samacharsecretary.com

कृषि में मध्य प्रदेश का दबदबा: टमाटर और मटर में शीर्ष, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की योजना

मध्य प्रदेश कृषि में अव्वल: टमाटर में पहला, मटर में दूसरा स्थान; दुग्ध उत्पादन 20% बढ़ाने का लक्ष्य कृषि में मध्य प्रदेश का दबदबा: टमाटर और मटर में शीर्ष, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की योजना मध्य प्रदेश ने बनाई अलग पहचान: टमाटर व मटर उत्पादन में शानदार प्रदर्शन, दुग्ध उत्पादन में 20% बढ़ोतरी का लक्ष्य भोपाल  कृषि के क्षेत्र में मध्य प्रदेश की देशभर में अलग पहचान है। लगातार सात कृषि कर्मण अवार्ड जीतने वाला न केवल यह पहला राज्य है, बल्कि कोरोना महामारी के समय रिकॉर्ड 128 लाख टन गेहूं का उपार्जन करके पंजाब को भी पीछे छोड़ चुका है। टमाटर में पहला और मटर के उत्पादन में मप्र का देश में दूसरा स्थान है, तो दालों के उत्पादन में प्रथम स्थान, खाद्यान्न में द्वितीय और तिलहन उत्पादन में तृतीय स्थान पर है। अब किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उद्यानिकी फसलों में देखें, तो मध्य प्रदेश टमाटर और मटर उत्पादन में लगातार प्रगति कर रहा है। टमाटर के बीज पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। 2024-25 में 1,27,740 हेक्टेयर में टमाटर की खेती की गई, जिससे 36 लाख 94 हजार 702 टन उत्पादन हुआ। यही स्थिति मटर को लेकर भी है। अन्य प्रमुख उद्यानिकी उत्पादों में संतरे, धनिया, मसाले, औषधीय और सुगंधित पौधों के उत्पादन में भी मध्य प्रदेश का पहला स्थान है। इसी तरह दुग्ध उत्पादन और गोपालन को लेकर भी सरकार काम कर रही है। गोशालाओं को चारा के लिए 40 रुपये तक अनुदान देने का प्रविधान किया गया है। वहीं, दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति लीटर पांच रुपये प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। दुग्ध उत्पादन 20 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके लिए नस्ल सुधार का कार्यक्रम छेड़ा गया है। वहीं, पशुओं की टैगिंग भी की जा रही है। सहकारी समितियों का क्षेत्र विस्तार किया जा रहा है, तो संयंत्रों को आधुनिक बनाने की पहल भी की गई है। बासमती को जीआई टैग दिलाने का प्रयास इधर, बासमती धान को बासमती की पहचान दिलाने के लिए जीआइ टैग दिलाने के प्रयास लंबे समय से किए जा रहे हैं। इसको लेकर कानूनी लड़ चल रही है। जीआइ टैग नहीं मिलने के कारण व्यापारी प्रदेश से बासमती सामान्य धान की तरह लेकर जाते हैं, तो बासमती के नाम से बेचते हैं। इसके कारण किसानों को जो लाभ मिलना चाहिए वह नहीं मिलता है। प्राकृतिक खेती पर जोर प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों के अति उपयोग के कारण भूमि की मृदा शक्ति प्रभावित हो रही है। भविष्य के खतरे को भांपते हुए सरकार का जोर इस बात पर है कि किसान प्राकृतिक खेती करें, ताकि भूमि की मृदा शक्ति बनी रहे। इसके साथ ही पराली (नरवाई) जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए एक ओर जहां कड़ाई की जा रही है तो दूसरी ओर नरवाई को भूमि में ही मिलने के उपकरणों पर अनुदान दिया जा रहा है। कस्टम हायरिंग सेंटर से भी इसे जोड़ा गया है।  

रेरा की सख्त कार्रवाई भोपाल में, एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी पर हुई बड़ी कार्यवाही

भोपाल में रेरा की बड़ी कार्रवाई — एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर भी गिरी गाज बिल्डर हर्षवर्धन दीक्षित और गौरव शर्मा पर ₹10,000 प्रतिमाह क्षतिपूर्ति, ₹50,000 मानसिक क्षति मुआवज़ा और ₹5,000 प्रकरण व्यय का आदेश भोपाल  राजधानी भोपाल में रियल एस्टेट के नाम पर ग्राहकों से ठगी और मनमानी करने वाले बिल्डरों पर अब रेरा का डंडा चलने लगा है।मध्यप्रदेश रेरा (RERA) ने एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के संचालक हर्षवर्धन दीक्षित और गौरव शर्मा पर शुभ बिजनेस ज़ोन, रासलाखेड़ी, वार्ड नंबर 78, भानपुर प्रोजेक्ट में ग्राहकों को समय पर पजेशन न देने के मामले में सख़्त कार्रवाई की है। रेरा ने अपने आदेश में कंपनी को निर्देश दिया है कि ग्राहकों को दुकान का पजेशन देने तक ₹10,000 प्रतिमाह क्षतिपूर्ति राशि दी जाए, साथ ही ₹50,000 मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए मुआवज़ा और ₹5,000 प्रकरण व्यय का भुगतान किया जाए।  ग्राहकों के आरोप — करोड़ों लेकर न दुकान दी, न जवाब ग्राहक आरती भटेले, जयश्री बोराना, प्रेमलता, सीबा अख्तर, दयाराम पवार और सुरेश वर्मा ने रेरा और पुलिस कमिश्नर कार्यालय भोपाल में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया कि एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बिल्डर हर्षवर्धन दीक्षित और गौरव शर्मा ने दुकानों की बुकिंग के नाम पर करोड़ों रुपये लिए लेकिन न तो तय समय पर निर्माण पूरा किया और न ही पजेशन दिया। ग्राहकों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने विरोध किया तो उन्हें धमकाया गया और मानसिक उत्पीड़न किया गया।  रेरा का सख़्त रुख — “अब खेल खत्म, जवाबदेही तय होगी” रेरा ने मामले की सुनवाई के दौरान बिल्डरों की लापरवाही को “स्पष्ट धोखाधड़ी और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन” बताया। प्राधिकरण ने कहा कि ग्राहकों की गाढ़ी कमाई से इस तरह खिलवाड़ करने वाले बिल्डरों को अब बख्शा नहीं जाएगा। “रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही तय करने का समय आ गया है। अब निवेशकों को ठगने वालों को हर कदम पर जवाब देना होगा।”   शुभ बिजनेस ज़ोन बना विवाद का केंद्र भानपुर क्षेत्र का यह कमर्शियल प्रोजेक्ट लंबे समय से विवादों में रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने बड़े-बड़े दावे कर दुकानों की बुकिंग की थी, लेकिन निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। कई निवेशक अब भी अपनी मेहनत की कमाई फँसी होने से परेशान हैं।  आदेश का प्रभाव — प्रदेश के बिल्डरों के लिए चेतावनी रेरा की यह कार्रवाई पूरे मध्यप्रदेश के बिल्डरों के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है। अब यदि कोई बिल्डर तय समय पर पजेशन नहीं देता या ग्राहकों से मनमानी करता है, तो उसके खिलाफ आर्थिक और कानूनी कार्रवाई तय है।  सारांश में —     •    कंपनी: एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड     •    प्रोजेक्ट: शुभ बिजनेस ज़ोन, रासलाखेड़ी, वार्ड नंबर 78, भानपुर, भोपाल     •    बिल्डर: हर्षवर्धन दीक्षित एवं गौरव शर्मा     •    शिकायतकर्ता: आरती भटेले, जयश्री बोराना, प्रेमलता, सीबा अख्तर, दयाराम पवार, सुरेश वर्मा     •    रेरा आदेश:     •    ₹12,000 प्रति माह क्षतिपूर्ति     •    ₹50,000 मानसिक एवं शारीरिक क्षति मुआवज़ा     •    ₹5,000 प्रकरण व्यय भोपाल में रेरा की यह सख़्त कार्रवाई उन बिल्डरों के लिए सीधा संदेश है जो निवेशकों की गाढ़ी कमाई को अपनी जागीर समझ बैठे हैं। अब हर परियोजना में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता ही एकमात्र रास्ता है — वरना एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह हर लापरवाह बिल्डर को रेरा के शिकंजे में आना तय है।

MIT-WPU, पुणे में होगा वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट का आयोजन

दुनिया के 25 देशों के 500 से ज़्यादा दिग्गज एकजुट होकर इनोवेशन के भविष्य को नई दिशा देंगे भोपाल/पुणे  भारत में उच्च शिक्षा के प्रमुख संस्थानों में से एक, MIT वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU) आने वाले 6-7 नवंबर, 2025 को वर्ल्ड टेक्नोलॉजी ग्रुप के साथ मिलकर पहले वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट 2025 की मेज़बानी करेगा। यह वैश्विक शिखर सम्मेलन बेहद महत्वपूर्ण है, जो टेक्नोलॉजी, विज्ञान और इनोवेशन के क्षेत्र में इंसानी कौशल को बढ़ावा देगा— इसमें दुनिया भर के संस्थानों, स्टार्टअप्स, नीति बनाने वालों और जाने-माने विचारकों के साथ-साथ 25 देशों के 500 से ज़्यादा प्रतिनिधि शामिल होंगे। भारत में इस शिखर सम्मेलन की मेज़बानी से यह ज़ाहिर है कि, दुनिया भर की टेक्नोलॉजी पर चर्चा और इनोवेशन पर आधारित सहयोग में देश की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। देश भर में शुरू की गई 'मेक इन इंडिया' जैसी पहल के तहत रजिस्ट्रेशन करने वाले स्टार्टअप्स की संख्या 1.6 लाख से ज़्यादा है, जिससे पता चलता है कि दुनिया में टेक्नोलॉजी और एंटरप्रेन्योरशिप के लिए बेहतर माहौल के विकास में भारत सबसे आगे है।  दो दिनों तक चलने वाले इस शिखर सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बायोटेक्नोलॉजी, लाइफ साइंसेज, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा के क्षेत्र में हुई बड़ी प्रगति पर चर्चा की जाएगी, और इस तरह जानकारी के आदान-प्रदान तथा विभिन्न क्षेत्रों में संवाद के लिए एक मंच उपलब्ध होगा। इस आयोजन में दुनिया भर के शोधकर्ता, टेक्नोलॉजी के जानकार, नीति-निर्माता और इंडस्ट्री के दिग्गज एकजुट होकर आने वाले दशक के लिए टेक्नोलॉजी की दिशा तय करेंगे। इस मौके पर डॉ. गणेश काकंदीकर, डीन (इनोवेशन, स्टार्टअप्स, एवं कोलैबोरेशन MIT-WPU), तथा वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट 2025, भारत के संयोजक, ने कहा: "इस शिखर सम्मेलन में विज्ञान और इनोवेशन के क्षेत्र के सभी प्रमुख विशेषज्ञ एकजुट होंगे, जो आने वाले कल की टेक्नोलॉजी और इंसान की भलाई के बीच के रिश्ते को और मज़बूत बनाएगा। यह सम्मेलन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल बदलाव में भारत के योगदान को बढ़ावा देने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मंच की भूमिका निभाएगा।" इस अवसर पर MIT-WPU के एग्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट, डॉ. राहुल वी. कराड ने कहा, "MIT-WPU में हम मानते हैं कि, टेक्नोलॉजी को सिर्फ नई-नई खोज के ज़रिए नहीं, बल्कि नेक इरादे के साथ इंसानियत की सेवा करनी चाहिए। भारत में वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट की मेज़बानी दुनिया को यह संदेश देती है कि, भविष्य में पूरी दुनिया में होने वाला इनोवेशन सबको साथ लेकर चलने वाला, नैतिकता पर आधारित और शांति की भावना से जुड़ा हुआ होना चाहिए। हम विज्ञान और अध्यात्म को जोड़कर, टेक्नोलॉजी को इंसानियत की तरक्की का जरिया बनाना चाहते हैं।" वर्ल्ड टेक्नोलॉजी ग्रुप के फाउंडर एवं एग्जीक्यूटिव चेयरमैन, पॉल जे. फोस्टर ने कहा, "वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट ने विश्व स्तर पर चर्चा के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है, जो टेक्नोलॉजी, विज्ञान और इनोवेशन के साथ-साथ हमारे साझा भविष्य को आकार देने वाले लोगों को बढ़ावा देता है। भारत के पुणे में मौजूद बेहद सम्मानित संस्थान, MIT-WPU में हमारा पहला सम्मेलन 'इनोवेशन का प्रभाव, ग्लोबल कनेक्टिविटी तेजी लाने की जरूरत' की थीम पर आधारित है। यह सम्मेलन दुनिया भर के विचारकों और इनोवेशन करने वालों से ऐसी टेक्नोलॉजी के उपयोग की गुजारिश करता है, जो नेक इरादे और ज़िम्मेदारी के साथ इंसानियत की सेवा करे।"  इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले गणमान्य अतिथियों और दुनिया भर के प्रतिनिधियों में शामिल हैं: ●    डॉ. राहुल वी. कराड, एग्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट, MIT-WPU ●    डॉ. आर. एम. चिटनिस, वाइस-चांसलर, MIT-WPU ●    डॉ. प्रसाद खांडेकर, चीफ़ एकेडमिक ऑफिसर, MIT-WPU ●    पॉल जे. फोस्टर, को-फाउंडर एवं एग्जीक्यूटिव चेयरमैन, वर्ल्ड टेक्नोलॉजी ग्रुप ●    स्टीव हेलमैन, को-फाउंडर एवं बोर्ड सदस्य, वर्ल्ड टेक्नोलॉजी ग्रुप ●    डेबोरा पंडित-सवाफ, चेयरमैन, कोऑर्डिनेशन कमिशन, वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट 2025, इंडिया ●    नंदन झा, सेक्रेटरी-जनरल एवं फाउंडर, गांधी मंडेला फाउंडेशन ●    जूलियन गोरनॉल-थॉड, जनरल मैनेजर, शंकाई स्पोर्ट्स     ●    स्टेफी बाउ, सीईओ, INIT ईस्पोर्ट्स इस शिखर सम्मेलन में 100 से ज़्यादा स्टार्टअप्स भाग लेंगे, जिनमें करीब आधे स्टार्टअप्स की कमान महिलाएँ संभाल रही हैं। यह शिखर सम्मेलन महिलाओं की अगुवाई में होने वाले इनोवेशन और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में ग्लोबल साउथ के बढ़ते प्रभाव को उजागर करेगा। प्रमुख सत्रों में शामिल हैं: •    कल की आवाज़– इनोवेशन करने वाली पीढ़ी: युवाओं की आवाज़ और विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी का भविष्य •    इंडिया विज़न 2030– दुनिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने के लिए भारत का ब्लूप्रिंट •    इंसानी कौशल का सम्मान– शुरुआत, वर्तमान और भविष्य •    ग्लोबल साउथ का उदय – हमारे साझा भविष्य को नया रूप देने में ग्लोबल साउथ के बढ़ते प्रभाव के बारे में जानना •    दुनिया के लिए एक नई व्यवस्था को आकार देना •    अल्फा इनोवेशन नाउ– इंसानी कौशल का प्रदर्शन: वैज्ञानिक और युवा एंटरप्रेन्योर्स करेंगे बेहतरीन विचारों और इनोवेशन का प्रदर्शन इस शिखर सम्मेलन में मुख्य वक्तव्य, गहन चर्चा और विचार-विमर्श भी होंगे, जिन्हें शिक्षा जगत, उद्योग जगत और इनोवेशन करने वालों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हेल्थ-टेक, क्लाइमेट-टेक और शिक्षा में इनोवेशन पर होने वाली चर्चाओं में इस बात पर ज़ोर दिया जाएगा कि, टेक्नोलॉजी किस तरह सतत विकास और सामाजिक बदलाव लाने में मददगार है। जो लोग इस कार्यक्रम में भाग लेना चाहते हैं, वे कृपया आगे की जानकारी और रजिस्ट्रेशन के विवरण के लिए आयोजकों से संपर्क करें।

इलाज के बहाने धर्मांतरण: रतलाम में SIT गठित, पास्टर के सैलरी और राज खुले रिमांड में

रतलाम में धर्मांतरण मामले में SIT जांच, केरल से पास्टर को हर महीने मिलती थी 60 हजार सैलरी; रिमांड में उगले राज इलाज के बहाने धर्मांतरण: रतलाम में SIT गठित, पास्टर के सैलरी और राज खुले रिमांड में रतलाम मामला: धर्मांतरण की जांच में SIT सक्रिय, केरल से पास्टर को मिलती थी भारी सैलरी; रिमांड में मिले अहम खुलासे रतलाम  इलाज के बहाने धर्मांतरण कराने के आरोपों से जुड़े रतलाम केस में अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।  जांच के दौरान सामने आया है कि झाबुआ से पकड़े गए पास्टर गॉडविन को केरल स्थित संस्था से हर महीने ₹60,000 सैलरी मिलती थी, जिसमें से वह ₹4,000 से ₹5,000 मुख्य आरोपी विक्रम सिंह के खाते में भेजता था। दो दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद कोर्ट ने पास्टर गॉडविन को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।  केरल की संस्था से जुड़ा था पास्टर गॉडविन पुलिस पूछताछ में पता चला कि गॉडविन झाबुआ जिले के मोहनपुरा में एक चर्च का पास्टर था, जो 'चर्च ऑफ साउथ इंडिया' नामक संस्था से जुड़ा है। यह संस्था केरल की राजधानी त्रिवेंद्रम में स्थित है। पास्टर का काम धार्मिक प्रचार, प्रार्थना आयोजन और चर्च की गतिविधियों की देखरेख करना था। संस्था द्वारा उसे हर महीने वेतन दिया जाता था।  मुख्य आरोपी विक्रम को भेजता था रकम गॉडविन ने स्वीकार किया कि वह विक्रम सिंह के खाते में पैसे भेजता था, लेकिन उसका दावा है कि यह “मदद” के रूप में भेजे गए थे। पुलिस इस दावे से संतुष्ट नहीं है और पैसों के लेन-देन के पीछे के वास्तविक उद्देश्य की जांच कर रही है।  CSP सत्येंद्र घनघोरिया की अगुवाई में SIT धर्मांतरण के इस मामले की गहराई तक जांच के लिए SP अमित कुमार ने 6 सदस्यीय SIT गठित की है, जिसका नेतृत्व CSP सत्येंद्र घनघोरिया करेंगे। टीम में नामली थाना प्रभारी गायत्री सोनी, औद्योगिक थाना प्रभारी सत्येंद्र रघुवंशी, सायबर सेल और अन्य अधिकारी शामिल हैं। यह टीम अब तक हुई पूरी जांच की समीक्षा करेगी और आवश्यकतानुसार केरल जाकर साक्ष्य जुटाएगी।  इलाज के बहाने धर्मांतरण का आरोप 5 सितंबर को शिवशक्ति नगर (रतलाम) में कई ग्रामीणों को “इलाज” के नाम पर एक जगह लाया गया था। सूचना मिलने पर बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच ने पुलिस को बुलाया। पुलिस ने मौके से तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जबकि मुख्य आरोपी विक्रम सिंह को अगले दिन पकड़ा गया। छापे के दौरान पुलिस को क्रॉस, बाइबल और प्रार्थना के वीडियो मिले थे, जिससे धर्मांतरण की गतिविधियों की पुष्टि हुई थी।  पास्टर का नाम बैंक जांच में आया सामने मुख्य आरोपी विक्रम के बैंक खातों की जांच में गॉडविन का नाम सामने आया था। इसी आधार पर पुलिस ने उसे झाबुआ से गिरफ्तार किया और रिमांड पर लेकर पूछताछ की।  यह था पूरा मामला रतलाम के थाना औद्योगिक क्षेत्र के शिवशक्ति नगर में 5 सितंबर को बड़ी संख्या में ग्रामीण लोग मिले थे। आरोप लगा था कि इन्हें इलाज के बहाने धर्मांतरण के लिए लाया गया था। बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच ने पुलिस को इसकी सूचना दी थी। मौके से पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जबकि मुख्य आरोपी अगले दिन पकड़ाया था। सभी के खिलाफ धर्मांतरण करने का केस दर्ज किया गया था। मुख्य आरोपी के खाते से जुड़ा पास्टर का नाम जब पुलिस ने मुख्य आरोपी के बैंक खातों की जांच की, तो झाबुआ के मोहनपुरा चर्च के पास्टर गॉडविन का नाम सामने आया था। इसके बाद पुलिस उसे पकड़ कर लाई थी। दो दिन के रिमांड के बाद कोर्ट ने उसे भी जेल भेज दिया है। छापे में मिला था धार्मिक साहित्य और वीडियो शिवशक्ति नगर में कार्रवाई के दौरान पुलिस को क्रॉस टंगा मिला, बाइबल मिली और इलाज के बहाने प्रार्थना करवाने का वीडियो भी सामने आया था। इसी आधार पर धर्मांतरण की गतिविधि की पुष्टि हुई। इनके खिलाफ दर्ज हुआ था केस     जगदीश (30) पिता शम्भूलाल निनामा निवासी रिछखोरा थाना सरवन हाल मुकाम गंगासागर रतलाम। (नर्सिंग स्टूडेंट)     मांगीलाल (35) पिता शंकरलाल निनामा साल निवासी सागवा थाना बिलकुंआ जिला बांसवाडा (राजस्थान)     गुड्डु उर्फ गुड्डा (18 साल 07 माह) पिता बालू मईडा निवासी गेणी थाना शिवगढ जिला रतलाम।     विक्रम सिंह (35) पिता शम्भूलाल उर्फ शम्भू निनामा निवासी रिछखोरा थाना सरवन हाल मुकाम शिव नगर रतलाम।

मध्य प्रदेश का विकास रिकॉर्ड: 70 साल में आय 584 गुना, आबादी में पौने तीन गुना वृद्धि

भोपाल  राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के आधार पर मध्य प्रदेश का जन्म हुआ था। जनसंख्या, कृषि, उद्योग आदि विकास के मापदंडों की समीक्षा के बाद 1956 में इस नए राज्य का गठन किया गया था। निर्माण के बाद लगातार प्रदेश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से अलग होकर नया राज्य बनाना गया। इसके बाद भी मध्य प्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का दूसरा बड़ा राज्य है। एक नवंबर को मध्य प्रदेश अपनी स्थापना का 70वां वर्ष मना रहा है। पांच वर्ष बाद यह अपने जन्म की 75वीं जयंती यानि हीरक जयंती मनाएगा। 70वें स्थापना दिवस पर प्रदेश के विकास का आकलन करें तो पाते हैं राज्य की प्रति व्यक्ति आय में 584 गुना बढ़ोतरी हुई तो आबादी में 2.78 गुना बढ़ोतरी हुई है। राज्य पुनर्गठन आयोग और मध्य प्रदेश आजादी के बाद 29 दिसंबर 1953 को भारत के राज्यों के पुनर्गठन के लिए जस्टिस सैयद फैसल अली की अध्यक्षता और हृदयनाथ कुंजरू, वल्लभ माधव पणिकर की सदस्यता में एक आयोग गठित हुआ था। इस आयोग ने 30 सितंबर 1955 को अपनी सिफारिश केंद्र सरकार को प्रस्तुत की थी। राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश द्वारा की गई अनुशंसाओं को अमल में लाने के लिए लोकसभा में 18 अप्रैल 1956 को संविधान में नवम संशोधन विधेयक पेश हुआ और अक्तूबर में राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद 1 नवंबर 1956 को यह पूर्ण रूप से अधिनियम बना। आयोग की सिफारिशों के आधार पर सेंट्रल प्रोविजंस एंड बरार में शामिल मराठी भाषी जिले महाराष्ट्र में शामिल हो गए और 43 जिलों के साथ नए मध्य प्रदेश का गठन किया गया। क्या कहा था नए प्रदेश के गठन के वक्त राज्य पुनर्गठन आयोग ने अपने प्रतिवेदन में नए मध्य प्रदेश के संबंध में तर्क दिया था कि यह बहुत ही समृद्ध कृषि वाला राज्य होगा, क्योंकि यहां गेहूं, चावल पैदा करने वाला संपूर्ण क्षेत्र इसमें शामिल है। हालांकि, वर्ष 2000 में चावल का कटोरा कहलाने वाला क्षेत्र छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य के रूप में गठित हो गया।   पं. रविशंकर शुक्ल थे पहले सीएम 1956 की 31 अक्तूबर और 1 नवंबर की मध्य रात्रि को नए मध्य प्रदेश का गठन हुआ तब प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल ने अपने संदेश में नए मध्य प्रदेश को राष्ट्र के लिए शक्ति का अविरल स्त्रोत बताते हुए कहा था कि 'ऊपर लहलहाते खेत और नीचे भूमि रत्नगर्भा है'। वहीं, उनके बाद सीएम बने कैलाशनाथ काटजू ने कहा था प्रकृति ने इस भू-भाग के निवासियों को पुरस्कृत करने में अत्यंत उदारता से काम लिया है। मप्र शक्ति का अविरल स्रोत बना आज प्रदेश की स्थापना के 70 वर्ष पूर्ण होने के बाद यह आकलन किया जाए कि क्या मध्य प्रदेश राष्ट्र के लिए शक्ति का अविरल स्रोत बन सका? क्या प्रकृति की अत्यंत उदारता प्रदेश के निवासियों को पुरस्कृत कर सकी? प्रदेश ने आर्थिक विकास की रफ्तार और प्रगति की राह को चुना और प्रगति के नए सोपान तय किए हैं। प्रति व्यक्ति आय 261 रुपये से बढ़कर 1.52 लाख हुई मध्य प्रदेश ने बीते 70 वर्षों में कितनी प्रगति की है, इसकी झलक प्रदेश के नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय से मिलती है। 1956 में मध्य प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 261 रुपये थी, जो वर्तमान में 1.52 लाख रुपये है। राज्य की प्रगति के साथ प्रदेश के नागरिकों के जीवन स्तर में भी वृद्धि हुई है। तीसरा सबसे ज्यादा गेहूं उत्पादक राज्य कृषि के क्षेत्र में प्रदेश ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, देश के किसी भी राज्य को लगातार सात बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त नहीं हुए यह खिताब मध्य प्रदेश ने हासिल किया है। गेहूं की पैदावार में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है। दलहन उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। कपास उत्पादन में देश में प्रदेश का पांचवा स्थान है। जाहिर है कृषि क्षेत्र में प्रदेश ने काफी उन्नति की है। सवा सात करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदेश में उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिलाकर 3,08,252 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसमें से 93,000 वर्ग किलोमीटर इलाका जनजाति क्षेत्र में है। ग्रामीण क्षेत्र 309505.59 वर्ग किलोमीटर है, शहरी क्षेत्र में 7746 वर्ग किलोमीटर है, इस प्रकार 97.49 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार है। इस तरह प्रदेश की 7.26 करोड़ जनसंख्या तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। बजट बढ़कर कई गुना हुआ वर्ष 2000-2001 राज्य का बजट 1,06,393 करोड़ रुपये का था, जो वर्ष 2024-25 में 3,26,383 करोड़ रुपये का अनुमानित है। राज्य में वर्तमान में 8586 शाखाओं के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं प्रदान की जा रही है। जो 33 प्रतिशत ग्रामीण और 67 प्रतिशत नगरीय क्षेत्रों में है। इसके अतिरिक्त 38 जिला सहकारी बैंक 4536 प्राथमिक कृषि ऋण समिति भी कार्यरत है। निवेश के नए द्वार खुले उद्योग, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन जैसे कई क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने प्रगति की है। प्रदेश में निवेश के नए द्वार खोले हैं और नई सुविधाएं मुहैया करवाने की घोषणाए की हैं। प्रदेश में रोजगार पर्याप्त उपलब्ध करवाया जा रहा है। प्रदेश के युवकों को रोजगार मिले इसके लिए प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया गया, प्रदेश में निवेश के लिए इंवेस्टर समिट का लगातार आयोजन किया जा रहा है। इससे उद्योगों को उचित सुविधा देकर प्रदेश में आमंत्रित किया जा रहा है। परिवहन के क्षेत्र में प्रदेश ने नए आयाम स्थापित किए हैं। मध्य प्रदेश के गठन से आज तक की स्थिति एक नजर में… क्रमांक विवरण वर्ष 1956 वर्ष 2025 1 क्षेत्रफल (वर्ग किमी) 4,43,452 3,08,000 2 जिले (संख्या) 43 55 3 संभाग (संख्या) 8 10 4 प्रतिव्यक्ति आय (रुपये में) 261 1,52,615 5 जनसंख्या 2,60,71,637 7,26,26,809 (2011 जनगणना के अनुसार अनुमानित 2025) 6 साक्षरता प्रतिशत (%) 16.83 69.32 7 शिक्षण संस्थाएं (संख्या) 22,800 79,215 8 विश्वविद्यालय (संख्या) 1 16 9 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (संख्या) 100 1,440 10 स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय (करोड़ रुपये में) 10 15,744 11 सड़कें (कुल लंबाई किमी में) 28,173 80,875 12 रेलमार्ग (किमी में) 4,891 5,188 13 वन क्षेत्र (वर्ग किमी) 1,56,386 (छत्तीसगढ़ का भाग शामिल) 85,724 14 सिंचित कृषि क्षेत्र (लाख हेक्टेयर में) 8.24 55 15 प्रदेश का … Read more

बच्चों से लेकर रोमियो तक, 5 लाख फर्जी कॉल्स ने 108 एम्बुलेंस की सेवा बाधित की, FIR प्रक्रिया शुरू

भोपाल  भोपाल समेत पूरे मध्यप्रदेश में आपातकाली 108 एम्बुलेंस सेवा को लोगों ने मजाक बना दिया है. पिछले छह महीनों में 5.72 लाख से ज्यादा फर्जी कॉल्स आने से न केवल कॉल सेंटर का स्टाफ परेशान है, बल्कि करीब 1500 घंटे की एम्बुलेंस सेवा भी बर्बाद हो गई है. कई कॉलर गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप, अकेलापन या मस्ती के लिए एम्बुलेंस सेवा पर फोन करते हैं. इन फर्जी कॉल्स की वजह से जरूरमतमंद मरीजों को कई बार समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पाती है. अब इन फर्जी कॉलर्स पर एक्शन लेने की तैयारी की जा रही है.  एम्बुलेंस बुलाकर समय खराब किया भोपाल के कोलार रोड इलाके में गुरुवार को एक व्यक्ति पर एम्बुलेंस सेवा पर कॉल किया और कहा कि उसकी तबीयत खराब है. एम्बुलेंस 15 मिनट में घर पहुंची, लेकिन वहां कोई बीमार नहीं मिला. जब ईएमटी ने कॉलर को फोन किया तो उसने कहा कि अब सब ठीक है, इसकी जरूरत नहीं. करीब 30 मिनट बर्बाद हो गए. इस तरह के सैकड़ों कॉल हर रोज आते हैं. इन फर्जी कॉल से निपटने की तैयारी की जा रही है. जय अंबे हेल्थकेयर के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि अब ऐसे कॉलर्स पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी.  जय अंबे हेल्थकेयर के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने मीडिया बताया कि अब ऐसे कॉलर्स पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इन कॉल्स के कारण कई बार जरूरतमंद मरीजों को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पाती। 108 सेवा आपातकालीन है। इसे मजाक या टाइमपास के लिए इस्तेमाल करना अपराध है। जानकारी के अनुसार गुरुवार को भोपाल के कोलार रोड से एक व्यक्ति ने 108 पर कॉल किया कि उसकी तबीयत बहुत खराब है। एम्बुलेंस 15 मिनट में घर पहुंची, लेकिन न कोई बीमार मिला, न परिवारजन। जब ईएमटी ने कॉलर को फोन किया तो उसने कहा अब सब ठीक है, जरूरत नहीं। करीब 30 मिनट ऐसे ही बर्बाद हो गए। यह अकेला मामला नहीं, ऐसे हजारों कॉल रोज आते हैं। कॉल सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ कॉलर्स तो 150 से 200 बार बिना वजह फोन करते हैं। इनमें बच्चे, नशे में धुत युवक और रोमियो टाइप लोग शामिल हैं। कुछ कॉलर्स तो कॉल सेंटर में बैठी महिला स्टाफ से बातचीत करने या उन्हें परेशान करने के लिए बार-बार कॉल करते हैं। इन कॉलर्स के नंबर ट्रैक कर भविष्य में सीधा कानूनी एक्शन लिया जाएगा। इसके लिए कंपनी एक स्टडी कर रही है, जिससे इनकी पहचान की जा सके। 108 कॉल सेंटर की हर लाइन कुछ सेकेंड के लिए व्यस्त होती है। एक झूठे कॉलर के कारण असली मरीज की कॉल मिस हो जाती है। औसतन हर दिन एम्बुलेंस को 50-60 किलोमीटर तक झूठी सूचनाओं के चलते दौड़ लगानी पड़ती है। तरुण सिंह परिहार के मुताबिक, “एक झूठी कॉल किसी जरूरतमंद की मौत की वजह बन सकती है। क्योंकि जब तक हमारी एम्बुलेंस वापस लौटती है, किसी और को मदद की ज़रूरत पड़ जाती है।" पहले बुलाई एम्बुलेंस फिर कहा अब जरूरत नहीं गुरुवार को कोलार रोड के एक व्यक्ति ने 108 पर कॉल किया कि उसकी तबीयत बहुत खराब है। एम्बुलेंस 15 मिनट में घर पहुंची, लेकिन न कोई बीमार मिला, न परिवारजन। जब ईएमटी ने कॉलर को फोन किया तो उसने कहा अब सब ठीक है, जरूरत नहीं। करीब 30 मिनट ऐसे ही बर्बाद हो गए। यह अकेला मामला नहीं, ऐसे सैकड़ों कॉल रोज आते हैं। फर्जी कॉलर्स की पहचान के लिए हो रही स्टडी कॉल सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ कॉलर्स तो 150 से 200 बार बिना वजह फोन करते हैं। इनमें बच्चे, नशे में धुत युवक और रोमियो टाइप लोग शामिल हैं। कुछ कॉलर्स तो कॉल सेंटर में बैठी महिला स्टाफ से बातचीत करने या उन्हें परेशान करने के लिए बार-बार कॉल करते हैं। इन कॉलर्स के नंबर ट्रैक कर भविष्य में सीधा कानूनी एक्शन लिया जाएगा। इसके लिए कंपनी एक स्टडी कर रही है, जिससे इनकी पहचान की जा सके। कैसे फर्जी कॉल्स बिगाड़ रहे सिस्टम 108 कॉल सेंटर की हर लाइन कुछ सेकेंड के लिए व्यस्त होती है। एक झूठे कॉलर के कारण असली मरीज की कॉल मिस हो जाती है। औसतन हर दिन एम्बुलेंस को 50-60 किलोमीटर तक झूठी सूचनाओं के चलते दौड़ लगानी पड़ती है। तरुण सिंह परिहार के मुताबिक, “एक झूठी कॉल किसी जरूरतमंद की मौत की वजह बन सकती है। क्योंकि जब तक हमारी एम्बुलेंस वापस लौटती है, किसी और को मदद की ज़रूरत पड़ जाती है।”

अब एडवांस पेमेंट जरूरी! MP में सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों के आवासों की बिजली कट सकती है

भोपाल मंत्रियों के बंगले हों या सरकारी कार्यालय, यदि बिजली चाहिए तो अग्रिम भुगतान करना होगा। प्रदेश के सरकारी भवनों में अब प्री पेड मीटर लगाने पर बिजली तभी मिलेगी जब अग्रिम भुगतान कर रिचार्ज करवाया जाएगा। इसके लिए वल्लभ भवन मंत्रालय से लेकर तहसील स्तरीय सरकारी कार्यालयों तक में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय से मिले दिशा-निर्देशों के अनुपालन में यह कार्य किया जा रहा है। पारदर्शी बिलिंग, मीटर रीडिंग प्रणाली में सुधार और सटीक ऊर्जा लेखांकन के लिए केंद्र सरकार की आरडीएसएस (पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना) अंतर्गत स्मार्ट मीटर लगाने के कार्य किए जा रहे हैं।   वितरण कंपनियों द्वारा संभाग, जिला व ब्लाक मुख्यालयों के शासकीय कार्यालयों में भी स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। योजनांतर्गत प्रदेश में 45,191 शासकीय कार्यालयों के विद्युत कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिसमें से 18,177 कनेक्शनों पर प्रीपेड बिलिंग की सुविधा शुरू हो गई है। वल्लभ भवन, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के अलावा प्रीपेड स्मार्ट मीटर मंत्रियों के बंगलों में भी लगेंगे। 10 हजार रुपये का एक प्रीपेड स्मार्ट मीटर है। प्रदेश में कुल 55 लाख मीटर लगाए जाएंगे। इनमें घरेलू उपभोक्ता भी शामिल हैं। इस कार्य पर मप्र में 15 हजार करोड़ रुपये व्यय होंगे। इन प्रीपेड स्मार्ट मीटर से बिजली लेने के लिए मोबाइल की तरह पहले रिचार्ज करना होगा उसके बाद ही विद्युत सप्लाई मिलेगी।        मप्र में कुल 413 नगर निकाय हैं। यहां छह -छह माह से विद्युत बिल भुगतान लंबित रहता है।     कई बार तो साल भर का विद्युत बिल भुगतान न होने पर विद्युत वितरण कंपनियों को निकायों को नोटिस जारी करना पड़ता है।     निकायों को विद्युत बिल भुगतान के लिए चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि दी जाती है, लेकिन समय पर राशि न मिलने से कई बार बिल भुगतान लंबित रहता है।     निकायों के अलावा पंचायतों की भी यही स्थिति हैं। अब अगर समय पर बिल भुगतान नहीं किया तो विद्युत प्रवाह रोक दिया जाएगा।     नगरीय विकास एवं आवास विभाग, महिला बाल विकास विभाग एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का लगभग 800 करोड़ रुपये का बकाया है।     अन्य विभागों को मिलाकर कुल शासकीय विभाग का 1300 करोड़ रुपये का बिल भुगतान बकाया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश स्थापना दिवस पर जनता को दी हार्दिक शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी राज्य के स्थापना दिवस की शुभकामनाएं विकास की 70 साल की लंबी यात्रा आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त बनता मध्यप्रदेश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को मध्यप्रदेश के 70 वें स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अब 70 साल का हो गया है। अपनी गौरवशाली विकास यात्रा का 70वां स्थापना दिवस मना रहा है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर 1956 को गठित यह राज्य न केवल भारत के हृदय में स्थित है, बल्कि देश के विकास मानचित्र पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की यह 70 वर्षीय यात्रा समर्पण, संकल्प और सतत् विकास की सुखद यात्रा रही है। यह दिन हमें हमारे पूर्वजों की मेहनत, उनके जज्‍बे, जनभागीदारी से विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी एवं हम सभी की आस्था और निष्ठा की याद दिलाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते सात दशकों में मध्यप्रदेश ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। कभी “बीमारू” कहे जाने वाले इस राज्य ने आज कृषि, सिंचाई, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। हमारा मध्यप्रदेश आज देश का “फूड बास्केट” कहलाता है, जहां अन्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता के साथ ही किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में अनेक योजनाएं सफलतापूर्वक लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन” और “लाड़ली लक्ष्मी योजना” जैसी योजनाएं महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गई हैं। युवाओं के लिए “मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना” और “स्टार्टअप मध्यप्रदेश” जैसे कार्यक्रम रोजगार और नवाचार के नए द्वार खोल रहे हैं। वहीं प्रदेश में सुशासन एवं नवाचारों ने शासन को जनता के द्वार तक पहुंचाने का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश अब “विकसित भारत @ 2047” के विज़न और संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। स्मार्ट शहरों, हरित ऊर्जा, जल संरक्षण, डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में तेज गति से काम हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र को आत्मसात करते हुए मध्यप्रदेश आज एक आत्मनिर्भर प्रदेश के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश अब केवल भौगोलिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यटन राज्य के रूप में भी देश के हृदय और धमनियों के रूप में धड़क रहा है। विकास को लेकर हमारी दिशा और लक्ष्य स्पष्ट है कि प्रदेश के हर नागरिक तक विकास का लाभ पहुंचे, हर हाथ को काम मिले, हर घर में खुशहाली हो और हर मन में मध्यप्रदेशवासी होने के गर्व का भाव जागे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का यह 70वां स्थापना दिवस एक अवसर है अतीत की उपलब्धियों को स्मरण करने और भविष्य के स्वर्णिम लक्ष्य तय करने का। स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी नागरिकों से आह्वान किया कि हम सब एकजुट होकर “विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त मध्यप्रदेश” के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। सामूहिक सहभागिता से अपनी मिट्टी को, अपनी मातृभूमि को, अपने प्रदेश को हर क्षेत्र में सबसे आगे रखकर अग्रणी बनाने का यही सही अवसर है‌।

एम्स भोपाल में शुरू हुई एडवांस्ड स्ट्रोक ट्रीटमेंट यूनिट, 24 घंटे उपलब्ध रहेगा इलाज

 भोपाल  एम्स भोपाल में अब एडवांस्ड स्टोक टीटमेंट यूनिट शुरू की गई है। जहां बिना ओपन सर्जरी ब्रेन की बंद धमनी से थक्का (क्लॉट) निकालकर रक्त प्रवाह सामान्य किया जाएगा। इस तकनीक से मरीज की जान बचाना संभव होगा। विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो 60 मिनट के भीतर अस्पताल पहुंचे। यह मध्य भारत में अपनी तरह की पहला केन्द्र होगा। यहां न्यूरोलॉजिस्ट, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन और क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट की टीम 24 घंटे मौजूद रहेगी। एम्स के कार्यपालक निदेशक डॉ. माधवानंद कर ने कहा कि स्ट्रोक के लक्षणों की तुरंत पहचान और अस्पताल पहुंचकर जीवन को बचाया जा सकता है। इसके लिए थिंक एफएएसटी अभियान चलाया गया है। एम्स की यह यूनिट मध्य भारत में स्ट्रोक मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण है। क्या है मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी यह एक मिनिमली इनवेसिव तकनीक है जिसमें पैर या कलाई की धमनी के जरिए पतली ट्यूब (कैथेटर) से ब्रेन की बंद धमनी तक पहुंचकर थक्का निकाला जाता है। इसमें ओपन सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। इससे लकवा जैसी बीमारी से बचा जा सकता हैं। एडवांस्ड स्ट्रोक की विशेषताएं     इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी से तुरंत इलाज     सीटी और एमआरआइ परफ्यूजन इमेजिंग से सटीक निदान     यह पहचानना कि मरीज को थ्रोम्बेक्टोमी का लाभ मिलेगा या नहीं     पारंपरिक समय के बाद भी नई तकनीक कारगर स्ट्रोक के शुरुआती 5 संकेत     चेहरे पर झुकाव     हाथ-पैर में अचानक कमजोरी     बोलने में दिक्कत     दृष्टि धुंधली या दोहरी     तेज सिरदर्द और चक्कर

राजधानी भोपाल को मिलेगी 70 नई CNG बसें, परिषद की 14वीं बैठक में मंजूरी

भोपाल पब्लिक ट्रांसपोर्ट की समस्या से जूझ रही राजधानी भोपाल में जल्द ही इनक्यूबेट कंपनी भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के साथ मिलकर 70 सीएनजी लो फ्लोर बसें चलाएगी। जबकि, शहर के 85 वार्ड और 81 जोन में डिग्री के हिसाब से इंजीनियर को अब काम दिया जाएगा। बड़ा तालाब का पानी बैरसिया तक पहुंचाया जाएगा ताकि यहां इंडस्ट्रियल क्लस्टर डेवलप किया जा सके। इसके अलावा नगर निगम में पिछले 10 साल से सेवा देने वाले एक हजार अस्थाई कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा।  नगर परिषद की 14वीं बैठक में इन निर्णयों को बहुमत से पारित किया गया। कांग्रेस एवं भाजपा पार्षदों ने बगैर नगर परिषद एवं महापौर परिषद की मंजूरी भेजे गए प्रस्ताव पर तमाम आरोप लगाए हैं। शहर में अभी केवल 30 बसें बीसीएलएल अभी शहर(Bhopal) में 30 बसों का ही संचालन करवा रहा है। एमआईसी मेंबर मनोज राठौर ने कांग्रेस पार्षद योगेंद्र सिंह चौहान के सवाल पर कहा कि कंपनियों को 60 बसों को चलाने के निर्देश है। निगमायुक्त ने संस्कृति जैन ने इस पर सदन को जानकारी दी कि निजी कंपनी से एग्रीमेंट के आधार पर इनकी संख्या जल्द 70 की जाएगी। यह हुए बड़े फैसले     बैरसिया तक पहुंचेगा बड़ा तालाब का पानी     तबादले के बाद भी जमे अफसर हटाए जाएंगे     एक हजार कर्मचारी नियमित होंगे     अपर आयुक्त 5 की बजाए 50 लाख बजट खर्च कर सकेंगे     हरियाली के लिए उद्यान विभाग के खर्च बजट की होगी जांच इंजीनियरों का कैडर सुधारेंगे सिविल इंजीनियरों से बिजली और बिजली के इंजीनियरों से सीवेज, स्वच्छत्ता का काम कराने का मुद्दा उठा। कांग्रेस भाजपा पार्षदों ने एक सुर में कहा कि इससे काम होने बंद हो चुके हैं। निगमायुक्त ने कहा कि जल्द सभी शाखाओं में डिग्री और डिप्लोमा के हिसाब से पदस्थापना की जाएगी। बैरसिया तक जाएगा बड़ा तालाब का पानी, इंडस्ट्रियल क्लस्टर का होगा विकास बैठक में लिए गए प्रमुख फैसलों में से एक था — बैरसिया तक बड़ा तालाब का पानी पहुंचाने का प्रस्ताव। नगर निगम अब बांदीखेड़ी इलेक्ट्रॉनिक क्लस्टर को पानी की आपूर्ति करेगा, जिसके लिए लगभग 40 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस परियोजना का उद्देश्य बैरसिया क्षेत्र में इंडस्ट्रियल क्लस्टर का विकास करना है। हालांकि, कांग्रेस पार्षदों ने इसका विरोध किया और कहा कि “शहर अपनी पानी की जरूरतें ही पूरी नहीं कर पा रहा है, तो दूसरे क्षेत्र में सप्लाई क्यों?” इसके बावजूद यह प्रस्ताव बहुमत से पारित कर दिया गया। एक हजार अस्थायी कर्मचारियों को मिलेगी स्थायी नौकरी नगर परिषद बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि नगर निगम में पिछले 10 सालों से कार्यरत एक हजार अस्थायी कर्मचारियों को अब नियमित (Permanent) किया जाएगा। इससे कर्मचारियों में स्थिरता आएगी और प्रशासनिक कामकाज भी बेहतर होगा। साथ ही, यह भी तय किया गया कि जिन कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार या अनियमितता के आरोप पाए जाएंगे, उनकी जांच निगमायुक्त स्तर पर की जाएगी। इंजीनियरों का काम अब डिग्री और विशेषज्ञता के अनुसार तय होगा बैठक में इंजीनियरों की कार्य विभाजन व्यवस्था को लेकर भी बड़ा निर्णय लिया गया। अभी तक सिविल इंजीनियरों से बिजली और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों से सीवेज-सफाई का काम कराया जा रहा था, जिससे परियोजनाएं अटक रही थीं। अब जल्द ही सभी इंजीनियरों को डिग्री और डिप्लोमा के अनुसार संबंधित शाखाओं में पदस्थ किया जाएगा ताकि कामकाज प्रभावी और सुचारू रूप से हो सके। तबादले के बाद भी जमे अफसर हटाए जाएंगे, बढ़ी अधिकारियों की वित्तीय शक्ति नगर निगम प्रशासन ने कई प्रशासनिक निर्णय भी लिए हैं। तबादले के बाद भी अपने पदों पर जमे अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह चौहान और उपायुक्त एकता अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से रिलीव करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही अब अपर आयुक्त 5 लाख की जगह 50 लाख रुपये तक का बजट खर्च कर सकेंगे ताकि विकास परियोजनाओं में देरी न हो। उद्यान विभाग के खर्च की होगी जांच पिछले एक वर्ष के दौरान उद्यान विभाग द्वारा शहर को हरा-भरा बनाने के नाम पर किए गए खर्च पर भी सवाल उठे। परिषद ने खर्चों की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के पार्षदों ने विभाग के कामकाज पर गंभीर आपत्तियां जताईं। अफसरों पर कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों की एकजुटता बैठक में एक अनोखा दृश्य तब देखने को मिला जब कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के पार्षद एक सुर में अफसरों के खिलाफ खड़े हो गए। दोनों ने आरोप लगाया कि अपर आयुक्त और उपायुक्त न तो जनप्रतिनिधियों के फोन उठाते हैं और न ही बैठकों में शामिल होते हैं। महापौर मालती राय को कांग्रेस पार्षदों ने शहर की टूटी सड़कों और अधूरे वादों की याद दिलाते हुए सदन में तख्तियां दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया। जीआईएस घोटाले पर भी गूंजा विरोध बैठक में ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (GIS 2025) से जुड़े भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी हंगामा हुआ। कांग्रेस की नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी का इस विषय पर सवाल एजेंडे से हटा दिया गया, जिस पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया। हालांकि, भाजपा पार्षद जगदीश यादव ने खुद सदन में बताया कि पुराने फाउंटेन मोटर को नया बताकर बिल पास किए गए, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। परिषद अध्यक्ष का बयान परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बताया कि “तबादले के बाद भी पद पर बने अफसरों को तुरंत हटाया जाएगा। कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। वहीं, जिन कर्मचारियों या अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”