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प्रदेश के दो शिक्षकों को मिला राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, CM डॉ. यादव और मंत्री सिंह ने दी बधाई

भोपाल  प्रदेश के दो शिक्षकों को वर्ष 2025 का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिया जायेगा। यह घोषणा केन्द्र सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा दी गई है। दमोह जिले की प्राथमिक शिक्षक श्रीमती शीला पटेल और आगर-मालवा के माध्यमिक शिक्षक भेरूलाल ओसारा को नई दिल्ली में सम्मानित किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों को बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री उदयप्रताप सिंह ने भी चयनित शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि चयनित शिक्षकों को श्रेष्ठ कार्यों की वजह से मध्यप्रदेश को गौरवान्वित करने का अवसर मिला है। चयनित शिक्षक राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार चयनित दमोह जिले की प्राथमिक शिक्षक श्रीमती शीला पटेल, शासकीय प्राथमिक शाला देवरान टपरिया में पदस्थ हैं। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से चयनित आगर-मालवा जिले के भेरूलाल ओसारा माध्यमिक शिक्षक शासकीय ईपीईएस माध्यमिक शाला खेरिया सुसनेर में पदस्थ हैं। चयनित दोनों शिक्षकों को स्कूली शिक्षा गुणवत्ता में सुधार एवं छात्रों के जीवन को समृद्ध बनाने, नवाचारों के माध्यम से शैक्षिक उत्कृष्टता के लिये प्रदान किया गया है। चयन प्रक्रिया प्रदेश के समस्त 55 जिलों में 45 जिलों से 145 शिक्षकों द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 के लिये अपना पंजीयन कराया गया था। राज्य स्तरीय चयन समिति द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 के लिये 6 शिक्षकों की अनुशंसा केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय को की गई थी।  

तोमर का संदेश: लोकतंत्र सिर्फ शासन नहीं, यह जीवन की आत्मा है

लोकतंत्र केवल शासन पद्धति नहीं, बल्कि जीवन की आत्मा है : तोमर तोमर का संदेश: लोकतंत्र सिर्फ शासन नहीं, यह जीवन की आत्मा है “लोकतंत्र जीवन की आत्मा है, केवल शासन पद्धति नहीं” – तोमर तोमर ने उजागर किया लोकतंत्र का असली महत्व, इसे बताया जीवन की आत्मा स्व. विट्ठल भाई पटेल शताब्दी वर्ष समारोह अखिल भारतीय पीठासीन सम्मेलन में तोमर का संबोधन भोपाल  विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि भारत का लोकतंत्र केवल शासन पद्धति भर नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन की आत्मा है। लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी रही हैं। यह एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक सत्य है कि भारत ने ही दुनिया को लोकतंत्र का बीज दिया। लोकतंत्र हमारे लिए केवल संविधान की देन नहीं है, बल्कि सबसे पुरानी जीवन परंपरा का हिस्सा है, जो हजारों वर्षों से हमारी संस्कृति, समाज और राजनीति का मार्गदर्शन करता आया है। तोमर दिल्ली विधानसभा में आयोजित केंद्रीय विधानसभा के प्रथम निर्वाचित भारतीय स्पीकर स्व. विट्ठल भाई पटेल शताब्दी वर्ष समारोह में आयोजित अखिल भारतीय पीठासीन सम्मेलन में “भारत−लोकतंत्र की जननी” विषय पर व्याख्यान सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस सत्र का विषय प्रवर्तन राज्यसभा के उपसभापति हरवंश ने किया। दो दिन चले व्याख्यान सत्र में देश के लगभग 12 विधानसभा अध्यक्षों/उपाध्यक्षों ने अपने विचार रखे। समापन सत्र के दौरान लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार एवं दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित थे। तोमर ने कहा कि भारत का लोकतंत्र केवल शासन पद्धति भर नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन की आत्मा है। लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी रही हैं। आज दुनिया के अनेक लोग यह मानते हैं कि लोकतांत्रिक मूल्य यूनान से शुरू हुए, लेकिन सच यह है कि भारत में उनकी नींव बहुत पहले पड़ चुकी थी। "ऋग्वेद" और "अथर्ववेद" में 'सभा' और 'समिति' जैसे शब्दों का उल्लेख मिलता है। ये संस्थाएँ सामूहिक विमर्श और निर्णय का प्रतीक थीं, जिनमें राजा तक को अपनी राय थोपने का अधिकार नहीं था। उपनिषद भी हमें यही शिक्षा देते हैं। "सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः" जैसी प्रार्थनाएँ केवल धार्मिक मंत्र नहीं हैं। यह मानवता की साझी भलाई, समानता और समावेश का उद्घोष है। यही लोकतंत्र का मूल तत्व है। लोकतंत्र का मतलब केवल वोट देना और सरकार चुनना नहीं है। लोकतंत्र का मतलब है ऐसी व्यवस्था जिसमें सबका कल्याण, सबकी साझेदारी और सबकी सुरक्षा सुनिश्चित हो। यही बात हमारे ऋषियों ने हजारों साल पहले कह दी थी। विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने कहा कि स्व. विट्ठलभाई पटेल ने तत्कालीन राजनीति को नए आयाम दिए और लोकतंत्र के नए मानदंड स्थापित किए। सभी राज्यों की विधानसभाओं को उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। तोमर ने कहा कि यह भवन विपिन चंद्र पाल एवं पं. मदन मोहन मालवीय की कर्म स्थली रही है। स्व. बटुकेश्वर दत्त और स्व. भगत सिंह के बम कांड की गवाही भी यह भवन देता है यह हमारी स्वतंत्रता आंदोलन की एक महत्वपूर्ण घटना है। तोमर ने कहा कि भारत की चुनाव प्रणाली विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। हर पाँच साल में करोड़ों नागरिक मतदान करके सरकार चुनते हैं। सत्ता का शांतिपूर्ण परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि जनता को चुनने और बदलने का अधिकार प्राप्त है। यही लोकतंत्र की आत्मा है -जनता सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि कई चुनौतियों के बावजूद भारत का लोकतंत्र मजबूत है। इसका कारण यही है कि यह लोकतंत्र केवल संविधान तक सीमित नहीं, बल्कि भारत की जनता की चेतना और उसकी संस्कृति में गहराई से रचा-बसा है। तोमर ने कहा कि अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस लोकतांत्रिक परंपरा को और सशक्त करें। लोकतंत्र का अर्थ केवल सरकार को चुनना नहीं, बल्कि नागरिक के रूप में अपने दायित्वों को निभाना भी है। सम्मेलन में देशभर की विधानसभाओं के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष विधान परिषदों के सभापति, उपसभापति एवं विधानसभा सचिवालयों के अधिकारी सम्मिलित हुए। सम्मलेन का शुभारंभ 24 अगस्त को गृहमंत्री भारत सरकार अमित शाह द्वारा किया गया। समापन दिवस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला विशेष रूप से उपस्थित थे। मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव ए पी सिंह भी उपस्थित थे।  

मप्र से देश भर में यह संदेश जाएगा कि भाषा जोड़ने का काम करती है : उच्च शिक्षा मंत्री परमार

भारतीय प्रतिभाएं, भारत के विकास में योगदान दें : केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान मप्र से देश भर में यह संदेश जाएगा कि भाषा जोड़ने का काम करती है : उच्च शिक्षा मंत्री परमार विश्व एक परिवार है, वसुधैव कुटुंबकम् भारत की संस्कृति है : परमार भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) का द्वादश दीक्षांत समारोह भोपाल  केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने भोपाल स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) में सोमवार को आयोजित 'द्वादश (12वें) दीक्षांत समारोह' में उपाधि प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने भारत की उज्ज्वलतम प्रतिभाओं को देश में ही बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। चौहान ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से भावनात्मक आह्वान करते हुए कहा कि वे विदेशों में अवसर तलाशने के बजाय, भारत के विकास और नवाचार प्रणाली में सक्रिय योगदान दें। चौहान ने इस बात को रेखांकित किया कि सिलिकॉन वैली जैसे वैश्विक तकनीकी केंद्रों में बड़ी संख्या में भारतीय प्रतिभाएं काम कर रही हैं। चौहान ने स्नातकों को प्रेरित किया कि वे अपनी योग्यता और कौशल का उपयोग भारत के हित में करें। उन्होंने 'ब्रेन ड्रेन' की प्रवृत्ति को उलटने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि युवा देश में ही सफल करियर और उद्यम खड़े करें, जिससे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के क्षेत्र में भारत की नींव मजबूत हो। चौहान ने विद्यार्थियों को जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर, समाज और देश के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित किया। चौहान ने स्थानीय उत्पादों और व्यवसायों के समर्थन की आवश्यकता पर भी बल दिया। चौहान ने कहा कि जब हम स्वदेशी वस्तुओं को अपनाते और बढ़ावा देते हैं, तब न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होते हैं। यह प्रक्रिया ग्रामीण और शहरी दोनों समुदायों को सशक्त बनाती है और समावेशी विकास को बढ़ावा देती है। चौहान ने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का उल्लेख किया और विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनेगा। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने सभी मेधावी शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी। परमार ने कहा कि विश्व एक बाजार नहीं, अपितु एक परिवार है। "वसुधैव कुटुंबकम्" का यही मूल भाव, भारत की संस्कृति है। यह भारतीय दृष्टिकोण विश्वमंच पर जितना प्रभावशाली एवं व्यापक होगा, वैश्विक परिधियों में लोक कल्याण का मार्ग उतना ही प्रशस्त होगा। परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में, प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में भारतीय भाषाओं को पढ़ाया जाएगा। प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक भारतीय भाषा सिखाने की कार्य योजना तैयार की जा रही है और इसका विद्यार्थियों को उनके मूल्यांकन में वेटेज देने की भी कार्ययोजना है। प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में भारतीय भाषाओं को पढ़ाने से देश भर में यह संदेश जाएगा कि भाषा जोड़ने का काम करती हैं। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि कृतज्ञता का भाव, भारत की सभ्यता एवं विरासत है। किसी के कार्यों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करना, कृतज्ञता भाव रूपी भारतीय दर्शन का उत्कृष्ट उदाहरण है। परमार ने कहा कि पेड़ों, जलस्रोतों सूर्य आदि प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों के पूजन एवं उपासना की पद्धति भारतीय समाज में परंपरागत रूप से विद्यमान है। यह परंपरा प्रकृति सहित समस्त ऊर्जा स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए, उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का भाव है। हम सभी कृतज्ञतावादी है, न कि रूढ़िवादी। समाज में विद्यमान परम्पराओं के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में पुनः शोध एवं अनुसंधान के साथ समृद्ध करने की आवश्यकता है। हमारे पूर्वज सूर्य उपासक थे, प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों की उपयोगिता और महत्व को जानते थे। परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत सौर ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्म निर्भर होकर अन्य देशों की भी पूर्ति करने में समर्थ होगा। साथ ही वर्ष 2047 तक खाद्यान्न के क्षेत्र में भी आत्म निर्भर होकर अन्य देशों का भरण-पोषण करने में भी सामर्थ्यवान बनेगा। हम सभी की सहभागिता से अपने पूर्वजों के ज्ञान के आधार पर पुनः विश्वमंच पर सिरमौर राष्ट्र का पुनर्निर्माण होगा। इसके लिए हमें स्वाभिमान के साथ हर क्षेत्र में अपने परिश्रम और तप से आगे बढ़कर, विश्वमंच पर अपनी मातृभूमि का परचम लहराना होगा। अपनी गौरवशाली सभ्यता, भाषा, इतिहास और ज्ञान के आधार पर हम सभी की सहभागिता से भारत पुनः "विश्वगुरु" बनेगा। समारोह में संस्थान के विभिन्न संकायों बीएस में 51, बीएस-एमएस में 227, एम.एससी./एम.एस. में 56 एवं पीएच.डी. पाठ्यक्रम में 89, इस प्रकार कुल 423 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। विशिष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों में संस्थान द्वारा दिए जाने वाला राष्ट्रपति स्वर्ण पदक एवं निदेशक स्वर्ण पदक कौशिक मेधी (बीएस-एमएस) को दिया गया। समारोह में 16 छात्र- छात्राओं को प्रवीणता पदक और 6 विद्यार्थियों को सर्वश्रेष्ठ थीसिस पुरस्कार प्रदान किया गया। समारोह में संस्थान की इनोवेशन मैगजीन का विमोचन भी हुआ। समारोह में संस्थान के शासक मंडल के अध्यक्ष प्रो. अरविंद ए नातू एवं संस्थान के निदेशक प्रो. गोवर्धन दास सहित संस्थान के विभिन्न विभागों के एचओडी, प्राध्यापकगण, विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।  

स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास और विस्तार में मध्यप्रदेश का अभूतपूर्व प्रदर्शन: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा

मध्यप्रदेश हैल्थ केयर फैसिलिटी और इनोवेशन में निभा रहा है अग्रणी भूमिका : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास और विस्तार में मध्यप्रदेश का अभूतपूर्व प्रदर्शन देश बदल रहा है, टोटल हैल्थ केयर में हम लिख रहे हैं एक नई कहानी बीमारी का इलाज और बीमार की मदद की व्यवस्था कर रही है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में 2003 में 5 मेडिकल कॉलेज थे, आज हैं 32 केंद्रीय मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्योपुर और सिंगरौली में नए मेडिकल कॉलेज का किया वर्चुअली लोकार्पण बैतूल, कटनी, धार और पन्ना में निजी भागीदारी से पीपीपी मॉडल से बनेंगे नए मेडिकल कॉलेज पात्र हितग्राहियों को मिली 8 लाख वय वंदना कार्ड की सौगात स्मार्ट चैटबॉट (आयुष्मान सखी) का हुआ शुभारंभ आशा कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद की पहल का हुआ शुभारंभ जबलपुर से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी से जुड़े कई नवाचारों का हुआ शुभारंभ जबलपुर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रसाद नड्डा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरगामी सोच से हमारा देश बदल रहा है। हम विकास के हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं के विस्तार में भारत ने पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है। दिल्ली से स्वास्थ्य सुधार के लिए तैयार की गई योजनाओं और स्वास्थ्य कार्यक्रमों को मध्यप्रदेश में अभूतपूर्व तरीके से अमली जामा पहनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश का प्रदर्शन देश के दूसरे राज्यों के लिए एक उदाहरण बन रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार, विस्तार और नवाचार में मध्यप्रदेश नेतृत्व कर रहा है। केन्द्रीय मंत्री नड्डा सोमवार को जबलपुर के घंटाघर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस सांस्कृतिक सूचना केन्द्र में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिमोट का बटन दबाकर श्योपुर और सिंगरौली जिले में नवनिर्मित नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों का वर्चुअली लोकार्पण किया। केन्द्रीय मंत्री नड्डा ने इन दोनों मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स की 100-100 सीटों के प्रवेश के लिए केन्द्र सरकार की ओर से लैटर ऑफ परमिशन भी राज्य सरकार को दिया। उन्होंने कहा कि लैटर ऑफ परमिशन के जरिए इन दोनों मेडिकल कॉलेज के संचालन और प्रवेश की प्रक्रिया भी आज से ही प्रारंभ कर दी गई है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने कहा कि हमारी नई स्वास्थ्य नीति में हमने बीमार होने के बाद इलाज करने की पुरानी व्यवस्था के बजाय नागरिक बीमार ही न पड़ें, इसके लिए प्रिवेन्टिव और प्रमोशनल हेल्थ केयर पर फोकस किया। टोटल हैल्थ केयर सेक्टर में हम विकास और विस्तार की एक नई कहानी लिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का पहला ऐसा देश है, जिसने अपनी अधिकतम आबादी को बीमारी की इलाज के लिए 5 लाख रुपये सालाना हैल्थ कवरेज दिया है। आयुष्मान भारत निरामयम् योजना के जरिए हमने यह कर दिखाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्वास्थ्य विभाग का अमला इस उपलब्धि के लिए बधाई और साधुवाद के पात्र हैं। केन्द्रीय मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में बैतूल, पन्ना, धार और कटनी जिले में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर स्थापित होने वाले नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के लिए संबंधित निवेशक समूहों के साथ अनुबंध पत्रों पर हस्ताक्षर एवं आदान-प्रदान भी किए गए। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 8 लाख पात्र वरिष्ठ नागरिकों को ‘वय वंदना कार्ड’ के वितरण कार्य का शुभारंभ करते हुए मंच से 5 वरिष्ठ नागरिकों को वय वंदना के पीवीसी कार्ड का वितरण किया। साथ ही रिमोट का बंटन दबाकर ‘आयुष्मान सखी’ स्मार्ट चैटबॉट और आशा संवाद कार्यक्रम की शुरुआत भी की। मातृ-गर्भावस्था आहार प्रचार सामग्री एवं मातृ-शिशु सुरक्षा कार्ड का विमोचन भी किया गया। राज्य सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने ‘स्वस्थ यकृत मिशन’ के तहत एक करोड़ लोगों की लीवर स्क्रीनिंग पूरी कर ली है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा हासिल की गई इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले के समर्पण की सराहना की और बधाई दी। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता और मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। स्वस्थ भारत से ही सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण होगा। नड्डा ने कहा कि मध्यप्रदेश हैल्थ सैक्टर में नेतृत्व प्रदान कर रहा है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। भारत सरकार देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर क्रांतिकारी बदलाव कर रही है। पहले हमारी स्वास्थ्य नीति क्योरेटिव थी अर्थात बीमारी के बाद उसका इलाज करना। अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में होलिस्टिक पॉलिसी बनी है, जिसमें प्रिवेंटिव क्योर, हैल्थ प्रमोशन जैसी बातों पर ध्यान दिया गया। एक लाख 77 हजार आरोग्य मंदिरों में डेंटल केयर, मेंटल केयर, कैंसर जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग शुरू की गई। 30 साल से अधिक उम्र के हर व्यक्ति की आरोग्य मंदिर के माध्यम से हेल्थ स्क्रीनिंग शुरू की गई। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि देश में सबसे अच्छा हैल्थ सिस्टम है। पांच करोड़ से अधिक माताओं और बच्चों की स्क्रीनिंग भारत सरकार डिजिटली करती है। आशा वर्कर्स ने अंतिम पंक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाया है। गर्भावस्था के समय महिलाओं के 5 चैकअप होते हैं। पांच करोड़ एंटी नेटल चेकअप हमारे रोबस्ट हेल्थकेयर सिस्टम को दर्शाता है। इसी प्रकार वैक्सिनेशन के क्षेत्र में भी आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम है। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि आज देश में 89 प्रतिशत बच्चों का जन्म अस्पतालों में हो रहा है। मातृ मृत्यु-दर आज 130 से घटकर 93 पर आ गई है। शिशु मृत्यु-दर घटकर 39 प्रतिशत पर आ चुकी है, जबकि दुनिया में यह दर 11 प्रतिशत है। देश भर में 5 करोड़ 20 लाख लोगों को हाइपरटेंशन और 3 करोड़ 50 लाख लोग डायबिटीज से पीड़ित मिले हैं। भारत सरकार सिकल सेल एनीमिया की स्कीनिंग के लिए तेजी से कार्य कर रही है। टीबी के मरीजों की भी तेजी से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के 12 करोड़ 74 लाख परिवारों अर्थात 50 करोड़ से अधिक आबादी … Read more

केंद्रीय मंत्री नड्डा और CM डॉ. यादव ने माँ नर्मदा की महाआरती में की सहभागिता

केंद्रीय मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. यादव माँ नर्मदा की महाआरती में हुए शामिल केंद्रीय मंत्री नड्डा और CM डॉ. यादव ने माँ नर्मदा की महाआरती में की सहभागिता माँ नर्मदा की महाआरती में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. यादव माँ नर्मदा का किया अभिषेक और दीपदान जबलपुर  केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पुण्य-सलिला माँ नर्मदा के पवित्र तट ग्वारीघाट में सोमवार की शाम माँ नर्मदा की महाआरती में शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री नड्डा की धर्मपत्नी श्रीमती मल्लिका बैनर्जी भी महाआरती में शामिल हुईं। केंद्रीय मंत्री नड्डा एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वस्ति-वाचन, हर-हर नर्मदे, माँ नर्मदा के जयकारों और नर्मदाष्टकम् के श्लोकों की गूँज के बीच पूरे विधि-विधान से पुरोहितों की मौजूदगी में माँ नर्मदा की पूजा-अर्चना कर देश तथा प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। नड्डा और डॉ. यादव ने माँ नर्मदा का दुग्धाभिषेक कर दीपदान भी किया।  लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, राज्यसभा सदस्य श्रीमती सुमित्रा वाल्मिकी, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक एवं अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी माँ नर्मदा की महाआरती में शामिल हुये। महाआरती में विधायक सर्व अशोक रोहाणी, सुशील कुमार तिवारी इंदु, डॉ. अभिलाष पांडे एवं नीरज सिंह, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, हितानन्द शर्मा, आशीष अग्रवाल, संदीप जैन, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष विनोद गोंटिया, पूर्व निःशक्तजन आयुक्त दीपांकर बैनर्जी, धर्माचार्य और संत समाज मौजूद रहे। नर्मदा महाआरती के समापन पर 14 वर्षीय तेजस्विनी दुबे ने माँ नर्मदा को साफ एवं स्वच्छ रखने का सभी को संकल्प दिलाया।  

मध्यप्रदेश में ताप्ती रिजर्व: वन्यजीव संरक्षण को मिली नई पहचान, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

भोपाल  मध्यप्रदेश के पहले कंजर्वेशन रिजर्व 'ताप्ती' को सरकार ने हरी झंडी दे दी है. यह कंजर्वेशन रिजर्व 250 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें रिजर्व और संरक्षित वन क्षेत्र शामिल होगा. यह कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच वन्यजीव कॉरिडोर का हिस्सा है. राज्य सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है और इसकी सीमाएं भी घोषित कर दी हैं. इसी के साथ एक बार फिर मध्य प्रदेश के वन्य जीवों का घर लगातार बड़ा हो रहा है. यह होगी कंजर्वेशन रिजर्व की सीमाएं मध्यप्रदेश के पहले कंजर्वेशन रिजर्व ताप्ती की सीमाएं भी निर्धारित कर दी गई हैं. यह कंजर्वेशन रिजर्व दक्षिण और पश्चिम वन मंडल बैतूल की 3 तहसील बैतूल, भीमपुर और भैंसदेही में बना है. इसमें ताप्ती, चिचोली और तावड़ी वन क्षेत्र को शामिल किया गया है. इस रिजर्व क्षेत्र में टाइगर, तेंदुआ, जंगली कुत्ते, बायसन जैसे कई वन्य जीव मौजूद हैं. जानें नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी और कंजर्वेशन रिजर्व में अंतर      ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 250 वर्ग किलोमीटर होगा.     इसमें 224.844 वर्ग किलोमीटर रिजर्व फॉरेस्ट और 25.156 वर्ग किलोमीटर संरक्षित वन क्षेत्र शामिल है.     यह पहला कंजर्वेशन रिजर्व बन गया है, जो दो टाइगर रिजर्व सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व को जोड़ता है.     रिजर्व में टाइगर, लैपर्ड जैसे वन्य जीवों के अलावा ब्लैक बक, चीतल और जंगली उल्लू भी देखे जा सकते हैं. यह होगा रिजर्व से फायदा एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ए. कृष्णामूर्ति कहते हैं, '' कंजर्वेशन रिजर्व टाइगर रिजर्व और सेंक्चुरी की तरह एक संरक्षित वन क्षेत्र है. इससे बाघ सहित दूसरे वन्य प्राणियों को संरक्षण मिलेगा. यह रिजर्व दो टाइगर रिजर्व के बीच कॉरिडोर का काम करेगा. इससे स्थानीय लोगों को नुकसान के स्थान पर फायदा होगा. इस रिजर्व के बनने से इस क्षेत्र में ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा. स्थानीय लोगों के वनोपज संग्रह के अधिकार खत्म नहीं होंगे. वहीं, आदिवासी पहले के तरह तेंदुपत्ता, चिरौंजी, सूखी लकड़ी, गोंद आदि एकट्ठा कर सकेंगे.'' क्या होता है अलग-अलग रिजर्व में अंतर? आमतौर पर सवाल उठता है कि आखिर नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी और कंजर्वेशन रिजर्व में क्या अंतर होता है? तो बता दें नेशनल पार्क में मानवीय गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध होता है. इस क्षेत्र में लकड़ी काटने, वनोपज इकट्ठा करने जैसी कोई भी गतिविधि नहीं की जा सकती. जबकि वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में कुछ सीमित मानवीय गतिविधियां जैसे जानवरों को चराने या स्थानीय उपयोग नियंत्रित तरीके से किए जा सकते हैं. जबकि कंजर्वेशन रिजर्व का क्षेत्र बफर जोन जैसा होता हैं. यहां स्थानीय समुदाय की सहभागिता की मदद से वन्य जीवों ओर वन्य क्षेत्र का संरक्षण किया जाता है. इस क्षेत्र में रहने वालों की आजीविका को भी महत्व दिया जाता है. 

MP में विधायकों की तनख्वाह बढ़ सकती है 45% तक, विधानसभा में गूंजा प्रस्ताव

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक बार फिर विधायकों की सैलरी बढ़ने के मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अगर मध्य प्रदेश में विधायकों की सैलरी 45 फीसदी बढ़ती है तो उन्हें मिलने वाली सैलरी 1 लाख से ज्यादा हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो राजस्थान से ज्यादा मध्य प्रदेश के विधायकों की सैलरी हो जाएगी. जानकारी के मुताबिक सैलरी बढ़ाने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को भेजा गया है. इतना ही नहीं पूर्व विधायकों के पेंशन में भी इजाफा करने की मांग की गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से भी यह प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार को भेजा गया है. अब 3 सदस्यीय समिति इस मुद्दे पर फैसला करेगी. इस समिति के अध्यक्ष एमपी के वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा हैं. इस समिति में बीजेपी और कांग्रेस के एक-एक सीनियर विधायक भी शामिल होंगे. माना जा रहा है कि उनका चयन जल्द ही सरकार की तरफ से किया जाएगा. लंबे समय से चल रही मांग काफी लंबे वक्त से मध्य प्रदेश के विधायकों की तरफ से वेतन, भत्ते और विधायक निधि में बढ़ोतरी की मांग की जा रही थी. इसके लिए एक समिति भी बनी हुई है. इसकी अध्यक्षता रीवा की गुढ़ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक नागेंद्र सिंह कर रहे हैं. समिति ने सभी पक्षों पर चर्चा कर वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की सिफारिश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दी थी.  

एमपी में वंदे भारत एक्सप्रेस की बढ़ती लोकप्रियता, भोपाल रेल मंडल ने लिया अहम निर्णय

भोपाल एमपी में चल रहीं वंदेभारत एक्सप्रेस में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश की पहली वंदेभारत भोपाल निजामुद्दीन और बाद में चलनेवाली इंदौर नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस तथा रानी कमलापति रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की ऑक्यूपेंसी बेहतर होती जा रही है। रेलवे बोर्ड द्वारा वंदे भारत के संबंध में जोन और मंडलों से बुलाई गई रिपोर्ट के अनुसार भोपाल निजामुद्दीन वंदेभारत एक्सप्रेस में तो सीटों की जबर्दस्त कमी पड़ रही है। इसकी ऑक्यूपेंसी और पैसेंजर डिमांड को देखते हुए भोपाल रेल मंडल ने बड़ा फैसला लिया है। मंडल ने भोपाल निजामुद्दीन वंदेभारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए अब रेलवे बोर्ड की मंजूरी मांगी गई है। एमपी की राजधानी भोपाल को देश की राजधानी दिल्ली से जोड़नेवाली रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। ट्रेन नंबर 20171 रानी कमलापति-निजामुद्दीन की ऑक्यूपेंसी जहां 94 प्रतिशत है वहीं ट्रेन नंबर 20172 निजामुद्दीन-रानी कमलापति वंदेभारत 112 प्रतिशत की ऑक्यूपेंसी से चल रही है। ट्रेन में तेजी से बढ़ती यात्रियों की संख्या को देखते हुए रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाए जा रहे हैं। इससे रेल यात्रियों को खासी राहत मिल सकेगी। भोपाल रेल मंडल ने रेलवे बोर्ड को वंदे भारत ट्रेन में 4 कोच बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। मंडल अधिकारियों के अनुसार बोर्ड से इसकी जल्द मंजूरी मिल सकती है। रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस अभी 16 कोच की ट्रेन है। इसमें 2 एग्जीक्यूटिव क्लास कोच और 14 एसी चेयर कार कोच हैं। इस प्रकार कुल 1128 सीटें हैं। 4 कोच बढ़ाने पर रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत में 432 सीटें बढ़ जाएंगी। 20 कोच से रोज 1560 यात्री कर सकेंगे सफर भोपाल रेल मंडल के अधिकारी बताते हैं कि रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस को 20 कोच की करने से इसमें रोज 1560 यात्री सफर कर सकेंगे। नया प्रस्ताव मंजूर होने पर ट्रेन में 2 एसी चेयर कार और 2 एग्जीक्यूटिव क्लास कोच बढ़ जाएंगे। इस प्रकार रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस में कुल 4 एग्जीक्यूटिव क्लास और 16 चेयर कार कोच हो जाएंगे। भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया बताते हैं कि रानी कमलापति–हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस को 20 कोच की करने का फैसला लिया गया है। रेलवे बोर्ड से जल्द ही इसकी मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

मध्यप्रदेश में रोजगार का तोहफ़ा, सीएम यादव देंगे 1060 कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव विद्युत कंपनियों के 1060 कर्मचारियों को देंगे नियुक्ति-पत्र मध्यप्रदेश में रोजगार का तोहफ़ा, सीएम यादव देंगे 1060 कर्मचारियों को अपॉइंटमेंट लेटर विद्युत कंपनियों में नई नियुक्तियाँ: सीएम डॉ. यादव बांटेंगे 1060 नियुक्ति-पत्र ऊर्जा मंत्री ने 26 अगस्त के नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 26 अगस्त को दोपहर 12 बजे रवीन्द्र भवन भोपाल में विद्युत कंपनियों के नवनियुक्त 1060 कार्मिकों को नियुक्त-पत्र वितरित करेंगे। कार्यक्रम में बिजली कंपनियों के लिए नवीन संगठनात्मक संरचना के तहत 51 हजार 711 नये स्थाई पदों की स्वीकृति के लिये मुख्यमंत्री का अभिनंदन भी किया जायेगा। ऊर्जा विभाग की विभिन्न बिजली कंपनियों में रिक्त पदों की परीक्षा के बाद कर्मचारियों का चयन किया गया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सोमवार को मंत्रालय में 26 अगस्त के कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। ऊर्जा मंत्री तोमर ने अधिकारियों को सभी तैयारियां समय-सीमा में पूरी करने के निर्देश दिये। उन्होंने कार्यक्रम स्थल का भी निरीक्षण किया। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई ने कार्यक्रम आयोजन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि संकल्प-पत्र के आधार पर विभिन्न पदों पर एमपी ऑनलाइन के माध्यम से भर्ती की गई है। चयनित पदों में बिजली इंजीनिय़र, सिविल इंजीनियर, लेखाधिकारी, सूचना प्रौद्योगिकी प्रबंधक, सहायक विधि अधिकारी, लाइन अटैंड़ेंट, सिक्य़ोरिटी ऑफिसर, पॉवर प्लांट  फार्मासिस्ट, केमिस्ट, एएनएम, ट्रेसर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्निशियन, रेडियोग्राफर, ईसीजी टैक्निशियन, पब्लिसिटी ऑफिसर, मेडिकल ऑफिसर आदि पद शामिल हैं। भोपाल में होने वाले इस राज्य स्तरीय समारोह में नियुक्ति पत्र पाने वाले युवाओं के परिजनों को भी आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर प्रदेश की विभिन्न बिजली कंपनियों की उपलब्धियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। साथ ही विद्युत कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भी कर्मचारी हितों और उपभोक्ता सेवाओं को लेकर चर्चा भी की जाएगी। बैठक में एम.डी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी अविनाश लवानिया और एम.डी. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षितिज सिंघल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

2005-06 के बाद फिर कहर! WHO ने चेताया, दुनियाभर में फैल रहा चिकनगुनिया

भोपाल   करीब 20 साल बाद एक बार फिर चिकनगुनिया का खतरा बढ़ता दिख रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस पर अलर्ट जारी किया है. चिकनगुनिया एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन यह अब तक 119 देशों में पाई जा चुकी है, जिससे करीब 5.6 अरब लोग जोखिम में हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि 20 साल पहले वाले वायरस में जो म्यूटेशन देखे गए थे, वही फिर से सामने आए हैं. भारत जैसे देशों में, जहां मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां पहले से मौजूद हैं, वहां इसका खतरा और बढ़ जाता है. राजधानी की बात करें तो बीते साल अगस्त के अंत तक चिकनगुनिया के 40 मरीज मिले थे। इस साल अब तक 58 मरीजों में इसकी पुष्टि हो चुकी है। खास बात यह है कि चिकनगुनिया जैसे लक्षण वाले मामले भी तेजी से बढ़े हैं। सभी को बुखार, जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों में अकड़न जैसी शिकायत है, लेकिन रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आती। हमीदिया, जेपी और एम्स में एक अगस्त से अब तक 7 हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे हैं। इसमें से 700 से ज्यादा मरीजों की जांच भी हो चुकी है। डॉक्टर बताते हैं कि इस बार मरीजों की सबसे बड़ी शिकायत जोड़ों में दर्द की है। मरीज बताते हैं कि लगता है जैसे हड्डियां आपस में टकरा रही हों। टेस्ट रिपोर्ट 10 दिन तक पॉजिटिव नहीं आ रही, जिससे पहचान में देरी हो रही है। मरीजों के लिए यह सिर्फ बुखार नहीं, बल्कि हफ्तों तक चलने वाला जोड़ों का कहर है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों के लिए यह और खतरनाक है। चिकनगुनिया के लक्षण जीएमसी के एमडी मेडिसिन डॉ. अनिल शेजवार बताते हैं कि इस बीमारी का वायरस शरीर में आने के 4 से 7 दिनों में लक्षण दिखने लगते हैं। तेज बुखार, जोड़ों में तीव्र दर्द, मांसपेशियों में अकड़न और नसों में खिंचाव, सिरदर्द, थकान, ठंड लगना, मतली, उल्टी, पूरे शरीर पर लाल चकत्ते, आंखों में सूजन और दर्द, डेंगू जैसे लक्षण होने की वजह से कई बार मरीज सही समय पर पहचान नहीं कर पाते। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन गंभीर मरीजों (अस्पताल में भर्ती) के लिए: आईवी हाइड्रेशन (ड्रिप) का प्रयोग करें। कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और इम्युनोग्लोबिन थेरेपी से बचें। प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन सिर्फ तब करें जब ब्लीडिंग हो। येलो फीवर से लिवर फेलियर होने पर आईवी एन-एसिटाइलसिस्टीन का उपयोग। मोनोक्लोनल इम्युनोग्लोबिन और सोफोसबुविर जैसी दवाएं सिर्फ रिसर्च में। सामान्य या हल्के लक्षण वाले मरीजों के लिए: डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ओआरएस और तरल पदार्थ दें। दर्द और बुखार के लिए केवल पैरासिटामोल का इस्तेमाल। स्टेरॉइड से बचें। बचाव ही सबसे बड़ा इलाज जेपी अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट, कॉइल और स्प्रे का उपयोग करें। दरवाजों-खिड़कियों पर नेट लगाएं। भारत में कितना खतरा? पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ समीर भाटी बताते हैं कि भारत में मॉनसून के मौसम में मच्छरों से होने वाली बीमारियां आम हैं और यही चिकनगुनिया के फैलने की सबसे बड़ी वजह बनती है. हालांकि यहां चिकनगुनिया का ज्यादा रिस्क नहीं होता है, लेकिन इस बात सतर्क रहने की जरूरत है. डॉ भाटी कहते हैं कि चिकनगुनिया कीबीमारी एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों के काटने से फैलती है, जो दिन में ज्यादा एक्टिव रहते हैं. जब संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो वायरस उसके खून में एंटर कर जाता है और शरीर में तेजी से फैलता है. इसका असर शरीर की जोड़ों, मांसपेशियों और नसों पर सबसे ज्यादा पड़ता है, जिससे मरीज को तेज दर्द और कमजोरी का सामना करना पड़ता है. चिकनगुनिया के लक्षण क्या हैं? चिकनगुनिया के लक्षण अचानक और तेजी से सामने आते हैं. इसका इनक्यूबेशन पीरियड 2 से 7 दिन होता है यानी वायरस के संक्रमण के कुछ दिनों बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं. सबसे विशेष लक्षणों में तेज बुखार, तीव्र जोड़ दर्द और मांसपेशियों में ऐंठन शामिल हैं. यह जोड़ दर्द कई बार इतना गंभीर होता है कि मरीज को हिलने-डुलने में कठिनाई होती है और यह हफ्तों से लेकर महीनों तक रह सकता है. इसके अलावा मरीज को सिरदर्द, थकान, ठंड लगना, मतली, उल्टी और पूरे शरीर पर लाल चकत्ते हो सकते हैं. आंखों में दर्द और सूजन भी सामान्य लक्षण हैं. कई मामलों में लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते होते हैं, जिससे मरीज को सही पहचान करने में देर हो सकती है. बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य पर असर डालता है. डेंगू, चिकनगुनिया और जीका ऐसी ही तीन खतरनाक बीमारियां हैं जिनका अभी तक कोई स्थायी इलाज या वैक्सीन नहीं है।  यही वजह है कि डॉक्टर सभी लोगों को बचाव के उपायों का पालन करते रहने की सलाह देते रहते हैं। इन बीमारियों की सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि शुरुआती लक्षण साधारण बुखार जैसे होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये जानलेवा रूप ले सकते हैं। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मच्छरों से होने वाली तमाम बीमारियां हर साल लोगों के परेशान करती हैं। डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से घटने लगता है जो गंभीर स्थितियों में जानलेवा भी हो सकता है। चिकनगुनिया महीनों तक जोड़ों में दर्द देता रहता है वहीं जीका वायरस गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए आजीवन खतरा बन सकता है। यानी ये सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि गंभीर चिंता का कारण भी हैं। डेंगू का खतरा डेंगू एक वायरल बीमारी है जो एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने से फैलती है। दुनियाभर में हर साल लगभग 40 करोड़ लोग डेंगू का शिकार होते हैं। भारत में मानसून के दिनों में और बरसात के बाद यह सबसे ज्यादा फैलता है। डेंगू के कारण रोगियों को तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे और मांसपेशियों-जोड़ों में दर्द के साथ त्वचा पर लाल चकत्ते हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में यह हेमरेजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम का भी कारण बन सकता है। इसमें प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटने लगती है जो शरीर में अंदरूनी रक्तस्राव का कारण बन सकती है।  डेंगू का कोई विशेष इलाज मौजूद नहीं है। इसके उपचार में केवल … Read more