों में इन तीनों चरणों में 913 किलोमीटर लंबाई की सड़क तथा 305 फूलों का निर्माण किया गया है।     आरसीपीएलडब्ल्यूईए अंतर्गत 18 अप्रैल 107 किलोमीटर लंबाई की सड़कों का निर्माण हुआ है।     प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत 1033 संपर्क विहीन बस्तियों हेतु 2218 किलोमीटर सड़क स्वीकृत की गई हैं।     प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण हेतु 10602 बस हटे चिन्ह अंकित की गई है जिनके लिए 1849 किलोमीटर की स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। रोजगार गांरटी योजना :-     कार्यों के स्थल चयन हेतु वैज्ञानिक आधार पर करने हेतु SIPRI सॉफ्टवेयर विकसित      जल गंगा संवर्धन अभियान 2025 में SIPRI सॉफ्टवेयर से समस्त कार्यों (जैसे खेत तालाब, कूप रिचार्ज, अमृत सरोवर इत्यादि) के उपयुक्त स्थल का चयन       वर्ष 2025-26 में कुल स्वीकृत लेबर बजट (मानव दिवस) : 1500 लाख, कुल सृजित  : 1404 लाख (94%)     वर्ष 2024-25 में कुल स्वीकृत लेबर बजट (मानव दिवस) : 2000 लाख, कुल सृजित  : 1897 लाख (95%)     राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जनजाति परिवारों को रोजगार देने में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर      कैच द रेन अभियान (जल संचय, जन भागीदारी- अप्रैल 2024 से मई 2025) – देश में मध्यप्रदेश को चतुर्थ स्थान एवं खंडवा जिले को प्रथम पुरुस्कार प्राप्त      एक बगिया माँ के नाम परियोजना अंतर्गत रु 750 करोड़ की लागत से 31,142 कार्य लिए गए।      माँ नर्मदा परिक्रमा पथ पर चिन्हित आश्रय स्थल के में 138 परिसरों में पौधरोपण कार्य।      जल गंगा संवर्धन अभियान 2025 अंतर्गत, रु 3000 करोड़ के कार्य लिए गए      खेत तालाब – 86,360 लागत रु 2048 करोड़      कूप रिचार्ज – 1,05,203 लागत रु 263 करोड़      अमृत सरोवर – 536, लागत रु 138 करोड़      पूर्व वर्षों के प्रगतिरत 24,358 कार्यों की पूर्णता      जल गंगा संवर्धन अभियान 2024 अंतर्गत रु. 1368 करोड़ के 60,428 कार्य कराये गए।     राज्‍य ग्रामीण आजीविका मिशन     लखपति दीदी- Digital Ajeevika register के अनुसार SHG के ऐसे सदस्य जिनके … Read more