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मैस में इल्लियां और फंगस लगी ब्रेड मिली, 70 किलो सामान मौके पर नष्ट

अलवर स्वास्थ्य विभाग की ओर से राजकीय और निजी अस्पतालों के अंदर और आसपास चल रहे रेस्टोरेंट व अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की लगातार जांच की जा रही है। इसी अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शुक्रवार को जेल सर्किल स्थित राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय की मैस का निरीक्षण किया। जांच के दौरान मैस में रखी खाद्य सामग्री की स्थिति देखकर टीम भी हैरान रह गई। सीएमएचओ डॉ. योगेन्द्र शर्मा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी दल ने मैस में रखे खाने-पीने के सामान की जांच की। इस दौरान करीब 70 किलो आटा, मैदा, बेसन, अरहर दाल और मूंग दाल में इल्लियां मिलीं। खाद्य सामग्री में इल्लियां मिलने के बाद टीम ने इन सभी सामान को मौके पर ही नष्ट करवा दिया, ताकि इनका इस्तेमाल खाने में न किया जा सके। फंगस लगी ब्रेड भी मिली जांच के दौरान मैस में फंगस लगी पुरानी ब्रेड और पाव भी मिले। टीम ने इन्हें भी मैस से हटवाया और मौके पर ही नष्ट करा दिया। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने वहां इस्तेमाल किए जा रहे सोयाबीन तेल और मसाले के एक-एक नमूने लिए। दोनों नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्थिति और साफ होगी। निरीक्षण के दौरान मैस में साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। खाद्य सुरक्षा टीम ने इस पर मैस संचालक को नोटिस जारी किया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों और उनके आसपास खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर इस तरह की जांच आगे भी जारी रहने की बात कही गई है। रेस्टोरेंट और ढाबों से भी लिए नमूने टेल्को सर्किल के समीप एक रेस्टोरेंट की किचन में भी साफ-सफाई ठीक नहीं मिली। संचालक को नोटिस देने के साथ रेस्टोरेंट से सर्विलांस के तहत दो नमूने लिए गए। भगत सिंह सर्किल के पास एक रसोई से सोयाबीन तेल तथा आसपास के ढाबों से लाल मिर्च पाउडर और दही के नमूने जांच के लिए लिए गए। संबंधित प्रतिष्ठानों को साफ-सफाई सुधारने के लिए इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी किए गए। इस दौरान केशव गोयल, विश्व बंधु गुप्ता, जय सिंह यादव, अशोक लखेरा, नीरज रावत, अंजली मीणा, अलका, नितेश और राजेश पूनिया मौजूद रहे।  

तरंगशक्ति-2026 के बीच पाक ड्रोन की घुसपैठ, सीमा पर ड्रग्स तस्करी बनी चुनौती

जयपुर  राजस्थान की पाकिस्तान से लगी सीमा पर एक तरफ आसमान में भारतीय सेनाओं के साथ मित्र राष्ट्रों की सेनाएं संयुक्त युद्धाभ्यास की तैयारियों में जुटी हैं। दूसरी तरफ इसी सीमा से लगे दूरस्थ इलाकों में पाकिस्तान से हो रही ड्रग व हथियारों की तस्करी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है। वायुसेना व सेना की युद्ध तैयारियों के बीच जोधपुर की हवाई सीमा पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है, लेकिन श्रीगंगानगर से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते पाकिस्तानी ड्रोन से नशे और हथियार पहुंचने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में अकेले श्रीगंगानगर जिले में करीब 500 करोड़ रुपए की ड्रग्स और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए जा चुके हैं। शुक्रवार को पुलिस को भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे सुजावलपुर क्षेत्र के एक खेत में पुलिस को दो लावारिस पैकेट में 1 किलो 600 ग्राम हेरोइन मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब आठ करोड़ रुपए है। आशंका है कि यह खेप पाकिस्तानी ड्रोन से गिराई गई, हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही इसकी पुष्टि होगी। इससे चार दिन पहले रोही 8 सी बड़ी हिन्दुमलकोट में पुलिस ने एक पॉलीथीन से 206 ग्राम मेथएम्फेटामाइन यानी आइस ड्रग और उपकरण बरामद किए थे। एसपी हरीशंकर के मुताबिक, पुलिस दोनों मामलों में खेप के स्रोत और संभावित रिसीवर तक पहुंचने में जुटी है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में श्रीगंगानगर में करीब 350 करोड़ रुपए की ड्रग्स और बड़ी मात्रा में हथियार पकड़े जा चुके हैं। वहीं, चार दिन पहले आइस ड्रग बरामद हुई थी। यानी सीमा पर दुश्मन की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ड्रोन से होने वाली तस्करी रोकना भी बड़ी चुनौती है। बड़ा सवाल… ड्रोन कैसे दे रहे धोखा पश्चिमी राजस्थान का बड़ा हिस्सा थार के रेगिस्तानी भूभाग में है, जिससे सीमा निगरानी की अपनी भौगोलिक चुनौतियां हैं। हालांकि सरकार जहां बॉर्डर पर सुरक्षा संबंधी गतिविधियों से घुसपैट रोकने दावे करती है। मई 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री ने बीकानेर में भारत-पाक सीमा की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। इन दिनों सैन्य अभ्यास के चलते सीमा पर सुरक्षा का स्तर बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद सीमा के दूसरे हिस्सों में तस्कर ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ और हथियार गिरा सुरक्षा को भेद रहे हैं। गौरतलब है कि प्रदेश की पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा 1,070 किमी लंबी है। श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर – चार जिले सीधे इस सीमा से जुड़े हैं। एयरफोर्स ने जारी किया 17 दिन का नोटम भारतीय वायुसेना ने मेगा मल्टीलेटरल युद्धाभ्यास तरंगशक्ति के संस्करण ‘तरंगशक्ति-2026’ को लेकर पश्चिमी सीमा पर 17 दिन का नोटम (नोटिस टू एयर मिशन) जारी किया है। वायुसेना ने 21 सितंबर से 7 अक्टूबर तक 17 दिनों के व्यापक सैन्य एवं हवाई अभ्यास के लिए नोटम जारी कर जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी और जोधपुर सेक्टर के विशाल हवाई क्षेत्र को सैन्य गतिविधियों के लिए आरक्षित किया है। नोटम की ऊंचाई 40 हजार फीट तक है। बीकानेर के नाल क्षेत्र में इसका एक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 20 किलोमीटर ही दूर है। नोटम लगातार नहीं होकर कुछ फेज में सुबह 9 बजे से रात 12 बजे तक रहेगा। जानकारी के अनुसार 28 से 30 सितम्बर, एक अक्टूबर से पांच अक्टूबर और सात अक्टूबर को नोटम प्रभावी रहेगा। आसमान में आज से दिखेगी आठ देशों की ताकत भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास ‘तरंगशक्ति 2026’ शनिवार से जोधपुर एयरबेस पर शुरू होगा। 12 अक्टूबर तक चलने वाले अभ्यास में अमरीका, जर्मनी, फ्रांस, यूएई, श्रीलंका, बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया समेत आठ देश अपने विमान व सैन्य संसाधनों के साथ हिस्सा लेंगे, जबकि 32 देश पर्यवेक्षक के तौर पर जुड़ेंगे। 100 से अधिक लड़ाकू विमान और करीब 3000 जवान अभ्यास का हिस्सा होंगे। चार से पांच एयरबेस का इस्तेमाल किया जाएगा। शुक्रवार से ही विदेशी परिवहन विमान जोधपुर पहुंचने लगे। इनमें ऑस्ट्रेलिया का सी-130 जे, अमरीका का सी-17, बांग्लादेश का सी-130 जे और फ्रांस का ए330 एमआरटीटी शामिल हैं। हाल ही जापान के साथ ‘वीर गार्जियन’ अभ्यास हुआ था। अब आठ देशों के इस अभ्यास में राजस्थान की गर्मी भी चुनौती होगी। जोधपुर में दिन का तापमान 42 डिग्री के आसपास पहुंच रहा है।

राजस्थान के आसमान में गरजेंगे राफेल-एफ16, 3,000 जवानों के साथ शुरू हुआ ‘तरंगशक्ति’

जयपुर भारतीय वायुसेना (IAF) के इतिहास के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंगशक्ति:2026' का आधिकारिक आगाज आज यानी शनिवार से वायुसेना स्टेशन जोधपुर में हो रहा है। आगामी 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस मेगा मिलिट्री इवेंट में दुनिया भर के 8 ताकतवर देश अपने अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट एसेट्स के साथ हिस्सा ले रहे हैं, जबकि 32 अन्य देश इस ऐतिहासिक युद्धाभ्यास को देखने के लिए ऑब्जर्वर के तौर पर जोधपुर में मौजूद रहेंगे। युद्धाभ्यास के शुरू होने से एक दिन पहले ही यानी शुक्रवार से ही विभिन्न मित्र देशों के विशालकाय ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जोधपुर एयरबेस पर उतरने शुरू हो गए थे, जिससे पूरे पश्चिमी राजस्थान में रक्षा और कूटनीति के मोर्चे पर अभूतपूर्व हलचल देखने को मिल रही है। शुक्रवार को जोधपुर एयरबेस पर उतरे विमानों में रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयरफोर्स का सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस, अमरीका वायुसेना का सी-17 ग्लोबमास्टर, बांग्लादेश का सी-130 जे और फ्रांस की वायुसेना 'आर्मा द लेयर' का ए330 एमआरटीटी शामिल रहे। इन मालवाहक विमानों के जरिए विदेशी सेनाओं के सैनिक दल, तकनीकी स्टाफ और अन्य जरूरी साजो-सामान जोधपुर पहुंच चुके हैं, जबकि विभिन्न देशों के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का पहुंचना आज से शुरू हो रहा है। इस बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास के जरिए भारत अपनी सामरिक ताकत, लॉजिस्टिक्स क्षमताओं और रक्षा कूटनीति का पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शन कर रहा है, जिसका केंद्र इस बार मरुधरा की धरती यानी जोधपुर बना है 100 से अधिक लड़ाकू विमान, 3000 सैनिक ले रहे हिस्सा 'तरंगशक्ति' का यह दूसरा संस्करण है, जिसे अब तक का सबसे व्यापक और बड़ा वायु अभ्यास माना जा रहा है। इससे पहले इसका पहला संस्करण वर्ष 2024 में तमिलनाडु के सुलूर और जोधपुर में आयोजित किया गया था, लेकिन इस बार इसका दायरा और अधिक विस्तृत किया गया है। भाग लेने वाले देश: इस युद्धाभ्यास में भारत के अलावा अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, यूएई, श्रीलंका, बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया कुल 8 देश अपने लड़ाकू विमानों के साथ मैदान में उतर रहे हैं। ऑब्जर्वर देश: दुनिया भर के 32 देश इस पूरी सैन्य गतिविधि का जायजा लेने के लिए बतौर ऑब्जर्वर जोधपुर में शिरकत कर रहे हैं। फाइटर जेट्स और जवान: इस पूरे मेगा इवेंट में कुल मिलाकर 100 से अधिक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान आसमान में अपनी ताकत दिखाएंगे, और करीब 3,000 सैन्य जवान व पायलट इस ऑपरेशन का हिस्सा बनेंगे। एयरबेस का दायरा: मिशन की जटिलता और विशालता को देखते हुए इस अभ्यास के संचालन के लिए 4 से 5 प्रमुख एयरबेसों का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें जोधपुर एयरबेस मुख्य कमांड सेंटर के रूप में कार्य कर रहा है। भीषण गर्मी बनेगी विदेशी पायलटों के लिए चुनौती! जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में अक्टूबर महीने की शुरुआत में मौसम अपने तीखे तेवर दिखा रहा है। मानसून की विदाई के बाद जोधपुर में दिन का अधिकतम तापमान अभी भी 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। इसके साथ ही दिन के समय हवा में नमी करीब 25 प्रतिशत के आसपास रहने के कारण मारवाड़ में भीषण लू जैसे हालात बने हुए हैं। विदेशी वायुसेना के पायलटों और तकनीकी दलों के लिए रेगिस्तान की इस प्रचंड गर्मी और तापमान से निपटना इस युद्धाभ्यास की सबसे बड़ी और शुरुआती चुनौती साबित होने वाली है। रक्षा जानकारों का कहना है कि भारतीय वायुसेना के साथ पूर्व में हुए 'वीर गार्जियन' जैसे अभ्यासों के दौरान भी जापान और अन्य पश्चिमी देशों के सैनिकों को राजस्थान की इस विशेष भौगोलिक गर्मी से तालमेल बिठाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। विदेशी एयरक्रू को यहां के शुष्क और गर्म मौसम में ऑपरेशनल रूटीन बनाए रखने के लिए विशेष एयर कंडीशनिंग और हाइड्रेशन प्रोटोकॉल फॉलो करने पड़ रहे हैं। भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित यह युद्धाभ्यास केवल दो देशों के बीच की सैन्य ड्रिल नहीं है, बल्कि यह एक 'मल्टीनेशनल एयर कॉम्बैट एक्सरसाइज' है। इसका मुख्य उद्देश्य मित्र देशों की वायुसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, साझा युद्ध रणनीतियों, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और कंबाइंड ऑपरेशंस की क्षमताओं को परखना और मजबूत करना है। आज के दौर में जब वैश्विक सुरक्षा के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, तब भारत की धरती पर दुनिया की शीर्ष वायुसेनाओं का एक साथ आना भारत की बढ़ती रणनीतिक साख और तकनीकी दक्षता को रेखांकित करता है। जोधपुर एयरबेस पर अगले कई दिनों तक सुखोई, राफेल, एफ-16 और अन्य आधुनिक फाइटर जेट्स की गर्जना से मरुधरा का आसमान गूंजता रहेगा। 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास के दौरान विभिन्न जटिल सामरिक परिदृश्यों का अभ्यास किया जाएगा, जिससे भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना की तैयारी और अधिक पुख्ता होगी।

पंचायत चुनाव टलने की अफवाहों पर विराम, निर्वाचन आयोग ने किया साफ

जयपुर राजस्थान के ग्रामीण इलाकों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इन दिनों एक ही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या राज्य में होने वाले आगामी पंचायती राज चुनाव एक बार फिर टल सकते हैं? दरअसल, सोशल मीडिया और विभिन्न अन्य माध्यमों से कुछ असामाजिक तत्वों और अफवाह फैलाने वालों द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि आगामी महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों की अड़चन के चलते चुनाव की मियाद को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस तरह की अफवाहों के कारण पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों के बीच असमंजस और ऊहापोह की स्थिति पैदा हो गई थी। ग्रामीण मतदाताओं के मन में भी संशय बनने लगा था कि क्या तय समय पर चुनाव हो पाएंगे या नहीं। स्थितियों को स्पष्ट करते हुए और जनता के बीच भ्रम को दूर करने के लिए खुद राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने इस मामले में कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से स्थिति को पूरी तरह साफ करते हुए एक आधिकारिक संदेश जारी किया गया है, जिसमें सभी प्रकार की अफवाहों का खंडन किया गया है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव अपनी निर्धारित समयावधि के भीतर ही शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए जाएंगे। इस आधिकारिक स्पष्टीकरण के सामने आने के बाद चुनाव तैयारियों में जुटे उम्मीदवारों ने राहत की सांस ली है, वहीं प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। अफवाहों से सावधान रहने की अपील, समय पर होगी पूरी प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स और मंचों के माध्यम से प्रदेश की जनता, पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों और संभावित उम्मीदवारों से विशेष रूप से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। अपने संदेश में उन्होंने जनता को सचेत करते हुए लिखा कि इस तरह की भ्रामक सूचनाएं केवल माहौल खराब करने के लिए फैलाई जाती हैं, इसलिए ऐसे लोगों से पूरी तरह सावधान रहने की जरूरत है। निर्वाचन आयुक्त ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया को हर हाल में 15 नवंबर 2026 से पूर्व सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया जाना है। चुनाव जैसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजन की प्रशासनिक तैयारियों में थोड़ा समय लगना स्वाभाविक है, और आयोग पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है। लॉटरी प्रक्रिया और त्योहारों के बीच तालमेल बैठा रहा है निर्वाचन आयोग संभावित चुनाव कार्यक्रमों की रूपरेखा और प्रशासनिक अड़चनों पर प्रकाश डालते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि पंचायती राज विभाग द्वारा हाल ही में संपन्न कराई गई आरक्षण और वार्डों की लॉटरी से जुड़ी संकलित सूचनाएं अब राज्य निर्वाचन आयोग को प्राप्त हो रही हैं। इन तमाम आंकड़ों के आधार पर एक व्यवस्थित और चरणबद्ध चुनावी कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। आयोग संबंधित प्रशासनिक विभागों और सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ लगातार विचार-विमर्श कर रहा है। चूंकि इस दौरान कई महत्वपूर्ण पर्व और त्योहार भी आ रहे हैं, इसलिए पर्वों की तिथियों और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ही मतदान की तारीखों का ऐसा खाका खींचा जा रहा है जिससे आम नागरिकों या त्योहारों को कोई असुविधा न हो। जल्द होगी आधिकारिक चुनाव घोषणा, उम्मीदवारों ने तेज की तैयारियां राज्य निर्वाचन आयोग के इस स्पष्टीकरण के बाद अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि राजस्थान में पंचायती राज चुनाव तय समय सीमा के भीतर ही आयोजित होंगे। निर्वाचन आयोग द्वारा बहुत जल्द औपचारिक चुनाव तिथियों और आचार संहिता की घोषणा किए जाने की संभावना है। इस घोषणा के बाद से ही राजस्थान के गांवों, ढाणियों और जिला मुख्यालयों की राजनीति में एक बार फिर से चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। संभावित उम्मीदवारों ने अपने जनसंपर्क अभियानों को गति दे दी है और राजनीतिक दलों ने भी अपने स्तर पर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। ग्रामीण जनता अब अपने क्षेत्र के विकास के लिए नए जनप्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर पूरी तरह उत्साहित नजर आ रही है।  

दीनदयाल जयंती पर ‘सेवा संकल्प सभा’, नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं को दिया जनसेवा का संदेश

जयपुर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शुक्रवार को जयपुर के दादिया गांव में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प सभा’ को संबोधित किया। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और ‘अंत्योदय’ के विचार को समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का माध्यम बताया। इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समेत भाजपा के कई नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। नितिन नवीन ने अपने संबोधन में हाल में हुए निकाय चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि तीन नगर निगमों और नगर परिषदों के परिणाम भी भाजपा के पक्ष में आए हैं। उन्होंने इसे जनता के समर्थन के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चल रही विकास योजनाओं तथा गांव-कस्बों तक पहुंचने की कोशिशों से लोगों का ‘विकास के रथ’ पर भरोसा बढ़ा है। जीत को सेवा का अवसर मानकर काम करें- नितिन नवीन भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव में मिली जीत को केवल राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे जनता की सेवा का अवसर मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायतीराज और निकायों के जनप्रतिनिधि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के विचार को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। नवीन ने कहा कि गरीब व्यक्ति को नारायण मानकर काम करने की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनता के साथ निरंतर जुड़ाव बनाए रखने और जनसेवा को प्राथमिकता देने की अपील की। राहुल गांधी के सवाल पर दिया जवाब नितिन नवीन ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस सवाल का भी जिक्र किया, जिसमें भाजपा की सरकारों के लगातार बनने को लेकर सवाल उठाया गया था। नवीन ने कहा कि भाजपा के नेताओं का लंबे समय तक सरकार में रहने का विश्वास जनता की सेवा और काम करने से आता है। उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीबों के लिए आवास, महिलाओं के लिए शौचालय और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए पीएम स्वनिधि जैसी योजनाओं का लाभ पहुंचने पर जनता का समर्थन मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना है। नवीन ने कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस पुराने कथन का भी संदर्भ दिया, जिसमें केंद्र से भेजे गए एक रुपये में से गरीब तक कम राशि पहुंचने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंचे। सीएम भजनलाल ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार अपने संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि संकल्प पत्र के 78 प्रतिशत काम अब तक पूरे किए जा चुके हैं। पंचायत चुनाव पर बोले मदन राठौड़ वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कार्यकर्ताओं को निकाय चुनाव में मिली जीत के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि अब पंचायत चुनाव की तैयारी करनी है। उन्होंने निकाय चुनाव में जीत दिलाने वाले संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की भूमिका को भी रेखांकित किया। सभा में नितिन नवीन ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को याद करते हुए कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इसी भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

राजस्थान में अब 4 तरह से होगा कचरे का पृथक्करण, डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी जवाबदेही

जयपुर शहरों की स्वच्छता अब केवल कचरे के निस्तारण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कचरे को संसाधन में परिवर्तित करने और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ेगी। इसी उद्देश्य से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों एवं उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शुक्रवार को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के सहयोग से संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के निदेशक अनुभव बैरवा ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की जानकारी को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बेहतर कचरा प्रबंधन स्वच्छ एवं टिकाऊ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मुख्य पर्यावरण अभियंता प्रेमालाल ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रमुख प्रावधानों, उनके क्रियान्वयन तथा आमजन, स्थानीय निकायों एवं थोक अपशिष्ट उत्पादकों की भूमिका के संबंध में जानकारी देते हुए मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला । चार-धारा पृथक्करण बनेगा प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन की आधारशिला इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर ने बताया कि 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी नए नियमों में स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण को विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत गीले कचरे, सूखे कचरे, स्वच्छता संबंधी कचरे तथा विशेष/घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग एकत्रित एवं संग्रहित करने पर जोर दिया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल कचरा एकत्र करना नहीं, बल्कि स्रोत पर ही पृथक्करण सुनिश्चित करते हुए पुनर्चक्रण एवं अपशिष्ट प्रसंस्करण की पूरी श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाना है। थोक अपशिष्ट उत्पादकों की जिम्मेदारी होगी और स्पष्ट स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के मुख्य अभियंता अरुण व्यास ने बताया कि नए नियमों में थोक अपशिष्ट उत्पादकों के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। निर्धारित सीमा के अंतर्गत आने वाले बड़े अपशिष्ट उत्पादकों—जैसे बड़े आवासीय परिसर, होटल, संस्थान एवं अन्य प्रतिष्ठानों—को अपने परिसर में ही जैविक कचरे के प्रसंस्करण के लिए कम्पोस्टिंग, जैव-मीथेनीकरण अथवा अन्य अनुमोदित तकनीकों का उपयोग करना होगा। साथ ही पुनर्चक्रण योग्य एवं खतरनाक अपशिष्ट का अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा। डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही अरुण व्यास ने बताया कि नए नियमों के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन निगरानी एवं अनुश्रवण व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके माध्यम से कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण एवं अंतिम निस्तारण की निगरानी को बढ़ावा मिलेगा तथा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। कचरे से संसाधन और भराव स्थलों पर निर्भरता में कमी नए नियमों में सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्रों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इनके माध्यम से सूखे कचरे से पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की अधिकतम पुनर्प्राप्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। वहीं कचरा भराव स्थलों पर निर्भरता कम करने के लिए उद्योगों में अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया है। पुराने विरासत अपशिष्ट स्थलों के वैज्ञानिक उपचार एवं सुधार पर भी विशेष बल दिया गया है। इसके साथ ही अपशिष्ट प्रसंस्करण, कम्पोस्टिंग एवं जैव-मीथेनीकरण जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से कार्बन क्रेडिट अर्जित करने की संभावनाओं का लाभ उठाने की दिशा में भी प्रोत्साहन दिया गया है। ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ से मजबूत होगी जवाबदेही नियमों में ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ को भी शामिल किया गया है। इसके तहत अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाए जाने का प्रावधान है। इससे नियमों के अनुपालन को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। स्थानीय निकायों की भूमिका अहम नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। अपशिष्ट प्रसंस्करण, कम्पोस्टिंग, जैव-मीथेनीकरण तथा मीथेन उत्सर्जन में कमी के माध्यम से स्वच्छ, स्वस्थ एवं टिकाऊ शहरों की दिशा में कार्य करने पर जोर दिया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय निकायों, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, राज्य सरकार, उद्योगों तथा आम नागरिकों के बीच समन्वय एवं सक्रिय सहभागिता इसके सफल क्रियान्वयन की आधारशिला होगी। राजस्थान में क्रियान्वयन की दिशा में उठाए गए कदम राजस्थान में नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अब तक की गई कार्यवाही के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि • राज्य स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया गया है। • 29 मई, 2026 को क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें शहरी स्थानीय निकायों, जिला प्रशासन एवं अन्य संबंधित विभागों के लगभग 600 प्रतिभागियों ने भाग लिया। • सभी शहरी स्थानीय निकायों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के केंद्रीकृत पोर्टल पर थोक अपशिष्ट उत्पादकों का अंतरिम पंजीकरण प्रारंभ किया गया है। • थोक उपभोक्ताओं एवं अपशिष्ट उत्पादकों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों के अनुरूप शर्तों के अनुपालन हेतु रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण के साथ भी समन्वय किया जा रहा है। अपशिष्ट से संसाधन’ की ओर बढ़ता राजस्थान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का प्रभावी क्रियान्वयन शहरी स्वच्छता को नई दिशा देने के साथ-साथ प्रदूषण में कमी, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में सहायक होगा। नए नियमों का मूल संदेश यही है कि कचरा केवल निस्तारण की वस्तु नहीं, बल्कि पुनर्चक्रण, पुनःउपयोग और संसाधन पुनर्प्राप्ति के माध्यम से आर्थिक एवं पर्यावरणीय मूल्य रखने वाला संसाधन है। राजस्थान में इन प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग, प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो, स्थानीय निकायों, उद्योगों और नागरिकों के समन्वित प्रयासों से स्वच्छ, स्वस्थ और अधिक टिकाऊ शहरी व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।  

खेजड़ी के उत्पादों से संरक्षण तक, MDSU में बनेगा खास रिसर्च सेंटर

अजमेर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में जल्द ही खेजड़ी के उत्पाद और उपयोगिता पर जानकारी और शोध की शुरुआत होगी। कैंपस में पर्यावरण विज्ञान विभाग लघु शोध केंद्र तैयार करने में जुटा है। इसमें शोधार्थी, शिक्षक और विद्यार्थी काम कर सकेंगे। खेजड़ी या शमी एक वृक्ष है, जो अजमेर सहित जोधपुर, बीकानेर, पाली, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, सीकर, झुंझुनूं और अन्य क्षेत्रों में पाया जाता है। इस वृक्ष की फलियों और पत्तियों में भरपूर मात्रा में विटामिन और प्रोटीन पाया जाता है। इसकी पत्तियां पशुओं के चारे और औषधीय उपयोग के लिए उपयोगी हैं। इसकी फलियों से सांगरी तैयार की जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस वृक्ष की आयु 5000 वर्ष मानी जाती है। रेगिस्तान में जब जानवरों के लिए धूप से बचने का कोई सहारा नहीं होता, तब यह पेड़ उन्हें छाया देता है। विश्वविद्यालय ने समझी उपयोगिता विश्वविद्यालय में महर्षि चरक भवन के पीछे खेजड़ी वाटिका विकसित की गई है। इसमें खेजड़ी के 100 पौधे लगाए गए हैं। ये पौधे काफी बड़े हो चुके हैं। जल्द ही विभाग खाली पड़ी अन्य जमीन पर खेजड़ी के पौधे लगाएगा। तैयार हो रहा लघु शोध केंद्र पर्यावरण विज्ञान विभाग में लघु शोध केंद्र तैयार हो रहा है। इसमें खेजड़ी से निर्मित गोंद, केर-सांगरी की सब्जी-आचार, खोखा (सूखा फल), मींझर (फूल) और अन्य उत्पाद रखे जाएंगे। खेजड़ी को बचाने के लिए अमृता देवी के योगदान और इसकी उपयोगिता से जुड़ी जानकारी भी यहां मिलेगी। प्रोजेक्टर लगाया जाएगा। भूगोल, बॉटनी, पर्यावरण विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी और अन्य विषयों के विद्यार्थी, शोधार्थी और शिक्षक यहां शोध कर सकेंगे। मियावाकी पद्धति का इस्तेमाल खेजड़ी को लगाने के लिए मियावाकी पद्धति का इस्तेमाल किया गया है। पौधरोपण की यह विधि छोटे क्षेत्रों में घने, देशी और आत्मनिर्भर जंगल विकसित करने में मदद करती है। इस विधि में पारंपरिक वनीकरण की तुलना में पौधे 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं। ये 30 गुना अधिक घने होते हैं। फैक्ट फाइल     1983 में घोषित किया गया राज्य वृक्ष     15 से ज्यादा जिलों में पाया जाता है खेजड़ी     5 हजार वर्ष मानी जाती है खेजड़ी की आयु     45 प्रतिशत से ज्यादा खेजड़ी वृक्ष खतरे में     1 लाख रुपए जुर्माना है खेजड़ी को काटने पर इनका कहना है… लघु शोध केंद्र तैयार हो रहा है। भविष्य में शोधार्थी, शिक्षक और विद्यार्थी रिसर्च कर सकेंगे। इससे खेजड़ी के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। -प्रो. प्रवीण माथुर, पूर्व पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष, एमडीएस विश्वविद्यालय

राजस्थान पंचायत चुनाव में बड़ा आरक्षण अपडेट, 1.30 लाख वार्ड पंच सीटों की तस्वीर साफ

जयपुर आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं। राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर गुरुवार को बड़ा अपडेट सामने आया। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। इसके साथ ही प्रदेशभर में हजारों गांवों की चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। उपखंड मुख्यालयों पर हुई लॉटरी में सरपंच के 14,403 और वार्ड पंच के 1,30,584 पदों के लिए आरक्षण तय किया गया। खास बात यह है कि प्रदेश में करीब 7,200 महिला सरपंच और करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच चुनी जाएंगी। सरपंच के 14 हजार से ज्यादा पदों का आरक्षण तय आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं। महिला आरक्षण के चलते बड़ी संख्या में गांवों की कमान इस बार महिलाओं के हाथ में जाएगी। करीब 7,200 पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। ऐसे में कई गांवों में लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे पुरुष दावेदारों की उम्मीदों पर भी आरक्षण लॉटरी ने असर डाला है। वार्ड पंचों में भी हजारों सीटें महिलाओं के लिए सरपंचों के साथ-साथ 1,30,584 वार्ड पंच पदों के लिए भी आरक्षण तय कर दिया गया है। इनमें 21,962 वार्ड SC, 19,117 वार्ड ST और करीब 15 हजार वार्ड OBC के लिए आरक्षित किए गए हैं। वहीं, कुल आरक्षण व्यवस्था के तहत करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच भी चुनी जाएंगी। यानी पंचायत चुनाव में इस बार महिलाओं की भागीदारी बड़े स्तर पर दिखाई देगी। 4 जिलों में बड़ा उलटफेर, सभी सरपंच सीट ST के लिए आरक्षण लॉटरी में सबसे ज्यादा चर्चा बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों की हो रही है। इन चार जिलों में सरपंच के सभी 1,253 पद ST वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक बांसवाड़ा में 327, डूंगरपुर में 442, प्रतापगढ़ में 277 और सलूंबर में 207 सरपंच पद हैं। इन सभी पदों पर ST वर्ग के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगे। इन जिलों में आरक्षण का सीधा असर उन दावेदारों पर पड़ेगा जो लंबे समय से सरपंच चुनाव की तैयारी कर रहे थे। अब टिकट और चुनावी रणनीति भी आरक्षण के हिसाब से तय होगी। बाड़मेर में दोबारा निकली लॉटरी, क्यों मचा विवाद? इधर बाड़मेर पंचायत समिति में सरपंच पदों की आरक्षण लॉटरी के दौरान विवाद खड़ा हो गया। लॉटरी में कपूरड़ी ग्राम पंचायत को SC वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया था। इस पर जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज कराई। आपत्ति करने वालों का कहना था कि ग्राम पंचायत में SC वर्ग की आबादी नहीं है। मामला सामने आने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने पूरी पंचायत समिति की आरक्षण लॉटरी दोबारा निकालने के आदेश दिए। इससे बाड़मेर की पंचायत समिति में कई सीटों का आरक्षण बदलने की संभावना बन गई है। अब चुनाव की तारीखों का इंतजार सरपंच और पंच के साथ-साथ प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के आरक्षण का पूरा ब्योरा राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार है। संभावना जताई जा रही है कि शनिवार या सोमवार तक राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की घोषणा कर सकता है। इसके बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह से चुनाव की अधिसूचना जारी होने और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी करनी है। ऐसे में आरक्षण लॉटरी के बाद अब राजस्थान के गांवों में चुनावी सरगर्मी तेज होना तय माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस गांव की कमान महिला के हाथ जाएगी और किस सीट पर कौन सा वर्ग मैदान में उतरेगा?

राजस्थान में 15 हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं की समीक्षा, 2029 तक पक्के घरों का लक्ष्य

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में राज उन्नति की 9वीं बैठक में करीब 15 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विकास कार्यों में तेजी लाने, समय पर स्वीकृति, निविदा और कार्यादेश जारी करने तथा योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांव, गरीब, युवा, नारी शक्ति और किसान विकास परियोजनाओं के केंद्र में हैं। अधिकारियों को फील्ड में जाकर योजनाओं की निगरानी करने और देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए। राज्य के सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए करीब 12,500 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। प्रदेश के सभी 41 जिलों के 65,308 राजकीय विद्यालयों का तकनीकी सर्वे पूरा हो चुका है। सर्वे में 3,587 जर्जर स्कूल भवनों और करीब 71,078 कक्षा-कक्षों के साथ बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं में सुधार की जरूरत सामने आई है। पिछले दो वर्षों में 3,364 कार्य स्वीकृत किए गए, जबकि 652 नए स्कूल भवनों को प्रशासनिक स्वीकृति देकर निविदा प्रक्रिया में लिया गया है। 2-अटल प्रगति पथों का काम नवंबर तक पूरा होगा 5 हजार से अधिक आबादी वाले ग्रामीण कस्बों में अटल प्रगति पथों के निर्माण की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक निर्माण विभाग को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश दिए। वर्ष 2025-26 के सभी शेष कार्य और 2026-27 के प्रथम चरण के प्रगतिरत कार्य नवंबर 2026 तक पूरे करने को कहा गया। दूसरे चरण के सभी निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होंगे। मुख्यमंत्री ने जिलेवार टाइमलाइन तय करने और गुणवत्ता की लगातार निगरानी के निर्देश दिए। इन सड़कों से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और जनसुविधाओं तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है। 3-पंचायत मुख्यालयों पर बनेंगे अटल ज्ञान केन्द्र ग्रामीण युवाओं और आमजन को अध्ययन तथा डिजिटल सेवाओं की सुविधा देने के लिए अटल ज्ञान केन्द्रों के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। पहले चरण में प्रदेश में 2,052 केन्द्र स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 628 केन्द्र पूरे हो चुके हैं। दूसरे चरण में 3 हजार अटल ज्ञान केन्द्र बनाए जाने हैं, जिनमें से 1 हजार की स्वीकृति जारी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने दूसरे चरण के 2 हजार केन्द्रों की स्थापना की स्वीकृति जल्द जारी करने को कहा। इन केन्द्रों में पुस्तकालय, ई-लाइब्रेरी, ई-मित्र, ऑनलाइन सेवाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा मिलेगी। 4-स्कूलों में दूध की आपूर्ति बाधित नहीं होगी पन्नाधाय बाल गोपाल योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के पोषण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्कूलों में नियमित रूप से दूध उपलब्ध कराने और दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्कूल शिक्षा विभाग को सभी जिलों में दूध पाउडर की शत-प्रतिशत आपूर्ति जल्द सुनिश्चित करने को कहा गया। स्कूल शिक्षा, गोपालन और वित्त विभाग को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए गए, ताकि आपूर्ति में किसी तरह का व्यवधान न आए। योजना के तहत प्रदेश में करीब 46 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है और इसके लिए करीब 800 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान है। 5-ग्रामीण रोजगार में 3.29 करोड़ मानव दिवस सृजित वीबी-जीरामजी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की प्रगति की मुख्यमंत्री ने समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक जरूरतमंद पात्र परिवार को आवश्यकतानुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाए और मजदूरी का भुगतान समय पर सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने जुलाई से अब तक 3 करोड़ 29 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित होने को योजना की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। ग्रामीण विकास विभाग को रोजगार और भुगतान की प्रक्रिया की निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए गए। सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की जरूरत रखने वाले पात्र परिवारों को समय पर काम मिले और भुगतान में देरी नहीं हो। 6-वर्ष 2029 तक सभी पात्र परिवारों को पक्का आवास प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2029 तक सभी पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लक्ष्य को टाइमलाइन के अनुसार पूरा करने के निर्देश दिए। दिसंबर 2026 तक सभी प्रगतिरत आवास पूरे कराने और लाभार्थियों को समय पर किस्तों का भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया। वर्ष 2026-27 के आवंटित लक्ष्यों की स्वीकृति भी जल्द जारी करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने वन भूमि में निवासरत भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर भूमि और आवास आवंटित करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र परिवारों को आवास सुविधा मिल सके। 7-ग्रामीण क्षेत्रों की शिकायतों का प्राथमिकता से होगा समाधान ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने लंबित परिवादों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। 1 जनवरी से 21 सितंबर 2026 तक ग्रामीण क्षेत्रों से कुल 8,97,808 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 8,68,425 का निस्तारण किया जा चुका है। केवल 3.27 प्रतिशत शिकायतें लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने पेयजल, जलभराव और सड़क से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने को कहा। जिन ग्राम पंचायतों में जनसेवा शिविर नहीं हुए हैं, वहां पंचायत समिति स्तर पर शिविर आयोजित कर शिकायतों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए। 8-भरतपुर, बीकानेर और अजमेर में बनेंगे RIT भरतपुर, बीकानेर और अजमेर के तीन इंजीनियरिंग कॉलेजों को अपग्रेड कर राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी RIT के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को इन संस्थानों की स्थापना के लिए विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए। इसके लिए विधि विभाग से शीघ्र सहमति लेने को कहा गया। इन तीनों RIT की स्थापना पर करीब 300 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में वित्त विभाग को आवश्यक वित्तीय स्वीकृति जारी करने के निर्देश भी दिए। 9-प्रदेश में 6 नए ट्रोमा सेंटरों के काम में तेजी राज्य में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए छह नए ट्रोमा सेंटरों के निर्माण की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कोलाना बांदीकुई और दलोत प्रतापगढ़ के ट्रोमा सेंटरों का काम 31 मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए। देसूरी पाली के ट्रोमा सेंटर को मार्च 2028 तक पूरा करने को कहा गया। RUHS जयपुर में ट्रोमा सेंटर के उन्नयन का काम मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। साण्डेराव पाली में … Read more

आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के भविष्य की पहली पाठशाला, दिया कुमारी ने बताया ‘लोकल हीरो’

जयपुर विकसित भारत जन सेवा अभियान के तहत शुक्रवार को वाटिका के सामुदायिक भवन में 'आंगन मिलन सेवा' कार्यक्रम का आयोजन उपमुख्यमंत्री तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रीदिया कुमारी के मुख्य आतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा सहयोगिनियों को माला पहनाकर, पौधा एवं माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रेषित पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और धात्री माताओं के बच्चों का अन्नप्राशन करवाया गया। अपने संबोधन में दिया कुमारी ने कहा कि आंगनबाड़ी सिर्फ एक केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य निर्माण की पहली पाठशाला है। आंगनबाड़ी बहनें हर बच्चे की मुस्कान और हर माँ के विश्वास की जिम्मेदारी पूर्ण मुस्तैदी से निभा रही हैं। यह सम्मान उस ममता, मेहनत और समर्पण का सम्मान है, जिससे नई पीढ़ी का भविष्य संवर रहा है। दिया कुमारी ने कहा कि आंगनबाड़ी में आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए परिवार और समाज को जोड़ने का प्रयास है। पोषण के क्षेत्र में निःस्वार्थ भाव से काम करने वाली कार्यकर्ता, सहायिका ही हमारे लोकल हीरो हैं। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आंगनबाड़ी बहनों के समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें पत्र प्रेषित किया है। पोषण ट्रैकर जैसी डिजिटल व्यवस्था से पोषण की निगरानी अधिक प्रभावी हुई है, जिसकी G20, UNICEF, WHO तक में सराहना हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ और अपग्रेड किया जा रहा है, नए केंद्र बनाए जा रहे हैं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों के पोषण में सुधार और उनका उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करना है। उन्होंने आह्वान किया कि हर स्वस्थ बच्चा हमारी जिम्मेदारी है, हम सभी हर बच्चे को सही पोषण, स्नेह और संस्कार देने का संकल्प लें। आंगनबाड़ी केंद्र विकसित राजस्थान की नई कहानी लिखने का मंच बनेंगे। कार्यक्रम में निदेशक समेकित बाल विकास सेवाएं वासुदेव मालावत,  जनप्रतिनिधियों, संस्था प्रधानों, महिला मोर्चा की सदस्यों, राजीविका समूहों तथा बड़ी संख्या में लाभार्थी माताओं और बच्चों ने भाग लिया।