samacharsecretary.com

दुर्लभ बीमारी से जंग जीतकर बच्चा बचा, डॉक्टरों ने रचा चमत्कार

जयपुर जयपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो चिकित्सा विज्ञान की ताकत के साथ-साथ उम्मीद और इंसानियत की मिसाल भी बन गई है। जहां एक तरफ दुर्लभ बीमारी ने एक परिवार के दो मासूमों की जिंदगी छीन ली, वहीं तीसरे बच्चे को महज 56 रुपए के इलाज ने नया जीवन दे दिया। यह चमत्कार हुआ जयपुर के जेके लोन अस्पताल में, जहां डॉक्टरों की सूझबूझ और समय पर सही पहचान ने मौत को मात दे दी। जब हर सांस बन गई थी जंग 10 मार्च का दिन… एक पिता अपनी गोद में नन्हीं सी जिंदगी लेकर अस्पताल की दहलीज पर पहुंचा। बच्चे की हालत बेहद नाजुक थी। जन्म के कुछ ही दिनों बाद संक्रमण ने उसे जकड़ लिया था। परिवार पहले भी यही दर्द झेल चुका था—दो बच्चों को इसी रहस्यमयी बीमारी ने 40 और 55 दिनों में छीन लिया था। इस बार डर और उम्मीद दोनों साथ थे। प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद आखिरकार परिवार जेके लोन हॉस्पिटल पहुंचा। यहां से शुरू हुई एक ऐसी जंग, जिसमें हर मिनट कीमती था। जब शरीर ने खून बनाना छोड़ दिया डॉक्टरों ने जांच की तो चौंकाने वाला सच सामने आया। बच्चे का ‘एब्सोल्यूट न्यूट्रोफिल काउंट’ (ANC) महज 82 था। मेडिकल साइंस के अनुसार, अगर यह 500 से नीचे चला जाए तो संक्रमण से बचना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इतना ही नहीं, बच्चे का बोनमैरो भी काम करना बंद कर चुका था। यानी शरीर खून नहीं बना पा रहा था और इम्यून सिस्टम लगभग फेल हो चुका था। स्थिति ऐसी थी कि हर पल मौत का खतरा मंडरा रहा था। दुर्लभ बीमारी का खुलासा मेडिकल जेनेटिक्स विभाग के डॉक्टरों ने जब गहराई से जांच की, तो पता चला कि बच्चा ‘ट्रांसकोबालामिन-2 डिफिशिएंसी’ नाम की बेहद दुर्लभ जेनेटिक बीमारी से जूझ रहा है। यह बीमारी इतनी रेयर है कि दुनिया भर में इसके सिर्फ 60 केस ही अब तक सामने आए हैं। इस बीमारी में शरीर विटामिन B12 को कोशिकाओं तक नहीं पहुंचा पाता, जिससे खून बनना बंद हो जाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। समय पर इलाज न मिले तो यह सीधे मौत की ओर ले जाती है। 14 रुपए का इंजेक्शन बना जिंदगी का सहारा अब कहानी में आता है सबसे बड़ा मोड़। डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए हाइड्रॉक्सीकॉबालामिन इंजेक्शन का प्रोटोकॉल शुरू किया। एक इंजेक्शन की कीमत—सिर्फ 14 रुपए! हफ्ते में एक बार लगने वाले इस इंजेक्शन के चार डोज दिए गए। कुल खर्च—महज 56 रुपए। लेकिन असर? चमत्कार से कम नहीं। कुछ ही दिनों में बच्चे का ANC लेवल 82 से बढ़कर 6000 के पार पहुंच गया। बोनमैरो ने फिर से काम करना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे मासूम मौत के मुंह से बाहर निकल आया। परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बच्चे के पिता की आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बार दर्द के नहीं, राहत के। उन्होंने कहा, “हमारे लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। पहले दो बच्चों को हमने यूं ही खो दिया, हमें समझ ही नहीं आया कि बीमारी क्या है। इस बार डॉक्टरों ने हमारे बच्चे को नई जिंदगी दे दी।” डॉक्टरों की टीम बनी फरिश्ता डॉक्टरों का कहना है कि सही समय पर जेनेटिक पहचान और तुरंत शुरू किया गया इलाज ही बच्चे की जिंदगी बचा सका। अगर थोड़ी भी देरी होती, तो परिणाम पहले जैसा ही हो सकता था। उम्मीद का संदेश यह कहानी सिर्फ एक बच्चे की नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद है, जो दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे हैं। यह बताती है कि सही समय पर सही जांच और इलाज हो, तो लाखों का खर्च नहीं, बल्कि 56 रुपए भी जिंदगी बचा सकते हैं। जयपुर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया—जब डॉक्टर ठान लें, तो किस्मत भी हार मान जाती है।

जापानी इंसेफेलाइटिस निगेटिव, पुणे लैब रिपोर्ट का इंतजार जारी

सलूंबर सलूंबर जिले में 8 दिन के भीतर 8 बच्चों की मौत की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है. घाटा और झल्लारा में कुछ दिनों के भीतर बच्चों की मौत का रहस्य बरकरार है. फिलहाल, इस बारे में वजह का खुलासा नहीं हुआ है. खास बात यह है कि कुछ मरीजों के सैंपल पुणे स्थित नेशनल वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट में भी भेजे गए थे. उसके बाद वायरस के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल पाएगी. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में अब तक जो बात सामने आई, उसके तथ्यों का विश्लेषण करते हुए NDTV ने विशेषज्ञ चिकित्सक और स्थानीय डॉक्टरों से बातचीत की. इस दौरान कुछ संभावनाओं की बात सामने आई, जो मौत की वजह हो सकती है. इस रिपोर्ट में बात इन्हीं संभावनाओं पर… हॉस्पिटल की जांच रिपोर्ट में ये बातें आई सामने इसमें जापानी इंसेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis) और चांदीपुरा वायरस (Chandipura virus) की आशंका जताई जा रही थी. स्वास्थ्य विभाग द्वारा 20 बच्चों के सैंपल की जांच कराई गई थी. उदयपुर स्थित एमबी हॉस्पिटल के अधीक्षक आरएल सुमन ने बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस की रिपोर्ट निगेटिव आई है. जबकि अन्य वायरस का पता लगाने के लिए सैंपल पुणे भेजे गए थे. फिलहाल यह रिपोर्ट स्वास्थ्य घाटा गांव और आसपास के इलाकों में 1 से 5 अप्रैल के बीच बच्चों की मौत हुई थी. इन बच्चों में बुखार, दौरे और इंसेफेलाइटिस जैसे लक्षण दिखे थे. डॉ. आरएल सुमन के मुताबिक, "झल्लारा गांव के 3 बच्चे हॉस्पिटल में रेफर हुए थे, उनमें से एक को मलेरिया था, उपचार करने के बाद दो दिन पहले डिस्चार्ज दे दिया था. इनके अलावा बाकी की रिपोर्ट में कोई गंभीर बात सामने नहीं आई थी." रैपिड रिस्पॉन्स टीम को क्या लक्षण मिले?     शाम या रात में हल्की उल्टी और दस्त शुरू होते थे.     उसके बाद अचानक शरीर में अकड़न (stiffness) आती थी.     बच्चा बेहोश हो जाता था और फिर होश नहीं आता था.     मौत 24 से 48 घंटे के अंदर हो जाती थी.     ज्यादातर मामलों में बुखार की हिस्ट्री नहीं मिली. क्या कहते हैं एक्सपर्ट? बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) डॉ. लाखन पोसवाल (एक्सपर्ट) से खास बातचीत में स्वास्थ्य विभाग की स्क्रीनिंग में मिले लक्षणों से जुड़े सवाल-जवाब किए. उन्होंने कहा कि बीमारी का स्पष्ट बता पाना संभव नहीं है. लेकिन, आदिवासी अंचल में मलेरिया, ब्रुसेलोसिस और वायरल एन्सेफलाइटिस (दिमागी बुखार/वायरल इनफेक्शन) का प्रकोप हमेशा से रहा है. स्पष्ट तौर पर इसकी पहचान के लिए पुणे लैब की रिपोर्ट का इंतजार करना होगा. उन्होंने बताया कि बीमार होने के बाद जिस तरह से कम ही समय में बच्चों की मौत हुई, उससे ब्रुसेलोसिस की संभावना काफी कम है. क्योंकि यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करती है. इससे इतनी तेजी (24-48 घंटे) में मौत होना काफी मुश्किल है. इसलिए इसकी संभावना कम मानी जा रही है.     डॉ. पोसवाल के मुताबिक, "पहली संभावना है कि मलेरिया (खासकर सेरेब्रल मलेरिया) का दिमाग पर सीधा असर हुआ हो. इलाके में पहले से प्रचलित बीमारियों को देखते हुए मलेरिया सबसे ज्यादा संभावित लगता है. दूसरी संभावना है कि वायरल एन्सेफलाइटिस (दिमागी बुखार/वायरल इनफेक्शन) की वजह से मौत हुई हो." साथ ही ध्यान देने वाली बात यह है कि मलेरिया में कई बार एंटीजन टेस्ट किट निगेटिव आ सकता है, भले ही संक्रमण हो (फॉल्स नेगेटिव). इसलिए नेगेटिव रिपोर्ट आने के बावजूद मलेरिया को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता. जनजाति क्षेत्र में चुनौतियां भी कम नहीं लेकिन, इस तरह मौतों का मामला जनजाति अंचल में कोई नई बात नहीं है. बीते कुछ सालों का पैटर्न एक जैसा ही है, जनजाति क्षेत्र में ऐसी बीमारी का मामला सामने आता है और फिर वो एक नए वायरस की बात का खुलासा होता है. जुलाई 2024 में उदयपुर में चांदीपुरा वायरस (CHPV) के मामलों ने चिंता बढ़ा दी थी. खास तौर पर गुजरात की सीमा से लगे आदिवासी क्षेत्रों (खेरवाड़ा, नयागांव) में 15 साल से कम उम्र के बच्चों में इसके लक्षण देखे गए. यह वायरस बुखार, उल्टी और मतिभ्रम (altered sensorium) का कारण बनता है. हालांकि, उस दौरान मृत बच्चे सहित 3 बच्चों के पुणे भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट निगेटिव आई थी. साक्षरता की कमी, स्वास्थ्य देखभाल और पोषण के बारे में सीमित जानकारी और खराब आहार जैसी तमाम वजह भी इस क्षेत्र में बड़ी चुनौतियां हैं. यही वजह है कि कई ग्रामीण बीमारी को मानने से इनकार कर रहे हैं. जांच के लिए पहुंची चिकित्सा टीमों को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा.  

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा, मुख्यमंत्री ने महिलाओं की भूमिका को बताया अहम

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के लोकसभा में पारित होने से पहले प्रदेश की महिलाओं से सीधा संवाद किया. मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में उद्योग, शिक्षा, पुलिस, सामाजिक संगठनों और लघु उद्योग से जुड़ी बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया यह अधिनियम एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय है. इससे लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण मिलेगा. इससे नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और वे देश के विकास में और अधिक सशक्त भूमिका निभा सकेंगी. "कुछ लोगों को डर हो सकता है कि…" मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि कुछ लोगों को यह डर हो सकता है कि यदि महिलाएं राजनीति में आगे आ गईं तो क्या होगा. लेकिन महिलाएं प्रशासन और व्यवस्था को और बेहतर तरीके से चला सकती हैं. जब वे घर का संचालन कुशलता से कर सकती हैं, तो राष्ट्र का संचालन भी उतनी ही क्षमता से कर सकती हैं. योजनाओं से महिला सशक्तिकरण को मिली मजबूती मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं को केंद्र और राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, उज्ज्वला योजना, जन-धन योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं का जिक्र किया. राज्य सरकार की ओर से लाडो प्रोत्साहन योजना, मा वाउचर योजना, मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना और दुग्ध उत्पादक संबल योजना जैसी पहलों से महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है.      लखपति दीदी योजना पर कही ये खास बात मुख्यमंत्री ने ‘लखपति दीदी' योजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान में 16 लाख से अधिक महिलाएं लखपति बन चुकी हैं. उन्होंने बताया कि बैंक अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि इन महिलाओं का कोई भी खाता एनपीए नहीं है, यानी उन्होंने समय पर ऋण का भुगतान किया है. यह दर्शाता है कि महिलाएं देश की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं. महिलाओं की बढ़ती भूमिका मुख्यमंत्री ने कहा कि आज महिलाएं खेल, रक्षा, विज्ञान, शिक्षा, उद्यम और कला समेत हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं. उन्होंने अपने निजी अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि आज जिस हेलीकॉप्टर से वे यात्रा करते हैं, उसकी पायलट भी एक महिला है. जब वह महिला पायलट हेलीकॉप्टर उड़ाती है तो उन्हें गर्व, सुकून और विश्वास का अनुभव होता है.

जयपुर-बीकानेर में सुरक्षा अलर्ट, विधानसभा और न्यायालयों की हुई सघन तलाशी

जयपुर राजस्थान में पिछले कुछ समय से सरकारी संस्थानों और न्यायिक परिसरों को निशाना बनाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार सुबह प्रदेश की 'लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत' यानी राजस्थान विधानसभा और जयपुर-बीकानेर के जिला व सत्र न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से पूरे राज्य में हड़कंप मच गया। सुरक्षा एजेंसियां घंटों तक हलकान रहीं, हालांकि सघन तलाशी के बाद कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला विधानसभा को RDX से उड़ाने की धमकी दहशत की शुरुआत सोमवार सुबह उस वक्त हुई जब जयपुर स्थित विधानसभा सचिवालय के आधिकारिक ईमेल पर एक संदेश प्राप्त हुआ। इस ईमेल में दावा किया गया कि अगले 3 घंटे में विधानसभा भवन को आरडीएक्स से उड़ा दिया जाएगा। इस सूचना के बाद परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया और आनन-फानन में कर्मचारियों को भवन से बाहर निकाला गया। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड ने चप्पे-चप्पे को खंगाला, लेकिन राहत की बात यह रही कि कोई विस्फोटक नहीं मिला। जयपुर सेशन कोर्ट: सुनवाई के बीच मची भगदड़ जयपुर जिला एवं सत्र न्यायालय को भी उनके ऑफिशियल आईडी पर इसी तरह का धमकी भरा मेल प्राप्त हुआ। गौरतलब है कि सोमवार से ही अदालतों का समय बदलकर सुबह 7:30 से दोपहर 1:00 बजे तक का हुआ है। ऐसे में जिस वक्त धमकी मिली, कोर्ट परिसर अधिवक्ताओं और परिवादियों से खचाखच भरा हुआ था। पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और पूरे परिसर को खाली कराया। भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने घंटों तक सर्च ऑपरेशन चलाया। सर्च के दौरान हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया, जिससे न्यायिक कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा। बीकानेर में फिर लौटी दहशत राजधानी के साथ-साथ बीकानेर के जिला एवं सत्र न्यायालय को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली। बीकानेर में यह सूचना मिलते ही न्यायिक और प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की सूचना पर बार एसोसिएशन ने तत्काल अलर्ट जारी किया। यहां भी सुरक्षा एजेंसियों ने एडवोकेट चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के कक्ष और कोर्ट रूम की बारीकी से जांच की। कई घंटों की मशक्कत के बाद जब कुछ नहीं मिला, तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली। जांच के घेरे में 'डिजिटल टेरर' सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ये सभी धमकियां ईमेल के जरिए भेजी गई थीं। पुलिस अब साइबर सेल की मदद से इन ईमेल्स के आईपी एड्रेस को ट्रेस करने में जुटी है। प्राथमिक तौर पर इसे शरारत माना जा रहा है, लेकिन बार-बार महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को इस तरह निशाना बनाए जाने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

नसीराबाद हाईवे पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, लाखों की अवैध खेप जब्त

अजमेर अजमेर जिले के श्रीनगर थाना पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है. पुलिस ने नशा तस्करों पर शिकंजा कसते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया. नसीराबाद हाईवे पर नाकाबंदी के दौरान एक संदिग्ध कार को रोका गया. तलाशी में कार से 120 किलो 415 ग्राम अवैध डोडा पोस्त बरामद हुआ, जिसे मौके पर जब्त कर लिया गया. पुलिस ने कार में सवार पंजाब निवासी तीन तस्करों को गिरफ्तार कर लिया है. इतनी बड़ी मात्रा में नशे की खेप मिलने के बाद अब नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है. पुलिस कड़ी से कड़ी जोड़ने में लगी हुई है. प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह खेप नसीराबाद से किशनगढ़ की ओर ले जाई जा रही थी. जब्त मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब आठ लाख रुपये बताई जा रही है. आरोपियों से पूछताछ जारी इस कार्रवाई का नेतृत्व श्रीनगर थाना प्रभारी पारुल यादव ने किया. पुलिस टीम पूरे समय सतर्क रही और किसी भी तरह की चूक नहीं होने दी. गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और बड़े गिरोह का खुलासा किया जा सके. नशे के खिलाफ अभियान जारी पुलिस अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र में नशे के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसी अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस सफलता को इलाके में मादक पदार्थों के खिलाफ बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

JJM घोटाले में सुबोध अग्रवाल से ACB की पूछताछ जारी, कोर्ट में रिमांड पर बहस तेज

अजमेर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को आज जेजेएम घोटाले के मामले में फिर से कोर्ट में पेश किया गया, जिसमें एसीबी ने उन्हें 960 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के लिए गिरफ्तार किया है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एसीबी की 5 दिन की रिमांड की मांग पर 3 दिन का रिमांड दिया था. बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए जाने का हवाला देकर इसका विरोध किया था. इस दौरान एसीबी ने करीब 125 सवाल तैयार किए थे, जिन्हें सुबोध अग्रवाल से पूछा गया. सुधांश पंत क‍ा ल‍िया नाम कोर्ट के बाहर मीडिया के सवालों पर सुबोध अग्रवाल ने कहा, "मैंने पूछताछ में पूरा सहयोग किया है, जो भी सवाल मुझसे पूछे गए, मैंने बता दिए. फाइनेंस कमेटी के 37 प्रकरणों में से 4 मेरे हैं, बाकी 33 सुधांश पंत के समय के हैं, जिसमें 600 करोड़ का मामला है. मैंने एसीबी से बार-बार कहा कि जिसमें पैसा नहीं दिया गया उसका नाम ले रहे हो, उसकी जांच कर रहे हैं, जिसमें पैसा देकर गबन हुआ, उसकी जांच नहीं कर रहे." ACB ने 3 दिन की रिमांड मांगी आज एसीबी ने फिर से 3 दिन की रिमांड मांगी. इसका विरोध करते हुए अग्रवाल के वकील ने कहा कि उन्हें रिमांड प्रार्थना पत्र की कॉपी नहीं दी गई, जो कानूनन आरोपी के वकील को दी जानी चाहिए, ताकि बचाव किया जा सके. एसीबी के वकील ने जवाब दिया कि यह केस डायरी का हिस्सा है, इसलिए नहीं दे सकते. कोर्ट ने एसीबी को अपनी बात का समर्थन करने के लिए आदेश या कानूनी प्रावधान पेश करने के लिए 15 मिनट का समय दिया है.

कालिका पेट्रोलिंग यूनिट की बड़ी कार्रवाई, हजारों महिलाओं को किया गया जागरूक

जयपुर  राजस्थान की राजधानी जयपुर में महिलाओं के साथ बढ़ती छेड़छाड़ और छींटाकशी की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है. कालिका पेट्रोलिंग यूनिट ने शनिवार को अभियान चलाकर 23 मनचलों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की. इन सभी आरोपियों को शहर के अलग अलग थानों में गिरफ्तार करवाया गया. स्कूल और कॉलोनियों में चलाया जागरूकता अभियान केवल कार्रवाई ही नहीं बल्कि कालिका टीम ने शहर के स्कूल कॉलेज और कॉलोनियों में जाकर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए. इस दौरान छात्राओं और महिलाओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा कानूनों के बारे में विस्तार से बताया गया. हजारों महिलाओं को किया जागरूक टीम ने सार्वजनिक परिवहन जैसे लो फ्लोर बस सिटी बस मिनी बस और अन्य वाहनों में यात्रा कर रही 4,118 महिलाओं को सुरक्षा के प्रति जागरूक किया. साथ ही उन्हें बताया गया कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत पुलिस से कैसे संपर्क करें. गर्ल्स स्कूल और कॉलेज में 1,185 छात्र छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया गया. इससे छात्राएं खुद को सुरक्षित रखने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हो सकेंगी. राजकॉप ऐप से भी मिलेगी मदद लगभग 989 महिलाओं और बालिकाओं को राजकॉप सिटीजन ऐप के Need Help फीचर के बारे में जानकारी दी गई और मौके पर ही डाउनलोड भी करवाया गया. इससे महिलाएं जरूरत पड़ने पर तुरंत पुलिस सहायता ले सकेंगी. ये 5 नंबर जरूर सेव करें अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त रानू शर्मा ने बताया कि महिलाएं अपने मोबाइल में निर्भया हेल्पलाइन के पांच नंबर जरूर सेव करें: 8764866090 8764866091 8764866092 8764866093 8764866094 इन नंबरों पर किसी भी परेशानी में कॉल या मैसेज के साथ ऑडियो वीडियो और रिकॉर्डिंग भेजकर तुरंत मदद ली जा सकती है. यह सेवा 24 घंटे सक्रिय रहती है.

स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से बदलेगा जयपुर, ई-चालान और रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी आसान

जयपुर जयपुर में ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर बनाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इससे शहर में रोड सेफ्टी को भी सुधारा जाएगा। इस कंट्रोल सेंटर का मुख्य उद्देश्य रियल-टाइम में शहर के ट्रैफिक की निगरानी करना और उसे सुव्यवस्थित बनाना है। गुरुवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस संबंध में एक रिव्यू मीटिंग भी ली। इस प्रोजेक्ट के लिए जयपुर ट्रैफिक पुलिस, जयपुर नगर निगम और जयपुर विकास प्राधिकरण एकसाथ मिलकर काम कर रहे हैं। योजना का ब्लू प्रिंट बनाने के लिए डिप्टी कमीशनर ऑफ पुलिस (ट्रैफिक) की अध्यक्षता में एक टीम गठित की गई है। सेंटर बनाने के लिए जमीन की जरूरत AI आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर बनाने के लिए जमीन की जरूरत है और सरकार ने जयपुर विकास प्राधिकरण को जयपुर आयुक्त कार्यालय को जमीन आवंटित करने का निर्देश दिया है, लेकिन अभी तक इसका सीमांकन नहीं हो सका है। नियम तोड़ने वालों की पहचान कर ई-चालान अधिकारियों के मुताबिक AI आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर मौजूदा अभय कमांड सेंटर से ज्यादा एडवांस होगा। यह नियम तोड़ने वालों की पहचान आसानी से कर सकेगा और ऐसे वाहन चालकों को ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) टेक्नॉलजी के जरिए ई-चालान भेजेगा। निगरानी बेहतर होगी AI आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर के जरिए निगरानी बेहतर होगी, पुलिस अधिकारी मौके पर तुरंत पहुंच सकेंगे जिससे ट्रैफिक जाम और रोड सेफ्टी में सुधार होगा। उम्मीद है कि नए कंट्रोल सेंटर से शहर के कुछ सबसे व्यस्त कॉरिडोर जैसे महल रोड, सीकर रोड और न्यू सांगानेर रोड को में ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात मिलेगी।

राजस्थान में ओलावृष्टि से तबाही, ई-गिरदावरी ऐप से नुकसान दर्ज करने की सुविधा

जयपुर राजस्थान में बीते दिनों बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और किसानों को मुआवजा देने की तैयारी की जा रही है। राजस्थान के नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने शनिवार को यह जानकारी दी। खर्रा के मुताबिक फसलों को हुए नुकसान के लिए गिरदावरी की प्रक्रिया जारी है और किसान खुद भी मोबाइल एप (ई-गिरदावरी) के जरिए अपनी-अपनी फसलों को हुए नुकसान की डिटेल को अपलोड कर सकते हैं। उन्होंने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि ‘फसल के नुकसान का आकलन दो तरीके से किया जा रहा है।सरकारी स्तर पर गिरदावरी की जा रही है, और किसान मोबाइल एप का इस्तेमाल करके अपने खेतों से नुकसान की डिटेल भी अपलोड कर सकते हैं।’ कांग्रेस पर भी कसा तंज वहीं पिछली कांग्रेस सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने आगे कहा, ‘एक समय था जब मुआवजा तभी दिया जाता था जब नुकसान 50% से ज्यादा हो। अब, किसान 33% नुकसान पर भी इसके पात्र हैं, और मुआवजे की राशि में भी बढ़ोतरी की गई है।’ कई जिलों में लगातार बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान आपको बता दें कि मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के चलते प्रदेश के कई जिलों में लगातार बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। विशेषकर खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसी आशंका जताई गई है कि इस दौरान गेहूं, सरसों और चना जैसी फसलों को भी खासा नुकसान पहुंचा है। बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया था। मुख्यमंत्री ने किया है उचित मदद का वादा बीते महीने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सभी जिला क्लेक्टर को बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे करवाने और रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। सीएम ने इस दौरान कहा कि किसानों का दर्द उनकी सरकार का ही दर्द है। उन्होंने कहा है कि सभी पीड़ित किसानों को उचित मदद दी जाएगी।  

युद्ध का पर्यटन पर असर: शाही ट्रेन पैलेस ऑन व्हील्स में सिर्फ 30 यात्री पहुंचे जैसलमेर

जैसलमेर ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले और फिर मिडिल ईस्ट में युद्ध का असर राजस्थान पर भी पड़ रहा है. दुनिया की सबसे आलीशान ट्रेनों में शुमार ‘पैलेस ऑन व्हील्स' के लिए इस पर्यटन सीजन निराशाजनक रहा. वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध और तनावपूर्ण हालात का सीधा असर इस शाही ट्रेन के यात्री भार पर पड़ा है.  इस सीजन के अंतिम फेरे पर पैलेस ऑन व्हील्स मात्र 30 यात्रियों को लेकर जैसलमेर पहुंची. इसके चलते अब पर्यटन इंडस्ट्री से जुड़े व्यवसायी काफी निराश हैं. आशंका है कि टूरिज्म इंडस्ट्री को इससे भारी नुकसान हो सकता है. स्टेशन पर ढोल-नगाड़ों से ट्रेन का स्वागत जैसलमेर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का भव्य स्वागत किया गया. ढोल-नगाड़ों की गूंज, लोकसंगीत और पारंपरिक नृत्य के बीच विदेशी सैलानियों का गर्मजोशी से अभिनंदन हुआ. यात्रियों ने मिडल ईस्ट में चल रहे तनाव को यात्री भार कम होने का बड़ा कारण बताया और विश्व शांति की प्रार्थना की. मिडल ईस्ट में युद्ध के अलावा पहले भी रूस-यूक्रेन युद्ध और हमास-इजरायल तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या घटी थी. पहले ट्रेन में 70-80 प्रतिशत तक ऑक्यूपेंसी रहती थी, लेकिन इस बार अंतिम फेरे में केवल 26 प्रतिशत यात्री ही सवार थे. 32 में से 10 फेरे रद्द इस सीजन में कुल 32 फेरों में से 10 फेरे रद्द करने पड़े. जैसलमेर रेलवे स्टेशन अधीक्षक पंकज कुमार झा ने बताया कि कोरोना काल के बाद पर्यटन उद्योग पर बुरा प्रभाव पड़ा. हाल ही में ईरान-इजराइल युद्ध के कारण विदेशी पर्यटकों की आवक घटी, जिससे कई फेरे रद्द करने पड़े. अभी तक लगभग 10 फेरे ही पूरे हो पाए हैं. लोक कलाकारों की आजीविका पर भी संकट ट्रेन का 1982 में शुरू होना और 2023 में निजीकरण के बाद आधुनिक सुविधाओं से लैस होना भी अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने में पूरी तरह सफल नहीं हो सका. अत्यधिक किराया और वैश्विक अस्थिरता दोनों ही बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं. इस शाही ट्रेन के यात्री भार में कमी से राजस्थान पर्यटन को बड़ा झटका लगा है. लोक कलाकारों की रोजी-रोटी भी प्रभावित हुई है. जैसलमेर में कालबेलिया नृत्य करने वाले कलाकार बक्स खान ने कहा कि पर्यटक कम होने से उनके कार्यक्रम घट गए हैं और आजीविका पर असर पड़ा है.