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बच्चों की मौत के बाद छिंदवाड़ा में जांच तेज, डॉक्टर गिरफ्तार, दवा कंपनी पर कार्रवाई

छिंदवाड़ा किडनी खराब होने से बच्चों की मौत के मामले में श्रेषन फार्मास्यूटिकल्स और डॉक्टर प्रवीण सोनी पर हत्या का मुकदमा पुलिस ​ने दर्ज किया है। छिंदवाड़ा के कोतवाली थाना क्षेत्र राजपाल चौक से डॉक्टर प्रवीण सोनी को देर रात एसपी की स्पेशल टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। छिंदवाड़ा एसपी अजय पांडेय ने बताया कि परासिया बीएमओ डॉक्टर अंकित सहलाम की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित श्रेषन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ​एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की ‘एडल्ट्रेशन ऑफ ड्रग’ (दवाओं में मिलावट) और ‘हत्या की कोटि में आने वाले अपराधिक मानव वध’ जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इसके अलावा ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। इन धाराओं में अधिकतम आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। छिंदवाड़ा जिले में एक कफ सिरप त्रासदी ने हड़कंप मचा दिया है। संदिग्ध कफ सिरप के सेवन से अब तक 14 मासूम बच्चों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि प्रशासन ने अभी तक 10 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है। प्रयोगशाला रिपोर्ट में सिरप में हानिकारक रसायन पाए जाने के बाद राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से दो कफ सिरप पर पूरे प्रदेश में प्रतिबंध लगा दिया है और कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

14 बच्चों की मौत का कफ सिरप कनेक्शन: डॉक्टर हिरासत में, कंपनी पर कार्रवाई शुरू

भोपाल मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कथित तौर पर कफ सिरप पीने की वजह से एक दर्जन से अधिक बच्चों की मौत के बाद राज्य सरकार अब ऐक्शन मोड में है। 'कोल्डरिफ' कफ सिरप को बैन किए जाने के बाद छिंदवाड़ा जिले में एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि मारे गए अधिकतर बच्चों को इसी डॉक्टर ने वह कफ सिरप लिखी थी। परासिया में सरकारी डॉक्टर प्रवीण सोनी पर आरोप है कि वह प्राइवेट प्रैक्टिस भी कर रहे थे और उन्होंने निजी क्लिनिक में यह दवा लिखी थी। राज्य सरकार ने दवा कंपनी के खिलाफ भी मकुदमा दर्ज कराया है। बाल रोग विशेषज्ञ प्रवीण सोनी परासिया में सरकारी डॉक्टर हैं। आरोप है कि वह यहां एक निजी क्लिनिक भी चला रहे थे। बताया जा रहा है कि जिन बच्चों की मौत हुई है उनमें से अधिकतर को सर्दी-खांसी जैसी शिकायतों के बाद डॉ. प्रवीण सोनी के क्लिनिक में लाया गया था और उन्होंने अन्य दवाओं के साथ 'कोल्डरिफ' लेने की सलाह दी थी। दवा में एक खतरनाक रसायन की पुष्टि होने के बाद राज्य सरकार ने इसे पूरे राज्य में बैन कर दिया है। परासिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर अंकित सहलाम की शिकायत के आधार पर पुलिस ने डॉक्टर सोनी और कोल्डरिफ कफ सिरप को बनाने वाली कंपनी 'श्रीसन फार्मास्युटिकल्स' के खिलाफ केस दर्ज कराया है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स ऐक्ट की धारा 27(ए) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 और 276 के तहत केस दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि दवा के नमूनों में 48.6 प्रतिशत 'डाईथिलीन ग्लाइकॉल' पाया गया, जो एक जहरीला रसायन है। मध्यप्रदेश सरकार ने छिंदवाड़ा में जिन 14 बच्चों की मौत हुई है उन्हें शुरुआत में सर्दी-खांसी और बुखार जैसे साधारण लक्षण थे। आरोप है कि कफ सिरप लेने के बाद बच्चों की किडनी फेल हो गई और उनकी मौत हो गई। 6 बच्चों का अब भी इलाज चल रहा है। मृतकों में सबसे अधिक 11 परासिया उपमंडल के हैं। दो छिंदवाड़ा शहर के और एक चौरई तहसील के थे। बैन के साथ CM का आदेश- बख्शे नहीं जाएंगे दोषी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक दिन पहले ही कोल्डरिफ को बैन करने का आदेश देते हुए सख्त ऐक्शन की बात कही। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'छिंदवाड़ा में Coldrif सिरप के कारण हुई बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद है। इस सिरप की बिक्री को पूरे मध्यप्रदेश में बैन कर दिया है। सिरप को बनाने वाली कंपनी के अन्य प्रोडक्ट की बिक्री पर भी बैन लगाया जा रहा है। सिरप बनाने वाली फैक्ट्री कांचीपुरम में है, इसलिए घटना के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार को जांच के लिए कहा था। आज सुबह जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट के आधार पर कड़ा एक्शन लिया गया है। बच्चों की दुखद मृत्यु के बाद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई चल रही थी। राज्य स्तर पर भी इस मामले में जांच के लिए टीम बनाई गई है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।'  

कानूनी दुनिया में महंगाई का झटका: MP बार काउंसिल चुनाव शुल्क हुआ 5 गुना ज्यादा, पैसा वापस नहीं

जबलपुर मध्य प्रदेश के सवा लाख से अधिक वकीलों का पंजीयन करने वाली सर्वोच्च संस्था एमपी स्टेट बार काउंसिल का चुनाव लड़ना अब आसान नहीं रहा। देश के वकीलों की सर्वोच्च संस्था बार काउंसिल आफ इंडिया ने एक आदेश के जरिए चुनाव नामांकन शुल्क में सीधे पांच गुना बढ़ोत्तरी कर दी है, जो कि वापस नहीं होगा। इससे प्रत्याशियों में खासा रोष है। इसको लेकर विरोध के स्वर भी उठ रहे है। पहले एसबीसी का चुनाव लड़ने के लिये नामांकन फीस महज 25 हजार रुपये थी, जिसे बढ़ाकर एक लाख पच्चीस हजार रुपये कर दिया गया है। राशि की वापसी न होने का भी विरोध हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को एक आदेश जारी करके स्टेट बार काउंसिल के चुनावों के लिए सात सदस्यीय चुनाव समितियां गठित करके 31 जनवरी, 2026 तक सभी चुनाव कराने के निर्देश बीसीआई को दिए थे। इसी आदेश के बाद बीसीआई द्वारा स्टेट बार काउंसिल को एक पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि लॉ ग्रेजुएट्स के नामांकन के लिए पहले फीस 16 हजार रुपये थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने घटाकर 600 रुपये कर दिया। स्टेट बार काउंसिल की आय घटने के कारण अब स्टेट बार काउंसिल के पास चुनावी खर्च के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं बच रही। इसके लिए जरूरी है कि नामांकन की फीस 25 हजार से बढ़ाकर एक लाख 25 हजार रुपये की जाए। मप्र स्टेट बार काउंसिल की मौजूदा कार्यकारिणी का कार्यकाल अगले माह पूरा होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में जनवरी 2026 तक नई कार्यकारिणी के चुनाव कराए जाने हैं। वेकेशन में प्रत्याशियों ने शुरू किया जनसंपर्क आगामी कार्यकारिणी को लेकर चुनाव की तैयारी कर रहे प्रत्याशियों ने जहां नामांकन शुल्क बढ़ाये जाने पर रोष व्यक्त किया है तो वहीं अपनी जोर आजमाइश भी शुरू कर दी है। दशहरा पर्व पर पड़ी छुट्टियों पर अपना भाग्य आजमा रहे प्रत्याशियों ने वकीलों के घरों में पहुंचकर जन संपर्क करना शुरू कर दिया है। वहीं सोशल मीडिया पर भी मतदाताओं से अपने पक्ष में मत का प्रयोग करने की अपील की जा रहीं है। शुल्क बढ़ाया जाना अनुचित : सैनी एसबीसी के वाइस चेयरमेन आरके सिंह सैनी ने कहा है कि चुनाव में नामांकन शुल्क सीधे पांच गुना बढ़ाया जाना अनुचित है। इसकों लेकर एसबीसी ने बीसीआई को पत्र भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज करायी है। जल्द ही बीसीआई की सामान्य सभा की बैठक होने वाली है, जिसमें संभवत: शुल्क घटाने पर विचार विमर्श होगा।

12 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता रद्द, पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका

भोपाल मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। प्रदेश के 12 शासकीय नर्सिंग कॉलेज आज भी मान्यता से वंचित हैं। एनएसयूआई का कहना है कि इन कालेजों में शैक्षणिक ढांचे की भारी कमी, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हैं। राज्य सरकार की गाइडलाइन के बावजूद इन कालेजों ने न तो फैकल्टी नियुक्त की और न ही जरूरी सुविधाएं पूरी कीं। एनएसयूआई ने अगस्त 2025 में इन कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को लेकर शिकायत की थी, लेकिन विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। मंत्री और नेताओं के जिलों में ही कॉलेजों की खराब स्थिति     रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 12 कॉलेजों को मान्यता नहीं मिली उनमें रायसेन, मंदसौर, नरसिंहपुर, जबलपुर, सागर, खंडवा, अमरकंटक, भोपाल, झाबुआ, सीधी, राजगढ़ और दतिया के कॉलेज शामिल हैं।     एनएसयूआई का आरोप है कि इनमें से कई कॉलेज कुछ संस्थान केवल एक या दो फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं।राज्य सरकार के 13 मंत्रियों और भाजपा नेताओं के गृह जिलों में हैं, लेकिन वे भी अपने जिलों के कॉलेजों की स्थिति सुधार नहीं पाए।   कई कॉलेजों में प्राचार्य और उप प्राचार्य तक नहीं हैं, जबकि कुछ संस्थान केवल एक या दो फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं। एनएसयूआई ने कहा कि कुछ कॉलेजों ने इतनी खामियों के बावजूद एम.एससी. नर्सिंग की 35 सीटों के लिए आवेदन तक कर दिया है, जो नर्सिंग शिक्षा के साथ खिलवाड़ है। गरीब छात्राओं का भविष्य संकट में     एनएसयूआई ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी लापरवाही के कारण हजारों छात्राओं का भविष्य अधर में है। जो छात्राएं निजी कालेजों की ऊंची फीस भरने में सक्षम नहीं हैं, वे अब प्रवेश से वंचित रह जाएंगी।     एनएसयूआई का कहना है कि यह स्थिति कहीं न कहीं प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है।     विभाग के कुछ अधिकारी निजी संस्थानों से मिलीभगत कर रहे हैं, जिससे सरकारी कॉलेजों की मान्यता रुकी हुई है। इन कॉलेजों में करीब 1000 से ज्यादा सीटें हैं, जो अब खाली रह जाने का खतरा है।

खजाने की हुई बरसात! माता टेकरी में भक्तों ने दिया दिल खोलकर दान, करोड़ों के रत्न और विदेशी नोट बरामद

देवास नवरात्र में माता टेकरी पर दर्शन करने पहुंचे लगभग दस लाख भक्तों की आस्था से भरी दान पेटियां शनिवार को खोली गईं। शनिवार को बड़ी माता मां तुलजा भवानी और छोटी माता मां चामुंडा के दोनों मंदिरों की कुल 24 दान पेटियों की गिनती सुबह 11 बजे शुरू हुई और शाम करीब 6 बजे तक चलती रही। दान पेटियों से लगभग 44 लाख रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा नवरात्र में माता को एवं दान पेटियों में कई आभूषण भी भक्तों ने अर्पित किए। नवरात्र पर लाखों भक्तों ने किए दर्शन नवरात्र के दौरान माता टेकरी पर देश-विदेश के लाखों भक्त दर्शन के लिए आए और भारी मात्रा में चढ़ावा चढ़ाया। नवरात्र समाप्त होने के बाद शनिवार को माता टेकरी पर स्थित मंदिरों की दान पेटियों को खोला गया। सुबह करीब 10 बजे से टेकरी पर मंदिरों में तहसीलदारों की निगरानी में पेटियों को खोला गया और दान की संपूर्ण राशि बोरियों में भरकर देव स्थान प्रबंध समिति कार्यालय में लाई गई। दान पेटियों से निकले दान के अलावा ऑनलाइन, क्यूआर व रसीद के माध्यम से भी भक्तों ने दान किया है।   नवरात्र के दौरान टेकरी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही बता दें कि पूरे नवरात्र के दौरान टेकरी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। इस दौरान व्यवस्था और सुरक्षा के लिए कलेक्टर ऋतुराज सिंह, एसपी पुनीत गेहलोद सहित सभी वरिष्ठ अधिकारी माता टेकरी पर मौजूद रहे। नवरात्र में करीब 800 सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर तैनात थे। कोटवार, पटवारी, आरआई व तीन तहसीलदार शामिल हैं। दान पेटियों से भगवान को अर्पित किए गए दानों में आभूषण और नेपाल, सिंगापुर सहित अन्य देशों के करेंसी नोट भी पाए गए। इस दौरान मंदिर समिति के सदस्य, पटवारी, कोटवार, राजस्व निरीक्षकों सहित 100 से अधिक कर्मचारी गिनती में शामिल रहे। साथ ही तहसीलदार सपना शर्मा, हरिओम ठाकुर ने भी गिनती में सहयोग के साथ निगरानी की। दान और पत्रों की संपूर्ण गिनती पारदर्शी तरीके से सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में की गई। 52 लाख 92 हजार 868 रुपये दान में आए इस नवरात्र में रसीद के माध्यम 3 लाख 61 हजार 280 रुपये और दान पेटियों में 43 लाख 91 हजार 588 रुपये प्राप्त हुए। बैंक बार कोड के माध्यम से 5 लाख 40 हजार रुपये नवरात्र में प्राप्त हुए। कुल 52 लाख 92 हजार 868 रुपये शारदीन नवरात्र में भक्तों ने दान दिया। इसके अलावा चांदी के 11 छत्र, एक चांदी का मुकुट, 5 जोड़ी बिछिया, 4 स्वास्तिक, 8 जोड़े पायल दान पेटियों से प्राप्त हुए। नवरात्र में कुछ दर्शनार्थियों ने माता को चांदी के हार भी चढ़ाए थे। साथ ही नवरात्र में छोटी माता जी को एक स्वर्ण मुकुट और एक जोड़े सोने के कंगन भी भक्तों ने अर्पित किए। पिछले साल 45 लाख 51 हजार रुपये प्राप्त हुए माता टेकरी प्रभारी तहसीलदार हरिओम ठाकुर ने बताया कि शनिवार को बड़ी माता मंदिर की 11 और छोटी माता मंदिर की 13 दान पेटियां खोली गईं। नवरात्र के पूर्व सभी पेटियां 19 सितंबर को खोली गई थी। सामान्यत: नवरात्र के पूर्व और नवरात्र के बाद सभी मंदिरों की दान पेटियां खोली जाती हैं। इसके अलावा तीन-चार माह के अंतर में नियमित रूप से दान पेटियां खोली जाती हैं। बता दें कि विगत वर्ष शारदीय नवरात्र में दान पेटियों से लगभग 45 लाख 51 हजार रुपये दान व आभूषण प्राप्त हुए थे।

वैश्विक जिओपार्क की दिशा में कदम: धार के बाग को मिलने की उम्मीद अनुशंसा

 धार  यूनेस्को के वैश्विक जिओपार्क के कार्यकारी विज्ञानी डॉ. अलीरेजा (ईरान) एवं लखनऊ के विज्ञानी डॉ. सतीश त्रिपाठी और खोजेमा नजमी (भू-गर्भशास्त्र विशेषज्ञ) ने बाग क्षेत्र स्थित डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान का गुरुवार को निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने उद्यान में संरक्षित किए गए डायनासोर के जीवाश्म, विभिन्न प्रकार की चट्टानों, समुद्री जीवों के जीवाश्म और वानस्पतिक जीवाश्मों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। डॉ. अलीरेजा ने जीवाश्म की प्रचुर मात्रा को देख आश्चर्य व्यक्त किया एवं वनमंडल धार द्वारा जीवाश्म संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों को सराहा। डॉ. अलीरेजा ने डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान को वैश्विक जिओपार्क की मान्यता के लिए प्रस्तावित करने की अनुशंसा की बात कही। बाग गुफाओं का सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक स्तर पर अध्ययन करने पर विशेष जोर दिया गया है। जीवाश्मों का डिजिटल डाक्यूमेंटेशन डॉ. त्रिपाठी ने सभी जीवाश्मों की विशेषता बताई एवं शोध व संरक्षण की भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। वनमंडलाधिकारी धार विजयनंथम टीआर ने बताया कि डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान को आधुनिक जिओपार्क बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। समस्त जीवाश्मों का डिजिटल डाक्यूमेंटेशन भी किया जाएगा, जो इसे वैश्विक पहचान देगा। उपवनमंडलाधिकारी संतोष कुमार रनशोरे द्वारा बाग के आसपास स्थित समस्त जीवाश्म स्थलों एवं बाग की गुफाओं की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों के दल के साथ वन परिक्षेत्र अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सोलंकी एवं सुनील बघेल व वेस्ता मंडलोई उपस्थित रहे। संपूर्ण डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण कराया गया एवं आज दिवस तक किए गए प्रयासों के बारे में जानकारी दी गई।

भोपाल का पर्यावरण फ्रेंडली इनोवेशन, दुर्गा पूजा में चढ़े नींबुओं से बनेगा प्राकृतिक क्लीनिंग स्प्रे

भोपाल  नवरात्रि के दौरान शहर में 5000 दुर्गा पंडाल बनाए गए थे। इन पंडालों में दुर्गा प्रतिमाओं पर नींबू चढ़ाए गए थे। अब ये नींबू बेकार नहीं जाएंगे। नगर निगम ने अनूठा कदम उठाते हुए इन नींबुओं का उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिए किया है। इन नींबूओं को इकट्ठा कर बायो एंजाइम तैयार किया जाएगा। यह तालाब और कुंडों की सफाई में इस्तेमाल होगा। दरअसल, शहर में 'वेस्ट टू वेल्थ' यानी बेकार चीजों से पैसे कमाने की दिशा में भोपाल में नवाचार किया जा रहा है। इसके लिए दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमाओं को चढ़ाए गए नीबूओं को इकट्ठा किया गया है। इसमें अन्य सामग्री मिलाकर एक स्प्रे तैयार होगा। दुर्गा पंडालों से इकट्ठा हुए 2 टन नींबू नगर निगम के अफसरों का अनुमान है कि इस नवरात्रि में भोपाल में अलग-अलग दुर्गा जी की प्रतिमाओं से 2 टन से ज्यादा नींबू इकट्‌ठा हुए हैं। इन नीबूओं के उपयोग से 10 हजार लीटर स्प्रे तैयार किया जाना है। इस स्प्रे में संतरे के छिलके और सड़े गुड़ को भी मिलाया जाएगा। इसके बाद तालाब-कुंड में डाला जाएगा। इस एंजाइम से पानी साफ और स्वच्छ होगा। गणेशोत्सव से शुरू हुआ था प्रयोग गौरतलब है कि पिछले दिनों हुए गणेश उत्सव के दौरान भी बायो एंजाइम बनाने का प्रयोग किया गया था, जो कि सफल रहा था। हालांकि उस समय इतनी अधिक मात्रा में नींबू इकट्‌ठा नहीं हुए थे। लेकिन अब नवरात्रि के 9 दिनों में करीब 5 हजार पंडाल में निगम की निर्माल्य सामग्री इकट्ठा किया। इनमें से नींबू को अलग कर बायो इंजाइम बनाने की प्रक्रिया शुरू की। शुरूआती 6 दिनों में 2 टन नींबू जमा हुए, लेकिन आखिरी 3 दिन में ही नींबूओं की मात्रा 8 टन से ज्यादा हो गई। ऐसे बनता है बायो एंजाइम दुर्गा पंडालों में पूजन सामग्री में से नीबू को अलग इकट्ठा किया जाता है। नीबू को मशीन में डालकर रस निकाला जाता है। इसे केन के अंदर भरा जाता है। यह नींबू, संतरे के छिलकों, सड़े ‎गुड़ और पानी को मिलाकर बनाया‎ जाता है। 10 से 15 दिन में यह तैयार हो जाता है। यह है फायदा जिस जल में प्रदूषण के ‎कारण ऑक्सीजन की मात्रा‎ कम हो जाती है। वहां पर बायो एंजाइम को मिलाया जाता है। यह पानी ‎को प्राकृतिक तरीके से साफ करता ‎है। बायो इंजाइम एक प्राकृतिक, ‎गैर-विषैले और पर्यावरण के अनुकूल ‎क्लीनर का काम करता है। इसका ‎उपयोग कपड़े धोने के साथ बर्तन ‎और हाथ धोने के लिए भी किया जा ‎सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 5 अक्टूबर को असम में निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे; मध्य प्रदेश बना निवेश का प्रमुख केंद्र

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, आज रविवार 5 अक्टूबर को असम के गुवाहटी में पूर्वोत्तर राज्यों के निवेशकों सहित भूटान के प्रतिनिधियों से वन टू वन चर्चा करेंगे। सेशन को रॉयल भूटान काउन्सलेट के काउंसिल जनरल  जिग्मे थिनायल नामग्याल भी संबोधित करेंगे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश के निवेश के प्रमुख सेक्टर और उद्योग-अनुकूल नीतियों की जानकारी देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संकल्पबद्धता और राज्य की मजबूत नीतियां निवेशकों को भरोसा देती हैं कि उनके व्यवसाय के लिए प्रदेश में हर तरह के संसाधन और अवसर उपलब्ध हैं। यह अवसर पूर्वोत्तर और मध्यप्रदेश के उद्योगों के लिए साझी संभावनाओं का नया मार्ग खोलेगा।  मध्यप्रदेश की केन्द्रीय भौगोलिक स्थिति, विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा और बाजार तक आसान पहुंच इसे निवेशकों के लिए सर्वाधिक अनुकूल और एक अनूठा केंद्र बनाती है। मध्यप्रदेश ने उद्योग-अनुकूल नीतियां और क्लस्टर आधारित विकास मॉडल तैयार किए हैं, जिससे निवेशक अपनी नए उद्योग की योजना को तेजी से क्रियान्वित कर सकते हैं। राज्य के एग्रो और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेशकों को कृषि उत्पादन और प्रोसेसिंग क्षमताओं का लाभ मिलता है। टेक्सटाइल्स और अपैरल सेक्टर राज्य की परंपरागत और आधुनिक क्षमता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिससे निर्यात और रोजगार दोनों में वृद्धि संभव होती है। फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में मध्यप्रदेश की ताकत निवेशकों को कच्चे माल, अनुसंधान एवं विकास और उत्पादन के अवसर प्रदान करती है। सीमेंट, मिनरल्स और इंजीनियरिंग, पेट्रोकेमिकल्स और केमिकल्स, टूरिज्म और वेलनेस, रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी इक्विपमेंट तथा प्लास्टिक्स और पॉलिमर्स जैसे सेक्टर राज्य को निवेश के लिए बहुआयामी विकल्प प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल से इन क्षेत्र में निवेश केवल व्यवसाय ही नहीं बल्कि आर्थिक विकास और स्थायी अवसरों का रास्ता बन रहा है। मध्यप्रदेश पूर्वोत्तर के उद्योगपतियों के लिए निवेश का आदर्श स्थल है। असम और अन्य राज्यों में फैले फार्मा हब, सीमेंट यूनिट्स, टी-रिसर्च और प्लांटेशन, लॉजिस्टिक केंद्र और पेट्रोकेमिकल्स जैसी सुविधाओं के साथ मध्यप्रदेश निवेशकों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक और भरोसेमंद वातावरण प्रदान करता है।  

रेल लाइन के लिए 16 सुरंगें, महू-खंडवा प्रोजेक्ट में 17 हजार पेड़ों की रक्षा का आश्वासन

इंदौर  महू-खंडवा रेलवे प्रोजेक्ट शुरू करने को लेकर कवायद तेज हो गई है। शुक्रवार को भोपाल में रीजनल इंपावरमेंट कमेटी (आरईसी) की बैठक में प्रोजेक्ट से जुड़े पर्यावरण मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें जंगल में बिछाई जाने वाली पटरी और निर्माण कार्यों पर सहमति बन चुकी है। गेज परिवर्तन के तहत इंदौर-बड़वाह वनमंडल की 454 हेक्टेयर वनभूमि आएगी, जिसमें एक लाख 52 हजार पेड़ चिह्नित किए गए हैं। हालांकि 17 हजार पेड़ों को बचाया जा सकेगा, क्योंकि इस पूरे रेल मार्ग पर 20 किमी लंबी 16 सुरंगें बनाई जाएंगी। इस कारण इन पेड़ों को काटा नहीं जाएगा। साथ ही रेलवे ने यह भी सुनिश्चित किया कि मार्ग में जगह-जगह अंडरपास बनाए जाएंगे, जिससे पेड़ों को बचा सकेंगे। हालांकि महीनेभर में प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल सकती है। इसके बाद रेलवे को राशि जमा करनी होगी। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक अगले कुछ महीनों में प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाएगा। महू-खंडवा प्रोजेक्ट में इंदौर वनमंडल की 410 हेक्टेयर और बड़वाह वनमंडल की 44 हेक्टेयर वनभूमि इस्तेमाल की जाएगी। इंदौर के 410 हेक्टेयर क्षेत्र में एक लाख 30 हजार और 44 हेक्टेयर में 22 हजार पेड़ों को चिह्नित किया गया है। हालांकि सुरंग बनने से इनमें 17 हजार पेड़ बचाए जाएंगे। बड़िया से बेका के बीच 4.1, चोरल से मुख्तियार बलवाड़ा के बीच 2.2 और राजपुर में 1.6 किमी लंबी सुरंग रहेगी। शेष 12.1 किमी की 13 सुरंग बनाई जाएंगी। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक सुरंग के अलावा अंडरपास बनाए जाएंगे। ये सभी 30-30 मीटर होंगे। इससे भी काफी संख्या में पेड़ों को कटने से बचाया जा सकेगा। धार-झाबुआ में लगेंगे पौधे इंदौर-बड़वाह के जंगलों से कटने वाले पेड़ों की भरपाई की जाएगी, मगर इसके लिए इंदौर वनमंडल में वनक्षेत्र नहीं है। इसके चलते धार और झाबुआ में एक हजार हेक्टेयर में पौधे रोपे जाएंगे। वन अफसरों ने वनभूमि चिह्नित कर ली है। फिलहाल रेलवे भी इसके लिए राजी है। दक्षिण से बढ़ेगी कनेक्टिविटी महू-खंडवा प्रोजेक्ट से इंदौर को काफी फायदा होगा। गेज परिवर्तन होने से दक्षिण की ओर जाने वाली ट्रेन भी इंदौर होकर गुजरेगी। अभी दक्षिण से चलने वाली ट्रेन उज्जैन और खंडवा से डायवर्ट हो जाती है। 150 करोड़ रुपये वन विभाग को रेलवे देगा वनभूमि के एवज में रेलवे वन विभाग को 40 करोड़ रुपये देगा। साथ ही पौधों की नेट प्रेजेंट वैल्यू भी निकाली गई है। उसके लिए भी 40 करोड़ रुपये देने होंगे। जबकि 1000 हेक्टेयर में पौधे लगाए जाएंगे। इसका खर्च भी रेलवे ही उठाएगा। यह राशि लगभग 50 करोड़ रुपये आएगी। वहीं पेड़ों को काटने और परिवहन का खर्च भी वन विभाग रेलवे से वसूलेगा, जो चार से पांच करोड़ होगा। वन विभाग के मुताबिक प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद रेलवे को राशि जमा करनी होगी। उसके बाद रेलवे को काम करने की अनुमति दी जाएगी। अगले कुछ दिनों में मिलेगी अनुमति     वन व पर्यावरण मंत्रालय की कमेटी ने महू-खंडवा प्रोजेक्ट को लेकर बैठक ली थी, जिसमें वन विभाग ने कुछ आपत्तियां लगाई थीं। इसे लेकर रेलवे ने जवाब दिया है। अगले कुछ दिनों के भीतर कमेटी हरी झंडी देगी। इसके बाद रेलवे को आगे की प्रक्रिया करनी होगी। –प्रदीप मिश्रा, डीएफओ, इंदौर वनमंडल  

सरकारी क्वार्टर्स में पालतू जानवरों पर रोक? जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा – आवास का उपयोग सिर्फ परिवार के लिए हो

जबलपुर  पालतू कुत्ते और बिल्लियां अब सिर्फ घर की खुशी का जरिया नहीं रह गई हैं, बल्कि कभी-कभी पड़ोसियों और परिवार के लिए कानूनी मुद्दा बन रही हैं। जबलपुर (Jabalpur) के व्हीकल फैक्ट्री में तैनात जूनियर वर्क्स मैनेजर (JWM) सैफ उल हक सिद्दीकी ने भी इसी कारण हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन शुक्रवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। मामला इस बात का है कि फैक्ट्री प्रशासन ने पड़ोसियों की शिकायत पर JWM को सरकारी क्वार्टर खाली करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी क्वार्टर परिवार के लिए है, और यदि डॉग पालने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ता पर है, तो वह किराए के मकान में रहकर पालतू डॉग का पालन कर सकता है। पालतू डॉग्स और पड़ोसियों के बीच विवाद का कारण हाल ही में देखा गया है कि पालतू डॉग और बिल्लियां न केवल पति-पत्नी के बीच मतभेद का कारण बन रही हैं, बल्कि पड़ोसियों के साथ भी संबंधों को प्रभावित कर रही हैं। पड़ोसियों ने शिकायत की थी कि JWM के घर में कई पालतू कुत्ते और बिल्लियां रहने के कारण शोर और गंदगी बढ़ रही है। इस शिकायत के बाद फैक्ट्री प्रशासन ने सरकारी क्वार्टर खाली करने का आदेश जारी किया। JWM ने इसे अवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्वार्टर आवंटन केवल परिवार के लिए होता है, और किसी भी पालतू जानवर को वहां रखने की जिम्मेदारी परिवार के अधिकार में नहीं आती। हाईकोर्ट का आदेश और तर्क जस्टिस विवेक जैन की अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि फैक्ट्री प्रशासन का आदेश सही है। सरकारी क्वार्टर परिवार के रहने के लिए है, न कि पालतू जानवरों के लिए। पड़ोसियों की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और शांति बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि याचिकाकर्ता पालतू डॉग पालना चाहते हैं, तो वह किराए का मकान लेकर अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। याचिकाकर्ता क्वार्टर का मालिक नहीं है, बल्कि इसे फैक्ट्री प्रशासन ने आवंटित किया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पालतू जानवरों के कारण उत्पन्न परेशानियों को प्रशासन और कानूनी तौर पर हल किया जा सकता है। देश-विदेश में पालतू जानवरों से जुड़े विवाद पालतू डॉग्स और बिल्लियों से जुड़े विवाद अब सिर्फ जबलपुर या किसी एक शहर तक सीमित नहीं रह गए हैं। यहां तक कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी 2023 में अपने पालतू डॉग की वजह से सामाजिक और कानूनी बहस का हिस्सा बन चुके हैं। भारत में भी कई परिवारों में पालतू जानवरों ने घर की शांति को चुनौती दी है, कभी पति-पत्नी के बीच तलाक की नौबत आई, तो कभी पड़ोसियों के साथ मतभेद और कानूनी याचिकाओं की झड़ी लग गई। इसलिए पालतू जानवर सिर्फ घर की खुशी का जरिया नहीं रहे, बल्कि वे अब सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारियों का भी हिस्सा बन गए हैं, जिनका पालन हर मालिक को सोच-समझकर करना पड़ता है। मिडिया और समाज पर प्रभाव इस मामले ने समाज में पालतू जानवरों और पड़ोसियों के अधिकार के बीच संतुलन की चर्चा शुरू कर दी है। मीडिया ने इसे बड़े पैमाने पर कवर किया, और सोशल मीडिया पर भी जब इस तरह के विषय उजागर होते हैं, तो लोग अपनी तरह-तरह की राय देने में पीछे नहीं रहते। अदालत के आदेश ने साफ कर दिया कि सरकारी आवास का उपयोग निजी जिम्मेदारी और पालतू जानवरों के लिए नहीं किया जा सकता। पड़ोसियों और मालिकों के बीच उत्पन्न विवाद अब प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से नियंत्रित किया जा सकता है।