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महिलाएं सशक्त व आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं

सरकार ने बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ और बेटी बढ़ाओ अभियान से उन्हें सशक्त और सबल बनाया है महिलाएं सशक्त व आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले, इस दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने देवरीकलां में हितग्राही जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित किया भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण की दिशा में लगातार काम कर रही है। सरकार ने बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ और बेटी बढ़ाओ अभियान चलाकर बालिका और महिलाओं को सशक्त व सबल बनाया है। आज महिलाएं स्वसहायता समूह से जुड़कर रोजगार स्थापित कर महिने में 15 हजार रुपये से 17 हजार रुपये तक की आमदनी कमा रही है। राज्यपाल  पटेल रविवार को नरसिंहपुर जिले की ग्राम पंचायत देवरीकलां में आयोजित हितग्राही जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल मंगुभाई ने कहा कि आज महिलाएं पुरूषों से भी अधिक परिश्रम कर रही हैं। स्वसहायता समूह के माध्यम से अपना रोजगार स्थापित कर परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। सरकार के द्वारा बालिकाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर , सशक्त बनाने के लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना और लाड़ली बहना योजना प्रारंभ की गई है। प्रदेश की महिलाओं को लाड़ली बहना योजना का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बच्चों का शिक्षा स्तर बढ़ा है। स्कूलों में वार्षिक परीक्षाफल के बेहतर परिणाम आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ  देश में करोड़ों नागरिक गरीबी रेखा की सूची से बाहर आए हैं, जिसका श्रेय केन्द्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जाता है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का संकल्प है कि वर्ष 2047 तक भारत विकसित देश बनेगा। सरकार विकसित भारत के साथ स्वस्थ भारत के संकल्प को भी पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले, इस दिशा में सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। नागरिकों को 5 लाख रुपये तक नि:शुल्क इलाज कराने के लिए आयुष्मान कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि टीबी के मरीजों का भी लगातार उपचार किया जा रहा है। उन्हें पोषण आहार किट और दवाईयां दी जा रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार हो सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिकल सेल की बीमारी को जड़ से समाप्त करना होगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच परीक्षण कर सिकल सेल बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को चिन्हित किया जा रहा है। जिससे उनका सफल उपचार किया जा सके। उन्होंने बताया कि सिकल सेल बीमारी के लिए आयुर्वेदिक दवाईयां भी दी जा रही है ।उनका डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड भी बनाया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत 0 से 5 वर्ष की आयु तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जा रही है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी नागरिक अपने बच्चों या आसपास के सभी बच्चों को निकटतम पोलियो बूथ में ले जाकर पोलियो की दो बूंद दवा जरूर पिलाएं। उन्होंने कहा कि सिकल सेल बीमारी को प्रदेश से समाप्त करने का अभियान प्रारंभ किया गया है। इस अभियान के तहत सिकल सेल बीमारी से पीड़ित मरीजों की पहचान करना और उनका उपचार तथा पीड़ित परिवार की मदद करना शामिल है। उन्होंने बालिकाओं के संरक्षण में मनाए जाने वाले बालिका दिवस के बारे में भी बताया कि बालिका दिवस हमारे लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने कहा कि राज्यपाल  मंगुभाई पटेल को प्रदेश के नागरिकों की अत्यधिक चिंता है। यही वजह है कि वह प्रदेश के विभिन्न जिलों का भ्रमण कर नागरिकों से सीधा संवाद कर रहे हैं। आप प्रदेश के दूरस्थ ग्रामों का भ्रमण करते हैं।धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कृष्ट अभियान सहित विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं से लाभांवित हितग्राहियों से संवाद भी करते हैं। हम सभी को सतत  मार्गदर्शन भी देते हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभांवित हितग्राहियों से संवाद भी किया। उन्होंने 2120 स्वसहायता समूहों को 32 करोड़ 30 लाख रुपये का चैक प्रदानकिया। आयोजित हितग्राही जनसंवाद कार्यक्रम में टीबी फूड बास्केट, जाति प्रमाण पत्र, आयुष्मान कार्ड, स्वाइल्थ हेल्थ कार्ड का वितरण किया गया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने कार्यक्रम का बड़ादेव का पूजन कर  शुभारंभ किया।कार्यक्रम मेंआयोजित सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों पर आधारित विकास प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत नवजात से 5 वर्ष की आयु तक के बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलाई।   

एमपी मेट्रो भर्ती 2025: इस डिग्री वालों को मिलेगा बड़ा मौका, सैलरी और योग्यता देखें यहां

भोपाल मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने सहायक प्रबंधक पद पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह भर्ती डिपुटेशन, कांट्रैक्ट और री-एम्प्लॉयमेंट के आधार पर की जाएगी। योग्य और अनुभवी उम्मीदवार 28 अक्टूबर 2025 तक आवेदन कर सकते हैं। योग्यता और अनुभव इस पद के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/संस्थान से मास कम्यूनिकेशन, जर्नलिज्म, पब्लिसिटी, पब्लिक रिलेशन या पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक डिग्री अनिवार्य है। इसके अलावा, इन विषयों में पोस्टग्रेजुएट डिग्री रखने वाले उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर निकली नौकरी… सहायक प्रबंधक का मुख्य कार्य जनसंपर्क, मीडिया संबंध और सार्वजनिक जानकारी से जुड़ा होगा। पद पर कार्य करने वाले उम्मीदवार मेट्रो परियोजनाओं के प्रचार-प्रसार और मीडिया रिपोर्टिंग, प्रेस कांफ्रेंस तथा अन्य जनसंपर्क गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। आवेदन प्रक्रिया इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन पत्र सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ MPMRCL के संबंधित विभाग में 28 अक्टूबर, 2025 तक भेज सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया और शैक्षिक योग्यताओं से संबंधित जानकारी के लिए उम्मीदवार MPMRCL की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। कब तक कर सकेंगे आवेदन आवेदन की अंतिम तिथि 28 अक्टूबर 2025 है। इस तिथि के बाद प्राप्त आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उम्मीदवारों से अनुरोध है कि वे समय रहते अपना आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।  

भविष्य की राजनीति: MP के विधायक होंगे डिजिटल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होंगे जुड़े

भोपाल मध्य प्रदेश के सभी 230 विधायकों को सरकार हाई टेक बनाएगी। सभी को कार्यालय में वीडियो कॉफ्रेसिंग की सुविधा दी जाएगी। इससे अधिकारी उनके संपर्क में रहेंगे। इस व्यवस्था को बनाने के लिए बजट में साढ़े 11 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2025-26 के बजट में ई-विधायक ऑफिस नाम से योजना प्रारंभ करने की घोषणा की गई थी। इसमें प्रत्येक विधायक को पांच लाख रुपये देने का प्रविधान रखा गया है। यद्यपि, आधा वर्ष बीतने के बाद इस दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। विधायकों के कार्यालय भी हाई टेक बनाए जाएंगे दरअसल, विधानसभा सचिवालय ई-विधान परियोजना पर काम कर रहा है। इसमें विधायकों को एक-एक लैपटॉप दिए जाने हैं। इसकी निविदा जारी हो चुकी है। संभावना है कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले ई-विधान व्यवस्था लागू हो जाए। इसके साथ ही विधायकों के कार्यालय भी हाई टेक बनाए जाएंगे। इससे उन्हें न केवल अपने विधायी कार्य करने में आसानी होगी, बल्कि वीडियो कॉफ्रेंस भी कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने हाल ही में दोहराई थी प्रतिबद्धता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में हुई कलेक्टर-कमिश्नर कॉफ्रेंस में भी यह बात दोहराई और कहा कि हम जल्द ही विधायकों के कार्यालयों को हाई टेक करने जा रहे हैं। इससे वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से योजनाओं की प्रगति की न केवल अद्यतन जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे बल्कि समीक्षा भी कर सकेंगे।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम में परिवहन विभाग की सेवाएं

भोपाल  प्रदेश के समस्त जिलों में नवीन गैर परिवहन मोटरयानों और नवीन वाहनों का पंजीयन वाहन-4 पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है। नागरिकों को पोर्टल के माध्यम से विभिन्न प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं। प्रदेश के नागरिक प्रदेश के किसी भी जिले में मोटरयान का क्रय करने के बाद अपने मूल निवास या प्रदेश के किसी भी जिले का पंजीयन नंबर मोटरयान क्रय से संबंधित जिले में ही प्राप्त कर सकेंगे। नागरिकों को अपने मोटरयानों के पंजीयन के लिये भौतिक रूप से परिवहन कार्यालयों में नहीं जाना पड़ेगा। वे मोटरयान क्रय करते समय संबंधित ऑटोमोबाइल डीलर के माध्यम से यह सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। नागरिक अपने प्रदेश के अलावा अन्य प्रदेशों में अपने मोटरयानों पर अति सुरक्षा पंजीयन पट्टिका (हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट) लगवा सकेंगे। भारत सीरीज (बीएच सीरीज) से संबंधित पंजीयन नंबर गैर परिवहन मोटरयानों के लिये ऑनलाइन ही प्राप्त किये जा सकते हैं। पंजीयन नंबरों के लिये केन्द्र सरकार के अंतर्गत कार्यरत समस्त लोक सेवा एवं ऐसे समस्त निजी संस्थानों में कार्यरत कर्मचारी लाभान्वित होंगे, जिनके 4 या अधिक राज्यों में स्थापित कार्यालय या संस्थान हैं। आधुनिकतम मोटरयान मॉडल के व्यावसायिक रूप से बाजार में प्रचलन में आने के पूर्व ही उसके मूल्य एवं समस्त तकनीकी विवरण पोर्टल पर प्रदर्शित होने से राज्य में इनके पंजीयन के समय किसी भी प्रकार का कर अपवंचन नहीं हो सकेगा। प्रदेश में गैर परिवहन वाहनों और परिवहन वाहनों का पंजीयन निरंतर "वाहन-4" पोर्टल पर किया जा रहा है। राज्य में वाहन-4 पोर्टल पर परिवहन कार्यालयों का डाटा पोर्ट, डीलर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया, होमोलोगेशन की प्रक्रिया, फैंसी नंबर जनरेट करने की प्रक्रिया और टेक्सेशन की प्रक्रिया पूर्ण की जा चुकी है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम में परिवहन विभाग की 31 सेवाओं को शामिल किया गया है। आरटीओ द्वारा नियुक्त अधिकारी तथा जिला कलेक्टर और संभागायुक्त को क्रमश: प्रथम अपीली अधिकारी, द्वितीय अपीली अधिकारी अधिसूचित किया गया है। नागरिकों से जुड़ी चयनित 31 सेवाओं के निराकरण के लिये एक निश्चित समय अवधि तय की गई है। जिन सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया गया है, इनमें प्रमुख रूप से लर्निंग ड्रायविंग लाइसेंस, वाहन का फिटनेस प्रमाण-पत्र, वाहन का पंजीयन प्रमाण-पत्र, डुप्लीकेट ड्राइविंग लाइसेंस जारी करना, डुप्लीकेट वाहन पंजीयन कार्ड, मृत्यु के बाद स्वामित्व का हस्तांतरण, ड्राइविंग लाइसेंस में अन्य श्रेणियों का वाहन जोड़ा जाना और लाइसेंस में पता परिवर्तन जैसी सुविधाएं प्रमुख हैं। 

हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति, लेकिन अस्पतालों में इमरजेंसी सुविधा नहीं

भोपाल भारत में मानसिक स्वास्थ्य का संकट अब एक 'इमरजेंसी चुनौती' बन चुका है, जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश में हर तीन मिनट में एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है। चिंताजनक यह है कि इनमें से अधिकांश लोगों को कभी कोई मानसिक उपचार नहीं मिला। गांधी मेडिकल कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रुचि सोनी इसे एक मूक महामारी बताती हैं। डॉ. सोनी का मत है कि मानसिक स्वास्थ्य संकट समय नहीं देखता। हमें ऐसी व्यवस्था चाहिए, जहां रात के दो बजे भी किसी संकटग्रस्त व्यक्ति को तत्काल मदद मिल सके।   शरीर चीखता है, मन चुप रह जाता है डॉ. सोनी के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य की आपातकालीन स्थितियां उतनी ही खतरनाक हैं, जितना अचानक हार्ट अटैक आना। वे कहती हैं कि फर्क बस इतना है कि शरीर चीखता है और मन चुप रह जाता है। मानसिक स्वास्थ्य इमरजेंसी तब आती है, जब किसी व्यक्ति के विचार, व्यवहार या भावनाएं अचानक खुद के या दूसरों के लिए खतरा बन जाती हैं। जैसे बार-बार आत्मघाती विचार आना, पैनिक अटैक या हिंसक व्यवहार। यह वह नाजुक दौर होता है, जहां उपचार में एक मिनट की देरी भी जिंदगी छीन सकती है। हर जिले में 24 घंटे मदद जरूरी इस मूक महामारी को रोकने के लिए व्यापक बदलाव आवश्यक हैं। डॉ. सोनी ने हर जिले में सुधार की राह सुझाई है। यह आवश्यक है कि हर जिला अस्पताल में 24 घंटे सातों दिन साइकेट्रिक इमरजेंसी यूनिट स्थापित हो। साथ ही डाक्टरों, नर्सों और पैरामेडिक्स को संकट प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। टेली-साइकेट्री सेवाओं का विस्तार किया जाना चाहिए, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों तक विशेषज्ञ मदद पहुंचे। इसके अतिरिक्त स्कूलों और कालेजों में मेंटल हेल्थ फर्स्ट एड ट्रेनिंग शुरू करना समय की मांग है, जिससे हर व्यक्ति अपने आसपास के संकट को पहचान कर तुरंत सहायता प्रदान कर सके। इमरजेंसी रेफरल की त्रासदी वर्तमान में देश के बहुत कम अस्पतालों में 24 घंटे सातों दिन साइकेट्रिक इमरजेंसी यूनिट उपलब्ध है। जब कोलार के एक बैंक अधिकारी ने नींद की गोलियां खा लीं या शाहपुरा की 24 वर्षीय छात्रा परीक्षा से पहले पैनिक अटैक के कारण बेहोश हो गईं, तो दोनों मामलों में शुरुआती इलाज के बाद उन्हें मानसिक रोग विभाग में रेफर किया गया। यही रेफरल और सही इमरजेंसी सुविधा का अभाव कीमती समय नष्ट कर देता है। जिला और छोटे शहरों में प्रशिक्षित मनोरोग चिकित्सकों की भारी कमी है, जिसके कारण परिवार को ही संकट संभालना पड़ता है, और यही देरी अक्सर जिंदगी छीन लेती है।

मानदेय ठप! MP में तकनीकी गड़बड़ी के कारण अतिथि शिक्षक परेशान

भोपाल मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को हमारे शिक्षक एप से ऑनलाइन हाजिरी लगाना अनिवार्य है। हालांकि इसमें अतिथि शिक्षक ऑनलाइन हाजिरी में आगे हैं। मध्य प्रदेश के 80 फीसद अतिथि शिक्षक ऑनलाइन हाजिरी लगा रहे हैं। इसके बावजूद भी तीन माह से अतिथि शिक्षकों को मानदेय नहीं मिला। इसका कारण यह है कि ऑनलाइन हाजिरी में आ रही तकनीकी समस्या आ रही है। इसका खामियाजा अतिथि शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। विगत तीन माह से इन्हें मानदेय का भुगतान नहीं हो सका है। अतिथि शिक्षकों का कहना है कि नेटवर्क और अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण अतिथि शिक्षक स्कूल में समय पर उपस्थित नहीं लगा पा रहे हैं। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग का आदेश है कि ऑनलाइन हाजिरी के आधार पर ही अतिथि शिक्षकों को माह में उपस्थिति का ऑनलाइन बिल जनरेट होगा।   ई-अटेंडेंस नहीं लगा पाए अब ई-उपस्थिति नहीं होने से पोर्टल पर मानदेय का भुगतान नहीं हो पा रहा है। अतिथि शिक्षक स्कूल में उपस्थित रहें हैं, इसका उपस्थित पंजी में विधिवत हस्ताक्षर हैं, लेकिन नेटवर्क और तकनीकी समस्याओं के कारण अतिथि शिक्षक ई-अटेंडेंस नहीं लगा पाए। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अतिथि शिक्षकों के लंबित वेतन भुगतान करने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि अतिथि शिक्षकों को विगत तीन माह के मानदेय का भुगतान उपस्थिति पंजी के आधार पर किया जाए। जिससे अतिथि शिक्षक दीपावली का त्योहार मना सके और अन्य आर्थिक समस्याओं से निजात पा सके।

13 अक्टूबर को आत्मनिर्भर भारत थीम पर तैयार होंगे प्रोजेक्ट

भोपाल भारत विल्डाथोन-2025 के लिए मध्यप्रदेश के 4 स्कूलों को चयन स्पॉटलाइट स्कूलों के रूप में किया गया है। जिन स्कूलों का चयन किया गया है, उनमें शासकीय कमला नेहरू – सांदीपनि कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टीटी नगर भोपाल, शासकीय सुभाष उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय शिवाजी नगर भोपाल, शासकीय सांदीपनि विद्यालय रतलाम, शासकीय सांदीपनि विद्यालय नौगांव जिला छतरपुर शामिल हैं।इस कार्यक्रम के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने दिशा निर्देश भी जारी किए हैं। इन विद्यालयों के द्वारा 13 अक्टूबर 2025 को प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 12:00 तक स्वदेशी, लोकल फॉरर वोकल, आत्मनिर्भर भारत और समृद्ध भारत की थीम पर प्रोजेक्ट तैयार किए जाएंगे। इन विद्यालयों से केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान नई दिल्ली से वर्चुअली जुड़कर चर्चा करेंगे। यह स्पॉटलाइट विद्यालय प्रदेश के अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणा का केंद्र होंगे तथा 13 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलने वाले कार्यक्रम के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के 15 हजार से अधिक विद्यालय इस आयोजन में सहभागिता कर रहे हैं। इन सभी विद्यालयों के द्वारा 13 से 31 अक्टूबर के मध्य चार थीमों पर प्रोजेक्ट/प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे। तैयार किये गये प्रोजेक्ट को पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। अपलोड किये गये प्रोजेक्ट का मूल्यांकन केन्द्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया जायेगा। मूल्यांकन के बाद उन्हें पुरस्कृत किया जायेगा। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने पुरस्कार के लिये चयनित विद्यालयों को एक करोड़ रूपए के पुरस्कार वितरित किये जाने का निर्णय लिया है। विकसित भारत बिल्डाथोन-2025 में देश के करीब 3 लाख स्कूल सहभागिता कर रहे हैं। प्रत्येक स्कूल में 4 शिक्षकों की टीम भी तैयार की गई है। शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर प्रोजेक्ट तैयार करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालयों की प्रतिभा को सामने लाना है।  

पर्यटन राज्य मंत्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने कहा- पर्यटन का भविष्य साझेदारी में निहित है

राम वन पथ गमन से टाइगर कॉरिडोर तक, मध्यप्रदेश की क्षेत्रीय पहल से मध्य भारत बनेगा पर्यटन हब : एसीएस श्री शुक्ल म.प्र. ट्रेवल मार्ट के दूसरे दिन महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के अधिकारियों के बीच इन्टर स्टेट टूरिज्म कोलेबरेशन विषय पर हुई चर्चा भोपाल पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने कहा है कि पर्यटन का भविष्य साझेदारी में निहित है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पारिस्थितिक ताने-बाने से जुड़े हमारे राज्य मिलकर ऐसे संयुक्त पर्यटन परिपथ और अनुभव गढ़ने का प्रयास कर रहे हैं, जो न केवल घरेलू बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्य भारत को एक नई पहचान देंगे। पर्यटन मंत्री श्री लोधी मध्यप्रदेश ट्रेवल मार्ट के दूसरे दिन फॉस्टरिंग इन्टर स्टेट टूरिज्म कोलेबरेशन विषय चर्चा कर रहे थे। मध्यप्रदेश न केवल भौगोलिक रूप से, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी भारत का केंद्र है। हमें यह समझना होगा कि अकेले आगे बढ़ने की बजाय मिलकर चलना ज्यादा प्रभावी होता है। अपर मुख्य सचिव पर्यटन व संस्कृति एव प्रबंधन संचालक मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड श्री शिवशेखर शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश अब एक विविधतापूर्ण, बहुआयामी और ऑफबीट पर्यटन गंतव्य के रूप में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। यहां विरासत, वन्यजीवन, रोमांच, संस्कृति, कला, हस्तशिल्प और पाक-परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की सीमा से लगे अन्य राज्य जैसे छत्तीसगढ़ से राम वन पथ गमन सर्किट, महाराष्ट्र के साथ ज्योर्तिलिंग सर्किट जैसे संयुक्त कार्यों पर काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त टाइगर कॉरिडोर, फिल्म पर्यटन और ईको टूरिज्म के साझा विकास की संभावना भी तलाशी जा सकती है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के उप संचालक श्री युवराज पड़ोले ने बताया कि मध्यप्रदेश में राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित 498 स्मारक हैं, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित 290 स्मारक, स्थायी यूनेस्को विश्व धरोहर 3 स्थल, यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल 15 स्थल हैं। यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त रचनात्मक शहर की श्रेणी में संगीत के लिए – ग्वालियर, साहित्य के लिए भोपाल का चुना गया है। मांडू, ओरछा, चंदेरी, बुरहानपुर और खजुराहो जैसे ऐतिहासिक शहरों की मध्यकालीन भव्यता दर्शकों को मंत्रमुग्ध करती है। राजस्थान के साथ संयुक्त पर्यटन की संभावनाएं मध्यप्रदेश और राजस्थान को एक संयुक्त इनबाउंड पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास जारी हैं। इसके अंतर्गत सीमा-पार पर्यटन ढांचे को मजबूत करने और सतत गंतव्य विकास को बढ़ावा देने की योजना है। हेरिटेज धरोहर परियोजना के अंतर्गत दोनों राज्यों की सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत को जोड़ते हुए उनका संयुक्त प्रचार-प्रसार किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के साथ सहयोग के अवसर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि दोनों राज्यों की जनजातीय संस्कृति, वन्यजीवन, धरोहर और हस्तशिल्प को उजागर करने के लिए को-ब्रांडेड अभियान शुरू किए जाएंगे। यह सहयोग न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित करेगा। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के एमडी श्री विवेक आचार्य ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य 7 राज्यों के साथ बार्डर साझा करता है। उन्होंने कहा कि इन्टरस्टेट बाडर्स में पर्यटकों को सबसे बड़ी समस्या टोल प्लाजा पर आती है। इसके समाधान के लिये राज्यों के मध्य एमओयू होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अलग-अलग राज्यों के टूरिज्म बोर्ड का व्हाटसऐप ग्रुप बनाया जाना चाहिए। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच हो टूरिज्म कॉरिडोर पुनर्स्थापित महाराष्ट्र टूरिज्म डेवलपमेंट के जनरल मैनेजर श्री चंद्रशेखर जायसवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच टूरिज्म कॉरिडोर पुनर्स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच एक्सचेंज ऑफ टूरिज्म स्टडी टू और बेस्ट प्रेक्टिसेस एक्सचेंज किये जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र मिलकर वाइल्ड लाइफ सर्किट बनाने पर विचार जाना चाहिए। कस्टमाइज्ड टूरिज्म पर जोर तेलंगाना प्रोजेक्ट कन्सल्टेन्ट प्राइवेट लिमिटेड के एमडी श्री श्रीनिवास बंदा ने कहा कि मध्यप्रदेश और तेलंगाना मिलकर मेडिकल टूरिज्म, वाइल्ड और रिलिजीयस टूरिज्म पर बेहतर काम कर सकते हैं। तेलंगाना सरकार में पीएमयू कसंलटेंट श्री फ्राज मलिक ने कहा कि वर्तमान में हमें कस्टमाइज्ड टूरिज्म पर विचार करना चाहिए, जिसके तहत मेडिकल, धार्मिक, वाइल्ड लाइफ आदि टूरिज्म शामिल हैं। इसके अतिरिक्त हम टूरिज्म कॉलेज खोलने पर भी विचार कर सकते हैं। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश स्टेट काउंसिल फिक्की के अध्यक्ष श्री प्रतीक हीरा, मध्यप्रदेश टूरिज्म कमेटी फिक्की के चेयरमेन श्री महेन्द्र प्रताप सिंह ने भी अपने विचार रखे।  

उद्योगों को भूमि आबंटन पत्र और उद्यम क्रांति योजना के युवाओं को होगा ऋण वितरण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार 13 अक्टूबर को होटल ताज फ्रंट में एमएसएमई सम्मेलन 2025 में शामिल होंगे। सम्मेलन एमएसएमई के विकास एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। सम्मेलन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चेतन्य काश्यप विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एमएसएमई विकास नीति के अंतर्गत प्रदेश के 48 जिलों की 700 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को सिगंल क्लिक के माध्यम से ₹200 करोड़ से अधिक की अनुदान राशि अंतरित करेंगे। इसी तरह स्टार्टअप नीति 2025 के अंतर्गत प्रदेश के 80 से अधिक स्टार्टअप को ₹1 करोड़ से अधिक की सहायता राशि का वितरण भी किया जाएगा। सम्मेलन दोपहर डेढ़ बजे प्रारंभ होगा। इस दौरान स्टार्टअप और निर्यात प्रोत्साहन पर दो विषयगत सत्र होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बालाघाट और टीकमगढ़ के उद्यमियों और उद्योग संघों से वर्चुअली संवाद करेंगे। उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र कुमार सिंह भी उपस्थित रहेंगे। औद्योगिक भूखंड आशय पत्र और उद्यम क्रांति ऋण वितरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव एमएसएमई विभाग के आधिपत्य के औद्योगिक क्षेत्रों में विभिन्न उद्यमों को 200 से अधिक भूखण्डों के आवंटन का आशय पत्र वितरित करेंगे। मुख्यमंत्री ₹113.78 करोड़ की लागत के 03 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों का वर्चुअली शिलान्यास करेंगे। इसके अलावा सेवा पखवाड़ा अंतर्गत अभियान चलाया जाकर मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना अंतर्गत 350 से अधिक हितग्राहियों को ऋण उपलब्ध कराया गया है। कार्यक्रम में 100 से अधिक हितग्राहियों को हितलाभ वितरण भी किया जाएगा। सम्मेलन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग एवं ओएनडीसी के मध्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होंगे। 7.57 करोड़ रूपये की परियोजना लागत के तीन नवीन कार्यालय भवनों का शिलान्यास किया जाएगा। विभाग की एमएसएमई और स्टार्टअप गतिविधियों के अंतर्गत उद्यमियों व स्टार्टअप द्वारा अपने अनुभव भी साझा किये जाएंगे। शाम को विशेष रूप से स्वदेशी एवं स्वावलंबन पर विशेष परिचर्चा सत्र भी होगा।  

मानसून के बाद अब सर्दी ने मचाई दस्तक, जानें कब आएगी असली ठंड!

ग्वालियर मानसून ने इस बार अंचल में सात दिन पहले दस्तक दी थी। इसी तरह अब ठंड ने भी कुछ समय से पहले आ गई है। लोगों को गुलाबी सर्दी का एहसास सुबह शाम में होना शुरू हो गया है। साथ ही रात व दिन का तापमान भी कम हो रहा है। केंद्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की माने तो इस बार दिसंबर व जनवरी माह में कड़ाके की सर्दी पड़ सकती है। इसकी वजह यह है कि यह ला नीना के असर की वजह से होगा। यानि इस बार कड़ाके की ठंड के लिए तैयार रहना होगा। यहां बता दें कि ला नीना प्रशांत महासागर में होने वाली समुद्री सतह के तापमान में असामान्य ठंडक की स्थिति है, जिसके कारण भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में औसत से अधिक ठंडे पानी और तेज़ पूर्वी हवाएं होती हैं।   केंद्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने तो पूरे देश को लेकर संभावना व्यक्त है, लेकिन अंचल सर्दी व गर्मी के लिहाज से संवेदनशील है। यहां पर सर्दी के दिनों के सर्दी भी अधिक पड़ती है और गर्मी के दिनों में गर्मी भी। चूंकि उत्तर भारत से आने वाली ठंडी हवाएं शहर व जिले में जल्द पहुंचती हैं और अधिक ठंडा करती हैं। ऐसे में अंचल में और अधिक कड़ाके की ठंड पड़ने का अंदेशा है। कितना कम हो जाता है तापमान अंचल में सर्दियाें में न्यूनतम तापमान 0.2 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता हैं। हालांकि पिछले कुछ सालों में यह तापमान 0.4 और 05 तक ही गिरा है। लेकिन दिसंबर 1961 को तापमान 0.4 डिग्री सेल्सियस तक चला गया था। इसलिए ला नीना इफेक्ट की वजह से अंचल में ठंड में न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड तोड़ सकता है। स्थानीय मौसम वैज्ञानिक हुकुम सिंह के मुताबिक यदि आगामी दिनों में पश्चिमी विक्षोभ जैसे सिस्टम अधिक नहीं बने तो फिर ठंड अधिक पड़ सकती है। लगातार कम हो रहा है रात का तापमान, बढ़ रही है ठंड ग्वालियर अंचल के रात के तापमान में लगातार कमी हो रही है। हालांकि तापमान धीमी गति से गिर रहा है। लेकिन इससे ठंड बढ़ रही है। तापमान में गिरावट पिछले चार दिन से हो रही है। शनिवार को न्यूनतम तापमान 18.2 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। हालांकि शुक्रवार की तुलना में 0.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दिन में धूप निकलने की वजह से तापमान में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिन का तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस रहा। यह कल के मुकाबले 0.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। मौसम विभाग की माने वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ उत्तर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय है। इसका प्रभाव खत्म होते ही अंचल में और तेजी से तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। यहां बता दें कि शुक्रवार को करीब बीस साल में पहली बार अक्टूबर माह में सबसे कम तापमान दर्ज किया गया था।