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इंदौर में पहली बार दिखा ऐसा एक्शन, नगर निगम ने ढोल बजाकर और पीले चावल देकर शुरू की बकाया वसूली मुहिम

इंदौर  इंदौर में इस बार राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर नगर निगम ने ऐसा तरीका अपनाया है, जिसे देखकर लोग हैरान भी हो रहे हैं और खुश भी। आमतौर पर कर बकायादारों को नोटिस भेजे जाते हैं, लेकिन इस बार निगम की टीमें ढोल-ताशे बजाते हुए मोहल्लों और बाजारों में घूम रही हैं। कर्मचारियों ने दुकानदारों और करदाताओं को पीले चावल देकर 13 दिसंबर की लोक अदालत में आने का निमंत्रण दिया। राजवाड़ा और किशनपुरा जैसे व्यस्त बाजारों में बुधवार सुबह यह नजारा लोगों के लिए बिल्कुल अलग था। व्यापारियों ने भी नगर निगम की इस अनोखी पहल का स्वागत किया। 13 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने बताया कि 13 दिसंबर को वर्ष की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होगी। शहर के सभी 22 जोनल कार्यालय, रजिस्टार कार्यालय और निगम मुख्यालय में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में लोग अपना संपत्तिकर (Property Tax), जलकर (Water Tax) और बकाया अधिभार (Surcharge) कम राशि में निपटा सकेंगे। मकसद यह है कि ज्यादा से ज्यादा लोग एक ही दिन में अपने बकाए चुका सकें। राजवाड़ा में दुकान-दुकान पहुंचा निगम का न्यौता जोन 3 की टीम, सहायक राजस्व अधिकारी अनिल निगम के निर्देशन में, बुधवार को राजवाड़ा और किशनपुरा के बाजारों में निकली। कर्मचारियों ने ढोल-ताशे बजाकर दुकान-दुकान व्यापारियों को बताया कि लोक अदालत में बकाया अधिभार पर बड़ी छूट मिल रही है। व्यापारी भी इस तरीके से काफी प्रभावित दिखे। उनका कहना था कि यह तरीका नोटिस या मैसेज की तुलना में ज्यादा असरदार है, क्योंकि लोग तुरंत ध्यान देते हैं और बात समझ भी जाते हैं। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग काउंटर लोक अदालत वाले दिन नगर निगम करदाताओं की सुविधा के लिए खास इंतजाम करेगा। सभी जोनल कार्यालयों में भुगतान के लिए विशेष काउंटर, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग डेस्क, पीने के पानी की सुविधा, बैठने की व्यवस्था रखी जाएगी। इसके अलावा बकाया राशि के बिल और अधिभार में दी जा रही छूट की जानकारी भी वहीं तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। जानिए कितनी मिलेगी छूट 1. संपत्ति कर पर छूट 50,000 तक पुरानी बकाया राशि होने पर, आपको ब्याज में पूरी 100% छूट मिलेगी। अगर बकाया राशि 50,000 से 1 लाख के बीच है, तो आपको ब्याज में आधी छूट मिलेगी और अगर बकाया राशि 1 लाख से ज़्यादा है, तो भी आपको ब्याज में 25% की छूट मिलेगी। 2. जलकर पर छूट पानी के बिल की 10,000 तक की बकाया राशि पर, आपको ब्याज में पूरी 100% छूट मिलेगी। अगर बकाया राशि 10,000 से 50,000 के बीच है, तो आपको ब्याज में 75% की बड़ी छूट मिलेगी और अगर बकाया राशि 50,000 से ज़्यादा है, तो भी आपको ब्याज में 50% की छूट मिलेगी। इस बात का ध्यान रखें यह छूट केवल 13 दिसंबर, लोक अदालत वाले दिन ही लागू होगी।

मध्य प्रदेश की नई पहचान: धर्म, पर्यटन और अध्यात्म के क्षेत्र में 12 लोक और श्री राम वनगमन पथ का निर्माण

भोपाल  धर्म- अध्यात्म, संस्कृति और पर्यटन के संगम से मध्य प्रदेश में विकास की त्रिवेणी बह रही है। प्रदेश इन क्षेत्रों में नई पहचान बना रहा है। प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उज्जैन में वर्ष 2024 में सात करोड़ पर्यटक आए, जबकि 2023 में यह संख्या पांच लाख थी। श्रीमहाकाल महालोक बनने के पहले उज्जैन में प्रतिवर्ष आने वाले पर्यटकों की संख्या 30 से 40 लाख के भीतर रहती थी। यानी महालोक बनने के बाद पर्यटकों की संख्या 20 गुना तक बढ़ गई है। इसमें विदेश पर्यटक भी शामिल हैं। इसी तरह से प्रदेश में 12 लोक और बन रहे हैं, जिससे देश-दुनिया में मप्र की नई पहचान बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा धार्मिक पर्यटन बढ़ाने के लिए प्रमुख स्थलों के विकास की है। धर्म, संस्कृति और पर्यटन का सबसे अच्छा गठजोड़ प्रदेश में बन रहे 1,450 किलोमीटर के राम वनगमन पथ में दिखेगा। अभी प्रदेश के 10 ऐसे जिलों के 40 स्थलों को चिह्नित किया गया है, जहां से भगवान श्रीराम वनवास के दौरान गुजरे थे। कुछ ऐसे जिलों को भी शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जो भगवान श्रीराम से जुड़े हैं। इन जिलों को सड़क मार्ग से एक सर्किट की तरह जोड़ा जाएगा। वहां सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम होंगे। इस तरह से कृष्ण पाथेय का निर्माण किया जा रहा है। इसका केंद्र उज्जैन का सांदीपनि आश्रम होगा। श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़े स्थलों की पहचान का काम चल रहा है। इससे राजस्थान के सीकर में स्थित खाटू श्माम को भी जोड़ा जाएगा। इस तरह कृष्ण पाथेय के रूप में एक बड़ा धार्मिक और पर्यटन सर्किट बनने जा रहा है। राजस्थान सरकार भी इसमें सहयोग कर रही हैं। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच इस विषय पर एक-दूसरे का सहयोग करने की सहमति बन चुकी है। कहां कौन सा लोक बन रहा ओरछा में रामराजा लोक, पांढुर्णा के जामसावली में हनुमान लोक, सीहोर में सलकनपुर में देवी लोक, सागर में संत रविदास लोक, जबलपुर में रानी दुर्गावती स्मारक और रानी अवंतीबाई स्मारक, अमरकंटक में मां नर्मदा महालोक, खरगोन में देवी अहिल्याबाई लोक, बड़वानी में नागलवाड़ी लोक और ओंकारेश्वर में एकात्म धाम बनाया जा रहा है। पीएमश्री पर्यटन वायु सेवा एवं पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा मध्य प्रदेश में पर्यटन को बढ़ाने के लिए पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा नवंबर 2025 से प्रारंभ की गई है। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए हेलीकाप्टर की सुविधा निजी एजेंसी के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। चीता प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 मे अपने जन्म दिवस पर श्योपुर में नामीबिया से लाए गए आठ चीते छोड़े थे। इसके बाद मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य को भी चीतों का बसेरा बनाया गया है। अब नौरादेही में भी चीते बसाने की तैयारी है। पर्यटकों की सुविधा के लिए बफर में सफर का कांसेप्ट शुरू किया है। रातापानी और माधव नए टाइगर रिजर्व बनाए गए हैं।

यूनियन कार्बाइड के कचरे में घातक मरक्यूरी, हाईकोर्ट ने जताई गंभीर चिंता, याचिका दायर

जबलपुर   यूनियन कार्बाइड का जहरीला पीथमपुर में नष्ट किए जाने के बाद अब उसकी राख चिंता का विषय बनी हुई है. इस मामले में दायर एक अन्य याचिका की सुनवाई के दौरान बताया गया कि जहरीले कचरे से निकली 900 मीट्रिक टन राख में रेडियो एक्टिव पदार्थ सक्रिय हैं, जो चिंताजनक हैं. राख में मरक्यूरी है, जिसे नष्ट करने की तकनीक सिर्फ जपान व जर्मनी के पास है. ऐसे में इसकी घनी आबादी के पास लैंडफिलिंग करना भविष्य में खतरनाक साबित हो सकता है. यूनियन कार्बाइड की राख को लेकर याचिका साल 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा था. पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कचरे के विनष्टीकरण की रिपोर्ट पेश की गई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने राख को घनी आबादी के पास लैंडफिल किए जाने पर रोक लगा दी थी. इसी दौरान एक अन्य याचिका दायर की गई, जिसमें राख को भविष्य के लिए खतरनाक बताया गया. इसके बाद हाईकोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ किए जाने के आदेश जारी किए थे. राख को दूर ले जाने पर विचार करे सरकार हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने 8 अक्टूबर 2025 को जारी अपने आदेश में कहा था कि जहरीले कचरे की राख की लैंडफिलिंग के आदेश के बावजूद भी सरकार ने दूसरे स्थान के संबंध में जानकारी नहीं दी. सरकार द्वारा इंसानों की आबादी से सिर्फ 500 मीटर दूर लैंड फिलिंग का स्थान निर्धारित किया गया है. राख अभी भी जहरीली है और अगर इसे ठीक से नहीं रोका गया तो भूकंप जैसी किसी प्राकृतिक आपदा के कारण उसे रोकने वाला स्ट्रक्चर गिरने पर एक और आपदा हो सकती है. ऐसे में राज्य सरकार को राख ऐसी जगहों पर ले जाने की संभावना पर विचार करना चाहिए जो इंसानी बस्तियों, पेड़-पौधों और पानी के सोर्स से बहुत दूर हों. कंटेनमेंट सिस्टम टूट भी जाए, तो भी इसके बुरे असर बहुत कम हों. यूनियन कार्बाइड की राख में मरक्युरी की मात्रा अधिक इंटरविनर याचिका में कहा गया है कि जहरीले कचरे में मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड रिपोर्ट में बताई गई तय लिमिट से मरक्यूरी की मात्रा अधिक है. वहीं, इस मामले में सरकार की ओर से अधिवक्ता ने एक एनिमेटेड वीडियो प्रेजेंटेशन के साथ यह दलील दी कि जहरीली राख को रोकने के लिए जो स्ट्रक्चर बनाया है, सबसे मॉडर्न सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल करते हुए बनाया गया है. हालांकि, हाईकोर्ट इस बात से संतुष्ट नहीं हुआ कि प्रस्तावित कंटेनमेंट स्ट्रक्चर किसी भी तरह की जियो-टेक्टोनिक एक्टिविटी या भूकंप से होने वाले नुकसान से पूरी तरह सुरक्षित है. युगलपीठ ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बारिश में नई सड़कें बह जाती हैं और पुल गिर जाते हैं, और इससे भी बुरा जब ओवरब्रिज 90 डिग्री मोड़ के साथ बनाए जाते हैं, जिससे यह राज्य पूरे देश में मजाक का पात्र बन जाता है. ऐसे राज्य की इंजीनियरिंग की काबिलियत पर पूरा भरोसा करना तबाही को न्योता देना हो सकता है. इस कोर्ट की चिंता को सरकार का मजाक उड़ाने जैसा नहीं समझना चाहिए, बल्कि कोर्ट जो सावधानी बरत रहा है, वह एक बार चोट खाने के बाद दूसरी बार बचने जैसा है. कोर्ट ने याद दिलाया भोपाल गैस कांड का वो दिन हाईकोर्ट में युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी जारी रखते हुए कहा कि भोपाल में फैक्ट्री तब तक सुरक्षित थी? जब तक कोई मुसीबत नहीं आई और लगभग बीस हजार लोगों की जान एक पल में चली गई. पांच लाख दूसरे लोगों को अपनी बाकी की जिंदगी सांस लेने और कई तरह की दिक्कतों से जूझना पड़ा रहा है. इसलिए, जब जहरीली राख को रोकने की बात आती है, शायद आखिरी सांस तक, तो कोई भी सावधानी ज्यादा नहीं होती. इसलिए जहरीली राख की लैंडफिलिंग साइट को आबादी के पास रखना कोर्ट को मंजूर नहीं. लैंडफिलिंग के लिए अलग जगह चुनें : हाईकोर्ट युगलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देशित किया था कि जहरीली कचरे की रखा की लैंडफिलिंग के लिए सबसे अच्छी टेक्निकल एक्सपर्टीज पाने ग्लोबल टेंडर निकालाजाए. कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में भी जानकारी प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं.इसके अलावा लैंडफिलिंग के लिए दूसरा स्थान चयन करने के भी निर्देश दिए हैं. राख में मरक्यूरी, ये इंसानों के लिए कितनी खतरनाक? WHO के मुताबिक, '' मरक्यूरी यानी पारा इंसानी सेहत के लिए बेहद खतरनाक होता है. आमतौर पर हर व्यक्ति किसी न किसी स्तर पर मरक्यूरी के संपर्क में आता है, हालांकि इसकी मात्रा बहुत कम होती है. लेकिन मरक्यूरी की मात्रा अधिक हो और ये सांस या भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाए तो ये फेफड़े और दिमाग को डैमेज कर देती है. दूषित मछलियों और शेलफिश में भी मरक्यूरी की मात्रा अधिका होती है, जिससे किडनी भी खराब हो सकती हैं. यह प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी बेहद खतरनाक है, क्योंकि ये गर्भ में पल रहे बच्चे और जीवन के शुरुआती दिनों में बच्चे के विकास में बाधा डाल सकती है.''

मोहन सरकार के दो साल का रिपोर्ट कार्ड: मुख्यमंत्री आज देंगे जनता को सरकार की प्रगति का ब्योरा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर 12 दिसंबर को जनता के सामने कार्यकाल का लेखा जोखा पेश करेंगे। इस मौके पर वे भोपाल में पत्रकार वार्ता को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि पत्रकार वार्ता में वे सरकार की दो वर्षों की उपलब्धियों, प्रमुख परियोजनाओं और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से जानकारी साझा करेंगे। मुख्यमंत्री की पत्रकार वार्ता के अगले दिन, 13 दिसंबर को, प्रभारी मंत्रीगण अपने-अपने संभागीय और जिला मुख्यालयों में जिला विकास सलाहकार समितियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद मीडिया को संबोधित कर अपने क्षेत्रों में हुई उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी देंगे। 14 दिसंबर को बाकी जिलों में भी प्रभारी मंत्री जिला सलाहकार समितियों की बैठक कर पत्रकार वार्ता करेंगे। इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे जिला स्तर पर हुए कार्य, उपलब्धियां और आगामी कार्ययोजना की पूरी जानकारी साझा करें। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही सभी विभागों की समीक्षा कर उनकी उपलब्धियों और आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी ली। इस दौरान प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने, सड़क और पुल निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, शिक्षा क्षेत्र में सुधार, कृषि और उद्योग में नवाचार तथा रोजगार सृजन जैसी प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है। यह आयोजन सरकार की पारदर्शिता और जनता के साथ संवाद को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम होगा। 

मुख्यमंत्री मोहन यादव 14 दिसंबर को इंदौर में मेट्रो, बीआरटीएस और सड़कों के निर्माण पर लेंगे अहम निर्णय

 इंदौर  इंदौर में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे। रेसीडेंसी कोठी में आयोजित बैठक में मुख्य मुद्दा मेट्रो ट्रेन के अंडरग्राउंड रुट का रहेगा। पिछले दिनों नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजवर्गीय ने मेट्रो ट्रेन रुट का दौरा किया था। तब उन्होंने मेट्रो रुट बंगाली काॅलोनी से अंडग्राउंड करने पर जोर दिया है। मेट्रो के रुट में बदलाव होगा या फिर पुराना रुट ही रहेगा। इस पर मुख्यमंत्री फैसला ले सकते है। इसके अलावा बीआरटीएस की बस रेलिंग हटाने में हो रही देरी को लेकर भी बैठक में चर्चा होगी। 9 माह तक रेलिंग नहीं हटाए जाने पर हाईकोर्ट भी नाराज हो चुका है। बीआरटीएस पर नए ब्रिज भी बनाए जाना है। इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी आ चुकी है। इस पर भी फैसला हो सकता है। इसके अलावा अन्य प्रोजेक्टों पर भी चर्चा होगी। बैठक में सभी विभागों के अफसर भी मौजूद रहेंगे। नर्मदा-कालीसिंध लिंक परियोजना और संचालित हो रही नर्मदा-शिप्रा लिंक योजना के बारे में भी बात होगी। सिंहस्थ को लेकर शहर में हो कामों की समीक्षा भी की जाएगी। मास्टर प्लान की 23 सड़कों के लिए काम भी शहर में शुरू हो चुके है, लेकिन कुछ सड़कों के लिए अभी बाधक निर्माण नहीं टूटे है।  मेट्रो के अंडरग्राउंड स्टेशनों का काम शुरू इंदौर में मेट्रो के अंडरग्राउंड स्टेशनों का काम भी शुरू हो गया है। एमजी रोड के समीप भाऊ शिंदे खेल परिसर में स्टेशन के लिए खुदाई भी शुरू हो गई है। मेट्रो कार्पोरेशन ने खुदाई के लिए मशीनें भी भेज दी है। इसके अलावा दूसरी जगहों पर भी अंडरग्राउंड स्टेशन के लिए सर्वे हो गया है। आठ से अधिक मेट्रो स्टेशन बनाए जाना है। यदि मेट्रो के अंडरग्राउंड रुट में बदलाव होता है तो उनकी संख्या और बढ़ सकती है।  

म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग को देगा 400 ईव्हीएम

राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री श्रीवास्तव की उपस्थिति में हुआ एमओयू भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी के तहत किराये पर सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग को 400 ईव्हीएम उपलब्ध करायेगा। इस संबंध में गुरुवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव की उपस्थिति में सचिव मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह और सचिव सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग सुश्री ग्लोरिया नामचू ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये। राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री श्रीवास्तव ने कहा कि ईव्हीएम शेयरिंग के मामले में मध्यप्रदेश पॉयनियर स्टेट है। उन्होंने बताया कि ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी के तहत छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग को ईव्हीएम किराये पर दी जा चुकी हैं। इसी तरह जम्मू-कश्मीर एवं महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन को भी ईव्हीएम किराये पर देने के लिये एमओयू हो चुका है। अन्य राज्यों के साथ भी एमओयू की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी को-ऑपरेटिव फेडरेलिजम का बेहतर उदाहरण है। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि मध्यप्रदेश में स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज के एमओयू से सिक्किम और मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के बीच संबंध और सुदृढ़ होंगे। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2014-15 में स्थानीय निर्वाचन में ईव्हीएम का उपयोग शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि ईव्हीएम के माध्यम से चुनाव कराने में सहूलियत होने के साथ ही पारदर्शिता भी बनी रहती है। श्री सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ को 2 हजार ईव्हीएम और महाराष्ट्र को 25 हजार कंट्रोल यूनिट और एक लाख बेलेट यूनिट किराये पर दी गयी हैं। सचिव सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग सुश्री नामचू ने इस एमओयू पर कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी सिक्किम जैसे छोटे राज्यों के लिये बहुत उपयोगी है। सुश्री नामचू ने कहा कि इससे राज्यों का आर्थिक बोझ कम होगा और सरलता से स्थानीय चुनाव कराये जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उपयोग की जा रहीं निर्वाचन की अन्य नवीनतम तकनीकों के बारे में भी जानकारी मिलेगी, जिसका उपयोग सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग करेगा। ईव्हीएम को किराये पर देने के लिये प्रति कंट्रोल यूनिट 400 एवं प्रति बीयू 200 रुपये की दर निर्धारित है। किराये की राशि अग्रिम रूप से ली जाती है। ईव्हीएम के परिवहन का पूरा व्यय राज्य निर्वाचन आयोग सिक्किम वहन करेगा। ईव्हीएम मशीन आवश्यक सुरक्षा के साथ ले जानी होगी एवं निर्वाचन के बाद स्वयं ही मध्यप्रदेश के संबंधित जिलों में जमा करानी होगी। इस दौरान सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव श्री राजेन राय और उप संचालक श्री टी.टी. लेपचा, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव श्री मनोज मालवीय, श्री सुतेश शाक्य, सुश्री संजू कुमारी, श्री मुकुल गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

एम.पी. ट्रांसको चलाएगी ‘रोको-टोको‘ अभियान

इंदौर की ट्रांसमिशन लाइनों में चायनीज मांझा फँसने से दो वर्षों में 13 बार बिजली बाधित भोपाल  मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने इंदौर शहर में ट्रांसमिशन लाइनों के नजदीक चायनीज मांझे से पतंग उड़ाने के कारण उत्पन्न होने वाली संभावित दुर्घटनाओं और विद्युत व्यवधानों पर अंकुश लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सतर्क व सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कंपनी इंदौर में विशेष ‘‘रोको-टोको ‘‘ अभियान चलाएगी। एम.पी. ट्रांसको की कार्यपालन अभियंता श्रीमती नमृता जैन ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में इंदौर क्षेत्र में 13 बार ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब पतंग के साथ चायनीज मांझा ट्रांसमिशन लाइन के संपर्क में आया, जिससे न केवल बिजली आपूर्ति बाधित हुई, बल्कि ट्रांसमिशन लाइनें क्षतिग्रस्त भी हुईं। चलाया जायेगा जागरूकता अभियान रोको-टोको अभियान के तहत, एम.पी. ट्रांसको ने इंदौर के उन क्षेत्रों को चिन्हित किया है जहाँ बहुतायत में पतंग उड़ाई जाती हैं। इन संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिकों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, व्यापक जागरूकता फैलाने के लिए पोस्टर, बैनर और पी.ए. सिस्टम के माध्यम से भी लोगों को सचेत और सतर्क किया जाएगा, ताकि जान-माल की हानि रोकी जा सके और उपभोक्ताओं को व्यापक क्षेत्र में बिजली के अनावश्यक लंबे व्यवधान का सामना न करना पड़े। क्यों घातक है चायनीज मांझा दरअसल, चायनीज मांझा, जो कि सामान्य सूती धागे से अलग होता है, विद्युत का सुचालक होने के कारण बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों के संपर्क में आने पर यह न केवल बिजली आपूर्ति में व्यवधान डालता है, बल्कि जान-माल की हानि का कारण भी बन सकता है। जब यह मांझा बिजली के तारों से टकराता है, तो इसमें मौजूद सामग्री के कारण करंट प्रवाहित हो सकता है, जिससे पतंग उड़ाने वाले और आसपास के लोगों को गंभीर खतरा होता है। इंदौर में ये क्षेत्र है संवेदनशील इंदौर में जिन क्षेत्रों को चायनीज मांझा के साथ पतंग उड़ाने के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील माना गया है, उनमें मुख्य रूप से लिम्बोदी, मूसाखेड़ी, खजराना, महालक्ष्मी नगर, सुखलिया, गौरीनगर, बाणगंगा, तेजाजी नगर और नेमावर रोड शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अभियान पर विशेष जोर रहेगा। 

मध्यप्रदेश पुलिस की मासूमों की सकुशल बरामदगी में त्वरित कार्रवाई

“विदिशा, सागर और ग्वालियर पुलिस ने अपहृत बच्चों को सुरक्षित दस्‍तयाब कर परिवार से मिलाया भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस ने एक बार फिर त्वरित, प्रभावी और संवेदनशील कार्रवाई का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। प्रदेश के तीन जिलों—विदिशा, ग्वालियर और सागर में अपहरण एवं गुमशुदगी से जुड़े तीन महत्वपूर्ण मामलों में पुलिस ने अद्भुत दक्षता और मानवीय संवेदना का परिचय दिया। दो अपहरण मामलों में मासूम बच्चों को रिकॉर्ड समय में सुरक्षित बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, वहीं सागर में पुलिस की संवेदनशील पहल से 17 वर्ष बाद गुमशुदा बालिका अपने परिवार से पुनः मिल सकी। विदिशा पुलिस की बड़ी सफलता — 235 से अधिक सीसीटीवी फुटेज से 48 घंटे में 3 वर्षीय मासूम बरामद थाना कोतवाली क्षेत्र से तीन वर्षीय बालिका के अपहरण की सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी के निर्देशन में “ऑपरेशन मुस्कान” के अंतर्गत 8 टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने 235 से अधिक सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण, 135 से अधिक लोगों से पूछताछ तथा कई इलाकों में सघन तलाशी अभियान चलाया। जिसके परिणामस्‍वरूप ऑटो चालक बृजेश कुशवाहा की पहचान हुई, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुँची। अभियुक्त अर्जुन सिंह पाल, हरिबाई, रवि पाल और जितेंद्र पाल ने बच्ची को सौदे के उद्देश्य से अपहरण करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने बच्ची को सकुशल बरामद कर परिवार को सौंपा। ग्वालियर पुलिस की त्वरित कार्यवाही — डेढ़ वर्षीय बच्चा सुरक्षित बरामद थाना बहोड़ापुर क्षेत्र से डेढ़ वर्षीय रोहित के गुम होने की सूचना पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह के निर्देशन में त्वरित खोजबीन प्रारंभ की गई। पुलिस टीम ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, मुखबिर तंत्र सक्रिय किया और सतत सर्च अभियान चलाया। मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने नागदेवता मंदिर, ट्रांसपोर्ट नगर से एक महिला को पकड़ा जो बच्चा लेकर घूम रही थी। महिला ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने बच्चा न होने के कारण उसे उठा लिया था। पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया। सागर जिला — 17 वर्ष बाद गुमशुदा बालिका को परिवार से मिलाया, परिवार ने कहा – ‘’यह हमारे जीवन का सबसे सुखद पल’’ 11 फरवरी 2008 को चौकी मंडीबामोरा क्षेत्र से 10 वर्षीय बालिका लापता हुई थी। वर्षों तक खोजबीन जारी रहने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। हाल ही में इंस्टाग्राम रील देखते समय उस बालिका, जो अब बालिग है, ने मंडीबामोरा रेलवे स्टेशन का नाम देखा और उसे अपना गृहक्षेत्र याद आ गया। उसने तत्काल अपने पति संग पुलिस चौकी से संपर्क किया। पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसके परिवार को बुलाया। बेटी अपने माता-पिता को तुरंत नहीं पहचान पाई, लेकिन पिता ने उसके माथे पर पुराने घाव के निशान से पहचान लिया। परिवार ने पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “यह हमारे जीवन का सबसे सुखद पल है। ये सभी उदाहरण न केवल प्रदेश पुलिस की दक्षता दर्शाते हैं, बल्कि समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करते हैं।

राज्यपाल पटेल ने किया गौवंश का पूजन मुरारीलाल तिवारी गौशाला का किया भ्रमण

भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने गुरूवार को इंदौर के सांवेर रोड़ स्थित मुरारीलाल तिवारी गौशाला का भ्रमण किया। उन्होंने गौशाला में गौवंश का पूजन किया और गौमाता को लड्डू खिलाये। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि गायों की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। भारत में गौमाता के पूजन की परम्परा वर्षों पुरानी है। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल को विधायक सुश्री उषा ठाकुर और गौशाला संचालकों ने गौशाला की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गौशाला में तीन सौ से अधिक गायों की देख भाल और सेवा की जाती है। उनका पूरा ध्यान रखा जाता है। राज्यपाल श्री पटेल को गौशाला के सचिव श्री सुभाष गोयल ने गौशाला से संबंधित साहित्य भेंट किया।  

चिकित्सक भगवान का दूसरा रूप होता है : राज्यपाल मंगुभाई पटेल

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के 73वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन का किया शुभारंभ भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि भगवान सभी जगह नहीं पहुँच पाते हैं, इसलिए उन्होंने चिकित्सक बनायें हैं। भगवान का दूसरा रूप चिकित्सक ही होता है। सम्मेलन आयोजन की सराहना करते हुए अपेक्षा की है कि चार दिवसीय सम्मेलन का निष्कर्ष समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। राज्यपाल श्री पटेल गुरूवार को न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (NSI) द्वारा आयोजित 73वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने न्यूरोलॉजी विषय पर दो पुस्तकों का लोकार्पण किया। विद्वान चिकित्सकों को सम्मानित किया। विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय मौजूद थे। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि मानव शरीर का मुख्य संचालक मस्तिष्क होता है। मस्तिष्क ही सभी इंद्रियों का नियंत्रणकर्ता है। हमारा मस्तिष्क स्वस्थ और शांत रहे, इस दिशा में न्यूरो सर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट चिकित्सकों की विशेष भूमिका है। न्यूरो सर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट उन्नत चिकित्सा, प्रमाणिक ज्ञान और संवेदनशीलता से मस्तिष्क का ईलाज करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और मन के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक तंदुरूस्ती भी जरूरी है। इसके लिए मस्तिष्क का स्वस्थ और शांत रहना बहुत जरूरी है। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि हम सभी अच्छी सेहत के लिए मोटे अनाज का सेवन करें। खूब पानी पीयें, अच्छी नींद लें और नियमित व्यायाम करें। फास्ट फूड खाने से बचे। मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर स्वास्थ्य की राजधानी है। यहाँ के चिकित्सक मरीजों की सेवा में हमेशा तत्पर रहते हैं। सेवा भावना के साथ कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य चिकित्सा के क्षेत्र में लगातार शोध और अनुसंधान हो रहे हैं। चिकित्सा गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में एनएसआइकॉन के ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. वसंत डाकवाले, ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. जे. एस. कठपाल, डॉ. मानस  पाणिगही, अध्यक्ष डॉ. मानस पाणिग्रही,  अध्यक्ष-निर्वाचित डॉ. के. श्रीधर, एजुकेशन एंड ट्रेनिंग कमेटी के चेयरमैन डॉ. लुईस बोर्बा और बड़ी संख्या में न्यूरोसर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट उपस्थित थे।