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सरकारी क्वार्टर्स में पालतू जानवरों पर रोक? जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा – आवास का उपयोग सिर्फ परिवार के लिए हो

जबलपुर  पालतू कुत्ते और बिल्लियां अब सिर्फ घर की खुशी का जरिया नहीं रह गई हैं, बल्कि कभी-कभी पड़ोसियों और परिवार के लिए कानूनी मुद्दा बन रही हैं। जबलपुर (Jabalpur) के व्हीकल फैक्ट्री में तैनात जूनियर वर्क्स मैनेजर (JWM) सैफ उल हक सिद्दीकी ने भी इसी कारण हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन शुक्रवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। मामला इस बात का है कि फैक्ट्री प्रशासन ने पड़ोसियों की शिकायत पर JWM को सरकारी क्वार्टर खाली करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी क्वार्टर परिवार के लिए है, और यदि डॉग पालने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ता पर है, तो वह किराए के मकान में रहकर पालतू डॉग का पालन कर सकता है। पालतू डॉग्स और पड़ोसियों के बीच विवाद का कारण हाल ही में देखा गया है कि पालतू डॉग और बिल्लियां न केवल पति-पत्नी के बीच मतभेद का कारण बन रही हैं, बल्कि पड़ोसियों के साथ भी संबंधों को प्रभावित कर रही हैं। पड़ोसियों ने शिकायत की थी कि JWM के घर में कई पालतू कुत्ते और बिल्लियां रहने के कारण शोर और गंदगी बढ़ रही है। इस शिकायत के बाद फैक्ट्री प्रशासन ने सरकारी क्वार्टर खाली करने का आदेश जारी किया। JWM ने इसे अवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्वार्टर आवंटन केवल परिवार के लिए होता है, और किसी भी पालतू जानवर को वहां रखने की जिम्मेदारी परिवार के अधिकार में नहीं आती। हाईकोर्ट का आदेश और तर्क जस्टिस विवेक जैन की अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि फैक्ट्री प्रशासन का आदेश सही है। सरकारी क्वार्टर परिवार के रहने के लिए है, न कि पालतू जानवरों के लिए। पड़ोसियों की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और शांति बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि याचिकाकर्ता पालतू डॉग पालना चाहते हैं, तो वह किराए का मकान लेकर अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। याचिकाकर्ता क्वार्टर का मालिक नहीं है, बल्कि इसे फैक्ट्री प्रशासन ने आवंटित किया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पालतू जानवरों के कारण उत्पन्न परेशानियों को प्रशासन और कानूनी तौर पर हल किया जा सकता है। देश-विदेश में पालतू जानवरों से जुड़े विवाद पालतू डॉग्स और बिल्लियों से जुड़े विवाद अब सिर्फ जबलपुर या किसी एक शहर तक सीमित नहीं रह गए हैं। यहां तक कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी 2023 में अपने पालतू डॉग की वजह से सामाजिक और कानूनी बहस का हिस्सा बन चुके हैं। भारत में भी कई परिवारों में पालतू जानवरों ने घर की शांति को चुनौती दी है, कभी पति-पत्नी के बीच तलाक की नौबत आई, तो कभी पड़ोसियों के साथ मतभेद और कानूनी याचिकाओं की झड़ी लग गई। इसलिए पालतू जानवर सिर्फ घर की खुशी का जरिया नहीं रहे, बल्कि वे अब सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारियों का भी हिस्सा बन गए हैं, जिनका पालन हर मालिक को सोच-समझकर करना पड़ता है। मिडिया और समाज पर प्रभाव इस मामले ने समाज में पालतू जानवरों और पड़ोसियों के अधिकार के बीच संतुलन की चर्चा शुरू कर दी है। मीडिया ने इसे बड़े पैमाने पर कवर किया, और सोशल मीडिया पर भी जब इस तरह के विषय उजागर होते हैं, तो लोग अपनी तरह-तरह की राय देने में पीछे नहीं रहते। अदालत के आदेश ने साफ कर दिया कि सरकारी आवास का उपयोग निजी जिम्मेदारी और पालतू जानवरों के लिए नहीं किया जा सकता। पड़ोसियों और मालिकों के बीच उत्पन्न विवाद अब प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से नियंत्रित किया जा सकता है।

अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचे जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ : ऊर्जा मंत्री तोमर

जनसुनवाई में ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने किया जनसमस्याओं का निराकरण भोपाल सरकार की मंशा अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह बात शनिवार को अपने ग्वालियर रेसकोर्स रोड स्थित सरकारी कार्यालय पर जनसुनवाई करते हुए कही। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने आमजन की समस्याओं को सुनते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने हिदायत दी कि किसी भी समस्या का निदान निर्धारित समय-सीमा में किया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने जनसुनवाई में आई महिलाओं को तत्काल राशन दिलाने, वृद्धजनों की वृद्धावस्था पेंशन और मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि आपका यह सेवक किसी भी परिवार के साथ अन्याय नहीं होने देगा। आपकी सेवा के लिए आपका यह सेवक सदैव तत्पर रहा है और आगे भी आपके हर सुख-दु:ख में हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के हर स्तर पर पुख्ता इंतजाम किए हैं।  

रोशनी के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा पॉवर हाउस सारनी

भोपाल बैतूल जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर एक छोटा सा कस्बा सारनी स्थित है। वर्ष 1965 के आसपास वहां सतपुड़ा ताप विद्युत गृह की स्थापना हुई थी। वर्ष 2007 तक सतपुड़ा थर्मल पॉवर स्टेशन मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा पॉवर प्लांट था लेकिन कुछ पुरानी यूनिट बंद होने के बाद वर्ष 2019 से यह मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी का मध्यप्रदेश का तीसरा बड़ा थर्मल पॉवर स्टेशन बन गया। वर्ष 2014 से 250-250 मेगावॉट की दो यूनिट यहां बिजली का उत्पादन कर रही हैं। सारनी के आसपास सुरम्य वन क्षेत्र है। यहां भरपूर वन संपदा उपलब्ध है। वनों में स्थित सागौन, साल, पलास तथा अन्य वृक्ष यहां की हरी-भरी घाटियों को बेहद सुंदर बनाते हैं। इस क्षेत्र की आबादी करीब 86 हजार के आसपास है। सारनी पॉवर हाउस अस्पताल आसपास के क्षेत्र में संजीवनी साबित हो रहा दरअसल बात हो रही है सारनी पॉवर हाउस के अस्पताल की जहां कंपनी कार्मिकों के अलावा अन्य समुदाय के लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल बेहतर तरीके से की जा रही है। सारनी पॉवर हाउस में करीब 580 से ज्यादा अभियंता व कार्मिक कार्यरत हैं। यह कार्मिक सुविधाजनक आवासीय परिसर में रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सारनी कस्बे में बच्चों की पढ़ाई के लिए केन्द्रीय विद्यालय है, बाजार है और बुनियादी जरूरत की सारी सुविधाएं यहां पर उपलब्ध हैं। 55 वर्ष पुराना अस्पताल पूर्णत: सुसज्जित सारनी स्थित यह अस्पताल 1971 में स्थापित हुआ। इस अस्पताल के पहले चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार थे जो बाद में मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मंडल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी नियुक्त हुए। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी के मुख्य अभियंता वी. के. कैथवार ने बताया कि यह अस्पताल सभी तरह की स्वास्थ्य सेवाओं से युक्त है तथा पॉवर हाउस के कार्मिकों के साथ अन्य समुदाय के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। सुदूर अंचल में स्थापित होने के बावजूद यहां अस्पताल में 30 बिस्तरों की व्यवस्था है। अस्पताल में पूर्णकालिक चिकित्सक तथा अनुबंध के आधार पर विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी चिकित्सा सेवाएं देते हैं। अस्पताल में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय रघुवंशी ने बताया कि अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स व वार्ड बॉय सभी मिलकर बिजली अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ आसपास के लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं में जुटे हुए हैं।  दूरदराज के लोगों का सहारा अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं, इनमें महिला वार्ड, पुरुष वार्ड, वर्न यूनिट, एक्स-रे रूम, पैथोलॉजी लैब, ऑपरेशन थिएटर के साथ दवाई वितरण की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। यहां पर इलाज के लिए प्रतिदिन आने वाले मरीजों की संख्या की बात करें तो औसतन 70 से 75 मरीजों की ओपीडी रहती है। इनमें कंपनी कार्मिकों एव उनके परिजनों के अलावा आसपास के गांव के लोग भी अपने परिवार सहित आकर स्वास्थ्य की सुविधाओं का लाभ लेते हैं। यह अस्पताल दूरदराज के समुदाय के लोगों के स्वास्थ्य की भी देखभाल करने में सक्षम है।  दो एम्बुलेंस से तत्काल इलाज की सुविधा मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह बताते हैं कि यह अस्पताल सारनी और इसके आसपास के लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहां पर दो एम्बुलेंस भी मरीज की सेवा में तत्पर रहती हैं जो दूर दराज के मरीजों को लाने तथा जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल बैतूल या नर्मदापुरम पहुंचाने का कार्य करती हैं।  

मध्यप्रदेश एवं गुजरात के अधिकारियों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक

सरदार सरोवर प्रोजेक्ट पर हुई चर्चा भोपाल  मध्यप्रदेश और गुजरात राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच शनिवार को उच्चस्तरीय बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें सरदार सरोवर प्रोजेक्ट संबंधी महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा की गई। बैठक का उद्देश्य सरदार सरोवर प्रोजेक्ट से संबंधित मुद्दों का आपसी समन्वय से निराकरण करना था। बैठक की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन तथा गुजरात के मुख्य सचिव श्री पंकज जोशी ने संयुक्त रूप से की। बैठक में नर्मदा घाटी विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, सचिव श्री जॉन किंग्सली, सी.एम.डी., एस.एस.एन.एन.एल श्री मुकेश पुरी तथा दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट को लेकर बनी सहमति बैठक में दोनों राज्यों के बीच सरदार सरोवर प्रोजेक्ट में गुजरात के गरुड़ेश्वर वियर के माध्यम से पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट को लेकर सहमति बनी। मध्यप्रदेश सरकार इसमें सशर्त सम्मिलित होगी, इससे मध्यप्रदेश सरकार को उत्पन्न बिजली में 57% की भागीदारी मिलेगी। साथ ही सरदार सरोवर के डूब क्षेत्र में आने वाली शासकीय राजस्व, आबादी एवं वन भूमि की प्रतिपूर्ति राशि को लेकर सिद्धांत तय किये गए। बैठक में दोनों राज्यों की लेनदारी एवं देनदारी के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा में यह तय किया गया कि दोनों राज्यों की वित्तीय टीम आपस में विचार कर अगले कुछ दिनों में वित्तीय समायोजन पर निराकरण करेगी। बैठक अत्यंत सकारात्मक एवं सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई।  

वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण विषय पर हुई युवा संसद

वन्यजीव सप्ताह में विद्यार्थियों ने पक्षियों और वन्य जीवों के बारे में प्राप्त की जानकारी भोपाल वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह-2025 के अंतर्गत शनिवार 4 अक्टूबर को चौथे दिन सुबह 6:00 बजे से दिव्यांग बच्चों के लिये पक्षी अवलोकन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में आयाम इंक्लूजन स्कूल भोपाल के 57 छात्र/छात्राओं ने पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के दर्शन किये। इनमें मैगपाई रॉबिन, इंडियन रॉबिन, ग्रीन बी ईटर, ग्रे फ्रैंकोलिन, कॉमन किंग फिशर, वाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर को देखकर बच्चे उत्साहित हो उठे। पक्षी अवलोकन शिविर में सम्मिलित बच्चों को वन्यप्राणियों के मॉडल दिखाये गये एवं उनके बारे में विषय विशेषज्ञों द्वारा जानकारी प्रदान की गई, जिसे जानकर बच्चे बहुत ही रोमांचित हुये। महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिये सुबह 6:30 बजे से "वन विहार" विषय पर फोटोग्राफी प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें 40 बच्चों ने भाग लेकर वन विहार के वन्यजीवों की फोटोग्राफी की एवं तीन-तीन फोटोग्राफ्स, साफ्ट कॉपी के रूप में कार्यालय में जमा किये। रंगोली प्रतियोगिता वन एवं वन्यजीव विषय पर कक्षा 5 से 8 तक वर्ग के लिये आयोजित की गई। "पौराणिक कथाओं में वन्यजीव" विषय पर प्रतियोगिता कक्षा 9वीं के लिये सुबह 9:00 बजे से आयोजित की गई। इसमें 126 प्रतिभागियों ने भाग लेकर विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों पर आधारित बहुत सुंदर रंगोली बनाई। विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन छात्र/छात्राओं के लिये "युवा संसद" प्रतियोगिता सुबह 11.00 बजे से आयोजित की गई। इसमें 4 ग्रुप में 53 प्रतिभागियों ने भाग लेकर "वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण" विषयों पर पक्ष एवं विपक्ष में अपने विचार व्यक्त किये। स्रोत व्यक्ति के रूप में डॉ. सुदेश वाघमारे, डॉ. संगीता राजगीर एवं मो. खालिक तथा अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान श्री विजय कुमार भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक संचालक वन विहार डॉ. रूही हक ने किया। पक्षी अवलोकन शिविर के दौरान वन विहार भ्रमण पर आये विभिन्न विद्यालयों के लगभग 300 छात्र/छात्राओं ने भी पक्षियों एवं वन्यजीवों के सम्बंध में जानकारी प्राप्त कर ज्ञानवर्धन किया। 5 अक्टूबर के कार्यक्रम वन्य जीव सप्ताह में 5 अक्टूबर को सुबह 7:00 बजे से वन्यजीव संरक्षण के लिये 'रन फॉर वाईल्ड लाईफ" दौड़ होगी। इसका रिपोर्टिंग समय सुबह 6:00 बजे रहेगा। दौड़ वन विहार गेट क्र.-2 से डिपो चौराहा, पॉलीटेक्निक चौराहा, श्यामला हिल्स होते हुए बोट क्लब की ओर वन विहार के गेट क्र.-1 पर पूरी होगी। साथ ही सुबह 10:30 बजे से "वनों में पर्यटन वन्यजीवों के संरक्षण में सहायक है" विषय पर शिक्षक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैतूल की छात्रा सुश्री त्रिशा को दी बधाई

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल जिले की बिटिया सुश्री त्रिशा को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उललेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नई दिल्ली में शासकीय एकलव्य महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) बैतूल की छात्रा कुमारी त्रिशा तावड़े को सेंट्रल जोन के अंतर्गत इलेक्ट्रीशियन ट्रेड की राष्ट्रीय मेरिट लिस्‍ट में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि त्रिशा की यह उपलब्धि सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि हमारे गांव-कस्बों में अपार प्रतिभा छिपी हुई है। बदलते दौर में जनजातीय क्षेत्र से आने वाले विद्यार्थी नए-नए प्रतिमान रच रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज से शुरू पीएम-सेतु योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी का हार्दिक अभिनंदन है। प्रधानमंत्री की यह पहल देश के सभी आईटीआई को एक नई दिशा और नई ऊर्जा देगी।  

97 लाख की साइबर ठगी: इंदौर की रिटायर्ड टीचर ठग के जाल में फंसी 14 महीनों तक

इंदौर साइबर अपराधियों ने सेवानिवृत्त शिक्षिका से 96 लाख 83 हजार 595 रुपये की ठगी कर ली। वह 14 महीनों तक ठगों के संपर्क में रही और उनके इशारों पर खातों में राशि जमा करवाती रहीं। पुलिस ने शुक्रवार रात अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ठग के सभी खाते फर्जी पाए गए हैं। सिम कार्ड भी दूसरों के नाम से मिले हैं। ठगी जूना रिसाला निवासी कुमारी पुष्पा ठाकुर के साथ हुई है। 67 वर्षीय पुष्पा सेवानिवृत्त सहायक प्राध्यापक हैं। शिकायत में बताया कि 16 दिसंबर 2023 को राजीव शर्मा नामक व्यक्ति का कॉल आया था। उसने खुद को बीमा कंपनी का अधिकारी बताया और पुष्पा को दो बीमा पॉलिसी की जानकारी दी। उसने कहा कि एक पॉलिसी चालू है और दूसरी सरेंडर नहीं हुई है। एक लाख रुपये की राशि एनईएफटी कर दें ताकि पॉलिसी की सरेंडर राशि खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।   आरोपी ने महिला से दस्तावेज भी मंगवा लिए आरोपित ने बाकायदा ई-मेल आईडी भेजी और महिला से दस्तावेज भी मंगवा लिए। आरोपित ने सात फरवरी 2025 तक महिला से कुल 96 लाख 83 हजार 595 रुपये जमा करवा लिए। बीमा कंपनी से डेटा लीक, ठग ने पॉलिसी बताकर ठगा महिला ने पुलिस को बताया कि उसने एसबीआई लाइफ से बीमा पॉलिसी ली थी। तीन साल तक 25 हजार रुपये जमा करती थी। बीच में रुपये जमा करना बंद कर दिए। कंपनी के कर्मचारी ने पॉलिसी सरेंडर करने की सलाह दी और 72 हजार रुपये मिले। मार्च 2020 में महिला ने दस वर्ष के लिए दूसरी पॉलिसी ले ली। 16 दिसंबर 2023 को ठग का कॉल आया और कहा कि पॉलिसी सरेंडर नहीं हुई है। उसमें लाखों रुपये जमा हैं। शक है बीमा कंपनी से ही ग्राहकों के डेटा लीक हो रहा है। गिरोह ने 23 बार में 32 खातों में जमा करवा रुपये एडिशनल डीसीपी (अपराध) राजेश दंडोतिया के अनुसार, ठगी का शिकार हुई महिला ने आरोपितों में राजीव शर्मा, अमित शर्मा, आर. गोस्वामी, एसके अहलुवालिया, सुब्रत बास, गुरमीत सिंह चंद्रा के नाम बताए हैं। ठग इनके नाम से ही कॉल लगाते थे। आरोपितों ने 23 बार में 32 खातों में रुपये ट्रांसफर करवाए हैं। 15 लाख 46 हजार रुपये तो बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते से ट्रांसफर किए गए हैं।

ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने प्रतिबद्ध है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विशेष ग्राम सभाओं ने 4 हजार से ज्यादा विलेज एक्शन प्लान का अनुमोदन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजातीय बहुल जिलों में ग्राम सभाओं को अपने गांव के विकास का रोडमैप तैयार करने सक्षम बनाया जा रहा है। राज्य सरकार ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में जनजातीय बहुल गांवों में आदि सेवा पर्व पर दो अक्टूबर को हुई विशेष ग्राम सभाओं ने आपसी विचार-विर्मश कर 4 हजार से ज्यादा विलेज एक्शन प्लान का अनुमोदन किया। शेष ग्राम सभाएं जल्द ही विलेज एक्शन प्लान बनाने की प्रक्रियाएं पूरी करेंगी। विलेज एक्शन प्लान के लिए 30 जनजातीय बहुल जिलों के लिए अधिकारियों के कार्य दल बनाए गए थे। अधिकारियों की टीम गांव में पहुंची और ग्राम सभाओं में उपस्थित होकर आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत आदि सेवा पर्व के महत्व को समझाया। ग्राम सभाओं ने जनजाति ग्राम विजन 2030 के लिए ग्राम विशेष एक्शन प्लान का अनुमोदन किया। साथ में यह भी संकल्प लिया कि प्रत्येक गांव में एक आदि सेवा केंद्र स्थापित किया जाएगा। यह सेवा केंद्र एकल खिड़की नागरिक सेवा केंद्र की तरह काम करेगा। इसके माध्यम से स्थानीय लोग आदि सेवा समय, स्वैच्छिक सेवा के अंतर्गत सप्ताह में एक घंटा अपना योगदान करेंगे। सरकारी अधिकारियों को जनजातीय समुदाय की मूल भाषा, बोलियों और संस्कृति से भी जोड़ेंगे। उल्लेखनीय की जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आदि कर्मयोगी अभियान प्रारंभ किया गया है। यह देश में जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए ऐतिहासिक पहल है। इसका उद्देश्य जनजातीय क्षेत्र में ग्राम स्तर पर नेतृत्व क्षमता का विकास करना, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना और शासन-प्रशासन को और अधिक उत्तरदायी बनाना है। यह अभियान सेवा, संकल्प और समर्पण जैसे मूल्यों पर केन्द्रित है, जो जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अभियान के प्रथम चरण में 41 जिलों के 249 विकासखंडों में 14,040 जनजातीय बाहुल्य गांव चिन्हित किए गए हैं। अभियान का लक्ष्य 3 लाख आदि कर्मयोगियों को प्रशिक्षित करना है। इनमें ग्राम स्तर के युवा, महिलाएं, शिक्षक, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव और अन्य स्थानीय प्रतिनिधि शामिल है। अभियान में 18,150 क्लस्टर स्तर के मास्टर ट्रेनर, 41 अशासकीय संगठन, 1250 विकासखंड स्तरीय शासकीय संगठन, 56470 आदि सहयोगी, 2,03,292 आदि साथी, 22,528 आदि विद्यार्थी मिलाकर कुल 3 लाख 3 हजार 233 चेंज लीडर्स तैयार किया जा रहे हैं। प्रत्येक गांव के लिए विकास का एक दीर्घकालिक रोडमैप तैयार किया गया है। ट्राइबल विलेज विजन 2030 पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शुद्ध पेयजल की उपयोगिता, पोषण संबंधी योजनाओं का क्रियान्वयन, महिला बाल विकास की योजनाओं का लाभ, आजीविका के साधनों का सृजन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का कवरेज सुनिश्चित करने जैसे विषय शामिल है। विलेज एक्शन प्लान के निर्माण में आदि कर्मयोगियों के साथ आदि साथियों, आदि सहयोगियों, आदि विद्यार्थियों, सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशन, युवा नेतृत्व, ग्रामीण वयोवृद्ध कल्चरल आइकॉन को शामिल कर सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित की गई है। विशेष ग्राम सभाओ में विलेज एक्शन प्लान का अनुमोदन किया गया है। इस प्रकार अनुमोदित हुए एक्शन प्लान को जिला स्तर पर तीन श्रेणियां में बांटा जाएगा। पहला व्यक्तिगत या सेवाओं की मांग के आधार पर, दूसरा सामुदायिक परिसंपत्तियों और सेवाओं की मांग और तीसरा सेवाओं के वितरण की मांग के आधार पर होगा। इन सब बिंदुओं पर विचार कर राज्य का एक संपूर्ण दस्तावेज तैयार किया जाएगा। राज्य सरकार ने अपनी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए आदि सेवा केंद्र और आदि सेवा समय जैसी पहल शुरू की है। इसके माध्यम से गांव में ही शिकायतों का निवारण होगा। अभियान के अंतर्गत सेवाओं के बेहतर वितरण को विभिन्न विभागों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल जीवन मिशन, कृषि विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। क्या है गांव के एक्शन प्लान में गांव के एक्शन प्लान में गांव की आधारभूत जानकारी सामाजिक, आर्थिक संसाधन, गांव के सामाजिक मुद्दे, उपलब्ध बुनियादी सेवाएं दर्ज रहती हैं ताकि आगे नई योजनाएं बनाने में कठिनाई न आए। गांव की पहचान में विकासखंड का नाम, ग्राम पंचायत और गांव का नाम, गांव की भौगोलिक स्थिति, गांव में स्थित मंदिर, पूजा स्थल, अति गरीबों का विवरण, उपलब्ध सुविधाएं जैसे आंगनबाड़ी, प्राथमिक शाला, माध्यमिक शाला, विद्युत लाइन, सौर पैनल, स्ट्रीट लाइट, उज्ज्वला योजना से जुड़े परिवार, शौचालय, सामुदायिक भवन, ग्राम चौपाल, सड़के, आजीविका के विकल्प जैसे खेती पशुपालन, गैर कृषि, व्यापार सेवा या नौकरी, गांव की खेती के तरीके, सिंचाई की व्यवस्थाएं गांव की जल संसाधन और गांव के लोगों की अपेक्षाएं आदि आधारभूत जानकारी के साथ गांव के लोगों के विचार भी दर्ज रहते हैं, कि वे अपने गांव के विकास को कैसे देखना चाहते हैं।  

मतांतरित लोगों की ‘घर वापसी’ का अभियान शुरू, आलीराजपुर की ग्राम सभाओं ने संभाली मोर्चा

छकतला मतांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर पश्चिमी मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाके आलीराजपुर में अब ग्राम सभाएं मोर्चा संभाल रही हैं। पेसा अधिनियम के तहत गठित ग्राम स्तरीय समितियां अब मतांतरण (धर्म परिवर्तन) के खिलाफ संगठित कदम उठा रही हैं। इन समितियों का उद्देश्य है जो आदिवासी मूल संस्कृति से भटके हैं, उन्हें समझाइश के माध्यम से पुनः घर वापसी कराना। दुधवी गांव में परिवार की वापसी बनी उदाहरण ऐसा ही एक ताजा उदाहरण सामने आया है ग्राम पंचायत करजवानी के ग्राम दुधवी से, जहां उकारिया पुत्र कदवा ने अपने पूरे परिवार के साथ सनातन धर्म में वापसी की है। इस निर्णय में गांव की ग्राम सभा का महत्वपूर्ण किरदार रहा। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना की वापसी का प्रतीक है।   मथवाड़ पंचायत में प्रस्ताव पर होगा फैसला ग्राम पंचायत मथवाड़ के ग्रामसभा अध्यक्ष दिलीप पटेल ने बताया कि रविवार को पंचायत की बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा, जिसमें गांव के मतांतरण कर चुके परिवारों को ससम्मान सनातन धर्म में लौटाने की प्रक्रिया को ग्राम सभा की मंजूरी दी जाएगी। यह प्रस्ताव पेसा अधिनियम के प्रविधानों के तहत पारित किया जाएगा। पूर्व सरपंचों की पहल, गांव-गांव जा रहे जनप्रतिनिधि ग्राम छकतला के पूर्व सरपंच उसान गरासिया ने जानकारी दी कि वे स्वयं मथवाड़, वाकानेर, करजवानी और आसपास के कई गांवों में जाकर ऐसे परिवारों से संवाद कर रहे हैं जो कभी अपनी मूल संस्कृति से दूर हो गए थे। उन्होंने बताया कि, जिन्होंने मतांतरण किया है, उनमें से अधिकतर अत्यंत गरीब और बीमार थे। कुछ को लालच देकर मत परिवर्तन कराया गया। लेकिन अब जब हम उन्हें समझा रहे हैं, तो लोग अपनी जड़ों की ओर लौटने को तैयार हो रहे हैं। जनपद स्तर पर भी सक्रियता, ग्राम सभा बनी अधिकारों की आवाज सोंडवा जनपद पंचायत अध्यक्ष रेवली उषानसिंह गरासिया ने बताया कि क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की जा रही हैं, जहां पेसा एक्ट के तहत ग्राम सभा को जो विशेष अधिकार प्राप्त हैं, उनका उपयोग करते हुए धर्म परिवर्तन रोकने और पुनः मूल संस्कृति में लौटने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने कहा, हमारी परंपरा, रीति-रिवाज और आस्था हमारी पहचान है। पंचायतें अब यह सुनिश्चित कर रही हैं कि कोई भी परिवार लालच या भयवश अपनी संस्कृति से दूर न हो। पेसा अधिनियम बना आधार, 607 ग्राम सभाओं में सक्रिय समितियां जिले के पेसा जिला समन्वयक प्रवीण कुमार चौहान के अनुसार पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में जिले में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। अब तक 607 ग्राम सभाओं में पेसा समितियों का गठन किया जा चुका है। ये समितियां न सिर्फ ग्रामों में अधिकारों की जानकारी फैला रही हैं, बल्कि सांस्कृतिक सुरक्षा को लेकर भी सजग हैं। चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम 2022 और ग्राम सभा गठन नियम 1998 के तहत ग्राम सभाओं को जो अधिकार दिए गए हैं, उनका उपयोग अब वास्तविक धरातल पर दिखने लगा है। कई ग्राम सभाओं ने तो अब विधिवत प्रस्ताव पारित कर ‘घर वापसी’ के अभियान को समर्थन दिया है। जमीनी स्तर पर जनभागीदारी, सामाजिक समरसता की ओर कदम पेसा अधिनियम के तहत गठित समितियां न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक चेतना का केंद्र बन रही हैं। ग्राम स्तरीय मोबिलाइज़र और ब्लाक समन्वयक जहां लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों की जानकारी दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्राम सभाएं अब सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए भी सक्रिय हो चुकी हैं।

ड्रग्स रैकेट का अंधेरा: इंदौर में सीमा नाथ के भाइयों ने पैडलर को अगवा कर जमकर पीटा

इंदौर 1 करोड़ के ड्रग्स और 48 लाख रुपयों के साथ पकड़ी गई ड्रग्स माफिया सीमा नाथ के भाईयों ने एक पैडलर का अपहरण कर लिया। उसको पेड़ से बांधा और जमकर पिटाई की। आरोपितों ने ड्रग्स बेचने की धमकी दी और रुपये भी छीन लिए। डीसीपी ने व्यावसायिक विवाद बताया है। चारों आरोपितों को पकड़ लिया है। पेड़ पर बांध कर पीटा, रुपये छीने घटना द्वारकापुरी थाना अंतर्गत अहिरखेड़ी की है। श्रीराम नगर निवासी 34 वर्षीय कुणाल पुत्र गोपाल चौहान ने सीमा नाथ के भाई अर्जुन नाथ, चेतन नाथ, लक्की नाथ और समीर नाथ के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई है। कुणाल ने पुलिस को बताया कि वह गुरुवार को भंडारा में खाना खाने जा रहा था। आरोपितों ने रास्ते में पकड़ लिया और दोपहिया वाहन से श्मशान के समीप ले गए। एक पेड़ पर बांध कर पीटा और उससे 2 हजार रुपये छीन लिए। 1800 रुपये खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए।   ड्रग्स के धंधे को लेकर हुआ अपहरण शनिवार को इस घटना की रिपोर्ट लिखी गई। सूत्रों के मुताबिक अपहरण ड्रग्स के धंधे को लेकर हुआ है। सीमा नाथ अहिरखेड़ी, प्रजापत नगर, द्वारकापुरी, ऋषि पैलेस, राजेंद्रनगर, कुंदननगर क्षेत्र में ड्रग्स (ब्राउन शुगर) की सप्लाई करती है। सीमा की गिरफ्तारी के बाद चेतन, लक्की और अर्जुन ड्रग्स का धंधा कर रहे है। तीनों ही आपराधिक प्रवृति के है। चेतन तो किराना कारोबारी की हत्या कर चुका है। आरोपितों ने कुणाल से कहा कि वह क्षेत्र में दूसरे की ड्रग्स बेचता है। उससे कहा कि इस क्षेत्र में उनसे ही ड्रग्स खरीदना पड़ेगी। पुलिस के अनुसार आरोपितों से पूछताछ चल रही है।