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ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत, बाड़मेर रिफाइनरी के लोकार्पण की तारीख हुई तय

बाड़मेर  एक तरफ जहां वैश्विक स्तर पर ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण कच्चे तेल की सप्लाई और रिफाइनरियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, वहीं राजस्थान अपने औद्योगिक इतिहास का सबसे सुनहरा पन्ना लिखने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 21 अप्रैल को बाड़मेर के पचपदरा में स्थित राजस्थान रिफाइनरी का लोकार्पण करेंगे। दुबई की तर्ज पर यहां क्रूड ऑयल स्टोरेज और रिफाइनिंग की क्षमता इसे उत्तर भारत का 'एनर्जी गेटवे' बना देगी। जब यहां उत्पादित पेट्रोल-डीजल और गैस राजस्थान के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक सप्लाई होगी, तो राजस्व का बड़ा हिस्सा बाड़मेर और आसपास के विकास पर खर्च होगा। 72 हजार करोड़ रुपये की लागत से बना प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस ऐतिहासिक घड़ी की पुष्टि करते हुए बताया कि पीएम मोदी 21 अप्रैल को इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। 72 हजार करोड़ रुपये की लागत से बना यह प्रोजेक्ट न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे उत्तर भारत के औद्योगिक परिदृश्य को बदलकर रख देगा। बाड़मेर-जैसलमेर में बनेगा 'इंडस्ट्रियल क्लस्टर' पचपदरा रिफाइनरी महज एक तेल शोधन इकाई नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी राजस्थान के लिए आर्थिक इंजन साबित होगी। सीएम ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के चालू होने से बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में एक विशाल इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होगा।     सहायक उद्योग: पेट्रोकेमिकल्स पर आधारित सैकड़ों सहायक उद्योगों के लिए रास्ते खुलेंगे।     इंफ्रास्ट्रक्चर: क्षेत्र में सड़कों, लॉजिस्टिक्स हब और बिजली के बुनियादी ढांचे में भारी निवेश होगा।     रोजगार: स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे। वैश्विक युद्ध के बीच भारत की 'ऊर्जा सुरक्षा' दिलचस्प बात यह है कि यह लोकार्पण ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया युद्ध की आग में झुलस रहा है और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार अस्थिर है। ऐसे में पचपदरा रिफाइनरी का शुरू होना भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह रिफाइनरी उच्च गुणवत्ता वाले BS-VI मानक के ईंधन का उत्पादन करेगी, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी। प्रोजेक्ट की खासियतें लागत: ₹72,000 करोड़ से अधिक। क्षमता: 9 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA)। साझेदारी: यह HPCL और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है। उत्पाद: पेट्रोल-डीजल के अलावा पेट्रोकेमिकल उत्पादों जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीथीन का भी उत्पादन होगा। पीएम मोदी का पिछला राजस्थान दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा बेहद खास है। इससे पहले पीएम मोदी इसी साल 28 फरवरी को राजस्थान के अजमेर आए थे। अजमेर के कायड़ विश्रामस्थली में उन्होंने एक बड़ी सभा को संबोधित किया था, जहां उन्होंने प्रदेश के विकास और डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों को गिनाया था। अब करीब दो महीने के भीतर ही वे पचपदरा रिफाइनरी के रूप में राजस्थान को एक बड़ी सौगात देने दोबारा मरूधरा की धरती पर कदम रखेंगे।  

सरिस्का टाइगर रिजर्व, बाघों की सुरक्षा के लिए बनेगा नया STR-2 प्रभाग और बढ़ेगा दायरा

जयपुर  राजस्थान की राजधानी जयपुर और इसके आसपास के जंगलों की तस्वीर अब बदलने वाली है। वन्यजीवों की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने और प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाने के लिए वन विभाग ने एक व्यापक पुनर्गठन योजना तैयार की है। इस मास्टरप्लान के तहत जयपुर के मशहूर वन्यजीव पर्यटन स्थलों को मिलाकर एक स्वतंत्र वन प्रभाग बनाने का प्रस्ताव है, जिससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि लेपर्ड और अन्य वन्यजीवों की निगरानी भी अधिक विशेषज्ञता के साथ हो सकेगी। झालाना और नाहरगढ़ का नया 'प्रशासनिक अवतार' प्रस्ताव के अनुसार, जयपुर के गौरव झालाना लेपर्ड रिजर्व, नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य और हाथी गांव को एक साथ जोड़कर एक स्वतंत्र वन प्रभाग बनाया जाएगा। इस प्रभाग की कमान भारतीय वन सेवा के एक समर्पित अधिकारी के हाथों में होगी। 200 वर्ग किलोमीटर से अधिक फैले इस क्षेत्र में वन्यजीव प्रबंधन, रेस्क्यू ऑपरेशन और पर्यटन प्रशासन की जिम्मेदारी इसी प्रभाग की होगी। झालाना और हाथी गांव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन के नक्शे पर आ चुके हैं। एक अलग प्रभाग होने से यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और लेपर्ड के आवास की सुरक्षा अधिक वैज्ञानिक तरीके से हो पाएगी। सरिस्का टाइगर रिजर्व का होगा विस्तार एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव सरिस्का टाइगर रिजर्व को लेकर है। बाघों की बढ़ती संख्या और उनके मूवमेंट को देखते हुए बीलवाड़ी, विराट नगर, थानागाजी और अजबगढ़ के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक नया STR-2 प्रभाग बनाने की तैयारी है। अधिकारियों के मुताबिक, सरिस्का के बाघ अक्सर इन क्षेत्रों में निकल आते हैं। इन्हें एक समर्पित यूनिट के तहत लाने से बाघों की ट्रैकिंग आसान होगी और यह क्षेत्र सरिस्का के लिए एक मजबूत 'बफर जोन' का काम करेगा। अवैध खनन पर लगेगी लगाम योजना के तहत दौसा, बांदीकुई, जमवारामगढ़ और रायसर रेंजों को जयपुर वन्यजीव प्रभाग से अलग कर एक नई प्रशासनिक इकाई बनाने का भी सुझाव है। इन क्षेत्रों में पहले अवैध खनन की शिकायतें आती रही हैं। नई इकाई बनने से वन विभाग की टीम अधिक केंद्रित होकर निगरानी कर सकेगी और त्वरित कार्रवाई संभव होगी। 12 से अधिक नई वन रेंज पुनर्गठन की इस लहर में नए प्रस्तावित जिलों में एक दर्जन से अधिक नई वन रेंज बनाने की भी परिकल्पना की गई है। प्रत्येक रेंज की जिम्मेदारी और कार्यक्षेत्र स्पष्ट रूप से परिभाषित होंगे। यह योजना काफी हद तक पूरी हो चुकी है और अब केवल औपचारिक सरकारी मंज़ूरी का इंतजार है।  

जयपुर मेट्रो, प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक बनेगा 41 KM लंबा कॉरिडोर और बनेंगे 36 नए स्टेशन

जयपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण (Phase-2) को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। जयपुर मेट्रों के दूसरे चरण में 13037.66 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह परियोजना उत्तर से दक्षिण जयपुर को आपस में जोड़ते हुए शहर की तस्वीर बदल देगी।जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण में प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर बनेगा। इस रूट पर कुल 36 स्टेशन बनाए जाएंगे, जो शहर के सबसे व्यस्त इलाकों को कवर करेंगे। इस परियोजना को केंद्र और राजस्थान सरकार के फिफटी-फिफटी भागीदारी वाले संयुक्त उद्यम के रूप में राजस्थान मेट्रो रेल निगम लिमिटेड (RMRCL) पूरा करेगी। जयपुर मेट्रो फेज-2 : इन इलाकों को कवर करेगा कैबिनेट के एक बयान के अनुसार, जयपुर मेट्रो फेज-2 में मेट्रो प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक दौड़ेगी। फेज-2 में बनने वाला कॉरिडोर सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र, वीकेआईए, जयपुर हवाई अड्डा, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल और स्टेडियम, अंबाबारी और विद्याधर नगर जैसे व्यस्त इलाकों को जोड़ेगा। यहां 36 स्टेशन बनेंगे। इसमें एयरपोर्ट के क्षेत्र में अंडरग्राउंड स्टेशन भी शामिल हैं। यहां इंटरचेंज की भी सुविधा होगी। इसे पहले से चल रहे फेज-1 मेट्रो से जोड़ा जाएगा। इससे पूरे शहर में एक एकीकृत और निरंतर मेट्रो नेटवर्क सुनिश्चित होगा। जयपुर मेट्रो पहले फेज में कहां से कहां तक चलती है? जयपुर में पहले चरण के तहत मेट्रो मानसरोवर से बड़ी चौपर तक, पूर्व-पश्चिम गलियारे पर 11.64 किमी की दूरी तय करती है। इसमें 11 स्टेशन हैं। यह प्रणाली जयपुर के महत्वपूर्ण आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को केंद्रीय व्यापारिक जिले से जोड़ती है, जो हेरिटेज वॉल सिटी का हिस्सा है। उत्तर-दक्षिण अक्ष पर नियोजित जयपुर मेट्रो का दूसरा चरण मौजूदा गलियारे का पूरक होगा और पूरे शहर में मेट्रो कनेक्टिविटी हो जाएगी। इससे शहर में लगने वाले ट्रैफिक जाम में काफी कमी आएगी। और शहरी में आवागमन में सुधार होगा। जयपुर मेट्रो में हर दिन लगभग 60 हजार यात्री करते हैं सफर वर्तमान में, जयपुर मेट्रो के पहले चरण में प्रतिदिन औसतन लगभग 60 हजार यात्री यात्रा करते हैं। जयपुर मेट्रो पहले चरण में 11.64 किमी के छोटा रूट पर दौड़ रही है। दूसरे चरण के चालू होने के साथ, मेट्रो नेटवर्क में यात्रियों की संख्या में कई गुना वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे जयपुर में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी। मेट्रो का काम सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य कैबिनेट के बयान के अनुसार, मेट्रो रेल नीति, 2017 के अनुसार, केंद्र और राजस्थान सरकार से इक्विटी समर्थन, ऋण और बहुपक्षीय वित्तपोषण के माध्यम से वित्तपोषण की संरचना की गई है। परियोजना का वित्तपोषण मेट्रो रेल नीति-2017 के तहत केंद्र और राज्य सरकार की इक्विटी, ऋण और बहुपक्षीय फंडिंग के माध्यम से किया जाएगा। सरकार ने इसे सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

आर्थिक संकट, ब्यावर के खनिज उद्योग में छाई खामोशी और 5000 मजदूरों का पलायन

ब्यावर  ईरान और इजराइल के बीच छिड़ी जंग की तपिश अब राजस्थान के 'मिनरल हब' कहे जाने वाले ब्यावर जिले की गलियों में महसूस होने लगी है। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव ने यहां के फलते-फूलते खनिज उद्योग की कमर तोड़ दी है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि ब्यावर की करीब 1100 फैक्ट्रियों में से 1000 इकाइयों पर ताले लटक गए हैं। मशीनों का शोर अब सन्नाटे में बदल चुका है और औद्योगिक क्षेत्रों में छाई यह खामोशी हजारों परिवारों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। ग्लोबल वॉर का 'लोकल' जख्म ब्यावर का मिनरल उद्योग मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मांग और सुगम सप्लाई चेन पर निर्भर है। ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण समुद्री मार्ग असुरक्षित हो गए हैं और लॉजिस्टिक्स खर्च आसमान छू रहा है। इसका सीधा असर डिमांड पर पड़ा है। निर्यात ठप होने और नई डिमांड न आने के कारण उद्यमियों ने उत्पादन बंद करना ही बेहतर समझा। सिर्फ ब्यावर ही नहीं, इसका असर गुजरात के मोरबी तक फैला है, जहां करीब 2300 से ज्यादा मिनरल ग्राइंडिंग यूनिट्स बंद हो चुकी हैं। 'साहब, अब घर जाने के अलावा चारा नहीं' इस औद्योगिक संकट की सबसे करुण तस्वीर उन प्रवासी मजदूरों की है, जो बिहार और झारखंड जैसे राज्यों से हजारों किलोमीटर दूर सुनहरे भविष्य की तलाश में यहां आए थे। आंकड़ों की मानें तो पिछले कुछ दिनों में 5000 से ज्यादा मजदूरों की नौकरी जा चुकी है। ब्यावर के बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर अब उन मजदूरों की भीड़ दिखने लगी है, जो अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर पलायन करने को मजबूर हैं। फैक्ट्री मालिक ने हाथ खड़े कर दिए हैं। काम नहीं है तो तनख्वाह कहां से मिलेगी? कमरे का किराया और खाने के लाले पड़ रहे हैं। 6 लाख लोगों की रोजी-रोटी दांव पर लघु उद्योग भारती के जानकारों का कहना है कि राजस्थान के करीब 14 जिलों में यह सेक्टर फैला है, जिससे 6 लाख लोग सीधे तौर पर जुड़े हैं। हर फैक्ट्री औसतन 30 टन उत्पादन करती थी, जो अब शून्य पर पहुंच गया है। यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो ब्यावर का मिनरल मार्केट पूरी तरह तबाह हो सकता है। फिलहाल, उद्यमियों और मजदूरों की नजरें अंतरराष्ट्रीय हालातों के सुधरने पर टिकी हैं। पुलकित सक्सेना

बच्चों की संदिग्ध मौतों से सलूंबर में हड़कंप, 17 मेडिकल टीमों ने संभाला मोर्चा

सलूंबर सलूंबर जिले के लसाड़िया ब्लॉक में बच्चों की लगातार हो रही मौतों ने चिंता बढ़ा दी है। बीते पांच दिनों में पांच मासूमों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर बच्चों और परिजनों की जांच कर रही हैं। दो से चार साल के बच्चों में बुखार, उल्टी-दस्त और ऐंठन जैसे लक्षण सामने आए हैं, जिससे बीमारी को लेकर रहस्य और गहरा गया है। संदिग्ध मरीजों की पहचान की गई कलेक्टर मुहम्मद जुनैद पीपी के नेतृ्त्व में प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया। उन्होंने मेडिकल टीमों को विस्तृत सर्वे कर जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को 17 मेडिकल टीमों ने 429 परिवारों का सर्वे किया। इस दौरान 17 बुखार के मरीज मिले, जिनके सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया गया है। उदयपुर से आई डॉक्टरों की टीम मौके पर तैनात है, जो कि लगातार हालातों पर नजर बनाए हुए है। बच्चों को किया गया रेफर स्वास्थ्य जांच के बाद कई बच्चों को बेहतर इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में रेफर किया गया है। इनमें पेट दर्द, बुखार और उल्टी-दस्त की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ बच्चों को उदयपुर तो कुछ को जिला अस्पताल सलंबूर भेजा गया है, जहां उनका इलाज जारी है। स्वास्थ्य ने की अपील सीएमएचओ डॉ महेंद्र परमार के अनुसार, विशेष मेडिकल टीम गांव में डेरा डालकर लगातार जांच कर रही। ग्रामीणों को साफ-सफाई रखने, शुद्ध पानी पीने और पानी उबालकर इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। इधर, लसाड़िया ब्लॉक के प्रभावित इलाकों में लगातार सर्वे और सैंपलिंग का काम जारी है। प्रशासन किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए सावधानी बरत रहा है।  

क्यूआर कोड स्कैन करते ही ‘कलेक्टर ट्री’ सुनाएगा अपनी कहानी, पचपहाड़ के सरकारी स्कूल का डिजिटल नवाचार

झालावाड़ झालावाड़ जिले के भवानीमंडी क्षेत्र के पचपहाड़ स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में पर्यावरण शिक्षा को रोचक बनाने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है। हर पेड़ कुछ कहता है- नाम की अभिनव पहल चलाई जा रही है। इस पहल के तहत विद्यालय परिसर में लगे लगभग 500 पेड़-पौधों पर क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं, जिन्हें मोबाइल से स्कैन करते ही अब पौधे स्वयं अपनी विशेषताएं, उपयोग और पर्यावरणीय महत्व के बारे में ऑडियो संदेश के माध्यम से जानकारी दे रहे हैं। क्यूआर स्कैन करने पर सुनाई देगा ऑडियो प्रधानाचार्य कृष्ण गोपाल वर्मा ने बताया कि इस परियोजना की शुरुआत लगभग दो वर्ष पूर्व की गई थी। प्रारंभ में QR कोड स्कैन करने पर पौधों की जानकारी पीडीएफ के रूप में खुलती थी, लेकिन अब इस परियोजना को अपडेट करते हुए इसे ऑडियो आधारित बना दिया है। प्रोजेक्ट के संयोजक एवं राज्य स्तरीय पुरुस्कृत , डॉ दिव्येंदु सेन व्याख्याता, जीव विज्ञान ने बताया कि अब QR कोड स्कैन करते ही संबंधित पौधे के बारे में ऑडियो संदेश सुनाई देता है- मानो पौधा स्वयं अपनी कहानी सुना रहा हो। इस पहल की विशेष बात यह है कि इन ऑडियो संदेशों में स्टूडेंट्स, विद्यालय स्टाफ तथा जिला अधिकारियों, जिला कलक्टर, उपखण्ड अधिकारी, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, एबीईओ, डीईओ एवं विद्यालय प्रिंसिपल ने अपनी आवाज़ दी है, इससे यह पहल और भी प्रेरणादायक बन गई है। मुख्य आकर्षण कलक्टर ट्री मुख्य आकर्षण जीव विज्ञान के व्याख्याता डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ से भी एक पेड़ को आवाज देने के लिए अनुरोध किया था। इसे उन्होंने स्वीकार किया और जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ ने भी एक वृक्ष को अपनी आवाज दी गई थी। जिसे हमने “कलक्टर ट्री” नाम दिया है, जिला कलक्टर ने कुपोषण से लड़ने में सहायक मोरिंगा (सहजन) वृक्ष के लिए अपनी आवाज में संदेश रिकॉर्ड किया है। इस वृक्ष पर लगाए गए QR कोड को स्कैन करने पर कलक्टर की आवाज़ में पेड़ का संदेश सुनाई देता है, जो स्टूडेंट्स और आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मनोविज्ञान के समन्वय पर आधारित डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि यह पहल तकनीक और शैक्षिक मनोविज्ञान के समन्वय पर आधारित है। इस परियोजना में स्टूडेंट्स की सक्रिय भागीदारी निर्धारित की गई है। स्टूडेंट्स ने स्वयं पौधों की जानकारी एकत्र की, स्क्रिप्ट तैयार की और ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया में भाग लिया। इससे स्टूडेंट्स की जिज्ञासा, स्मरण शक्ति और प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है। स्थानीय भाषा में उपलब्ध है रिकॉर्डिंग डॉ सेन ने आगे बताया कि इस पहल में कुछ पौधों के ऑडियो संदेश स्थानीय मालवी भाषा में भी रिकॉर्ड किए हैं, ताकि स्थानीय समुदाय भी पौधों के महत्व को समझ सकें और इस पहल से जुड़ सकें। पलाश और देशी बबूल जैसे पौधे स्थानीय भाषा में स्वयं अपनी कहानी सुनाते हैं, इससे यह परियोजना केवल स्कूल तक सीमित न रहकर समाज से भी जुड़ रही है। स्कूल परिसर में पीपल, बरगद, नीम, खेजड़ी, सागवान, अर्जुन, महुआ, जामुन, आम, अमरूद, पारिजात, पलाश, कचनार, बबूल, काजूरिना, यूकेलिप्टस, मोरिंगा सहित अनेक पौधों को इस परियोजना में शामिल किया गया है। कुछ पौधे अपनी विशेषताओं के साथ-साथ अपनी सीमाओं के बारे में भी बताते हैं, इससे स्टूडेंट्स को सही पौधा सही स्थान पर लगाने की जानकारी भी मिलती है। जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने वाला अभिनव प्रयास बताया।          

डमी कैंडिडेट और नकल माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, एसओजी ने शिक्षा विभाग से मांगी संदिग्धों की कुंडली

जालोर जालोर जिले में प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल, डमी उम्मीदवार और फर्जीवाड़े के मामले लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हाल ही में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने जिले को विशेष निगरानी में लेकर जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। अभ्यर्थियों की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही एसओजी मुख्यालय ने शिक्षा विभाग से संदिग्ध अभ्यर्थियों के दस्तावेज, हस्ताक्षर, आवेदन पत्र, फोटो सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी गई हैं। इसके बाद जिला स्तर पर भी जांच शुरू कर दी गई और संबंधित अभ्यर्थियों की जानकारी मुख्यालय के माध्यम से एसओजी भेजी जा रही है। विभागीय सूत्रों की मानें तो अभी तक कुल 30 अभ्यर्थियों के खिलाफ रिपोर्ट एसओजी को भेजी जा चुकी है। वहीं, 250 के लगभग अभ्यर्थी संदेह के घेरे में हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि कई मामलों में डमी उम्मीदवारों का चयन परीक्षा में बैठकर हुआ था। पिछले कई वर्षों की परीक्षाओं की जांच हुई शिक्षा विभाग पिछले पांच वर्षों में हुई विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की भी गहन जांच कर रहा है। विशेष रूप से शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों में गड़बड़ी पाई गई है, जिसके कारण दस्तावेजों का सत्यापन और सख्ती से किया जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक भंवरलाल परमार ने बताया कि एसओजी द्वारा मांगी गई सभी जानकारियों का मिलान किया जा रहा है। दस्तावेजों, आवेदन प्रक्रिया और अन्य विवरणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने पर दोषी पाए गए अभ्यर्थियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है।  

पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक विकास को लगेंगे पंख, प्रधानमंत्री करेंगे 79 हजार करोड़ की रिफाइनरी का लोकार्पण

जयपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को राजस्थान के बालोतरा जिले में पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। यह दौरा पिछले दो महीनों में उनका दूसरा राजस्थान दौरा होगा। इससे पहले वे 28 फरवरी 2026 को अजमेर आए थे, जहां उन्होंने हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। मारवाड़ सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए पचपदरा रिफाइनरी का खास महत्व है। इस परियोजना से बाड़मेर और जैसलमेर क्षेत्र में इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होने की संभावना है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। जनवरी से ही पहले चरण के ट्रायल रन की तैयारी शुरू कर दी गई थी और अब जल्द ही कमर्शियल उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। रिफाइनरी परियोजना का इतिहास भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इसका पहला शिलान्यास 22 सितंबर 2013 को सोनिया गांधी ने किया था, उस समय प्रदेश में अशोक गहलोत की सरकार थी और लागत करीब 37,230 करोड़ रुपए आंकी गई थी। बाद में शर्तों में बदलाव के बाद 16 जनवरी 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने इसका पुनः शुभारंभ किया, तब लागत बढ़कर 43,129 करोड़ रुपए हो गई। समय के साथ परियोजना की लागत लगातार बढ़ती गई और अब यह करीब 79,459 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।   मुझे यह जानकारी देते हुए अत्यंत हर्ष और गर्व की अनुभूति हो रही है कि विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता, हम सभी के मार्गदर्शक, यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री @narendramodi जी आगामी 21 अप्रैल 2026 को पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण हेतु वीरधरा राजस्थान पधार रहे हैं। रिफाइनरी के बारे में रिफाइनरी की सालाना क्षमता 9 मिलियन टन कच्चे तेल के प्रसंस्करण की है, जबकि 2 मिलियन टन का पेट्रोकेमिकल उत्पादन भी होगा। इसमें करीब 7.5 मिलियन टन क्रूड ऑयल अरब देशों से आयात किया जाएगा और शेष 1.5 मिलियन टन तेल राजस्थान में उत्पादित होगा। कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी रिफाइनरी रिफाइनरी परियोजना राजस्थान और देश के लिए एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक सपना रही है, जिसकी यात्रा दो दशकों में कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी है। शुरुआत (2005-2013) वर्ष 2005 में इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपए रखी गई थी। इसके बाद 2013 में अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में पचपदरा में एचपीसीएल के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और शिलान्यास किया गया। उस समय परियोजना की लागत बढ़कर 37,320 करोड़ रुपए हो गई और इसकी वार्षिक क्षमता 90 लाख टन तय की गई। राजे सरकार में नए एमओयू (2013-2017) वसुंधरा राजे सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछली सरकार के समझौते की शर्तों पर सवाल उठाए गए। इसके बाद 2017 में एचपीसीएल के साथ नया समझौता हुआ, जिसमें राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले ब्याज-मुक्त ऋण की राशि में बड़ा बदलाव किया गया और इसे 3,736 करोड़ रुपए से घटाकर 1,123 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष कर दिया गया।2018 में पीएम मोदी ने किया शिलान्यास (2018-2025) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में परियोजना स्थल का उद्घाटन किया।    

दल बदल लेते हैं पर दिल नहीं बदलता, राजस्थान की पूर्व सीएम ने बाहरी नेताओं पर कसा तंज

 जयपुर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की कद्दावर नेता वसुंधरा राजे ने पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर एक ऐसा बयान दिया है, जिसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। जयपुर स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राजे ने साफ लहजे में कहा कि पार्टी को अब अवसरवादियों की जगह अपने मूल वफादारों को पहचानने की जरूरत है। दल बदल लेते हैं, पर दिल नहीं वसुंधरा राजे ने बीजेपी के 46 साल के सफर का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान कई लोग आए और कई चले गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, आजकल कई लोग दल तो बदल लेते हैं, लेकिन उनका दिल नहीं बदलता। उनकी मानसिकता वही पुरानी रहती है। राजे का इशारा साफ तौर पर उन नेताओं की तरफ था जो दूसरी पार्टियों से आकर बीजेपी में ऊंचे पद पाने की जुगत में रहते हैं। वफादारों को मिले सम्मान, अवसरवादियों को नो एंट्री! राजे ने आगामी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर नेतृत्व को सावधान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक नियुक्तियां और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सिर्फ उन्हीं को मिलनी चाहिए जो मूल भाजपा के हैं। जिन्होंने तूफानों और मुश्किल वक्त में पार्टी के लिए लाठियां खाईं और संघर्ष किया, उन्हें ही मौका मिले। उन्होंने कहा कि संगठन के प्रति समर्पण दिखाने वाले कार्यकर्ताओं को ही शासन में भागीदारी दी जानी चाहिए। पद के पीछे भागने वालों को नसीहत कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए वसुंधरा ने एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा, पद के लालच में काम मत करो। अगर आप ईमानदारी से जमीन पर काम करेंगे, तो पद खुद चलकर आपके पास आएगा। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर अटल-आडवाणी और विजयाराजे सिंधिया के योगदान को याद करते हुए कहा कि आज पीएम नरेंद्र मोदी उस दीप को और प्रकाशमान कर रहे हैं।

भर्ती में धांधली और अनियमितताओं के आरोप, कोर्ट ने राजस्थान हाउसिंग बोर्ड से मांगा जवाब

जयपुर  राजस्थान हाउसिंग बोर्ड (RHB) में जूनियर असिस्टेंट बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने इस भर्ती प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं को देखते हुए नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि अगली सुनवाई तक इन पदों को नहीं भरा जाएगा। कोर्ट में क्यों नाराज हुए जज? आज कोर्ट रूम में माहौल काफी गरमाया रहा। दरअसल, सुनवाई के दौरान रेस्पोंडेंट (बोर्ड) पक्ष के वकील बार-बार समय मांग रहे थे, जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। अभ्यर्थियों के वकील आनंद शर्मा और अरविंद कुमार शर्मा ने मजबूती से पक्ष रखते हुए बताया कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। भर्ती में धांधली के आरोप सूत्रों और याचिकाकर्ताओं के वकीलों की मानें तो इस भर्ती में पारदर्शिता की भारी कमी रही है। कोर्ट के सामने दलील दी गई कि विज्ञापन में लिखा था कि मुख्य परीक्षा और टाइपिंग टेस्ट के नंबर जोड़कर मेरिट बनेगी, लेकिन बोर्ड ने टाइपिंग के अंक जोड़े ही नहीं। भर्ती का परिणाम कई बार संशोधित किया गया, जिसके पीछे कोई ठोस वजह नहीं दी गई। सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि जिन अभ्यर्थियों के नाम दस्तावेज सत्यापन (DV) सूची में थे, उन्हें बाद में बिना किसी कारण बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वहीं मामले की गंभीरता और अभ्यर्थियों के भविष्य को देखते हुए न्यायालय ने अंतरिम आदेश जारी कर सभी संबंधित पदों को रिजर्व रखने के निर्देश दिए हैं। यानी जब तक कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक बोर्ड किसी को जॉइनिंग नहीं दे पाएगा।